नवमी तिथि हिंदू पंचांग की प्रमुख तिथियों में से एक है, जिसे विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व प्राप्त है। यह तिथि हर पक्ष शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष की नवमी को आती है और इसे शुभ एवं पवित्र माना जाता है। नवमी तिथि का संबंध देवी दुर्गा और उनके नवम स्वरूप सिद्धिदात्री से है। नवमी प्रत्येक महीने में दो बार आती है। नवमी का हिन्दू धर्म में अपना विशेष महत्व रखता है। नवमी दिन में आने वाले सबसे प्रसिद्ध त्योहार राम नवमी होता है। नवमी तिथि को हवन और अन्य धार्मिक अनुष्ठान भी किए जाते हैं। यह दिन आध्यात्मिक उन्नति के लिए आदर्श माना जाता है और इसे सिद्धि प्राप्ति का दिन भी कहा जाता है।
धार्मिक महत्व
नवमी तिथि विशेष रूप से नवरात्रि के दौरान महत्वपूर्ण होती है। शारदीय और चैत्र नवरात्रि की नवमी तिथि पर देवी दुर्गा की पूजा विधि-विधान से की जाती है। इस दिन भक्तजन कन्या पूजन करते हैं, जिसे कंजक या कुमारिका पूजन भी कहा जाता है। इस पूजा में नौ कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर उन्हें आमंत्रित किया जाता है और भोजन करवाया जाता है। उन्हें उपहार और दक्षिणा देकर आशीर्वाद लिया जाता है।
पौराणिक कथा
पौराणिक कथाओं के अनुसार, नवमी तिथि पर देवी दुर्गा ने राक्षस महिषासुर का वध करके धर्म की स्थापना की थी। इसे महिषासुर मर्दिनी की विजय के रूप में मनाया जाता है।
क्या करें
- स्नान और ध्यान - प्रातःकाल स्नान कर साफ वस्त्र धारण करें।
- देवी पूजन - माँ दुर्गा की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक जलाएं और दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।
- कन्या पूजन - नौ कन्याओं और एक बालक को आमंत्रित करके भोजन कराएं।
- दान और हवन - गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र, या धन का दान करें। हवन में आहुति देकर सुख-समृद्धि की कामना करें।
संदेश
नवमी तिथि हमें यह संदेश देती है कि असुरता पर विजय पाने के लिए हमें अपने अंदर की शक्ति को जागृत करना चाहिए। यह दिन आत्मशुद्धि, भक्ति और परोपकार का प्रतीक है।
विशेष
- सूर्य से चन्द्र के अन्तर तक 97° से 108° तक नवमी होती है, तब शुक्ल पक्ष की नवमी और 277° से 288° तक कृष्ण नवमी रहती है।
- नवमी चन्द्र तिथि की स्वामिनी ‘दुर्गा देवी’ है। यह ‘रिक्ता’ संज्ञक है। इसका विशेष नाम ‘उग्रा’ है। इसमें समस्त शुभ कार्य वर्जित है।
- नवमी शनिवार को सिद्धिदा और गुरुवार को मृत्युदा होती है।
- चैत्र मास में यह शून्य संज्ञक होती है।
- नवमी तिथि की दिशा पूर्व है।
- शिवपूजन के लिये यह तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ और कृष्ण पक्ष में शुभ होती है।
- चन्द्रमा की इस नौवीं कला के अमृत का पान यमराज करते हैं।
- विशेष – नवमी तिथि शुक्र ग्रह की जन्म तिथि है। इसलिये शुभ कार्यों में वर्जित करनी चाहिये।
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