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	<title>Bharatkosh - सदस्य द्वारा योगदान [hi]</title>
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		<title>गंगाप्रसाद वर्मा</title>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;प्रियंका चतुर्वेदी: Adding category :Category:राजनीति कोश (को हटा दिया गया हैं।)&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{tocright}}&lt;br /&gt;
गंगाप्रसाद वर्मा (जन्म- [[13 अगस्त]], [[1863]] ई., मृत्यु- [[23 जून]], [[1914]] ई.) 1885 में कांग्रेस के प्रथम स्थापना अधिवेशन [[मुम्बई]] में [[उत्तर प्रदेश]] से भाग लेने वाले मुख्य प्रतिनिधि थे। &lt;br /&gt;
==जीवन परिचय==&lt;br /&gt;
गंगाप्रसाद वर्मा का जन्म 13 अगस्त, 1863 ई. को हरदोई ज़िले में एक सम्पन्न खत्री परिवार में हुआ था। [[अरबी भाषा|अरबी]] और [[फ़ारसी भाषा|फ़ारसी]]  की शिक्षा प्राप्त करने के बाद वे [[लखनऊ]] के केनिंग कॉलेज में भर्ती हुए। उनकी रुचि चतुर्दिक घटित विषयों में अधिक थी। अत: वे विद्यालयी शिक्षा पूरी नहीं कर पाए।&lt;br /&gt;
==राजनीतिक दृष्टि से जागरूक==&lt;br /&gt;
गंगाप्रसाद वर्मा पर स्वामी रामतीर्थ का बहुत प्रभाव था। [[मदनमोहन मालवीय|मालवीय जी]], [[लाला लाजपत राय]], [[एनी बेसेंट]] आदि से भी वे प्रभावित थे। उन्होंने [[1883]] में ‘एडवोकेट’ नामक द्वि-साप्ताहिक पत्र का सम्पादन करके अपना सार्वजनिक जीवन प्रारम्भ किया। फिर [[उर्दू]] में ‘हिन्दुस्तानी’ निकाला। इन पत्रों के माध्यम से राज्य में राजनीतिक चेतना के प्रसार में बड़ी सहायता मिली। वे स्वयं राजनीतिक दृष्टि से इतने जागरूक थे कि, 1885 के प्रथम कांग्रेस अधिवेशन मुम्बई में कई साथियों को लेकर सम्मिलित हुए। उनके निमंत्रण पर ही [[1892]] में कांग्रेस का अधिवेशन [[इलाहाबाद]] में हुआ था। प्रदेश में कांग्रेस की स्थापना का श्रेय भी उन्हीं को है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गंगाप्रसाद वर्मा आधुनिक लखनऊ नगर के निर्माता माने जाते हैं। वे नगरपालिका के उपाध्यक्ष थे। शहर का वर्तमान रूप उन्हीं की देन है। उन्होंने नगर में 28 सड़कों का निर्माण करवाया और जल व मल निकासी की योजनाओं के लिए अन्य नगरों को भी परामर्श दिया। वे [[आर्यसमाज]] और होमरूल लीग से भी जुड़े थे। इलाहाबाद और [[काशी हिन्दू विश्वविद्यालय]] से भी उनका निकट का सम्बन्ध था। वर्षों तक वे प्रान्तीय कौंसिल के सदस्य रहे। सभी धर्मों के लोगों के प्रति उनका मैत्री भाव था और वे आधुनिक विषयों के साथ प्राचीन भारतीय शिक्षा पद्धति के भी समर्थक थे। &lt;br /&gt;
==मृत्यु== &lt;br /&gt;
प्राचीन भारतीय शिक्षा पद्धति के भी समर्थक गंगाप्रसाद वर्मा  का 23 जून, 1914 ई. को निधन हो गया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{प्रचार}}&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=|प्रारम्भिक=प्रारम्भिक1 |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
{{संदर्भ ग्रंथ}}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
*(पुस्तक ‘भारतीय चरित कोश’) पृष्ठ संख्या-213&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:राजनीतिज्ञ]]&lt;br /&gt;
[[Category:राजनीति कोश]]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>प्रियंका चतुर्वेदी</name></author>
	</entry>
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		<id>https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%AE%E0%A5%8D%E0%A4%AC%E0%A4%88&amp;diff=165715</id>
		<title>मुम्बई</title>
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		<updated>2011-05-25T10:42:16Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;प्रियंका चतुर्वेदी: /* सरकार */&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा मुम्बई}}&lt;br /&gt;
{{लेख सूची&lt;br /&gt;
|लेख का नाम=मुम्बई&lt;br /&gt;
|पर्यटन=मुम्बई पर्यटन&lt;br /&gt;
|ज़िला=मुम्बई ज़िला&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
मुम्बई शहर, भूतपूर्व बंबई, [[महाराष्ट्र]] राज्य की राजधानी है। यह दक्षिण-पश्चिम [[भारत]] देश का वित्तीय व वाणिज्यिक केंद्र और [[अरब सागर]] में स्थित प्रमुख बंदरगाह है। मुम्बई दुनिया के विशालतम व सबसे घनी आबादी वाले शहरों में से एक है। [[चित्र:Gateway-Of-India-Mumbai.jpg|thumb|250px|left|[[गेटवे ऑफ इंडिया]], मुम्बई&amp;lt;br /&amp;gt; Gateway Of India, Mumbai]] मुम्बई एक प्राचीन बस्ती के स्थल पर बसा हुआ है और इसका नामकरण भगवान [[शंकर]] की पत्नी [[पार्वती देवी]] के एक रूप, स्थानीय देवी मुंबा के नाम पर किया है। जिनका मंदिर उस स्थल पर था, जहाँ पर अब नगर का दक्षिण-पूर्वी हिस्सा अवस्थित है। मुम्बई लंबे समय से भारत के सूती वस्त्र उद्योग के केंद्र के रूप में विख्यात रहा है, लेकिन अब यहाँ विविध निर्माण उद्योग भी हैं और इसके वाणिज्यिक व वित्तिय संस्थान सशक्त और सबल हैं। इस शहर में अधिकांश बड़े, विकासशील औद्योगिक नगरों की पुरानी समस्या वायु व जल प्रदूषण, झुग्गी बस्ती और अत्यधिक भीड़भाड़ मौजूद है। द्वीपीय अवस्थिति के कारण मुम्बई का विस्तार सीमित है।&lt;br /&gt;
==इतिहास==&lt;br /&gt;
मछुआरों की मूल जनजाति, कोली यहाँ के आरम्भिक ज्ञात निवासी थे, हालाँकि वृहद मुम्बई के कान्दीवली में पाए गए पुरापाषाण काल के पत्थर के औज़ार यहाँ पाषाण काल के दौरान मानव बस्ती की ओर संकेत करते हैं। प्राचीन यूनानी खगोलशास्त्री व भूगोलविज्ञानी टालेमी के समय में यह क्षेत्र हेप्टेनिशिया के रूप में जाना जाता था और यह 1000 वर्ष ई. पू. में फ़ारस व [[मिस्र]] के साथ समुद्री व्यापार का प्रमुख केन्द्र था। तीसरी शताब्दी ई. पू. में यह अशोक के साम्राज्य का हिस्सा था और छठी से आठवीं शताब्दी में यहाँ चालुक्यों का शासन रहा, जिन्होंने अपनी छाप घरपुरी (एलीफ़ेन्टा द्वीप) पर छोड़ी। मालाबार पाइन्ट पर बना वाकेश्वर मन्दिर सम्भवतः कोंकण तट के शिलाहर प्रमुखों के शासन (9वीं से 13वीं शताब्दी) के दौरान निर्मित किया गया था। दोगिरि के यादवों (1187-1318) के समय में इस द्वीप (जो बाम्बे द्वीप बना) पर महिकावती (माहिम) बस्ती की स्थापना हुई, जो 1924 में हिन्दुस्तान के [[ख़िलजी वंश]] के आक्रमणों के जवाब में बनाई गई। इन्हीं के वंशज वर्तमान मुम्बई में पाए जाते हैं और बहुत से स्थानों के नाम आज भी उसी युग से हैं। 1348 में आक्रमणकारी मुस्लिम सेनाओं ने इस द्वीप को जीत लिया और यह [[गुजरात]] राज्य का हिस्सा बन गया। माहिम को जीतने की पुर्तग़ाली कोशिश 1507 में असफल रही, लेकिन 1534 में गुजरात के शासक सुल्तान बहादुरशाह ने यह द्वीप पुर्तग़ालियों को सौंप दिया। 1661 में किंग चार्ल्स द्वितीय व पुर्तग़ाल के राजा की बहन कैथरीन आफ़ ब्रैगेंज़ा के विवाह के बाद यह ब्रिटिश नियंत्रण में आ गया। राजा ने इसे 1668 में ईस्ट इंडिया कम्पनी को सत्तांतरित कर दिया। शुरूआत में कलकत्ता (वर्तमान [[कोलकाता]]) व मद्रास (वर्तमान [[चेन्नई]]) की तुलना में बंबई कम्पनी की बहुत बड़ी सम्पत्ति ने होकर केवल पश्चिमी तट पर कम्पनी की पैर जमाए रखने में सहायता करता था। &lt;br /&gt;
[[चित्र:Churchgate-Building-Mumbai.jpg|thumb|250px|left|[[चर्चगेट भवन मुंबई|चर्चगेट भवन]], मुम्बई &amp;lt;br /&amp;gt; Churchgate Building, Mumbai]] &lt;br /&gt;
मुख्य भूमि पर [[मुग़ल]], मराठा व गुजरात के प्रादेशिक शासक अधिक शक्तिशाली थे। यहाँ तक कि ब्रिटिश नौसेना का मुग़लों, मराठों, पुर्तग़ालियों व डचों से कोई मुक़ाबला नहीं था। 19वीं शताब्दी के आरम्भ तक बाहरी घटनाओं ने शहर के तेज़ विकास में सहायता की। [[दिल्ली]] में मुग़ल शक्ति के पतन, मुग़ल-मराठा प्रतिद्वन्द्विता और गुजरात में मौजूद अस्थिरता ने कारीगरों व व्यापारियों को शरण लेने के लिए इस द्वीप पर जाने को मज़बूर किया और इस प्रकार मुम्बई का विकास शुरू हुआ। मराठा शक्ति के विनाश के साथ मुख्यभूमि से व्यापार व संचार स्थापित हुआ और उसका यूरोप तक विस्तार किया गया, जिससे समृद्धी की शुरूआत हुई। 1857 में पहली कताई व बुनाई मिल स्थापित की गई और [[1860]] तक मुम्बई भारत का विशालतम सूती वस्त्र बाज़ार बन गया। अमेरिकी नागरिक युद्ध ([[1861]]-[[1865|65]]) और ब्रिटेन को किए जा रहे कपास की आपूर्ति रुक जाने से मुम्बई के व्यापार में उछाल आया। लेकिन नागरिक युद्ध के समाप्त होने के बाद कपास के दामों में भारी कमी आई तथा व्यापार में तेज़ी ख़त्म हो गई। तब तक हालाँकि अतःक्षेत्र खोले जा चुके थे और मुम्बई आयात व्यापार का मज़बूत केन्द्र बन चुका था। &lt;br /&gt;
[[चित्र:Hotel-Taj-Mumbai.jpg|thumb|250px|[[ताजमहल होटल मुंबई|होटल ताज]], मुम्बई&amp;lt;br /&amp;gt; Hotel Taj, Mumbai]]&lt;br /&gt;
[[1869]] में स्वेज़ नहर के खुलने के साथ ही मुम्बई में समृद्धि आई, हालाँकि जनसंख्या बढ़ने के साथ-साथ झुग्गियों और अस्वच्छ स्थितियों में भी कई गुना वृद्धि हुई। [[1896]] में यहाँ प्लेग का प्रकोप फैला और नए क्षेत्रों में बस्तियाँ बसाने व कामगार वर्ग के लिए आवास की व्यवस्था करने के लिए सिटी इंप्रूवमेंट ट्रस्ट की स्थापना की गई। 525 हेक्टेयर क्षेत्र को घेरने के लिए तटबन्ध बनाने की महत्त्वाकांक्षी योजना का [[1918]] में प्रस्ताव किया गया, लेकिन द्वितीय विश्व युद्ध के बाद भारत में अपने क़िस्म की पहली दोतरफ़ा सड़क नेताजी सुभाष मार्ग, जो नरीमन प्वाइंट से मालाबार प्वाइंट तक है, के बन जाने तक यह पूरा नहीं हो सका। युद्ध के बाद के वर्षों में उपनगरीय क्षेत्रों में आवासीय इकाइयों के विकास की शुरूआत हुई और नगर निगम के माध्यम से मुम्बई नगर के प्रशासन को वृहत मुम्बई के उपनगरों तक विस्तारित किया गया। यह शहर भूतपूर्व बाम्बे प्रेज़िडेन्सी व बाम्बे राज्य की राजधानी रह चुका है और [[1960]] में इसे महाराष्ट्र राज्य की राजधानी बनाया गया।&lt;br /&gt;
19वीं सदी के अन्त व 20 शताब्दी के आरम्भ में मुम्बई भारतीय राष्ट्रवादी और क्षेत्रीय राजनीतिक गतिविधियों का केन्द्र था। [[1885]] में [[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस]] (स्वतंत्रता प्राप्ति तक भारत समर्थक और ब्रिटिश विरोधी भावनाओं का केन्द्रीय दल) का पहला अधिवेशन इस नगर में हुआ, जिसके बाद [[1942]] के अधिवेशन में कांग्रेस ने 'भारत छोड़ो' प्रस्ताव पारित किया, जिससे भारत की पूर्ण स्वतंत्रता की माँग की गई थी। [[1956]] से 1960 तक मुम्बई में मुम्बई राज्य के ब्रिटिश उपनिवेशवाद से विरासत में मिले द्विभाषीय (मराठी--गुजराती) स्वरूप के ख़िलाफ़ व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए और इसके बाद विभाजन हुआ, जिससे गुजरात व महाराष्ट्र के आधुनिक राज्यों का निर्माण हुआ।&lt;br /&gt;
{{तिथि क्रम मुम्बई सूची1}}&lt;br /&gt;
====बिजनेस केपिटल ऑफ इंडिया====&lt;br /&gt;
मुम्बई को पहले बॉम्बे के नाम से जाना जाता था। मुम्बई शहर को '''बिजनेस केपिटल ऑफ इंडिया''' के नाम से भी जाना जाता है। यहां देश के प्रमुख वित्तीय और संचार केन्द्र है। [[भारत]] का सबसे बड़ा शेयर बाज़ार, जिसका विश्व में तीसरा स्थान है, मुम्बई में ही स्थित है। मुम्बई भारत के पश्चिमी समुद्र तट पर स्थित है। यह अरबियन समुद्र के सात द्वीपों का एक हिस्सा है। मुम्बई सामान्य रूप से सात द्वीपों जिनके नाम कोलाबा, माजागांव, ओल्ड वूमन द्वीप, वाडाला, माहीम, पारेल और माटूंगा-सायन पर स्थित है।  सन 1661 में [[इंग्लैंड]] के महाराजा चार्ल्‍स ने [[पुर्तग़ाल]] की राजकुमारी कैटरीना डे ब्रिगेंजा से शादी की थी। शादी में दहेज के रूप में चार्ल्‍स को बम्बई शहर मिला था, जो वर्तमान समय में मुम्बई के नाम से जाना जाता है। लेकिन सन 1668 में मुम्बई ईस्ट इंडिया कम्पनी के हाथों में चला गया। सन 1868 में [[महारानी विक्टोरिया]] ने शहर के प्रशासन को [[ईस्ट इंडिया कम्पनी]] से वापस ले लिया।&amp;lt;ref name=&amp;quot;ys&amp;quot;&amp;gt;{{cite web |url=http://yatrasalah.com/touristPlaces.aspx?id=28 |title=मुम्बई |accessmonthday=[[25 मार्च]] |accessyear=[[2011]] |last= |first= |authorlink= |format=ए.एस.पी |publisher=यात्रा सलाह डॉट कॉम |language=[[हिन्दी]]}}&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
==भौतिक एवं मानव भूगोल==&lt;br /&gt;
====&amp;lt;u&amp;gt;नगर की स्थिति&amp;lt;/u&amp;gt;====&lt;br /&gt;
मुम्बई शहर प्रायद्विपीय स्थल पर बसा हुआ है, जो मूलतः पश्चिम भारत के कोंकण तट के पास स्थित सात द्वीपिकाओं से मिलकर बना है। 17 वीं शताब्दी से अपवाह व भूमि फिर से हासिल करने की परियोजनाओं और जलमार्गों व [[जल]] अवरोधकों के निर्माण के कारण ये द्वीपिकाएं मिलकर एक बड़े भूभाग का निर्माण करती हैं, जिसे बंबई द्वीप के नाम से जाना जाता था।  इस द्वीप के पूर्व में मुम्बई बंदरगाह का स्थिर जलक्षेत्र है। यह द्वीप निम्न मैदान से बना है, जिसका एक चौथाई हिस्सा समुद्र तल से भी नीचा है; इस मैदान के पूर्वी और पश्चिमी किनारों में निचली पहाड़ियों की दो समानांतर पर्वतश्रेणियाँ हैं। इनमें से लंबी पर्वतश्रेणी द्वारा सुदूर दक्षिण में निर्मित कोलाबा पॉइंट मुम्बई बंदरगाह को खुले समुद्र से बचाता है। पश्चिमी पर्वतश्रेणी मालाबार हिल पर समुद्र तल से 55 मीटर की ऊँचाई पर समाप्त होती है, जो मुम्बई की सबसे ऊँचे इलाकों में से एक है। इन दो पर्वत श्रेणियों के बीच पश्च खाड़ी (बैक बे) का छिछला विस्तार है। इस खाड़ी के शीर्ष और बंदरगाह के बीच कुछ ऊँची भूपट्टिकाओं पर दुर्ग स्थित है, मूलतः इसी के चारों ओर शहर का विस्तार हुआ। अब यहाँ मुख्यतः सार्वजनिक एवं वाणिज्यिक कार्यालय हैं। पश्च खाड़ी से उत्तर की ओर भूतल मध्यवर्ती मैदान की दिशा में ढलान वाली है। बंबई के सुदूर उत्तर में विशाल खारे दलदल हैं।&lt;br /&gt;
[[चित्र:Nehru-Planetarium-Mumbai.jpg|thumb|[[नेहरू प्लेनेटेरीयम मुंबई|नेहरू प्लेनेटेरीयम]], मुम्बई&amp;lt;br /&amp;gt; Flora Fountain, Mumbai]]&lt;br /&gt;
पुराना शहर दक्षिण में कोलाबा से उत्तर में माहिम और्सायन तक लगभग 67 वर्ग किमी में फैला हुआ था। [[1950]] में सालगेट के विशाल द्वीप को जलमार्ग द्वारा जोड़कर मुख्य क्षेत्र में शामिल करके उत्तर की ओर बंबई का विस्तार किया गया। [[1957]] तक वृहद बंबई में कई उपनगरीय नगरपालिका क्षेत्रों और कुछ पड़ोसी गावों को शामिल कर लिया गया। उसके बाद से इस महानगर का विस्तार जारी है। [[1970]] के दशक के आरंभ में भीड़भाड़ और सघनता दूर करने  के प्रयास के रूप में सालगेट द्वीप को मुंबई बंदरगाह के मुख्य जलक्षेत्र थाना क्रीक पर पुल बनाकर मुख्यभूमि से जोड़ दिया गया। मुंबई का प्राकृतिक सौंदर्य इस क्षेत्र के किसी अन्य शहर से बेहतर है। समुद्र से बंदरगाह में प्रवेश स्थान से एक विशाल दृश्य दिखाई देता है, जिसके किनारों पर मुख्यभूमि पर स्थित पश्चिमी घाट की पहाड़ियाँ हैं। बेशुमार छोटे जलयानों की सफ़ेद पालों से चमकता द्वीपों से घिरा चौड़ा बंदरगाह जहाज़ों को सुरक्षित आश्रय प्रदान करता है, विशेषकर जब तटीय क्षेत्र पर तूफ़ान की स्थिति हो। बंदरगाह के द्वीपों में सबसे बड़ा एलीफ़ेटा है, जो छठी शताब्दी के गुफ़ा मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है।&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
इस नगर में पाए जाने वाले सामान्य वृक्षों में [[नारियल]], [[आम]], [[इमली]], और [[बरगद]] शामिल हैं। सालसेट द्वीप कभी [[बाघ]], [[तेंदुआ]], [[सियार]] और [[हिरन]] जैसे वन्य प्राणियों का आश्रय था, लेकिन अब ये प्राणी यहाँ नहीं पाये जाते। यहाँ के प्राणी जीवन में अब [[गाय]], [[बैल]], [[भेड़]], [[बकरी]] और अन्य पालतू प्रजातियाँ हैं। यहाँ पाए जाने वाले पक्षियों में [[गिद्ध]], [[कबूतर]], [[सारस]] और [[बत्तख]] शामिल हैं।&lt;br /&gt;
[[चित्र:Elephanta-Caves-Mumbai.jpg|thumb|250px|left|[[एलिफेंटा की गुफाएँ]], मुम्बई&amp;lt;br /&amp;gt; Elephant Caves, Mumbai]]&lt;br /&gt;
====&amp;lt;u&amp;gt;जलवायु&amp;lt;/u&amp;gt;====&lt;br /&gt;
मुंबई की जलवायु गर्म और आर्द्र है। यहाँ चार ॠतुएं हैं। दिसंबर से फ़रवरी तक सर्दी और मार्च से मई तक गर्मी का महीना रहता है। दक्षिण-पश्चिम में मॉनसूनी हवाओं द्वारा होने वाली वर्षा &lt;br /&gt;
जून से सितंबर तक होती है और इसके बाद उत्तर मॉनसून काल आता है, जो अक्टूबर-नवंबर तक रहता है। इस काल में मौसम फिर से गर्म हो जाता है। औसत मासिक तापमान मई में 33 &lt;br /&gt;
डिग्री से. से जनवरी में 19 डिग्री से. तक होता है। औसत वार्षिक वर्षा 1,800 मिमी है, जिसमें से औसतन 610 मिमी. वर्षा सिर्फ़ जुलाई के महीने में होती है।&lt;br /&gt;
====&amp;lt;u&amp;gt;शहर की संरचना&amp;lt;/u&amp;gt;====&lt;br /&gt;
[[चित्र:Rajabai-Tower-Mumbai.jpg|thumb|250px|[[राजाबाई घंटाघर]], मुम्बई&amp;lt;br /&amp;gt; Rajabai Tower, Mumbai]]&lt;br /&gt;
मुंबई के पुराने हिस्से ज़्यादा निर्मित हैं, लेकिन अधिक समृद्ध क्षेत्रों, जैसे मालाबार हिल में कुछ हरियाली है। यहाँ कई खुले मैदान व पार्क हैं। मुंबई में लगातार शहरीकरण के इतिहास के कारण शहर के कई हिस्सों में झुग्गी बस्तियाँ बन गईं हैं। इस शहर में अनेक कारख़ानों, बढ़ते यातायात और निकट स्थित तेलशोधनशालाओं के कारण वायु एवं जल प्रदूषण ख़तरे के स्तर तक बढ़ गया है। शहर के दक्षिणी हिस्से में वित्तीय ज़िला (पुराने फ़ोर्ट बंबई के आसपास) स्थित है। सुदूर दक्षिण (कोलाबा के आसपास) और पश्चिम में नेताजी सुभाष चंद्र रोड (मॅरीन ड्राइव) तथा मालाबार हिल आवासी क्षेत्र हैं। फ़ोर्ट क्षेत्र के उत्तर में प्रमुख व्यापारिक ज़िला है, जो धीरे-धीरे वाणिज्यिक आवासीय क्षेत्र में शामिल हो रहा है। अधिकांश पुराने कारख़ाने इसी क्षेत्र में स्थित हैं। सुदूर उत्तर में आवासीय क्षेत्र हैं और उनके बाद हाल ही में विकसित औद्योगिक क्षेत्र और झुग्गी बस्तियों के इलाक़े हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यहाँ आवास मुख्यतः निजी स्वामित्व वाले हैं, हालाँकि सार्वजनिक वित्त निगमों के ज़रिये सरकार द्वारा निर्मित कुछ सार्वजनिक आवास भी हैं। मुंबई अत्यधिक भीड़भाड़ वाला नगर है और अत्यधिक समृद्ध लोगों के अलावा बाक़ी लोगों के आवास के लिए कमी रहती है। इसी कारण वाणिज्यिक और औद्योगिक उद्यमों को मध्य स्तरीय व्यावसायिक, तकनीकी या प्रबंधकीय कर्मचारियों को आकर्षित करने में लगातार परेशानी हो रही है। आंतरिक क्षेत्र से अकुशल श्रमिकों का लगातार प्रवास हो रहा है और इस नगर में बेघर व निर्धन लोगों की संख्या बढ़ रही है। नगर के योजनाकार इसे रोकना चाहते हैं और उन्होंने उद्यमों को बंदरगाह के दूसरी ओर इससे लगे नगर नवी मुंबई में स्थापित करने का प्रयास किया है। इसके लिए नगर में औद्योगिक इकाइयों के विकास और पुरानी इकाइयों के विस्तार पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। लेकिन उद्यमियों द्वारा अपने उद्योग को देश के किसी अन्य हिस्से में ले जाने की धमकी के कारण इस प्रतिबंध का बड़े पैमाने पर उल्लंघन हो रहा है। मुंबई का वास्तुशिल्प अलंकृत गॉथिक शैली का है, जो 18वीं और 19वीं शताब्दियों की विशेषता थी। यहाँ समकालीन अन्य रुपांकन (डिज़ाइन) भी है। पुराने प्रशासनिक और वाणिज्यिक भवनों के साथ गगनचुंबी व कॉन्क्रीट से बनी बहुमंज़िला इमारतें हैं।&lt;br /&gt;
[[चित्र:Mumbai-Tiffin-Wallah.jpg|left|मुम्बई का टिफ़िन वाला&amp;lt;br /&amp;gt; Tiffin Wallah Of Mumbai|thumb|250px]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
====&amp;lt;u&amp;gt;जनजीवन&amp;lt;/u&amp;gt;====&lt;br /&gt;
[[1940]] के दशक से मुंबई का विकास असाधारण तो नहीं, लेकिन एक समान रहा है। 20वीं सदी की शुरूआत में यहाँ की जनसंख्या 8 लाख 50 हज़ार थी। [[1941]] में यह दुगुनी होकर 16 लाख 95 हज़ार हो गई है। परिवार नियोजन कार्यक्रमों के कारण इस शहर में जन्मदर देश के अन्य हिस्सों से काफ़ी कम है और जनसंख्या विकास की ऊँची दर का मुख्य कारण रोज़गार की खोज में यहाँ आने वाले लोग हैं। मुंबई विश्व की सबसे अधिक सघन आबादी वाले क्षेत्रों में से एक है। [[1981]] में ग्रेटर मुंबई का औसत घनत्व 13,500 लोग प्रति वर्ग किमी था। शहर के अधिकांश पुराने हिस्सों में घनत्व इस औसत से लगभग तीन गुना अधिक था, हालाँकि पश्च खाड़ी के पास स्थित गिरगांव, भिंडी बाज़ार और भुलेश्वर में घनत्व कम है। नगर के कुछ भीतरी हिस्सों में घनत्व लगभग 3,86,100 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी है, जो शायद दुनिया का अधिकतम घनत्व है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुंबई का चरित्र सही मायनों में महानगरीय है और यहाँ लगभग सभी धर्मों तथा विश्व के सभी क्षेत्रों के लोग रहते हैं। यहाँ की लगभग आधी आबादी हिंदुओं की है, लेकिन [[इस्लाम]], [[ईसाई धर्म|ईसाई]], [[बौद्ध]], [[जैन]], [[सिक्ख]], [[पारसी धर्म|पारसी]] और [[यहूदी धर्म|यहूदी]] धर्म के लोग भी यहाँ मौजूद हैं। मुंबई में लगभग सभी भारतीय भाषाएं और कई विदेशी भाषाएं बोली जाती हैं। राजकीय भाषा [[मराठी भाषा|मराठी]] प्रमुख स्थानीय भाषा है, इसके बाद [[गुजराती भाषा|गुजराती]] और [[हिन्दी]] का स्थान है।&lt;br /&gt;
[[चित्र:Bombay-Stock-Exchange.jpg|thumb|250px|बंबई स्टॉक एक्स्चेंज, मुम्बई&amp;lt;br /&amp;gt; Bombay Stock Exchange, Mumbai]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==अर्थव्यवस्था==&lt;br /&gt;
मुम्बई भारत की आर्थिक धुरी एवं वाणिज्यिक व वित्तीय केन्द्र है। कुछ मायनों में इसकी आर्थिक संरचना भारत में नाभिकीय और पुरातन कालों के संयोजन को प्रदर्शित करती है। इस नगर में भारतीय परमाणु ऊर्जा आयोग स्थित है, जिसमें परमाणु रिऐक्टर और प्लूटोनियम विलग्नक स्थित है। नगर के कई हिस्सों में अब भी ईधन और ऊर्जा के पारम्परिक जैविक साधनों का इस्तेमाल होता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==उद्योग==&lt;br /&gt;
सूती वस्त्र उद्योग, जिसके कारण 19वीं शताब्दी में यह नगर समृद्ध हुआ। अब भी महत्त्वपूर्ण है, लेकिन अब इसका पतन हो रहा है, क्योंकि कई सूती वस्त्र मिलों को रूग्ण इकाई घोषित कर दिया गया हैं नए विकासशील उद्योगों में [[धातु]], रसायन, वाहन, इलेक्ट्रानिक्स, इंजीनियरिंग और कई प्रकार के सहायक उद्यम शामिल हैं। शाद्य प्रसंस्करण, काग़ज़ —निर्माण, छपाई और प्रकाशन जैसे शहरी उद्योग भी रोज़ग़ार के अवसर उपलब्ध कराने में सहायक हैं। सेवा और अनौपचारिक क्षेत्र में 20वीं शताब्दी के अन्तिम दशक में काफ़ी विस्तार हुआ है।&lt;br /&gt;
[[चित्र:Nariman-Point-Mumbai.jpg|thumb|250px|left|[[नरीमन पाइंट मुंबई|नरीमन पाइंट]], मुम्बई&amp;lt;br /&amp;gt; Nariman Point, Mumbai]] &lt;br /&gt;
====वाणिज्य और वित्त====&lt;br /&gt;
देश का केन्द्रीय बैंक भारतीय रिज़र्व बैंक, कई अन्य व्यावसायिक बैंक और सरकारी बान्डों व निजी शेयरों में देश के सार्वजनिक क्षेत्र का सबसे बड़ा निवेशक राष्ट्रीयकृत उद्यम भारतीय जीवन बीमा निगम और दीर्घकालीन निवेश से जुड़े प्रमुख वित्तीय संस्थान मुम्बई में स्थित हैं। इस कारण इस शहर में कई वित्तीय और व्यापारिक सेवाएँ उपलब्ध हैं। मुम्बई स्टाक एक्सचेन्ज देश का अग्रणी स्टाक और शेयर बाज़ार है। हालाँकि आज़ादी के बाद देश भर में कई आर्थिक केन्द्र पनपे हैं, जिसके कारण इस एक्सचेन्ज का उतना महत्त्व नहीं रहा। फिर भी वित्तीय व अन्य व्यापारिक कारोबार के मामले में यह प्रमुख केन्द्र है और देश की अर्थ-व्यवस्था के पैमाने की भूमिका निभाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==परिवहन==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Mumbai-Chhatrapati-Shivaji-Terminus.jpg|thumb|250px|[[छत्रपति शिवाजी टर्मिनस मुंबई|छत्रपति शिवाजी टर्मिनस]], मुम्बई&amp;lt;br /&amp;gt;Chhatrapati Shivaji Terminus, Mumbai]]&lt;br /&gt;
मुम्बई सड़क संजाल द्वारा भारत के अन्य हिस्सों से जुड़ा हुआ है। यह पश्चिम तथा मध्य रेलवे का मुख्यालय है और इस नगर से चलने वाली रेलगाड़ियाँ भारत के सभी हिस्सों तक सामान व यात्रियों को ले जाती हैं। छत्रपति शिवाजी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा कई विदेशी हवाई सेवाओं के आगमन का महत्त्वपूर्ण स्थल है। जबकि निकटस्थ सान्ताक्रूज़ हवाई अड्डे से घरेलू उड़ानें भरी जाती हैं। मुम्बई में भारत के अंतर्राष्ट्रीय हवाई यातायात का 60 प्रतिशत और घरेलू यातायात का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा केन्द्रित है। &lt;br /&gt;
यहाँ के बंदरगाह पर उपलब्ध सुविधाओं ने मुम्बई को देश का प्रमुख पश्चिमी बंदरगाह बना दिया है। हालाँकि पश्चिमी तट पर मुम्बई के उत्तर में कांडला और दक्षिण में गोवा व [[कोच्चि]] जैसे कई अन्य प्रमुख बंदरगाह बन गए हैं, लेकिन यहाँ से अब भी भारत के समुद्री व्यापार का 40 प्रतिशत हिस्सा संचालित होता है। दो उपनगरीय विद्युत रेलप्रणालियाँ मुख्य सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध कराती हैं और रोज़ महानगरीय क्षेत्र के लाखों लोगों को ढोती हैं। मुम्बई में नगरपालिका के स्वामित्व वाली बस सेवा भी है।&lt;br /&gt;
====कैसे पहुंचे====&lt;br /&gt;
'''वायु मार्ग'''- &amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
मुम्बई में अंर्तराष्ट्रीय और घरेलू हवाई अड्डा है। इन दोनों हवाई अड्डों के नाम छत्रपति शिवाजी है। अंर्तराष्ट्रीय ट्रर्मिनल सहार में स्थित है। जो शहर के केन्द्र के उत्तर से लगभग तीस किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। जबकि घरेलू टर्मिनल सेंटा क्रूज में स्थित है, जो केवल चार किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''रेल मार्ग'''- &amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
मुम्बई में लोकमान्य तिलक टर्मिनल (एलटीटी) और दादर स्टेशन है। सीटीसी मुख्य स्टेशन है, जहाँ पर अधिकतर रेलें रुकती है। सबसे प्रमुख रेलवे स्टेशन विक्टोरिया रेलवे स्टेशन है। जिसे अब क्षत्रपति शिवाजी नाम से जाना है। अन्य रेलवे स्टेशन चर्चगेट और कुरला में स्थित है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''सड़क मार्ग'''- &amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
केंद्रीय रेलवे स्टेशन के विपरीत ही राज्य परिवहन टर्मिनल स्थित है। यहाँ से भारत यात्रा के लिए आसानी से बस मिल जाएंगी। लेकिन यदि आपको [[हिन्दी]] और [[मराठी भाषा|मराठी]] की जानकारी नहीं है और आपके पास [[अंग्रेज़ी]] में भी छपी हुई जानकारी नहीं है तो यह आपके लिए अच्छा विकल्प नहीं है। वैसे अधिकतर सभी पड़ोसी राज्य जैसे [[गोवा]], [[गुजरात]], [[कर्नाटक]] और [[मध्य प्रदेश]] आदि के राज्य बस कम्पनी कार्यालय यहाँ पर स्थित है।&amp;lt;ref name=&amp;quot;ys&amp;quot;/&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==प्रशासनिक एवं सामाजिक विशेषताएँ==&lt;br /&gt;
====&amp;lt;u&amp;gt;सरकार&amp;lt;/u&amp;gt;====&lt;br /&gt;
[[महाराष्ट्र]] की राजधानी के रूप में यह शहर राज्य प्रशासन का समेकित राजनीतिक खण्ड है, जिसके मुख्यालय को मंत्रालय कहा जाता है। राज्य सरकार पुलिस बल को नियंत्रित करती है और नगर के कुछ विभागों पर प्रशासनिक नियंत्रण रखती है। डाक एवं टेलीग्राफ़ प्रणाली, रेल, बंदरगाह और हवाई अड्डों जैसे संचार साधनों पर केन्द्र सरकार का नियंत्रण है। &lt;br /&gt;
[[चित्र:Bombay-High-Court.jpg|thumb|250px|left|बॉम्बे उच्च न्यायालय&amp;lt;br /&amp;gt; Bombay High Court]]&lt;br /&gt;
मुम्बई में भारतीय नौसेना की पश्चिमी कमान का मुख्यालय भी है और यह भारतीय फ़्लैगशिप का बेस भी है। शहर का प्रशासन वृहद (ग्रेटर) मुम्बई के पूर्णतःस्वायत्त नगर निगम के अंतर्गत है। इसकी विधायी संस्था का निर्वाचन हर चार वर्ष में वयस्क मताधिकार द्वारा होता है और यह विभिन्न स्थायी समितियों के माध्यम से काम करती है। राज्य सरकार के द्वारा तीन वर्षों के लिए नियुक्त मुख्य कार्यकारी यहाँ का निगम आयुक्त होता है। महापौर का चुनाव हर वर्ष नगर निगम द्वारा किया जाता है; महापौर निगम की बैठकों की अध्यक्षता करता है और शहर में सर्वाधिक सम्मानित माना जाता है, लेकिन वस्तुतः उसके पास कोई सत्ता नहीं होती। [[1885]] में कांग्रेस के प्रथम स्थापना अधिवेशन मुम्बई में [[उत्तर प्रदेश]] से भाग लेने वाले मुख्य प्रतिनिधि [[गंगाप्रसाद वर्मा]] थे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
====&amp;lt;u&amp;gt;जनसुविधाएँ&amp;lt;/u&amp;gt;====&lt;br /&gt;
निगम के कई कार्यों में चिकित्सा सेवा, शिक्षा, जलापूर्ति, अग्निशमन, कचरे की व्यवस्था, बाज़ार, उद्यान और इंजीनियरिंग परियोजनाओं का, जैसे निकास तथा सड़कों व गलियों में प्रकाश व्यवस्था को बेहतर बनाना, काम शामिल हैं। नगर निगम शहर में यातायात प्रणाली और विद्युत आपूर्ति को संचालित करता है। &lt;br /&gt;
[[चित्र:Brabourne-Stadium-Mumbai.jpg|thumb|250px|[[ब्रेबोर्न स्टेडियम]], मुम्बई&amp;lt;br /&amp;gt; Brabourne Stadium, Mumbai]]&lt;br /&gt;
यहाँ सरकार और निजी क्षेत्र की एजेंसियों के द्वारा एक ग्रिड प्रणाली के ज़रिये बिजली शहर में वितरित की जाती है। जलापूर्ति व्यवस्था भी नगर निगम के द्वारा संचालित की जाती है और यह मुख्यतः निकटस्थ ठाणे ज़िले की तांसा झील, तुलसी व विहार झीलों से प्राप्त किया जाता है। मूलतः जलापूर्ति के लिए निर्मित पवई झील कारगर साबित नहीं हुई, क्योंकि इसका पानी पीने योग्य नहीं है।&lt;br /&gt;
====&amp;lt;u&amp;gt;स्वास्थ्य&amp;lt;/u&amp;gt;====&lt;br /&gt;
इस शहर में 100 से अधिक अस्पताल हैं, जिनमें केन्द्र, राज्य सरकार और निगम संस्थाओं द्वारा संचालित अस्पताल और कई (क्षय-रोग, कैन्सर और हृदय रोगों के लिए) विशेष संस्थान शामिल हैं, यहाँ पर कई अग्रणी निजी अस्पताल भी हैं। यहाँ हेफ़काइन इंस्टिट्यूट भी है, जो एक अग्रणी बैक्टीरिया अनुसन्धान केन्द्र है, इसे उष्णकटिबन्धीय बीमारियों में विशिष्टता प्राप्त है।&lt;br /&gt;
====&amp;lt;u&amp;gt;सुरक्षा&amp;lt;/u&amp;gt;====&lt;br /&gt;
शहर के पुलिस बल का प्रमुख पुलिस आयुक्त होता है, जो मुम्बई में क़ानून एवं व्यवस्था के लिए ज़िम्मेदार होता है, प्रशासनिक रूप से वह राज्य के गृह सचिव के प्रति जवाबदेह होता है।&lt;br /&gt;
====&amp;lt;u&amp;gt;शिक्षा&amp;lt;/u&amp;gt;====&lt;br /&gt;
मुम्बई की साक्षरता दर समूचे राष्ट्र की साक्षरता दर से काफ़ी अधिक हैं। प्राथमिक शिक्षा मुफ़्त व अनिवार्य है और यह नगर निगम का दायित्व है। माध्यमिक शिक्षा सरकारी व निजी विद्यालयों द्वारा सरकार की देखरेख में कराई जाती है। यहाँ सार्वजनिक एवं निजी पालिटेक्निक व संस्थान हैं, जो विद्यार्थियों को यांत्रिकी, विद्युत तथा रासायनिक इंजीनियरी में विभिन्न डिग्री व डिप्लोमा देते हैं। केन्द्र सरकार के द्वारा संचालित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आई. आई. टी.) भी यहाँ पर स्थित है। अन्य इंजीनियरिंग कॉलेजों में:-&lt;br /&gt;
[[चित्र:Marine-Drive-Mumbai.jpg|thumb|300px|left|[[मारीन ड्राईव मुम्बई|मारीन ड्राईव]], मुम्बई&amp;lt;br /&amp;gt; Marine Drive, Mumbai]]&lt;br /&gt;
*सरदार पटेल कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग, &lt;br /&gt;
*वीरमाता जीजाबाई टेक्नोलाज़िकल इंस्टिट्यूट, &lt;br /&gt;
*के. जी. एस. कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग, &lt;br /&gt;
*एम. एच. एस. एस. कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग, &lt;br /&gt;
*डी. जे. एस. कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग, &lt;br /&gt;
*थोडोमल शाही इंजीनियरिंग कॉलेज और &lt;br /&gt;
*विवेकानन्द इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलोज़ी शामिल हैं। &lt;br /&gt;
1857 में स्थापित बाम्बे विश्वविद्यालय से सम्बद्ध कला, [[विज्ञान]], वाणिज्य व शिक्षा सम्बन्धी महाविद्यालय, चिकित्सा, होमियोपैथी, यूनानी चिकित्सा, फ़ार्मेसी व दन्त चिकित्सा महाविद्यालय, वास्तुशिल्प, शारीरिक शिक्षा एवं प्रबन्धन संस्थान हैं। मुम्बई में महिलाओं के लिए एस. एन. डी. टी. विश्वविद्यालय भी है। 1857 में स्थापित बाम्बे विश्वविद्यालय से बहुत से महाविद्यालय और कई शिक्षण विभाग जुड़े हुए हैं। [[गोवा]] में स्थित बहुत से महाविद्यालय इस विश्वविद्यालय से सम्बद्ध हैं।&lt;br /&gt;
====&amp;lt;u&amp;gt;सांस्कृतिक जीवन&amp;lt;/u&amp;gt;====&lt;br /&gt;
[[चित्र:Flora-Fountain-Mumbai.jpg|thumb|250px|[[फ़्लोरा फ़ाउंटेन मुंबई|फ़्लोरा फ़ाउंटेन]], मुम्बई&amp;lt;br /&amp;gt; Flora Fountain, Mumbai]]&lt;br /&gt;
मुम्बई का सांस्कृतिक जीवन इसकी जातीय विविधतायुक्त जनसंख्या को प्रतिबिम्बित करता है। शहर में बहुत से संग्रहालय, पुस्तकालय, साहित्यिक एवं कई अन्य सांस्कृतिक संस्थान, कला, दीर्घाएँ व रंगशालाएँ हैं। भारत का कोई अन्य शहर अपनी सांस्कृतिक एवं मनोरंजन सुविधाओं के मामले में इतनी उच्च श्रेणी की विविधता और गुणवत्ता का शायद ही दावा कर सके। मुम्बई भारतीय फ़िल्म उद्योग का गढ़ है। साल भर यहाँ पश्चिमी व भारतीय संगीत सम्मेलन एवं महोत्सव और भारतीय नृत्य कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इंडो—सार्सेनिक वास्तुशिल्प की एक इमारत में द प्रिंस आफ़ वेल्स म्यूज़ियम आफ़ वेस्टर्न इंडिया है, जिसमें कला, पुरातत्त्व व प्राकृतिक इतिहास के तीन प्रमुख विभाग हैं। निकट ही जहाँगीर आर्ट गैलरी है, जो मुम्बई की पहली स्थायी कला दीर्घा है और सांस्कृतिक व शैक्षिक गतिविधियों का केन्द्र है। मुम्बई भारतीय मुद्रण उद्योग का महत्त्वपूर्ण केन्द्र है और यहाँ सशक्त प्रेस है। यहाँ [[अंग्रेज़ी]], [[मराठी भाषा|मराठी]], [[हिन्दी]], [[गुजराती भाषा|गुजराती]], [[सिंधी भाषा|सिन्धी]] व [[उर्दू]] में समाचार पत्र प्रकाशित होते हैं। बहुत-सी मासिक, पाक्षिक व साप्ताहिक पत्रिकाएँ भी यहाँ से प्रकाशित होती हैं। आल-इंडिया रेडियो (आकाशवाणी) का क्षेत्रीय केन्द्र भी मुम्बई में ही है और इस शहर के लिए दूरदर्शन सेवाएँ [[1972]] में शुरू हुईं। शहर के उत्तर में कृष्णगिरि वन एक राष्ट्रीय उद्यान और छुट्टियाँ बिताने के लिए ख़ूबसूरत सैरगाह है, [[कन्हेरी गुफाएँ मुम्बई|कन्हेरी गुफ़ाओं]] के निकट एक प्राचीन बौद्ध विश्वविद्यालय था, यहाँ 100 से अधिक गुफ़ाओं में दूसरी से नौवीं शताब्दी तक के विशालकाय बौद्ध मूर्तिशिल्प हैं। यहाँ पर कई सार्वजनिक उद्यान हैं। जिसमें जीजामाता उद्यान शामिल है, यहाँ पर मुम्बई का चिड़ियाघर स्थित है, यहाँ पर बैपटिस्टा गार्डन भी है, जो मज़गाँव में एक जलाशय पर स्थित है; इसके अलावा मालाबार हिल पर स्थित फ़िरोज़शाह मेहता गार्डन, कमला नेहरू पार्क व स्लोपिंग पार्क हैं। समूचे भारत में लोकप्रिय क्रिक्रेट के मैच भारतीय क्रिकेट क्लव (ब्रेबोर्न स्टेडियम) और वानखेड़े स्टेडियम में खेले जाते हैं। दौड़ व साइकिल चालन प्रतियोगिताएँ वल्लभ भाई पटेल स्टेडियम में आयोजित की जाती है। स्नान व तैराकी के लिए जुहू समुद्र तट एक प्रसिद्ध स्थान है।&lt;br /&gt;
====भोजन ====&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुम्बई में कोलाबा बड़े मियां, मुसाफिर खानं गुलशन-ए-ईरान, हाजी अली जूस सेंटर, शिव सागर जूहू स्थित है। यह सब अरबन तड़का के लिए प्रसिद्ध है। चॉकलेट [[चाय]] के लिए दादर स्थित पश्चिम स्टेशन जा सकते हैं। जबकि पानी पूरी के लिए [[बांद्रा]] के कराची स्वीट जाया जा सकता है। गर्म पोहा और [[साबूदाना]] वड़ा के लिए महापालिका मार्ग जा सकते हैं। होर्नीमन सर्कल के नजदीक अपूर्वा में मंगलोरियन सीफ्रूड का मजा ले सकते हैं। भिंडी बाज़ार और नूर मोहम्मदी में [[रमजान]] के महीने में यहां सड़क किनारे लगने वाली रेहड़ी से फिरनी और मालपुआ का स्वाद चख सकते हैं। स्वाति स्नैक्स जो टारडियो मार्ग में स्थित है।  [[भारत]] के बेहतरीन स्नैक्स मिलते हैं। सिन्धुद्वार जो आर.के. विद्या रोड़, दादर पश्चिम में स्थित है; [[मछली]] के लिये प्रसिद्ध है। इसके अलावा यहां के चिड़वा और [[लड्डू]] का स्वाद भी ले सकते है। बहुत ही कम दाम में दक्षिण भारतीय शाकाहारी खाने के लिए रामानायक उद्दुपी, माटूंगा केंद्रीय स्टेशन के समीप। अगर आप बांद्रा (पश्चिम) में है तो लक्की रेस्तरां में जा सकते हैं। यह रस्तरां बिरयानी से लिए प्रसिद्ध है। गांधी नगर स्थित गोमांतक हाईवे, अपना बाज़ार, बांद्रा (पूर्व) में कोकर्णी के विभिन्न व्यंजन परोसे जाते हैं। इसके अलावा कोकर्णी खाने के लिए सायबा, बांद्रा (पूर्व) में स्थित है। &amp;lt;ref name=&amp;quot;ys&amp;quot;/&amp;gt;&lt;br /&gt;
====ख़रीददारी====&lt;br /&gt;
मुम्बई में ख़रीददारी करना एक यादगार अनुभव हो सकता है। यहाँ लगने वाले बाज़ारों में चोर बाज़ार, मटन स्ट्रीट और जावरी बाज़ार प्रसिद्ध है। चोर बाज़ार से असाधारण से प्राचीन, आभूषण, लकड़ी की वस्तुएं, चमड़े का सामान और सामान्य छोटी-मोटी वस्तुएं आसानी से मिल जाएगी। क्रोफोर्ड बाज़ार फूलों, फल, मीट और मछली के लिए प्रसिद्ध है। वहीं जावरी बाज़ार से सस्‍ते दामों में आभूषण ख़रीदे जा सकते हैं। रंगीन और नव-निर्माण गलीचे के लिए मेयरवेदर मार्ग, [[ताज महल होटल]] के पीछे जा सकते हैं। लेकिन यहाँ मिलने वाले गालीचों की कीमत बहुत अधिक है। कपड़ों की ख़रीददारी के लिए सेंट्रल कॉटेज इंडस्टरी इम्पोरियम (अपोलो बंडर) और खादी विलेज इंडस्टरी इम्पोरियम (डी.एन.रोड़) जा सकते हैं। यहाँ बिल्कुल निश्चित कीमत पर कपड़े मिलते हैं। लेकिन यहां मिलने वाले कपड़े बेहतरीन किस्म के होते हैं। ग्लैमरस चीजों की ख़रीद के लिए कीम्स कॉर्नर, वार्डन रोड़, ब्रीच केंडी और नेपिन सी रोड़ सबसे बेहतरीन जगहों में से है। इसके अलावा इत्र, कशीदा और जरी के काम वो भी हाथ से बने हुए चीजों के लिए प्रसिद्ध मोहम्मद अली रोड़ में बहुत सारी दुकानें है। मुम्बई 20 में विभिन्न डिजाइनरों जैसे हूगो बॉस, पिरी कार्डिन, अरमानी, पोलो स्पोर्ट और अन्य बहुत से डिजाइनरों के ब्रांड यहाँ  मिल जाएंगें।&amp;lt;ref name=&amp;quot;ys&amp;quot;/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==जनसंख्या==&lt;br /&gt;
मुम्बई की जनसंख्या ([[2001]]) 33,26,837 है और मुम्बई उपनगरीय क्षेत्र की जनसंख्या 85,87,561 है।&lt;br /&gt;
{{प्रचार}}&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति &lt;br /&gt;
|आधार=&lt;br /&gt;
|प्रारम्भिक=&lt;br /&gt;
|माध्यमिक=माध्यमिक1&lt;br /&gt;
|पूर्णता=&lt;br /&gt;
|शोध=&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
==वीथिका==&lt;br /&gt;
{{Panorama&lt;br /&gt;
|image =चित्र:Flora-Fountain-Mumbai-1.jpg&lt;br /&gt;
|height =200&lt;br /&gt;
|alt =फ़्लोरा फ़ाउंटेन का विहंगम दृश्य&lt;br /&gt;
|caption=	[[फ़्लोरा फ़ाउंटेन मुंबई|फ़्लोरा फ़ाउंटेन]] का विहंगम दृश्य&amp;lt;br /&amp;gt; Panoramic View Of Flora Fountain&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;gallery perrow=&amp;quot;3&amp;quot; widths=&amp;quot;200&amp;quot;&amp;gt;&lt;br /&gt;
चित्र:Chhatrapati-Shivaji-Terminus.jpg|छत्रपति शिवाजी टर्मिनस, मुम्बई &lt;br /&gt;
चित्र:Borivali-Mumbai.jpg|[[बोरिवली मुम्बई|बोरिवली]], मुम्बई &lt;br /&gt;
चित्र:Jogeshwari-Cave-Mumbai.jpg|[[जोगेश्‍वरी गुफ़ा मुंबई|जोगेश्‍वरी गुफ़ा]], मुम्बई &lt;br /&gt;
चित्र:Hanging-Garden-Mumbai.jpg|[[हेंगिग गार्डन मुंबई|हेंगिग गार्डन]], मुम्बई &lt;br /&gt;
चित्र:Juhu-Beach-Mumbai.jpg|[[जुहू चौपाटी मुंबई|जुहू चौपाटी]], मुम्बई &lt;br /&gt;
चित्र:Haji-Ali-Dargah.jpg|[[हाजी अली दरगाह]], मुम्बई &lt;br /&gt;
चित्र:Kanheri-Caves-Mumbai.jpg|[[कन्हेरी गुफाएँ मुंबई|कन्हेरी गुफाएँ]], मुम्बई  &lt;br /&gt;
चित्र:Mount-Mary-Church-Mumbai.jpg|[[माउंट मेरी चर्च मुंबई|माउंट मेरी चर्च]], मुम्बई &lt;br /&gt;
चित्र:The-Prince-Of-Wales-Museum-Mumbai.jpg|[[द प्रिंस ऑफ़ वेल्स संग्रहालय मुंबई|द प्रिंस ऑफ़ वेल्स संग्रहालय]], मुम्बई &lt;br /&gt;
चित्र:Taraporewala-Aquarium-Mumbai.jpg|[[तारापोरवाला एक्वेरियम मुंबई|तारापोरवाला एक्वेरियम]], मुम्बई &lt;br /&gt;
चित्र:Mumba-Devi-Temple-Mumbai.jpg|[[मुंबा देवी मंदिर मुंबई|मुंबा देवी मंदिर]], मुम्बई &lt;br /&gt;
चित्र:Kanheri-Caves-Mumbai-2.jpg|[[कन्हेरी गुफाएँ मुम्बई|कन्हेरी गुफाएँ]], मुम्बई &lt;br /&gt;
चित्र:Arnala.jpg|[[अरनाला|अरनाला दुर्ग]], मुंबई&lt;br /&gt;
चित्र:Sanjay-Gandhi-National-Park.jpg|[[संजय गाँधी राष्ट्रीय उद्यान]], मुंबई&lt;br /&gt;
चित्र:Versova-Beach-Mumbai.jpg|[[वरसोवा तट मुंबई|वरसोवा तट]], मुंबई&lt;br /&gt;
&amp;lt;/gallery&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{संदर्भ ग्रंथ}}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
*[http://www.mcgm.gov.in/ अधिकारिक वेबसाइट]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{महाराष्ट्र  के पर्यटन स्थल}}&lt;br /&gt;
{{भारतीय महानगर}}&lt;br /&gt;
{{प्रदेशों की राजधानी}}&lt;br /&gt;
{{महाराष्ट्र के नगर}}&lt;br /&gt;
{{भारत गणराज्य}}&lt;br /&gt;
[[Category:महाराष्ट्र]][[Category:महाराष्ट्र_के_ऐतिहासिक_नगर]][[Category:महाराष्ट्र_के_नगर]][[Category:भारत के नगर]]&lt;br /&gt;
[[Category:प्रदेशों की राजधानियाँ]][[Category:महाराष्ट्र_के_पर्यटन स्थल]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:मुम्बई]]&lt;br /&gt;
[[Category:भारत के व्यापारिक क्षेत्र और नगर]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>प्रियंका चतुर्वेदी</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%98%E0%A4%A3%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A4%BE&amp;diff=165713</id>
		<title>घण्टा</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%98%E0%A4%A3%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A4%BE&amp;diff=165713"/>
		<updated>2011-05-25T10:38:25Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;प्रियंका चतुर्वेदी: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;*घण्टा एक [[घन वाद्य]] है। &lt;br /&gt;
*घण्टा काँसा मिश्रित पीतल अथवा [[लोहा|लौह]] निर्मित प्रचलित हैं।&lt;br /&gt;
*घण्टे का व्यवहार कई प्रकार से होता है एवं आकृति भी कई प्रकार की है।&lt;br /&gt;
*भारतवर्ष में [[देवता|देव]] [[पूजा]] में जिस घण्टे का व्यवहार होता है, उसके साथ पीतल या काँसा निर्मित एक दण्ड भी रहता है, बायें हाथ में यह दण्ड रखकर घण्टा बजाया जाता है।&lt;br /&gt;
*मंदिरों में जंजीर की सहायता से घण्टा झूलता रहता है।&lt;br /&gt;
*देवदर्शनाकांक्षी व्यक्ति मंदिरों में प्रवेश करते समय यह घण्टा बजाते हैं।&lt;br /&gt;
{{प्रचार}}&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=|प्रारम्भिक=प्रारम्भिक1 |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
{{संदर्भ ग्रंथ}}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{संगीत वाद्य}}&lt;br /&gt;
[[Category:संगीत वाद्य]][[Category:संगीत कोश]][[Category:वादन]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>प्रियंका चतुर्वेदी</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%AB%E0%A4%BC%E0%A5%80%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%9C%E0%A4%BC_%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%81%E0%A4%A7%E0%A5%80&amp;diff=165712</id>
		<title>फ़ीरोज़ गाँधी</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%AB%E0%A4%BC%E0%A5%80%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%9C%E0%A4%BC_%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%81%E0%A4%A7%E0%A5%80&amp;diff=165712"/>
		<updated>2011-05-25T10:35:13Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;प्रियंका चतुर्वेदी: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{tocright}}&lt;br /&gt;
फ़िरोज़ गाँधी (जन्म- [[12 सितम्बर]], [[1912]] ई., [[मुम्बई]]; मृत्यु- [[8 सितम्बर]], [[1960]] ई., [[दिल्ली]])  स्वतंत्रता सेनानी और [[लोकसभा]] के प्रभावशाली सदस्य थे। फ़िरोज़ गाँधी [[भारत]] की  प्रथम महिला [[प्रधानमंत्री]] [[इंदिरा गाँधी]] के पति थे।&lt;br /&gt;
==जीवन परिचय==&lt;br /&gt;
स्वतंत्रता सेनानी फ़िरोज़ गाँधी का जन्म 12 सितम्बर, 1912 ई. को मुम्बई के एक अस्पताल में पारसी परिवार में हुआ था। उनके [[पिता]] का नाम जहाँगीर एवं [[माता]] का नाम रतिमाई था। [[1915]] ई. में वे अपनी माँ के साथ [[इलाहाबाद]] में कार्यरत एक सम्बन्धी महिला के पास आ गए। इस प्रकार उनकी आरम्भिक शिक्षा-दीक्षा इलाहाबाद में हुई। इलाहाबाद उन दिनों स्वतंत्रता संग्राम की गतिविधियों का केन्द्र था। युवक फ़िरोज़ गाँधी इसके प्रभाव में आए और नेहरू परिवार से भी उनका सम्पर्क हुआ। उन्होंने [[1928]] ई. में [[साइमन कमीशन]] के बहिष्कार में भाग लिया तथा [[1930]]-[[1932]] के आन्दोलन में जेल की सज़ा काटी। फ़िरोज़ गाँधी [[1935]] में  आगे के अध्ययन के लिए लंदन गए और उन्होंने ‘स्कूल ऑफ़ इकोनोमिक्स’ से अंतर्राष्ट्रीय क़ानून में स्नातक की डिग्री प्राप्त की। &lt;br /&gt;
====विवाह====&lt;br /&gt;
फ़िरोज़ गाँधी ने क्षय रोग से पीड़ित अपनी पत्नी इंदिरा गाँधी की माँ [[कमला नेहरू]] की [[भारत]] और [[जर्मनी]] के चिकित्सालयों में बड़ी सेवा की। उसी समय उनका और इंदिरा का सम्पर्क हुआ और [[मार्च]], [[1942]] ई. में इलाहाबाद में दोनों का [[विवाह]] हो गया।&lt;br /&gt;
==राजनीति सफ़र==&lt;br /&gt;
अगस्त, 1942 में ‘भारत छोड़ो आन्दोलन’ में फ़िरोज़ गाँधी कुछ समय तक भूमिगत रहने के बाद गिरफ़्तार कर लिए गए। रिहा होने के बाद [[1946]] में उन्होंने [[लखनऊ]] के दैनिक पत्र ‘नेशनल हेराल्ड’ के प्रबन्ध निर्देशक का पद सम्भाला। [[1952]] के प्रथम आम चुनाव में वे लोकसभा के सदस्य चुने गए। इसके बाद उन्होंने लखनऊ छोड़ दिया। कुछ वर्ष वे और इंदिरा, [[नेहरू जी]] के साथ रहे। इंदिरा जी का अधिकांश समय प्रधानमंत्री पिता की देख-रेख में बीतता था। [[1956]] में फ़िरोज़ गांधी ने प्रधानमंत्री निवास में रहना छोड़ दिया और वे सांसद के साधारण मकान में अकेले ही रहने लगे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[1957]] में वे पुन: लोकसभा के सदस्य निर्वाचित हुए। इस बार उन्होंने संसद में भ्रष्टाचार के कई मामले उठाए। इन्हीं के कारण वित्त मंत्री टी. टी. कृष्णमाचारी को अपने पद से हटना पड़ा। वे नेहरू परिवार से अपने सम्बन्धों की परवाह किए बिना प्रधानमंत्री की कई नीतियों, विशेषत: औद्योगिक नीतियों की कटु आलोचना करते थे। वे बड़े लोकप्रिय सांसद थे, पर निजी जीवन में अन्तिम वर्षों में बहुत एकाकी हो गए थे। उनके दोनों पुत्र [[राजीव गाँधी]] और संजय गाँधी भी अपनी माँ के साथ प्रधानमंत्री निवास में ही रहते थे।&lt;br /&gt;
==मृत्यु==&lt;br /&gt;
फ़िरोज़ गाँधी को [[1960]] में दिल का दौरा पड़ा। इंदिरा जी उस समय महिला सम्मेलन में भाग लेने के लिए [[केरल]] गई थीं। सूचना मिलते ही वे तुरन्त दिल्ली आई और 8 सितम्बर, 1960 ई. को फ़िरोज़ गाँधी का देहान्त हो गया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{प्रचार}}&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=|प्रारम्भिक=प्रारम्भिक2 |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
{{संदर्भ ग्रंथ}}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{स्वतन्त्रता सेनानी}}&lt;br /&gt;
{{नेहरू परिवार}}&lt;br /&gt;
[[Category:स्वतन्त्रता सेनानी]][[Category:लोकसभा सांसद]][[Category:नेहरू परिवार]][[Category:राजनीति कोश]][[Category:प्रसिद्ध व्यक्तित्व कोश]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>प्रियंका चतुर्वेदी</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%97%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%A6_%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A4%BE&amp;diff=165711</id>
		<title>गंगाप्रसाद वर्मा</title>
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		<updated>2011-05-25T10:33:08Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;प्रियंका चतुर्वेदी: Adding category :Category:राजनीतिज्ञ (को हटा दिया गया हैं।)&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{tocright}}&lt;br /&gt;
गंगाप्रसाद वर्मा (जन्म- [[13 अगस्त]], [[1863]] ई., मृत्यु- [[23 जून]], [[1914]] ई.) 1885 में कांग्रेस के प्रथम स्थापना अधिवेशन [[मुम्बई]] में [[उत्तर प्रदेश]] से भाग लेने वाले मुख्य प्रतिनिधि थे। &lt;br /&gt;
==जीवन परिचय==&lt;br /&gt;
गंगाप्रसाद वर्मा का जन्म 13 अगस्त, 1863 ई. को हरदोई ज़िले में एक सम्पन्न खत्री परिवार में हुआ था। [[अरबी भाषा|अरबी]] और [[फ़ारसी भाषा|फ़ारसी]]  की शिक्षा प्राप्त करने के बाद वे [[लखनऊ]] के केनिंग कॉलेज में भर्ती हुए। उनकी रुचि चतुर्दिक घटित विषयों में अधिक थी। अत: वे विद्यालयी शिक्षा पूरी नहीं कर पाए।&lt;br /&gt;
==राजनीतिक दृष्टि से जागरूक==&lt;br /&gt;
गंगाप्रसाद वर्मा पर स्वामी रामतीर्थ का बहुत प्रभाव था। [[मदनमोहन मालवीय|मालवीय जी]], [[लाला लाजपत राय]], [[एनी बेसेंट]] आदि से भी वे प्रभावित थे। उन्होंने [[1883]] में ‘एडवोकेट’ नामक द्वि-साप्ताहिक पत्र का सम्पादन करके अपना सार्वजनिक जीवन प्रारम्भ किया। फिर [[उर्दू]] में ‘हिन्दुस्तानी’ निकाला। इन पत्रों के माध्यम से राज्य में राजनीतिक चेतना के प्रसार में बड़ी सहायता मिली। वे स्वयं राजनीतिक दृष्टि से इतने जागरूक थे कि, 1885 के प्रथम कांग्रेस अधिवेशन मुम्बई में कई साथियों को लेकर सम्मिलित हुए। उनके निमंत्रण पर ही [[1892]] में कांग्रेस का अधिवेशन [[इलाहाबाद]] में हुआ था। प्रदेश में कांग्रेस की स्थापना का श्रेय भी उन्हीं को है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गंगाप्रसाद वर्मा आधुनिक लखनऊ नगर के निर्माता माने जाते हैं। वे नगरपालिका के उपाध्यक्ष थे। शहर का वर्तमान रूप उन्हीं की देन है। उन्होंने नगर में 28 सड़कों का निर्माण करवाया और जल व मल निकासी की योजनाओं के लिए अन्य नगरों को भी परामर्श दिया। वे [[आर्यसमाज]] और होमरूल लीग से भी जुड़े थे। इलाहाबाद और [[काशी हिन्दू विश्वविद्यालय]] से भी उनका निकट का सम्बन्ध था। वर्षों तक वे प्रान्तीय कौंसिल के सदस्य रहे। सभी धर्मों के लोगों के प्रति उनका मैत्री भाव था और वे आधुनिक विषयों के साथ प्राचीन भारतीय शिक्षा पद्धति के भी समर्थक थे। &lt;br /&gt;
==मृत्यु== &lt;br /&gt;
प्राचीन भारतीय शिक्षा पद्धति के भी समर्थक गंगाप्रसाद वर्मा  का 23 जून, 1914 ई. को निधन हो गया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{प्रचार}}&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=|प्रारम्भिक=प्रारम्भिक1 |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
{{संदर्भ ग्रंथ}}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
*(पुस्तक ‘भारतीय चरित कोश’) पृष्ठ संख्या-213&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:राजनीतिज्ञ]]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>प्रियंका चतुर्वेदी</name></author>
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		<id>https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%97%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%A6_%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A4%BE&amp;diff=165710</id>
		<title>गंगाप्रसाद वर्मा</title>
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		<updated>2011-05-25T10:32:37Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;प्रियंका चतुर्वेदी: :श्रेणी:नया पन्ना (को हटा दिया गया हैं।)&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{tocright}}&lt;br /&gt;
गंगाप्रसाद वर्मा (जन्म- [[13 अगस्त]], [[1863]] ई., मृत्यु- [[23 जून]], [[1914]] ई.) 1885 में कांग्रेस के प्रथम स्थापना अधिवेशन [[मुम्बई]] में [[उत्तर प्रदेश]] से भाग लेने वाले मुख्य प्रतिनिधि थे। &lt;br /&gt;
==जीवन परिचय==&lt;br /&gt;
गंगाप्रसाद वर्मा का जन्म 13 अगस्त, 1863 ई. को हरदोई ज़िले में एक सम्पन्न खत्री परिवार में हुआ था। [[अरबी भाषा|अरबी]] और [[फ़ारसी भाषा|फ़ारसी]]  की शिक्षा प्राप्त करने के बाद वे [[लखनऊ]] के केनिंग कॉलेज में भर्ती हुए। उनकी रुचि चतुर्दिक घटित विषयों में अधिक थी। अत: वे विद्यालयी शिक्षा पूरी नहीं कर पाए।&lt;br /&gt;
==राजनीतिक दृष्टि से जागरूक==&lt;br /&gt;
गंगाप्रसाद वर्मा पर स्वामी रामतीर्थ का बहुत प्रभाव था। [[मदनमोहन मालवीय|मालवीय जी]], [[लाला लाजपत राय]], [[एनी बेसेंट]] आदि से भी वे प्रभावित थे। उन्होंने [[1883]] में ‘एडवोकेट’ नामक द्वि-साप्ताहिक पत्र का सम्पादन करके अपना सार्वजनिक जीवन प्रारम्भ किया। फिर [[उर्दू]] में ‘हिन्दुस्तानी’ निकाला। इन पत्रों के माध्यम से राज्य में राजनीतिक चेतना के प्रसार में बड़ी सहायता मिली। वे स्वयं राजनीतिक दृष्टि से इतने जागरूक थे कि, 1885 के प्रथम कांग्रेस अधिवेशन मुम्बई में कई साथियों को लेकर सम्मिलित हुए। उनके निमंत्रण पर ही [[1892]] में कांग्रेस का अधिवेशन [[इलाहाबाद]] में हुआ था। प्रदेश में कांग्रेस की स्थापना का श्रेय भी उन्हीं को है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गंगाप्रसाद वर्मा आधुनिक लखनऊ नगर के निर्माता माने जाते हैं। वे नगरपालिका के उपाध्यक्ष थे। शहर का वर्तमान रूप उन्हीं की देन है। उन्होंने नगर में 28 सड़कों का निर्माण करवाया और जल व मल निकासी की योजनाओं के लिए अन्य नगरों को भी परामर्श दिया। वे [[आर्यसमाज]] और होमरूल लीग से भी जुड़े थे। इलाहाबाद और [[काशी हिन्दू विश्वविद्यालय]] से भी उनका निकट का सम्बन्ध था। वर्षों तक वे प्रान्तीय कौंसिल के सदस्य रहे। सभी धर्मों के लोगों के प्रति उनका मैत्री भाव था और वे आधुनिक विषयों के साथ प्राचीन भारतीय शिक्षा पद्धति के भी समर्थक थे। &lt;br /&gt;
==मृत्यु== &lt;br /&gt;
प्राचीन भारतीय शिक्षा पद्धति के भी समर्थक गंगाप्रसाद वर्मा  का 23 जून, 1914 ई. को निधन हो गया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{प्रचार}}&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=|प्रारम्भिक=प्रारम्भिक1 |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
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==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
*(पुस्तक ‘भारतीय चरित कोश’) पृष्ठ संख्या-213&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
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		<author><name>प्रियंका चतुर्वेदी</name></author>
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		<title>घण्टा</title>
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		<updated>2011-05-25T10:29:44Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;प्रियंका चतुर्वेदी: '*घण्टा एक घन वाद्य है।  *घण्टा काँसा मिश्रित पीतल अथ...' के साथ नया पन्ना बनाया&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;*घण्टा एक [[घन वाद्य]] है। &lt;br /&gt;
*घण्टा काँसा मिश्रित पीतल अथवा [[लौहा|लौह]] निर्मित प्रचलित हैं।&lt;br /&gt;
*घण्टे का व्यवहार कई प्रकार से होता है एवं आकृति भी कई प्रकार की है।&lt;br /&gt;
*भारतवर्ष में [[देवता|देव]] [[पूजा]] में जिस घण्टे का व्यवहार होता है, उसके साथ पीतल या काँसा निर्मित एक दण्ड भी रहता है, बायें हाथ में यह दण्ड रखकर घण्टा बजाया जाता है।&lt;br /&gt;
*मंदिरों में जंजीर की सहायता से घण्टा झूलता रहता है।&lt;br /&gt;
*देवदर्शनाकांक्षी व्यक्ति मंदिरों में प्रवेश करते समय यह घण्टा बजाते हैं।&lt;br /&gt;
{{प्रचार}}&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=|प्रारम्भिक=प्रारम्भिक1 |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
{{संदर्भ ग्रंथ}}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{संगीत वाद्य}}&lt;br /&gt;
[[Category:संगीत वाद्य]][[Category:संगीत कोश]][[Category:वादन]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>प्रियंका चतुर्वेदी</name></author>
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		<id>https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%96%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%B2&amp;diff=165698</id>
		<title>खरताल</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%96%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%B2&amp;diff=165698"/>
		<updated>2011-05-25T07:57:14Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;प्रियंका चतुर्वेदी: '*खरताल एक घन वाद्य है।  *खरताल लोहे के दो खण्ड ...' के साथ नया पन्ना बनाया&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;*खरताल एक [[घन वाद्य]] है। &lt;br /&gt;
*खरताल [[लोहा|लोहे]] के दो खण्ड होते हैं, प्रत्येक एक वित्ता दीर्घ, एक आँगुल परिमाण में स्थूल, चौकोन गड़न है, जो केवल दोनों किनारों पर क्रमश: पतले होते हैं। &lt;br /&gt;
*इस प्रकार के दो लौहखण्ड दायीं मुठ्ठी में रखकर परस्पर आघात से बजाये जाते हैं। &lt;br /&gt;
*यह प्रधानत: 'कंसर्ट' वाद्य में व्यवहृत है। &lt;br /&gt;
*भजन गीत के समय इसका एकाकी वादन भी होता है। &lt;br /&gt;
*कोई युगल रूप में दोनों हाथों से भी खरताल बजाता है।&lt;br /&gt;
{{प्रचार}}&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=|प्रारम्भिक=प्रारम्भिक1 |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
{{संदर्भ ग्रंथ}}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{संगीत वाद्य}}&lt;br /&gt;
[[Category:संगीत वाद्य]][[Category:संगीत कोश]][[Category:वादन]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>प्रियंका चतुर्वेदी</name></author>
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	<entry>
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		<title>घन वाद्य</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%98%E0%A4%A8_%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%AF&amp;diff=165697"/>
		<updated>2011-05-25T07:57:05Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;प्रियंका चतुर्वेदी: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;जो [[वाद्य यंत्र|वाद्य]] धातुनिर्मित होते हैं, एवं आघात करके बजाये जाते हैं, उन्हें घन वाद्य कहते हैं। जैसे- [[घण्टा]], जलतरंग, [[खरताल]] इत्यादि।&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
{{प्रचार}}&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति&lt;br /&gt;
|आधार=&lt;br /&gt;
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}}&lt;br /&gt;
{{संदर्भ ग्रंथ}}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{संगीत वाद्य}}&lt;br /&gt;
[[Category:संगीत वाद्य]][[Category:संगीत कोश]][[Category:वादन]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>प्रियंका चतुर्वेदी</name></author>
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	<entry>
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		<title>नाच न जाने</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%9A_%E0%A4%A8_%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%87&amp;diff=165678"/>
		<updated>2011-05-25T07:30:43Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;प्रियंका चतुर्वेदी: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{पुनरीक्षण}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;blockquote&amp;gt;{{blue}}नाच न जाने आँगन टेढ़ा{{blueclose}}&amp;lt;/blockquote&amp;gt; &lt;br /&gt;
*यह  [[कहावत लोकोक्ति मुहावरे|लोकोक्ति]]  एक प्रचलित कहावत है। &lt;br /&gt;
*इसका अर्थ- काम करना नहीं आना और बहाने बनाना।&lt;br /&gt;
;उदाहरण&lt;br /&gt;
एक स्त्री से नाचने के लिए कहा होगा, तो उसने कहा आँगन ऊँचा- नीचा है या टेढ़ा है। इसका यह मतलब हुआ होगा, कि स्त्री नाचना नहीं चाहती होगी या उसको नाचना नहीं आता होगा। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{प्रचार}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
[[Category:कहावत लोकोक्ति मुहावरे]]&lt;br /&gt;
[[Category:नया पन्ना]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>प्रियंका चतुर्वेदी</name></author>
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		<title>बिन माँगे मोती मिलें</title>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;प्रियंका चतुर्वेदी: '{{पुनरीक्षण}} &amp;lt;blockquote&amp;gt;{{blue}}बिन माँगे मोती मिलैं, माँगे मिले ...' के साथ नया पन्ना बनाया&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{पुनरीक्षण}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;blockquote&amp;gt;{{blue}}बिन माँगे मोती मिलैं, माँगे मिले न भीख{{blueclose}}&amp;lt;/blockquote&amp;gt; &lt;br /&gt;
*यह  [[कहावत लोकोक्ति मुहावरे|लोकोक्ति]]  एक प्रचलित कहावत है। &lt;br /&gt;
*इसका अर्थ- माँगे बिना अच्छी वस्तु की प्राप्ति हो जाती है, माँगने पर साधारण भी नहीं मिलती।&lt;br /&gt;
;उदाहरण&lt;br /&gt;
परिश्रमी और योग्य व्यक्ति को परिश्रम से सब कुछ मिल सकता है, जबकि भिखारी घर-घर घूमते हैं और उनको माँगने पर भीख भी नहीं मिलती।&lt;br /&gt;
{{प्रचार}}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
[[Category:कहावत लोकोक्ति मुहावरे]]&lt;br /&gt;
[[Category:नया पन्ना]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>प्रियंका चतुर्वेदी</name></author>
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		<title>नाच न जाने</title>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;प्रियंका चतुर्वेदी: '{{पुनरीक्षण}} &amp;lt;blockquote&amp;gt;{{blue}}नाच न जाने आँगन टेढ़ा{{blueclose}}&amp;lt;/blockquote&amp;gt;  *...' के साथ नया पन्ना बनाया&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{पुनरीक्षण}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;blockquote&amp;gt;{{blue}}नाच न जाने आँगन टेढ़ा{{blueclose}}&amp;lt;/blockquote&amp;gt; &lt;br /&gt;
*यह  [[कहावत लोकोक्ति मुहावरे|लोकोक्ति]]  एक प्रचलित कहावत है। &lt;br /&gt;
*इसका अर्थ- काम करना नहीं आना और बहाने बनाना।&lt;br /&gt;
;उदाहरण&lt;br /&gt;
एक स्त्री से नाचने के लिए कहा होगा, तो उसने कहा आँगन ऊँचा- नीचा है या टेढ़ा है। इसका यह मतलब हुआ होगा, कि स्त्री नाचना नहीं चाहती थी या उसको नाचना नहीं आता था। इस प्रकार यह कहावत हुई कि &amp;quot;नाच न जाने आँगन टेढ़ा&amp;quot;।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{प्रचार}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
[[Category:कहावत लोकोक्ति मुहावरे]]&lt;br /&gt;
[[Category:नया पन्ना]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>प्रियंका चतुर्वेदी</name></author>
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		<title>गंगाप्रसाद वर्मा</title>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;प्रियंका चतुर्वेदी: '{{tocright}} गंगाप्रसाद वर्मा (जन्म- 13 अगस्त, 1863 ई., मृत्यु- [[2...' के साथ नया पन्ना बनाया&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{tocright}}&lt;br /&gt;
गंगाप्रसाद वर्मा (जन्म- [[13 अगस्त]], [[1863]] ई., मृत्यु- [[23 जून]], [[1914]] ई.) 1885 में कांग्रेस के प्रथम स्थापना अधिवेशन [[मुम्बई]] में [[उत्तर प्रदेश]] से भाग लेने वाले मुख्य प्रतिनिधि थे। &lt;br /&gt;
==जीवन परिचय==&lt;br /&gt;
गंगाप्रसाद वर्मा का जन्म 13 अगस्त, 1863 ई. को हरदोई ज़िले में एक सम्पन्न खत्री परिवार में हुआ था। [[अरबी भाषा|अरबी]] और [[फ़ारसी भाषा|फ़ारसी]]  की शिक्षा प्राप्त करने के बाद वे [[लखनऊ]] के केनिंग कॉलेज में भर्ती हुए। उनकी रुचि चतुर्दिक घटित विषयों में अधिक थी। अत: वे विद्यालयी शिक्षा पूरी नहीं कर पाए।&lt;br /&gt;
==राजनीतिक दृष्टि से जागरूक==&lt;br /&gt;
गंगाप्रसाद वर्मा पर स्वामी रामतीर्थ का बहुत प्रभाव था। [[मदनमोहन मालवीय|मालवीय जी]], [[लाला लाजपत राय]], [[एनी बेसेंट]] आदि से भी वे प्रभावित थे। उन्होंने [[1883]] में ‘एडवोकेट’ नामक द्वि-साप्ताहिक पत्र का सम्पादन करके अपना सार्वजनिक जीवन प्रारम्भ किया। फिर [[उर्दू]] में ‘हिन्दुस्तानी’ निकाला। इन पत्रों के माध्यम से राज्य में राजनीतिक चेतना के प्रसार में बड़ी सहायता मिली। वे स्वयं राजनीतिक दृष्टि से इतने जागरूक थे कि, 1885 के प्रथम कांग्रेस अधिवेशन मुम्बई में कई साथियों को लेकर सम्मिलित हुए। उनके निमंत्रण पर ही [[1892]] में कांग्रेस का अधिवेशन [[इलाहाबाद]] में हुआ था। प्रदेश में कांग्रेस की स्थापना का श्रेय भी उन्हीं को है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गंगाप्रसाद वर्मा आधुनिक लखनऊ नगर के निर्माता माने जाते हैं। वे नगरपालिका के उपाध्यक्ष थे। शहर का वर्तमान रूप उन्हीं की देन है। उन्होंने नगर में 28 सड़कों का निर्माण करवाया और जल व मल निकासी की योजनाओं के लिए अन्य नगरों को भी परामर्श दिया। वे [[आर्यसमाज]] और होमरूल लीग से भी जुड़े थे। इलाहाबाद और [[काशी हिन्दू विश्वविद्यालय]] से भी उनका निकट का सम्बन्ध था। वर्षों तक वे प्रान्तीय कौंसिल के सदस्य रहे। सभी धर्मों के लोगों के प्रति उनका मैत्री भाव था और वे आधुनिक विषयों के साथ प्राचीन भारतीय शिक्षा पद्धति के भी समर्थक थे। &lt;br /&gt;
==मृत्यु== &lt;br /&gt;
प्राचीन भारतीय शिक्षा पद्धति के भी समर्थक गंगाप्रसाद वर्मा  का 23 जून, 1914 ई. को निधन हो गया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{प्रचार}}&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=|प्रारम्भिक=प्रारम्भिक1 |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
{{संदर्भ ग्रंथ}}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
*(पुस्तक ‘भारतीय चरित कोश’) पृष्ठ संख्या-213&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
[[Category:नया पन्ना]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>प्रियंका चतुर्वेदी</name></author>
	</entry>
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		<id>https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%AB%E0%A4%BC%E0%A5%80%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%9C%E0%A4%BC_%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%81%E0%A4%A7%E0%A5%80&amp;diff=165616</id>
		<title>फ़ीरोज़ गाँधी</title>
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		<updated>2011-05-25T06:16:33Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;प्रियंका चतुर्वेदी: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{tocright}}&lt;br /&gt;
फ़िरोज़ गाँधी (जन्म- [[12 सितम्बर]], [[1912]] ई., [[मुम्बई]]; मृत्यु- [[8 सितम्बर]], [[1960]] ई., [[दिल्ली]])  स्वतंत्रता सेनानी और [[लोकसभा]] के प्रभावशाली सदस्य थे। फ़िरोज़ गाँधी [[भारत]] की  प्रथम महिला [[प्रधानमंत्री]] [[इंदिरा गाँधी]] के पति थे।&lt;br /&gt;
==जीवन परिचय==&lt;br /&gt;
स्वतंत्रता सेनानी फ़िरोज़ गाँधी का जन्म 12 सितम्बर, 1912 ई. को मुम्बई के एक अस्पताल में पारसी परिवार में हुआ था। उनके [[पिता]] का नाम जहाँगीर एवं [[माता]] का नाम रतिमाई था। [[1915]] ई. में वे अपनी माँ के साथ [[इलाहाबाद]] में कार्यरत एक सम्बन्धी महिला के पास आ गए। इस प्रकार उनकी आरम्भिक शिक्षा-दीक्षा इलाहाबाद में हुई। इलाहाबाद उन दिनों स्वतंत्रता संग्राम की गतिविधियों का केन्द्र था। युवक फ़िरोज़ गाँधी इसके प्रभाव में आए और नेहरू परिवार से भी उनका सम्पर्क हुआ। उन्होंने [[1928]] ई. में [[साइमन कमीशन]] के बहिष्कार में भाग लिया तथा [[1930]]-[[1932]] के आन्दोलन में जेल की सज़ा भोगी। फ़िरोज़ गाँधी [[1935]] में  आगे के अध्ययन के लिए लंदन गए और उन्होंने ‘स्कूल ऑफ़ इकोनोमिक्स’ से अंतर्राष्ट्रीय क़ानून में स्नातक की डिग्री प्राप्त की। &lt;br /&gt;
====विवाह====&lt;br /&gt;
फ़िरोज़ गाँधी ने क्षय रोग से पीड़ित अपनी पत्नी इंदिरा गाँधी की माँ [[कमला नेहरू]] की [[भारत]] और [[जर्मनी]] के चिकित्सालयों में बड़ी सेवा की। उसी समय उनका और इंदिरा का सम्पर्क हुआ और [[मार्च]], [[1942]] ई. में इलाहाबाद में दोनों का [[विवाह]] हो गया।&lt;br /&gt;
==राजनीति सफ़र==&lt;br /&gt;
अगस्त, 1942 में ‘भारत छोड़ो आन्दोलन’ में फ़िरोज़ गांधी कुछ समय तक भूमिगत रहने के बाद गिरफ़्तार कर लिए गए। रिहा होने के बाद [[1946]] में उन्होंने [[लखनऊ]] के दैनिक पत्र ‘नेशनल हेराल्ड’ के प्रबन्ध निदेशक का पद सम्भाला। [[1952]] के प्रथम आम चुनाव में वे लोकसभा के सदस्य चुने गए। इसके बाद उन्होंने लखनऊ छोड़ दिया। कुछ वर्ष वे और इंदिरा, [[नेहरू जी]] के साथ रहे। इंदिरा जी का अधिकांश समय प्रधानमंत्री पिता की देख-रेख में बीतता था। [[1956]] में फ़िरोज़ गांधी ने प्रधानमंत्री निवास में रहना छोड़ दिया और वे सांसद के साधारण मकान में अकेले ही रहने लगे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[1957]] में वे पुन: लोकसभा के सदस्य निर्वाचित हुए। इस बार उन्होंने संसद में भ्रष्टाचार के कई मामले उठाए। इन्हीं के कारण वित्त मंत्री टी. टी. कृष्णमाचारी को अपने पद से हटना पड़ा। वे नेहरू परिवार से अपने सम्बन्धों की परवाह किए बिना प्रधानमंत्री की कई नीतियों, विशेषत: औद्योगिक नीतियों की कटु आलोचना करते थे। वे बड़े लोकप्रिय सांसद थे, पर निजी जीवन में अन्तिम वर्षों में बहुत एकाकी हो गए थे। उनके दोनों पुत्र [[राजीव गाँधी]] और संजय गाँधी भी अपनी माँ के साथ प्रधानमंत्री निवास में ही रहते थे।&lt;br /&gt;
==मृत्यु==&lt;br /&gt;
फ़िरोज़ गाँधी को [[1960]] में दिल का दौरा पड़ा। इंदिरा जी उस समय महिला सम्मेलन में भाग लेने के लिए [[केरल]] गई थीं। सूचना मिलते ही वे तुरन्त दिल्ली आई और 8 सितम्बर, 1960 ई. को फ़िरोज़ गाँधी का देहान्त हो गया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{प्रचार}}&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=|प्रारम्भिक=प्रारम्भिक2 |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
{{संदर्भ ग्रंथ}}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{स्वतन्त्रता सेनानी}}&lt;br /&gt;
{{नेहरू परिवार}}&lt;br /&gt;
[[Category:स्वतन्त्रता सेनानी]][[Category:लोकसभा सांसद]][[Category:नेहरू परिवार]][[Category:राजनीति कोश]][[Category:प्रसिद्ध व्यक्तित्व कोश]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>प्रियंका चतुर्वेदी</name></author>
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		<title>फिरोज गाँधी</title>
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		<title>फ़ीरोज़ गांधी</title>
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		<title>फीरोज गाँधी</title>
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		<updated>2011-05-25T06:09:09Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;प्रियंका चतुर्वेदी: फ़ीरोज़ गाँधी को अनुप्रेषित&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
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		<title>फ़िरोज़ गाँधी</title>
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		<updated>2011-05-25T06:08:04Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;प्रियंका चतुर्वेदी: फ़ीरोज़ गाँधी को अनुप्रेषित&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;#REDIRECT[[फ़ीरोज़ गाँधी]]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>प्रियंका चतुर्वेदी</name></author>
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		<title>फ़ीरोज़ गाँधी</title>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;प्रियंका चतुर्वेदी: '{{tocright}} फ़िरोज़ गाँधी (जन्म- 12 सितम्बर, 1912 ई., मुम्बई; ...' के साथ नया पन्ना बनाया&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{tocright}}&lt;br /&gt;
फ़िरोज़ गाँधी (जन्म- [[12 सितम्बर]], [[1912]] ई., [[मुम्बई]]; मृत्यु- [[8 सितम्बर]], [[1960]] ई., [[दिल्ली]])  स्वतंत्रता सेनानी और [[लोकसभा]] के प्रभावशाली सदस्य थे। फ़िरोज़ गाँधी [[भारत]] की  प्रथम महिला [[प्रधानमंत्री]] [[इंदिरा गाँधी]] के पति थे।&lt;br /&gt;
==जीवन परिचय==&lt;br /&gt;
स्वतंत्रता सेनानी फ़िरोज़ गाँधी का जन्म 12 सितम्बर, 1912 ई. को मुम्बई के एक अस्पताल में पारसी परिवार में हुआ था। [[1915]] ई. में वे अपनी माँ के साथ [[इलाहाबाद]] में कार्यरत एक सम्बन्धी महिला के पास आ गए। इस प्रकार उनकी आरम्भिक शिक्षा-दीक्षा इलाहाबाद में हुई। इलाहाबाद उन दिनों स्वतंत्रता संग्राम की गतिविधियों का केन्द्र था। युवक फ़िरोज़ गाँधी इसके प्रभाव में आए और नेहरू परिवार से भी उनका सम्पर्क हुआ। उन्होंने [[1928]] ई. में [[साइमन कमीशन]] के बहिष्कार में भाग लिया तथा [[1930]]-[[1932]] के आन्दोलन में जेल की सज़ा भोगी। फ़िरोज़ गाँधी [[1935]] में  आगे के अध्ययन के लिए लंदन गए और उन्होंने ‘स्कूल ऑफ़ इकोनोमिक्स’ से अंतर्राष्ट्रीय क़ानून में स्नातक की डिग्री प्राप्त की। &lt;br /&gt;
====विवाह====&lt;br /&gt;
फ़िरोज़ गाँधी ने क्षय रोग से पीड़ित अपनी पत्नी इंदिरा गाँधी की माँ [[कमला नेहरू]] की [[भारत]] और [[जर्मनी]] के चिकित्सालयों में बड़ी सेवा की। उसी समय उनका और इंदिरा का सम्पर्क हुआ और [[मार्च]], [[1942]] ई. में इलाहाबाद में दोनों का [[विवाह]] हो गया।&lt;br /&gt;
==राजनीति सफ़र==&lt;br /&gt;
अगस्त, 1942 में ‘भारत छोड़ो आन्दोलन’ में फ़िरोज़ गांधी कुछ समय तक भूमिगत रहने के बाद गिरफ़्तार कर लिए गए। रिहा होने के बाद [[1946]] में उन्होंने [[लखनऊ]] के दैनिक पत्र ‘नेशनल हेराल्ड’ के प्रबन्ध निदेशक का पद सम्भाला। [[1952]] के प्रथम आम चुनाव में वे लोकसभा के सदस्य चुने गए। इसके बाद उन्होंने लखनऊ छोड़ दिया। कुछ वर्ष वे और इंदिरा, [[नेहरू जी]] के साथ रहे। इंदिरा जी का अधिकांश समय प्रधानमंत्री पिता की देख-रेख में बीतता था। [[1956]] में फ़िरोज़ गांधी ने प्रधानमंत्री निवास में रहना छोड़ दिया और वे सांसद के साधारण मकान में अकेले ही रहने लगे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[1957]] में वे पुन: लोकसभा के सदस्य निर्वाचित हुए। इस बार उन्होंने संसद में भ्रष्टाचार के कई मामले उठाए। इन्हीं के कारण वित्त मंत्री टी. टी. कृष्णमाचारी को अपने पद से हटना पड़ा। वे नेहरू परिवार से अपने सम्बन्धों की परवाह किए बिना प्रधानमंत्री की कई नीतियों, विशेषत: औद्योगिक नीतियों की कटु आलोचना करते थे। वे बड़े लोकप्रिय सांसद थे, पर निजी जीवन में अन्तिम वर्षों में बहुत एकाकी हो गए थे। उनके दोनों पुत्र [[राजीव गाँधी]] और संजय गाँधी भी अपनी माँ के साथ प्रधानमंत्री निवास में ही रहते थे।&lt;br /&gt;
==मृत्यु==&lt;br /&gt;
फ़िरोज़ गाँधी को [[1960]] में दिल का दौरा पड़ा। इंदिरा जी उस समय महिला सम्मेलन में भाग लेने के लिए [[केरल]] गई थीं। सूचना मिलते ही वे तुरन्त दिल्ली आई और 8 सितम्बर, 1960 ई. को फ़िरोज़ गाँधी का देहान्त हो गया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{प्रचार}}&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=|प्रारम्भिक=प्रारम्भिक2 |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
{{संदर्भ ग्रंथ}}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{स्वतन्त्रता सेनानी}}&lt;br /&gt;
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__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>प्रियंका चतुर्वेदी</name></author>
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		<title>25 मई</title>
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		<updated>2011-05-25T05:23:12Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;प्रियंका चतुर्वेदी: /* 25 मई को हुए निधन */&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{कैलंडर}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[ग्रेगोरी कैलंडर]] के अनुसार 25 मई [[वर्ष]] का 145 वाँ ([[लीप वर्ष]] में यह 146 वाँ) दिन है। साल में अभी और 220 दिन शेष हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==25 मई की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ==&lt;br /&gt;
* [[2008]]- [[कर्नाटक]] विधान सभा के 224 सीटों में से 110 सीट जीत कर भाजपा दक्षिण के लिए किसी राज्य में पहली बार सरकार बनाने में सफल रही।&lt;br /&gt;
* [[2010]]- भारतीय मूल की 59 वर्षीय कमला प्रसाद बिसेसर निवर्तमान प्रधानमंत्री पैट्रिक मैनिंग को पराजित कर त्रिनिदाद और टोबेगो की पहली महिला प्रधानमंत्री निर्वाचित हुईं।&lt;br /&gt;
==25 मई को जन्मे व्यक्ति==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==25 मई को हुए निधन==&lt;br /&gt;
* [[2005]]- [[सुनील दत्त]] - भारतीय [[अभिनेता]]&lt;br /&gt;
* [[2010]]- तपन चट्टोपाध्यय, बंगला अभिनेता गोपी गाइन बाघा बाइन&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==25 मई के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
{{कैलंडर बाहरी कड़ियाँ}}&lt;br /&gt;
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&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{पुनरीक्षण}}&lt;br /&gt;
कुल ऐसा समूह है जिसके सदस्यों में रक्तसंबंध हो, जो एक परंपरागत वंशानुक्रम बंधन को स्वीकार करते हों, भले ही ये मातृरेखीय हों या पितृरेखीय, पर जो वास्तविक पीढ़ियों के संबंधों को बतलाने में हमेशा असमर्थ रहें। रक्तसंबंधी पीढ़ियों के संबंध को स्पष्ट रूप से बतला सकने वाले समूह को वंश कहा जाता है। मर्डाक ने कुल के लिए [[अंग्रेज़ी]] में 'सिब' शब्द का प्रयोग किया है। मर्डाक के पहले अन्य मानवशास्त्रियों ने 'सिब' का अन्य अर्थों में भी प्रयोग किया था। वंश की तुलना में कुल शब्द की अस्पष्टता मर्डाक के 'सिब' शब्द के प्रयोग के अनुरूप ही हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
एक कुल के व्यक्ति [[पिता]] से अपनी अनुगतता बतलाते हैं तो ऐसे समूह को [[पितृकुल]] कहा जाता है। एक कुल के व्यक्ति [[माता]] के कुल से अपनी अनुगतता बतलाते हैं तो ऐसे समूह को [[मातृकुल]] कहा जाता है। इसलिए ये दोनों समूह क्रमश: पितृरेखीय और मातृरेखीय कहलाते हैं। पितृकुलों में संपति के उत्तराधिकारी के नियम के अनुसार पिता से [[पुत्र]] को संपति का उत्तराधिकार मिलता है।&lt;br /&gt;
==बहिर्विवाह==&lt;br /&gt;
अन्य रक्तसंबंधी एकरेखीय समूहों की भाँति कुल में भी बहिर्विवाह के नियम का पालन होता हैं। सामान्य रूप से एक कुल में भी अनेक वंश होते हैं, इसीलिये कुल के बाहर [[विवाह]] करने का तात्पर्य वंश के बाहर भी विवाह करना है। कुछ समाजों में वंश होते हैं पर कुल नहीं होते और कुछ समाजों में वंश और कुल के बीच में उपकुल भी होते हैं।&lt;br /&gt;
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==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
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		<title>गुरु गुड़ रहा</title>
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&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{पुनरीक्षण}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;blockquote&amp;gt;{{blue}}गुरु गुड़ रहा, चेला शक्कर हो गया{{blueclose}}&amp;lt;/blockquote&amp;gt; &lt;br /&gt;
*यह  [[कहावत लोकोक्ति मुहावरे|लोकोक्ति]]  एक प्रचलित कहावत है। &lt;br /&gt;
*इसका अर्थ- छोटे–बड़ों से आगे बढ़ जाते हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{प्रचार}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
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कुल ऐसा समूह है जिसके सदस्यों में रक्तसंबंध हो, जो एक परंपरागत वंशानुक्रम बंधन को स्वीकार करते हों, भले ही ये मातृरेखीय हों या पितृरेखीय, पर जो वास्तविक पीढ़ियों के संबंधों को बतलाने में हमेशा असमर्थ रहें। एक कुल के व्यक्ति [[माता]] के कुल से अपनी अनुगतता बतलाते हैं तो ऐसे समूह का मातृकुल कहा जाता है।रक्तसंबंधी पीढ़ियों के संबंध को स्पष्ट रूप से बतला सकने वाले समूह को वंश कहा जाता है। मर्डाक ने कुल के लिए [[अंग्रेज़ी]] में 'सिब' शब्द का प्रयोग किया है। मर्डाक के पहले अन्य मानवशास्त्रियों ने सिब का अन्य अर्थों में भी प्रयोग किया था। वंश की तुलना में कुल शब्द की अस्पष्टता मर्डाक के 'सिब' शब्द के प्रयोग के अनुरूप ही हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
एक कुल के व्यक्ति [[पिता]] से अपनी अनुगतता बतलाते हैं तो ऐसे समूह को पितृकुल कहा जाता है। इसलिए ये दोनों समूह क्रमश: पितृरेखीय और मातृरेखीय कहलाते हैं। पितृकुलों में संपति के उत्तराधिकारी के नियम के अनुसार पिता से [[पुत्र]] को संपति का उत्तराधिकार मिलता है।&lt;br /&gt;
==बहिर्विवाह==&lt;br /&gt;
अन्य रक्तसंबंधी एकरेखीय समूहों की भाँति कुल में भी बहिर्विवाह के नियम का पालन होता हैं। सामान्य रूप से एक कुल में भी अनेक वंश होते हैं, इसीलिये कुल के बाहर [[विवाह]] करने का तात्पर्य वंश के बाहर भी विवाह करना है। कुछ समाजों में वंश होते हैं पर कुल नहीं होते और कुछ समाजों में वंश और कुल के बीच में उपकुल भी होते हैं।&lt;br /&gt;
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&lt;div&gt;{{पुनरीक्षण}}&lt;br /&gt;
एक [[कुल]] के व्यक्ति [[पिता]] से अपनी अनुगतता बतलाते हैं तो ऐसे समूह को पितृकुल कहा जाता है। पितृकुलों में संपति के उत्तराधिकारी के नियम के अनुसार पिता से [[पुत्र]] को संपति का उत्तराधिकार मिलता है।&lt;br /&gt;
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एक [[कुल]] के व्यक्ति [[पिता]] से अपनी अनुगतता बतलाते हैं तो ऐसे समूह को पितृकुल कहा जाता है। पितृकुलों में संपति के उत्तराधिकारी के नियम के अनुसार पिता से [[पुत्र]] को संपति का उत्तराधिकार मिलता है।&lt;br /&gt;
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&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{पुनरीक्षण}}&lt;br /&gt;
कुल ऐसा समूह है जिसके सदस्यों में रक्तसंबंध हो, जो एक परंपरागत वंशानुक्रम बंधन को स्वीकार करते हों, भले ही ये मातृरेखीय हों या पितृरेखीय, पर जो वास्तविक पीढ़ियों के संबंधों को बतलाने में हमेशा असमर्थ रहें। एक कुल के व्यक्ति [[माता]] के कुल से अपनी अनुगतता बतलाते हैं तो ऐसे समूह का मातृकुल कहा जाता है।रक्तसंबंधी पीढ़ियों के संबंध को स्पष्ट रूप से बतला सकने वाले समूह को वंश कहा जाता है। मर्डाक ने कुल के लिए [[अंग्रेज़ी]] में 'सिब' शब्द का प्रयोग किया है। मर्डाक के पहले अन्य मानवशास्त्रियों ने सिब का अन्य अर्थों में भी प्रयोग किया था। वंश की तुलना में कुल शब्द की अस्पष्टता मर्डाक के 'सिब' शब्द के प्रयोग के अनुरूप ही हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
एक कुल के व्यक्ति [[पिता]] से अपनी अनुगतता बतलाते हैं तो ऐसे समूह को पितृकुल कहा जाता है। इसलिए ये दोनों समूह क्रमश: पितृरेखीय और मातृरेखीय कहलाते हैं। पितृकुलों में संपति के उत्तराधिकारी के नियम के अनुसार पिता से [[पुत्र]] को संपति का उत्तराधिकार मिलता है।&lt;br /&gt;
==बहिर्विवाह==&lt;br /&gt;
अन्य रक्तसंबंधी एकरेखीय समूहों की भाँति कुल में भी बहिर्विवाह के नियम का पालन होता हैं। सामान्य रूप से एक कुल में भी अनेक वंश होते हैं, इसीलिये कुल के बाहर [[विवाह]] करने का तात्पर्य वंश के बाहर भी विवाह करना है। कुछ समाजों में वंश होते हैं पर कुल नहीं होते और कुछ समाजों में वंश और कुल के बीच में उपकुल भी होते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{प्रचार}}&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=|प्रारम्भिक=प्रारम्भिक1 |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
{{संदर्भ ग्रंथ}}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
[[Category:नया पन्ना]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>प्रियंका चतुर्वेदी</name></author>
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		<title>जगबंधु बख्शी</title>
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		<updated>2011-05-19T12:53:03Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;प्रियंका चतुर्वेदी: Adding category :Category:स्वतन्त्रता सेनानी (को हटा दिया गया हैं।)&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{पुनरीक्षण}}&lt;br /&gt;
जगबंधु बख्शी का पूरा नाम '''जगबंधु विद्याशर महापात्र''' था। खुर्दा ([[उड़ीसा]]) के राजा की ओर से उनके पूर्वजों को बख्शी की उपाधि मिली थी। जगबंधु के जन्म का निश्चित समय ज्ञात नहीं है। [[अंग्रेज़|अंग्रेज़ों]] के उड़ीसा पर अधिकार के विरोध में 1817 में जो सशस्त्र आंदोलन हुआ उसके नेता के रूप में जगबंधु का नाम सामने आया। 1803 में [[मराठा|मराठों]] से कटक लेने के बाद अंग्रेज़ों ने खुर्दा के राजा को जेल में डाल दिया और उनके दीवान को फाँसी दे दी। जगबंधु की भी एक अपनी छोटी-सी रियासत थी। अंग्रेज़ों ने उसे भी छीन लिया। उन पर [[पिंडारी|पिंडारियों]] के साथ मिलकर विद्रोह करने का अभियोग लगाया था। इस पर जगबंधु ने बलपूर्वक अंग्रेज़ों को उड़ीसा से निकाल देने का निश्चय किया जिससे खुर्दा के राजा को फिर गद्दी पर बिठाया जा सके। [[मार्च]], 1817 में जब उन्होंने अपना संघर्ष आरंभ किया, उनके साथ लगभग 400 व्यक्ति थे। शीघ्र ही उनके समर्थकों की संख्या 5 हजार तक पहुँच गई। उन्होंने [[पुरी]] तथा कुछ अन्य स्थानों पर अधिकार करके वहाँ अंग्रेज़ों की सत्ता समाप्त कर दी। लेकिन विदेशियों की संगठित शक्ति के सामने वे अधिक दिन टिक नहीं सके और यह ‘पाइक विद्रोह’ दबा दिया गया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जगबंधु अपने बचे सहयोगियों के साथ जंगलों में चले गए और वहाँ से समय-समय पर विदेशियों पर आक्रमण करते रहे। इससे तंग आकर अंग्रेज़ों ने उन्हें पेंशन देकर शांति के साथ [[कटक]] में रहने के लिए आमंत्रित किया। 3 वर्ष तक वे इस आमंत्रण की उपेक्षा करते रहे। अंत में अपने साथियों की परेशानियाँ देखकर जंगल से बाहर आ गए। यद्यपि उनका विद्रोह सफल नहीं हो सका किन्तु इससे सिद्ध हो गया कि जगबंधु में कितनी संगठन-क्षमता थी। उन्होंने निकटवर्ती रियासतों से ही नहीं, [[नागपुर]] के राजा तक से सहायता मांगी थी। कटक में पैर रखते ही इस विद्रोह ने अंग्रेज़ों को भी यह चेतावनी दे दी कि जनता की उचित मांगों की उपेक्षा करना उनके लिए खतरे से खाली नहीं है। [[24 जनवरी]], 1829 ई. को जगबंधु का देहांत हो गया। [[भुवनेश्वर]] का ‘जगबंधु विद्याधर कॉलेज’ उनकी याद दिलाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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{{प्रचार}}&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=|प्रारम्भिक=प्रारम्भिक1|माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
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==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{स्वतन्त्रता सेनानी}}&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
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[[Category:स्वतन्त्रता सेनानी]]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>प्रियंका चतुर्वेदी</name></author>
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		<title>जगबंधु बख्शी</title>
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		<updated>2011-05-19T12:52:27Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;प्रियंका चतुर्वेदी: :श्रेणी:नया पन्ना (को हटा दिया गया हैं।)&lt;/p&gt;
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जगबंधु बख्शी का पूरा नाम '''जगबंधु विद्याशर महापात्र''' था। खुर्दा ([[उड़ीसा]]) के राजा की ओर से उनके पूर्वजों को बख्शी की उपाधि मिली थी। जगबंधु के जन्म का निश्चित समय ज्ञात नहीं है। [[अंग्रेज़|अंग्रेज़ों]] के उड़ीसा पर अधिकार के विरोध में 1817 में जो सशस्त्र आंदोलन हुआ उसके नेता के रूप में जगबंधु का नाम सामने आया। 1803 में [[मराठा|मराठों]] से कटक लेने के बाद अंग्रेज़ों ने खुर्दा के राजा को जेल में डाल दिया और उनके दीवान को फाँसी दे दी। जगबंधु की भी एक अपनी छोटी-सी रियासत थी। अंग्रेज़ों ने उसे भी छीन लिया। उन पर [[पिंडारी|पिंडारियों]] के साथ मिलकर विद्रोह करने का अभियोग लगाया था। इस पर जगबंधु ने बलपूर्वक अंग्रेज़ों को उड़ीसा से निकाल देने का निश्चय किया जिससे खुर्दा के राजा को फिर गद्दी पर बिठाया जा सके। [[मार्च]], 1817 में जब उन्होंने अपना संघर्ष आरंभ किया, उनके साथ लगभग 400 व्यक्ति थे। शीघ्र ही उनके समर्थकों की संख्या 5 हजार तक पहुँच गई। उन्होंने [[पुरी]] तथा कुछ अन्य स्थानों पर अधिकार करके वहाँ अंग्रेज़ों की सत्ता समाप्त कर दी। लेकिन विदेशियों की संगठित शक्ति के सामने वे अधिक दिन टिक नहीं सके और यह ‘पाइक विद्रोह’ दबा दिया गया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जगबंधु अपने बचे सहयोगियों के साथ जंगलों में चले गए और वहाँ से समय-समय पर विदेशियों पर आक्रमण करते रहे। इससे तंग आकर अंग्रेज़ों ने उन्हें पेंशन देकर शांति के साथ [[कटक]] में रहने के लिए आमंत्रित किया। 3 वर्ष तक वे इस आमंत्रण की उपेक्षा करते रहे। अंत में अपने साथियों की परेशानियाँ देखकर जंगल से बाहर आ गए। यद्यपि उनका विद्रोह सफल नहीं हो सका किन्तु इससे सिद्ध हो गया कि जगबंधु में कितनी संगठन-क्षमता थी। उन्होंने निकटवर्ती रियासतों से ही नहीं, [[नागपुर]] के राजा तक से सहायता मांगी थी। कटक में पैर रखते ही इस विद्रोह ने अंग्रेज़ों को भी यह चेतावनी दे दी कि जनता की उचित मांगों की उपेक्षा करना उनके लिए खतरे से खाली नहीं है। [[24 जनवरी]], 1829 ई. को जगबंधु का देहांत हो गया। [[भुवनेश्वर]] का ‘जगबंधु विद्याधर कॉलेज’ उनकी याद दिलाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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{{संदर्भ ग्रंथ}}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
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		<author><name>प्रियंका चतुर्वेदी</name></author>
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		<title>जगबंधु बख्शी</title>
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जगबंधु बख्शी का पूरा नाम '''जगबंधु विद्याशर महापात्र''' था। खुर्दा ([[उड़ीसा]]) के राजा की ओर से उनके पूर्वजों को बख्शी की उपाधि मिली थी। जगबंधु के जन्म का निश्चित समय ज्ञात नहीं है। [[अंग्रेज़|अंग्रेज़ों]] के उड़ीसा पर अधिकार के विरोध में 1817 में जो सशस्त्र आंदोलन हुआ उसके नेता के रूप में जगबंधु का नाम सामने आया। 1803 में [[मराठा|मराठों]] से कटक लेने के बाद अंग्रेज़ों ने खुर्दा के राजा को जेल में डाल दिया और उनके दीवान को फाँसी दे दी। जगबंधु की भी एक अपनी छोटी-सी रियासत थी। अंग्रेज़ों ने उसे भी छीन लिया। उन पर [[पिंडारी|पिंडारियों]] के साथ मिलकर विद्रोह करने का अभियोग लगाया था। इस पर जगबंधु ने बलपूर्वक अंग्रेज़ों को उड़ीसा से निकाल देने का निश्चय किया जिससे खुर्दा के राजा को फिर गद्दी पर बिठाया जा सके। [[मार्च]], 1817 में जब उन्होंने अपना संघर्ष आरंभ किया, उनके साथ लगभग 400 व्यक्ति थे। शीघ्र ही उनके समर्थकों की संख्या 5 हजार तक पहुँच गई। उन्होंने [[पुरी]] तथा कुछ अन्य स्थानों पर अधिकार करके वहाँ अंग्रेज़ों की सत्ता समाप्त कर दी। लेकिन विदेशियों की संगठित शक्ति के सामने वे अधिक दिन टिक नहीं सके और यह ‘पाइक विद्रोह’ दबा दिया गया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जगबंधु अपने बचे सहयोगियों के साथ जंगलों में चले गए और वहाँ से समय-समय पर विदेशियों पर आक्रमण करते रहे। इससे तंग आकर अंग्रेज़ों ने उन्हें पेंशन देकर शांति के साथ [[कटक]] में रहने के लिए आमंत्रित किया। 3 वर्ष तक वे इस आमंत्रण की उपेक्षा करते रहे। अंत में अपने साथियों की परेशानियाँ देखकर जंगल से बाहर आ गए। यद्यपि उनका विद्रोह सफल नहीं हो सका किन्तु इससे सिद्ध हो गया कि जगबंधु में कितनी संगठन-क्षमता थी। उन्होंने निकटवर्ती रियासतों से ही नहीं, [[नागपुर]] के राजा तक से सहायता मांगी थी। कटक में पैर रखते ही इस विद्रोह ने अंग्रेज़ों को भी यह चेतावनी दे दी कि जनता की उचित मांगों की उपेक्षा करना उनके लिए खतरे से खाली नहीं है। [[24 जनवरी]], 1829 ई. को जगबंधु का देहांत हो गया। [[भुवनेश्वर]] का ‘जगबंधु विद्याधर कॉलेज’ उनकी याद दिलाता है।&lt;br /&gt;
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==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
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==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
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__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>प्रियंका चतुर्वेदी</name></author>
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		<title>ऊटी</title>
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		<updated>2011-05-19T12:50:14Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;प्रियंका चतुर्वेदी: &lt;/p&gt;
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&lt;div&gt;{{tocright}}&lt;br /&gt;
ऊटी, [[तमिलनाडु]] राज्य, दक्षिण-पूर्वी [[भारत]] में स्थित है। ऊटी का पुराना नाम '''उटकमंड और उदगमंडलम''' था। यह समुद्रतल से 2,240 मीटर की ऊँचाई पर बसा हुआ है। ऊटी नीलगिरि ज़िले का प्रशासनिक मुख्यालय है और [[नीलगिरि पहाड़ियाँ|नीलगिरि पहाड़ियों]] में स्थित है। इसके चारों तरफ कई चोटियाँ हैं, जिनमें तमिलनाडु का सबसे ऊँचा क्षेत्र डोडाबेट्टा (2,637 मीटर) भी शामिल है। &lt;br /&gt;
==इतिहास==&lt;br /&gt;
अंग्रेज़ों द्वारा 1821 में स्थापित ऊटी का इस्तेमाल [[1947]] में भारत के स्वतंत्र होने तक मद्रास प्रेज़िडेंसी के ग्रीष्मकालीन सरकारी मुख्यालय के रूप में किया जाता था। प्राथमिक तौर पर यह नगर एक पर्यटक आरामगाह है।&lt;br /&gt;
==कृषि और व्यापार==&lt;br /&gt;
ऊटी [[चाय]] प्रसंस्करण और वस्त्र उद्योग के लिए प्रसिद्ध है।&lt;br /&gt;
==यातायात और परिवहन==&lt;br /&gt;
;वायु मार्ग&lt;br /&gt;
ऊटी का निकटतम हवाई अड्डा कोयंबटूर है।&lt;br /&gt;
;रेल मार्ग&lt;br /&gt;
ऊटी रेलमार्ग द्वारा अन्य शहरों से जुड़ा हुआ है। ऊटी का निकटतम रेलवे स्टेशन मुख्य जंक्शन कोयंबटूर है।&lt;br /&gt;
;सड़क मार्ग &lt;br /&gt;
ऊटी के लिए [[बंगलोर]], [[कोचीन]], [[मैसूर]], कालीकट और कोयंबटूर आदि स्थानों  से नियमित बसें उपलब्ध हैं। राज्य राजमार्ग 17 से मड्डुर और मैसूर होते हुए बांदीपुर पहुंचा जा सकता है। यहाँ से ऊटी की दूरी केवल 67 किलोमीटर है।&lt;br /&gt;
==शिक्षण संस्थान==&lt;br /&gt;
ऊटी में शैक्षणिक संस्थानों में गवर्नमेंट आर्ट्स कॉलेज, गवर्नमेंट पॉलीटेक्निक, लॉले इंस्टिट्यूट और होमियोपैथिक औषधि शोध केंद्र शामिल हैं। &lt;br /&gt;
==पर्यटन==&lt;br /&gt;
नीलगिरी यानी नीले पहाड़ की गोद में बसा हरा भरा पर्यटन स्थल ऊटी दक्षिण भारत के सबसे प्रमुख पर्वतीय स्थलों में से एक है। यह देशी विदेशी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है। शहर की भीड़भाड़ से दूर कुछ दिन आराम से छुट्टियाँ बिताने के लिए यह एक उम्दा पिकनिक स्पॉट है। ख़ूबसूरत प्राकृतिक नज़ारे, घने जंगल, झरने, पहाड़ की चोटियाँ और दूर-दूर तक फैले चाय के बाग़ान यहाँ आने वाले सैलानियों का मन मोह लेते हैं। यहाँ की जलवायु हमेशा खुशनुमा रहती है। ऊटी का नैसर्गिक सौंदर्य, धुंध से ढकी पहाड़ों की चोटियाँ, ओस से भीगी पेड़ों की पत्तियाँ और अनेक ख़ूबसूरत नज़ारों को देखकर मन प्रफुल्लित हो जाता है। पहाड़ी क्षेत्र होने के नाते यहाँ का तापमान गर्मियों में भी 25 डिग्री सेल्सियस से ज़्यादा नहीं होता।&lt;br /&gt;
==पर्यटन स्थल== &lt;br /&gt;
====बॉटनिकल गार्डन====&lt;br /&gt;
{{मुख्य|बॉटनिकल गार्डन}}&lt;br /&gt;
*यहाँ के दर्शनीय स्थलों में सबसे पहला नाम बॉटनिकल  गार्डन का आता है। &lt;br /&gt;
*यह गार्डन 22 एकड़ में फैला हुआ है और यहाँ लगभग 650 दुर्लभ किस्म के पेड़-पौधों के साथ-साथ, अद्भुत ऑर्किड, रंगबिरंगे लिली, ख़ूबसूरत झाड़ियाँ व 2000 हज़ार साल पुराने पेड़ का अवशेष देखने को मिलता है। *वनस्पति विज्ञान में रूचि रखने वालों के लिए यह एक प्रमुख स्थान है। &lt;br /&gt;
====रोज गार्डन====&lt;br /&gt;
{{मुख्य|रोज गार्डन ऊटी}}&lt;br /&gt;
*ऊटी का रोज गार्डन बहुत ख़ूबसूरत है। &lt;br /&gt;
*इस गार्डन की स्थापना [[1995]] में की गई थी। &lt;br /&gt;
====ऊटी झील====&lt;br /&gt;
{{मुख्य|ऊटी झील}}&lt;br /&gt;
*ऊटी झील को देखना अपने आप में एक अनोखा और सुखद अनुभव है। &lt;br /&gt;
*झील के चारों ओर फूलों की क्यारियों में तरह तरह के रंगबिरंगे फूल यहाँ की ख़ूबसूरती में चार चाँद लगाते हैं।&lt;br /&gt;
*झील में मोटर बोट, पैडल बोट और रो बोट्स में बोटिंग का लुत्फ भी उठाया जा सकता है। &lt;br /&gt;
====ललितकला अकादमी आर्ट गैलरी====&lt;br /&gt;
कला के शौकीन लोगों के लिए ऊटी में ललितकला अकादमी आर्ट गैलरी भी है। जो ऊटी से 2 किलोमीटर दूर स्थित है। गैलरी में भारत की विभिन्न प्रकार की पेंटिंग्स और स्कल्पचर्स मौज़ूद हैं। &lt;br /&gt;
====डोड्डाबेट्टा चोटी ==== &lt;br /&gt;
{{मुख्य|डोड्डाबेट्टा चोटी}}    &lt;br /&gt;
*डोड्डाबेट्टा चोटी ऊटी से लगभग 8 किलोमीटर दूर स्थित है। &lt;br /&gt;
*यह [[नीलगिरि पहाड़ियाँ|नीलगिरि]] की सबसे ऊँची चोटी है। &lt;br /&gt;
*इसकी ऊँचाई 2,636 मीटर है, यहाँ से पूरे इलाके का विहंगम दृश्य देखा जा सकता है। &lt;br /&gt;
====कालहट्टी जलप्रपात==== &lt;br /&gt;
कालहट्टी जलप्रपात ऊटी का एक ख़ूबसूरत दर्शनीय स्थल है। यह जलप्रपात लगभग 100 फुट ऊँचा है, यहाँ का सौंदर्य देख लिग मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। यहाँ अनेक प्रकार के पर्वतीय पक्षी भी देखे जा सकते हैं। &lt;br /&gt;
====डाल्फिंस नोज====&lt;br /&gt;
ऊटी में डाल्फिंस नोज एक ख़ूबसूरत पिकनिक स्पॉट है। डाल्फिंस नोज अपने नाम की तरह ही रोचक व रोमांच पैदा करने वाला स्थल है। यहाँ से पूरी घाटी का विहंगम दृश्य दिखाई देता है। मौसम साफ हो तो यहाँ से कोटागिरी के कैथरज फाल्स का नज़ारा भी देखा जा सकता है। यहाँ बच्चों के साथ आउटडोर पिकनिक का भरपूर आनंद लिया जा सकता है।&lt;br /&gt;
====कोटागिरी हिल====&lt;br /&gt;
कोटागिरी हिल ऊटी से 28 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। कोटागिरी हिल प्राकृतिक सुंदरता के लिए दर्शनीय स्थल है। यहाँ के चाय बागानों को देखने के लिए पर्यटक दूर-दूर से आते हैं। &lt;br /&gt;
====वाइल्ड लाइफ़ सैक्चुरी====&lt;br /&gt;
वाइल्ड लाइफ़ सैक्चुरी कोटागिरी से आगे ऊटी से 67 किलोमीटर दूर स्थित है। यहाँ दुर्लभ प्रजातियों के पशुओं को देखा जा सकता है।&lt;br /&gt;
==जनगणना==&lt;br /&gt;
[[2001]] की जनगणना के अनुसार इस शहर की जनसंख्या 93, 921 है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{प्रचार}}&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=|प्रारम्भिक=प्रारम्भिक2 |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
{{संदर्भ ग्रंथ}}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{तमिलनाडु के पर्यटन स्थल}}&lt;br /&gt;
{{तमिलनाडु के नगर}}&lt;br /&gt;
[[Category:तमिलनाडु]]&lt;br /&gt;
[[Category:तमिलनाडु के नगर]]&lt;br /&gt;
[[Category:भारत के नगर]]&lt;br /&gt;
[[Category:तमिलनाडु के पर्यटन स्थल]]&lt;br /&gt;
[[Category:पर्यटन कोश]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>प्रियंका चतुर्वेदी</name></author>
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		<title>डोड्डाबेट्टा</title>
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		<updated>2011-05-19T12:48:59Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;प्रियंका चतुर्वेदी: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{पुनरीक्षण}}&lt;br /&gt;
*डोड्डाबेट्टा चोटी, [[ऊटी]], [[तमिलनाडु]] से लगभग 8 किलोमीटर दूर स्थित है। &lt;br /&gt;
*यह [[नीलगिरि पहाड़ियाँ|नीलगिरि]] की सबसे ऊँची चोटी है। &lt;br /&gt;
*इसकी ऊँचाई 2,636 मीटर है, यहाँ से पूरे इलाके का विहंगम दृश्य देखा जा सकता है। &lt;br /&gt;
*इस चोटी से न सिर्फ कोयंबटूर बल्कि [[मैसूर]] शहर का नज़ारा भी देखा जा सकता है। &lt;br /&gt;
*यहाँ से घाटी का नज़ारा अद्भुत दिखाई पड़ता है। &lt;br /&gt;
*लोगों का कहना है कि जब मौसम साफ होता है तब यहाँ से दूर के इलाके भी दिखाई देते हैं।&lt;br /&gt;
{{प्रचार}}&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=आधार1|प्रारम्भिक= |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
{{संदर्भ ग्रंथ}}&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{तमिलनाडु के पर्यटन स्थल}}&lt;br /&gt;
[[Category:तमिलनाडु]]&lt;br /&gt;
[[Category:तमिलनाडु के पर्यटन स्थल]]&lt;br /&gt;
[[Category:पर्यटन कोश]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>प्रियंका चतुर्वेदी</name></author>
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		<title>ऊटी झील</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%8A%E0%A4%9F%E0%A5%80_%E0%A4%9D%E0%A5%80%E0%A4%B2&amp;diff=164541"/>
		<updated>2011-05-19T12:48:52Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;प्रियंका चतुर्वेदी: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{पुनरीक्षण}}&lt;br /&gt;
[[चित्र:Ooty-Lake.jpg|thumb|250px|ऊटी झील, [[ऊटी]]&amp;lt;br /&amp;gt;Ooty Lake]]&lt;br /&gt;
*ऊटी झील, [[ऊटी]], [[तमिलनाडु]] राज्य में स्थित है। &lt;br /&gt;
*इस झील का निर्माण यहाँ के पहले कलैक्टर जॉन सुविलिअन ने 1825 में करवाया था। &lt;br /&gt;
*यह झील 2.5 किलोमीटर लंबी है। &lt;br /&gt;
*झील के चारों ओर [[भारत के फूल|फूलों]] की क्यारियों में तरह-तरह के रंगबिरंगे फूल यहाँ की ख़ूबसूरती में चार चाँद लगाते हैं। &lt;br /&gt;
*यहाँ आने वाले पर्यटक बोटिंग और [[मछली]] पकड़ने का आनंद ले सकते हैं। &lt;br /&gt;
*प्रतिवर्ष 12 लाख पर्यटक ऊटी झील देखने के लिए आते हैं।&lt;br /&gt;
*झील में मोटर बोट, पैडल बोट और रो बोट्स में बोटिंग का लुत्फ भी उठाया जा सकता है।&lt;br /&gt;
*गर्मी के मौसम में यहाँ दो दिवसीय बोट रेस का आयोजन किया जाता है।&lt;br /&gt;
*ऊँटी झील के पूर्वी किनारों पर बच्चों का पार्क है जहाँ बच्चों के मनोरंजन के लिए बहुत सी चीजें हैं। &lt;br /&gt;
;बोटिंग का समय&lt;br /&gt;
प्रात:- '''8:00''' से शाम- '''6:00''' बजे तक।&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
{{प्रचार}}&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=|प्रारम्भिक=प्रारम्भिक1 |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
{{संदर्भ ग्रंथ}}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{तमिलनाडु के पर्यटन स्थल}}&lt;br /&gt;
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[[Category:तमिलनाडु के पर्यटन स्थल]]&lt;br /&gt;
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		<author><name>प्रियंका चतुर्वेदी</name></author>
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		<title>बॉटनिकल गार्डन</title>
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		<updated>2011-05-19T12:48:39Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;प्रियंका चतुर्वेदी: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{पुनरीक्षण}}&lt;br /&gt;
*बॉटनिकल गार्डन [[ऊटी]], [[तमिलनाडु]] राज्य का प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है।&lt;br /&gt;
*ऊटी के दर्शनीय स्थलों में सबसे पहला नाम बॉटनिकल गार्डन का आता है।  &lt;br /&gt;
*बॉटनिकल गार्डन की स्थापना 1847 में की गई थी। &lt;br /&gt;
*यह गार्डन 22 हेक्टेयर भूमि में फैला हुआ है।  &lt;br /&gt;
*इस ख़ूबसूरत गार्डन की देखरख बागवानी विभाग करता है। &lt;br /&gt;
*यहाँ एक पेड़ के जीवाश्म संभाल कर रखे गए हैं जिसके बारे में माना जाता है, कि यह 20 मिलियन वर्ष पुराना है। &lt;br /&gt;
*इस गार्डन में पेड़-पौधों की 650 से ज़्यादा प्रजातियाँ, अद्भुत ऑर्किड, रंगबिरंगे लिली, ख़ूबसूरत झाड़ियाँ व 2000 हज़ार साल पुराने पेड़ का अवशेष देखने को मिलता है।&lt;br /&gt;
*प्रकृति प्रेमियों के बीच यह गार्डन बहुत लोकप्रिय है। &lt;br /&gt;
*बॉटनिकल गार्डन में [[मई]] के महीने में ग्रीष्मोत्सव मनाया जाता है। &lt;br /&gt;
*इस महोत्सव में [[भारत के फूल|फूलों]] की प्रदर्शनी और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिसमें स्थानीय प्रसिद्ध कलाकार भाग लेते हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
;बोटिंग का समय&lt;br /&gt;
प्रात:- '''8:30''' से शाम- '''6:30''' बजे तक।&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
{{प्रचार}}&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=|प्रारम्भिक=प्रारम्भिक1 |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
{{संदर्भ ग्रंथ}}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{तमिलनाडु के पर्यटन स्थल}}&lt;br /&gt;
[[Category:तमिलनाडु]]&lt;br /&gt;
[[Category:तमिलनाडु के पर्यटन स्थल]]&lt;br /&gt;
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		<title>रोज़ गार्डन ऊटी</title>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;प्रियंका चतुर्वेदी: '{{पुनरीक्षण}} *रोज गार्डन, ऊटी, तमिलनाडु राज्य का एक प...' के साथ नया पन्ना बनाया&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{पुनरीक्षण}}&lt;br /&gt;
*रोज गार्डन, ऊटी, [[तमिलनाडु]] राज्य का एक प्रमुख पर्यटन स्थल है।&lt;br /&gt;
*रोज गार्डन बहुत ख़ूबसूरत है। &lt;br /&gt;
*इस गार्डन की स्थापना [[1995]] में की गई थी। &lt;br /&gt;
*यह गार्डन 10 एकड़ में फैला हुआ है। &lt;br /&gt;
*यहाँ लगभग 200 किस्म के [[गुलाब|गुलाबों]] का संग्रह है। &lt;br /&gt;
*ऊटी रेलवे स्टेशन के पास स्थित यह गार्डन हर समय गुलाब की खुशबू से सरोबर रहता है।&lt;br /&gt;
{{प्रचार}}&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=|प्रारम्भिक= प्रारम्भिक1|माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
{{संदर्भ ग्रंथ}}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
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[[Category:तमिलनाडु के पर्यटन स्थल]]&lt;br /&gt;
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		<title>जगबंधु बख्शी</title>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;प्रियंका चतुर्वेदी: '{{पुनरीक्षण}} जगबंधु बख्शी का पूरा नाम '''जगबंधु विद्या...' के साथ नया पन्ना बनाया&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{पुनरीक्षण}}&lt;br /&gt;
जगबंधु बख्शी का पूरा नाम '''जगबंधु विद्याशर महापात्र''' था। खुर्दा ([[उड़ीसा]]) के राजा की ओर से उनके पूर्वजों को बख्शी की उपाधि मिली थी। जगबंधु के जन्म का निश्चित समय ज्ञात नहीं है। [[अंग्रेज़|अंग्रेज़ों]] के उड़ीसा पर अधिकार के विरोध में 1817 में जो सशस्त्र आंदोलन हुआ उसके नेता के रूप में जगबंधु का नाम सामने आया। 1803 में [[मराठा|मराठों]] से कटक लेने के बाद अंग्रेज़ों ने खुर्दा के राजा को जेल में डाल दिया और उनके दीवान को फाँसी दे दी। जगबंधु की भी एक अपनी छोटी-सी रियासत थी। अंग्रेज़ों ने उसे भी छीन लिया। उन पर [[पिंडारी|पिंडारियों]] के साथ मिलकर विद्रोह करने का अभियोग लगाया था। इस पर जगबंधु ने बलपूर्वक अंग्रेज़ों को उड़ीसा से निकाल देने का निश्चय किया जिससे खुर्दा के राजा को फिर गद्दी पर बिठाया जा सके। [[मार्च]], 1817 में जब उन्होंने अपना संघर्ष आरंभ किया, उनके साथ लगभग 400 व्यक्ति थे। शीघ्र ही उनके समर्थकों की संख्या 5 हजार तक पहुँच गई। उन्होंने [[पुरी]] तथा कुछ अन्य स्थानों पर अधिकार करके वहाँ अंग्रेज़ों की सत्ता समाप्त कर दी। लेकिन विदेशियों की संगठित शक्ति के सामने वे अधिक दिन टिक नहीं सके और यह ‘पाइक विद्रोह’ दबा दिया गया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जगबंधु अपने बचे सहयोगियों के साथ जंगलों में चले गए और वहाँ से समय-समय पर विदेशियों पर आक्रमण करते रहे। इससे तंग आकर अंग्रेज़ों ने उन्हें पेंशन देकर शांति के साथ [[कटक]] में रहने के लिए आमंत्रित किया। 3 वर्ष तक वे इस आमंत्रण की उपेक्षा करते रहे। अंत में अपने साथियों की परेशानियाँ देखकर जंगल से बाहर आ गए। यद्यपि उनका विद्रोह सफल नहीं हो सका किन्तु इससे सिद्ध हो गया कि जगबंधु में कितनी संगठन-क्षमता थी। उन्होंने निकटवर्ती रियासतों से ही नहीं, [[नागपुर]] के राजा तक से सहायता मांगी थी। कटक में पैर रखते ही इस विद्रोह ने अंग्रेज़ों को भी यह चेतावनी दे दी कि जनता की उचित मांगों की उपेक्षा करना उनके लिए खतरे से खाली नहीं है। [[24 जनवरी]], [[1829]] ई. को जगबंधु का देहांत हो गया। [[भुवनेश्वर]] का ‘जगबंधु विद्याधर कॉलेज’ उनकी याद दिलाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{प्रचार}}&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=|प्रारम्भिक=प्रारम्भिक1|माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
{{संदर्भ ग्रंथ}}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
[[Category:नया पन्ना]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>प्रियंका चतुर्वेदी</name></author>
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		<title>ऊटी</title>
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		<updated>2011-05-19T12:09:15Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;प्रियंका चतुर्वेदी: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{tocright}}&lt;br /&gt;
ऊटी, [[तमिलनाडु]] राज्य, दक्षिण-पूर्वी [[भारत]] में स्थित है। ऊटी का पुराना नाम '''उटकमंड और उदगमंडलम''' था। यह समुद्रतल से 2,240 मीटर की ऊँचाई पर बसा हुआ है। ऊटी नीलगिरि ज़िले का प्रशासनिक मुख्यालय है और [[नीलगिरि पहाड़ियाँ|नीलगिरि पहाड़ियों]] में स्थित है। इसके चारों तरफ कई चोटियाँ हैं, जिनमें तमिलनाडु का सबसे ऊँचा क्षेत्र डोडाबेट्टा (2,637 मीटर) भी शामिल है। &lt;br /&gt;
==इतिहास==&lt;br /&gt;
अंग्रेज़ों द्वारा 1821 में स्थापित ऊटी का इस्तेमाल [[1947]] में भारत के स्वतंत्र होने तक मद्रास प्रेज़िडेंसी के ग्रीष्मकालीन सरकारी मुख्यालय के रूप में किया जाता था। प्राथमिक तौर पर यह नगर एक पर्यटक आरामगाह है।&lt;br /&gt;
==कृषि और व्यापार==&lt;br /&gt;
ऊटी [[चाय]] प्रसंस्करण और वस्त्र उद्योग के लिए प्रसिद्ध है।&lt;br /&gt;
==यातायात और परिवहन==&lt;br /&gt;
;वायु मार्ग&lt;br /&gt;
ऊटी का निकटतम हवाई अड्डा कोयंबटूर है।&lt;br /&gt;
;रेल मार्ग&lt;br /&gt;
ऊटी रेलमार्ग द्वारा अन्य शहरों से जुड़ा हुआ है। ऊटी का निकटतम रेलवे स्टेशन मुख्य जंक्शन कोयंबटूर है।&lt;br /&gt;
;सड़क मार्ग &lt;br /&gt;
ऊटी के लिए [[बंगलोर]], [[कोचीन]], [[मैसूर]], कालीकट और कोयंबटूर आदि स्थानों  से नियमित बसें उपलब्ध हैं। राज्य राजमार्ग 17 से मड्डुर और मैसूर होते हुए बांदीपुर पहुंचा जा सकता है। यहाँ से ऊटी की दूरी केवल 67 किलोमीटर है।&lt;br /&gt;
==शिक्षण संस्थान==&lt;br /&gt;
ऊटी में शैक्षणिक संस्थानों में गवर्नमेंट आर्ट्स कॉलेज, गवर्नमेंट पॉलीटेक्निक, लॉले इंस्टिट्यूट और होमियोपैथिक औषधि शोध केंद्र शामिल हैं। &lt;br /&gt;
==पर्यटन==&lt;br /&gt;
नीलगिरी यानी नीले पहाड़ की गोद में बसा हरा भरा पर्यटन स्थल ऊटी दक्षिण भारत के सबसे प्रमुख पर्वतीय स्थलों में से एक है। यह देशी विदेशी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है। शहर की भीड़भाड़ से दूर कुछ दिन आराम से छुट्टियाँ बिताने के लिए यह एक उम्दा पिकनिक स्पॉट है। ख़ूबसूरत प्राकृतिक नज़ारे, घने जंगल, झरने, पहाड़ की चोटियाँ और दूर-दूर तक फैले चाय के बाग़ान यहाँ आने वाले सैलानियों का मन मोह लेते हैं। यहाँ की जलवायु हमेशा खुशनुमा रहती है। ऊटी का नैसर्गिक सौंदर्य, धुंध से ढकी पहाड़ों की चोटियाँ, ओस से भीगी पेड़ों की पत्तियाँ और अनेक ख़ूबसूरत नज़ारों को देखकर मन प्रफुल्लित हो जाता है। पहाड़ी क्षेत्र होने के नाते यहाँ का तापमान गर्मियों में भी 25 डिग्री सेल्सियस से ज़्यादा नहीं होता।&lt;br /&gt;
==पर्यटन स्थल== &lt;br /&gt;
====बॉटनिकल गार्डन====&lt;br /&gt;
*यहाँ के दर्शनीय स्थलों में सबसे पहला नाम बॉटनिकल  गार्डन का आता है। &lt;br /&gt;
*यह गार्डन 22 एकड़ में फैला हुआ है और यहाँ लगभग 650 दुर्लभ किस्म के पेड़-पौधों के साथ-साथ, अद्भुत ऑर्किड, रंगबिरंगे लिली, ख़ूबसूरत झाड़ियाँ व 2000 हज़ार साल पुराने पेड़ का अवशेष देखने को मिलता है। *वनस्पति विज्ञान में रूचि रखने वालों के लिए यह एक प्रमुख स्थान है। &lt;br /&gt;
====रोज गार्डन====&lt;br /&gt;
ऊटी का रोज गार्डन बहुत ख़ूबसूरत है। इस गार्डन की स्थापना [[1995]] में की गई थी। यह गार्डन 10 एकड़ में फैला हुआ है। यहाँ लगभग 200 किस्म के [[गुलाब|गुलाबों]] का संग्रह है। ऊटी रेलवे स्टेशन के पास स्थित यह बगीचा हर समय गुलाब की खुशबू से सरोबर रहता है।&lt;br /&gt;
====ऊटी झील====&lt;br /&gt;
*ऊटी झील को देखना अपने आप में एक अनोखा और सुखद अनुभव है। &lt;br /&gt;
*झील के चारों ओर फूलों की क्यारियों में तरह तरह के रंगबिरंगे फूल यहाँ की ख़ूबसूरती में चार चाँद लगाते हैं।&lt;br /&gt;
*झील में मोटर बोट, पैडल बोट और रो बोट्स में बोटिंग का लुत्फ भी उठाया जा सकता है। &lt;br /&gt;
====ललितकला अकादमी आर्ट गैलरी====&lt;br /&gt;
कला के शौकीन लोगों के लिए ऊटी में ललितकला अकादमी आर्ट गैलरी भी है। जो ऊटी से 2 किलोमीटर दूर स्थित है। गैलरी में भारत की विभिन्न प्रकार की पेंटिंग्स और स्कल्पचर्स मौज़ूद हैं। &lt;br /&gt;
====डोड्डाबेट्टा====     &lt;br /&gt;
*डोड्डाबेट्टा चोटी ऊटी से लगभग 8 किलोमीटर दूर स्थित है। &lt;br /&gt;
*यह [[नीलगिरि पहाड़ियाँ|नीलगिरि]] की सबसे ऊँची चोटी है। &lt;br /&gt;
*इसकी ऊँचाई 2,636 मीटर है, यहाँ से पूरे इलाके का विहंगम दृश्य देखा जा सकता है। &lt;br /&gt;
====कालहट्टी जलप्रपात==== &lt;br /&gt;
कालहट्टी जलप्रपात ऊटी का एक ख़ूबसूरत दर्शनीय स्थल है। यह जलप्रपात लगभग 100 फुट ऊँचा है, यहाँ का सौंदर्य देख लिग मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। यहाँ अनेक प्रकार के पर्वतीय पक्षी भी देखे जा सकते हैं। &lt;br /&gt;
====डाल्फिंस नोज====&lt;br /&gt;
ऊटी में डाल्फिंस नोज एक ख़ूबसूरत पिकनिक स्पॉट है। डाल्फिंस नोज अपने नाम की तरह ही रोचक व रोमांच पैदा करने वाला स्थल है। यहाँ से पूरी घाटी का विहंगम दृश्य दिखाई देता है। मौसम साफ हो तो यहाँ से कोटागिरी के कैथरज फाल्स का नज़ारा भी देखा जा सकता है। यहाँ बच्चों के साथ आउटडोर पिकनिक का भरपूर आनंद लिया जा सकता है।&lt;br /&gt;
====कोटागिरी हिल====&lt;br /&gt;
कोटागिरी हिल ऊटी से 28 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। कोटागिरी हिल प्राकृतिक सुंदरता के लिए दर्शनीय स्थल है। यहाँ के चाय बागानों को देखने के लिए पर्यटक दूर-दूर से आते हैं। &lt;br /&gt;
====वाइल्ड लाइफ़ सैक्चुरी====&lt;br /&gt;
वाइल्ड लाइफ़ सैक्चुरी कोटागिरी से आगे ऊटी से 67 किलोमीटर दूर स्थित है। यहाँ दुर्लभ प्रजातियों के पशुओं को देखा जा सकता है।&lt;br /&gt;
==जनगणना==&lt;br /&gt;
[[2001]] की जनगणना के अनुसार इस शहर की जनसंख्या 93, 921 है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{प्रचार}}&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=|प्रारम्भिक=प्रारम्भिक2 |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
{{संदर्भ ग्रंथ}}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{तमिलनाडु के पर्यटन स्थल}}&lt;br /&gt;
{{तमिलनाडु के नगर}}&lt;br /&gt;
[[Category:तमिलनाडु]]&lt;br /&gt;
[[Category:तमिलनाडु के नगर]]&lt;br /&gt;
[[Category:भारत के नगर]]&lt;br /&gt;
[[Category:तमिलनाडु के पर्यटन स्थल]]&lt;br /&gt;
[[Category:पर्यटन कोश]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>प्रियंका चतुर्वेदी</name></author>
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		<title>ऊटी</title>
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		<updated>2011-05-19T12:06:05Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;प्रियंका चतुर्वेदी: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{tocright}}&lt;br /&gt;
ऊटी, [[तमिलनाडु]] राज्य, दक्षिण-पूर्वी [[भारत]] में स्थित है। ऊटी का पुराना नाम '''उटकमंड और उदगमंडलम''' था। यह समुद्रतल से 2,240 मीटर की ऊँचाई पर बसा हुआ है। ऊटी नीलगिरि ज़िले का प्रशासनिक मुख्यालय है और [[नीलगिरि पहाड़ियाँ|नीलगिरि पहाड़ियों]] में स्थित है। इसके चारों तरफ कई चोटियाँ हैं, जिनमें तमिलनाडु का सबसे ऊँचा क्षेत्र डोडाबेट्टा (2,637 मीटर) भी शामिल है। &lt;br /&gt;
==इतिहास==&lt;br /&gt;
अंग्रेज़ों द्वारा 1821 में स्थापित ऊटी का इस्तेमाल [[1947]] में भारत के स्वतंत्र होने तक मद्रास प्रेज़िडेंसी के ग्रीष्मकालीन सरकारी मुख्यालय के रूप में किया जाता था। प्राथमिक तौर पर यह नगर एक पर्यटक आरामगाह है।&lt;br /&gt;
==कृषि और व्यापार==&lt;br /&gt;
ऊटी [[चाय]] प्रसंस्करण और वस्त्र उद्योग के लिए प्रसिद्ध है।&lt;br /&gt;
==यातायात और परिवहन==&lt;br /&gt;
;वायु मार्ग&lt;br /&gt;
ऊटी का निकटतम हवाई अड्डा कोयंबटूर है।&lt;br /&gt;
;रेल मार्ग&lt;br /&gt;
ऊटी रेलमार्ग द्वारा अन्य शहरों से जुड़ा हुआ है। ऊटी का निकटतम रेलवे स्टेशन मुख्य जंक्शन कोयंबटूर है।&lt;br /&gt;
;सड़क मार्ग &lt;br /&gt;
ऊटी के लिए [[बंगलोर]], [[कोचीन]], [[मैसूर]], कालीकट और कोयंबटूर आदि स्थानों  से नियमित बसें उपलब्ध हैं। राज्य राजमार्ग 17 से मड्डुर और मैसूर होते हुए बांदीपुर पहुंचा जा सकता है। यहाँ से ऊटी की दूरी केवल 67 किलोमीटर है।&lt;br /&gt;
==शिक्षण संस्थान==&lt;br /&gt;
ऊटी में शैक्षणिक संस्थानों में गवर्नमेंट आर्ट्स कॉलेज, गवर्नमेंट पॉलीटेक्निक, लॉले इंस्टिट्यूट और होमियोपैथिक औषधि शोध केंद्र शामिल हैं। &lt;br /&gt;
==पर्यटन==&lt;br /&gt;
नीलगिरी यानी नीले पहाड़ की गोद में बसा हरा भरा पर्यटन स्थल ऊटी दक्षिण भारत के सबसे प्रमुख पर्वतीय स्थलों में से एक है। यह देशी विदेशी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है। शहर की भीड़भाड़ से दूर कुछ दिन आराम से छुट्टियाँ बिताने के लिए यह एक उम्दा पिकनिक स्पॉट है। ख़ूबसूरत प्राकृतिक नज़ारे, घने जंगल, झरने, पहाड़ की चोटियाँ और दूर-दूर तक फैले चाय के बाग़ान यहाँ आने वाले सैलानियों का मन मोह लेते हैं। यहाँ की जलवायु हमेशा खुशनुमा रहती है। ऊटी का नैसर्गिक सौंदर्य, धुंध से ढकी पहाड़ों की चोटियाँ, ओस से भीगी पेड़ों की पत्तियाँ और अनेक ख़ूबसूरत नज़ारों को देखकर मन प्रफुल्लित हो जाता है। पहाड़ी क्षेत्र होने के नाते यहाँ का तापमान गर्मियों में भी 25 डिग्री सेल्सियस से ज़्यादा नहीं होता।&lt;br /&gt;
==पर्यटन स्थल== &lt;br /&gt;
====बॉटनिकल गार्डन====&lt;br /&gt;
{{मुख्य|बॉटनिकल गार्डन}}&lt;br /&gt;
*यहाँ के दर्शनीय स्थलों में सबसे पहला नाम बॉटनिकल गार्डन का आता है। &lt;br /&gt;
*यह गार्डन 22 एकड़ में फैला हुआ है और यहाँ लगभग 650 दुर्लभ किस्म के पेड़-पौधों के साथ-साथ, अद्भुत ऑर्किड, रंगबिरंगे लिली, ख़ूबसूरत झाड़ियाँ व 2000 हज़ार साल पुराने पेड़ का अवशेष देखने को मिलता है। &lt;br /&gt;
====रोज गार्डन====&lt;br /&gt;
ऊटी का रोज गार्डन बहुत ख़ूबसूरत है। इस गार्डन की स्थापना [[1995]] में की गई थी। यह गार्डन 10 एकड़ में फैला हुआ है। यहाँ लगभग 200 किस्म के [[गुलाब|गुलाबों]] का संग्रह है। ऊटी रेलवे स्टेशन के पास स्थित यह बगीचा हर समय गुलाब की खुशबू से सरोबर रहता है।&lt;br /&gt;
====ऊटी झील====&lt;br /&gt;
{{मुख्य|ऊटी झील}}&lt;br /&gt;
*ऊटी झील को देखना अपने आप में एक अनोखा और सुखद अनुभव है।&lt;br /&gt;
*झील के चारों ओर फूलों की क्यारियों में तरह तरह के रंगबिरंगे फूल यहाँ की ख़ूबसूरती में चार चाँद लगाते हैं। &lt;br /&gt;
*झील में मोटर बोट, पैडल बोट और रो बोट्स में बोटिंग का लुत्फ भी उठाया जा सकता है। &lt;br /&gt;
====ललितकला अकादमी आर्ट गैलरी====&lt;br /&gt;
कला के शौकीन लोगों के लिए ऊटी में ललितकला अकादमी आर्ट गैलरी भी है। जो ऊटी से 2 किलोमीटर दूर स्थित है। गैलरी में भारत की विभिन्न प्रकार की पेंटिंग्स और स्कल्पचर्स मौज़ूद हैं। &lt;br /&gt;
====डोड्डाबेट्टा चोटी==== &lt;br /&gt;
{{मुख्य|डोड्डाबेट्टा चोटी}}&lt;br /&gt;
*डोड्डाबेट्टा ऊटी से लगभग 8 किलोमीटर दूर स्थित है। यह नीलगिरी की सबसे ऊँची चोटी है। &lt;br /&gt;
*इसकी ऊँचाई 2,636 मीटर है, यहाँ से पूरे इलाके का विहंगम दृश्य देखा जा सकता है। &lt;br /&gt;
====कालहट्टी जलप्रपात==== &lt;br /&gt;
कालहट्टी जलप्रपात ऊटी का एक ख़ूबसूरत दर्शनीय स्थल है। यह जलप्रपात लगभग 100 फुट ऊँचा है, यहाँ का सौंदर्य देख लिग मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। यहाँ अनेक प्रकार के पर्वतीय पक्षी भी देखे जा सकते हैं। &lt;br /&gt;
====डाल्फिंस नोज====&lt;br /&gt;
ऊटी में डाल्फिंस नोज एक ख़ूबसूरत पिकनिक स्पॉट है। डाल्फिंस नोज अपने नाम की तरह ही रोचक व रोमांच पैदा करने वाला स्थल है। यहाँ से पूरी घाटी का विहंगम दृश्य दिखाई देता है। मौसम साफ हो तो यहाँ से कोटागिरी के कैथरज फाल्स का नज़ारा भी देखा जा सकता है। यहाँ बच्चों के साथ आउटडोर पिकनिक का भरपूर आनंद लिया जा सकता है।&lt;br /&gt;
====कोटागिरी हिल====&lt;br /&gt;
कोटागिरी हिल ऊटी से 28 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। कोटागिरी हिल प्राकृतिक सुंदरता के लिए दर्शनीय स्थल है। यहाँ के चाय बागानों को देखने के लिए पर्यटक दूर-दूर से आते हैं। &lt;br /&gt;
====वाइल्ड लाइफ़ सैक्चुरी====&lt;br /&gt;
वाइल्ड लाइफ़ सैक्चुरी कोटागिरी से आगे ऊटी से 67 किलोमीटर दूर स्थित है। यहाँ दुर्लभ प्रजातियों के पशुओं को देखा जा सकता है।&lt;br /&gt;
==जनगणना==&lt;br /&gt;
[[2001]] की जनगणना के अनुसार इस शहर की जनसंख्या 93, 921 है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{प्रचार}}&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=|प्रारम्भिक=प्रारम्भिक2 |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
{{संदर्भ ग्रंथ}}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{तमिलनाडु के पर्यटन स्थल}}&lt;br /&gt;
{{तमिलनाडु के नगर}}&lt;br /&gt;
[[Category:तमिलनाडु]]&lt;br /&gt;
[[Category:तमिलनाडु के नगर]]&lt;br /&gt;
[[Category:भारत के नगर]]&lt;br /&gt;
[[Category:तमिलनाडु के पर्यटन स्थल]]&lt;br /&gt;
[[Category:पर्यटन कोश]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>प्रियंका चतुर्वेदी</name></author>
	</entry>
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		<id>https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%A1%E0%A5%8B%E0%A4%A1%E0%A5%8D%E0%A4%A1%E0%A4%BE%E0%A4%AC%E0%A5%87%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A4%BE&amp;diff=164489</id>
		<title>डोड्डाबेट्टा</title>
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		<updated>2011-05-19T12:05:59Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;प्रियंका चतुर्वेदी: '*डोड्डाबेट्टा चोटी, ऊटी, तमिलनाडु से लगभग 8 किलोमी...' के साथ नया पन्ना बनाया&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;*डोड्डाबेट्टा चोटी, [[ऊटी]], [[तमिलनाडु]] से लगभग 8 किलोमीटर दूर स्थित है। &lt;br /&gt;
*यह [[नीलगिरि पहाड़ियाँ|नीलगिरि]] की सबसे ऊँची चोटी है। &lt;br /&gt;
*इसकी ऊँचाई 2,636 मीटर है, यहाँ से पूरे इलाके का विहंगम दृश्य देखा जा सकता है। &lt;br /&gt;
*इस चोटी से न सिर्फ कोयंबटूर बल्कि [[मैसूर]] शहर का नज़ारा भी देखा जा सकता है। &lt;br /&gt;
*यहाँ से घाटी का नज़ारा अद्भुत दिखाई पड़ता है। &lt;br /&gt;
*लोगों का कहना है कि जब मौसम साफ होता है तब यहाँ से दूर के इलाके भी दिखाई देते हैं।&lt;br /&gt;
{{प्रचार}}&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=आधार1|प्रारम्भिक= |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
{{संदर्भ ग्रंथ}}&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{तमिलनाडु के पर्यटन स्थल}}&lt;br /&gt;
[[Category:तमिलनाडु]]&lt;br /&gt;
[[Category:तमिलनाडु के पर्यटन स्थल]]&lt;br /&gt;
[[Category:पर्यटन कोश]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>प्रियंका चतुर्वेदी</name></author>
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		<title>प्यासा कुएँ के पास जाता है</title>
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		<updated>2011-05-19T11:49:31Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;प्रियंका चतुर्वेदी: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{पुनरीक्षण}}&lt;br /&gt;
*यह  [[कहावत लोकोक्ति मुहावरे|लोकोक्ति]]  एक प्रचलित कहावत है। &lt;br /&gt;
*इसका अर्थ - जिसे गरज़ होती है वही दूसरों के पास जाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{प्रचार}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
[[Category:कहावत लोकोक्ति मुहावरे]]&lt;br /&gt;
[[Category:नया पन्ना]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>प्रियंका चतुर्वेदी</name></author>
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		<title>गुरु गुड़ रहा</title>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;प्रियंका चतुर्वेदी: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{पुनरीक्षण}}&lt;br /&gt;
*यह  [[कहावत लोकोक्ति मुहावरे|लोकोक्ति]]  एक प्रचलित कहावत है। &lt;br /&gt;
*इसका अर्थ - छोटे–बड़ों से आगे बढ़ जाते हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{प्रचार}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
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		<author><name>प्रियंका चतुर्वेदी</name></author>
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		<title>प्यासा कुएँ के पास जाता है</title>
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&lt;div&gt;{{पुनरीक्षण}}&lt;br /&gt;
यह  [[कहावत लोकोक्ति मुहावरे|लोकोक्ति]]  एक प्रचलित कहावत है। इसका अर्थ - जिसे गरज़ होती है वही दूसरों के पास जाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
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[[Category:कहावत लोकोक्ति मुहावरे]]&lt;br /&gt;
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		<title>गुरु गुड़ रहा</title>
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		<updated>2011-05-19T11:44:44Z</updated>

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&lt;div&gt;{{पुनरीक्षण}}&lt;br /&gt;
यह [[लोकोक्ति]] एक प्रचलित कहावत है। इसका अर्थ - छोटे–बड़ों से आगे बढ़ जाते हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{प्रचार}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
[[Category:कहावत लोकोक्ति मुहावरे]]&lt;br /&gt;
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		<title>कहावत लोकोक्ति मुहावरे-ग</title>
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		<updated>2011-05-19T11:42:03Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;प्रियंका चतुर्वेदी: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{कहावत लोकोक्ति मुहावरे}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{| class=&amp;quot;bharattable&amp;quot;&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
!कहावत लोकोक्ति मुहावरे&lt;br /&gt;
!अर्थ&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| style=&amp;quot;width:30%&amp;quot;|&lt;br /&gt;
1- गोबर राखी पाती सड़ै,&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
फिर खेती में दाना पड़ै।&lt;br /&gt;
| style=&amp;quot;width:70%&amp;quot;|&lt;br /&gt;
अर्थ - धैर्य और मेहनत के साथ ही सफलता मिलती है।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|2- गोबर, मैला, नीम की खली,&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
या से खेती दुनी फली।।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - अनुरूप कार्य करने से दुगना लाभ मिलता है।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|3- गहिर न जोतै बोवै धान।&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
सो घर कोठिला भरै किसान।। &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - अगर किसान गहरी जुतायी न करके धान बोयें तो उसकी पैदावार ख़ूब होती है।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|4- गेहूं भवा काहें। असाढ़ के दुइ बाहें।। &amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
गेहूं भवा काहें। सोलह बाहें नौ गाहें।। &amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
गेहूं भवा काहें। सोलह दायं बाहें।। &amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
गेहूं भवा काहें। कातिक के चौबाहें।।।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - अगर किसान आषाढ़ के महीने में दो बांह जोतने से; कुल सोलह बांह करने से और नौ बार हेंगाने से; कातिक में बोवाई करने से पहले चार बार जोतने से गेहूं की फ़सल अच्छी होती है।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|5- गेहूं बाहें। धान बिदाहें।।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - गेहूं की पैदावार अधिक बार जोतने से और धान की पैदावार विदाहने (धान होने के चार दिन बाद जुतवा देने) से अच्छी होती है।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|6- गेहूं मटर सरसी। औ जौ कुरसी।।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - गेहूं और मटर की बोआई सरस खेत में तथा जौ की बोआई कुरसौ में करने से पैदावार अच्छी होती है।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|7- गेहूं बाहा, धान गाहा।&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
[[ऊख]] गोड़ाई से है आहा।।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - जौ-गेहूं कई बांह करने से धान बिदाहने से और ऊख कई बार गोड़ने से इनकी पैदावार अच्छी होती है।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|8- गेहूं बाहें, चना दलाये। &amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
धान गाहें, मक्का निराये, ऊख कसाये।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - ख़ूब बांह करने से गेहूं, दलने से चना, बार-बार पानी मिलने से धान, निराने से मक्का और ईख में पानी में छोड़कर बोने से  उसकी फ़सल अच्छी होती है।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|9- गंगा गए तो गंगादास, यमुना गए तो यमुनादास।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - परिस्थिति अनुसार अपना सिद्धांत बदलने वाला।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|10- गंजेडी यार किसके दम लगाया खिसके।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - स्वार्थी आदमी स्वार्थ सिद्ध होते ही मुँह फेर लेता है।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|11- गँवार गन्ना न दे, भेली दे।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - मूर्ख सरलता से मामूली चीज़ नहीं देता, धमकाने से अधिक मूल्य की वस्तु भी दे देता है।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|12- गधा धोने से बछड़ा नहीं हो जाता।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - किसी उपाय से भी स्वभाव नहीं बदलता।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|13- गई माँगने पूत, खो आई भरतार।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - थोड़े लाभ के चक्कर में भारी नुक़सान का हो जाना।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|14- गर्व का सिर नीचा।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - घमंडी आदमी का घमंड चूर हो जाता है।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|15- ग़रीब की जोरू, सबकी भाभी।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - अर्थ - ग़रीब आदमी से सब लाभ उठाना चाहते हैं।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|16- ग़रीबी तेरे तीन नाम- झूठा, पाजी, बेईमान।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - ग़रीब का सर्वत्र अपमान होता रहता है।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|17- गवाह चुस्त, मुद्दई सुस्त।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - जिसका काम है वह तो आलस करे और दूसरे फुर्ती दिखाएं।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|18- ग़रीबों ने रोज़े रखे तो दिन ही बड़े हो गए।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - ग़रीब की क़िस्मत ही बुरी होती है।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|19- गाँठ का पूरा, आँख का अंधा।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - पैसे वाला तो है, पर मूर्ख  है।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|20- गाडर पाली ऊन को लागी, चरन कपास।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - रखा तो गया है काम करने को, पर करता है नुक़सान।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|21- गिरहकट का भाई गठकट।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - सब बदमाश एक से होते हैं।  &lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|22- गीदड़ की शामत आए तो गाँव की ओर भागे।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - विपत्ति में बुद्धि काम नहीं करती।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|23- गुड़ खाए, गुलगुलों से परहेज।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ -  झूठ और ढोंग रचना।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|24- गुड़ दिए मरे तो ज़हर क्यों दें।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - प्रेम से काम निकल सके तो सख्ती क्यों करें।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|25- गुड़ न दें, पर गुड़ सी बात तो करें।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - कुछ न दें पर मीठा बोल तो बोलें।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|26- गुरु गुड़ रहा, चेला शक्कर हो गया।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - छोटे–बड़ों से आगे बढ़ जाते हैं।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|27- गुरु जी, चेले बहुत हो गए। &amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
भूखों मरेंगे तो आप ही चले जाएंगे।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - लोग अधिक हो तो, उपेक्षा होती है।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|28- गूदड़ में लाल नहीं छिपता।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - बढ़िया चीज़ अपने आप पहचानी जाती है।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|29- गोद में बैठकर आँख में उँगली।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - भला करने पर दुष्टता करना।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|30- गोद में लड़का, शहर में ढिंढोरा।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - वस्तु पास में और खोज दूर तक।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|31- गंगा नहाना।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - कठिन कार्य पूरा होना।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|32- गठरी मारना।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - सामान चुरा लेना। &lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|33- गड़े मुरदे उखाड़ना।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - पुरानी बात फिर से उजागर करना। &lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|34-  गढ़ जीतना।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - बहुत कठिन काम करना।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|35- गले का हार होना।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - बहुत प्यारा होना।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|36- गले पड़ा ढोल बजाना।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - सिर पर पड़ी जिम्मेदारी को मजबूरी में पूरा करना।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|37- गले मढ़ना।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - जबरदस्ती सौंपना।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|38- गहरा हाथ।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - बहुत कुछ हथिया लेना। &lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|39- गाँठ का पूरा।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - मालदार होना। &lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|40- गाँठ में बाँधना।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - याद रखना।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|41- गागर में सागर भरना।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - थोड़े में बहुत कुछ कहना।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|42- गाजर मूली समझना।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - तुच्छ समझना।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|43- गाढ़े का साथी।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - संकट का साथी।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|44- गाल फुलाना।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - रूठना जाना।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|45- गाल बजाना।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - डींग हाँकना।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|46- गिन-गिन कर क़दम रखना।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - बहुत सावधानी से आगे बढ़ना।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|47- गिरगिट की तरह रंग बदलना।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - एक रंग-ढंग न रखना, रोज़ बातें बदलना।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|48- गीदड़ भभकी।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - दिखावटी धमकी देना।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|49- गुड़ गोबर कर देना।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - बना-बनाया काम बिगाड़ देना।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|50- गुदड़ी का लाल होना।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - ग़रीबी में भी गुणवान होना।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|51-  ग़ुल खिलाना।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - कोई बखेड़ा खड़ा करना।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|52- ग़ुस्सा़ पी जाना।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - क्रोध रोकना।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|53- गूँगे का गुड़ होना।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - अनुभव को प्रकट न कर पाना।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|54- गूलर का फूल।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - दुर्लभ वस्तु होना।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|55- गेहूँ के साथ घुन पिस जाना।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - दोषी के साथ निर्दोष का भी अहित हो जाना।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|56- गोटी बैठाना।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - युक्ति सफल होना।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|57- गोबर गणेश।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
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|-&lt;br /&gt;
|58- गोल कर जाना।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - गायब कर देना।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:कहावत_लोकोक्ति_मुहावरे]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>प्रियंका चतुर्वेदी</name></author>
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	<entry>
		<id>https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%95%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A4%A4_%E0%A4%B2%E0%A5%8B%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BF_%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A5%87-%E0%A4%97&amp;diff=164465</id>
		<title>कहावत लोकोक्ति मुहावरे-ग</title>
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		<updated>2011-05-19T11:38:14Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;प्रियंका चतुर्वेदी: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{कहावत लोकोक्ति मुहावरे}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{| class=&amp;quot;bharattable&amp;quot;&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
!कहावत लोकोक्ति मुहावरे&lt;br /&gt;
!अर्थ&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| style=&amp;quot;width:30%&amp;quot;|&lt;br /&gt;
1- गोबर राखी पाती सड़ै,&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
फिर खेती में दाना पड़ै।&lt;br /&gt;
| style=&amp;quot;width:70%&amp;quot;|&lt;br /&gt;
अर्थ - धैर्य और मेहनत के साथ ही सफलता मिलती है।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|2- गोबर, मैला, नीम की खली,&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
या से खेती दुनी फली।।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - अनुरूप कार्य करने से दुगना लाभ मिलता है।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|3- गहिर न जोतै बोवै धान।&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
सो घर कोठिला भरै किसान।। &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - अगर किसान गहरी जुतायी न करके धान बोयें तो उसकी पैदावार ख़ूब होती है।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|4- गेहूं भवा काहें। असाढ़ के दुइ बाहें।। &amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
गेहूं भवा काहें। सोलह बाहें नौ गाहें।। &amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
गेहूं भवा काहें। सोलह दायं बाहें।। &amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
गेहूं भवा काहें। कातिक के चौबाहें।।।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - अगर किसान आषाढ़ के महीने में दो बांह जोतने से; कुल सोलह बांह करने से और नौ बार हेंगाने से; कातिक में बोवाई करने से पहले चार बार जोतने से गेहूं की फ़सल अच्छी होती है।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|5- गेहूं बाहें। धान बिदाहें।।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - गेहूं की पैदावार अधिक बार जोतने से और धान की पैदावार विदाहने (धान होने के चार दिन बाद जुतवा देने) से अच्छी होती है।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|6- गेहूं मटर सरसी। औ जौ कुरसी।।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - गेहूं और मटर की बोआई सरस खेत में तथा जौ की बोआई कुरसौ में करने से पैदावार अच्छी होती है।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|7- गेहूं बाहा, धान गाहा।&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
[[ऊख]] गोड़ाई से है आहा।।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - जौ-गेहूं कई बांह करने से धान बिदाहने से और ऊख कई बार गोड़ने से इनकी पैदावार अच्छी होती है।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|8- गेहूं बाहें, चना दलाये। &amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
धान गाहें, मक्का निराये, ऊख कसाये।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - ख़ूब बांह करने से गेहूं, दलने से चना, बार-बार पानी मिलने से धान, निराने से मक्का और ईख में पानी में छोड़कर बोने से  उसकी फ़सल अच्छी होती है।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|9- गंगा गए तो गंगादास, यमुना गए तो यमुनादास।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - परिस्थिति अनुसार अपना सिद्धांत बदलने वाला।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|10- गंजेडी यार किसके दम लगाया खिसके।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - स्वार्थी आदमी स्वार्थ सिद्ध होते ही मुँह फेर लेता है।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|11- गँवार गन्ना न दे, भेली दे।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - मूर्ख सरलता से मामूली चीज़ नहीं देता, धमकाने से अधिक मूल्य की वस्तु भी दे देता है।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|12- गधा धोने से बछड़ा नहीं हो जाता।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - किसी उपाय से भी स्वभाव नहीं बदलता।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|13- गई माँगने पूत, खो आई भरतार।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - थोड़े लाभ के चक्कर में भारी नुक़सान का हो जाना।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|14- गर्व का सिर नीचा।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - घमंडी आदमी का घमंड चूर हो जाता है।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|15- ग़रीब की जोरू, सबकी भाभी।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - अर्थ - ग़रीब आदमी से सब लाभ उठाना चाहते हैं।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|16- ग़रीबी तेरे तीन नाम- झूठा, पाजी, बेईमान।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - ग़रीब का सर्वत्र अपमान होता रहता है।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|17- गवाह चुस्त, मुद्दई सुस्त।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - जिसका काम है वह तो आलस करे और दूसरे फुर्ती दिखाएं।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|18- ग़रीबों ने रोज़े रखे तो दिन ही बड़े हो गए।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - ग़रीब की क़िस्मत ही बुरी होती है।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|19- गाँठ का पूरा, आँख का अंधा।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - पैसे वाला तो है, पर मूर्ख  है।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|20- गाडर पाली ऊन को लागी, चरन कपास।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - रखा तो गया है काम करने को, पर करता है नुक़सान।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|21- गिरहकट का भाई गठकट।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - सब बदमाश एक से होते हैं।  &lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|22- गीदड़ की शामत आए तो गाँव की ओर भागे।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - विपत्ति में बुद्धि काम नहीं करती।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|23- गुड़ खाए, गुलगुलों से परहेज।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ -  झूठ और ढोंग रचना।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|24- गुड़ दिए मरे तो ज़हर क्यों दें।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - प्रेम से काम निकल सके तो सख्ती क्यों करें।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|25- गुड़ न दें, पर गुड़ सी बात तो करें।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - कुछ न दें पर मीठा बोल तो बोलें।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|26- गुरू गुड़ रहा, चेला शक्कर हो गया।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - छोटे–बड़ों से आगे बढ़ जाते हैं।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|27- गुरु जी, चेले बहुत हो गए। &amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
भूखों मरेंगे तो आप ही चले जाएंगे।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - लोग अधिक हो तो, उपेक्षा होती है।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|28- गूदड़ में लाल नहीं छिपता।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - बढ़िया चीज़ अपने आप पहचानी जाती है।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|29- गोद में बैठकर आँख में उँगली।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - भला करने पर दुष्टता करना।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|30- गोद में लड़का, शहर में ढिंढोरा।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - वस्तु पास में और खोज दूर तक।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|31- गंगा नहाना।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - कठिन कार्य पूरा होना।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|32- गठरी मारना।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
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|-&lt;br /&gt;
|33- गड़े मुरदे उखाड़ना।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - पुरानी बात फिर से उजागर करना। &lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|34-  गढ़ जीतना।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - बहुत कठिन काम करना।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|35- गले का हार होना।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - बहुत प्यारा होना।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|36- गले पड़ा ढोल बजाना।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
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|-&lt;br /&gt;
|37- गले मढ़ना।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - जबरदस्ती सौंपना।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|38- गहरा हाथ।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
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|-&lt;br /&gt;
|39- गाँठ का पूरा।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
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|41- गागर में सागर भरना।&lt;br /&gt;
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|-&lt;br /&gt;
|42- गाजर मूली समझना।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
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|-&lt;br /&gt;
|43- गाढ़े का साथी।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
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|-&lt;br /&gt;
|44- गाल फुलाना।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - रूठना जाना।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|45- गाल बजाना।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - डींग हाँकना।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|46- गिन-गिन कर क़दम रखना।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
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|-&lt;br /&gt;
|47- गिरगिट की तरह रंग बदलना।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - एक रंग-ढंग न रखना, रोज़ बातें बदलना।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|48- गीदड़ भभकी।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - दिखावटी धमकी देना।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|49- गुड़ गोबर कर देना।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - बना-बनाया काम बिगाड़ देना।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|50- गुदड़ी का लाल होना।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - ग़रीबी में भी गुणवान होना।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|51-  ग़ुल खिलाना।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
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|-&lt;br /&gt;
|52- ग़ुस्सा़ पी जाना।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - क्रोध रोकना।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|53- गूँगे का गुड़ होना।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - अनुभव को प्रकट न कर पाना।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|54- गूलर का फूल।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - दुर्लभ वस्तु होना।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|55- गेहूँ के साथ घुन पिस जाना।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - दोषी के साथ निर्दोष का भी अहित हो जाना।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|56- गोटी बैठाना।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - युक्ति सफल होना।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|57- गोबर गणेश।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - बिलकुल बुध्दू  होना।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|58- गोल कर जाना।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
अर्थ - गायब कर देना।&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:कहावत_लोकोक्ति_मुहावरे]]&lt;br /&gt;
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		<author><name>प्रियंका चतुर्वेदी</name></author>
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		<title>बॉटनिकल गार्डन</title>
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		<updated>2011-05-19T11:24:35Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;प्रियंका चतुर्वेदी: '*बॉटनिकल गार्डन ऊटी, तमिलनाडु राज्य का प्रसिद्ध प...' के साथ नया पन्ना बनाया&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;*बॉटनिकल गार्डन [[ऊटी]], [[तमिलनाडु]] राज्य का प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है।&lt;br /&gt;
*ऊटी के दर्शनीय स्थलों में सबसे पहला नाम बॉटनिकल गार्डन का आता है।  &lt;br /&gt;
*बॉटनिकल गार्डन की स्थापना 1847 में की गई थी। &lt;br /&gt;
*यह गार्डन 22 हेक्टेयर भूमि में फैला हुआ है।  &lt;br /&gt;
*इस ख़ूबसूरत गार्डन की देखरख बागवानी विभाग करता है। &lt;br /&gt;
*यहाँ एक पेड़ के जीवाश्म संभाल कर रखे गए हैं जिसके बारे में माना जाता है, कि यह 20 मिलियन वर्ष पुराना है। &lt;br /&gt;
*इस गार्डन में पेड़-पौधों की 650 से ज़्यादा प्रजातियाँ, अद्भुत ऑर्किड, रंगबिरंगे लिली, ख़ूबसूरत झाड़ियाँ व 2000 हज़ार साल पुराने पेड़ का अवशेष देखने को मिलता है।&lt;br /&gt;
*प्रकृति प्रेमियों के बीच यह गार्डन बहुत लोकप्रिय है। &lt;br /&gt;
*बॉटनिकल गार्डन में [[मई]] के महीने में ग्रीष्मोत्सव मनाया जाता है। &lt;br /&gt;
*इस महोत्सव में [[भारत के फूल|फूलों]] की प्रदर्शनी और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिसमें स्थानीय प्रसिद्ध कलाकार भाग लेते हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
;बोटिंग का समय&lt;br /&gt;
प्रात:- '''8:30''' से शाम- '''6:30''' बजे तक।&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
{{प्रचार}}&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=|प्रारम्भिक=प्रारम्भिक1 |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
{{संदर्भ ग्रंथ}}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{तमिलनाडु के पर्यटन स्थल}}&lt;br /&gt;
[[Category:तमिलनाडु]]&lt;br /&gt;
[[Category:तमिलनाडु के पर्यटन स्थल]]&lt;br /&gt;
[[Category:पर्यटन कोश]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>प्रियंका चतुर्वेदी</name></author>
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		<title>ऊटी झील</title>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;प्रियंका चतुर्वेदी: 'ऊटी झील, [[ऊटी&amp;lt;br /&amp;gt;Ooty Lake]] *ऊटी झील, ऊटी, [[...' के साथ नया पन्ना बनाया&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;[[चित्र:Ooty-Lake.jpg|thumb|250px|ऊटी झील, [[ऊटी]]&amp;lt;br /&amp;gt;Ooty Lake]]&lt;br /&gt;
*ऊटी झील, [[ऊटी]], [[तमिलनाडु]] राज्य में स्थित है। &lt;br /&gt;
*इस झील का निर्माण यहाँ के पहले कलैक्टर जॉन सुविलिअन ने 1825 में करवाया था। &lt;br /&gt;
*यह झील 2.5 किलोमीटर लंबी है। &lt;br /&gt;
*झील के चारों ओर [[भारत के फूल|फूलों]] की क्यारियों में तरह-तरह के रंगबिरंगे फूल यहाँ की ख़ूबसूरती में चार चाँद लगाते हैं। &lt;br /&gt;
*यहाँ आने वाले पर्यटक बोटिंग और [[मछली]] पकड़ने का आनंद ले सकते हैं। &lt;br /&gt;
*प्रतिवर्ष 12 लाख पर्यटक ऊटी झील देखने के लिए आते हैं।&lt;br /&gt;
*झील में मोटर बोट, पैडल बोट और रो बोट्स में बोटिंग का लुत्फ भी उठाया जा सकता है।&lt;br /&gt;
*गर्मी के मौसम में यहाँ दो दिवसीय बोट रेस का आयोजन किया जाता है।&lt;br /&gt;
*ऊँटी झील के पूर्वी किनारों पर बच्चों का पार्क है जहाँ बच्चों के मनोरंजन के लिए बहुत सी चीजें हैं। &lt;br /&gt;
;बोटिंग का समय&lt;br /&gt;
प्रात:- '''8:00''' से शाम- '''6:00''' बजे तक।&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
{{प्रचार}}&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=|प्रारम्भिक=प्रारम्भिक1 |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
{{संदर्भ ग्रंथ}}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{तमिलनाडु के पर्यटन स्थल}}&lt;br /&gt;
[[Category:तमिलनाडु]]&lt;br /&gt;
[[Category:तमिलनाडु के पर्यटन स्थल]]&lt;br /&gt;
[[Category:पर्यटन कोश]]&lt;br /&gt;
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		<author><name>प्रियंका चतुर्वेदी</name></author>
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		<title>चित्र:Ooty-Lake.jpg</title>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;प्रियंका चतुर्वेदी: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{चित्र सूचना&lt;br /&gt;
|विवरण=[[ऊटी झील]]&amp;lt;br /&amp;gt;Ooty Lake&lt;br /&gt;
|चित्रांकन=[http://www.flickr.com/people/ivan_iraci/  Ivan Iraci]&lt;br /&gt;
|दिनांक=&lt;br /&gt;
|स्रोत=www.flickr.com&lt;br /&gt;
|प्रयोग अनुमति=&lt;br /&gt;
|चित्रकार=&lt;br /&gt;
|उपलब्ध=[http://www.flickr.com/photos/ivan_iraci/2157221343/ Ooty Lake]&lt;br /&gt;
|प्राप्ति स्थान=&lt;br /&gt;
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|संग्रहालय क्रम संख्या=&lt;br /&gt;
|आभार=[http://www.flickr.com/photos/81877579@N00 Ivan Iraci's photostream]&lt;br /&gt;
|आकार=&lt;br /&gt;
|अन्य विवरण=ऊटी झील, [[ऊटी]], [[तमिलनाडु]] राज्य में स्थित है। इस झील का निर्माण यहाँ के पहले कलैक्टर जॉन सुविलिअन ने 1825 में करवाया था। यह झील 2.5 किलोमीटर लंबी है। झील के चारों ओर [[भारत के फूल|फूलों]] की क्यारियों में तरह-तरह के रंगबिरंगे फूल यहाँ की ख़ूबसूरती में चार चाँद लगाते हैं। &lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
{{CCL&lt;br /&gt;
|Attribution={{Attribution}}&lt;br /&gt;
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		<author><name>प्रियंका चतुर्वेदी</name></author>
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		<title>चित्र:Ooty-Lake.jpg</title>
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		<updated>2011-05-19T11:08:19Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;प्रियंका चतुर्वेदी: &lt;/p&gt;
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		<author><name>प्रियंका चतुर्वेदी</name></author>
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