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	<title>Bharatkosh - सदस्य द्वारा योगदान [hi]</title>
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		<title>चित्र:University-Of-Pune.jpg</title>
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		<updated>2010-07-01T13:15:45Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Gaurav: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{चित्र सूचना&lt;br /&gt;
|विवरण=[[पुणे विश्वविद्यालय]]&amp;lt;br /&amp;gt; University Of Pune&lt;br /&gt;
|चित्रांकन=[http://www.flickr.com/photos/k_shreesh/ K. Shreesh]&lt;br /&gt;
|दिनांक=&lt;br /&gt;
|स्रोत=www.flickr.com&lt;br /&gt;
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|प्राप्ति स्थान=&lt;br /&gt;
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|संग्रहालय क्रम संख्या=&lt;br /&gt;
|आभार=&lt;br /&gt;
|आकार=&lt;br /&gt;
|अन्य विवरण=&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
{{CCL&lt;br /&gt;
|Attribution={{Attribution}}&lt;br /&gt;
}}&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Gaurav</name></author>
	</entry>
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		<id>https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0&amp;diff=39782</id>
		<title>महाराष्ट्र</title>
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		<updated>2010-07-01T13:14:18Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Gaurav: /* वीथिका */&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा राज्य&lt;br /&gt;
|Image=Maharashtra-Map.jpg&lt;br /&gt;
|राजधानी=मुंबई&lt;br /&gt;
|जनसंख्या=96879&lt;br /&gt;
|जनसंख्या घनत्व=315&lt;br /&gt;
|क्षेत्रफल=308,000&lt;br /&gt;
|भौगोलिक निर्देशांक=18° 58' 30&amp;quot; N 72° 49' 33&amp;quot; E&lt;br /&gt;
|ज़िले=35&lt;br /&gt;
|महानगर=मुंबई&lt;br /&gt;
|बड़े नगर=मुंबई, पुणे, नागपूर, औरंगाबाद, कोल्हापूर, नासिक, शोलापूर, अमरावती, सांगली, नांदेड&lt;br /&gt;
|राजभाषा(एँ)=मराठी , हिन्दी , अंग्रेजी,&lt;br /&gt;
|स्थापना=1960/05/01&lt;br /&gt;
|मुख्य ऐतिहासिक स्थल=गेटवे ऑफ़ इन्डिया, अजंता-एलोरा केव्स, शनिवारवाडा, लाल महल, सिंहगढ़&lt;br /&gt;
|मुख्य पर्यटन स्थल=गेटवे ऑफ़ इन्डिया, मडआईलॅन्ड, अजंता-एलोरा केव्स, मुंबई चौपाटी&lt;br /&gt;
|लिंग अनुपात=1000:922&lt;br /&gt;
|साक्षरता=76.9&lt;br /&gt;
|राज्यपाल=एस एम कृष्णा&lt;br /&gt;
|मुख्यमंत्री=अशोक चव्हाण&lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=[http://www.maharashtra.gov.in/ अधिकारिक वेबसाइट]&lt;br /&gt;
|अद्यतन=2010/05/07&lt;br /&gt;
|emblem=maharashtra-seal.gif&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
==इतिहास और भूगोल==&lt;br /&gt;
प्राचीन 16 महाजनपदों में अश्मक या अस्सक का स्थान आधुनिक [[अहमदनगर]] के आसपास का माना जाता है । सम्राट [[अशोक]] के शिलालेख भी [[मुंबई]] के निकट पाए गए हैं । महाराष्‍ट्र के पहले प्रसिद्ध शासक सातवाहन (ई.पू. 230 से 225 ई.) थे जो महाराष्ट्र राज्य के संस्‍थापक थे। उन्‍होंने अपने पीछे बहुत से साहित्यिक, कलात्‍मक तथा पुरातात्विक प्रमाण छोड़े हैं। उनके शासनकाल में मानव जीवन के हर क्षेत्र में भरपूर  प्रगति हुई। &lt;br /&gt;
[[चित्र:Ajanta-Caves-1.jpg|thumb|[[अजंता की गुफ़ाएँ|अजंता की गुफ़ाओं]] का विश्व प्रसिद्ध भित्ति चित्र|left]]&lt;br /&gt;
इसके बाद वाकाटक आए, जिन्‍होंने भारतीय साम्राज्‍य की स्‍थापना की। उनके शासनकाल में महाराष्‍ट्र में शिक्षा, कला तथा धर्म सभी दिशाओं में अत्यधिक विकास हुआ। उनके शासन के दौरान ही 'अजंता की गुफाओं' में उच्‍च कोटि के भित्तिचित्र बनाए गए। वाकाटको के बाद कुछ समय के लिए 'कलचुरी वंश' ने शासन किया और फिर 'चालुक्‍य' सत्‍ता में आए। इसके बाद तटवर्ती इलाकों मे 'शिलाहारों' के अलावा महाराष्‍ट्र पर 'राष्‍ट्रकूट' तथा 'यादव' शासकों का नियंत्रण रहा। यादवों ने मराठी को शासन की भाषा बनाया और दक्षिण के एक बडे भाग पर अपना आधिपत्‍य स्थापित किया।&lt;br /&gt;
अलाउद्दीन ख़िलजी पहला मुस्लिम शासक था जिसने अपना राज्य दक्षिण में मदुरै तक फैला लिया था । उसके बाद मुहम्मद बिन तुग़लक (1325) ने अपनी राजधानी [[दिल्ली]] से हटाकर [[दौलताबाद]] कर ली । यह स्थान पहले देवगिरि नाम से प्रसिद्ध था और अहमदनगर के पास है । बहमनी शासकों ने महाराष्‍ट्र तथा इसकी संस्‍कृति को समन्वित किया, पर शिवाजी के कुशल नेतृत्‍व में महाराष्‍ट्र का सर्वांगीण विकास हुआ और यह एक अलग पहचान के साथ उभरकर सामने आया। शिवाजी ने स्‍वराज तथा राष्‍ट्रीयता की एक नई भावना पैदा की। उनकी प्रचंड शाक्ति ने मुग़लों को भारत के इस भाग में आगे नहीं बढ़ने दिया। पेशवाओं ने दक्षिण के पठार से लेकर पंजाब पर हमला बोल कर मराठाओं का आधिपत्‍य स्‍थापित किया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बहमनी सल्तनत के टूटने पर यह प्रदेश गोलकुण्डा के शासन में आया और उसके बाद औरंगजेब का संक्षिप्त शासन रहा। इसके बाद मराठों की शक्ति में उत्तरोत्तर वृद्धि हुई और अठारहवीं सदी के अन्त तक मराठा पूरे महाराष्ट्र में फैल गये थे और उनका साम्राज्य दक्षिण में कर्नाटक के दक्षिणी सिरे तक हो गया था । 1820 तक आते आते अंग्रेजों ने पेशवाओं को हरा दिया था और यह प्रदेश भी अंग्रेजी साम्राज्य का अंग बन गया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
स्‍वतंत्रता संग्राम में महाराष्‍ट्र सबसे आगे था। भारतीय राष्‍ट्रीय कांग्रेस का जन्‍म भी यहीं हुआ। मुंबई तथा महाराष्‍ट्र के अन्‍य शहरों के अनगिनत नेताओं ने पहले तिलक और बाद में महात्‍मा गांधी के मार्गदर्शन में कांग्रेस के आंदोलन को आगे बढाया। गांधी जी ने भी अपने आंदोलन का केंद्र महाराष्‍ट्र को बनाया था और गांधी युग में राष्‍ट्रवादी देश की राजधानी सेवाग्राम थी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
महाराष्ट्र  की स्थापना के पचास साल पूरे हो गये हैं। महाराष्ट्र और गुजरात का स्थापना दिवस 1मई को मनाया जाता है कभी ये दोनों राज्य मुंबई का हिस्सा थे। जब मुंबई राज्य से महाराष्ट्र और गुजरात के गठन का प्रस्ताव आया तो तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने मुंबई को अलग केन्द्रशासित प्रदेश बनाने की वकालत की। उनका तर्क था कि अगर मुंबई को देश की आर्थिक राजधानी बने रहना है तो यह करना आवश्यक है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
किंतु पंडित नेहरू की नहीं चली। देश के पहले वित्तमंत्री और वित्त विशेषज्ञ चिंतामणि देशमुख ने इसका प्रखर विरोध किया और इसी मुद्दे पर केन्द्रीय मंत्रिमण्डल से इस्तीफा दे दिया। मुंबई को महाराष्ट्र में रखने के लिए आंदोलन चला जिसमें कुल 80 लोगों की आहुति हुई लेकिन आखिरकार मुंबई महाराष्ट्र का हुआ।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देश को आजादी के ब मध्य बाद भारत के सभी मराठी भाषी स्थानों का समीकरण करके एक राज्य बनाने को लेकर बड़ा आंदोलन चला और 1 मई, 1960 को कोंकण, मराठवाडा, पश्चिमी महाराष्ट्र, दक्षिण महाराष्ट्र, उत्तर महाराष्ट्र (खानदेश) तथा विदर्भ, सभी संभागों को जोड़ कर महाराष्ट्र राज्य की स्थापना की गई।&lt;br /&gt;
==महाराष्ट्र राज्य का गठन==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Maharashtra-Map-1.jpg|महाराष्ट्र का मानचित्र&amp;lt;br /&amp;gt; Map of Maharashtra|thumb]]&lt;br /&gt;
देश के राज्‍यों के भाषायी पुनर्गठन के फलस्‍वरूप 1 मई, 1960 को महाराष्‍ट्र राज्‍य का प्रशासनिक प्रादुर्भाव हुआ। यह राज्‍य आसपास के मराठी भाषी क्षेत्रों को मिलाकर बनाया गया, जो पहले चार अलग अलग प्रशासनों के नियंत्रण में था। इनमें मूल ब्रिटिश मुंबई प्रांत में शामिल दमन तथा गोवा के बीच का ज़िला, हैदराबाद के निज़ाम की रियासत के पांच ज़िले, मध्‍य प्रांत (मध्‍य प्रदेश) के दक्षिण के आठ ज़िले तथा आसपास की ऐसी अनेक छोटी-छोटी रियासतें शामिल थी, जो समीपवर्ती ज़िलों में मिल गई थी। &lt;br /&gt;
==भौगोलिक स्थिति==&lt;br /&gt;
महाराष्‍ट्र  भारत के उत्तर में बसा हुआ है और भौगोलिक दृष्टि से यह राज्‍य मुख्‍यत: पठारी है। महाराष्‍ट्र पठारों का पठार है। इसके उठे हुए पश्चिमी किनारे सहाद्री पहाडियों का निर्माण करते है और समुद्र तट के समानांतर हैं तथा इसकी ढलान पूर्व तथा दक्षिण पूर्व की ओर धीरे धीरे बढ़ती है। राज्‍य के उत्तरी भाग में सतपुड़ा की पहाडियां है, जबकि अजंता तथा सतमाला पहाडियां राज्‍य के मध्‍य भाग से होकर जाती है। अरब सागर महाराष्‍ट्र की पश्चिमी सीमा का प्रहरी है, जबकि गुजरात और मध्‍य प्रदेश इसके उत्तर में हैं। राज्‍य की पूर्वी सीमा पर छत्तीसगढ है और कर्नाटक तथा आंध्र प्रदेश इसके दक्षिण में है।&lt;br /&gt;
==जनसंख्या==&lt;br /&gt;
महाराष्ट्र की जनसंख्या सन 2001 में 96,752,247 थी, विश्व में केवल ग्यारह ऐसे देश हैं जिनकी जनसंख्या महाराष्ट्र प्रदेश से ज़्यादा है। &lt;br /&gt;
==कृषि==&lt;br /&gt;
महाराष्‍ट्र के लगभग 65 प्रतिशत श्रमिक कृषि तथा संबंधित गतिविधियों पर निर्भर है। यहां की प्रमुख फ़सलें हैं- धान, ज्‍वार, बाजरा, गेहूं, तूर (अरहर), उडद, चना और दलहन। यह राज्‍य तिलहनों का प्रमुख उत्‍पादक है और मूंगफली, सूरजमुखी, सोयाबीन प्रमुख तिलहनी फ़सलें है। महत्‍वपूर्ण नकदी फ़सलें है कपास, गन्‍ना, हल्‍दी और सब्जियां। राज्‍य में 12.90 लाख हेक्‍टेयर क्षेत्र में विभिन्‍न प्रकार के फल, जैसे आम, केला, संतरा, अंगूर, काजू आदि की फ़सलें उगाई जाती है।&lt;br /&gt;
==उद्योग==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Gateway-of-India-2.jpg|thumb|[[गेटवे ऑफ़ इन्डिया]], [[मुम्बई]]&amp;lt;br /&amp;gt; Gateway of India, Mumbai]]&lt;br /&gt;
महाराष्‍ट्र को पूरे देश का औद्योगिक क्षमता का केंद्र माना जाता है और राज्‍य की राजधानी मुंबई देश की वित्‍तीय तथा वाणिज्यिक गतिविधियों का केंद्र है। राज्‍य की अर्थव्‍यवस्‍था में औद्योगिक क्षेत्र का महत्‍वपूर्ण स्‍थान है। खाद्य उत्‍पाद, तंबाकू और इससे बनी चीजें, सूती कपडा, कपड़े से बना सामान, काग़ज और इससे बनी चीजें, मुद्रण और प्रकाशन, रबड, प्‍लास्टिक, रसायन व रासायनिक उत्‍पाद, मशीनें बिजली की मशीन, यंत्र व उपकरण तथा परिवहन उपकरण और उनके कल पुर्जे आदि का राज्‍य के औद्योगिक उत्‍पादन में महत्‍वपूर्ण योगदान है। वर्ष 2005-06 में औद्योगिक उत्‍पादन (निर्माण) वर्ष 2004-05 के मुकाबले 8.9 प्रतिशत अधिक रहा।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==सिंचाई और बिजली==&lt;br /&gt;
जून 2005 के अंत तक 32 बड़ी, 178 मंझोली और राज्‍य के क्षेत्र की 2,274 लघु सिंचाई परियोजनाएं पूरी हो चुकी थीं इसके अलावा 21 बडी 39 मंझोली सिंचाई परियोजनाओं का निर्माण कार्य जारी है। 2004 से 2005 में राज्‍य में कुल सिंचित क्षेत्र 36.36 लाख हेक्‍टेयर था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
2004-05 में महाराष्‍ट्र की कुल स्‍थापित विद्युत उत्‍पादन क्षमता 12,909 मेगावाट थी। राज्‍य में प्‍लांट लोड फैक्‍टर (पी.एल.एफ) 81.6 प्रतिशत था और बिजली उत्‍पादन 68,507 करोड किलोवाट घंटा था।&lt;br /&gt;
==परिवहन==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Bibi-Ka-Maqbara-Aurangabad.jpg|[[बीबी का मक़बरा]], [[औरंगाबाद]]&amp;lt;br /&amp;gt; Bibi Ka Maqbara, Aurangabad|thumb|left]]&lt;br /&gt;
'''सड़क''' मार्च 2005 तक राज्‍य में सड़कों की कुल लंबाई 2.29 लाख कि.मी. थी, जिसमें राष्‍ट्रीय राजमार्गों की लंबाई 4, 367 कि.मी. प्रांतीय राजमार्गों की 33,406 कि.मी., प्रमुख ज़िला सड़कों की 48,824 कि.मी., अन्‍य ज़िला सड़कों की लंबाई 44,792 कि.मी. और ग्रामीण सड़कों की कुल लंबाई 97,913 कि.मी. थी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''रेलवे''' महाराष्‍ट्र में 5,527 कि.मी. रेल मार्ग है। इसमें से लगभग 78.6 प्रतिशत बड़ी रेल लाइनें, 7.8 प्रतिशत मीटर गेज तथा 13.6 प्रतिशत छोटी रेल लाइनें है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''उड्डयन''' राज्‍य में कुल 24 हवाई अड्डे / हवाई पट्टियां है। इनमें से 17 महाराष्‍ट्र सरकार के नियंत्रण में है। चार हवाई अड्डे अंतर्राष्‍ट्रीय हवाई अड्डा प्राधिकरण / भारतीय हवाई अड्डा प्राधिकरण के नियंत्रण में हैं, ज‍बकि बाकी तीन रक्षा मंत्रालय के अधीन है। राज्‍य सरकार के नियंत्रण वाले हवाई अड्डों पर अभी व्‍यावसायिक उड़ानों की सुविधा नहीं है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''बंदरगाह''' मुम्बंई प्रमुख बंदरगाह है। राज्‍य में दो बड़े और 48 छोटे अधिसूचित बंदरगाह हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==पर्यटन स्‍थल==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Ajanta-Caves-Aurangabad-Maharashtra-2.jpg|thumb|[[अजंता की गुफाएं]], [[औरंगाबाद]]&amp;lt;br /&amp;gt; Ajanta Caves, Aurangabad]]&lt;br /&gt;
यहां के महत्‍वपूर्ण पर्यटन केंद्र है अजंता, एलोरा, एलिफेंटा, कन्‍हेरी और कारला गुफाएं, महाबलेश्‍वर, माथेरन और पंचगनी, जवाहर, मालशेजघाट, अंबोली, चिकलधारा और पन्‍हाला पर्वतीय स्‍थल। पंढरपुर, नाशिक, शिरडी, नांदेड, औधानागनाथ, त्रयंबकेवर, तुलजापुर, गणपतिपुले, भीमशंकर, हरिहरेश्‍वर, शेगाव, कोल्‍हापुर, जेजुरी तथा अंबजोगई  धार्मिक स्‍थान है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==प्रमुख नगर==&lt;br /&gt;
भारत देश में महाराष्ट्र सबसे बड़ा औद्योगिक प्रान्त है। मुंबई, पुणे, औरंगाबाद, नागपुर और नाशिक महाराष्ट्र के बडे शहरों में गिने जाते हैं। यहाँ के निवासियों की मातृभाषा मराठी है और यहाँ के लोगों को महाराष्ट्रीयन कहा जाता है। पहाड़ी नगरों में 'महाबलेश्वर' और 'माथेरान' काफ़ी प्रसिद्ध है। छुट्टियों के समय इन नगरों में बहुत ही भीड़ होती है और मौसम भी बहुत सुहावना होता है।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''धार्मिक नगर'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
*धार्मिक नगरों में नाशिक के काफ़ी नज़दीक शिर्डी नगर है। इस नगर का साईं बाबा का मन्दिर बहुत ही प्रसिद्ध है। &lt;br /&gt;
*इसी तरह मुंबई का 'महालक्ष्मी मन्दिर' और पुणे के 'दगडूशेठ गणपति मन्दिर' बहुत ही अधिक ख्याति प्राप्त हैं।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''मुंबई'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
[[चित्र:Nariman-Point-Mumbai.jpg|thumb|[[नरीमन पाइंट]], मुम्बई&amp;lt;br /&amp;gt; Nariman Point, Mumbai]]&lt;br /&gt;
मुंबई पूर्वी न्यूयॉर्क के नाम से भी विख्यात है। मुंबई में चौपाटी, गेटवे ऑफ़ इन्डिया , प्रिन्स वेल्स म्युज़ियम, एलिफ़ेन्टा केव्स और मडआईलॅन्ड बहुत ही प्रसिद्ध है।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''पुणे'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पुणे महाराष्ट्र का संस्कृति प्रधान नगर माना जाता है। शनिवारवाडा, लाल महल, सिंहगढ़ जैसे ऐतिहासिक स्थान हैं। पुणे का आई॰टी॰ पार्क और लक्ष्मी रोड काफ़ी जाना माना है।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''औरंगाबाद'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
औरंगाबाद नगर महाराष्ट्र के मध्य भाग में स्थित है। यहां के अजंता-एलोरा केव्स विश्व प्रसिद्ध हैं। इन गुफाओं में बुद्ध के तक्षण बनाये गये हैं।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''नागपुर'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नागपुर एक बहुत ही सुन्दर शहर है और यहा के संतरे पूरी दुनिया में जाने माने हैं।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''नाशिक'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नाशिक एक काफ़ी सुन्दर शहर है और यहां का मौसम सुहाना है। नाशिक के कालाराम और दूसरे मन्दिर विख्यात है और लोग [[गोदावरी नदी]] में नहाना पवित्र समझते हैं।&lt;br /&gt;
==वीथिका==&lt;br /&gt;
&amp;lt;gallery&amp;gt;&lt;br /&gt;
चित्र:Sinhagarh-Fort-Pune.jpg|[[सिंहगढ़ क़िला]], पुणे&amp;lt;br /&amp;gt; Sinhagarh Fort&lt;br /&gt;
चित्र:Ajanta-Caves-Aurangabad-Maharashtra-1.jpg|[[अजंता की गुफाएं]], [[औरंगाबाद]]&amp;lt;br /&amp;gt; Ajanta Caves, Aurangabad&lt;br /&gt;
चित्र:University-Of-Pune.jpg|[[पुणे विश्वविद्यालय]]&amp;lt;br /&amp;gt; University Of Pune&lt;br /&gt;
चित्र:Ellora-Caves-Aurangabad-Maharashtra-1.jpg|[[एलोरा की गुफाएं]], [[औरंगाबाद]]&amp;lt;br /&amp;gt; Ellora Caves, Aurangabad&lt;br /&gt;
चित्र:Infosys-Campus-Pune.jpg|[[इन्फोसिस]], [[पुणे]]&amp;lt;br /&amp;gt; Infosys, Pune&lt;br /&gt;
चित्र:Ellora-Caves-Aurangabad-Maharashtra-2.jpg|[[एलोरा की गुफाएं]], [[औरंगाबाद]]&amp;lt;br /&amp;gt; Ellora Caves, Aurangabad&lt;br /&gt;
चित्र:Sunset-At-Khandala.jpg|[[खंडाला]] में सूर्यास्त का द्रश्य&amp;lt;br /&amp;gt; View Of Sunset At Khandala&lt;br /&gt;
&amp;lt;/gallery&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==सम्बंधित लिंक==&lt;br /&gt;
{{महाराष्ट्र प्रदेश के ज़िले}}&lt;br /&gt;
{{महाराष्ट्र के पर्यटन स्थल}}&lt;br /&gt;
{{राज्य और के. शा. प्र.}}&lt;br /&gt;
[[Category:भारत के राज्य और केन्द्र शासित प्रदेश]][[Category:राज्य संरचना]]&lt;br /&gt;
[[Category:महाराष्ट्र]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Gaurav</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%A3%E0%A5%87&amp;diff=39781</id>
		<title>पुणे</title>
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		<updated>2010-07-01T13:10:47Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Gaurav: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;==स्थापना==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Sinhagarh-Fort-Pune.jpg|thumb|[[सिंहगढ़ क़िला]], पुणे&amp;lt;br /&amp;gt; Sinhagarh Fort]]&lt;br /&gt;
पुणे भूतपूर्व पूना शहर, [[महाराष्ट्र]] राज्य, दक्षिण पश्चिम [[भारत]], मूला और मूथा नदियों के संगम स्थल पर स्थित है। ‘दक्कन की रानी’ के नाम से विख्यात पुणे मराठियों की सांस्कृतिक राजधानी है। 17वीं शताब्दी में [[मराठा साम्राज्य|मराठा राज्य]] की राजधानी के रूप में पहली बार इस नगर को महत्व प्राप्त हुआ था। कुछ समय तक इस पर मुग़लों का कब्जा रहा, लेकिन बाद में 1714 से यह पुनः मराठा राज्य की राजधानी बन गया, अंततः 1817 में यह अंग्रेजों के अधिकार में चला गया। इसने [[बंबई]] प्रेज़िडेंसी की मौसमी राजधानी की भूमिका निभाई और आज़ादी के बाद यह विकासशील देश बन गया, जो हर दिशा में फैल रहा था। विशेष रूप से इसका विस्तार पुणे-मुंबई रेल और सड़क मार्गों के समानांतर हुआ, जो पिंपरी और चिंचवड से गुज़रते हैं। &lt;br /&gt;
==इतिहास==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Infosys-Campus-Pune.jpg|[[इन्फोसिस]], पुणे&amp;lt;br /&amp;gt; Infosys, Pune|thumb|left]]&lt;br /&gt;
पुणे [[शिवाजी]] महाराज के जीवन व [[मराठा साम्राज्य]] के इतिहास का एक महत्वपूर्ण अंग है। इस प्रकार मराठों और अंग्रेजों, दोनों को अपनी-अपनी शक्ति और कमज़ोरी का पता चल गया और अगले बीस वर्षों तक उनके बीच शांति रही। मराठा सरदारों में आपसी दुश्मनी और प्रतिद्वन्द्विता चलती रही और 25 अक्टूबर 1802 ई॰ को तत्कालीन पेशवा [[बाजीराव द्वितीय]] को अपने चंगुल में करने के लिए शिन्दे और होल्कर में पूना के बाहर युद्ध हुआ। बाजीराव द्वितीय कायर और षड़यंत्रकारी था और उसे राज्य के हित की कोई चिन्ता नहीं थी। जिस समय पूना का युद्ध चल ही रहा था, वह प्रतिद्वन्द्वी मराठा सरदारों के चंगुल से अपने को बचाने के लिए पूना से भागकर [[बसई]] अंग्रेजों की शरण में चला गया। वहाँ उसने 31 दिसम्बर 1802 ई॰ को बसई की लज्जाजनक संधि कर ली, जिसके द्वारा उसने पेशवा पद फिर से प्राप्त करने का मनोरथ बनाया था। इस प्रकार बाजीराव द्वितीय ने मराठा राज्य की स्वतंत्रता बेच दी और वह अंग्रेजों के द्वारा पुनः पूना की गद्दी पर आसीन कर दिया गया। परन्तु मराठा सरदारों, विशेष रूप से शिन्दे, भोंसले और होल्कर ने इस व्यवस्था को स्वीकार नहीं किया और फलस्वरूप दूसरा मराठा-युद्ध (1803-05 ई॰) छिड़ गया।&lt;br /&gt;
==यातायात और परिवहन==&lt;br /&gt;
पुणे शहर भारत के अन्य महत्वपूर्ण शहरों से सड़क, रेलवे व हवाईमार्ग से जुड़ा हुआ है। पुणे का विमानतल से पहले केवल देश के अन्य शहरों के लिए उड़ाने थी, मगर सिंगापुर व दुबई के लिए उड़ा आने के बाद इसे अन्तरराष्ट्रीय दर्जा प्राप्त हुआ है। &lt;br /&gt;
==कृषि और खनिज==&lt;br /&gt;
ज्वार, बाजरा, गन्ना और चावल यहाँ की मुख्य फ़सलें हैं। &lt;br /&gt;
==उद्योग और व्यापार==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Purandarh-Fort-Pune-1.jpg|thumb|[[पुरंदर क़िला]], पुणे&amp;lt;br /&amp;gt; Purandarh Fort, Pune]]&lt;br /&gt;
यहाँ स्थित आधुनिक विशाल औद्योगिक इकाइयों में कार, स्कूटर, ट्रक एंटीबायोटक, औषधि, आधुनिक अभियांत्रिकी पुर्ज़े तथा तेल से चलने  वाले इंजनों का निर्माण होता है। अन्य इकाइयाँ चिंचवड तथा पूर्व में भोसारी समेत आसपास के क्षेत्रों में स्थित हैं। नए उद्योग पूणे-शोलापुर मार्ग पर स्थित स्थान को पसंद करते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पुणे के आसपास के क्षेत्र, जिसे अब वृहद (ग्रेटर) पुणे कहा जाता है। इसमें सह्याद्रि पहाडियाँ, बालघाट श्रृंखला (उत्तर) और महादेव पहाडियाँ (दक्षिण) शामिल है, और भीमा नदी की ऊपरी घाटी का हिस्सा भी मिला हुआ है। &lt;br /&gt;
==शिक्षण संस्थान==&lt;br /&gt;
लबें अरसे से पुणे शैक्षणिक और सांस्कृतिक केंद्र रहा है, पूर्व प्रधानमंत्री [[जवाहर लाल नेहरू]] इसे भारत का ऑक्सफ़ोर्ड और कैब्रिज कहते थे। यहाँ के विख्यात शैक्षणिक संस्थानों में पुणे विश्वविद्यालय (स्थापना 1948), फ़र्ग्युसन कॉलेज, इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट एजुकेशन ऐंड रिसर्च, इंटरनेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट एजुकेशन ऐंड रिसर्च, इंटरनेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ इन्फ़ॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट एजुकेशन, महाराष्ट्र एकेडमी ऑफ़ इंजीनियरिंग ऐंड एजुकेशनल रिसर्च, एकेडमी ऑफ़ कम्युनिकेश्न स्किल, एकेडमी ऑफ़ पोलिटिकल ऐंड सोशल रिसर्च , छत्रपति शिवाजी मेडिकल कॉलेज, सी॰ए॰ मेडिकल कॉलेज ऑफ़ आल्टरनेटिव मेडिसिन, कॉलेज ऑफ़ कंप्यूटर ऐंड इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग, डी॰ इंस्टिट्यूट ऑफ़ वोकेशनल कोर्सेस, इंस्टिट्यूट ऑफ़ बिजनेस मैनेजमेंट ऐंड रिसर्च, फ़िल्म ऐंड टेलीविजन इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंडिया, और बी॰डी॰ इंस्टिट्यूट ऑफ़ फ़ैशन टेक्नोलॉजी शामिल हैं। यहाँ अंतराष्ट्रीय स्तर के शोध संस्थान हैं, जैसे भंडारकर ओरिएंटल रिसर्च इंस्टिट्यूट (स्थापना 1917), गोखले इंस्टिट्यूट ऑफ़ पॉलिटिक्स ऐंड इकोनॉमिक्स तथा दक्कन कॉलेज पोस्ट ग्रेजुएट रिसर्च इंस्टिट्यूट, जो मानव विश्वविद्यालय भी है और इटंर यूनिवर्सिटी सेंटर फ़ॉर एस्ट्रोनॉमी ऐंड एस्ट्रोफ़िज़िक्स एक स्वायत्त संस्था है।&lt;br /&gt;
[[चित्र:University-Of-Pune.jpg|[[पुणे विश्वविद्यालय]]&amp;lt;br /&amp;gt; University Of Pune|thumb|left]]&lt;br /&gt;
इस नगर में स्थित सरकारी कार्यालयों में शिक्षा निदेशालय, सेंकेंड्री स्कूल सर्टिफ़िकेट परिक्षा बोर्ड, महाराष्ट्र स्टेट ब्यूरो टेक्स्ट बुक प्रोडेक्शन ऐंड करीकुलर रिसर्च, तिलक महराष्ट्र विद्यापीठ तथा विभिन्न राजनितिक, सामाजिक और शैक्षिक नेताओं द्वारा स्थापित संस्थाओं द्वारा वित्त प्रदत्त शैक्षणिक संस्थान शामिल हैं। यहाँ केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजित संस्थान, जैसे भारतीय मौसम विज्ञान और नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ वायरोलॉजी भी स्थित हैं। शहर के पश्चिमी सीमा पर खड़गवासला में नेश्नल डिफ़ेंस अकादमी और सेंट्रल वाटर ऐंड पावर रिसर्च स्टेशन; उत्तर में इंस्टिट्यूट ऑफ़ ट्रॉपिकल मेटरोलॉजी; पुणे विश्वविद्यालय परिसर में इंटर यूनिवर्सिटी सेंटर फ़ॉर एस्ट्रोनॉमी ऐंड एस्ट्रो फ़िज़िक्स; पूर्व में किरकी में प्रतिरक्षा उत्पादन इकाइयाँ स्थित हैं। यहाँ एक छावनी भी है, जिसमें प्रतिरक्षा कमान इकाई और आर्म्ड फ़ोर्सेस मेडिकल स्थित हैं।&lt;br /&gt;
==जनसंख्या==&lt;br /&gt;
पुणे की जनसंख्या (2001) 25,40,069 है, और ग्रामीण क्षेत्र की जनसंख्या 80,191 है। पुणे ज़िले की जनसंख्या 72,24,224 है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==पर्यटन==&lt;br /&gt;
प्रमुख धार्मिक, ऐतिहासिक और पर्यटक स्थल सह्याद्रिके आसपास तथा भीमा नदी के किनारे स्थित इसकी ढलानों पर अवस्थित हैं। सिंहगढ़ जैसे कुछ विख्यात मराठा क़िले अब आधुनिक आरामगाह में परिवर्तित कर दिए गए हैं। यहाँ के धार्मिक केंद्रों में [[भीमशंकर ज्योतिर्लिंग|भीमशंकर]], जो भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। संत कवि तुकाराम का जन्म स्थल देहू, आचार्य रजनीश का आश्रम (ओशो कम्यूम इंटरनेशनल सेंटर)। इसके निकट ही संत मेहरबाबा से संबंधित स्थान मेहराजाद और मेहराबाद हैं।&lt;br /&gt;
[[Category:महाराष्ट्र]][[Category:महाराष्ट्र_के_धार्मिक_स्थल]][[Category:महाराष्ट्र_के_नगर]][[Category:महाराष्ट्र_के_पर्यटन_स्थल]][[Category:पर्यटन कोश]][[Category:भारत के नगर]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Gaurav</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%A3%E0%A5%87&amp;diff=39780</id>
		<title>पुणे</title>
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		<updated>2010-07-01T13:09:41Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Gaurav: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;==स्थापना==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Sinhagarh-Fort-Pune.jpg|thumb|[[सिंहगढ़ क़िला]], पुणे&amp;lt;br /&amp;gt; Sinhagarh Fort]]&lt;br /&gt;
पुणे भूतपूर्व पूना शहर, [[महाराष्ट्र]] राज्य, दक्षिण पश्चिम [[भारत]], मूला और मूथा नदियों के संगम स्थल पर स्थित है। ‘दक्कन की रानी’ के नाम से विख्यात पुणे मराठियों की सांस्कृतिक राजधानी है। 17वीं शताब्दी में [[मराठा साम्राज्य|मराठा राज्य]] की राजधानी के रूप में पहली बार इस नगर को महत्व प्राप्त हुआ था। कुछ समय तक इस पर मुग़लों का कब्जा रहा, लेकिन बाद में 1714 से यह पुनः मराठा राज्य की राजधानी बन गया, अंततः 1817 में यह अंग्रेजों के अधिकार में चला गया। इसने [[बंबई]] प्रेज़िडेंसी की मौसमी राजधानी की भूमिका निभाई और आज़ादी के बाद यह विकासशील देश बन गया, जो हर दिशा में फैल रहा था। विशेष रूप से इसका विस्तार पुणे-मुंबई रेल और सड़क मार्गों के समानांतर हुआ, जो पिंपरी और चिंचवड से गुज़रते हैं। &lt;br /&gt;
==इतिहास==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Purandarh-Fort-Pune-1.jpg|thumb|[[पुरंदर क़िला]], पुणे&amp;lt;br /&amp;gt; Purandarh Fort, Pune|left]]&lt;br /&gt;
पुणे [[शिवाजी]] महाराज के जीवन व [[मराठा साम्राज्य]] के इतिहास का एक महत्वपूर्ण अंग है। इस प्रकार मराठों और अंग्रेजों, दोनों को अपनी-अपनी शक्ति और कमज़ोरी का पता चल गया और अगले बीस वर्षों तक उनके बीच शांति रही। मराठा सरदारों में आपसी दुश्मनी और प्रतिद्वन्द्विता चलती रही और 25 अक्टूबर 1802 ई॰ को तत्कालीन पेशवा [[बाजीराव द्वितीय]] को अपने चंगुल में करने के लिए शिन्दे और होल्कर में पूना के बाहर युद्ध हुआ। बाजीराव द्वितीय कायर और षड़यंत्रकारी था और उसे राज्य के हित की कोई चिन्ता नहीं थी। जिस समय पूना का युद्ध चल ही रहा था, वह प्रतिद्वन्द्वी मराठा सरदारों के चंगुल से अपने को बचाने के लिए पूना से भागकर [[बसई]] अंग्रेजों की शरण में चला गया। वहाँ उसने 31 दिसम्बर 1802 ई॰ को बसई की लज्जाजनक संधि कर ली, जिसके द्वारा उसने पेशवा पद फिर से प्राप्त करने का मनोरथ बनाया था। इस प्रकार बाजीराव द्वितीय ने मराठा राज्य की स्वतंत्रता बेच दी और वह अंग्रेजों के द्वारा पुनः पूना की गद्दी पर आसीन कर दिया गया। परन्तु मराठा सरदारों, विशेष रूप से शिन्दे, भोंसले और होल्कर ने इस व्यवस्था को स्वीकार नहीं किया और फलस्वरूप दूसरा मराठा-युद्ध (1803-05 ई॰) छिड़ गया।&lt;br /&gt;
==यातायात और परिवहन==&lt;br /&gt;
पुणे शहर भारत के अन्य महत्वपूर्ण शहरों से सड़क, रेलवे व हवाईमार्ग से जुड़ा हुआ है। पुणे का विमानतल से पहले केवल देश के अन्य शहरों के लिए उड़ाने थी, मगर सिंगापुर व दुबई के लिए उड़ा आने के बाद इसे अन्तरराष्ट्रीय दर्जा प्राप्त हुआ है। &lt;br /&gt;
==कृषि और खनिज==&lt;br /&gt;
ज्वार, बाजरा, गन्ना और चावल यहाँ की मुख्य फ़सलें हैं। &lt;br /&gt;
==उद्योग और व्यापार==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Infosys-Campus-Pune.jpg|[[इन्फोसिस]], पुणे&amp;lt;br /&amp;gt; Infosys, Pune|thumb]]&lt;br /&gt;
यहाँ स्थित आधुनिक विशाल औद्योगिक इकाइयों में कार, स्कूटर, ट्रक एंटीबायोटक, औषधि, आधुनिक अभियांत्रिकी पुर्ज़े तथा तेल से चलने  वाले इंजनों का निर्माण होता है। अन्य इकाइयाँ चिंचवड तथा पूर्व में भोसारी समेत आसपास के क्षेत्रों में स्थित हैं। नए उद्योग पूणे-शोलापुर मार्ग पर स्थित स्थान को पसंद करते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पुणे के आसपास के क्षेत्र, जिसे अब वृहद (ग्रेटर) पुणे कहा जाता है। इसमें सह्याद्रि पहाडियाँ, बालघाट श्रृंखला (उत्तर) और महादेव पहाडियाँ (दक्षिण) शामिल है, और भीमा नदी की ऊपरी घाटी का हिस्सा भी मिला हुआ है। &lt;br /&gt;
==शिक्षण संस्थान==&lt;br /&gt;
लबें अरसे से पुणे शैक्षणिक और सांस्कृतिक केंद्र रहा है, पूर्व प्रधानमंत्री [[जवाहर लाल नेहरू]] इसे भारत का ऑक्सफ़ोर्ड और कैब्रिज कहते थे। यहाँ के विख्यात शैक्षणिक संस्थानों में पुणे विश्वविद्यालय (स्थापना 1948), फ़र्ग्युसन कॉलेज, इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट एजुकेशन ऐंड रिसर्च, इंटरनेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट एजुकेशन ऐंड रिसर्च, इंटरनेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ इन्फ़ॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट एजुकेशन, महाराष्ट्र एकेडमी ऑफ़ इंजीनियरिंग ऐंड एजुकेशनल रिसर्च, एकेडमी ऑफ़ कम्युनिकेश्न स्किल, एकेडमी ऑफ़ पोलिटिकल ऐंड सोशल रिसर्च , छत्रपति शिवाजी मेडिकल कॉलेज, सी॰ए॰ मेडिकल कॉलेज ऑफ़ आल्टरनेटिव मेडिसिन, कॉलेज ऑफ़ कंप्यूटर ऐंड इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग, डी॰ इंस्टिट्यूट ऑफ़ वोकेशनल कोर्सेस, इंस्टिट्यूट ऑफ़ बिजनेस मैनेजमेंट ऐंड रिसर्च, फ़िल्म ऐंड टेलीविजन इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंडिया, और बी॰डी॰ इंस्टिट्यूट ऑफ़ फ़ैशन टेक्नोलॉजी शामिल हैं। यहाँ अंतराष्ट्रीय स्तर के शोध संस्थान हैं, जैसे भंडारकर ओरिएंटल रिसर्च इंस्टिट्यूट (स्थापना 1917), गोखले इंस्टिट्यूट ऑफ़ पॉलिटिक्स ऐंड इकोनॉमिक्स तथा दक्कन कॉलेज पोस्ट ग्रेजुएट रिसर्च इंस्टिट्यूट, जो मानव विश्वविद्यालय भी है और इटंर यूनिवर्सिटी सेंटर फ़ॉर एस्ट्रोनॉमी ऐंड एस्ट्रोफ़िज़िक्स एक स्वायत्त संस्था है।&lt;br /&gt;
[[चित्र:University-Of-Pune.jpg|[[पुणे विश्वविद्यालय]]&amp;lt;br /&amp;gt; University Of Pune|thumb|left]]&lt;br /&gt;
इस नगर में स्थित सरकारी कार्यालयों में शिक्षा निदेशालय, सेंकेंड्री स्कूल सर्टिफ़िकेट परिक्षा बोर्ड, महाराष्ट्र स्टेट ब्यूरो टेक्स्ट बुक प्रोडेक्शन ऐंड करीकुलर रिसर्च, तिलक महराष्ट्र विद्यापीठ तथा विभिन्न राजनितिक, सामाजिक और शैक्षिक नेताओं द्वारा स्थापित संस्थाओं द्वारा वित्त प्रदत्त शैक्षणिक संस्थान शामिल हैं। यहाँ केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजित संस्थान, जैसे भारतीय मौसम विज्ञान और नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ वायरोलॉजी भी स्थित हैं। शहर के पश्चिमी सीमा पर खड़गवासला में नेश्नल डिफ़ेंस अकादमी और सेंट्रल वाटर ऐंड पावर रिसर्च स्टेशन; उत्तर में इंस्टिट्यूट ऑफ़ ट्रॉपिकल मेटरोलॉजी; पुणे विश्वविद्यालय परिसर में इंटर यूनिवर्सिटी सेंटर फ़ॉर एस्ट्रोनॉमी ऐंड एस्ट्रो फ़िज़िक्स; पूर्व में किरकी में प्रतिरक्षा उत्पादन इकाइयाँ स्थित हैं। यहाँ एक छावनी भी है, जिसमें प्रतिरक्षा कमान इकाई और आर्म्ड फ़ोर्सेस मेडिकल स्थित हैं।&lt;br /&gt;
==जनसंख्या==&lt;br /&gt;
पुणे की जनसंख्या (2001) 25,40,069 है, और ग्रामीण क्षेत्र की जनसंख्या 80,191 है। पुणे ज़िले की जनसंख्या 72,24,224 है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==पर्यटन==&lt;br /&gt;
प्रमुख धार्मिक, ऐतिहासिक और पर्यटक स्थल सह्याद्रिके आसपास तथा भीमा नदी के किनारे स्थित इसकी ढलानों पर अवस्थित हैं। सिंहगढ़ जैसे कुछ विख्यात मराठा क़िले अब आधुनिक आरामगाह में परिवर्तित कर दिए गए हैं। यहाँ के धार्मिक केंद्रों में [[भीमशंकर ज्योतिर्लिंग|भीमशंकर]], जो भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। संत कवि तुकाराम का जन्म स्थल देहू, आचार्य रजनीश का आश्रम (ओशो कम्यूम इंटरनेशनल सेंटर)। इसके निकट ही संत मेहरबाबा से संबंधित स्थान मेहराजाद और मेहराबाद हैं।&lt;br /&gt;
[[Category:महाराष्ट्र]][[Category:महाराष्ट्र_के_धार्मिक_स्थल]][[Category:महाराष्ट्र_के_नगर]][[Category:महाराष्ट्र_के_पर्यटन_स्थल]][[Category:पर्यटन कोश]][[Category:भारत के नगर]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Gaurav</name></author>
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		<title>महाराष्ट्र</title>
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		<updated>2010-07-01T13:08:56Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Gaurav: /* वीथिका */&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा राज्य&lt;br /&gt;
|Image=Maharashtra-Map.jpg&lt;br /&gt;
|राजधानी=मुंबई&lt;br /&gt;
|जनसंख्या=96879&lt;br /&gt;
|जनसंख्या घनत्व=315&lt;br /&gt;
|क्षेत्रफल=308,000&lt;br /&gt;
|भौगोलिक निर्देशांक=18° 58' 30&amp;quot; N 72° 49' 33&amp;quot; E&lt;br /&gt;
|ज़िले=35&lt;br /&gt;
|महानगर=मुंबई&lt;br /&gt;
|बड़े नगर=मुंबई, पुणे, नागपूर, औरंगाबाद, कोल्हापूर, नासिक, शोलापूर, अमरावती, सांगली, नांदेड&lt;br /&gt;
|राजभाषा(एँ)=मराठी , हिन्दी , अंग्रेजी,&lt;br /&gt;
|स्थापना=1960/05/01&lt;br /&gt;
|मुख्य ऐतिहासिक स्थल=गेटवे ऑफ़ इन्डिया, अजंता-एलोरा केव्स, शनिवारवाडा, लाल महल, सिंहगढ़&lt;br /&gt;
|मुख्य पर्यटन स्थल=गेटवे ऑफ़ इन्डिया, मडआईलॅन्ड, अजंता-एलोरा केव्स, मुंबई चौपाटी&lt;br /&gt;
|लिंग अनुपात=1000:922&lt;br /&gt;
|साक्षरता=76.9&lt;br /&gt;
|राज्यपाल=एस एम कृष्णा&lt;br /&gt;
|मुख्यमंत्री=अशोक चव्हाण&lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=[http://www.maharashtra.gov.in/ अधिकारिक वेबसाइट]&lt;br /&gt;
|अद्यतन=2010/05/07&lt;br /&gt;
|emblem=maharashtra-seal.gif&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
==इतिहास और भूगोल==&lt;br /&gt;
प्राचीन 16 महाजनपदों में अश्मक या अस्सक का स्थान आधुनिक [[अहमदनगर]] के आसपास का माना जाता है । सम्राट [[अशोक]] के शिलालेख भी [[मुंबई]] के निकट पाए गए हैं । महाराष्‍ट्र के पहले प्रसिद्ध शासक सातवाहन (ई.पू. 230 से 225 ई.) थे जो महाराष्ट्र राज्य के संस्‍थापक थे। उन्‍होंने अपने पीछे बहुत से साहित्यिक, कलात्‍मक तथा पुरातात्विक प्रमाण छोड़े हैं। उनके शासनकाल में मानव जीवन के हर क्षेत्र में भरपूर  प्रगति हुई। &lt;br /&gt;
[[चित्र:Ajanta-Caves-1.jpg|thumb|[[अजंता की गुफ़ाएँ|अजंता की गुफ़ाओं]] का विश्व प्रसिद्ध भित्ति चित्र|left]]&lt;br /&gt;
इसके बाद वाकाटक आए, जिन्‍होंने भारतीय साम्राज्‍य की स्‍थापना की। उनके शासनकाल में महाराष्‍ट्र में शिक्षा, कला तथा धर्म सभी दिशाओं में अत्यधिक विकास हुआ। उनके शासन के दौरान ही 'अजंता की गुफाओं' में उच्‍च कोटि के भित्तिचित्र बनाए गए। वाकाटको के बाद कुछ समय के लिए 'कलचुरी वंश' ने शासन किया और फिर 'चालुक्‍य' सत्‍ता में आए। इसके बाद तटवर्ती इलाकों मे 'शिलाहारों' के अलावा महाराष्‍ट्र पर 'राष्‍ट्रकूट' तथा 'यादव' शासकों का नियंत्रण रहा। यादवों ने मराठी को शासन की भाषा बनाया और दक्षिण के एक बडे भाग पर अपना आधिपत्‍य स्थापित किया।&lt;br /&gt;
अलाउद्दीन ख़िलजी पहला मुस्लिम शासक था जिसने अपना राज्य दक्षिण में मदुरै तक फैला लिया था । उसके बाद मुहम्मद बिन तुग़लक (1325) ने अपनी राजधानी [[दिल्ली]] से हटाकर [[दौलताबाद]] कर ली । यह स्थान पहले देवगिरि नाम से प्रसिद्ध था और अहमदनगर के पास है । बहमनी शासकों ने महाराष्‍ट्र तथा इसकी संस्‍कृति को समन्वित किया, पर शिवाजी के कुशल नेतृत्‍व में महाराष्‍ट्र का सर्वांगीण विकास हुआ और यह एक अलग पहचान के साथ उभरकर सामने आया। शिवाजी ने स्‍वराज तथा राष्‍ट्रीयता की एक नई भावना पैदा की। उनकी प्रचंड शाक्ति ने मुग़लों को भारत के इस भाग में आगे नहीं बढ़ने दिया। पेशवाओं ने दक्षिण के पठार से लेकर पंजाब पर हमला बोल कर मराठाओं का आधिपत्‍य स्‍थापित किया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बहमनी सल्तनत के टूटने पर यह प्रदेश गोलकुण्डा के शासन में आया और उसके बाद औरंगजेब का संक्षिप्त शासन रहा। इसके बाद मराठों की शक्ति में उत्तरोत्तर वृद्धि हुई और अठारहवीं सदी के अन्त तक मराठा पूरे महाराष्ट्र में फैल गये थे और उनका साम्राज्य दक्षिण में कर्नाटक के दक्षिणी सिरे तक हो गया था । 1820 तक आते आते अंग्रेजों ने पेशवाओं को हरा दिया था और यह प्रदेश भी अंग्रेजी साम्राज्य का अंग बन गया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
स्‍वतंत्रता संग्राम में महाराष्‍ट्र सबसे आगे था। भारतीय राष्‍ट्रीय कांग्रेस का जन्‍म भी यहीं हुआ। मुंबई तथा महाराष्‍ट्र के अन्‍य शहरों के अनगिनत नेताओं ने पहले तिलक और बाद में महात्‍मा गांधी के मार्गदर्शन में कांग्रेस के आंदोलन को आगे बढाया। गांधी जी ने भी अपने आंदोलन का केंद्र महाराष्‍ट्र को बनाया था और गांधी युग में राष्‍ट्रवादी देश की राजधानी सेवाग्राम थी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
महाराष्ट्र  की स्थापना के पचास साल पूरे हो गये हैं। महाराष्ट्र और गुजरात का स्थापना दिवस 1मई को मनाया जाता है कभी ये दोनों राज्य मुंबई का हिस्सा थे। जब मुंबई राज्य से महाराष्ट्र और गुजरात के गठन का प्रस्ताव आया तो तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने मुंबई को अलग केन्द्रशासित प्रदेश बनाने की वकालत की। उनका तर्क था कि अगर मुंबई को देश की आर्थिक राजधानी बने रहना है तो यह करना आवश्यक है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
किंतु पंडित नेहरू की नहीं चली। देश के पहले वित्तमंत्री और वित्त विशेषज्ञ चिंतामणि देशमुख ने इसका प्रखर विरोध किया और इसी मुद्दे पर केन्द्रीय मंत्रिमण्डल से इस्तीफा दे दिया। मुंबई को महाराष्ट्र में रखने के लिए आंदोलन चला जिसमें कुल 80 लोगों की आहुति हुई लेकिन आखिरकार मुंबई महाराष्ट्र का हुआ।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देश को आजादी के ब मध्य बाद भारत के सभी मराठी भाषी स्थानों का समीकरण करके एक राज्य बनाने को लेकर बड़ा आंदोलन चला और 1 मई, 1960 को कोंकण, मराठवाडा, पश्चिमी महाराष्ट्र, दक्षिण महाराष्ट्र, उत्तर महाराष्ट्र (खानदेश) तथा विदर्भ, सभी संभागों को जोड़ कर महाराष्ट्र राज्य की स्थापना की गई।&lt;br /&gt;
==महाराष्ट्र राज्य का गठन==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Maharashtra-Map-1.jpg|महाराष्ट्र का मानचित्र&amp;lt;br /&amp;gt; Map of Maharashtra|thumb]]&lt;br /&gt;
देश के राज्‍यों के भाषायी पुनर्गठन के फलस्‍वरूप 1 मई, 1960 को महाराष्‍ट्र राज्‍य का प्रशासनिक प्रादुर्भाव हुआ। यह राज्‍य आसपास के मराठी भाषी क्षेत्रों को मिलाकर बनाया गया, जो पहले चार अलग अलग प्रशासनों के नियंत्रण में था। इनमें मूल ब्रिटिश मुंबई प्रांत में शामिल दमन तथा गोवा के बीच का ज़िला, हैदराबाद के निज़ाम की रियासत के पांच ज़िले, मध्‍य प्रांत (मध्‍य प्रदेश) के दक्षिण के आठ ज़िले तथा आसपास की ऐसी अनेक छोटी-छोटी रियासतें शामिल थी, जो समीपवर्ती ज़िलों में मिल गई थी। &lt;br /&gt;
==भौगोलिक स्थिति==&lt;br /&gt;
महाराष्‍ट्र  भारत के उत्तर में बसा हुआ है और भौगोलिक दृष्टि से यह राज्‍य मुख्‍यत: पठारी है। महाराष्‍ट्र पठारों का पठार है। इसके उठे हुए पश्चिमी किनारे सहाद्री पहाडियों का निर्माण करते है और समुद्र तट के समानांतर हैं तथा इसकी ढलान पूर्व तथा दक्षिण पूर्व की ओर धीरे धीरे बढ़ती है। राज्‍य के उत्तरी भाग में सतपुड़ा की पहाडियां है, जबकि अजंता तथा सतमाला पहाडियां राज्‍य के मध्‍य भाग से होकर जाती है। अरब सागर महाराष्‍ट्र की पश्चिमी सीमा का प्रहरी है, जबकि गुजरात और मध्‍य प्रदेश इसके उत्तर में हैं। राज्‍य की पूर्वी सीमा पर छत्तीसगढ है और कर्नाटक तथा आंध्र प्रदेश इसके दक्षिण में है।&lt;br /&gt;
==जनसंख्या==&lt;br /&gt;
महाराष्ट्र की जनसंख्या सन 2001 में 96,752,247 थी, विश्व में केवल ग्यारह ऐसे देश हैं जिनकी जनसंख्या महाराष्ट्र प्रदेश से ज़्यादा है। &lt;br /&gt;
==कृषि==&lt;br /&gt;
महाराष्‍ट्र के लगभग 65 प्रतिशत श्रमिक कृषि तथा संबंधित गतिविधियों पर निर्भर है। यहां की प्रमुख फ़सलें हैं- धान, ज्‍वार, बाजरा, गेहूं, तूर (अरहर), उडद, चना और दलहन। यह राज्‍य तिलहनों का प्रमुख उत्‍पादक है और मूंगफली, सूरजमुखी, सोयाबीन प्रमुख तिलहनी फ़सलें है। महत्‍वपूर्ण नकदी फ़सलें है कपास, गन्‍ना, हल्‍दी और सब्जियां। राज्‍य में 12.90 लाख हेक्‍टेयर क्षेत्र में विभिन्‍न प्रकार के फल, जैसे आम, केला, संतरा, अंगूर, काजू आदि की फ़सलें उगाई जाती है।&lt;br /&gt;
==उद्योग==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Gateway-of-India-2.jpg|thumb|[[गेटवे ऑफ़ इन्डिया]], [[मुम्बई]]&amp;lt;br /&amp;gt; Gateway of India, Mumbai]]&lt;br /&gt;
महाराष्‍ट्र को पूरे देश का औद्योगिक क्षमता का केंद्र माना जाता है और राज्‍य की राजधानी मुंबई देश की वित्‍तीय तथा वाणिज्यिक गतिविधियों का केंद्र है। राज्‍य की अर्थव्‍यवस्‍था में औद्योगिक क्षेत्र का महत्‍वपूर्ण स्‍थान है। खाद्य उत्‍पाद, तंबाकू और इससे बनी चीजें, सूती कपडा, कपड़े से बना सामान, काग़ज और इससे बनी चीजें, मुद्रण और प्रकाशन, रबड, प्‍लास्टिक, रसायन व रासायनिक उत्‍पाद, मशीनें बिजली की मशीन, यंत्र व उपकरण तथा परिवहन उपकरण और उनके कल पुर्जे आदि का राज्‍य के औद्योगिक उत्‍पादन में महत्‍वपूर्ण योगदान है। वर्ष 2005-06 में औद्योगिक उत्‍पादन (निर्माण) वर्ष 2004-05 के मुकाबले 8.9 प्रतिशत अधिक रहा।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==सिंचाई और बिजली==&lt;br /&gt;
जून 2005 के अंत तक 32 बड़ी, 178 मंझोली और राज्‍य के क्षेत्र की 2,274 लघु सिंचाई परियोजनाएं पूरी हो चुकी थीं इसके अलावा 21 बडी 39 मंझोली सिंचाई परियोजनाओं का निर्माण कार्य जारी है। 2004 से 2005 में राज्‍य में कुल सिंचित क्षेत्र 36.36 लाख हेक्‍टेयर था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
2004-05 में महाराष्‍ट्र की कुल स्‍थापित विद्युत उत्‍पादन क्षमता 12,909 मेगावाट थी। राज्‍य में प्‍लांट लोड फैक्‍टर (पी.एल.एफ) 81.6 प्रतिशत था और बिजली उत्‍पादन 68,507 करोड किलोवाट घंटा था।&lt;br /&gt;
==परिवहन==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Bibi-Ka-Maqbara-Aurangabad.jpg|[[बीबी का मक़बरा]], [[औरंगाबाद]]&amp;lt;br /&amp;gt; Bibi Ka Maqbara, Aurangabad|thumb|left]]&lt;br /&gt;
'''सड़क''' मार्च 2005 तक राज्‍य में सड़कों की कुल लंबाई 2.29 लाख कि.मी. थी, जिसमें राष्‍ट्रीय राजमार्गों की लंबाई 4, 367 कि.मी. प्रांतीय राजमार्गों की 33,406 कि.मी., प्रमुख ज़िला सड़कों की 48,824 कि.मी., अन्‍य ज़िला सड़कों की लंबाई 44,792 कि.मी. और ग्रामीण सड़कों की कुल लंबाई 97,913 कि.मी. थी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''रेलवे''' महाराष्‍ट्र में 5,527 कि.मी. रेल मार्ग है। इसमें से लगभग 78.6 प्रतिशत बड़ी रेल लाइनें, 7.8 प्रतिशत मीटर गेज तथा 13.6 प्रतिशत छोटी रेल लाइनें है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''उड्डयन''' राज्‍य में कुल 24 हवाई अड्डे / हवाई पट्टियां है। इनमें से 17 महाराष्‍ट्र सरकार के नियंत्रण में है। चार हवाई अड्डे अंतर्राष्‍ट्रीय हवाई अड्डा प्राधिकरण / भारतीय हवाई अड्डा प्राधिकरण के नियंत्रण में हैं, ज‍बकि बाकी तीन रक्षा मंत्रालय के अधीन है। राज्‍य सरकार के नियंत्रण वाले हवाई अड्डों पर अभी व्‍यावसायिक उड़ानों की सुविधा नहीं है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''बंदरगाह''' मुम्बंई प्रमुख बंदरगाह है। राज्‍य में दो बड़े और 48 छोटे अधिसूचित बंदरगाह हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==पर्यटन स्‍थल==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Ajanta-Caves-Aurangabad-Maharashtra-2.jpg|thumb|[[अजंता की गुफाएं]], [[औरंगाबाद]]&amp;lt;br /&amp;gt; Ajanta Caves, Aurangabad]]&lt;br /&gt;
यहां के महत्‍वपूर्ण पर्यटन केंद्र है अजंता, एलोरा, एलिफेंटा, कन्‍हेरी और कारला गुफाएं, महाबलेश्‍वर, माथेरन और पंचगनी, जवाहर, मालशेजघाट, अंबोली, चिकलधारा और पन्‍हाला पर्वतीय स्‍थल। पंढरपुर, नाशिक, शिरडी, नांदेड, औधानागनाथ, त्रयंबकेवर, तुलजापुर, गणपतिपुले, भीमशंकर, हरिहरेश्‍वर, शेगाव, कोल्‍हापुर, जेजुरी तथा अंबजोगई  धार्मिक स्‍थान है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==प्रमुख नगर==&lt;br /&gt;
भारत देश में महाराष्ट्र सबसे बड़ा औद्योगिक प्रान्त है। मुंबई, पुणे, औरंगाबाद, नागपुर और नाशिक महाराष्ट्र के बडे शहरों में गिने जाते हैं। यहाँ के निवासियों की मातृभाषा मराठी है और यहाँ के लोगों को महाराष्ट्रीयन कहा जाता है। पहाड़ी नगरों में 'महाबलेश्वर' और 'माथेरान' काफ़ी प्रसिद्ध है। छुट्टियों के समय इन नगरों में बहुत ही भीड़ होती है और मौसम भी बहुत सुहावना होता है।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''धार्मिक नगर'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
*धार्मिक नगरों में नाशिक के काफ़ी नज़दीक शिर्डी नगर है। इस नगर का साईं बाबा का मन्दिर बहुत ही प्रसिद्ध है। &lt;br /&gt;
*इसी तरह मुंबई का 'महालक्ष्मी मन्दिर' और पुणे के 'दगडूशेठ गणपति मन्दिर' बहुत ही अधिक ख्याति प्राप्त हैं।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''मुंबई'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
[[चित्र:Nariman-Point-Mumbai.jpg|thumb|[[नरीमन पाइंट]], मुम्बई&amp;lt;br /&amp;gt; Nariman Point, Mumbai]]&lt;br /&gt;
मुंबई पूर्वी न्यूयॉर्क के नाम से भी विख्यात है। मुंबई में चौपाटी, गेटवे ऑफ़ इन्डिया , प्रिन्स वेल्स म्युज़ियम, एलिफ़ेन्टा केव्स और मडआईलॅन्ड बहुत ही प्रसिद्ध है।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''पुणे'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पुणे महाराष्ट्र का संस्कृति प्रधान नगर माना जाता है। शनिवारवाडा, लाल महल, सिंहगढ़ जैसे ऐतिहासिक स्थान हैं। पुणे का आई॰टी॰ पार्क और लक्ष्मी रोड काफ़ी जाना माना है।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''औरंगाबाद'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
औरंगाबाद नगर महाराष्ट्र के मध्य भाग में स्थित है। यहां के अजंता-एलोरा केव्स विश्व प्रसिद्ध हैं। इन गुफाओं में बुद्ध के तक्षण बनाये गये हैं।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''नागपुर'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नागपुर एक बहुत ही सुन्दर शहर है और यहा के संतरे पूरी दुनिया में जाने माने हैं।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''नाशिक'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नाशिक एक काफ़ी सुन्दर शहर है और यहां का मौसम सुहाना है। नाशिक के कालाराम और दूसरे मन्दिर विख्यात है और लोग [[गोदावरी नदी]] में नहाना पवित्र समझते हैं।&lt;br /&gt;
==वीथिका==&lt;br /&gt;
&amp;lt;gallery&amp;gt;&lt;br /&gt;
चित्र:Sinhagarh-Fort-Pune.jpg|[[सिंहगढ़ क़िला]], पुणे&amp;lt;br /&amp;gt; Sinhagarh Fort&lt;br /&gt;
चित्र:Ajanta-Caves-Aurangabad-Maharashtra-1.jpg|[[अजंता की गुफाएं]], [[औरंगाबाद]]&amp;lt;br /&amp;gt; Ajanta Caves, Aurangabad&lt;br /&gt;
चित्र:University-Of-Pune.jpg|[[पुणे विश्वविद्यालय]]&amp;lt;br /&amp;gt; University Of Pune&lt;br /&gt;
चित्र:Ellora-Caves-Aurangabad-Maharashtra-1.jpg|[[एलोरा की गुफाएं]], [[औरंगाबाद]]&amp;lt;br /&amp;gt; Ellora Caves, Aurangabad&lt;br /&gt;
चित्र:Infosys-Campus-Pune.jpg|इन्फोसिस, [[पुणे]]&amp;lt;br /&amp;gt; Infosys, Pune&lt;br /&gt;
चित्र:Ellora-Caves-Aurangabad-Maharashtra-2.jpg|[[एलोरा की गुफाएं]], [[औरंगाबाद]]&amp;lt;br /&amp;gt; Ellora Caves, Aurangabad&lt;br /&gt;
चित्र:Sunset-At-Khandala.jpg|[[खंडाला]] में सूर्यास्त का द्रश्य&amp;lt;br /&amp;gt; View Of Sunset At Khandala&lt;br /&gt;
&amp;lt;/gallery&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==सम्बंधित लिंक==&lt;br /&gt;
{{महाराष्ट्र प्रदेश के ज़िले}}&lt;br /&gt;
{{महाराष्ट्र के पर्यटन स्थल}}&lt;br /&gt;
{{राज्य और के. शा. प्र.}}&lt;br /&gt;
[[Category:भारत के राज्य और केन्द्र शासित प्रदेश]][[Category:राज्य संरचना]]&lt;br /&gt;
[[Category:महाराष्ट्र]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Gaurav</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%A3%E0%A5%87&amp;diff=39777</id>
		<title>पुणे</title>
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		<updated>2010-07-01T13:08:09Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Gaurav: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;==स्थापना==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Sinhagarh-Fort-Pune.jpg|thumb|[[सिंहगढ़ क़िला]], पुणे&amp;lt;br /&amp;gt; Sinhagarh Fort]]&lt;br /&gt;
पुणे भूतपूर्व पूना शहर, [[महाराष्ट्र]] राज्य, दक्षिण पश्चिम [[भारत]], मूला और मूथा नदियों के संगम स्थल पर स्थित है। ‘दक्कन की रानी’ के नाम से विख्यात पुणे मराठियों की सांस्कृतिक राजधानी है। 17वीं शताब्दी में [[मराठा साम्राज्य|मराठा राज्य]] की राजधानी के रूप में पहली बार इस नगर को महत्व प्राप्त हुआ था। कुछ समय तक इस पर मुग़लों का कब्जा रहा, लेकिन बाद में 1714 से यह पुनः मराठा राज्य की राजधानी बन गया, अंततः 1817 में यह अंग्रेजों के अधिकार में चला गया। इसने [[बंबई]] प्रेज़िडेंसी की मौसमी राजधानी की भूमिका निभाई और आज़ादी के बाद यह विकासशील देश बन गया, जो हर दिशा में फैल रहा था। विशेष रूप से इसका विस्तार पुणे-मुंबई रेल और सड़क मार्गों के समानांतर हुआ, जो पिंपरी और चिंचवड से गुज़रते हैं। &lt;br /&gt;
==इतिहास==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Purandarh-Fort-Pune-1.jpg|thumb|[[पुरंदर क़िला]], पुणे&amp;lt;br /&amp;gt; Purandarh Fort, Pune|left]]&lt;br /&gt;
पुणे [[शिवाजी]] महाराज के जीवन व [[मराठा साम्राज्य]] के इतिहास का एक महत्वपूर्ण अंग है। इस प्रकार मराठों और अंग्रेजों, दोनों को अपनी-अपनी शक्ति और कमज़ोरी का पता चल गया और अगले बीस वर्षों तक उनके बीच शांति रही। मराठा सरदारों में आपसी दुश्मनी और प्रतिद्वन्द्विता चलती रही और 25 अक्टूबर 1802 ई॰ को तत्कालीन पेशवा [[बाजीराव द्वितीय]] को अपने चंगुल में करने के लिए शिन्दे और होल्कर में पूना के बाहर युद्ध हुआ। बाजीराव द्वितीय कायर और षड़यंत्रकारी था और उसे राज्य के हित की कोई चिन्ता नहीं थी। जिस समय पूना का युद्ध चल ही रहा था, वह प्रतिद्वन्द्वी मराठा सरदारों के चंगुल से अपने को बचाने के लिए पूना से भागकर [[बसई]] अंग्रेजों की शरण में चला गया। वहाँ उसने 31 दिसम्बर 1802 ई॰ को बसई की लज्जाजनक संधि कर ली, जिसके द्वारा उसने पेशवा पद फिर से प्राप्त करने का मनोरथ बनाया था। इस प्रकार बाजीराव द्वितीय ने मराठा राज्य की स्वतंत्रता बेच दी और वह अंग्रेजों के द्वारा पुनः पूना की गद्दी पर आसीन कर दिया गया। परन्तु मराठा सरदारों, विशेष रूप से शिन्दे, भोंसले और होल्कर ने इस व्यवस्था को स्वीकार नहीं किया और फलस्वरूप दूसरा मराठा-युद्ध (1803-05 ई॰) छिड़ गया।&lt;br /&gt;
==यातायात और परिवहन==&lt;br /&gt;
पुणे शहर भारत के अन्य महत्वपूर्ण शहरों से सड़क, रेलवे व हवाईमार्ग से जुड़ा हुआ है। पुणे का विमानतल से पहले केवल देश के अन्य शहरों के लिए उड़ाने थी, मगर सिंगापुर व दुबई के लिए उड़ा आने के बाद इसे अन्तरराष्ट्रीय दर्जा प्राप्त हुआ है। &lt;br /&gt;
==कृषि और खनिज==&lt;br /&gt;
ज्वार, बाजरा, गन्ना और चावल यहाँ की मुख्य फ़सलें हैं। &lt;br /&gt;
==उद्योग और व्यापार==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Infosys-Campus-Pune.jpg|[[इन्फोसिस]], पुणे&amp;lt;br /&amp;gt; Infosys, Pune|thumb]]&lt;br /&gt;
यहाँ स्थित आधुनिक विशाल औद्योगिक इकाइयों में कार, स्कूटर, ट्रक एंटीबायोटक, औषधि, आधुनिक अभियांत्रिकी पुर्ज़े तथा तेल से चलने  वाले इंजनों का निर्माण होता है। अन्य इकाइयाँ चिंचवड तथा पूर्व में भोसारी समेत आसपास के क्षेत्रों में स्थित हैं। नए उद्योग पूणे-शोलापुर मार्ग पर स्थित स्थान को पसंद करते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पुणे के आसपास के क्षेत्र, जिसे अब वृहद (ग्रेटर) पुणे कहा जाता है। इसमें सह्याद्रि पहाडियाँ, बालघाट श्रृंखला (उत्तर) और महादेव पहाडियाँ (दक्षिण) शामिल है, और भीमा नदी की ऊपरी घाटी का हिस्सा भी मिला हुआ है। &lt;br /&gt;
==शिक्षण संस्थान==&lt;br /&gt;
लबें अरसे से पुणे शैक्षणिक और सांस्कृतिक केंद्र रहा है, पूर्व प्रधानमंत्री [[जवाहर लाल नेहरू]] इसे भारत का ऑक्सफ़ोर्ड और कैब्रिज कहते थे। यहाँ के विख्यात शैक्षणिक संस्थानों में पुणे विश्वविद्यालय (स्थापना 1948), फ़र्ग्युसन कॉलेज, इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट एजुकेशन ऐंड रिसर्च, इंटरनेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट एजुकेशन ऐंड रिसर्च, इंटरनेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ इन्फ़ॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट एजुकेशन, महाराष्ट्र एकेडमी ऑफ़ इंजीनियरिंग ऐंड एजुकेशनल रिसर्च, एकेडमी ऑफ़ कम्युनिकेश्न स्किल, एकेडमी ऑफ़ पोलिटिकल ऐंड सोशल रिसर्च , छत्रपति शिवाजी मेडिकल कॉलेज, सी॰ए॰ मेडिकल कॉलेज ऑफ़ आल्टरनेटिव मेडिसिन, कॉलेज ऑफ़ कंप्यूटर ऐंड इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग, डी॰ इंस्टिट्यूट ऑफ़ वोकेशनल कोर्सेस, इंस्टिट्यूट ऑफ़ बिजनेस मैनेजमेंट ऐंड रिसर्च, फ़िल्म ऐंड टेलीविजन इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंडिया, और बी॰डी॰ इंस्टिट्यूट ऑफ़ फ़ैशन टेक्नोलॉजी शामिल हैं। यहाँ अंतराष्ट्रीय स्तर के शोध संस्थान हैं, जैसे भंडारकर ओरिएंटल रिसर्च इंस्टिट्यूट (स्थापना 1917), गोखले इंस्टिट्यूट ऑफ़ पॉलिटिक्स ऐंड इकोनॉमिक्स तथा दक्कन कॉलेज पोस्ट ग्रेजुएट रिसर्च इंस्टिट्यूट, जो मानव विश्वविद्यालय भी है और इटंर यूनिवर्सिटी सेंटर फ़ॉर एस्ट्रोनॉमी ऐंड एस्ट्रोफ़िज़िक्स एक स्वायत्त संस्था है।&lt;br /&gt;
[[चित्र:University-Of-Pune.jpg|पुणे विश्वविद्यालय&amp;lt;br /&amp;gt; University Of Pune|thumb|left]]&lt;br /&gt;
इस नगर में स्थित सरकारी कार्यालयों में शिक्षा निदेशालय, सेंकेंड्री स्कूल सर्टिफ़िकेट परिक्षा बोर्ड, महाराष्ट्र स्टेट ब्यूरो टेक्स्ट बुक प्रोडेक्शन ऐंड करीकुलर रिसर्च, तिलक महराष्ट्र विद्यापीठ तथा विभिन्न राजनितिक, सामाजिक और शैक्षिक नेताओं द्वारा स्थापित संस्थाओं द्वारा वित्त प्रदत्त शैक्षणिक संस्थान शामिल हैं। यहाँ केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजित संस्थान, जैसे भारतीय मौसम विज्ञान और नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ वायरोलॉजी भी स्थित हैं। शहर के पश्चिमी सीमा पर खड़गवासला में नेश्नल डिफ़ेंस अकादमी और सेंट्रल वाटर ऐंड पावर रिसर्च स्टेशन; उत्तर में इंस्टिट्यूट ऑफ़ ट्रॉपिकल मेटरोलॉजी; पुणे विश्वविद्यालय परिसर में इंटर यूनिवर्सिटी सेंटर फ़ॉर एस्ट्रोनॉमी ऐंड एस्ट्रो फ़िज़िक्स; पूर्व में किरकी में प्रतिरक्षा उत्पादन इकाइयाँ स्थित हैं। यहाँ एक छावनी भी है, जिसमें प्रतिरक्षा कमान इकाई और आर्म्ड फ़ोर्सेस मेडिकल स्थित हैं।&lt;br /&gt;
==जनसंख्या==&lt;br /&gt;
पुणे की जनसंख्या (2001) 25,40,069 है, और ग्रामीण क्षेत्र की जनसंख्या 80,191 है। पुणे ज़िले की जनसंख्या 72,24,224 है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==पर्यटन==&lt;br /&gt;
प्रमुख धार्मिक, ऐतिहासिक और पर्यटक स्थल सह्याद्रिके आसपास तथा भीमा नदी के किनारे स्थित इसकी ढलानों पर अवस्थित हैं। सिंहगढ़ जैसे कुछ विख्यात मराठा क़िले अब आधुनिक आरामगाह में परिवर्तित कर दिए गए हैं। यहाँ के धार्मिक केंद्रों में [[भीमशंकर ज्योतिर्लिंग|भीमशंकर]], जो भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। संत कवि तुकाराम का जन्म स्थल देहू, आचार्य रजनीश का आश्रम (ओशो कम्यूम इंटरनेशनल सेंटर)। इसके निकट ही संत मेहरबाबा से संबंधित स्थान मेहराजाद और मेहराबाद हैं।&lt;br /&gt;
[[Category:महाराष्ट्र]][[Category:महाराष्ट्र_के_धार्मिक_स्थल]][[Category:महाराष्ट्र_के_नगर]][[Category:महाराष्ट्र_के_पर्यटन_स्थल]][[Category:पर्यटन कोश]][[Category:भारत के नगर]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Gaurav</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0&amp;diff=39776</id>
		<title>महाराष्ट्र</title>
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		<updated>2010-07-01T13:07:26Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Gaurav: /* प्रमुख नगर */&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा राज्य&lt;br /&gt;
|Image=Maharashtra-Map.jpg&lt;br /&gt;
|राजधानी=मुंबई&lt;br /&gt;
|जनसंख्या=96879&lt;br /&gt;
|जनसंख्या घनत्व=315&lt;br /&gt;
|क्षेत्रफल=308,000&lt;br /&gt;
|भौगोलिक निर्देशांक=18° 58' 30&amp;quot; N 72° 49' 33&amp;quot; E&lt;br /&gt;
|ज़िले=35&lt;br /&gt;
|महानगर=मुंबई&lt;br /&gt;
|बड़े नगर=मुंबई, पुणे, नागपूर, औरंगाबाद, कोल्हापूर, नासिक, शोलापूर, अमरावती, सांगली, नांदेड&lt;br /&gt;
|राजभाषा(एँ)=मराठी , हिन्दी , अंग्रेजी,&lt;br /&gt;
|स्थापना=1960/05/01&lt;br /&gt;
|मुख्य ऐतिहासिक स्थल=गेटवे ऑफ़ इन्डिया, अजंता-एलोरा केव्स, शनिवारवाडा, लाल महल, सिंहगढ़&lt;br /&gt;
|मुख्य पर्यटन स्थल=गेटवे ऑफ़ इन्डिया, मडआईलॅन्ड, अजंता-एलोरा केव्स, मुंबई चौपाटी&lt;br /&gt;
|लिंग अनुपात=1000:922&lt;br /&gt;
|साक्षरता=76.9&lt;br /&gt;
|राज्यपाल=एस एम कृष्णा&lt;br /&gt;
|मुख्यमंत्री=अशोक चव्हाण&lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=[http://www.maharashtra.gov.in/ अधिकारिक वेबसाइट]&lt;br /&gt;
|अद्यतन=2010/05/07&lt;br /&gt;
|emblem=maharashtra-seal.gif&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
==इतिहास और भूगोल==&lt;br /&gt;
प्राचीन 16 महाजनपदों में अश्मक या अस्सक का स्थान आधुनिक [[अहमदनगर]] के आसपास का माना जाता है । सम्राट [[अशोक]] के शिलालेख भी [[मुंबई]] के निकट पाए गए हैं । महाराष्‍ट्र के पहले प्रसिद्ध शासक सातवाहन (ई.पू. 230 से 225 ई.) थे जो महाराष्ट्र राज्य के संस्‍थापक थे। उन्‍होंने अपने पीछे बहुत से साहित्यिक, कलात्‍मक तथा पुरातात्विक प्रमाण छोड़े हैं। उनके शासनकाल में मानव जीवन के हर क्षेत्र में भरपूर  प्रगति हुई। &lt;br /&gt;
[[चित्र:Ajanta-Caves-1.jpg|thumb|[[अजंता की गुफ़ाएँ|अजंता की गुफ़ाओं]] का विश्व प्रसिद्ध भित्ति चित्र|left]]&lt;br /&gt;
इसके बाद वाकाटक आए, जिन्‍होंने भारतीय साम्राज्‍य की स्‍थापना की। उनके शासनकाल में महाराष्‍ट्र में शिक्षा, कला तथा धर्म सभी दिशाओं में अत्यधिक विकास हुआ। उनके शासन के दौरान ही 'अजंता की गुफाओं' में उच्‍च कोटि के भित्तिचित्र बनाए गए। वाकाटको के बाद कुछ समय के लिए 'कलचुरी वंश' ने शासन किया और फिर 'चालुक्‍य' सत्‍ता में आए। इसके बाद तटवर्ती इलाकों मे 'शिलाहारों' के अलावा महाराष्‍ट्र पर 'राष्‍ट्रकूट' तथा 'यादव' शासकों का नियंत्रण रहा। यादवों ने मराठी को शासन की भाषा बनाया और दक्षिण के एक बडे भाग पर अपना आधिपत्‍य स्थापित किया।&lt;br /&gt;
अलाउद्दीन ख़िलजी पहला मुस्लिम शासक था जिसने अपना राज्य दक्षिण में मदुरै तक फैला लिया था । उसके बाद मुहम्मद बिन तुग़लक (1325) ने अपनी राजधानी [[दिल्ली]] से हटाकर [[दौलताबाद]] कर ली । यह स्थान पहले देवगिरि नाम से प्रसिद्ध था और अहमदनगर के पास है । बहमनी शासकों ने महाराष्‍ट्र तथा इसकी संस्‍कृति को समन्वित किया, पर शिवाजी के कुशल नेतृत्‍व में महाराष्‍ट्र का सर्वांगीण विकास हुआ और यह एक अलग पहचान के साथ उभरकर सामने आया। शिवाजी ने स्‍वराज तथा राष्‍ट्रीयता की एक नई भावना पैदा की। उनकी प्रचंड शाक्ति ने मुग़लों को भारत के इस भाग में आगे नहीं बढ़ने दिया। पेशवाओं ने दक्षिण के पठार से लेकर पंजाब पर हमला बोल कर मराठाओं का आधिपत्‍य स्‍थापित किया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बहमनी सल्तनत के टूटने पर यह प्रदेश गोलकुण्डा के शासन में आया और उसके बाद औरंगजेब का संक्षिप्त शासन रहा। इसके बाद मराठों की शक्ति में उत्तरोत्तर वृद्धि हुई और अठारहवीं सदी के अन्त तक मराठा पूरे महाराष्ट्र में फैल गये थे और उनका साम्राज्य दक्षिण में कर्नाटक के दक्षिणी सिरे तक हो गया था । 1820 तक आते आते अंग्रेजों ने पेशवाओं को हरा दिया था और यह प्रदेश भी अंग्रेजी साम्राज्य का अंग बन गया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
स्‍वतंत्रता संग्राम में महाराष्‍ट्र सबसे आगे था। भारतीय राष्‍ट्रीय कांग्रेस का जन्‍म भी यहीं हुआ। मुंबई तथा महाराष्‍ट्र के अन्‍य शहरों के अनगिनत नेताओं ने पहले तिलक और बाद में महात्‍मा गांधी के मार्गदर्शन में कांग्रेस के आंदोलन को आगे बढाया। गांधी जी ने भी अपने आंदोलन का केंद्र महाराष्‍ट्र को बनाया था और गांधी युग में राष्‍ट्रवादी देश की राजधानी सेवाग्राम थी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
महाराष्ट्र  की स्थापना के पचास साल पूरे हो गये हैं। महाराष्ट्र और गुजरात का स्थापना दिवस 1मई को मनाया जाता है कभी ये दोनों राज्य मुंबई का हिस्सा थे। जब मुंबई राज्य से महाराष्ट्र और गुजरात के गठन का प्रस्ताव आया तो तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने मुंबई को अलग केन्द्रशासित प्रदेश बनाने की वकालत की। उनका तर्क था कि अगर मुंबई को देश की आर्थिक राजधानी बने रहना है तो यह करना आवश्यक है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
किंतु पंडित नेहरू की नहीं चली। देश के पहले वित्तमंत्री और वित्त विशेषज्ञ चिंतामणि देशमुख ने इसका प्रखर विरोध किया और इसी मुद्दे पर केन्द्रीय मंत्रिमण्डल से इस्तीफा दे दिया। मुंबई को महाराष्ट्र में रखने के लिए आंदोलन चला जिसमें कुल 80 लोगों की आहुति हुई लेकिन आखिरकार मुंबई महाराष्ट्र का हुआ।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देश को आजादी के ब मध्य बाद भारत के सभी मराठी भाषी स्थानों का समीकरण करके एक राज्य बनाने को लेकर बड़ा आंदोलन चला और 1 मई, 1960 को कोंकण, मराठवाडा, पश्चिमी महाराष्ट्र, दक्षिण महाराष्ट्र, उत्तर महाराष्ट्र (खानदेश) तथा विदर्भ, सभी संभागों को जोड़ कर महाराष्ट्र राज्य की स्थापना की गई।&lt;br /&gt;
==महाराष्ट्र राज्य का गठन==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Maharashtra-Map-1.jpg|महाराष्ट्र का मानचित्र&amp;lt;br /&amp;gt; Map of Maharashtra|thumb]]&lt;br /&gt;
देश के राज्‍यों के भाषायी पुनर्गठन के फलस्‍वरूप 1 मई, 1960 को महाराष्‍ट्र राज्‍य का प्रशासनिक प्रादुर्भाव हुआ। यह राज्‍य आसपास के मराठी भाषी क्षेत्रों को मिलाकर बनाया गया, जो पहले चार अलग अलग प्रशासनों के नियंत्रण में था। इनमें मूल ब्रिटिश मुंबई प्रांत में शामिल दमन तथा गोवा के बीच का ज़िला, हैदराबाद के निज़ाम की रियासत के पांच ज़िले, मध्‍य प्रांत (मध्‍य प्रदेश) के दक्षिण के आठ ज़िले तथा आसपास की ऐसी अनेक छोटी-छोटी रियासतें शामिल थी, जो समीपवर्ती ज़िलों में मिल गई थी। &lt;br /&gt;
==भौगोलिक स्थिति==&lt;br /&gt;
महाराष्‍ट्र  भारत के उत्तर में बसा हुआ है और भौगोलिक दृष्टि से यह राज्‍य मुख्‍यत: पठारी है। महाराष्‍ट्र पठारों का पठार है। इसके उठे हुए पश्चिमी किनारे सहाद्री पहाडियों का निर्माण करते है और समुद्र तट के समानांतर हैं तथा इसकी ढलान पूर्व तथा दक्षिण पूर्व की ओर धीरे धीरे बढ़ती है। राज्‍य के उत्तरी भाग में सतपुड़ा की पहाडियां है, जबकि अजंता तथा सतमाला पहाडियां राज्‍य के मध्‍य भाग से होकर जाती है। अरब सागर महाराष्‍ट्र की पश्चिमी सीमा का प्रहरी है, जबकि गुजरात और मध्‍य प्रदेश इसके उत्तर में हैं। राज्‍य की पूर्वी सीमा पर छत्तीसगढ है और कर्नाटक तथा आंध्र प्रदेश इसके दक्षिण में है।&lt;br /&gt;
==जनसंख्या==&lt;br /&gt;
महाराष्ट्र की जनसंख्या सन 2001 में 96,752,247 थी, विश्व में केवल ग्यारह ऐसे देश हैं जिनकी जनसंख्या महाराष्ट्र प्रदेश से ज़्यादा है। &lt;br /&gt;
==कृषि==&lt;br /&gt;
महाराष्‍ट्र के लगभग 65 प्रतिशत श्रमिक कृषि तथा संबंधित गतिविधियों पर निर्भर है। यहां की प्रमुख फ़सलें हैं- धान, ज्‍वार, बाजरा, गेहूं, तूर (अरहर), उडद, चना और दलहन। यह राज्‍य तिलहनों का प्रमुख उत्‍पादक है और मूंगफली, सूरजमुखी, सोयाबीन प्रमुख तिलहनी फ़सलें है। महत्‍वपूर्ण नकदी फ़सलें है कपास, गन्‍ना, हल्‍दी और सब्जियां। राज्‍य में 12.90 लाख हेक्‍टेयर क्षेत्र में विभिन्‍न प्रकार के फल, जैसे आम, केला, संतरा, अंगूर, काजू आदि की फ़सलें उगाई जाती है।&lt;br /&gt;
==उद्योग==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Gateway-of-India-2.jpg|thumb|[[गेटवे ऑफ़ इन्डिया]], [[मुम्बई]]&amp;lt;br /&amp;gt; Gateway of India, Mumbai]]&lt;br /&gt;
महाराष्‍ट्र को पूरे देश का औद्योगिक क्षमता का केंद्र माना जाता है और राज्‍य की राजधानी मुंबई देश की वित्‍तीय तथा वाणिज्यिक गतिविधियों का केंद्र है। राज्‍य की अर्थव्‍यवस्‍था में औद्योगिक क्षेत्र का महत्‍वपूर्ण स्‍थान है। खाद्य उत्‍पाद, तंबाकू और इससे बनी चीजें, सूती कपडा, कपड़े से बना सामान, काग़ज और इससे बनी चीजें, मुद्रण और प्रकाशन, रबड, प्‍लास्टिक, रसायन व रासायनिक उत्‍पाद, मशीनें बिजली की मशीन, यंत्र व उपकरण तथा परिवहन उपकरण और उनके कल पुर्जे आदि का राज्‍य के औद्योगिक उत्‍पादन में महत्‍वपूर्ण योगदान है। वर्ष 2005-06 में औद्योगिक उत्‍पादन (निर्माण) वर्ष 2004-05 के मुकाबले 8.9 प्रतिशत अधिक रहा।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==सिंचाई और बिजली==&lt;br /&gt;
जून 2005 के अंत तक 32 बड़ी, 178 मंझोली और राज्‍य के क्षेत्र की 2,274 लघु सिंचाई परियोजनाएं पूरी हो चुकी थीं इसके अलावा 21 बडी 39 मंझोली सिंचाई परियोजनाओं का निर्माण कार्य जारी है। 2004 से 2005 में राज्‍य में कुल सिंचित क्षेत्र 36.36 लाख हेक्‍टेयर था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
2004-05 में महाराष्‍ट्र की कुल स्‍थापित विद्युत उत्‍पादन क्षमता 12,909 मेगावाट थी। राज्‍य में प्‍लांट लोड फैक्‍टर (पी.एल.एफ) 81.6 प्रतिशत था और बिजली उत्‍पादन 68,507 करोड किलोवाट घंटा था।&lt;br /&gt;
==परिवहन==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Bibi-Ka-Maqbara-Aurangabad.jpg|[[बीबी का मक़बरा]], [[औरंगाबाद]]&amp;lt;br /&amp;gt; Bibi Ka Maqbara, Aurangabad|thumb|left]]&lt;br /&gt;
'''सड़क''' मार्च 2005 तक राज्‍य में सड़कों की कुल लंबाई 2.29 लाख कि.मी. थी, जिसमें राष्‍ट्रीय राजमार्गों की लंबाई 4, 367 कि.मी. प्रांतीय राजमार्गों की 33,406 कि.मी., प्रमुख ज़िला सड़कों की 48,824 कि.मी., अन्‍य ज़िला सड़कों की लंबाई 44,792 कि.मी. और ग्रामीण सड़कों की कुल लंबाई 97,913 कि.मी. थी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''रेलवे''' महाराष्‍ट्र में 5,527 कि.मी. रेल मार्ग है। इसमें से लगभग 78.6 प्रतिशत बड़ी रेल लाइनें, 7.8 प्रतिशत मीटर गेज तथा 13.6 प्रतिशत छोटी रेल लाइनें है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''उड्डयन''' राज्‍य में कुल 24 हवाई अड्डे / हवाई पट्टियां है। इनमें से 17 महाराष्‍ट्र सरकार के नियंत्रण में है। चार हवाई अड्डे अंतर्राष्‍ट्रीय हवाई अड्डा प्राधिकरण / भारतीय हवाई अड्डा प्राधिकरण के नियंत्रण में हैं, ज‍बकि बाकी तीन रक्षा मंत्रालय के अधीन है। राज्‍य सरकार के नियंत्रण वाले हवाई अड्डों पर अभी व्‍यावसायिक उड़ानों की सुविधा नहीं है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''बंदरगाह''' मुम्बंई प्रमुख बंदरगाह है। राज्‍य में दो बड़े और 48 छोटे अधिसूचित बंदरगाह हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==पर्यटन स्‍थल==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Ajanta-Caves-Aurangabad-Maharashtra-2.jpg|thumb|[[अजंता की गुफाएं]], [[औरंगाबाद]]&amp;lt;br /&amp;gt; Ajanta Caves, Aurangabad]]&lt;br /&gt;
यहां के महत्‍वपूर्ण पर्यटन केंद्र है अजंता, एलोरा, एलिफेंटा, कन्‍हेरी और कारला गुफाएं, महाबलेश्‍वर, माथेरन और पंचगनी, जवाहर, मालशेजघाट, अंबोली, चिकलधारा और पन्‍हाला पर्वतीय स्‍थल। पंढरपुर, नाशिक, शिरडी, नांदेड, औधानागनाथ, त्रयंबकेवर, तुलजापुर, गणपतिपुले, भीमशंकर, हरिहरेश्‍वर, शेगाव, कोल्‍हापुर, जेजुरी तथा अंबजोगई  धार्मिक स्‍थान है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==प्रमुख नगर==&lt;br /&gt;
भारत देश में महाराष्ट्र सबसे बड़ा औद्योगिक प्रान्त है। मुंबई, पुणे, औरंगाबाद, नागपुर और नाशिक महाराष्ट्र के बडे शहरों में गिने जाते हैं। यहाँ के निवासियों की मातृभाषा मराठी है और यहाँ के लोगों को महाराष्ट्रीयन कहा जाता है। पहाड़ी नगरों में 'महाबलेश्वर' और 'माथेरान' काफ़ी प्रसिद्ध है। छुट्टियों के समय इन नगरों में बहुत ही भीड़ होती है और मौसम भी बहुत सुहावना होता है।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''धार्मिक नगर'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
*धार्मिक नगरों में नाशिक के काफ़ी नज़दीक शिर्डी नगर है। इस नगर का साईं बाबा का मन्दिर बहुत ही प्रसिद्ध है। &lt;br /&gt;
*इसी तरह मुंबई का 'महालक्ष्मी मन्दिर' और पुणे के 'दगडूशेठ गणपति मन्दिर' बहुत ही अधिक ख्याति प्राप्त हैं।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''मुंबई'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
[[चित्र:Nariman-Point-Mumbai.jpg|thumb|[[नरीमन पाइंट]], मुम्बई&amp;lt;br /&amp;gt; Nariman Point, Mumbai]]&lt;br /&gt;
मुंबई पूर्वी न्यूयॉर्क के नाम से भी विख्यात है। मुंबई में चौपाटी, गेटवे ऑफ़ इन्डिया , प्रिन्स वेल्स म्युज़ियम, एलिफ़ेन्टा केव्स और मडआईलॅन्ड बहुत ही प्रसिद्ध है।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''पुणे'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पुणे महाराष्ट्र का संस्कृति प्रधान नगर माना जाता है। शनिवारवाडा, लाल महल, सिंहगढ़ जैसे ऐतिहासिक स्थान हैं। पुणे का आई॰टी॰ पार्क और लक्ष्मी रोड काफ़ी जाना माना है।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''औरंगाबाद'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
औरंगाबाद नगर महाराष्ट्र के मध्य भाग में स्थित है। यहां के अजंता-एलोरा केव्स विश्व प्रसिद्ध हैं। इन गुफाओं में बुद्ध के तक्षण बनाये गये हैं।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''नागपुर'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नागपुर एक बहुत ही सुन्दर शहर है और यहा के संतरे पूरी दुनिया में जाने माने हैं।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''नाशिक'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नाशिक एक काफ़ी सुन्दर शहर है और यहां का मौसम सुहाना है। नाशिक के कालाराम और दूसरे मन्दिर विख्यात है और लोग [[गोदावरी नदी]] में नहाना पवित्र समझते हैं।&lt;br /&gt;
==वीथिका==&lt;br /&gt;
&amp;lt;gallery&amp;gt;&lt;br /&gt;
चित्र:Sinhagarh-Fort-Pune.jpg|[[सिंहगढ़ क़िला]], पुणे&amp;lt;br /&amp;gt; Sinhagarh Fort&lt;br /&gt;
चित्र:Ajanta-Caves-Aurangabad-Maharashtra-1.jpg|[[अजंता की गुफाएं]], [[औरंगाबाद]]&amp;lt;br /&amp;gt; Ajanta Caves, Aurangabad&lt;br /&gt;
चित्र:University-Of-Pune.jpg|पुणे विश्वविद्यालय&amp;lt;br /&amp;gt; University Of Pune&lt;br /&gt;
चित्र:Ellora-Caves-Aurangabad-Maharashtra-1.jpg|[[एलोरा की गुफाएं]], [[औरंगाबाद]]&amp;lt;br /&amp;gt; Ellora Caves, Aurangabad&lt;br /&gt;
चित्र:Infosys-Campus-Pune.jpg|इन्फोसिस, [[पुणे]]&amp;lt;br /&amp;gt; Infosys, Pune&lt;br /&gt;
चित्र:Ellora-Caves-Aurangabad-Maharashtra-2.jpg|[[एलोरा की गुफाएं]], [[औरंगाबाद]]&amp;lt;br /&amp;gt; Ellora Caves, Aurangabad&lt;br /&gt;
चित्र:Sunset-At-Khandala.jpg|खंडाला में सूर्यास्त का द्रश्य&amp;lt;br /&amp;gt; View Of Sunset At Khandala&lt;br /&gt;
&amp;lt;/gallery&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==सम्बंधित लिंक==&lt;br /&gt;
{{महाराष्ट्र प्रदेश के ज़िले}}&lt;br /&gt;
{{महाराष्ट्र के पर्यटन स्थल}}&lt;br /&gt;
{{राज्य और के. शा. प्र.}}&lt;br /&gt;
[[Category:भारत के राज्य और केन्द्र शासित प्रदेश]][[Category:राज्य संरचना]]&lt;br /&gt;
[[Category:महाराष्ट्र]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Gaurav</name></author>
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		<id>https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%A3%E0%A5%87&amp;diff=39775</id>
		<title>पुणे</title>
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		<updated>2010-07-01T13:06:06Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Gaurav: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;[[चित्र:Sinhagarh-Fort-Pune.jpg|thumb|[[सिंहगढ़ क़िला]], पुणे&amp;lt;br /&amp;gt; Sinhagarh Fort]]&lt;br /&gt;
==स्थापना==&lt;br /&gt;
पुणे भूतपूर्व पूना शहर, [[महाराष्ट्र]] राज्य, दक्षिण पश्चिम [[भारत]], मूला और मूथा नदियों के संगम स्थल पर स्थित है। ‘दक्कन की रानी’ के नाम से विख्यात पुणे मराठियों की सांस्कृतिक राजधानी है। 17वीं शताब्दी में [[मराठा साम्राज्य|मराठा राज्य]] की राजधानी के रूप में पहली बार इस नगर को महत्व प्राप्त हुआ था। कुछ समय तक इस पर मुग़लों का कब्जा रहा, लेकिन बाद में 1714 से यह पुनः मराठा राज्य की राजधानी बन गया, अंततः 1817 में यह अंग्रेजों के अधिकार में चला गया। इसने [[बंबई]] प्रेज़िडेंसी की मौसमी राजधानी की भूमिका निभाई और आज़ादी के बाद यह विकासशील देश बन गया, जो हर दिशा में फैल रहा था। विशेष रूप से इसका विस्तार पुणे-मुंबई रेल और सड़क मार्गों के समानांतर हुआ, जो पिंपरी और चिंचवड से गुज़रते हैं। &lt;br /&gt;
==इतिहास==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Purandarh-Fort-Pune-1.jpg|thumb|[[पुरंदर क़िला]], पुणे&amp;lt;br /&amp;gt; Purandarh Fort, Pune|left]]&lt;br /&gt;
पुणे [[शिवाजी]] महाराज के जीवन व [[मराठा साम्राज्य]] के इतिहास का एक महत्वपूर्ण अंग है। इस प्रकार मराठों और अंग्रेजों, दोनों को अपनी-अपनी शक्ति और कमज़ोरी का पता चल गया और अगले बीस वर्षों तक उनके बीच शांति रही। मराठा सरदारों में आपसी दुश्मनी और प्रतिद्वन्द्विता चलती रही और 25 अक्टूबर 1802 ई॰ को तत्कालीन पेशवा [[बाजीराव द्वितीय]] को अपने चंगुल में करने के लिए शिन्दे और होल्कर में पूना के बाहर युद्ध हुआ। बाजीराव द्वितीय कायर और षड़यंत्रकारी था और उसे राज्य के हित की कोई चिन्ता नहीं थी। जिस समय पूना का युद्ध चल ही रहा था, वह प्रतिद्वन्द्वी मराठा सरदारों के चंगुल से अपने को बचाने के लिए पूना से भागकर [[बसई]] अंग्रेजों की शरण में चला गया। वहाँ उसने 31 दिसम्बर 1802 ई॰ को बसई की लज्जाजनक संधि कर ली, जिसके द्वारा उसने पेशवा पद फिर से प्राप्त करने का मनोरथ बनाया था। इस प्रकार बाजीराव द्वितीय ने मराठा राज्य की स्वतंत्रता बेच दी और वह अंग्रेजों के द्वारा पुनः पूना की गद्दी पर आसीन कर दिया गया। परन्तु मराठा सरदारों, विशेष रूप से शिन्दे, भोंसले और होल्कर ने इस व्यवस्था को स्वीकार नहीं किया और फलस्वरूप दूसरा मराठा-युद्ध (1803-05 ई॰) छिड़ गया।&lt;br /&gt;
==यातायात और परिवहन==&lt;br /&gt;
पुणे शहर भारत के अन्य महत्वपूर्ण शहरों से सड़क, रेलवे व हवाईमार्ग से जुड़ा हुआ है। पुणे का विमानतल से पहले केवल देश के अन्य शहरों के लिए उड़ाने थी, मगर सिंगापुर व दुबई के लिए उड़ा आने के बाद इसे अन्तरराष्ट्रीय दर्जा प्राप्त हुआ है। &lt;br /&gt;
==कृषि और खनिज==&lt;br /&gt;
ज्वार, बाजरा, गन्ना और चावल यहाँ की मुख्य फ़सलें हैं। &lt;br /&gt;
==उद्योग और व्यापार==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Infosys-Campus-Pune.jpg|इन्फोसिस, [[पुणे]]&amp;lt;br /&amp;gt; Infosys, Pune|thumb]]&lt;br /&gt;
यहाँ स्थित आधुनिक विशाल औद्योगिक इकाइयों में कार, स्कूटर, ट्रक एंटीबायोटक, औषधि, आधुनिक अभियांत्रिकी पुर्ज़े तथा तेल से चलने  वाले इंजनों का निर्माण होता है। अन्य इकाइयाँ चिंचवड तथा पूर्व में भोसारी समेत आसपास के क्षेत्रों में स्थित हैं। नए उद्योग पूणे-शोलापुर मार्ग पर स्थित स्थान को पसंद करते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पुणे के आसपास के क्षेत्र, जिसे अब वृहद (ग्रेटर) पुणे कहा जाता है। इसमें सह्याद्रि पहाडियाँ, बालघाट श्रृंखला (उत्तर) और महादेव पहाडियाँ (दक्षिण) शामिल है, और भीमा नदी की ऊपरी घाटी का हिस्सा भी मिला हुआ है। &lt;br /&gt;
==शिक्षण संस्थान==&lt;br /&gt;
लबें अरसे से पुणे शैक्षणिक और सांस्कृतिक केंद्र रहा है, पूर्व प्रधानमंत्री [[जवाहर लाल नेहरू]] इसे भारत का ऑक्सफ़ोर्ड और कैब्रिज कहते थे। यहाँ के विख्यात शैक्षणिक संस्थानों में पुणे विश्वविद्यालय (स्थापना 1948), फ़र्ग्युसन कॉलेज, इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट एजुकेशन ऐंड रिसर्च, इंटरनेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट एजुकेशन ऐंड रिसर्च, इंटरनेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ इन्फ़ॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट एजुकेशन, महाराष्ट्र एकेडमी ऑफ़ इंजीनियरिंग ऐंड एजुकेशनल रिसर्च, एकेडमी ऑफ़ कम्युनिकेश्न स्किल, एकेडमी ऑफ़ पोलिटिकल ऐंड सोशल रिसर्च , छत्रपति शिवाजी मेडिकल कॉलेज, सी॰ए॰ मेडिकल कॉलेज ऑफ़ आल्टरनेटिव मेडिसिन, कॉलेज ऑफ़ कंप्यूटर ऐंड इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग, डी॰ इंस्टिट्यूट ऑफ़ वोकेशनल कोर्सेस, इंस्टिट्यूट ऑफ़ बिजनेस मैनेजमेंट ऐंड रिसर्च, फ़िल्म ऐंड टेलीविजन इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंडिया, और बी॰डी॰ इंस्टिट्यूट ऑफ़ फ़ैशन टेक्नोलॉजी शामिल हैं। यहाँ अंतराष्ट्रीय स्तर के शोध संस्थान हैं, जैसे भंडारकर ओरिएंटल रिसर्च इंस्टिट्यूट (स्थापना 1917), गोखले इंस्टिट्यूट ऑफ़ पॉलिटिक्स ऐंड इकोनॉमिक्स तथा दक्कन कॉलेज पोस्ट ग्रेजुएट रिसर्च इंस्टिट्यूट, जो मानव विश्वविद्यालय भी है और इटंर यूनिवर्सिटी सेंटर फ़ॉर एस्ट्रोनॉमी ऐंड एस्ट्रोफ़िज़िक्स एक स्वायत्त संस्था है।&lt;br /&gt;
[[चित्र:University-Of-Pune.jpg|पुणे विश्वविद्यालय&amp;lt;br /&amp;gt; University Of Pune|thumb]]&lt;br /&gt;
इस नगर में स्थित सरकारी कार्यालयों में शिक्षा निदेशालय, सेंकेंड्री स्कूल सर्टिफ़िकेट परिक्षा बोर्ड, महाराष्ट्र स्टेट ब्यूरो टेक्स्ट बुक प्रोडेक्शन ऐंड करीकुलर रिसर्च, तिलक महराष्ट्र विद्यापीठ तथा विभिन्न राजनितिक, सामाजिक और शैक्षिक नेताओं द्वारा स्थापित संस्थाओं द्वारा वित्त प्रदत्त शैक्षणिक संस्थान शामिल हैं। यहाँ केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजित संस्थान, जैसे भारतीय मौसम विज्ञान और नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ वायरोलॉजी भी स्थित हैं। शहर के पश्चिमी सीमा पर खड़गवासला में नेश्नल डिफ़ेंस अकादमी और सेंट्रल वाटर ऐंड पावर रिसर्च स्टेशन; उत्तर में इंस्टिट्यूट ऑफ़ ट्रॉपिकल मेटरोलॉजी; पुणे विश्वविद्यालय परिसर में इंटर यूनिवर्सिटी सेंटर फ़ॉर एस्ट्रोनॉमी ऐंड एस्ट्रो फ़िज़िक्स; पूर्व में किरकी में प्रतिरक्षा उत्पादन इकाइयाँ स्थित हैं। यहाँ एक छावनी भी है, जिसमें प्रतिरक्षा कमान इकाई और आर्म्ड फ़ोर्सेस मेडिकल स्थित हैं।&lt;br /&gt;
==जनसंख्या==&lt;br /&gt;
पुणे की जनसंख्या (2001) 25,40,069 है, और ग्रामीण क्षेत्र की जनसंख्या 80,191 है। पुणे ज़िले की जनसंख्या 72,24,224 है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==पर्यटन==&lt;br /&gt;
प्रमुख धार्मिक, ऐतिहासिक और पर्यटक स्थल सह्याद्रिके आसपास तथा भीमा नदी के किनारे स्थित इसकी ढलानों पर अवस्थित हैं। सिंहगढ़ जैसे कुछ विख्यात मराठा क़िले अब आधुनिक आरामगाह में परिवर्तित कर दिए गए हैं। यहाँ के धार्मिक केंद्रों में [[भीमशंकर ज्योतिर्लिंग|भीमशंकर]], जो भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। संत कवि तुकाराम का जन्म स्थल देहू, आचार्य रजनीश का आश्रम (ओशो कम्यूम इंटरनेशनल सेंटर)। इसके निकट ही संत मेहरबाबा से संबंधित स्थान मेहराजाद और मेहराबाद हैं।&lt;br /&gt;
[[Category:महाराष्ट्र]][[Category:महाराष्ट्र_के_धार्मिक_स्थल]][[Category:महाराष्ट्र_के_नगर]][[Category:महाराष्ट्र_के_पर्यटन_स्थल]][[Category:पर्यटन कोश]][[Category:भारत के नगर]]&lt;br /&gt;
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&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{चित्र सूचना&lt;br /&gt;
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|चित्रांकन=[http://www.flickr.com/photos/araswami/ Swaminathan]&lt;br /&gt;
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|आभार=&lt;br /&gt;
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}}&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
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|Attribution={{Attribution}}&lt;br /&gt;
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		<title>महाराष्ट्र</title>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;Gaurav: /* उद्योग */&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा राज्य&lt;br /&gt;
|Image=Maharashtra-Map.jpg&lt;br /&gt;
|राजधानी=मुंबई&lt;br /&gt;
|जनसंख्या=96879&lt;br /&gt;
|जनसंख्या घनत्व=315&lt;br /&gt;
|क्षेत्रफल=308,000&lt;br /&gt;
|भौगोलिक निर्देशांक=18° 58' 30&amp;quot; N 72° 49' 33&amp;quot; E&lt;br /&gt;
|ज़िले=35&lt;br /&gt;
|महानगर=मुंबई&lt;br /&gt;
|बड़े नगर=मुंबई, पुणे, नागपूर, औरंगाबाद, कोल्हापूर, नासिक, शोलापूर, अमरावती, सांगली, नांदेड&lt;br /&gt;
|राजभाषा(एँ)=मराठी , हिन्दी , अंग्रेजी,&lt;br /&gt;
|स्थापना=1960/05/01&lt;br /&gt;
|मुख्य ऐतिहासिक स्थल=गेटवे ऑफ़ इन्डिया, अजंता-एलोरा केव्स, शनिवारवाडा, लाल महल, सिंहगढ़&lt;br /&gt;
|मुख्य पर्यटन स्थल=गेटवे ऑफ़ इन्डिया, मडआईलॅन्ड, अजंता-एलोरा केव्स, मुंबई चौपाटी&lt;br /&gt;
|लिंग अनुपात=1000:922&lt;br /&gt;
|साक्षरता=76.9&lt;br /&gt;
|राज्यपाल=एस एम कृष्णा&lt;br /&gt;
|मुख्यमंत्री=अशोक चव्हाण&lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=[http://www.maharashtra.gov.in/ अधिकारिक वेबसाइट]&lt;br /&gt;
|अद्यतन=2010/05/07&lt;br /&gt;
|emblem=maharashtra-seal.gif&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
==इतिहास और भूगोल==&lt;br /&gt;
प्राचीन 16 महाजनपदों में अश्मक या अस्सक का स्थान आधुनिक [[अहमदनगर]] के आसपास का माना जाता है । सम्राट [[अशोक]] के शिलालेख भी [[मुंबई]] के निकट पाए गए हैं । महाराष्‍ट्र के पहले प्रसिद्ध शासक सातवाहन (ई.पू. 230 से 225 ई.) थे जो महाराष्ट्र राज्य के संस्‍थापक थे। उन्‍होंने अपने पीछे बहुत से साहित्यिक, कलात्‍मक तथा पुरातात्विक प्रमाण छोड़े हैं। उनके शासनकाल में मानव जीवन के हर क्षेत्र में भरपूर  प्रगति हुई। &lt;br /&gt;
[[चित्र:Ajanta-Caves-1.jpg|thumb|[[अजंता की गुफ़ाएँ|अजंता की गुफ़ाओं]] का विश्व प्रसिद्ध भित्ति चित्र|left]]&lt;br /&gt;
इसके बाद वाकाटक आए, जिन्‍होंने भारतीय साम्राज्‍य की स्‍थापना की। उनके शासनकाल में महाराष्‍ट्र में शिक्षा, कला तथा धर्म सभी दिशाओं में अत्यधिक विकास हुआ। उनके शासन के दौरान ही 'अजंता की गुफाओं' में उच्‍च कोटि के भित्तिचित्र बनाए गए। वाकाटको के बाद कुछ समय के लिए 'कलचुरी वंश' ने शासन किया और फिर 'चालुक्‍य' सत्‍ता में आए। इसके बाद तटवर्ती इलाकों मे 'शिलाहारों' के अलावा महाराष्‍ट्र पर 'राष्‍ट्रकूट' तथा 'यादव' शासकों का नियंत्रण रहा। यादवों ने मराठी को शासन की भाषा बनाया और दक्षिण के एक बडे भाग पर अपना आधिपत्‍य स्थापित किया।&lt;br /&gt;
अलाउद्दीन ख़िलजी पहला मुस्लिम शासक था जिसने अपना राज्य दक्षिण में मदुरै तक फैला लिया था । उसके बाद मुहम्मद बिन तुग़लक (1325) ने अपनी राजधानी [[दिल्ली]] से हटाकर [[दौलताबाद]] कर ली । यह स्थान पहले देवगिरि नाम से प्रसिद्ध था और अहमदनगर के पास है । बहमनी शासकों ने महाराष्‍ट्र तथा इसकी संस्‍कृति को समन्वित किया, पर शिवाजी के कुशल नेतृत्‍व में महाराष्‍ट्र का सर्वांगीण विकास हुआ और यह एक अलग पहचान के साथ उभरकर सामने आया। शिवाजी ने स्‍वराज तथा राष्‍ट्रीयता की एक नई भावना पैदा की। उनकी प्रचंड शाक्ति ने मुग़लों को भारत के इस भाग में आगे नहीं बढ़ने दिया। पेशवाओं ने दक्षिण के पठार से लेकर पंजाब पर हमला बोल कर मराठाओं का आधिपत्‍य स्‍थापित किया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बहमनी सल्तनत के टूटने पर यह प्रदेश गोलकुण्डा के शासन में आया और उसके बाद औरंगजेब का संक्षिप्त शासन रहा। इसके बाद मराठों की शक्ति में उत्तरोत्तर वृद्धि हुई और अठारहवीं सदी के अन्त तक मराठा पूरे महाराष्ट्र में फैल गये थे और उनका साम्राज्य दक्षिण में कर्नाटक के दक्षिणी सिरे तक हो गया था । 1820 तक आते आते अंग्रेजों ने पेशवाओं को हरा दिया था और यह प्रदेश भी अंग्रेजी साम्राज्य का अंग बन गया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
स्‍वतंत्रता संग्राम में महाराष्‍ट्र सबसे आगे था। भारतीय राष्‍ट्रीय कांग्रेस का जन्‍म भी यहीं हुआ। मुंबई तथा महाराष्‍ट्र के अन्‍य शहरों के अनगिनत नेताओं ने पहले तिलक और बाद में महात्‍मा गांधी के मार्गदर्शन में कांग्रेस के आंदोलन को आगे बढाया। गांधी जी ने भी अपने आंदोलन का केंद्र महाराष्‍ट्र को बनाया था और गांधी युग में राष्‍ट्रवादी देश की राजधानी सेवाग्राम थी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
महाराष्ट्र  की स्थापना के पचास साल पूरे हो गये हैं। महाराष्ट्र और गुजरात का स्थापना दिवस 1मई को मनाया जाता है कभी ये दोनों राज्य मुंबई का हिस्सा थे। जब मुंबई राज्य से महाराष्ट्र और गुजरात के गठन का प्रस्ताव आया तो तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने मुंबई को अलग केन्द्रशासित प्रदेश बनाने की वकालत की। उनका तर्क था कि अगर मुंबई को देश की आर्थिक राजधानी बने रहना है तो यह करना आवश्यक है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
किंतु पंडित नेहरू की नहीं चली। देश के पहले वित्तमंत्री और वित्त विशेषज्ञ चिंतामणि देशमुख ने इसका प्रखर विरोध किया और इसी मुद्दे पर केन्द्रीय मंत्रिमण्डल से इस्तीफा दे दिया। मुंबई को महाराष्ट्र में रखने के लिए आंदोलन चला जिसमें कुल 80 लोगों की आहुति हुई लेकिन आखिरकार मुंबई महाराष्ट्र का हुआ।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देश को आजादी के ब मध्य बाद भारत के सभी मराठी भाषी स्थानों का समीकरण करके एक राज्य बनाने को लेकर बड़ा आंदोलन चला और 1 मई, 1960 को कोंकण, मराठवाडा, पश्चिमी महाराष्ट्र, दक्षिण महाराष्ट्र, उत्तर महाराष्ट्र (खानदेश) तथा विदर्भ, सभी संभागों को जोड़ कर महाराष्ट्र राज्य की स्थापना की गई।&lt;br /&gt;
==महाराष्ट्र राज्य का गठन==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Maharashtra-Map-1.jpg|महाराष्ट्र का मानचित्र&amp;lt;br /&amp;gt; Map of Maharashtra|thumb]]&lt;br /&gt;
देश के राज्‍यों के भाषायी पुनर्गठन के फलस्‍वरूप 1 मई, 1960 को महाराष्‍ट्र राज्‍य का प्रशासनिक प्रादुर्भाव हुआ। यह राज्‍य आसपास के मराठी भाषी क्षेत्रों को मिलाकर बनाया गया, जो पहले चार अलग अलग प्रशासनों के नियंत्रण में था। इनमें मूल ब्रिटिश मुंबई प्रांत में शामिल दमन तथा गोवा के बीच का ज़िला, हैदराबाद के निज़ाम की रियासत के पांच ज़िले, मध्‍य प्रांत (मध्‍य प्रदेश) के दक्षिण के आठ ज़िले तथा आसपास की ऐसी अनेक छोटी-छोटी रियासतें शामिल थी, जो समीपवर्ती ज़िलों में मिल गई थी। &lt;br /&gt;
==भौगोलिक स्थिति==&lt;br /&gt;
महाराष्‍ट्र  भारत के उत्तर में बसा हुआ है और भौगोलिक दृष्टि से यह राज्‍य मुख्‍यत: पठारी है। महाराष्‍ट्र पठारों का पठार है। इसके उठे हुए पश्चिमी किनारे सहाद्री पहाडियों का निर्माण करते है और समुद्र तट के समानांतर हैं तथा इसकी ढलान पूर्व तथा दक्षिण पूर्व की ओर धीरे धीरे बढ़ती है। राज्‍य के उत्तरी भाग में सतपुड़ा की पहाडियां है, जबकि अजंता तथा सतमाला पहाडियां राज्‍य के मध्‍य भाग से होकर जाती है। अरब सागर महाराष्‍ट्र की पश्चिमी सीमा का प्रहरी है, जबकि गुजरात और मध्‍य प्रदेश इसके उत्तर में हैं। राज्‍य की पूर्वी सीमा पर छत्तीसगढ है और कर्नाटक तथा आंध्र प्रदेश इसके दक्षिण में है।&lt;br /&gt;
==जनसंख्या==&lt;br /&gt;
महाराष्ट्र की जनसंख्या सन 2001 में 96,752,247 थी, विश्व में केवल ग्यारह ऐसे देश हैं जिनकी जनसंख्या महाराष्ट्र प्रदेश से ज़्यादा है। &lt;br /&gt;
==कृषि==&lt;br /&gt;
महाराष्‍ट्र के लगभग 65 प्रतिशत श्रमिक कृषि तथा संबंधित गतिविधियों पर निर्भर है। यहां की प्रमुख फ़सलें हैं- धान, ज्‍वार, बाजरा, गेहूं, तूर (अरहर), उडद, चना और दलहन। यह राज्‍य तिलहनों का प्रमुख उत्‍पादक है और मूंगफली, सूरजमुखी, सोयाबीन प्रमुख तिलहनी फ़सलें है। महत्‍वपूर्ण नकदी फ़सलें है कपास, गन्‍ना, हल्‍दी और सब्जियां। राज्‍य में 12.90 लाख हेक्‍टेयर क्षेत्र में विभिन्‍न प्रकार के फल, जैसे आम, केला, संतरा, अंगूर, काजू आदि की फ़सलें उगाई जाती है।&lt;br /&gt;
==उद्योग==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Gateway-of-India-2.jpg|thumb|[[गेटवे ऑफ़ इन्डिया]], [[मुम्बई]]&amp;lt;br /&amp;gt; Gateway of India, Mumbai]]&lt;br /&gt;
महाराष्‍ट्र को पूरे देश का औद्योगिक क्षमता का केंद्र माना जाता है और राज्‍य की राजधानी मुंबई देश की वित्‍तीय तथा वाणिज्यिक गतिविधियों का केंद्र है। राज्‍य की अर्थव्‍यवस्‍था में औद्योगिक क्षेत्र का महत्‍वपूर्ण स्‍थान है। खाद्य उत्‍पाद, तंबाकू और इससे बनी चीजें, सूती कपडा, कपड़े से बना सामान, काग़ज और इससे बनी चीजें, मुद्रण और प्रकाशन, रबड, प्‍लास्टिक, रसायन व रासायनिक उत्‍पाद, मशीनें बिजली की मशीन, यंत्र व उपकरण तथा परिवहन उपकरण और उनके कल पुर्जे आदि का राज्‍य के औद्योगिक उत्‍पादन में महत्‍वपूर्ण योगदान है। वर्ष 2005-06 में औद्योगिक उत्‍पादन (निर्माण) वर्ष 2004-05 के मुकाबले 8.9 प्रतिशत अधिक रहा।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==सिंचाई और बिजली==&lt;br /&gt;
जून 2005 के अंत तक 32 बड़ी, 178 मंझोली और राज्‍य के क्षेत्र की 2,274 लघु सिंचाई परियोजनाएं पूरी हो चुकी थीं इसके अलावा 21 बडी 39 मंझोली सिंचाई परियोजनाओं का निर्माण कार्य जारी है। 2004 से 2005 में राज्‍य में कुल सिंचित क्षेत्र 36.36 लाख हेक्‍टेयर था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
2004-05 में महाराष्‍ट्र की कुल स्‍थापित विद्युत उत्‍पादन क्षमता 12,909 मेगावाट थी। राज्‍य में प्‍लांट लोड फैक्‍टर (पी.एल.एफ) 81.6 प्रतिशत था और बिजली उत्‍पादन 68,507 करोड किलोवाट घंटा था।&lt;br /&gt;
==परिवहन==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Bibi-Ka-Maqbara-Aurangabad.jpg|[[बीबी का मक़बरा]], [[औरंगाबाद]]&amp;lt;br /&amp;gt; Bibi Ka Maqbara, Aurangabad|thumb|left]]&lt;br /&gt;
'''सड़क''' मार्च 2005 तक राज्‍य में सड़कों की कुल लंबाई 2.29 लाख कि.मी. थी, जिसमें राष्‍ट्रीय राजमार्गों की लंबाई 4, 367 कि.मी. प्रांतीय राजमार्गों की 33,406 कि.मी., प्रमुख ज़िला सड़कों की 48,824 कि.मी., अन्‍य ज़िला सड़कों की लंबाई 44,792 कि.मी. और ग्रामीण सड़कों की कुल लंबाई 97,913 कि.मी. थी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''रेलवे''' महाराष्‍ट्र में 5,527 कि.मी. रेल मार्ग है। इसमें से लगभग 78.6 प्रतिशत बड़ी रेल लाइनें, 7.8 प्रतिशत मीटर गेज तथा 13.6 प्रतिशत छोटी रेल लाइनें है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''उड्डयन''' राज्‍य में कुल 24 हवाई अड्डे / हवाई पट्टियां है। इनमें से 17 महाराष्‍ट्र सरकार के नियंत्रण में है। चार हवाई अड्डे अंतर्राष्‍ट्रीय हवाई अड्डा प्राधिकरण / भारतीय हवाई अड्डा प्राधिकरण के नियंत्रण में हैं, ज‍बकि बाकी तीन रक्षा मंत्रालय के अधीन है। राज्‍य सरकार के नियंत्रण वाले हवाई अड्डों पर अभी व्‍यावसायिक उड़ानों की सुविधा नहीं है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''बंदरगाह''' मुम्बंई प्रमुख बंदरगाह है। राज्‍य में दो बड़े और 48 छोटे अधिसूचित बंदरगाह हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==पर्यटन स्‍थल==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Ajanta-Caves-Aurangabad-Maharashtra-2.jpg|thumb|[[अजंता की गुफाएं]], [[औरंगाबाद]]&amp;lt;br /&amp;gt; Ajanta Caves, Aurangabad]]&lt;br /&gt;
यहां के महत्‍वपूर्ण पर्यटन केंद्र है अजंता, एलोरा, एलिफेंटा, कन्‍हेरी और कारला गुफाएं, महाबलेश्‍वर, माथेरन और पंचगनी, जवाहर, मालशेजघाट, अंबोली, चिकलधारा और पन्‍हाला पर्वतीय स्‍थल। पंढरपुर, नाशिक, शिरडी, नांदेड, औधानागनाथ, त्रयंबकेवर, तुलजापुर, गणपतिपुले, भीमशंकर, हरिहरेश्‍वर, शेगाव, कोल्‍हापुर, जेजुरी तथा अंबजोगई  धार्मिक स्‍थान है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==प्रमुख नगर==&lt;br /&gt;
भारत देश में महाराष्ट्र सबसे बड़ा औद्योगिक प्रान्त है। मुंबई, पुणे, औरंगाबाद, नागपुर और नाशिक महाराष्ट्र के बडे शहरों में गिने जाते हैं। यहाँ के निवासियों की मातृभाषा मराठी है और यहाँ के लोगों को महाराष्ट्रीयन कहा जाता है। पहाड़ी नगरों में 'महाबलेश्वर' और 'माथेरान' काफ़ी प्रसिद्ध है। छुट्टियों के समय इन नगरों में बहुत ही भीड़ होती है और मौसम भी बहुत सुहावना होता है।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''धार्मिक नगर'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
*धार्मिक नगरों में नाशिक के काफ़ी नज़दीक शिर्डी नगर है। इस नगर का साईं बाबा का मन्दिर बहुत ही प्रसिद्ध है। &lt;br /&gt;
*इसी तरह मुंबई का 'महालक्ष्मी मन्दिर' और पुणे के 'दगडूशेठ गणपति मन्दिर' बहुत ही अधिक ख्याति प्राप्त हैं।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''मुंबई'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
[[चित्र:Nariman-Point-Mumbai.jpg|thumb|[[नरीमन पाइंट]], मुम्बई&amp;lt;br /&amp;gt; Nariman Point, Mumbai]]&lt;br /&gt;
मुंबई पूर्वी न्यूयॉर्क के नाम से भी विख्यात है। मुंबई में चौपाटी, गेटवे ऑफ़ इन्डिया , प्रिन्स वेल्स म्युज़ियम, एलिफ़ेन्टा केव्स और मडआईलॅन्ड बहुत ही प्रसिद्ध है।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''पुणे'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पुणे महाराष्ट्र का संस्कृति प्रधान नगर माना जाता है। शनिवारवाडा, लाल महल, सिंहगढ़ जैसे ऐतिहासिक स्थान हैं। पुणे का आई॰टी॰ पार्क और लक्ष्मी रोड काफ़ी जाना माना है।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''औरंगाबाद'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
औरंगाबाद नगर महाराष्ट्र के मध्य भाग में स्थित है। यहां के अजंता-एलोरा केव्स विश्व प्रसिद्ध हैं। इन गुफाओं में बुद्ध के तक्षण बनाये गये हैं।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''नागपुर'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नागपुर एक बहुत ही सुन्दर शहर है और यहा के संतरे पूरी दुनिया में जाने माने हैं।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''नाशिक'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नाशिक एक काफ़ी सुन्दर शहर है और यहां का मौसम सुहाना है। नाशिक के कालाराम और दूसरे मन्दिर विख्यात है और लोग [[गोदावरी नदी]] में नहाना पवित्र समझते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==सम्बंधित लिंक==&lt;br /&gt;
{{महाराष्ट्र प्रदेश के ज़िले}}&lt;br /&gt;
{{महाराष्ट्र के पर्यटन स्थल}}&lt;br /&gt;
{{राज्य और के. शा. प्र.}}&lt;br /&gt;
[[Category:भारत के राज्य और केन्द्र शासित प्रदेश]][[Category:राज्य संरचना]]&lt;br /&gt;
[[Category:महाराष्ट्र]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Gaurav</name></author>
	</entry>
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		<title>महाराष्ट्र</title>
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		<updated>2010-07-01T11:37:20Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Gaurav: /* उद्योग */&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा राज्य&lt;br /&gt;
|Image=Maharashtra-Map.jpg&lt;br /&gt;
|राजधानी=मुंबई&lt;br /&gt;
|जनसंख्या=96879&lt;br /&gt;
|जनसंख्या घनत्व=315&lt;br /&gt;
|क्षेत्रफल=308,000&lt;br /&gt;
|भौगोलिक निर्देशांक=18° 58' 30&amp;quot; N 72° 49' 33&amp;quot; E&lt;br /&gt;
|ज़िले=35&lt;br /&gt;
|महानगर=मुंबई&lt;br /&gt;
|बड़े नगर=मुंबई, पुणे, नागपूर, औरंगाबाद, कोल्हापूर, नासिक, शोलापूर, अमरावती, सांगली, नांदेड&lt;br /&gt;
|राजभाषा(एँ)=मराठी , हिन्दी , अंग्रेजी,&lt;br /&gt;
|स्थापना=1960/05/01&lt;br /&gt;
|मुख्य ऐतिहासिक स्थल=गेटवे ऑफ़ इन्डिया, अजंता-एलोरा केव्स, शनिवारवाडा, लाल महल, सिंहगढ़&lt;br /&gt;
|मुख्य पर्यटन स्थल=गेटवे ऑफ़ इन्डिया, मडआईलॅन्ड, अजंता-एलोरा केव्स, मुंबई चौपाटी&lt;br /&gt;
|लिंग अनुपात=1000:922&lt;br /&gt;
|साक्षरता=76.9&lt;br /&gt;
|राज्यपाल=एस एम कृष्णा&lt;br /&gt;
|मुख्यमंत्री=अशोक चव्हाण&lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=[http://www.maharashtra.gov.in/ अधिकारिक वेबसाइट]&lt;br /&gt;
|अद्यतन=2010/05/07&lt;br /&gt;
|emblem=maharashtra-seal.gif&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
==इतिहास और भूगोल==&lt;br /&gt;
प्राचीन 16 महाजनपदों में अश्मक या अस्सक का स्थान आधुनिक [[अहमदनगर]] के आसपास का माना जाता है । सम्राट [[अशोक]] के शिलालेख भी [[मुंबई]] के निकट पाए गए हैं । महाराष्‍ट्र के पहले प्रसिद्ध शासक सातवाहन (ई.पू. 230 से 225 ई.) थे जो महाराष्ट्र राज्य के संस्‍थापक थे। उन्‍होंने अपने पीछे बहुत से साहित्यिक, कलात्‍मक तथा पुरातात्विक प्रमाण छोड़े हैं। उनके शासनकाल में मानव जीवन के हर क्षेत्र में भरपूर  प्रगति हुई। &lt;br /&gt;
[[चित्र:Ajanta-Caves-1.jpg|thumb|[[अजंता की गुफ़ाएँ|अजंता की गुफ़ाओं]] का विश्व प्रसिद्ध भित्ति चित्र|left]]&lt;br /&gt;
इसके बाद वाकाटक आए, जिन्‍होंने भारतीय साम्राज्‍य की स्‍थापना की। उनके शासनकाल में महाराष्‍ट्र में शिक्षा, कला तथा धर्म सभी दिशाओं में अत्यधिक विकास हुआ। उनके शासन के दौरान ही 'अजंता की गुफाओं' में उच्‍च कोटि के भित्तिचित्र बनाए गए। वाकाटको के बाद कुछ समय के लिए 'कलचुरी वंश' ने शासन किया और फिर 'चालुक्‍य' सत्‍ता में आए। इसके बाद तटवर्ती इलाकों मे 'शिलाहारों' के अलावा महाराष्‍ट्र पर 'राष्‍ट्रकूट' तथा 'यादव' शासकों का नियंत्रण रहा। यादवों ने मराठी को शासन की भाषा बनाया और दक्षिण के एक बडे भाग पर अपना आधिपत्‍य स्थापित किया।&lt;br /&gt;
अलाउद्दीन ख़िलजी पहला मुस्लिम शासक था जिसने अपना राज्य दक्षिण में मदुरै तक फैला लिया था । उसके बाद मुहम्मद बिन तुग़लक (1325) ने अपनी राजधानी [[दिल्ली]] से हटाकर [[दौलताबाद]] कर ली । यह स्थान पहले देवगिरि नाम से प्रसिद्ध था और अहमदनगर के पास है । बहमनी शासकों ने महाराष्‍ट्र तथा इसकी संस्‍कृति को समन्वित किया, पर शिवाजी के कुशल नेतृत्‍व में महाराष्‍ट्र का सर्वांगीण विकास हुआ और यह एक अलग पहचान के साथ उभरकर सामने आया। शिवाजी ने स्‍वराज तथा राष्‍ट्रीयता की एक नई भावना पैदा की। उनकी प्रचंड शाक्ति ने मुग़लों को भारत के इस भाग में आगे नहीं बढ़ने दिया। पेशवाओं ने दक्षिण के पठार से लेकर पंजाब पर हमला बोल कर मराठाओं का आधिपत्‍य स्‍थापित किया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बहमनी सल्तनत के टूटने पर यह प्रदेश गोलकुण्डा के शासन में आया और उसके बाद औरंगजेब का संक्षिप्त शासन रहा। इसके बाद मराठों की शक्ति में उत्तरोत्तर वृद्धि हुई और अठारहवीं सदी के अन्त तक मराठा पूरे महाराष्ट्र में फैल गये थे और उनका साम्राज्य दक्षिण में कर्नाटक के दक्षिणी सिरे तक हो गया था । 1820 तक आते आते अंग्रेजों ने पेशवाओं को हरा दिया था और यह प्रदेश भी अंग्रेजी साम्राज्य का अंग बन गया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
स्‍वतंत्रता संग्राम में महाराष्‍ट्र सबसे आगे था। भारतीय राष्‍ट्रीय कांग्रेस का जन्‍म भी यहीं हुआ। मुंबई तथा महाराष्‍ट्र के अन्‍य शहरों के अनगिनत नेताओं ने पहले तिलक और बाद में महात्‍मा गांधी के मार्गदर्शन में कांग्रेस के आंदोलन को आगे बढाया। गांधी जी ने भी अपने आंदोलन का केंद्र महाराष्‍ट्र को बनाया था और गांधी युग में राष्‍ट्रवादी देश की राजधानी सेवाग्राम थी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
महाराष्ट्र  की स्थापना के पचास साल पूरे हो गये हैं। महाराष्ट्र और गुजरात का स्थापना दिवस 1मई को मनाया जाता है कभी ये दोनों राज्य मुंबई का हिस्सा थे। जब मुंबई राज्य से महाराष्ट्र और गुजरात के गठन का प्रस्ताव आया तो तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने मुंबई को अलग केन्द्रशासित प्रदेश बनाने की वकालत की। उनका तर्क था कि अगर मुंबई को देश की आर्थिक राजधानी बने रहना है तो यह करना आवश्यक है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
किंतु पंडित नेहरू की नहीं चली। देश के पहले वित्तमंत्री और वित्त विशेषज्ञ चिंतामणि देशमुख ने इसका प्रखर विरोध किया और इसी मुद्दे पर केन्द्रीय मंत्रिमण्डल से इस्तीफा दे दिया। मुंबई को महाराष्ट्र में रखने के लिए आंदोलन चला जिसमें कुल 80 लोगों की आहुति हुई लेकिन आखिरकार मुंबई महाराष्ट्र का हुआ।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देश को आजादी के ब मध्य बाद भारत के सभी मराठी भाषी स्थानों का समीकरण करके एक राज्य बनाने को लेकर बड़ा आंदोलन चला और 1 मई, 1960 को कोंकण, मराठवाडा, पश्चिमी महाराष्ट्र, दक्षिण महाराष्ट्र, उत्तर महाराष्ट्र (खानदेश) तथा विदर्भ, सभी संभागों को जोड़ कर महाराष्ट्र राज्य की स्थापना की गई।&lt;br /&gt;
==महाराष्ट्र राज्य का गठन==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Maharashtra-Map-1.jpg|महाराष्ट्र का मानचित्र&amp;lt;br /&amp;gt; Map of Maharashtra|thumb]]&lt;br /&gt;
देश के राज्‍यों के भाषायी पुनर्गठन के फलस्‍वरूप 1 मई, 1960 को महाराष्‍ट्र राज्‍य का प्रशासनिक प्रादुर्भाव हुआ। यह राज्‍य आसपास के मराठी भाषी क्षेत्रों को मिलाकर बनाया गया, जो पहले चार अलग अलग प्रशासनों के नियंत्रण में था। इनमें मूल ब्रिटिश मुंबई प्रांत में शामिल दमन तथा गोवा के बीच का ज़िला, हैदराबाद के निज़ाम की रियासत के पांच ज़िले, मध्‍य प्रांत (मध्‍य प्रदेश) के दक्षिण के आठ ज़िले तथा आसपास की ऐसी अनेक छोटी-छोटी रियासतें शामिल थी, जो समीपवर्ती ज़िलों में मिल गई थी। &lt;br /&gt;
==भौगोलिक स्थिति==&lt;br /&gt;
महाराष्‍ट्र  भारत के उत्तर में बसा हुआ है और भौगोलिक दृष्टि से यह राज्‍य मुख्‍यत: पठारी है। महाराष्‍ट्र पठारों का पठार है। इसके उठे हुए पश्चिमी किनारे सहाद्री पहाडियों का निर्माण करते है और समुद्र तट के समानांतर हैं तथा इसकी ढलान पूर्व तथा दक्षिण पूर्व की ओर धीरे धीरे बढ़ती है। राज्‍य के उत्तरी भाग में सतपुड़ा की पहाडियां है, जबकि अजंता तथा सतमाला पहाडियां राज्‍य के मध्‍य भाग से होकर जाती है। अरब सागर महाराष्‍ट्र की पश्चिमी सीमा का प्रहरी है, जबकि गुजरात और मध्‍य प्रदेश इसके उत्तर में हैं। राज्‍य की पूर्वी सीमा पर छत्तीसगढ है और कर्नाटक तथा आंध्र प्रदेश इसके दक्षिण में है।&lt;br /&gt;
==जनसंख्या==&lt;br /&gt;
महाराष्ट्र की जनसंख्या सन 2001 में 96,752,247 थी, विश्व में केवल ग्यारह ऐसे देश हैं जिनकी जनसंख्या महाराष्ट्र प्रदेश से ज़्यादा है। &lt;br /&gt;
==कृषि==&lt;br /&gt;
महाराष्‍ट्र के लगभग 65 प्रतिशत श्रमिक कृषि तथा संबंधित गतिविधियों पर निर्भर है। यहां की प्रमुख फ़सलें हैं- धान, ज्‍वार, बाजरा, गेहूं, तूर (अरहर), उडद, चना और दलहन। यह राज्‍य तिलहनों का प्रमुख उत्‍पादक है और मूंगफली, सूरजमुखी, सोयाबीन प्रमुख तिलहनी फ़सलें है। महत्‍वपूर्ण नकदी फ़सलें है कपास, गन्‍ना, हल्‍दी और सब्जियां। राज्‍य में 12.90 लाख हेक्‍टेयर क्षेत्र में विभिन्‍न प्रकार के फल, जैसे आम, केला, संतरा, अंगूर, काजू आदि की फ़सलें उगाई जाती है।&lt;br /&gt;
==उद्योग==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Gateway-of-India-2.jpg|thumb|[[गेटवे ऑफ़ इन्डिया]], मुम्बई&amp;lt;br /&amp;gt; Gateway of India, Mumbai]]&lt;br /&gt;
महाराष्‍ट्र को पूरे देश का औद्योगिक क्षमता का केंद्र माना जाता है और राज्‍य की राजधानी मुंबई देश की वित्‍तीय तथा वाणिज्यिक गतिविधियों का केंद्र है। राज्‍य की अर्थव्‍यवस्‍था में औद्योगिक क्षेत्र का महत्‍वपूर्ण स्‍थान है। खाद्य उत्‍पाद, तंबाकू और इससे बनी चीजें, सूती कपडा, कपड़े से बना सामान, काग़ज और इससे बनी चीजें, मुद्रण और प्रकाशन, रबड, प्‍लास्टिक, रसायन व रासायनिक उत्‍पाद, मशीनें बिजली की मशीन, यंत्र व उपकरण तथा परिवहन उपकरण और उनके कल पुर्जे आदि का राज्‍य के औद्योगिक उत्‍पादन में महत्‍वपूर्ण योगदान है। वर्ष 2005-06 में औद्योगिक उत्‍पादन (निर्माण) वर्ष 2004-05 के मुकाबले 8.9 प्रतिशत अधिक रहा।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==सिंचाई और बिजली==&lt;br /&gt;
जून 2005 के अंत तक 32 बड़ी, 178 मंझोली और राज्‍य के क्षेत्र की 2,274 लघु सिंचाई परियोजनाएं पूरी हो चुकी थीं इसके अलावा 21 बडी 39 मंझोली सिंचाई परियोजनाओं का निर्माण कार्य जारी है। 2004 से 2005 में राज्‍य में कुल सिंचित क्षेत्र 36.36 लाख हेक्‍टेयर था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
2004-05 में महाराष्‍ट्र की कुल स्‍थापित विद्युत उत्‍पादन क्षमता 12,909 मेगावाट थी। राज्‍य में प्‍लांट लोड फैक्‍टर (पी.एल.एफ) 81.6 प्रतिशत था और बिजली उत्‍पादन 68,507 करोड किलोवाट घंटा था।&lt;br /&gt;
==परिवहन==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Bibi-Ka-Maqbara-Aurangabad.jpg|[[बीबी का मक़बरा]], [[औरंगाबाद]]&amp;lt;br /&amp;gt; Bibi Ka Maqbara, Aurangabad|thumb|left]]&lt;br /&gt;
'''सड़क''' मार्च 2005 तक राज्‍य में सड़कों की कुल लंबाई 2.29 लाख कि.मी. थी, जिसमें राष्‍ट्रीय राजमार्गों की लंबाई 4, 367 कि.मी. प्रांतीय राजमार्गों की 33,406 कि.मी., प्रमुख ज़िला सड़कों की 48,824 कि.मी., अन्‍य ज़िला सड़कों की लंबाई 44,792 कि.मी. और ग्रामीण सड़कों की कुल लंबाई 97,913 कि.मी. थी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''रेलवे''' महाराष्‍ट्र में 5,527 कि.मी. रेल मार्ग है। इसमें से लगभग 78.6 प्रतिशत बड़ी रेल लाइनें, 7.8 प्रतिशत मीटर गेज तथा 13.6 प्रतिशत छोटी रेल लाइनें है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''उड्डयन''' राज्‍य में कुल 24 हवाई अड्डे / हवाई पट्टियां है। इनमें से 17 महाराष्‍ट्र सरकार के नियंत्रण में है। चार हवाई अड्डे अंतर्राष्‍ट्रीय हवाई अड्डा प्राधिकरण / भारतीय हवाई अड्डा प्राधिकरण के नियंत्रण में हैं, ज‍बकि बाकी तीन रक्षा मंत्रालय के अधीन है। राज्‍य सरकार के नियंत्रण वाले हवाई अड्डों पर अभी व्‍यावसायिक उड़ानों की सुविधा नहीं है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''बंदरगाह''' मुम्बंई प्रमुख बंदरगाह है। राज्‍य में दो बड़े और 48 छोटे अधिसूचित बंदरगाह हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==पर्यटन स्‍थल==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Ajanta-Caves-Aurangabad-Maharashtra-2.jpg|thumb|[[अजंता की गुफाएं]], [[औरंगाबाद]]&amp;lt;br /&amp;gt; Ajanta Caves, Aurangabad]]&lt;br /&gt;
यहां के महत्‍वपूर्ण पर्यटन केंद्र है अजंता, एलोरा, एलिफेंटा, कन्‍हेरी और कारला गुफाएं, महाबलेश्‍वर, माथेरन और पंचगनी, जवाहर, मालशेजघाट, अंबोली, चिकलधारा और पन्‍हाला पर्वतीय स्‍थल। पंढरपुर, नाशिक, शिरडी, नांदेड, औधानागनाथ, त्रयंबकेवर, तुलजापुर, गणपतिपुले, भीमशंकर, हरिहरेश्‍वर, शेगाव, कोल्‍हापुर, जेजुरी तथा अंबजोगई  धार्मिक स्‍थान है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==प्रमुख नगर==&lt;br /&gt;
भारत देश में महाराष्ट्र सबसे बड़ा औद्योगिक प्रान्त है। मुंबई, पुणे, औरंगाबाद, नागपुर और नाशिक महाराष्ट्र के बडे शहरों में गिने जाते हैं। यहाँ के निवासियों की मातृभाषा मराठी है और यहाँ के लोगों को महाराष्ट्रीयन कहा जाता है। पहाड़ी नगरों में 'महाबलेश्वर' और 'माथेरान' काफ़ी प्रसिद्ध है। छुट्टियों के समय इन नगरों में बहुत ही भीड़ होती है और मौसम भी बहुत सुहावना होता है।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''धार्मिक नगर'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
*धार्मिक नगरों में नाशिक के काफ़ी नज़दीक शिर्डी नगर है। इस नगर का साईं बाबा का मन्दिर बहुत ही प्रसिद्ध है। &lt;br /&gt;
*इसी तरह मुंबई का 'महालक्ष्मी मन्दिर' और पुणे के 'दगडूशेठ गणपति मन्दिर' बहुत ही अधिक ख्याति प्राप्त हैं।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''मुंबई'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
[[चित्र:Nariman-Point-Mumbai.jpg|thumb|[[नरीमन पाइंट]], मुम्बई&amp;lt;br /&amp;gt; Nariman Point, Mumbai]]&lt;br /&gt;
मुंबई पूर्वी न्यूयॉर्क के नाम से भी विख्यात है। मुंबई में चौपाटी, गेटवे ऑफ़ इन्डिया , प्रिन्स वेल्स म्युज़ियम, एलिफ़ेन्टा केव्स और मडआईलॅन्ड बहुत ही प्रसिद्ध है।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''पुणे'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पुणे महाराष्ट्र का संस्कृति प्रधान नगर माना जाता है। शनिवारवाडा, लाल महल, सिंहगढ़ जैसे ऐतिहासिक स्थान हैं। पुणे का आई॰टी॰ पार्क और लक्ष्मी रोड काफ़ी जाना माना है।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''औरंगाबाद'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
औरंगाबाद नगर महाराष्ट्र के मध्य भाग में स्थित है। यहां के अजंता-एलोरा केव्स विश्व प्रसिद्ध हैं। इन गुफाओं में बुद्ध के तक्षण बनाये गये हैं।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''नागपुर'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नागपुर एक बहुत ही सुन्दर शहर है और यहा के संतरे पूरी दुनिया में जाने माने हैं।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''नाशिक'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नाशिक एक काफ़ी सुन्दर शहर है और यहां का मौसम सुहाना है। नाशिक के कालाराम और दूसरे मन्दिर विख्यात है और लोग [[गोदावरी नदी]] में नहाना पवित्र समझते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==सम्बंधित लिंक==&lt;br /&gt;
{{महाराष्ट्र प्रदेश के ज़िले}}&lt;br /&gt;
{{महाराष्ट्र के पर्यटन स्थल}}&lt;br /&gt;
{{राज्य और के. शा. प्र.}}&lt;br /&gt;
[[Category:भारत के राज्य और केन्द्र शासित प्रदेश]][[Category:राज्य संरचना]]&lt;br /&gt;
[[Category:महाराष्ट्र]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Gaurav</name></author>
	</entry>
	<entry>
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		<title>मुम्बई</title>
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		<updated>2010-07-01T11:19:54Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Gaurav: /* नगर की स्थिति */&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;[[चित्र:A-View-Of-Mumbai.jpg|thumb|मुम्बई शहर का एक द्रश्य&amp;lt;br /&amp;gt; A View Of Mumbai City]]&lt;br /&gt;
मुंबई शहर, भूतपूर्व बंबई, [[महाराष्ट्र]] राज्य की राजधानी है। यह दक्षिण-पश्चिम [[भारत]] देश का वित्तीय व वाणिज्यिक केंद्र और अरब सागर में स्थित प्रमुख बंदरगाह है। मुंबई दुनिया के विशालतम व सबसे घनी आबादी वाले शहरों में से एक है। मुंबई एक प्राचीन बस्ती के स्थल पर बसा हुआ है और इसका नामकरण भगवान [[शंकर]] की पत्नी [[पार्वती]] के एक रूप, स्थानीय देवी मुंबा के नाम पर किया है। जिनका मंदिर उस स्थल पर था, जहाँ पर अब नगर का दक्षिण-पूर्वी हिस्सा अवस्थित है। मुंबई लंबे समय से भारत के सूती वस्त्र उद्योग के केंद्र के रूप में विख्यात रहा है, लेकिन अब यहाँ विविध निर्माण उद्योग भी हैं और इसके वाणिज्यिक व वित्तिय संस्थान सशक्त और सबल हैं। इस शहर में अधिकांश बड़े, विकासशील औद्योगिक नगरों की पुरानी समस्या वायु व जल प्रदूषण, झुग्गी बस्ती और अत्यधिक भीड़भाड़ मौजूद है। द्वीपीय अवस्थिति के कारण मुंबई का विस्तार सीमित है।&lt;br /&gt;
==भौतिक एवं मानव भूगोल==&lt;br /&gt;
====नगर की स्थिति====&lt;br /&gt;
[[चित्र:Nariman-Point-Mumbai.jpg|thumb|[[नरीमन पाइंट]], मुम्बई&amp;lt;br /&amp;gt; Nariman Point, Mumbai]]  &lt;br /&gt;
मुंबई शहर प्रायद्विपीय स्थल पर बसा हुआ है, जो मूलतः पश्चिम भारत के कोंकण तट के पास स्थित सात द्वीपिकाओं से मिलकर बना है। 17 वीं शताब्दी से अपवाह व भूमि फिर से हासिल करने की परियोजनाओं और जलमार्गों व जल अवरोधकों के निर्माण के कारण ये द्वीपिकाएं मिलकर एक बड़े भूभाग का निर्माण करती हैं, जिसे बंबई द्वीप के नाम से जाना जाता था।  इस द्वीप के पूर्व में मुंबई बंदरगाह का स्थिर जलक्षेत्र है। यह द्वीप निम्न मैदान से बना है, जिसका एक चौथाई हिस्सा समुद्र तल से भी नीचा है; इस मैदान के पूर्वी और पश्चिमी किनारों में निचली पहाड़ियों की दो समानांतर पर्वतश्रेणियाँ हैं। इनमें से लंबी पर्वतश्रेणी द्वारा सुदूर दक्षिण में निर्मित कोलाबा पॉइंट मुंबई बंदरगाह को खुले समुद्र से बचाता है। पश्चिमी पर्वतश्रेणी मालाबार हिल पर समुद्र तल से 55 मीटर की ऊँचाई पर समाप्त होती है, जो मुंबई की सबसे ऊँचे इलाकों में से एक है। इन दो पर्वत श्रेणियों के बीच पश्च खाड़ी (बैक बे) का छिछला विस्तार है। इस खाड़ी के शीर्ष और बंदरगाह के बीच कुछ ऊँची भूपट्टिकाओं पर दुर्ग स्थित है, मूलतः इसी के चारों ओर शहर का विस्तार हुआ। अब यहाँ मुख्यतः सार्वजनिक एवं वाणिज्यिक कार्यालय हैं। पश्च खाड़ी से उत्तर की ओर भूतल मध्यवर्ती मैदान की दिशा में ढलान वाली है। बंबई के सुदूर उत्तर में विशाल खारे दलदल हैं।&lt;br /&gt;
पुराना शहर दक्षिण में कोलाबा से उत्तर में माहिम और्सायन तक लगभग 67 वर्ग किमी में फैला हुआ था। 1950 में सालगेट के विशाल द्वीप को जलमार्ग द्वारा जोड़कर मुख्य क्षेत्र में शामिल करके उत्तर की ओर बंबई का विस्तार किया गया। 1957 तक वृहद बंबई में कई उपनगरीय नगरपालिका क्षेत्रों और कुछ पड़ोसी गावों को शामिल कर लिया गया। उसके बाद से इस महानगर का विस्तार जारी है। 1970 के दशक के आरंभ में भीड़भाड़ और सघनता दूर करने  के प्रयास के रूप में सालगेट द्वीप को मुंबई बंदरगाह के मुख्य जलक्षेत्र थाना क्रीक पर पुल बनाकर मुख्यभूमि से जोड़ दिया गया। मुंबई का प्राकृतिक सौंदर्य इस क्षेत्र के किसी अन्य शहर से बेहतर है। समुद्र से बंदरगाह में प्रवेश स्थान से एक विशाल दृश्य दिखाई देता है, जिसके किनारों पर मुख्यभूमि पर स्थित पश्चिमी घाट की पहाड़ियाँ हैं। बेशुमार छोटे जलयानों की सफेद पालों से चमकता द्वीपों से घिरा चौड़ा बंदरगाह जहाज़ों को सुरक्षित आश्रय प्रदान करता है, विशेषकर जब तटीय क्षेत्र पर तूफ़ान की स्थिति हो। बंदरगाह के द्वीपों में सबसे बड़ा एलीफ़ेटा है, जो छठी शताब्दी के गुफ़ा मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है।&lt;br /&gt;
[[चित्र:Gateway-Of-India-Mumbai.jpg|thumb|[[गेटवे ऑफ इंडिया]], मुम्बई&amp;lt;br /&amp;gt; Gateway Of India, Mumbai|left]] &lt;br /&gt;
इस नगर में पाए जाने वाले सामान्य वृक्षों में [[नारियल]], [[आम]], [[इमली]], और [[बरगद]] शामिल हैं। सालसेट द्वीप कभी [[बाघ]], [[तेंदुआ]], [[सियार]] और [[हिरन]] जैसे वन्य प्राणियों का आश्रय था, लेकिन अब ये प्राणी यहाँ नहीं पाये जाते। यहाँ के प्राणी जीवन में अब [[गाय]], [[बैल]], [[भेड़]], [[बकरी]] और अन्य पालतू प्रजातियाँ हैं। यहाँ पाए जाने वाले पक्षियों में [[गिद्ध]], [[कबूतर]], [[सारस]] और [[बत्तख]] शामिल हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
====जलवायु====&lt;br /&gt;
मुंबई की जलवायु गर्म और आर्द्र है। यहाँ चार ॠतुएं हैं। दिसंबर से फरवरी तक सर्दी और मार्च से मई तक गर्मी का महीना रहता है। दक्षिण-पश्चिम में मॉनसूनी हवाओं द्वारा होने वाली वर्षा &lt;br /&gt;
जून से सितंबर तक होती है और इसके बाद उत्तर मॉनसून काल आता है, जो अक्टूबर-नवंबर तक रहता है। इस काल में मौसम फिर से गर्म हो जाता है। औसत मासिक तापमान मई में 33 &lt;br /&gt;
डिग्री से॰ से जनवरी में 19 डिग्री से॰ तक होता है। औसत वार्षिक वर्षा 1,800 मिमी है, जिसमें से औसतन 610 मिमी॰ वर्षा सिर्फ़ जुलाई के महीने में होती है।&lt;br /&gt;
====शहर की संरचना====&lt;br /&gt;
[[चित्र:Elephanta-Caves-Mumbai.jpg|[[एलीफेंटा की गुफाएं]], मुम्बई&amp;lt;br /&amp;gt; Elephant Caves, Mumbai|thumb]]&lt;br /&gt;
मुंबई के पुराने हिस्से ज़्यादा निर्मित हैं, लेकिन अधिक समृद्ध क्षेत्रों, जैसे मालाबार हिल में कुछ हरियाली है। यहाँ कई खुले मैदान व पार्क हैं। मुंबई में लगातार शहरीकरण के इतिहास के कारण शहर के कई हिस्सों में झुग्गी बस्तियाँ बन गईं हैं। इस शहर में अनेक कारख़ानों, बढ़ते यातायात और निकट स्थित तेलशोधनशालाओं के कारण वायु एवं जल प्रदूषण ख़तरे के स्तर तक बढ़ गया है। शहर के दक्षिणी हिस्से में वित्तीय ज़िला (पुराने फ़ोर्ट बंबई के आसपास) स्थित है। सुदूर दक्षिण (कोलाबा के आसपास) और पश्चिम में नेताजी सुभाष चंद्र रोड (मॅरीन ड्राइव) तथा मालाबार हिल आवासी क्षेत्र हैं। फ़ोर्ट क्षेत्र के उत्तर में प्रमुख व्यापारिक ज़िला है, जो धीरे-धीरे वाणिज्यिक आवासीय क्षेत्र में शामिल हो रहा है। अधिकांश पुराने कारख़ाने इसी क्षेत्र में स्थित हैं। सुदूर उत्तर में आवासीय क्षेत्र हैं और उनके बाद हाल ही में विकसित औद्योगिक क्षेत्र और झुग्गी बस्तियों के इलाक़े हैं।&lt;br /&gt;
यहाँ आवास मुख्यतः निजी स्वामित्व वाले हैं, हालाँकि सार्वजनिक वित्त निगमों के ज़रिये सरकार द्वारा निर्मित कुछ सार्वजनिक आवास भी हैं। मुंबई अत्यधिक भीड़भाड़ वाला नगर है और अत्यधिक समृद्ध लोगों के अलावा बाक़ी लोगों के आवास के लिए कमी रहती है। इसी कारण वाणिज्यिक और औद्योगिक उद्यमों को मध्य स्तरीय व्यावसायिक, तकनीकी या प्रबंधकीय कर्मचारियों को आकर्षित करने में लगातार परेशानी हो रही है। आंतरिक क्षेत्र से अकुशल श्रमिकों का लगातार अप्रवास हो रहा है और इस नगर में बेघर व निर्धन लोगों की संख्या बढ़ रही है। नगर के योजनाकार इसे रोकना चाहते हैं और उन्होंने उद्यमों को बंदरगाह के दूसरी ओर इससे लगे नगर नवी मुंबई में स्थापित करने का प्रयास किया है। इसके लिए नगर में औद्योगिक इकाइयों के विकास और पुरानी इकाइयों के विस्तार पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। लेकिन उद्यमियों द्वारा अपने उद्योग को देश के किसी अन्य हिस्से में ले जाने की धमकी के कारण इस प्रतिबंध का बड़े पैमाने पर उल्लंघन हो रहा है। मुंबई का वास्तुशिल्प अलंकृत गॉथिक शैली का है, जो 18वीं और 19वीं शताब्दियों की विशेषता थी। यहाँ समकालीन अन्य रुपांकन (डिज़ाइन) भी है। पुराने प्रशासनिक और वाणिज्यिक भवनों के साथ गगनचुंबी व कॉन्क्रीट से बनी बहुमंज़िला इमारतें हैं।&lt;br /&gt;
====जनजीवन====&lt;br /&gt;
[[चित्र:Mumbai-Tiffin-Wallah.jpg|मुम्बई का टिफ़िन वाला&amp;lt;br /&amp;gt; Tiffin Wallah Of Mumbai|thumb]]&lt;br /&gt;
1940 के दशक से मुंबई का विकास असाधारण तो नहीं, लेकिन एक समान रहा है। 20वीं सदी की शुरुआत में यहाँ की जनसंख्या 8 लाख 50 हज़ार थी। 1941 में यह दुगुनी होकर 16 लाख 95 हज़ार हो गई है। परिवार नियोजन कार्यक्रमों के कारण इस शहर में जन्मदर देश के अन्य हिस्सों से काफ़ी कम है और जनसंख्या विकास की ऊँची दर का मुख्य कारण रोज़गार की खोज में यहाँ आने वाले लोग हैं। मुंबई विश्व की सबसे अधिक सघन आबादी वाले क्षेत्रों में से एक है। 1981 में ग्रेटर मुंबई का औसत घनत्व 13,500 लोग प्रति वर्ग किमी था। शहर के अधिकांश पुराने हिस्सों में घनत्व इस औसत से लगभग तीन गुना अधिक था, हालाँकि पश्च खाड़ी के पास स्थित गिरगांव, भिंडी बाजार और भुलेश्वर में घनत्व कम है। नगर के कुछ भीतरी हिस्सों में घनत्व लगभग 3,86,100 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी है, जो शायद दुनिया का अधिकतम घनत्व है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुंबई का चरित्र सही मायनों में महानगरीय है और यहाँ लगभग सभी धर्मों तथा विश्व के सभी क्षेत्रों के लोग रहते हैं। यहाँ की लगभग आधी आबादी हिंदुओं की है, लेकिन मुसलमान, ईसाई, &lt;br /&gt;
बौद्ध, जैन, सिक्ख, पारसी और यहूदी समुदाय भी यहाँ मौजूद हैं। मुंबई में लगभग सभी भारतीय भाषाएं और कई विदेशी भाषाएं बोली जाती हैं। राजकीय भाषा [[मराठी भाषा|मराठी]] प्रमुख स्थानीय भाषा है, इसके बाद [[गुजराती भाषा|गुजराती]] और [[हिंदी]] का स्थान है।&lt;br /&gt;
==अर्थव्यवस्था==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Bombay-Stock-Exchange.jpg|thumb|[[बंबई स्टॉक एक्स्चेंज]], मुम्बई&amp;lt;br /&amp;gt; Bombay Stock Exchange, Mumbai]]&lt;br /&gt;
मुम्बई भारत की आर्थिक धुरी एवं वाणिज्यिक व वित्तीय केन्द्र है। कुछ मायनों में इसकी आर्थिक संरचना भारत में नाभिकीय और पुरातन कालों के संयोजन को प्रदर्शित करती है। इस नगर में &lt;br /&gt;
भारतीय परमाणु ऊर्जा आयोग स्थित है, जिसमें परमाणु रिऐक्टर और प्लूटोनियम विलग्नक स्थित है। नगर के कई हिस्सों में अब भी ईधन और ऊर्जा के पारम्परिक जैविक साधनों का इस्तेमाल होता है।&lt;br /&gt;
====उद्योग====&lt;br /&gt;
सूती वस्त्र उद्योग, जिसके कारण 19वीं शताब्दी में यह नगर समृद्ध हुआ। अब भी महत्वपूर्ण है, लेकिन अब इसका पतन हो रहा है, क्योंकि कई सूती वस्त्र मिलों को रूग्ण इकाई घोषित कर दिया गया हैं नए विकासशील उद्योगों में धातु, रसायन, वाहन, इलेक्ट्रानिक्स, इंजीनियरिंग और कई प्रकार के सहायक उद्यम शामिल हैं। शाद्य प्रसंस्करण, काग़ज़—निर्माण, छपाई और प्रकाशन जैसे शहरी उद्योग भी रोज़ग़ार के अवसर उपलब्ध कराने में सहायक हैं। सेवा और अनौपचारिक क्षेत्र में 20वीं शताब्दी के अन्तिम दशक में काफ़ी विस्तार हुआ है।&lt;br /&gt;
====वाणिज्य और वित्त====&lt;br /&gt;
[[चित्र:Hotel-Taj-Mumbai.jpg|thumb|[[होटल ताज]], मुम्बई&amp;lt;br /&amp;gt; Hotel Taj, Mumbai|left]]&lt;br /&gt;
देश का केन्द्रीय बैंक भारतीय रिज़र्व बैंक, कई अन्य व्यवसायिक बैंक और सरकारी बान्डों व निजी शेयरों में देश के सार्वजनिक क्षेत्र का सबसे बड़ा निवेशक राष्ट्रीयकृत उद्यम भारतीय जीवन बीमा निगम और दीर्घकालीन निवेश से जुड़े प्रमुख वित्तीय संस्थान मुम्बई में स्थित हैं। इस कारण इस शहर में कई वित्तीय और व्यापारिक सेवाएँ उपलब्ध हैं। मुम्बई स्टाक एक्सचेन्ज देश का अग्रणी स्टाक और शेयर बाज़ार है। हालाँकि आज़ादी के बाद देश भर में कई आर्थिक केन्द्र पनपे हैं, जिसके कारण इस एक्सचेन्ज का उतना महत्व नहीं रहा। फिर भी वित्तीय व अन्य व्यापारिक कारोबार के मामले में यह प्रमुख केन्द्र है और देश की अर्थ-व्यवस्था के पैमाने की भूमिका निभाता है।&lt;br /&gt;
====परिवहन====&lt;br /&gt;
[[चित्र:Mumbai-Chhatrapati-Shivaji-Terminus.jpg|thumb|[[छत्रपति शिवाजी टर्मिनस]], मुम्बई&amp;lt;br /&amp;gt;Chhatrapati Shivaji Terminus, Mumbai]]&lt;br /&gt;
मुम्बई सड़क संजाल द्वारा भारत के अन्य हिस्सों से जुड़ा हुआ है। यह पश्चिम तथा मध्य रेलवे का मुख्यालय है और इस नगर से चलने वाली रेलगाड़ियाँ भारत के सभी हिस्सों तक सामान व &lt;br /&gt;
यात्रियों को ले जाती हैं। छत्रपति शिवाजी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा कई विदेशी हवाई सेवाओं के आगमन का महत्वपूर्ण स्थल है। जबकि निकटस्थ सान्ताक्रूज़ हवाई अड्डे से घरेलू उड़ानें भरी जाती हैं। मुम्बई में भारत के अंतर्राष्ट्रीय हवाई यातायात का 60 प्रतिशत और घरेलू यातायात का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा केन्द्रित है। यहाँ के बंदरगाह पर उपलब्ध सुविधाओं ने मुम्बई को देश का प्रमुख पश्चिमी बंदरगाह बना दिया है। हालाँकि पश्चिमी तट पर मुम्बई के उत्तर में कांडला और दक्षिण में गोवा व कोच्चि जैसे कई अन्य प्रमुख बंदरगाह बन गए हैं, लेकिन यहाँ से अब भी भारत के समुद्री व्यापार का 40 प्रतिशत हिस्सा संचालित होता है। दो उपनगरीय विद्युत रेलप्रणालियाँ मुख्य सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध कराती हैं और रोज़ महानगरीय क्षेत्र के लाखों लोगों को ढोती हैं। मुम्बई में नगरपालिका के स्वामित्व वाली बस सेवा भी है।&lt;br /&gt;
==प्रशासनिक एवं सामाजिक विशेषताएँ==&lt;br /&gt;
====सरकार====&lt;br /&gt;
[[चित्र:Mumbai-High-Court.jpg|thumb|[[बंबई उच्च न्यायालय]], मुम्बई&amp;lt;br /&amp;gt; Mumbai High Court]]&lt;br /&gt;
[[महाराष्ट्र]] की राजधानी के रूप में यह शहर राज्य प्रशासन का समेकित राजनीतिक खण्ड है, जिसके मुख्यालय को मंत्रालय कहा जाता है। राज्य सरकार पुलिस बल को नियंत्रित करती है और नगर के कुछ विभागों पर प्रशासनिक नियंत्रण रखती है। डाक एवं टेलीग्राफ़ प्रणाली, रेल, बंदरगाह और हवाई अड्डों जैसे संचार साधनों पर केन्द्र सरकार का नियंत्रण है। मुम्बई में भारतीय नौसेना की पश्चिमी कमान का मुख्यालय भी है और यह भारतीय फ़्लैगशिप का बेस भी है। शहर का प्रशासन वृहद (ग्रेटर) मुम्बई के पूर्णतःस्वायत्त नगर निगम के अंतर्गत है। इसकी विधायी संस्था का निर्वाचन हर चार वर्ष में वयस्क मताधिकार द्वारा होता है और यह विभिन्न स्थायी समितियों के माध्यम से काम करती है। राज्य सरकार के द्वारा तीन वर्षों के लिए नियुक्त मुख्य कार्यकारी यहाँ का निगम आयुक्त होता है। महापौर का चुनाव हर वर्ष नगर निगम द्वारा किया जाता है; महापौर निगम की बैठकों की अध्यक्षता करता है और शहर में सर्वाधिक सम्मानित माना जाता है, लेकिन वस्तुतः उसके पास कोई सत्ता नहीं होती।&lt;br /&gt;
====जनसुविधाएँ====&lt;br /&gt;
[[चित्र:Brabourne-Stadium-Mumbai.jpg|thumb|[[ब्रेबोर्न स्टेडियम]], मुम्बई&amp;lt;br /&amp;gt; Brabourne Stadium, Mumbai|left]]&lt;br /&gt;
निगम के कई कार्यों में चिकित्सा सेवा, शिक्षा, जलापूर्ति, अग्निशमन, कचरे की व्यवस्था, बाज़ार, उद्यान और इंजीनियरिंग परियोजनाओं का, जैसे निकास तथा सड़कों व गलियों में प्रकाश व्यवस्था को बेहतर बनाना, काम शामिल हैं। नगर निगम शहर में यातायात प्रणाली और विद्युत आपूर्ति को संचालित करता है। यहाँ सरकार और निजी क्षेत्र की एजेंसियों के द्वारा एक ग्रिड प्रणाली के ज़रिये बिजली शहर में वितरित की जाती है। जलापूर्ति व्यवस्था भी नगर निगम के द्वारा संचालित की जाती है और यह मुख्यतः निकटस्थ ठाणे ज़िले की तांसा झील, तुलसी व विहार झीलों से प्राप्त किया जाता है। मूलतः जलापूर्ति के लिए निर्मित पवई झील कारगर साबित नहीं हुई, क्योंकि इसका पानी पीने योग्य नहीं है।&lt;br /&gt;
====स्वास्थ्य====&lt;br /&gt;
इस शहर में 100 से अधिक अस्पताल हैं, जिनमें केन्द्र, राज्य सरकार और निगम संस्थाओं द्वारा संचालित अस्पताल और कई (क्षय-रोग, कैन्सर और ह्रदय रोगों के लिए) विशेष संस्थान शामिल हैं, यहाँ पर कई अग्रणी निजी अस्पताल भी हैं। यहाँ हेफ़काइन इंस्टिट्यूट भी है, जो एक अग्रणी बैक्टीरिया अनुसन्धान केन्द्र है, इसे उष्णकटिबन्धीय बीमारियों में विशिष्टता प्राप्त है।&lt;br /&gt;
====सुरक्षा====&lt;br /&gt;
शहर के पुलिस बल का प्रमुख पुलिस आयुक्त होता है, जो मुम्बई में क़ानून एवं व्यवस्था के लिए ज़िम्मेदार होता है, प्रशासनिक रूप से वह राज्य के गृह सचिव के प्रति जवाबदेह होता है।&lt;br /&gt;
====शिक्षा====&lt;br /&gt;
मुम्बई की साक्षरता दर समूचे राष्ट्र की साक्षरता दर से काफ़ी अधिक हैं। प्राथमिक शिक्षा मुफ़्त व अनिवार्य है और यह नगर निगम का दायित्व है। माध्यमिक शिक्षा सरकारी व निजी विद्यालयों द्वारा सरकार की देखरेख में कराई जाती है। यहाँ सार्वजनिक एवं निजी पालिटेक्निक व संस्थान हैं, जो विद्यार्थियों को यांत्रिकी, विद्युत तथा रासायनिक इंजीनियरी में विभिन्न डिग्री व डिप्लोमा देते हैं। केन्द्र सरकार के द्वारा संचालित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आई. आई. टी.) भी यहाँ पर स्थित है। अन्य इंजीनियरिंग कालेजों में:-&lt;br /&gt;
*सरदार पटेल कालेज आफ़ इंजीनियरिंग, &lt;br /&gt;
*वीरमाता जीजाबाई टेक्नोलाज़िकल इंस्टिट्यूट, &lt;br /&gt;
*के. जी. एस. कालेज आफ़ इंजीनियरिंग, &lt;br /&gt;
*एम. एच. एस. एस. कालेज आफ़ इंजीनियरिंग, &lt;br /&gt;
*डी. जे. एस. कालेज आफ़ इंजीनियरिंग, &lt;br /&gt;
*थोडोमल शाही इंजीनियरिंग कालेज और &lt;br /&gt;
*विवेकानन्द इंस्टिट्यूट आफ़ टेक्नोलोज़ी शामिल हैं। &lt;br /&gt;
1857 में स्थापित बाम्बे विश्वविद्यालय से सम्बद्ध कला, विज्ञान, वाणिज्य व शिक्षा सम्बन्धी महाविद्यालय, चिकित्सा, होमियोपैथी, यूनानी चिकित्सा, फ़ार्मेसी व दन्त चिकित्सा महाविद्यालय, वास्तुशिल्प, शारीरिक शिक्षा एवं प्रबन्धन संस्थान हैं। मुम्बई में महिलाओं के लिए एस. एन. डी. टी. विश्वविद्यालय भी है। 1857 में स्थापित बाम्बे विश्वविद्यालय से बहुत से महाविद्यालय और कई शिक्षण विभाग जुड़े हुए हैं। [[गोवा]] में स्थित बहुत से महाविद्यालय इस विश्वविद्यालय से सम्बद्ध हैं।&lt;br /&gt;
====सांस्कृतिक जीवन====&lt;br /&gt;
[[चित्र:Rajabai-Tower-Mumbai.jpg|thumb|[[राजाबाई घंटाघर]], मुम्बई&amp;lt;br /&amp;gt; Rajabai Tower, Mumbai|left]]&lt;br /&gt;
मुम्बई का सांस्कृतिक जीवन इसकी जातीय विविधतायुक्त जनसंख्या को प्रतिबिम्बित करता है। शहर में बहुत से संग्रहालय, पुस्तकालय, साहित्यिक एवं कई अन्य सांस्कृतिक संस्थान, कला, दीर्घाएँ व रंगशालाएँ हैं। भारत का कोई अन्य शहर अपनी सांस्कृतिक एवं मनोरंजन सुविधाओं के मामले में इतनी उच्च श्रेणी की विविधता और गुणवत्ता का शायद ही दावा कर सके। मुम्बई भारतीय फ़िल्म उद्योग का गढ़ है। साल भर यहाँ पश्चिमी व भारतीय संगीत सम्मेलन एवं महोत्सव और भारतीय नृत्य कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इंडो—सार्सेनिक वास्तुशिल्प की एक इमारत में द प्रिंस आफ़ वेल्स म्यूज़ियम आफ़ वेस्टर्न इंडिया है, जिसमें कला, पुरातत्व व प्राकृतिक इतिहास के तीन प्रमुख विभाग हैं। निकट ही जहाँगीर आर्ट गैलरी है, जो मुम्बई की पहली स्थायी कला दीर्घा है और सांस्कृतिक व शैक्षिक गतिविधियों का केन्द्र है। मुम्बई भारतीय मुद्रण उद्योग का महत्वपूर्ण केन्द्र है और यहाँ सशक्त प्रेस है। यहाँ अंग्रेज़ी, मराठी, हिन्दी, गुजराती, सिन्धी व उर्दू में समाचार पत्र प्रकाशित होते हैं। बहुत-सी मासिक, पाक्षिक व साप्ताहिक पत्रिकाएँ भी यहाँ से प्रकाशित होती हैं। आल-इंडिया रेडियो (आकाशवाणी) का क्षेत्रीय केन्द्र भी मुम्बई में ही है और इस शहर के लिए दूरदर्शन सेवाएँ 1972 में शुरू हुईं। शहर के उत्तर में कृष्णगिरि वन एक राष्ट्रीय उद्यान और छुट्टियाँ बिताने के लिए ख़ूबसूरत सैरगाह है, कन्हेरी गुफ़ाओं के निकट एक प्राचीन बौद्ध विश्वविद्यालय था, यहाँ 100 से अधिक गुफ़ाओं में दूसरी से नौवीं शताब्दी तक के विशालकाय बौद्ध मूर्तिशिल्प हैं। यहाँ पर कई सार्वजनिक उद्यान हैं। जिसमें जीजामाता उद्यान शामिल है, यहाँ पर मुम्बई का चिड़ियाघर स्थित है, यहाँ पर बैपटिस्टा गार्डन भी है, जो मज़गाँव में एक जलाशय पर स्थित है; इसके अलावा मालाबार हिल पर स्थित फ़िरोज़शाह मेहता गार्डन, कमला नेहरू पार्क व स्लोपिंग पार्क हैं। समूचे भारत में लोकप्रिय क्रिक्रेट के मैच भारतीय क्रिकेट क्लव (ब्रेबोर्न स्टेडियम) और वानखेड़े स्टेडियम में खेले जाते हैं। दौड़ व साइकिल चालन प्रतियोगिताएँ वल्लभ भाई पटेल स्टेडियम में आयोजित की जाती है। स्नान व तैराकी के लिए जुहू समुद्र तट एक प्रसिद्ध स्थान है।&lt;br /&gt;
==इतिहास==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Hutatma-Chowk-Mumbai.jpg|thumb|[[हुतात्मा चौक]], मुम्बई&amp;lt;br /&amp;gt; Hutatma Chowk, Mumbai]]&lt;br /&gt;
मछुआरों की मूल जनजाति, कोली यहाँ के आरम्भिक ज्ञात निवासी थे, हालाँकि वृहद मुम्बई के कान्दीवली में पाए गए पुरापाषाण काल के पत्थर के औज़ार यहाँ पाषाण काल के दौरान मानव बस्ती की ओर संकेत करते हैं। प्राचीन यूनानी खगोलशास्त्री व भूगोलविज्ञानी टालेमी के समय में यह क्षेत्र हेप्टेनिशिया के रूप में जाना जाता था और यह 1000 वर्ष ई. पू. में फ़ारस व मिस्र के साथ समुद्री व्यापार का प्रमुख केन्द्र था। तीसरी शताब्दी ई. पू. में यह अशोक के साम्राज्य का हिस्सा था और छठी से आठवीं शताब्दी में यहाँ चालुक्यों का शासन रहा, जिन्होंने अपनी छाप घरपुरी (एलीफ़ेन्टा द्वीप) पर छोड़ी। मालाबार पाइन्ट पर बना वाकेश्वर मन्दिर सम्भवतः कोंकण तट के शिलाहर प्रमुखों के शासन (9वीं से 13वीं शताब्दी) के दौरान निर्मित किया गया था। दोगिरि के यादवों (1187-1318) के समय में इस द्वीप (जो बाम्बे द्वीप बना) पर महिकावती (माहिम) बस्ती की स्थापना हुई, जो 1924 में हिन्दुस्तान के [[ख़िलजी वंश]] के आक्रमणों के जवाब में बनाई गई। इन्हीं के वंशज वर्तमान मुम्बई में पाए जाते हैं और बहुत से स्थानों के नाम आज भी उसी युग से हैं। 1348 में आक्रमणकारी मुस्लिम सेनाओं ने इस द्वीप को जीत लिया और यह [[गुजरात]] राज्य का हिस्सा बन गया। माहिम को जीतने की पुर्तग़ाली कोशिश 1507 में असफल रही, लेकिन 1534 में गुजरात के शासक सुल्तान बहादुरशाह ने यह द्वीप पुर्तग़ालियों को सौंप दिया। 1661 में किंग चार्ल्स द्वितीय व पुर्तग़ाल के राजा की बहन कैथरीन आफ़ ब्रैगेंज़ा के विवाह के बाद यह ब्रिटिश नियंत्रण में आ गया। राजा ने इसे 1668 में ईस्ट इंडिया कम्पनी को सत्तांतरित कर दिया। शुरूआत में कलकत्ता (वर्तमान [[कोलकाता]]) व मद्रास (वर्तमान [[चेन्नई]]) की तुलना में बंबई कम्पनी की बहुत बड़ी सम्पत्ति ने होकर केवल पश्चिमी तट पर कम्पनी की पैर जमाए रखने में सहायता करता था। &lt;br /&gt;
मुख्य भूमि पर मुग़ल, मराठा व गुजरात के प्रादेशिक शासक अधिक शक्तिशाली थे। यहाँ तक कि ब्रिटिश नौसेना का मुग़लों, मराठों, पुर्तगालियों व डचों से कोई मुक़ाबला नहीं था। 19वीं शताब्दी के आरम्भ तक बाहरी घटनाओं ने शहर के तेज़ विकास में सहायता की। [[दिल्ली]] में मुग़ल शक्ति के पतन, मुग़ल-मराठा प्रतिद्वन्द्विता और गुजरात में मौजूद अस्थिरता ने कारीगरों व व्यापारियों को शरण लेने के लिए इस द्वीप पर जाने को मज़बूर किया और इस प्रकार मुम्बई का विकास शुरू हुआ। मराठा शक्ति के विनाश के साथ मुख्यभूमि से व्यापार व संचार स्थापित हुआ और उसका यूरोप तक विस्तार किया गया, जिससे समृद्धी की शुरुआत हुई। 1857 में पहली कताई व बुनाई मिल स्थापित की गई और 1860 तक मुम्बई भारत का विशालतम सूती वस्त्र बाज़ार बन गया। अमेरिकी नागरिक युद्ध (1861-65) और ब्रिटेन को किए जा रहे कपास की आपूर्ति रुक जाने से मुम्बई के व्यापार में उछाल आया। लेकिन नागरिक युद्ध के समाप्त होने के बाद कपास के दामों में भारी कमी आई तथा व्यापार में तेज़ी ख़त्म हो गई। तब तक हालाँकि अतःक्षेत्र खोले जा चुके थे और मुम्बई आयात व्यापार का मज़बूत केन्द्र बन चुका था। &lt;br /&gt;
[[चित्र:Brabourne-Stadium-Mumbai.jpg|thumb|[[ब्रेबोर्न स्टेडियम]], मुम्बई&amp;lt;br /&amp;gt; Brabourne Stadium, Mumbai]]&lt;br /&gt;
1869 में स्वेज़ नहर के खुलने के साथ ही मुम्बई में समृद्धि आई, हालाँकि जनसंख्या बढ़ने के साथ-साथ झुग्गियों और अस्वच्छ स्थितियों में भी कई गुना वृद्धि हुई। 1896 में यहाँ प्लेग का प्रकोप फैला और नए क्षेत्रों में बस्तियाँ बसाने व कामगार वर्ग के लिए आवास की व्यवस्था करने के लिए सिटी इंप्रूवमेंट ट्रस्ट की स्थापना की गई। 525 हेक्टेयर क्षेत्र को घेरने के लिए तटबन्ध बनाने की महत्वाकांक्षी योजना का 1918 में प्रस्ताव किया गया, लेकिन द्वितीय विश्व युद्ध के बाद भारत में अपने क़िस्म की पहली दोतरफ़ा सड़क नेताजी सुभाष मार्ग, जो नरीमन प्वाइंट से मालाबार प्वाइंट तक है, के बन जाने तक यह पूरा नहीं हो सका। युद्ध के बाद के वर्षों में उपनगरीय क्षेत्रों में आवासीय इकाइयों के विकास की शुरूआत हुई और नगर निगम के माध्यम से मुम्बई नगर के प्रशासन को वृहत मुम्बई के उपनगरों तक विस्तारित किया गया। यह शहर भूतपूर्व बाम्बे प्रेज़िडेन्सी व बाम्बे राज्य की राजधानी रह चुका है और 1960 में इसे महाराष्ट्र राज्य की राजधानी बनाया गया।&lt;br /&gt;
19वीं सदी के अन्त व 20 शताब्दी के आरम्भ में मुम्बई भारतीय राष्ट्रवादी और क्षेत्रीय राजनीतिक गतिविधियों का केन्द्र था। 1885 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (स्वतंत्रता प्राप्ति तक भारत समर्थक और ब्रिटिश विरोधी भावनाओं का केन्द्रीय दल) का पहला अधिवेशन इस नगर में हुआ, जिसके बाद 1942 के अधिवेशन में कांग्रेस ने 'भारत छोड़ो' प्रस्ताव पारित किया, जिससे भारत की पूर्ण स्वतंत्रता की माँग की गई थी। 1956 से 1960 तक मुम्बई में मुम्बई राज्य के ब्रिटिश उपनिवेशवाद से विरासत में मिले द्विभाषीय (मराठी--गुजराती) स्वरूप के ख़िलाफ़ व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए और इसके बाद विभाजन हुआ, जिससे गुजरात व महाराष्ट्र के आधुनिक राज्यों का निर्माण हुआ। &lt;br /&gt;
==जनसंख्या==&lt;br /&gt;
मुम्बई की जनसंख्या (2001) 33,26,837 है और मुम्बई उपनगरीय क्षेत्र की जनसंख्या 85,87,561 है।&lt;br /&gt;
==सम्बंधित लिंक==&lt;br /&gt;
{{महाराष्ट्र  के पर्यटन स्थल}}&lt;br /&gt;
[[Category:महाराष्ट्र]][[Category:महाराष्ट्र_के_ऐतिहासिक_नगर]][[Category:महाराष्ट्र_के_नगर]][[Category:भारत के नगर]]&lt;br /&gt;
[[Category:प्रदेशों की राजधानियाँ]][[Category:महाराष्ट्र_के_पर्यटन स्थल]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:मुम्बई]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Gaurav</name></author>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;Gaurav: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{चित्र सूचना&lt;br /&gt;
|विवरण=[[महात्मा गाँधी]] के तीन बंदरों का सेंडसेशन&amp;lt;br /&amp;gt; Sandsation Of Mahatma Gandhi's Monkeys&lt;br /&gt;
|चित्रांकन=[http://www.flickr.com/photos/goere/ Die Göre]&lt;br /&gt;
|दिनांक=&lt;br /&gt;
|स्रोत=www.flickr.com&lt;br /&gt;
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|अन्य विवरण=महात्मा गाँधी के इन तीन बंदरों का संकेत अर्थ है- बुरा मत बोलो, बुरा मत सुनो, बुरा मत देखो। (बांये से दांये) &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
{{CCL&lt;br /&gt;
|Attribution={{Attribution}}&lt;br /&gt;
|Noncommercial={{Noncommercial}}&lt;br /&gt;
|No Derivative Works={{No Derivative Works}}&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
{{चयन प्रक्रिया चित्र}}&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Gaurav</name></author>
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		<title>महाराष्ट्र</title>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;Gaurav: /* प्रमुख नगर */&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा राज्य&lt;br /&gt;
|Image=Maharashtra-Map.jpg&lt;br /&gt;
|राजधानी=मुंबई&lt;br /&gt;
|जनसंख्या=96879&lt;br /&gt;
|जनसंख्या घनत्व=315&lt;br /&gt;
|क्षेत्रफल=308,000&lt;br /&gt;
|भौगोलिक निर्देशांक=18° 58' 30&amp;quot; N 72° 49' 33&amp;quot; E&lt;br /&gt;
|ज़िले=35&lt;br /&gt;
|महानगर=मुंबई&lt;br /&gt;
|बड़े नगर=मुंबई, पुणे, नागपूर, औरंगाबाद, कोल्हापूर, नासिक, शोलापूर, अमरावती, सांगली, नांदेड&lt;br /&gt;
|राजभाषा(एँ)=मराठी , हिन्दी , अंग्रेजी,&lt;br /&gt;
|स्थापना=1960/05/01&lt;br /&gt;
|मुख्य ऐतिहासिक स्थल=गेटवे ऑफ़ इन्डिया, अजंता-एलोरा केव्स, शनिवारवाडा, लाल महल, सिंहगढ़&lt;br /&gt;
|मुख्य पर्यटन स्थल=गेटवे ऑफ़ इन्डिया, मडआईलॅन्ड, अजंता-एलोरा केव्स, मुंबई चौपाटी&lt;br /&gt;
|लिंग अनुपात=1000:922&lt;br /&gt;
|साक्षरता=76.9&lt;br /&gt;
|राज्यपाल=एस एम कृष्णा&lt;br /&gt;
|मुख्यमंत्री=अशोक चव्हाण&lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=[http://www.maharashtra.gov.in/ अधिकारिक वेबसाइट]&lt;br /&gt;
|अद्यतन=2010/05/07&lt;br /&gt;
|emblem=maharashtra-seal.gif&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
==इतिहास और भूगोल==&lt;br /&gt;
प्राचीन 16 महाजनपदों में अश्मक या अस्सक का स्थान आधुनिक [[अहमदनगर]] के आसपास का माना जाता है । सम्राट [[अशोक]] के शिलालेख भी [[मुंबई]] के निकट पाए गए हैं । महाराष्‍ट्र के पहले प्रसिद्ध शासक सातवाहन (ई.पू. 230 से 225 ई.) थे जो महाराष्ट्र राज्य के संस्‍थापक थे। उन्‍होंने अपने पीछे बहुत से साहित्यिक, कलात्‍मक तथा पुरातात्विक प्रमाण छोड़े हैं। उनके शासनकाल में मानव जीवन के हर क्षेत्र में भरपूर  प्रगति हुई। &lt;br /&gt;
[[चित्र:Ajanta-Caves-1.jpg|thumb|[[अजंता की गुफ़ाएँ|अजंता की गुफ़ाओं]] का विश्व प्रसिद्ध भित्ति चित्र|left]]&lt;br /&gt;
इसके बाद वाकाटक आए, जिन्‍होंने भारतीय साम्राज्‍य की स्‍थापना की। उनके शासनकाल में महाराष्‍ट्र में शिक्षा, कला तथा धर्म सभी दिशाओं में अत्यधिक विकास हुआ। उनके शासन के दौरान ही 'अजंता की गुफाओं' में उच्‍च कोटि के भित्तिचित्र बनाए गए। वाकाटको के बाद कुछ समय के लिए 'कलचुरी वंश' ने शासन किया और फिर 'चालुक्‍य' सत्‍ता में आए। इसके बाद तटवर्ती इलाकों मे 'शिलाहारों' के अलावा महाराष्‍ट्र पर 'राष्‍ट्रकूट' तथा 'यादव' शासकों का नियंत्रण रहा। यादवों ने मराठी को शासन की भाषा बनाया और दक्षिण के एक बडे भाग पर अपना आधिपत्‍य स्थापित किया।&lt;br /&gt;
अलाउद्दीन ख़िलजी पहला मुस्लिम शासक था जिसने अपना राज्य दक्षिण में मदुरै तक फैला लिया था । उसके बाद मुहम्मद बिन तुग़लक (1325) ने अपनी राजधानी [[दिल्ली]] से हटाकर [[दौलताबाद]] कर ली । यह स्थान पहले देवगिरि नाम से प्रसिद्ध था और अहमदनगर के पास है । बहमनी शासकों ने महाराष्‍ट्र तथा इसकी संस्‍कृति को समन्वित किया, पर शिवाजी के कुशल नेतृत्‍व में महाराष्‍ट्र का सर्वांगीण विकास हुआ और यह एक अलग पहचान के साथ उभरकर सामने आया। शिवाजी ने स्‍वराज तथा राष्‍ट्रीयता की एक नई भावना पैदा की। उनकी प्रचंड शाक्ति ने मुग़लों को भारत के इस भाग में आगे नहीं बढ़ने दिया। पेशवाओं ने दक्षिण के पठार से लेकर पंजाब पर हमला बोल कर मराठाओं का आधिपत्‍य स्‍थापित किया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बहमनी सल्तनत के टूटने पर यह प्रदेश गोलकुण्डा के शासन में आया और उसके बाद औरंगजेब का संक्षिप्त शासन रहा। इसके बाद मराठों की शक्ति में उत्तरोत्तर वृद्धि हुई और अठारहवीं सदी के अन्त तक मराठा पूरे महाराष्ट्र में फैल गये थे और उनका साम्राज्य दक्षिण में कर्नाटक के दक्षिणी सिरे तक हो गया था । 1820 तक आते आते अंग्रेजों ने पेशवाओं को हरा दिया था और यह प्रदेश भी अंग्रेजी साम्राज्य का अंग बन गया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
स्‍वतंत्रता संग्राम में महाराष्‍ट्र सबसे आगे था। भारतीय राष्‍ट्रीय कांग्रेस का जन्‍म भी यहीं हुआ। मुंबई तथा महाराष्‍ट्र के अन्‍य शहरों के अनगिनत नेताओं ने पहले तिलक और बाद में महात्‍मा गांधी के मार्गदर्शन में कांग्रेस के आंदोलन को आगे बढाया। गांधी जी ने भी अपने आंदोलन का केंद्र महाराष्‍ट्र को बनाया था और गांधी युग में राष्‍ट्रवादी देश की राजधानी सेवाग्राम थी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
महाराष्ट्र  की स्थापना के पचास साल पूरे हो गये हैं। महाराष्ट्र और गुजरात का स्थापना दिवस 1मई को मनाया जाता है कभी ये दोनों राज्य मुंबई का हिस्सा थे। जब मुंबई राज्य से महाराष्ट्र और गुजरात के गठन का प्रस्ताव आया तो तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने मुंबई को अलग केन्द्रशासित प्रदेश बनाने की वकालत की। उनका तर्क था कि अगर मुंबई को देश की आर्थिक राजधानी बने रहना है तो यह करना आवश्यक है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
किंतु पंडित नेहरू की नहीं चली। देश के पहले वित्तमंत्री और वित्त विशेषज्ञ चिंतामणि देशमुख ने इसका प्रखर विरोध किया और इसी मुद्दे पर केन्द्रीय मंत्रिमण्डल से इस्तीफा दे दिया। मुंबई को महाराष्ट्र में रखने के लिए आंदोलन चला जिसमें कुल 80 लोगों की आहुति हुई लेकिन आखिरकार मुंबई महाराष्ट्र का हुआ।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देश को आजादी के ब मध्य बाद भारत के सभी मराठी भाषी स्थानों का समीकरण करके एक राज्य बनाने को लेकर बड़ा आंदोलन चला और 1 मई, 1960 को कोंकण, मराठवाडा, पश्चिमी महाराष्ट्र, दक्षिण महाराष्ट्र, उत्तर महाराष्ट्र (खानदेश) तथा विदर्भ, सभी संभागों को जोड़ कर महाराष्ट्र राज्य की स्थापना की गई।&lt;br /&gt;
==महाराष्ट्र राज्य का गठन==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Maharashtra-Map-1.jpg|महाराष्ट्र का मानचित्र&amp;lt;br /&amp;gt; Map of Maharashtra|thumb]]&lt;br /&gt;
देश के राज्‍यों के भाषायी पुनर्गठन के फलस्‍वरूप 1 मई, 1960 को महाराष्‍ट्र राज्‍य का प्रशासनिक प्रादुर्भाव हुआ। यह राज्‍य आसपास के मराठी भाषी क्षेत्रों को मिलाकर बनाया गया, जो पहले चार अलग अलग प्रशासनों के नियंत्रण में था। इनमें मूल ब्रिटिश मुंबई प्रांत में शामिल दमन तथा गोवा के बीच का ज़िला, हैदराबाद के निज़ाम की रियासत के पांच ज़िले, मध्‍य प्रांत (मध्‍य प्रदेश) के दक्षिण के आठ ज़िले तथा आसपास की ऐसी अनेक छोटी-छोटी रियासतें शामिल थी, जो समीपवर्ती ज़िलों में मिल गई थी। &lt;br /&gt;
==भौगोलिक स्थिति==&lt;br /&gt;
महाराष्‍ट्र  भारत के उत्तर में बसा हुआ है और भौगोलिक दृष्टि से यह राज्‍य मुख्‍यत: पठारी है। महाराष्‍ट्र पठारों का पठार है। इसके उठे हुए पश्चिमी किनारे सहाद्री पहाडियों का निर्माण करते है और समुद्र तट के समानांतर हैं तथा इसकी ढलान पूर्व तथा दक्षिण पूर्व की ओर धीरे धीरे बढ़ती है। राज्‍य के उत्तरी भाग में सतपुड़ा की पहाडियां है, जबकि अजंता तथा सतमाला पहाडियां राज्‍य के मध्‍य भाग से होकर जाती है। अरब सागर महाराष्‍ट्र की पश्चिमी सीमा का प्रहरी है, जबकि गुजरात और मध्‍य प्रदेश इसके उत्तर में हैं। राज्‍य की पूर्वी सीमा पर छत्तीसगढ है और कर्नाटक तथा आंध्र प्रदेश इसके दक्षिण में है।&lt;br /&gt;
==जनसंख्या==&lt;br /&gt;
महाराष्ट्र की जनसंख्या सन 2001 में 96,752,247 थी, विश्व में केवल ग्यारह ऐसे देश हैं जिनकी जनसंख्या महाराष्ट्र प्रदेश से ज़्यादा है। &lt;br /&gt;
==कृषि==&lt;br /&gt;
महाराष्‍ट्र के लगभग 65 प्रतिशत श्रमिक कृषि तथा संबंधित गतिविधियों पर निर्भर है। यहां की प्रमुख फ़सलें हैं- धान, ज्‍वार, बाजरा, गेहूं, तूर (अरहर), उडद, चना और दलहन। यह राज्‍य तिलहनों का प्रमुख उत्‍पादक है और मूंगफली, सूरजमुखी, सोयाबीन प्रमुख तिलहनी फ़सलें है। महत्‍वपूर्ण नकदी फ़सलें है कपास, गन्‍ना, हल्‍दी और सब्जियां। राज्‍य में 12.90 लाख हेक्‍टेयर क्षेत्र में विभिन्‍न प्रकार के फल, जैसे आम, केला, संतरा, अंगूर, काजू आदि की फ़सलें उगाई जाती है।&lt;br /&gt;
==उद्योग==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Gateway-of-India-2.jpg|thumb|भारतीय प्रवेशद्वार (गेटवे ऑफ़ इन्डिया), मुम्बई&amp;lt;br /&amp;gt; Gateway of India, Mumbai]]&lt;br /&gt;
महाराष्‍ट्र को पूरे देश का औद्योगिक क्षमता का केंद्र माना जाता है और राज्‍य की राजधानी मुंबई देश की वित्‍तीय तथा वाणिज्यिक गतिविधियों का केंद्र है। राज्‍य की अर्थव्‍यवस्‍था में औद्योगिक क्षेत्र का महत्‍वपूर्ण स्‍थान है। खाद्य उत्‍पाद, तंबाकू और इससे बनी चीजें, सूती कपडा, कपड़े से बना सामान, काग़ज और इससे बनी चीजें, मुद्रण और प्रकाशन, रबड, प्‍लास्टिक, रसायन व रासायनिक उत्‍पाद, मशीनें बिजली की मशीन, यंत्र व उपकरण तथा परिवहन उपकरण और उनके कल पुर्जे आदि का राज्‍य के औद्योगिक उत्‍पादन में महत्‍वपूर्ण योगदान है। वर्ष 2005-06 में औद्योगिक उत्‍पादन (निर्माण) वर्ष 2004-05 के मुकाबले 8.9 प्रतिशत अधिक रहा।&lt;br /&gt;
==सिंचाई और बिजली==&lt;br /&gt;
जून 2005 के अंत तक 32 बड़ी, 178 मंझोली और राज्‍य के क्षेत्र की 2,274 लघु सिंचाई परियोजनाएं पूरी हो चुकी थीं इसके अलावा 21 बडी 39 मंझोली सिंचाई परियोजनाओं का निर्माण कार्य जारी है। 2004 से 2005 में राज्‍य में कुल सिंचित क्षेत्र 36.36 लाख हेक्‍टेयर था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
2004-05 में महाराष्‍ट्र की कुल स्‍थापित विद्युत उत्‍पादन क्षमता 12,909 मेगावाट थी। राज्‍य में प्‍लांट लोड फैक्‍टर (पी.एल.एफ) 81.6 प्रतिशत था और बिजली उत्‍पादन 68,507 करोड किलोवाट घंटा था।&lt;br /&gt;
==परिवहन==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Bibi-Ka-Maqbara-Aurangabad.jpg|[[बीबी का मक़बरा]], [[औरंगाबाद]]&amp;lt;br /&amp;gt; Bibi Ka Maqbara, Aurangabad|thumb|left]]&lt;br /&gt;
'''सड़क''' मार्च 2005 तक राज्‍य में सड़कों की कुल लंबाई 2.29 लाख कि.मी. थी, जिसमें राष्‍ट्रीय राजमार्गों की लंबाई 4, 367 कि.मी. प्रांतीय राजमार्गों की 33,406 कि.मी., प्रमुख ज़िला सड़कों की 48,824 कि.मी., अन्‍य ज़िला सड़कों की लंबाई 44,792 कि.मी. और ग्रामीण सड़कों की कुल लंबाई 97,913 कि.मी. थी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''रेलवे''' महाराष्‍ट्र में 5,527 कि.मी. रेल मार्ग है। इसमें से लगभग 78.6 प्रतिशत बड़ी रेल लाइनें, 7.8 प्रतिशत मीटर गेज तथा 13.6 प्रतिशत छोटी रेल लाइनें है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''उड्डयन''' राज्‍य में कुल 24 हवाई अड्डे / हवाई पट्टियां है। इनमें से 17 महाराष्‍ट्र सरकार के नियंत्रण में है। चार हवाई अड्डे अंतर्राष्‍ट्रीय हवाई अड्डा प्राधिकरण / भारतीय हवाई अड्डा प्राधिकरण के नियंत्रण में हैं, ज‍बकि बाकी तीन रक्षा मंत्रालय के अधीन है। राज्‍य सरकार के नियंत्रण वाले हवाई अड्डों पर अभी व्‍यावसायिक उड़ानों की सुविधा नहीं है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''बंदरगाह''' मुम्बंई प्रमुख बंदरगाह है। राज्‍य में दो बड़े और 48 छोटे अधिसूचित बंदरगाह हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==पर्यटन स्‍थल==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Ajanta-Caves-Aurangabad-Maharashtra-2.jpg|thumb|[[अजंता की गुफाएं]], [[औरंगाबाद]]&amp;lt;br /&amp;gt; Ajanta Caves, Aurangabad]]&lt;br /&gt;
यहां के महत्‍वपूर्ण पर्यटन केंद्र है अजंता, एलोरा, एलिफेंटा, कन्‍हेरी और कारला गुफाएं, महाबलेश्‍वर, माथेरन और पंचगनी, जवाहर, मालशेजघाट, अंबोली, चिकलधारा और पन्‍हाला पर्वतीय स्‍थल। पंढरपुर, नाशिक, शिरडी, नांदेड, औधानागनाथ, त्रयंबकेवर, तुलजापुर, गणपतिपुले, भीमशंकर, हरिहरेश्‍वर, शेगाव, कोल्‍हापुर, जेजुरी तथा अंबजोगई  धार्मिक स्‍थान है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==प्रमुख नगर==&lt;br /&gt;
भारत देश में महाराष्ट्र सबसे बड़ा औद्योगिक प्रान्त है। मुंबई, पुणे, औरंगाबाद, नागपुर और नाशिक महाराष्ट्र के बडे शहरों में गिने जाते हैं। यहाँ के निवासियों की मातृभाषा मराठी है और यहाँ के लोगों को महाराष्ट्रीयन कहा जाता है। पहाड़ी नगरों में 'महाबलेश्वर' और 'माथेरान' काफ़ी प्रसिद्ध है। छुट्टियों के समय इन नगरों में बहुत ही भीड़ होती है और मौसम भी बहुत सुहावना होता है।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''धार्मिक नगर'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
*धार्मिक नगरों में नाशिक के काफ़ी नज़दीक शिर्डी नगर है। इस नगर का साईं बाबा का मन्दिर बहुत ही प्रसिद्ध है। &lt;br /&gt;
*इसी तरह मुंबई का 'महालक्ष्मी मन्दिर' और पुणे के 'दगडूशेठ गणपति मन्दिर' बहुत ही अधिक ख्याति प्राप्त हैं।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''मुंबई'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
[[चित्र:Nariman-Point-Mumbai.jpg|thumb|[[नरीमन पाइंट]], मुम्बई&amp;lt;br /&amp;gt; Nariman Point, Mumbai]]&lt;br /&gt;
मुंबई पूर्वी न्यूयॉर्क के नाम से भी विख्यात है। मुंबई में चौपाटी, गेटवे ऑफ़ इन्डिया , प्रिन्स वेल्स म्युज़ियम, एलिफ़ेन्टा केव्स और मडआईलॅन्ड बहुत ही प्रसिद्ध है।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''पुणे'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पुणे महाराष्ट्र का संस्कृति प्रधान नगर माना जाता है। शनिवारवाडा, लाल महल, सिंहगढ़ जैसे ऐतिहासिक स्थान हैं। पुणे का आई॰टी॰ पार्क और लक्ष्मी रोड काफ़ी जाना माना है।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''औरंगाबाद'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
औरंगाबाद नगर महाराष्ट्र के मध्य भाग में स्थित है। यहां के अजंता-एलोरा केव्स विश्व प्रसिद्ध हैं। इन गुफाओं में बुद्ध के तक्षण बनाये गये हैं।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''नागपुर'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नागपुर एक बहुत ही सुन्दर शहर है और यहा के संतरे पूरी दुनिया में जाने माने हैं।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''नाशिक'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नाशिक एक काफ़ी सुन्दर शहर है और यहां का मौसम सुहाना है। नाशिक के कालाराम और दूसरे मन्दिर विख्यात है और लोग [[गोदावरी नदी]] में नहाना पवित्र समझते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==सम्बंधित लिंक==&lt;br /&gt;
{{महाराष्ट्र प्रदेश के ज़िले}}&lt;br /&gt;
{{महाराष्ट्र के पर्यटन स्थल}}&lt;br /&gt;
{{राज्य और के. शा. प्र.}}&lt;br /&gt;
[[Category:भारत के राज्य और केन्द्र शासित प्रदेश]][[Category:राज्य संरचना]]&lt;br /&gt;
[[Category:महाराष्ट्र]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Gaurav</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%9A%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0:Nariman-Point-Mumbai.jpg&amp;diff=39733</id>
		<title>चित्र:Nariman-Point-Mumbai.jpg</title>
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		<updated>2010-07-01T11:04:35Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Gaurav: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{चित्र सूचना&lt;br /&gt;
|विवरण= [[नरीमन पाइंट मुम्बई|नरीमन पाइंट]], [[मुम्बई]]&amp;lt;br /&amp;gt; Nariman Point, Mumbai&lt;br /&gt;
|चित्रांकन=[http://www.flickr.com/photos/zephyr_too/ Merril Cherian]&lt;br /&gt;
|दिनांक=&lt;br /&gt;
|स्रोत=www.flickr.com&lt;br /&gt;
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|संग्रहालय क्रम संख्या=&lt;br /&gt;
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|अन्य विवरण=नरीमन पॉइंट मुंबई का सबसे प्रमुख व्यापारिक केन्द्र है। इसका यह नाम एक पारसी दूरदर्शक खुर्शीद फ्राम्जी नरीमन के नाम पर रखा गया।&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
{{CCL&lt;br /&gt;
|Attribution={{Attribution}}&lt;br /&gt;
|Noncommercial={{Noncommercial}}&lt;br /&gt;
|Share Alike={{Share Alike}}&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
{{चयन प्रक्रिया चित्र}}&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Gaurav</name></author>
	</entry>
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		<title>महाराष्ट्र</title>
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		<updated>2010-07-01T11:02:12Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Gaurav: /* परिवहन */&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा राज्य&lt;br /&gt;
|Image=Maharashtra-Map.jpg&lt;br /&gt;
|राजधानी=मुंबई&lt;br /&gt;
|जनसंख्या=96879&lt;br /&gt;
|जनसंख्या घनत्व=315&lt;br /&gt;
|क्षेत्रफल=308,000&lt;br /&gt;
|भौगोलिक निर्देशांक=18° 58' 30&amp;quot; N 72° 49' 33&amp;quot; E&lt;br /&gt;
|ज़िले=35&lt;br /&gt;
|महानगर=मुंबई&lt;br /&gt;
|बड़े नगर=मुंबई, पुणे, नागपूर, औरंगाबाद, कोल्हापूर, नासिक, शोलापूर, अमरावती, सांगली, नांदेड&lt;br /&gt;
|राजभाषा(एँ)=मराठी , हिन्दी , अंग्रेजी,&lt;br /&gt;
|स्थापना=1960/05/01&lt;br /&gt;
|मुख्य ऐतिहासिक स्थल=गेटवे ऑफ़ इन्डिया, अजंता-एलोरा केव्स, शनिवारवाडा, लाल महल, सिंहगढ़&lt;br /&gt;
|मुख्य पर्यटन स्थल=गेटवे ऑफ़ इन्डिया, मडआईलॅन्ड, अजंता-एलोरा केव्स, मुंबई चौपाटी&lt;br /&gt;
|लिंग अनुपात=1000:922&lt;br /&gt;
|साक्षरता=76.9&lt;br /&gt;
|राज्यपाल=एस एम कृष्णा&lt;br /&gt;
|मुख्यमंत्री=अशोक चव्हाण&lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=[http://www.maharashtra.gov.in/ अधिकारिक वेबसाइट]&lt;br /&gt;
|अद्यतन=2010/05/07&lt;br /&gt;
|emblem=maharashtra-seal.gif&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
==इतिहास और भूगोल==&lt;br /&gt;
प्राचीन 16 महाजनपदों में अश्मक या अस्सक का स्थान आधुनिक [[अहमदनगर]] के आसपास का माना जाता है । सम्राट [[अशोक]] के शिलालेख भी [[मुंबई]] के निकट पाए गए हैं । महाराष्‍ट्र के पहले प्रसिद्ध शासक सातवाहन (ई.पू. 230 से 225 ई.) थे जो महाराष्ट्र राज्य के संस्‍थापक थे। उन्‍होंने अपने पीछे बहुत से साहित्यिक, कलात्‍मक तथा पुरातात्विक प्रमाण छोड़े हैं। उनके शासनकाल में मानव जीवन के हर क्षेत्र में भरपूर  प्रगति हुई। &lt;br /&gt;
[[चित्र:Ajanta-Caves-1.jpg|thumb|[[अजंता की गुफ़ाएँ|अजंता की गुफ़ाओं]] का विश्व प्रसिद्ध भित्ति चित्र|left]]&lt;br /&gt;
इसके बाद वाकाटक आए, जिन्‍होंने भारतीय साम्राज्‍य की स्‍थापना की। उनके शासनकाल में महाराष्‍ट्र में शिक्षा, कला तथा धर्म सभी दिशाओं में अत्यधिक विकास हुआ। उनके शासन के दौरान ही 'अजंता की गुफाओं' में उच्‍च कोटि के भित्तिचित्र बनाए गए। वाकाटको के बाद कुछ समय के लिए 'कलचुरी वंश' ने शासन किया और फिर 'चालुक्‍य' सत्‍ता में आए। इसके बाद तटवर्ती इलाकों मे 'शिलाहारों' के अलावा महाराष्‍ट्र पर 'राष्‍ट्रकूट' तथा 'यादव' शासकों का नियंत्रण रहा। यादवों ने मराठी को शासन की भाषा बनाया और दक्षिण के एक बडे भाग पर अपना आधिपत्‍य स्थापित किया।&lt;br /&gt;
अलाउद्दीन ख़िलजी पहला मुस्लिम शासक था जिसने अपना राज्य दक्षिण में मदुरै तक फैला लिया था । उसके बाद मुहम्मद बिन तुग़लक (1325) ने अपनी राजधानी [[दिल्ली]] से हटाकर [[दौलताबाद]] कर ली । यह स्थान पहले देवगिरि नाम से प्रसिद्ध था और अहमदनगर के पास है । बहमनी शासकों ने महाराष्‍ट्र तथा इसकी संस्‍कृति को समन्वित किया, पर शिवाजी के कुशल नेतृत्‍व में महाराष्‍ट्र का सर्वांगीण विकास हुआ और यह एक अलग पहचान के साथ उभरकर सामने आया। शिवाजी ने स्‍वराज तथा राष्‍ट्रीयता की एक नई भावना पैदा की। उनकी प्रचंड शाक्ति ने मुग़लों को भारत के इस भाग में आगे नहीं बढ़ने दिया। पेशवाओं ने दक्षिण के पठार से लेकर पंजाब पर हमला बोल कर मराठाओं का आधिपत्‍य स्‍थापित किया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बहमनी सल्तनत के टूटने पर यह प्रदेश गोलकुण्डा के शासन में आया और उसके बाद औरंगजेब का संक्षिप्त शासन रहा। इसके बाद मराठों की शक्ति में उत्तरोत्तर वृद्धि हुई और अठारहवीं सदी के अन्त तक मराठा पूरे महाराष्ट्र में फैल गये थे और उनका साम्राज्य दक्षिण में कर्नाटक के दक्षिणी सिरे तक हो गया था । 1820 तक आते आते अंग्रेजों ने पेशवाओं को हरा दिया था और यह प्रदेश भी अंग्रेजी साम्राज्य का अंग बन गया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
स्‍वतंत्रता संग्राम में महाराष्‍ट्र सबसे आगे था। भारतीय राष्‍ट्रीय कांग्रेस का जन्‍म भी यहीं हुआ। मुंबई तथा महाराष्‍ट्र के अन्‍य शहरों के अनगिनत नेताओं ने पहले तिलक और बाद में महात्‍मा गांधी के मार्गदर्शन में कांग्रेस के आंदोलन को आगे बढाया। गांधी जी ने भी अपने आंदोलन का केंद्र महाराष्‍ट्र को बनाया था और गांधी युग में राष्‍ट्रवादी देश की राजधानी सेवाग्राम थी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
महाराष्ट्र  की स्थापना के पचास साल पूरे हो गये हैं। महाराष्ट्र और गुजरात का स्थापना दिवस 1मई को मनाया जाता है कभी ये दोनों राज्य मुंबई का हिस्सा थे। जब मुंबई राज्य से महाराष्ट्र और गुजरात के गठन का प्रस्ताव आया तो तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने मुंबई को अलग केन्द्रशासित प्रदेश बनाने की वकालत की। उनका तर्क था कि अगर मुंबई को देश की आर्थिक राजधानी बने रहना है तो यह करना आवश्यक है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
किंतु पंडित नेहरू की नहीं चली। देश के पहले वित्तमंत्री और वित्त विशेषज्ञ चिंतामणि देशमुख ने इसका प्रखर विरोध किया और इसी मुद्दे पर केन्द्रीय मंत्रिमण्डल से इस्तीफा दे दिया। मुंबई को महाराष्ट्र में रखने के लिए आंदोलन चला जिसमें कुल 80 लोगों की आहुति हुई लेकिन आखिरकार मुंबई महाराष्ट्र का हुआ।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देश को आजादी के ब मध्य बाद भारत के सभी मराठी भाषी स्थानों का समीकरण करके एक राज्य बनाने को लेकर बड़ा आंदोलन चला और 1 मई, 1960 को कोंकण, मराठवाडा, पश्चिमी महाराष्ट्र, दक्षिण महाराष्ट्र, उत्तर महाराष्ट्र (खानदेश) तथा विदर्भ, सभी संभागों को जोड़ कर महाराष्ट्र राज्य की स्थापना की गई।&lt;br /&gt;
==महाराष्ट्र राज्य का गठन==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Maharashtra-Map-1.jpg|महाराष्ट्र का मानचित्र&amp;lt;br /&amp;gt; Map of Maharashtra|thumb]]&lt;br /&gt;
देश के राज्‍यों के भाषायी पुनर्गठन के फलस्‍वरूप 1 मई, 1960 को महाराष्‍ट्र राज्‍य का प्रशासनिक प्रादुर्भाव हुआ। यह राज्‍य आसपास के मराठी भाषी क्षेत्रों को मिलाकर बनाया गया, जो पहले चार अलग अलग प्रशासनों के नियंत्रण में था। इनमें मूल ब्रिटिश मुंबई प्रांत में शामिल दमन तथा गोवा के बीच का ज़िला, हैदराबाद के निज़ाम की रियासत के पांच ज़िले, मध्‍य प्रांत (मध्‍य प्रदेश) के दक्षिण के आठ ज़िले तथा आसपास की ऐसी अनेक छोटी-छोटी रियासतें शामिल थी, जो समीपवर्ती ज़िलों में मिल गई थी। &lt;br /&gt;
==भौगोलिक स्थिति==&lt;br /&gt;
महाराष्‍ट्र  भारत के उत्तर में बसा हुआ है और भौगोलिक दृष्टि से यह राज्‍य मुख्‍यत: पठारी है। महाराष्‍ट्र पठारों का पठार है। इसके उठे हुए पश्चिमी किनारे सहाद्री पहाडियों का निर्माण करते है और समुद्र तट के समानांतर हैं तथा इसकी ढलान पूर्व तथा दक्षिण पूर्व की ओर धीरे धीरे बढ़ती है। राज्‍य के उत्तरी भाग में सतपुड़ा की पहाडियां है, जबकि अजंता तथा सतमाला पहाडियां राज्‍य के मध्‍य भाग से होकर जाती है। अरब सागर महाराष्‍ट्र की पश्चिमी सीमा का प्रहरी है, जबकि गुजरात और मध्‍य प्रदेश इसके उत्तर में हैं। राज्‍य की पूर्वी सीमा पर छत्तीसगढ है और कर्नाटक तथा आंध्र प्रदेश इसके दक्षिण में है।&lt;br /&gt;
==जनसंख्या==&lt;br /&gt;
महाराष्ट्र की जनसंख्या सन 2001 में 96,752,247 थी, विश्व में केवल ग्यारह ऐसे देश हैं जिनकी जनसंख्या महाराष्ट्र प्रदेश से ज़्यादा है। &lt;br /&gt;
==कृषि==&lt;br /&gt;
महाराष्‍ट्र के लगभग 65 प्रतिशत श्रमिक कृषि तथा संबंधित गतिविधियों पर निर्भर है। यहां की प्रमुख फ़सलें हैं- धान, ज्‍वार, बाजरा, गेहूं, तूर (अरहर), उडद, चना और दलहन। यह राज्‍य तिलहनों का प्रमुख उत्‍पादक है और मूंगफली, सूरजमुखी, सोयाबीन प्रमुख तिलहनी फ़सलें है। महत्‍वपूर्ण नकदी फ़सलें है कपास, गन्‍ना, हल्‍दी और सब्जियां। राज्‍य में 12.90 लाख हेक्‍टेयर क्षेत्र में विभिन्‍न प्रकार के फल, जैसे आम, केला, संतरा, अंगूर, काजू आदि की फ़सलें उगाई जाती है।&lt;br /&gt;
==उद्योग==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Gateway-of-India-2.jpg|thumb|भारतीय प्रवेशद्वार (गेटवे ऑफ़ इन्डिया), मुम्बई&amp;lt;br /&amp;gt; Gateway of India, Mumbai]]&lt;br /&gt;
महाराष्‍ट्र को पूरे देश का औद्योगिक क्षमता का केंद्र माना जाता है और राज्‍य की राजधानी मुंबई देश की वित्‍तीय तथा वाणिज्यिक गतिविधियों का केंद्र है। राज्‍य की अर्थव्‍यवस्‍था में औद्योगिक क्षेत्र का महत्‍वपूर्ण स्‍थान है। खाद्य उत्‍पाद, तंबाकू और इससे बनी चीजें, सूती कपडा, कपड़े से बना सामान, काग़ज और इससे बनी चीजें, मुद्रण और प्रकाशन, रबड, प्‍लास्टिक, रसायन व रासायनिक उत्‍पाद, मशीनें बिजली की मशीन, यंत्र व उपकरण तथा परिवहन उपकरण और उनके कल पुर्जे आदि का राज्‍य के औद्योगिक उत्‍पादन में महत्‍वपूर्ण योगदान है। वर्ष 2005-06 में औद्योगिक उत्‍पादन (निर्माण) वर्ष 2004-05 के मुकाबले 8.9 प्रतिशत अधिक रहा।&lt;br /&gt;
==सिंचाई और बिजली==&lt;br /&gt;
जून 2005 के अंत तक 32 बड़ी, 178 मंझोली और राज्‍य के क्षेत्र की 2,274 लघु सिंचाई परियोजनाएं पूरी हो चुकी थीं इसके अलावा 21 बडी 39 मंझोली सिंचाई परियोजनाओं का निर्माण कार्य जारी है। 2004 से 2005 में राज्‍य में कुल सिंचित क्षेत्र 36.36 लाख हेक्‍टेयर था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
2004-05 में महाराष्‍ट्र की कुल स्‍थापित विद्युत उत्‍पादन क्षमता 12,909 मेगावाट थी। राज्‍य में प्‍लांट लोड फैक्‍टर (पी.एल.एफ) 81.6 प्रतिशत था और बिजली उत्‍पादन 68,507 करोड किलोवाट घंटा था।&lt;br /&gt;
==परिवहन==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Bibi-Ka-Maqbara-Aurangabad.jpg|[[बीबी का मक़बरा]], [[औरंगाबाद]]&amp;lt;br /&amp;gt; Bibi Ka Maqbara, Aurangabad|thumb|left]]&lt;br /&gt;
'''सड़क''' मार्च 2005 तक राज्‍य में सड़कों की कुल लंबाई 2.29 लाख कि.मी. थी, जिसमें राष्‍ट्रीय राजमार्गों की लंबाई 4, 367 कि.मी. प्रांतीय राजमार्गों की 33,406 कि.मी., प्रमुख ज़िला सड़कों की 48,824 कि.मी., अन्‍य ज़िला सड़कों की लंबाई 44,792 कि.मी. और ग्रामीण सड़कों की कुल लंबाई 97,913 कि.मी. थी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''रेलवे''' महाराष्‍ट्र में 5,527 कि.मी. रेल मार्ग है। इसमें से लगभग 78.6 प्रतिशत बड़ी रेल लाइनें, 7.8 प्रतिशत मीटर गेज तथा 13.6 प्रतिशत छोटी रेल लाइनें है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''उड्डयन''' राज्‍य में कुल 24 हवाई अड्डे / हवाई पट्टियां है। इनमें से 17 महाराष्‍ट्र सरकार के नियंत्रण में है। चार हवाई अड्डे अंतर्राष्‍ट्रीय हवाई अड्डा प्राधिकरण / भारतीय हवाई अड्डा प्राधिकरण के नियंत्रण में हैं, ज‍बकि बाकी तीन रक्षा मंत्रालय के अधीन है। राज्‍य सरकार के नियंत्रण वाले हवाई अड्डों पर अभी व्‍यावसायिक उड़ानों की सुविधा नहीं है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''बंदरगाह''' मुम्बंई प्रमुख बंदरगाह है। राज्‍य में दो बड़े और 48 छोटे अधिसूचित बंदरगाह हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==पर्यटन स्‍थल==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Ajanta-Caves-Aurangabad-Maharashtra-2.jpg|thumb|[[अजंता की गुफाएं]], [[औरंगाबाद]]&amp;lt;br /&amp;gt; Ajanta Caves, Aurangabad]]&lt;br /&gt;
यहां के महत्‍वपूर्ण पर्यटन केंद्र है अजंता, एलोरा, एलिफेंटा, कन्‍हेरी और कारला गुफाएं, महाबलेश्‍वर, माथेरन और पंचगनी, जवाहर, मालशेजघाट, अंबोली, चिकलधारा और पन्‍हाला पर्वतीय स्‍थल। पंढरपुर, नाशिक, शिरडी, नांदेड, औधानागनाथ, त्रयंबकेवर, तुलजापुर, गणपतिपुले, भीमशंकर, हरिहरेश्‍वर, शेगाव, कोल्‍हापुर, जेजुरी तथा अंबजोगई  धार्मिक स्‍थान है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==प्रमुख नगर==&lt;br /&gt;
भारत देश में महाराष्ट्र सबसे बड़ा औद्योगिक प्रान्त है। मुंबई, पुणे, औरंगाबाद, नागपुर और नाशिक महाराष्ट्र के बडे शहरों में गिने जाते हैं। यहाँ के निवासियों की मातृभाषा मराठी है और यहाँ के लोगों को महाराष्ट्रीयन कहा जाता है। पहाड़ी नगरों में 'महाबलेश्वर' और 'माथेरान' काफ़ी प्रसिद्ध है। छुट्टियों के समय इन नगरों में बहुत ही भीड़ होती है और मौसम भी बहुत सुहावना होता है।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''धार्मिक नगर'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
*धार्मिक नगरों में नाशिक के काफ़ी नज़दीक शिर्डी नगर है। इस नगर का साईं बाबा का मन्दिर बहुत ही प्रसिद्ध है। &lt;br /&gt;
*इसी तरह मुंबई का 'महालक्ष्मी मन्दिर' और पुणे के 'दगडूशेठ गणपति मन्दिर' बहुत ही अधिक ख्याति प्राप्त हैं।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''मुंबई'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुंबई पूर्वी न्यूयॉर्क के नाम से भी विख्यात है। मुंबई में चौपाटी, गेटवे ऑफ़ इन्डिया , प्रिन्स वेल्स म्युज़ियम, एलिफ़ेन्टा केव्स और मडआईलॅन्ड बहुत ही प्रसिद्ध है।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''पुणे'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पुणे महाराष्ट्र का संस्कृति प्रधान नगर माना जाता है। शनिवारवाडा, लाल महल, सिंहगढ़ जैसे ऐतिहासिक स्थान हैं। पुणे का आई॰टी॰ पार्क और लक्ष्मी रोड काफ़ी जाना माना है।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''औरंगाबाद'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
औरंगाबाद नगर महाराष्ट्र के मध्य भाग में स्थित है। यहां के अजंता-एलोरा केव्स विश्व प्रसिद्ध हैं। इन गुफाओं में बुद्ध के तक्षण बनाये गये हैं।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''नागपुर'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नागपुर एक बहुत ही सुन्दर शहर है और यहा के संतरे पूरी दुनिया में जाने माने हैं।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''नाशिक'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नाशिक एक काफ़ी सुन्दर शहर है और यहां का मौसम सुहाना है। नाशिक के कालाराम और दूसरे मन्दिर विख्यात है और लोग [[गोदावरी नदी]] में नहाना पवित्र समझते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==सम्बंधित लिंक==&lt;br /&gt;
{{महाराष्ट्र प्रदेश के ज़िले}}&lt;br /&gt;
{{महाराष्ट्र के पर्यटन स्थल}}&lt;br /&gt;
{{राज्य और के. शा. प्र.}}&lt;br /&gt;
[[Category:भारत के राज्य और केन्द्र शासित प्रदेश]][[Category:राज्य संरचना]]&lt;br /&gt;
[[Category:महाराष्ट्र]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Gaurav</name></author>
	</entry>
	<entry>
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		<title>महाराष्ट्र</title>
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		<updated>2010-07-01T11:01:19Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Gaurav: /* पर्यटन स्‍थल */&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा राज्य&lt;br /&gt;
|Image=Maharashtra-Map.jpg&lt;br /&gt;
|राजधानी=मुंबई&lt;br /&gt;
|जनसंख्या=96879&lt;br /&gt;
|जनसंख्या घनत्व=315&lt;br /&gt;
|क्षेत्रफल=308,000&lt;br /&gt;
|भौगोलिक निर्देशांक=18° 58' 30&amp;quot; N 72° 49' 33&amp;quot; E&lt;br /&gt;
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|मुख्य पर्यटन स्थल=गेटवे ऑफ़ इन्डिया, मडआईलॅन्ड, अजंता-एलोरा केव्स, मुंबई चौपाटी&lt;br /&gt;
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|राज्यपाल=एस एम कृष्णा&lt;br /&gt;
|मुख्यमंत्री=अशोक चव्हाण&lt;br /&gt;
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|अद्यतन=2010/05/07&lt;br /&gt;
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}}&lt;br /&gt;
==इतिहास और भूगोल==&lt;br /&gt;
प्राचीन 16 महाजनपदों में अश्मक या अस्सक का स्थान आधुनिक [[अहमदनगर]] के आसपास का माना जाता है । सम्राट [[अशोक]] के शिलालेख भी [[मुंबई]] के निकट पाए गए हैं । महाराष्‍ट्र के पहले प्रसिद्ध शासक सातवाहन (ई.पू. 230 से 225 ई.) थे जो महाराष्ट्र राज्य के संस्‍थापक थे। उन्‍होंने अपने पीछे बहुत से साहित्यिक, कलात्‍मक तथा पुरातात्विक प्रमाण छोड़े हैं। उनके शासनकाल में मानव जीवन के हर क्षेत्र में भरपूर  प्रगति हुई। &lt;br /&gt;
[[चित्र:Ajanta-Caves-1.jpg|thumb|[[अजंता की गुफ़ाएँ|अजंता की गुफ़ाओं]] का विश्व प्रसिद्ध भित्ति चित्र|left]]&lt;br /&gt;
इसके बाद वाकाटक आए, जिन्‍होंने भारतीय साम्राज्‍य की स्‍थापना की। उनके शासनकाल में महाराष्‍ट्र में शिक्षा, कला तथा धर्म सभी दिशाओं में अत्यधिक विकास हुआ। उनके शासन के दौरान ही 'अजंता की गुफाओं' में उच्‍च कोटि के भित्तिचित्र बनाए गए। वाकाटको के बाद कुछ समय के लिए 'कलचुरी वंश' ने शासन किया और फिर 'चालुक्‍य' सत्‍ता में आए। इसके बाद तटवर्ती इलाकों मे 'शिलाहारों' के अलावा महाराष्‍ट्र पर 'राष्‍ट्रकूट' तथा 'यादव' शासकों का नियंत्रण रहा। यादवों ने मराठी को शासन की भाषा बनाया और दक्षिण के एक बडे भाग पर अपना आधिपत्‍य स्थापित किया।&lt;br /&gt;
अलाउद्दीन ख़िलजी पहला मुस्लिम शासक था जिसने अपना राज्य दक्षिण में मदुरै तक फैला लिया था । उसके बाद मुहम्मद बिन तुग़लक (1325) ने अपनी राजधानी [[दिल्ली]] से हटाकर [[दौलताबाद]] कर ली । यह स्थान पहले देवगिरि नाम से प्रसिद्ध था और अहमदनगर के पास है । बहमनी शासकों ने महाराष्‍ट्र तथा इसकी संस्‍कृति को समन्वित किया, पर शिवाजी के कुशल नेतृत्‍व में महाराष्‍ट्र का सर्वांगीण विकास हुआ और यह एक अलग पहचान के साथ उभरकर सामने आया। शिवाजी ने स्‍वराज तथा राष्‍ट्रीयता की एक नई भावना पैदा की। उनकी प्रचंड शाक्ति ने मुग़लों को भारत के इस भाग में आगे नहीं बढ़ने दिया। पेशवाओं ने दक्षिण के पठार से लेकर पंजाब पर हमला बोल कर मराठाओं का आधिपत्‍य स्‍थापित किया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बहमनी सल्तनत के टूटने पर यह प्रदेश गोलकुण्डा के शासन में आया और उसके बाद औरंगजेब का संक्षिप्त शासन रहा। इसके बाद मराठों की शक्ति में उत्तरोत्तर वृद्धि हुई और अठारहवीं सदी के अन्त तक मराठा पूरे महाराष्ट्र में फैल गये थे और उनका साम्राज्य दक्षिण में कर्नाटक के दक्षिणी सिरे तक हो गया था । 1820 तक आते आते अंग्रेजों ने पेशवाओं को हरा दिया था और यह प्रदेश भी अंग्रेजी साम्राज्य का अंग बन गया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
स्‍वतंत्रता संग्राम में महाराष्‍ट्र सबसे आगे था। भारतीय राष्‍ट्रीय कांग्रेस का जन्‍म भी यहीं हुआ। मुंबई तथा महाराष्‍ट्र के अन्‍य शहरों के अनगिनत नेताओं ने पहले तिलक और बाद में महात्‍मा गांधी के मार्गदर्शन में कांग्रेस के आंदोलन को आगे बढाया। गांधी जी ने भी अपने आंदोलन का केंद्र महाराष्‍ट्र को बनाया था और गांधी युग में राष्‍ट्रवादी देश की राजधानी सेवाग्राम थी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
महाराष्ट्र  की स्थापना के पचास साल पूरे हो गये हैं। महाराष्ट्र और गुजरात का स्थापना दिवस 1मई को मनाया जाता है कभी ये दोनों राज्य मुंबई का हिस्सा थे। जब मुंबई राज्य से महाराष्ट्र और गुजरात के गठन का प्रस्ताव आया तो तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने मुंबई को अलग केन्द्रशासित प्रदेश बनाने की वकालत की। उनका तर्क था कि अगर मुंबई को देश की आर्थिक राजधानी बने रहना है तो यह करना आवश्यक है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
किंतु पंडित नेहरू की नहीं चली। देश के पहले वित्तमंत्री और वित्त विशेषज्ञ चिंतामणि देशमुख ने इसका प्रखर विरोध किया और इसी मुद्दे पर केन्द्रीय मंत्रिमण्डल से इस्तीफा दे दिया। मुंबई को महाराष्ट्र में रखने के लिए आंदोलन चला जिसमें कुल 80 लोगों की आहुति हुई लेकिन आखिरकार मुंबई महाराष्ट्र का हुआ।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देश को आजादी के ब मध्य बाद भारत के सभी मराठी भाषी स्थानों का समीकरण करके एक राज्य बनाने को लेकर बड़ा आंदोलन चला और 1 मई, 1960 को कोंकण, मराठवाडा, पश्चिमी महाराष्ट्र, दक्षिण महाराष्ट्र, उत्तर महाराष्ट्र (खानदेश) तथा विदर्भ, सभी संभागों को जोड़ कर महाराष्ट्र राज्य की स्थापना की गई।&lt;br /&gt;
==महाराष्ट्र राज्य का गठन==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Maharashtra-Map-1.jpg|महाराष्ट्र का मानचित्र&amp;lt;br /&amp;gt; Map of Maharashtra|thumb]]&lt;br /&gt;
देश के राज्‍यों के भाषायी पुनर्गठन के फलस्‍वरूप 1 मई, 1960 को महाराष्‍ट्र राज्‍य का प्रशासनिक प्रादुर्भाव हुआ। यह राज्‍य आसपास के मराठी भाषी क्षेत्रों को मिलाकर बनाया गया, जो पहले चार अलग अलग प्रशासनों के नियंत्रण में था। इनमें मूल ब्रिटिश मुंबई प्रांत में शामिल दमन तथा गोवा के बीच का ज़िला, हैदराबाद के निज़ाम की रियासत के पांच ज़िले, मध्‍य प्रांत (मध्‍य प्रदेश) के दक्षिण के आठ ज़िले तथा आसपास की ऐसी अनेक छोटी-छोटी रियासतें शामिल थी, जो समीपवर्ती ज़िलों में मिल गई थी। &lt;br /&gt;
==भौगोलिक स्थिति==&lt;br /&gt;
महाराष्‍ट्र  भारत के उत्तर में बसा हुआ है और भौगोलिक दृष्टि से यह राज्‍य मुख्‍यत: पठारी है। महाराष्‍ट्र पठारों का पठार है। इसके उठे हुए पश्चिमी किनारे सहाद्री पहाडियों का निर्माण करते है और समुद्र तट के समानांतर हैं तथा इसकी ढलान पूर्व तथा दक्षिण पूर्व की ओर धीरे धीरे बढ़ती है। राज्‍य के उत्तरी भाग में सतपुड़ा की पहाडियां है, जबकि अजंता तथा सतमाला पहाडियां राज्‍य के मध्‍य भाग से होकर जाती है। अरब सागर महाराष्‍ट्र की पश्चिमी सीमा का प्रहरी है, जबकि गुजरात और मध्‍य प्रदेश इसके उत्तर में हैं। राज्‍य की पूर्वी सीमा पर छत्तीसगढ है और कर्नाटक तथा आंध्र प्रदेश इसके दक्षिण में है।&lt;br /&gt;
==जनसंख्या==&lt;br /&gt;
महाराष्ट्र की जनसंख्या सन 2001 में 96,752,247 थी, विश्व में केवल ग्यारह ऐसे देश हैं जिनकी जनसंख्या महाराष्ट्र प्रदेश से ज़्यादा है। &lt;br /&gt;
==कृषि==&lt;br /&gt;
महाराष्‍ट्र के लगभग 65 प्रतिशत श्रमिक कृषि तथा संबंधित गतिविधियों पर निर्भर है। यहां की प्रमुख फ़सलें हैं- धान, ज्‍वार, बाजरा, गेहूं, तूर (अरहर), उडद, चना और दलहन। यह राज्‍य तिलहनों का प्रमुख उत्‍पादक है और मूंगफली, सूरजमुखी, सोयाबीन प्रमुख तिलहनी फ़सलें है। महत्‍वपूर्ण नकदी फ़सलें है कपास, गन्‍ना, हल्‍दी और सब्जियां। राज्‍य में 12.90 लाख हेक्‍टेयर क्षेत्र में विभिन्‍न प्रकार के फल, जैसे आम, केला, संतरा, अंगूर, काजू आदि की फ़सलें उगाई जाती है।&lt;br /&gt;
==उद्योग==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Gateway-of-India-2.jpg|thumb|भारतीय प्रवेशद्वार (गेटवे ऑफ़ इन्डिया), मुम्बई&amp;lt;br /&amp;gt; Gateway of India, Mumbai]]&lt;br /&gt;
महाराष्‍ट्र को पूरे देश का औद्योगिक क्षमता का केंद्र माना जाता है और राज्‍य की राजधानी मुंबई देश की वित्‍तीय तथा वाणिज्यिक गतिविधियों का केंद्र है। राज्‍य की अर्थव्‍यवस्‍था में औद्योगिक क्षेत्र का महत्‍वपूर्ण स्‍थान है। खाद्य उत्‍पाद, तंबाकू और इससे बनी चीजें, सूती कपडा, कपड़े से बना सामान, काग़ज और इससे बनी चीजें, मुद्रण और प्रकाशन, रबड, प्‍लास्टिक, रसायन व रासायनिक उत्‍पाद, मशीनें बिजली की मशीन, यंत्र व उपकरण तथा परिवहन उपकरण और उनके कल पुर्जे आदि का राज्‍य के औद्योगिक उत्‍पादन में महत्‍वपूर्ण योगदान है। वर्ष 2005-06 में औद्योगिक उत्‍पादन (निर्माण) वर्ष 2004-05 के मुकाबले 8.9 प्रतिशत अधिक रहा।&lt;br /&gt;
==सिंचाई और बिजली==&lt;br /&gt;
जून 2005 के अंत तक 32 बड़ी, 178 मंझोली और राज्‍य के क्षेत्र की 2,274 लघु सिंचाई परियोजनाएं पूरी हो चुकी थीं इसके अलावा 21 बडी 39 मंझोली सिंचाई परियोजनाओं का निर्माण कार्य जारी है। 2004 से 2005 में राज्‍य में कुल सिंचित क्षेत्र 36.36 लाख हेक्‍टेयर था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
2004-05 में महाराष्‍ट्र की कुल स्‍थापित विद्युत उत्‍पादन क्षमता 12,909 मेगावाट थी। राज्‍य में प्‍लांट लोड फैक्‍टर (पी.एल.एफ) 81.6 प्रतिशत था और बिजली उत्‍पादन 68,507 करोड किलोवाट घंटा था।&lt;br /&gt;
==परिवहन==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Bibi-Ka-Maqbara-Aurangabad.jpg|[[बीबी का मक़बरा]], [[औरंगाबाद]]&amp;lt;br /&amp;gt; Bibi Ka Maqbara, Aurangabad|thumb]]&lt;br /&gt;
'''सड़क''' मार्च 2005 तक राज्‍य में सड़कों की कुल लंबाई 2.29 लाख कि.मी. थी, जिसमें राष्‍ट्रीय राजमार्गों की लंबाई 4, 367 कि.मी. प्रांतीय राजमार्गों की 33,406 कि.मी., प्रमुख ज़िला सड़कों की 48,824 कि.मी., अन्‍य ज़िला सड़कों की लंबाई 44,792 कि.मी. और ग्रामीण सड़कों की कुल लंबाई 97,913 कि.मी. थी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''रेलवे''' महाराष्‍ट्र में 5,527 कि.मी. रेल मार्ग है। इसमें से लगभग 78.6 प्रतिशत बड़ी रेल लाइनें, 7.8 प्रतिशत मीटर गेज तथा 13.6 प्रतिशत छोटी रेल लाइनें है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''उड्डयन''' राज्‍य में कुल 24 हवाई अड्डे / हवाई पट्टियां है। इनमें से 17 महाराष्‍ट्र सरकार के नियंत्रण में है। चार हवाई अड्डे अंतर्राष्‍ट्रीय हवाई अड्डा प्राधिकरण / भारतीय हवाई अड्डा प्राधिकरण के नियंत्रण में हैं, ज‍बकि बाकी तीन रक्षा मंत्रालय के अधीन है। राज्‍य सरकार के नियंत्रण वाले हवाई अड्डों पर अभी व्‍यावसायिक उड़ानों की सुविधा नहीं है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''बंदरगाह''' मुम्बंई प्रमुख बंदरगाह है। राज्‍य में दो बड़े और 48 छोटे अधिसूचित बंदरगाह हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==पर्यटन स्‍थल==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Ajanta-Caves-Aurangabad-Maharashtra-2.jpg|thumb|[[अजंता की गुफाएं]], [[औरंगाबाद]]&amp;lt;br /&amp;gt; Ajanta Caves, Aurangabad]]&lt;br /&gt;
यहां के महत्‍वपूर्ण पर्यटन केंद्र है अजंता, एलोरा, एलिफेंटा, कन्‍हेरी और कारला गुफाएं, महाबलेश्‍वर, माथेरन और पंचगनी, जवाहर, मालशेजघाट, अंबोली, चिकलधारा और पन्‍हाला पर्वतीय स्‍थल। पंढरपुर, नाशिक, शिरडी, नांदेड, औधानागनाथ, त्रयंबकेवर, तुलजापुर, गणपतिपुले, भीमशंकर, हरिहरेश्‍वर, शेगाव, कोल्‍हापुर, जेजुरी तथा अंबजोगई  धार्मिक स्‍थान है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==प्रमुख नगर==&lt;br /&gt;
भारत देश में महाराष्ट्र सबसे बड़ा औद्योगिक प्रान्त है। मुंबई, पुणे, औरंगाबाद, नागपुर और नाशिक महाराष्ट्र के बडे शहरों में गिने जाते हैं। यहाँ के निवासियों की मातृभाषा मराठी है और यहाँ के लोगों को महाराष्ट्रीयन कहा जाता है। पहाड़ी नगरों में 'महाबलेश्वर' और 'माथेरान' काफ़ी प्रसिद्ध है। छुट्टियों के समय इन नगरों में बहुत ही भीड़ होती है और मौसम भी बहुत सुहावना होता है।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''धार्मिक नगर'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
*धार्मिक नगरों में नाशिक के काफ़ी नज़दीक शिर्डी नगर है। इस नगर का साईं बाबा का मन्दिर बहुत ही प्रसिद्ध है। &lt;br /&gt;
*इसी तरह मुंबई का 'महालक्ष्मी मन्दिर' और पुणे के 'दगडूशेठ गणपति मन्दिर' बहुत ही अधिक ख्याति प्राप्त हैं।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''मुंबई'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुंबई पूर्वी न्यूयॉर्क के नाम से भी विख्यात है। मुंबई में चौपाटी, गेटवे ऑफ़ इन्डिया , प्रिन्स वेल्स म्युज़ियम, एलिफ़ेन्टा केव्स और मडआईलॅन्ड बहुत ही प्रसिद्ध है।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''पुणे'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पुणे महाराष्ट्र का संस्कृति प्रधान नगर माना जाता है। शनिवारवाडा, लाल महल, सिंहगढ़ जैसे ऐतिहासिक स्थान हैं। पुणे का आई॰टी॰ पार्क और लक्ष्मी रोड काफ़ी जाना माना है।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''औरंगाबाद'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
औरंगाबाद नगर महाराष्ट्र के मध्य भाग में स्थित है। यहां के अजंता-एलोरा केव्स विश्व प्रसिद्ध हैं। इन गुफाओं में बुद्ध के तक्षण बनाये गये हैं।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''नागपुर'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नागपुर एक बहुत ही सुन्दर शहर है और यहा के संतरे पूरी दुनिया में जाने माने हैं।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''नाशिक'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नाशिक एक काफ़ी सुन्दर शहर है और यहां का मौसम सुहाना है। नाशिक के कालाराम और दूसरे मन्दिर विख्यात है और लोग [[गोदावरी नदी]] में नहाना पवित्र समझते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==सम्बंधित लिंक==&lt;br /&gt;
{{महाराष्ट्र प्रदेश के ज़िले}}&lt;br /&gt;
{{महाराष्ट्र के पर्यटन स्थल}}&lt;br /&gt;
{{राज्य और के. शा. प्र.}}&lt;br /&gt;
[[Category:भारत के राज्य और केन्द्र शासित प्रदेश]][[Category:राज्य संरचना]]&lt;br /&gt;
[[Category:महाराष्ट्र]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Gaurav</name></author>
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		<author><name>Gaurav</name></author>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;Gaurav: /* परिवहन */&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा राज्य&lt;br /&gt;
|Image=Maharashtra-Map.jpg&lt;br /&gt;
|राजधानी=मुंबई&lt;br /&gt;
|जनसंख्या=96879&lt;br /&gt;
|जनसंख्या घनत्व=315&lt;br /&gt;
|क्षेत्रफल=308,000&lt;br /&gt;
|भौगोलिक निर्देशांक=18° 58' 30&amp;quot; N 72° 49' 33&amp;quot; E&lt;br /&gt;
|ज़िले=35&lt;br /&gt;
|महानगर=मुंबई&lt;br /&gt;
|बड़े नगर=मुंबई, पुणे, नागपूर, औरंगाबाद, कोल्हापूर, नासिक, शोलापूर, अमरावती, सांगली, नांदेड&lt;br /&gt;
|राजभाषा(एँ)=मराठी , हिन्दी , अंग्रेजी,&lt;br /&gt;
|स्थापना=1960/05/01&lt;br /&gt;
|मुख्य ऐतिहासिक स्थल=गेटवे ऑफ़ इन्डिया, अजंता-एलोरा केव्स, शनिवारवाडा, लाल महल, सिंहगढ़&lt;br /&gt;
|मुख्य पर्यटन स्थल=गेटवे ऑफ़ इन्डिया, मडआईलॅन्ड, अजंता-एलोरा केव्स, मुंबई चौपाटी&lt;br /&gt;
|लिंग अनुपात=1000:922&lt;br /&gt;
|साक्षरता=76.9&lt;br /&gt;
|राज्यपाल=एस एम कृष्णा&lt;br /&gt;
|मुख्यमंत्री=अशोक चव्हाण&lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=[http://www.maharashtra.gov.in/ अधिकारिक वेबसाइट]&lt;br /&gt;
|अद्यतन=2010/05/07&lt;br /&gt;
|emblem=maharashtra-seal.gif&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
==इतिहास और भूगोल==&lt;br /&gt;
प्राचीन 16 महाजनपदों में अश्मक या अस्सक का स्थान आधुनिक [[अहमदनगर]] के आसपास का माना जाता है । सम्राट [[अशोक]] के शिलालेख भी [[मुंबई]] के निकट पाए गए हैं । महाराष्‍ट्र के पहले प्रसिद्ध शासक सातवाहन (ई.पू. 230 से 225 ई.) थे जो महाराष्ट्र राज्य के संस्‍थापक थे। उन्‍होंने अपने पीछे बहुत से साहित्यिक, कलात्‍मक तथा पुरातात्विक प्रमाण छोड़े हैं। उनके शासनकाल में मानव जीवन के हर क्षेत्र में भरपूर  प्रगति हुई। &lt;br /&gt;
[[चित्र:Ajanta-Caves-1.jpg|thumb|[[अजंता की गुफ़ाएँ|अजंता की गुफ़ाओं]] का विश्व प्रसिद्ध भित्ति चित्र|left]]&lt;br /&gt;
इसके बाद वाकाटक आए, जिन्‍होंने भारतीय साम्राज्‍य की स्‍थापना की। उनके शासनकाल में महाराष्‍ट्र में शिक्षा, कला तथा धर्म सभी दिशाओं में अत्यधिक विकास हुआ। उनके शासन के दौरान ही 'अजंता की गुफाओं' में उच्‍च कोटि के भित्तिचित्र बनाए गए। वाकाटको के बाद कुछ समय के लिए 'कलचुरी वंश' ने शासन किया और फिर 'चालुक्‍य' सत्‍ता में आए। इसके बाद तटवर्ती इलाकों मे 'शिलाहारों' के अलावा महाराष्‍ट्र पर 'राष्‍ट्रकूट' तथा 'यादव' शासकों का नियंत्रण रहा। यादवों ने मराठी को शासन की भाषा बनाया और दक्षिण के एक बडे भाग पर अपना आधिपत्‍य स्थापित किया।&lt;br /&gt;
अलाउद्दीन ख़िलजी पहला मुस्लिम शासक था जिसने अपना राज्य दक्षिण में मदुरै तक फैला लिया था । उसके बाद मुहम्मद बिन तुग़लक (1325) ने अपनी राजधानी [[दिल्ली]] से हटाकर [[दौलताबाद]] कर ली । यह स्थान पहले देवगिरि नाम से प्रसिद्ध था और अहमदनगर के पास है । बहमनी शासकों ने महाराष्‍ट्र तथा इसकी संस्‍कृति को समन्वित किया, पर शिवाजी के कुशल नेतृत्‍व में महाराष्‍ट्र का सर्वांगीण विकास हुआ और यह एक अलग पहचान के साथ उभरकर सामने आया। शिवाजी ने स्‍वराज तथा राष्‍ट्रीयता की एक नई भावना पैदा की। उनकी प्रचंड शाक्ति ने मुग़लों को भारत के इस भाग में आगे नहीं बढ़ने दिया। पेशवाओं ने दक्षिण के पठार से लेकर पंजाब पर हमला बोल कर मराठाओं का आधिपत्‍य स्‍थापित किया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बहमनी सल्तनत के टूटने पर यह प्रदेश गोलकुण्डा के शासन में आया और उसके बाद औरंगजेब का संक्षिप्त शासन रहा। इसके बाद मराठों की शक्ति में उत्तरोत्तर वृद्धि हुई और अठारहवीं सदी के अन्त तक मराठा पूरे महाराष्ट्र में फैल गये थे और उनका साम्राज्य दक्षिण में कर्नाटक के दक्षिणी सिरे तक हो गया था । 1820 तक आते आते अंग्रेजों ने पेशवाओं को हरा दिया था और यह प्रदेश भी अंग्रेजी साम्राज्य का अंग बन गया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
स्‍वतंत्रता संग्राम में महाराष्‍ट्र सबसे आगे था। भारतीय राष्‍ट्रीय कांग्रेस का जन्‍म भी यहीं हुआ। मुंबई तथा महाराष्‍ट्र के अन्‍य शहरों के अनगिनत नेताओं ने पहले तिलक और बाद में महात्‍मा गांधी के मार्गदर्शन में कांग्रेस के आंदोलन को आगे बढाया। गांधी जी ने भी अपने आंदोलन का केंद्र महाराष्‍ट्र को बनाया था और गांधी युग में राष्‍ट्रवादी देश की राजधानी सेवाग्राम थी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
महाराष्ट्र  की स्थापना के पचास साल पूरे हो गये हैं। महाराष्ट्र और गुजरात का स्थापना दिवस 1मई को मनाया जाता है कभी ये दोनों राज्य मुंबई का हिस्सा थे। जब मुंबई राज्य से महाराष्ट्र और गुजरात के गठन का प्रस्ताव आया तो तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने मुंबई को अलग केन्द्रशासित प्रदेश बनाने की वकालत की। उनका तर्क था कि अगर मुंबई को देश की आर्थिक राजधानी बने रहना है तो यह करना आवश्यक है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
किंतु पंडित नेहरू की नहीं चली। देश के पहले वित्तमंत्री और वित्त विशेषज्ञ चिंतामणि देशमुख ने इसका प्रखर विरोध किया और इसी मुद्दे पर केन्द्रीय मंत्रिमण्डल से इस्तीफा दे दिया। मुंबई को महाराष्ट्र में रखने के लिए आंदोलन चला जिसमें कुल 80 लोगों की आहुति हुई लेकिन आखिरकार मुंबई महाराष्ट्र का हुआ।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
देश को आजादी के ब मध्य बाद भारत के सभी मराठी भाषी स्थानों का समीकरण करके एक राज्य बनाने को लेकर बड़ा आंदोलन चला और 1 मई, 1960 को कोंकण, मराठवाडा, पश्चिमी महाराष्ट्र, दक्षिण महाराष्ट्र, उत्तर महाराष्ट्र (खानदेश) तथा विदर्भ, सभी संभागों को जोड़ कर महाराष्ट्र राज्य की स्थापना की गई।&lt;br /&gt;
==महाराष्ट्र राज्य का गठन==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Maharashtra-Map-1.jpg|महाराष्ट्र का मानचित्र&amp;lt;br /&amp;gt; Map of Maharashtra|thumb]]&lt;br /&gt;
देश के राज्‍यों के भाषायी पुनर्गठन के फलस्‍वरूप 1 मई, 1960 को महाराष्‍ट्र राज्‍य का प्रशासनिक प्रादुर्भाव हुआ। यह राज्‍य आसपास के मराठी भाषी क्षेत्रों को मिलाकर बनाया गया, जो पहले चार अलग अलग प्रशासनों के नियंत्रण में था। इनमें मूल ब्रिटिश मुंबई प्रांत में शामिल दमन तथा गोवा के बीच का ज़िला, हैदराबाद के निज़ाम की रियासत के पांच ज़िले, मध्‍य प्रांत (मध्‍य प्रदेश) के दक्षिण के आठ ज़िले तथा आसपास की ऐसी अनेक छोटी-छोटी रियासतें शामिल थी, जो समीपवर्ती ज़िलों में मिल गई थी। &lt;br /&gt;
==भौगोलिक स्थिति==&lt;br /&gt;
महाराष्‍ट्र  भारत के उत्तर में बसा हुआ है और भौगोलिक दृष्टि से यह राज्‍य मुख्‍यत: पठारी है। महाराष्‍ट्र पठारों का पठार है। इसके उठे हुए पश्चिमी किनारे सहाद्री पहाडियों का निर्माण करते है और समुद्र तट के समानांतर हैं तथा इसकी ढलान पूर्व तथा दक्षिण पूर्व की ओर धीरे धीरे बढ़ती है। राज्‍य के उत्तरी भाग में सतपुड़ा की पहाडियां है, जबकि अजंता तथा सतमाला पहाडियां राज्‍य के मध्‍य भाग से होकर जाती है। अरब सागर महाराष्‍ट्र की पश्चिमी सीमा का प्रहरी है, जबकि गुजरात और मध्‍य प्रदेश इसके उत्तर में हैं। राज्‍य की पूर्वी सीमा पर छत्तीसगढ है और कर्नाटक तथा आंध्र प्रदेश इसके दक्षिण में है।&lt;br /&gt;
==जनसंख्या==&lt;br /&gt;
महाराष्ट्र की जनसंख्या सन 2001 में 96,752,247 थी, विश्व में केवल ग्यारह ऐसे देश हैं जिनकी जनसंख्या महाराष्ट्र प्रदेश से ज़्यादा है। &lt;br /&gt;
==कृषि==&lt;br /&gt;
महाराष्‍ट्र के लगभग 65 प्रतिशत श्रमिक कृषि तथा संबंधित गतिविधियों पर निर्भर है। यहां की प्रमुख फ़सलें हैं- धान, ज्‍वार, बाजरा, गेहूं, तूर (अरहर), उडद, चना और दलहन। यह राज्‍य तिलहनों का प्रमुख उत्‍पादक है और मूंगफली, सूरजमुखी, सोयाबीन प्रमुख तिलहनी फ़सलें है। महत्‍वपूर्ण नकदी फ़सलें है कपास, गन्‍ना, हल्‍दी और सब्जियां। राज्‍य में 12.90 लाख हेक्‍टेयर क्षेत्र में विभिन्‍न प्रकार के फल, जैसे आम, केला, संतरा, अंगूर, काजू आदि की फ़सलें उगाई जाती है।&lt;br /&gt;
==उद्योग==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Gateway-of-India-2.jpg|thumb|भारतीय प्रवेशद्वार (गेटवे ऑफ़ इन्डिया), मुम्बई&amp;lt;br /&amp;gt; Gateway of India, Mumbai]]&lt;br /&gt;
महाराष्‍ट्र को पूरे देश का औद्योगिक क्षमता का केंद्र माना जाता है और राज्‍य की राजधानी मुंबई देश की वित्‍तीय तथा वाणिज्यिक गतिविधियों का केंद्र है। राज्‍य की अर्थव्‍यवस्‍था में औद्योगिक क्षेत्र का महत्‍वपूर्ण स्‍थान है। खाद्य उत्‍पाद, तंबाकू और इससे बनी चीजें, सूती कपडा, कपड़े से बना सामान, काग़ज और इससे बनी चीजें, मुद्रण और प्रकाशन, रबड, प्‍लास्टिक, रसायन व रासायनिक उत्‍पाद, मशीनें बिजली की मशीन, यंत्र व उपकरण तथा परिवहन उपकरण और उनके कल पुर्जे आदि का राज्‍य के औद्योगिक उत्‍पादन में महत्‍वपूर्ण योगदान है। वर्ष 2005-06 में औद्योगिक उत्‍पादन (निर्माण) वर्ष 2004-05 के मुकाबले 8.9 प्रतिशत अधिक रहा।&lt;br /&gt;
==सिंचाई और बिजली==&lt;br /&gt;
जून 2005 के अंत तक 32 बड़ी, 178 मंझोली और राज्‍य के क्षेत्र की 2,274 लघु सिंचाई परियोजनाएं पूरी हो चुकी थीं इसके अलावा 21 बडी 39 मंझोली सिंचाई परियोजनाओं का निर्माण कार्य जारी है। 2004 से 2005 में राज्‍य में कुल सिंचित क्षेत्र 36.36 लाख हेक्‍टेयर था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
2004-05 में महाराष्‍ट्र की कुल स्‍थापित विद्युत उत्‍पादन क्षमता 12,909 मेगावाट थी। राज्‍य में प्‍लांट लोड फैक्‍टर (पी.एल.एफ) 81.6 प्रतिशत था और बिजली उत्‍पादन 68,507 करोड किलोवाट घंटा था।&lt;br /&gt;
==परिवहन==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Bibi-Ka-Maqbara-Aurangabad.jpg|[[बीबी का मक़बरा]], [[औरंगाबाद]]&amp;lt;br /&amp;gt; Bibi Ka Maqbara, Aurangabad|thumb]]&lt;br /&gt;
'''सड़क''' मार्च 2005 तक राज्‍य में सड़कों की कुल लंबाई 2.29 लाख कि.मी. थी, जिसमें राष्‍ट्रीय राजमार्गों की लंबाई 4, 367 कि.मी. प्रांतीय राजमार्गों की 33,406 कि.मी., प्रमुख ज़िला सड़कों की 48,824 कि.मी., अन्‍य ज़िला सड़कों की लंबाई 44,792 कि.मी. और ग्रामीण सड़कों की कुल लंबाई 97,913 कि.मी. थी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''रेलवे''' महाराष्‍ट्र में 5,527 कि.मी. रेल मार्ग है। इसमें से लगभग 78.6 प्रतिशत बड़ी रेल लाइनें, 7.8 प्रतिशत मीटर गेज तथा 13.6 प्रतिशत छोटी रेल लाइनें है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''उड्डयन''' राज्‍य में कुल 24 हवाई अड्डे / हवाई पट्टियां है। इनमें से 17 महाराष्‍ट्र सरकार के नियंत्रण में है। चार हवाई अड्डे अंतर्राष्‍ट्रीय हवाई अड्डा प्राधिकरण / भारतीय हवाई अड्डा प्राधिकरण के नियंत्रण में हैं, ज‍बकि बाकी तीन रक्षा मंत्रालय के अधीन है। राज्‍य सरकार के नियंत्रण वाले हवाई अड्डों पर अभी व्‍यावसायिक उड़ानों की सुविधा नहीं है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''बंदरगाह''' मुम्बंई प्रमुख बंदरगाह है। राज्‍य में दो बड़े और 48 छोटे अधिसूचित बंदरगाह हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==पर्यटन स्‍थल==&lt;br /&gt;
यहां के महत्‍वपूर्ण पर्यटन केंद्र है अजंता, एलोरा, एलिफेंटा, कन्‍हेरी और कारला गुफाएं, महाबलेश्‍वर, माथेरन और पंचगनी, जवाहर, मालशेजघाट, अंबोली, चिकलधारा और पन्‍हाला पर्वतीय स्‍थल। पंढरपुर, नाशिक, शिरडी, नांदेड, औधानागनाथ, त्रयंबकेवर, तुलजापुर, गणपतिपुले, भीमशंकर, हरिहरेश्‍वर, शेगाव, कोल्‍हापुर, जेजुरी तथा अंबजोगई  धार्मिक स्‍थान है।&lt;br /&gt;
==प्रमुख नगर==&lt;br /&gt;
भारत देश में महाराष्ट्र सबसे बड़ा औद्योगिक प्रान्त है। मुंबई, पुणे, औरंगाबाद, नागपुर और नाशिक महाराष्ट्र के बडे शहरों में गिने जाते हैं। यहाँ के निवासियों की मातृभाषा मराठी है और यहाँ के लोगों को महाराष्ट्रीयन कहा जाता है। पहाड़ी नगरों में 'महाबलेश्वर' और 'माथेरान' काफ़ी प्रसिद्ध है। छुट्टियों के समय इन नगरों में बहुत ही भीड़ होती है और मौसम भी बहुत सुहावना होता है।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''धार्मिक नगर'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
*धार्मिक नगरों में नाशिक के काफ़ी नज़दीक शिर्डी नगर है। इस नगर का साईं बाबा का मन्दिर बहुत ही प्रसिद्ध है। &lt;br /&gt;
*इसी तरह मुंबई का 'महालक्ष्मी मन्दिर' और पुणे के 'दगडूशेठ गणपति मन्दिर' बहुत ही अधिक ख्याति प्राप्त हैं।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''मुंबई'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुंबई पूर्वी न्यूयॉर्क के नाम से भी विख्यात है। मुंबई में चौपाटी, गेटवे ऑफ़ इन्डिया , प्रिन्स वेल्स म्युज़ियम, एलिफ़ेन्टा केव्स और मडआईलॅन्ड बहुत ही प्रसिद्ध है।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''पुणे'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पुणे महाराष्ट्र का संस्कृति प्रधान नगर माना जाता है। शनिवारवाडा, लाल महल, सिंहगढ़ जैसे ऐतिहासिक स्थान हैं। पुणे का आई॰टी॰ पार्क और लक्ष्मी रोड काफ़ी जाना माना है।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''औरंगाबाद'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
औरंगाबाद नगर महाराष्ट्र के मध्य भाग में स्थित है। यहां के अजंता-एलोरा केव्स विश्व प्रसिद्ध हैं। इन गुफाओं में बुद्ध के तक्षण बनाये गये हैं।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''नागपुर'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नागपुर एक बहुत ही सुन्दर शहर है और यहा के संतरे पूरी दुनिया में जाने माने हैं।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''नाशिक'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नाशिक एक काफ़ी सुन्दर शहर है और यहां का मौसम सुहाना है। नाशिक के कालाराम और दूसरे मन्दिर विख्यात है और लोग [[गोदावरी नदी]] में नहाना पवित्र समझते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==सम्बंधित लिंक==&lt;br /&gt;
{{महाराष्ट्र प्रदेश के ज़िले}}&lt;br /&gt;
{{महाराष्ट्र के पर्यटन स्थल}}&lt;br /&gt;
{{राज्य और के. शा. प्र.}}&lt;br /&gt;
[[Category:भारत के राज्य और केन्द्र शासित प्रदेश]][[Category:राज्य संरचना]]&lt;br /&gt;
[[Category:महाराष्ट्र]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Gaurav</name></author>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;Gaurav: &lt;/p&gt;
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&lt;div&gt;{{चित्र सूचना&lt;br /&gt;
|विवरण=[[बीबी का मक़बरा]], [[औरंगाबाद]]&amp;lt;br /&amp;gt; Bibi Ka Maqbara, Aurangabad&lt;br /&gt;
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|संग्रहालय क्रम संख्या=&lt;br /&gt;
|आभार=&lt;br /&gt;
|आकार=&lt;br /&gt;
|अन्य विवरण=बीबी के मकबरा का निर्माण मुगल बादशाह [[औरंग़ज़ेब]] के शहजा़दे [[आज़मशाह]] ने, अंतिम सत्रहवीं शताब्दी में करवाया था। &lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
{{CCL&lt;br /&gt;
|Attribution={{Attribution}}&lt;br /&gt;
|Share Alike={{Share Alike}}&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
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		<summary type="html">&lt;p&gt;Gaurav: &lt;/p&gt;
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&lt;div&gt;{{चित्र सूचना&lt;br /&gt;
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}}&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
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		<summary type="html">&lt;p&gt;Gaurav: &lt;/p&gt;
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&lt;div&gt;{{चित्र सूचना&lt;br /&gt;
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|अन्य विवरण=एलोरा [[युनेस्को]] द्वारा घोषित एक विश्व धरोहर स्थल है।&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
{{CCL&lt;br /&gt;
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{{चयन प्रक्रिया चित्र}}&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Gaurav</name></author>
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&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{चित्र सूचना&lt;br /&gt;
|विवरण=[[अजंता गुफाएं]], [[औरंगाबाद]]&amp;lt;br /&amp;gt; Ajanta Caves, Aurangabad&lt;br /&gt;
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|अन्य विवरण=बीबी के मकबरा का निर्माण मुगल बादशाह [[औरंग़ज़ेब]] के शहजा़दे [[आज़मशाह]] ने, अंतिम सत्रहवीं शताब्दी में करवाया था। &lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
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__INDEX__&lt;br /&gt;
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}}&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
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		<title>चित्र:Vagator-Beach-Goa-2.jpg</title>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;Gaurav: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{चित्र सूचना&lt;br /&gt;
|विवरण=[[वेगेटर बीच गोवा|वेगेटर बीच]], [[गोवा]]&amp;lt;br /&amp;gt; Vagator Beach, Goa&lt;br /&gt;
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|उपलब्ध=[http://www.flickr.com/photos/souvikdg/4449594775/ Souvikdg]&lt;br /&gt;
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|संग्रहालय क्रम संख्या=&lt;br /&gt;
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__INDEX__&lt;br /&gt;
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{{चयन प्रक्रिया चित्र}}&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Gaurav</name></author>
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		<title>कृष्ण</title>
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		<updated>2010-07-01T06:22:43Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Gaurav: /* सम्बंधित लिंक */&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{चयनित लेख}}&lt;br /&gt;
{{Copyright}}&lt;br /&gt;
{{पात्र परिचय&lt;br /&gt;
|चित्र=Radha-Krishna-1.jpg&lt;br /&gt;
|अन्य नाम=द्वारिकाधीश, केशव, गोपाल, नंदलाल, बाँके बिहारी, कन्हैया, गिरधारी, मुरारी आदि&lt;br /&gt;
|अवतार=[[सोलह कला]] युक्त पूर्णावतार ([[विष्णु]])&lt;br /&gt;
|वंश-गोत्र=[[वृष्णि वंश]] ([[चंद्रवंश]])&lt;br /&gt;
|कुल=[[यदुकुल]]&lt;br /&gt;
|पिता=[[वसुदेव]]&lt;br /&gt;
|माता=[[देवकी]]&lt;br /&gt;
|धर्म पिता=&lt;br /&gt;
|धर्म माता=&lt;br /&gt;
|पालक पिता=[[नंद|नंदबाबा]]&lt;br /&gt;
|पालक माता=[[यशोदा]]&lt;br /&gt;
|जन्म विवरण=भादों कृष्णा अष्टमी  &lt;br /&gt;
|समय-काल=[[महाभारत]] काल&lt;br /&gt;
|धर्म-संप्रदाय=&lt;br /&gt;
|परिजन=[[रोहिणी]] संतान [[बलराम]] (भाई), [[सुभद्रा]] (बहन), गद (भाई) &lt;br /&gt;
|गुरु=[[संदीपन]], [[आंगिरस]]&lt;br /&gt;
|विवाह=[[रुक्मिणी]], [[सत्यभामा]], [[जांबवती]], मित्रविंदा, भद्रा, सत्या, लक्ष्मणा, [[कालिंदी]]&lt;br /&gt;
|संतान=[[प्रद्युम्न]] &lt;br /&gt;
|विद्या पारंगत=सोलह कला, चक्र चलाना&lt;br /&gt;
|रचनाएँ=[[गीता]]&lt;br /&gt;
|महाजनपद=&lt;br /&gt;
|शासन-राज्य=[[द्वारिका]]&lt;br /&gt;
|संदर्भ ग्रंथ=[[महाभारत]], [[भागवत]], [[छान्दोग्य उपनिषद]]&lt;br /&gt;
|प्रसिद्ध घटनाएँ=&lt;br /&gt;
|अन्य विवरण=&lt;br /&gt;
|मृत्यु=पैर में तीर लगने से&lt;br /&gt;
|यशकीर्ति=[[द्रौपदी]] के चीरहरण में रक्षा करना। [[कंस]] का वध करके [[उग्रसेन]] को राजा बनाना।&lt;br /&gt;
|अपकीर्ति=&lt;br /&gt;
|संबंधित लेख=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=&lt;br /&gt;
|पाठ 1=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 2=&lt;br /&gt;
|पाठ 2=&lt;br /&gt;
|अन्य जानकारी=&lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
[[चित्र:krishn-title.jpg|कृष्ण|500px]]&lt;br /&gt;
==परिचय==&lt;br /&gt;
सनातन धर्म के अनुसार भगवान [[विष्णु]] सर्वपापहारी पवित्र और समस्त मनुष्यों को भोग तथा मोक्ष प्रदान करने वाले प्रमुख [[देवता]] हैं। कृष्ण हिन्दू धर्म में विष्णु के अवतार माने जाते हैं । श्रीकृष्ण साधारण व्यक्ति न होकर युग पुरुष थे। उनके व्यक्तित्व में भारत को एक प्रतिभासम्पन्न राजनीतिवेत्ता ही नही, एक महान कर्मयोगी और दार्शनिक प्राप्त हुआ, जिसका [[गीता]]- ज्ञान समस्त मानव-जाति एवं सभी देश-काल के लिए पथ-प्रदर्शक है। कृष्ण की स्तुति लगभग सारे भारत में किसी न किसी रूप में की जाती है। वे लोग जिन्हें हम साधारण रूप में नास्तिक या धर्म निरपेक्ष की श्रेणी में रखते हैं निश्चित रूप से भगवत गीता से प्रभावित हैं। गीता किसने और किस काल में कही या लिखी यह शोध का विषय है किन्तु गीता को कृष्ण से ही जोड़ा जाता है। यह आस्था का प्रश्न है और यूँ भी आस्था के प्रश्नों के उत्तर इतिहास में नहीं तलाशे जाते।&lt;br /&gt;
----&lt;br /&gt;
[[ब्रज]] या [[शूरसेन]] जनपद के इतिहास में श्रीकृष्ण का समय बड़े महत्व का है। इसी समय में प्रजातंत्र और नृपतंत्र के बीच कठोर संघर्ष हुए, [[मगध]]-राज्य की शक्ति का विस्तार हुआ और भारत का वह महान भीषण संग्राम हुआ जिसे [[महाभारत]] युद्ध कहते है। इन राजनैतिक हलचलों के अतिरिक्त इस काल का सांस्कृतिक महत्व भी है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[मथुरा]] नगरी इस महान विभूति का [[कृष्ण जन्मभूमि|जन्मस्थान]] होने के कारण धन्य हो गई। मथुरा ही नहीं, सारा शूरसेन या ब्रज जनपद आनंदकंद कृष्ण की मनोहर लीलाओं की क्रीड़ाभूमि होने के कारण गौरवान्वित हो गया। मथुरा और ब्रज को कालांतर में जो असाधारण महत्व प्राप्त हुआ वह इस महापुरुष की जन्मभूमि और क्रीड़ाभूमि होने के कारण ही श्रीकृष्ण भागवत धर्म के महान स्त्रोत हुए। इस धर्म ने कोटि-कोटि भारतीय जन का अनुरंजन तो किया ही,साथ ही कितने ही विदेशी इसके द्वारा प्रभावित हुए। प्राचीन और अर्वाचीन साहित्य का एक बड़ा भाग कृष्ण की मनोहर लीलाओं से ओत-प्रोत है। उनके लोकरंजक रूप ने भारतीय जनता के मानस-पटली पर जो छाप लगा दी है, वह अमिट है।&lt;br /&gt;
----&lt;br /&gt;
वर्तमान ऐतिहासिक अनुसंधानों के आधार पर श्रीकृष्ण का जन्म लगभग ई. पू. 1500 माना जाता है। ये सम्भवत: 100 वर्ष से कुछ ऊपर की आयु तक जीवित रहे। अपने इस दीर्घजीवन में उन्हें विविध प्रकार के कार्यो में व्यस्त रहना पड़ा। उनका प्रारंभिक जीवन तो ब्रज में कटा और शेष [[द्वारका]] में व्यतीत हुआ। बीच-बीच में उन्हें अन्य अनेक जनपदों में भी जाना पडा़। जो अनेक घटनाएं उनके समय में घटी उनकी विस्तृत चर्चा [[पुराण|पुराणों]] तथा महाभारत में मिलती है। [[वैदिक साहित्य]]&amp;lt;ref&amp;gt;छांदोग्य उपनिषद(3,17,6), जिसमें देवकी पुत्र कृष्ण का उल्लेख है और उन्हें घोर [[आंगिरस]] का शिष्य कहा है। परवर्ती साहित्य में श्रीकृष्ण को देव या [[विष्णु]] रूप में प्रदर्शित करने का भाव मिलता है (दे0 तैत्तिरीय आरण्यक, 10, 1, 6; [[पाणिनि]]-अष्टाध्यायी, 4, 3, 98 आदि)।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[महाभारत]] तथा [[हरिवंश पुराण|हरिवंश]], [[विष्णु पुराण|विष्णु]], [[ब्रह्म पुराण|ब्रह्म]], [[वायु पुराण|वायु]], [[भागवत पुराण|भागवत]], [[पद्म पुराण|पद्म]], [[देवी भागवत]] [[अग्नि पुराण|अग्नि]] तथा [[ब्रह्मावर्त|ब्रह्मवर्त]] [[पुराण|पुराणों]] में उन्हें प्राय: भगवान के रूप में ही दिखाया गया है। इन ग्रंथो में यद्यपि कृष्ण के आलौकिक तत्व की प्रधानता है तो भी उनके मानव या ऐतिहासिक रूप के भी दर्शन यत्र-तत्र मिलते हैं। पुराणों में कृष्ण-संबंधी विभिन्न वर्णनों के आधार पर कुछ पाश्चात्य विद्वानों को यह कल्पना करने का अवसर मिला कि कृष्ण ऐतिहासिक पुरुष नहीं थे। इस कल्पना की पुष्टि में अनेक दलीलें दी गई हैं, जो ठीक नहीं सिद्ध होती। यदि महाभारत और पुराणों के अतिरिक्त, ब्राह्मण-ग्रंथों तथा [[उपनिषद|उपनिषदों]] के उल्लेख देखे जायें तो कृष्ण के ऐतिहासिक तत्व का पता चल जायगा। बौद्ध-ग्रंथ घट [[जातक कथा|जातक]] तथा [[जैन]]-ग्रंथ उत्तराध्ययन सूत्र से भी श्रीकृष्ण का ऐतिहासिक होना सिद्ध है। यह मत भी भ्रामक है कि [[ब्रज]] के कृष्ण, [[द्वारका]] के कृष्ण तथा महाभारत के कृष्ण एक न होकर अलग-अलग व्यक्ति थे। &lt;br /&gt;
(श्रीकृष्ण की ऐतिहासिकता तथा तत्संबंधी अन्य समस्याओं के लिए देखिए- राय चौधरी-अर्ली हिस्ट्री आफ वैष्णव सेक्ट, पृ0 39, 52; आर0जी0 भंडारकार-ग्रंथमाला, जिल्द 2, पृ0 58-291; विंटरनीज-हिस्ट्री आफ इंडियन लिटरेचर, जिल्द 1, पृ0 456; मैकडॉनल तथा कीथ-वैदिक इंडेक्स, जि0 1, पृ0 184; ग्रियर्सन-एनसाइक्लोपीडिया आफ रिलीजंस (`भक्ति' पर निबंध); भगवानदास-कृष्ण; तदपत्रिकर-दि कृष्ण प्रायलम; पार्जीटर-ऎश्यंट इंडियन हिस्टारिकल ट्रेडीशन आदि।)&amp;lt;/ref&amp;gt; में तो कृष्ण का उल्लेख बहुत कम मिलता है और उसमें उन्हें मानव-रूप में ही दिखाया गया है, न कि नारायण या विष्णु के अवतार रूप में।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==इतिहास और पुरातत्व== &lt;br /&gt;
दामोदर धर्मानंद कोसंबी के अनुसार, कृष्ण के बारे में एकमात्र पुरातात्विक प्रमाण है उसका पारंपरिक हथियार चक्र जिसे फेंककर मारा जाता था।  वह इतना तीक्ष्णधार होता था कि किसी का भी सिर काट दे ।  यह हथियार वैदिक नहीं है, और [[बुद्ध]] के पहले ही इसका चलन बंद हो गया था; परंतु [[मिर्ज़ापुर]] ज़िले (दरअसल, बौद्ध दक्षिणागिरि) के एक गुफ़ाचित्र में एक रथारोही को ऐसे चक्र से आदिवासियों पर (जिन्होंने यह चित्र बनाया है) आक्रमण करते दिखाया गया है।  अत: इसका समय होगा लगभग 800 ई.पू. जबकि, मोटे तौर पर, [[वाराणसी]] में पहली बस्ती की नींव पड़ी। &amp;lt;ref&amp;gt;प्राचीन भारत की संस्कृति और सभ्यता- दामोदर धर्मानंद कोसंबी&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
[[चित्र:chakra-krishna.jpg|thumb|left|चक्र द्वारा आक्रमण करता अश्वारोही (इस चित्र को स्पष्ट रूप से दिखाने के लिए background बदल दिया है। जो मूल चित्र मैं नहीं है।)]]&lt;br /&gt;
ये रथारोही [[आर्य]] रहे होंगे, और नदी पार के क्षेत्र में लोह-खनिज की खोज करने आए होंगे- उस हैमाटाइट खनिज की, जिससे ये गुफ़ाचित्र बनाए गए हैं।  दूसरी ओर , [[ॠग्वेद]] में कृष्ण को दानव और [[इन्द्र|इन्द्र]] का शत्रु बताया गया है, और उसका नाम श्यामवर्ण आर्यपूर्व लोगों का द्योतक है। कृष्णाख्यान का मूलाधार यह है कि वह एक वीर योद्धा था और यदु कबीले का नर-देवता (प्राचीनतम वेद ऋग्वेद में जिन पाँच प्रमुख जनों यानी कबीलों का उल्लेख मिलता है उनमें से [[यदु]] क़बीला एक था); परंतु सूक्तकारों ने, [[पंजाब]] के [[कबीलों]] में निरंतर चल रहे कलह से जनित तत्कालीन गुटबंदी के अनुसार, इन यदुओं को कभी धिक्कारा है तो कभी आशीर्वाद दिया है। कृष्ण [[सात्वत]] भी है, [[अंधक]]-[[वृष्णि संघ|वृष्णि]] भी, और मामा [[कंस]] से बचाने के लिए उसे [[गोकुल]] (गोपालकों के कम्यून) में पाला गया था।  इस स्थानांतरण ने उसे उन [[आभीरों]] से भी जोड़ दिया जो ईसा की आरंभिक सदियों में ऐतिहासिक एवं पशुपालक लोग थे, जो आधुनिक अहीर जाति के पूर्वज हैं।  भविष्यवाणी थी कि कंस का वध उसकी बहिन (कुछ उल्लेखों में पुत्री) [[देवकी]] के पुत्र के हाथों होगा, इसलिए देवकी को उसके पति [[वसुदेव]] सहित कारागार में डाल दिया गया था।  बालक कृष्ण-वासुदेव (वासुदेव का पुत्र) गोकुल में बड़ा हुआ, उसने इन्द्र से गोधन की रक्षा की और अनेक मुँहवाले विषधर [[कालिय नाग]] का, जिसने मथुरा के पास [[यमुना नदी|यमुना]] के एक सुविधाजनक डबरे तक जाने का मार्ग रोक दिया था, मर्दन करके उसे खदेड़ दिया, उसका वध नहीं किया।  तब कृष्ण और उसके अधिक बलशाली भाई [[बलराम]] ने, भविष्यवाणी को पूरा करने के पहले, अखाड़े में कंस के मल्लों को परास्त किया।  यहाँ यह ध्यान में रखना ज़रूरी है कि कुछ आदिम समाजों में मुखिया की बहिन का पुत्र ही उसका उत्तराधिकारी होता है; साथ ही, उत्तराधिकारी को प्राय: मुखिया की बलि चढ़ानी पड़ती है।  आदिम प्रथाओं से कंस-वध को अच्छा समर्थन मिलता है, और यह भी स्पष्ट होता है कि मातृस्थानक समाज में ईडिपस-आख्यान का क्या रूप हो जाता।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==नारद कृष्ण संवाद==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Krishna Birth Place Mathura-13.jpg|[[कृष्ण जन्मभूमि]], [[मथुरा]]&amp;lt;br /&amp;gt; Krishna's Janm Bhumi, Mathura|thumb|250px]]&lt;br /&gt;
नारद कृष्ण संवाद ने कृष्ण के सम्बन्ध में कई बातें हमें स्पष्ट संकेत देती हैं कि कृष्ण ने भी एक सहज संघ मुखिया के रूप में ही समस्याओं से जूझते हुए समय व्यतीत किया होगा । श्रीकृष्ण मंझले भाई थे।  उनके बड़े भाई का नाम [[बलराम]] था जो अपनी शक्ति में ही मस्त रहते थे।  उनसे छोटे का नाम 'गद' था।  वे अत्यंत सुकुमार होने के कारण श्रम से दूर भागते थे।  श्रीकृष्ण के बेटे [[प्रद्युम्न]] अपने दैहिक सौंदर्य से मदासक्त थे।  कृष्ण अपने राज्य का आधा धन ही लेते थे, शेष यादववंशी उसका उपभोग करते थे।  श्रीकृष्ण के जीवन में भी ऐसे क्षण आये जब उन्होंने अपने जीवन का असंतोष [[नारद]] के सम्मुख कह सुनाया और पूछा कि यादववंशी लोगों के परस्पर द्वेष तथा अलगाव के विषय में उन्हें क्या करना चाहिए।  नारद ने उन्हें सहनशीलता का उपदेश देकर एकता बनाये रखने को कहा। &amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
'''महाभारत शांति पर्व अध्याय-82:'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
अरणीमग्निकामो वा मन्थाति हृदयं मम।&lt;br /&gt;
वाचा दुरूक्तं देवर्षे तन्मे दहति नित्यदा  	 ॥6॥&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
हे देवर्षि ! जैसे पुरुष अग्नि की इच्छा से अरणी काष्ठ मथता है; वैसे ही उन जाति-लोगों के कहे हुए कठोर वचन से मेरा हृदय सदा मथता तथा जलता हुआ रहता है ॥6॥&amp;lt;br /&amp;gt;&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
बलं संकर्षणे नित्यं सौकुमार्य पुनर्गदे।&lt;br /&gt;
रूपेण मत्त: प्रद्युम्न: सोऽसहायोऽस्मि नारद   ॥7॥&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
हे नारद ! बड़े भाई बलराम सदा बल से, गद सुकुमारता से और प्रद्युम्न रूप से मतवाले हुए है; इससे इन सहायकों के होते हुए भी मैं असहाय हुआ हूँ। ॥7॥&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==जन्म कथा==&lt;br /&gt;
[[कंस]] की चचेरी बहन देवकी शूर-पुत्र [[वसुदेव]] को ब्याही गई थी पुराणों के अनुसार जब कंस को यह भविष्यवाणी ज्ञात हुई कि देवकी के गर्भ से उत्पन्न आठवें बच्चे के हाथ से उसकी मृत्यु होगी तो वह बहुत सशंकित हो गया। उसने वासुदेव-देवकी को कारागार में बन्द करा दिया। उल्लेख है की कंस के चाचा और [[उग्रसेन]] के भाई [[देवक]] ने अपनी सात पुत्रियों का विवाह वासुदेव से कर दिया था जिनमें देवकी भी एक थी । &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[देवकी]] से उत्पन्न प्रथम छह बच्चों को कंस ने मरवा डाला। सातवें बच्चे (बलराम) का उसे कुछ पता ही नहीं चला।&amp;lt;ref&amp;gt;पुराणों के अनुसार बलराम सर्वप्रथम देवकी के गर्भ में आये, किन्तु देवी शक्ति द्वारा वे वसुदेव की दूसरी पत्नी रोहिणी के गर्भ में स्थानांतरित कर दिये गये। इस घटना के कारण ही बलदेव का नाम 'संकर्षण' पड़ा ।&amp;lt;/ref&amp;gt; यथा समय देवकी की आठवीं सन्तान कृष्ण का जन्म कारागार में [[भादों]] कृष्णा अष्टमी की आधी रात को हुआ।&amp;lt;ref&amp;gt;)	भागवत पुराण और ब्रह्म पुराण को छोड़ प्राय: सब पुराण श्री कृष्ण के स्वाभाविक जन्म की बात कहते हैं, न कि उनके ईश्वर-रूप की। श्रीकृष्ण का जन्म-स्थान मथुरा के [[कटरा केशवदेव मन्दिर मथुरा|कटरा केशवदेव]] मुहल्ले में [[औरंगजेब]] की [[लाल मस्जिद]] ([[ईदगाह]]) के पीछे माना जाता है।&amp;lt;/ref&amp;gt; जिस समय वे प्रकट हुए प्रकृति सौम्य थी, दिशायें निर्मल हो गई थीं। और [[नक्षत्र|नक्षत्रों]] में विशेष कांति आ गई थी। भयभीत वसुदेव नवजात बच्चे को शीघ्र लेकर यमुना-पार गोकुल गये और वहाँ अपने मित्र [[नंद]] के यहाँ शिशु को पहुँचा आये।&amp;lt;ref&amp;gt;	हरिवंश पुराण में मार्ग का कोई वर्णन नहीं है। अन्य पुराणों में अपने आप कारागार के कपाटों के खुलने तथा प्रहरियों की निंद्रा से लेकर अन्य अनेक घटनाओं का वर्णन है।&amp;lt;/ref&amp;gt;बदले में वे उनकी पत्नी यशोदा की सद्योजाता कन्या को ले आये। जब दूसरे दिन प्रात: कंस ने बालक के स्थान पर कन्या को पाया तो वह बड़े सोच-विचार में पड़ गया। उसने उस बच्ची को भी जीवित रखना ठीक न समझ उसे दिवंगत कर दिया। गोकुल में नंद ने पुत्र जन्म पर बड़ा उत्सव मनाया। नंद प्रति वर्ष कंस को कर देने मथुरा आया करते थे। उनसे भेंट होने पर वसुदेव ने नंद को बलदेव और कृष्ण के जन्म पर बधाई दी। पितृ-मोह के कारण उन्होंने नंद से कहा -'ब्रज में बड़े उपद्रवों की आंशका है, वहाँ शीघ्र जाकर रोहिणी और बच्चों की रक्षा करो।'&lt;br /&gt;
[[चित्र:krishna-birth.jpg|thumb|कृष्ण जन्म [[वसुदेव]], कृष्ण को [[कंस]] के  कारागार [[मथुरा]] से [[गोकुल]] ले जाते हुए, द्वारा- [[राजा रवि वर्मा]]&amp;lt;br /&amp;gt; Vasudev Taking Krishna To Gokul From Mathura Jail]]&lt;br /&gt;
====राक्षस आदि का संहार====&lt;br /&gt;
* [[पूतना वध]], &lt;br /&gt;
* [[शकटासुर वध]], &lt;br /&gt;
* [[यमलार्जुन मोक्ष]], &lt;br /&gt;
* [[कालियदह|कलिय दमन]], &lt;br /&gt;
* [[धेनुक वध]], &lt;br /&gt;
* [[प्रलंब वध]], &lt;br /&gt;
* [[अरिष्ट वध]] &lt;br /&gt;
====गोवर्धन पूजा====&lt;br /&gt;
गोकुल के गोप प्राचीन-रीति के अनुसार वर्षा काल बीतने और [[शरद]] के आगमन के अवसर पर [[इन्द्र]] देवता की पूजा किया करते थे।&amp;lt;ref&amp;gt;प्रर्लय-यथ के उपरान्त भाग0 पुराण मे सुंजयन में अग्नि-कांड का प्रसंग है; कृष्ण ने अग्नि शांत कर गावों की रक्षा की (अ0 19 । शरद ऋतु के आगमन पर ब्र0 वै0 (22 और भाग0 (27) कात्यायनी ब्रत का उल्लेख करते हैं। इन [[पुराण|पुराणों]] के अनुसार गोपियाँ कृष्ण का पतिभाव से चिंतन करती हुई कात्यायनी-व्रत करती थीं। कृष्ण ने एक दिन यमुना में स्नान करती हुई गोपियों के कपड़े चुरा लिये ओर कुछ देर तक उन्हें तंग करने के बाद वापस दे दिये। इन पुराणों में आगे कहा है कि इस ब्रत के तीन मास बाद महारास-लीला हुई। कात्यायनी-व्रत का वर्णन प्रारंभिक पुराणों में नहीं मिलता। भाग0 (23 )में उल्लिखित ब्राह्मणी के वेश में भूखे गोपों द्वारा भोजन माँगने का प्रसंग भी प्राचीन पुराणों में नहीं मिलता।&amp;lt;/ref&amp;gt; इनका विश्वास था कि इन्द्र की कृपा के कारण वर्षा होती है, जिसके परिणामस्वरूप पानी पड़ता है। कृष्ण और बलराम ने इन्द्र की पूजा का विरोध किया तथा गोवर्धन (धरती माँ, जो अन्न और जल देती है) की पूजा का अवलोकन किया। इस प्रकार एक ओर कृष्ण ने इन्द्र के काल्पनिक महत्व को बढ़ाने का कार्य किया, दूसरी और बलदेव ने हल लेकर खेती में वृद्धि के साधनों को खोज निकाला। पुराणों मे कथा है कि इस पर इन्द्र क्रुद्ध हो गया और उसने इतनी अत्यधिक वर्षा की कि हाहाकार मच गया। किन्तु कृष्ण ने बुद्धि-कौशल के गिरि द्वारा [[गोपी|गोप-गोपिकाओं]], गौओं आदि की रक्षा की। इस प्रकार इन्द्र-पूजा के स्थान पर अब [[गोवर्धन पूजा]] की स्थापना की गई।&amp;lt;ref&amp;gt;हरि (72-76) तथा पद्म0 ``(372,181-217) में इन्द्र द्वारा सात दिन तक घोर वृष्टि,करने का उल्लेख मिलता है। ब्रह्म पुराण (180), विष्णु0 (10,1-12,56) तथा हरिवंश के अनुसार वर्षा शांत होने पर इन्द्र ऐरावत पर चढ़कर क्षमा माँगने के लिए कृष्ण के पास आये। भाग के अनुसार इन्द्र गुप्त रूप से कृष्ण से मिले; उन्हें अन्य गोपी ने नहीं &lt;br /&gt;
देखा। वह कृष्ण को प्रसन्न करने के लिए स्वर्ग से मुरली साथ लेकर आये-भाग0 (37)। गोवर्धन-पूजा के बाद भागवत (28,1-10) में यह घटना वर्णित है कि एक दिन नंद को जब वे नदी में स्नान कर हे थे, वरुण के दूत अपने लोक को ले गये। कृष्ण ने वहाँ जाकर नंद को छुड़ाया और इसके बाद गोपों को बैंकुण्ठ-लोक के दर्शन कराये।&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
====रास====&lt;br /&gt;
कृष्ण के प्रति ब्रजवासियों का बड़ा स्नेह था। गोपियाँ तो विशेष रूप उनके सौंदर्य तथा साहस पूर्ण कार्यों पर मुग्ध थीं। प्राचीन पुराणों के अनुसार [[शरद पूर्णिमा]] की एक सुहावनी रात को गोपियों ने कृष्ण के साथ मिलकर नृत्य-गान किया। इसका नाम [[रासलीला|रास]] प्रसिद्ध हुआ।,&amp;lt;ref&amp;gt;हरि0 77; ब्रह्म0 189, 1-45; विष्णु0 13; भाग0 29-33। परवर्ती पुराणों में रास या महारास का विस्तार से कथन मिलता है। पद्म (72, 158-180) तथा ब्रह्मवैवर्त (28-53) में तो रास के सहारे काम-क्रीड़ा का विस्तृत वर्णन किया गया है। ब्रह्म वै0 के वर्णन में राधा तथा असंख्य सखियों का भी अतिशयोक्तिपूर्ण आलेखन किया गया है। वस्तुत: एक सीधीसादी घटना को संस्कृत एवं भाषा के परवर्ती भक्त कवियों ने बहुत बढ़ा-चढ़ा कर वर्णित किया है।&lt;br /&gt;
भाग0 पु0 (34) रासक्रीड़ा के तत्काल बाद दो और घटनाओं का समावेश करता है-(1) आम्बिका-वन में सरस्वती नदी के किनारे सोते नंद की अजगर से रक्षा और (2) उसी रात कुबेर-किंकर शंखचूड़ का वध।&amp;lt;/ref&amp;gt;धीरे-धीरे यह प्रथा एक नैमित्तिक उत्सव बन गया, जिसमें गोपी-ग्वाल सभी सम्मिलित होते थे। सभंवत: रात में इस प्रकार के मनोविनोंदों और खेलकूदों को इस हेतु भी प्रचारित किया गया कि जिससे रात मे भी सजग रह कर कंस के उन षड्यंत्रों से बचा जा सके जो आये दिन गोकुल में हुआ करते थे।&lt;br /&gt;
====धनुर्याग====&lt;br /&gt;
इस प्रकार ब्रज तथा उसके निवासियों पर संकट आये और चले गये। आपत्तिग्रस्त जंगलों और कुण्डों को भी कृष्ण ने अपनी शक्ति और चातुर्य से निष्कंटक बना दिया। अभी तक जितनी घटनाएँ घटी उनमें पूतना के संबंध में ही पुराणों में स्पष्ट संकेत मिलता है कि वह कंस की भेजी हुई थी। अन्य सब घटनाएं आकस्मिक या दैवी प्रतीत होती है, संभवत: उनमें कंस का विशेष हाथ न था। इन घटनाओं के संबंध में दूसरी बात ध्यान देने की यह है कि प्रारंभिक पुराणों-हरिवंश, वायु, ब्रह्म-में कृष्ण के साथ कम चामत्कारिक घटनाओं का संबंध है और बाद के पुराणों यथा भागवत, पद्म और ब्रह्मवैवर्त-में क्रमश: इन घटनाओं में वृद्धि हुई है। केवल घटनाओं की संख्या में ही वृद्धि नहीं हुई, प्राचीन पुराणों की कथाओं को भी परवर्ती पुराणों में बहुत घटा बढ़ा कर कहा गया है। बारहवीं शती के बाद के संस्कृत एवं भाषा साहित्य में तो ये बातें और भी प्रचुर मात्रा में मिलती हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
====धनुर्याग और अक्रूर का ब्रज-आगमन====&lt;br /&gt;
[[चित्र:krishna-parents.jpg|thumb|left|कृष्ण-[[बलराम]], [[देवकी]]-[[वसुदेव]] से मिलते हुए, द्वारा- [[राजा रवि वर्मा]]&amp;lt;br /&amp;gt; Krishna-Balram Meeting Devki-Vasudev]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कृष्ण बचपन में ही कई आकस्मिक दुर्धटनाओं का सामना करने तथा कंस के षड्यंत्रों को विफल करने के कारण बहुत लोक-प्रिय हो गये थे। सारे ब्रज में इस छोटे वीर बालक के प्रति विशेष महत्व पैदा हो गया। किन्तु दूसरी ओर मथुरा पति कंस कृष्ण की इस ख्याति से घबरा रहा था और समझ रहा था कि एक दिन अपने ऊपर भी सकंट आ सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
साम्राज्यवादी कंस ने अन्त में कूटनीति की शरण ली और दानपति [[अक्रूर]] के द्वारा धनुर्याग के बहाने कृष्ण-बलराम को मथुरा बुलाने का विचार किया। अक्रूर अपने समय में [[वृष्णि संघ|अंधक-वृष्णि संघ]] के एक वर्ग का प्रसिद्ध नेता था। संभवत: वह बहुत ही कुशल और व्यावहारिक-ज्ञान-सम्पन्न पुरुष था। कंस को उस समय ऐसे ही एक ही एक चतुर और विश्वस्त व्यक्ति की आवश्यकता थी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कंस ने पहले [[रंगेश्वर महादेव|धनुर्याग]] की तैयारी कर ली और फिर अक्रुर को गोकुल भेजा।&amp;lt;ref&amp;gt;हरिवंश 79; ब्रह्म0 190, 1-21; विष्णु0 15, 1-24; भाग0 36, 16,16-34 आदि। हरिवंश के अनुसार कंस ने [[अक्रूर]] को भेजने के पहले वसुदेव को बुरा-भला कहा और उन्हें ही अपने और कृष्ण के बीच वैमनस्य उत्पन्न करने वाला कहा । ब्रह्म0 और विष्णु के अनुसार कंस ने अकूर को छोड़ कर सभी यादवों के वध की प्रतिज्ञा की।&amp;lt;/ref&amp;gt; अक्रूर के कुछ पूर्व केशी कृष्ण के वधार्थ ब्रज पहुँच चुका था, परंतु कृष्ण ने उसे भी मार डाला।&amp;lt;ref&amp;gt;हरिवंश के वर्णन से प्रतीत होता है कि [[केशी]] कंस का परम प्रिय भाई या मित्र था। केशी के मारने से कृष्ण का नाम `केशव' हुआ। पुराणों के अनुसार केशी घोड़े का रूप बना कर कृष्ण को मारने गया था-ब्रह्म0 190,22-48, भाग0 37, 1-25; विष्णु0 16, 1-28।&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
====कृष्ण का मथुरा-गमन====&lt;br /&gt;
एक दिन सन्ध्या समय कृष्ण ने समाचार पाया कि अक्रुर उन्हें लेने वृन्दावन आये है। कृष्ण ने निर्भीक होकर अक्रुर से भेंट की और उन्हें नंद के पास ले गये। यहाँ अक्रूर ने कंस का धनुर्याग-संदेश सुनाकर कहा--``राजा ने आपको गोपों और बच्चों सहित यह मेला देखने बुलाया है``। अक्रूर दूसरे दिन सवेरे बलदेव और कृष्ण को लेकर मथुरा के लिए चले।&amp;lt;ref&amp;gt; हरिवंश 82; ब्रह्म0 191-92; विष्णु0 17, 1-19, 9; भागवत 31, 1-41; ब्रह्म्वै0 70, 1-72।&lt;br /&gt;
हरिवंश के अतिरिक्त अन्य पुराणों में आया है कि ब्रज की गोपियाँ कृष्ण को मथुरा न जाने देना चाहती थीं। उन्होंने अक्रूर का विरोध भी किया और रथ को रोक लिया। ब्रह्मवैवर्त में गोपियों की वियोग-व्यथा विस्तार से वर्णित है। ब्रज भाषा, बंगला तथा गुजराती के अनेक कवियों ने इस करुण प्रसंग का मार्मिक वर्णन किया है।&amp;lt;/ref&amp;gt; नंद संभवत: बच्चों को न भेजते, किन्तु अक्रूर ने नंद को समझाया कि कृष्ण का यह कर्तव्य है कि वह अपने माता-पिता वसुदेव और देवकी से मिलें और उनका कष्ट दूर करें। नंद अब भला कैसे रोकते ? मथुरा पहुंचने पर नीतिवान अक्रूर ने प्रथम ही माता-पिता से बच्चों को मिलाना उचित नहीं समझा। इसका कारण बताते हुए उन्होंने कहा कि इससे कंस भड़क जायगा और बना-बनाया काम बिगड़ जायगा। वे सन्ध्या समय मथुरा पहुंचे थे, अक्रूर दोनों भाइयों को पहले अपने घर ले गये।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ये वीर बालक सन्ध्या समय मथुरा नगरी की शोभा देखने के लोभ का संवरण न कर सके। पहली बार उन्होंने इतना बड़ा नगर देखा था। वे मुख्य सड़कों से होते हुए नगर की शोभा देखने लगे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
====कंस-वध====&lt;br /&gt;
{| id=&amp;quot;textboxrt&amp;quot;&lt;br /&gt;
|'''महाभारत शांति पर्व अध्याय-82:'''&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कृष्ण:-&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हे देवर्षि ! जैसे पुरुष अग्रिकी इच्छासे अरणी काष्ठ मथता है; वैसे ही उन जाति-लोगों के कहे हुए कठोर वचनसे मेरा हृदय सदा मथता तथा जलता हुआ रहता है ॥6॥&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हे नारद ! बड़े भाई बलराम सदा बल से, गद सुकुमारता से और प्रद्युम्न रूपसे मतवाले हुए है; इससे इन सहायकों के होते हुए भी मैं असहाय हुआ हूँ। ॥7॥&lt;br /&gt;
|}&lt;br /&gt;
कृष्ण-बलराम का नाम मथुरा में पहले से ही प्रसिद्ध हो चुका था। उनके द्वारा नगर में प्रवेश करते ही एक विचित्र कोलाहल पैदा हो गया। जिन लोगों ने उनका विरोध किया वे इन बालकों द्वारा दंडित किये गये। ऐसे मथुरावासियों की संख्या कम न थी जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कृष्ण के प्रति सहानुभूति रखते थे। इनमें कंस के अनेक भृत्य भी थे, जैसे सुदाभ या गुणक नामक माली, [[कुब्जा दासी]] आदि।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कंस के शस्त्रागार में भी कृष्ण पहुंच गये&amp;lt;ref&amp;gt;ज्ञात होता है कि कृष्ण ने शस्त्रागार में जानबूझ कर गड़बड़ी की, जिससे उनके पक्ष वालों को कंस के विरुद्ध युद्ध करने को हथियार मिल जाये। पुराणकारों ने तो इतना ही लिखा है कि धनुष तोड़ कर वे आगे बढ़े।&amp;lt;/ref&amp;gt;और वहाँ के रक्षक को समाप्त कर दिया। इतना करने के बाद कृष्ण-बलराम ने रात में संभवत: अक्रूर के घर विश्राम किया। अन्य पुराणों में यह बात निश्चित रूप से ज्ञात नहीं हो पाती कि दोनों भाइयों ने रात कहाँ बिताई।&amp;lt;ref&amp;gt;	पद्म पुराण (272, 331-393) के अनुसार यह रात दोनों भाइयों ने अपने सहयोगियों सहित रंगमंच पर ही बिताई। ब्र0 वै0 (अ0 12) के अनुसार नंद और कृष्ण आदि रात में कुविंद नामक एक वैष्णव के यहाँ रहे । &amp;lt;/ref&amp;gt; कंस ने ये उपद्रवपूर्ण बातें सुनी। उसने चाणूर और मुष्टिक नामक अपने पहलवानों को कृष्ण-बलराम के वध के लिए सिखा-पढ़ा दिया। शायद कंस ने यह भी सोचा कि उन्हें रंग भवन में घुसने से पूर्व ही क्यों न हाथी द्वारा कुचलवा दिया जाय, क्योंकि भीतर घुसने पर वे न जाने कैसा वातावरण उपस्थित कर दें। प्रात: होते ही दोनों भाई धनुर्याग का दृश्य देखने राजभवन में घुसे। ठीक उसी समय पूर्व योजनानुसार कुवलय नामक राज्य के एक भयंकर हाथी ने उन पर प्रहार किया। दोनों भाइयों ने इस संकट को दूर किया। भीतर जाकर कृष्ण चाणूर से और बलराम मुष्टिक से भिड़ गये। इन दोनों पहलवानों को समाप्त कर कृष्ण ने तोसलक नामक एक अन्य योद्धा को भी मारा। कंस के शेष योद्धाओं में आतंक छा जाने और भगदड़ मचने के लिए इतना कृत्य यथेष्ट था। इसी कोलाहल में कृष्ण ऊपर बैठे हुए कंस पर झपटे और उसको भी कुछ समय बाद परलोक पहुँचा दिया। इस भीषण कांड के समय कंस के सुनाम नामक भृत्य ने कंस को बचाने की चेष्टा की। किन्तु बलराम ने उसे बीच में ही रोक उसका वध कर डाला। &amp;lt;ref&amp;gt;भागवत में कूट और शल योद्धाओं तथा कंस के आठ भाइयों (कंक, न्यग्रोधक आदि) के मारे जाने का भी उल्लेख है।&lt;br /&gt;
कंस के इस प्रकार मारे जाने पर कुछ लोगों ने हाहाकार भी किया-&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
'ततो हाहाकृर्त सर्वमासीत्तद्रङमंडलम् ।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
अवज्ञया हतं दृष्ट्वा कृष्णेन मथुरेशवरम् ।।' (विष्णु पु0 5, 20, 91)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तथा- 'हाहेति शब्द: सुमहांस्तदाSभूदुदीरित: सर्वजनैर्नरेन्द्र ।'	(भागवत 10,44,38)&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
हो सकता है कि मथुरेश कंस की इस प्रकार मृत्यु देखकर तथा उसकी रानियों और परिजनों का हाहाकार (हरिवंश अ0 88) सुनकर दर्शकों में कुछ समय के लिए बड़ी बेचैनी पैदा हो गई हो ।&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अपना कार्य पूरा करने के उपरांत दोनो भाई सर्वप्रथम अपने माता-पिता से मिले। वसुदेव और देवकी इतने समय बाद अपने प्यारे बच्चों से मिल कर हर्ष-गदगद हो गये। इस प्रकार माता-पिता का कष्ट दूर करने के बाद कृष्ण ने कंस के पिता [[उग्रसेन]] को, जो अंधकों के नेता थे, पुन: अपने पद पर प्रतिष्ठित किया। समस्त संघ चाहता था कि कृष्ण नेता हों, किन्तु कृष्ण ने उग्रसेन से कहा:-&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;quot;मैनें कंस को सिंहासन के लिए नहीं मारा है। आप यादवों के नेता हैं । अत: सिंहासन पर बैठें।&amp;quot; &amp;lt;ref&amp;gt;हरि0 87, 52। sS&amp;lt;/ref&amp;gt; मालूम होता है कि इस पर भी कृष्ण से विशेष अनुरोध किया गया, तब उन्होंने नीतिपूर्वक ययाति के शाप का स्मरण दिलाकर सिंहासन-त्याग की बात कही।&amp;lt;ref&amp;gt;&amp;quot;ययाति शापाद्वं शोSयमराज्यार्ह Sपि साम्प्रतम् ।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
मयि भृत्ये स्थिते देव नाज्ञापयतु किं नृपै: ।।&amp;quot; (विष्णु0 5,21,120)&amp;lt;/ref&amp;gt; इस प्रकार कृष्ण ने त्याग और दूर-दर्शिता का महान आदर्श उपस्थित किया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==संस्कार==&lt;br /&gt;
कंस-वध तक कृष्ण का जीवन एक प्रकार से अज्ञातवास में व्यतीत हुआ। एक ओर कंस का आतंक था तो दूसरी ओर आकस्मिक आपत्तियों का कष्ट। अब इनसे छुटकारा मिलने पर उनके विद्याध्ययन की बात चली। वैसे तो वे दोनो भाई प्रतिभावान्, नीतिज्ञ तथा साहसी थे, परन्तु राजत्य-पंरपरा के अनुसार शास्त्रानुकूल संस्कार एवं शिक्षा-प्राप्ति आवश्यक थी। इसके लिए उन्हें गुरु के आश्रम में भेजा गया। वहाँ पहुँच कर कृष्ण-बलराम ने विधिवत् दीक्षा ली&amp;lt;ref&amp;gt; हरिवंश में कृष्ण-बलराम के यज्ञोपवीत का कोई उल्लेख नहीं है, पर शिक्षा से पहले उसका विधान है। उनका विद्यारंभ संभवत: [[गोकुल]] में हुआ। बाद के पुराणों-जैसे पद्म (273, 1-5), ब्रह्मवैवर्त (99 -102) और भागवत (45, 26-50) में यज्ञोपवीत का वर्णन है। इनके अनुसार गर्गाचार्य ने उन्हें गायत्री-मन्त्र का उपदेश दिया। सांदीपनि के आश्रम में ये चौंसठ दिनों तक रहे। इतने दिनों में वे गुरुकुल की प्रथा का पालन करते हुए धनुर्विद्या में ही विशेश शिक्षा प्राप्त कर सके होंगे। उनकी अवस्था अब बढ़ चली थी, क्योंकि हरिवंश के अनुसार अब वे युवा (`प्राप्त यौवनदेह:') थे। देवी भागवत (24,25) के अनुसार सांदीपनि के यहाँ से लौटने पर उनकी अवस्था केवल बारह वर्ष की थी।&amp;lt;/ref&amp;gt;  और अन्य शास्त्रों के साथ धनुर्विद्या में विशेष दक्षता प्राप्त की। वहीं उनकी [[सुदामा]] ब्राह्मण से भेंट हुई, जो उनका गुरु-भाई हुआ। [[जरासंध]] की मथुरा पर चढ़ाई कंस की मृत्यु का समाचार पाकर मगध-नरेश जरासंध बहुत-कुद्ध हो गया। वह कंस का श्वसुर था। जरासंध अपने समय का महान् साम्राज्यवादी और क्रूर शासक था। उसने कितने ही छोटे-मोटे राजाओं का राज्य हड़प कर उन राजाओं को बंदी बना लिया था। जरासंध ने कंस को अपनी लड़कियाँ संभवत: इसीलिए ब्याही थी जिससे कि पश्चिमी प्रदेशों में भी उसकी धाक बनी रहे और उधर गणराज्य की शक्ति कमज़ोर पड़-जाय। कंस की प्रकृति भी जरासंध से बहुत मिलती-जुलती थी। शायद जरासंध के बल पर ही बैठा था। अपने जामातृ और सहायक का इस प्रकार वध होते देख जरासंध का कुद्ध होना स्वाभाविक ही था। अब उसने शूरसेन जनपद पर चढ़ाई करने का पक्का विचार कर लिया। [[शूरसेन]] और [[मगध]] के बीच युद्ध का विशेष महत्व है, इसीलिए हरिवंश आदि पुराणों में इसका वर्णन विस्तार से मिलता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==जरासंध की पहली चढ़ाई==&lt;br /&gt;
जरासंध ने पूरे दल-बल के साथ शूरसेन जनपद पर चढ़ाई की। पौराणिक वर्णनों के अनुसार उसके सहायक कारूप का राजा दंतवक, चेदिराज, [[शिशुपाल]], कलिंगपति पौंड्र, भीष्मक पुत्र [[रूक्मी]], काय अंशुमान तथा [[अंग]], [[बंग]], [[कोषल]], [[दषार्ण]], [[भद्र]], [[त्रिगर्त]] आदि के राजा थे। इनके अतिरिक्त शाल्वराज, पवनदेश का राजा भगदत्त, सौवीरराज [[गंधार]] का राजा सुबल नग्नजित् का मीर का राजा गोभर्द, [[दरद|दरद देश]] का राजा तथा कौरवराज [[दुर्योधन]] आदि भी उसके सहायक थे। [[मगध]] की विशाल सेना ने मथुरा पहुँच कर नगर के चारों फाटकों को घेर लिया।&amp;lt;ref&amp;gt; हरिवंश (अ0 91)। पुराणों में यद्यपि अनेक देश के राजाओं का उल्लेख हुआ है, पर यह कहना कठिन है कि वास्तव में किन-किन राजाओं ने जरासंध की पहली मथुरा की चढ़ाई में उसकी सहायता की और अपनी सेनाएं इस निमित्त भेजीं। भागवत् के अनुसार जरासंघ की सेना 23 अक्षौहिणी थी; हरिवंश 20 अक्षौहिणी तथ पद्म 100 अक्षोहिणी बताता है।&amp;lt;/ref&amp;gt;  सत्ताईस दिनों तक जरासंध मथुरा नगर को घेरे पड़ा रहा, पर वह मथुरा का अभेद्य दुर्ग न जीत सका। संभवत: समय से पहले ही खाद्य-सामग्री के समाप्त हो जाने के कारण उसे निराश होकर मगध लौटना पड़ा। दूसरी बार जरासंध पूरी तैयारी से शूरसेन पहुँचा। यादवों ने अपनी सेना इधर-उधर फैला दी। युवक बलराम ने जरासंध का अच्छा मुक़ाबला किया। लुका-छिपी के युद्ध द्वारा यादवों ने मगध-सैन्य को बहुत छकाया। श्रीकृष्ण जानते थे कि यादव सेना की संख्या तथा शक्ति सीमित है और वह मगध की विशाल सेना का खुलकर सामना नहीं कर सकती। इसीलिए उन्होंने लुका-छिपी वाला आक्रमण ही उचित समझा। उसका फल यह हुआ कि जरासंध परेशान हो गया और हताश होकर ससैन्य लौट पड़ा। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[पुराण|पुराणों]] के अनुसार जरासंध ने अठारह बार मथुरा पर चढ़ाई की। सत्रह बार यह असफल रहा। अंतिम चढ़ाई में उसने एक विदेशी शक्तिशाली शासन कालयवन को भी मथुरा पर आक्रमण करने के लिए प्रेरित किया। कृष्ण बलदेव को जब यह ज्ञात हुआ कि जरासंध और कालयवन विशाल फौज लेकर आ रहे हैं तब उन्होंने मथुरा छोड़कर कहीं अन्यत्र चले जाना ही बेहतर समझा।&amp;lt;ref&amp;gt; हरिवंश और भागवत के अनुसार जब कृष्ण ने यह सुना कि एक ओर से जरासंध और दूसरी ओर से कालयवन बड़ी सेनाएँ लेकर शूरसेन जनपद आ रहे हैं, तो उन्होंने यादवों को मथुरा से [[द्वारका]] रवाना कर दिया और स्वयं बलराम के साथ गोमंत पर्वत पर चढ़ गये। जरासंध पहाड़ पर आग लगा कर तथा यह समझ कर कि दोनो जल मरे होंगे, लौट गया। दूसरी कथा के अनुसार कृष्ण सब लोगों को द्वारका भेज चुकने के बाद कालयवन को आता देख अकेले भगे। कालयवन ने इनका पीछा किया। कृष्ण उसे वहाँ तक ले गये जहाँ सूर्यवंशी मुचकुंद सो रहा था। मुचकुंद को यह वर मिला था कि जो कोई उन्हें सोते से उठायेगा वह उनकी दृष्टि पड़ते ही भस्म हो जायगा। कृष्ण ने ऐसा किया कि [[कालयवन]] मुचकुंद द्वारा भस्म कर दिया गया। (हरिवंश 100, 109; भागवत 50, 44,-52) आदि।&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==महाभिनिष्क्रमण==&lt;br /&gt;
अब समस्या थी कि कहाँ जाया जाय? यादवों ने इस पर विचार कर निश्चय किया कि सौराष्ट्र की द्वारकापुरी में जाना चाहिए। यह स्थान पहले से ही यादवों का प्राचीन केन्द्र था और इसके आस-पास के भूभाग में यादव बड़ी संख्या में निवास करते थे। ब्रजवासी अपने प्यारे कृष्ण को न जाने देना चाहते थे और कृष्ण स्वयं भी [[ब्रज]] को क्यों छोड़ते? पर आपत्तिकाल में क्या नहीं किया जाता? कृष्ण ने मातृभूमि के वियोग में सहानुभूति प्रकट करते हुए ब्रजवासियों को कर्त्तव्य का ध्यान दिलाया और कहा-&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
'जरासंध के साथ हमारा विग्रह हो गया है दु:ख की बात है। उसके साधन प्रभूत है। उसके पास वाहन, पदाति और मित्र भी अनेक है। यह मथुरा छोटी जगह है और प्रबल शत्रु इसके दुर्ग को नष्ट किया चाहता है। हम लोग यहाँ संख्या में भी बहुत बढ़ गये हैं, इस कारण भी हमारा इधर-उधर फैलना आवश्यक है।'&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
इस प्रकार पूर्व निश्चय के अनुसार [[उग्रसेन]], कृष्ण, बलराम आदि के नेतृत्व में यादवों ने बहुत बड़ी संख्या में मथुरा से प्रयाण किया और [[सौराष्ट्र]] की नगरी द्वारावती में जाकर बस गये।&amp;lt;ref&amp;gt;[[महाभारत]] में यादवों के निष्क्रमण का समाचार श्रीकृष्ण के द्वारा युधिष्ठिर को इस प्रकार बताया गया है -&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
'वयं चैव महाराज जरासंधभयात्तदा।'&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
'मथुरां संपरित्यज्य गता द्वारवतीं पुरीम्।।' (महाभारत ,2, 13,65)&amp;lt;/ref&amp;gt; द्वारावती का जीर्णोद्वार किया गया और उससे बड़ी संख्या में नये मकानों का निर्माण हुआ।&amp;lt;ref&amp;gt; हरिवंश (अ0 113) में आया है कि शिल्पियों द्वारा प्राचीन नगरी का जीर्णोद्धार किया गया। विश्वकर्मा ने सुधर्मा सभा का निर्माण किया (अ0 116)। दे0 देवीभागवत (24, 31)-&lt;br /&gt;
'शिल्पिभि: कारयामास जीणोद्धारम।'&amp;lt;/ref&amp;gt; मथुरा के इतिहास में महाभिनिष्क्रमण की यह घटना बड़े महत्व की है। यद्यपि इसके पूर्व भी यह नगरी कम-से-कम दो बार ख़ाली की गई थी-पहली बार शत्रुध्न-विजय के उपरांत लवण के अनुयायिओं द्वारा और दूसरी बार कंस के अत्याचारों से ऊबे हुए यादवों द्वारा, पर जिस बड़े रूप में मथुरा इस तीसरे अवसर पर ख़ाली हुई वैसे वह पहले कभी नहीं हुई थी। इस निष्क्रमण के उपरांत मथुरा की आबादी बहुत कम रह गई होगी। कालयवन और जरासंध की सम्मिलित सेना ने नगरी को कितनी क्षति पहुँचाई, इसका सम्यक पता नहीं चलता। यह भी नहीं ज्ञात होता कि जरासंध ने अंतिम आक्रमण के फलस्वरूप मथुरा पर अपना अधिकार कर लेने के बाद शूरसेन जनपद के शासनार्थ अपनी ओर से किसी यादव को नियुक्त किया अथवा किसी अन्य को। परंतु जैसा कि महाभारत एवं पुराणों से पता चलता है, कुछ समय बाद ही श्री कृष्ण ने बड़ी युक्ति के साथ [[पांडव|पांडवों]] की सहायता से जरासंध का वध करा दिया। अत: मथुरा पर जरासंध का आधिपत्य अधिक काल तक न रह सका।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बलराम का पुन: ब्रज-आगमन==&lt;br /&gt;
संभवत: उक्त महाभिनिष्क्रमण के बाद कृष्ण फिर कभी ब्रज न लौट सके। द्वारका में जीवन की जटिल समस्याओं में फंस कर भी कृष्ण ब्रजभूमि, [[नंद]]-यशोदा तथा साथ में खेले गोप-गोपियों को भूले नही। उन्हें ब्रज की सुधि प्राय: आया करती थी। अत: बलराम को उन्होंने भेजा कि वे वहाँ जाकर लोगों को सांत्वना दें। बलराम ब्रज में दो मास तक रहे। इस समय का उपयोग भी उन्होंने अच्छे ढंग से किया। वे कृषि-विद्या में निपुण थे। उन्होंने अपने कौशल से वृन्दावन से दूर बहने वाली यमुना में इस प्रकार से बाँध बांधा कि वह वृन्दावन के पास से होकर बहने लगी।&amp;lt;ref&amp;gt; पुराणों में इस घटना को यह रूप दिया गया है कि बलराम अपने हल से यमुना को अपनी ओर खींच लिया (देखिए ब्रह्म पुराण 197,2, 198,19; विष्णु पुराण 24,8; 25,19 भागवत पुराण अ0 65) परंतु हरिवंश पुराण (103) में स्पष्ट कहा है कि यमुना पहले दूर बहती थी, उसे बलराम द्वारा वहाँ से निकट लाया गया, जिससे यमुना वृन्दावन के खेतों के पास से बहने लगी। कई पुराणों में बलराम द्वारा गोकुल में अत्यधिक वारुणी-सेवन का भी उल्लेख है और लिखा है कि यहाँ रेवती से उनका विवाह हुआ। परंतु अन्य प्रमाणों के आधार पर बलराम का रेवती से विवाह द्वारका में हुआ।&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==कृष्ण और पांडव==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Gita-Krishna-1.jpg|thumb|right|कृष्ण &amp;lt;br /&amp;gt;Krishna]]&lt;br /&gt;
द्वारका पहुँच कर कृष्ण ने वहाँ स्थायी रूप से निवास करने का विचार दृढ़ किया और आवश्यक व्यवस्था में लग गये। जब पंचाल के राजा [[द्रुपद]] द्वारा [[द्रौपदी]]-स्वयंवर तथा मध्य-भेद की बात चारों तरफ फैली तो कृष्ण भी उस स्वयंवर में गये। वहाँ उनकी बुआ के लड़के [[पांडव]] भी मौजूद थे। यही से पांडवों के साथ कृष्ण की घनिष्टता का आरंम्भ हुआ। पांडव [[अर्जुन]] ने मध्य भेद कर [[द्रौपदी]] को प्राप्त कर लिया और इस प्रकार अपनी धनुर्विद्या का कौशल अनेक देश के राजाओं के समक्ष प्रकट किया। इससे कृष्ण बहुत प्रसन्न हुए। अर्जुन के प्रति वे विशेष रूप से आकृष्ट हुए। वे पांडवों के साथ [[हस्तिनापुर]] लौटे। कुरुराज [[धृतराष्ट्र]] ने पांडवों को [[इन्द्रप्रस्थ]] के आस-पास का प्रदेश दिया था। पांडवों ने कृष्ण के [[द्वारका]]-संबंधी अनुभव का लाभ उठाया। उनकी सहायता से उन्होंने जंगल के एक भाग को साफ करा कर [[इन्द्रप्रस्थ]] नगर को अच्छें ढंग से बसाया। इसक बाद कृष्ण द्वारका लौट गये। कृष्ण के द्वारका लौटने के कुछ समय बाद अर्जुन तीर्थयात्रा के लिए निकले। अनेक स्थानों में होते हुए वे [[प्रभास]] क्षेत्र पहुँचें। कृष्ण ने जब यह सुना तब वे प्रभास जाकर अपने प्रिय सखा अर्जुन को अपने साथ द्वारिका ले आये। यहाँ अर्जुन का बढ़ा स्वागत हुआ। उन दिनों रैवतक पर्वत पर यादवों का मेला लगता था। इस मेलें में अर्जुन भी कृष्ण के साथ गये। उन्होंने यहाँ [[सुभद्रा]] को देखा और उस पर मोहित हो गये। कृष्ण ने कहा-सुभद्रा मेरी बहिन है, पर यदि तुम उससे विवाह करना चाहते हो तो उसे यहाँ से हर कर ले जा सकते हो, क्यों कि वीर क्षत्रियों के द्वारा विवाह हेतु स्त्री का हरण निंद्य नहीं, बल्कि श्रेष्ठ माना जाता है।&amp;lt;ref&amp;gt;'प्रसह्म हरणं चापि क्षत्रियाणां प्रशस्यते।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
विवाहहेतु: शूराणमिति धर्मविदो बिदु: ।।' (महाभारत, [[आदि पर्व महाभारत]] 219,22)&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अर्जुन सुभद्रा को भगा ले चले। जब इसकी ख़बर यादवों को लगी तो उनमें बड़ी हलचल मच गई। सभापाल ने सूचना देकर सब गण-मुख्यों को सुधर्मा-भवन में बुलाया, जहाँ इस विषय पर बड़ा वाद-विवाद हुआ। बलराम अर्जुन के इस व्यवहार से अत्यन्त क्रुद्ध हो गये थे और उन्होंने प्रण किया कि वे इस अपमान का बदला अवश्य लेंगें। कृष्ण ने बड़ी कुशलता के साथ अर्जुन के कार्य का समर्थन किया। श्रीमान् कृष्ण ने निर्भीक होकर कहा कि अर्जुन ने क्षत्रियोचित कार्य ही किया है।&amp;lt;ref&amp;gt;उनका स्वयं का दृष्टान्त भी सामने था, क्योंकि वे विदर्भ-कन्या रुक्मिणी को भगा लाये थे और फिर उसके साथ विवाह किया था।&amp;lt;/ref&amp;gt; कृष्ण के अकाट्य तर्कों के आगे किसी की न चली। उन्होंने सबको समझा-बुझाकर शांत किया। फिर वे बलराम तथा कुछ अन्य अंधक-वृष्णियों के साथ बड़ी धूमधाम से दहेज का सामान लेकर पांडवों के पास इंन्द्रप्रस्थ पहुँचे। अन्य लोग तो शीघ्र इन्द्रप्रस्थ से द्वारका लौट आये, किंतु कृष्ण कुछ समय वहाँ ठहर गये। इस बार पांडवों के राज्य के अंतर्गत [[खांडव वन]] नामक स्थान में भयंकर अग्निकांड हो गया, किंतु कृष्ण और अर्जुन के प्रयत्नों से अग्नि बुझा दी गई और वहाँ के निवासी मय तथा अन्य दानवों की रक्षा की जा सकी।&amp;lt;ref&amp;gt;ये दानव संभवत: इस भूभाग के आदिम निवासी थे। पुराणों तथा महाभारत से पता चलता है कि मय दानव वास्तु-कला में बहुत कुशल था और उसने पांडवों के लिए अनेक महल आदि बनाये। शायद इसी ने कृष्ण तथा पांडवों को अद्भुत शस्त्रास्त्र भी प्रदान किये । [[ॠग्वेद]] में असुरों के दृढ़ और विशाल किलों, महलों और हथियारों के उल्लेख मिलते हैं। खांडव-वन में मय असुर तथा उसके कुछ काल पहले मधुवन में मधु तथा लवण असुर का होना एक महत्वपूर्ण बात है।&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==पांडवों का राजसूय यज्ञ और जरासंध का वध==&lt;br /&gt;
कुछ समय बाद युधिष्ठिर ने राजसूय यज्ञ की तैयारियाँ आरंभ कर दी। और आवश्यक परामर्श के लिए कृष्णा को बुलाया। कृष्ण इन्द्रप्रस्थ आये और उन्होंने [[राजसूय यज्ञ]] के विचार की पुष्टि की। उन्होंने यह सुझाव दिया कि पहले अत्याचारी शासकों को नष्ट कर दिया जाय और उसके बाद यज्ञ का आयोजन किया जाय। कृष्ण ने युधिष्ठिर को सबसे पहले जरासंध पर चढ़ाई करने की मन्त्रणा दी। तद्नुसार [[भीम]] और अर्जुन के साथ कृष्ण रवाना हुए और कुछ समय बाद मगध की राजधानी गिरिब्रज पहुँच गये। कृष्ण की नीति सफल हुई और उन्होंने भीम के द्वारा मल्लयुद्ध में जरासंध को मरवा डाला। जरासंध की मृत्यु के बाद कृष्ण ने उसके पुत्र [[सहदेव]] को मगध का राजा बनाया।&amp;lt;ref&amp;gt; कृष्ण और पांडवों के पूर्व से लौटने के बाद सहदेव के कई प्रतिद्वंदी खड़े हो गये, जिन्होंने मगध साम्राज्य के पूर्वी भाग पर अधिकार कर लिया। कुरुराज दुर्योधन ने कुछ समय बाद [[कर्ण]] को [[अंग]] देश का शासक बनाया, जिसने बंग और पुंड्र राज्यों को भी अपने अधिकार में कर लिया। इस प्रकार दुर्योधन को पूर्व में एक शक्तिशाली सहायक प्राप्त हो गया।&amp;lt;/ref&amp;gt; फिर उन्होंने गिरिब्रज के कारागार में बन्द बहुत से राजाओं को मुक्त किया। इस प्रकार कृष्ण ने जरासंध-जैसे महापराक्रमी और क्रूर शासक का अन्त कर बड़ा यश पाया। जरासंध के पश्चात पांडवों ने भारत के अन्य कितने ही राजाओं को जीता।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अब पांडवों का राजसूय यज्ञ बड़ी धूमधाम से आरम्भ हुआ। कृष्ण ने यज्ञ में आये हुए ब्राह्मणों के पैर आदर-भाव से धोये। ब्रह्मचारी [[भीष्म]] ने कृष्ण की प्रशंसा की तथा उनकी `अग्रपूजा` करने का प्रस्ताव किया। सहदेव ने सर्वप्रथम कृष्णको अर्ध्यदान दिया। चेदि-नरेश शिशुपाल कृष्ण के इस सम्मान को सहन न कर सका और उलटी-सीधी बातें करने लगा। उसने युधिष्ठिर से कहा कि 'कृष्ण न तो ऋत्विक् है, न राजा और न आचार्य। केवल चापलूसी के कारण तुमने उसकी पूजा की है।'&amp;lt;ref&amp;gt;नैव ऋत्विङ् न चाचार्यो न राजा मधुसूदन: ।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
चर्चितश्य कुरुश्रेष्ठ किमन्यत्प्रियकाम्यया ।। (महाभारत 2,37,17)&amp;lt;/ref&amp;gt; शिशुपाल दो कारणों से कृष्ण से विशेष द्वेष मानता था-प्रथम तो विदर्भ कन्या रुक्मिणी के कारण, जिसको कृष्ण हर लाये थे और शिशुपाल का मनोरथ अपूर्ण रह गया था। दूसरे जरासंध के वध के कारण, जो शिशुपाल का घनिष्ठ मित्र था। जब शिशुपाल यज्ञ में कृष्ण के अतिरिक्त भीष्म और पांडवों की भी निंदा करने लगा तब कृष्ण से न सहा गया और उन्होंने उसे मुख बंद करने की चेतावनी दी। किंतु वह चुप नहीं रह सका। कृष्ण ने अन्त में शिशुपाल को यज्ञ में ही समाप्त कर दिया। अब पांडवों का राजसूर्य यज्ञ पूरा हुआ। पर इस यज्ञ तथा पांडवों की बढ़ती को देख उनके प्रतिद्वंद्वी [[कौरव|कौरवों]] के मन में विद्वेश की अग्नि प्रज्वलित हो उठी और वे पांडवों को नीचा दिखाने का उपाय सोचने लगे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==युद्ध की पृष्ठ भूमि==&lt;br /&gt;
यज्ञ के समाप्त हो जाने पर कृष्ण युधिष्ठिर से आज्ञा ले द्वारका लौट गये। इसके कुछ समय उपरांत दुर्योधन ने अपने मामा [[शकुनि]] की सहायता से छल द्वारा जुए में पांडवों को हरा दिया और उन्हें इस शर्त पर तेरह वर्ष के लिए निर्वासित कर दिया कि अंतिम वर्ष उन्हें अज्ञातवास करना पड़ेगा। पांडव द्रौपदी के साथ [[काम्यकवन]] की ओर चले गये। उनके साथ सहानुभूति रखने वाले बहुत से लोग काम्यक वन में पहुँचे, जहाँ पांडव ठहरे थे। भोज, वृष्णि और अंधक-वंशी यादव तथा पंचाल-नरेश द्रुपद भी उनसे मिले। कृष्ण को जब यह सब ज्ञात हुआ तो वह शीघ्र पांडवों से मिलने आये। उनकी दशा देख तथा द्रौपदी की आक्रोशपूर्ण प्रार्थना सुन कृष्ण द्रवित हो उठे। उन्होंने द्रौपदी को वचन दिया कि वे पांडवों की सब प्रकार से सहायता करेगें और उनका राज्य वापस दिलावेंगे। इसके बाद कृष्ण सुभद्रा तथा उसके बच्चे [[अभिमन्यु]] को लेकर द्वारका वापस गये। पांडवों ने अज्ञातवास का एक साल राजा [[विराट]] के यहाँ व्यतीत किया। कौरवों ने विराट पर चढ़ाई कर उनके पशु छीन लिये थे, पर पांडवों की सहायता से विराट ने कौरवों पर विजय पाई और अपने पशुओं को लौटा लिया। विराट को अन्त में यह ज्ञात हुआ कि उनके यहाँ पांडव गुप्त रूप से अब तक निवास करते रहे थे। उन्होंने अपनी पुत्री [[उत्तरा]] का विवाह अर्जुन के पुत्र अभिमन्यु के साथ कर दिया। इस विवाह में अभिमन्यु के मामा कृष्ण बलदेव भी सम्मिलित हुए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इसके उपरांत [[विराट नगर]] में सभा हुई और उसमें विचार किया गया कि कौरवों से पांडवों का समझौता किस प्रकार कराया जाय। बलराम ने कहा कि शकुनि का इस झगड़े में कोई दोष नहीं था; युधिष्ठिर उसके साथ जुआ खेलने ही क्यों गये ? हाँ, यदि किसी प्रकार संधि हो जाय तो अच्छा है। सात्यकि और द्रुपद को बलराम की ये बाते अच्छी नहीं लगी। कृष्ण ने द्रुपद के कथन की पुष्टि करते हुए कहा कि कौरव अवश्य दोषी है। अतं में सर्व-सम्मति से यह तय हुआ कि संधि के लिए किसी योग्य व्यक्ति को दुर्योधन के पास भेजा जाय। द्रुपद ने अपने पुरोहित को इस काम के लिए भेजा। कृष्ण इस सभा में सम्मिलित होने के बाद द्वारका चले गये। संधि की बात तब न हो सकी। दुर्धोधन पांडवों को पाँच गाँव तक देने की राजी न हुआ। अब युद्ध अनिवार्य जानकर दुर्योधन और अर्जुन दोनों श्री कृष्ण ने सहायता प्राप्त करने के लिए द्वारका पहुँचे। नीतिज्ञ कृष्ण ने पहले दुर्योधन ने पूछा कि तुम मुझे लोगे या मेरी सेना को ? दुर्योधन ने तत्त्काल सेना मांगी। कृष्ण ने अर्जुन को वचन दिया कि वह उसके सारथी बनेगें और स्वयं शस्त्र न ग्रहण करेगें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कृष्ण अर्जुन के साथ इन्द्रप्रस्थ आ गये। कृष्ण के आने पर पांडवों ने फिर एक सभा की और निश्चय किया कि एक बार संधि का और प्रयत्न किया जाय। युधिष्ठिर ने अपना मत प्रकट करने हुए कहा- हम पाँच भाइयों को अविस्थल, वृकस्थल, माकन्दी, वारणाबत और एक कोई अन्य गांव निर्वाह मात्र के लिए चाहिए। इतने पर ही हम मान जायेगें, अन्यथा युद्ध के लिए प्रस्तुत होना पड़ेगा। उनके इस कथन का समर्थन अन्य लोगों ने लिए प्रस्तुत होना पड़ेगा। उनके इस कथन का समर्थन अन्य लोगों ने भी किया। वह तय हुआ कि इस बार संधि का प्रस्ताव लेकर कृष्ण कौरवों के पास जाये। कृष्ण संधि कराने को बहुत इच्छुक थे। उन्होंने दुर्योधन की सभा में जाकर उसे समझाया और कहा कि केवल पाँच गाँव पांडवों को देकर झगड़ा समाप्त कर दिया जाय। परंतु अभिमानी दुर्योधन स्पष्ट कह दिया कि बिना युद्ध के वह पांडवों को सुई की नोंक के बराबर भी ज़मीन न देगा।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==महाभारत युद्ध==&lt;br /&gt;
इस प्रकार कृष्ण भी संधि कराने में असफल हुए। अब युद्ध अनिवार्य हो गया। दोनों पक्ष अपनी-अपनी सेनाएँ तैयार करने लगे। इस भंयकर युद्धग्नि में इच्छा या अनिच्छा से आहुति देने को प्राय: सारे भारत के शासक शामिल हुए। पांडवों की ओर मध्स्य, [[पंचाल]], [[चेदि]], कारूश, पश्चिमी मगध, [[काशी]] और कंशल के राजा हुए। सौराष्ट्र-[[गुजरात]] के वृष्णि यादव भी पांडवो के पक्ष में रहे। कृष्ण, युयंधान और सात्यकि इन यादवों के प्रमुख नेता थे। ब्रजराम अद्यपि कौरवों के पक्षपाती थे, तो भी उन्होंने कौरव-पांडव युद्ध में भाग लेना उचित न समझा और वे तीर्थ-पर्यटन के लिए चले गये। कौरवों की और शूरसेन प्रदेश के यादव तथा महिष्मती, [[अवंति]], [[विदर्भ]] और निषद देश के यादव हुए। इनके अतिरिक्त पूर्व में बंगाल, आसाम, उड़ीसा तथा उत्तर-पश्चिम एवं पश्चिम भारत के बारे राजा और [[वत्स]] देश के शासक कौरवों की ओर रहे। इस प्रकार मध्यदेश का अधिकांश, गुजरात और सौराष्ट्र का बड़ा भाग पांडवों की ओर था और प्राय: सारा पूर्व, उत्तर-पश्चिम और पश्चिमी विंध्य कौरवों की तरफ। पांडवों की कुल सेना सात अक्षौहिणी तथा कौरवों की ग्यारह अक्षौहिणी थी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दोनों ओर की सेनाएं युद्ध के लिए तैयार हुई। कृष्ण, धृष्टद्युम्न तथा सात्वकि ने पांडव-सैन्य की ब्यूह-रचना की। कुरुक्षेत्र के प्रसिद्ध मैदान में दोनों सेनाएं एक-दूसरे के सामने आ डटीं। अर्जुन के सारथी कृष्ण थे। युद्धस्थल में अपने परिजनों आदि को देखकर अर्जुन के चित्त में विषाद उत्पन्न हुआ और उसने युद्ध करने से इंकार कर दिया। तब श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता के निष्काम कर्मयोग का उपदेश दिया और उसकी भ्रांति दूर की। अब अर्जुन के युद्ध के लिए पूर्णतया प्रस्तुत हो गया। अठारह दिन तक यह महाभीषण संग्राम होता रहा। देश का अपार जन-धन इसमें स्वाहा हो गया। कौरवों के शक्तिशाली सेनापति [[भीष्म]], [[द्रोण]], कर्ण, [[शल्य]] आदि धराशायी हो गये। अठारहवें दिन दुर्योधन मारा गया और महाभारत युद्ध की समाप्ति हुई। यद्यपि पांडव इस युद्ध में विजयी हुए, पर उन्हें शांति न मिल सकी। चारों और उन्हें क्षोभ और निराशा दिखाई पड़ने लगी। श्रीकृष्ण ने शरशय्या पर लेटे हुए भीष्मपितामह से युधिष्ठर को उपदेश दिलवाया। फिर हस्तिनापुर में राज्याभिषेक-उत्सव सम्पन्न करा कर वे द्वारका लौट गये। पांडवों ने कुछ समय बाद एक [[अश्वमेध यज्ञ]] किया और इस प्रकार वे भारत के चक्रवर्ती सम्राट् घोषित हुए। कृष्ण भी इस यज्ञ में सम्मिलित हुए और फिर द्वारका वापस चले गये। यह कृष्ण की अंतिम हस्तिनापुर यात्रा थी। अब वे वृद्ध हो चुके थे। महाभारत-संग्राम में उन्हें जो अनवरत परिश्रम करना पड़ा उसका भी उनके स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ना स्वाभाविक था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==श्रीकृष्ण का द्वारका का जीवन==&lt;br /&gt;
द्वारका के विषय में ऊपर लिखा जा चुका है कि यह नगर बिलकुल नवीन नहीं था। वैवस्वत मनु के एक पुत्र [[शर्याति]] को शासन में पश्चिमी भारत का भाग मिला था। शर्याति के पुत्र आनर्त के नाम पर कठियावाड़ और समीप के कुछ प्रदेश का नाम आनंत प्रसिद्ध हुआ। उसकी राजधानी कुशस्थली के ध्वंसावशेषों पर कृष्ण कालीन द्वारका की स्थापना हुई।&amp;lt;ref&amp;gt; यह स्थान आजकल 'मूल द्वारका' के नाम से ज्ञात है और प्रभास-पट्टन के पूर्व कोडीनार के समीप स्थित है। औखामंडल वाली द्वारका बाद में बसाई हुई प्रतीत होती है। सौराष्ट्र में एक तीसरी द्वारका [[पोरबंदर]] के पास है।&amp;lt;/ref&amp;gt; यहाँ आकर कृष्ण ने उग्रसेन को वृष्णिगण का प्रमुख बनाया। द्वारका में कृष्ण के वैयक्तिक जीवन की पहली मुख्य घटना थी-कुंडिनपुर&amp;lt;ref&amp;gt; यह कुंडिननुर विदर्भ देश (बरार) में था। एक जनश्रुति के अनुसार कुंडिनपुर उत्तरप्रदेश के एटा ज़िले में वर्तमान नोहखेड़ा के पास था। किंवदंती है कि कृष्ण यहीं से रुक्मिणी को ले गये थे। नोहखेड़ा में आज भी रुक्मिणी की मढ़िया बनी है, जहाँ लगभग आठवीं शती की एक अत्यंत कलापूर्ण पाषाण-मूर्ति रुक्मिणी के नाम से पूजी जाती है। खेड़े से अन्य प्राचीन कलावशेष प्राप्त हुए हैं। यह स्थान एटा नगर से क़रीब 20 मील दक्षिण जलेसर तहसील में है।&amp;lt;/ref&amp;gt; की सुंदरी राजकुमारी रुक्मिणी के साथ विवाह। हरिवंश पुराण में यह कथा विस्तार से दी हुई है। रुक्मिणी का भाई [[रूक्मी]] था। वह अपनी बहन का विवाह चेदिराज शिशुपाल से करना चाहता था। मगधराज जरासंध भी यही चाहता था। किंतु कुंडिनपुर का राजा कृष्ण को ही अपनी कन्या देना चाहता था। रुक्मिणी स्वयं भी कृष्ण को वरना चाहती थी। उनके सौंदर्य और शौर्य की प्रशंसा सुन रखी थी। रुक्मिणी का स्वयंवर रचा गया और वहाँ से कृष्ण उसे हर ले गये। जिन लोगों ने उनका विरोध किया वे पराजित हुए। इस घटना से शिशुपाल कृष्ण के प्रति गहरा द्वेष मानने लगा।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हरिवंश के अनुसार बलराम का विवाह भी द्वारका जाकर हुआ।&amp;lt;ref&amp;gt; हरि0, अ0 116। बलराम का विवाह आनर्त-वंशी यादव रेवत की पुत्री रेवती से हुआ।&amp;lt;/ref&amp;gt; संभवत: पहले बलराम का विवाह हुआ, फिर कृष्ण का। बाद के पुराणों में बलराम और रेवती की विचित्र कथा मिलती है। कृष्ण की अन्य पत्नियाँ-रुक्मिणी के अतिरिक्त कृष्ण की सात अन्य पत्नियाँ होने का उल्लेख प्राय: सभी पुराणों में मिलता है।&amp;lt;ref&amp;gt; [[भागवत पुराण]] (56-57), [[वायु पुराण]] (96, 20-98), [[पद्म पुराण]] (276, 1-37), [[ब्रह्म वैवर्त पुराण]] (122), [[ब्रह्माण्ड पुराण]] (201, 15), [[हरिवंश पुराण]] (118) आदि । पुराणों में नरकासुर का श्रीकृष्ण के द्वारा वध तथा उसके द्वारा बंदी सोलह हज़ार स्त्रियों के छुड़ाने का भी वर्णन मिलता है और कहा गया है कि कृष्ण ने इन सबसे विवाह कर लिया।&amp;lt;/ref&amp;gt;  इनके नाम [[सत्यभामा]], [[जांबवती]], कालिंदी, मित्रविंदा, सत्या, भद्रा और लक्ष्मण दिये हैं। इनमें से कोई को तो उनके माता-पिता ने विवाह में प्रदान किया और शेष को कृष्ण विजय में प्राप्त कर लाये। सतांन-पुराणों से ज्ञात होता है कि कृष्ण के संतानों की संख्या बड़ी थी ।&amp;lt;ref&amp;gt; दे0 भागवत पुराण 61, 1-19; हरिवंश पुराण118 तथा 162; ब्रह्मवैवर्त पुराण 112, 36-41 आदि।&amp;lt;/ref&amp;gt; [[रुक्मिणी]] से दस पुत्र और एक कन्या थी इनमें सबसे बड़ा [[प्रद्युम्न]] था। भागवतादि पुराणों में कृष्ण के गृहस्थ-जीवन तथा उनकी दैनिक चर्या का हाल विस्तार से मिलता है। प्रद्युम्न के पुत्र [[अनिरुद्ध]] का विवाह शोणितपुर&amp;lt;ref&amp;gt; यह शोणितपुर कहाँ था, इस संबंध में विद्वानों के विभिन्न मत हैं। कुछ लोग इसे गढ़वाल ज़िले में रुद्रप्रयाग के उत्तर ऊषीमठ के समीप मानते हैं। कुमायूँ पहाड़ी का कोटलगढ़ आगरा के समीप बयाना, नर्मदा पर स्थित तेवर (प्राचीन त्रिपुरी) तथा आसाम के तेजपुर को भी विभिन्न मतों के अनुसार शोणितपुर माना जाता है। श्री अमृतवसंत पंड्या का मत है कि शोणितपुर असीरिया में था और श्रीकृष्ण ने असीरिया पर आक्रमण कर बाणासुर (असुरबानी पाल प्रथम) को परास्त किया (ब्रजभारती, फाल्गुन, सं0 2009, पृ0 25-31)। &amp;lt;/ref&amp;gt; के राजा वाणासुर की पुत्री ऊषा के साथ हुआ।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==यादवों का अंत==&lt;br /&gt;
अंधक-वृष्णि यादव बड़ी संख्या में महाभारत युद्ध में काम आये। जो शेष बचे वे आपस में मिल-जुल कर अधिक समय तक न रह सके। श्रीकृष्ण-बलराम अब काफ़ी वृद्ध हो चुके थे और संभवत: यादवों के ऊपर उनका प्रभाव भी कम हो गया था। पौराणिक विवरणों से पता चलता है कि यादवों में विकास की वृद्धि हो चली थी और ये मदिरा-पान अधिक करने लगे थे। कृष्ण-बलराम के समझाने पर भी ऐश्वर्य से मत्त यादव न माने और वे कई दलों में विभक्त हो गये। एक दिन प्रभास के मेले में, जब यादव लोग वारुणी के नशें में चूर थे, वे आपस में लड़ने लगे। वह झगड़ा इतना बढ़ गया कि अंत में वे सामूहिक रूप से कट मरे। इस प्रकार यादवों ने गृह-युद्ध अपना अन्त कर लिया।&amp;lt;ref&amp;gt; विभिन्न पुराणों में इस गृह-युद्ध का वर्णन मिलता है और कहा गया है कि ऋषियों के शाप के कारण कृष्ण-पुत्र सांब के पेट से एक मुशल उत्पन्न हुआ, जिससे यादव-वंश का नाश हो गया। दे0 महाभारत, मुशल पर्व; ब्रह्म पुर0 210-12; विष्णु0 37-38; भाग0 ग्यारहवां स्कंध अ0 1,6,30,31; लिंग पु0 69,83-94 आदि &amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==अंतिम समय==&lt;br /&gt;
प्रभास के यादवयुद्ध में चार प्रमुख व्यक्तियों ने भाग नहीं लिया, जिससे वे बच गये। ये थे-कृष्ण, बलराम, दारुक सारथी और बभ्रु। बलराम दु:खी होकर समुद्र की ओर चले गये और वहाँ से फिर उनका पता नहीं चला। कृष्ण बड़े मर्माहत हुए। वे द्वारका गये और दारुक को अर्जुन के पास भेजा कि वह आकर स्त्री-बच्चों को हस्तिनापुर लिवा ले जायें। कुछ स्त्रियों ने जल कर प्राण दे दिये। अर्जुन आये और शेष स्त्री-बच्चों को लिवा कर चले।&amp;lt;ref&amp;gt; संभवत: इस अवसर पर अर्जुन की कृष्ण से भेंट न हो सकी। कृष्ण पहले ही द्वारका छोड़ गये होंगे। महाभारत (16,7) में श्रीकृष्ण के पिता वसुदेव से अर्जुन के मिलने का उल्लेख है, जिससे पता चलता है कि वसुदेव इस समय तक जीवित थे। इसके बाद वसुदेव की मृत्यु तथा उनके साथ चार विधवा पत्नियों के चितारोहण का कथन मिलता है।&amp;lt;/ref&amp;gt;  कहते है मार्ग में पश्चिमी राजपूताना के जंगली आभीरों से अर्जुन को मुक़ाबला करना पड़ा। कुछ स्त्रियों को आभीरों ने लूट लिया।&amp;lt;ref&amp;gt; महाभारत 16,8,60; ब्रह्म0 212,26।&amp;lt;/ref&amp;gt; शेष को अर्जुन ने शाल्ब देश और कुरु देश में बसा दिया। कृष्ण शोकाकुल होकर घने वन में चले गये थे। वे चिंतित हो लेटे हुए थे कि जरा नामक एक बहेलियें ने हरिण के भ्रम से तीर मारा। वह वाण श्रीकृष्ण के पैर में लगा, जिससे शीघ्र ही उन्होंने इस संसार को छोड़ दिया। मृत्यु के समय वे संभवत: 100वर्ष से कुछ ऊपर थे। कृष्ण के देहांत के बाद द्वापर का अंत और कलियुग का आरंभ हुआ। श्रीकृष्ण के अंत का इतिहास वास्तव में यादव गण-तंत्र के अंत का इतिहास है। कृष्ण के बाद उनके प्रपौत्र बज्र यदुवंश के उत्तराधिकारी हुए। पुराणों के अनुसार वे मथुरा आये और इस नगर को उन्होंने अपना केन्द्र बनाया। कही-कहीं उन्हें इन्द्रप्रस्थ का शासक कहा गया है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==अंधक-वृष्णि संघ==&lt;br /&gt;
यादवों के अंधक-वृष्णि संघ का उल्लेख ऊपर किया जा चुका है। इस संघ की कार्य-प्रणाली गणतंत्रात्मक थी और बहुत समय तक वह अच्छे ढंग से चलती रही। प्राचीन साहित्यिक उल्लेखों से पता चलता है कि अंधक-वृष्णि-संघ काफ़ी प्रसिद्धि प्राप्त कर चुका था। इसका मुख्य कारण यही था कि संघ के द्वारा गणराज्य के सिद़्धांतों का सम्यक् रूप से पालन होता था; चुने हुए नेताओं पर विश्वास किया जाता था। ऐसा प्रतीत होता है कि कालांतर में अंधकों और वृष्णियों की अलग-अलग मान्यताएँ हो गई और उनमें कई दल हो गये। प्रत्येक दल अब अपना राजनैतिक प्रमुख स्थापित करने के लिए प्रयत्नशील रहने लगा। इनकी सभाओं में सदस्यों को जी भर कर आवश्यक विवाद करने की स्वतन्त्रता थी। एक दल दूसरे की आलोचना भी करता था। जिस प्रकार आजकल अच्छे से अच्छे सामाजिक कार्यकर्ताओं की भी बुराइयाँ होती है, उसी प्रकार उस समय भी ऐसे दलगत आक्षेप हुआ करते थे। महाभारत के शांति पर्व के 82 वें अध्याय में एक ऐसे वाद-विवाद का वर्णन है जो तत्कालीन प्रजातन्त्रात्मक प्रणाली का अच्छा चित्र उपस्थित करता है। यह वर्णन श्रीकृष्ण और [[नारद]] के बीच संवाद के रूप में है। उसका हिन्दी अनुवाद नीचे दिया जाता है ।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
====वसुदेव उवाच====&lt;br /&gt;
*देवर्षे! जो व्यक्ति सुहृद न हो, जो सुहृद तो हो किन्तु पण्डित न हो तथा जो सुहृद और पण्डित तो हो किन्तु अपने मन को वश में न कर सका हो- ये तीनों ही परम गोपनीय मन्त्रणा को सुनने या जानने के अधिकारी नहीं हैं।(3)&lt;br /&gt;
*स्वर्ग विचरनेवाले नारदजी! मैं आपके सौहार्द पर भरोसा रखकर आपसे कुछ निवेदन करूँगा। मनुष्य किसी व्यक्ति बुद्धि-बल की पूर्णता देखकर ही उससे कुछ पूछता या जिज्ञासा प्रकट करता है।(4)&lt;br /&gt;
*मैं अपनी प्रभुता प्रकाशित करके जाति-भाइयों, कुटुम्बी-जनों को अपना दास बनाना नहीं चहता। मुझे जो भोग प्राप्त होते हैं, उनका आधा भाग ही अपने उपभोग में लाता हूँ, शेष आधा भाग कुटुम्बीजनों के लिये ही छोड़ देता हूँ और उनकी कड़वी बातों को सुनकर भी क्षमा कर देता हूँ। (5)&lt;br /&gt;
*देवर्षे! जैसे अग्नि को प्रकट करने की इच्छा वाला पुरुष अरणीकाष्ठ का मन्थन करता है, उसी प्रकार इन कुटुम्बी-जनों का कटुवचन मेरे ह्रदय को सदा मथता और जलाता रहता है।(6)&lt;br /&gt;
*नारद जी! बड़े भाई बलराम में सदा ही असीम बल है; वे उसी में मस्त रहते हैं। छोटे भाई गद में अत्यन्त सुकुमारता है (अत: वह परिश्रम से दूर भागता है); रह गया बेटा प्रद्युम्न, सो वह अपने रूप-सौन्दर्य के अभिमान से ही मतवाला बना रहता है। इस प्रकार इन सहायकों के होते हुए भी मैं असहाय हूँ।(7)&lt;br /&gt;
*नारद जी! अन्धक तथा वृष्णि वंश में और भी बहुत से वीर पुरुष हैं, जो महान सौभाग्यशाली, बलवान एवं दु:सह पराक्रमी हैं, वे सब के सब सदा उद्योगशील बने रहते हैं।(8) &lt;br /&gt;
*ये वीर जिसके पक्ष में न हों, उसका जीवित रहना असम्भव है और जिसके पक्ष में ये चले जाएँ, वह सारा का सारा समुदाय ही विजयी हो जाए। परन्तु आहुक और अक्रूर ने आपस में वैमनस्य रखकर  मुझे इस तरह अवरुद्ध कर दिया है कि मैं इनमें किसी एक का पक्ष नहीं ले सकता।(9)&lt;br /&gt;
*आपस में लड़ने वाले आहुक और अक्रूर दोनों ही जिसके स्वजन हों, उसके लिये इससे बढ़कर दु:ख की बात और क्या होगी? और वे दोनों ही जिसके सुहृद् न हों, उसके लिये भी इससे बढ़कर और दु:ख क्या हो सकता है? (क्योंकि ऐसे मित्रों का न रहना भी महान् दु:खदायी होता है)(10)&lt;br /&gt;
*महामते! जैसे दो जुआरियों की एक ही माता एक की जीत चाहती है तो दूसरे की भी पराजय नहीं चाहती, उसी प्रकार मैं भी इन दोनों सुहृदों में से एक की विजय कामना करता हूँ तो दूसरे की पराजय नहीं चाहता। (11)&lt;br /&gt;
*नारद जी! इस प्रकार मैं सदा उभय पक्ष  का हित चाहने के कारण दोनों ओर से कष्ट पाता रहता हूँ। ऐसी दशा में मेरा अपना तथा इन जाति-भाइयों का भी जिस प्रकार भला हो, वह उपाय आप बताने की कृपा करें। (12)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
====नारद उवाच====&lt;br /&gt;
*नारद जी ने कहा- वृष्णिनन्दन श्रीकृष्ण! आपत्तियाँ दो प्रकार  की होती हैं- एक ब्रह्म और दूसरी आभ्यन्तर। वे दोनों ही स्वकृत&amp;lt;ref&amp;gt;जो आपत्तियाँ स्वत: अपना ही करतूतों से आती हैं, उन्हें स्वकृत कहते हैं।&amp;lt;/ref&amp;gt; और परकृत&amp;lt;ref&amp;gt;जिन्हें लाने में दूसरे लोग निमित्त बनते हैं, वे विपत्तियाँ परकृत कहलाती है।&amp;lt;/ref&amp;gt; भेद से दो-दो प्रकार की होती हैं। (13)&lt;br /&gt;
*अक्रूर और आहुक से उत्पन्न हुई यह कष्टदायिनी आपत्ति जो आप को प्राप्त हुई है, आभ्यन्तर है और अपनी ही करतूतों से प्रकट हूई है। ये सभी जिनके नाम आपने गिनाये हैं, आपके ही वंश हैं। (14)&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
*आपने स्वयं जिस ऐश्वर्य को प्राप्त किया था, उसे किसी प्रयोजन वश या स्वेच्छा से अथवा कटुवचन से डरकर दूसरे को दे दिया। (15)&lt;br /&gt;
*सहायशाली श्री कृष्ण! इस समय उग्रसेन को दिया हुआ वह ऐश्वर्य दृढ़मूल हो चुका है। उग्रसेन के साथ जाति के लोग भी सहायक हैं; अत: उगले हुए अन्न की भाँति आप उस दिये हुए ऐश्वर्य को वापस नहीं ले सकते। (16)&lt;br /&gt;
*श्री कृष्ण! अक्रूर और उग्रसेन के अधिकार में गए हुए राज्य को भाई-बन्धुओं में फूट पड़ने के भय से अन्य की तो कौन कहे इतने शक्तिशाली होकर स्वयं भी आप किसी तरह वापस नहीं ले सकते। (17)&lt;br /&gt;
*बड़े प्रयत्न से अत्यन्त दुष्कर कर्म महान् संहाररूप युद्ध करने पर राज्य को वापस लेने का कार्य सिद्ध हो सकता है, परन्तु इसमें धन का बहुत व्यय और असंख्य मनुष्यों का पुन: विनाश होगा। (18)&lt;br /&gt;
*अत: श्री कृष्ण! आप एक ऐसे कोमल शस्त्र से, जो लोहो का बना हुआ न होने पर भी हृदय को छेद डालने में समर्थ है , परिमार्जन&amp;lt;ref&amp;gt;क्षमा, सरलता और कोमलता के द्वारा दोषों को दूर करना 'परिमार्जन' कहलाता है।&amp;lt;/ref&amp;gt; और अनुमार्जन&amp;lt;ref&amp;gt;यथायोग्य सेवा-सत्कार के द्वारा हृदय में प्रीति उत्पन्न करना 'अनुमार्जन' कहा गया है।&amp;lt;/ref&amp;gt; करके उन सबकी जीभ उखाड़ लें- उन्हें मूक बना दें(जिससे फिर कलह का आरम्भ न हो) (19)&lt;br /&gt;
====वासुदेव उवाच==== &lt;br /&gt;
*भगवान श्री कृष्ण ने कहा- मुने! बिना लोहे के बने हुए उस कोमल शस्त्र को मैं कैसे जानूँ, जिसके द्वारा परिमार्जन और अनुमार्जन करके इन सबकी जिह्वा को उखाड़ लूँ।(20)&lt;br /&gt;
====नारद उवाच====&lt;br /&gt;
*नारद जी ने कहा- श्री कृष्ण! अपनी शक्ति के अनुसार सदा अन्नदान करना, सहनशीलता, सरलता, कोमलता तथा यथायोग्य पूजन (आदर-सत्कार) करना यही बीना लोहे का बना हुआ शस्त्र है। (21) &lt;br /&gt;
*जब सजातीय बन्धु आप के प्रति कड़वी तथा ओछी बातें कहना चाहें, उस समय आप मधुर वचन बोलकर उनके हृदय, वाणी तथा मन को शान्त कर दें। (22)&lt;br /&gt;
*जो महापुरुष नहीं है, जिसने अपने मन को वश में नहीं किया है तथा जो सहायकों से सत्पन्न नहीं है, वह कोई भारी भार नहीं उठा सकता। अत: आप ही इस गुरुतर भार को हृदय से उठाकर वहन करें। (23)&lt;br /&gt;
*समतल भूमिपर सभी बैल भारी भार वहन कर लेते हैं; परन्तु दुर्गम भूमि पर कठिनाई से वहन करने योग्य गुरुतर भार को अच्छे बैल ही ढोते हैं। (24)&lt;br /&gt;
*केशव! आप इस यादवसंघ के मुखिया हैं। यदि इसमें फूट हो गयी तो इस समूचे संघ का विनाश हो जाएगा; अत: आप ऐसा करें जिससे आप को पाकर इस संघ का- इस यादवगणतन्त्र राज्य का मूलोच्छेद न हो जाए। (25)&lt;br /&gt;
*बुद्धि, क्षमा और इन्द्रिय-निग्रह के बिना तथा धन-वैभव का त्याग किये बिना कोई गण अथवा संघ किसी बुद्धिमान पुरुष की आज्ञा के अधीन नहीं रहता है। (26)&lt;br /&gt;
*श्री कृष्ण! सदा अपने पक्ष की ऐसी उन्नति होनी चाहिए जो धन, यश तथा आयु की वृद्धि करने वाली हो और कुटुम्बीजनों में से किसी का विनाश न हो। यह सब जैसे भी सम्भव हो, वैसा ही कीजिये। (27)&lt;br /&gt;
*प्रभु! संधि, विग्रह, यान, आसन, द्वैधीभाव और समाश्रय- इन छहों गुणों के यथासमय प्रयोग से तथा शत्रु पर चढ़ाई करने के लिए यात्रा करने पर वर्तमान या भविष्य में क्या परिणाम निकलेगा? यह सब आप से छिपा नहीं है।(28)&lt;br /&gt;
*महाबाहु माधव! कुकुर, भोज, अन्धक और वृष्णि वंश के सभी यादव आप में प्रेम रखते हैं। दूसरे लोग और लोकेश्वर भी आप में अनुराग रखते हैं। औरों की तो बात ही क्या है? बड़े-बड़े ॠषि-मुनि भी आपकी बुद्धि का आश्रय लेते हैं।(29)&lt;br /&gt;
*आप समस्त प्राणियों के गुरु हैं। भूत, वर्तमान और भविष्य को जानते हैं। आप जैसे यदुकुलतिलक महापुरुष का आश्रय लेकर ही समस्त यादव सुखपूर्वक अपनी उन्नति करते हैं।(30)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उक्त उद्धरण से ज्ञात होता है कि अंधक-वृष्णि संध में शास्त्र के अनुसार व्यवहार (न्याय) संपादित होता था। अंतर और वाह्म विभाग, अर्थ विभाग-ये सब नियमित रूप से शासित होते थे। गण-मुख्य का काम कार्यवाहक प्रण-प्रधान (राजन्य) देखता था। गण-मुख्यों-अक्रुर अंधक, आहुक आदि-की समाज में प्रतिष्ठा थी। अंधक-वृष्णियों का मन्त्रगण सुधर्मा नाम से विख्यात था। समय-समय पर परिषद् की बैठकें महत्वपूर्ण विषयों पर विचार करने के लिए हुआ करती थी। `सभापाल' परिषद् बुलाता था। प्रत्येक सदस्स्य को अपना मत निर्भीकता से सामने रखने का अधिकार था। जो अपने मत का सर्वोत्तम ढंग से समर्थन करता वह परिषद् को प्रभावित कर सकता था। गण-मुख्य अलग-अलग शाखाओं के नेता होते थे। राज्य के विभिन्न विभाग उनके निरीक्षण में कार्य करते थे। इन शाखाओं या जातीय संघों को अपनी-अपनी नीति के अनुसार कार्य करने की स्वतन्त्रता थी महाभारत में यादवों की कुछ शाखाएं इसी कारण पाडंवों की ओर से लड़ी और कुछ कौरवों की ओर से । इससे स्पष्ट है कि महाभारतयुद्ध के समझ जातीय-संघों का काफ़ी जोर हो गया था।&amp;lt;ref&amp;gt; विस्तार के लिए देखिये के. एम.मुंशी-ग्लोरी दैट वाज़ गुर्जर देश, पृ.130 तथा वासुदेवशरण अग्रवाल-इंडिया ऎज़ नोन टु पाणिनि(लखनऊ,1953),पृ.452।&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
==वीथिका==&lt;br /&gt;
&amp;lt;gallery widths=&amp;quot;145px&amp;quot; perrow=&amp;quot;4&amp;quot;&amp;gt;&lt;br /&gt;
चित्र:krishna-birth2.jpg|कृष्ण &amp;lt;br /&amp;gt;Krishna&lt;br /&gt;
चित्र:Vasudev-Krishna.jpg|कृष्ण &amp;lt;br /&amp;gt;Krishna&lt;br /&gt;
चित्र:Radha-Krishna-Janmbhumi-Mathura-1.jpg|[[राधा]]-कृष्ण, [[कृष्ण जन्मभूमि]], [[मथुरा]]&amp;lt;br /&amp;gt; Radha - Krishna, Krishna's Birth Place, Mathura&lt;br /&gt;
चित्र:makhanchor.jpg|कृष्ण &amp;lt;br /&amp;gt;Krishna&lt;br /&gt;
चित्र:cheer-haran.jpg|कृष्ण &amp;lt;br /&amp;gt;Krishna&lt;br /&gt;
चित्र:Radha-Krishna-1.jpg|[[राधा]]-कृष्ण&amp;lt;br /&amp;gt;Radha-Krishna&lt;br /&gt;
चित्र:krishna-arjun1.jpg|कृष्ण-[[अर्जुन]]&amp;lt;br /&amp;gt; Krishna-Arjuna&lt;br /&gt;
&amp;lt;/gallery&amp;gt;&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==सम्बंधित लिंक==&lt;br /&gt;
{{महाभारत}}&lt;br /&gt;
{{दशावतार2}}&lt;br /&gt;
{{कृष्ण}}&lt;br /&gt;
{{कृष्ण2}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:पौराणिक कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:हिन्दू भगवान अवतार]]&lt;br /&gt;
[[Category:हिन्दू देवी-देवता]]&lt;br /&gt;
[[Category:प्रसिद्ध चरित्र और मिथक कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:महाभारत]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Gaurav</name></author>
	</entry>
	<entry>
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		<title>गोवा</title>
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		<updated>2010-07-01T06:16:39Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Gaurav: /* ज़िले */&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा राज्य&lt;br /&gt;
|Image=Goa-Map-1.jpg&lt;br /&gt;
|राजधानी=पणजी&lt;br /&gt;
|जनसंख्या=1347668&lt;br /&gt;
|जनसंख्या घनत्व=363&lt;br /&gt;
|क्षेत्रफल=3,702sqkm&lt;br /&gt;
|भौगोलिक निर्देशांक=15.493°N 73.818°E&lt;br /&gt;
|ज़िले=2&lt;br /&gt;
|सबसे बड़ा नगर=पणजी&lt;br /&gt;
|महानगर=वास्कोडिगामा&lt;br /&gt;
|राजभाषा(एँ)=कोंकणी तथा मराठी&lt;br /&gt;
|स्थापना=1987/05/03&lt;br /&gt;
|मुख्य पर्यटन स्थल=कोलावा,कालनगुटे, वागाटोर, बागा, हरमल, अंजुना&lt;br /&gt;
|लिंग अनुपात=1000:960&lt;br /&gt;
|साक्षरता=82.32&lt;br /&gt;
|स्त्री=88.88&lt;br /&gt;
|पुरुष=75.51&lt;br /&gt;
|ग्रीष्म=35 °C&lt;br /&gt;
|शरद=20 °C&lt;br /&gt;
|राज्यपाल=शिविंदर सिंह सिद्धु&lt;br /&gt;
|मुख्यमंत्री=दिगंबर कामथ&lt;br /&gt;
|विधान सभा सदस्य संख्या=40&lt;br /&gt;
|राज्यसभा सदस्य=1&lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=[http://goagovt.nic.in/welcome.htm अधिकारिक वेबसाइट]&lt;br /&gt;
|अद्यतन=2010/04/04&lt;br /&gt;
|emblem=Goa Logo.png&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
[[State::गोवा]] &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गोवा क्षेत्रफल में भारत का सबसे छोटा और जनसंख्या के हिसाब से दूसरा सबसे छोटा राज्य है। पूरी दुनिया में गोवा अपने ख़ूबसूरत समुंद्र के किनारों और मशहूर स्थापत्य कला के लिये जाना जाता है। गोवा पहले पुर्तग़ाल का एक उपनिवेश था। पुर्तग़ालियों ने गोवा पर लगभग 450 साल तक शासन किया और दिसंबर 1961  में यह भारतीय प्रशासन को सौंपा दिया गया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
महाभारत में गोवा का उल्लेख 'गोपराष्ट्र' अर्थात 'गाय चराने वालों का देश' के रूप में मिलता है। दक्षिण कोंकण का उल्लेख गोवा राष्ट्र के रूप में मिलता है। [[संस्कृत]] के कुछ प्राचीन स्त्रोतों में गोवा को 'गोपकपुरी' और 'गोपकपट्टन' कहा गया है जिनका उल्लेख अन्य ग्रंथों के अलावा 'हरिवंशम्' और [[स्कन्द पुराण]] में प्राप्त होता है। गोवा को बाद में कहीं कहीं 'गोअंचल' भी कहा गया है। अन्य नामों में गोवे, गोवापुरी, गोप का पाटन, और गोमंत प्रमुख हैं। टॉलमी ने गोवा का उल्लेख ईस्वी सन 200 के लगभग 'गोउबा'  के रूप में किया है। अरब के मध्ययुगीन यात्रियों ने इसे 'चंद्रपुर' और 'चंदौर' का नाम दिया है जो मुख्य रूप से एक तटीय नगर था। जिस स्थान का नाम पुर्तग़ालियों ने गोवा रखा वह आज का छोटा सा समुद्र तटीय शहर 'गोअ-वेल्हा' है। कालान्तर में उस क्षेत्र को गोवा कहा जाने लगा जिस पर पुर्तग़ालियों ने कब्जा किया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जनश्रुति के अनुसार गोवा जिसमें कोंकण क्षेत्र भी है और जिसका विस्तार गुजरात से केरल तक माना जाता है, की रचना [[परशुराम]] ने की थी। कहावत है कि परशुराम ने एक यज्ञ के दौरान अपने बाणों की वर्षा से समुद्र को कई स्थानों पर पीछे धकेल दिया था। लोगों का कहना है कि इसी वजह से आज भी गोवा में बहुत से स्थानों का नाम वाणावली, वाणस्थली इत्यादि हैं। उत्तरी गोवा में हरमल के पास आज भी भूरे रंग के एक पर्वत को परशुराम के यज्ञ करने का स्थान माना जाता है।&lt;br /&gt;
==इतिहास और भूगोल==&lt;br /&gt;
गोवा प्राचीनकाल में गोमांचल,गोपकपट्टनम, गोपपुरी, और गोमांतक आदि कई नामों से विख्यात रहा है। इस प्रदेश की लंबी ऐतिहासिक परंपरा रही है। गोवा के प्रारंभिक इतिहास के संबंध में स्पष्ट जानकारी नहीं है। ईसा पूर्व पहली शताब्दी मे गोवा [[सातवाहन]] साम्राज्य का इस पर शासन रहा। 14वीं शताब्दी के अंत में यादवों का साम्राज्य समाप्त हुआ और [[दिल्ली]] के [[ख़िलजी वंश]] ने इस पर अपना अधिकार किया। इस प्रकार गोवा मुस्लिम शासकों के अधीन रहा। सन 1489 में [[वास्कोडिगामा]] द्वारा भारत के लिए समुद्री मार्ग की खोज के बाद पुर्तग़ाली यात्री भारत पहुंचे। सन 1510 में एल्फांसो द अलबुकर्क ने विजयनगर के सम्राट की सहायता से गोवा पर आक्रमण करके इस पर कब्जा कर लिया। सन 1542 में जेसुइट संत फ्रांसिस जेवियर के आगमन से गोवा में धर्म परिवर्तन आरंभ हुआ। 17 वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध के कुछ वर्षो को छोड़कर, जब शिवा जी ने गोवा और उसके आसपास के क्षेत्रों पर अधिकार कर लिया था, पूरे क्षेत्र पर पुर्तग़ालियों का शासन रहा। भारत के स्वतंत्र होने पर भी गोवा पुर्तग़ालियों के ही अधिकार में रहा। अंतत: 19 दिसंबर, 1961 को गोवा को मुक्त कर दिया गया और इसे [[दमन और दीव]] के साथ मिलाकर केंद्रशासित प्रदेश बनाया गया। 30 मई, 1987 को गोवा को पूर्ण राज्य को दर्जा मिला और दमन तथा दीव को अलग केंद्रशासित प्रदेश बना दिया गया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गोवा भारतीय प्रायद्वीप के पश्चिमी तट पर स्थित है। इसके उत्तर में तेरेखोल नदी बहती है जो गोवा को [[महाराष्ट्र]] से अलग करती है। इसके दक्षिण में [[कर्नाटक]] का उत्तर कन्नड़ ज़िला और पूर्व में पश्चिमी घाट और पश्चिम में अरब सागर है। पणजी, मड़गांव, वास्को, मापुसा, तथा पोंडा राज्य के प्रमुख शहर हैं।&lt;br /&gt;
==कृषि==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Dona-Paula-Beach-Goa.jpg|thumb|[[दोनापाउला बीच गोवा|दोनापाउला बीच]], गोवा&amp;lt;br /&amp;gt; Dona Paula Beach, Goa]]&lt;br /&gt;
यहाँ की मुख्य खाद्य फ़सल चावल हैं। इसके अतिरिक्त दालें, रागी और अन्य खाद्य फ़सलें भी उगाई जाती हैं। नारियल, काजू, सुपारी तथा गन्ने जैसी नकदी फ़सलों के साथ-साथ यहाँ अनन्नास, आम और केला भी होता है। राज्य में 1,424 वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में घने वन हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==सिचाई और बिजली==&lt;br /&gt;
राज्य में 'सेलाउलिम' और 'अंजुनेम' जैसे बांधों और अन्य लघु सिंचाई परियोजनाओं के होने से सिंचित क्षेत्र बढ़ता जा रहा है। इन परियोजनाओं से अब तक कुल 43,000 हेक्टेयर की सिंचाई क्षमता उपलब्ध हो सकी है। राज्य के सभी गांवों में बिजली पहुँचाई जा चुकी है और शत-प्रतिशत विद्युतीकरण का लक्ष्य प्राप्त किया जा चुका है।&lt;br /&gt;
==उद्योग तथा खनिज==&lt;br /&gt;
*राज्य में लघु उद्योगों की संख्या 7110 है। &lt;br /&gt;
*20 औद्योगिक परिसर हैं। राज्य के खनिज उत्पादों में फैरो मैंगनीज, बॉक्साइट, लौह-अयस्क आदि शामिल हैं और इनके निर्यात से राज्य की अर्थवस्था में महत्वपूर्ण योगदान मिलता है।&lt;br /&gt;
==परिवहन==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Immaculate-Conception-Church-Panjim-Goa.jpg|thumb|इम्मेकुलेट कंसेप्शन चर्च, [[पणजी]], गोवा&amp;lt;br /&amp;gt;Immaculate Conception Church, Panjim, Goa|left]]&lt;br /&gt;
*राज्य में राष्ट्रीय राजमार्गों की लंबाई 224 किलोमीटर तथा प्रांतीय राजमार्गों की लंबाई 232 किलोमीटर है। इसके अलावा 815 किलोमीटर ज़िला मार्ग हैं।&lt;br /&gt;
*गोवा कोंकण रेलवे के माध्यम से [[मुंबई]], [[मंगलोर]] और [[तिरुवनंतपुरम]] से जुड़ा है। इस रेलमार्ग पर अनेक तेज-रफ्तार रेलगाडियां शुरू की गई हैं। वास्कोडिगामा दक्षिण मध्य रेलवे के [[बैंगलौर]] और [[बेलगांव कर्नाटक|बेलगांव]] स्टेशनों से जुड़ा है। इस मार्ग का प्रयोग माल यातायात के लिए होता है।&lt;br /&gt;
*डबोलिम हवाई अड्डे से मुंबई, [[दिल्ली]], तिरुवनंतपुरम, [[कोच्चि]], [[चेन्नई]], अगाती और बैंगलौर के लिए नियमित विमान सेवाएं हैं।&lt;br /&gt;
*मरमुगांव राज्य का प्रमुख बंदरगाह है। यहाँ मालवाहक जहाजों के लिए सुविधाएं उपलब्ध है। इसके अलावा [[पणजी]], तिराकोल, चपोरा बेतूल और तालपोना में भी छोटे बंदरगाह हैं, मगर इनमें से पणजी प्रमुख व्यस्त बंदरगाह है।  यहाँ जहाजों के लिए एक पत्तन (पोर्ट) भी प्रारम्भ हो गया है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==पर्यटन स्थल==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Vagator-Beach-Goa-2.jpg|thumb|[[वेगेटर बीच गोवा|वेगेटर बीच]], गोवा&amp;lt;br /&amp;gt; Vagator Beach, Goa]]&lt;br /&gt;
*अंजुना बीच गोवा&lt;br /&gt;
*बेसिलिका ऑफ बॉम जीसस&lt;br /&gt;
*गोवा के महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल हैं- कोलावा,कालनगुटे, वागाटोर, बागा, हरमल, अंजुना और मीरामार समुद्र तट:, &lt;br /&gt;
*पुराने गोवा में बैसीलिका ऑफ बोम जीसस और से-केथेड्रल चर्च; &lt;br /&gt;
*कावलेम, मारडोल, मंगेशी तथा बनडोरा मंदिर; &lt;br /&gt;
*अगुडा तेरेखोल, चपोरा और काबो डि रामा किले; &lt;br /&gt;
*प्राकृतिक सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध दूधसागर और हरवालेम जलप्रपात तथा माएम झील हैं। &lt;br /&gt;
*राज्य में समृद्ध वन्यप्राणी उद्यान हैं, जैसे- बोंडला, कोटीगांव तथा मोलेम वन्यप्राणी उद्यान और चोराव में डा. सलीम अली पक्षी उद्यान, जिसका कुल क्षेत्रफल 354 वर्ग किलोमीटर है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==ज़िले==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Anjuna-Beach-Goa.jpg|thumb|[[अंजना बीच गोवा|अंजुना बीच]], गोवा&amp;lt;br /&amp;gt; Anjuna Beach, Goa]]&lt;br /&gt;
गोवा राज्य 2 जिलों में विभाजित है, जिनका क्षेत्रफल, जनसंख्या इस प्रकार है-&lt;br /&gt;
#उत्तरी गोवा - क्षेत्रफल 1,736 वर्ग कि.मी.- जनसंख्या 758,573 (2001 जनगणना के अनुसार) और मुख्यालय पणजी है।&lt;br /&gt;
#दक्षिणी गोवा - क्षेत्रफल 1,966 वर्ग कि.मी.- जनसंख्या 589,095 (2001 जनगणना के अनुसार) और मुख्यालय मारगांव है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==सम्बंधित लिंक==&lt;br /&gt;
{{गोवा के ज़िले}}&lt;br /&gt;
{{राज्य और के. शा. प्र.}}&lt;br /&gt;
[[Category:गोवा]]&lt;br /&gt;
[[Category:भारत के राज्य और केन्द्र शासित प्रदेश]][[Category:राज्य संरचना]]&lt;br /&gt;
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		<author><name>Gaurav</name></author>
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