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	<title>Bharatkosh - सदस्य द्वारा योगदान [hi]</title>
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		<title>रत्नेश पाण्डेय</title>
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		<updated>2024-05-12T11:10:17Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Jeeteshvaishya: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा खिलाड़ी&lt;br /&gt;
|चित्र=Ratnesh Pandey.jpeg&lt;br /&gt;
|चित्र का नाम=रत्नेश पाण्डेय&lt;br /&gt;
|पूरा नाम=रत्नेश पाण्डेय&lt;br /&gt;
|अन्य नाम=&lt;br /&gt;
|जन्म= [[12 मई]], [[1985]]&lt;br /&gt;
|जन्म भूमि=सतना, मध्य प्रदेश, भारत &lt;br /&gt;
|मृत्यु=&lt;br /&gt;
|मृत्यु स्थान=&lt;br /&gt;
|अभिभावक=&lt;br /&gt;
|पति/पत्नी=&lt;br /&gt;
|संतान=&lt;br /&gt;
|कर्म भूमि=[[भारत]]&lt;br /&gt;
|खेल-क्षेत्र=पर्वतारोहण &lt;br /&gt;
|शिक्षा=&lt;br /&gt;
|विद्यालय=&lt;br /&gt;
|पुरस्कार-उपाधि=विक्रम पुरस्कार ([[2021]])&lt;br /&gt;
|प्रसिद्धि=अंतर्राष्ट्रीय पर्वतारोही&lt;br /&gt;
|विशेष योगदान= रत्नेश पाण्डेय विश्व के सबसे ऊँचे पर्वत शिखर माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई कर राष्ट्रगान गाने वाले प्रथम भारतीय है।   &lt;br /&gt;
|नागरिकता=भारतीय &lt;br /&gt;
|संबंधित लेख=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=&lt;br /&gt;
|पाठ 1=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 2=&lt;br /&gt;
|पाठ 2=&lt;br /&gt;
|अन्य जानकारी=मध्य प्रदेश का सर्वोच्च खेल पुरस्कार, विक्रम पुरस्कार 2021 से सम्मानित किया, जो साहसिक खेलों की श्रेणी में पहली बार दिया गया था।&lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
|अद्यतन=&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''रत्नेश पाण्डेय''' ([[अंग्रेज़ी]]: ''Ratnesh Pandey'', जन्म- [[12 मई]], [[1985]], [[मध्य प्रदेश]]) एक भारतीय पर्वतारोही हैं, जिन्होंने 21 मई 2016 को विश्व के सबसे ऊँचे पर्वत शिखर माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई कर राष्ट्रगान जन गण मन गाने वाले प्रथम भारतीय है। इन्होंने [[यूरोप]], अफ्रीका महाद्वीप समेत 10 देशों में 21 से अधिक पर्वत शिखरों पर सफलतापूर्वक आरोहण किया हैं। इन्होंने दिव्यांगों और किन्नरों के दल को भी सफल पर्वतारोहण करा विश्व कीर्तिमान रचा। रत्नेश ने मोटरबाइक स्टंट के लिए गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स बनाया है  उन्हें नवंबर 2016 में मध्य प्रदेश सरकार द्वारा खेल अलंकरण पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 16 सितंबर 2023 को इन्हें [[मध्य प्रदेश]] का सर्वोच्च विक्रम पुरस्कार वर्ष 2021 के लिए प्राप्त हुआ जो कि साहसिक खेलों की श्रेणी में प्रथम बार दिया गया। 2022 में खेल एवं युवा मंत्रालय, [[भारत सरकार]] ने इन्हें फिट इंडिया चैंपियन नियुक्त किया हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== प्रारंभिक जीवन ==&lt;br /&gt;
रत्नेश सतना, मध्य प्रदेश, भारत से हैं। उन्होंने बैचलर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में स्नातक किया है और मास्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में पोस्ट ग्रेजुएट हैं। इन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग एंड एलाइड स्पोर्ट्स, मनाली में पर्वतारोहण का प्रशिक्षण प्राप्त किया व मास्टर ट्रेनर इन माउंटेनियरिंग का खिताब भी प्राप्त किया। वर्तमान में वह सतना में रहते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== करियर ==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Ratnesh Pandey on Mount Everest.jpeg|thumb|right|200px|माउंट एवरेस्ट के शिखर पर रत्नेश पाण्डेय]]&lt;br /&gt;
रत्नेश पाण्डेय ने 21 मई 2016 को माउंट एवरेस्ट फतह किया, जहाँ उन्होंने माउंट एवरेस्ट के शिखर पर प्रथम बार भारतीय राष्ट्रगान [[जन गण मन]] गाकर इतिहास रचा सितंबर 2016 में, पाण्डेय ने इंटरनेशनल क्लाइंबिंग एंड माउंटेनियरिंग फेडरेशन द्वारा आयोजित एक पर्वतारोहण अभियान में ईरान के सबसे ऊंचे पर्वत माउंट दमावंद और इसके तीसरे सबसे ऊंचे पर्वत माउंट सबलान पर चढ़ाई की। अप्रैल 2015 नेपाल भूकम्प के वजह से वो एवरेस्ट चढ़ने में असफल रहे, जहाँ उनके साथ के 21 पर्वतारोहियों की मौत हो गई। तूफान में फंसने से उनका दल से संपर्क टूट गया। उस दौरान हुए हादसे में तीन दिन बाद नेपाली सेना का हेलीकॉप्टर द्वारा रत्नेश को सुरक्षित बेस कैंप लाया गया था। फिर वर्ष 2016 में पुनः प्रयास के बाद उन्होंने माउंट एवरेस्ट फतह करने में सफलता हासिल की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
5 दिसंबर 2015 को रत्नेश ने इंदौर में 32.3 किलोमीटर मोटरसाइकल की सीट के ऊपर खड़े होकर और दोनों हाँथ छोड़कर बाइक चलाई। दूसरी बार, उन्होंने बाइक के जरिए बगैर रुके 175 सर्किल बनाए। इसके अलावा उन्होंने पीछे की ओर मुँह करके बिना हैंडल पकड़े 14 किलोमीटर मोटर साइकिल चलाई है। मोटरसाइकिल की सीट पर खड़े होकर सबसे लंबी लगातार सवारी करने के लिए गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में इनका नाम आया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अगस्त 2018 में, रत्नेश ने दो बार माउंट एल्ब्रस (18,511 फीट) पर चढ़ाई की, साथ ही पूर्वी और पश्चिमी चोटियों पर भारत का ध्वज और मध्य प्रदेश के खेल और युवा कल्याण विभाग का झंडा फहराया। इन्होंने निहाल सरकार के साथ इटली में आयोजित UIAA आइस क्लाइंबिंग वर्ल्ड कप 2017 में भारत का प्रतिनिधित्व किया। रत्नेश ने 14 जुलाई 2021 को 14,980 फीट ऊंचे माउंट मेरु और 21 जुलाई 2021 को 19,340 फीट ऊंचे माउंट किलिमंजारो, तंजानिया की चढ़ाई की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
एक प्रशिक्षक के रूप में अक्टूबर 2020 में रत्नेश ने प्रथम किन्नरों के दल को पर्वतारोहण कराया। 25 किन्नरों के दल को हिमालय के शिखर पर चढ़ाया था जिसकी आधिकारिक पुष्टि भारतीय पर्वतारोहण संस्थान, दिल्ली ने की। इस अभियान को पाण्डेय ने किन्नर अखाड़ा की अध्यक्ष आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी और राष्ट्रीय ट्रांसजेंडर कमीशन के आर्यन पाशा के साथ मिलकर पूर्ण किया। वर्ष 2021 में हरियाणा के स्कूली शिक्षा विभाग के पर्वतारोहण अभियान में सहभागिता निभाते हुए 25 दिव्यांगों को सफलता पूर्वक पर्वतारोहण कराया। रत्नेश के कार्यों को हरियाणा के मुख्यमंत्री [[मनोहर लाल खट्टर]] और स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा सम्मानित किया गया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== राजनीति ==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Narendra Modi &amp;amp; Ratnesh Pandey.jpg|thumb|right|220px|रत्नेश पाण्डेय एवं प्रधानमंत्री [[नरेन्द्र मोदी]]]]&lt;br /&gt;
रत्नेश पाण्डेय [[भारतीय जनता पार्टी]] के नेता हैं। सितंबर 2023 में रत्नेश पाण्डेय ने भाजपा की रीति-नीति एवं प्रधानमंत्री [[नरेन्द्र मोदी]], मुख्यमंत्री [[शिवराज सिंह चौहान]] के विकास कार्यों से प्रभावित होकर भाजपा मध्य प्रदेश अध्यक्ष और सांसद वीडी शर्मा के समक्ष भाजपा की सदस्यता ग्रहण की। प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद वीडी शर्मा ने रत्नेश पाण्डेय को भाजपा की प्राथमिक सदस्यता दिलाई।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== सामाजिक कार्य  ==&lt;br /&gt;
अपने पर्वतारोहण कारनामों से इतर, रत्नेश पाण्डेय अपनी संस्था &amp;quot;रत्नेश पाण्डेय फाउंडेशन&amp;quot; के माध्यम से विभिन्न सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं। यह फाउंडेशन कई तरह की सामाजिक समस्याओं का समाधान करने का प्रयास करता है। उदाहरण के लिए, उन्होंने कोविड-19 के कारण माता-पिता खो चुकी एक महिला की आर्थिक मदद कर उसके होम लोन का भुगतान करवाया। साथ ही, उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद के तत्वावधान में आयोजित &amp;quot;यूथ फॉर राम कैम्पेन&amp;quot; द्वारा आयोजित 10,000 किलोमीटर की बाइक रैली में भाग लिया। यह रैली अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए जागरूकता और धन उगाहने के लिए निकाली गई थी। उन्होंने धार्मिक निष्ठा का प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रीय ध्वज के साथ माउंट एवरेस्ट पर भगवा ध्वज भी फहराया था। कोविड-19 महामारी के दौरान, पाण्डेय ने प्रतिदिन 500 गायों को भोजन कराने का सराहनीय कार्य किया, जिसके लिए उन्हें वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स से चौथा पुरस्कार प्राप्त हुआ। इसके अलावा, वह युवाओं को प्रेरित करने और उन्हें सामाजिक कार्यों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न कार्यक्रमों का भी आयोजन करते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== पुरस्कार और सम्मान ==&lt;br /&gt;
रत्नेश पाण्डेय को उनकी उत्कृष्ट उपलब्धियों के लिए कई पुरस्कारों और सम्मानों से सम्मानित किया गया है।&lt;br /&gt;
* नवंबर 2016: मध्य प्रदेश सरकार द्वारा खेल अलंकरण पुरस्कार से सम्मानित।&lt;br /&gt;
* 2015: मध्य प्रदेश सरकार द्वारा मध्य प्रदेश राज्य का प्रथम आधिकारिक पर्वतारोही घोषित किया गया।&lt;br /&gt;
* सतना स्मार्ट सिटी: रत्नेश को सतना स्मार्ट सिटी द्वारा ब्रांड एंबेसडर के रूप में नियुक्त किया गया। वे खेल और शिक्षा पर ध्यान केंद्रित करते हुए राज्य के सरकारी स्कूलों और कॉलेजों से जुड़े हुए हैं।&lt;br /&gt;
* अप्रैल 2017: असम पर्यटन विकास निगम द्वारा अंबुबाची मेले के ब्रांड एंबेसडर के रूप में नियुक्त किया गया।&lt;br /&gt;
* 16 सितंबर 2023: मध्य प्रदेश का सर्वोच्च विक्रम पुरस्कार वर्ष 2021 प्राप्त किया, जो साहसिक खेलों की श्रेणी में पहली बार दिया गया था।&lt;br /&gt;
* अक्टूबर 2022: खेल एवं युवा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा फिट इंडिया चैंपियन नियुक्त किया गया।&lt;br /&gt;
यह रत्नेश पाण्डेय को प्राप्त पुरस्कारों और सम्मानों की एक संक्षिप्त सूची है। उनकी अदम्य साहस और दृढ़ संकल्प के लिए उन्हें कई अन्य पुरस्कारों और सम्मानों से भी सम्मानित किया गया है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=|प्रारम्भिक=प्रारम्भिक1 |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{भारतीय जनता पार्टी}}&lt;br /&gt;
[[Category:राजनीतिज्ञ]][[Category:राजनेता]][[Category:भारतीय जनता पार्टी]][[Category:राजनीति कोश]][[Category:राजनीतिज्ञ]][[Category:चरित कोश]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Jeeteshvaishya</name></author>
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		<title>रत्नेश पाण्डेय</title>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;Jeeteshvaishya: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा खिलाड़ी&lt;br /&gt;
|चित्र=Ratnesh Pandey.jpeg&lt;br /&gt;
|चित्र का नाम=रत्नेश पाण्डेय&lt;br /&gt;
|पूरा नाम=रत्नेश पाण्डेय&lt;br /&gt;
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|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
|अद्यतन=&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''रत्नेश पाण्डेय''' ([[अंग्रेज़ी]]: ''Ratnesh Pandey'', जन्म- [[12 मई]], [[1985]], [[मध्य प्रदेश]]) एक भारतीय पर्वतारोही हैं, जिन्होंने 21 मई 2016 को विश्व के सबसे ऊँचे पर्वत शिखर माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई कर राष्ट्रगान जन गण मन गाने वाले प्रथम भारतीय है। इन्होंने [[यूरोप]], अफ्रीका महाद्वीप समेत 10 देशों में 21 से अधिक पर्वत शिखरों पर सफलतापूर्वक आरोहण किया हैं। इन्होंने दिव्यांगों और किन्नरों के दल को भी सफल पर्वतारोहण करा विश्व कीर्तिमान रचा। रत्नेश ने मोटरबाइक स्टंट के लिए गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स बनाया है  उन्हें नवंबर 2016 में मध्य प्रदेश सरकार द्वारा खेल अलंकरण पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 16 सितंबर 2023 को इन्हें [[मध्य प्रदेश]] का सर्वोच्च विक्रम पुरस्कार वर्ष 2021 के लिए प्राप्त हुआ जो कि साहसिक खेलों की श्रेणी में प्रथम बार दिया गया। 2022 में खेल एवं युवा मंत्रालय, [[भारत सरकार]] ने इन्हें फिट इंडिया चैंपियन नियुक्त किया हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== प्रारंभिक जीवन ==&lt;br /&gt;
रत्नेश सतना, मध्य प्रदेश, भारत से हैं। उन्होंने बैचलर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में स्नातक किया है और मास्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में पोस्ट ग्रेजुएट हैं। इन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग एंड एलाइड स्पोर्ट्स, मनाली में पर्वतारोहण का प्रशिक्षण प्राप्त किया व मास्टर ट्रेनर इन माउंटेनियरिंग का खिताब भी प्राप्त किया। वर्तमान में वह सतना में रहते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== करियर ==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Ratnesh Pandey on Mount Everest.jpeg|thumb|right|200px|माउंट एवरेस्ट के शिखर पर रत्नेश पाण्डेय]]&lt;br /&gt;
रत्नेश पाण्डेय ने 21 मई 2016 को माउंट एवरेस्ट फतह किया, जहाँ उन्होंने माउंट एवरेस्ट के शिखर पर प्रथम बार भारतीय राष्ट्रगान [[जन गण मन]] गाकर इतिहास रचा सितंबर 2016 में, पाण्डेय ने इंटरनेशनल क्लाइंबिंग एंड माउंटेनियरिंग फेडरेशन द्वारा आयोजित एक पर्वतारोहण अभियान में ईरान के सबसे ऊंचे पर्वत माउंट दमावंद और इसके तीसरे सबसे ऊंचे पर्वत माउंट सबलान पर चढ़ाई की। अप्रैल 2015 नेपाल भूकम्प के वजह से वो एवरेस्ट चढ़ने में असफल रहे, जहाँ उनके साथ के 21 पर्वतारोहियों की मौत हो गई। तूफान में फंसने से उनका दल से संपर्क टूट गया। उस दौरान हुए हादसे में तीन दिन बाद नेपाली सेना का हेलीकॉप्टर द्वारा रत्नेश को सुरक्षित बेस कैंप लाया गया था। फिर वर्ष 2016 में पुनः प्रयास के बाद उन्होंने माउंट एवरेस्ट फतह करने में सफलता हासिल की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
5 दिसंबर 2015 को रत्नेश ने इंदौर में 32.3 किलोमीटर मोटरसाइकल की सीट के ऊपर खड़े होकर और दोनों हाँथ छोड़कर बाइक चलाई। दूसरी बार, उन्होंने बाइक के जरिए बगैर रुके 175 सर्किल बनाए। इसके अलावा उन्होंने पीछे की ओर मुँह करके बिना हैंडल पकड़े 14 किलोमीटर मोटर साइकिल चलाई है। मोटरसाइकिल की सीट पर खड़े होकर सबसे लंबी लगातार सवारी करने के लिए गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में इनका नाम आया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अगस्त 2018 में, रत्नेश ने दो बार माउंट एल्ब्रस (18,511 फीट) पर चढ़ाई की, साथ ही पूर्वी और पश्चिमी चोटियों पर भारत का ध्वज और मध्य प्रदेश के खेल और युवा कल्याण विभाग का झंडा फहराया। इन्होंने निहाल सरकार के साथ इटली में आयोजित UIAA आइस क्लाइंबिंग वर्ल्ड कप 2017 में भारत का प्रतिनिधित्व किया। रत्नेश ने 14 जुलाई 2021 को 14,980 फीट ऊंचे माउंट मेरु और 21 जुलाई 2021 को 19,340 फीट ऊंचे माउंट किलिमंजारो, तंजानिया की चढ़ाई की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
एक प्रशिक्षक के रूप में अक्टूबर 2020 में रत्नेश ने प्रथम किन्नरों के दल को पर्वतारोहण कराया। 25 किन्नरों के दल को हिमालय के शिखर पर चढ़ाया था जिसकी आधिकारिक पुष्टि भारतीय पर्वतारोहण संस्थान, दिल्ली ने की। इस अभियान को पाण्डेय ने किन्नर अखाड़ा की अध्यक्ष आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी और राष्ट्रीय ट्रांसजेंडर कमीशन के आर्यन पाशा के साथ मिलकर पूर्ण किया। वर्ष 2021 में हरियाणा के स्कूली शिक्षा विभाग के पर्वतारोहण अभियान में सहभागिता निभाते हुए 25 दिव्यांगों को सफलता पूर्वक पर्वतारोहण कराया। रत्नेश के कार्यों को हरियाणा के मुख्यमंत्री [[मनोहर लाल खट्टर]] और स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा सम्मानित किया गया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== राजनीति ==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Narendra Modi &amp;amp; Ratnesh Pandey.jpg|thumb|right|220px|रत्नेश पाण्डेय एवं प्रधानमंत्री [[नरेन्द्र मोदी]]]]&lt;br /&gt;
रत्नेश पाण्डेय [[भारतीय जनता पार्टी]] के नेता हैं। सितंबर 2023 में रत्नेश पाण्डेय ने भाजपा की रीति-नीति एवं प्रधानमंत्री [[नरेन्द्र मोदी]], मुख्यमंत्री [[शिवराज सिंह चौहान]] के विकास कार्यों से प्रभावित होकर भाजपा मध्य प्रदेश अध्यक्ष और सांसद वीडी शर्मा के समक्ष भाजपा की सदस्यता ग्रहण की। प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद वीडी शर्मा ने रत्नेश पाण्डेय को भाजपा की प्राथमिक सदस्यता दिलाई।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== सामाजिक कार्य  ==&lt;br /&gt;
अपने पर्वतारोहण कारनामों से इतर, रत्नेश पाण्डेय अपनी संस्था &amp;quot;रत्नेश पाण्डेय फाउंडेशन&amp;quot; के माध्यम से विभिन्न सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं। यह फाउंडेशन कई तरह की सामाजिक समस्याओं का समाधान करने का प्रयास करता है। उदाहरण के लिए, उन्होंने कोविड-19 के कारण माता-पिता खो चुकी एक महिला की आर्थिक मदद कर उसके होम लोन का भुगतान करवाया। साथ ही, उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद के तत्वावधान में आयोजित &amp;quot;यूथ फॉर राम कैम्पेन&amp;quot; द्वारा आयोजित 10,000 किलोमीटर की बाइक रैली में भाग लिया। यह रैली अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए जागरूकता और धन उगाहने के लिए निकाली गई थी। उन्होंने धार्मिक निष्ठा का प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रीय ध्वज के साथ माउंट एवरेस्ट पर भगवा ध्वज भी फहराया था। कोविड-19 महामारी के दौरान, पाण्डेय ने प्रतिदिन 500 गायों को भोजन कराने का सराहनीय कार्य किया, जिसके लिए उन्हें वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स से चौथा पुरस्कार प्राप्त हुआ। इसके अलावा, वह युवाओं को प्रेरित करने और उन्हें सामाजिक कार्यों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न कार्यक्रमों का भी आयोजन करते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== पुरस्कार और सम्मान ==&lt;br /&gt;
रत्नेश पाण्डेय को उनकी उत्कृष्ट उपलब्धियों के लिए कई पुरस्कारों और सम्मानों से सम्मानित किया गया है।&lt;br /&gt;
* नवंबर 2016: मध्य प्रदेश सरकार द्वारा खेल अलंकरण पुरस्कार से सम्मानित।&lt;br /&gt;
* 2015: मध्य प्रदेश सरकार द्वारा मध्य प्रदेश राज्य का प्रथम आधिकारिक पर्वतारोही घोषित किया गया।&lt;br /&gt;
* सतना स्मार्ट सिटी: रत्नेश को सतना स्मार्ट सिटी द्वारा ब्रांड एंबेसडर के रूप में नियुक्त किया गया। वे खेल और शिक्षा पर ध्यान केंद्रित करते हुए राज्य के सरकारी स्कूलों और कॉलेजों से जुड़े हुए हैं।&lt;br /&gt;
* अप्रैल 2017: असम पर्यटन विकास निगम द्वारा अंबुबाची मेले के ब्रांड एंबेसडर के रूप में नियुक्त किया गया।&lt;br /&gt;
* 16 सितंबर 2023: मध्य प्रदेश का सर्वोच्च विक्रम पुरस्कार वर्ष 2021 प्राप्त किया, जो साहसिक खेलों की श्रेणी में पहली बार दिया गया था।&lt;br /&gt;
* अक्टूबर 2022: खेल एवं युवा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा फिट इंडिया चैंपियन नियुक्त किया गया।&lt;br /&gt;
यह रत्नेश पाण्डेय को प्राप्त पुरस्कारों और सम्मानों की एक संक्षिप्त सूची है। उनकी अदम्य साहस और दृढ़ संकल्प के लिए उन्हें कई अन्य पुरस्कारों और सम्मानों से भी सम्मानित किया गया है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=|प्रारम्भिक=प्रारम्भिक1 |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{भारतीय जनता पार्टी}}&lt;br /&gt;
[[Category:राजनीतिज्ञ]][[Category:राजनेता]][[Category:भारतीय जनता पार्टी]][[Category:राजनीति कोश]][[Category:राजनीतिज्ञ]][[Category:चरित कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;div&gt;[[चित्र:Babu Umanath Singh Kohra.jpeg|अंगूठाकार|250px|right|कोहरा तालुकदारी के बाबू उमानाथ सिंह]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''बाबू उमानाथ सिंह''' [[अवध]] की पूर्ववर्ती कोहरा तालुकदारी के पूर्व उत्तराधिकारी एवं एक शिक्षाविद थे। वें अवध विश्वविद्यालय के प्रोफेसर थें और उत्तर प्रदेश इतिहास कांग्रेस के संस्थापक सदस्यों&amp;lt;ref&amp;gt;Uttar Pradesh History Congress (Ed.). (1986). Uttar Pradesh History Congress: Proceedings of the I Session, T.N.P.G. College, Tanda, 1985. Uttar Pradesh History Congress.&amp;lt;/ref&amp;gt; में से एक थें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== प्रारंभिक जीवन एवं शिक्षा  ==&lt;br /&gt;
वर्तमान [[उत्तर प्रदेश]] के अमेठी जिले में स्थित कोहरा तालुकदारी में 1936 में जन्मे बाबू उमानाथ सिंह बाबू प्रताप बहादुर सिंह के पुत्र थे। बाबू प्रताप बहादुर सिंह कोहरा नरेश बाबू बेनी बहादुर सिंह के अनुज थे। बाबू बेनी बहादुर सिंह के पुत्र न होने के कारण, उनके भाई, बाबू प्रताप बहादुर सिंह को कोहरा का उत्तराधिकार मिला।&lt;br /&gt;
बाबू उमानाथ सिंह 1857 के प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के क्रांतिवीर बाबू भूप सिंह के पांचवे वंशज थे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उनकी शैक्षणिक यात्रा [[वाराणसी]] के उदय प्रताप कॉलेज से प्रारंभ हुई। उन्होंने 1956 में प्रतिष्ठित [[बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय]] से स्नातक की उपाधि प्राप्त की तथा 1958 में प्राचीन इतिहास में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की। इसके बाद, उन्होंने 1970 में [[गोरखपुर|गोरखपुर विश्वविद्यालय]] से मध्यकालीन इतिहास में परास्नातक की उपाधि प्राप्त की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== कार्य == &lt;br /&gt;
बाबू उमानाथ सिंह ने स्वयं को शिक्षा के क्षेत्र में समर्पित कर दिया। उन्होंने क्षेत्र में शैक्षिक मानकों को बढ़ाने के लिए अथक प्रयास किया। अवध विश्वविद्यालय में मध्यकालीन इतिहास विभाग में प्रोफेसर के रूप में कार्य करते हुए, उन्होंने शिक्षा जगत में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इसके अतिरिक्त, उन्होंने उत्तर प्रदेश इतिहास कांग्रेस के संस्थापक सदस्य के रूप में क्षेत्र की समृद्ध ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== व्यक्तिगत जीवन ==&lt;br /&gt;
[[जौनपुर]] के ख्याति प्राप्त स्वतंत्रता संग्राम सेनानी ठाकुर सीताराम सिंह की पुत्री द्रौपदी देवी के साथ बाबू उमानाथ सिंह का विवाह हुआ। इस दंपति को चार पुत्र हुए, क्रमशः बाबू राघवेंद्र प्रताप सिंह, कुंवर विजय सिंह, कुंवर डॉ. संजय सिंह और कुंवर धनंजय सिंह।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
* [https://hi.wikipedia.org/s/p28f बाबू उमानाथ सिंह - विकिपिडिया पर]&lt;br /&gt;
[[Category:प्रसिद्ध व्यक्तित्व]]&lt;br /&gt;
[[Category:प्रसिद्ध व्यक्तित्व कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:चरित कोश]]&lt;br /&gt;
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&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;[[चित्र:Babu Umanath Singh Kohra.jpeg|अंगूठाकार|250px|right|कोहरा तालुकदारी के बाबू उमानाथ सिंह]]&lt;br /&gt;
'''बाबू उमानाथ सिंह''' [[अवध]] की पूर्ववर्ती कोहरा तालुकदारी के पूर्व उत्तराधिकारी एवं एक शिक्षाविद थे। वें अवध विश्वविद्यालय के प्रोफेसर थें और उत्तर प्रदेश इतिहास कांग्रेस के संस्थापक सदस्यों&amp;lt;ref&amp;gt;Uttar Pradesh History Congress (Ed.). (1986). Uttar Pradesh History Congress: Proceedings of the I Session, T.N.P.G. College, Tanda, 1985. Uttar Pradesh History Congress.&amp;lt;/ref&amp;gt; में से एक थें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== प्रारंभिक जीवन एवं शिक्षा  ==&lt;br /&gt;
वर्तमान [[उत्तर प्रदेश]] के अमेठी जिले में स्थित कोहरा तालुकदारी में 1936 में जन्मे बाबू उमानाथ सिंह बाबू प्रताप बहादुर सिंह के पुत्र थे। बाबू प्रताप बहादुर सिंह कोहरा नरेश बाबू बेनी बहादुर सिंह के अनुज थे। बाबू बेनी बहादुर सिंह के पुत्र न होने के कारण, उनके भाई, बाबू प्रताप बहादुर सिंह को कोहरा का उत्तराधिकार मिला।&lt;br /&gt;
बाबू उमानाथ सिंह 1857 के प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के क्रांतिवीर बाबू भूप सिंह के पांचवे वंशज थे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उनकी शैक्षणिक यात्रा [[वाराणसी]] के उदय प्रताप कॉलेज से प्रारंभ हुई। उन्होंने 1956 में प्रतिष्ठित [[बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय]] से स्नातक की उपाधि प्राप्त की तथा 1958 में प्राचीन इतिहास में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की। इसके बाद, उन्होंने 1970 में [[गोरखपुर|गोरखपुर विश्वविद्यालय]] से मध्यकालीन इतिहास में परास्नातक की उपाधि प्राप्त की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== कार्य == &lt;br /&gt;
बाबू उमानाथ सिंह ने स्वयं को शिक्षा के क्षेत्र में समर्पित कर दिया। उन्होंने क्षेत्र में शैक्षिक मानकों को बढ़ाने के लिए अथक प्रयास किया। अवध विश्वविद्यालय में मध्यकालीन इतिहास विभाग में प्रोफेसर के रूप में कार्य करते हुए, उन्होंने शिक्षा जगत में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इसके अतिरिक्त, उन्होंने उत्तर प्रदेश इतिहास कांग्रेस के संस्थापक सदस्य के रूप में क्षेत्र की समृद्ध ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== व्यक्तिगत जीवन ==&lt;br /&gt;
[[जौनपुर]] के ख्याति प्राप्त स्वतंत्रता संग्राम सेनानी ठाकुर सीताराम सिंह की पुत्री द्रौपदी देवी के साथ बाबू उमानाथ सिंह का विवाह हुआ। इस दंपति को चार पुत्र हुए, क्रमशः बाबू राघवेंद्र प्रताप सिंह, कुंवर विजय सिंह, कुंवर डॉ. संजय सिंह और कुंवर धनंजय सिंह।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
* [https://hi.wikipedia.org/s/p28f बाबू उमानाथ सिंह - विकिपिडिया पर]&lt;br /&gt;
[[Category:प्रसिद्ध व्यक्तित्व]]&lt;br /&gt;
[[Category:प्रसिद्ध व्यक्तित्व कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:चरित कोश]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
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		<title>रत्नेश पाण्डेय</title>
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&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;[[चित्र:Ratnesh Pandey.jpeg|thumb|right|200px|रत्नेश पाण्डेय]]&lt;br /&gt;
'''रत्नेश पाण्डेय''' ([[अंग्रेज़ी]]: ''Ratnesh Pandey'', जन्म- [[12 मई]], [[1985]], [[मध्य प्रदेश]]) एक भारतीय पर्वतारोही हैं, जिन्होंने 21 मई 2016 को विश्व के सबसे ऊँचे पर्वत शिखर माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई कर राष्ट्रगान जन गण मन गाने वाले प्रथम भारतीय है। इन्होंने [[यूरोप]], अफ्रीका महाद्वीप समेत 10 देशों में 21 से अधिक पर्वत शिखरों पर सफलतापूर्वक आरोहण किया हैं। इन्होंने दिव्यांगों और किन्नरों के दल को भी सफल पर्वतारोहण करा विश्व कीर्तिमान रचा। रत्नेश ने मोटरबाइक स्टंट के लिए गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स बनाया है  उन्हें नवंबर 2016 में मध्य प्रदेश सरकार द्वारा खेल अलंकरण पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 16 सितंबर 2023 को इन्हें [[मध्य प्रदेश]] का सर्वोच्च विक्रम पुरस्कार वर्ष 2021 के लिए प्राप्त हुआ जो कि साहसिक खेलों की श्रेणी में प्रथम बार दिया गया। 2022 में खेल एवं युवा मंत्रालय, [[भारत सरकार]] ने इन्हें फिट इंडिया चैंपियन नियुक्त किया हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== प्रारंभिक जीवन ==&lt;br /&gt;
रत्नेश सतना, मध्य प्रदेश, भारत से हैं। उन्होंने बैचलर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में स्नातक किया है और मास्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में पोस्ट ग्रेजुएट हैं। इन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग एंड एलाइड स्पोर्ट्स, मनाली में पर्वतारोहण का प्रशिक्षण प्राप्त किया व मास्टर ट्रेनर इन माउंटेनियरिंग का खिताब भी प्राप्त किया। वर्तमान में वह सतना में रहते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== करियर ==&lt;br /&gt;
रत्नेश पाण्डेय ने 21 मई 2016 को माउंट एवरेस्ट फतह किया, जहाँ उन्होंने माउंट एवरेस्ट के शिखर पर प्रथम बार भारतीय राष्ट्रगान [[जन गण मन]] गाकर इतिहास रचा सितंबर 2016 में, पाण्डेय ने इंटरनेशनल क्लाइंबिंग एंड माउंटेनियरिंग फेडरेशन द्वारा आयोजित एक पर्वतारोहण अभियान में ईरान के सबसे ऊंचे पर्वत माउंट दमावंद और इसके तीसरे सबसे ऊंचे पर्वत माउंट सबलान पर चढ़ाई की। अप्रैल 2015 नेपाल भूकम्प के वजह से वो एवरेस्ट चढ़ने में असफल रहे, जहाँ उनके साथ के 21 पर्वतारोहियों की मौत हो गई। तूफान में फंसने से उनका दल से संपर्क टूट गया। उस दौरान हुए हादसे में तीन दिन बाद नेपाली सेना का हेलीकॉप्टर द्वारा रत्नेश को सुरक्षित बेस कैंप लाया गया था। फिर वर्ष 2016 में पुनः प्रयास के बाद उन्होंने माउंट एवरेस्ट फतह करने में सफलता हासिल की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
5 दिसंबर 2015 को रत्नेश ने इंदौर में 32.3 किलोमीटर मोटरसाइकल की सीट के ऊपर खड़े होकर और दोनों हाँथ छोड़कर बाइक चलाई। दूसरी बार, उन्होंने बाइक के जरिए बगैर रुके 175 सर्किल बनाए। इसके अलावा उन्होंने पीछे की ओर मुँह करके बिना हैंडल पकड़े 14 किलोमीटर मोटर साइकिल चलाई है। मोटरसाइकिल की सीट पर खड़े होकर सबसे लंबी लगातार सवारी करने के लिए गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में इनका नाम आया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अगस्त 2018 में, रत्नेश ने दो बार माउंट एल्ब्रस (18,511 फीट) पर चढ़ाई की, साथ ही पूर्वी और पश्चिमी चोटियों पर भारत का ध्वज और मध्य प्रदेश के खेल और युवा कल्याण विभाग का झंडा फहराया। इन्होंने निहाल सरकार के साथ इटली में आयोजित UIAA आइस क्लाइंबिंग वर्ल्ड कप 2017 में भारत का प्रतिनिधित्व किया। रत्नेश ने 14 जुलाई 2021 को 14,980 फीट ऊंचे माउंट मेरु और 21 जुलाई 2021 को 19,340 फीट ऊंचे माउंट किलिमंजारो, तंजानिया की चढ़ाई की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
एक प्रशिक्षक के रूप में अक्टूबर 2020 में रत्नेश ने प्रथम किन्नरों के दल को पर्वतारोहण कराया। 25 किन्नरों के दल को हिमालय के शिखर पर चढ़ाया था जिसकी आधिकारिक पुष्टि भारतीय पर्वतारोहण संस्थान, दिल्ली ने की। इस अभियान को पाण्डेय ने किन्नर अखाड़ा की अध्यक्ष आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी और राष्ट्रीय ट्रांसजेंडर कमीशन के आर्यन पाशा के साथ मिलकर पूर्ण किया। वर्ष 2021 में हरियाणा के स्कूली शिक्षा विभाग के पर्वतारोहण अभियान में सहभागिता निभाते हुए 25 दिव्यांगों को सफलता पूर्वक पर्वतारोहण कराया। रत्नेश के कार्यों को हरियाणा के मुख्यमंत्री [[मनोहर लाल खट्टर]] और स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा सम्मानित किया गया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== राजनीति ==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Narendra Modi &amp;amp; Ratnesh Pandey.jpg|thumb|right|220px|रत्नेश पाण्डेय एवं प्रधानमंत्री [[नरेन्द्र मोदी]]]]&lt;br /&gt;
रत्नेश पाण्डेय [[भारतीय जनता पार्टी]] के नेता हैं। सितंबर 2023 में रत्नेश पाण्डेय ने भाजपा की रीति-नीति एवं प्रधानमंत्री [[नरेन्द्र मोदी]], मुख्यमंत्री [[शिवराज सिंह चौहान]] के विकास कार्यों से प्रभावित होकर भाजपा मध्य प्रदेश अध्यक्ष और सांसद वीडी शर्मा के समक्ष भाजपा की सदस्यता ग्रहण की। प्रदेश अध्यक्ष VD शर्मा ने रत्नेश पाण्डेय को भाजपा की प्राथमिक सदस्यता दिलाई।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== सामाजिक कार्य  ==&lt;br /&gt;
अपने पर्वतारोहण कारनामों से इतर, रत्नेश पाण्डेय अपनी संस्था &amp;quot;रत्नेश पाण्डेय फाउंडेशन&amp;quot; के माध्यम से विभिन्न सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं। यह फाउंडेशन कई तरह की सामाजिक समस्याओं का समाधान करने का प्रयास करता है। उदाहरण के लिए, उन्होंने कोविड-19 के कारण माता-पिता खो चुकी एक महिला की आर्थिक मदद कर उसके होम लोन का भुगतान करवाया। साथ ही, उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद के तत्वावधान में आयोजित &amp;quot;यूथ फॉर राम कैम्पेन&amp;quot; द्वारा आयोजित 10,000 किलोमीटर की बाइक रैली में भाग लिया। यह रैली अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए जागरूकता और धन उगाहने के लिए निकाली गई थी। उन्होंने धार्मिक निष्ठा का प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रीय ध्वज के साथ माउंट एवरेस्ट पर भगवा ध्वज भी फहराया था। कोविड-19 महामारी के दौरान, पाण्डेय ने प्रतिदिन 500 गायों को भोजन कराने का सराहनीय कार्य किया, जिसके लिए उन्हें वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स से चौथा पुरस्कार प्राप्त हुआ। इसके अलावा, वह युवाओं को प्रेरित करने और उन्हें सामाजिक कार्यों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न कार्यक्रमों का भी आयोजन करते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== पुरस्कार और सम्मान ==&lt;br /&gt;
रत्नेश पाण्डेय को उनकी उत्कृष्ट उपलब्धियों के लिए कई पुरस्कारों और सम्मानों से सम्मानित किया गया है।&lt;br /&gt;
* नवंबर 2016: मध्य प्रदेश सरकार द्वारा खेल अलंकरण पुरस्कार से सम्मानित।&lt;br /&gt;
* 2015: मध्य प्रदेश सरकार द्वारा मध्य प्रदेश राज्य का प्रथम आधिकारिक पर्वतारोही घोषित किया गया।&lt;br /&gt;
* सतना स्मार्ट सिटी: रत्नेश को सतना स्मार्ट सिटी द्वारा ब्रांड एंबेसडर के रूप में नियुक्त किया गया। वे खेल और शिक्षा पर ध्यान केंद्रित करते हुए राज्य के सरकारी स्कूलों और कॉलेजों से जुड़े हुए हैं।&lt;br /&gt;
* अप्रैल 2017: असम पर्यटन विकास निगम द्वारा अंबुबाची मेले के ब्रांड एंबेसडर के रूप में नियुक्त किया गया।&lt;br /&gt;
* 16 सितंबर 2023: मध्य प्रदेश का सर्वोच्च विक्रम पुरस्कार वर्ष 2021 प्राप्त किया, जो साहसिक खेलों की श्रेणी में पहली बार दिया गया था।&lt;br /&gt;
* अक्टूबर 2022: खेल एवं युवा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा फिट इंडिया चैंपियन नियुक्त किया गया।&lt;br /&gt;
यह रत्नेश पाण्डेय को प्राप्त पुरस्कारों और सम्मानों की एक संक्षिप्त सूची है। उनकी अदम्य साहस और दृढ़ संकल्प के लिए उन्हें कई अन्य पुरस्कारों और सम्मानों से भी सम्मानित किया गया है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=|प्रारम्भिक=प्रारम्भिक1 |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{भारतीय जनता पार्टी}}&lt;br /&gt;
[[Category:राजनीतिज्ञ]][[Category:राजनेता]][[Category:भारतीय जनता पार्टी]][[Category:राजनीति कोश]][[Category:राजनीतिज्ञ]][[Category:चरित कोश]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
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		<author><name>Jeeteshvaishya</name></author>
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		<author><name>Jeeteshvaishya</name></author>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;Jeeteshvaishya: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Jeeteshvaishya</name></author>
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		<title>रत्नेश पाण्डेय</title>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;Jeeteshvaishya: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;'''रत्नेश पाण्डेय''' ([[अंग्रेज़ी]]: ''Ratnesh Pandey'', जन्म- [[12 मई]], [[1985]], [[मध्य प्रदेश]]) एक भारतीय पर्वतारोही हैं, जिन्होंने 21 मई 2016 को विश्व के सबसे ऊँचे पर्वत शिखर माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई कर राष्ट्रगान जन गण मन गाने वाले प्रथम भारतीय है। इन्होंने [[यूरोप]], अफ्रीका महाद्वीप समेत 10 देशों में 21 से अधिक पर्वत शिखरों पर सफलतापूर्वक आरोहण किया हैं। इन्होंने दिव्यांगों और किन्नरों के दल को भी सफल पर्वतारोहण करा विश्व कीर्तिमान रचा। रत्नेश ने मोटरबाइक स्टंट के लिए गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स बनाया है  उन्हें नवंबर 2016 में मध्य प्रदेश सरकार द्वारा खेल अलंकरण पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 16 सितंबर 2023 को इन्हें [[मध्य प्रदेश]] का सर्वोच्च विक्रम पुरस्कार वर्ष 2021 के लिए प्राप्त हुआ जो कि साहसिक खेलों की श्रेणी में प्रथम बार दिया गया। 2022 में खेल एवं युवा मंत्रालय, [[भारत सरकार]] ने इन्हें फिट इंडिया चैंपियन नियुक्त किया हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== प्रारंभिक जीवन ==&lt;br /&gt;
रत्नेश सतना, मध्य प्रदेश, भारत से हैं। उन्होंने बैचलर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में स्नातक किया है और मास्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में पोस्ट ग्रेजुएट हैं। इन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग एंड एलाइड स्पोर्ट्स, मनाली में पर्वतारोहण का प्रशिक्षण प्राप्त किया व मास्टर ट्रेनर इन माउंटेनियरिंग का खिताब भी प्राप्त किया। वर्तमान में वह सतना में रहते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== करियर ==&lt;br /&gt;
रत्नेश पाण्डेय ने 21 मई 2016 को माउंट एवरेस्ट फतह किया, जहाँ उन्होंने माउंट एवरेस्ट के शिखर पर प्रथम बार भारतीय राष्ट्रगान [[जन गण मन]] गाकर इतिहास रचा सितंबर 2016 में, पाण्डेय ने इंटरनेशनल क्लाइंबिंग एंड माउंटेनियरिंग फेडरेशन द्वारा आयोजित एक पर्वतारोहण अभियान में ईरान के सबसे ऊंचे पर्वत माउंट दमावंद और इसके तीसरे सबसे ऊंचे पर्वत माउंट सबलान पर चढ़ाई की। अप्रैल 2015 नेपाल भूकम्प के वजह से वो एवरेस्ट चढ़ने में असफल रहे, जहाँ उनके साथ के 21 पर्वतारोहियों की मौत हो गई। तूफान में फंसने से उनका दल से संपर्क टूट गया। उस दौरान हुए हादसे में तीन दिन बाद नेपाली सेना का हेलीकॉप्टर द्वारा रत्नेश को सुरक्षित बेस कैंप लाया गया था। फिर वर्ष 2016 में पुनः प्रयास के बाद उन्होंने माउंट एवरेस्ट फतह करने में सफलता हासिल की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
5 दिसंबर 2015 को रत्नेश ने इंदौर में 32.3 किलोमीटर मोटरसाइकल की सीट के ऊपर खड़े होकर और दोनों हाँथ छोड़कर बाइक चलाई। दूसरी बार, उन्होंने बाइक के जरिए बगैर रुके 175 सर्किल बनाए। इसके अलावा उन्होंने पीछे की ओर मुँह करके बिना हैंडल पकड़े 14 किलोमीटर मोटर साइकिल चलाई है। मोटरसाइकिल की सीट पर खड़े होकर सबसे लंबी लगातार सवारी करने के लिए गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में इनका नाम आया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अगस्त 2018 में, रत्नेश ने दो बार माउंट एल्ब्रस (18,511 फीट) पर चढ़ाई की, साथ ही पूर्वी और पश्चिमी चोटियों पर भारत का ध्वज और मध्य प्रदेश के खेल और युवा कल्याण विभाग का झंडा फहराया। इन्होंने निहाल सरकार के साथ इटली में आयोजित UIAA आइस क्लाइंबिंग वर्ल्ड कप 2017 में भारत का प्रतिनिधित्व किया। रत्नेश ने 14 जुलाई 2021 को 14,980 फीट ऊंचे माउंट मेरु और 21 जुलाई 2021 को 19,340 फीट ऊंचे माउंट किलिमंजारो, तंजानिया की चढ़ाई की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
एक प्रशिक्षक के रूप में अक्टूबर 2020 में रत्नेश ने प्रथम किन्नरों के दल को पर्वतारोहण कराया। 25 किन्नरों के दल को हिमालय के शिखर पर चढ़ाया था जिसकी आधिकारिक पुष्टि भारतीय पर्वतारोहण संस्थान, दिल्ली ने की। इस अभियान को पाण्डेय ने किन्नर अखाड़ा की अध्यक्ष आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी और राष्ट्रीय ट्रांसजेंडर कमीशन के आर्यन पाशा के साथ मिलकर पूर्ण किया। वर्ष 2021 में हरियाणा के स्कूली शिक्षा विभाग के पर्वतारोहण अभियान में सहभागिता निभाते हुए 25 दिव्यांगों को सफलता पूर्वक पर्वतारोहण कराया। रत्नेश के कार्यों को हरियाणा के मुख्यमंत्री  मनोहर लाल खट्टर और स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा सम्मानित किया गया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== राजनीति ==&lt;br /&gt;
रत्नेश पाण्डेय [[भारतीय जनता पार्टी]] के नेता हैं। सितंबर 2023 में रत्नेश पाण्डेय ने भाजपा की रीति-नीति एवं प्रधानमंत्री [[नरेन्द्र मोदी]], मुख्यमंत्री [[शिवराज सिंह चौहान]] के विकास कार्यों से प्रभावित होकर भाजपा मध्य प्रदेश अध्यक्ष और सांसद वीडी शर्मा के समक्ष भाजपा की सदस्यता ग्रहण की। प्रदेश अध्यक्ष VD शर्मा ने रत्नेश पाण्डेय को भाजपा की प्राथमिक सदस्यता दिलाई।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== सामाजिक कार्य  ==&lt;br /&gt;
अपने पर्वतारोहण कारनामों से इतर, रत्नेश पाण्डेय अपनी संस्था &amp;quot;रत्नेश पाण्डेय फाउंडेशन&amp;quot; के माध्यम से विभिन्न सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं। यह फाउंडेशन कई तरह की सामाजिक समस्याओं का समाधान करने का प्रयास करता है। उदाहरण के लिए, उन्होंने कोविड-19 के कारण माता-पिता खो चुकी एक महिला की आर्थिक मदद कर उसके होम लोन का भुगतान करवाया। साथ ही, उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद के तत्वावधान में आयोजित &amp;quot;यूथ फॉर राम कैम्पेन&amp;quot; द्वारा आयोजित 10,000 किलोमीटर की बाइक रैली में भाग लिया। यह रैली अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए जागरूकता और धन उगाहने के लिए निकाली गई थी। उन्होंने धार्मिक निष्ठा का प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रीय ध्वज के साथ माउंट एवरेस्ट पर भगवा ध्वज भी फहराया था। कोविड-19 महामारी के दौरान, पाण्डेय ने प्रतिदिन 500 गायों को भोजन कराने का सराहनीय कार्य किया, जिसके लिए उन्हें वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स से चौथा पुरस्कार प्राप्त हुआ। इसके अलावा, वह युवाओं को प्रेरित करने और उन्हें सामाजिक कार्यों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न कार्यक्रमों का भी आयोजन करते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== पुरस्कार और सम्मान ==&lt;br /&gt;
रत्नेश पाण्डेय को उनकी उत्कृष्ट उपलब्धियों के लिए कई पुरस्कारों और सम्मानों से सम्मानित किया गया है।&lt;br /&gt;
* नवंबर 2016: मध्य प्रदेश सरकार द्वारा खेल अलंकरण पुरस्कार से सम्मानित।&lt;br /&gt;
* 2015: मध्य प्रदेश सरकार द्वारा मध्य प्रदेश राज्य का प्रथम आधिकारिक पर्वतारोही घोषित किया गया।&lt;br /&gt;
* सतना स्मार्ट सिटी: रत्नेश को सतना स्मार्ट सिटी द्वारा ब्रांड एंबेसडर के रूप में नियुक्त किया गया। वे खेल और शिक्षा पर ध्यान केंद्रित करते हुए राज्य के सरकारी स्कूलों और कॉलेजों से जुड़े हुए हैं।&lt;br /&gt;
* अप्रैल 2017: असम पर्यटन विकास निगम द्वारा अंबुबाची मेले के ब्रांड एंबेसडर के रूप में नियुक्त किया गया।&lt;br /&gt;
* 16 सितंबर 2023: मध्य प्रदेश का सर्वोच्च विक्रम पुरस्कार वर्ष 2021 प्राप्त किया, जो साहसिक खेलों की श्रेणी में पहली बार दिया गया था।&lt;br /&gt;
* अक्टूबर 2022: खेल एवं युवा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा फिट इंडिया चैंपियन नियुक्त किया गया।&lt;br /&gt;
यह रत्नेश पाण्डेय को प्राप्त पुरस्कारों और सम्मानों की एक संक्षिप्त सूची है। उनकी अदम्य साहस और दृढ़ संकल्प के लिए उन्हें कई अन्य पुरस्कारों और सम्मानों से भी सम्मानित किया गया है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=|प्रारम्भिक=प्रारम्भिक1 |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{भारतीय जनता पार्टी}}&lt;br /&gt;
[[Category:राजनीतिज्ञ]][[Category:राजनेता]][[Category:भारतीय जनता पार्टी]][[Category:राजनीति कोश]][[Category:राजनीतिज्ञ]][[Category:चरित कोश]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Jeeteshvaishya</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%B6_%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%A3%E0%A5%8D%E0%A4%A1%E0%A5%87%E0%A4%AF&amp;diff=689521</id>
		<title>रत्नेश पाण्डेय</title>
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		<updated>2024-05-11T12:47:04Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Jeeteshvaishya: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;'''रत्नेश पाण्डेय''' ([[अंग्रेज़ी]]: ''Ratnesh Pandey'', जन्म- [[12 मई]], [[1985]], [[मध्य प्रदेश]]) एक भारतीय पर्वतारोही हैं, जिन्होंने 21 मई 2016 को विश्व के सबसे ऊँचे पर्वत शिखर [[माउंट एवरेस्ट]] पर चढ़ाई कर [[राष्ट्रगान]] ''जन गण मन'' गाने वाले प्रथम भारतीय है। इन्होंने [[यूरोप]], अफ्रीका महाद्वीप समेत 10 देशों में 21 से अधिक पर्वत शिखरों पर सफलतापूर्वक आरोहण किया हैं। इन्होंने दिव्यांगों और किन्नरों के दल को भी सफल पर्वतारोहण करा विश्व कीर्तिमान रचा। रत्नेश ने मोटरबाइक स्टंट के लिए गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स बनाया है  उन्हें नवंबर 2016 में मध्य प्रदेश सरकार द्वारा खेल अलंकरण पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 16 सितंबर 2023 को इन्हें [[मध्य प्रदेश]] का सर्वोच्च विक्रम पुरस्कार वर्ष 2021 के लिए प्राप्त हुआ जो कि साहसिक खेलों की श्रेणी में प्रथम बार दिया गया। 2022 में खेल एवं युवा मंत्रालय, [[भारत सरकार]] ने इन्हें फिट इंडिया चैंपियन नियुक्त किया हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== प्रारंभिक जीवन ==&lt;br /&gt;
रत्नेश सतना, [[मध्य प्रदेश]], [[भारत\\ से हैं। उन्होंने बैचलर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में स्नातक किया है और मास्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में पोस्ट ग्रेजुएट हैं। इन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग एंड एलाइड स्पोर्ट्स, मनाली में पर्वतारोहण का प्रशिक्षण प्राप्त किया व मास्टर ट्रेनर इन माउंटेनियरिंग का खिताब भी प्राप्त किया। वर्तमान में वह सतना में रहते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== करियर ==&lt;br /&gt;
रत्नेश पाण्डेय ने 21 मई 2016 को [[माउंट एवरेस्ट]] फतह किया, जहाँ उन्होंने माउंट एवरेस्ट के शिखर पर प्रथम बार भारतीय राष्ट्रगान [[जन गण मन]] गाकर इतिहास रचा सितंबर 2016 में, रत्नेश पाण्डेय ने इंटरनेशनल क्लाइंबिंग एंड माउंटेनियरिंग फेडरेशन द्वारा आयोजित एक पर्वतारोहण अभियान में ईरान के सबसे ऊंचे पर्वत माउंट दमावंद और इसके तीसरे सबसे ऊंचे पर्वत माउंट सबलान पर चढ़ाई की। अप्रैल 2015 [[नेपाल]] [[भूकम्प]] के वजह से वो एवरेस्ट चढ़ने में असफल रहे, जहाँ उनके साथ के 21 पर्वतारोहियों की मौत हो गई। तूफान में फंसने से उनका दल से संपर्क टूट गया। उस दौरान हुए हादसे में तीन दिन बाद नेपाली सेना का हेलीकॉप्टर द्वारा रत्नेश को सुरक्षित बेस कैंप लाया गया था। फिर वर्ष 2016 में पुनः प्रयास के बाद उन्होंने माउंट एवरेस्ट फतह करने में सफलता हासिल की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
5 दिसंबर 2015 को रत्नेश ने इंदौर में 32.3 किलोमीटर मोटरसाइकल की सीट के ऊपर खड़े होकर और दोनों हाँथ छोड़कर बाइक चलाई। दूसरी बार, उन्होंने बाइक के जरिए बगैर रुके 175 सर्किल बनाए। इसके अलावा उन्होंने पीछे की ओर मुँह करके बिना हैंडल पकड़े 14 किलोमीटर मोटर साइकिल चलाई है। मोटरसाइकिल की सीट पर खड़े होकर सबसे लंबी लगातार सवारी करने के लिए गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में इनका नाम आया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अगस्त 2018 में, रत्नेश ने दो बार माउंट एल्ब्रस (18,511 फीट) पर चढ़ाई की, साथ ही पूर्वी और पश्चिमी चोटियों पर भारत का ध्वज और मध्य प्रदेश के खेल और युवा कल्याण विभाग का झंडा फहराया। इन्होंने निहाल सरकार के साथ इटली में आयोजित UIAA आइस क्लाइंबिंग वर्ल्ड कप 2017 में भारत का प्रतिनिधित्व किया। रत्नेश ने 14 जुलाई 2021 को 14,980 फीट ऊंचे माउंट मेरु और 21 जुलाई 2021 को 19,340 फीट ऊंचे माउंट किलिमंजारो, तंजानिया की चढ़ाई की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
एक प्रशिक्षक के रूप में अक्टूबर 2020 में रत्नेश ने प्रथम किन्नरों के दल को पर्वतारोहण कराया। 25 किन्नरों के दल को हिमालय के शिखर पर चढ़ाया था जिसकी आधिकारिक पुष्टि भारतीय पर्वतारोहण संस्थान, दिल्ली ने की। इस अभियान को पाण्डेय ने किन्नर अखाड़ा की अध्यक्ष आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी और राष्ट्रीय ट्रांसजेंडर कमीशन के आर्यन पाशा के साथ मिलकर पूर्ण किया। वर्ष 2021 में हरियाणा के स्कूली शिक्षा विभाग के पर्वतारोहण अभियान में सहभागिता निभाते हुए 25 दिव्यांगों को सफलता पूर्वक पर्वतारोहण कराया। रत्नेश के कार्यों को हरियाणा के मुख्यमंत्री  मनोहर लाल खट्टर और स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा सम्मानित किया गया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== राजनीति ==&lt;br /&gt;
रत्नेश पाण्डेय [[भारतीय जनता पार्टी]] के नेता हैं। सितंबर 2023 में रत्नेश पाण्डेय ने भाजपा की रीति-नीति एवं प्रधानमंत्री [[नरेन्द्र मोदी]], मुख्यमंत्री [[शिवराजसिंह चौहान]] के विकास कार्यों से प्रभावित होकर भाजपा मध्य प्रदेश अध्यक्ष और सांसद वीडी शर्मा के समक्ष भाजपा की सदस्यता ग्रहण की। प्रदेश अध्यक्ष VD शर्मा ने रत्नेश पाण्डेय को भाजपा की प्राथमिक सदस्यता दिलाई।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== सामाजिक कार्य  ==&lt;br /&gt;
अपने पर्वतारोहण कारनामों से इतर, रत्नेश पाण्डेय अपनी संस्था &amp;quot;रत्नेश पाण्डेय फाउंडेशन&amp;quot; के माध्यम से विभिन्न सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं। यह फाउंडेशन कई तरह की सामाजिक समस्याओं का समाधान करने का प्रयास करता है। उदाहरण के लिए, उन्होंने [[कोविड]]-19 के कारण माता-पिता खो चुकी एक महिला की आर्थिक मदद कर उसके होम लोन का भुगतान करवाया। साथ ही, उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद के तत्वावधान में आयोजित &amp;quot;यूथ फॉर राम कैम्पेन&amp;quot; द्वारा आयोजित 10,000 किलोमीटर की बाइक रैली में भाग लिया। यह रैली अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए जागरूकता और धन उगाहने के लिए निकाली गई थी। उन्होंने धार्मिक निष्ठा का प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रीय ध्वज के साथ माउंट एवरेस्ट पर भगवा ध्वज भी फहराया था। कोविड-19 महामारी के दौरान, पाण्डेय ने प्रतिदिन 500 गायों को भोजन कराने का सराहनीय कार्य किया, जिसके लिए उन्हें वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स से चौथा पुरस्कार प्राप्त हुआ। इसके अलावा, वह युवाओं को प्रेरित करने और उन्हें सामाजिक कार्यों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न कार्यक्रमों का भी आयोजन करते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== पुरस्कार और सम्मान ==&lt;br /&gt;
रत्नेश पाण्डेय को उनकी उत्कृष्ट उपलब्धियों के लिए कई पुरस्कारों और सम्मानों से सम्मानित किया गया है।&lt;br /&gt;
* नवंबर 2016: मध्य प्रदेश सरकार द्वारा खेल अलंकरण पुरस्कार से सम्मानित।&lt;br /&gt;
* 2015: मध्य प्रदेश सरकार द्वारा मध्य प्रदेश राज्य का प्रथम आधिकारिक पर्वतारोही घोषित किया गया।&lt;br /&gt;
* सतना स्मार्ट सिटी: रत्नेश को सतना स्मार्ट सिटी द्वारा ब्रांड एंबेसडर के रूप में नियुक्त किया गया। वे खेल और शिक्षा पर ध्यान केंद्रित करते हुए राज्य के सरकारी स्कूलों और कॉलेजों से जुड़े हुए हैं।&lt;br /&gt;
* अप्रैल 2017: असम पर्यटन विकास निगम द्वारा अंबुबाची मेले के ब्रांड एंबेसडर के रूप में नियुक्त किया गया।&lt;br /&gt;
* 16 सितंबर 2023: मध्य प्रदेश का सर्वोच्च विक्रम पुरस्कार वर्ष 2021 प्राप्त किया, जो साहसिक खेलों की श्रेणी में पहली बार दिया गया था।&lt;br /&gt;
* अक्टूबर 2022: खेल एवं युवा मंत्रालय, [[भारत सरकार]] द्वारा फिट इंडिया चैंपियन नियुक्त किया गया।&lt;br /&gt;
यह रत्नेश पाण्डेय को प्राप्त पुरस्कारों और सम्मानों की एक संक्षिप्त सूची है। उनकी अदम्य साहस और दृढ़ संकल्प के लिए उन्हें कई अन्य पुरस्कारों और सम्मानों से भी सम्मानित किया गया है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=|प्रारम्भिक=प्रारम्भिक1 |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{भारत के प्रसिद्ध खिलाड़ी}}&lt;br /&gt;
{{भारतीय जनता पार्टी}}&lt;br /&gt;
[[Category:भारतीय खिलाड़ी]][[Category:पुरुष खिलाड़ी]][[Category:प्रसिद्ध व्यक्तित्व]][[Category:चरित कोश]][[Category:खेलकूद कोश]][[Category:राजनीतिज्ञ]][[Category:राजनेता]][[Category:भारतीय जनता पार्टी]][[Category:राजनीति कोश]][[Category:राजनीतिज्ञ]][[Category:चरित कोश]][[Category:प्रसिद्ध व्यक्तित्व कोश]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Jeeteshvaishya</name></author>
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		<title>रत्नेश पाण्डेय</title>
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		<updated>2024-05-11T12:43:12Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Jeeteshvaishya: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;'''रत्नेश पाण्डेय''' ([[अंग्रेज़ी]]: ''Ratnesh Pandey'', जन्म- [[12 मई]], [[1985]], [[मध्य प्रदेश]]) एक भारतीय पर्वतारोही हैं, जिन्होंने 21 मई 2016 को विश्व के सबसे ऊँचे पर्वत शिखर माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई कर राष्ट्रगान जन गण मन गाने वाले प्रथम भारतीय है। इन्होंने [[यूरोप]], अफ्रीका महाद्वीप समेत 10 देशों में 21 से अधिक पर्वत शिखरों पर सफलतापूर्वक आरोहण किया हैं। इन्होंने दिव्यांगों और किन्नरों के दल को भी सफल पर्वतारोहण करा विश्व कीर्तिमान रचा। रत्नेश ने मोटरबाइक स्टंट के लिए गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स बनाया है  उन्हें नवंबर 2016 में मध्य प्रदेश सरकार द्वारा खेल अलंकरण पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 16 सितंबर 2023 को इन्हें [[मध्य प्रदेश]] का सर्वोच्च विक्रम पुरस्कार वर्ष 2021 के लिए प्राप्त हुआ जो कि साहसिक खेलों की श्रेणी में प्रथम बार दिया गया। 2022 में खेल एवं युवा मंत्रालय, [[भारत सरकार]] ने इन्हें फिट इंडिया चैंपियन नियुक्त किया हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== प्रारंभिक जीवन ==&lt;br /&gt;
रत्नेश सतना, मध्य प्रदेश, भारत से हैं। उन्होंने बैचलर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में स्नातक किया है और मास्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में पोस्ट ग्रेजुएट हैं। इन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग एंड एलाइड स्पोर्ट्स, मनाली में पर्वतारोहण का प्रशिक्षण प्राप्त किया व मास्टर ट्रेनर इन माउंटेनियरिंग का खिताब भी प्राप्त किया। वर्तमान में वह सतना में रहते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== करियर ==&lt;br /&gt;
रत्नेश पाण्डेय ने 21 मई 2016 को माउंट एवरेस्ट फतह किया, जहाँ उन्होंने माउंट एवरेस्ट के शिखर पर प्रथम बार भारतीय राष्ट्रगान जन गण मन गाकर इतिहास रचा सितंबर 2016 में, पाण्डेय ने इंटरनेशनल क्लाइंबिंग एंड माउंटेनियरिंग फेडरेशन द्वारा आयोजित एक पर्वतारोहण अभियान में ईरान के सबसे ऊंचे पर्वत माउंट दमावंद और इसके तीसरे सबसे ऊंचे पर्वत माउंट सबलान पर चढ़ाई की। अप्रैल 2015 नेपाल भूकम्प के वजह से वो एवरेस्ट चढ़ने में असफल रहे, जहाँ उनके साथ के 21 पर्वतारोहियों की मौत हो गई। तूफान में फंसने से उनका दल से संपर्क टूट गया। उस दौरान हुए हादसे में तीन दिन बाद नेपाली सेना का हेलीकॉप्टर द्वारा रत्नेश को सुरक्षित बेस कैंप लाया गया था। फिर वर्ष 2016 में पुनः प्रयास के बाद उन्होंने माउंट एवरेस्ट फतह करने में सफलता हासिल की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
5 दिसंबर 2015 को रत्नेश ने इंदौर में 32.3 किलोमीटर मोटरसाइकल की सीट के ऊपर खड़े होकर और दोनों हाँथ छोड़कर बाइक चलाई। दूसरी बार, उन्होंने बाइक के जरिए बगैर रुके 175 सर्किल बनाए। इसके अलावा उन्होंने पीछे की ओर मुँह करके बिना हैंडल पकड़े 14 किलोमीटर मोटर साइकिल चलाई है। मोटरसाइकिल की सीट पर खड़े होकर सबसे लंबी लगातार सवारी करने के लिए गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में इनका नाम आया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अगस्त 2018 में, रत्नेश ने दो बार माउंट एल्ब्रस (18,511 फीट) पर चढ़ाई की, साथ ही पूर्वी और पश्चिमी चोटियों पर भारत का ध्वज और मध्य प्रदेश के खेल और युवा कल्याण विभाग का झंडा फहराया। इन्होंने निहाल सरकार के साथ इटली में आयोजित UIAA आइस क्लाइंबिंग वर्ल्ड कप 2017 में भारत का प्रतिनिधित्व किया। रत्नेश ने 14 जुलाई 2021 को 14,980 फीट ऊंचे माउंट मेरु और 21 जुलाई 2021 को 19,340 फीट ऊंचे माउंट किलिमंजारो, तंजानिया की चढ़ाई की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
एक प्रशिक्षक के रूप में अक्टूबर 2020 में रत्नेश ने प्रथम किन्नरों के दल को पर्वतारोहण कराया। 25 किन्नरों के दल को हिमालय के शिखर पर चढ़ाया था जिसकी आधिकारिक पुष्टि भारतीय पर्वतारोहण संस्थान, दिल्ली ने की। इस अभियान को पाण्डेय ने किन्नर अखाड़ा की अध्यक्ष आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी और राष्ट्रीय ट्रांसजेंडर कमीशन के आर्यन पाशा के साथ मिलकर पूर्ण किया। वर्ष 2021 में हरियाणा के स्कूली शिक्षा विभाग के पर्वतारोहण अभियान में सहभागिता निभाते हुए 25 दिव्यांगों को सफलता पूर्वक पर्वतारोहण कराया। रत्नेश के कार्यों को हरियाणा के मुख्यमंत्री  मनोहर लाल खट्टर और स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा सम्मानित किया गया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== राजनीति ==&lt;br /&gt;
रत्नेश पाण्डेय [[भारतीय जनता पार्टी]] के नेता हैं। सितंबर 2023 में रत्नेश पाण्डेय ने भाजपा की रीति-नीति एवं प्रधानमंत्री [[नरेन्द्र मोदी]], मुख्यमंत्री [[शिवराज सिंह चौहान]] के विकास कार्यों से प्रभावित होकर भाजपा मध्य प्रदेश अध्यक्ष और सांसद वीडी शर्मा के समक्ष भाजपा की सदस्यता ग्रहण की। प्रदेश अध्यक्ष VD शर्मा ने रत्नेश पाण्डेय को भाजपा की प्राथमिक सदस्यता दिलाई।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== सामाजिक कार्य  ==&lt;br /&gt;
अपने पर्वतारोहण कारनामों से इतर, रत्नेश पाण्डेय अपनी संस्था &amp;quot;रत्नेश पाण्डेय फाउंडेशन&amp;quot; के माध्यम से विभिन्न सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं। यह फाउंडेशन कई तरह की सामाजिक समस्याओं का समाधान करने का प्रयास करता है। उदाहरण के लिए, उन्होंने कोविड-19 के कारण माता-पिता खो चुकी एक महिला की आर्थिक मदद कर उसके होम लोन का भुगतान करवाया। साथ ही, उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद के तत्वावधान में आयोजित &amp;quot;यूथ फॉर राम कैम्पेन&amp;quot; द्वारा आयोजित 10,000 किलोमीटर की बाइक रैली में भाग लिया। यह रैली अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए जागरूकता और धन उगाहने के लिए निकाली गई थी। उन्होंने धार्मिक निष्ठा का प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रीय ध्वज के साथ माउंट एवरेस्ट पर भगवा ध्वज भी फहराया था। कोविड-19 महामारी के दौरान, पाण्डेय ने प्रतिदिन 500 गायों को भोजन कराने का सराहनीय कार्य किया, जिसके लिए उन्हें वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स से चौथा पुरस्कार प्राप्त हुआ। इसके अलावा, वह युवाओं को प्रेरित करने और उन्हें सामाजिक कार्यों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न कार्यक्रमों का भी आयोजन करते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== पुरस्कार और सम्मान ==&lt;br /&gt;
रत्नेश पाण्डेय को उनकी उत्कृष्ट उपलब्धियों के लिए कई पुरस्कारों और सम्मानों से सम्मानित किया गया है।&lt;br /&gt;
* नवंबर 2016: मध्य प्रदेश सरकार द्वारा खेल अलंकरण पुरस्कार से सम्मानित।&lt;br /&gt;
* 2015: मध्य प्रदेश सरकार द्वारा मध्य प्रदेश राज्य का प्रथम आधिकारिक पर्वतारोही घोषित किया गया।&lt;br /&gt;
* सतना स्मार्ट सिटी: रत्नेश को सतना स्मार्ट सिटी द्वारा ब्रांड एंबेसडर के रूप में नियुक्त किया गया। वे खेल और शिक्षा पर ध्यान केंद्रित करते हुए राज्य के सरकारी स्कूलों और कॉलेजों से जुड़े हुए हैं।&lt;br /&gt;
* अप्रैल 2017: असम पर्यटन विकास निगम द्वारा अंबुबाची मेले के ब्रांड एंबेसडर के रूप में नियुक्त किया गया।&lt;br /&gt;
* 16 सितंबर 2023: मध्य प्रदेश का सर्वोच्च विक्रम पुरस्कार वर्ष 2021 प्राप्त किया, जो साहसिक खेलों की श्रेणी में पहली बार दिया गया था।&lt;br /&gt;
* अक्टूबर 2022: खेल एवं युवा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा फिट इंडिया चैंपियन नियुक्त किया गया।&lt;br /&gt;
यह रत्नेश पाण्डेय को प्राप्त पुरस्कारों और सम्मानों की एक संक्षिप्त सूची है। उनकी अदम्य साहस और दृढ़ संकल्प के लिए उन्हें कई अन्य पुरस्कारों और सम्मानों से भी सम्मानित किया गया है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=|प्रारम्भिक=प्रारम्भिक1 |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{भारत के प्रसिद्ध खिलाड़ी}}&lt;br /&gt;
{{भारतीय जनता पार्टी}}&lt;br /&gt;
[[Category:भारतीय खिलाड़ी]][[Category:पुरुष खिलाड़ी]][[Category:प्रसिद्ध व्यक्तित्व]][[Category:चरित कोश]][[Category:खेलकूद कोश]][[Category:राजनीतिज्ञ]][[Category:राजनेता]][[Category:भारतीय जनता पार्टी]][[Category:राजनीति कोश]][[Category:राजनीतिज्ञ]][[Category:चरित कोश]][[Category:प्रसिद्ध व्यक्तित्व कोश]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Jeeteshvaishya</name></author>
	</entry>
	<entry>
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		<title>रत्नेश पाण्डेय</title>
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		<updated>2024-05-11T12:42:33Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Jeeteshvaishya: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;'''रत्नेश पाण्डेय''' ([[अंग्रेज़ी]]: ''Ratnesh Pandey'', जन्म- [[12 मई]], [[1985]], [[मध्य प्रदेश]]) एक भारतीय पर्वतारोही हैं, जिन्होंने 21 मई 2016 को विश्व के सबसे ऊँचे पर्वत शिखर माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई कर राष्ट्रगान जन गण मन गाने वाले प्रथम भारतीय है। इन्होंने [[यूरोप]], अफ्रीका महाद्वीप समेत 10 देशों में 21 से अधिक पर्वत शिखरों पर सफलतापूर्वक आरोहण किया हैं। इन्होंने दिव्यांगों और किन्नरों के दल को भी सफल पर्वतारोहण करा विश्व कीर्तिमान रचा। रत्नेश ने मोटरबाइक स्टंट के लिए गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स बनाया है  उन्हें नवंबर 2016 में मध्य प्रदेश सरकार द्वारा खेल अलंकरण पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 16 सितंबर 2023 को इन्हें [[मध्य प्रदेश]] का सर्वोच्च विक्रम पुरस्कार वर्ष 2021 के लिए प्राप्त हुआ जो कि साहसिक खेलों की श्रेणी में प्रथम बार दिया गया। 2022 में खेल एवं युवा मंत्रालय, [[भारत सरकार]] ने इन्हें फिट इंडिया चैंपियन नियुक्त किया हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== प्रारंभिक जीवन ==&lt;br /&gt;
रत्नेश सतना, मध्य प्रदेश, भारत से हैं। उन्होंने बैचलर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में स्नातक किया है और मास्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में पोस्ट ग्रेजुएट हैं। इन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग एंड एलाइड स्पोर्ट्स, मनाली में पर्वतारोहण का प्रशिक्षण प्राप्त किया व मास्टर ट्रेनर इन माउंटेनियरिंग का खिताब भी प्राप्त किया। वर्तमान में वह सतना में रहते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== करियर ==&lt;br /&gt;
रत्नेश पाण्डेय ने 21 मई 2016 को माउंट एवरेस्ट फतह किया, जहाँ उन्होंने माउंट एवरेस्ट के शिखर पर प्रथम बार भारतीय राष्ट्रगान जन गण मन गाकर इतिहास रचा सितंबर 2016 में, पाण्डेय ने इंटरनेशनल क्लाइंबिंग एंड माउंटेनियरिंग फेडरेशन द्वारा आयोजित एक पर्वतारोहण अभियान में ईरान के सबसे ऊंचे पर्वत माउंट दमावंद और इसके तीसरे सबसे ऊंचे पर्वत माउंट सबलान पर चढ़ाई की। अप्रैल 2015 नेपाल भूकम्प के वजह से वो एवरेस्ट चढ़ने में असफल रहे, जहाँ उनके साथ के 21 पर्वतारोहियों की मौत हो गई। तूफान में फंसने से उनका दल से संपर्क टूट गया। उस दौरान हुए हादसे में तीन दिन बाद नेपाली सेना का हेलीकॉप्टर द्वारा रत्नेश को सुरक्षित बेस कैंप लाया गया था। फिर वर्ष 2016 में पुनः प्रयास के बाद उन्होंने माउंट एवरेस्ट फतह करने में सफलता हासिल की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
5 दिसंबर 2015 को रत्नेश ने इंदौर में 32.3 किलोमीटर मोटरसाइकल की सीट के ऊपर खड़े होकर और दोनों हाँथ छोड़कर बाइक चलाई। दूसरी बार, उन्होंने बाइक के जरिए बगैर रुके 175 सर्किल बनाए। इसके अलावा उन्होंने पीछे की ओर मुँह करके बिना हैंडल पकड़े 14 किलोमीटर मोटर साइकिल चलाई है। मोटरसाइकिल की सीट पर खड़े होकर सबसे लंबी लगातार सवारी करने के लिए गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में इनका नाम आया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अगस्त 2018 में, रत्नेश ने दो बार माउंट एल्ब्रस (18,511 फीट) पर चढ़ाई की, साथ ही पूर्वी और पश्चिमी चोटियों पर भारत का ध्वज और मध्य प्रदेश के खेल और युवा कल्याण विभाग का झंडा फहराया। इन्होंने निहाल सरकार के साथ इटली में आयोजित UIAA आइस क्लाइंबिंग वर्ल्ड कप 2017 में भारत का प्रतिनिधित्व किया। रत्नेश ने 14 जुलाई 2021 को 14,980 फीट ऊंचे माउंट मेरु और 21 जुलाई 2021 को 19,340 फीट ऊंचे माउंट किलिमंजारो, तंजानिया की चढ़ाई की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
एक प्रशिक्षक के रूप में अक्टूबर 2020 में रत्नेश ने प्रथम किन्नरों के दल को पर्वतारोहण कराया। 25 किन्नरों के दल को हिमालय के शिखर पर चढ़ाया था जिसकी आधिकारिक पुष्टि भारतीय पर्वतारोहण संस्थान, दिल्ली ने की। इस अभियान को पाण्डेय ने किन्नर अखाड़ा की अध्यक्ष आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी और राष्ट्रीय ट्रांसजेंडर कमीशन के आर्यन पाशा के साथ मिलकर पूर्ण किया। वर्ष 2021 में हरियाणा के स्कूली शिक्षा विभाग के पर्वतारोहण अभियान में सहभागिता निभाते हुए 25 दिव्यांगों को सफलता पूर्वक पर्वतारोहण कराया। रत्नेश के कार्यों को हरियाणा के मुख्यमंत्री  मनोहर लाल खट्टर और स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा सम्मानित किया गया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== राजनीति ==&lt;br /&gt;
रत्नेश पाण्डेय [[भारतीय जनता पार्टी]] के नेता हैं। सितंबर 2023 में रत्नेश पाण्डेय ने भाजपा की रीति-नीति एवं प्रधानमंत्री [[नरेन्द्र मोदी]], मुख्यमंत्री [[शिवराजसिंह चौहान]] के विकास कार्यों से प्रभावित होकर भाजपा मध्य प्रदेश अध्यक्ष और सांसद वीडी शर्मा के समक्ष भाजपा की सदस्यता ग्रहण की। प्रदेश अध्यक्ष VD शर्मा ने रत्नेश पाण्डेय को भाजपा की प्राथमिक सदस्यता दिलाई।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== सामाजिक कार्य  ==&lt;br /&gt;
अपने पर्वतारोहण कारनामों से इतर, रत्नेश पाण्डेय अपनी संस्था &amp;quot;रत्नेश पाण्डेय फाउंडेशन&amp;quot; के माध्यम से विभिन्न सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं। यह फाउंडेशन कई तरह की सामाजिक समस्याओं का समाधान करने का प्रयास करता है। उदाहरण के लिए, उन्होंने कोविड-19 के कारण माता-पिता खो चुकी एक महिला की आर्थिक मदद कर उसके होम लोन का भुगतान करवाया। साथ ही, उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद के तत्वावधान में आयोजित &amp;quot;यूथ फॉर राम कैम्पेन&amp;quot; द्वारा आयोजित 10,000 किलोमीटर की बाइक रैली में भाग लिया। यह रैली अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए जागरूकता और धन उगाहने के लिए निकाली गई थी। उन्होंने धार्मिक निष्ठा का प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रीय ध्वज के साथ माउंट एवरेस्ट पर भगवा ध्वज भी फहराया था। कोविड-19 महामारी के दौरान, पाण्डेय ने प्रतिदिन 500 गायों को भोजन कराने का सराहनीय कार्य किया, जिसके लिए उन्हें वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स से चौथा पुरस्कार प्राप्त हुआ। इसके अलावा, वह युवाओं को प्रेरित करने और उन्हें सामाजिक कार्यों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न कार्यक्रमों का भी आयोजन करते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== पुरस्कार और सम्मान ==&lt;br /&gt;
रत्नेश पाण्डेय को उनकी उत्कृष्ट उपलब्धियों के लिए कई पुरस्कारों और सम्मानों से सम्मानित किया गया है।&lt;br /&gt;
* नवंबर 2016: मध्य प्रदेश सरकार द्वारा खेल अलंकरण पुरस्कार से सम्मानित।&lt;br /&gt;
* 2015: मध्य प्रदेश सरकार द्वारा मध्य प्रदेश राज्य का प्रथम आधिकारिक पर्वतारोही घोषित किया गया।&lt;br /&gt;
* सतना स्मार्ट सिटी: रत्नेश को सतना स्मार्ट सिटी द्वारा ब्रांड एंबेसडर के रूप में नियुक्त किया गया। वे खेल और शिक्षा पर ध्यान केंद्रित करते हुए राज्य के सरकारी स्कूलों और कॉलेजों से जुड़े हुए हैं।&lt;br /&gt;
* अप्रैल 2017: असम पर्यटन विकास निगम द्वारा अंबुबाची मेले के ब्रांड एंबेसडर के रूप में नियुक्त किया गया।&lt;br /&gt;
* 16 सितंबर 2023: मध्य प्रदेश का सर्वोच्च विक्रम पुरस्कार वर्ष 2021 प्राप्त किया, जो साहसिक खेलों की श्रेणी में पहली बार दिया गया था।&lt;br /&gt;
* अक्टूबर 2022: खेल एवं युवा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा फिट इंडिया चैंपियन नियुक्त किया गया।&lt;br /&gt;
यह रत्नेश पाण्डेय को प्राप्त पुरस्कारों और सम्मानों की एक संक्षिप्त सूची है। उनकी अदम्य साहस और दृढ़ संकल्प के लिए उन्हें कई अन्य पुरस्कारों और सम्मानों से भी सम्मानित किया गया है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=|प्रारम्भिक=प्रारम्भिक1 |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{भारत के प्रसिद्ध खिलाड़ी}}&lt;br /&gt;
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__INDEX__&lt;br /&gt;
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		<author><name>Jeeteshvaishya</name></author>
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		<updated>2024-05-11T12:34:27Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Jeeteshvaishya: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;'''रत्नेश पाण्डेय''' ([[अंग्रेज़ी]]: ''Ratnesh Pandey'', जन्म- [[12 मई]], [[1985]], [[मध्य प्रदेश]]) एक भारतीय पर्वतारोही हैं, जिन्होंने 21 मई 2016 को विश्व के सबसे ऊँचे पर्वत शिखर माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई कर राष्ट्रगान जन गण मन गाने वाले प्रथम भारतीय है। इन्होंने [[यूरोप]], अफ्रीका महाद्वीप समेत 10 देशों में 21 से अधिक पर्वत शिखरों पर सफलतापूर्वक आरोहण किया हैं। इन्होंने दिव्यांगों और किन्नरों के दल को भी सफल पर्वतारोहण करा विश्व कीर्तिमान रचा। रत्नेश ने मोटरबाइक स्टंट के लिए गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स बनाया है  उन्हें नवंबर 2016 में मध्य प्रदेश सरकार द्वारा खेल अलंकरण पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 16 सितंबर 2023 को इन्हें [[मध्य प्रदेश]] का सर्वोच्च विक्रम पुरस्कार वर्ष 2021 के लिए प्राप्त हुआ जो कि साहसिक खेलों की श्रेणी में प्रथम बार दिया गया। 2022 में खेल एवं युवा मंत्रालय, [[भारत सरकार]] ने इन्हें फिट इंडिया चैंपियन नियुक्त किया हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== प्रारंभिक जीवन ==&lt;br /&gt;
रत्नेश सतना, मध्य प्रदेश, भारत से हैं। उन्होंने बैचलर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में स्नातक किया है और मास्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में पोस्ट ग्रेजुएट हैं। इन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग एंड एलाइड स्पोर्ट्स, मनाली में पर्वतारोहण का प्रशिक्षण प्राप्त किया व मास्टर ट्रेनर इन माउंटेनियरिंग का खिताब भी प्राप्त किया। वर्तमान में वह सतना में रहते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== करियर ==&lt;br /&gt;
रत्नेश पाण्डेय ने 21 मई 2016 को माउंट एवरेस्ट फतह किया, जहाँ उन्होंने माउंट एवरेस्ट के शिखर पर प्रथम बार भारतीय राष्ट्रगान जन गण मन गाकर इतिहास रचा सितंबर 2016 में, पाण्डेय ने इंटरनेशनल क्लाइंबिंग एंड माउंटेनियरिंग फेडरेशन द्वारा आयोजित एक पर्वतारोहण अभियान में ईरान के सबसे ऊंचे पर्वत माउंट दमावंद और इसके तीसरे सबसे ऊंचे पर्वत माउंट सबलान पर चढ़ाई की। अप्रैल 2015 नेपाल भूकम्प के वजह से वो एवरेस्ट चढ़ने में असफल रहे, जहाँ उनके साथ के 21 पर्वतारोहियों की मौत हो गई। तूफान में फंसने से उनका दल से संपर्क टूट गया। उस दौरान हुए हादसे में तीन दिन बाद नेपाली सेना का हेलीकॉप्टर द्वारा रत्नेश को सुरक्षित बेस कैंप लाया गया था। फिर वर्ष 2016 में पुनः प्रयास के बाद उन्होंने माउंट एवरेस्ट फतह करने में सफलता हासिल की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
5 दिसंबर 2015 को रत्नेश ने इंदौर में 32.3 किलोमीटर मोटरसाइकल की सीट के ऊपर खड़े होकर और दोनों हाँथ छोड़कर बाइक चलाई। दूसरी बार, उन्होंने बाइक के जरिए बगैर रुके 175 सर्किल बनाए। इसके अलावा उन्होंने पीछे की ओर मुँह करके बिना हैंडल पकड़े 14 किलोमीटर मोटर साइकिल चलाई है। मोटरसाइकिल की सीट पर खड़े होकर सबसे लंबी लगातार सवारी करने के लिए गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में इनका नाम आया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अगस्त 2018 में, रत्नेश ने दो बार माउंट एल्ब्रस (18,511 फीट) पर चढ़ाई की, साथ ही पूर्वी और पश्चिमी चोटियों पर भारत का ध्वज और मध्य प्रदेश के खेल और युवा कल्याण विभाग का झंडा फहराया। इन्होंने निहाल सरकार के साथ इटली में आयोजित UIAA आइस क्लाइंबिंग वर्ल्ड कप 2017 में भारत का प्रतिनिधित्व किया। रत्नेश ने 14 जुलाई 2021 को 14,980 फीट ऊंचे माउंट मेरु और 21 जुलाई 2021 को 19,340 फीट ऊंचे माउंट किलिमंजारो, तंजानिया की चढ़ाई की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
एक प्रशिक्षक के रूप में अक्टूबर 2020 में रत्नेश ने प्रथम किन्नरों के दल को पर्वतारोहण कराया। 25 किन्नरों के दल को हिमालय के शिखर पर चढ़ाया था जिसकी आधिकारिक पुष्टि भारतीय पर्वतारोहण संस्थान, दिल्ली ने की। इस अभियान को पाण्डेय ने किन्नर अखाड़ा की अध्यक्ष आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी और राष्ट्रीय ट्रांसजेंडर कमीशन के आर्यन पाशा के साथ मिलकर पूर्ण किया। वर्ष 2021 में हरियाणा के स्कूली शिक्षा विभाग के पर्वतारोहण अभियान में सहभागिता निभाते हुए 25 दिव्यांगों को सफलता पूर्वक पर्वतारोहण कराया। रत्नेश के कार्यों को हरियाणा के मुख्यमंत्री  मनोहर लाल खट्टर और स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा सम्मानित किया गया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== राजनीति ==&lt;br /&gt;
रत्नेश पाण्डेय [[भारतीय जनता पार्टी]] के नेता हैं। सितंबर 2023 में रत्नेश पाण्डेय ने भाजपा की रीति-नीति एवं प्रधानमंत्री [[नरेन्द्र मोदी]], मुख्यमंत्री [[शिवराजसिंह चौहान]] के विकास कार्यों से प्रभावित होकर भाजपा मध्य प्रदेश अध्यक्ष और सांसद वीडी शर्मा के समक्ष भाजपा की सदस्यता ग्रहण की। प्रदेश अध्यक्ष VD शर्मा ने रत्नेश पाण्डेय को भाजपा की प्राथमिक सदस्यता दिलाई।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== सामाजिक कार्य  ==&lt;br /&gt;
अपने पर्वतारोहण कारनामों से इतर, रत्नेश पाण्डेय अपनी संस्था &amp;quot;रत्नेश पाण्डेय फाउंडेशन&amp;quot; के माध्यम से विभिन्न सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं। यह फाउंडेशन कई तरह की सामाजिक समस्याओं का समाधान करने का प्रयास करता है। उदाहरण के लिए, उन्होंने कोविड-19 के कारण माता-पिता खो चुकी एक महिला की आर्थिक मदद कर उसके होम लोन का भुगतान करवाया। साथ ही, उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद के तत्वावधान में आयोजित &amp;quot;यूथ फॉर राम कैम्पेन&amp;quot; द्वारा आयोजित 10,000 किलोमीटर की बाइक रैली में भाग लिया। यह रैली अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए जागरूकता और धन उगाहने के लिए निकाली गई थी। उन्होंने धार्मिक निष्ठा का प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रीय ध्वज के साथ माउंट एवरेस्ट पर भगवा ध्वज भी फहराया था। कोविड-19 महामारी के दौरान, पाण्डेय ने प्रतिदिन 500 गायों को भोजन कराने का सराहनीय कार्य किया, जिसके लिए उन्हें वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स से चौथा पुरस्कार प्राप्त हुआ। इसके अलावा, वह युवाओं को प्रेरित करने और उन्हें सामाजिक कार्यों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न कार्यक्रमों का भी आयोजन करते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== पुरस्कार और सम्मान ==&lt;br /&gt;
रत्नेश पाण्डेय को उनकी उत्कृष्ट उपलब्धियों के लिए कई पुरस्कारों और सम्मानों से सम्मानित किया गया है।&lt;br /&gt;
* नवंबर 2016: मध्य प्रदेश सरकार द्वारा खेल अलंकरण पुरस्कार से सम्मानित।&lt;br /&gt;
* 2015: मध्य प्रदेश सरकार द्वारा मध्य प्रदेश राज्य का प्रथम आधिकारिक पर्वतारोही घोषित किया गया।&lt;br /&gt;
* सतना स्मार्ट सिटी: रत्नेश को सतना स्मार्ट सिटी द्वारा ब्रांड एंबेसडर के रूप में नियुक्त किया गया। वे खेल और शिक्षा पर ध्यान केंद्रित करते हुए राज्य के सरकारी स्कूलों और कॉलेजों से जुड़े हुए हैं।&lt;br /&gt;
* अप्रैल 2017: असम पर्यटन विकास निगम द्वारा अंबुबाची मेले के ब्रांड एंबेसडर के रूप में नियुक्त किया गया।&lt;br /&gt;
* 16 सितंबर 2023: मध्य प्रदेश का सर्वोच्च विक्रम पुरस्कार वर्ष 2021 प्राप्त किया, जो साहसिक खेलों की श्रेणी में पहली बार दिया गया था।&lt;br /&gt;
* अक्टूबर 2022: खेल एवं युवा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा फिट इंडिया चैंपियन नियुक्त किया गया।&lt;br /&gt;
यह रत्नेश पाण्डेय को प्राप्त पुरस्कारों और सम्मानों की एक संक्षिप्त सूची है। उनकी अदम्य साहस और दृढ़ संकल्प के लिए उन्हें कई अन्य पुरस्कारों और सम्मानों से भी सम्मानित किया गया है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=|प्रारम्भिक=प्रारम्भिक1 |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{भारतीय जनता पार्टी}}&lt;br /&gt;
[[Category:राजनीतिज्ञ]][[Category:राजनेता]][[Category:भारतीय जनता पार्टी]][[Category:राजनीति कोश]][[Category:राजनीतिज्ञ]][[Category:चरित कोश]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
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		<title>रत्नेश पाण्डेय</title>
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		<updated>2024-05-11T12:27:58Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Jeeteshvaishya: ''''रत्नेश पाण्डेय''' (अंग्रेज़ी: ''Ratnesh Pandey'', जन्म- 12 मई, 19...' के साथ नया पृष्ठ बनाया&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;'''रत्नेश पाण्डेय''' ([[अंग्रेज़ी]]: ''Ratnesh Pandey'', जन्म- [[12 मई]], [[1985]], [[मध्य प्रदेश]]) एक भारतीय पर्वतारोही हैं, जिन्होंने 21 मई 2016 को विश्व के सबसे ऊँचे पर्वत शिखर माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई कर राष्ट्रगान जन गण मन गाने वाले प्रथम भारतीय है। इन्होंने [[यूरोप]], अफ्रीका महाद्वीप समेत 10 देशों में 21 से अधिक पर्वत शिखरों पर सफलतापूर्वक आरोहण किया हैं। इन्होंने दिव्यांगों और किन्नरों के दल को भी सफल पर्वतारोहण करा विश्व कीर्तिमान रचा। रत्नेश ने मोटरबाइक स्टंट के लिए गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स बनाया है  उन्हें नवंबर 2016 में मध्य प्रदेश सरकार द्वारा खेल अलंकरण पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 16 सितंबर 2023 को इन्हें [[मध्य प्रदेश]] का सर्वोच्च विक्रम पुरस्कार वर्ष 2021 के लिए प्राप्त हुआ जो कि साहसिक खेलों की श्रेणी में प्रथम बार दिया गया। 2022 में खेल एवं युवा मंत्रालय, [[भारत सरकार]] ने इन्हें फिट इंडिया चैंपियन नियुक्त किया हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== प्रारंभिक जीवन ==&lt;br /&gt;
रत्नेश सतना, मध्य प्रदेश, भारत से हैं। उन्होंने बैचलर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में स्नातक किया है और मास्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में पोस्ट ग्रेजुएट हैं। इन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग एंड एलाइड स्पोर्ट्स, मनाली में पर्वतारोहण का प्रशिक्षण प्राप्त किया व मास्टर ट्रेनर इन माउंटेनियरिंग का खिताब भी प्राप्त किया। वर्तमान में वह सतना में रहते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== करियर ==&lt;br /&gt;
रत्नेश पाण्डेय ने 21 मई 2016 को माउंट एवरेस्ट फतह किया, जहाँ उन्होंने माउंट एवरेस्ट के शिखर पर प्रथम बार भारतीय राष्ट्रगान जन गण मन गाकर इतिहास रचा सितंबर 2016 में, पाण्डेय ने इंटरनेशनल क्लाइंबिंग एंड माउंटेनियरिंग फेडरेशन द्वारा आयोजित एक पर्वतारोहण अभियान में ईरान के सबसे ऊंचे पर्वत माउंट दमावंद और इसके तीसरे सबसे ऊंचे पर्वत माउंट सबलान पर चढ़ाई की। अप्रैल 2015 नेपाल भूकम्प के वजह से वो एवरेस्ट चढ़ने में असफल रहे, जहाँ उनके साथ के 21 पर्वतारोहियों की मौत हो गई। तूफान में फंसने से उनका दल से संपर्क टूट गया। उस दौरान हुए हादसे में तीन दिन बाद नेपाली सेना का हेलीकॉप्टर द्वारा रत्नेश को सुरक्षित बेस कैंप लाया गया था। फिर वर्ष 2016 में पुनः प्रयास के बाद उन्होंने माउंट एवरेस्ट फतह करने में सफलता हासिल की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
5 दिसंबर 2015 को रत्नेश ने इंदौर में 32.3 किलोमीटर मोटरसाइकल की सीट के ऊपर खड़े होकर और दोनों हाँथ छोड़कर बाइक चलाई। दूसरी बार, उन्होंने बाइक के जरिए बगैर रुके 175 सर्किल बनाए। इसके अलावा उन्होंने पीछे की ओर मुँह करके बिना हैंडल पकड़े 14 किलोमीटर मोटर साइकिल चलाई है। मोटरसाइकिल की सीट पर खड़े होकर सबसे लंबी लगातार सवारी करने के लिए गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में इनका नाम आया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अगस्त 2018 में, रत्नेश ने दो बार माउंट एल्ब्रस (18,511 फीट) पर चढ़ाई की, साथ ही पूर्वी और पश्चिमी चोटियों पर भारत का ध्वज और मध्य प्रदेश के खेल और युवा कल्याण विभाग का झंडा फहराया। इन्होंने निहाल सरकार के साथ इटली में आयोजित UIAA आइस क्लाइंबिंग वर्ल्ड कप 2017 में भारत का प्रतिनिधित्व किया। रत्नेश ने 14 जुलाई 2021 को 14,980 फीट ऊंचे माउंट मेरु और 21 जुलाई 2021 को 19,340 फीट ऊंचे माउंट किलिमंजारो, तंजानिया की चढ़ाई की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
एक प्रशिक्षक के रूप में अक्टूबर 2020 में रत्नेश ने प्रथम किन्नरों के दल को पर्वतारोहण कराया। 25 किन्नरों के दल को हिमालय के शिखर पर चढ़ाया था जिसकी आधिकारिक पुष्टि भारतीय पर्वतारोहण संस्थान, दिल्ली ने की। इस अभियान को पाण्डेय ने किन्नर अखाड़ा की अध्यक्ष आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी और राष्ट्रीय ट्रांसजेंडर कमीशन के आर्यन पाशा के साथ मिलकर पूर्ण किया। वर्ष 2021 में हरियाणा के स्कूली शिक्षा विभाग के पर्वतारोहण अभियान में सहभागिता निभाते हुए 25 दिव्यांगों को सफलता पूर्वक पर्वतारोहण कराया। रत्नेश के कार्यों को हरियाणा के मुख्यमंत्री  मनोहर लाल खट्टर और स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा सम्मानित किया गया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== सामाजिक कार्य  ==&lt;br /&gt;
अपने पर्वतारोहण कारनामों से इतर, रत्नेश पाण्डेय अपनी संस्था &amp;quot;रत्नेश पाण्डेय फाउंडेशन&amp;quot; के माध्यम से विभिन्न सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं। यह फाउंडेशन कई तरह की सामाजिक समस्याओं का समाधान करने का प्रयास करता है। उदाहरण के लिए, उन्होंने कोविड-19 के कारण माता-पिता खो चुकी एक महिला की आर्थिक मदद कर उसके होम लोन का भुगतान करवाया। साथ ही, उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद के तत्वावधान में आयोजित &amp;quot;यूथ फॉर राम कैम्पेन&amp;quot; द्वारा आयोजित 10,000 किलोमीटर की बाइक रैली में भाग लिया। यह रैली अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए जागरूकता और धन उगाहने के लिए निकाली गई थी। उन्होंने धार्मिक निष्ठा का प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रीय ध्वज के साथ माउंट एवरेस्ट पर भगवा ध्वज भी फहराया था। कोविड-19 महामारी के दौरान, पाण्डेय ने प्रतिदिन 500 गायों को भोजन कराने का सराहनीय कार्य किया, जिसके लिए उन्हें वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स से चौथा पुरस्कार प्राप्त हुआ। इसके अलावा, वह युवाओं को प्रेरित करने और उन्हें सामाजिक कार्यों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न कार्यक्रमों का भी आयोजन करते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== पुरस्कार और सम्मान ==&lt;br /&gt;
रत्नेश पाण्डेय को उनकी उत्कृष्ट उपलब्धियों के लिए कई पुरस्कारों और सम्मानों से सम्मानित किया गया है।&lt;br /&gt;
* नवंबर 2016: मध्य प्रदेश सरकार द्वारा खेल अलंकरण पुरस्कार से सम्मानित।&lt;br /&gt;
* 2015: मध्य प्रदेश सरकार द्वारा मध्य प्रदेश राज्य का प्रथम आधिकारिक पर्वतारोही घोषित किया गया।&lt;br /&gt;
* सतना स्मार्ट सिटी: रत्नेश को सतना स्मार्ट सिटी द्वारा ब्रांड एंबेसडर के रूप में नियुक्त किया गया। वे खेल और शिक्षा पर ध्यान केंद्रित करते हुए राज्य के सरकारी स्कूलों और कॉलेजों से जुड़े हुए हैं।&lt;br /&gt;
* अप्रैल 2017: असम पर्यटन विकास निगम द्वारा अंबुबाची मेले के ब्रांड एंबेसडर के रूप में नियुक्त किया गया।&lt;br /&gt;
* 16 सितंबर 2023: मध्य प्रदेश का सर्वोच्च विक्रम पुरस्कार वर्ष 2021 प्राप्त किया, जो साहसिक खेलों की श्रेणी में पहली बार दिया गया था।&lt;br /&gt;
* अक्टूबर 2022: खेल एवं युवा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा फिट इंडिया चैंपियन नियुक्त किया गया।&lt;br /&gt;
यह रत्नेश पाण्डेय को प्राप्त पुरस्कारों और सम्मानों की एक संक्षिप्त सूची है। उनकी अदम्य साहस और दृढ़ संकल्प के लिए उन्हें कई अन्य पुरस्कारों और सम्मानों से भी सम्मानित किया गया है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=|प्रारम्भिक=प्रारम्भिक1 |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{भारतीय जनता पार्टी}}&lt;br /&gt;
[[Category:राजनीतिज्ञ]][[Category:राजनेता]][[Category:भारतीय जनता पार्टी]][[Category:राजनीति कोश]][[Category:राजनीतिज्ञ]][[Category:चरित कोश]]&lt;br /&gt;
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		<author><name>Jeeteshvaishya</name></author>
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		<title>बाबू उमानाथ सिंह</title>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;Jeeteshvaishya: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;'''बाबू उमानाथ सिंह''' [[अवध]] की पूर्ववर्ती कोहरा तालुकदारी के पूर्व उत्तराधिकारी एवं एक शिक्षाविद थे। वें अवध विश्वविद्यालय के प्रोफेसर थें और उत्तर प्रदेश इतिहास कांग्रेस के संस्थापक सदस्यों&amp;lt;ref&amp;gt;Uttar Pradesh History Congress (Ed.). (1986). Uttar Pradesh History Congress: Proceedings of the I Session, T.N.P.G. College, Tanda, 1985. Uttar Pradesh History Congress.&amp;lt;/ref&amp;gt; में से एक थें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== प्रारंभिक जीवन एवं शिक्षा  ==&lt;br /&gt;
वर्तमान [[उत्तर प्रदेश]] के अमेठी जिले में स्थित कोहरा तालुकदारी में 1936 में जन्मे बाबू उमानाथ सिंह बाबू प्रताप बहादुर सिंह के पुत्र थे। बाबू प्रताप बहादुर सिंह कोहरा नरेश बाबू बेनी बहादुर सिंह के अनुज थे। बाबू बेनी बहादुर सिंह के पुत्र न होने के कारण, उनके भाई, बाबू प्रताप बहादुर सिंह को कोहरा का उत्तराधिकार मिला।&lt;br /&gt;
बाबू उमानाथ सिंह 1857 के प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के क्रांतिवीर बाबू भूप सिंह के पांचवे वंशज थे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उनकी शैक्षणिक यात्रा [[वाराणसी]] के उदय प्रताप कॉलेज से प्रारंभ हुई। उन्होंने 1956 में प्रतिष्ठित [[बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय]] से स्नातक की उपाधि प्राप्त की तथा 1958 में प्राचीन इतिहास में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की। इसके बाद, उन्होंने 1970 में [[गोरखपुर|गोरखपुर विश्वविद्यालय]] से मध्यकालीन इतिहास में परास्नातक की उपाधि प्राप्त की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== कार्य == &lt;br /&gt;
बाबू उमानाथ सिंह ने स्वयं को शिक्षा के क्षेत्र में समर्पित कर दिया। उन्होंने क्षेत्र में शैक्षिक मानकों को बढ़ाने के लिए अथक प्रयास किया। अवध विश्वविद्यालय में मध्यकालीन इतिहास विभाग में प्रोफेसर के रूप में कार्य करते हुए, उन्होंने शिक्षा जगत में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इसके अतिरिक्त, उन्होंने उत्तर प्रदेश इतिहास कांग्रेस के संस्थापक सदस्य के रूप में क्षेत्र की समृद्ध ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== व्यक्तिगत जीवन ==&lt;br /&gt;
[[जौनपुर]] के ख्याति प्राप्त स्वतंत्रता संग्राम सेनानी ठाकुर सीताराम सिंह की पुत्री द्रौपदी देवी के साथ बाबू उमानाथ सिंह का विवाह हुआ। इस दंपति को चार पुत्र हुए, क्रमशः बाबू राघवेंद्र प्रताप सिंह, कुंवर विजय सिंह, कुंवर डॉ. संजय सिंह और कुंवर धनंजय सिंह।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
* [https://hi.wikipedia.org/s/p28f बाबू उमानाथ सिंह - विकिपिडिया पर]&lt;br /&gt;
[[Category:प्रसिद्ध व्यक्तित्व]]&lt;br /&gt;
[[Category:प्रसिद्ध व्यक्तित्व कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:चरित कोश]]&lt;br /&gt;
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		<author><name>Jeeteshvaishya</name></author>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;Jeeteshvaishya: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;'''बाबू उमानाथ सिंह''' [[अवध]] की पूर्ववर्ती कोहरा तालुकदारी के पूर्व उत्तराधिकारी एवं एक शिक्षाविद थे। वें अवध विश्वविद्यालय के प्रोफेसर थें और उत्तर प्रदेश इतिहास कांग्रेस के संस्थापक सदस्यों&amp;lt;ref&amp;gt;Uttar Pradesh History Congress (Ed.). (1986). Uttar Pradesh History Congress: Proceedings of the I Session, T.N.P.G. College, Tanda, 1985. Uttar Pradesh History Congress.&amp;lt;/ref&amp;gt; में से एक थें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== प्रारंभिक जीवन एवं शिक्षा  ==&lt;br /&gt;
वर्तमान [[उत्तर प्रदेश]] के अमेठी जिले में स्थित कोहरा तालुकदारी में 1936 में जन्मे बाबू उमानाथ सिंह बाबू प्रताप बहादुर सिंह के पुत्र थे। बाबू प्रताप बहादुर सिंह कोहरा नरेश बाबू बेनी बहादुर सिंह के अनुज थे। बाबू बेनी बहादुर सिंह के पुत्र न होने के कारण, उनके भाई, बाबू प्रताप बहादुर सिंह को कोहरा का उत्तराधिकार मिला।&lt;br /&gt;
बाबू उमानाथ सिंह 1857 के प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के क्रांतिवीर बाबू भूप सिंह के पांचवे वंशज थे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उनकी शैक्षणिक यात्रा वाराणसी के उदय प्रताप कॉलेज से प्रारंभ हुई। उन्होंने 1956 में प्रतिष्ठित बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से स्नातक की उपाधि प्राप्त की तथा 1958 में प्राचीन इतिहास में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की। इसके बाद, उन्होंने 1970 में गोरखपुर विश्वविद्यालय से मध्यकालीन इतिहास में परास्नातक की उपाधि प्राप्त की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== कार्य == &lt;br /&gt;
बाबू उमानाथ सिंह ने स्वयं को शिक्षा के क्षेत्र में समर्पित कर दिया। उन्होंने क्षेत्र में शैक्षिक मानकों को बढ़ाने के लिए अथक प्रयास किया। अवध विश्वविद्यालय में मध्यकालीन इतिहास विभाग में प्रोफेसर के रूप में कार्य करते हुए, उन्होंने शिक्षा जगत में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इसके अतिरिक्त, उन्होंने उत्तर प्रदेश इतिहास कांग्रेस के संस्थापक सदस्य के रूप में क्षेत्र की समृद्ध ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== व्यक्तिगत जीवन ==&lt;br /&gt;
जौनपुर के ख्याति प्राप्त स्वतंत्रता संग्राम सेनानी ठाकुर सीताराम सिंह की पुत्री द्रौपदी देवी के साथ बाबू उमानाथ सिंह का विवाह हुआ। इस दंपति को चार पुत्र हुए, क्रमशः बाबू राघवेंद्र प्रताप सिंह, कुंवर विजय सिंह, कुंवर डॉ. संजय सिंह और कुंवर धनंजय सिंह।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
* [https://hi.wikipedia.org/s/p28f बाबू उमानाथ सिंह - विकिपिडिया पर]&lt;br /&gt;
[[Category:प्रसिद्ध व्यक्तित्व]]&lt;br /&gt;
[[Category:प्रसिद्ध व्यक्तित्व कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:चरित कोश]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
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		<author><name>Jeeteshvaishya</name></author>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;Jeeteshvaishya: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;'''बाबू उमानाथ सिंह'''  ([[अंग्रेज़ी]]: ''Babu Umanath Singh'', जन्म: [[1936]]; मृत्यु: [[20 मई]], [[2017]])  [[अवध]] की पूर्ववर्ती कोहरा तालुकदारी (वर्तमान में अमेठी जिला अंतर्गत) के पूर्व उत्तराधिकारी एवं एक शिक्षाविद थे। वें अवध विश्वविद्यालय के प्रोफेसर थें और उत्तर प्रदेश इतिहास कांग्रेस के संस्थापक सदस्यों में से एक थें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== प्रारंभिक जीवन एवं शिक्षा  ==&lt;br /&gt;
वर्तमान [[उत्तर प्रदेश]] के अमेठी जिले में स्थित कोहरा तालुकदारी में 1936 में जन्मे बाबू उमानाथ सिंह बाबू प्रताप बहादुर सिंह के पुत्र थे। बाबू प्रताप बहादुर सिंह कोहरा नरेश बाबू बेनी बहादुर सिंह के अनुज थे। बाबू बेनी बहादुर सिंह के पुत्र न होने के कारण, उनके भाई, बाबू प्रताप बहादुर सिंह को कोहरा का उत्तराधिकार मिला।&lt;br /&gt;
बाबू उमानाथ सिंह 1857 के [[प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम|प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम]] के क्रांतिवीर बाबू भूप सिंह के पांचवे वंशज थे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उनकी शैक्षणिक यात्रा वाराणसी के उदय प्रताप कॉलेज से प्रारंभ हुई। उन्होंने 1956 में प्रतिष्ठित बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से स्नातक की उपाधि प्राप्त की तथा 1958 में प्राचीन इतिहास में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की। इसके बाद, उन्होंने 1970 में [[गोरखपुर]] विश्वविद्यालय से मध्यकालीन इतिहास में परास्नातक की उपाधि प्राप्त की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== कार्य == &lt;br /&gt;
बाबू उमानाथ सिंह ने स्वयं को शिक्षा के क्षेत्र में समर्पित कर दिया। उन्होंने क्षेत्र में शैक्षिक मानकों को बढ़ाने के लिए अथक प्रयास किया। अवध विश्वविद्यालय में मध्यकालीन इतिहास विभाग में प्रोफेसर के रूप में कार्य करते हुए, उन्होंने शिक्षा जगत में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इसके अतिरिक्त, उन्होंने उत्तर प्रदेश इतिहास कांग्रेस के संस्थापक सदस्य के रूप में क्षेत्र की समृद्ध ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== व्यक्तिगत जीवन ==&lt;br /&gt;
जौनपुर के ख्याति प्राप्त स्वतंत्रता संग्राम सेनानी ठाकुर सीताराम सिंह की पुत्री द्रौपदी देवी के साथ बाबू उमानाथ सिंह का विवाह हुआ। इस दंपति को चार पुत्र हुए, क्रमशः बाबू राघवेंद्र प्रताप सिंह, कुंवर विजय सिंह, कुंवर डॉ. संजय सिंह और कुंवर धनंजय सिंह।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
* [https://hi.wikipedia.org/s/p28f बाबू उमानाथ सिंह - विकिपिडिया पर]&lt;br /&gt;
[[Category:प्रसिद्ध व्यक्तित्व]]&lt;br /&gt;
[[Category:प्रसिद्ध व्यक्तित्व कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:चरित कोश]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Jeeteshvaishya</name></author>
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		<title>बाबू उमानाथ सिंह</title>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;Jeeteshvaishya: ''''बाबू उमानाथ सिंह''' अवध की पूर्ववर्ती कोहरा तालुक...' के साथ नया पृष्ठ बनाया&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;'''बाबू उमानाथ सिंह''' [[अवध]] की पूर्ववर्ती कोहरा तालुकदारी के पूर्व उत्तराधिकारी एवं एक शिक्षाविद थे। वें अवध विश्वविद्यालय के प्रोफेसर थें और उत्तर प्रदेश इतिहास कांग्रेस के संस्थापक सदस्यों में से एक थें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== प्रारंभिक जीवन एवं शिक्षा  ==&lt;br /&gt;
वर्तमान [[उत्तर प्रदेश]] के अमेठी जिले में स्थित कोहरा तालुकदारी में 1936 में जन्मे बाबू उमानाथ सिंह बाबू प्रताप बहादुर सिंह के पुत्र थे। बाबू प्रताप बहादुर सिंह कोहरा नरेश बाबू बेनी बहादुर सिंह के अनुज थे। बाबू बेनी बहादुर सिंह के पुत्र न होने के कारण, उनके भाई, बाबू प्रताप बहादुर सिंह को कोहरा का उत्तराधिकार मिला।&lt;br /&gt;
बाबू उमानाथ सिंह 1857 के प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के क्रांतिवीर बाबू भूप सिंह के पांचवे वंशज थे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उनकी शैक्षणिक यात्रा वाराणसी के उदय प्रताप कॉलेज से प्रारंभ हुई। उन्होंने 1956 में प्रतिष्ठित बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से स्नातक की उपाधि प्राप्त की तथा 1958 में प्राचीन इतिहास में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की। इसके बाद, उन्होंने 1970 में गोरखपुर विश्वविद्यालय से मध्यकालीन इतिहास में परास्नातक की उपाधि प्राप्त की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== कार्य == &lt;br /&gt;
बाबू उमानाथ सिंह ने स्वयं को शिक्षा के क्षेत्र में समर्पित कर दिया। उन्होंने क्षेत्र में शैक्षिक मानकों को बढ़ाने के लिए अथक प्रयास किया। अवध विश्वविद्यालय में मध्यकालीन इतिहास विभाग में प्रोफेसर के रूप में कार्य करते हुए, उन्होंने शिक्षा जगत में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इसके अतिरिक्त, उन्होंने उत्तर प्रदेश इतिहास कांग्रेस के संस्थापक सदस्य के रूप में क्षेत्र की समृद्ध ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== व्यक्तिगत जीवन ==&lt;br /&gt;
जौनपुर के ख्याति प्राप्त स्वतंत्रता संग्राम सेनानी ठाकुर सीताराम सिंह की पुत्री द्रौपदी देवी के साथ बाबू उमानाथ सिंह का विवाह हुआ। इस दंपति को चार पुत्र हुए, क्रमशः बाबू राघवेंद्र प्रताप सिंह, कुंवर विजय सिंह, कुंवर डॉ. संजय सिंह और कुंवर धनंजय सिंह।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
* [https://hi.wikipedia.org/s/p28f बाबू उमानाथ सिंह - विकिपिडिया पर]&lt;br /&gt;
[[Category:प्रसिद्ध व्यक्तित्व]]&lt;br /&gt;
[[Category:प्रसिद्ध व्यक्तित्व कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:चरित कोश]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Jeeteshvaishya</name></author>
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		<title>कटरा गुलाब सिंह</title>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;Jeeteshvaishya: यथाउचित सुधार&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;[[चित्र:bhayaharan nath dham.jpg|250px|thumb|right|[[भयहरणनाथ धाम|बाबा भयहरणनाथ धाम]], कटरा गुलाब सिंह]] &lt;br /&gt;
'''कटरा गुलाब सिंह''' [[उत्तर प्रदेश]] प्रांत के [[प्रतापगढ़ ज़िला|प्रतापगढ़ ज़िले]] के सदर तहसील अंतर्गत एक नगर पंचायत शहर है, जो [[बकुलाही नदी]] के किनारे बसा है। प्रतापगढ़ ज़िला मुख्यालय से 30 किलोमीटर तथा राजधानी [[लखनऊ]] से 160 किलोमीटर दूरी पर जनपद मुख्यालय के दक्षिणांचल व [[इलाहाबाद]] ([[प्रयाग]]) ज़िले के उत्तरांचल मे जनपदीय सीमा पर स्थित है। ऐतिहासिक व [[पुरातत्त्व|पुरातात्विक]] दृष्टि से यह स्थान काफ़ी संपन्न माना जाता है। प्रदेश का सुविख्यात महाभारतकालीन पौराणिक तीर्थ [[भयहरणनाथ धाम|बाबा भयहरणनाथ धाम]], कटरा गुलाब सिंह बाज़ार के पूर्व दिशा मे बकुलाही नदी के तट पर अवस्थित है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== नामकरण ==&lt;br /&gt;
[[चित्र:bhayaharan nath dham1.jpg|250px|thumb|right|[[भयहरणनाथ धाम|बाबा भयहरणनाथ धाम]],कटरा गुलाब सिंह]] &lt;br /&gt;
[[प्रतापगढ़ ज़िला|प्रतापगढ़]] ज़िले के इस नगर को तरौल के तालुकेदार और 1857 के महान क्रांतिकारी [[बाबू गुलाब सिंह]] द्वारा बसाया गया था। उन्हीं के नाम पर इस स्थान का नाम कटरा गुलाब सिंह पड़ा।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== पौराणिक महत्व ==&lt;br /&gt;
[[चित्र:katra gulab singh.jpg|250px|thumb|right|प्राप्त भग्नावशेष]] &lt;br /&gt;
यह क़स्बा [[वाल्मीकि]] [[रामायण]] मे वर्णित पतित पावनी नदी [[बकुलाही नदी|बालकुनी]] (बकुलाही) के किनारे बसा हुआ है। यहाँ पर पांडवकालीन [[भयहरणनाथ धाम]] की उत्पत्ति है। मान्यताओ के अनुसार [[अज्ञातवास]] के दौरान [[पांडव]] ने इस क्षेत्र मे निवास किये थे। बकुलाही तीरे पूजन पाठ कर [[शिवलिंग]] की स्थापना की थी। इस क्षेत्र मे प्राप्त [[पुरावशेष]] यहाँ की अमर इतिहास की गाथा बयाँ करती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== पुरातात्विक महत्त्व ==&lt;br /&gt;
पांडवकालीन भयहरणनाथ धाम तथा कटरा गुलाब सिंह के निकटवर्ती क्षेत्रों के उत्खनन से प्राप्त पुरावशेष महाभारत कालीन व बौद्ध संस्कृति के प्रतीत होते है। प्राप्त भग्नावशेषों को पंजीकृत कर इलाहाबाद संग्राहालय मे संरक्षित रखा है। इस क्षेत्र के दो तीन कि.मी. परिधि मे कम से कम आधे दर्जन से अधिक पुरातात्विक महत्व के स्थान है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
*ऐतिहासिक स्थानावली | विजयेन्द्र कुमार माथुर |  वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली आयोग | मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक स्थान}}&lt;br /&gt;
[[Category:उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक स्थान]][[Category:इतिहास_कोश]][[Category:ऐतिहासिक स्थान कोश]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Jeeteshvaishya</name></author>
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		<title>राजा बजरंग बहादुर सिंह</title>
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		<updated>2024-04-05T09:37:05Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Jeeteshvaishya: /* राज्यपाल पद */&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा राजनीतिज्ञ&lt;br /&gt;
|चित्र=Raja Bajrang Bahadur Singh Bhadri.jpg&lt;br /&gt;
|चित्र का नाम=राजा बजरंग बहादुर सिंह के साथ जवाहर लाल नेहरू&lt;br /&gt;
|पूरा नाम=राजा बजरंग बहादुर सिंह&lt;br /&gt;
|अन्य नाम=&lt;br /&gt;
|जन्म=[[1905]]&lt;br /&gt;
|जन्म भूमि=[[प्रतापगढ़ ज़िला|प्रतापगढ़]], [[उत्तर प्रदेश]]&lt;br /&gt;
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|संतान=&lt;br /&gt;
|मृत्यु=[[1970]] &lt;br /&gt;
|मृत्यु स्थान=&lt;br /&gt;
|मृत्यु कारण=&lt;br /&gt;
|स्मारक= &lt;br /&gt;
|क़ब्र= &lt;br /&gt;
|नागरिकता=भारतीय&lt;br /&gt;
|प्रसिद्धि=[[स्वतंत्रता सेनानी सूची|स्वतंत्रता सेनानी]] एवं [[राज्यपाल]] &lt;br /&gt;
|पार्टी=[[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस|कांग्रेस]]&lt;br /&gt;
|पद=[[हिमाचल प्रदेश]] के दूसरे [[राज्यपाल]] &lt;br /&gt;
|भाषा=[[अंग्रेज़ी भाषा|अंग्रेज़ी]], [[हिन्दी]], [[अवधी भाषा|अवधी]] &lt;br /&gt;
|जेल यात्रा=&lt;br /&gt;
|विद्यालय= &lt;br /&gt;
|शिक्षा=&lt;br /&gt;
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|संबंधित लेख=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=रचनाएँ&lt;br /&gt;
|पाठ 1=हाउ टू ट्रेन योर डॉग&lt;br /&gt;
|शीर्षक 2=&lt;br /&gt;
|पाठ 2=&lt;br /&gt;
|अन्य जानकारदेश के पहले कृषि विश्वविद्यालय अर्थात पंतनगर विश्वविद्यालय  के संस्थापक  सदस्य व उपकुलपति थे।&lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ= &lt;br /&gt;
|अद्यतन={{अद्यतन|16:00, 26 अप्रॅल 2013 (IST)}}&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''राजा राय बजरंग बहादुर सिंह''' (1905-1970) [[स्वतंत्रता सेनानी सूची|स्वतंत्रता सेनानी]] व [[हिमाचल प्रदेश]] के उप [[राज्यपाल]] थे। वे [[अवध]] [[प्रतापगढ़ ज़िला|प्रतापगढ़]] की तालुकदारी रियासत भदरी के राजा थे।&lt;br /&gt;
==संक्षिप्त परिचय==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Raja Bajrang Bahadur Singh.gif|thumb|250px|राजा बजरंग बहादुर सिंह|left]]&lt;br /&gt;
राजा बजरंग बहादुर सिंह का जन्म सन [[1905]] में [[उत्तर प्रदेश]] के [[प्रतापगढ़ ज़िला|प्रतापगढ़]] मे भदरी नरेश राजा किशन प्रसाद सिंह के घर हुआ। आपके दो भाई भद्रेश्वर प्रताप सिंह और त्रिलोचन प्रताप सिंह थे लेकिन भदरी नरेश के ज्येष्ठ पुत्र होने के कारण पिता की रियासत के राजा आप बने। आप राजा साहब भदरी और राजा राय साहब जैसे उपनामो भी जाने जाते थे। &lt;br /&gt;
====विवाह====&lt;br /&gt;
वर्ष [[1926]] में राजा बजरंग बहादुर सिंह का विवाह [[अजयगढ़]] के महाराजा पुण्य प्रताप सिंह और महारानी रुक्मणी देवी की पुत्री रानी गिरिजा देवी से हुआ। &lt;br /&gt;
==== स्वतंत्रता संग्राम में योगदान====&lt;br /&gt;
बतौर [[स्वतंत्रता सेनानी सूची|स्वतंत्रता संग्राम सेनानी]] राजा बजरंग बहादुर सिंह कई आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाई। स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में इनकी रियासत भदरी का कई स्थानों पर ज़िक्र है। [[महात्मा गाँधी]] के [[असहयोग आंदोलन]] का राजा भदरी ने समर्थन किया और असहयोग आंदोलन में अपनी सक्रिय भूमिका दर्ज कराते हुए बजरंग बहादुर सिंह ने विदेशी वस्त्रो का बहिष्कार कर कपड़ों की [[होली]] जलायी।&lt;br /&gt;
==राज्यपाल पद==&lt;br /&gt;
स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद वर्ष [[1955]] में राजा बजरंग बहादुर [[हिमाचल प्रदेश]] के [[राज्यपाल]] बने। [[1 जनवरी]] [[1955]] को उप [[राज्यपाल]] पद पर नियुक्ति हुई और [[13 अगस्त]] [[1963]] तक इस पद पर कार्यरत रहे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==सामाजिक जीवन== &lt;br /&gt;
देश के पहले [[कृषि]] [[विश्वविद्यालय]] अर्थात [[गोविंद बल्लभ पंत]] यूनिवर्सिटी ऑफ़  एग्रिकल्चर एंड टेक्नॉलोजी  के संस्थापक सदस्य व उपकुलपति थे। आपने &amp;quot;हाउ टू ट्रेन योर  डॉग&amp;quot; नामक  पुस्तक भी लिखी। राय साहब बजरंग ने '''हिंद फ्लाइंग क्लब''' की स्थापना की थी।&lt;br /&gt;
==== निधन ====&lt;br /&gt;
वर्ष [[1970]] में एक बीमार रहने के कारण देश के एक कुशल प्रशासक, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, समाजसेवी राजा बजरंग बहादुर सिंह का निधन हो गया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=|प्रारम्भिक=प्रारम्भिक3 |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{स्वतन्त्रता सेनानी}}&lt;br /&gt;
[[Category:जीवनी साहित्य]]&lt;br /&gt;
[[Category:प्रसिद्ध व्यक्तित्व]]&lt;br /&gt;
[[Category:स्वतन्त्रता सेनानी]]&lt;br /&gt;
[[Category:प्रसिद्ध व्यक्तित्व कोश]][[Category:चरित कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:राजनेता]]&lt;br /&gt;
[[Category:राजनीति कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Jeeteshvaishya</name></author>
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		<title>राजा बजरंग बहादुर सिंह</title>
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		<updated>2024-04-05T09:35:53Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Jeeteshvaishya: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा राजनीतिज्ञ&lt;br /&gt;
|चित्र=Raja Bajrang Bahadur Singh Bhadri.jpg&lt;br /&gt;
|चित्र का नाम=राजा बजरंग बहादुर सिंह के साथ जवाहर लाल नेहरू&lt;br /&gt;
|पूरा नाम=राजा बजरंग बहादुर सिंह&lt;br /&gt;
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|जन्म=[[1905]]&lt;br /&gt;
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|स्मारक= &lt;br /&gt;
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|पद=[[हिमाचल प्रदेश]] के दूसरे [[राज्यपाल]] &lt;br /&gt;
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|विशेष योगदान=[[असहयोग आन्दोलन]]  &lt;br /&gt;
|संबंधित लेख=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=रचनाएँ&lt;br /&gt;
|पाठ 1=हाउ टू ट्रेन योर डॉग&lt;br /&gt;
|शीर्षक 2=&lt;br /&gt;
|पाठ 2=&lt;br /&gt;
|अन्य जानकारदेश के पहले कृषि विश्वविद्यालय अर्थात पंतनगर विश्वविद्यालय  के संस्थापक  सदस्य व उपकुलपति थे।&lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ= &lt;br /&gt;
|अद्यतन={{अद्यतन|16:00, 26 अप्रॅल 2013 (IST)}}&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''राजा राय बजरंग बहादुर सिंह''' (1905-1970) [[स्वतंत्रता सेनानी सूची|स्वतंत्रता सेनानी]] व [[हिमाचल प्रदेश]] के उप [[राज्यपाल]] थे। वे [[अवध]] [[प्रतापगढ़ ज़िला|प्रतापगढ़]] की तालुकदारी रियासत भदरी के राजा थे।&lt;br /&gt;
==संक्षिप्त परिचय==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Raja Bajrang Bahadur Singh.gif|thumb|250px|राजा बजरंग बहादुर सिंह|left]]&lt;br /&gt;
राजा बजरंग बहादुर सिंह का जन्म सन [[1905]] में [[उत्तर प्रदेश]] के [[प्रतापगढ़ ज़िला|प्रतापगढ़]] मे भदरी नरेश राजा किशन प्रसाद सिंह के घर हुआ। आपके दो भाई भद्रेश्वर प्रताप सिंह और त्रिलोचन प्रताप सिंह थे लेकिन भदरी नरेश के ज्येष्ठ पुत्र होने के कारण पिता की रियासत के राजा आप बने। आप राजा साहब भदरी और राजा राय साहब जैसे उपनामो भी जाने जाते थे। &lt;br /&gt;
====विवाह====&lt;br /&gt;
वर्ष [[1926]] में राजा बजरंग बहादुर सिंह का विवाह [[अजयगढ़]] के महाराजा पुण्य प्रताप सिंह और महारानी रुक्मणी देवी की पुत्री रानी गिरिजा देवी से हुआ। &lt;br /&gt;
==== स्वतंत्रता संग्राम में योगदान====&lt;br /&gt;
बतौर [[स्वतंत्रता सेनानी सूची|स्वतंत्रता संग्राम सेनानी]] राजा बजरंग बहादुर सिंह कई आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाई। स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में इनकी रियासत भदरी का कई स्थानों पर ज़िक्र है। [[महात्मा गाँधी]] के [[असहयोग आंदोलन]] का राजा भदरी ने समर्थन किया और असहयोग आंदोलन में अपनी सक्रिय भूमिका दर्ज कराते हुए बजरंग बहादुर सिंह ने विदेशी वस्त्रो का बहिष्कार कर कपड़ों की [[होली]] जलायी।&lt;br /&gt;
==राज्यपाल पद==&lt;br /&gt;
स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद वर्ष [[1955]] में राजा बजरंग बहादुर [[हिमाचल प्रदेश]] के [[राज्यपाल]] बने। [[1 जनवरी]] [[1955]] को [[राज्यपाल]] पद पर नियुक्ति हुई और [[13 अगस्त]] [[1963]] तक इस पद पर कार्यरत रहे।&lt;br /&gt;
==सामाजिक जीवन== &lt;br /&gt;
देश के पहले [[कृषि]] [[विश्वविद्यालय]] अर्थात [[गोविंद बल्लभ पंत]] यूनिवर्सिटी ऑफ़  एग्रिकल्चर एंड टेक्नॉलोजी  के संस्थापक सदस्य व उपकुलपति थे। आपने &amp;quot;हाउ टू ट्रेन योर  डॉग&amp;quot; नामक  पुस्तक भी लिखी। राय साहब बजरंग ने '''हिंद फ्लाइंग क्लब''' की स्थापना की थी।&lt;br /&gt;
==== निधन ====&lt;br /&gt;
वर्ष [[1970]] में एक बीमार रहने के कारण देश के एक कुशल प्रशासक, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, समाजसेवी राजा बजरंग बहादुर सिंह का निधन हो गया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=|प्रारम्भिक=प्रारम्भिक3 |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{स्वतन्त्रता सेनानी}}&lt;br /&gt;
[[Category:जीवनी साहित्य]]&lt;br /&gt;
[[Category:प्रसिद्ध व्यक्तित्व]]&lt;br /&gt;
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[[Category:राजनेता]]&lt;br /&gt;
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[[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Jeeteshvaishya</name></author>
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		<title>साँचा:स्वतन्त्रता सेनानी</title>
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		<updated>2024-04-05T09:34:27Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Jeeteshvaishya: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;&amp;lt;noinclude&amp;gt;{{विशेष|कृपया ध्यान दें! जो लेख इस साँचे में जोड़ें उसे [[स्वतन्त्रता सेनानी सूची]] में भी अवश्य जोड़ें}}&amp;lt;/noinclude&amp;gt; &lt;br /&gt;
{{Navbox&lt;br /&gt;
|name=स्वतन्त्रता सेनानी&lt;br /&gt;
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|list1 =[[जे. बी. कृपलानी]] '''·''' [[ख़ान अब्दुल ग़फ़्फ़ार ख़ान]] '''·''' [[ख़्वाजा नज़ीमुद्दीन]] '''·''' [[कनाईलाल दत्त]] '''·''' [[लाला हरदयाल]] '''·''' [[जयरामदास दौलतराम]] '''·''' [[ज्ञानचंद्र मजूमदार]] '''·''' [[खलीकुज्जमा]] '''·''' [[त्रैलोक्य चक्रवर्ती]] '''·''' [[पंडित रूपचंद]] '''·''' [[मुहम्मद अली जिन्ना]] '''·''' [[लीला नाग]] '''·''' [[बिपिन चन्द्र पाल]] '''·''' [[भाई बालमुकुंद]] '''·''' [[कालीपद मुखर्जी]]  '''·''' [[अल्ला बख़्श]] '''·''' [[गोविंदा नंद]] '''·''' [[चक्रवर्ती विजय राघवाचारी]]&lt;br /&gt;
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|group2 =[[आंध्र प्रदेश]] &lt;br /&gt;
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|list2 =[[पिंगलि वेंकय्या]] '''·''' [[एन.जी. रंगा]] '''·''' [[बी. सत्य नारायण रेड्डी]]'''·''' [[अल्लूरी सीताराम राजू]] '''·''' [[भोगराजू पट्टाभि सीतारामैया]] '''·''' [[एस. निजलिंगप्पा]] '''·''' [[टी. प्रकाशम]] '''·''' [[एच. सी. दासप्पा|हिराली चनया दासप्पा]] '''·''' [[कालेश्वर राव]] '''·''' [[पद्मजा नायडू]] '''·''' [[काला वेंकटराव]] '''·''' [[ज़ाकिर हुसैन]] '''·''' [[दुर्गाबाई देशमुख]] '''·''' [[एम. ए. अय्यंगार]] '''·''' [[मदनसिंह मतवाले]] '''·''' [[बलुसु संबमूर्ति]] '''·''' [[पी. आनन्द चार्लू]] '''·''' [[केशवराव कोराटकर]] '''·''' [[नरसिम्हा रेड्डी]]&lt;br /&gt;
|group3=[[उत्तर प्रदेश]]&lt;br /&gt;
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|list3=[[जवाहरलाल नेहरू]] '''·''' [[श्यामलाल गुप्त 'पार्षद']] '''·''' [[लक्ष्मी सहगल]] '''·''' [[कमला नेहरू]] '''·''' [[हनुमान प्रसाद पोद्दार]] '''·''' [[मोतीलाल नेहरू]] '''·''' [[राम मनोहर लोहिया]] '''·''' [[अवधेश अग्रहरि]] '''·''' [[इंदिरा गाँधी]] '''·''' [[चंद्रशेखर आज़ाद]] '''·''' [[आचार्य जुगल किशोर]] '''·''' [[चन्द्रभानु गुप्त]] '''·''' [[सरोजिनी नायडू]] '''·''' [[मदनमोहन मालवीय]] '''·''' [[सम्पूर्णानंद]] '''·''' [[विजयलक्ष्मी पण्डित]] '''·''' [[पुरुषोत्तम दास टंडन]] '''·''' [[उमाशंकर दीक्षित]] ''' ''' [[के. एम. अशरफ़]] '''·''' [[गणेशशंकर विद्यार्थी]] '''·''' [[भगवान दास|भगवान दास]] '''·''' [[अशफ़ाक़ उल्ला ख़ाँ]] '''·''' [[द्वारका प्रसाद मिश्रा]] '''·''' [[सुभद्रा कुमारी चौहान]] '''·''' [[विजय सिंह पथिक]] '''·''' [[ठाकुर रोशन सिंह]] '''·''' [[गौरीशंकर मिश्र]] '''·''' [[शचीन्द्रनाथ सान्याल]] '''·''' [[सूफ़ी अम्बा प्रसाद]] '''·''' [[शौक़त अली]] '''·''' [[शिवप्रसाद गुप्त]] '''·''' [[हुसैन अहमद मदानी]] '''·''' [[दुर्गा भाभी]] '''·''' [[श्रीप्रकाश]] '''·''' [[मौलाना मोहम्मद अब्दुल बरी]] '''·''' [[मुहम्मद अब्दुल बारी]] '''·''' [[ऊदा देवी]] '''·''' [[राम प्रसाद बिस्मिल]] '''·''' [[केदारेश्वर सेन गुप्ता]] '''·''' [[बीना दास]] '''·''' [[चित्तू पाण्डे]] '''·''' [[मुख़्तार अहमद अंसारी]] '''·''' [[प्यारे लाल शर्मा]] '''·''' [[स्वामी सहजानंद सरस्वती]] '''·''' [[रफ़ी अहमद क़िदवई]] '''·''' [[मोहम्मद अली]] '''·''' [[मन्मथनाथ गुप्त]] '''·''' [[भगवतीचरण बोहरा]] '''·''' [[बाबू  गुलाब सिंह]] '''·''' [[राजा महेन्द्र प्रताप]] '''·''' [[देवकरन सिंह]] '''·''' [[चौधरी दिगम्बर सिंह]] '''·''' [[मथुरा प्रसाद मिश्र वैद्य]] '''·''' [[राजाराम किसान]] '''·''' [[राजा बजरंग बहादुर सिंह]] '''·''' [[नरेन्द्र देव]] '''·''' [[हसरत मोहानी]] '''·''' [[बाबा राघवदास]] '''·''' [[दयाल सिंह मजीठिया]] '''·''' [[अजित प्रसाद जैन]] '''·''' [[कालका प्रसाद (स्वतंत्रता सेनानी)|कालका प्रसाद]] '''·''' [[विष्णु शरण दुबलिश]] '''·''' [[शिब्बनलाल सक्सेना]] '''·''' [[गेंदालाल दीक्षित]] '''·''' [[शिव वर्मा]] '''·''' [[श्री कृष्णदत्त पालीवाल]] '''·''' [[जुगल किशोर चतुर्वेदी]] '''·''' [[सीताराम]] '''·''' [[बजरंग बहादुर सिंह]] '''·''' [[राजकुमारी गुप्ता]] '''·''' [[रतन लाल बंसल]] '''·''' [[धन सिंह गुर्जर]] '''·''' [[हुसैन अहमद मदनी]]&lt;br /&gt;
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|group4=[[पश्चिम बंगाल]]	&lt;br /&gt;
|group4style=&lt;br /&gt;
|list4=[[अजय घोष]] '''·''' [[अन्नत हरि मित्र]] '''·''' [[अबुलकलाम आज़ाद]] '''·''' [[अरबिंदो घोष]] '''·''' [[अम्बिका चक्रवर्ती]] '''·''' [[अब्दुल मोमिन]] '''·''' [[अब्दुल रशीद]] '''·''' [[अब्दुल रहमान ख़ाँ]] '''·'''  [[कन्हाई लाल दत्त]] '''·''' [[कमलादेवी चट्टोपाध्याय]] '''·'''  [[खुदीराम बोस]] '''·'''  [[ईश्वर चन्द्र विद्यासागर]] '''·''' [[अश्विनी कुमार दत्त]] '''·''' [[सूर्य सेन]] '''·''' [[अरुण चन्द्र गुहा]] '''·''' [[नेली सेनगुप्त]] '''·''' [[अनंता सिंह]] '''·''' [[प्रीतिलता वड्डेदार]] '''·''' [[चित्तरंजन दास]] '''·''' [[नरेन्द्र मोहन सेन]] '''·''' [[ननिबाला देवी]] '''·''' [[मातंगिनी हज़ारा]] '''·''' [[कल्पना दत्त]] '''·''' [[जतीन्द्रनाथ मुखर्जी]] '''·''' [[बटुकेश्वर दत्त]] '''·''' [[तारकनाथ दास]] '''·''' [[पुलिन बिहारी दास]] '''·''' [[कृष्णमोहन बनर्जी]] '''·''' [[यतीन्द्र मोहन सेनगुप्त]] '''·''' [[चितरंजन मुखर्जी]] '''·''' [[दिनेश चंद्र मजूमदार]] '''·''' [[राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी]] '''·''' [[जतीन्द्रनाथ दास]] '''·''' [[जोगेशचंद्र चटर्जी]] '''·''' [[रास बिहारी बोस]] '''·''' [[मानवेन्द्र नाथ राय]] '''·''' [[बारीन्द्र कुमार घोष]] '''·''' [[प्रतुलचंद्र गांगुली]] '''·''' [[बसंती देवी]] '''·''' [[गणेश घोष]] '''·''' [[आशुतोष दास]] '''·''' [[प्रफुल्लचंद चाकी]] '''·''' [[प्रफुल्लचंद्र सेन]] '''·''' [[शरत चन्द्र बोस]] '''·''' [[ब्रह्मबांधव उपाध्याय]] '''·''' [[हेमचंद्र बसु]] '''·''' [[अनिल बरन राय (समाजवादी कार्यकर्ता)]] '''·''' [[गोपाल सेन]] '''·''' [[गोपीनाथ साहा]] '''·''' [[बाल मुकुन्द]] '''·''' [[नलिनी रंजन सरकार]] '''·''' [[अनिल बरन राय]] '''·''' [[अविनाश चन्द्र चक्रवर्ती]] '''·''' [[वीरेंद्र नाथ चटर्जी]] '''·''' [[सत्येन्द्र चंद्र मित्रा]] '''·''' [[सत्येंद्रनाथ बोस (क्रांतिकारी)|सत्येंद्रनाथ बोस]] '''·''' [[सत्येन्द्रनाथ सेन]] '''·''' [[इन्दुमति सिंह]] '''·''' [[सुहासिनी गांगुली]] '''·''' [[इन्दुमती सिंह]] '''·''' [[प्रीतिलता वादेदार]] '''·''' [[मालती चौधरी]] '''·''' [[पूर्णिमा बनर्जी]] '''·''' [[रेणुका राय]] '''·''' [[उपेन्द्रनाथ बंधोपाध्याय]] '''·''' [[बंकिम मुखर्जी]]&lt;br /&gt;
|list4style=&lt;br /&gt;
|group5=[[मणिपुर]]'''·'''[[असम]]&lt;br /&gt;
|group5style=&lt;br /&gt;
|list5 =[[रानी गाइदिनल्यू]] '''·''' [[तरुण राम फुकन]] '''·''' [[कुलाधर चालिहा]] '''·''' [[कनकलता बरुआ]] '''·''' [[भोगेश्वरी देवी फुकन]] '''·''' [[बसंत कुमार दास]] '''·''' [[अमिय कुमार दास]] '''·''' [[कुसाल कौवर]] '''·''' [[विमल प्रसाद चालिहा]] '''·''' [[अमलप्रवा दास]]&lt;br /&gt;
|list5style=&lt;br /&gt;
|group6=[[ओडिशा]]&lt;br /&gt;
|group6style=&lt;br /&gt;
|list6= [[सुभाष चंद्र बोस]] '''·''' [[गोपबंधु दास]] '''·''' [[हरे कृष्ण मेहताब]] '''·''' [[जगबंधु बख्शी]] '''·''' [[गोपबन्धु चौधरी]]'''·''' [[आचार्य प्यारे मोहन]] '''·''' [[विश्वनाथ दास]] '''·''' [[शशिभूषण रथ]] '''·''' [[कृष्ण चन्द्र गजपति]] '''·''' [[वीर सुरेंद्र साई]]&lt;br /&gt;
|list6style=&lt;br /&gt;
|group7=[[हिमाचल प्रदेश|हिमाचल]]'''·'''[[उत्तराखण्ड]] &lt;br /&gt;
|group7style=&lt;br /&gt;
|list7=[[नारायण दत्त तिवारी]] '''·''' [[चन्दन सिंह गढ़वाली]] '''·''' [[घनश्याम लाल जोशी]] '''·''' [[गोविंद बल्लभ पंत]] '''·''' [[पूरन चन्द जोशी]] '''·''' [[विचित्र नारायण शर्मा]] '''·''' [[राम सिंह पठानिया]]&lt;br /&gt;
|list7style=&lt;br /&gt;
|group8=[[कर्नाटक]]'''·'''[[केरल]]&lt;br /&gt;
|group8style=&lt;br /&gt;
|list8= [[एन.जी. हार्डीकर]] '''·''' [[एन. एस. हार्डिकर]] '''·''' [[के. एम. चांडी]] '''·''' [[सी. एम. पुनाचा]] '''·''' [[दामोदर मेनन]] '''·''' [[के. केलप्पन]] '''·''' [[ई. एम. एस. नंबूदरीपाद]] '''·''' [[ए. के. गोपालन]] '''·''' [[एनी मसकैरिनी]] '''·''' [[चम्पक रमन पिल्लई]]&lt;br /&gt;
|list8style=&lt;br /&gt;
|group9=[[बिहार]]'''·'''[[झारखण्ड]]&lt;br /&gt;
|group9style=&lt;br /&gt;
|list9= [[अनुग्रह नारायण सिंह]] '''·''' [[सत्येन्द्र नारायण सिंह]] '''·''' [[शेख़ भिखारी]] '''·''' [[राजेन्द्र प्रसाद]] '''·''' [[जयप्रकाश नारायण]] '''·''' [[बिरसा मुंडा]] '''·''' [[बिधान चंद्र राय]] '''·'''  [[जगजीवन राम]] '''·'''  [[तिलका माँझी]] '''·''' [[अब्दुल बारी]] '''·''' [[टिकैत उमराव सिंह]] '''·''' [[बाबू कुंवर सिंह]] '''·''' [[जगत नारायण लाल]] '''·''' [[बली राम भगत]] '''·''' [[बुधु भगत]] '''·''' [[रामवृक्ष बेनीपुरी]] '''·''' [[कृष्ण बल्लभ सहाय]] '''·''' [[राजकुमार शुक्ल]] '''·''' [[अहमदुल्लाह]] '''·''' [[रामनवमी प्रसाद]] '''·''' [[राम नारायण मिश्र]] '''·''' [[शीलभद्र याजी]] '''·''' [[रामदेनी सिंह]] '''·''' [[जुब्बा साहनी]] '''·''' [[राम नारायण सिंह]]&lt;br /&gt;
|list9style=&lt;br /&gt;
|group10=[[गोवा]]&lt;br /&gt;
|group10style=&lt;br /&gt;
|list10 =[[टी. बी. कुन्हा]] '''·''' [[सुधाताई जोशी]] '''·''' [[बापू बोटो]] '''·''' [[बाला देसाई]] '''·''' [[रोहिदास मापारी]] '''·''' [[यशवंत अग्रवाडेकर]] '''·''' [[लक्ष्मण वेलिंगकर]] '''·''' [[रघुनाथ शिरोदकर]] '''·''' [[मनोहर पेडनेकर]] '''·''' [[बाला मापारी]] '''·''' [[मार दूलो]] '''·''' [[रामचंद्र नेवगुई]] '''·''' [[रावजी राने]] '''·''' [[यशवंत राव राने]] '''·''' [[विनायक साप्ते]] '''·''' [[विश्वनाथ नारायण लवांडे]] '''·''' [[रामराव गणपत राव लाड]] '''·''' [[मोहन रानाडे]]&lt;br /&gt;
|list10style=&lt;br /&gt;
|group11=[[गुजरात]]	&lt;br /&gt;
|group11style=&lt;br /&gt;
|list11= [[कस्तूरबा गाँधी]] '''·''' [[महात्मा गाँधी]] '''·''' [[सरदार पटेल|सरदार वल्लभ भाई पटेल]] '''·'''  [[जीवराज मेहता]] '''·''' [[हंसा मेहता]] '''·''' [[गणेश वासुदेव मावलंकर]] '''·''' [[विट्ठलदास पटेल]] '''·''' [[भूलाभाई देसाई]] '''·''' [[पेरीन बेन]] '''·''' [[महादेव देसाई]] '''·''' [[अशोक मेहता]] '''·''' [[नरहरि पारिख]] '''·''' [[मनीभाई देसाई]]  '''·''' [[श्यामजी कृष्ण वर्मा]] '''·''' [[नारायण भाई देसाई]] '''·''' [[अब्बास तैयबजी]] '''·''' [[उच्छंगराय नवलशंकर ढेबर]] '''·''' [[कुंवर जी कल्याण जी मेहता]] '''·''' [[बलवंतराय मेहता]] '''·''' [[हितेन्द्र देसाई]] '''·''' [[पेरिन बेन कैप्टन]]&lt;br /&gt;
|list11style=&lt;br /&gt;
|group12=[[जम्मू]] 	&lt;br /&gt;
|group12style=&lt;br /&gt;
|list12=[[कामरेड धनवंतरी]] '''·''' [[शेख़ मोहम्मद अब्दुल्ला]] '''·''' [[सरदार बुध सिंह]] '''·''' [[श्यामलाल सराफ]]&lt;br /&gt;
|list12style=&lt;br /&gt;
|group13=[[राजस्थान]] &lt;br /&gt;
|group13style=&lt;br /&gt;
|list13=[[अंजना देवी चौधरी]] '''·''' [[छगनराज चौपासनी वाला]] '''·''' [[गंगा सिंह]] '''·''' [[घनश्याम दास बिड़ला]] '''·''' [[घासी राम चौधरी]] '''·''' [[जमनालाल बजाज]] '''·''' [[चुन्नीलाल चित्तौड़ा]] '''·''' [[जयनारायण व्यास]] '''·''' [[केसरी सिंह बारहट]] '''·''' [[नगेन्द्र बाला]] '''·''' [[अब्दुल हमीद कैसर]] '''·''' [[ठाकुर केसरी सिंह]] '''·''' [[गोकुलभाई भट्ट]] '''·''' [[महात्मा रामचन्द्र वीर]] '''·''' [[बाबा नरसिंह दास]] '''·''' [[अर्जुन लाल सेठी]] '''·''' [[शौकत उस्मानी]] '''·''' [[गोकुल लाल असावा]] '''·''' [[नानक भील]] '''·''' [[युधवीर सिंह]]&lt;br /&gt;
|list13style=&lt;br /&gt;
|group14=[[तमिलनाडु]]&lt;br /&gt;
|group14style=&lt;br /&gt;
|list14=[[सी. सुब्रह्मण्यम]] '''·''' [[चक्रवर्ती राजगोपालाचारी]] '''·''' [[चिदंबरम पिल्लई]] '''·''' [[टी.एस.एस. राजन]] '''·''' [[कसीनथूनी नागेश्वर राव]] '''·''' [[के. कामराज]] '''·''' [[के. संतानम]] '''·''' [[मिनजुर भक्तवत्सलम]] '''·''' [[सी. विजय राघवा चारियर]] '''·''' [[जे.सी. कुमारप्पा]] '''·''' [[एस. सत्यमूर्ति]] '''·''' [[अविनाशलिंगम चेट्टियार]] '''·''' [[आदि केशवलू नायकर]] '''·''' [[रुक्मणि लक्ष्मीपति अम्माल]] '''·''' [[वरदराजुलू नायडू]] '''·''' [[वी. वी. सुब्रमण्य अय्यर]]  &lt;br /&gt;
|list14style=&lt;br /&gt;
|group15=[[पंजाब]]&lt;br /&gt;
|group15style=&lt;br /&gt;
|list15 =[[करतार सिंह सराभा]] '''·''' [[ऊधम सिंह]] '''·''' [[भगतसिंह]] '''·''' [[सुखदेव]] '''·''' [[लाला लाजपत राय]] '''·''' [[लाला शंकर लाल]] '''·''' [[राजकुमारी अमृत कौर]] '''·''' [[प्रताप सिंह कैरों]] '''·''' [[सोहन सिंह भकना]] '''·''' [[इन्द्र विद्यावाचस्पति]] '''·''' [[जगतराम]] '''·''' [[स्वामी श्रद्धानन्द]] '''·''' [[भाई परमानन्द]] '''·''' [[गुरुबख्श ढिल्लो]] '''·''' [[मदन लाल ढींगरा]] '''·''' [[गुरदयाल सिंह ढिल्‍लों]] '''·''' [[पंडित कांशीराम]] '''·''' [[राम सिंह]]'''·''' [[गोकुलचन्द नारंग]] '''·''' [[हरि किशन सरहदी]] '''·''' [[तारा सिंह]] '''·''' [[बलराज भल्ला]] '''·''' [[बलवंत सिंह]] '''·''' [[गोपी चन्द भार्गव]] '''·''' [[सरदार बलदेव सिंह]]'''·''' [[प्रजापति मिश्र]] '''·''' [[रणधीर सिंह]] '''·''' [[भाई संतोख सिंह]] '''·''' [[भूपेश गुप्ता]] '''·'''[[सैफ़ुद्दीन किचलू]] '''·''' [[सरदार अजीत सिंह]] '''·''' [[बाल मुकुन्द]] '''·''' [[लाला दुनीचंद]] '''·''' [[अमरनाथ विद्यालंकार]] '''·''' [[रामभजदत्त चौधरी]] '''·''' [[लाला जगत नारायन]] '''·''' [[लाला पिंडीदास]] '''·''' [[शार्दूल सिंह कवीश्वर]] '''·''' [[सत्यदेव विद्यालंकार]] '''·''' [[सत्यवती देवी]] '''·''' [[सत्यपाल]] '''·''' [[सरदार सेवा सिंह]] '''·''' [[बृष भान]] '''·''' [[भीम सेन सच्चर]] '''·''' [[मंगूराम]] '''·''' [[ज्ञानी गुरमुख सिंह मुसाफ़िर]] '''·''' [[हबीब उर रहमान लुधियानवी]]&lt;br /&gt;
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|group16=[[मध्य प्रदेश]]-[[छत्तीसगढ़]]&lt;br /&gt;
|group16style=&lt;br /&gt;
|list16=[[अनंत लक्ष्मण कन्हेरे]] '''·''' [[ठाकुर निरंजन सिंह]] '''·''' [[लक्ष्मण प्रसाद दुबे]] '''·''' [[वामनराव बलिराम लाखे]] '''·''' [[बृजलाल वियाणी]] '''·''' [[प्यारेलाल खण्डेलवाल]] '''·''' [[सुन्दरलाल शर्मा]] '''·''' [[ठाकुर प्यारेलाल सिंह]] '''·''' [[लाल कालेन्द्र सिंह]] '''·''' [[डॉ. राधाबाई]] '''·''' [[मुकुन्द रामाराव जयकर]] '''·''' [[दादा धर्माधिकारी]] '''·''' [[बाबा रामचंद्र]] '''·''' [[जानकी देवी बजाज]] '''·''' [[राजा बख्तावर सिंह]] '''·''' [[बालकृष्ण शिवराम मुंजे]] '''·''' [[खूबचंद बघेल]]&lt;br /&gt;
|list16style=&lt;br /&gt;
|group17=[[महाराष्ट्र]]	&lt;br /&gt;
|group17style=&lt;br /&gt;
|list17=[[एन. एम. जोशी]] '''·''' [[बाल गंगाधर तिलक]] '''·''' [[केशव बलिराम हेडगेवार]] '''·''' [[राजगुरु]] '''·''' [[वीर सावरकर]] '''·'''  [[विनोबा भावे]] '''·''' [[दादा भाई नौरोजी]] '''·''' [[वासुदेव बलवन्त फड़के]] '''·''' [[गोपाल कृष्ण गोखले]] '''·''' [[बाल गंगाधर खेर]] '''·''' [[माधव श्रीहरि अणे]] '''·''' [[गणेश दामोदर सावरकर]] '''·''' [[चापेकर बन्धु]] '''·''' [[गंगाधर अधिकारी]] '''·''' [[काका कालेलकर]] '''·''' [[फ़ीरोज़ गाँधी]] '''·''' [[त्र्यंबक रघुनाथ देवगिरिकर]] '''·''' [[बलवंत सांवलराम देशपाण्डे]] '''·''' [[बदरुद्दीन तैयब जी]] '''·''' [[भीकाजी कामा]] '''·''' [[बालकृष्ण चापेकर]] '''·''' [[बाबूराव थोरात]] '''·''' [[किशोरी लाल मशरूवाला]] '''·''' [[यूसुफ़ मेहरअली]] '''·''' [[फिरोज़शाह मेहता]] '''·''' [[रामकृष्ण खत्री]] '''·''' [[दामोदर हरी चापेकर]] '''·''' [[वासुदेव चापेकर]] '''·''' [[वामन सखाराम खरे]] '''·''' [[विष्णु गणेश पिंगले]] '''·''' [[नरहर विष्णु गाडगिल]] '''·''' [[विष्णु दामोदर चितले]] '''·''' [[शंकर लाल बैंकर]] '''·''' [[शंकर दत्तात्रेय देव]] '''·''' [[श्रीधर महादेव जोशी]] '''·''' [[नाना साहब]] '''·''' [[भाऊसाहेब हिरे]] '''·''' [[विट्ठल सखाराम पागे]]&lt;br /&gt;
|list17style=&lt;br /&gt;
|group18= [[हरियाणा]]	&lt;br /&gt;
|group18style=&lt;br /&gt;
|list18= [[चौधरी देवी लाल]] '''·''' [[अरुणा आसफ़ अली]] '''·''' [[देशबंधु गुप्त]] '''·'''  [[बंसीलाल]] '''·''' [[सुचेता कृपलानी]] '''·''' [[बनारसी दास गुप्ता]] '''·''' [[छोटूराम]]&lt;br /&gt;
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|group19=[[स्वतन्त्रता सेनानी सूची|विविध]] &lt;br /&gt;
|group19style=&lt;br /&gt;
|list19=[[एनी बेसेंट]] '''·''' [[एन. गोपाल स्वामी आयंगर]] '''·''' [[ज्योतिकणा दत्त]] '''·''' [[दुर्गा भाभी]] '''·''' [[इंदुलाल याज्ञिक]] '''·''' [[सुशीला दीदी]] '''·''' [[अनन्त हरि मित्र]] '''·''' [[कैप्टन मोहन सिंह]] '''·''' [[इन्द्रनारायण द्विवेदी]] '''·''' [[ई.वी. रामास्वामी नायकर]] '''·''' [[गंगा राम]] '''·''' [[गणपत लाल वर्मा]] '''·''' [[घीसी लाल धाकड़]] '''·''' [[आसफ़ अली]] '''·''' [[वनलता दास गुप्ता]] '''·''' [[मिट्ठूलाल अग्रहरि]] '''·'''  [[मीरा बेन]]  '''·''' [[हरिनारायण अग्रहरि]] '''·''' [[पोट्टि श्रीरामुलु]] '''·''' [[पूर्णानंद दास गुप्ता]] '''·''' [[प्यारे लाल नय्यर]] '''·''' [[लोकराम नयनराम शर्मा]] '''·''' [[कमलादास गुप्ता]] '''·'''  [[सारंगधर दास]] '''·''' [[भूपेंद्रनाथ दत्त]] '''·''' [[मौलाना मज़हरुल हक़]] '''·''' [[अमीर चन्द]] '''·''' [[गुलाब सिंह]] '''·''' [[किशना भील]] '''·''' [[अवध बिहारी]] '''·''' [[आई. के. कुमारन]] '''·''' [[असित भट्टाचार्य]] '''·''' [[शाहनवाज ख़ां]] '''·''' [[गोकुल चंद धाकड़]] '''·''' [[जानकी देवी]] '''·''' [[होससैनी]] '''·''' [[अज़ीज़ुंबाई]] '''·''' [[गौहर जान (क्रांतिकारी)|गौहर जान]]&lt;br /&gt;
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}}&amp;lt;noinclude&amp;gt;[[Category:इतिहास के साँचे]][[Category:राजनीति के साँचे]]&amp;lt;/noinclude&amp;gt;&lt;/div&gt;</summary>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;Jeeteshvaishya: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;'''बाबू मेदनी सिंह''' का जन्म सोमवंशी राजपूत परिवार में प्रतापगढ़ राज (वर्तमान में प्रतापगढ़ जिला) में हुआ था। वे प्रतापगढ़ के राजा छत्रधारी सिंह के ज्येष्ठ पुत्र थे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बड़े भाई होने के बावजूद, मेदनी सिंह को अपनी उचित विरासत के लिए शुरुआती चुनौतियों का सामना करना पड़ा। उनके पिता राजा छत्रधारी सिंह ने अपनी दूसरी पत्नी सुजान कुंवारी के मोह के वशीभूत होकर अन्यायपूर्वक सुजान कुंवारी से जन्मे पुत्र पृथ्वीपत सिंह को अपना उत्तराधिकारी बनाया, जिससे मेदनी सिंह अपने जन्मसिद्ध अधिकार से वंचित हो गए। इस पैतृक अन्याय ने मेदनी सिंह के भीतर आक्रोश पैदा कर दिया, जिससे वह उस चीज के लिए संघर्ष को जन्म दिया जिसे वह सही मायनों में अपनी विरासत मानता था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेदनी सिंह ने अपने पिता छत्रधारी सिंह के अन्यायपूर्ण निर्णय का विरोध किया और अपने पिता के साथ प्रतापगढ़ शहर के पास कई युद्ध लड़े, लेकिन सफलता नहीं मिली। छत्रधारी सिंह की 1795 में मृत्यु हो गई और पृथ्वीपत सिंह ने सिंहासन संभाल लिया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेदनी सिंह ने प्रतापगढ़ शहर के पास ही, कटरा मेदनीगंज नाम से एक नगर की स्थापना कि जो उनके ही नाम पर बसाई गई हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति |आधार= |प्रारम्भिक=प्रारम्भिक1 |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ ==&lt;br /&gt;
* [https://archive.org/details/dli.ministry.08771/page/37/mode/2up प्रतापगढ़ गजेटीयर, 1980, पृष्ठ 37 और 38]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
[[Category:इतिहास कोश]]&lt;/div&gt;</summary>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;Jeeteshvaishya: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;'''बाबू मेदनी सिंह''' का जन्म सोमवंशी राजपूत परिवार में प्रतापगढ़ राज (वर्तमान में प्रतापगढ़ जिला) में हुआ था। वे प्रतापगढ़ के राजा छत्रधारी सिंह के ज्येष्ठ पुत्र थे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* बड़े भाई होने के बावजूद, मेदनी सिंह को अपनी उचित विरासत के लिए शुरुआती चुनौतियों का सामना करना पड़ा। उनके पिता राजा छत्रधारी सिंह ने अपनी दूसरी पत्नी सुजान कुंवारी के मोह के वशीभूत होकर अन्यायपूर्वक सुजान कुंवारी से जन्मे पुत्र पृथ्वीपत सिंह को अपना उत्तराधिकारी बनाया, जिससे मेदनी सिंह अपने जन्मसिद्ध अधिकार से वंचित हो गए। इस पैतृक अन्याय ने मेदनी सिंह के भीतर आक्रोश पैदा कर दिया, जिससे वह उस चीज के लिए संघर्ष को जन्म दिया जिसे वह सही मायनों में अपनी विरासत मानता था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* मेदनी सिंह ने अपने पिता छत्रधारी सिंह के अन्यायपूर्ण निर्णय का विरोध किया और अपने पिता के साथ प्रतापगढ़ शहर के पास कई युद्ध लड़े, लेकिन सफलता नहीं मिली। छत्रधारी सिंह की 1795 में मृत्यु हो गई और पृथ्वीपत सिंह ने सिंहासन संभाल लिया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* मेदनी सिंह ने प्रतापगढ़ शहर के पास ही, कटरा मेदनीगंज नाम से एक नगर की स्थापना कि जो उनके ही नाम पर बसाई गई हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति |आधार= |प्रारम्भिक=प्रारम्भिक1 |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ ==&lt;br /&gt;
* [https://archive.org/details/dli.ministry.08771/page/37/mode/2up प्रतापगढ़ गजेटीयर, 1980, पृष्ठ 37 और 38]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
[[Category:इतिहास कोश]]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Jeeteshvaishya</name></author>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;Jeeteshvaishya: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;बाबू मेदनी सिंह का जन्म सोमवंशी राजपूत परिवार में प्रतापगढ़ राज (वर्तमान में प्रतापगढ़ जिला) में हुआ था। वे प्रतापगढ़ के राजा छत्रधारी सिंह के ज्येष्ठ पुत्र थे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बड़े भाई होने के बावजूद, मेदनी सिंह को अपनी उचित विरासत के लिए शुरुआती चुनौतियों का सामना करना पड़ा। उनके पिता राजा छत्रधारी सिंह ने अपनी दूसरी पत्नी सुजान कुंवारी के मोह के वशीभूत होकर अन्यायपूर्वक सुजान कुंवारी से जन्मे पुत्र पृथ्वीपत सिंह को अपना उत्तराधिकारी बनाया, जिससे मेदनी सिंह अपने जन्मसिद्ध अधिकार से वंचित हो गए। इस पैतृक अन्याय ने मेदनी सिंह के भीतर आक्रोश पैदा कर दिया, जिससे वह उस चीज के लिए संघर्ष को जन्म दिया जिसे वह सही मायनों में अपनी विरासत मानता था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेदनी सिंह ने अपने पिता छत्रधारी सिंह के अन्यायपूर्ण निर्णय का विरोध किया और अपने पिता के साथ प्रतापगढ़ शहर के पास कई युद्ध लड़े, लेकिन सफलता नहीं मिली। छत्रधारी सिंह की 1795 में मृत्यु हो गई और पृथ्वीपत सिंह ने सिंहासन संभाल लिया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेदनी सिंह ने प्रतापगढ़ शहर के पास ही, कटरा मेदनीगंज नाम से एक नगर की स्थापना कि जो उनके ही नाम पर बसाई गई हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति |आधार= |प्रारम्भिक=प्रारम्भिक1 |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ ==&lt;br /&gt;
* [https://archive.org/details/dli.ministry.08771/page/37/mode/2up प्रतापगढ़ गजेटीयर, 1980, पृष्ठ 37 और 38]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
[[Category:इतिहास कोश]]&lt;/div&gt;</summary>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;Jeeteshvaishya: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;बाबू मेदनी सिंह का जन्म सोमवंशी राजपूत परिवार में प्रतापगढ़ राज (वर्तमान में प्रतापगढ़ जिला) में हुआ था। वे प्रतापगढ़ के राजा छत्रधारी सिंह के ज्येष्ठ पुत्र थे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बड़े भाई होने के बावजूद, मेदनी सिंह को अपनी उचित विरासत के लिए शुरुआती चुनौतियों का सामना करना पड़ा। उनके पिता राजा छत्रधारी सिंह ने अपनी दूसरी पत्नी सुजान कुंवारी के मोह के वशीभूत होकर अन्यायपूर्वक सुजान कुंवारी से जन्मे पुत्र पृथ्वीपत सिंह को अपना उत्तराधिकारी बनाया, जिससे मेदनी सिंह अपने जन्मसिद्ध अधिकार से वंचित हो गए। इस पैतृक अन्याय ने मेदनी सिंह के भीतर आक्रोश पैदा कर दिया, जिससे वह उस चीज के लिए संघर्ष को जन्म दिया जिसे वह सही मायनों में अपनी विरासत मानता था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेदनी सिंह ने अपने पिता छत्रधारी सिंह के अन्यायपूर्ण निर्णय का विरोध किया और अपने पिता के साथ प्रतापगढ़ शहर के पास कई युद्ध लड़े, लेकिन सफलता नहीं मिली। छत्रधारी सिंह की 1795 में मृत्यु हो गई और पृथ्वीपत सिंह ने सिंहासन संभाल लिया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मेदनी सिंह ने प्रतापगढ़ शहर के पास ही, कटरा मेदनीगंज नाम से एक नगर की स्थापना कि जो उनके ही नाम पर बसाई गई हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति |आधार= |प्रारम्भिक=प्रारम्भिक1 |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
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		<summary type="html">&lt;p&gt;Jeeteshvaishya: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;'''बाबू  गुलाब सिंह''' एक भारतीय क्रांतिकारी थें जो अवध के तरौल रियासत के तालुकेदार (राजा) थें। &lt;br /&gt;
*ठाकुर गुलाब सिंह [[नाना साहब|नाना साहेब पेशवा]] तथा [[झांसी की रानी लक्ष्मीबाई]] के व्यक्तित्व से काफ़ी प्रभावित थे। &lt;br /&gt;
* सन [[1857 का स्वतंत्रता संग्राम]] में अंग्रेजी सेना छितपालगढ़ से तरौल पर चढ़ाई की तो बाबू गुलाब सिंह व उनकी सेना ने हफ्तों तक [[अंग्रेज़|अंग्रेजों]] से लोहा लिया। हालाकि उन्हें मालूम था कि अंग्रेजी सेना के सामने लड़ना मौत के मुँह मे जाना है, फिर भी [[भारत]] के सपूतों ने अंतिम समय तक [[किला|किले]] के समीप अंग्रेजी सेना को फटकने नहीं दिया। जब [[इलाहाबाद]] से [[लखनऊ]] अंग्रेजी सैनिक क्रांतिकारियों के दमन के लिए जा रहे थे। तब उन्होंने अपनी निजी सेना के साथ मान्धाता क्षेत्र के [[कटरा गुलाब सिंह]] के पास [[बकुलाही नदी]] पर घमासान युद्ध करके कई अंग्रेजों को मार डाला था। &lt;br /&gt;
* जानकारी के अनुसार  इस लड़ाई में किले पर फिरंगी सैनिकों ने उनके कई सिपाही व उनकी महारानी को गोलियों से भून डाला था। मुठभेड़ में बाबू गुलाब सिंह गंभीर रूप से घायल हुए थे। &lt;br /&gt;
* क्रांतिकारी बाबू गुलाब सिंह ने पौराणिक नदी [[बकुलाही नदी|बकुलाही]] के किनारे एक गाँव की स्थापना की थी, जो वर्तमान में उन्हीं के नाम पर '''[[कटरा गुलाब सिंह]]''' के नाम से जाना जाता है।&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति |आधार= |प्रारम्भिक=प्रारम्भिक2 |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{स्वतन्त्रता सेनानी}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:स्वतन्त्रता सेनानी]]&lt;br /&gt;
[[Category:इतिहास कोश]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Jeeteshvaishya</name></author>
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		<title>प्रज्ञा शर्मा</title>
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		<updated>2023-02-05T21:10:24Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Jeeteshvaishya: Jeeteshvaishya moved page प्रज्ञा शर्मा to Dr. Pragya Sharma&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;#REDIRECT [[Dr. Pragya Sharma]]&lt;/div&gt;</summary>
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	<entry>
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		<updated>2023-02-05T21:10:24Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Jeeteshvaishya: Jeeteshvaishya moved page प्रज्ञा शर्मा to Dr. Pragya Sharma&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा साहित्यकार&lt;br /&gt;
|चित्र=Pragya Sharma.jpg&lt;br /&gt;
|चित्र का नाम=डॉ प्रज्ञा शर्मा &lt;br /&gt;
|पूरा नाम=प्रज्ञा शर्मा&lt;br /&gt;
|अन्य नाम=&lt;br /&gt;
|जन्म=[[3 जुलाई]], [[1981]]&lt;br /&gt;
|जन्म भूमि=[[कानपुर]] ([[उत्तर प्रदेश]])&lt;br /&gt;
|मृत्यु=&lt;br /&gt;
|मृत्यु स्थान=&lt;br /&gt;
|अभिभावक=&lt;br /&gt;
|पालक माता-पिता= स्वर्गीय श्री बी. एल. शर्मा (पिता), श्रीमती रमा शर्मा (माता) &lt;br /&gt;
|पति/पत्नी=&lt;br /&gt;
|संतान=&lt;br /&gt;
|कर्म भूमि=[[भारत]] &lt;br /&gt;
|कर्म-क्षेत्र=साहित्यकार, कवियित्री&lt;br /&gt;
|मुख्य रचनाएँ= 'मौत का ज़िंदगीनामा', 'गोपाल दास नीरज की हस्तलिखित कविताएँ'&lt;br /&gt;
|विषय=&lt;br /&gt;
|भाषा=[[हिंदी भाषा|हिंदी]], [[उर्दू]], [[अंग्रेज़ी भाषा|अंग्रेज़ी]] और हिन्दुस्तानी भाषा।&lt;br /&gt;
|विद्यालय=&lt;br /&gt;
|शिक्षा= एमए (शिक्षाशास्त्र)   &lt;br /&gt;
|पुरस्कार-उपाधि=&lt;br /&gt;
|प्रसिद्धि=&lt;br /&gt;
|विशेष योगदान= &lt;br /&gt;
|नागरिकता=भारतीय&lt;br /&gt;
|संबंधित लेख=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=&lt;br /&gt;
|पाठ 1=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 2=&lt;br /&gt;
|पाठ 2=&lt;br /&gt;
|अन्य जानकारी= &lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
|अद्यतन=}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रज्ञा शर्मा ([[अंग्रेज़ी]]: ''Pragya Sharma'', जन्म:03 जुलाई, 1981) एक भारतीय [[कवि|कवियित्री]] एवं [[साहित्यकार]] हैं।&amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web |url=https://dainikbhaskarup.com/writing-has-also-shaped-my-rough-personality-dr-pragya-sharma/|title=लेखन ने मेरे अनगढ़ व्यक्तित्व को भी सँवारा है : डॉ प्रज्ञा शर्मा|accessmonthday=16 दिसंबर |accessyear=2022 |last= |first= |authorlink= |format= |publisher=दैनिक भास्कर  |language=हिन्दी }}&amp;lt;/ref&amp;gt;&amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web |url=https://deshkiupasana.com/?p=26442&amp;amp;fbclid|title=कविता लिखना और कविता को जीना, दोनों दो अलग- अलग बातें हैं |accessmonthday=29 दिसंबर&lt;br /&gt;
|accessyear=2022 |last= |first= |authorlink= |format= |publisher=देश की उपासना|language=हिन्दी }}&amp;lt;/ref&amp;gt; &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==परिचय== &lt;br /&gt;
प्रज्ञा शर्मा का जन्म 1981 में [[उत्तर प्रदेश]] के [[कानपुर]] में पिता श्री बी. एल. शर्मा और श्रीमती रमा शर्मा के यहाँ हुआ। उन्होंने शिक्षाशास्त्र में परास्नातक किया है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
डॉ प्रज्ञा राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पटल पर मंच एवं साहित्य की दुनिया का जाना पहचाना नाम हैं। कवि-सम्मेलनों और मुशायरों के क्षेत्र में डॉ. प्रज्ञा शर्मा एक महत्वपूर्ण नाम हैं। वो अब तक अनेकों कवि सम्मेलनों और मुशायरों में कविता-पाठ चुकी हैं। उन्होंने लालकिला कवि सम्मेलन, गेटवे ऑफ इंडिया गणतंत्र दिवस मुशायरा, संसद भवन कवि सम्मेलन जैसे देश के की नामी-गिरामी कवि सम्मलनों व मुशायरों मे प्रस्तुति दी हैं। इनकी रचनाएं सब टीवी, दूरदर्शन, ज़ी सलाम, डीडी सह्याद्री, साधना टीवी, ईटीवी, [[आकाशवाणी]] इत्यादि पर प्रसारित हो चुकी हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भारत के छोटे-बड़े शहरों में कविता पाठ करने के अलावा उन्होंने कई अन्य देशों में भी अपनी काव्य-प्रतिभा का प्रदर्शन किया है। इनमें [[दुबई]], कतर जैसे देश शामिल हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वर्ष 2019 में ‘गोपाल दास नीरज की हस्तलिखित कविताएँ’ नाम से उनकी पहली किताब छपी, जिसका विमोचन [[डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक]] (तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री), [[मुरली मनोहर जोशी|डॉ. मुरली मनोहर जोशी]] (भूतपूर्व गृह मंत्री), आर.के. सिन्हा (तत्कालीन [[राज्यसभा]] सदस्य) और [[पद्मश्री]] सुरेंद्र शर्मा द्वारा [[दिल्ली]] में हुआ। इनकी दूसरी पुस्तक ‘मौत का ज़िंदगीनामा' (काव्य संग्रह) रेख़्ता पब्लिकेशन द्वारा 2021 में प्रकाशित की गई, जिसकी समस्त रचनाएं लॉकडाउन विषय पर आधारित हैं। इसे पाठकों और आलोचकों से काफी सराहना मिली। यह पुस्तक बेस्ट-सेलर रही। &amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web |url=https://chauthiduniya.com/pragya-sharma-vs-a-self-made-personality/|title=प्रज्ञा शर्मा बनाम एक स्वनिर्मित व्यक्तित्व|accessmonthday=21 जुलाई |accessyear=2022 |last= |first= |authorlink= |format= |publisher=चौथी दुनिया |language=हिन्दी }}&amp;lt;/ref&amp;gt; &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
डॉ प्रज्ञा शर्मा कविसम्मेलन समिति के संस्थापक सदस्यों में से एक है। प्रज्ञा वेलफेयर फाउंडेशन की संस्थापक-निदेशक के रूप में विभिन्न सामाजिक कार्यों से जुड़ी हैं। वर्तमान में वह [[महाराष्ट्र]] के शहर [[मुंबई]] में स्थाई रूप से निवास करती हैं।&amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web |url=https://www.facebook.com/photo.php?fbid=184813223657439&amp;amp;set=pb.100063862864144.-2207520000|title=एक शायराना शख़्सियत|accessmonthday=29 जून|accessyear=2021 |last= |first= |authorlink= |format= |publisher=दून वैली मेल |language=हिन्दी }}&amp;lt;/ref&amp;gt;&amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web |url=https://rashtrawadi.in/as-a-writer-i-consider-myself-a-student-poet-dr-pragya-sharma/|title=एक साहित्यकार के तौर पर खुद को विद्यार्थी मानती हूँ: कवियित्री डॉ. प्रज्ञा शर्मा  |accessmonthday=29 दिसंबर|accessyear=2022 |last= |first= |authorlink= |format= |publisher=राष्ट्रवादी न्यूज |language=हिन्दी }}&amp;lt;/ref&amp;gt; &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==प्रमुख कृतियाँ==&lt;br /&gt;
* ''मौत का ज़िंदगीनामा''&lt;br /&gt;
* ''गोपाल दास नीरज की हस्तलिखित कविताएँ'' &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=|प्रारम्भिक=प्रारम्भिक1 |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{आधुनिक महिला साहित्यकार}}&lt;br /&gt;
[[Category:आधुनिक महिला साहित्यकार]][[Category:महिला साहित्यकार]][[Category:साहित्यकार]][[Category:जीवनी साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]][[Category:चरित कोश]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
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		<author><name>Jeeteshvaishya</name></author>
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		<title>Dr. Pragya Sharma</title>
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		<updated>2023-01-14T13:58:28Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Jeeteshvaishya: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा साहित्यकार&lt;br /&gt;
|चित्र=Pragya Sharma.jpg&lt;br /&gt;
|चित्र का नाम=डॉ प्रज्ञा शर्मा &lt;br /&gt;
|पूरा नाम=प्रज्ञा शर्मा&lt;br /&gt;
|अन्य नाम=&lt;br /&gt;
|जन्म=[[3 जुलाई]], [[1981]]&lt;br /&gt;
|जन्म भूमि=[[कानपुर]] ([[उत्तर प्रदेश]])&lt;br /&gt;
|मृत्यु=&lt;br /&gt;
|मृत्यु स्थान=&lt;br /&gt;
|अभिभावक=&lt;br /&gt;
|पालक माता-पिता= स्वर्गीय श्री बी. एल. शर्मा (पिता), श्रीमती रमा शर्मा (माता) &lt;br /&gt;
|पति/पत्नी=&lt;br /&gt;
|संतान=&lt;br /&gt;
|कर्म भूमि=[[भारत]] &lt;br /&gt;
|कर्म-क्षेत्र=साहित्यकार, कवियित्री&lt;br /&gt;
|मुख्य रचनाएँ= 'मौत का ज़िंदगीनामा', 'गोपाल दास नीरज की हस्तलिखित कविताएँ'&lt;br /&gt;
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|भाषा=[[हिंदी भाषा|हिंदी]], [[उर्दू]], [[अंग्रेज़ी भाषा|अंग्रेज़ी]] और हिन्दुस्तानी भाषा।&lt;br /&gt;
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|शिक्षा= एमए (शिक्षाशास्त्र)   &lt;br /&gt;
|पुरस्कार-उपाधि=&lt;br /&gt;
|प्रसिद्धि=&lt;br /&gt;
|विशेष योगदान= &lt;br /&gt;
|नागरिकता=भारतीय&lt;br /&gt;
|संबंधित लेख=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=&lt;br /&gt;
|पाठ 1=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 2=&lt;br /&gt;
|पाठ 2=&lt;br /&gt;
|अन्य जानकारी= &lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
|अद्यतन=}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रज्ञा शर्मा ([[अंग्रेज़ी]]: ''Pragya Sharma'', जन्म:03 जुलाई, 1981) एक भारतीय [[कवि|कवियित्री]] एवं [[साहित्यकार]] हैं।&amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web |url=https://dainikbhaskarup.com/writing-has-also-shaped-my-rough-personality-dr-pragya-sharma/|title=लेखन ने मेरे अनगढ़ व्यक्तित्व को भी सँवारा है : डॉ प्रज्ञा शर्मा|accessmonthday=16 दिसंबर |accessyear=2022 |last= |first= |authorlink= |format= |publisher=दैनिक भास्कर  |language=हिन्दी }}&amp;lt;/ref&amp;gt;&amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web |url=https://deshkiupasana.com/?p=26442&amp;amp;fbclid|title=कविता लिखना और कविता को जीना, दोनों दो अलग- अलग बातें हैं |accessmonthday=29 दिसंबर&lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
==परिचय== &lt;br /&gt;
प्रज्ञा शर्मा का जन्म 1981 में [[उत्तर प्रदेश]] के [[कानपुर]] में पिता श्री बी. एल. शर्मा और श्रीमती रमा शर्मा के यहाँ हुआ। उन्होंने शिक्षाशास्त्र में परास्नातक किया है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
डॉ प्रज्ञा राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पटल पर मंच एवं साहित्य की दुनिया का जाना पहचाना नाम हैं। कवि-सम्मेलनों और मुशायरों के क्षेत्र में डॉ. प्रज्ञा शर्मा एक महत्वपूर्ण नाम हैं। वो अब तक अनेकों कवि सम्मेलनों और मुशायरों में कविता-पाठ चुकी हैं। उन्होंने लालकिला कवि सम्मेलन, गेटवे ऑफ इंडिया गणतंत्र दिवस मुशायरा, संसद भवन कवि सम्मेलन जैसे देश के की नामी-गिरामी कवि सम्मलनों व मुशायरों मे प्रस्तुति दी हैं। इनकी रचनाएं सब टीवी, दूरदर्शन, ज़ी सलाम, डीडी सह्याद्री, साधना टीवी, ईटीवी, [[आकाशवाणी]] इत्यादि पर प्रसारित हो चुकी हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भारत के छोटे-बड़े शहरों में कविता पाठ करने के अलावा उन्होंने कई अन्य देशों में भी अपनी काव्य-प्रतिभा का प्रदर्शन किया है। इनमें [[दुबई]], कतर जैसे देश शामिल हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वर्ष 2019 में ‘गोपाल दास नीरज की हस्तलिखित कविताएँ’ नाम से उनकी पहली किताब छपी, जिसका विमोचन [[डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक]] (तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री), [[मुरली मनोहर जोशी|डॉ. मुरली मनोहर जोशी]] (भूतपूर्व गृह मंत्री), आर.के. सिन्हा (तत्कालीन [[राज्यसभा]] सदस्य) और [[पद्मश्री]] सुरेंद्र शर्मा द्वारा [[दिल्ली]] में हुआ। इनकी दूसरी पुस्तक ‘मौत का ज़िंदगीनामा' (काव्य संग्रह) रेख़्ता पब्लिकेशन द्वारा 2021 में प्रकाशित की गई, जिसकी समस्त रचनाएं लॉकडाउन विषय पर आधारित हैं। इसे पाठकों और आलोचकों से काफी सराहना मिली। यह पुस्तक बेस्ट-सेलर रही। &amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web |url=https://chauthiduniya.com/pragya-sharma-vs-a-self-made-personality/|title=प्रज्ञा शर्मा बनाम एक स्वनिर्मित व्यक्तित्व|accessmonthday=21 जुलाई |accessyear=2022 |last= |first= |authorlink= |format= |publisher=चौथी दुनिया |language=हिन्दी }}&amp;lt;/ref&amp;gt; &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
डॉ प्रज्ञा शर्मा कविसम्मेलन समिति के संस्थापक सदस्यों में से एक है। प्रज्ञा वेलफेयर फाउंडेशन की संस्थापक-निदेशक के रूप में विभिन्न सामाजिक कार्यों से जुड़ी हैं। वर्तमान में वह [[महाराष्ट्र]] के शहर [[मुंबई]] में स्थाई रूप से निवास करती हैं।&amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web |url=https://www.facebook.com/photo.php?fbid=184813223657439&amp;amp;set=pb.100063862864144.-2207520000|title=एक शायराना शख़्सियत|accessmonthday=29 जून|accessyear=2021 |last= |first= |authorlink= |format= |publisher=दून वैली मेल |language=हिन्दी }}&amp;lt;/ref&amp;gt;&amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web |url=https://rashtrawadi.in/as-a-writer-i-consider-myself-a-student-poet-dr-pragya-sharma/|title=एक साहित्यकार के तौर पर खुद को विद्यार्थी मानती हूँ: कवियित्री डॉ. प्रज्ञा शर्मा  |accessmonthday=29 दिसंबर|accessyear=2022 |last= |first= |authorlink= |format= |publisher=राष्ट्रवादी न्यूज |language=हिन्दी }}&amp;lt;/ref&amp;gt; &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==प्रमुख कृतियाँ==&lt;br /&gt;
* ''मौत का ज़िंदगीनामा''&lt;br /&gt;
* ''गोपाल दास नीरज की हस्तलिखित कविताएँ'' &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=|प्रारम्भिक=प्रारम्भिक1 |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{आधुनिक महिला साहित्यकार}}&lt;br /&gt;
[[Category:आधुनिक महिला साहित्यकार]][[Category:महिला साहित्यकार]][[Category:साहित्यकार]][[Category:जीवनी साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]][[Category:चरित कोश]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
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		<author><name>Jeeteshvaishya</name></author>
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		<updated>2023-01-14T13:57:34Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Jeeteshvaishya: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा साहित्यकार&lt;br /&gt;
|चित्र=Pragya Sharma.jpg&lt;br /&gt;
|चित्र का नाम=डॉ प्रज्ञा शर्मा &lt;br /&gt;
|पूरा नाम=प्रज्ञा शर्मा&lt;br /&gt;
|अन्य नाम=&lt;br /&gt;
|जन्म=[[3 जुलाई]], [[1981]]&lt;br /&gt;
|जन्म भूमि=[[कानपुर]] ([[उत्तर प्रदेश]])&lt;br /&gt;
|मृत्यु=&lt;br /&gt;
|मृत्यु स्थान=&lt;br /&gt;
|अभिभावक=&lt;br /&gt;
|पालक माता-पिता= स्वर्गीय श्री बी. एल. शर्मा (पिता), श्रीमती रमा शर्मा (माता) &lt;br /&gt;
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|कर्म भूमि=[[भारत]] &lt;br /&gt;
|कर्म-क्षेत्र=साहित्यकार, कवियित्री&lt;br /&gt;
|मुख्य रचनाएँ= 'मौत का ज़िंदगीनामा', 'गोपाल दास नीरज की हस्तलिखित कविताएँ'&lt;br /&gt;
|विषय=&lt;br /&gt;
|भाषा=[[हिंदी भाषा|हिंदी]], [[उर्दू]], [[अंग्रेज़ी भाषा|अंग्रेज़ी]] और हिन्दुस्तानी भाषा।&lt;br /&gt;
|विद्यालय=&lt;br /&gt;
|शिक्षा= एमए (शिक्षाशास्त्र)   &lt;br /&gt;
|पुरस्कार-उपाधि=&lt;br /&gt;
|प्रसिद्धि=&lt;br /&gt;
|विशेष योगदान= &lt;br /&gt;
|नागरिकता=भारतीय&lt;br /&gt;
|संबंधित लेख=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=&lt;br /&gt;
|पाठ 1=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 2=&lt;br /&gt;
|पाठ 2=&lt;br /&gt;
|अन्य जानकारी= &lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
|अद्यतन=}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''डॉ प्रज्ञा शर्मा''' ([[अंग्रेज़ी]]: ''Dr. Pragya Sharma'', जन्म:03 जुलाई, 1981) एक भारतीय [[कवि|कवियित्री]] एवं [[साहित्यकार]] हैं।&amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web |url=https://dainikbhaskarup.com/writing-has-also-shaped-my-rough-personality-dr-pragya-sharma/|title=लेखन ने मेरे अनगढ़ व्यक्तित्व को भी सँवारा है : डॉ प्रज्ञा शर्मा|accessmonthday=16 दिसंबर |accessyear=2022 |last= |first= |authorlink= |format= |publisher=दैनिक भास्कर  |language=हिन्दी }}&amp;lt;/ref&amp;gt;&amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web |url=https://deshkiupasana.com/?p=26442&amp;amp;fbclid|title=कविता लिखना और कविता को जीना, दोनों दो अलग- अलग बातें हैं |accessmonthday=29 दिसंबर&lt;br /&gt;
|accessyear=2022 |last= |first= |authorlink= |format= |publisher=देश की उपासना|language=हिन्दी }}&amp;lt;/ref&amp;gt; &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==परिचय== &lt;br /&gt;
प्रज्ञा शर्मा का जन्म 1981 में [[उत्तर प्रदेश]] के [[कानपुर]] में पिता श्री बी. एल. शर्मा और माता का नाम श्रीमती रमा शर्मा के यहाँ हुआ। उन्होंने शिक्षाशास्त्र में परास्नातक किया है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
डॉ प्रज्ञा राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पटल पर मंच एवं साहित्य की दुनिया का जाना पहचाना नाम हैं। कवि-सम्मेलनों और मुशायरों के क्षेत्र में डॉ. प्रज्ञा शर्मा एक महत्वपूर्ण नाम हैं। वो अब तक अनेकों कवि सम्मेलनों और मुशायरों में कविता-पाठ चुकी हैं। उन्होंने लालकिला कवि सम्मेलन, गेटवे ऑफ इंडिया गणतंत्र दिवस मुशायरा, संसद भवन कवि सम्मेलन जैसे देश के की नामी-गिरामी कवि सम्मलनों व मुशायरों मे प्रस्तुति दी हैं। इनकी रचनाएं सब टीवी, दूरदर्शन, ज़ी सलाम, डीडी सह्याद्री, साधना टीवी, ईटीवी, [[आकाशवाणी]] इत्यादि पर प्रसारित हो चुकी हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भारत के छोटे-बड़े शहरों में कविता पाठ करने के अलावा उन्होंने कई अन्य देशों में भी अपनी काव्य-प्रतिभा का प्रदर्शन किया है। इनमें [[दुबई]], कतर जैसे देश शामिल हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वर्ष 2019 में ‘गोपाल दास नीरज की हस्तलिखित कविताएँ’ नाम से उनकी पहली किताब छपी, जिसका विमोचन [[डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक]] (तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री), [[मुरली मनोहर जोशी|डॉ. मुरली मनोहर जोशी]] (भूतपूर्व गृह मंत्री), आर.के. सिन्हा (तत्कालीन [[राज्यसभा]] सदस्य) और [[पद्मश्री]] सुरेंद्र शर्मा द्वारा [[दिल्ली]] में हुआ। इनकी दूसरी पुस्तक ‘मौत का ज़िंदगीनामा' (काव्य संग्रह) रेख़्ता पब्लिकेशन द्वारा 2021 में प्रकाशित की गई, जिसकी समस्त रचनाएं लॉकडाउन विषय पर आधारित हैं। इसे पाठकों और आलोचकों से काफी सराहना मिली। यह पुस्तक बेस्ट-सेलर रही। &amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web |url=https://chauthiduniya.com/pragya-sharma-vs-a-self-made-personality/|title=प्रज्ञा शर्मा बनाम एक स्वनिर्मित व्यक्तित्व|accessmonthday=21 जुलाई |accessyear=2022 |last= |first= |authorlink= |format= |publisher=चौथी दुनिया |language=हिन्दी }}&amp;lt;/ref&amp;gt; &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
डॉ प्रज्ञा शर्मा कविसम्मेलन समिति के संस्थापक सदस्यों में से एक है। प्रज्ञा वेलफेयर फाउंडेशन की संस्थापक-निदेशक के रूप में विभिन्न सामाजिक कार्यों से जुड़ी हैं। वर्तमान में वह [[महाराष्ट्र]] के शहर [[मुंबई]] में स्थाई रूप से निवास करती हैं।&amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web |url=https://www.facebook.com/photo.php?fbid=184813223657439&amp;amp;set=pb.100063862864144.-2207520000|title=एक शायराना शख़्सियत|accessmonthday=29 जून|accessyear=2021 |last= |first= |authorlink= |format= |publisher=दून वैली मेल |language=हिन्दी }}&amp;lt;/ref&amp;gt;&amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web |url=https://rashtrawadi.in/as-a-writer-i-consider-myself-a-student-poet-dr-pragya-sharma/|title=एक साहित्यकार के तौर पर खुद को विद्यार्थी मानती हूँ: कवियित्री डॉ. प्रज्ञा शर्मा  |accessmonthday=29 दिसंबर|accessyear=2022 |last= |first= |authorlink= |format= |publisher=राष्ट्रवादी न्यूज |language=हिन्दी }}&amp;lt;/ref&amp;gt; &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==प्रमुख कृतियाँ==&lt;br /&gt;
* ''मौत का ज़िंदगीनामा''&lt;br /&gt;
* ''गोपाल दास नीरज की हस्तलिखित कविताएँ'' &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=|प्रारम्भिक=प्रारम्भिक1 |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{आधुनिक महिला साहित्यकार}}&lt;br /&gt;
[[Category:आधुनिक महिला साहित्यकार]][[Category:महिला साहित्यकार]][[Category:साहित्यकार]][[Category:जीवनी साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]][[Category:चरित कोश]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Jeeteshvaishya</name></author>
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		<updated>2023-01-14T13:56:47Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Jeeteshvaishya: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा साहित्यकार&lt;br /&gt;
|चित्र=Pragya Sharma.jpg&lt;br /&gt;
|चित्र का नाम=डॉ प्रज्ञा शर्मा &lt;br /&gt;
|पूरा नाम=प्रज्ञा शर्मा&lt;br /&gt;
|अन्य नाम=&lt;br /&gt;
|जन्म=[[3 जुलाई]], [[1981]]&lt;br /&gt;
|जन्म भूमि=[[कानपुर]] ([[उत्तर प्रदेश]])&lt;br /&gt;
|मृत्यु=&lt;br /&gt;
|मृत्यु स्थान=&lt;br /&gt;
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|पालक माता-पिता= स्वर्गीय श्री बी. एल. शर्मा (पिता), श्रीमती रमा शर्मा (माता) &lt;br /&gt;
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|कर्म-क्षेत्र=साहित्यकार, कवियित्री&lt;br /&gt;
|मुख्य रचनाएँ= 'मौत का ज़िंदगीनामा', 'गोपाल दास नीरज की हस्तलिखित कविताएँ'&lt;br /&gt;
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|भाषा=[[हिंदी भाषा|हिंदी]], [[उर्दू]], [[अंग्रेज़ी भाषा|अंग्रेज़ी]] और हिन्दुस्तानी भाषा।&lt;br /&gt;
|विद्यालय=&lt;br /&gt;
|शिक्षा= एमए (शिक्षाशास्त्र)   &lt;br /&gt;
|पुरस्कार-उपाधि=&lt;br /&gt;
|प्रसिद्धि=&lt;br /&gt;
|विशेष योगदान= &lt;br /&gt;
|नागरिकता=भारतीय&lt;br /&gt;
|संबंधित लेख=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=&lt;br /&gt;
|पाठ 1=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 2=&lt;br /&gt;
|पाठ 2=&lt;br /&gt;
|अन्य जानकारी= &lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
|अद्यतन=}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रज्ञा शर्मा ([[अंग्रेज़ी]]: ''Pragya Sharma'', जन्म:03 जुलाई, 1981) एक भारतीय [[कवि|कवियित्री]] एवं [[साहित्यकार]] हैं।&amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web |url=https://dainikbhaskarup.com/writing-has-also-shaped-my-rough-personality-dr-pragya-sharma/|title=लेखन ने मेरे अनगढ़ व्यक्तित्व को भी सँवारा है : डॉ प्रज्ञा शर्मा|accessmonthday=16 दिसंबर |accessyear=2022 |last= |first= |authorlink= |format= |publisher=दैनिक भास्कर  |language=हिन्दी }}&amp;lt;/ref&amp;gt;&amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web |url=https://deshkiupasana.com/?p=26442&amp;amp;fbclid|title=कविता लिखना और कविता को जीना, दोनों दो अलग- अलग बातें हैं |accessmonthday=29 दिसंबर&lt;br /&gt;
|accessyear=2022 |last= |first= |authorlink= |format= |publisher=देश की उपासना|language=हिन्दी }}&amp;lt;/ref&amp;gt; &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==परिचय== &lt;br /&gt;
प्रज्ञा शर्मा का जन्म 1981 में [[उत्तर प्रदेश]] के [[कानपुर]] में पिता श्री बी. एल. शर्मा और माता का नाम श्रीमती रमा शर्मा के यहाँ हुआ। उन्होंने शिक्षाशास्त्र में परास्नातक किया है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
डॉ प्रज्ञा राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पटल पर मंच एवं साहित्य की दुनिया का जाना पहचाना नाम हैं। कवि-सम्मेलनों और मुशायरों के क्षेत्र में डॉ. प्रज्ञा शर्मा एक महत्वपूर्ण नाम हैं। वो अब तक अनेकों कवि सम्मेलनों और मुशायरों में कविता-पाठ चुकी हैं। उन्होंने लालकिला कवि सम्मेलन, गेटवे ऑफ इंडिया गणतंत्र दिवस मुशायरा, संसद भवन कवि सम्मेलन जैसे देश के की नामी-गिरामी कवि सम्मलनों व मुशायरों मे प्रस्तुति दी हैं। इनकी रचनाएं सब टीवी, दूरदर्शन, ज़ी सलाम, डीडी सह्याद्री, साधना टीवी, ईटीवी, [[आकाशवाणी]] इत्यादि पर प्रसारित हो चुकी हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भारत के छोटे-बड़े शहरों में कविता पाठ करने के अलावा उन्होंने कई अन्य देशों में भी अपनी काव्य-प्रतिभा का प्रदर्शन किया है। इनमें [[दुबई]], कतर जैसे देश शामिल हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वर्ष 2019 में ‘गोपाल दास नीरज की हस्तलिखित कविताएँ’ नाम से उनकी पहली किताब छपी, जिसका विमोचन [[डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक]] (तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री), [[मुरली मनोहर जोशी|डॉ. मुरली मनोहर जोशी]] (भूतपूर्व गृह मंत्री), आर.के. सिन्हा (तत्कालीन [[राज्यसभा]] सदस्य) और [[पद्मश्री]] सुरेंद्र शर्मा द्वारा [[दिल्ली]] में हुआ। इनकी दूसरी पुस्तक ‘मौत का ज़िंदगीनामा' (काव्य संग्रह) रेख़्ता पब्लिकेशन द्वारा 2021 में प्रकाशित की गई, जिसकी समस्त रचनाएं लॉकडाउन विषय पर आधारित हैं। इसे पाठकों और आलोचकों से काफी सराहना मिली। यह पुस्तक बेस्ट-सेलर रही। &amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web |url=https://chauthiduniya.com/pragya-sharma-vs-a-self-made-personality/|title=प्रज्ञा शर्मा बनाम एक स्वनिर्मित व्यक्तित्व|accessmonthday=21 जुलाई |accessyear=2022 |last= |first= |authorlink= |format= |publisher=चौथी दुनिया |language=हिन्दी }}&amp;lt;/ref&amp;gt; &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
डॉ प्रज्ञा शर्मा कविसम्मेलन समिति के संस्थापक सदस्यों में से एक है। प्रज्ञा वेलफेयर फाउंडेशन की संस्थापक-निदेशक के रूप में विभिन्न सामाजिक कार्यों से जुड़ी हैं। वर्तमान में वह [[महाराष्ट्र]] के शहर [[मुंबई]] में स्थाई रूप से निवास करती हैं।&amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web |url=https://www.facebook.com/photo.php?fbid=184813223657439&amp;amp;set=pb.100063862864144.-2207520000|title=एक शायराना शख़्सियत|accessmonthday=29 जून|accessyear=2021 |last= |first= |authorlink= |format= |publisher=दून वैली मेल |language=हिन्दी }}&amp;lt;/ref&amp;gt;&amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web |url=https://rashtrawadi.in/as-a-writer-i-consider-myself-a-student-poet-dr-pragya-sharma/|title=एक साहित्यकार के तौर पर खुद को विद्यार्थी मानती हूँ: कवियित्री डॉ. प्रज्ञा शर्मा  |accessmonthday=29 दिसंबर|accessyear=2022 |last= |first= |authorlink= |format= |publisher=राष्ट्रवादी न्यूज |language=हिन्दी }}&amp;lt;/ref&amp;gt; &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==प्रमुख कृतियाँ==&lt;br /&gt;
* ''मौत का ज़िंदगीनामा''&lt;br /&gt;
* ''गोपाल दास नीरज की हस्तलिखित कविताएँ'' &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=|प्रारम्भिक=प्रारम्भिक1 |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{आधुनिक महिला साहित्यकार}}&lt;br /&gt;
[[Category:आधुनिक महिला साहित्यकार]][[Category:महिला साहित्यकार]][[Category:साहित्यकार]][[Category:जीवनी साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]][[Category:चरित कोश]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
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		<author><name>Jeeteshvaishya</name></author>
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		<id>https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=Dr._Pragya_Sharma&amp;diff=682105</id>
		<title>Dr. Pragya Sharma</title>
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		<updated>2023-01-13T06:52:06Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Jeeteshvaishya: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा साहित्यकार&lt;br /&gt;
|चित्र=Pragya Sharma.jpg&lt;br /&gt;
|चित्र का नाम=डॉ प्रज्ञा शर्मा &lt;br /&gt;
|पूरा नाम=डॉ0 प्रज्ञा शर्मा&lt;br /&gt;
|अन्य नाम=&lt;br /&gt;
|जन्म=[[3 जुलाई]], [[1981]]&lt;br /&gt;
|जन्म भूमि=[[कानपुर]] ([[उत्तर प्रदेश]])&lt;br /&gt;
|मृत्यु=&lt;br /&gt;
|मृत्यु स्थान=&lt;br /&gt;
|अभिभावक=&lt;br /&gt;
|पालक माता-पिता= श्री बी. एल. शर्मा (पिता), श्रीमती रमा शर्मा (माता) &lt;br /&gt;
|पति/पत्नी=&lt;br /&gt;
|संतान=&lt;br /&gt;
|कर्म भूमि=[[भारत]] &lt;br /&gt;
|कर्म-क्षेत्र=साहित्यकार, कवियित्री&lt;br /&gt;
|मुख्य रचनाएँ= 'मौत का ज़िंदगीनामा', 'गोपाल दास नीरज की हस्तलिखित कविताएँ'&lt;br /&gt;
|विषय=&lt;br /&gt;
|भाषा=[[हिंदी भाषा|हिंदी]], [[उर्दू]], [[अंग्रेज़ी भाषा|अंग्रेज़ी]] और हिन्दुस्तानी भाषा।&lt;br /&gt;
|विद्यालय=&lt;br /&gt;
|शिक्षा= एमए (शिक्षाशास्त्र)   &lt;br /&gt;
|पुरस्कार-उपाधि=&lt;br /&gt;
|प्रसिद्धि=&lt;br /&gt;
|विशेष योगदान= &lt;br /&gt;
|नागरिकता=भारतीय&lt;br /&gt;
|संबंधित लेख=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=&lt;br /&gt;
|पाठ 1=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 2=&lt;br /&gt;
|पाठ 2=&lt;br /&gt;
|अन्य जानकारी= &lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
|अद्यतन=}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''डॉ. प्रज्ञा शर्मा''' ([[अंग्रेज़ी]]: ''Pragya Sharma'', जन्म:03 जुलाई, 1981) एक भारतीय [[कवि|कवियित्री]] एवं [[साहित्यकार]] हैं।&amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web |url=https://dainikbhaskarup.com/writing-has-also-shaped-my-rough-personality-dr-pragya-sharma/|title=कविता लिखना और कविता को जीना, दोनों दो अलग- अलग बातें हैं |accessmonthday=16 दिसंबर |accessyear=2022 |last= |first= |authorlink= |format= |publisher=देश की उपासना |language=हिन्दी }}&amp;lt;/ref&amp;gt;&amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web |url=https://deshkiupasana.com/?p=26442&amp;amp;fbclid|title=लेखन ने मेरे अनगढ़ व्यक्तित्व को भी सँवारा है : डॉ प्रज्ञा शर्मा |accessmonthday=29 दिसंबर&lt;br /&gt;
|accessyear=2022 |last= |first= |authorlink= |format= |publisher=दैनिक भास्कर |language=हिन्दी }}&amp;lt;/ref&amp;gt; &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==परिचय== &lt;br /&gt;
प्रज्ञा शर्मा का जन्म 1981 में [[उत्तर प्रदेश]] के [[कानपुर]] में पिता श्री बी. एल. शर्मा और माता का नाम श्रीमती रमा शर्मा के यहाँ हुआ। उन्होंने शिक्षाशास्त्र में परास्नातक की डिग्री हासिल की है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
डॉ प्रज्ञा राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पटल पर मंच एवं साहित्य की दुनिया में जाना पहचाना नाम हैं। कवि-सम्मेलनों और मुशायरों के क्षेत्र में भी डॉ. प्रज्ञा शर्मा एक अग्रणी कवियित्री हैं। वो अब तक अनेकों कवि सम्मेलनों और मुशायरों में कविता-पाठ चुकी हैं। उन्होंने लालकिला कवि सम्मेलन, गेटवे ऑफ इंडिया गणतंत्र दिवस मुशायरा, दुबई मुशायरा, संसद भवन कवि सम्मेलन जैसे देश के की नामी-गिरामी कवि सम्मलनों व मुशायरों मे प्रस्तुति दी हैं। इनकी रचनाएं सब टीवी, दूरदर्शन, ज़ी सलाम, डीडी सह्याद्री, साधना टीवी, ईटीवी, [[आकाशवाणी]] इत्यादि पर प्रसारित हो चुकी हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भारत के छोटे-बड़े शहरों में कविता पाठ करने के अलावा उन्होंने कई अन्य देशों में भी अपनी काव्य-प्रतिभा का प्रदर्शन किया है। इनमें [[दुबई]], कतर जैसे देश शामिल हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वर्ष 2019 में ‘गोपाल दास नीरज की हस्तलिखित कविताएँ’ नाम से उनकी पहली किताब छपी, जिसका विमोचन [[डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक]] (तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री), [[मुरली मनोहर जोशी|डॉ. मुरली मनोहर जोशी]] (भूतपूर्व गृह मंत्री), आर.के. सिन्हा (तत्कालीन [[राज्यसभा]] सदस्य) और [[पद्मश्री]] सुरेंद्र शर्मा द्वारा [[दिल्ली]] में हुआ। इनकी दूसरी पुस्तक ‘मौत का ज़िंदगीनामा' (काव्य संग्रह) रेख़्ता पब्लिकेशन द्वारा 2021 में प्रकाशित हुआ, जिसे पाठकों और आलोचकों से काफी सराहना मिली।&amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web |url=https://chauthiduniya.com/pragya-sharma-vs-a-self-made-personality/|title=प्रज्ञा शर्मा बनाम एक स्वनिर्मित व्यक्तित्व|accessmonthday=21 जुलाई |accessyear=2022 |last= |first= |authorlink= |format= |publisher=चौथी दुनिया |language=हिन्दी }}&amp;lt;/ref&amp;gt; इसके अतिरिक्त 20 से अधिक सााँझा काव्य संकलनो में इनकी कविताएं प्रकाशित हैं। वर्ष 2022 में कवयित्री प्रज्ञा शर्मा को [[अमेरिका]] की केईएसआईई इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी से साहित्य में डॉक्टरेट की उपाधि मिली। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
डॉ प्रज्ञा शर्मा कविसम्मेलन समिति की संस्थापको सदस्यों में से एक है। प्रज्ञा वेलफेयर फाउंडेशन की संस्थापक-निदेशक के रूप में विभिन्न सामाजिक कार्यों से जुड़ी हैं। वर्तमान में वह [[महाराष्ट्र]] के शहर [[मुंबई]] में स्थाई रूप से निवास करती हैं।&amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web |url=https://www.facebook.com/photo.php?fbid=184813223657439&amp;amp;set=pb.100063862864144.-2207520000|title=एक शायराना शख़्सियत|accessmonthday=29 जून|accessyear=2021 |last= |first= |authorlink= |format= |publisher=दून वैली मेल |language=हिन्दी }}&amp;lt;/ref&amp;gt;&amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web |url=https://rashtrawadi.in/as-a-writer-i-consider-myself-a-student-poet-dr-pragya-sharma/|title=एक साहित्यकार के तौर पर खुद को विद्यार्थी मानती हूँ: कवियित्री डॉ. प्रज्ञा शर्मा  |accessmonthday=29 दिसंबर|accessyear=2022 |last= |first= |authorlink= |format= |publisher=राष्ट्रवादी न्यूज |language=हिन्दी }}&amp;lt;/ref&amp;gt; &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==प्रमुख कृतियाँ==&lt;br /&gt;
* ''मौत का ज़िंदगीनामा''&lt;br /&gt;
* ''गोपाल दास नीरज की हस्तलिखित कविताएँ'' &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=|प्रारम्भिक=प्रारम्भिक1 |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{आधुनिक महिला साहित्यकार}}&lt;br /&gt;
[[Category:आधुनिक महिला साहित्यकार]][[Category:महिला साहित्यकार]][[Category:साहित्यकार]][[Category:जीवनी साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]][[Category:चरित कोश]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
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		<author><name>Jeeteshvaishya</name></author>
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		<updated>2023-01-12T00:02:29Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Jeeteshvaishya: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा साहित्यकार&lt;br /&gt;
|चित्र=Pragya Sharma.jpg&lt;br /&gt;
|चित्र का नाम=डॉ प्रज्ञा शर्मा &lt;br /&gt;
|पूरा नाम=प्रज्ञा शर्मा&lt;br /&gt;
|अन्य नाम=&lt;br /&gt;
|जन्म=[[3 जुलाई]], [[1981]]&lt;br /&gt;
|जन्म भूमि=[[कानपुर]] ([[उत्तर प्रदेश]])&lt;br /&gt;
|मृत्यु=&lt;br /&gt;
|मृत्यु स्थान=&lt;br /&gt;
|अभिभावक=&lt;br /&gt;
|पालक माता-पिता= श्री बी. एल. शर्मा (पिता), श्रीमती रमा शर्मा (माता) &lt;br /&gt;
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|कर्म भूमि=[[भारत]] &lt;br /&gt;
|कर्म-क्षेत्र=साहित्यकार, कवियित्री&lt;br /&gt;
|मुख्य रचनाएँ= 'मौत का ज़िंदगीनामा', 'गोपाल दास नीरज की हस्तलिखित कविताएँ'&lt;br /&gt;
|विषय=&lt;br /&gt;
|भाषा=[[हिंदी भाषा|हिंदी]], [[उर्दू]], [[अंग्रेज़ी भाषा|अंग्रेज़ी]] और हिन्दुस्तानी भाषा।&lt;br /&gt;
|विद्यालय=&lt;br /&gt;
|शिक्षा= एमए (शिक्षाशास्त्र)   &lt;br /&gt;
|पुरस्कार-उपाधि=&lt;br /&gt;
|प्रसिद्धि=&lt;br /&gt;
|विशेष योगदान= &lt;br /&gt;
|नागरिकता=भारतीय&lt;br /&gt;
|संबंधित लेख=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=&lt;br /&gt;
|पाठ 1=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 2=&lt;br /&gt;
|पाठ 2=&lt;br /&gt;
|अन्य जानकारी= &lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
|अद्यतन=}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रज्ञा शर्मा ([[अंग्रेज़ी]]: ''Pragya Sharma'', जन्म:03 जुलाई, 1981) एक भारतीय [[कवि|कवियित्री]] एवं [[साहित्यकार]] हैं।&amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web |url=https://dainikbhaskarup.com/writing-has-also-shaped-my-rough-personality-dr-pragya-sharma/|title=कविता लिखना और कविता को जीना, दोनों दो अलग- अलग बातें हैं |accessmonthday=16 दिसंबर |accessyear=2022 |last= |first= |authorlink= |format= |publisher=देश की उपासना |language=हिन्दी }}&amp;lt;/ref&amp;gt;&amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web |url=https://deshkiupasana.com/?p=26442&amp;amp;fbclid|title=लेखन ने मेरे अनगढ़ व्यक्तित्व को भी सँवारा है : डॉ प्रज्ञा शर्मा |accessmonthday=29 दिसंबर&lt;br /&gt;
|accessyear=2022 |last= |first= |authorlink= |format= |publisher=दैनिक भास्कर |language=हिन्दी }}&amp;lt;/ref&amp;gt; &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==परिचय== &lt;br /&gt;
प्रज्ञा शर्मा का जन्म 1981 में [[उत्तर प्रदेश]] के [[कानपुर]] में पिता श्री बी. एल. शर्मा और माता का नाम श्रीमती रमा शर्मा के यहाँ हुआ। उन्होंने शिक्षाशास्त्र में परास्नातक की डिग्री हासिल की है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
डॉ प्रज्ञा राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पटल पर मंच एवं साहित्य की दुनिया में जाना पहचाना नाम हैं। कवि-सम्मेलनों और मुशायरों के क्षेत्र में भी डॉ. प्रज्ञा शर्मा एक अग्रणी कवियित्री हैं। वो अब तक अनेकों कवि सम्मेलनों और मुशायरों में कविता-पाठ चुकी हैं। उन्होंने लालकिला कवि सम्मेलन, गेटवे ऑफ इंडिया गणतंत्र दिवस मुशायरा, दुबई मुशायरा, संसद भवन कवि सम्मेलन जैसे देश के की नामी-गिरामी कवि सम्मलनों व मुशायरों मे प्रस्तुति दी हैं। इनकी रचनाएं सब टीवी, दूरदर्शन, ज़ी सलाम, डीडी सह्याद्री, साधना टीवी, ईटीवी, [[आकाशवाणी]] इत्यादि पर प्रसारित हो चुकी हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भारत के छोटे-बड़े शहरों में कविता पाठ करने के अलावा उन्होंने कई अन्य देशों में भी अपनी काव्य-प्रतिभा का प्रदर्शन किया है। इनमें [[दुबई]], कतर जैसे देश शामिल हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वर्ष 2019 में ‘गोपाल दास नीरज की हस्तलिखित कविताएँ’ नाम से उनकी पहली किताब छपी, जिसका विमोचन [[डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक]] (तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री), [[मुरली मनोहर जोशी|डॉ. मुरली मनोहर जोशी]] (भूतपूर्व गृह मंत्री), आर.के. सिन्हा (तत्कालीन [[राज्यसभा]] सदस्य) और [[पद्मश्री]] सुरेंद्र शर्मा द्वारा [[दिल्ली]] में हुआ। इनकी दूसरी पुस्तक ‘मौत का ज़िंदगीनामा' (काव्य संग्रह) रेख़्ता पब्लिकेशन द्वारा 2021 में प्रकाशित हुआ, जिसे पाठकों और आलोचकों से काफी सराहना मिली।&amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web |url=https://chauthiduniya.com/pragya-sharma-vs-a-self-made-personality/|title=प्रज्ञा शर्मा बनाम एक स्वनिर्मित व्यक्तित्व|accessmonthday=21 जुलाई |accessyear=2022 |last= |first= |authorlink= |format= |publisher=चौथी दुनिया |language=हिन्दी }}&amp;lt;/ref&amp;gt; इसके अतिरिक्त 20 से अधिक सााँझा काव्य संकलनो में इनकी कविताएं प्रकाशित हैं। वर्ष 2022 में कवयित्री प्रज्ञा शर्मा को [[अमेरिका]] की केईएसआईई इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी से साहित्य में डॉक्टरेट की उपाधि मिली। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
डॉ प्रज्ञा शर्मा कविसम्मेलन समिति की संस्थापको सदस्यों में से एक है। प्रज्ञा वेलफेयर फाउंडेशन की संस्थापक-निदेशक के रूप में विभिन्न सामाजिक कार्यों से जुड़ी हैं। वर्तमान में वह [[महाराष्ट्र]] के शहर [[मुंबई]] में स्थाई रूप से निवास करती हैं।&amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web |url=https://www.facebook.com/photo.php?fbid=184813223657439&amp;amp;set=pb.100063862864144.-2207520000|title=एक शायराना शख़्सियत|accessmonthday=29 जून|accessyear=2021 |last= |first= |authorlink= |format= |publisher=दून वैली मेल |language=हिन्दी }}&amp;lt;/ref&amp;gt;&amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web |url=https://rashtrawadi.in/as-a-writer-i-consider-myself-a-student-poet-dr-pragya-sharma/|title=एक साहित्यकार के तौर पर खुद को विद्यार्थी मानती हूँ: कवियित्री डॉ. प्रज्ञा शर्मा  |accessmonthday=29 दिसंबर|accessyear=2022 |last= |first= |authorlink= |format= |publisher=राष्ट्रवादी न्यूज |language=हिन्दी }}&amp;lt;/ref&amp;gt; &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==प्रमुख कृतियाँ==&lt;br /&gt;
* ''मौत का ज़िंदगीनामा''&lt;br /&gt;
* ''गोपाल दास नीरज की हस्तलिखित कविताएँ'' &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=|प्रारम्भिक=प्रारम्भिक1 |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{आधुनिक महिला साहित्यकार}}&lt;br /&gt;
[[Category:आधुनिक महिला साहित्यकार]][[Category:महिला साहित्यकार]][[Category:साहित्यकार]][[Category:जीवनी साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]][[Category:चरित कोश]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
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		<author><name>Jeeteshvaishya</name></author>
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		<updated>2023-01-06T09:17:46Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Jeeteshvaishya: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा साहित्यकार&lt;br /&gt;
|चित्र=Pragya Sharma.jpg&lt;br /&gt;
|चित्र का नाम=डॉ प्रज्ञा शर्मा &lt;br /&gt;
|पूरा नाम=प्रज्ञा शर्मा&lt;br /&gt;
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|कर्म भूमि=[[भारत]] &lt;br /&gt;
|कर्म-क्षेत्र=साहित्यकार, कवियित्री&lt;br /&gt;
|मुख्य रचनाएँ= 'मौत का ज़िंदगीनामा', 'गोपाल दास नीरज की हस्तलिखित कविताएँ'&lt;br /&gt;
|विषय=&lt;br /&gt;
|भाषा=[[हिंदी भाषा|हिंदी]], [[उर्दू]], [[अंग्रेज़ी भाषा|अंग्रेज़ी]] और हिन्दुस्तानी भाषा।&lt;br /&gt;
|विद्यालय=&lt;br /&gt;
|शिक्षा=&lt;br /&gt;
|पुरस्कार-उपाधि=साहित्य में योगदान के लिए केईएसआईई इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी से डॉक्टरेट की उपाधि&lt;br /&gt;
|प्रसिद्धि=&lt;br /&gt;
|विशेष योगदान=&lt;br /&gt;
|नागरिकता=भारतीय&lt;br /&gt;
|संबंधित लेख=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=&lt;br /&gt;
|पाठ 1=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 2=&lt;br /&gt;
|पाठ 2=&lt;br /&gt;
|अन्य जानकारी= &lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
|अद्यतन=}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रज्ञा शर्मा ([[अंग्रेज़ी]]: ''Pragya Sharma'', जन्म:03 जुलाई, 1981) एक भारतीय [[कवि|कवियित्री]] एवं [[साहित्यकार]] हैं।&amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web |url=https://dainikbhaskarup.com/writing-has-also-shaped-my-rough-personality-dr-pragya-sharma/|title=कविता लिखना और कविता को जीना, दोनों दो अलग- अलग बातें हैं |accessmonthday=16 दिसंबर |accessyear=2022 |last= |first= |authorlink= |format= |publisher=देश की उपासना |language=हिन्दी }}&amp;lt;/ref&amp;gt;&amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web |url=https://deshkiupasana.com/?p=26442&amp;amp;fbclid|title=लेखन ने मेरे अनगढ़ व्यक्तित्व को भी सँवारा है : डॉ प्रज्ञा शर्मा |accessmonthday=29 दिसंबर&lt;br /&gt;
|accessyear=2022 |last= |first= |authorlink= |format= |publisher=दैनिक भास्कर |language=हिन्दी }}&amp;lt;/ref&amp;gt; &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==परिचय== &lt;br /&gt;
प्रज्ञा शर्मा का जन्म 1981 में [[उत्तर प्रदेश]] के [[कानपुर]] में पिता श्री बी. एल. शर्मा और माता का नाम श्रीमती रमा शर्मा के यहाँ हुआ। उन्होंने [[शास्त्र]] में परास्नातक की डिग्री हासिल की है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
डॉ प्रज्ञा राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पटल पर मंच एवं साहित्य की दुनिया में जाना पहचाना नाम हैं। कवि-सम्मेलनों और मुशायरों के क्षेत्र में भी डॉ. प्रज्ञा शर्मा एक अग्रणी कवियित्री हैं। वो अब तक सैकड़ों कवि सम्मेलनों और मुशायरों में कविता-पाठ चुकी हैं। उन्होंने गणतंत्र दिवस मुशायरा कवि सम्मेलन, लालकिला कवि सम्मेलन, संसद भवन, गेटवे ऑफ इंडिया जैसे देश के की नामी-गिनामी कवि सम्मलनों मे काव्य पाठ किया हैं। इनकी रचनाएं [[आकाशवाणी]], [[दूरदर्शन]] ([[मुंबई]], [[दिल्ली]], [[लखनऊ]]), ईटीवी पर प्रसारित हो चुकी हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भारत के छोटे-बड़े शहरों में कविता पाठ करने के अलावा उन्होंने कई अन्य देशों में भी अपनी काव्य-प्रतिभा का प्रदर्शन किया है। इनमें [[दुबई]], कतर जैसे देश शामिल हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वर्ष 2019 में ‘गोपाल दास नीरज की हस्तलिखित कविताएँ’ नाम से उनकी पहली किताब छपी, जिसका विमोचन शिक्षा मंत्री के करकमलों से दिल्ली में हुआ। इनकी दूसरी पुस्तक ‘मौत का ज़िंदगीनामा' (काव्य संग्रह) रेख़्ता पब्लिकेशन द्वारा 2021 में प्रकाशित हुआ, जिसे पाठकों और आलोचकों से काफी सराहना मिली।&amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web |url=https://chauthiduniya.com/pragya-sharma-vs-a-self-made-personality/|title=प्रज्ञा शर्मा बनाम एक स्वनिर्मित व्यक्तित्व|accessmonthday=21 जुलाई |accessyear=2022 |last= |first= |authorlink= |format= |publisher=चौथी दुनिया |language=हिन्दी }}&amp;lt;/ref&amp;gt; इसके अतिरिक्त 20 से अधिक सााँझा काव्य संकलनो में इनकी कविताएं प्रकाशित हैं। वर्ष 2022 में कवयित्री प्रज्ञा शर्मा को [[अमेरिका]] की केईएसआईई इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी से साहित्य में डॉक्टरेट की उपाधि मिली। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
डॉ प्रज्ञा शर्मा कविसम्मेलन समिति की संस्थापको सदस्यों में से एक है। प्रज्ञा वेलफेयर फाउंडेशन की संस्थापक-निदेशक के रूप में विभिन्न सामाजिक कार्यों से जुड़ी हैं। वर्तमान में वह [[महाराष्ट्र]] के शहर [[मुंबई]] में स्थाई रूप से निवास करती हैं।&amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web |url=https://www.facebook.com/photo.php?fbid=184813223657439&amp;amp;set=pb.100063862864144.-2207520000|title=एक शायराना शख़्सियत|accessmonthday=29 जून|accessyear=2021 |last= |first= |authorlink= |format= |publisher=दून वैली मेल |language=हिन्दी }}&amp;lt;/ref&amp;gt;&amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web |url=https://rashtrawadi.in/as-a-writer-i-consider-myself-a-student-poet-dr-pragya-sharma/|title=एक साहित्यकार के तौर पर खुद को विद्यार्थी मानती हूँ: कवियित्री डॉ. प्रज्ञा शर्मा  |accessmonthday=29 दिसंबर|accessyear=2022 |last= |first= |authorlink= |format= |publisher=राष्ट्रवादी न्यूज |language=हिन्दी }}&amp;lt;/ref&amp;gt; &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==प्रमुख कृतियाँ==&lt;br /&gt;
* ''मौत का ज़िंदगीनामा''&lt;br /&gt;
* ''गोपाल दास नीरज की हस्तलिखित कविताएँ'' &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=|प्रारम्भिक=प्रारम्भिक1 |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{आधुनिक महिला साहित्यकार}}&lt;br /&gt;
[[Category:आधुनिक महिला साहित्यकार]][[Category:महिला साहित्यकार]][[Category:साहित्यकार]][[Category:जीवनी साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]][[Category:चरित कोश]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Jeeteshvaishya</name></author>
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		<title>Dr. Pragya Sharma</title>
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		<updated>2022-12-29T09:03:11Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Jeeteshvaishya: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा साहित्यकार&lt;br /&gt;
|चित्र=Pragya Sharma.jpg&lt;br /&gt;
|चित्र का नाम=डॉ प्रज्ञा शर्मा &lt;br /&gt;
|पूरा नाम=प्रज्ञा शर्मा&lt;br /&gt;
|अन्य नाम=&lt;br /&gt;
|जन्म=[[3 जुलाई]], [[1981]]&lt;br /&gt;
|जन्म भूमि=[[कानपुर]] ([[उत्तर प्रदेश]])&lt;br /&gt;
|मृत्यु=&lt;br /&gt;
|मृत्यु स्थान=&lt;br /&gt;
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|पालक माता-पिता= श्री बी. एल. शर्मा (पिता), श्रीमती रमा शर्मा (माता) &lt;br /&gt;
|पति/पत्नी=&lt;br /&gt;
|संतान=&lt;br /&gt;
|कर्म भूमि=[[भारत]] &lt;br /&gt;
|कर्म-क्षेत्र=साहित्यकार, कवियित्री&lt;br /&gt;
|मुख्य रचनाएँ= 'मौत का ज़िंदगीनामा', 'गोपाल दास नीरज की हस्तलिखित कविताएँ'&lt;br /&gt;
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|भाषा=[[हिंदी भाषा|हिंदी]], [[उर्दू]], [[अंग्रेज़ी भाषा|अंग्रेज़ी]] और हिन्दुस्तानी भाषा।&lt;br /&gt;
|विद्यालय=&lt;br /&gt;
|शिक्षा=&lt;br /&gt;
|पुरस्कार-उपाधि=साहित्य में योगदान के लिए केईएसआईई इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी से डॉक्टरेट की उपाधि&lt;br /&gt;
|प्रसिद्धि=&lt;br /&gt;
|विशेष योगदान=&lt;br /&gt;
|नागरिकता=भारतीय&lt;br /&gt;
|संबंधित लेख=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=&lt;br /&gt;
|पाठ 1=&lt;br /&gt;
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|अन्य जानकारी= &lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
|अद्यतन=}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रज्ञा शर्मा ([[अंग्रेज़ी]]: ''Pragya Sharma'', जन्म:03 जुलाई, 1981) एक भारतीय [[कवि|कवियित्री]] एवं [[साहित्यकार]] हैं।&amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web |url=https://deshkiupasana.com/?p=26442&amp;amp;fbclid|title=कविता लिखना और कविता को जीना, दोनों दो अलग- अलग बातें हैं |accessmonthday=16 दिसंबर |accessyear=2022 |last= |first= |authorlink= |format= |publisher=डेश की उपासना |language=हिन्दी }}&amp;lt;/ref&amp;gt; &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==परिचय== &lt;br /&gt;
प्रज्ञा शर्मा का जन्म 1981 में [[उत्तर प्रदेश]] के [[कानपुर]] में पिता श्री बी. एल. शर्मा और माता का नाम श्रीमती रमा शर्मा के यहाँ हुआ। उन्होंने [[शास्त्र]] में परास्नातक की डिग्री हासिल की है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
डॉ प्रज्ञा राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पटल पर मंच एवं साहित्य की दुनिया में जाना पहचाना नाम हैं। कवि-सम्मेलनों और मुशायरों के क्षेत्र में भी डॉ. प्रज्ञा शर्मा एक अग्रणी कवियित्री हैं। वो अब तक सैकड़ों कवि सम्मेलनों और मुशायरों में कविता-पाठ चुकी हैं। उन्होंने गणतंत्र दिवस मुशायरा कवि सम्मेलन, लालकिला कवि सम्मेलन, संसद भवन, गेटवे ऑफ इंडिया जैसे देश के की नामी-गिनामी कवि सम्मलनों मे काव्य पाठ किया हैं। इनकी रचनाएं [[आकाशवाणी]], [[दूरदर्शन]] ([[मुंबई]], [[दिल्ली]], [[लखनऊ]]), ईटीवी पर प्रसारित हो चुकी हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भारत के छोटे-बड़े शहरों में कविता पाठ करने के अलावा उन्होंने कई अन्य देशों में भी अपनी काव्य-प्रतिभा का प्रदर्शन किया है। इनमें [[दुबई]], कतर जैसे देश शामिल हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वर्ष 2019 में ‘गोपाल दास नीरज की हस्तलिखित कविताएँ’ नाम से उनकी पहली किताब छपी, जिसका विमोचन शिक्षा मंत्री के करकमलों से दिल्ली में हुआ। इनकी दूसरी पुस्तक ‘मौत का ज़िंदगीनामा' (काव्य संग्रह) रेख़्ता पब्लिकेशन द्वारा 2021 में प्रकाशित हुआ, जिसे पाठकों और आलोचकों से काफी सराहना मिली।&amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web |url=https://chauthiduniya.com/pragya-sharma-vs-a-self-made-personality/|title=प्रज्ञा शर्मा बनाम एक स्वनिर्मित व्यक्तित्व|accessmonthday=21 जुलाई |accessyear=2022 |last= |first= |authorlink= |format= |publisher=चौथी दुनिया |language=हिन्दी }}&amp;lt;/ref&amp;gt; इसके अतिरिक्त 20 से अधिक सााँझा काव्य संकलनो में इनकी कविताएं प्रकाशित हैं। वर्ष 2022 में कवयित्री प्रज्ञा शर्मा को [[अमेरिका]] की केईएसआईई इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी से साहित्य में डॉक्टरेट की उपाधि मिली। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
डॉ प्रज्ञा शर्मा कविसम्मेलन समिति की संस्थापको सदस्यों में से एक है। प्रज्ञा वेलफेयर फाउंडेशन की संस्थापक-निदेशक के रूप में विभिन्न सामाजिक कार्यों से जुड़ी हैं। वर्तमान में वह [[महाराष्ट्र]] के शहर [[मुंबई]] में स्थाई रूप से निवास करती हैं।&amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web |url=https://www.facebook.com/photo.php?fbid=184813223657439&amp;amp;set=pb.100063862864144.-2207520000|title=एक शायराना शख़्सियत|accessmonthday=29 जून|accessyear=2021 |last= |first= |authorlink= |format= |publisher=दून वैली मेल |language=हिन्दी }}&amp;lt;/ref&amp;gt; &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==प्रमुख कृतियाँ==&lt;br /&gt;
* ''मौत का ज़िंदगीनामा''&lt;br /&gt;
* ''गोपाल दास नीरज की हस्तलिखित कविताएँ'' &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=|प्रारम्भिक=प्रारम्भिक1 |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{आधुनिक महिला साहित्यकार}}&lt;br /&gt;
[[Category:आधुनिक महिला साहित्यकार]][[Category:महिला साहित्यकार]][[Category:साहित्यकार]][[Category:जीवनी साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]][[Category:चरित कोश]]&lt;br /&gt;
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		<updated>2022-12-28T15:19:02Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Jeeteshvaishya: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा साहित्यकार&lt;br /&gt;
|चित्र=Pragya Sharma.jpg&lt;br /&gt;
|चित्र का नाम=डॉ प्रज्ञा शर्मा &lt;br /&gt;
|पूरा नाम=प्रज्ञा शर्मा&lt;br /&gt;
|अन्य नाम=&lt;br /&gt;
|जन्म=[[3 जुलाई]], [[1981]]&lt;br /&gt;
|जन्म भूमि=[[कानपुर]] ([[उत्तर प्रदेश]])&lt;br /&gt;
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|पालक माता-पिता= श्री बी. एल. शर्मा (पिता), श्रीमती रमा शर्मा (माता) &lt;br /&gt;
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|कर्म-क्षेत्र=साहित्यकार, कवियित्री&lt;br /&gt;
|मुख्य रचनाएँ= 'मौत का ज़िंदगीनामा', 'गोपाल दास नीरज की हस्तलिखित कविताएँ'&lt;br /&gt;
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|भाषा=[[हिंदी भाषा|हिंदी]], [[उर्दू]], [[अंग्रेज़ी भाषा|अंग्रेज़ी]] और हिन्दुस्तानी भाषा।&lt;br /&gt;
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|पुरस्कार-उपाधि=साहित्य में योगदान के लिए केईएसआईई इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी से डॉक्टरेट की उपाधि&lt;br /&gt;
|प्रसिद्धि=&lt;br /&gt;
|विशेष योगदान=&lt;br /&gt;
|नागरिकता=भारतीय&lt;br /&gt;
|संबंधित लेख=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=&lt;br /&gt;
|पाठ 1=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 2=&lt;br /&gt;
|पाठ 2=&lt;br /&gt;
|अन्य जानकारी= &lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
|अद्यतन=}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रज्ञा शर्मा (अंग्रेज़ी: Pragya Sharma, जन्म:03 जुलाई, 1981) एक भारतीय [[कवि|कवियित्री]] एवं [[साहित्यकार]] हैं।&amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web |url=https://deshkiupasana.com/?p=26442&amp;amp;fbclid|title=कविता लिखना और कविता को जीना, दोनों दो अलग- अलग बातें हैं |accessmonthday=16 दिसंबर |accessyear=2022 |last= |first= |authorlink= |format= |publisher=डेश की उपासना |language=हिन्दी }}&amp;lt;/ref&amp;gt; &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==परिचय== &lt;br /&gt;
प्रज्ञा शर्मा का जन्म 1981 में [[उत्तर प्रदेश]] के [[कानपुर]] में पिता श्री बी. एल. शर्मा और माता का नाम श्रीमती रमा शर्मा के यहाँ हुआ। उन्होंने [[शास्त्र]] में परास्नातक की डिग्री हासिल की है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
डॉ प्रज्ञा राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पटल पर मंच एवं साहित्य की दुनिया में जाना पहचाना नाम हैं। कवि-सम्मेलनों और मुशायरों के क्षेत्र में भी डॉ. प्रज्ञा शर्मा एक अग्रणी कवियित्री हैं। वो अब तक सैकड़ों कवि सम्मेलनों और मुशायरों में कविता-पाठ चुकी हैं। उन्होंने गणतंत्र दिवस मुशायरा कवि सम्मेलन, लालकिला कवि सम्मेलन, संसद भवन, गेटवे ऑफ इंडिया जैसे देश के की नामी-गिनामी कवि सम्मलनों मे काव्य पाठ किया हैं। इनकी रचनाएं [[आकाशवाणी]], [[दूरदर्शन]] ([[मुंबई]], [[दिल्ली]], [[लखनऊ]]), ईटीवी पर प्रसारित हो चुकी हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भारत के छोटे-बड़े शहरों में कविता पाठ करने के अलावा उन्होंने कई अन्य देशों में भी अपनी काव्य-प्रतिभा का प्रदर्शन किया है। इनमें [[दुबई]], कतर जैसे देश शामिल हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वर्ष 2019 में ‘गोपाल दास नीरज की हस्तलिखित कविताएँ’ नाम से उनकी पहली किताब छपी, जिसका विमोचन शिक्षा मंत्री के करकमलों से दिल्ली में हुआ। इनकी दूसरी पुस्तक ‘मौत का ज़िंदगीनामा' (काव्य संग्रह) रेख़्ता पब्लिकेशन द्वारा 2021 में प्रकाशित हुआ, जिसे पाठकों और आलोचकों से काफी सराहना मिली।&amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web |url=https://chauthiduniya.com/pragya-sharma-vs-a-self-made-personality/|title=प्रज्ञा शर्मा बनाम एक स्वनिर्मित व्यक्तित्व|accessmonthday=21 जुलाई |accessyear=2022 |last= |first= |authorlink= |format= |publisher=चौथी दुनिया |language=हिन्दी }}&amp;lt;/ref&amp;gt; इसके अतिरिक्त 20 से अधिक सााँझा काव्य संकलनो में इनकी कविताएं प्रकाशित हैं। वर्ष 2022 में कवयित्री प्रज्ञा शर्मा को [[अमेरिका]] की केईएसआईई इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी से साहित्य में डॉक्टरेट की उपाधि मिली। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
डॉ प्रज्ञा शर्मा कविसम्मेलन समिति की संस्थापको सदस्यों में से एक है। प्रज्ञा वेलफेयर फाउंडेशन की संस्थापक-निदेशक के रूप में विभिन्न सामाजिक कार्यों से जुड़ी हैं। वर्तमान में वह [[महाराष्ट्र]] के शहर [[मुंबई]] में स्थाई रूप से निवास करती हैं।&amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web |url=https://www.facebook.com/photo.php?fbid=184813223657439&amp;amp;set=pb.100063862864144.-2207520000|title=एक शायराना शख़्सियत|accessmonthday=29 जून|accessyear=2021 |last= |first= |authorlink= |format= |publisher=दून वैली मेल |language=हिन्दी }}&amp;lt;/ref&amp;gt; &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==प्रमुख कृतियाँ==&lt;br /&gt;
* ''मौत का ज़िंदगीनामा''&lt;br /&gt;
* ''गोपाल दास नीरज की हस्तलिखित कविताएँ'' &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=|प्रारम्भिक=प्रारम्भिक1 |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{आधुनिक महिला साहित्यकार}}&lt;br /&gt;
[[Category:आधुनिक महिला साहित्यकार]][[Category:महिला उपन्यासकार]][[Category:महिला साहित्यकार]][[Category:साहित्यकार]][[Category:व्यास सम्मान]][[Category:जीवनी साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]][[Category:चरित कोश]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
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		<author><name>Jeeteshvaishya</name></author>
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&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा साहित्यकार&lt;br /&gt;
|चित्र=&lt;br /&gt;
|चित्र का नाम=डॉ प्रज्ञा शर्मा &lt;br /&gt;
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|अन्य नाम=&lt;br /&gt;
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|कर्म भूमि=[[भारत]] &lt;br /&gt;
|कर्म-क्षेत्र=साहित्यकार, कवियित्री&lt;br /&gt;
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|भाषा=[[हिंदी भाषा|हिंदी]], [[उर्दू]], [[अंग्रेज़ी भाषा|अंग्रेज़ी]] और हिन्दुस्तानी भाषा।&lt;br /&gt;
|विद्यालय=&lt;br /&gt;
|शिक्षा=&lt;br /&gt;
|पुरस्कार-उपाधि=साहित्य में योगदान के लिए केईएसआईई इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी से डॉक्टरेट की उपाधि&lt;br /&gt;
|प्रसिद्धि=&lt;br /&gt;
|विशेष योगदान=&lt;br /&gt;
|नागरिकता=भारतीय&lt;br /&gt;
|संबंधित लेख=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=&lt;br /&gt;
|पाठ 1=&lt;br /&gt;
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|अन्य जानकारी= &lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
|अद्यतन=}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रज्ञा शर्मा (अंग्रेज़ी: Pragya Sharma, जन्म:03 जुलाई, 1981) एक भारतीय [[कवि|कवियित्री]] एवं [[साहित्यकार]] हैं।&amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web |url=https://deshkiupasana.com/?p=26442&amp;amp;fbclid|title=कविता लिखना और कविता को जीना, दोनों दो अलग- अलग बातें हैं |accessmonthday=16 दिसंबर |accessyear=2022 |last= |first= |authorlink= |format= |publisher=डेश की उपासना |language=हिन्दी }}&amp;lt;/ref&amp;gt; &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==परिचय== &lt;br /&gt;
प्रज्ञा शर्मा का जन्म 1981 में [[उत्तर प्रदेश]] के [[कानपुर]] में पिता श्री बी. एल. शर्मा और माता का नाम श्रीमती रमा शर्मा के यहाँ हुआ। उन्होंने [[शास्त्र]] में परास्नातक की डिग्री हासिल की है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
डॉ प्रज्ञा राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पटल पर मंच एवं साहित्य की दुनिया में जाना पहचाना नाम हैं। कवि-सम्मेलनों और मुशायरों के क्षेत्र में भी डॉ. प्रज्ञा शर्मा एक अग्रणी कवियित्री हैं। वो अब तक सैकड़ों कवि सम्मेलनों और मुशायरों में कविता-पाठ चुकी हैं। उन्होंने गणतंत्र दिवस मुशायरा कवि सम्मेलन, लालकिला कवि सम्मेलन, संसद भवन, गेटवे ऑफ इंडिया जैसे देश के की नामी-गिनामी कवि सम्मलनों मे काव्य पाठ किया हैं। इनकी रचनाएं [[आकाशवाणी]], [[दूरदर्शन]] ([[मुंबई]], [[दिल्ली]], [[लखनऊ]]), ईटीवी पर प्रसारित हो चुकी हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भारत के छोटे-बड़े शहरों में कविता पाठ करने के अलावा उन्होंने कई अन्य देशों में भी अपनी काव्य-प्रतिभा का प्रदर्शन किया है। इनमें [[दुबई]], कतर जैसे देश शामिल हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वर्ष 2019 में ‘गोपाल दास नीरज की हस्तलिखित कविताएँ’ नाम से उनकी पहली किताब छपी, जिसका विमोचन शिक्षा मंत्री के करकमलों से दिल्ली में हुआ। इनकी दूसरी पुस्तक ‘मौत का ज़िंदगीनामा' (काव्य संग्रह) रेख़्ता पब्लिकेशन द्वारा 2021 में प्रकाशित हुआ, जिसे पाठकों और आलोचकों से काफी सराहना मिली।&amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web |url=https://chauthiduniya.com/pragya-sharma-vs-a-self-made-personality/|title=प्रज्ञा शर्मा बनाम एक स्वनिर्मित व्यक्तित्व|accessmonthday=21 जुलाई |accessyear=2022 |last= |first= |authorlink= |format= |publisher=चौथी दुनिया |language=हिन्दी }}&amp;lt;/ref&amp;gt; इसके अतिरिक्त 20 से अधिक सााँझा काव्य संकलनो में इनकी कविताएं प्रकाशित हैं। वर्ष 2022 में कवयित्री प्रज्ञा शर्मा को [[अमेरिका]] की केईएसआईई इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी से साहित्य में डॉक्टरेट की उपाधि मिली। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
डॉ प्रज्ञा शर्मा कविसम्मेलन समिति की संस्थापको सदस्यों में से एक है। प्रज्ञा वेलफेयर फाउंडेशन की संस्थापक-निदेशक के रूप में विभिन्न सामाजिक कार्यों से जुड़ी हैं। वर्तमान में वह [[महाराष्ट्र]] के शहर [[मुंबई]] में स्थाई रूप से निवास करती हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==प्रमुख कृतियाँ==&lt;br /&gt;
* ''मौत का ज़िंदगीनामा''&lt;br /&gt;
* ''गोपाल दास नीरज की हस्तलिखित कविताएँ'' &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=|प्रारम्भिक=प्रारम्भिक1 |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{आधुनिक महिला साहित्यकार}}&lt;br /&gt;
[[Category:आधुनिक महिला साहित्यकार]][[Category:महिला उपन्यासकार]][[Category:महिला साहित्यकार]][[Category:साहित्यकार]][[Category:व्यास सम्मान]][[Category:जीवनी साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]][[Category:चरित कोश]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Jeeteshvaishya</name></author>
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		<title>Dr. Pragya Sharma</title>
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		<updated>2022-12-28T14:55:10Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Jeeteshvaishya: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा साहित्यकार&lt;br /&gt;
|चित्र=&lt;br /&gt;
|चित्र का नाम=डॉ प्रज्ञा शर्मा &lt;br /&gt;
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|मृत्यु=&lt;br /&gt;
|मृत्यु स्थान=&lt;br /&gt;
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|पालक माता-पिता= श्री बी. एल. शर्मा (पिता), श्रीमती रमा शर्मा (माता) &lt;br /&gt;
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|कर्म भूमि=[[भारत]] &lt;br /&gt;
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|भाषा=[[हिंदी भाषा|हिंदी]], [[उर्दू]], [[अंग्रेज़ी भाषा|अंग्रेज़ी]] और हिन्दुस्तानी भाषा।&lt;br /&gt;
|विद्यालय=&lt;br /&gt;
|शिक्षा=&lt;br /&gt;
|पुरस्कार-उपाधि=साहित्य में योगदान के लिए केईएसआईई इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी से डॉक्टरेट की उपाधि&lt;br /&gt;
|प्रसिद्धि=&lt;br /&gt;
|विशेष योगदान=&lt;br /&gt;
|नागरिकता=भारतीय&lt;br /&gt;
|संबंधित लेख=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=&lt;br /&gt;
|पाठ 1=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 2=&lt;br /&gt;
|पाठ 2=&lt;br /&gt;
|अन्य जानकारी= &lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
|अद्यतन=}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रज्ञा शर्मा (अंग्रेज़ी: Pragya Sharma, जन्म:03 जुलाई, 1981) एक भारतीय [[कवि|कवियित्री]] एवं [[साहित्यकार]] हैं।&amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web |url=https://deshkiupasana.com/?p=26442&amp;amp;fbclid|title=कविता लिखना और कविता को जीना, दोनों दो अलग- अलग बातें हैं |accessmonthday=16 दिसंबर |accessyear=2022 |last= |first= |authorlink= |format= |publisher=देश की उपासना |language=हिन्दी }}&amp;lt;/ref&amp;gt; &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==परिचय== &lt;br /&gt;
प्रज्ञा शर्मा का जन्म 1981 में [[उत्तर प्रदेश]] के [[कानपुर]] में पिता श्री बी. एल. शर्मा और माता का नाम श्रीमती रमा शर्मा के यहाँ हुआ। उन्होंने [[शास्त्र]] में परास्नातक की डिग्री हासिल की है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
डॉ प्रज्ञा राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पटल पर मंच एवं साहित्य की दुनिया में जाना पहचाना नाम हैं। कवि-सम्मेलनों और मुशायरों के क्षेत्र में भी डॉ. प्रज्ञा शर्मा एक अग्रणी कवियित्री हैं। वो अब तक सैकड़ों कवि सम्मेलनों और मुशायरों में कविता-पाठ चुकी हैं। उन्होंने गणतंत्र दिवस मुशायरा कवि सम्मेलन, लालकिला कवि सम्मेलन, संसद भवन, गेटवे ऑफ इंडिया जैसे देश के की नामी-गिनामी कवि सम्मलनों मे काव्य पाठ किया हैं। इनकी रचनाएं [[आकाशवाणी]], [[दूरदर्शन]] ([[मुंबई]], [[दिल्ली]], [[लखनऊ]]), ईटीवी पर प्रसारित हो चुकी हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भारत के छोटे-बड़े शहरों में कविता पाठ करने के अलावा उन्होंने कई अन्य देशों में भी अपनी काव्य-प्रतिभा का प्रदर्शन किया है। इनमें [[दुबई]], कतर जैसे देश शामिल हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वर्ष 2019 में ‘गोपाल दास नीरज की हस्तलिखित कविताएँ’ नाम से उनकी पहली किताब छपी, जिसका विमोचन शिक्षा मंत्री के करकमलों से दिल्ली में हुआ। इनकी दूसरी पुस्तक ‘मौत का ज़िंदगीनामा' (काव्य संग्रह) रेख़्ता पब्लिकेशन द्वारा 2021 में प्रकाशित हुआ, जिसे पाठकों और आलोचकों से काफी सराहना मिली।&amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web |url=https://chauthiduniya.com/pragya-sharma-vs-a-self-made-personality/|title=प्रज्ञा शर्मा बनाम एक स्वनिर्मित व्यक्तित्व|accessmonthday=21 जुलाई |accessyear=2022 |last= |first= |authorlink= |format= |publisher=चौथी दुनिया |language=हिन्दी }}&amp;lt;/ref&amp;gt; इसके अतिरिक्त 20 से अधिक सााँझा काव्य संकलनो में इनकी कविताएं प्रकाशित हैं। वर्ष 2022 में कवयित्री प्रज्ञा शर्मा को [[अमेरिका]] की केईएसआईई इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी से साहित्य में डॉक्टरेट की उपाधि मिली। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
डॉ प्रज्ञा शर्मा कविसम्मेलन समिति की संस्थापको सदस्यों में से एक है। प्रज्ञा वेलफेयर फाउंडेशन की संस्थापक-निदेशक के रूप में विभिन्न सामाजिक कार्यों से जुड़ी हैं। वर्तमान में वह [[महाराष्ट्र]] के शहर [[मुंबई]] में स्थाई रूप से निवास करती हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==प्रमुख कृतियाँ==&lt;br /&gt;
* ''मौत का ज़िंदगीनामा'&lt;br /&gt;
* 'गोपाल दास नीरज की हस्तलिखित कविताएँ' &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=|प्रारम्भिक=प्रारम्भिक1 |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{आधुनिक महिला साहित्यकार}}&lt;br /&gt;
[[Category:आधुनिक महिला साहित्यकार]][[Category:महिला उपन्यासकार]][[Category:महिला साहित्यकार]][[Category:साहित्यकार]][[Category:व्यास सम्मान]][[Category:जीवनी साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]][[Category:चरित कोश]]&lt;br /&gt;
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		<author><name>Jeeteshvaishya</name></author>
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		<updated>2022-12-28T14:54:48Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Jeeteshvaishya: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा साहित्यकार&lt;br /&gt;
|चित्र=&lt;br /&gt;
|चित्र का नाम=डॉ प्रज्ञा शर्मा &lt;br /&gt;
|पूरा नाम=प्रज्ञा शर्मा&lt;br /&gt;
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|जन्म=[[3 जुलाई]], [[1981]]&lt;br /&gt;
|जन्म भूमि=[[कानपुर]] ([[उत्तर प्रदेश]])&lt;br /&gt;
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|पालक माता-पिता= श्री बी. एल. शर्मा (पिता), श्रीमती रमा शर्मा (माता) &lt;br /&gt;
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|शिक्षा=&lt;br /&gt;
|पुरस्कार-उपाधि=साहित्य में योगदान के लिए केईएसआईई इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी से डॉक्टरेट की उपाधि&lt;br /&gt;
|प्रसिद्धि=&lt;br /&gt;
|विशेष योगदान=&lt;br /&gt;
|नागरिकता=भारतीय&lt;br /&gt;
|संबंधित लेख=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=&lt;br /&gt;
|पाठ 1=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 2=&lt;br /&gt;
|पाठ 2=&lt;br /&gt;
|अन्य जानकारी= &lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
|अद्यतन=}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रज्ञा शर्मा (अंग्रेज़ी: Pragya Sharma, जन्म:03 जुलाई, 1981) एक भारतीय [[कवि|कवियित्री]] एवं [[साहित्यकार]] हैं।&amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web |url=https://deshkiupasana.com/?p=26442&amp;amp;fbclid|title=कविता लिखना और कविता को जीना, दोनों दो अलग- अलग बातें हैं |accessmonthday=16 दिसंबर |accessyear=2022 |last= |first= |authorlink= |format= |publisher=डेश की उपासना |language=हिन्दी }}&amp;lt;/ref&amp;gt; &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==परिचय== &lt;br /&gt;
प्रज्ञा शर्मा का जन्म 1981 में [[उत्तर प्रदेश]] के [[कानपुर]] में पिता श्री बी. एल. शर्मा और माता का नाम श्रीमती रमा शर्मा के यहाँ हुआ। उन्होंने [[शास्त्र]] में परास्नातक की डिग्री हासिल की है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
डॉ प्रज्ञा राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पटल पर मंच एवं साहित्य की दुनिया में जाना पहचाना नाम हैं। कवि-सम्मेलनों और मुशायरों के क्षेत्र में भी डॉ. प्रज्ञा शर्मा एक अग्रणी कवियित्री हैं। वो अब तक सैकड़ों कवि सम्मेलनों और मुशायरों में कविता-पाठ चुकी हैं। उन्होंने गणतंत्र दिवस मुशायरा कवि सम्मेलन, लालकिला कवि सम्मेलन, संसद भवन, गेटवे ऑफ इंडिया जैसे देश के की नामी-गिनामी कवि सम्मलनों मे काव्य पाठ किया हैं। इनकी रचनाएं [[आकाशवाणी]], [[दूरदर्शन]] ([[मुंबई]], [[दिल्ली]], [[लखनऊ]]), ईटीवी पर प्रसारित हो चुकी हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भारत के छोटे-बड़े शहरों में कविता पाठ करने के अलावा उन्होंने कई अन्य देशों में भी अपनी काव्य-प्रतिभा का प्रदर्शन किया है। इनमें [[दुबई]], कतर जैसे देश शामिल हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वर्ष 2019 में ‘गोपाल दास नीरज की हस्तलिखित कविताएँ’ नाम से उनकी पहली किताब छपी, जिसका विमोचन शिक्षा मंत्री के करकमलों से दिल्ली में हुआ। इनकी दूसरी पुस्तक ‘मौत का ज़िंदगीनामा' (काव्य संग्रह) रेख़्ता पब्लिकेशन द्वारा 2021 में प्रकाशित हुआ, जिसे पाठकों और आलोचकों से काफी सराहना मिली।&amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web |url=https://chauthiduniya.com/pragya-sharma-vs-a-self-made-personality/|title=प्रज्ञा शर्मा बनाम एक स्वनिर्मित व्यक्तित्व|accessmonthday=21 जुलाई |accessyear=2022 |last= |first= |authorlink= |format= |publisher=चौथी दुनिया |language=हिन्दी }}&amp;lt;/ref&amp;gt; इसके अतिरिक्त 20 से अधिक सााँझा काव्य संकलनो में इनकी कविताएं प्रकाशित हैं। वर्ष 2022 में कवयित्री प्रज्ञा शर्मा को [[अमेरिका]] की केईएसआईई इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी से साहित्य में डॉक्टरेट की उपाधि मिली। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
डॉ प्रज्ञा शर्मा कविसम्मेलन समिति की संस्थापको सदस्यों में से एक है। प्रज्ञा वेलफेयर फाउंडेशन की संस्थापक-निदेशक के रूप में विभिन्न सामाजिक कार्यों से जुड़ी हैं। वर्तमान में वह [[महाराष्ट्र]] के शहर [[मुंबई]] में स्थाई रूप से निवास करती हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==प्रमुख कृतियाँ==&lt;br /&gt;
* ''मौत का ज़िंदगीनामा'&lt;br /&gt;
* 'गोपाल दास नीरज की हस्तलिखित कविताएँ' &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=|प्रारम्भिक=प्रारम्भिक1 |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{आधुनिक महिला साहित्यकार}}&lt;br /&gt;
[[Category:आधुनिक महिला साहित्यकार]][[Category:महिला उपन्यासकार]][[Category:महिला साहित्यकार]][[Category:साहित्यकार]][[Category:व्यास सम्मान]][[Category:जीवनी साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]][[Category:चरित कोश]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Jeeteshvaishya</name></author>
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		<id>https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=Dr._Pragya_Sharma&amp;diff=681690</id>
		<title>Dr. Pragya Sharma</title>
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		<updated>2022-12-28T14:53:04Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Jeeteshvaishya: '{{सूचना बक्सा साहित्यकार |चित्र= |चित्र का नाम=डॉ प्र...' के साथ नया पृष्ठ बनाया&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा साहित्यकार&lt;br /&gt;
|चित्र=&lt;br /&gt;
|चित्र का नाम=डॉ प्रज्ञा शर्मा &lt;br /&gt;
|पूरा नाम=प्रज्ञा शर्मा&lt;br /&gt;
|अन्य नाम=&lt;br /&gt;
|जन्म=[[3 जुलाई]], [[1981]]&lt;br /&gt;
|जन्म भूमि=[[कानपुर]] ([[उत्तर प्रदेश]])&lt;br /&gt;
|मृत्यु=&lt;br /&gt;
|मृत्यु स्थान=&lt;br /&gt;
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|कर्म भूमि=[[भारत]] &lt;br /&gt;
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|भाषा=[[हिंदी भाषा|हिंदी]], [[उर्दू]], [[अंग्रेज़ी भाषा|अंग्रेज़ी]] और हिन्दुस्तानी भाषा।&lt;br /&gt;
|विद्यालय=&lt;br /&gt;
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|पुरस्कार-उपाधि=साहित्य में योगदान के लिए केईएसआईई इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी से डॉक्टरेट की उपाधि&lt;br /&gt;
|प्रसिद्धि=&lt;br /&gt;
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|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
|अद्यतन=}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रज्ञा शर्मा (अंग्रेज़ी: Pragya Sharma, जन्म:03 जुलाई, 1981) एक भारतीय [[कवि|कवियित्री]] एवं [[साहित्यकार]] हैं।&amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web |url=https://deshkiupasana.com/?p=26442&amp;amp;fbclid|title=कविता लिखना और कविता को जीना, दोनों दो अलग- अलग बातें हैं |accessmonthday=16 दिसंबर |accessyear=2022 |last= |first= |authorlink= |format= |publisher=डेश की उपासना |language=हिन्दी }}&amp;lt;/ref&amp;gt; &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==परिचय== &lt;br /&gt;
प्रज्ञा शर्मा का जन्म 1981 में [[उत्तर प्रदेश]] के [[कानपुर]] में पिता श्री बी. एल. शर्मा और माता का नाम श्रीमती रमा शर्मा के यहाँ हुआ। उन्होंने [[शास्त्र]] में परास्नातक की डिग्री हासिल की है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
डॉ प्रज्ञा राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पटल पर मंच एवं साहित्य की दुनिया में जाना पहचाना नाम हैं। कवि-सम्मेलनों और मुशायरों के क्षेत्र में भी डॉ. प्रज्ञा शर्मा एक अग्रणी कवियित्री हैं। वो अब तक सैकड़ों कवि सम्मेलनों और मुशायरों में कविता-पाठ चुकी हैं। उन्होंने गणतंत्र दिवस मुशायरा कवि सम्मेलन, लालकिला कवि सम्मेलन, संसद भवन, गेटवे ऑफ इंडिया जैसे देश के की नामी-गिनामी कवि सम्मलनों मे काव्य पाठ किया हैं। इनकी रचनाएं [[आकाशवाणी]], [[दूरदर्शन]] ([[मुंबई]], [[दिल्ली]], [[लखनऊ]]), ईटीवी पर प्रसारित हो चुकी हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भारत के छोटे-बड़े शहरों में कविता पाठ करने के अलावा उन्होंने कई अन्य देशों में भी अपनी काव्य-प्रतिभा का प्रदर्शन किया है। इनमें [[दुबई]], कतर जैसे देश शामिल हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वर्ष 2019 में ‘गोपाल दास नीरज की हस्तलिखित कविताएँ’ नाम से उनकी पहली किताब छपी, जिसका विमोचन शिक्षा मंत्री के करकमलों से दिल्ली में हुआ। इनकी दूसरी पुस्तक ‘मौत का ज़िंदगीनामा' (काव्य संग्रह) रेख़्ता पब्लिकेशन द्वारा 2021 में प्रकाशित हुआ, जिसे पाठकों और आलोचकों से काफी सराहना मिली।&amp;lt;ref&amp;gt;{{cite web |url=https://chauthiduniya.com/pragya-sharma-vs-a-self-made-personality/|title=कविता लिखना और कविता को जीना, दोनों दो अलग- अलग बातें हैं |accessmonthday=21 जुलाई |accessyear=2022 |last= |first= |authorlink= |format= |publisher=चौथी दुनिया |language=हिन्दी }}&amp;lt;/ref&amp;gt;  इसके अतिरिक्त 20 से अधिक सााँझा काव्य संकलनो में इनकी कविताएं प्रकाशित हैं। वर्ष 2022 में कवयित्री प्रज्ञा शर्मा को [[अमेरिका]] की केईएसआईई इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी से साहित्य में डॉक्टरेट की उपाधि मिली। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
डॉ प्रज्ञा शर्मा कविसम्मेलन समिति की संस्थापको सदस्यों में से एक है। प्रज्ञा वेलफेयर फाउंडेशन की संस्थापक-निदेशक के रूप में विभिन्न सामाजिक कार्यों से जुड़ी हैं। वर्तमान में वह [[महाराष्ट्र]] के शहर [[मुंबई]] में स्थाई रूप से निवास करती हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==प्रमुख कृतियाँ==&lt;br /&gt;
* ''मौत का ज़िंदगीनामा'&lt;br /&gt;
* 'गोपाल दास नीरज की हस्तलिखित कविताएँ' &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=|प्रारम्भिक=प्रारम्भिक1 |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{आधुनिक महिला साहित्यकार}}&lt;br /&gt;
[[Category:आधुनिक महिला साहित्यकार]][[Category:महिला उपन्यासकार]][[Category:महिला साहित्यकार]][[Category:साहित्यकार]][[Category:व्यास सम्मान]][[Category:जीवनी साहित्य]][[Category:साहित्य कोश]][[Category:चरित कोश]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Jeeteshvaishya</name></author>
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		<title>नीलम सक्सेना चंद्रा</title>
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		<updated>2017-05-07T14:51:05Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Jeeteshvaishya: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा साहित्यकार&lt;br /&gt;
|चित्र=Neelam-Saxena.jpg&lt;br /&gt;
|चित्र का नाम=नीलम सक्सेना चंद्रा&lt;br /&gt;
|पूरा नाम=नीलम सक्सेना चंद्रा&lt;br /&gt;
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|जन्म=[[27 जून]], [[1969]]&lt;br /&gt;
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|मुख्य रचनाएँ=&lt;br /&gt;
|विषय=&lt;br /&gt;
|भाषा=[[हिन्दी]], [[अंग्रेज़ी]] &lt;br /&gt;
|विद्यालय=विश्वेश्वरय्या राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, [[नागपुर]]&lt;br /&gt;
|शिक्षा=इंजीनियरिंग, मानव संसाधन विकास तथा वित्तीय प्रबंधन में स्नातकोत्तर डिप्लोमा&lt;br /&gt;
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|प्रसिद्धि=&lt;br /&gt;
|विशेष योगदान= नीलम चंद्रा की 45 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें [[कविता]], [[कहानी]], बाल साहित्य इत्यादि विधाओं का समावेश है। &lt;br /&gt;
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|अन्य जानकारी=लिम्का बुक ऑफ़ रिकॉर्ड और इंडिया बुक ऑफ़ रिकार्ड्स, मिरेकल बुक ऑफ़ रिकार्ड्स में भी इनका नाम दर्ज है। &lt;br /&gt;
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|अद्यतन={{अद्यतन|18:25, 30 अप्रॅल 2017 (IST)}}&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
'''नीलम सक्सेना चंद्रा''' ([[अंग्रेज़ी]]: ''Neelam Saxena Chandra'', जन्म: [[27 जून]], [[1969]], [[नागपुर]], [[महाराष्ट्र]]) [[हिंदी]] और [[अंग्रेज़ी भाषा]] की एक प्रसिद्ध आधुनिक लेखिका, कवियित्री, [[उपन्यासकार]] एवं गीतकार हैं। नीलम भारतीय अभियांत्रिकी सेवा अधिकारी हैं, जो वर्तमान में [[संघ लोक सेवा आयोग]] की संयुक्त सचिव के पद पर कार्यरत हैं। इनकी 45 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें [[कविता]], [[कहानी]], बाल साहित्य इत्यादि विधाओं का समावेश है।&amp;lt;ref&amp;gt;[http://www.bhaskar.com/news/UP-LUCK-story-of-author-neelam-saxena-chandra-5259703-PHO.html &amp;quot;इस लेडी ऑफिसर की कलम बनी पैशन, दुनिया में हुई फेमस, जीते कई अवॉर्ड&amp;quot;], ''दैनिक भास्कर '', February 27, 2016&amp;lt;/ref&amp;gt; &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==जीवन परिचय== &lt;br /&gt;
नीलम का जन्म 27 जून, 1969 में [[महाराष्ट्र]] प्रान्त के [[नागपुर]] शहर में माता शशि सक्सेना और पिता संतोष सक्सेना के घर हुआ। इन्होंने [[नागपुर]] के विश्वेश्वरय्या राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान से अभियान्त्रिकी में स्नातक के बाद मानव संसाधन विकास तथा वित्तीय प्रबंधन में स्नातकोत्तर डिप्लोमा किया। भारतीय अभियांत्रिकी सेवा की परीक्षा उत्तीर्ण कर भारतीय रेल सेवा से जुड़ गई। वर्तमान में आप [[संघ लोक सेवा आयोग]] (UPSC) की जॉइंट सेक्रेटरी हैं। &lt;br /&gt;
==लेखन परिचय==&lt;br /&gt;
अब तक इनकी 700 से ज़्यादा कविताएं-कहानियां राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं।  नीलम 45 पुस्तकों की लेखिका हैं। इनको एक साल में सबसे ज़्यादा 9 किताबें प्रकाशित कराने के लिए ‘लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड’ द्वारा सम्मानित किया गया। इन्होंने अमेरिकी दूतावास द्वारा आयोजित काव्य प्रतियोगिता में भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। नीलम को प्रसिद्ध बॉलीवुड गीतकार [[गुलजार]] ने भी सम्मानित किया है।&lt;br /&gt;
==सम्मान एवं पुरस्कार== &lt;br /&gt;
* नीलम चंद्रा को 2014 में फोर्ब्स इंडिया मैगज़ीन ने [[भारत]] की 78 लोकप्रिय लेखकों की सूची में शामिल किया।&lt;br /&gt;
* इन्हें [[रेल मंत्रालय]] द्वारा प्रेमचंद पुरस्कार, रबीन्द्रनाथ टैगोर अंतरराष्‍ट्रीय काव्य पुरस्कार, चिल्‍ड्रेन ट्रस्ट अवॉर्ड सहित कई अन्य पुरस्कार प्राप्त हैं। &lt;br /&gt;
* नीलम के लिखे गीत ‘मेरे साजन सुन सुन’ को रेडियो सिटी की ओर से फ्रीडम अवॉर्ड भी मिल चुका है।&lt;br /&gt;
* नीलम और इनकी बेटी सिमरन चंद्रा को लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड, मिरकल बुक ऑफ रिकॉर्ड और इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड की ओर से प्रथम मां-पुत्री द्वारा प्रकाशित पुस्तक का अवॉर्ड मिला है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=|प्रारम्भिक=प्रारम्भिक1 |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
*[https://www.youtube.com/watch?v=V_0IE1uxYA0 दूरदर्शन पर साक्षात्कार]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{कवि सूची}}&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{साहित्यकार}}{{भारत के कवि}}&lt;br /&gt;
[[Category:कवियित्री]][[Category:महिला साहित्यकार]] &lt;br /&gt;
[[Category:लेखक]][[Category:आधुनिक लेखक]]&lt;br /&gt;
[[Category:जीवनी साहित्य]]&lt;br /&gt;
[[Category:साहित्यकार]]&lt;br /&gt;
[[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:आधुनिक साहित्यकार]] &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Jeeteshvaishya</name></author>
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		<title>नीलम सक्सेना चंद्रा</title>
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		<updated>2017-04-29T11:07:12Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Jeeteshvaishya: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{| style=&amp;quot;background:transparent; float:right; margin:5px;&amp;quot;&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
{{सूचना बक्सा साहित्यकार&lt;br /&gt;
|चित्र=&lt;br /&gt;
|पूरा नाम=नीलम सक्सेना चंद्रा&lt;br /&gt;
|अन्य नाम=&lt;br /&gt;
|जन्म=[[27 जून]], [[1969 ]]&lt;br /&gt;
|जन्म भूमि=[[नागपुर]], [[महाराष्ट्र]], [[भारत]] &lt;br /&gt;
|अभिभावक=शशि सक्सेना, संतोष सक्सेना &lt;br /&gt;
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|संतान= सिमरन चंद्रा&lt;br /&gt;
|कर्म भूमि=[[लखनऊ]], [[दिल्ली]] इत्यादि &lt;br /&gt;
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|विशेष योगदान= नीलम चंद्रा की 45 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी है, जिनमे कविता, कहानी, बाल साहित्य इत्यादि विधाओ का समावेश हैं। &lt;br /&gt;
|नागरिकता=भारतीय&lt;br /&gt;
|संबंधित लेख=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=विधा&lt;br /&gt;
|पाठ 1=गद्य और पद्य&lt;br /&gt;
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|पाठ 2=&lt;br /&gt;
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|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
|अद्यतन=&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''नीलम सक्सेना चंद्रा''' ([[अंग्रेज़ी]]: ''Neelam Saxena Chandra'', जन्म: [[27 जून]], [[1969]], [[नागपुर]], [[महाराष्ट्र]]) [[हिंदी]] और [[अंग्रेजी भाषा]] की एक प्रसिद्ध आधुनिक लेखिका, कवियित्री, [[उपन्यासकार]]  एवं गीतकार हैं। वें भारतीय अभियांत्रिकी सेवा अधिकारी हैं, जो वर्तमान में [[संघ लोक सेवा आयोग]] की संयुक्त सचिव के पद पर कार्यरत हैं। इनकी 45 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी है, जिनमे कविता, कहानी, बाल साहित्य इत्यादि विधाओ का समावेश हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==जीवन परिचय== &lt;br /&gt;
नीलम का जन्म  27 जून 1969 में [[महाराष्ट्र]] प्रान्त के [[नागपुर]] शहर में माता श्रीमती शशि सक्सेना और पिता श्री (स्व। )संतोष सक्सेना के घर हुआ। इन्होनें [[नागपुर]] के विश्वेश्वरय्या राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान से अभियान्त्रिकी में स्नातक के बाद मानव संसाधन विकास तथा वित्तीय प्रबंधन में स्नातकोत्तर डिप्लोमा किया। भारतीय अभियांत्रिकी सेवा की परीक्षा उत्तीर्ण कर [[भारतीय रेल]] सेवा से जुड़ गई। वर्तमान में आप [[संघ लोक सेवा आयोग]] (UPSC) की जॉइंट सेक्रेटरी हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अब तक इनकी 700 से ज्यादा कविताएं-कहानियां राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पत्रिकाओ में प्रकाशित हो चुकी हैं। वें 45 पुस्तकों की लेखिका हैं। इनको एक साल में सबसे ज्यादा 9 किताबे प्रकाशित कराने के लिए ‘लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड’ द्वारा सम्मानित किया गया। नीलम और इनकी बेटी सिमरन चंद्रा को लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड, मिरकल बुक ऑफ रिकॉर्ड और इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड की ओर से प्रथम मां-पुत्री द्वारा प्रकाशित पुस्तक का अवॉर्ड मिला है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==उपलब्धियाँ एवं सम्मान== &lt;br /&gt;
* नीलम चंद्रा को 2014 में फोर्ब्स इंडिया मैगज़ीन ने भारत की 78 फेमस राइटर्स की सूची में शामिल किया।&lt;br /&gt;
* इन्होंने अमेरिकी दूतावास द्वारा आयोजित काव्य प्रतियोगिता में भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है।&lt;br /&gt;
* नीलम को प्रसिद्ध बॉलीवुड गीतकार [[गुलजार]] ने भी सम्मानित किया है।&lt;br /&gt;
* इन्हें  [[रेल मंत्रालय]] द्वारा  [[प्रेमचंद]] पुरस्कार, [[रबीन्द्रनाथ ठाकुर|रबीन्द्रनाथ टैगोर अंतरराष्‍ट्रीय काव्य पुरस्कार]], चिल्‍ड्रेन ट्रस्ट अवॉर्ड सहित कई अन्य पुरस्कार प्राप्त हैं। &lt;br /&gt;
* नीलम के लिखे गीत ‘मेरे साजन सुन सुन’ को रेडियो सिटी की ओर से फ्रीडम अवॉर्ड भी मिल चुका है।&lt;br /&gt;
* लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड और इंडिया बुक ऑफ़ रिकार्ड्स में भी नामदर्ज हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=|प्रारम्भिक= |माध्यमिक=माध्यमिक2 |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
*[https://www.youtube.com/watch?v=V_0IE1uxYA0 दूरदर्शन पर साक्षात्कार]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{कवि सूची}}&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{साहित्यकार}}{{भारत के कवि}}&lt;br /&gt;
[[Category:कवियित्री]][[Category:महिला साहित्यकार]][[Category:कवि]]&lt;br /&gt;
[[Category:लेखक]][[Category:आधुनिक लेखक]]&lt;br /&gt;
[[Category:जीवनी साहित्य]]&lt;br /&gt;
[[Category:साहित्यकार]]&lt;br /&gt;
[[Category:साहित्य कोश]][[Category:ज्ञानपीठ पुरस्कार]][[Category:साहित्य अकादमी पुरस्कार]]&lt;br /&gt;
[[Category:आधुनिक साहित्यकार]][[Category:आधुनिक कवि]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Jeeteshvaishya</name></author>
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		<title>नीलम सक्सेना चंद्रा</title>
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		<updated>2017-04-29T11:05:31Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Jeeteshvaishya: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
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|-&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
{{सूचना बक्सा साहित्यकार&lt;br /&gt;
|चित्र=Neelam Saxena.jpg  &lt;br /&gt;
|पूरा नाम=नीलम सक्सेना चंद्रा&lt;br /&gt;
|अन्य नाम=&lt;br /&gt;
|जन्म=[[27 जून]], [[1907]]&lt;br /&gt;
|जन्म भूमि=[[नागपुर]], [[महाराष्ट्र]], [[भारत]] &lt;br /&gt;
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|विद्यालय=विश्वेश्वरय्या राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान&lt;br /&gt;
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|प्रसिद्धि=&lt;br /&gt;
|विशेष योगदान= नीलम चंद्रा की 45 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी है, जिनमे कविता, कहानी, बाल साहित्य इत्यादि विधाओ का समावेश हैं। &lt;br /&gt;
|नागरिकता=भारतीय&lt;br /&gt;
|संबंधित लेख=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=विधा&lt;br /&gt;
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|अन्य जानकारी=लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड और इंडिया बुक ऑफ़ रिकार्ड्स, मिरेकल बुक ऑफ़ रिकार्ड्स में भी नामदर्ज हैं। &lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
|अद्यतन=&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''नीलम सक्सेना चंद्रा''' ([[अंग्रेज़ी]]: ''Neelam Saxena Chandra'', जन्म: [[27 जून]], [[1969]], [[नागपुर]], [[महाराष्ट्र]]) [[हिंदी]] और [[अंग्रेजी भाषा]] की एक प्रसिद्ध आधुनिक लेखिका, कवियित्री, [[उपन्यासकार]]  एवं गीतकार हैं। वें भारतीय अभियांत्रिकी सेवा अधिकारी हैं, जो वर्तमान में [[संघ लोक सेवा आयोग]] की संयुक्त सचिव के पद पर कार्यरत हैं। इनकी 45 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी है, जिनमे कविता, कहानी, बाल साहित्य इत्यादि विधाओ का समावेश हैं।&amp;lt;ref&amp;gt;[http://www.bhaskar.com/news/UP-LUCK-story-of-author-neelam-saxena-chandra-5259703-PHO.html &amp;quot;इस लेडी ऑफिसर की कलम बनी पैशन, दुनिया में हुई फेमस, जीते कई अवॉर्ड&amp;quot;], ''[[दैनिक भास्कर]]'', फरवरी 27, 2016&amp;lt;/ref&amp;gt;&amp;lt;ref&amp;gt;[http://epaper.navodayatimes.in/1187605/The-Navodaya-Times-Main/Navodaya-Times-Main#page/9/2 &amp;quot;रोजमर्रा की घटनाओ ने लिखवाई कवितायेँ:नीलम&amp;quot;], ''नवोदय टाइम्स'', अप्रैल 27, 2017&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==जीवन परिचय== &lt;br /&gt;
नीलम का जन्म  27 जून 1969 में [[महाराष्ट्र]] प्रान्त के [[नागपुर]] शहर में माता श्रीमती शशि सक्सेना और पिता श्री (स्व०) संतोष सक्सेना के घर हुआ। इन्होनें [[नागपुर]] के विश्वेश्वरय्या राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान से अभियान्त्रिकी में स्नातक के बाद मानव संसाधन विकास तथा वित्तीय प्रबंधन में स्नातकोत्तर डिप्लोमा किया। भारतीय अभियांत्रिकी सेवा की परीक्षा उत्तीर्ण कर [[भारतीय रेल]] सेवा से जुड़ गई। वर्तमान में आप [[संघ लोक सेवा आयोग]] (UPSC) की जॉइंट सेक्रेटरी हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अब तक इनकी 700 से ज्यादा कविताएं-कहानियां राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पत्रिकाओ में प्रकाशित हो चुकी हैं। वें 45 पुस्तकों की लेखिका हैं। इनको एक साल में सबसे ज्यादा 9 किताबे प्रकाशित कराने के लिए ‘लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड’ द्वारा सम्मानित किया गया। नीलम और इनकी बेटी सिमरन चंद्रा को लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड, मिरकल बुक ऑफ रिकॉर्ड और इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड की ओर से प्रथम मां-पुत्री द्वारा प्रकाशित पुस्तक का अवॉर्ड मिला है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==उपलब्धियाँ एवं सम्मान== &lt;br /&gt;
[[चित्र:Neelam saxena Chandra receiving Radio city freedom Award.jpg|250px|thumbnail|left|गायक संगीतकार विशाल दादलानी द्वारा गीत ‘मेरे साजन सुन सुन’ के लिए रेडियो सिटी की ओर से फ्रीडम अवॉर्ड प्राप्त करते हुए नीलम सक्सेना  ]]&lt;br /&gt;
* नीलम चंद्रा को 2014 में फोर्ब्स इंडिया मैगज़ीन ने भारत की 78 फेमस राइटर्स की सूची में शामिल किया।&lt;br /&gt;
* इन्होंने अमेरिकी दूतावास द्वारा आयोजित काव्य प्रतियोगिता में भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है।&lt;br /&gt;
* नीलम को प्रसिद्ध बॉलीवुड गीतकार [[गुलजार]] ने भी सम्मानित किया है।&lt;br /&gt;
* इन्हें  [[रेल मंत्रालय]] द्वारा  [[प्रेमचंद]] पुरस्कार, [[रबीन्द्रनाथ ठाकुर|रबीन्द्रनाथ टैगोर अंतरराष्‍ट्रीय काव्य पुरस्कार]], चिल्‍ड्रेन ट्रस्ट अवॉर्ड सहित कई अन्य पुरस्कार प्राप्त हैं। &lt;br /&gt;
* नीलम के लिखे गीत ‘मेरे साजन सुन सुन’ को रेडियो सिटी की ओर से फ्रीडम अवॉर्ड भी मिल चुका है।&lt;br /&gt;
* लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड और इंडिया बुक ऑफ़ रिकार्ड्स में भी नामदर्ज हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=|प्रारम्भिक= |माध्यमिक=माध्यमिक2 |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
*[https://www.youtube.com/watch?v=V_0IE1uxYA0 दूरदर्शन पर साक्षात्कार]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{कवि सूची}}&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{साहित्यकार}}{{भारत के कवि}}&lt;br /&gt;
[[Category:कवियित्री]][[Category:महिला साहित्यकार]][[Category:कवि]]&lt;br /&gt;
[[Category:लेखक]][[Category:आधुनिक लेखक]]&lt;br /&gt;
[[Category:जीवनी साहित्य]]&lt;br /&gt;
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[[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:आधुनिक साहित्यकार]][[Category:आधुनिक कवि]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Jeeteshvaishya</name></author>
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		<updated>2017-04-29T11:03:53Z</updated>

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{{सूचना बक्सा साहित्यकार&lt;br /&gt;
|चित्र=Neelam Saxena.jpg  &lt;br /&gt;
|पूरा नाम=नीलम सक्सेना चंद्रा&lt;br /&gt;
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|जन्म=[[27 जून]], [[1907]]&lt;br /&gt;
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|विशेष योगदान= नीलम चंद्रा की 45 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी है, जिनमे कविता, कहानी, बाल साहित्य इत्यादि विधाओ का समावेश हैं। &lt;br /&gt;
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|अद्यतन=&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''नीलम सक्सेना चंद्रा''' ([[अंग्रेज़ी]]: ''Neelam Saxena Chandra'', जन्म: [[27 जून]], [[1969]], [[नागपुर]], [[महाराष्ट्र]]) [[हिंदी]] और [[अंग्रेजी भाषा]] की एक प्रसिद्ध आधुनिक लेखिका, कवियित्री, [[उपन्यासकार]]  एवं गीतकार हैं। वें भारतीय अभियांत्रिकी सेवा अधिकारी हैं, जो वर्तमान में [[संघ लोक सेवा आयोग]] की संयुक्त सचिव के पद पर कार्यरत हैं। इनकी 45 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी है, जिनमे कविता, कहानी, बाल साहित्य इत्यादि विधाओ का समावेश हैं।&amp;lt;ref&amp;gt;[http://www.bhaskar.com/news/UP-LUCK-story-of-author-neelam-saxena-chandra-5259703-PHO.html &amp;quot;इस लेडी ऑफिसर की कलम बनी पैशन, दुनिया में हुई फेमस, जीते कई अवॉर्ड&amp;quot;], ''[[दैनिक भास्कर]]'', फरवरी 27, 2016&amp;lt;/ref&amp;gt;&amp;lt;ref&amp;gt;[http://epaper.navodayatimes.in/1187605/The-Navodaya-Times-Main/Navodaya-Times-Main#page/9/2 &amp;quot;रोजमर्रा की घटनाओ ने लिखवाई कवितायेँ:नीलम&amp;quot;], ''नवोदय टाइम्स'', अप्रैल 27, 2017&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==जीवन परिचय== &lt;br /&gt;
नीलम का जन्म  27 जून 1969 में [[महाराष्ट्र]] प्रान्त के [[नागपुर]] शहर में माता श्रीमती शशि सक्सेना और पिता श्री (स्व०) संतोष सक्सेना के घर हुआ। इन्होनें [[नागपुर]] के विश्वेश्वरय्या राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान से अभियान्त्रिकी में स्नातक के बाद मानव संसाधन विकास तथा वित्तीय प्रबंधन में स्नातकोत्तर डिप्लोमा किया। भारतीय अभियांत्रिकी सेवा की परीक्षा उत्तीर्ण कर [[भारतीय रेल]] सेवा से जुड़ गई। वर्तमान में आप [[संघ लोक सेवा आयोग]] (UPSC) की जॉइंट सेक्रेटरी हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अब तक इनकी 700 से ज्यादा कविताएं-कहानियां राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पत्रिकाओ में प्रकाशित हो चुकी हैं। वें 45 पुस्तकों की लेखिका हैं। इनको एक साल में सबसे ज्यादा 9 किताबे प्रकाशित कराने के लिए ‘लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड’ द्वारा सम्मानित किया गया। नीलम और इनकी बेटी सिमरन चंद्रा को लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड, मिरकल बुक ऑफ रिकॉर्ड और इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड की ओर से प्रथम मां-पुत्री द्वारा प्रकाशित पुस्तक का अवॉर्ड मिला है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==उपलब्धियाँ एवं सम्मान== &lt;br /&gt;
[[चित्र:Neelam saxena Chandra receiving Radio city freedom Award.jpg|250px|thumbnail|left|गायक संगीतकार विशाल दादलानी द्वारा गीत ‘मेरे साजन सुन सुन’ के लिए रेडियो सिटी की ओर से फ्रीडम अवॉर्ड प्राप्त करते हुए नीलम सक्सेना  ]]&lt;br /&gt;
* नीलम चंद्रा को 2014 में फोर्ब्स इंडिया मैगज़ीन ने भारत की 78 फेमस राइटर्स की सूची में शामिल किया।&lt;br /&gt;
* इन्होंने अमेरिकी दूतावास द्वारा आयोजित काव्य प्रतियोगिता में भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है।&lt;br /&gt;
* नीलम को प्रसिद्ध बॉलीवुड गीतकार [[गुलजार]] ने भी सम्मानित किया है।&lt;br /&gt;
* इन्हें  [[रेल मंत्रालय]] द्वारा  [[प्रेमचंद]] पुरस्कार, [[रबीन्द्रनाथ ठाकुर|रबीन्द्रनाथ टैगोर अंतरराष्‍ट्रीय काव्य पुरस्कार]], चिल्‍ड्रेन ट्रस्ट अवॉर्ड सहित कई अन्य पुरस्कार प्राप्त हैं। &lt;br /&gt;
* नीलम के लिखे गीत ‘मेरे साजन सुन सुन’ को रेडियो सिटी की ओर से फ्रीडम अवॉर्ड भी मिल चुका है।&lt;br /&gt;
* लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड और इंडिया बुक ऑफ़ रिकार्ड्स में भी नामदर्ज हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=|प्रारम्भिक= |माध्यमिक=माध्यमिक2 |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
*[https://www.youtube.com/watch?v=V_0IE1uxYA0 दूरदर्शन पर साक्षात्कार]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{कवि सूची}}&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{साहित्यकार}}{{भारत के कवि}}&lt;br /&gt;
[[Category:कवियित्री]][[Category:महिला साहित्यकार]][[Category:कवि]]&lt;br /&gt;
[[Category:लेखक]][[Category:आधुनिक लेखक]]&lt;br /&gt;
[[Category:जीवनी साहित्य]]&lt;br /&gt;
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		<updated>2017-04-29T11:01:28Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Jeeteshvaishya: नीलम सक्सेना चंद्रा&lt;/p&gt;
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&lt;div&gt;नीलम सक्सेना चंद्रा&lt;/div&gt;</summary>
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