<?xml version="1.0"?>
<feed xmlns="http://www.w3.org/2005/Atom" xml:lang="hi">
	<id>https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/api.php?action=feedcontributions&amp;feedformat=atom&amp;user=Krishna+anuj</id>
	<title>Bharatkosh - सदस्य द्वारा योगदान [hi]</title>
	<link rel="self" type="application/atom+xml" href="https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/api.php?action=feedcontributions&amp;feedformat=atom&amp;user=Krishna+anuj"/>
	<link rel="alternate" type="text/html" href="https://loginhi.bharatdiscovery.org/india/%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B6%E0%A5%87%E0%A4%B7:%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%97%E0%A4%A6%E0%A4%BE%E0%A4%A8/Krishna_anuj"/>
	<updated>2026-05-24T19:18:01Z</updated>
	<subtitle>सदस्य द्वारा योगदान</subtitle>
	<generator>MediaWiki 1.41.1</generator>
	<entry>
		<id>https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%85%E0%A4%B5%E0%A4%B9%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%9F_%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B7%E0%A4%BE&amp;diff=314733</id>
		<title>अवहट्ट भाषा</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%85%E0%A4%B5%E0%A4%B9%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%9F_%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B7%E0%A4%BE&amp;diff=314733"/>
		<updated>2013-02-09T14:31:45Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Krishna anuj: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{पुनरीक्षण}}&lt;br /&gt;
''अवहट्ट'' [[भाषा]] सतत् परिवर्तनशील होती है। कोई भी भाषा जब साहित्यालम्ब होकर प्रतिष्टित होती है तो वह [[व्याकरण]] के नियमों की श्रंखला बद्ध होने लगती है और धीरे-धीरे जनभाषा से उसका अलगाव होने लगता है। अपभृंश के ही उत्तरकालीन या परवर्ती रूप को 'अवहट्ट' नाम दिया गया है। ग्यारहवीं से लेकर चौदहवीं शती के अपभृंश रचनाकारों ने अपनी भाषा को अवहट्ट कहा। 'अवहट्ट' शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग ज्योतिरीश्वर ठाकुर ने अपने 'वर्ण रत्नाकर' में किया प्राकृत पैंगलम के टीकाकार वंशीधर ने अवहट्ट माना। संदेश राशक, मैथिल कोहिल कृत कीर्तिलता की भाषा को, अद्दहमान और विध्यापति ने अवहट्ट माना। अवहट्ट को अपभृंश और पुरानी हिन्दी के बीच की कड़ी माना जाता है। पुरातन प्रबंध संग़ृह की कतिपय अनु-श्रुतियों, नाथ और सिद्ध साहित्य, नेमिनाथ चौपाई, बाहुबलि रास, थूलिमद्द फाग आदि के अलावा संत ज्ञानेश्वर की 'ज्ञानेश्वरी' और रोडाकृत राउलबेल की भाषा को भी अवहट्ट माना गया। खड़ी बोली हिंदी के भाषिक और साहित्यिक विकास में जिन भाषाओँ और बोलियों का विशेष योगदान रहा है उनमे  अपभ्रंश और अवहट्ट भाषाएँ भी है। हिंदी को अपभ्रंश और अवहट्ट से जो कुछ भी मिला उसका पूरा लेखा जोखा इन तीनों की भाषिक और साहित्यिक संपत्ति का तुलनात्मक विवेचन करने से प्राप्त होता है।&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
==अपभ्रंश और अवहट्ट का व्याकरणिक रूप==&lt;br /&gt;
अपभ्रंश कुछ -कुछ और अवहट्ट बहुत कुछ वियोगात्मक भाषा बन रही थी, अर्थात विकारी शब्दों (संगे, सर्वनाम, विशेषण,और क्रिया) का रूपांतर संस्कृत की विभक्तियों से मुक्त होकर पर्सर्गों और स्वतंत्र शब्दों या शब्द्खंडों की सहायता से होने लगा था। इससे भाषा के सरलीकरण की प्रक्रिया तेज हो गई। अपभ्रंश और अवहट्ट का सबसे बड़ा योगदान पर्सर्गों के विकास में है। सर्वनामों में हम और तुम काफी पुराने हैं। शेष सर्वनामों के रूप भी अपभ्रंश और अवहट्ट में संपन्न हो गए थे। अपभ्रंश मइं से अवहट्ट में मैं हो गया था। तुहुँ से तू प्राप्त हो गया था। बहुत से अपभ्रंश और अवहट्ट के सर्वनाम पूर्वी और पश्चिमी बोलियों को मिले। सबसे महत्वपूर्ण योगदान क्रिया की रचना में क्रिदंतीय रूपों का विकास था जो अपभ्रंश और अवहट्ट में हुआ। भविष्यत् काल के रूप इतर बोलियों को मिले ; अवहट्ट में, भले हीं छिटपुट, ग-रूप आने लगा था। इसी से कड़ी बोली को गा गे गी प्राप्त हुए। अपभ्रंश और अवहट्ट में संयुक्त क्रियाओं का प्रयोग भी ध्यातव्य है। इसी के आगे हिंदी में सकना,चुभना,आना,लाना,जाना,लेना,देना,उठाना,बैठना का अंतर क्रियाओं से योग करने पर संयुक्त क्रियाओं का विकास हुआ और उनमें नई अर्थवत्ता विकसित हुई। अपभ्रंश काल से तत्सम शब्दों का पुनरुज्जीवन, विदेशी शब्दावली का ग्रहण, देशी शब्दों का गठन द्रुत गति से बढ़ चला। प्राकृत तो संस्कृत की अनुगामिनी थी - तद्भव प्रधान। अपभ्रंश और अवहट्ट की उदारता ने हिंदी को अपना शब्द्भंदर भरने में भारी सहायता दी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==साहित्यिक योगदान==&lt;br /&gt;
सिद्धों और नाथों की गीत परंपरा को संतों ने आगे बढ़ाया। सिद्धों के से नैतिक और धार्मिक आचरण सम्बन्धी उपदेश भी संत्काव्य के प्रमुख लक्ष्मण हैं। इस प्रकार हिंदी साहित्य के इतिहास में चारण काव्य और भक्तिकाल का सूफी काव्य, संतकाव्य, रामभक्ति काव्य और कृष्णभक्ति काव्य को प्रेरित करने में अपभ्रंश और अवहट्ट काव्य परम्परा का महत्वपूर्ण सहयोग प्राप्त रहा है। यदि उस पूर्ववर्ती काव्य में पाए जाने वाले नये-नये उपमानों, नायिकाओं के नख-शिख वर्णनों, नायकों के सौन्दर्य के चित्रण, छंद और अलंकार योजना को गहराई से देखा जाये तो स्पष्ट हो जायेगा की रीति काल के साहित्य तक उसका प्रभाव जारी रहा। ऐसा लगता है सन 1800 तक थोड़े अदल-बदल के साथ वैसी ही भाषा, वैसे ही काव्यरूप और अभिव्यक्ति के वैसे ही उपकरण काम में लाये जाते रहे। क्रान्ति आई तो खड़ी बोली के उदय के साथ। अपभ्रंश और अवहट्ट में दोहा-चौपाई जैसे वार्णिक छंदों का भरपूर प्रयोग हुआ है। हिंदी के प्रबंध काव्यों-सूफियों की रचनाओं में और रामभक्तों के चरित-काव्यों-में इन्ही दो को अधिक अपनाया गया है। अपभ्रंश और अवहट्ट में चऊपई १५ मात्राओं का छंद  था। हिंदी के कवियों ने इसमें एक मात्रा बढाकर चौपाई बना लिया। छप्पय छंद का रिवाज़ भी उत्तरवर्ती अपभ्रंश में चल पड़ा था। दोहा को हिंदी के मुक्तक काव्य के लिए अधिक उपयुक्त माना गया। कबीर, तुलसी, रहीम, वृन्द और विशेषता बिहारी ने इसका अत्यंत सफल प्रयोग किया। अलंकार योजना में अपभ्रंश और अवहट्ट के कवियों ने लोक में प्रचलित नए-नए उपमान और प्रतीक लाकर एक अलग परंपरा की स्थापना की जिसका हिंदी के कवियों ने विशेष लाभ उठाया। कबीर जैसे लोकप्रिय कवियों में इस तरह के प्रयोग अधिकता से मिलते हैं। अरबी का प्रभाव फ़ारसी के द्वारा हिंदी पर पड़ा मगर सीधे नहीं। अरबी फ़ारसी में अनेक ध्वनिया हिंदी से भिन्न है, परन्तु उनमे पाँच ध्वनियाँ ऐसी है जिनका प्रयोग हिंदी लेखन में पाया जाता है, अर्थात, क़,ख़,ग़,ज़,फ़। इनमे क़ का  उच्चारण पूरी तरह अपनाया नहीं जा सका। खड़ी बोली हिंदी को अंग्रेजी की एक स्वर-ध्वनि और दो व्यंजन-ध्वनिया अपनानी पड़ी क्योंकि बहुत से ऐसे शब्द हिंदी हिंदी ने उधार में लिए है जिनमे ये ध्वनिया आती है। अंग्रेजी से अनुवाद करके सैंकड़ो-हजारो शब्द ज्ञान-विज्ञान और  साहित्य में अपना रखे हैं। अंग्रेजी से सम्पर्क होने के बाद से हिंदी गद्य साहित्य के विकास में अभूतपूर्व प्रगति हुई है। गद्य के सभी विधाओं में बांगला साहित्य अग्रणी रहा। &lt;br /&gt;
आरंभिक हिंदी- आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने अपना &amp;quot;हिंदी साहित्य का इतिहास &amp;quot; सिद्धो की वाणियों से शुरू किया है। सरहपा, कन्हापा आदि सिद्ध कवियों ने अपनी भाषा को जन से अधिक निकट रखा। इसमें हिंदी के रूप असंदिग्ध है। कुछ विद्वानों ने जैन कवि पुष्यदंत को हिंदी का आदि कवि माना है। पउम चरिउ के महाकवि स्वैम्भू ने अपनी भाषा को देशी भाषा कहा है। अवधी के प्रथम कवि मुल्ला दाऊद की भाषा को आरंभिक हिंदी नहीं कहा जा सकता, उनका रचनाकाल चौदहवीं शताब्दी का अंतिम चरण माना गया। उनसे पहले अन्य बोलियों की साफ़ सुथरी रचनाएँ उपलब्ध है।&lt;br /&gt;
नाथ जोगियों की वाणी में आरंभिक हिंदी का रूप अधिक निखरा हुआ है। इसी परंपरा को बाद में जयदेव, नामदेव, त्रिलोचन,बेनी, सधना, कबीर आदि ने आगे चलाया।&lt;br /&gt;
इससे भी स्पष्ट और परिष्कृत खड़ी बोली का दक्खिनी रूप है जिसमें शरफुद्दीन बू-अली ने लिखा।&lt;br /&gt;
9. शुद्ध खड़ी बोली (हिन्दवी की) के नमूने अमीर खुसरो की शायरी में प्राप्त होते है। खुसरो की भाषा का देशीपन देखिये।&lt;br /&gt;
10.खड़ी बोली में रोड़ा कवि की रचना &amp;quot;रौल बेलि&amp;quot; की खड़ी बोली कुछ पुरानी।&lt;br /&gt;
11. राजस्थान और उसके आस-पास हिंदी के इस काल में चार प्रकार की भाषा का प्रयोग होता रहा है। एक तो अपभ्रंश-मिश्रित पश्चिमी हिंदी जिसके नमूने स्वयंभू के पऊम चरिऊ में मिल सकते हैं, दूसरी डिंगल, तीसरी शुद्ध मरु भाषा (राजस्थानी) और चौथी पिंगल भाषा।  राजस्थान इस युग में साहित्य और संस्कृति का एक मात्र केंद्र रह गया था। सारे उत्तरी भारत में पठान आक्रमणकारियों की मारकाट, वाही-तबाही मची थी। हिंदी के आदिकाल का अधिकतम साहित्य राजस्थान से ही प्राप्त हुआ है।&lt;br /&gt;
12. डिंगल को चारण वर्ग की भाषा कह सकते हैं।यह लोकप्रचलित भाषा नहीं थी। पिंगल एक व्यापक क्षेत्र की भाषा थी जो सरस और कोमल तो थी ही, शास्त्र-सम्मत और व्यवस्थित भी थी। &lt;br /&gt;
यह ब्रजमंडल की भाषा नहीं थी।आदिकाल की भाषा के ये तेरह रूप है जो प्रारंभिक या पुरानी हिंदी के आधार है। पं० चक्रधर शर्मा गुलेरी का मत सही जान पड़ता है की 11 वी शताब्दी की परवर्ती अपभ्रंश (अर्थात अवहट्ट) से पुरानी हिंदी का उदय माना जा सकता है। किन्तु, संक्रांति काल की सामग्री इतनी कम है की उससे किसी भाषा के ध्वनिगत और व्याकरणिक लक्षणों की  पूरी-पूरी जानकारी नहीं मिल सकती।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Krishna anuj</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%85%E0%A4%B5%E0%A4%B9%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%9F_%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B7%E0%A4%BE&amp;diff=314732</id>
		<title>अवहट्ट भाषा</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%85%E0%A4%B5%E0%A4%B9%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%9F_%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B7%E0%A4%BE&amp;diff=314732"/>
		<updated>2013-02-09T14:06:51Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Krishna anuj: '''अवहट्ट'' भाषा सतत् परिवर्तनशील होती है। कोई भी भाष...' के साथ नया पन्ना बनाया&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;''अवहट्ट'' [[भाषा]] सतत् परिवर्तनशील होती है। कोई भी भाषा जब साहित्यालम्ब होकर प्रतिष्टित होती है तो वह [[व्याकरण]] के नियमों की श्रंखला बद्ध होने लगती है और धीरे-धीरे जनभाषा से उसका अलगाव होने लगता है। अपभृंश के ही उत्तरकालीन या परवर्ती रूप को 'अवहट्ट' नाम दिया गया है। ग्यारहवीं से लेकर चौदहवीं शती के अपभृंश रचनाकारों ने अपनी भाषा को अवहट्ट कहा। 'अवहट्ट' शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग ज्योतिरीश्वर ठाकुर ने अपने 'वर्ण रत्नाकर' में किया प्राकृत पैंगलम के टीकाकार वंशीधर ने अवहट्ट माना। संदेश राशक, मैथिल कोहिल कृत कीर्तिलता की भाषा को, अद्दहमान और विध्यापति ने अवहट्ट माना। अवहट्ट को अपभृंश और पुरानी हिन्दी के बीच की कड़ी माना जाता है। पुरातन प्रबंध संग़ृह की कतिपय अनु-श्रुतियों, नाथ और सिद्ध साहित्य, नेमिनाथ चौपाई, बाहुबलि रास, थूलिमद्द फाग आदि के अलावा संत ज्ञानेश्वर की 'ज्ञानेश्वरी' और रोडाकृत राउलबेल की भाषा को भी अवहट्ट माना गया। खड़ी बोली हिंदी के भाषिक और साहित्यिक विकास में जिन भाषाओँ और बोलियों का विशेष योगदान रहा है उनमे  अपभ्रंश और अवहट्ट भाषाएँ भी है। हिंदी को अपभ्रंश और अवहट्ट से जो कुछ भी मिला उसका पूरा लेखा जोखा इन तीनों की भाषिक और साहित्यिक संपत्ति का तुलनात्मक विवेचन करने से प्राप्त होता है।&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
==अपभ्रंश और अवहट्ट का व्याकरणिक रूप==&lt;br /&gt;
अपभ्रंश कुछ -कुछ और अवहट्ट बहुत कुछ वियोगात्मक भाषा बन रही थी, अर्थात विकारी शब्दों (संगे, सर्वनाम, विशेषण,और क्रिया) का रूपांतर संस्कृत की विभक्तियों से मुक्त होकर पर्सर्गों और स्वतंत्र शब्दों या शब्द्खंडों की सहायता से होने लगा था। इससे भाषा के सरलीकरण की प्रक्रिया तेज हो गई। अपभ्रंश और अवहट्ट का सबसे बड़ा योगदान पर्सर्गों के विकास में है। सर्वनामों में हम और तुम काफी पुराने हैं। शेष सर्वनामों के रूप भी अपभ्रंश और अवहट्ट में संपन्न हो गए थे। अपभ्रंश मइं से अवहट्ट में मैं हो गया था। तुहुँ से तू प्राप्त हो गया था। बहुत से अपभ्रंश और अवहट्ट के सर्वनाम पूर्वी और पश्चिमी बोलियों को मिले। सबसे महत्वपूर्ण योगदान क्रिया की रचना में क्रिदंतीय रूपों का विकास था जो अपभ्रंश और अवहट्ट में हुआ। भविष्यत् काल के रूप इतर बोलियों को मिले ; अवहट्ट में, भले हीं छिटपुट, ग-रूप आने लगा था। इसी से कड़ी बोली को गा गे गी प्राप्त हुए। अपभ्रंश और अवहट्ट में संयुक्त क्रियाओं का प्रयोग भी ध्यातव्य है। इसी के आगे हिंदी में सकना,चुभना,आना,लाना,जाना,लेना,देना,उठाना,बैठना का अंतर क्रियाओं से योग करने पर संयुक्त क्रियाओं का विकास हुआ और उनमें नई अर्थवत्ता विकसित हुई। अपभ्रंश काल से तत्सम शब्दों का पुनरुज्जीवन, विदेशी शब्दावली का ग्रहण, देशी शब्दों का गठन द्रुत गति से बढ़ चला। प्राकृत तो संस्कृत की अनुगामिनी थी - तद्भव प्रधान। अपभ्रंश और अवहट्ट की उदारता ने हिंदी को अपना शब्द्भंदर भरने में भारी सहायता दी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==साहित्यिक योगदान==&lt;br /&gt;
सिद्धों और नाथों की गीत परंपरा को संतों ने आगे बढ़ाया। सिद्धों के से नैतिक और धार्मिक आचरण सम्बन्धी उपदेश भी संत्काव्य के प्रमुख लक्ष्मण हैं। इस प्रकार हिंदी साहित्य के इतिहास में चारण काव्य और भक्तिकाल का सूफी काव्य, संतकाव्य, रामभक्ति काव्य और कृष्णभक्ति काव्य को प्रेरित करने में अपभ्रंश और अवहट्ट काव्य परम्परा का महत्वपूर्ण सहयोग प्राप्त रहा है। यदि उस पूर्ववर्ती काव्य में पाए जाने वाले नये-नये उपमानों, नायिकाओं के नख-शिख वर्णनों, नायकों के सौन्दर्य के चित्रण, छंद और अलंकार योजना को गहराई से देखा जाये तो स्पष्ट हो जायेगा की रीति काल के साहित्य तक उसका प्रभाव जारी रहा। ऐसा लगता है सन 1800 तक थोड़े अदल-बदल के साथ वैसी ही भाषा, वैसे ही काव्यरूप और अभिव्यक्ति के वैसे ही उपकरण काम में लाये जाते रहे। क्रान्ति आई तो खड़ी बोली के उदय के साथ। अपभ्रंश और अवहट्ट में दोहा-चौपाई जैसे वार्णिक छंदों का भरपूर प्रयोग हुआ है। हिंदी के प्रबंध काव्यों-सूफियों की रचनाओं में और रामभक्तों के चरित-काव्यों-में इन्ही दो को अधिक अपनाया गया है। अपभ्रंश और अवहट्ट में चऊपई १५ मात्राओं का छंद  था। हिंदी के कवियों ने इसमें एक मात्रा बढाकर चौपाई बना लिया। छप्पय छंद का रिवाज़ भी उत्तरवर्ती अपभ्रंश में चल पड़ा था। दोहा को हिंदी के मुक्तक काव्य के लिए अधिक उपयुक्त माना गया। कबीर, तुलसी, रहीम, वृन्द और विशेषता बिहारी ने इसका अत्यंत सफल प्रयोग किया। अलंकार योजना में अपभ्रंश और अवहट्ट के कवियों ने लोक में प्रचलित नए-नए उपमान और प्रतीक लाकर एक अलग परंपरा की स्थापना की जिसका हिंदी के कवियों ने विशेष लाभ उठाया। कबीर जैसे लोकप्रिय कवियों में इस तरह के प्रयोग अधिकता से मिलते हैं। अरबी का प्रभाव फ़ारसी के द्वारा हिंदी पर पड़ा मगर सीधे नहीं। अरबी फ़ारसी में अनेक ध्वनिया हिंदी से भिन्न है, परन्तु उनमे पाँच ध्वनियाँ ऐसी है जिनका प्रयोग हिंदी लेखन में पाया जाता है, अर्थात, क़,ख़,ग़,ज़,फ़। इनमे क़ का  उच्चारण पूरी तरह अपनाया नहीं जा सका। खड़ी बोली हिंदी को अंग्रेजी की एक स्वर-ध्वनि और दो व्यंजन-ध्वनिया अपनानी पड़ी क्योंकि बहुत से ऐसे शब्द हिंदी हिंदी ने उधार में लिए है जिनमे ये ध्वनिया आती है। अंग्रेजी से अनुवाद करके सैंकड़ो-हजारो शब्द ज्ञान-विज्ञान और  साहित्य में अपना रखे हैं। अंग्रेजी से सम्पर्क होने के बाद से हिंदी गद्य साहित्य के विकास में अभूतपूर्व प्रगति हुई है। गद्य के सभी विधाओं में बांगला साहित्य अग्रणी रहा। &lt;br /&gt;
आरंभिक हिंदी- आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने अपना &amp;quot;हिंदी साहित्य का इतिहास &amp;quot; सिद्धो की वाणियों से शुरू किया है। सरहपा, कन्हापा आदि सिद्ध कवियों ने अपनी भाषा को जन से अधिक निकट रखा। इसमें हिंदी के रूप असंदिग्ध है। कुछ विद्वानों ने जैन कवि पुष्यदंत को हिंदी का आदि कवि माना है। पउम चरिउ के महाकवि स्वैम्भू ने अपनी भाषा को देशी भाषा कहा है। अवधी के प्रथम कवि मुल्ला दाऊद की भाषा को आरंभिक हिंदी नहीं कहा जा सकता, उनका रचनाकाल चौदहवीं शताब्दी का अंतिम चरण माना गया। उनसे पहले अन्य बोलियों की साफ़ सुथरी रचनाएँ उपलब्ध है।&lt;br /&gt;
नाथ जोगियों की वाणी में आरंभिक हिंदी का रूप अधिक निखरा हुआ है। इसी परंपरा को बाद में जयदेव, नामदेव, त्रिलोचन,बेनी, सधना, कबीर आदि ने आगे चलाया।&lt;br /&gt;
इससे भी स्पष्ट और परिष्कृत खड़ी बोली का दक्खिनी रूप है जिसमें शरफुद्दीन बू-अली ने लिखा।&lt;br /&gt;
9. शुद्ध खड़ी बोली (हिन्दवी की) के नमूने अमीर खुसरो की शायरी में प्राप्त होते है। खुसरो की भाषा का देशीपन देखिये।&lt;br /&gt;
10.खड़ी बोली में रोड़ा कवि की रचना &amp;quot;रौल बेलि&amp;quot; की खड़ी बोली कुछ पुरानी।&lt;br /&gt;
11. राजस्थान और उसके आस-पास हिंदी के इस काल में चार प्रकार की भाषा का प्रयोग होता रहा है। एक तो अपभ्रंश-मिश्रित पश्चिमी हिंदी जिसके नमूने स्वयंभू के पऊम चरिऊ में मिल सकते हैं, दूसरी डिंगल, तीसरी शुद्ध मरु भाषा (राजस्थानी) और चौथी पिंगल भाषा।  राजस्थान इस युग में साहित्य और संस्कृति का एक मात्र केंद्र रह गया था। सारे उत्तरी भारत में पठान आक्रमणकारियों की मारकाट, वाही-तबाही मची थी। हिंदी के आदिकाल का अधिकतम साहित्य राजस्थान से ही प्राप्त हुआ है।&lt;br /&gt;
12. डिंगल को चारण वर्ग की भाषा कह सकते हैं।यह लोकप्रचलित भाषा नहीं थी। पिंगल एक व्यापक क्षेत्र की भाषा थी जो सरस और कोमल तो थी ही, शास्त्र-सम्मत और व्यवस्थित भी थी। &lt;br /&gt;
यह ब्रजमंडल की भाषा नहीं थी।आदिकाल की भाषा के ये तेरह रूप है जो प्रारंभिक या पुरानी हिंदी के आधार है। पं० चक्रधर शर्मा गुलेरी का मत सही जान पड़ता है की 11 वी शताब्दी की परवर्ती अपभ्रंश (अर्थात अवहट्ट) से पुरानी हिंदी का उदय माना जा सकता है। किन्तु, संक्रांति काल की सामग्री इतनी कम है की उससे किसी भाषा के ध्वनिगत और व्याकरणिक लक्षणों की  पूरी-पूरी जानकारी नहीं मिल सकती।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Krishna anuj</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%9A%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0:%E0%A4%B8%E0%A5%82%E0%A4%AB%E0%A5%80%E0%A4%AE%E0%A4%A4_%E0%A4%94%E0%A4%B0_%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A5%80_%E0%A4%B8%E0%A5%82%E0%A4%AB%E0%A5%80_%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A5%8D%E0%A4%AF.jpg&amp;diff=314675</id>
		<title>चित्र:सूफीमत और हिन्दी सूफी काव्य.jpg</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%9A%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0:%E0%A4%B8%E0%A5%82%E0%A4%AB%E0%A5%80%E0%A4%AE%E0%A4%A4_%E0%A4%94%E0%A4%B0_%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A5%80_%E0%A4%B8%E0%A5%82%E0%A4%AB%E0%A5%80_%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A5%8D%E0%A4%AF.jpg&amp;diff=314675"/>
		<updated>2013-02-08T14:19:19Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Krishna anuj: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Krishna anuj</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%9A%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A8&amp;diff=314673</id>
		<title>चन्दायन</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%9A%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A8&amp;diff=314673"/>
		<updated>2013-02-08T14:14:40Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Krishna anuj: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;'''चन्दायन''' : इससे [[हिन्दी]] में सूफी काव्य/प्रेमाख्यान काव्य परम्परा का सूत्रपात होता है। इसकी रचना मुल्ला दाऊद ने 1379 ई. में की थी। इसका मूलनाम माताप्रसाद गुप्त 'लोर कहा' या ' लोर कथा' मानते हैं। परंतु अब चन्दायन (माताप्रसाद) या चन्दायन (परमेश्वरीलाल गुप्त) नाम ही प्रसिद्ध है। नायक (लोरिक) तथा नायिका (चन्दा) का प्रणय वर्णन इसका कथ्य है।&lt;br /&gt;
'चन्दायन' आलोच्यकाल के अंतर्गत नहीं आता तथापि उसका परिचय प्रस्तुत अध्याय में इसलिए किया गया है क्योंकि वह हिन्दी के प्राप्त सूफी प्रेमाख्यानों में पहला समझा जाता है और आलोच्यकाल से केवल 20 वर्ष पूर्व का है। दक्खिनी के प्रेमाख्यानों में जहां 'कुतुबमुश्तरी', 'सबरस', 'सैफुलमुलूक व वदीउलजमाल' तथा 'चंदरबदन-माहियार' के कथानक विस्तार से दिये गये हैं, वहीं 'गुलशने इश्क़', फूलबदन', आदि का रचनाकाल तथा उनके रचियताओं का उल्लेख कर उनके कथानकों को अति संक्षेप में दिया गया है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==चन्दायन का रचनाकाल तथा कवि का परिचय==&lt;br /&gt;
सूफी प्रेमाख्यानों की परम्परा हिन्दी में मुल्ला दाउद से प्रारम्भ होती है। उनका 'चन्दायन' सन् 1379 में लिखा गया। वह डलमऊ के रहने वाले थे और अपने यहाँ की लोक-प्रचलित गाथा चनैनी के आधार पर उन्होंने &amp;quot;चन्दायन&amp;quot; की रचना की। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Krishna anuj</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%9A%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A8&amp;diff=314665</id>
		<title>चन्दायन</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%9A%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A8&amp;diff=314665"/>
		<updated>2013-02-08T12:24:15Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Krishna anuj: पृष्ठ को '

__INDEX__' से बदल रहा है।&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Krishna anuj</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%9A%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A8&amp;diff=314664</id>
		<title>चन्दायन</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%9A%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A8&amp;diff=314664"/>
		<updated>2013-02-08T12:23:20Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Krishna anuj: '&amp;lt;!-- सबसे पहले इस पन्ने को संजोएँ (सेव करें) जिससे आपको य...' के साथ नया पन्ना बनाया&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;&amp;lt;!-- सबसे पहले इस पन्ने को संजोएँ (सेव करें) जिससे आपको यह दिखेगा कि लेख बनकर कैसा लगेगा --&amp;gt;&lt;br /&gt;
[[चित्र:{{PAGENAME}}|thumb|{{PAGENAME}} लिंक पर क्लिक करके चित्र अपलोड करें]]&lt;br /&gt;
{{पुनरीक्षण}}&amp;lt;!-- कृपया इस साँचे को हटाएँ नहीं (डिलीट न करें)। इसके नीचे से ही सम्पादन कार्य करें। --&amp;gt;&lt;br /&gt;
'''आपको नया पन्ना बनाने के लिए यह आधार दिया गया है'''&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==शीर्षक उदाहरण 1==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
===शीर्षक उदाहरण 2===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
====शीर्षक उदाहरण 3====&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=====शीर्षक उदाहरण 4=====&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;!-- कृपया इस संदेश से ऊपर की ओर ही सम्पादन कार्य करें। ऊपर आप अपनी इच्छानुसार शीर्षक और सामग्री डाल सकते हैं --&amp;gt; &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;!-- यदि आप सम्पादन में नये हैं तो कृपया इस संदेश से नीचे सम्पादन कार्य न करें --&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=आधार1|प्रारम्भिक= |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:नया पन्ना फ़रवरी-2013]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Krishna anuj</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%AA%E0%A5%80._%E0%A4%9C%E0%A4%AF%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C&amp;diff=314663</id>
		<title>पी. जयराज</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%AA%E0%A5%80._%E0%A4%9C%E0%A4%AF%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C&amp;diff=314663"/>
		<updated>2013-02-08T12:19:33Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Krishna anuj: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा कलाकार&lt;br /&gt;
|चित्र=Jairaj.jpg&lt;br /&gt;
|चित्र का नाम=जयराज&lt;br /&gt;
|पूरा नाम=पैदी जयराज&lt;br /&gt;
|प्रसिद्ध नाम=जयराज&lt;br /&gt;
|अन्य नाम=&lt;br /&gt;
|जन्म= [[28 सितम्बर]], [[1909]] &lt;br /&gt;
|जन्म भूमि=[[करीमनगर]], [[आंध्र प्रदेश]]&lt;br /&gt;
|मृत्यु=[[11 अगस्त]], [[2000]]&lt;br /&gt;
|मृत्यु स्थान=[[मुम्बई]], [[महाराष्ट्र]]&lt;br /&gt;
|अविभावक=&lt;br /&gt;
|पति/पत्नी=&lt;br /&gt;
|संतान=पाँच (दो पुत्र दिलीप, जयतिलक और तीन पुत्रियाँ जयश्री, दीपा एवं गीता)&lt;br /&gt;
|कर्म भूमि=मुम्बई&lt;br /&gt;
|कर्म-क्षेत्र=अभिनेता, निर्माता-निर्देशक&lt;br /&gt;
|मुख्य रचनाएँ=&lt;br /&gt;
|मुख्य फ़िल्में=हमारी बात, नई कहानी, शिकारी, रायफल गर्ल, भाभी आदि&lt;br /&gt;
|विषय=&lt;br /&gt;
|शिक्षा=स्नातक&lt;br /&gt;
|विद्यालय=वुड नेशनल कॉलेज, हैदराबाद&lt;br /&gt;
|पुरस्कार-उपाधि=[[दादा साहब फाल्के पुरस्कार]]&lt;br /&gt;
|प्रसिद्धि=&lt;br /&gt;
|विशेष योगदान=&lt;br /&gt;
|नागरिकता=भारतीय&lt;br /&gt;
|संबंधित लेख=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=&lt;br /&gt;
|पाठ 1=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 2=&lt;br /&gt;
|पाठ 2=&lt;br /&gt;
|अन्य जानकारी=अपने फ़िल्मी कैरियर में बतौर [[अभिनेता]] तो लगभग 300 फ़िल्मों में अभिनय किया जिनमें से 160 फ़िल्मों में नायक की भूमिकाएं निभाईं। &lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
|अद्यतन=&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
'''पी. जयराज''' (पूरा नाम- पैदी जयराज, [[अंग्रेज़ी]]: ''Paidi Jairaj'',  जन्म: [[28 सितम्बर]], [[1909]] - मृत्यु: [[11 अगस्त]], [[2000]]) [[हिन्दी सिनेमा|हिन्दी फ़िल्म जगत्]] के एकमात्र ऐसे [[अभिनेता]] थे जो मूक फ़िल्मों के दौर से लेकर वर्तमान दौर तक की अनेक फ़िल्मों में काम कर चुके थे। [[हिन्दी सिनेमा]] के पर्दे पर सर्वाधिक राष्ट्रीय और ऐतिहासिक नायकों को जीवित करने का कीर्तिमान इसी कलाकार के साथ जुड़ा है। [[नौशाद]] जैसे महान संगीतकार को फ़िल्मों में ब्रेक देने का श्रेय भी जयराज के नाम ही है। उनकी जिंदगी हिन्दी सिने जगत के [[इतिहास]] के साथ साथ चलती हुई, एक सिनेमा की कहानी जैसी थी। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==जीवन परिचय==&lt;br /&gt;
जयराज का जन्म [[28 सितम्बर]], [[1909]] को निजाम स्टेट के [[करीमनगर]] जिले में हुआ था। 'पाइदीपाटी जैरुला नाइडू' उनका आन्ध्रीय नाम था। [[हैदराबाद]] में पले बड़े हुए जिससे [[उर्दू भाषा]] पर पकड़ अच्छी थी, वो काम आयी। उनके पिताजी सरकारी दफ्तर में लेखाजोखा देखा करते थे। उनकी प्रारंम्भिक शिक्षा हैदराबाद के रोमन कैथोलिक स्कूल में हुई। फिर तीन साल के लिए उन्हें 'वुड नेशनल कॉलेज' के बॉडिंग हाउस में पढ़ाया गया जहां से उन्होंने [[संस्कृत]] की शिक्षा ली। फिर हैदराबाद के 'निजाम हाईस्कूल' में उर्दू पढी। बी. एस. सी. करने के बाद नेवी में जाना चाह्ते थे किंतु उनके बडे भाई सुन्दरराज इंजीनिय्ररिंग की पढाई के लिए [[लंदन]] भेजना चाह्ते थे। उनकी माताजी बड़े भाई को ज्यादा प्यार देतीं थीं और उनकी इच्छा थी [[इंग्लैंड]] जाकर पढाई करने की जिसका परिवार ने विरोध किया जिससे नाराज होकर, युवा जयराज, किस्मत आजमाने के लिए सन् [[1929]] में [[मुम्बई]] आ गये। उस समय उनकी उम्र 19 [[वर्ष]] थी। समुन्दर के साथ पहले से बहुत लगाव था सो, डॉक यार्ड में काम करने लगे ! वहाँ उनका एक दोस्त था जिसका नाम &amp;quot;रंग्या&amp;quot; था उसने सहायता की और तब, पोस्टर को रंगने का काम मिला जिससे स्टूडियो पहुंचे। उनकी मजबूत कद काठी ने जल्द ही उन्हें निर्माता की आंखों में चढ़ा दिया। महावीर फोटोप्लेज़ में काम मिला। उस समय चित्रपट मूक थे। कई जगह काम, ऐक्टर के बदले खड़े डबल का मिला, पर बाद में मुख्य भूमिकाएं भी मिलने लगीं। भाभा वारेरकर उनके आकर्षक और सौष्ठव शरीर को देखकर उनके व्यक्तित्व से बहुत प्रभावित हुए और उन्होंने अपनी पहली फ़िल्म में नायक की भूमिका के लिए चुन लिया। दुर्भाग्य से यह फ़िल्म बीच में ही बंद हो गई क्योंकि वारेरकर का अपने पार्टनर के साथ मनमुटाव हो गया था। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बतौर सहायक निर्देशक==&lt;br /&gt;
भायखाला स्थित स्टुडियो में निर्देशक नागेन्द्र मजूमदार के पास उन्हें 'सहायक निर्देशक की नौकरी मिल गई। उनके साथ निर्देशन के अलावा संपादन, सिने-छांयाकन आदि का कार्य भी सीखा। [[दिलीप कुमार]] की पहली फ़िल्म &amp;quot;प्रतिमा&amp;quot; का निर्देशन जयराज ने किया था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बतौर निर्देशक==&lt;br /&gt;
पी. जयराज ने फ़िल्मों के निर्देशन का काम भी किया जिसमें बतौर निर्देशक पहली फ़िल्म थी-'प्रतिभा', जिसकी निर्मात्री [[देविका रानी]] थीं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==अभिनय की शुरूआत==&lt;br /&gt;
फ़िल्मों में बतौर [[अभिनेता]] वर्ष [[1929]] में नागेन्द्र मजूमदार ने ही प्रथम फ़िल्म 'जगमगाती जवानी' में ब्रेक दिया। जिसमें माधव काले नायक थे और जयराज सहायक चूंकि माधव काले को घुड्सवारी और फाइटिंग नहीं आती थी, लिहाजा जयराज ने मास्क पहनकर उनका भी काम किया। जिसके मुख्य कलाकार माधव केले के स्टंट सीन भी उन्होंने ही किए थे। उसके बाद 'यंग इन्डिया पिक्चर्स' ने 35 रुपये प्रतिमाह, 3 वक्त का भोजन और 4 अन्य लोगों के साथ गिरगाम [[मुम्बई]] में रहने की सुविधा वाला काम दिया। अब जीवन की गाडी चल निकली। [[1930]] में &amp;quot;रसीली रानी&amp;quot; फ़िल्म बनी। माधुरी उनकी हिरोइन थीं। उसके बाद जयराज 'शारदा फ़िल्म कम्पनी' से जुड़े। 35 रुपये से 75 रुपये मिलने लगे। जेबुनिस्सा हीरोइन थीं जो हिन्दुस्तानी ग्रेटा के नाम से मशहूर थीं और जयराज जी गिल्बर्ट थे हिन्दुस्तान के। (Anthony Hope's की फ़िल्म 'द प्रिज़नर ऑफ़ जेंडा' ही [[हिन्दी]] फ़िल्म &amp;quot;रसीली रानी&amp;quot; के रूप में बनी थी) बतौर नायक उनकी पहली फ़िल्म 'रसीली रानी' [[1929]] में प्रदर्शित हुई माधुरी उनकी नायिका थीं। 'नवजीवन फ़िल्म्स' के बैनर तले बनी नागेन्द्र मजूमदार द्वारा निर्देशित वह फ़िल्म बहुत सफल रही थी। मूक फ़िल्मों के दौर में वह फ़िल्म कई सिनेमाघरों में पांच [[सप्ताह]] चली थी जो उन दिनों बहुत बड़ी बात थी। मूक फ़िल्मों में तो जयराज के नाम की धूम मची हूई थी।&lt;br /&gt;
==बोलती फ़िल्मों का नया दौर==&lt;br /&gt;
[[1931]] में जब 'आलमारा' से बोलती फ़िल्मों का दौर शुरू हुआ तो उन्होंने भी बोलती फ़िल्मों के अनुरूप खुद को ढाला। उनकी पहली बोलती फ़िल्म थी 'शिकारी'। [[1932]] में प्रदर्शित इस फ़िल्म में जयराज ने एक [[बौद्ध]] भिक्षुक की भुमिका निभाई थी और [[सांप]], [[बाघ]], [[शेर]] जैसे हिंसक जानवरों के साथ लड़ने के दृश्य दिए। बोलती फ़िल्म के साथ [[संगीत]] शुरू हुआ। कई कलाकार प्ले बैक भी देने लगे पर [[1935]] से दूसरे गाते और कलाकार सिर्फ़ होंठ हिलाते जिससे आसानी हो गयी। अब [[सिनेमा]] संगीतमय हो गया। हमजोली फ़िल्म में [[नूरजहाँ]] और जयराज जी ने काम किया था। राइफल गर्ल, हमारी बात आदि फ़िल्म मिलीं। जयराज की लोकप्रियता देखकर 'बाम्बे टॉकीज' के मालिक हिमांशु राय ने अपनी कंपनी की फ़िल्म 'भाभी' के लिए उन्हें बतौर नायक अनुबंधित किया, जिससे फ़िल्म-जगत् में सनसनी फैल गई। तब 'बाम्बे टॉकीज' बाहर के कलाकारों को अपनी फ़िल्म में काम नहीं देता था। फांज आस्टिन द्वारा निर्देशित वह फ़िल्म 'भाभी' बहुत सफल रही। [[मुम्बई]] में उस फ़िल्म ने रजत जयंती मनाई थी तो [[कलकत्ता]] में वह 80 सप्ताह चली थी। फिर आयी 'स्वामी' फ़िल्म, जिसमें सितारा देवी थीं। हातिम ताई, तमन्ना, उस समय के सिनेमा थे। जयराज ने [[मराठी]], गुजराती फ़िल्म भी कीं। अपने फ़िल्मी कैरियर में बतौर [[अभिनेता]] तो लगभग 300 फ़िल्मों में अभिनय किया जिनमें से 160 फ़िल्मों में नायक की भूमिकाएं निभाईं। बतौर नायक उनकी अंतिम फ़िल्म थी-खूनी कौन मुजरिम कौन', जो [[वर्ष]] [[1965]] में प्रदर्शित हुई थी। उसके बाद उन्होंने उम्र की मांग के अनुसार चरित्र भूमिकाएं निभानी शुरु कर दीं। [[महात्मा गांधी]] की हत्या पर आधारित अमरीकी फ़िल्म- 'नाईन आवर्स टू रामा', मार्क रोब्सन निर्मित में [[जी. डी. बिड़ला]] की भूमिका निभाने का भी अवसर मिला जो आज तक हिन्दुस्तान में प्रदर्शित नहीं हो पायी है। माया फ़िल्म में आई. एस. जौहर के साथ काम किया। यह दोनों अमरीकी फ़िल्में हैं। इन्डो-रशियन फ़िल्म 'परदेसी' में भी काम किया। दो बार दुर्घट्ना ग्रस्त हो जाने के कारण चलने फिरने में तकलीफ होने लगी तो फ़िल्मों से दूरी बनानी शुरु कर दी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बतौर निर्माता==&lt;br /&gt;
एक फ़िल्म जयराज जी ने बनाना शुरू किया था जिसमें [[नर्गिस]], [[भारत भूषण]] और ख़ुद वे काम कर रहे थे। फ़िल्म का नाम था सागर। उनका बहुत नाम था [[सिने जगत]] में और कई सारे निर्माता, निर्देशक, कलाकार उन्हें जन्मदिन की बधाई देने सुबह से उनके घर पहुँचते थे। [[1951]] में सागर फ़िल्म बनायी, जो लॉर्ड टेनिसन की &amp;quot;इनोच आर्डेन&amp;quot; पर आधारित कथा थी। वह निष्फल हुई क्योंकि जयराज ने अपना खुद का पैसा लगाया था और उन्होंने कुबूल किया था कि व्यवासायिक समझ उनमें नहीं थी। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==परिवार== &lt;br /&gt;
[[1939]] में अपने घनिष्ठ मित्र [[पृथ्वीराज कपूर]] के कहने पर उन्होंने सावित्री नाम की युवती से [[विवाह]] कर लिया। तब उन्होंने ही सावित्री के कन्यादान की रस्म निभाई थी। [[1942]] में उनका वेतन 200 रुपये प्रतिमाह से बढ़कर 600 रुपये प्रतिमाह हो गया। उनकी 5 संतान थीं, दो [[पुत्र]], दिलीप राज व जयतिलक और तीन पुत्रियाँ, जयश्री, दीपा एवं गीता। सबसे बड़े दिलीप राज, जो ऐक्टर बने। उनके द्वारा अभिनीत के. ए. अब्बास की फ़िल्म &amp;quot;शहर और सपना&amp;quot; को राष्ट्रपति पुरस्कार मिला था। जयराज का दूसरा पुत्र [[अमेरिका]] में रहता है।  दूसरी [[बेटी]] थीं जयश्री, उनका विवाह [[राजकपूर]] की पत्नी कृष्णा के छोटे भाई भूपेन्द्रनाथ के साथ हुआ था। तीसरी बेटी थीं दीपा, फ़िर थी गीता सबसे छोटी। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==मुख्य फ़िल्में==&lt;br /&gt;
* सन् 1938 - रायफल गर्ल&lt;br /&gt;
* सन् 1939 - भाभी&lt;br /&gt;
* सन् 1942 - खिलौना&lt;br /&gt;
* सन् 1942 - मेरा गाँव&lt;br /&gt;
* सन् 1943 - नई कहानी&lt;br /&gt;
* सन् 1954 - बादबान&lt;br /&gt;
* सन् 1954 - मुन्ना&lt;br /&gt;
* सन् 1956 - अमरसिंह राठौड़&lt;br /&gt;
* सन् 1956 - हातिमताई&lt;br /&gt;
* सन् 1957 - परदेसी&lt;br /&gt;
* सन् 1959 - चार दिल चार राहें&lt;br /&gt;
* सन् 1962 - रजिया सुल्तान&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==पुरस्कार ==&lt;br /&gt;
50 के दशक में पी. जयराज को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से नवाजा गया। [[1982]] में उन्हें [[दादा साहेब फाल्के]] पुरस्कार भी मिला।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==निधन==&lt;br /&gt;
जयराज का निधन लीलावती अस्पताल, [[मुम्बई]] में [[11 अगस्त]] सन् [[2000]] को हुआ और हिन्दी सिने संसार का मूक फ़िल्मों से आज तक का मानो एक सेतु ही टूट कर अदृश्य हो गया। 11 मूक चित्रपट और 200 बोलती फ़िल्मों से हमारा मनोरंजन करने वाले एक समर्थ कलाकार ने इस दुनिया से विदा ले ली।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=|प्रारम्भिक=प्रारम्भिक2 |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
*[http://books.google.co.in/books?id=yIVGnaM7z38C&amp;amp;lpg=RA1-PA1831&amp;amp;ots=dj7PTUxuif&amp;amp;dq=%E0%A4%AA%E0%A5%80.%20%E0%A4%9C%E0%A4%AF%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C%20%E0%A4%85%E0%A4%AD%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%A4%E0%A4%BE&amp;amp;pg=RA1-PA1831#v=onepage&amp;amp;q&amp;amp;f=false भुलाए नहीं भूलेंगे पी. जयराज]&lt;br /&gt;
*[http://cineplot.com/jairaj/ Jairaj]&lt;br /&gt;
*[http://www.lavanyashah.com/2008/07/blog-post_05.html हमारे पडौसी : सिने कलाकार : जयराज अंकल]&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{फ़िल्म निर्माता और निर्देशक}}{{अभिनेता}}{{दादा साहब फाल्के पुरस्कार}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:अभिनेता]][[Category:फ़िल्म निर्देशक]] [[Category:फ़िल्म निर्माता]][[Category:सिनेमा]][[Category:सिनेमा कोश]][[Category:चरित कोश]][[Category:कला कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:दादा साहब फाल्के पुरस्कार]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Krishna anuj</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%B0%E0%A5%81%E0%A4%AA%E0%A4%BE_%E0%A4%B0%E0%A5%89%E0%A4%AF&amp;diff=314660</id>
		<title>निरुपा रॉय</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%B0%E0%A5%81%E0%A4%AA%E0%A4%BE_%E0%A4%B0%E0%A5%89%E0%A4%AF&amp;diff=314660"/>
		<updated>2013-02-08T12:02:49Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Krishna anuj: /* कैरियर की शुरुआत */&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा कलाकार&lt;br /&gt;
|चित्र=Nirupa-Roy.jpg&lt;br /&gt;
|चित्र का नाम=निरुपा रॉय&lt;br /&gt;
|पूरा नाम=निरुपा रॉय&lt;br /&gt;
|प्रसिद्ध नाम=&lt;br /&gt;
|अन्य नाम=कोकिला बेन&lt;br /&gt;
|जन्म=[[4 जनवरी]], [[1931]]&lt;br /&gt;
|जन्म भूमि=बलसाड, [[गुजरात]]&lt;br /&gt;
|मृत्यु=[[13 अक्टूबर]], [[2004]]&lt;br /&gt;
|मृत्यु स्थान=&lt;br /&gt;
|अविभावक=&lt;br /&gt;
|पति/पत्नी=कमल रॉय&lt;br /&gt;
|संतान=दो पुत्र- 'योगेश' और 'किरन'&lt;br /&gt;
|कर्म भूमि=[[गुजरात]], [[मुंबई]]&lt;br /&gt;
|कर्म-क्षेत्र=अभिनय&lt;br /&gt;
|मुख्य रचनाएँ=&lt;br /&gt;
|मुख्य फ़िल्में='गंगा तेरे देश में', 'छाया', 'शहनाई', 'मर्द', 'बेताब', 'शहीद', 'दीवार', 'अमर अकबर एंथोनी', 'पाताल भैरवी', 'गरीबी', 'हर हर महादेव', 'चालबाज' 'पूरब और पश्चिम', लाल बादशाह आदि।&lt;br /&gt;
|विषय=&lt;br /&gt;
|शिक्षा=&lt;br /&gt;
|विद्यालय=&lt;br /&gt;
|पुरस्कार-उपाधि='फ़िल्म फ़ेयर पुरस्कार' (तीन बार), 'मुनीम जी' (1956), 'छाया' (1962), 'शहनाई' (1965)   &lt;br /&gt;
|प्रसिद्धि=माँ की भूमिका में प्रसिद्ध&lt;br /&gt;
|विशेष योगदान=&lt;br /&gt;
|नागरिकता=भारतीय&lt;br /&gt;
|संबंधित लेख=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=&lt;br /&gt;
|पाठ 1=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 2=&lt;br /&gt;
|पाठ 2=&lt;br /&gt;
|अन्य जानकारी=निरुपा रॉय ने अपने सिने कैरियर की शुरुआत [[1946]] में प्रदर्शित [[गुजराती भाषा|गुजराती]] फ़िल्म 'गणसुंदरी' से की थी।&lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
|अद्यतन=&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
'''निरुपा रॉय''' ([[अंग्रेज़ी]]: Nirupa Roy; जन्म- [[4 जनवरी]], [[1931]], [[गुजरात]]; मृत्यु- [[13 अक्टूबर]], [[2004]]) को [[हिन्दी]] सिनेमा में एक ऐसी अभिनेत्री के तौर पर याद किया जाता है, जिन्होंने अपने किरदारों से [[माँ]] के चरित्र को नये आयाम दिये। वैसे उनका मूल नाम 'कोकिला बेन' था। भारतीय सिनेमा में जब भी माँ के किरदार को सशक्त करने की बात आती है तो सबसे पहला नाम निरुपा रॉय का ही आता है, जिन्होंने अपनी बेमिसाल अदायगी से माँ के किरदार को [[हिन्दी सिनेमा]] में बुलन्दियों पर पहुँचाया। इस बेहतरीय अदाकारा को तीन बार सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री का 'फ़िल्म फ़ेयर पुरस्कार' देकर सम्मानित किया गया था।&lt;br /&gt;
==जन्म तथा परिवार==&lt;br /&gt;
निरुपा रॉय का जन्म 4 जनवरी, 1931 को गुजरात राज्य के बलसाड में एक मध्यम वर्गीय गुजराती परिवार में हुआ था। गौर वर्ण की वजह से उन्हें 'धोरी चकली' कहकर पुकारा जाता था। उनके [[पिता]] रेलवे में सरकारी नौकर थे। निरुपा रॉय ने चौथी तक शिक्षा प्राप्त की। जब वह मात्र 15 साल की ही थीं, उनका उनका [[विवाह]] [[मुंबई]] में कार्यरत राशनिग विभाग के कर्मचारी कमल रॉय से हो गया। विवाह के बाद निरुपा रॉय भी मुंबई आ गईं। रॉय दम्पत्ति दो पुत्रों के [[माता]]-[[पिता]] भी बने, जिनके नाम योगेश और किरन रखे गये।&lt;br /&gt;
====प्रारम्भिक संघर्ष====&lt;br /&gt;
उन्हीं दिनो निर्माता-निर्देशक बी. एम. व्यास अपनी नई फ़िल्म 'रनकदेवी' के लिए नए चेहरों की तलाश कर रहे थे। उन्होंने अपनी फ़िल्म में कलाकारों की आवश्यकता के लिए अखबार में विज्ञापन दिया। निरुपा रॉय के पति फ़िल्मों के बेहद शौकीन थे और अभिनेता बनने की इच्छा रखते थे। कमल रॉय अपनी पत्नी को लेकर बी. एम. व्यास से मिलने गए और अभिनेता बनने की पेशकश की, लेकिन बी. एम. व्यास ने कहा कि उनका व्यक्तित्व अभिनेता बनने के लायक नही है। लेकिन यदि वह चाहें तो उनकी पत्नी को फ़िल्म में अभिनेत्नी के रूप में काम मिल सकता है। फ़िल्म 'रनकदेवी' में निरुपा रॉय 150 [[रुपया|रुपये]] प्रति माह पर काम करने लगीं। किंतु कुछ समय बाद ही उन्हें भी इस फ़िल्म से अलग कर दिया गया। यह निरुपा रॉय के संघर्ष की शुरुआत थी।&amp;lt;ref name=&amp;quot;mcc&amp;quot;&amp;gt;{{cite web |url=http://dr-mahesh-parimal.blogspot.in/2010/10/blog-post_15.html |title=निरुपा रॉय|accessmonthday=4 अक्टूबर|accessyear=2012|last= |first= |authorlink= |format= |publisher= |language=[[हिन्दी]]}}&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
==कैरियर की शुरुआत==&lt;br /&gt;
निरुपा रॉय ने अपने सिने कैरियर की शुरुआत [[1946]] में प्रदर्शित [[गुजराती भाषा|गुजराती]] फ़िल्म 'गणसुंदरी' से की थी। वर्ष [[1949]] में प्रदर्शित फ़िल्म 'हमारी मंजिल' से उन्होंने [[हिन्दी]] फ़िल्म की ओर भी रुख़ किया। ओ. पी. दत्ता के निर्देशन में बनी इस फ़िल्म में उनके नायक की भूमिका प्रेम अदीब ने निभाई। उसी वर्ष उन्हें [[पी. जयराज|जयराज]] के साथ फ़िल्म 'गरीबी' में काम करने का अवसर मिला। इन फ़िल्मों की सफलता के बाद वह अभिनेत्नी के रूप में अपनी पहचान बनाने में सफल हुईं। [[1951]] में निरुपा रॉय की एक और महत्वपूर्ण फ़िल्म 'हर हर महादेव' आई। इस फ़िल्म में उन्होंने [[पार्वती देवी|देवी पार्वती]] की भूमिका निभाई थी। इस फ़िल्म की सफलता के बाद वह दर्शकों के बीच देवी के रूप में भी प्रसिद्ध हो गईं। इसी दौरान उन्होंने फ़िल्म 'वीर भीमसेन' में [[द्रौपदी]] का किरदार निभाया, जिसे काफ़ी वाहवाही मिली। पचास और साठ के दशक में निरुपा रॉय ने जितनी भी फ़िल्मों में काम किया, उनमें से अधिकतर फ़िल्मों की कहानी धार्मिक और [[भक्ति]] भावना से पूर्ण थी। हालांकि 1951 में प्रदर्शित फ़िल्म 'सिंदबाद द सेलर' में निरुपा रॉय ने नकारात्मक चरित्न भी निभाया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==सफलता==&lt;br /&gt;
वर्ष [[1953]] में प्रदर्शित फ़िल्म '[[दो बीघा ज़मीन]]' निरुपा रॉय के सिने कैरियर के लिए मील का पत्थर साबित हुई। विमल रॉय के निर्देशन में बनी इस फ़िल्म में वह एक किसान की पत्नी की भूमिका में दिखाई दीं। फ़िल्म में [[बलराज साहनी]] ने मुख्य भूमिका निभाई थी। बेहतरीन अभिनय से सजी इस फ़िल्म में दमदार अभिनय के लिए उन्हें अंतराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त हुई। [[1955]] में 'फ़िल्मिस्तान स्टूडियो' के बैनर तले बनी फ़िल्म 'मुनीम जी' निरुपा रॉय की अहम फ़िल्म साबित हुई। इस फ़िल्म में उन्होंने [[देवानंद]] की [[माँ]] की भूमिका निभाई थी। फ़िल्म में अपने सशक्त अभिनय के लिए वह सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्नी के 'फ़िल्म फ़ेयर पुरस्कार' से सम्मानित की गईं। लेकिन इसके बाद छह वर्ष तक उन्होंने माँ की भूमिका स्वीकार नही की।&amp;lt;ref name=&amp;quot;mcc&amp;quot;/&amp;gt;&lt;br /&gt;
====माँ का चरित्र====&lt;br /&gt;
[[1961]] में प्रदर्शित फ़िल्म 'छाया' में उन्होंने एक बार फिर माँ की भूमिका निभाई। इसमें उन्होंने [[आशा पारेख]] की माँ की भूमिका निभाई थीं। इस फ़िल्म में भी उनके जबरदस्त अभिनय को देखते हुए उन्हें सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्नी के 'फ़िल्म फ़ेयर पुरस्कार' से सम्मानित किया गया। सन [[1975]] में प्रदर्शित फ़िल्म 'दीवार' निरुपा रॉय के कैरियर की महत्वपूर्ण फ़िल्मों में शुमार की जाती है। [[यश चोपड़ा]] के निर्देशन में बनी इस फ़िल्म में उन्होंने अच्छाई और बुराई का प्रतिनिधित्व करने वाले [[शशि कपूर]] और [[अमिताभ बच्चन]] की माँ की भूमिका निभाई। फ़िल्म में उन्होंने अपने स्वाभाविक अभिनय से माँ के चरित्न को जीवंत कर दिया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
निरुपा रॉय के सिने कैरियर पर नज़र डालें तो पता चलता है कि सुपरस्टार अमिताभ बच्चन की माँ के रूप में उनकी भूमिका अत्यंत प्रभावशाली रही। उन्होंने सर्वप्रथम फ़िल्म '[[दीवार (फ़िल्म)|दीवार]]' में अमिताभ बच्चन की माँ की भूमिका निभाई थी। इसके बाद 'खून पसीना', 'मुकद्दर का सिकंदर', 'अमर अकबर एंथनी', 'सुहाग', 'इंकलाब', 'गिरफ्तार', 'मर्द' और 'गंगा जमुना सरस्वती' जैसी फ़िल्मों में भी वह अमिताभ बच्चन की माँ की भूमिका में दिखाई दीं। वर्ष [[1999]] में प्रदर्शित होने वाली फ़िल्म 'लाल बादशाह' में वह अंतिम बार अमिताभ बच्चन की माँ की भूमिका में दिखाई दीं।&amp;lt;ref name=&amp;quot;mcc&amp;quot;/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==मुख्य फ़िल्में==&lt;br /&gt;
निरुपा रॉय ने अपने पांच दशक के लंबे सिने कैरियर में लगभग 300 फ़िल्मों में अभिनय किया। उनकी कैरियर की उल्लेखनीय फ़िल्मों में कुछ हैं-&lt;br /&gt;
#लाल बादशाह - 1999&lt;br /&gt;
#जहाँ तुम ले चलो - 1999&lt;br /&gt;
#आँसू बने अंगारे - 1993&lt;br /&gt;
#गंगा तेरे देश में - 1988&lt;br /&gt;
#पाताल भैरवी - 1985&lt;br /&gt;
#मर्द - 1985&lt;br /&gt;
#बेताब - 1983&lt;br /&gt;
#खून और पानी - 1981&lt;br /&gt;
#सुहाग - 1979&lt;br /&gt;
#अमर अकबर एंथोनी - 1979&lt;br /&gt;
#खानदान - 1979&lt;br /&gt;
#[[दीवार (फ़िल्म)|दीवार]] - 1975&lt;br /&gt;
#शहीद - 1965&lt;br /&gt;
#शहनाई - 1965&lt;br /&gt;
#छाया - 1962&lt;br /&gt;
#बाजीगर - 1959&lt;br /&gt;
#चालबाज - 1958&lt;br /&gt;
#नागमणि - 1957&lt;br /&gt;
#मुनीम जी - 1956&lt;br /&gt;
#[[दो बीघा ज़मीन]] - 1953&lt;br /&gt;
#दशावतार - 1951&lt;br /&gt;
#श्री विष्णु भगवान - 1951&lt;br /&gt;
#हर हर महादेव - 1950&lt;br /&gt;
#गरीबी - 1949&lt;br /&gt;
====पुरस्कार व सम्मान====&lt;br /&gt;
निरुपा रॉय को तीन बार सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री का 'फ़िल्म फ़ेयर पुरस्कार' दिया गया था। सबसे पहले उन्हें [[1956]] की फ़िल्म 'मुनीम जी' के लिए यह पुरस्कार दिया गया, जिसमें निरुपा रॉय [[देवानंद]] की माँ की भूमिका में थीं। इसके बाद उन्हें सन [[1962]] की फ़िल्म 'छाया' के लिए यह पुरस्कार दिया गया। इसके बाद उन्हें फ़िल्म 'शहनाई'  के लिए [[1965]] में पुरस्कृत किया गया था।&lt;br /&gt;
==निधन==&lt;br /&gt;
भारतीय [[हिन्दी]] सिनेमा में [[माँ]] के किरदार को जीवंत करने वाली इस महान अभिनेत्री की [[13 अक्टूबर]], [[2004]] को मौत हो गई। उन्हें आज भी बॉलिवुड की सबसे सर्वश्रेष्ठ माँ माना जाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=|प्रारम्भिक=प्रारम्भिक1|माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{अभिनेत्री}}&lt;br /&gt;
[[Category:अभिनेत्री]][[Category:सिनेमा]][[Category:कला कोश]][[Category:चरित कोश]][[Category:प्रसिद्ध व्यक्तित्व]][[Category:प्रसिद्ध व्यक्तित्व कोश]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Krishna anuj</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%A6%E0%A4%BE%E0%A4%A6%E0%A4%BE_%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%B9%E0%A4%AC_%E0%A4%AB%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A5%87_%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0&amp;diff=314659</id>
		<title>दादा साहब फाल्के पुरस्कार</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%A6%E0%A4%BE%E0%A4%A6%E0%A4%BE_%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%B9%E0%A4%AC_%E0%A4%AB%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A5%87_%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0&amp;diff=314659"/>
		<updated>2013-02-08T12:00:04Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Krishna anuj: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;[[चित्र:Dadasaheb Phalke Award.jpg|100px|thumb|दादा साहब फाल्के पुरस्कार]]&lt;br /&gt;
'''दादा साहब फाल्के पुरस्कार''' की स्थापना वर्ष [[1969]] में भारतीय सिनेमा के पितामह [[दादा साहब फाल्के]] की सौंवीं जयंती के अवसर पर की गई थी।  यह भारतीय सिनेमा का सबसे बड़ा पुरस्कार है, जो आजीवन योगदान के लिए केंद्र सरकार की ओर से दिया जाता है। भारत सरकार द्वारा यह पुरस्कार भारतीय सिनेमा के संवर्धन और विकास में उल्लेखनीय योगदान करने के लिए दिया जाता है। &lt;br /&gt;
*'लाइफ टाईम अचीवमेंट अवार्ड' के रूप में दिया जाने वाला 'दादा साहेब फाल्के पुरस्कार' [[भारत]] के फ़िल्म क्षेत्र का सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार है।&lt;br /&gt;
*प्रतिष्ठित व्यक्तियों की एक समिति की सिफारिशों पर यह पुरस्कार प्रदान किया जाता है। &lt;br /&gt;
*वर्ष 1969 में पहला पुरस्कार [[अभिनेत्री]] [[देविका रानी]] को दिया गया था। &lt;br /&gt;
*यह पुरस्कार वर्ष के अंत में [[राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार|राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कारों]] के साथ दिया जाता है। लेकिन वर्ष [[2006]] में बंबई हाई कोर्ट ने फ़िल्म महोत्सव निदेशालय को निर्देश दिया कि वह इस सम्मान के लिए बिना सेंसर की हुई फ़िल्मों पर ही विचार करे। इसे फ़िल्म महोत्सव निदेशालय ने सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी और सर्वोच्च न्यायालय का फैसला फ़िल्म महोत्सव निदेशालय के पक्ष में रहा। अदालती फैसले में देरी के कारण उस वर्ष के पुरस्कार की घोषणा वर्ष [[2008]] के मध्य में की गई। &lt;br /&gt;
*2007 के पुरस्कार की घोषणा&amp;lt;ref&amp;gt;[[2008]] के अंत में होनी चाहिए थी&amp;lt;/ref&amp;gt; सिंतबर, [[2009]] में हुई और इसी तरह वर्ष 2008 के पुरस्कार की [[19 जनवरी]], [[2010]] को तथा वर्ष 2009 के पुरस्कार की घोषणा नौ सितंबर, 2010 को हुई। &lt;br /&gt;
*इस पुरस्कार में [[भारत]] सरकार की ओर से दस लाख रुपये नकद, स्वर्ण कमल और शॉल प्रदान किया जाता है।&lt;br /&gt;
*वर्ष [[2008]] का 'दादा साहेब फाल्के पुरस्कार' [[कर्नाटक]] के वी.के. मूर्ति को प्रदान किया गया था, जो इस प्रतिष्ठित पुरस्कार को पाने वाले पहले सिनेमैटोग्राफर थे।&lt;br /&gt;
*‘दादा साहेब फाल्के अकेडमी’ के द्वारा भी दादा साहेब फाल्के के नाम पर तीन पुरस्कार दिए जाते हैं, जो हैं -  फाल्के रत्न अवार्ड, फाल्के कल्पतरु अवार्ड और दादा साहेब फाल्के अकेडमी अवार्ड्स।&lt;br /&gt;
{| class=&amp;quot;bharattable-pink&amp;quot; width=&amp;quot;90%&amp;quot; &lt;br /&gt;
|+ दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित &lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
! क्रम&lt;br /&gt;
! वर्ष &lt;br /&gt;
! कलाकार &lt;br /&gt;
! कार्यक्षेत्र &lt;br /&gt;
! चित्र&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 1- &lt;br /&gt;
| [[1969]]&lt;br /&gt;
| [[देविका रानी]]&lt;br /&gt;
| [[अभिनेत्री]]&lt;br /&gt;
| [[चित्र:Devika-Rani.jpg|center|50px|link=देविका रानी]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 2- &lt;br /&gt;
| [[1970]]&lt;br /&gt;
| [[बी. एन. सरकार]]&lt;br /&gt;
| फ़िल्म निर्माता&lt;br /&gt;
| [[चित्र:B.N.Sircar.jpg|center|50px|link=बी. एन. सरकार]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 3- &lt;br /&gt;
| [[1971]]&lt;br /&gt;
| [[पृथ्वीराज कपूर]]&lt;br /&gt;
| [[अभिनेता|अभिनेता ( मरणोपरांत)]]&lt;br /&gt;
| [[चित्र:Prithviraj-Kapoor-2.jpg|center|50px|link=पृथ्वीराज कपूर]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 4- &lt;br /&gt;
| [[1972]]&lt;br /&gt;
| [[पंकज मलिक]]&lt;br /&gt;
| फ़िल्म संगीतकार&lt;br /&gt;
| [[चित्र:Pankaj-Malik.jpg|center|50px|link=पंकज मलिक]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 5- &lt;br /&gt;
| [[1973]]&lt;br /&gt;
| [[रूबी मेयर्स|रूबी मेयर्स / सुलोचना]]&lt;br /&gt;
| [[अभिनेत्री]]&lt;br /&gt;
| [[चित्र:Sulochana.jpg|center|50px|link=रूबी मेयर्स]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 6- &lt;br /&gt;
| [[1974]]&lt;br /&gt;
| बोमिरेद्दी नरसिम्हा रेड्डी&lt;br /&gt;
| फ़िल्म निर्देशक&lt;br /&gt;
| &lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 7- &lt;br /&gt;
| [[1975]]&lt;br /&gt;
| धीरेन्द्र नाथ गांगुली&lt;br /&gt;
| [[अभिनेता]], फ़िल्म निर्देशक&lt;br /&gt;
| &lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 8- &lt;br /&gt;
| [[1976]]&lt;br /&gt;
| [[कानन देवी]]&lt;br /&gt;
| [[अभिनेत्री]]&lt;br /&gt;
| [[चित्र:Kanan-Devi.jpg|center|50px|link=कानन देवी]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 9- &lt;br /&gt;
| [[1977]]&lt;br /&gt;
| [[नितिन बोस]]&lt;br /&gt;
| फ़िल्म छायाकार, फ़िल्म निर्देशक, फ़िल्म पटकथा लेखक&lt;br /&gt;
| &lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 10- &lt;br /&gt;
| [[1978]]&lt;br /&gt;
| [[रायचंद बोराल]]&lt;br /&gt;
| फ़िल्म संगीतकार, फ़िल्म निर्देशक&lt;br /&gt;
| [[चित्र:R-C-Boral.jpg|center|50px|link=रायचंद बोराल]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 11- &lt;br /&gt;
| [[1979]]&lt;br /&gt;
| [[सोहराब मोदी]]&lt;br /&gt;
| [[अभिनेता]], फ़िल्म निर्देशक, फ़िल्म निर्माता&lt;br /&gt;
| [[चित्र:Sohrab-Modi.jpg|center|50px|link=सोहराब मोदी]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 12- &lt;br /&gt;
| [[1980]]&lt;br /&gt;
| [[पी. जयराज]]&lt;br /&gt;
| [[अभिनेता]], फ़िल्म निर्देशक चित्र:&lt;br /&gt;
| [[चित्र:Jairaj.jpg|center|50px|link=पी. जयराज]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 13- &lt;br /&gt;
| [[1981]]&lt;br /&gt;
| [[नौशाद|नौशाद अली]]&lt;br /&gt;
| फ़िल्म संगीतकार&lt;br /&gt;
| [[चित्र:Naushad.jpg|center|50px|link=नौशाद]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 14- &lt;br /&gt;
| [[1982]]&lt;br /&gt;
| एल. वी. प्रसाद &lt;br /&gt;
| [[अभिनेता]], फ़िल्म निर्देशक, फ़िल्म निर्माता&lt;br /&gt;
| &lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 15- &lt;br /&gt;
| [[1983]]&lt;br /&gt;
| [[दुर्गा खोटे]]&lt;br /&gt;
| [[अभिनेत्री]]&lt;br /&gt;
| [[चित्र:Durga-khote-2.jpg|center|50px|link=दुर्गा खोटे]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 16- &lt;br /&gt;
| [[1984]]&lt;br /&gt;
| [[सत्यजित राय]]&lt;br /&gt;
| फ़िल्म निर्देशक&lt;br /&gt;
| [[चित्र:Satyajit-Ray.jpg|center|50px|link=सत्यजित राय]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 17- &lt;br /&gt;
| [[1985]]&lt;br /&gt;
| [[वी शांताराम]]&lt;br /&gt;
| [[अभिनेता]], फ़िल्म निर्देशक, फ़िल्म निर्माता&lt;br /&gt;
| [[चित्र:V-Shantaram.jpg|center|50px|link=वी शांताराम]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 18- &lt;br /&gt;
| [[1986]]&lt;br /&gt;
| बी. नागी रेड्डी&lt;br /&gt;
| फ़िल्म निर्माता&lt;br /&gt;
| &lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 19- &lt;br /&gt;
| [[1987]]&lt;br /&gt;
| [[राजकपूर]]&lt;br /&gt;
| [[अभिनेता]], फ़िल्म निर्देशक&lt;br /&gt;
| [[चित्र:Raj-Kapoor.jpg|center|50px|link=राजकपूर]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 20- &lt;br /&gt;
| [[1988]]&lt;br /&gt;
| [[अशोक कुमार]]&lt;br /&gt;
| [[अभिनेता]]&lt;br /&gt;
| [[चित्र:Ashok Kumar.jpg|center|50px|link=अशोक कुमार]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 21- &lt;br /&gt;
| [[1989]]&lt;br /&gt;
| [[लता मंगेशकर]]&lt;br /&gt;
| पार्श्व गायिका&lt;br /&gt;
| [[चित्र:Lata-Mangeshkar-1.jpg|center|50px|link=लता मंगेशकर]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 22- &lt;br /&gt;
| [[1990]]&lt;br /&gt;
| ए. नागेश्वर राव&lt;br /&gt;
| [[अभिनेता]]&lt;br /&gt;
| &lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 23- &lt;br /&gt;
| [[1991]]&lt;br /&gt;
| भालजी पेंढरकर&lt;br /&gt;
| फ़िल्म निर्देशक, फ़िल्म निर्माता, फ़िल्म पटकथा लेखक&lt;br /&gt;
| &lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 24- &lt;br /&gt;
| [[1992]]&lt;br /&gt;
| [[भूपेन हज़ारिका]]&lt;br /&gt;
| फ़िल्म निर्देशक, गायक&lt;br /&gt;
| [[चित्र:Bhupen Hazarika.jpg|center|50px|link=भूपेन हज़ारिका]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 25- &lt;br /&gt;
| [[1993]]&lt;br /&gt;
| [[मजरूह सुल्तानपुरी]]&lt;br /&gt;
| गीतकार&lt;br /&gt;
| [[चित्र:Majrooh Sultanpuri.gif|center|50px|link=मजरूह सुल्तानपुरी]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 26- &lt;br /&gt;
| [[1994]] &lt;br /&gt;
| [[दिलीप कुमार]]&lt;br /&gt;
| [[अभिनेता]]&lt;br /&gt;
| [[चित्र:Dilip-kumar.jpg|center|50px|link=दिलीप कुमार]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 27- &lt;br /&gt;
| [[1995]]&lt;br /&gt;
| [[राजकुमार]]&lt;br /&gt;
| [[अभिनेता]]&lt;br /&gt;
| [[चित्र:Rajkumar-sounth-indian-actor.jpg|center|50px|link=राजकुमार]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 28- &lt;br /&gt;
| [[1996]]&lt;br /&gt;
| [[शिवाजी गणेशन]]&lt;br /&gt;
| [[अभिनेता]]&lt;br /&gt;
| [[चित्र:Shivaji-ganeshan.jpg|center|50px|link=शिवाजी गणेशन]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 29- &lt;br /&gt;
| [[1997]]&lt;br /&gt;
| [[प्रदीप]]&lt;br /&gt;
| गीतकार&lt;br /&gt;
| [[चित्र:Pradeep.jpg|center|50px|link=प्रदीप]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 30- &lt;br /&gt;
| [[1998]]&lt;br /&gt;
| [[बी. आर. चोपड़ा]]&lt;br /&gt;
| फ़िल्म निर्देशक, फ़िल्म निर्माता&lt;br /&gt;
| [[चित्र:B.R.-Chopra.jpg|center|50px|link=बी. आर. चोपड़ा]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 31- &lt;br /&gt;
| [[1999]]&lt;br /&gt;
| [[ऋषिकेश मुखर्जी]]&lt;br /&gt;
| फ़िल्म निर्देशक&lt;br /&gt;
| [[चित्र:Hrishikesh-mukherjee.jpg|center|50px|link=ऋषिकेश मुखर्जी]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 32- &lt;br /&gt;
| [[2000]]&lt;br /&gt;
| [[आशा भोंसले]]&lt;br /&gt;
| पार्श्व गायिका&lt;br /&gt;
| [[चित्र:Asha-Bhosle.jpg|center|50px|link=आशा भोंसले]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 33- &lt;br /&gt;
| [[2001]]&lt;br /&gt;
| [[यश चोपड़ा]]&lt;br /&gt;
| फ़िल्म निर्देशक, फ़िल्म निर्माता&lt;br /&gt;
| [[चित्र:Yash-chopra-.jpg|center|50px|link=यश चोपड़ा]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 34- &lt;br /&gt;
| [[2002]]&lt;br /&gt;
| [[देव आनंद]]&lt;br /&gt;
| [[अभिनेता]], फ़िल्म निर्देशक, फ़िल्म निर्माता&lt;br /&gt;
| [[चित्र:Dev anand young.jpg|center|50px|link=देवानंद]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 35- &lt;br /&gt;
| [[2003]]&lt;br /&gt;
| [[मृणाल सेन]] &lt;br /&gt;
| फ़िल्म निर्देशक&lt;br /&gt;
| [[चित्र:Mrinal-sen.jpg|center|50px|link=मृणाल सेन]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 36- &lt;br /&gt;
| [[2004]]&lt;br /&gt;
| अदूर गोपालकृष्णन&lt;br /&gt;
| फ़िल्म निर्देशक&lt;br /&gt;
| &lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 37- &lt;br /&gt;
| [[2005]]&lt;br /&gt;
| [[श्याम बेनेगल]]&lt;br /&gt;
| फ़िल्म निर्देशक&lt;br /&gt;
| [[चित्र:Shyam Benegal.jpg|center|50px|link=श्याम बेनेगल]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 38- &lt;br /&gt;
| [[2006]]&lt;br /&gt;
| [[तपन सिन्हा]]&lt;br /&gt;
| फ़िल्म निर्देशक&lt;br /&gt;
| [[चित्र:Tapan-sinha.jpg|center|50px|link=तपन सिन्हा]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 39- &lt;br /&gt;
| [[2007]]&lt;br /&gt;
| [[मन्ना डे]]&lt;br /&gt;
| पार्श्व गायक&lt;br /&gt;
| [[चित्र:Manna Dey.jpg|center|50px|link=मन्ना डे]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 40- &lt;br /&gt;
| [[2008]]&lt;br /&gt;
| [[वी.के. मूर्ति]]&lt;br /&gt;
| छायाकार &lt;br /&gt;
| [[चित्र:V.K.Murthy.jpg|center|50px|link= वी. के. मूर्ति]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 41- &lt;br /&gt;
| [[2009]]&lt;br /&gt;
| [[डी. रामानायडू]]&lt;br /&gt;
| फ़िल्म निर्माता&lt;br /&gt;
| [[चित्र:D-Ramanaidu.jpg|center|50px|link=डी. रामानायडू]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 42- &lt;br /&gt;
| [[2010]]&lt;br /&gt;
| [[के. बालाचंदर]]&lt;br /&gt;
| फ़िल्म निर्देशक&lt;br /&gt;
| [[चित्र:K.Balachander.jpg|center|50px|link=के. बालाचंदर]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| 43- &lt;br /&gt;
| [[2011]]&lt;br /&gt;
| [[सौमित्र चटर्जी]]&lt;br /&gt;
| अभिनेता&lt;br /&gt;
| [[चित्र:Saumitra-Chatterjee.jpg|center|50px|link=सौमित्र चटर्जी]]&lt;br /&gt;
|}&lt;br /&gt;
  &lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति&lt;br /&gt;
|आधार=&lt;br /&gt;
|प्रारम्भिक=प्रारम्भिक3&lt;br /&gt;
|माध्यमिक=&lt;br /&gt;
|पूर्णता=&lt;br /&gt;
|शोध=&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
* [http://pib.nic.in/newsite/erelease.aspx?relid=65641 डी रामानायडू को दादा साहब फाल्के पुरस्कार]&lt;br /&gt;
* [http://livehindustan.com/news/desh/national/article1-Phalke-award-39-39-168783.html फ़िल्मकार बालाचंदर को दादा साहब फाल्के पुरस्कार] &lt;br /&gt;
[[Category:राष्ट्रीय_सम्मान_एवं_पुरस्कार]][[Category:सिनेमा_कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:दादा साहब फाल्के पुरस्कार]]&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{राष्ट्रीय सम्मान एवं पुरस्कार}}&lt;br /&gt;
{{दादा साहब फाल्के पुरस्कार}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Krishna anuj</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=2000&amp;diff=314658</id>
		<title>2000</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=2000&amp;diff=314658"/>
		<updated>2013-02-08T11:53:37Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Krishna anuj: /* वर्ष ईसवी सन् 2000 में हुए निधन */&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{वर्ष}}&lt;br /&gt;
यह पन्ना [[ग्रेगोरी कलैण्डर]] के [[वर्ष]] [[ईसवी सन्]]  2000 का है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिसका समकालीन वर्ष (लगभग) [[विक्रमी संवत]] के अनुसार {{वर्ष विक्रमी}} है और [[राष्ट्रीय शाके]] के अनुसार {{वर्ष शाके}} है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==वर्ष ईसवी सन् 2000 में घटी महत्त्वपूर्ण घटनाएँ==&lt;br /&gt;
* [[1 जनवरी]]  - न्यूजीलैंड से 860 किमी. पूर्व दिशा में स्थित मोरिओरी चैटहैम द्वीप पर सहस्त्राब्दी की प्रथम किरण पड़ी।&lt;br /&gt;
* [[3 जनवरी]]- [[कलकत्ता]] का नाम आधिकारिक रूप से [[कोलकाता]] रखा गया।&lt;br /&gt;
* [[5 जनवरी]]  - अंतर्राष्ट्रीय फ़ुटबाल एवं सांख्यिकी महासंघ ने 'पेले' को शताब्दी का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी घोषित किया।&lt;br /&gt;
* [[7 जनवरी]] - जकार्ता (इंडोनेशिया) में 10 हज़ार मुसलमानों ने मोलुकस द्वीप समूह में ईसाईयों के विरुद्ध जेहाद की घोषणा की।&lt;br /&gt;
* [[14 जनवरी]] - कम्प्यूटर बादशाह बिल गेट्स ने स्टीव वाल्मर को विश्व की सबसे बड़ी कम्प्यूटर साफ़्टवेयर कम्पनी सौंपी।&lt;br /&gt;
* [[16 जनवरी]] - चीन सरकार ने दो वर्षीय तिब्बती बालक को 'साकार बुद्ध' के पुरावतार के रूप में मान्यता प्रदान की।&lt;br /&gt;
* [[21 जनवरी]] - एशिया के प्रथम 'स्लिट लिवर' का प्रत्यारोपण हांगकांग में हुआ, हिमतक्षेस की बैठक मस्कट में प्रारम्भ।&lt;br /&gt;
* [[24 जनवरी]] - चुनावों में दलितों का आरक्षण 10 वर्ष तक बढ़ाने हेतु संविधान के 79वें संशोधन को राष्ट्रपति की मंजूरी। &lt;br /&gt;
* [[26 जनवरी]] - कोंकण रेलवे परियोजना पूर्ण हुई और प्रथम यात्री गाड़ी चलाई गयी। &lt;br /&gt;
* [[28 जनवरी]] - अंडर -19 का युवा विश्वकप क्रिकेट के फ़ाइनल में भारत ने श्रीलंका को हराया।&lt;br /&gt;
* [[31 जनवरी]] - हवाला केस के सभी आरोपी बरी। &lt;br /&gt;
* [[6 फ़रवरी]] - विदेश मंत्री टारजा हैलोनेन फ़िनलैंड की प्रथम महिला राष्ट्रपति चुनी गईं।&lt;br /&gt;
* [[7 फ़रवरी]] - भारत व सं.रा. अमेरिका के बीच गठित संयुक्त आतंकवाद विरोधी दल की प्रथम बैठक वाशिंगटन में शुरू।&lt;br /&gt;
* [[12 फ़रवरी]] - पंडित रविशंकर फ़्रांस के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'कॉमनडियर डीला लीजंड डि आनर' से सम्मानित, पाकिस्तान राष्ट्रमंडल संसदीय संघ से निलम्बित।&lt;br /&gt;
* [[13 फ़रवरी]] - बहुचर्चित पीनट्स कॉमिक पट्टी के सर्जक चार्ल्स शुल्ज का निधन।&lt;br /&gt;
* [[14 फ़रवरी]] - अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के प्रबंध निदेशक माइकल कैमडेसस ने अपने 13 वर्षीय कार्यकाल के बाद अवकाश ग्रहण किया।&lt;br /&gt;
* [[17 फ़रवरी]] - संयुक्त राष्ट्र शैक्षणिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक विकास संगठन ने बांग्लादेश के अनुरोध पर 21 फ़रवरी को सम्पूर्ण विश्व में मातृभाषा दिवस मनाने का निश्चय किया।&lt;br /&gt;
* [[19 फ़रवरी]] - तुवालू संयुक्त राष्ट्र का 189वां सदस्य बना।&lt;br /&gt;
* [[20 फ़रवरी]] - भारतीय मूल के ब्रिटिश लेखक सलमान रुश्दी ने ब्रिटेन छोड़कर न्यूयार्क में बसने का निश्चय किया।&lt;br /&gt;
* [[21 फ़रवरी]] - भारतीय मूल के 52 वर्षीय उज्जल दोसांझ कनाडा में ब्रिटिश कोलंबिया प्रान्त के नये मुख्यमंत्री (प्रीमियर) बने।&lt;br /&gt;
* [[25 फ़रवरी]] - रूस की निचली संसद ड्यूमा द्वारा भारत के साथ द्विपक्षीय प्रत्यर्पण संधि का अनुमोदन।&lt;br /&gt;
* [[29 फ़रवरी]] - चेचेन्या के 99 प्रतिशत हिस्से पर रूसी सेनाओं का कब्ज़ा, रवाण्डा के प्रधानमंत्री पिरे सेलेस्टिन रविगेमा ने अपने पद से इस्तीफ़ा दिया।&lt;br /&gt;
* [[1 मार्च]] - मोहम्मद अहमद अल गयूम के स्थान पर मुबारक अल शामेख लीबिया के नये प्रधानमंत्री नियुक्त।&lt;br /&gt;
* [[2 मार्च]] - चिली के पूर्व सैनिक तानाशाह जनरल आगस्टो पिनोशे ब्रिटेन द्वारा रिहा करने के बाद स्वदेश रवाना।&lt;br /&gt;
* [[3 मार्च]] - अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायाधिकरण द्वारा क्रोएशिया के जनरल तिहोमिर ब्लास्किय को 45 साल क़ैद की सज़ा।&lt;br /&gt;
* [[14 मार्च]] - मोहम्मद मुस्तफ़ा मेरो सीरिया के नये प्रधानमंत्री बने।&lt;br /&gt;
* [[18 मार्च]] - उगांडा में प्रलय दिवस सम्प्रदाय के 230 सदस्यों ने आत्मदाह किया।&lt;br /&gt;
* [[21 मार्च]] - ताइवान की संसद ने चीन के साथ सीधे तौर पर व्यापार और परिवहन पर पिछले 50 सालों से चले आ रहे प्रतिबंध को समाप्त किया, गिरिजा प्रसाद कोइराला नेपाल के नये प्रधानमंत्री नियुक्त।&lt;br /&gt;
* [[27 मार्च]] - रूस में 52.52 प्रतिशत मत प्राप्त कर रूस के कार्यवाहक राष्ट्रपति ब्लादीमीर ब्लादीमिरोविच पुतिन ने राष्ट्रपति चुनाव जीता।&lt;br /&gt;
* [[28 मार्च]] - वेस्टइंडीज के कोर्टनी वाल्स ने 435 विकेट लेकर कपिल देव का रिकार्ड तोड़ा।&lt;br /&gt;
* [[31 मार्च]] - 22 वर्ष बाद जापान के उत्तरी धोकाइडु द्वीप में दाते के निकट उसू ज्वालामुखी फिर सक्रिय।&lt;br /&gt;
* [[6 अप्रैल]] - कराची की एक अदालत ने आतंकवाद व विमान अपहरण के मामले में अपदस्थ प्रधानमंत्री नवाज शरीफ़ को उम्र क़ैद की सज़ा सुनायी।&lt;br /&gt;
* [[7 अप्रैल]] - ब्राजील से विश्व के सबसे छोटे अख़बार 'योर आनर' का प्रकाशन प्रारम्भ।&lt;br /&gt;
* [[8 अप्रैल]] - गुटनिरपेक्ष देशों के विदेश मंत्रियों का 13वां सम्मेलन कोलंबिया के कार्टिजेना शहर में प्रारम्भ।&lt;br /&gt;
* [[10 अप्रैल]] - पाकिस्तान को निर्गुट संगठन से निकालने का भारत का प्रस्ताव गुटनिरपेक्ष देशों के विदेश मंत्रियों के सम्मेलन में मंजूर।&lt;br /&gt;
* [[14 अप्रैल]] - रूस की संसद ने संयुक्त राज्य अमेरिका और रूस के बीच 'स्टार्ट -2' परमाणु शस्त्र कटौती संधि का अनुमोदन किया।&lt;br /&gt;
* [[15 अप्रैल]] - आतंकवाद से निपटने के लिए सहयोग के आहवान के साथ जी-77 शिखर सम्मेलन हवाना में सम्पन्न।&lt;br /&gt;
* [[30 अप्रैल]] - संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा पहली बार पाकिस्तान तथा अफ़ग़ानिस्तान पर आतंकवादियों को पनाह देने का आरोप।&lt;br /&gt;
* [[1 मई]] - अंतर्राष्ट्रीय अन्तर-संसदीय संघ ने पाकिस्तान, आइवरी कोस्ट व सूडान को देश की संसद भंग करने के लिए संघ की सदस्यता से निलंबित किया।&lt;br /&gt;
* [[7 मई]] - ब्लादिमीर पुतिन ने रूस के नये राष्ट्रपति के रूप में कार्यभार सम्भाला।&lt;br /&gt;
* [[8 मई]] - भारतीय मूल के 69 वर्षीय लॉर्ड स्वराजपाल ब्रिटेन के चौथे सबसे बड़े विश्वविद्यालय ब्रिटिश यूनीवर्सिटी के कुलपति नियुक्त।&lt;br /&gt;
* [[9 मई]] - जाफना प्राय:द्वीप के एलीफेंट दर्रे पर कब्ज़े के लिए लिट्टे के साथ हुए संघर्ष में श्रीलंका के 358 सैनिक मारे गये।&lt;br /&gt;
* [[11 मई]] - दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में जन्मी 'आस्था' भारत का एक अरबवाँ बच्चा।&lt;br /&gt;
* [[13 मई]] - मिस इंडिया लारा दत्ता ने साइप्रस में सम्पन्न प्रतियोगिता में मिस यूनीवर्स -2000 का ख़िताब जीता।&lt;br /&gt;
* [[17 मई]] - रूसी संसद के ऊपरी सदन फ़ेडरलिस्ट्स ने परमाणु परीक्षण प्रतिबंध संधि की मंजूरी प्रदान की।&lt;br /&gt;
* [[19 मई]] - फिजी में भारतीय मूल के प्रधानमंत्री महेन्द्र चौधरी की सरकार को सात नाकाबपोश सशस्त्र व्यक्तियों द्वारा तख्तापलट।&lt;br /&gt;
* [[20 मई]] - फिजी में बंदूक़धारियों के नेता जार्ज स्पेट ने देश के अंतरिम प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली।&lt;br /&gt;
* [[24 मई]] - दक्षिण लेबनान से 22 साल का ख़ूनी दौर समाप्त कर इस्रायली सेना वापस लौटी।&lt;br /&gt;
* [[27 मई]] - फिजी में महेन्द्र चौधरी सरकार बर्खास्त, राष्ट्रपति मारा ने प्रशासन सम्भाला।&lt;br /&gt;
* [[28 मई]] - भारत के राष्ट्रपति के.आर. नारायणन चीन के साथ द्विपक्षीय संबंधों को प्रगाढ़ करने के लिए छह दिनों की राजकीय यात्रा पर पेइचिंग पहुँचे।&lt;br /&gt;
* [[2 जून]] - पाकिस्तान की एक जवाबदेही अदालत द्वारा नवाज शरीफ़ के आजीवन कारावास को मृत्युदंड में बदलने संबंधी याचिका मंजूर, मलेशिया की राजधानी कुआलालमपुर में स्थित विश्व की सबसे ऊँची इमारत पेट्रोनास ट्रिवन टावर्स दर्शकों के लिए खुला।&lt;br /&gt;
* [[7 जून]] - एक अमेरिकी अदालत द्वारा माइक्रोसॉफ़्ट कंपनी को दो भागों में बांटने का निर्देश।&lt;br /&gt;
* [[20 जून]] - काहिरा में समूह-15 देशों का दसवाँ शिखर सम्मेलन सम्पन्न।&lt;br /&gt;
* [[26 जून]] - अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट काउंसिल द्वारा बांग्लादेश को टेस्ट का दर्जा दिया गया।&lt;br /&gt;
* [[29 जून]] - सिएरा लियोन में रिवॉल्यूशनरी युनाइटेड फ़्रंट के विद्रोहियों ने बंधक बनाने गये शेष 21 भारतीय शांति सैनिकों को रिहा किया, विश्व की प्रमुख कंपनी आई.बी.एम. द्वारा विश्व का सबसे तेज कम्प्यूटर निर्मित।&lt;br /&gt;
* [[1 जुलाई]] - लार्ड्स के 100वें ऐतिहासिक टेस्ट मैच में इंग्लैंड ने वेस्टइंडीज को हराया।&lt;br /&gt;
* [[3 जुलाई]] - लायसेनिया करासे फिजी के अंतरिम प्रधानमंत्री नियुक्त।&lt;br /&gt;
* [[5 जुलाई]] - दुशानबे (कजाकिस्तान) में शंघाई -5 देशों का सम्मेलन प्रारम्भ।&lt;br /&gt;
* [[9 जुलाई]] - फिजी में जार्ज स्पीट तथा सैन्य नेताओं के मध्य समझौता सम्पन्न।&lt;br /&gt;
* [[13 जुलाई]] - फिजी में महेन्द्र चौधरी समेत 18 बंधक रिहा।&lt;br /&gt;
* [[15 जुलाई]] - सिएरा लियोन में सैन्य कार्यवाही द्वारा सभी भारतीय सैनिक बंधक मुक्त।&lt;br /&gt;
* [[18 जुलाई]] - रातू जोसेफा इलोइलो द्वारा फिजी के राष्ट्रपति के रूप में शपथ ग्रहण।&lt;br /&gt;
* [[23 जुलाई]] - व्यापक घोषणाओं के साथ नागो में हुए समूह -8 का 26वाँ शिखर सम्मेलन सम्पन्न।&lt;br /&gt;
* [[26 जुलाई]] - फिजी में विद्रोही नेता जार्ज स्पीट को सेना ने गिरफ्तार किया।&lt;br /&gt;
* [[29 जुलाई]] - सं.रा. अमेरिका द्वारा पैमनसेट-9 नामक संचार उपग्रह उक्रेन के राकेट की सहायता से अंतरिक्ष में प्रक्षेपित किया गया।&lt;br /&gt;
* [[30 जुलाई]] - संयुक्त राष्ट्र ने इस्रायल द्वारा खाली किये क्षेत्रों में शांति सेना की तैनाती प्रारम्भ की।&lt;br /&gt;
* [[1 अगस्त]] - ईरान में महिलाएं भी इमाम बनीं।&lt;br /&gt;
* [[3 अगस्त]] - ब्रिटेन की 'क्वीन मदर' द्वारा अपनी 100वीं वर्षगांठ मनायी गई।&lt;br /&gt;
* [[7 अगस्त]] - रूसी राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन द्वारा एक क़ानून पर हस्ताक्षर कर अपनी शक्ति का विस्तार।&lt;br /&gt;
* [[9 अगस्त]] - जिम्बाव्वे में व्यापक विरोध के बावजूद भूमि सुधार की प्रक्रिया शुरू।&lt;br /&gt;
* [[10 अगस्त]] - श्रीलंका में सिरीमावो भंडारनायके का प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा, आर. विक्रमानयके श्रीलंका के नये प्रधानमंत्री नियुक्त, जिनेवा में आत्मनिर्णय के अधिकार पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन।&lt;br /&gt;
* [[11 अगस्त]] - फिजी के विद्रोही नेता जार्ज स्पेट के ख़िलाफ़ देशद्रोह का मुकदमा चलाने का निर्णय।&lt;br /&gt;
* [[13 अगस्त]] - रोनाल्ड वेनेशिअन सूरीनाम के नये राष्ट्रपति नियुक्त।&lt;br /&gt;
* [[15 अगस्त]] - उत्तर एवं दक्षिण कोरिया के बिछड़े नागरिक आपस में मिले।&lt;br /&gt;
* [[16 अगस्त]] - वेरेण्टर्स सागर में रूस की परमाणु पनडुब्बी दुर्घटनाग्रस्त।&lt;br /&gt;
* [[17 अगस्त]] - फिजी में भारतीय मूल के लोगों की बर्बादी रोकने के लिए अपदस्थ प्रधानमंत्री महेन्द्र चौधरी ने भारत से मदद मांगी, ब्रिटेन द्वारा मानव भ्रूण कोशिकाओं की क्लोनिंग की अनुमति।&lt;br /&gt;
* [[18 अगस्त]] - इंग्लैंड ने वेस्टइंडीज को हराकर दो दिन में टेस्ट जीतने का इतिहास रचा।&lt;br /&gt;
* [[19 अगस्त]] - हिना जलाली विश्व की पहली मानवाधिकार संरक्षक प्रतिनिधि नियुक्त।&lt;br /&gt;
* [[21 अगस्त]] - दक्षिण-पूर्वी आर्देक प्रान्त में लगी आग से 1600 हेक्टेयर क्षेत्र में खड़े वन नष्ट, रूसी पनडुब्बी के सभी 118 सदस्यों के मारे जाने की पुष्टि।&lt;br /&gt;
* [[24 अगस्त]] - बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति मुहम्मद इरशाद को 5 वर्ष की सज़ा।&lt;br /&gt;
* [[28 अगस्त]] - ताइवान के राष्ट्रपति चुने शुई बियान द्वारा चीन के साथ एकीकरण के विकल्प को स्वीकार करने का संकेत, संयुक्त राष्ट्र में सहस्त्राब्दि विश्व धार्मिक शिखर सम्मेलन शुरू।&lt;br /&gt;
* [[29 अगस्त]] - न्यूयार्क में चार दिवसीय विश्व शांति शिखर सम्मेलन शुरू।&lt;br /&gt;
* [[1 सितम्बर]] - चीन ने तिब्बत होते हुए नेपाल जाने वाले अपने एकमात्र रास्ते को बंद किया।&lt;br /&gt;
* [[2 सितम्बर]] - मैनहट्टन परियोजना में अग्रणी भूमिका निभाने वाले वैज्ञानिक जॉन सिम्पसन का निधन, संयुक्त राष्ट्र अमेरिका द्वारा राष्ट्रीय प्रक्षेपास्त्र प्रणाली की तैनाती की योजना स्थगित।&lt;br /&gt;
* [[4 सितम्बर]] - श्रीलंका के उत्तरी जाफना के बाहरी सीमाओं पर श्रीलंका सेना तथा मुक्ति चीते के बीच हुए संघर्ष में 316 लोग मारे गये।&lt;br /&gt;
* [[5 सितम्बर]] - नील्जिमालम्बा रूस में अंतर्राष्ट्रीय महिला संगठन की अध्यक्ष नियुक्त, वे इस पद को सुशोभित करने वाली पहली एशियाई महिला हैं।&lt;br /&gt;
* [[6 सितम्बर]] - संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफी अन्नान द्वारा संयुक्त राष्ट्र सहस्त्राब्दि शिखर सम्मेलन का शुभारम्भ।&lt;br /&gt;
* [[8 सितम्बर]] - भारतीय प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने संयुक्त राष्ट्र शांति शिखर सम्मेलन के दौरान हिन्दी में भाषण देते हुए पाकिस्तान को लताड़ा।&lt;br /&gt;
* [[12 सितम्बर]] - न्यूयार्क में अंतर्राष्ट्रीय आयुर्वेद सम्मेलन प्रारम, उत्तर-पश्चिम अंतर्राष्ट्रीय समुद्री मार्ग से लिए एक महत्त्वपूर्ण समझौते पर भारत, ईरान एवं रूस के बीच समझौता।&lt;br /&gt;
* [[13 सितम्बर]] - भारत के विश्वनाथन आनन्द ने शेनयांन में पहला फ़िडे शतरंज विश्व कप जीता।&lt;br /&gt;
* [[14 सितम्बर]] - प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने अमेरिकी सीनेट के दोनों सदनों की सुयंक्त बैठक को सम्बोधित किया, ओलम्पिक मशाल [[सिडनी]] पहुँची।&lt;br /&gt;
* [[15 सितम्बर]] - सिडनी में 27वें ओलम्पिक खेलों का शुभारम्भ।&lt;br /&gt;
* [[17 सितम्बर]] - जाफना प्राय:द्वीप का चवाक छेड़ी शहर लिट्टे से मुक्त।&lt;br /&gt;
* [[20 सितम्बर]] - क्लिंटन दम्पत्ति व्हाइट वाटर कांड के आरोपों से मुक्त।&lt;br /&gt;
* [[21 सितम्बर]] - भारत एवं ब्रिटेन के बीच बेहतर संबंध के लिए लिबरल डेमोक्रेटिक फ़्रेंड्स आफ़ इंडिया सोसायटी की स्थापना।&lt;br /&gt;
* [[23 सितम्बर]] - सिडनी ओलम्पिक में संयुक्त राज्य अमेरिका की धाविका मैरियन जोन्स ने 100 मीटर दौड़ का स्वर्ण पदक जीता।&lt;br /&gt;
* [[25 सितम्बर]] - यमन में रिफ्ट वैली बुखार से 211 लोग मरे, सिडनी ओलम्पिक में 400 मीटर दौड़ का स्वर्ण पदक माइकल जॉनसन तथा केथीफ़्रीमेन ने जीता।&lt;br /&gt;
* [[27 सितम्बर]] - वेनेजुएला की राजधानी काराकस में ओपेक देशों का शिखर सम्मेलन शुरू।&lt;br /&gt;
* [[28 सितम्बर]] - सिडनी ओलम्पिक में 200 मीटर की दौड़ के स्वर्ण पदक का ख़िताब मोरियाना जोंस तथा केंटेरिस ने जीता।&lt;br /&gt;
* [[29 सितम्बर]] - चीन की मुन्चोनाक कोयला खान में 100 लोगों की मृत्यु।&lt;br /&gt;
* [[1 अक्टूबर]] - सिडनी में 27वें ओलम्पिक खेल सम्पन्न।&lt;br /&gt;
* [[2 अक्टूबर]] - रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन भारत की चार दिवसीय यात्रा दिल्ली पहुँचे।&lt;br /&gt;
* [[4 अक्टूबर]] - चांग चून शियुंग ताइवान के नये प्रधानमंत्री बने।&lt;br /&gt;
* [[5 अक्टूबर]] - यूगोस्लाविया के राष्ट्रपति मिलोसेविच के ख़िलाफ़ विद्रोह।&lt;br /&gt;
* [[6 अक्टूबर]] - इस्रायली पुलिस द्वारा अलअक्सा मस्जिद में जबरन प्रवेश के बाद हिंसा शुरू, यूगोस्लाविया में रक्तहीन जनक्रान्ति के बीच राष्ट्रपति मिलोसेविच देश छोड़कर भागे, विपक्षी नेता कोस्तुनिका ने स्वयं को राष्ट्रपति घोषित किया।&lt;br /&gt;
* [[7 अक्टूबर]] - जापान में मानव क्लोनिंग दंडनीय अपराध घोषित।&lt;br /&gt;
* [[8 अक्टूबर]] - वोजोस्लाव कोस्तुनिका यूगोस्लाविया के राष्ट्रपति बने, इस्रायल, फिलीस्तीन व संयुक्त राष्ट्र अमेरिका गाजा पट्टी समस्या हल के लिए त्रिपक्षीय संकट प्रबंधन दल के गठन पर सहमत।&lt;br /&gt;
* [[10 अक्टूबर]] - श्रीलंका के पूर्व प्रधानमंत्री सिरीमाओ भंडारनायके का निधन।&lt;br /&gt;
* [[11 अक्टूबर]] - दक्षिण अफ़्रीकी क्रिकेट बोर्ड द्वारा हैन्सी क्रोनिए पर आजीवन प्रतिबंध।&lt;br /&gt;
* [[12 अक्टूबर]] - अंतरिक्ष यान 'डिस्कवरी' फ़्लोरिडा से अंतरिक्ष में प्रक्षेपित।&lt;br /&gt;
* [[13 अक्टूबर]] - दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति किम दाई जुंग को शांति को नोबेल पुरस्कार।&lt;br /&gt;
* [[14 अक्टूबर]] - संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा पाक समेत 22 देशों में अपने दूतावास बंद।&lt;br /&gt;
* [[17 अक्टूबर]] - पश्चिम एशिया शांति वार्ता सम्पन्न, दोनों पक्ष बिल क्लिंटन के तीन सूत्रों पर सहमत।&lt;br /&gt;
* [[18 अक्टूबर]] - श्रीलंका में पहली बार विपक्षी सदस्य अनुरा भंडारनायके को संसद अध्यक्ष बनाने की सहमति।&lt;br /&gt;
* [[2 अक्टूबर]] - काहिरा में अरब शिखर सम्मेलन शुरू, संयुक्त राष्ट्र महासभा में इस्रायल के ख़िलाफ़ निन्दा प्रस्ताव पारित, फिलीस्तीनी क्षेत्र में इस्रायली आबादी अवैध करार।&lt;br /&gt;
* [[23 अक्टूबर]] - अमेरिकन विदेशी मंत्री मेडलिन अल्ब्राइट की उत्तरी कोरिया के राष्ट्रपति किम जोंग ली से ऐतिहासिक मुलाकात।&lt;br /&gt;
* [[24 अक्टूबर]] - दक्षिण कोरिया द्वारा लम्बी दूरी की मिसाइलों का परीक्षण न करने की घोषणा।&lt;br /&gt;
* [[25 अक्टूबर]] - अंतरिक्ष यान डिस्कवरी (यू.एस.ए.) 13 दिन के अभियान के बाद सकुशल वापस।&lt;br /&gt;
* [[29 अक्टूबर]] - आइसलैंड के राष्ट्रपति ओलोफ़र रेगनर ग्रिमसन सात दिवसीय राजकीय यात्रा पर भारत पहुँचे।&lt;br /&gt;
* [[1 नवम्बर]] - यूगोस्लाविया को आठ वर्ष बाद संयुक्त राष्ट्र संघ की सदस्यता हेतु सुरक्षा परिषद द्वारा मंजूरी।&lt;br /&gt;
* [[2 नवम्बर]] - पश्चिम एशिया में हिंसा रोकने के फ़ार्मूले पर सहमति।&lt;br /&gt;
* [[4 नवम्बर]] - संयुक्त राष्ट्र संघ में परमाणु हथियारों पर प्रतिबंध लगाने व विखंडनीय पदार्थों के उत्पादन पर रोक संबंधी जापान का प्रस्ताव भारत के विरोध के बावजूद पारित।&lt;br /&gt;
* [[7 नवम्बर]] - अमेरिकी राष्ट्रपति पद हेतु मतदान सम्पन्न।&lt;br /&gt;
* [[8 नवम्बर]] - बिल क्लिंटन की पत्नी हिलेरी क्लिंटन ने न्यूयार्क सीट पर जीत दर्ज कर इतिहास रचा।&lt;br /&gt;
* [[9 नवंबर]] - उत्तराखण्ड का उत्तर प्रदेश से अलग राज्य के रूप में गठन। &lt;br /&gt;
* [[10 नवम्बर]] - गंगा-मेकांग सम्पर्क परियोजना का कार्य प्रारम्भ।&lt;br /&gt;
* [[11 नवम्बर]] - ऑस्ट्रिया में सुरंग से गुजरती हुई ट्रेन में आग लगने से 180 लोगों की मृत्यु।&lt;br /&gt;
* [[15 नवम्बर]] - फिजी में तख्ता पलट अवैध घोषित।&lt;br /&gt;
* [[16 नवम्बर]] - रूस द्वारा अंतरिक्ष केन्द्र मीर को डुबाने का फैसला।&lt;br /&gt;
* [[19 नवम्बर]] - पाकिस्तान की एक अदालत द्वारा पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो की मां नुसरल भुट्टो को 2 वर्ष के कठिन कारावास की सज़ा।&lt;br /&gt;
* [[22 नवम्बर]] - पाकिस्तान व ईरान पर संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा प्रतिबंध।&lt;br /&gt;
* [[27 नवम्बर]] - फ्लोरिडा में डाले गये मतों की गिनती में जार्ज बुश 537 मतों से जीते, फ्लोरिडा में जीत के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति पद पर जार्ज बुश जूनियर का दावा।&lt;br /&gt;
* [[30 नवम्बर]] - अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव मामले में अल गोर ने पुनर्मतगणना की अपील की।&lt;br /&gt;
* [[1 दिसम्बर]] - संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने तालिबान पर शस्त्र प्रतिबंध का समर्थन किया।&lt;br /&gt;
* [[3 दिसम्बर]] - विसिट फ़ॉक्स मैक्सिको के नये राष्ट्रपति निर्वाचित, आस्ट्रेलिया ने वेस्टइंडीज को टेस्ट मैच में हराकर लगातार 12 टेस्ट मैच जीतने का रिकार्ड बनाया।&lt;br /&gt;
* [[5 दिसम्बर]] - अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति चुनाव में जार्ज बुश के पक्ष में फैसला दिया।&lt;br /&gt;
* [[8 दिसम्बर]] - ब्रिटेन और रूस के बीच रक्षा समझौता सम्पन्न, फ़्रांस के वैज्ञानिकों ने अल्जाईमर का नया उपचार 'गोलनेटमाइन' खोजा।&lt;br /&gt;
* [[9 दिसम्बर]] - दक्षिण कोरिया का दर्जा विकासशील देश से बढ़कर विकसित देश किया गया।&lt;br /&gt;
* [[10 दिसम्बर]] - नवाज शरीफ़ सपरिवार पाकिस्तान से दस साल के लिए निर्वासित।&lt;br /&gt;
* [[14 दिसम्बर]] - जार्ज डब्ल्यू बुश अमेरिका के 43 वें राष्ट्रपति निर्वाचित।&lt;br /&gt;
* [[15 दिसम्बर]] - चेरनोबिल रिएक्टर सदा के लिए बंद।&lt;br /&gt;
* [[17 दिसम्बर]] - भारत और पाकिस्तान के सेनाध्यक्ष मुख्यालयों में हॉटलाइन पुन: शुरू, नेशनलिस्ट सर्व डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता मिरको सरोविक ने बोस्निया में राष्ट्रपति पद की शपथ ली।&lt;br /&gt;
* [[18 दिसम्बर]] - फ़्रांस के जाने-माने अभिनेता करार्ड ब्लेन का निधन।&lt;br /&gt;
* [[19 दिसम्बर]] - आस्ट्रेलिया ने वेस्टइंडीज को हराकर लगातार 13वां टेस्ट मैच जीता।&lt;br /&gt;
* [[23 दिसम्बर]] - न्यूजीलैंड ने आस्ट्रेलिया को हराकर विश्व महिला क्रिकेट ख़िताब जीता।&lt;br /&gt;
* [[24 दिसंबर]] - [[विश्वनाथन आनंद]] विश्व शतरंज चैंपियन बने।&lt;br /&gt;
* [[27 दिसम्बर]] - आस्ट्रेलिया में विवाह पूर्व संबंधों को क़ानूनी मान्यता।&lt;br /&gt;
* [[30 दिसम्बर]] - जनरल उमर-इल बशील दोबारा सूडान के राष्ट्रपति चुने गये, कोलंबिया विश्व का सबसे हिंसक एवं ख़तरनाक देश घोषित।&lt;br /&gt;
==वर्ष ईसवी सन् 2000 में जन्मे व्यक्ति==&lt;br /&gt;
*&lt;br /&gt;
==वर्ष ईसवी सन् 2000 में हुए निधन==&lt;br /&gt;
*[[3 फ़रवरी]] - [[अल्ला रक्खा ख़ाँ]], सुविख्यात [[तबला वादक]], भारत के सर्वश्रेष्ठ एकल और संगीत वादक&lt;br /&gt;
*[[24 मई]] - [[मजरूह सुल्तानपुरी]], हिन्दी फ़िल्मों के प्रसिद्ध गीतकार और शायर&lt;br /&gt;
*[[7 नवम्बर]] - [[सी. सुब्रह्मण्यम]] - [[भारत]] में [[हरित क्रांति]] के जनक&lt;br /&gt;
* [[11 अगस्त]] - [[पी. जयराज]] - [[अभिनेता]]।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==वर्ष ईसवी सन् 2000 के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव==&lt;br /&gt;
*&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
{{वर्ष बाहरी कड़ियाँ}}&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{वर्ष2}}&lt;br /&gt;
[[Category:2000]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Krishna anuj</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=1909&amp;diff=314656</id>
		<title>1909</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=1909&amp;diff=314656"/>
		<updated>2013-02-08T11:52:06Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Krishna anuj: /* वर्ष ईसवी सन् 1909 में जन्मे व्यक्ति */&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{वर्ष}}&lt;br /&gt;
यह पन्ना [[ग्रेगोरी कलैण्डर]] के [[वर्ष]] [[ईसवी सन्]]  1909 का है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिसका समकालीन वर्ष (लगभग) [[विक्रमी संवत]] के अनुसार {{वर्ष विक्रमी}} है और [[राष्ट्रीय शाके]] के अनुसार {{वर्ष शाके}} है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==वर्ष ईसवी सन् 1909 में घटी महत्त्वपूर्ण घटनाएँ==&lt;br /&gt;
*दक्षिण अफ्रीका संघ का गठन। &lt;br /&gt;
* [[28 जनवरी]] - &lt;br /&gt;
**क्यूबा पर से अमेरिका का नियंत्रण समाप्त हो गया।&lt;br /&gt;
**सेना के प्रथम भारतीय सेनाध्यक्ष के.एस. करियप्पा का जन्म।&lt;br /&gt;
* [[15 फ़रवरी]] - एकापुल्को मैक्सिको में फ़्लोरेंस सिनेमागृह में आग से 250 लोगों की मृत्यु। &lt;br /&gt;
* [[17 फ़रवरी]] - अमेरिकी साम्राज्य के ख़िलाफ़ संघर्ष छेड़ने वाले अश्वेत अपाचे योद्धा जेरेनिमो का निधन।  &lt;br /&gt;
* [[17 अगस्त]] -  महान क्रांतिकारी मदन लाल ढींगरा को फांसी पर चढ़ा दिया गया। &lt;br /&gt;
==वर्ष ईसवी सन् 1909 में जन्मे व्यक्ति==&lt;br /&gt;
* [[9 सितंबर]] - [[लीला चिटनिस]], प्रसिद्ध [[हिन्दी]] फ़िल्म [[अभिनेत्री]]&lt;br /&gt;
* [[28 सितम्बर]] - [[पी. जयराज]], [[अभिनेता]]।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==वर्ष ईसवी सन् 1909 में हुए निधन==&lt;br /&gt;
*&lt;br /&gt;
==वर्ष ईसवी सन् 1909 के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव==&lt;br /&gt;
*&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
{{वर्ष बाहरी कड़ियाँ}}&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{वर्ष2}}&lt;br /&gt;
[[Category:1909]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Krishna anuj</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=28_%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A4%82%E0%A4%AC%E0%A4%B0&amp;diff=314655</id>
		<title>28 सितंबर</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=28_%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A4%82%E0%A4%AC%E0%A4%B0&amp;diff=314655"/>
		<updated>2013-02-08T11:50:21Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Krishna anuj: /* 28 सितंबर को जन्मे व्यक्ति */&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{कैलंडर}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[ग्रेगोरी कैलंडर]] के अनुसार 28 सितंबर [[वर्ष]] का 271 वाँ ([[लीप वर्ष]] में यह 272 वाँ) दिन है। साल में अभी और 94 दिन शेष हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==28 सितंबर की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ==&lt;br /&gt;
* 1838 - बहादुरशाह ज़फ़र [[भारत]] में [[मुग़ल|मुग़लों]] का अंतिम सम्राट, अपने पिता की मृत्यु के बाद सिंहासन पर बैठा। &lt;br /&gt;
* [[1994]] - एतोमिया के जल पोत के तुर्क सागर में डूब जाने से 800 लोगों की मृत्यु। &lt;br /&gt;
* [[1997]] - अमेरिकी अंतरिक्ष शटल अटलांटिक रूसी अंतरिक्ष केन्द्र 'मीर' से जुड़ा। &lt;br /&gt;
* [[2000]] - सिडनी ओलम्पिक में 200 मीटर की दौड़ के स्वर्ण पदक का ख़िताब मोरियाना जोंस तथा केंटेरिस ने जीता। &lt;br /&gt;
* [[2001]] - अमेरिका व ब्रिटिश सेना एवं सहयोगियों ने 'ऑपरेशन एंड्योरिंग फ़्रीडम' प्रारम्भ किया। &lt;br /&gt;
* [[2003]] - यान रूस की धरती पर सुरक्षित उतरा। &lt;br /&gt;
* [[2004]] - विश्व बैंक ने भारत को विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था कहा।&lt;br /&gt;
* [[2006]] - जापान के नव निर्वाचित एवं 90वें प्रधानमंत्री के रूप में शिंजो एबे ने शपथ ली। विश्व व्यापार संगठन के पूर्व प्रमुख सुपाचाओ पानिच पाकड़ी थाइलैंड के नये प्रधानमंत्री घोषित। तालिबान ने लादेन के जीवित होने की घोषणा की। फ़्रांस की चिकित्सा टीम ने लगभग शून्य गुरुत्वाकर्षण में एक व्यक्ति का सफल आपरेशन किया। &lt;br /&gt;
* [[2007]] - मेक्सिको के तटीय क्षेत्रों में चक्रवर्ती तूफ़ान लोरेंजो ने भारी तबाही मचाई। नेशनल एयरोनॉटिक्स स्पेस एडमिनिशस्ट्रशन (नासा) ने विशेष यान डॉन का प्रक्षेपण किया। रूस ने ईरान के ख़िलाफ़ सुरक्षा परिषद के माध्यम से नये प्रतिबन्ध लगाने के प्रयास का विरोध किया।&lt;br /&gt;
* [[2009]] - स्टार खिलाड़ी [[सानिया मिर्ज़ा]] पैन पैसिफिक ओपन के पहले राउंड में हार के बाद बाहर हुई।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==28 सितंबर को जन्मे व्यक्ति==&lt;br /&gt;
*1836 - [[शिरडी साईं बाबा]], आध्यात्मिक गुरु&lt;br /&gt;
* [[1929]] - [[लता मंगेशकर]] भारतीय पार्श्वगायिका &lt;br /&gt;
* [[1982]] -  रणबीर कपूर - बालीवुड अभिनेता&lt;br /&gt;
* [[1909]] - [[पी. जयराज]] - अभिनेता।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==28 सितंबर को हुए निधन==&lt;br /&gt;
* [[2012]]- [[बृजेश मिश्र]]- [[भारत]] के पहले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार&lt;br /&gt;
==28 सितंबर के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव==&lt;br /&gt;
* [[विश्व हृदय दिवस]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
{{कैलंडर बाहरी कड़ियाँ}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{कैलंडर2}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Krishna anuj</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=11_%E0%A4%85%E0%A4%97%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A4&amp;diff=314654</id>
		<title>11 अगस्त</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=11_%E0%A4%85%E0%A4%97%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A4&amp;diff=314654"/>
		<updated>2013-02-08T11:48:42Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Krishna anuj: /* 11 अगस्त को हुए निधन */&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{कैलंडर}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[ग्रेगोरी कैलंडर]] के अनुसार 11 अगस्त [[वर्ष]] का 223 वाँ ([[लीप वर्ष]] में यह 224 वाँ) दिन है। साल में अभी और 142 दिन शेष हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==11 अगस्त की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ==&lt;br /&gt;
* [[1999]] - [[यूरोप]] और [[एशिया]] में सदी का अंतिम सूर्यग्रहण। &lt;br /&gt;
* [[2000]] - फिजी के विद्रोही नेता जार्ज स्पेट के ख़िलाफ़ देशद्रोह का मुकदमा चलाने का निर्णय। &lt;br /&gt;
* [[2001]] - उत्तरी आयरलैंड विधानसभा भंग, आयरिश विद्रोहियों को निशस्त्रीकरण के लिए दो सप्ताह का समय। &lt;br /&gt;
* [[2004]] - चीनी कम्प्यूटर उद्योग के पितामह चेन चुनशियान का 70 वर्ष की उम्र में निधन। भारत और पाकिस्तान ने वांछित अपराधियों की सूचियों की अदला-बदली की। भारत और पाकिस्तान के मध्य आतंकवाद और मादक द्रव्यों की तस्करी सहित आठ मुद्दों पर इस्लामाबाद में वार्ता सम्पन्न। संयुक्त राष्ट्र परमाणु ऊर्जा एजेंसी ने ईरान को पाकिस्तान द्वारा परमाणु मदद दिये जाने की पुष्टि की। &lt;br /&gt;
* [[2006]] - पाकिस्तान ने तीसरी अगोस्टा 90बी श्रेणी की पनडुब्बी का जलावतरण किया। &lt;br /&gt;
* [[2007]] - ब्रिटेन की महान संगीतज्ञ एन्थनी विल्सन का निधन। &lt;br /&gt;
* [[2008]] - एकीकृत इस्पात मैन्युफैक्चरर्स गोदावरी पावर एण्ड इस्पात ने [[छत्तीसगढ़]] सरकार के साथ 1570 करोड़ रुपये के एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किये। आर जे नायक पार्श्वनाथ रिटेल में स्वतन्त्र निदेशक नियुक्त हुए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==11 अगस्त को जन्मे व्यक्ति==&lt;br /&gt;
* [[1892]] - आर्ची विलेस, पश्चिम भारतीय क्रिकेटर।&lt;br /&gt;
* [[1954]] - [[यशपाल शर्मा]], भारतीय क्रिकेटर।&lt;br /&gt;
* [[1954]] - [[एम. वी. नरसिम्हा राव]], भारतीय क्रिकेटर।&lt;br /&gt;
* [[1974]] - [[अंजू जैन]], भारतीय क्रिकेटर।&lt;br /&gt;
==11 अगस्त को हुए निधन==&lt;br /&gt;
*[[1908]] - [[खुदीराम बोस]], भारतीय स्वतंत्रता सेनानी।&lt;br /&gt;
*[[2000]] - [[पी. जयराज]], अभिनेता।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==11 अगस्त के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
{{कैलंडर बाहरी कड़ियाँ}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{कैलंडर2}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Krishna anuj</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE:%E0%A4%AA%E0%A5%80._%E0%A4%9C%E0%A4%AF%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C&amp;diff=314626</id>
		<title>वार्ता:पी. जयराज</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE:%E0%A4%AA%E0%A5%80._%E0%A4%9C%E0%A4%AF%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C&amp;diff=314626"/>
		<updated>2013-02-08T07:27:48Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Krishna anuj: '{{वार्ता}}' के साथ नया पन्ना बनाया&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{वार्ता}}&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Krishna anuj</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%AA%E0%A5%80._%E0%A4%9C%E0%A4%AF%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C&amp;diff=314625</id>
		<title>पी. जयराज</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%AA%E0%A5%80._%E0%A4%9C%E0%A4%AF%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C&amp;diff=314625"/>
		<updated>2013-02-08T07:27:15Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Krishna anuj: '{{पुनरीक्षण}} '''पी. जयराज''' पूरा नाम पैदी जयराज (जन्म [[28 स...' के साथ नया पन्ना बनाया&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{पुनरीक्षण}}&lt;br /&gt;
'''पी. जयराज''' पूरा नाम पैदी जयराज (जन्म [[28 सितम्बर]], [[1909]] [[आंध्र प्रदेश]] - मृत्यु [[11 अगस्त]], [[2000]] [[मुम्बई]] हिन्दी फिल्म जगत् के एकमात्र ऐसे [[अभिनेता]] थे जो मूक फिल्मों के दौर से लेकर वर्तमान दौर तक की अनेक फिल्मों में काम कर चुके थे। [[हिन्दी सिनेमा]] के पर्दे पर सर्वाधिक राष्ट्रीय और ऐतिहासिक नायकों को जीवित करने का कीर्तिमान इसी कलाकार के साथ जुड़ा है। [[नौशाद]] जैसे महान संगीतकार को फिल्मों में ब्रेक देने का श्रेय भी जयराज के नाम ही है। उनकी जिंदगी हिन्दी सिने जगत के [[इतिहास]] के साथ साथ चलती हुई, एक सिनेमा की कहानी जैसी है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==जीवन परिचय==&lt;br /&gt;
जयराज का जन्म [[28 सितम्बर]], [[1909]] को निजाम स्टेट के [[करीमनगर]] जिले में हुआ था। वे सरोजिनी नाइडू, पद्माजा नाइडू (जो [[बंगाल]] की गवर्नर थीं) के भतीजे थे। 'पाइदीपाटी जैरुला नाइडू' उनका आन्ध्रीय नाम था। [[हैदराबाद]] में पले बड़े हुए जिससे [[उर्दू भाषा]] पर पकड़ अच्छी थी, वो काम आयी। उनके पिताजी सरकारी दफ्तर में लेखाजोखा देखा करते थे। उनकी प्रारंम्भिक शिक्षा हैदराबाद के रोमन कैथोलिक स्कूल में हुई। फिर तीन साल के लिए उन्हें 'वुड नेशनल कॉलेज' के बॉडिंग हाउस में पढाया गया जहां से उन्होंने [[संस्कृत]] की शिक्षा ली। फिर हैदराबाद के 'निजाम हाईस्कूल' में उर्दू पढी। बी. एस. सी. करने के बाद नेवी में जाना चाह्ते थे किंतु उनके बडे भाई सुन्दरराज इंजीनिय्ररिंग की पढाई के लिए [[लंदन]] भेजना चाह्ते थे। उनकी माताजी बड़े भाई को ज्यादा प्यार देतीं थीं और उनकी इच्छा थी [[इंग्लैंड]] जाकर पढाई करने की जिसका परिवार ने विरोध किया जिससे नाराज होकर, युवा जयराज, किस्मत आजमाने के लिए सन् [[1929]] में [[मुम्बई]] आ गये। उस समय उनकी उम्र 19 [[वर्ष]] थी। समुन्दर के साथ पहले से बहुत लगाव था सो, डॉक यार्ड में काम करने लगे ! वहाँ उनका एक दोस्त था जिसका नाम &amp;quot;रंग्या&amp;quot; था उसने सहायता की और तब, पोस्टर को रंगने का काम मिला जिससे स्टूडियो पहुंचे। उनकी मजबूत कद काठी ने जल्द ही उन्हें निर्माता की आंखों में चढ़ा दिया। महावीर फोटोप्लेज़ में काम मिला। उस समय चित्रपट मूक थे! कई काम, ऐक्टर के बदले खड़े डबल का मिला, पर बाद में मुख्य भूमिकाएं भी मिलने लगीं। भाभा वारेरकर उनके आकर्षक और सौष्ठव शरीर को देखकर उनके व्यक्तित्व से बहुत प्रभावित हुए और उन्होंने अपनी पहली फिल्म में नायक की भूमिका के लिए चुन लिया। दुर्भाग्य से यह फिल्म बीच में ही बंद हो गई क्योंकि वारेरकर का अपने पार्टनर के साथ मनमुटाव हो गया था। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बतौर सहायक निर्देशक==&lt;br /&gt;
भायखाला स्थित स्टुडियो में निर्देशक नागेन्द्र मजूमदार के पास उन्हें 'सहायक निर्देशक की नौकरी मिल गई। उनके साथ निर्देशन के अलावा संपादन, सिने-छांयाकन आदि का कार्य भी सीखा। दिलीप कुमार की पहली फ़िल्म &amp;quot;प्रतिमा&amp;quot; का निर्देशन जयराज ने किया था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बतौर निर्देशक==&lt;br /&gt;
पी. जयराज ने फिल्मों के निर्देशन का काम भी किया जिसमें बतौर निर्देशक पहली फिल्म थी-'प्रतिभा', जिसकी निर्मात्री देविका रानी थीं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==अभिनय की शुरूआत==&lt;br /&gt;
फिल्मों में बतौर [[अभिनेता]] वर्ष [[1929]] में नागेन्द्र मजूमदार ने ही प्रथम फिल्म 'जगमगातीजवानी' में ब्रेक दिया। जिसमें माधव काले नायक थे और जयराज सहायक चूंकि माधव काले को घुड्सवारी और फाइटिंग नहीं आती थी, लिहाजा जयराज ने मास्क पहनकर उनका भी काम किया। जिसके मुख्य कलाकार माधव केले के स्टंट सीन भी उन्होंने ही किए थे।&lt;br /&gt;
उसके बाद 'यंग इन्डिया पिक्चर्स' ने 35 रुपये प्रतिमाह, 3 वक्त का भोजन और 4 अन्य लोगों के साथ गिरगाम [[मुम्बई]] में रहने की सुविधा वाला काम दिया। अब जीवन की गाडी चल निकली। [[1930]] में &amp;quot;रसीली रानी&amp;quot; फ़िल्म बनी। माधुरी उनकी हिरोइन थीं। उसके बाद जयराज 'शारदा फ़िल्म कम्पनी' से जुड़े। 35 रुपये से 75 रुपये मिलने लगे। जेबुनिस्सा हीरोइन थीं जो हिन्दुस्तानी ग्रेटा के नाम से मशहूर थीं और जयराज जी गिल्बर्ट थे हिन्दुस्तान के। (Anthony Hope's की फ़िल्म 'द प्रिज़नर ऑफ़ जेंडा' ही [[हिन्दी]] फ़िल्म &amp;quot;रसीली रानी&amp;quot; के रूप में बनी थी) बतौर नायक उनकी पहली फिल्म 'रसीली रानी' [[1929]] में प्रदर्षित हुई माधुरी उनकी नायिका थीं। 'नवजीवन फिल्म्स' के बैनर तले बनी नागेन्द्र मजूमदार द्वारा निर्देशित वह फिल्म बहुत सफल रही थी। मूक फिल्मों के दौर में वह फिल्म कई सिनेमाघरों में पांच [[सप्ताह]] चली थी जो उन दिनों बहुत बड़ी बात थी। मूक फिल्मों में तो जयराज के नाम की धूम मची हूई थी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बोलती फिल्मों का नया दौर==&lt;br /&gt;
[[1931]] में जब 'आलमारा' से बोलती फिल्मों का दौर शुरू हुआ तो उन्होंने भी बोलती फिल्मों के अनुरूप खुद को ढाला। उनकी पहली बोलती फिल्म थी 'शिकारी'। &lt;br /&gt;
[[1932]] में प्रदर्शित इस फिल्म में जयराज ने एक [[बौद्ध]] भिक्षुक की भुमिका निभाई थी और [[सांप]], [[बाघ]], [[शेर]] जैसे हिंसक जानवरों के साथ लड़ने के द्रश्य दिए। बोलती फ़िल्म के साथ [[संगीत]] शुरू हुआ। कई कलाकार प्ले बैक भी देने लगे पर [[1935]] से दूसरे गाते और कलाकार सिर्फ़ होंठ हिलाते जिससे आसानी हो गयी। अब [[सिनेमा]] संगीतमय हो गया ! हमजोली फ़िल्म में [[नूरजहाँ]] और जयराज जी ने काम किया था। राइफल गर्ल, हमारी बात आदि फ़िल्म मिलीं। जयराज की लोकप्रियता देखकर 'बाम्बे टॉकीज' के मालिक हिमांशु राय ने अपनी कंपनी की फिल्म 'भाभी' के लिए उन्हें बतौर नायक अनुबंधित किया, जिससे फिल्म-जगत् में सनसनी फैल गई। तब 'बाम्बे टॉकीज' बाहर के कलाकारों को अपनी फिल्म में काम नहीं देता था। फांज आस्टिन द्वारा निर्देशित वह फिल्म 'भाभी' बहुत सफल रही। [[मुम्बई]] में उस फिल्म ने रजत जयंती मनाई थी तो कलकत्ता में वह 80 सप्ताह चली थी। फिर आयी 'स्वामी' फ़िल्म, जिसमें सितारा देवी थीं। हातिम ताई, तमन्ना, उस समय के सिनेमा थे। जयराज ने [[मराठी]], गुजराती फ़िल्म भी कीं। अपने फिल्मी कैरियर में बतौर [[अभिनेता]] तो लगभग 300 फिल्मों में अभिनय किया जिनमें से 160 फिल्मों में नायक की भूमिकाएं निभाईं। बतौर नायक उनकी अंतिम फिल्म थी-खूनी कौन मुजरिम कौन', जो [[वर्ष]] [[1965]] में प्रदर्शित हुई थी। उसके बाद उन्होंने उम्र की मांग के अनुसार चरित्र भूमिकाएं निभानी शुरु कर दीं। [[महात्मा गांधी]] की हत्या पर आधारित अमरीकी फिल्म- 'नाईन आवर्स टू रामा', मार्क रोब्सन निर्मित में [[जी. डी. बिड़ला]] की भूमिका निभाने का भी अवसर मिला जो आज तक हिन्दुस्तान मेँ प्रदर्शित नहीं हो पायी है। माया फिल्म में आई. एस. जौहर के साथ काम किया। यह दोनों अमरीकी फिल्में हैं। इन्डो-रशियन फिल्म 'परदेसी' में भी काम किया। दो बार दुर्घट्ना ग्रस्त हो जाने के कारण चलने फिरने में तकलीफ होने लगी तो फिल्मों से दूरी बनानी शुरु कर दी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बतौर निर्माता==&lt;br /&gt;
एक फ़िल्म जयराज जी ने बनाना शुरू किया था जिसमें [[नर्गिस]], [[भारत भूषण]] और ख़ुद वे काम कर रहे थे। फ़िल्म का नाम था सागर। उनका बहुत नाम था [[सिने जगत]] में और कई सारे निर्माता, निर्देशक, कलाकार उन्हें जन्मदिन की बधाई देने सुबह से उनके घर पहुँचते थे। [[1951]] में सागर फ़िल्म बनायी, जो लॉर्ड टेनिसन की &amp;quot;इनोच आर्डेन&amp;quot; पर आधारित कथा थी। वह निष्फल हुई क्योंकि जयराज ने अपना खुद का पैसा लगाया था और उन्होंने कुबूल किया था कि व्यवासायिक समझ उनमें नहीं थी। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==परिवार== &lt;br /&gt;
[[1939]] में अपने घनिष्ठ मित्र [[पृथ्वीराज कपूर]] के कहने पर उन्होंने सावित्री नाम की युवती से [[विवाह]] कर लिया। तब उन्होंने ही सावित्री के कन्यादान की रस्म निभाई थी। &lt;br /&gt;
[[1942]] में उनका वेतन 200 रुपये प्रतिमाह से बढ़कर 600 रुपये प्रतिमाह हो गया। उनकी 5 संतान थीं, दो [[पुत्र]], दिलीप राज व जयतिलक और तीन पुत्रियाँ, जयश्री, दीपा एवं गीता । &lt;br /&gt;
सबसे बड़े दिलीप राज, जो ऐक्टर बने। उनके द्वारा अभिनीत के. ए. अब्बास की फ़िल्म &amp;quot;शहर और सपना&amp;quot; को [[राष्ट्रपति]] पुरस्कार मिला था। जयराज का दूसरा पुत्र [[अमेरिका]] में रहता है। &lt;br /&gt;
दूसरी [[बेटी]] थीं जयश्री, उनका विवाह राजकपूर की पत्नी कृष्णा के छोटे भाई भूपेन्द्रनाथ के साथ हुआ था। तीसरी बेटी थीं दीपा, फ़िर थी गीता सबसे छोटी। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==मुख्य फिल्में==&lt;br /&gt;
* सन् 1938 - रायफल गर्ल&lt;br /&gt;
* सन् 1939 - भाभी&lt;br /&gt;
* सन् 1942 - खिलौना&lt;br /&gt;
* सन् 1942 - मेरा गाँव&lt;br /&gt;
* सन् 1943 - तमन्ना नाम कहानी&lt;br /&gt;
* सन् 1954 - बादबान&lt;br /&gt;
* सन् 1954 - मुन्ना&lt;br /&gt;
* सन् 1956 - अमरसिंह राठौड&lt;br /&gt;
* सन् 1956 - हातिमताई&lt;br /&gt;
* सन् 1957 - परदेसी&lt;br /&gt;
* सन् 1959 - चार दिल चार राहें&lt;br /&gt;
* सन् 1962 - रजिया सुल्तान&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==पुरस्कार ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
50 के दशक में पी. जयराज को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से नवाजा गया। [[1982]] में उन्हें [[दादा साहेब फाल्के]] पुरस्कार भी मिला।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==निधन==&lt;br /&gt;
जयराज का निधन लीलावती अस्पताल, [[मुम्बई]] में [[11 अगस्त]] सन् [[2000]] को हुआ और हिन्दी सिने संसार का मूक फिल्मों से आज तक का मानो एक सेतु ही टूट कर अदृश्य हो गया। &lt;br /&gt;
11 मूक चित्रपट और 200 बोलती फिल्मों से हमारा मनोरंजन करने वाले एक समर्थ कलाकार ने इस दुनिया से विदा ले ली।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=आधार1|प्रारम्भिक= |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{फ़िल्म निर्माता और निर्देशक}}{{अभिनेता}}{{दादा साहब फाल्के पुरस्कार}}&lt;br /&gt;
[[Category:नया पन्ना फ़रवरी-2013]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
__NOTOC__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Krishna anuj</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%B6:%E0%A4%85%E0%A4%AD%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B8_%E0%A4%AA%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A8%E0%A4%BE&amp;diff=314624</id>
		<title>भारतकोश:अभ्यास पन्ना</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%B6:%E0%A4%85%E0%A4%AD%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B8_%E0%A4%AA%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A8%E0%A4%BE&amp;diff=314624"/>
		<updated>2013-02-08T07:21:05Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Krishna anuj: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{अभ्यास पन्ना}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;!--सम्पादन अभ्यास इस से नीचे करे --&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''पी. जयराज''' पूरा नाम पैदी जयराज (जन्म [[28 सितम्बर]], [[1909]] [[आंध्र प्रदेश]] - मृत्यु [[11 अगस्त]], [[2000]] [[मुम्बई]] हिन्दी फिल्म जगत् के एकमात्र ऐसे [[अभिनेता]] थे जो मूक फिल्मों के दौर से लेकर वर्तमान दौर तक की अनेक फिल्मों में काम कर चुके थे। [[हिन्दी सिनेमा]] के पर्दे पर सर्वाधिक राष्ट्रीय और ऐतिहासिक नायकों को जीवित करने का कीर्तिमान इसी कलाकार के साथ जुड़ा है। [[नौशाद]] जैसे महान संगीतकार को फिल्मों में ब्रेक देने का श्रेय भी जयराज के नाम ही है। उनकी जिंदगी हिन्दी सिने जगत के [[इतिहास]] के साथ साथ चलती हुई, एक सिनेमा की कहानी जैसी है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==जीवन परिचय==&lt;br /&gt;
जयराज का जन्म [[28 सितम्बर]], [[1909]] को निजाम स्टेट के [[करीमनगर]] जिले में हुआ था। वे सरोजिनी नाइडू, पद्माजा नाइडू (जो [[बंगाल]] की गवर्नर थीं) के भतीजे थे। 'पाइदीपाटी जैरुला नाइडू' उनका आन्ध्रीय नाम था। [[हैदराबाद]] में पले बड़े हुए जिससे [[उर्दू भाषा]] पर पकड़ अच्छी थी, वो काम आयी। उनके पिताजी सरकारी दफ्तर में लेखाजोखा देखा करते थे। उनकी प्रारंम्भिक शिक्षा हैदराबाद के रोमन कैथोलिक स्कूल में हुई। फिर तीन साल के लिए उन्हें 'वुड नेशनल कॉलेज' के बॉडिंग हाउस में पढाया गया जहां से उन्होंने [[संस्कृत]] की शिक्षा ली। फिर हैदराबाद के 'निजाम हाईस्कूल' में उर्दू पढी। बी. एस. सी. करने के बाद नेवी में जाना चाह्ते थे किंतु उनके बडे भाई सुन्दरराज इंजीनिय्ररिंग की पढाई के लिए [[लंदन]] भेजना चाह्ते थे। उनकी माताजी बड़े भाई को ज्यादा प्यार देतीं थीं और उनकी इच्छा थी [[इंग्लैंड]] जाकर पढाई करने की जिसका परिवार ने विरोध किया जिससे नाराज होकर, युवा जयराज, किस्मत आजमाने के लिए सन् [[1929]] में [[मुम्बई]] आ गये। उस समय उनकी उम्र 19 [[वर्ष]] थी। समुन्दर के साथ पहले से बहुत लगाव था सो, डॉक यार्ड में काम करने लगे ! वहाँ उनका एक दोस्त था जिसका नाम &amp;quot;रंग्या&amp;quot; था उसने सहायता की और तब, पोस्टर को रंगने का काम मिला जिससे स्टूडियो पहुंचे। उनकी मजबूत कद काठी ने जल्द ही उन्हें निर्माता की आंखों में चढ़ा दिया। महावीर फोटोप्लेज़ में काम मिला। उस समय चित्रपट मूक थे! कई काम, ऐक्टर के बदले खड़े डबल का मिला, पर बाद में मुख्य भूमिकाएं भी मिलने लगीं। भाभा वारेरकर उनके आकर्षक और सौष्ठव शरीर को देखकर उनके व्यक्तित्व से बहुत प्रभावित हुए और उन्होंने अपनी पहली फिल्म में नायक की भूमिका के लिए चुन लिया। दुर्भाग्य से यह फिल्म बीच में ही बंद हो गई क्योंकि वारेरकर का अपने पार्टनर के साथ मनमुटाव हो गया था। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बतौर सहायक निर्देशक==&lt;br /&gt;
भायखाला स्थित स्टुडियो में निर्देशक नागेन्द्र मजूमदार के पास उन्हें 'सहायक निर्देशक की नौकरी मिल गई। उनके साथ निर्देशन के अलावा संपादन, सिने-छांयाकन आदि का कार्य भी सीखा। दिलीप कुमार की पहली फ़िल्म &amp;quot;प्रतिमा&amp;quot; का निर्देशन जयराज ने किया था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बतौर निर्देशक==&lt;br /&gt;
पी. जयराज ने फिल्मों के निर्देशन का काम भी किया जिसमें बतौर निर्देशक पहली फिल्म थी-'प्रतिभा', जिसकी निर्मात्री देविका रानी थीं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==अभिनय की शुरूआत==&lt;br /&gt;
फिल्मों में बतौर [[अभिनेता]] वर्ष [[1929]] में नागेन्द्र मजूमदार ने ही प्रथम फिल्म 'जगमगातीजवानी' में ब्रेक दिया। जिसमें माधव काले नायक थे और जयराज सहायक चूंकि माधव काले को घुड्सवारी और फाइटिंग नहीं आती थी, लिहाजा जयराज ने मास्क पहनकर उनका भी काम किया। जिसके मुख्य कलाकार माधव केले के स्टंट सीन भी उन्होंने ही किए थे।&lt;br /&gt;
उसके बाद 'यंग इन्डिया पिक्चर्स' ने 35 रुपये प्रतिमाह, 3 वक्त का भोजन और 4 अन्य लोगों के साथ गिरगाम [[मुम्बई]] में रहने की सुविधा वाला काम दिया। अब जीवन की गाडी चल निकली। [[1930]] में &amp;quot;रसीली रानी&amp;quot; फ़िल्म बनी। माधुरी उनकी हिरोइन थीं। उसके बाद जयराज 'शारदा फ़िल्म कम्पनी' से जुड़े। 35 रुपये से 75 रुपये मिलने लगे। जेबुनिस्सा हीरोइन थीं जो हिन्दुस्तानी ग्रेटा के नाम से मशहूर थीं और जयराज जी गिल्बर्ट थे हिन्दुस्तान के। (Anthony Hope's की फ़िल्म 'द प्रिज़नर ऑफ़ जेंडा' ही [[हिन्दी]] फ़िल्म &amp;quot;रसीली रानी&amp;quot; के रूप में बनी थी) बतौर नायक उनकी पहली फिल्म 'रसीली रानी' [[1929]] में प्रदर्षित हुई माधुरी उनकी नायिका थीं। 'नवजीवन फिल्म्स' के बैनर तले बनी नागेन्द्र मजूमदार द्वारा निर्देशित वह फिल्म बहुत सफल रही थी। मूक फिल्मों के दौर में वह फिल्म कई सिनेमाघरों में पांच [[सप्ताह]] चली थी जो उन दिनों बहुत बड़ी बात थी। मूक फिल्मों में तो जयराज के नाम की धूम मची हूई थी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बोलती फिल्मों का नया दौर==&lt;br /&gt;
[[1931]] में जब 'आलमारा' से बोलती फिल्मों का दौर शुरू हुआ तो उन्होंने भी बोलती फिल्मों के अनुरूप खुद को ढाला। उनकी पहली बोलती फिल्म थी 'शिकारी'। &lt;br /&gt;
[[1932]] में प्रदर्शित इस फिल्म में जयराज ने एक [[बौद्ध]] भिक्षुक की भुमिका निभाई थी और [[सांप]], [[बाघ]], [[शेर]] जैसे हिंसक जानवरों के साथ लड़ने के द्रश्य दिए। बोलती फ़िल्म के साथ [[संगीत]] शुरू हुआ। कई कलाकार प्ले बैक भी देने लगे पर [[1935]] से दूसरे गाते और कलाकार सिर्फ़ होंठ हिलाते जिससे आसानी हो गयी। अब [[सिनेमा]] संगीतमय हो गया ! हमजोली फ़िल्म में [[नूरजहाँ]] और जयराज जी ने काम किया था। राइफल गर्ल, हमारी बात आदि फ़िल्म मिलीं। जयराज की लोकप्रियता देखकर 'बाम्बे टॉकीज' के मालिक हिमांशु राय ने अपनी कंपनी की फिल्म 'भाभी' के लिए उन्हें बतौर नायक अनुबंधित किया, जिससे फिल्म-जगत् में सनसनी फैल गई। तब 'बाम्बे टॉकीज' बाहर के कलाकारों को अपनी फिल्म में काम नहीं देता था। फांज आस्टिन द्वारा निर्देशित वह फिल्म 'भाभी' बहुत सफल रही। [[मुम्बई]] में उस फिल्म ने रजत जयंती मनाई थी तो कलकत्ता में वह 80 सप्ताह चली थी। फिर आयी 'स्वामी' फ़िल्म, जिसमें सितारा देवी थीं। हातिम ताई, तमन्ना, उस समय के सिनेमा थे। जयराज ने [[मराठी]], गुजराती फ़िल्म भी कीं। अपने फिल्मी कैरियर में बतौर [[अभिनेता]] तो लगभग 300 फिल्मों में अभिनय किया जिनमें से 160 फिल्मों में नायक की भूमिकाएं निभाईं। बतौर नायक उनकी अंतिम फिल्म थी-खूनी कौन मुजरिम कौन', जो [[वर्ष]] [[1965]] में प्रदर्शित हुई थी। उसके बाद उन्होंने उम्र की मांग के अनुसार चरित्र भूमिकाएं निभानी शुरु कर दीं। [[महात्मा गांधी]] की हत्या पर आधारित अमरीकी फिल्म- 'नाईन आवर्स टू रामा', मार्क रोब्सन निर्मित में [[जी. डी. बिड़ला]] की भूमिका निभाने का भी अवसर मिला जो आज तक हिन्दुस्तान मेँ प्रदर्शित नहीं हो पायी है। माया फिल्म में आई. एस. जौहर के साथ काम किया। यह दोनों अमरीकी फिल्में हैं। इन्डो-रशियन फिल्म 'परदेसी' में भी काम किया। दो बार दुर्घट्ना ग्रस्त हो जाने के कारण चलने फिरने में तकलीफ होने लगी तो फिल्मों से दूरी बनानी शुरु कर दी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बतौर निर्माता==&lt;br /&gt;
एक फ़िल्म जयराज जी ने बनाना शुरू किया था जिसमें [[नर्गिस]], [[भारत भूषण]] और ख़ुद वे काम कर रहे थे। फ़िल्म का नाम था सागर। उनका बहुत नाम था [[सिने जगत]] में और कई सारे निर्माता, निर्देशक, कलाकार उन्हें जन्मदिन की बधाई देने सुबह से उनके घर पहुँचते थे। [[1951]] में सागर फ़िल्म बनायी, जो लॉर्ड टेनिसन की &amp;quot;इनोच आर्डेन&amp;quot; पर आधारित कथा थी। वह निष्फल हुई क्योंकि जयराज ने अपना खुद का पैसा लगाया था और उन्होंने कुबूल किया था कि व्यवासायिक समझ उनमें नहीं थी। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==परिवार== &lt;br /&gt;
[[1939]] में अपने घनिष्ठ मित्र [[पृथ्वीराज कपूर]] के कहने पर उन्होंने सावित्री नाम की युवती से [[विवाह]] कर लिया। तब उन्होंने ही सावित्री के कन्यादान की रस्म निभाई थी। &lt;br /&gt;
[[1942]] में उनका वेतन 200 रुपये प्रतिमाह से बढ़कर 600 रुपये प्रतिमाह हो गया। उनकी 5 संतान थीं, दो [[पुत्र]], दिलीप राज व जयतिलक और तीन पुत्रियाँ, जयश्री, दीपा एवं गीता । &lt;br /&gt;
सबसे बड़े दिलीप राज, जो ऐक्टर बने। उनके द्वारा अभिनीत के. ए. अब्बास की फ़िल्म &amp;quot;शहर और सपना&amp;quot; को [[राष्ट्रपति]] पुरस्कार मिला था। जयराज का दूसरा पुत्र [[अमेरिका]] में रहता है। &lt;br /&gt;
दूसरी [[बेटी]] थीं जयश्री, उनका विवाह राजकपूर की पत्नी कृष्णा के छोटे भाई भूपेन्द्रनाथ के साथ हुआ था। तीसरी बेटी थीं दीपा, फ़िर थी गीता सबसे छोटी। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==मुख्य फिल्में==&lt;br /&gt;
* सन् 1938 - रायफल गर्ल&lt;br /&gt;
* सन् 1939 - भाभी&lt;br /&gt;
* सन् 1942 - खिलौना&lt;br /&gt;
* सन् 1942 - मेरा गाँव&lt;br /&gt;
* सन् 1943 - तमन्ना नाम कहानी&lt;br /&gt;
* सन् 1954 - बादबान&lt;br /&gt;
* सन् 1954 - मुन्ना&lt;br /&gt;
* सन् 1956 - अमरसिंह राठौड&lt;br /&gt;
* सन् 1956 - हातिमताई&lt;br /&gt;
* सन् 1957 - परदेसी&lt;br /&gt;
* सन् 1959 - चार दिल चार राहें&lt;br /&gt;
* सन् 1962 - रजिया सुल्तान&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==पुरुस्कार==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
50 के दशक में पी. जयराज को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से नवाजा गया। [[1982]] में उन्हें [[दादा साहेब फाल्के]] पुरस्कार भी मिला।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==निधन==&lt;br /&gt;
जयराज का निधन लीलावती अस्पताल, [[मुम्बई]] में [[11 अगस्त]] सन् [[2000]] को हुआ और हिन्दी सिने संसार का मूक फिल्मों से आज तक का मानो एक सेतु ही टूट कर अदृश्य हो गया। &lt;br /&gt;
11 मूक चित्रपट और 200 बोलती फिल्मों से हमारा मनोरंजन करने वाले एक समर्थ कलाकार ने इस दुनिया से विदा ले ली।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{फ़िल्म निर्माता और निर्देशक}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{अभिनेता}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{दादा साहब फाल्के पुरस्कार}}&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Krishna anuj</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%B6:%E0%A4%85%E0%A4%AD%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B8_%E0%A4%AA%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A8%E0%A4%BE&amp;diff=314602</id>
		<title>भारतकोश:अभ्यास पन्ना</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%B6:%E0%A4%85%E0%A4%AD%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B8_%E0%A4%AA%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A8%E0%A4%BE&amp;diff=314602"/>
		<updated>2013-02-07T14:33:19Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Krishna anuj: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{अभ्यास पन्ना}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;!--सम्पादन अभ्यास इस से नीचे करे --&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''पी. जयराज''' पूरा नाम पैदी जयराज (जन्म 28 सितम्बर, [[1909]] [[आंध्र प्रदेश]] - मृत्यु 11 अगस्त, [[2000]] [[मुम्बई]] हिन्दी फिल्म जगत् के एकमात्र ऐसे [[अभिनेता]] थे जो मूक फिल्मों के दौर से लेकर वर्तमान दौर तक की अनेक फिल्मों में काम कर चुके थे। [[हिन्दी सिनेमा]] के पर्दे पर सर्वाधिक राष्ट्रीय और ऐतिहासिक नायकों को जीवित करने का कीर्तिमान इसी कलाकार के साथ जुड़ा है। [[नौशाद]] जैसे महान संगीतकार को फिल्मों में ब्रेक देने का श्रेय भी जयराज के नाम ही है। उनकी जिंदगी [[हिन्दी]] [[सिने जगत]] के [[इतिहास]] के साथ साथ चलती हुई, एक [[सिनेमा]] की कहानी जैसी है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==जीवन परिचय==&lt;br /&gt;
जयराज का जन्म 28 सितम्बर, [[1909]] को निजाम स्टेट के [[करीमनगर]] जिले में हुआ था। वे सरोजिनी नाइडू, पद्माजा नाइडू (जो [[बंगाल]] की गवर्नर थीं) के भतीजे थे। 'पाइदीपाटी जैरुला नाइडू' उनका आन्ध्रीय नाम था। [[हैदराबाद]] में पले बड़े हुए जिससे [[उर्दू]] [[भाषा]] पर पकड़ अच्छी थी, वो काम आयी। उनके पिताजी सरकारी दफ्तर में लेखाजोखा देखा करते थे। उनकी प्रारंम्भिक शिक्षा [[हैदराबाद]] के रोमन कैथोलिक स्कूल में हुई। फिर तीन साल के लिए उन्हें 'वुड नेशनल कॉलेज' के बॉडिंग हाउस में पढाया गया जहां से उन्होंने [[संस्कृत]] की शिक्षा ली। फिर [[हैदराबाद]] के 'निजाम हाईस्कूल' में [[उर्दू]] पढी। बी. एस. सी. करने के बाद नेवी में जाना चाह्ते थे किंतु उनके बडे भाई सुन्दरराज इंजीनिय्ररिंग की पढाई के लिए [[लंदन]] भेजना चाह्ते थे। उनकी माताजी बड़े भाई को ज्यादा प्यार देतीं थीं और उनकी इच्छा थी [[इंग्लैंड]] जाकर पढाई करने की जिसका परिवार ने विरोध किया जिससे नाराज होकर, युवा जयराज, किस्मत आजमाने के लिए सन् [[1929]] में [[मुम्बई]] आ गये। उस समय उनकी उम्र 19 [[वर्ष]] थी। समुन्दर के साथ पहले से बहुत लगाव था सो, डॉक यार्ड में काम करने लगे ! वहाँ उनका एक दोस्त था जिसका नाम &amp;quot;रंग्या&amp;quot; था उसने सहायता की और तब, पोस्टर को रंगने का काम मिला जिससे स्टूडियो पहुंचे। उनकी मजबूत कद काठी ने जल्द ही उन्हें निर्माता की आंखों में चढ़ा दिया। महावीर फोटोप्लेज़ में काम मिला। उस समय चित्रपट मूक थे! कई काम, ऐक्टर के बदले खड़े डबल का मिला, पर बाद में मुख्य भूमिकाएं भी मिलने लगीं। भाभा वारेरकर उनके आकर्षक और सौष्ठव शरीर को देखकर उनके व्यक्तित्व से बहुत प्रभावित हुए और उन्होंने अपनी पहली फिल्म में नायक की भूमिका के लिए चुन लिया। दुर्भाग्य से यह फिल्म बीच में ही बंद हो गई क्योंकि वारेरकर का अपने पार्टनर के साथ मनमुटाव हो गया था। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बतौर सहायक निर्देशक==&lt;br /&gt;
भायखाला स्थित स्टुडियो में निर्देशक नागेन्द्र मजूमदार के पास उन्हें 'सहायक निर्देशक की नौकरी मिल गई। उनके साथ निर्देशन के अलावा संपादन, सिने-छांयाकन आदि का कार्य भी सीखा। दिलीप [[कुमार]] की पहली फ़िल्म &amp;quot;प्रतिमा&amp;quot; का निर्देशन जयराज ने किया था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बतौर निर्देशक==&lt;br /&gt;
पी. जयराज ने फिल्मों के निर्देशन का काम भी किया जिसमें बतौर निर्देशक पहली फिल्म थी-'प्रतिभा', जिसकी निर्मात्री देविका रानी थीं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==अभिनय की शुरूआत==&lt;br /&gt;
फिल्मों में बतौर [[अभिनेता]] वर्ष [[1929]] में नागेन्द्र मजूमदार ने ही प्रथम फिल्म 'जगमगातीजवानी' में ब्रेक दिया। जिसमें माधव काले नायक थे और जयराज सहायक चूंकि माधव काले को घुड्सवारी और फाइटिंग नहीं आती थी, लिहाजा जयराज ने मास्क पहनकर उनका भी काम किया। जिसके मुख्य कलाकार माधव केले के स्टंट सीन भी उन्होंने ही किए थे।&lt;br /&gt;
उसके बाद 'यंग इन्डिया पिक्चर्स' ने 35 रुपये प्रतिमाह, 3 वक्त का भोजन और 4 अन्य लोगों के साथ गिरगाम [[मुम्बई]] में रहने की सुविधा वाला काम दिया। अब जीवन की गाडी चल निकली। [[1930]] में &amp;quot;रसीली रानी&amp;quot; फ़िल्म बनी। माधुरी उनकी हिरोइन थीं। उसके बाद जयराज 'शारदा फ़िल्म कम्पनी' से जुड़े। 35 रुपये से 75 रुपये मिलने लगे। जेबुनिस्सा हीरोइन थीं जो हिन्दुस्तानी ग्रेटा के नाम से मशहूर थीं और जयराज जी गिल्बर्ट थे हिन्दुस्तान के। (Anthony Hope's की फ़िल्म 'द प्रिज़नर ऑफ़ जेंडा' ही [[हिन्दी]] फ़िल्म &amp;quot;रसीली रानी&amp;quot; के रूप में बनी थी) बतौर नायक उनकी पहली फिल्म 'रसीली रानी' [[1929]] में प्रदर्षित हुई माधुरी उनकी नायिका थीं। 'नवजीवन फिल्म्स' के बैनर तले बनी नागेन्द्र मजूमदार द्वारा निर्देशित वह फिल्म बहुत सफल रही थी। मूक फिल्मों के दौर में वह फिल्म कई सिनेमाघरों में पांच [[सप्ताह]] चली थी जो उन दिनों बहुत बड़ी बात थी। मूक फिल्मों में तो जयराज के नाम की धूम मची हूई थी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बोलती फिल्मों का नया दौर==&lt;br /&gt;
[[1931]] में जब 'आलमारा' से बोलती फिल्मों का दौर शुरू हुआ तो उन्होंने भी बोलती फिल्मों के अनुरूप खुद को ढाला। उनकी पहली बोलती फिल्म थी 'शिकारी'। &lt;br /&gt;
[[1932]] में प्रदर्शित इस फिल्म में जयराज ने एक [[बौद्ध]] भिक्षुक की भुमिका निभाई थी और [[सांप]], [[बाघ]], [[शेर]] जैसे हिंसक जानवरों के साथ लड़ने के द्रश्य दिए। बोलती फ़िल्म के साथ [[संगीत]] शुरू हुआ। कई कलाकार प्ले बैक भी देने लगे पर [[1935]] से दूसरे गाते और कलाकार सिर्फ़ होंठ हिलाते जिससे आसानी हो गयी। अब [[सिनेमा]] संगीतमय हो गया ! हमजोली फ़िल्म में [[नूरजहाँ]] और जयराज जी ने काम किया था। राइफल गर्ल, हमारी बात आदि फ़िल्म मिलीं। जयराज की लोकप्रियता देखकर 'बाम्बे टॉकीज' के मालिक हिमांशु राय ने अपनी कंपनी की फिल्म 'भाभी' के लिए उन्हें बतौर नायक अनुबंधित किया, जिससे फिल्म-जगत् में सनसनी फैल गई। तब 'बाम्बे टॉकीज' बाहर के कलाकारों को अपनी फिल्म में काम नहीं देता था। फांज आस्टिन द्वारा निर्देशित वह फिल्म 'भाभी' बहुत सफल रही। [[मुम्बई]] में उस फिल्म ने रजत जयंती मनाई थी तो कलकत्ता में वह 80 सप्ताह चली थी। फिर आयी 'स्वामी' फ़िल्म, जिसमें सितारा देवी थीं। हातिम ताई, तमन्ना, उस समय के [[सिनेमा]] थे। जयराज ने [[मराठी]], गुजराती फ़िल्म भी कीं। अपने फिल्मी कैरियर में बतौर [[अभिनेता]] तो लगभग 300 फिल्मों में अभिनय किया जिनमें से 160 फिल्मों में नायक की भूमिकाएं निभाईं। बतौर नायक उनकी अंतिम फिल्म थी-खूनी कौन मुजरिम कौन', जो [[वर्ष]] [[1965]] में प्रदर्शित हुई थी। उसके बाद उन्होंने उम्र की मांग के अनुसार चरित्र भूमिकाएं निभानी शुरु कर दीं। [[महात्मा गांधी]] की हत्या पर आधारित अमरीकी फिल्म- 'नाईन आवर्स टू रामा', मार्क रोब्सन निर्मित में [[जी. डी. बिड़ला]] की भूमिका निभाने का भी अवसर मिला जो आज तक हिन्दुस्तान मेँ प्रदर्शित नहीं हो पायी है। माया फिल्म में आई. एस. जौहर के साथ काम किया। यह दोनों अमरीकी फिल्में हैं। इन्डो-रशियन फिल्म 'परदेसी' में भी काम किया। दो बार दुर्घट्ना ग्रस्त हो जाने के कारण चलने फिरने में तकलीफ होने लगी तो फिल्मों से दूरी बनानी शुरु कर दी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बतौर निर्माता==&lt;br /&gt;
एक फ़िल्म जयराज जी ने बनाना शुरू किया था जिसमें [[नर्गिस]], [[भारत भूषण]] और ख़ुद वे काम कर रहे थे। फ़िल्म का नाम था [[सागर]]। उनका बहुत नाम था [[सिने जगत]] में और कई सारे निर्माता, निर्देशक, कलाकार उन्हें जन्मदिन की बधाई देने सुबह से उनके घर पहुँचते थे। [[1951]] में सागर फ़िल्म बनायी, जो लॉर्ड टेनिसन की &amp;quot;इनोच आर्डेन&amp;quot; पर आधारित कथा थी। वह निष्फल हुई क्योंकि जयराज ने अपना खुद का पैसा लगाया था और उन्होंने कुबूल किया था कि व्यवासायिक समझ उनमें नहीं थी। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==परिवार== &lt;br /&gt;
[[1939]] में अपने घनिष्ठ मित्र [[पृथ्वीराज कपूर]] के कहने पर उन्होंने [[सावित्री]] नाम की युवती से [[विवाह]] कर लिया। तब उन्होंने ही [[सावित्री]] के कन्यादान की रस्म निभाई थी। &lt;br /&gt;
[[1942]] में उनका वेतन 200 रुपये प्रतिमाह से बढ़कर 600 रुपये प्रतिमाह हो गया। उनकी 5 संतान थीं, दो [[पुत्र]], दिलीप राज व जयतिलक और तीन पुत्रियाँ, जयश्री, दीपा एवं गीता । &lt;br /&gt;
सबसे बड़े दिलीप राज, जो ऐक्टर बने। उनके द्वारा अभिनीत के. ए. अब्बास की फ़िल्म &amp;quot;शहर और सपना&amp;quot; को [[राष्ट्रपति]] पुरस्कार मिला था। जयराज का दूसरा [[पुत्र]] [[अमेरिका]] में रहता है। &lt;br /&gt;
दूसरी [[बेटी]] थीं जयश्री, उनका विवाह राजकपूर की पत्नी कृष्णा के छोटे भाई भूपेन्द्रनाथ के साथ हुआ था। तीसरी [[बेटी]] थीं दीपा, फ़िर थी गीता सबसे छोटी। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==मुख्य फिल्में==&lt;br /&gt;
* सन् 1938 - रायफल गर्ल&lt;br /&gt;
* सन् 1939 - भाभी&lt;br /&gt;
* सन् 1942 - खिलौना&lt;br /&gt;
* सन् 1942 - मेरा गाँव&lt;br /&gt;
* सन् 1943 - तमन्ना नाम कहानी&lt;br /&gt;
* सन् 1954 - बादबान&lt;br /&gt;
* सन् 1954 - मुन्ना&lt;br /&gt;
* सन् 1956 - अमरसिंह राठौड&lt;br /&gt;
* सन् 1956 - हातिमताई&lt;br /&gt;
* सन् 1957 - परदेसी&lt;br /&gt;
* सन् 1959 - चार दिल चार राहें&lt;br /&gt;
* सन् 1962 - रजिया सुल्तान&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==पुरुस्कार==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
50 के दशक में पी. जयराज को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से नवाजा गया। [[1982]] में उन्हें [[दादा साहेब फाल्के]] पुरस्कार भी मिला।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==निधन==&lt;br /&gt;
जयराज का निधन लीलावती अस्पताल, [[मुम्बई]] में 11 [[अगस्त]] सन [[2000]] को हुआ और हिन्दी सिने संसार का मूक फिल्मों से आज तक का मानो एक सेतु ही टूट कर अदृश्य हो गया। &lt;br /&gt;
11 मूक चित्रपट और 200 बोलती फिल्मों से हमारा मनोरंजन करने वाले एक समर्थ कलाकार ने इस दुनिया से विदा ले ली।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{फ़िल्म निर्माता और निर्देशक}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{अभिनेता}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{दादा साहब फाल्के पुरस्कार}}&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Krishna anuj</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%B6:%E0%A4%85%E0%A4%AD%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B8_%E0%A4%AA%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A8%E0%A4%BE&amp;diff=314583</id>
		<title>भारतकोश:अभ्यास पन्ना</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%B6:%E0%A4%85%E0%A4%AD%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B8_%E0%A4%AA%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A8%E0%A4%BE&amp;diff=314583"/>
		<updated>2013-02-07T13:08:26Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Krishna anuj: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{अभ्यास पन्ना}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;!--सम्पादन अभ्यास इस से नीचे करे --&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''पी. जयराज''' पूरा नाम पैदी जयराज (जन्म 28 सितम्बर, [[1909]] [[आंध्र प्रदेश]] - मृत्यु 11 अगस्त, [[2000]] [[बम्बई]], [[[मुम्बई]]] ) हिन्दी फिल्म जगत् के एकमात्र जीवित ऐसे वृद्ध अभिनेता थे जो मूक फिल्मों के दौर से लेकर वर्तमान दौर की अनेक फिल्मों में काम कर चुके थे। [[हिन्दी सिनेमा]] के पर्दे पर सर्वाधिक राष्ट्रीय और ऐतिहासिक नायकों को जीवित करने का कीर्तिमान इसी कलाकार के साथ जुड़ा है। [[नौशाद]] जैसे महान संगीतकार को फिल्मों में ब्रेक देने का श्रेय भी जयराज के नाम है। उनकी जिंदगी हिन्दी [[सिने जगत]] के [[इतिहास]] के साथ साथ चलती हुई, एक [[सिनेमा]] की कहानी जैसी है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==जीवन परिचय==&lt;br /&gt;
जयराज का जन्म 28 सितम्बर, [[1909]] को निजाम स्टेट के [[करीमनगर]] जिले में हुआ था। वे सरोजिनी नाइडू, पद्माजा नाइडू (जो [[बंगाल]] की गवर्नर थीं) के भतीजे थे। 'पाइदीपाटी जैरुला नाइडू' उनका आन्ध्रीय नाम था। [[हैदराबाद]] में पले बड़े हुए जिससे [[उर्दू]] [[भाषा]] पर पकड़ अच्छी थी, वो काम आयी। उनके पिताजी सरकारी दफ्तर में लेखाजोखा देखा करते थे। उनकी प्रारंम्भिक शिक्षा [[हैदराबाद]] के रोमन कैथोलिक स्कूल में हुई। फिर तीन साल के लिए उन्हें 'वुड नेशनल कॉलेज' के बॉडिंग हाउस में पढाया गया जहां से उन्होंने [[संस्कृत]] की शिक्षा ली। फिर [[हैदराबाद]] के 'निजाम हाईस्कूल' में [[उर्दू]] पढी। बी. एस. सी. करने के बाद नेवी में जाना चाह्ते थे किंतु उनके बडे भाई सुन्दरराज इंजीनिय्ररिंग की पढाई के लिए [[लंदन]] भेजना चाह्ते थे। लेकिन वे किस्मत आजमाने के लिए सन् [[1929]] में [[मुम्बई]] आ गये। उस समय उनकी उम्र 19 [[वर्ष]] थी। उनकी माताजी बड़े भाई को ज्यादा प्यार देतीं थीं और उनकी इच्छा थी [[इंग्लैंड]] जाकर पढाई करने की जिसका परिवार ने विरोध किया जिससे नाराज होकर, युवा जयराज, [[मुम्बई]] चले आए। समंदर के साथ पहले से बहुत लगाव था सो, डॉक यार्ड में काम करने लगे ! वहाँ उनका एक दोस्त था जिसका नाम &amp;quot;रंग्या&amp;quot; था उसने सहायता की और तब, पोस्टर को रंगने का काम भी मिला जिससे स्टूडियो पहुंचे। उनकी मजबूत कद काठी ने जल्द ही उन्हें निर्माता की आंखों में चढ़ा दिया। महावीर फोटोप्लेज़ में काम मिला। उस समय चित्रपट मूक थे! कई काम, ऐक्टर के बदले खड़े डबल का मिला, पर बाद में मुख्य भूमिकाएं भी मिलने लगीं। भाभा वारेरकर मेरे आकर्षक और सौष्ठव शरीर को देखकर मेरे व्यक्तित्व से बहुत प्रभावित हुए और उन्होंने मुझे अपनी पहली फिल्म में नायक की भूमिका के लिए चुन लिया। दुर्भाग्य से यह फिल्म बीच में ही बंद हो गई क्योंकि वारेरकर का अपने पार्टनर के साथ मनमुटाव हो गया था। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बतौर सहायक निर्देशक==&lt;br /&gt;
भायखाला स्थित स्टुडियो में निर्देशक नागेन्द्र मजूमदार के पास मुझे 'सहायक निर्देशक की नौकरी मिल गई। उनके साथ निर्देशन के अलावा संपादन, सिने-छांयाकन आदि का कार्य भी मैंने सीखा। दिलीप [[कुमार]] की पहली फ़िल्म &amp;quot;प्रतिमा&amp;quot; का निर्देशन जयराज ने किया था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बतौर निर्देशक==&lt;br /&gt;
पी. जयराज ने फिल्मों के निर्देशन का काम भी किया जिसमें बतौर निर्देशक पहली फिल्म थी-'प्रतिभा', जिसकी निर्मात्री देविका रानी थीं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==अभिनय की शुरूआत==&lt;br /&gt;
फिल्मों में बतौर [[अभिनेता]] वर्ष [[1929]] में नागेन्द्र मजूमदार ने ही प्रथम फिल्म 'जगमगातीजवानी' में ब्रेक दिया। जिसमें माधव काले नायक थे और वे सहायक चूंकि माधव काले को घुड्सवारी और फाइटिंग नहीं आती थी, लिहाजा उन्होंने मास्क पहनकर उनका भी काम किया। जिसके मुख्य कलाकार माधव केले के स्टंट सीन भी उन्होंने ही किए थे।&lt;br /&gt;
उसके बाद 'यंग इन्डिया पिक्चर्स' ने 35 रुपया माह, 3 वक्त का भोजन और 4 अन्य लोगों के साथ गिरगाम [[मुम्बई]] में रहने की सुविधा वाला काम दिया। अब जीवन की गाडी चल निकली। [[1930]] में &amp;quot;रसीली रानी&amp;quot; फ़िल्म बनी। माधुरी उनकी हिरोइन थीं। उसके बाद जयराज 'शारदा फ़िल्म कम्पनी' से जुड़े। 35 रुपया से 75 रुपये मिलने लगे। जेबुनिस्सा हिरोइन थीं जो हिन्दुस्तानी ग्रेटा के नाम से मशहूर थीं और जयराज जी गिल्बर्ट थे हिन्दोस्तान के। (Anthony Hope's की फ़िल्म 'द प्रिज़नर ऑफ़ जेंडा'  ही [[हिन्दी]] फ़िल्म &amp;quot;रसीली रानी&amp;quot; के रूप में बनी थी) बतौर नायक मेरी पहली फिल्म 'रसीली रानी' [[1929]] में प्रदर्षित हुई माधुरी मेरी नायिका थीं। 'नवजीवन फिल्म्स' के बैनर तले बनी नागेन्द्र मजूमदार द्वारा निर्देशित वह फिल्म बहुत सफल रही थी। मूक फिल्मों के दौर में वह फिल्म कई सिनेमाघरों में पांच [[सप्ताह]] चली थी जो उन दिनों बहुत बडी बात थी। मूक फिल्मों में तो मेरे नाम की धूम मची हूई थी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बोलती फिल्मों का नया दौर==&lt;br /&gt;
[[1931]] में जब 'आलमारा' से बोलती फिल्मों का दौर शुरू हुआ तो मैंने भी बोलती फिल्मों के अनुरूप खुद को ढाला। मेरी पहली बोलती फिल्म थी 'शिकारी'। &lt;br /&gt;
[[1932]] में प्रदर्शित इस फिल्म में मैंने एक [[बौद्ध]] भिक्षुक की भुमिका निभाई थी और [[सांप]], [[बाघ]], [[शेर]] जैसे हिंसक जानवरों के साथ लड़ने के द्रश्य दिए। बोलती फ़िल्म के साथ [[संगीत]] शुरू हुआ। कई कलाकार प्ले बैक भी देने लगे पर [[1935]] से दूसरे गाते और कलाकार सिर्फ़ होंठ हिलाते जिससे आसानी हो गयी। अब [[सिनेमा]] संगीतमय हो गया ! हमजोली फ़िल्म में [[नूरजहाँ]] और जयराज जी ने काम किया था। राइफल गर्ल, हमारी बात आदि फ़िल्म मिलीं। मेरी लोकप्रियता देखकर 'बाम्बे टॉकीज' के मालिक हिमांशु राय ने अपनी कंपनी की फिल्म 'भाभी' के लिए मुझे बतौर नायक अनुबंधित किया, जिससे फिल्म-जगत् में सनसनी फैल गई। तब 'बाम्बे टॉकीज' बाहर के कलाकारों को अपनी फिल्म में काम नहीं देता था। फांज आस्टिन द्वारा निर्देशित वह फिल्म 'भाभी' बहुत सफल रही। मुम्बई में उस फिल्म ने रजत जयंती मनाई थी तो कलकत्ता में वह 80 सप्ताह चली थी। फिर आयी 'स्वामी' फ़िल्म, जिसमें सितारा देवी थीं। हातिम ताई, तमन्ना, उस समय के [[सिनेमा]] थे। जयराज ने [[मराठी]], गुजराती फ़िल्म भी कीं। अपने फिल्मी कैरियर में मैंने बतौर अभिनेता तो लगभग 300 फिल्मों में अभिनय किया जिनमें से 160 फिल्मों में नायक की भूमिकाएं निभाईं। बतौर नायक मेरी अंतिम फिल्म थी-खूनी कौन मुजरिम कौन', जो वर्ष 1965 में प्रदर्शित हुई थी। उसके बाद मैंने उम्र की मांग के अनुसार चरित्र भूमिकाएं निभानी शुरु कर दीं। महात्मा गांधी की हत्या पर आधारित अमरीकी फिल्म-;नाईन आवर्स टू रामा' मार्क रोब्सन निर्मित में जी. डी. बिड़ला की भूमिका निभाने का भी अवसर मिला जो आज तक हिन्दुस्तान मेँ प्रदर्शित नहीं हो पायी है। माया फिल्म में आई.एस. जौहर के साथ काम किया। यह दोनों अमरीकी फिल्में हैं। इन्डो-रशियन फिल्म 'परदेसी' में भी काम किया। दो बार दुर्घट्ना ग्रस्त हो जाने के कारण चलने फिरने में तकलीफ होने लगी तो फिल्मों से दूरी बनानी शुरु कर दी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बतौर निर्माता==&lt;br /&gt;
एक फ़िल्म जयराज जी ने बनाना शुरू किया था जिसमें नर्गिस, भारत भूषण और ख़ुद वे काम कर रहे थे। फ़िल्म का नाम था सागर। उनका बहुत नाम था सिने जगत में और कई सारे निर्माता, निर्देशक, कलाकार उन्हें जन्मदिन की बधाई देने सुबह से उनके घर पहुँचते थे। 1951 में सागर फ़िल्म बनायी, जो लॉर्ड टेनिसन की &amp;quot;इनोच आर्डेन&amp;quot; पर आधारित कथा थी। वह निष्फल हुई क्योंकि जयराज ने अपना खुद का पैसा लगाया था और उन्होंने कुबूल किया था कि व्यवासायिक समझ उनमें नहीं थी। 'फ़िल्म फेयर अवार्ड्स' भी वही नियोजित करते थे। 50 के दशक में उन्हें 'लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड' से नवाजा गया। 1982 में उन्हें 'दादा साहेब फाल्के' पुरस्कार मिला।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==विवाह==&lt;br /&gt;
1939 में अपने घनिष्ठ मित्र् पृथ्वीराज कपूर के कहने पर उन्होंने सावित्री नाम की युवती से विवाह कर लिया। तब उन्होंने ही सावित्री के कन्यादान की रस्म निभाई थी। 1942 में उनका वेतन 200 रुपये प्रतिमाह से बढ़कर 600 रुपये प्रतिमाह हो गया। उनके दो पुत्र दिलीपराज व जयतिलक तथा जयश्री, दीपा एवं गीता तीन पुत्रियां थीं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==परिवार== &lt;br /&gt;
उनके 5 संतान थीं। दो पुत्र और तीन पुत्रियाँ। सबसे बड़े दिलीप राज, जो ऐक्टर बने। उनके द्वारा अभिनीत के. ए. अब्बास की फ़िल्म &amp;quot;शहर और सपना&amp;quot; को राष्ट्रपति पुरस्कार मिला था। दूसरी बेटी थीं जयश्री, उनका विवाह राजकपूर की पत्नी कृष्णा के छोटे भाई भूपेन्द्रनाथ के साथ हुआ था। &lt;br /&gt;
तीसरी बेटी थीं दीपा, फ़िर थी गीता सबसे छोटी। जयराज का दूसरा पुत्र अमेरिका में रहता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==निधन==&lt;br /&gt;
जयराज का निधन लीलावती अस्पताल, बंबई में 11 अगस्त सन 2000 को हुआ और हिन्दी सिने संसार का मूक फिल्मों से आज तक का मानो एक सेतु ही टूट कर अदृश्य हो गया। 11 मूक चित्रपट और 200 बोलती फिल्मों से हमारा मनोरंजन करनेवाले एक समर्थ कलाकार ने इस दुनिया से विदा ले ली।&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Krishna anuj</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%B6:%E0%A4%85%E0%A4%AD%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B8_%E0%A4%AA%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A8%E0%A4%BE&amp;diff=314564</id>
		<title>भारतकोश:अभ्यास पन्ना</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%B6:%E0%A4%85%E0%A4%AD%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B8_%E0%A4%AA%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A8%E0%A4%BE&amp;diff=314564"/>
		<updated>2013-02-07T10:51:52Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Krishna anuj: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;&amp;lt;small&amp;gt;&amp;lt;big&amp;gt;{{अभ्यास पन्ना}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;!--सम्पादन अभ्यास इस से नीचे करे --&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''पी. जयराज''' पूरा नाम पैंदी जयराज (जन्म 28 सितम्बर, 1909 आंध्र प्रदेश - मृत्यु 11 अगस्त, 2000 बम्बई) हिन्दी फिल्म जगत् के एकमात्र जीवित ऐसे वृद्ध अभिनेता थे जो मूक फिल्मों के दौर से लेकर वर्तमान दौर की अनेक फिल्मों में काम कर चुके थे। हिन्दी सिनेमा के पर्दे पर सर्वाधिक राष्ट्रीय और ऐतिहासिक नायकों को जीवित करने का कीर्तिमान इसी कलाकार के साथ जुड़ा है। नौशाद जैसे महान संगीतकार को फिल्मों में ब्रेक देने का श्रेय भी जयराज के नाम है। उनकी जिंदगी हिन्दी सिने जगत के इतिहास के साथ साथ चलती हुई, एक सिनेमा की कहानी जैसी है। वे सरोजिनी नाइडू , पद्माजा नाइडू &lt;br /&gt;
(जो बंगाल की गवर्नर थीं) के भतीजे थे। 'पाइदीपाटी जैरुला नाइडू' उनका आन्ध्रीय नाम था।हैदराबाद में पले बड़े हुए जिससे उर्दू भाषा पर पकड़ अच्छी थी, वो काम आयी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==जीवन परिचय==&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Krishna anuj</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%B6:%E0%A4%85%E0%A4%AD%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B8_%E0%A4%AA%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A8%E0%A4%BE&amp;diff=314557</id>
		<title>भारतकोश:अभ्यास पन्ना</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%B6:%E0%A4%85%E0%A4%AD%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B8_%E0%A4%AA%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A8%E0%A4%BE&amp;diff=314557"/>
		<updated>2013-02-07T10:17:05Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Krishna anuj: पृष्ठ को '&amp;lt;small&amp;gt;&amp;lt;big&amp;gt;{{अभ्यास पन्ना}}
&amp;lt;!--सम्पादन अभ्यास इस से नीचे करे --&amp;gt;' से बदल रहा है।&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;&amp;lt;small&amp;gt;&amp;lt;big&amp;gt;{{अभ्यास पन्ना}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;!--सम्पादन अभ्यास इस से नीचे करे --&amp;gt;&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Krishna anuj</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%B6:%E0%A4%85%E0%A4%AD%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B8_%E0%A4%AA%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A8%E0%A4%BE&amp;diff=314529</id>
		<title>भारतकोश:अभ्यास पन्ना</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%B6:%E0%A4%85%E0%A4%AD%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B8_%E0%A4%AA%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A8%E0%A4%BE&amp;diff=314529"/>
		<updated>2013-02-07T07:27:30Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Krishna anuj: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{अभ्यास पन्ना}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;!--सम्पादन अभ्यास इस से नीचे करे --&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
   &lt;br /&gt;
=== आज जिसे === &lt;br /&gt;
हम ब्रज क्षेत्र '''मानते''' हैं उसकी दिशाऐं, उत्तर दिशा में ''पलवल'' (हरियाणा),&amp;lt;big&amp;gt; दक्षिण में ग्वालियर&amp;lt;/big&amp;gt;(मध्य प्रदेश), पश्चिम में भरतपुर (राजस्थान) और पूर्व में एटा (उत्तर प्रदेश) को छूती हैं। &lt;br /&gt;
ब्रज भाषा, रीति-रिवाज, पहनावा और &amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&amp;lt;ref&amp;gt;ऐतिहासिक तथ्य इस सीमा के सहज आधार हैं।&amp;lt;/ref&amp;gt; &lt;br /&gt;
मथुरा-वृन्दावन [[ब्रज]] के केन्द्र हैं। &lt;br /&gt;
आज जिसे हम ब्रज क्षेत्र मानते हैं उसकी दिशाऐं, उत्तर दिशा में पलवल (हरियाणा), दक्षिण में ग्वालियर (मध्य प्रदेश), पश्चिम में भरतपुर (राजस्थान) और पूर्व में एटा (उत्तर प्रदेश) को छूती हैं। &lt;br /&gt;
ब्रज भाषा, रीति-रिवाज, पहनावा और  तथ्य इस सीमा के सहज आधार हैं। &lt;br /&gt;
मथुरा-वृन्दावन ब्रज के केन्द्र हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
[[Category:ऐतिहासिक]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Krishna anuj</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%B6:%E0%A4%85%E0%A4%AD%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B8_%E0%A4%AA%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A8%E0%A4%BE&amp;diff=314528</id>
		<title>भारतकोश:अभ्यास पन्ना</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%B6:%E0%A4%85%E0%A4%AD%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B8_%E0%A4%AA%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A8%E0%A4%BE&amp;diff=314528"/>
		<updated>2013-02-07T07:26:33Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Krishna anuj: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{अभ्यास पन्ना}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;!--सम्पादन अभ्यास इस से नीचे करे --&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
   &lt;br /&gt;
=== आज जिसे === &lt;br /&gt;
हम ब्रज क्षेत्र '''मानते''' हैं उसकी दिशाऐं, उत्तर दिशा में ''पलवल'' (हरियाणा),&amp;lt;big&amp;gt; दक्षिण में ग्वालियर&amp;lt;/big&amp;gt;(मध्य प्रदेश), पश्चिम में भरतपुर (राजस्थान) और पूर्व में एटा (उत्तर प्रदेश) को छूती हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
    ब्रज भाषा, रीति-रिवाज, पहनावा और &amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&amp;lt;ref&amp;gt;ऐतिहासिक तथ्य इस सीमा के सहज आधार हैं।&amp;lt;/ref&amp;gt; &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
    मथुरा-वृन्दावन [[ब्रज]] के केन्द्र हैं। &lt;br /&gt;
    आज जिसे हम ब्रज क्षेत्र मानते हैं उसकी दिशाऐं, उत्तर दिशा में पलवल (हरियाणा), दक्षिण में ग्वालियर (मध्य प्रदेश), पश्चिम में भरतपुर (राजस्थान) और पूर्व में एटा (उत्तर प्रदेश) को छूती हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
    ब्रज भाषा, रीति-रिवाज, पहनावा और  तथ्य इस सीमा के सहज आधार हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
    मथुरा-वृन्दावन ब्रज के केन्द्र हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:ऐतिहासिक]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Krishna anuj</name></author>
	</entry>
</feed>