<?xml version="1.0"?>
<feed xmlns="http://www.w3.org/2005/Atom" xml:lang="hi">
	<id>https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/api.php?action=feedcontributions&amp;feedformat=atom&amp;user=Pankaj+pathak</id>
	<title>Bharatkosh - सदस्य द्वारा योगदान [hi]</title>
	<link rel="self" type="application/atom+xml" href="https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/api.php?action=feedcontributions&amp;feedformat=atom&amp;user=Pankaj+pathak"/>
	<link rel="alternate" type="text/html" href="https://loginhi.bharatdiscovery.org/india/%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B6%E0%A5%87%E0%A4%B7:%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%97%E0%A4%A6%E0%A4%BE%E0%A4%A8/Pankaj_pathak"/>
	<updated>2026-05-23T16:01:30Z</updated>
	<subtitle>सदस्य द्वारा योगदान</subtitle>
	<generator>MediaWiki 1.41.1</generator>
	<entry>
		<id>https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%AA%E0%A4%A4%E0%A4%BF&amp;diff=285564</id>
		<title>राष्ट्रपति</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%AA%E0%A4%A4%E0%A4%BF&amp;diff=285564"/>
		<updated>2012-07-25T13:29:16Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Pankaj pathak: /* राष्ट्रपति की पदावधि */&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;[[चित्र:Dr.Rajendra-Prasad.jpg|thumb|[[भारत]] के प्रथम राष्ट्रपति [[राजेन्द्र प्रसाद|डॉक्टर राजेन्द्र प्रसाद]]]]&lt;br /&gt;
भारतीय संविधान पर ब्रिटेन के संविधान का व्यापक [[प्रभाव]] है। [[ब्रिटेन]] के संविधान का अनुकरण करते हुए [[भारत]] में संविधान द्वारा संसदीय शासन की स्थापना की गयी है। जिस तरह ब्रिटेन में शासन की प्रमुख वहाँ की साम्राज्ञी होती है, उसी प्रकार से भारत में राज्य का प्रमुख राष्ट्रपति होता है। ब्रिटेन की साम्राज्ञी की तरह भारत का राष्ट्रपति राज्य का औपचारिक प्रमुख होता है और संघ की वास्तविक शक्ति संघ मन्त्रिमण्डल में निहित होती है। इन दोनों देशों के प्रमुखों में मूलभूत अन्तर यह है कि ब्रिटेन की साम्राज्ञी का पद वंशानुगत होता है, जबकि भारत का राष्ट्रपति एक निर्वाचित मण्डल द्वारा निर्वाचित किया जाता है। इसी अन्तर के कारण भारत को प्रजातांत्रिक गणतन्त्र कहा जाता है। भारत में राष्ट्रपति का पद संविधान के अनुच्छेद 52 द्वारा उपबंधित है।&lt;br /&gt;
==भारत के राष्ट्रपति==&lt;br /&gt;
{{Main|भारत के राष्ट्रपति}}&lt;br /&gt;
[[भारत]] के राष्ट्रपति राष्ट्रप्रमुख और भारत के प्रथम नागरिक हैं, साथ ही भारतीय सशस्त्र सेनाओं के प्रमुख सेनापति भी हैं। राष्ट्रपति के पास पर्याप्त शक्ति होती है पर कुछ अपवादों के अलावा राष्ट्रपति के पद में निहित अधिकांश अधिकार वास्तव में प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाले मंत्रिपरिषद के द्वारा उपयोग किए जाते हैं। भारत के राष्ट्रपति [[नई दिल्ली]] स्थित [[राष्ट्रपति भवन]] में रहते हैं, जिसे रायसीना हिल के नाम से भी जाना जाता है। राष्ट्रपति अधिकतम दो कार्यकाल तक हीं पद पर रह सकते हैं। अब तक केवल पहले राष्ट्रपति [[डा. राजेंद्र प्रसाद]] ने हीं इस पद पर दो कार्यकाल पूरा कियें है। महामहिम [[प्रतिभा पाटिल]] भारत की 12वीं तथा इस पद को सुशोभित करने वाली पहली महिला राष्ट्रपति हैं। उन्होंने [[25 जुलाई]], [[2007]] को पद व गोपनीयता की शपथ ली थी।&lt;br /&gt;
==पद की योग्यता==&lt;br /&gt;
{{tocright}}&lt;br /&gt;
संविधान के अनुच्छेद 58 के अनुसार कोई भी व्यक्ति राष्ट्रपति होने के योग्य तब होगा, जब वह–&lt;br /&gt;
#भारत का नागरिक हो।&lt;br /&gt;
#पैंतीस वर्ष की आयु पूरी कर चुका हो।&lt;br /&gt;
#लोक सभा का सदस्य निर्वाचित किये जाने के योग्य हो, तथा&lt;br /&gt;
#भारत सरकार के या किसी राज्य सरकार के अधीन अथवा इन दोनों सरकारों में से किसी के नियन्त्रण में किसी स्थानीय या अन्य प्राधिकारी के अधीन लाभ का पद न धारण करता हो। यदि कोई व्यक्ति राष्ट्रपति या [[उपराष्ट्रपति]] के पद पर या संघ अथवा किसी राज्य के मंत्रिपरिषद का सदस्य हो, तो यह नहीं माना जाएगा कि वह लाभ के पद पर है। &lt;br /&gt;
==निर्वाचन==&lt;br /&gt;
{{seealso|उपराष्ट्रपति}}&lt;br /&gt;
राष्ट्रपति का चुनाव 'अप्रत्यक्ष निर्वाचन' के द्वारा किया जाता है। राष्ट्रपति पद के निर्वाचन में अभ्यर्थी होने के लिए आवश्यक है कि कोई व्यक्ति निर्वाचन के लिए अपना नामांकन करते समय 15,000 रुपये की धरोहर (ज़मानत धनराशि) निर्वाचन अधिकारी के समक्ष जमा करे और उसके नामांकन पत्र का प्रस्ताव कम से कम 50 मतदाताओं के द्वारा किया जाना चाहिए तथा कम से कम 50 मतदाताओं द्वारा उसके नामांकन पत्र का समर्थन भी किया जाना चाहिए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==निर्वाचक मण्डल==&lt;br /&gt;
अनुच्छेद 54 के अनुसार राष्ट्रपति का निर्वाचन ऐसे निर्वाचक मण्डल के द्वारा किया जाएगा, जिसमें [[संसद]] (लोकसभा तथा राज्यसभा) तथा राज्य विधान सभाओं के निर्वाचित सदस्य शामिल होंगे। राष्ट्रपति के निर्वाचक मण्डल में संसद के मनोनीत सदस्य, राज्य विधान सभाओं के मनोनीत सदस्य तथा राज्य विधान परिषदों के सदस्य (निर्वाचित एवं मनोनीत दोनों) शामिल नहीं किये जाते। संघ राज्य क्षेत्रों की विधानसभाओं के सदस्यों को भी 70वें संविधान संशोधन के पूर्व राष्ट्रपति के निर्वाचक मण्डल में शामिल नहीं किया जाता था। लेकिन 70वें संविधान संशोधन द्वारा यह व्यवस्था कर दी गयी है कि दो संघ राज्य क्षेत्रों, यथा [[पाण्डिचेरी]] तथा [[राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली|राष्ट्रीय राजधानी राज्यक्षेत्र दिल्ली]] की विधानसभाओं के सदस्य राष्ट्रपति के निर्वाचक मण्डल में शामिल किये जायेंगे। यहाँ पर यह उल्लेखनीय है कि केवल इन दोनों संघ राज्य क्षेत्रों में ही विधानसभा का गठन हुआ है।&lt;br /&gt;
==राष्ट्रपति के चुनाव पर प्रभाव==&lt;br /&gt;
संविधान सभा में राष्ट्रपति के निर्वाचन प्रक्रिया पर विचार करते समय यह ध्यान नहीं दिया गया था कि निर्वाचक मण्डल में से कोई स्थान रिक्त हो तो राष्ट्रपति का चुनाव कैसे होगा? [[1957]] में जब राष्ट्रपति का चुनाव किया गया तो निर्वाचक मण्डल में कुछ स्थान ख़ाली थे। इसलिए राष्ट्रपति के चुनाव को इस आधार पर चुनौती दी गई की निर्वाचक मण्डल में स्थान रिक्त होने के कारण राष्ट्रपति का चुनाव अवैध है। बाद में [[1961]] में ग्याहरवाँ संविधान संशोधन के तहत यह व्यवस्था की गयी कि निर्वाचक मण्डल में स्थान रिक्त होते हुए भी राष्ट्रपति का चुनाव कैसे कराया जा सकता है।&lt;br /&gt;
==निर्वाचन की पद्धति==&lt;br /&gt;
राष्ट्रपति के निर्वाचन पद्धति के सम्बन्ध में संविधान के अनुच्छेद 55 में प्रावधान किया गया है, जिसके अनुसार राष्ट्रपति के निर्वाचन में दो सिद्धान्तों को अपनाया जाता है–&lt;br /&gt;
====समरूपता तथा समतुल्यता====&lt;br /&gt;
इस सिद्धान्त, जो अनुच्छेद 55 के खण्ड (1) तथा (2) वर्णित हैं, के अनुसार राज्यों के प्रतिनिधित्व के मापमान में एकरूपता तथा सभी राज्यों और संघ के प्रतिनिधित्व में समतुल्यता होगी। इस सिद्धान्त का तात्पर्य यह है कि सभी राज्यों की विधानसभाओं का प्रतिनिधित्व का मान निकालने के लिए एक ही प्रक्रिया अपनायी जाएगी तथा सभी राज्यों की विधानसभाओं के सदस्यों के मत मूल्य का योग संसद के सभी सदस्य के मत मूल्य के योग के समतुल्य अर्थात् समान होगा। राज्यों की विधानसभाओं के सदस्यों के मतमूल्य तथा संसद के सदस्यों के मतमूल्य को निर्धारित करने के लिए निम्नलिखित प्रक्रिया अपनायी जाएगी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;u&amp;gt;'''विधानसभा के सदस्य के मत मूल्य का निर्धारण'''&amp;lt;/u&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रत्येक राज्य की विधानसभा के सदस्य के मतों की संख्या निकालने के लिए उस राज्य की कुल जनसंख्या (जो पिछली जनगणना के अनुसार निर्धारित है) को राज्य विधानसभा की कुल निर्वाचित सदस्य संख्या से विभाजित करके भागफल को 1000 से विभाजित किया जाता है। इस प्रकार भजनफल को एक सदस्य का मत मूल्य मान लेते हैं। यदि उक्त विभाजन के परिणामस्वरूप शेष संख्या 500 से अधिक आये, तो प्रत्येक सदस्य के मतों की संख्या में एक और जोड़ दिया जाता है। राज्य विधान सभा के सदस्यों का मूल्य निम्न प्रकार निकाला जाता है–&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
राज्य की विधानसभा के एक सदस्य का मत मूल्य = राज्य की कुल जनसंख्या / राज्य विधानसभा के निर्वाचित X 1 / 1000 सदस्यों की कुल संख्या&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;u&amp;gt;'''संसद सदस्य के मत मूल्य का निर्धारण'''&amp;lt;/u&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
संसद सदस्य का मत मूल्य निर्धारित करने के लिए राज्यों की विधानसभाओं के सदस्यों के मत मूल्यों को जोड़कर संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्यों के योग का भाग दिया जाता है। संसद सदस्य का मत मूल्य निम्न प्रकार निकाला जाता है–&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
संसद सदस्य का मत मूल्य = कुल राज्य विधान सभाओं के निर्वाचित सदस्यों के मत मूल्यों का योग / संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्यों का योग&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस प्रकार राष्ट्रपति के चुनाव में यह ध्यान रखा जाता है कि सभी राज्य विधान सभाओं के निर्वाचित सदस्यों के मतों के मूल्य का योग संसद के निर्वाचित सदस्यों के मतों के मूल्य का योग बराबर रहे और सभी राज्यों की विधान सभाओं के निर्वाचित सदस्यों के मत मूल्य का निर्धारण करने के लिए एक समान प्रक्रिया अपनायी जाए। इसे आनुपातिक प्रतिनिधित्व का सिद्धान्त भी कहते हैं।&lt;br /&gt;
====एकल संक्रमणीय सिद्धान्त====&lt;br /&gt;
इस सिद्धान्त का तात्पर्य है कि यदि निर्वाचन में एक से अधिक उम्मीदवार हों, तो मतदाताओं द्वारा मतदान वरीयता क्रम से दिया जाए। इसका आशय यह है कि मतदाता मतदान पत्र में उम्मीदवारों के नाम या चुनाव चिह्न के समक्ष अपना वरीयता क्रम लिखेगा। &lt;br /&gt;
==मतगणना==&lt;br /&gt;
राष्ट्रपति के चुनाव के बाद उसी व्यक्ति को निर्वाचित घोषित किया जाता है, जो डाले गये कुल वैध मतों में से आधे से अधिक मत प्राप्त करे। जब राष्ट्रपति के निर्वाचन के बाद मतों की गणना प्रारम्भ होती है, तो सर्वप्रथम अवैध मतपत्रों को निरस्त करके शेष वैध मत पत्रों का मत मूल्य निकाला जाता है और निकाले गए मत मूल्य में 2 का भाग देकर भागफल में एक जोड़कर निर्वाचित घोषित किये जाने वाले उम्मीदवार का कोटा निकाला जाता है। यदि मतगणना के प्रथम दौर में किसी उम्मीदवार को नियत किये गये कोटा के बराबर मत मूल्य प्राप्त हो जाता है, तो उसे निर्वाचित घोषित कर दिया जाता है। यदि किसी उम्मीदवार को नियम कोटा के बराबर मत मूल्य नहीं प्राप्त होता है, तो मतगणना का दूसरा दौर प्रारम्भ होता है। दूसरे दौर के मतगणना में जिस उम्मीदवार को प्रथम वरीयता का सबसे कम मत मिला होता है, उसको गणना से बाहर करके उसके द्वितीय वरीयता के मत मूल्य को अन्य उम्मीदवारों को स्थानान्तरित कर दिया जाता है। यदि द्वितीय दौर की गणना में भी किसी उम्मीदवार को नियत किये गये कोटा के बराबर मत मूल्य नहीं प्राप्त होता है, तो तीसरे दौर की गणना होती है। तीसरे दौर की गणना में उस उम्मीदवार को गणना से बाहर कर दिया जाता है, जो कि दूसरे दौर की गणना में सबसे कम मूल्य पाता है और इस उम्मीदवार के तृतीय वरीयता मत मूल्य को शेष उम्मीदवारों के पक्ष में स्थानान्तरित कर दिया जाता है। यह प्रक्रिया तब तक अपनायी जाती है, जब तक कि किसी उम्मीदवार को नियत किये गये कोटा के मत मूल्य के बराबर मत मूल्य प्राप्त नहीं हो जाता है।&lt;br /&gt;
==भारत में राष्ट्रपति का चुनाव==&lt;br /&gt;
[[चित्र:President-Selection.jpg|thumb|भारत में राष्ट्रपति चुनाव का तरीक़ा]]&lt;br /&gt;
भारत में अब तक 12 व्यक्ति राष्ट्रपति का पद ग्रहण कर चुके हैं, जिनमें से प्रथम राष्ट्रपति [[डॉ. राजेंद्र प्रसाद]] ने 2 बार इस पद को सुशोभित किया है। राष्ट्रपति की पदावधि 5 वर्ष की होती है। लेकिन राजेन्द्र प्रसाद 10 वर्ष से अधिक की अवधि तक राष्ट्रपति का पद धारण किये था। इसका कारण यह था कि [[1952]] में राष्ट्रपति के प्रथम चुनाव के पूर्व ही [[24 जनवरी]], [[1950]] को संविधान सभा के द्वारा राष्ट्रपति के रूप में डॉ. राजेंद्र प्रसाद का चुनाव कर लिया गया था। संविधान के प्रवर्तन की तिथि अर्थात् [[26 जनवरी]], 1950 से लेकर [[12 मई]], 1952 तक राजेन्द्र प्रसाद राष्ट्रपति के पद पर रहे। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भारत में अब तक 13 बार राष्ट्रपति के चुनाव हुए हैं, जिनमें से एक बार, अर्थात् [[1977]] में, श्री नीलम संजीव रेड्डी निर्विरोध राष्ट्रपति चुने गये थे। शेष 12 बार राष्ट्रपति पद के चुनाव में एक से अधिक उम्मीदवार थे। अब तक केवल डॉ. राजेंद्र प्रसाद, [[फ़ख़रुद्दीन अली अहमद]], [[नीलम संजीव रेड्डी]] तथा [[ज्ञानी ज़ैल सिंह]] को छोड़कर अन्य सभी राष्ट्रपति पूर्व में उपराष्ट्रपति के पद को सुशोभित कर चुके थे। [[डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन|डॉ. एस. राधाकृष्णन]] लगातार दो बार उपराष्ट्रपति तथा एक बार राष्ट्रपति के पद पर आसीन हुए। निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में [[वी.वी. गिरी]] ऐसे राष्ट्रपति निर्वाचित हुए थे, जिन्होंने कांग्रेस का स्पष्ट बहुमत होते हुए भी उसके उम्मीदवार को पराजित किया था। अब तक नीलम संजीव रेड्डी एकमात्र ऐसे राष्ट्रपति हुए हैं, जो एक बार चुनाव में पराजित हुए तथा बाद में निर्विरोध निर्वाचित हुए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[19 जुलाई]], [[2007]] को सम्पन्न 13वें राष्ट्रपति के चुनाव के लिए निर्वाचक मण्डल में 4,896 सदस्य थे, जिसमें 776 सांसद और 4,120 विधायक शामिल हैं। इन सबका कुल मत मूल्य 10,98,882 था। वर्तमान में प्रत्येक सांसद का मत मूल्य 708 है। सांसदों का कुल मत मूल्य 5,49,408 और विधायकों का कुल मत मूल्य 5,49,474 है। राज्यों में [[उत्तर प्रदेश]] विधानसभा का मत मूल्य सर्वाधिक 83,824 है। इसके बाद क्रमश: [[महाराष्ट्र]] विधानसभा का मत मूल्य 50,400, [[पश्चिम बंगाल]] का 44,394, [[आंध्र प्रदेश]] का 43,512 और [[बिहार]] विधानसभा का मत मूल्य 42,039 है। [[सिक्किम]] विधानसभा का मत मूल्य सबसे कम 224 है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==मतदान स्थल==&lt;br /&gt;
राष्ट्रपति के चुनाव में राज्य विधान सभाओं के सदस्य अपने-अपने राज्यों की राजधानियों में मतदान करते हैं और संसद सदस्य [[दिल्ली]] में या अपने राज्य की राजधानी में मतदान कर सकते हैं। यदि कोई संसद सदस्य अपने राज्य की राजधानी में मतदान करना चाहता है तो उसे इसकी सूचना 10 दिन पूर्व ही चुनाव आयोग का देनी चाहिए।&lt;br /&gt;
==चुनाव का समय ==&lt;br /&gt;
संविधान के अनुच्छेद 62 में केवल यह अपेक्षा की गई है कि राष्ट्रपति का चुनाव निर्धारित समय के अन्दर सम्पन्न करा लिया जाना चाहिए। निर्वाचन की प्रक्रिया को पाँच वर्ष की अवधि समाप्त हो जाने के बाद स्थगित नहीं रखा जा सकता है। राष्ट्रपति का चुनाव कब कराया जाएगा, इसके सम्बन्ध में संविधान में कोई प्रावधान नहीं किया गया है। संविधान में अनुच्छेद 71 (3) में केवल यह प्रावधान किया गया है कि राष्ट्रपति के निर्वाचन से सम्बन्धित या संसक्त किसी विषय का विनियमन संसद विधि द्वारा कर सकेगी। इस शक्ति का प्रयोग करके संसद ने राष्ट्रपतीय तथा उपराष्ट्रपतीय निर्वाचन अधिनियम, 1952 पारित करके यह प्रावधान किया है कि राष्ट्रपति का चुनाव निवर्तमान राष्ट्रपति की पदावधि की समाप्ति के पूर्व ही कराया जाना चाहिए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;u&amp;gt;'''किसी राज्य की विधानसभा भंग होने की स्थिति में राष्ट्रपति चुनाव '''&amp;lt;/u&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
किसी राज्य की विधानसभा भंग होने की स्थिति में भी राष्ट्रपति का चुनाव सम्पन्न होता है। इस सन्दर्भ में 11वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1961 में यह स्पष्ट किया गया है कि राष्ट्रपति के चुनाव को इस आधार पर चुनौती नहीं दी जा सकती कि निर्वाचक मण्डल में कोई स्थान रिक्त था। सर्वोच्च न्यायालय ने भी यह निर्णय दिया है कि बिना किसी विधानसभा के ही राष्ट्रपति का चुनाव कराया जा सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''राष्ट्रपति चुनाव में एक विधायक के मत का मूल्य'''&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
एक विधायक के मत के मूल्य का फार्मूला = राज्य की कुल जनसंख्या / राज्य विधानसभा के निर्वाचित विधायकों की संख्या X 1000&lt;br /&gt;
{| class=&amp;quot;bharattable&amp;quot; border=&amp;quot;1&amp;quot;&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
! राज्य&lt;br /&gt;
! सीटों की संख्या&amp;lt;ref&amp;gt;विधानसभा&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
! जनसंख्या (1971)&lt;br /&gt;
! मत का मूल्य&amp;lt;ref&amp;gt;एक विधायक&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
! मतों का मूल्य&amp;lt;ref&amp;gt;राज्य के कुल निर्वाचित विधायक&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[आन्ध्र प्रदेश]]&lt;br /&gt;
| 294&lt;br /&gt;
| 43,502,708&lt;br /&gt;
| 148&lt;br /&gt;
| 148 x 294 = 43,512&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[अरुणाचल प्रदेश]]&lt;br /&gt;
| 60&lt;br /&gt;
| 467,511&lt;br /&gt;
| 08&lt;br /&gt;
| 08 x 60 = 480&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[असम]]&lt;br /&gt;
| 126 &lt;br /&gt;
| 14,625,152&lt;br /&gt;
| 116&lt;br /&gt;
| 116 x 126 = 14,616&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[बिहार]]&lt;br /&gt;
| 243&lt;br /&gt;
| 42,126,239&lt;br /&gt;
| 173&lt;br /&gt;
| 173 x 243 = 42,039&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[छत्तीसगढ़]]&lt;br /&gt;
| 90&lt;br /&gt;
| 11,637,497&lt;br /&gt;
| 129&lt;br /&gt;
| 129 x 90 = 11,610&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[गोवा]]&lt;br /&gt;
| 40&lt;br /&gt;
| 795,120&lt;br /&gt;
| 20&lt;br /&gt;
| 20 x 40 = 800&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[गुजरात]]&lt;br /&gt;
| 182&lt;br /&gt;
| 26,697,475&lt;br /&gt;
| 147&lt;br /&gt;
| 147 x 182 = 26,754&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[हरियाणा]]&lt;br /&gt;
| 90&lt;br /&gt;
| 10,036,808&lt;br /&gt;
| 112&lt;br /&gt;
| 112 x 90 = 10,080&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[हिमाचल प्रदेश]]&lt;br /&gt;
| 68&lt;br /&gt;
| 3,460,434&lt;br /&gt;
| 51&lt;br /&gt;
| 51 x 68 = 3,468&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[जम्मू और कश्मीर]]&lt;br /&gt;
| 87&lt;br /&gt;
| 6,300,000&lt;br /&gt;
| 72&lt;br /&gt;
| 72 x 87 = 6,264&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[झारखण्ड]]&lt;br /&gt;
| 81&lt;br /&gt;
| 14,227,133&lt;br /&gt;
| 176&lt;br /&gt;
| 176 x 81 = 14,256&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[कर्नाटक]]&lt;br /&gt;
| 224&lt;br /&gt;
| 29,299,014&lt;br /&gt;
| 131&lt;br /&gt;
| 131 x 224 = 29,344&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[केरल]]&lt;br /&gt;
| 140&lt;br /&gt;
| 21,347,375&lt;br /&gt;
| 152&lt;br /&gt;
| 152 x 140 = 21,280&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[मध्य प्रदेश]]&lt;br /&gt;
| 230&lt;br /&gt;
| 30,016,625&lt;br /&gt;
| 131&lt;br /&gt;
| 131 x 230 = 30,130&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[महाराष्ट्र]]&lt;br /&gt;
| 288&lt;br /&gt;
| 50,412,235&lt;br /&gt;
| 175&lt;br /&gt;
| 175 x 288 = 50,400&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[मणिपुर]]&lt;br /&gt;
| 60&lt;br /&gt;
| 1,072,753&lt;br /&gt;
| 18&lt;br /&gt;
| 18 x 60 = 1,080&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[मेघालय]]&lt;br /&gt;
| 60&lt;br /&gt;
| 1,011,699&lt;br /&gt;
| 17&lt;br /&gt;
| 17 x 60 = 1,020&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[मिज़ोरम]]&lt;br /&gt;
| 40&lt;br /&gt;
| 332,390&lt;br /&gt;
| 8&lt;br /&gt;
| 8 x 40 = 320&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[नागालैण्ड]]&lt;br /&gt;
| 60&lt;br /&gt;
| 516,449&lt;br /&gt;
| 9&lt;br /&gt;
| 9 x 60 = 540&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[उड़ीसा]]&lt;br /&gt;
| 147&lt;br /&gt;
| 21,944,615&lt;br /&gt;
| 149&lt;br /&gt;
| 149 x 147 = 21,903&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[पंजाब]]&lt;br /&gt;
| 117&lt;br /&gt;
| 13,551,060&lt;br /&gt;
| 116&lt;br /&gt;
| 116 x 117 = 13,572&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[राजस्थान]]&lt;br /&gt;
| 200&lt;br /&gt;
| 25,765,806&lt;br /&gt;
| 129&lt;br /&gt;
| 129 x 200 = 25,800&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[सिक्किम]]&lt;br /&gt;
| 32&lt;br /&gt;
| 209,843&lt;br /&gt;
| 7&lt;br /&gt;
| 7 x 32 = 224&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[तमिलनाडु]]&lt;br /&gt;
| 234&lt;br /&gt;
| 41,199,168&lt;br /&gt;
| 176&lt;br /&gt;
| 176 x 234 = 41,184 &lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[त्रिपुरा]]&lt;br /&gt;
| 60&lt;br /&gt;
| 1,556,342&lt;br /&gt;
| 26&lt;br /&gt;
| 26 x 60 = 1,560&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[उत्तर प्रदेश]]&lt;br /&gt;
| 403&lt;br /&gt;
| 83,849,905&lt;br /&gt;
| 208&lt;br /&gt;
| 208 x 403 = 83,824&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[उत्तराखण्ड]]&lt;br /&gt;
| 70&lt;br /&gt;
| 4,491,239&lt;br /&gt;
| 64&lt;br /&gt;
| 64 x 70 = 4,480&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[पश्चिम बंगाल]]&lt;br /&gt;
| 294&lt;br /&gt;
| 44,312,011&lt;br /&gt;
| 151&lt;br /&gt;
| 151 x 294 =44,394&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[दिल्ली]]&lt;br /&gt;
| 70 &lt;br /&gt;
| 40,65,698&lt;br /&gt;
| 58&lt;br /&gt;
| 58 x 70 = 4,060&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[पुदुचेरी]]&lt;br /&gt;
| 30 &lt;br /&gt;
| 471,707&lt;br /&gt;
| 16&lt;br /&gt;
| 16 x 30 = 480&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| कुल&lt;br /&gt;
|4120&lt;br /&gt;
| 549,302,005&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| =549,474&lt;br /&gt;
|}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==एक सांसद के मत का मूल्य==&lt;br /&gt;
*राज्य के कुल निर्वाचित विधायकों के मतों का मूल्य = 5,49,474&lt;br /&gt;
*लोकसभा के कुल निर्वाचित सदस्यों की संख्या = 543&lt;br /&gt;
*राज्यसभा के कुल निर्वाचित सदस्यों की संख्या = 233&lt;br /&gt;
*कुल सांसदों की संख्या = 543+233 = 776&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
एक सांसद के मत के मूल्य का फार्मूला = राज्य के कुल मतों का मूल्य यानी 5,49,474 / कुल सांसदों की संख्या यानी 778 = 708.085 यानी 708&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सांसदों के कुल मतों का मूल्य, 708×776 = 5,49,408&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
वर्ष [[2002]] के राष्ट्रपति चुनाव में भाग लेने वाले कुल मतदाताओं की संख्या = कुल विधायक (4120) + कुल सांसद (776) = 4896&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सभी मतदाताओं के कुल मतों का मूल्य = 5,49,474+5,49,408 = 10,98,882&amp;lt;ref&amp;gt;नोट - भारतीय संविधान के अनुसार वर्ष 2002 के राष्ट्रपति चुनाव के लिए भी [[1971]] की जनगणना के आंकड़े ही मान्य थे, केवल [[झारखण्ड]], [[उत्तरांचल]] और [[छत्तीसगढ़]] जैसे नये बने तीन राज्यों के विधायकों के मतों का मूल्य अलग से तय किया गया है।&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
राष्ट्रपति के चुनाव को इस आधार पर चुनौती नहीं दी जा सकती कि निर्वाचक मंडल में कोई रिक्त स्थान था। सर्वोच्च न्यायालय ने भी यह निर्णय दिया है कि बिना किसी विधानसभा के ही राष्ट्रपति का चुनाव कराया जा सकता है।&lt;br /&gt;
==सम्बन्धित विवाद का विनिश्चय==&lt;br /&gt;
अनुच्छेद 7 के अनुसार राष्ट्रपति के चुनाव से सम्बन्धित विवाद का विनिश्चय [[उच्चतम न्यायालय]] द्वारा किया जाएगा। यदि कोई व्यक्ति राष्ट्रपति के रूप में निर्वाचित होकर पद ग्रहण कर लेता है और बाद में उसका चुनाव उच्चतम न्यायालय द्वारा अवैध घोषित किया जाता है, तो राष्ट्रपति के पद पर रहते हुए भी उसके द्वारा किया गया कार्य या की गयी घोषणा अविधिमान्य नहीं होगी।&lt;br /&gt;
==पुननिर्वाचन के लिए योग्यता==&lt;br /&gt;
अनुच्छेद 57 के अनुसार [[भारत]] के राष्ट्रपति पद पर पदस्थ व्यक्ति दूसरे कार्यकाल के लिए भी चुनाव में उम्मीदवार बन सकता है। वैसे संविधान में यह व्यवस्था नहीं की गयी है कि राष्ट्रपति पद पर पदस्थ व्यक्ति दूसरे कार्यकाल के लिए निर्वाचन में भाग ले सकता है या नहीं, लेकिन सामान्यत: यह परम्परा बन गयी है कि राष्ट्रपति पद के लिए कोई व्यक्ति एक ही बार निर्वाचित किया जाता है। इसका अपवाद राजेन्द्र प्रसाद रहे हैं, जो दो बार राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार थे। इसके अतिरिक्त दो राष्ट्रपति [[ज़ाकिर हुसैन]] तथा फ़खरुद्दीन अली अहमद, जिनकी कार्यकाल के दौरान ही मृत्यु हो गई थी, के सिवाय सभी राष्ट्रपति अपने एक कार्यकाल के बाद दूसरी बार राष्ट्रपति के चुनाव में उम्मीदवार नहीं बने।&lt;br /&gt;
{| class=&amp;quot;bharattable&amp;quot; border=&amp;quot;1&amp;quot;&lt;br /&gt;
|+राष्ट्रपति पद का चुनाव तथा विजयी एवं द्वितीय स्थान प्राप्त उम्मीदवारों की सूची&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
! क्र.सं.&lt;br /&gt;
! वर्ष&lt;br /&gt;
! निर्वाचित प्रत्याशी&lt;br /&gt;
! द्वितीय स्थान प्राप्त प्रत्याशी&lt;br /&gt;
! मत प्रतिशत&lt;br /&gt;
! चित्र&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| पहला&lt;br /&gt;
| [[1952]]&lt;br /&gt;
| [[राजेन्द्र प्रसाद|डॉ. राजेन्द्र प्रसाद]]&lt;br /&gt;
| के. टी. शाह&lt;br /&gt;
| 83.80&lt;br /&gt;
| [[चित्र:Dr.Rajendra-Prasad.jpg|30px]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| दूसरा                &lt;br /&gt;
| [[1957]]&lt;br /&gt;
| [[राजेन्द्र प्रसाद|डॉ. राजेन्द्र प्रसाद]]&lt;br /&gt;
| एन. एन. दास&lt;br /&gt;
| 99.30&lt;br /&gt;
| [[चित्र:Dr.Rajendra-Prasad.jpg|30px]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| तीसरा   &lt;br /&gt;
| [[1962]]&lt;br /&gt;
| [[सर्वपल्ली राधाकृष्णन|डॉ. राधाकृष्णन]]&lt;br /&gt;
| सी. एच. राम&lt;br /&gt;
| 98.30&lt;br /&gt;
| [[चित्र:Sarvepalli-Radhakrishnan.jpg|30px]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| चौथा   &lt;br /&gt;
| [[1967]]&lt;br /&gt;
| [[डॉ. ज़ाकिर हुसैन]]&lt;br /&gt;
| के. सुब्बाराव&lt;br /&gt;
| 56.20&lt;br /&gt;
| [[चित्र:Dr.Zakir-Hussain.jpg|30px]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| पाँचवाँ   &lt;br /&gt;
| [[1969]]&lt;br /&gt;
| [[वाराहगिरि वेंकट गिरि]]&lt;br /&gt;
| [[नीलम संजीव रेड्डी]]&lt;br /&gt;
| 50.20&lt;br /&gt;
| [[चित्र:V.V.Giri.jpg|30px]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| छठा &lt;br /&gt;
| [[1974]]&lt;br /&gt;
| [[फ़ख़रुद्दीन अली अहमद]]&lt;br /&gt;
| टी. चौधरी&lt;br /&gt;
| 80.20&lt;br /&gt;
| [[चित्र:Fakhruddin-Ali-Ahmed.jpg|30px]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| सातवाँ  &lt;br /&gt;
| [[1977]]&lt;br /&gt;
| [[नीलम संजीव रेड्डी]]&lt;br /&gt;
| निर्विरोध&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| [[चित्र:Neelam Sanjiva Reddy.jpg|30px]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| आठवाँ &lt;br /&gt;
| [[1982]]&lt;br /&gt;
| [[ज्ञानी ज़ैल सिंह]]&lt;br /&gt;
| एच. आर. खन्ना&lt;br /&gt;
| 72.70&lt;br /&gt;
| [[चित्र:Giani-Zail-Singh.jpg|30px]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| नवाँ &lt;br /&gt;
| [[1987]]&lt;br /&gt;
| [[रामस्वामी वेंकटरमण|आर. वेंकिटरमन अय्यर]]&lt;br /&gt;
| वी. आर. कृष्ण&lt;br /&gt;
| 72.30&lt;br /&gt;
| [[चित्र:R. Venkataraman.jpg|30px]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| दसवाँ      &lt;br /&gt;
| [[1992]]&lt;br /&gt;
| [[शंकरदयाल शर्मा|डॉ. शंकरदयाल शर्मा]]&lt;br /&gt;
| जी. जी. स्वेल&lt;br /&gt;
| 64.78&lt;br /&gt;
| [[चित्र:Shankar-Dayal-Sharma.jpg|30px]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| ग्यारहवाँ  &lt;br /&gt;
| [[1997]]&lt;br /&gt;
| [[के. आर. नारायणन]] &lt;br /&gt;
| टी. एन. शेषन&lt;br /&gt;
| 94.70&lt;br /&gt;
| [[चित्र:K.R.Narayanan.jpg|30px]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| बारहवाँ  &lt;br /&gt;
| [[2002]]&lt;br /&gt;
| [[डॉक्टर ए. पी. जे. अब्दुल कलाम]]&lt;br /&gt;
| कैप्टन लक्ष्मी सहगल&lt;br /&gt;
| 89.98&lt;br /&gt;
| [[चित्र:Abdul-Kalam.jpg|30px]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| तेरहवाँ  &lt;br /&gt;
| [[2007]]&lt;br /&gt;
| [[प्रतिभा देवी सिंह पाटिल]] &lt;br /&gt;
| भैरोसिंह शेखाबत&lt;br /&gt;
| 65.82&lt;br /&gt;
| [[चित्र:Pratibha-Patil.jpg|30px]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| तेरहवाँ  &lt;br /&gt;
| [[2012]]&lt;br /&gt;
| [[प्रणव मुखर्जी]] &lt;br /&gt;
| पी. ए. संगमा&lt;br /&gt;
| 69.31&lt;br /&gt;
| [[चित्र:Pranab_mukherjee.jpg|30px]]&lt;br /&gt;
|}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==राष्ट्रपति के द्वारा शपथ==&lt;br /&gt;
राष्ट्रपति या कोई व्यक्ति, जो किसी कारण से राष्ट्रपति के कृत्यों के निर्वहन के लिए नियुक्त होता है, अपना पद ग्रहण करने के पूर्व अनुच्छेद 60 के तहत भारत के मुख्य न्यायधीश या उसकी अनुपस्थिति में [[उच्चतम न्यायालय]] में उपलब्ध वरिष्ठतम न्यायधीश के समक्ष अपने पद के कार्यपालन की शपथ लेता है। राष्ट्रपति के शपथ पत्र का प्रारूप निम्नलिखित रूप में होता है–&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;'''मैं, अमुक ईश्वर की शपथ लेता हूँ सत्य निष्ठा से प्रतिज्ञाण करता हूँ कि मैं श्रद्धापूर्वक भारत के राष्ट्रपति के पद का कार्यपालन (अथवा राष्ट्रपति के कृत्यों का निर्वहन) करूँगा तथा अपनी पूरी योग्यता से संविधान और विधि का परिरक्षण, संरक्षण और प्रतिरक्षण करूँगा और मैं भारत की जनता की सेवा और कल्याण में निरत रहूँगा।'''&amp;lt;/poem&amp;gt; राष्ट्रपति द्वारा लिया जाने वाला शपथ या प्रतिज्ञण उपराष्ट्रपति एवं [[प्रधानमंत्री]] के शपथ से इस मामले में भिन्न है कि राष्ट्रपति संविधान और विधि के परिरक्षण, संरक्षण और प्रतिरक्षण का शपथ लेता है।&lt;br /&gt;
==राष्ट्रपति की पदावधि==&lt;br /&gt;
अनुच्छेद 56 के अनुसार राष्ट्रपति अपने पदग्रहण की तिथि से पाँच वर्ष की अवधि तक अपने पद पर बना रहता है, लेकिन इस पाँच वर्ष की अवधि के पूर्व भी वह उपराष्ट्रपति को अपना त्यागपत्र दे सकता है या उसे पाँच वर्ष की अवधि के पूर्व संविधान के उल्लंघन के लिए संसद द्वारा लगाये गये महाभियोग द्वारा हटाया जा सकता है। राष्ट्रपति द्वारा उपराष्ट्रपति को सम्बोधित त्यागपत्र की सूचना उसके द्वारा (उपराष्ट्रपति के द्वारा) लोकसभा के अध्यक्ष को अविलम्ब दी जाती है।&lt;br /&gt;
राष्ट्रपति अपने पाँच वर्ष के कार्यकाल के पूरा करने के बाद भी तब तक राष्ट्रपति के पद पर बना रहता है, जब तक उसका उत्तराधिकारी पद ग्रहण नहीं कर लेता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भारतीय संविधान में प्रावधान किया गया है कि राष्ट्रपति के पद में आकस्मिक रिक्ति के दौरान या उसकी अनुपस्थिति में उपराष्ट्रपति, राष्ट्रपति के पद के कार्यों का निर्वहन करेगा और राष्ट्रपति तथा उपराष्ट्रपति दोनों के पद में आकस्मिक रिक्ति के दौरान या दोनों की अनुपस्थिति में भारत का मुख्य न्यायधीश राष्ट्रपति के पद के कृत्यों का निर्वहन करेगा। इसी कारण जब [[3 मई]], [[1969]] को तत्कालीन राष्ट्रपति ज़ाकिर हुसैन की मृत्यु हुई, तब तत्कालीन उपराष्ट्रपति वी॰ वी॰ गिरि कार्यकारी राष्ट्रपति नियुक्त किये गये। लेकिन उन्होंने राष्ट्रपति पद के चुनाव में उम्मीदवार होने के लिए अपने पद से त्यागपत्र दे दिया था। तब भारत के तत्कालीन मुख्य न्यायधीश न्यायमूर्ति मो॰ हिदायतुल्ला ने राष्ट्रपति के पद का निर्वहन तब तक किया, जब तक निर्वाचित होकर वी॰ वी॰ गिरि ने राष्ट्रपति पद का कार्यभार ग्रहण नहीं कर लिया। अब तक तीन उपराष्ट्रपति वी॰ वी॰ गिरि (राष्ट्रपति जाकिर हुसैन की मृत्यु के कारण), [[बी.डी. जत्ती]] (राष्ट्रपति फ़खरुद्दीन अली अहमद की मृत्यु के कारण), तथा मोहम्मद हिदायतुल्ला (राष्ट्रपति ज्ञानी ज़ेल सिंह की अनुपस्थिति के कारण) और एक मुख्य न्यायधीश न्यायमूर्ती मोहम्मद हिदायतुल्ला राष्ट्रपति के पद के कृत्यों का निर्वहन कर चुके हैं।&lt;br /&gt;
{| width=&amp;quot;100%&amp;quot;&lt;br /&gt;
|-valign=&amp;quot;top&amp;quot;&lt;br /&gt;
| style=&amp;quot;width:50%&amp;quot;|&lt;br /&gt;
&amp;lt;div style=&amp;quot;border:thin solid #aaaaaa; margin:10px&amp;quot;&amp;gt;&lt;br /&gt;
{| width=&amp;quot;98%&amp;quot; class=&amp;quot;bharattable&amp;quot;&lt;br /&gt;
|+भारत के राष्ट्रपति पद के कृत्यों का निर्वहन करने वाले व्यक्ति&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
! नाम&lt;br /&gt;
! कार्यकाल&lt;br /&gt;
|}&lt;br /&gt;
&amp;lt;div style=&amp;quot;height: 300px; overflow: auto;overflow-x:hidden;&amp;quot;&amp;gt;&lt;br /&gt;
{| class=&amp;quot;bharattable&amp;quot; border=&amp;quot;1&amp;quot; width=&amp;quot;99%&amp;quot;&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[राजेन्द्र प्रसाद|डॉ. राजेन्द्र प्रसाद]]&lt;br /&gt;
| [[26 जनवरी]], [[1950]] से [[13 मई]], [[1962]] &lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[सर्वपल्ली राधाकृष्णन|डॉ. राधाकृष्णन]]&lt;br /&gt;
| [[13 मई]], [[1962]] से [[13 मई]], [[1967]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[डॉ. ज़ाकिर हुसैन]]&lt;br /&gt;
| [[15 मई]], [[1967]] से [[3 मई]], [[1969]] &lt;br /&gt;
(कार्यकाल में ही मृत्यु)&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[वाराहगिरि वेंकट गिरि]] &lt;br /&gt;
(उपराष्ट्रपति)&lt;br /&gt;
| [[3 मई]], [[1969]] से [[20 जुलाई]], [[1969]] &lt;br /&gt;
(कार्यवाहक)&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| न्यायमूर्ति एम॰ हिदायतुल्ला &lt;br /&gt;
(भारत के मुख्य न्यायाधीश)&lt;br /&gt;
| [[20 जुलाई]], [[1969]] से [[24 अगस्त]], [[1969]] &lt;br /&gt;
(कार्यवाहक)&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[वाराहगिरि वेंकट गिरि]]&lt;br /&gt;
| [[24 अगस्त]], [[1969]] से [[24 अगस्त]], [[1974]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[फ़ख़रुद्दीन अली अहमद]]&lt;br /&gt;
| [[24 अगस्त]], [[1974]] से [[11 फ़रवरी]], [[1977]] &lt;br /&gt;
(कार्यकाल में ही मृत्यु)&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[बी.डी. जत्ती]] (उपराष्ट्रपति)  &lt;br /&gt;
| [[11 फ़रवरी]], [[1977]] से [[25 जुलाई]], [[1977]] &lt;br /&gt;
(कार्यवाहक) &lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[नीलम संजीव रेड्डी]]&lt;br /&gt;
| [[25 जुलाई]], [[1977]] से [[25 जुलाई]], [[1982]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[ज्ञानी ज़ैल सिंह]]&lt;br /&gt;
| [[25 जुलाई]], [[1982]] से [[25 जुलाई]], [[1987]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| एम॰ हिदायतुल्ला (उपराष्ट्रपति) &lt;br /&gt;
| [[6 अक्टूबर]], [[1982]] से [[31 अक्टूबर]], [[1982]] &lt;br /&gt;
(जब राष्ट्रपति अनुपस्थित थे)&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[रामस्वामी वेंकटरमण]]  &lt;br /&gt;
| [[25 जुलाई]], [[1987]] से [[25 जुलाई]], [[1992]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[शंकरदयाल शर्मा|डॉ. शंकर दयाल शर्मा]]&lt;br /&gt;
| [[25 जुलाई]], [[1992]] से [[25 जुलाई]], [[1997]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[के. आर. नारायणन]] &lt;br /&gt;
| [[25 जुलाई]], [[1997]] से [[25 जुलाई]], [[2002]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[अब्दुल कलाम|डॉ. ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम]]&lt;br /&gt;
| [[25 जुलाई]], [[2002]] से [[25 जुलाई]], [[2007]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[प्रतिभा पाटिल]]&lt;br /&gt;
| [[25 जुलाई]], [[2006]] से [[25 जुलाई]], [[2012]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[प्रणव मुखर्जी]]&lt;br /&gt;
| [[25 जुलाई]], [[2012]] से निरन्तर&lt;br /&gt;
|}&lt;br /&gt;
&amp;lt;/div&amp;gt;&lt;br /&gt;
&amp;lt;/div&amp;gt;&lt;br /&gt;
| style=&amp;quot;width:50%&amp;quot;|&lt;br /&gt;
&amp;lt;div style=&amp;quot;border:thin solid #aaaaaa; margin:10px&amp;quot;&amp;gt;&lt;br /&gt;
{| width=&amp;quot;98%&amp;quot; class=&amp;quot;bharattable&amp;quot;&lt;br /&gt;
|+विभिन्न चुनावों में राष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों को मिले मत&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
! उम्मीदवार&lt;br /&gt;
! चुनाव तिथि&lt;br /&gt;
! प्राप्त मत&lt;br /&gt;
|}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;div style=&amp;quot;height: 300px; overflow: auto;overflow-x:hidden;&amp;quot;&amp;gt;&lt;br /&gt;
{| class=&amp;quot;bharattable&amp;quot; border=&amp;quot;1&amp;quot; width=&amp;quot;99%&amp;quot;&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| '''प्रथम चुनाव, 1952'''  &lt;br /&gt;
| '''2 मई, 1952'''&lt;br /&gt;
| &lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[डॉ. राजेन्द्र प्रसाद]]&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 5,07,400&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| के. टी. शाह  &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 92,827&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| लक्ष्मण गणेश ठाते  &lt;br /&gt;
| &lt;br /&gt;
| 2,672&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| चौधरी हरी राम  &lt;br /&gt;
| &lt;br /&gt;
| 1,954&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| कृष्ण कुमार चटर्जी &lt;br /&gt;
| &lt;br /&gt;
| 533&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| '''द्वितीय चुनाव, 1957''' &lt;br /&gt;
| '''6 मई, 1957'''&lt;br /&gt;
| '''प्राप्त मत'''&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| डॉ. राजेन्द्र प्रसाद &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 4,59,698&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| नागेन्द्र नारायण दास &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 2000&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| चौधरी हरी राम &lt;br /&gt;
| &lt;br /&gt;
| 1498&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| '''तृतीय चुनाव, 1962'''&lt;br /&gt;
| '''7 मई, 1962'''&lt;br /&gt;
| '''प्राप्त मत'''&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन]] &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 5,53,067&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| चौधरी हरी राम &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 6,341&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| यमुना प्रसाद त्रिशुलिया &lt;br /&gt;
| &lt;br /&gt;
| 3,537&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| '''चौथा चुनाव, 1967'''&lt;br /&gt;
| '''6 मई, 1967'''&lt;br /&gt;
| '''प्राप्त मत'''&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[डॉ. जाकिर हुसैन]] &lt;br /&gt;
| &lt;br /&gt;
| 4,71,244&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| कोका सुब्बाराय &lt;br /&gt;
| &lt;br /&gt;
| 3,63,971&lt;br /&gt;
|- &lt;br /&gt;
| खुबी राम &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 1369&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| यमुना प्रसाद त्रिशुलिया &lt;br /&gt;
| &lt;br /&gt;
| 750&lt;br /&gt;
|- &lt;br /&gt;
| भाम्बुरकर श्रीनिवास गोपाल &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 232&lt;br /&gt;
|- &lt;br /&gt;
| ब्रह्म देव &lt;br /&gt;
| &lt;br /&gt;
| 232&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| कृष्ण कुमार चटर्जी &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 125&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| कुमार कमला सिंह &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 125&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| '''पाँचवाँ चुनाव, 1969''' &lt;br /&gt;
| '''16 अगस्त, 1969'''&lt;br /&gt;
| '''प्राप्त मत'''&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[वी. वी. गिरि]] &lt;br /&gt;
| &lt;br /&gt;
| 4,01,515&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[नीलम संजीव रेड्डी]] &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 3,13,548&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| सी. डी. देशमुख &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 1,12,769&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| चन्द्रदत्त सेनानी &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 5,814&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| गुरुचरण कौर &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 940&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| राजभोज पांडुरंग नाथूजी&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 831&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| पं बाबूलाल भाग &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 576&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| मनोबिहारी अनिरुद्ध शर्मा &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 125&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| चौधरी हरी राम &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 125&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| खूबी राम &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 94&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| '''छठा चुनाव, 1974''' &lt;br /&gt;
| '''17 अगस्त, 1974'''&lt;br /&gt;
| '''प्राप्त मत'''&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[फ़खरुद्दीन अली अहमद]] &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 7,65,587&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| त्रिदिव चौधरी &lt;br /&gt;
| &lt;br /&gt;
| 1,89,196&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| '''सातवां चुनाव, 1977'''&lt;br /&gt;
| '''6 अगस्त, 1977'''&lt;br /&gt;
| '''प्राप्त मत'''&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[नीलम संजीव रेड्डी]]&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| निर्विरोध निर्वाचन&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| '''आठवां चुनाव, 1982'''&lt;br /&gt;
| '''12 जुलाई, 1982'''&lt;br /&gt;
| '''प्राप्त मत'''&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[ज्ञानी जैल सिंह]] &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 7,54,113&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| हंस राज खन्ना &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 2,82,685&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| '''नवां चुनाव, 1987'''&lt;br /&gt;
| '''13 जुलाई, 1987'''&lt;br /&gt;
| '''प्राप्त मत'''&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[रामास्वामी वेंकटरमण]] &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 7,40,148&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| कृष्ण अय्यर रामा अय्यर &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 2,81,550&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| मिथलेश कुमार &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 2,223&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| '''दसवां चुनाव, 1992'''&lt;br /&gt;
| '''13 जुलाई, 1992'''&lt;br /&gt;
| '''प्राप्त मत'''&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[डॉ. शंकर दयाल शर्मा]] &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 6,75,864&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| प्रो. जी. जी. स्वेल &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 3,46,485&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| राम जेठमलानी &lt;br /&gt;
| &lt;br /&gt;
| 2,704&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| जोगेन्द्र सिंह उर्फ धरती पकड़ &lt;br /&gt;
| &lt;br /&gt;
| 1,135&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| '''ग्याहरवां चुनाव, 1997'''&lt;br /&gt;
| '''14 जुलाई, 1997'''&lt;br /&gt;
| '''प्राप्त मत'''&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[के. आर. नारायणन]] &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 9,56,290&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| टी. एन. शेषन &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 50,631&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| '''बारहवां चुनाव, 2002'''&lt;br /&gt;
| '''15 जुलाई, 2002'''&lt;br /&gt;
| '''प्राप्त मत'''&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम]] &lt;br /&gt;
| &lt;br /&gt;
| 9,22,884&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| कैप्टन लक्ष्मी सहगल &lt;br /&gt;
| &lt;br /&gt;
| 1,07,366&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| '''तेरहवां चुनाव, 2007'''&lt;br /&gt;
| '''19 जुलाई, 2007'''&lt;br /&gt;
| '''प्राप्त मत'''&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[प्रतिभा देवी सिंह पाटिल]] &lt;br /&gt;
| &lt;br /&gt;
| 6,38,116&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| भैरोसिंह शेखावत &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 3,31,306&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| '''चौदहवाँ चुनाव, 2012'''&lt;br /&gt;
| '''19 जुलाई, 2012'''&lt;br /&gt;
| '''प्राप्त मत'''&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[प्रणव मुखर्जी]] &lt;br /&gt;
| &lt;br /&gt;
| 7,13,937&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| पी. ए. संगमा &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 315,987&lt;br /&gt;
|}&lt;br /&gt;
&amp;lt;/div&amp;gt;&lt;br /&gt;
&amp;lt;/div&amp;gt;&lt;br /&gt;
|}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==वेतन और भत्ते==&lt;br /&gt;
राष्ट्रपति को नि:शुल्क शासकीय निवास उपलब्ध होता है। वह ऐसी परिलब्धियों, भत्तों और विशेषाधिकारों का हक़दार होता है, जो संसद विधि के द्वारा अवधारित करें, और जब तक संसद ऐसी विधि पारित नहीं करती है उनकी परिलब्धियाँ या भत्ते वही होगें जो संविधान की दूसरी अनुसूची में विनिर्दिष्ट हैं। [[1990]] में राष्ट्रपति की परिलब्धियाँ बढ़ाकर 20,000 रुपये, [[4 अगस्त]], [[1998]] को इसे बढ़ाकर 50,000 रुपये और [[10 जनवरी]], [[2008]] को राष्ट्रपति की परिलब्धियों में एक बार फिर पुन: संशोधन करते हुए इसे बढ़ाकर 1.50 लाख रुपये प्रति माह कर दिया गया। यह वृद्धि जनवरी, [[2006]] से प्रभावी की गई है। राष्ट्रपति को पद त्याग देने के पश्चात् या पदावधि समाप्ति पर उनके वेतन का 50 प्रतिशत पेंशन का प्रावधान है। इस प्रकार पद विमुक्ति के पश्चात् पूर्व राष्ट्रपति को 9,00,000 रुपये वार्षिक पेंशन देय है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पूर्व राष्ट्रपति को एक अतिरिक्त निजी सचिव के अलावा एक कर्मचारी की भी सुविधा का प्रावधान है। उन्हें मोबाइल फ़ोन, इंटरनेट और ब्राडबैंड का कनेक्शन भी उपलब्ध कराया जाएगा। उनके कार्यालय के रख-रखाव पर पूर्व में 12 हज़ार रुपये वार्षिक ख़र्च का प्रावधान था, जिसे बढ़ाकर अब 60,000 रुपये कर दिया गया है। पदावधि के दौरान राष्ट्रपति की मृत्यु हो जाने पर उसे पारिवारिक पेंशन, सुसज्जित आवास, कर्मचारी, कार, टेलीफ़ोन, यात्रा और स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध हैं। संविधान के अनुच्छेद 59 के अनुसार राष्ट्रपति की परिलब्धियाँ और उसके भत्ते उसके कार्यकाल में घटाये नहीं जा सकते। राष्ट्रपति के वेतन एवं भत्ते को आयकर से छूट प्राप्त हैं।&lt;br /&gt;
==महाभियोग की प्रक्रिया==&lt;br /&gt;
राष्ट्रपति को उसके पद से अनुच्छेद 61 के तहत महाभियोग की प्रक्रिया के द्वारा हटाया जा सकता है। राष्ट्रपति के विरुद्ध महाभियोग की प्रक्रिया तब संचालित की जा सकती है, जब उसने संविधान के प्रावधानों का उल्लंघन किया हो। राष्ट्रपति के विरुद्ध महाभियोग चलाने का संकल्प संसद के किसी भी सदन में पेश किया जा सकता है, लेकिन जिस सदन में महाभियोग का संकल्प पेश किया जाना हो, उसके एक चौथाई सदस्यों के द्वारा हस्ताक्षरित आरोप पत्र राष्ट्रपति को 14 दिन पूर्व दिया जाना आवश्यक है। राष्ट्रपति को आरोप पत्र दिये जाने के 14 दिन बाद ही सदन में महाभियोग का संकल्प पेश किया जा सकता है। जिस सदन में संकल्प पेश किया जाए, उसके सदस्य संख्या के बहुमत तथा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो तिहाई बहुमत से संकल्प पारित किया जाना चाहिए। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिस सदन में संकल्प पेश किया गया है, उसके द्वारा पारित किये जाने के बाद संकल्प दूसरे सदन को भेजा जाएगा और दूसरा सदन राष्ट्रपति पर लगाये गये आरोपों की जाँच करेगा। जब दूसरा सदन राष्ट्रपति पर लगाये गये आरोपों की जाँच कर रहा हो, तब राष्ट्रपति या तो स्वयं या तो अपने वकील के माध्यम से लगाये गये आरोपों के सम्बन्ध में अपना पक्ष प्रस्तुत करेगा और स्पष्टीकरण देगा। यदि दूसरा सदन राष्ट्रपति पर लगाये गये आरोपों को सही पाता है तथा अपनी संख्या के बहुमत से तथा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो तिहाई बहुमत पहले सदन द्वारा पारित संकल्प का अनुमोदन कर देता है, तो महाभियोग की कार्रवाई पूर्ण हो जाती है। इस प्रकार राष्ट्रपति अपना पद त्याग करने के लिए बाध्य हो जाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==राष्ट्रपति भवन==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Rashtrapati-Bhavan-1.jpg|thumb|200px|राष्ट्रपति भवन, [[दिल्ली]] &amp;lt;br /&amp;gt; Rashtrapati Bhavan, Delhi]]&lt;br /&gt;
{{main|राष्ट्रपति भवन}}&lt;br /&gt;
राष्ट्रपति भवन वास्तुकला का उत्कृष्ट नमूना है। इस भवन के निर्माण की सोच सर्वप्रथम [[1911]] में उस समय उत्पन्न हुई जब [[दिल्ली दरबार]] ने निर्णय किया कि भारत की राजधानी [[कोलकाता]] से [[दिल्ली]] स्थानान्तरित की जाएगी। इसी के साथ में यह भी निर्णय लिया गया कि [[नई दिल्ली]] में ब्रिटिश वायसराय के रहने के लिए एक आलीशान भवन का निर्माण किया जाएगा।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==राष्ट्रपति के अंगरक्षक==&lt;br /&gt;
राष्ट्रपति की सुरक्षा के लिए अंगरक्षकों की व्यवस्था है। इस अंगरक्षक दस्ते का गठन सर्वप्रथम 1773 में गवर्नर जनरल हेस्टिग्स ने [[बनारस]] में किया था। प्रारम्भ में इस दस्तें में 50 जवान और 50 घोड़े शामिल किये गये थे। बाद में बनारस के राजा चेत सिंह द्वारा इस दस्ते में 50 जवान और 50 घोड़े शामिल कर लिये जाने के बाद इनकी संख्या 100 हो गई। प्रथम विश्वयुद्ध से पूर्व यह संख्या 1845 थी, जो कालान्तर में बढ़कर 1929 हो गई। वर्तमान में राष्ट्रपति के अंगरक्षक दस्ते में 4 अधिकारी, 14 जूनियर कमीशंड अधिकारी और 161 जवानों की टुकड़ी शामिल है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
राष्ट्रपति के सुरक्षा बलों को 1784 तक गवर्नर जनरल का बाडीगार्ड कहा जाता था। 1858 में इसे वायसराय का बाडीगार्ड कहा जाने लगा। [[1944]] तक आते-आते इसका नाम '44वीं डिवीजन निगरानी स्कवॉड्रन' पड़ गया। [[1947]] में एक बार फिर इस दस्ते को 'गवर्नर जनरल बाडीगार्ड' कहा जाने लगा। लेकिन [[21 जनवरी]], [[1950]] को भारत को गणतंत्र घोषित किये जाने के साथ ही इस दस्ते को 'राष्ट्रपति का अंगरक्षक' के रूप में नामांकित कर दिया गया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
राष्ट्रपति के अंगरक्षक के दस्ते के रेजीमेंट का [[नीला रंग|रंग नीला]] और गाढ़ा लाल (मैरून) है। इस दस्ते का अमर वाक्य 'भारत माता की जय' है। वर्तमान में राष्ट्रपति के अंगरक्षक दस्तें में [[सिक्ख]], [[जाट]] और राजपूत सहित लगभग सभी रेजीमेंट के जवान और अधिकारी कार्यरत हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==शक्तियाँ तथा अधिकार==&lt;br /&gt;
भारतीय संविधान द्वारा राष्ट्रपति को निम्नलिखित शक्तियाँ तथा अधिकार प्रदान किये गये हैं–&lt;br /&gt;
====कार्यपालिका शक्तियाँ====&lt;br /&gt;
संविधान के अनुच्छेद 73 के अनुसार संघ की कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में निहित है और वह अपनी इस शक्ति का प्रयोग अपने अधीनस्थ प्राधिकारियों के माध्यम से करता है। यहाँ अधीनस्थ प्राधिकारी का तात्पर्य केन्द्रीय मंत्रिमण्डल से है। राष्ट्रपति की कार्यपालिका शक्तियों को निम्नलिखित तीन भागों में विभाजित किया जा सकता है–&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;u&amp;gt;'''मंत्रिपरिषद का गठन'''&amp;lt;/u&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अनुच्छेद 74 के अनुसार राष्ट्रपति संघ की कार्यपालिका शक्ति के संचालन में सलाह देने के लिए मंत्रिपरिषद का गठन करता है, जिसका अध्यक्ष प्रधानमंत्री होता है। सामान्यत: राष्ट्रपति ऐसे व्यक्ति को प्रधानमंत्री के पद पर नियुक्त करता है जो कि लोकसभा में बहुमत दल का नेता हो। इस प्रकार नियुक्त किये गये प्रधानमंत्री की सलाह पर वह मंत्रिपरिषद के अन्य सदस्यों की नियुक्ति करता है। साथ ही वह प्रधानमंत्री की सलाह पर मंत्रिपरिषद के किसी सदस्य को बर्ख़ास्त कर सकता है। सामान्यत: यह प्रथा रही है कि प्रधानमंत्री लोकसभा का सदस्य होता है, क्योंकि मंत्रिपरिषद लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होता है, लेकिन राष्ट्रपति को यह अधिकार है कि यदि लोकसभा में बहुमत प्राप्त दल किसी ऐसे व्यक्ति को अपना नेता चुनता है, जो लोकसभा का सदस्य नहीं है या राज्यसभा का सदस्य है, तो राष्ट्रपति ऐसे व्यक्ति को प्रधानमंत्री नियुक्त करता है, लेकिन इस प्रकार नियुक्त किये गये व्यक्ति को 6 माह के अंतर्गत संसद का सदस्य होना पड़ता है। इसी तरह प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति ऐसे व्यक्ति को मंत्रिपरिषद में शामिल कर सकता है, जो कि संसद का सदस्य नहीं है। यदि ऐसा व्यक्ति मंत्रिपरिषद में शामिल किया जाता है तो उसे छ: माह के अंतर्गत संसद के किसी सदन का सदस्य बनना पड़ता है। &lt;br /&gt;
जब कभी ऐसी स्थिति उत्पन्न हो कि लोकसभा में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत न मिले या लोकसभा में पेश किये गये अविश्वास प्रस्ताव के पारित होने के कारण मंत्रिपरिषद को त्यागपत्र देना पड़े, तो राष्ट्रपति किस व्यक्ति को प्रधानमंत्री नियुक्त करेगा, इस सम्बन्ध में संविधान में कोई प्रावधान नहीं है। यहाँ पर राष्ट्रपति ऐसे व्यक्ति को प्रधानमंत्री नियुक्त कर सकता है, जिसके सम्बन्ध में उसे विश्वास हो कि वह लोकसभा में अपना बहुमत सिद्ध करता है। इस सम्बन्ध में कुछ हद तक राष्ट्रपति को विशेषाधिकार प्राप्त हैं। इसी विशेषाधिकार के प्रयोग में राष्ट्रपति ने [[1979]] में चरण सिंह को प्रधानमंत्री नियुक्त किया था। चरण सिंह की प्रधानमंत्री पद पर नियुक्ति को इस आधार पर न्यायालय में चुनौती दी गयी थी कि विश्वास मत प्राप्त करने पर ही उन्हें प्रधानमंत्री के रूप में नियुक्त किया जाना चाहिए था, किन्तु न्यायालन ने अपने निर्णय में कहा कि प्रधानमंत्री की नियुक्ति के सम्बन्ध में यह पूर्ववर्ती शर्त नहीं है कि लोकसभा में विश्वास मत प्राप्त किया जाय। इसी तरह [[1989]] में [[वी. पी. सिंह]], [[1991]] में [[नरसिंह राव पी. वी.|पी. वी. नरसिंहराव]], [[1996]] में [[अटल बिहारी वाजपेयी]] और 1996 में ही [[एच डी देवगौड़ा]] तथा [[1997]] में [[इन्द्रकुमार गुजराल]] को प्रधानमंत्री पर पर नियुक्त किया गया था। बाद में [[1998]] में 12वीं लोकसभा के गठन के बाद राष्ट्रपति ने अटल बिहारी वाजपेयी को प्रधानमंत्री पद पर नियुक्त किया था। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;u&amp;gt;'''नियुक्ति सम्बन्धी शक्ति'''&amp;lt;/u&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
संविधान द्वारा राष्ट्रपति को यह शक्ति दी गई है कि वह संघ से सम्बन्धित महत्त्वपूर्ण पदों पर नियुक्तियाँ करें। राष्ट्रपति इस शक्ति के प्रयोग में कई पदाधिकारियों, जैसे-महान्यायवादी, नियंत्रक-महालेखा परीक्षक, वित्त आयोगों के सदस्यों, संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष तथा अन्य सदस्यों, संयुक्त राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष तथा अन्य सदस्यों, मुख्य निर्वाचन आयुक्त, अन्य निर्वाचन आयुक्तों, [[उच्चतम न्यायालय]] तथा उच्च न्यायालयों के न्यायाधाशों, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष तथा सदस्यों, राष्ट्रीय महिला आयोग के अध्यक्ष तथा सदस्यों, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष तथा सदस्यों, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्षों तथा सदस्यों, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष तथा सदस्यों, राज्यों के राज्यपालों, संघ राज्यक्षेत्रों के उपराज्यपालों या प्रशासकों की नियुक्ति कर सकता है। राष्ट्रपति ये नियुक्तियाँ मंत्रिपरिषद की सलाह से करता है। वह अपने द्वारा नियुक्त प्राधिकारियों तथा अधिकारियों को पदमुक्त कर सकता है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;u&amp;gt;'''आयोगों का गठन'''&amp;lt;/u&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
राष्ट्रपति को आयोगों को गठित करने की शक्तियाँ भी प्रदान की गई हैं। यह भारत के राज्य क्षेत्र में सामाजिक और शैक्षणिक दृष्टि से पिछड़े वर्ग की दशाओं का अन्वेषण करने के लिए आयोग, [[राजभाषा]] पर प्रतिवेदन देने के लिए आयोग, अनुसूचित क्षेत्रों के प्रशासन पर रिपोर्ट देने के लिए तथा राज्यों में अनुसूचित जनजातियों के कल्याण सम्बन्धी क्रियाकलापों पर रिपोर्ट देने के लिए आयोग का गठन कर सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
====सैनिक शक्ति====&lt;br /&gt;
संघ के रक्षाबलों का समादेश राष्ट्रपति में निहित होता है। वह रक्षा बलों का प्रमुख होता है। राष्ट्रपति अपने में निहित रक्षा बलों का समादेश उस विधि के अनुसार प्रयुक्त करता है, जिसे संसद बनाये। वह रक्षा बलों के प्रमुखों को भी नियुक्त करता है। &lt;br /&gt;
====राजनयिक शक्तियाँ ====&lt;br /&gt;
अन्य देशों के साथ में भारत का संव्यवहार राष्ट्रपति के नाम से किया जाता है। अंतर्राष्ट्रीय मामलों में राष्ट्रपति भारत का प्रतिनिधित्व करता है। अन्य देशों में भेजे जाने वाले राजदूत तथा उच्चायुक्त राष्ट्रपति के द्वारा नियुक्त जाते हैं। साथ ही अन्य देशों से भारत में नियुक्ति पर आने वाले राजदूतों व उच्चायुक्तों का स्वागत भी राष्ट्रपति के द्वारा किया जाता है। जब अन्य देश के राजदूत या उच्चायुक्त भारत में नियुक्त होकर आते हैं, तो वे अपना 'प्रत्यय पत्र' राष्ट्रपति के समक्ष पेश करते हैं। समस्त अंतर्राष्ट्रीय क़रार और सन्धियाँ राष्ट्रपति के नाम से की जाती हैं, लेकिन राष्ट्रपति अपनी राजनयिक शक्ति का प्रयोग मंत्रिपरिषद की सलाह पर करता है।&lt;br /&gt;
====विधायी शक्तियाँ एवं कार्य====&lt;br /&gt;
संविधान द्वारा राष्ट्रपति को व्यापक विधायी शक्तियाँ प्रदान की गयी हैं, जिन्हें निम्नलिखित भागों में विभाजित किया जा सकता है-&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;u&amp;gt;'''संसद से सम्बन्धित शक्ति'''&amp;lt;/u&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
राष्ट्रपति संसद का अभिन्न अंग है, क्योंकि संसद का गठन राष्ट्रपति और लोकसभा तथा राज्यसभा से मिलकर होता है। संसद से सम्बन्धित राष्ट्रपति की शक्तियाँ निम्नलिखित हैं-&lt;br /&gt;
#अनुच्छेद 331 के तहत वह लोकसभा में आंग्ल-भारतीय समुदाय के दो सदस्यों को नामजद कर सकता है, यदि उसके विचार में लोकसभा में उस समूदाय को उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिला है।&lt;br /&gt;
#वह राज्यसभा में 12 सदस्यों को मनोनीत कर सकता है (अनुच्छेद 80, 1)।&lt;br /&gt;
#यदि संसद के किसी सदस्य की अयोग्यता के सम्बन्ध में, दल-बदल के आधार पर के सिवाय, सवाल उत्पन्न होता है, तो उसका निर्णय राष्ट्रपति करेगा, लेकिन राष्ट्रपति ऐसा निर्णय करने के लिए निर्वाचन आयोग की राय लेगा। &lt;br /&gt;
#राष्ट्रपति संसद के सत्र को आहूत करता है, लेकिन संसद के एक सत्र की अन्तित बैठक और आगामी सत्र की प्रथम बैठक के लिए नियत तारीख़ के बीच छ: मास का अन्तर नहीं होना चाहिए। &lt;br /&gt;
#वह सदनों या किसी सदन का सत्रावसान कर सकता है तथा लोकसभा का विघटन कर सकता है। &lt;br /&gt;
#वह संसद के किसी एक सदन में या संसद के संयुक्त अधिवेशन में अभिभाषण कर सकता है। &lt;br /&gt;
#संसद में लम्बित किसी विधेयक के सम्बन्ध में संसद के दोनों सदनों या किसी सदन को संदेश भेज सकता है और उसके संदेश पर यथाशीघ्र विचारण किया जाता है। &lt;br /&gt;
#वह लोकसभा के प्रत्येक साधारण निर्वाचन के पश्चात् प्रथम सत्र के आरम्भ में और प्रत्येक वर्ष के प्रथम सत्र के आरम्भ में संसद के संयुक्त अधिवेशन में अभिभाषण कर सकता है। &lt;br /&gt;
#संसद द्वारा कोई विधेयक पारित किये जाने पर उसे राष्ट्रपति के समक्ष अनुमति के लिए भेजा जाता है। राष्ट्रपति या तो उस पर अपनी अनुमति देता है या विधेयक पर पुन: विचार करने के लिए संसद को वापस भेजता है। यदि संसद द्वारा पुन: विधेयक पारित कर दिया जाता है तो राष्ट्रपति उस पर अपनी अनुमति देने के लिए बाध्य होता है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;u&amp;gt;'''विधेयक को पेश करने की सिफ़ारिश करने की शक्ति'''&amp;lt;/u&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
निम्नलिखित विधेयक राष्ट्रपति की सिफ़ारिश के बिना संसद में पेश नहीं किये जा सकते-&lt;br /&gt;
#धन विधेयक, लेकिन किसी कर को घटाने या समाप्त करने का प्रावधान करने वाले विधेयक राष्ट्रपति की सिफ़ारिश के बिना संसद में पेश किये जा सकते हैं।&lt;br /&gt;
#राज्य का निर्माण करने या विद्यमान राज्य के क्षेत्र, सीमा या नाम में परिवर्तन करने वाले विधेयक।&lt;br /&gt;
#जिस कराधान में राज्य का हित हो, उस कराधान पर प्रभाव डालने वाले विधेयक।&lt;br /&gt;
#जिस विधेयक को अधिनियमित और प्रवर्तित करने से भारत की संचित निधि से व्यय करना पड़ेगा, सम्बन्धी विधेयक।&lt;br /&gt;
#भूमि अधिग्रहण से सम्बन्धित विधेयक।&lt;br /&gt;
#व्यापार की स्वतंत्रता पर रोक लगाने वाले राज्य का कोई विधेयक।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;u&amp;gt;'''राज्य विधान मण्डल के द्वारा बनायी जाने वाली विधि के सम्बन्ध में राष्ट्रपति की शक्ति'''&amp;lt;/u&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
राज्य विधान मण्डल द्वारा बनायी जाने वाली विधि के सम्बन्ध में राष्ट्रपति को निम्नलिखित शक्तियाँ प्राप्त हैं-&lt;br /&gt;
#यदि राज्य विधान मण्डल कोई ऐसा विधेयक पारित करता है, जिससे उच्च न्यायालय की अधिकारिता प्रभावित होती है, तो राज्यपाल उस विधेयक पर अनुमति नहीं देगा और उसे राष्ट्रपति की अनुमति के लिए आरक्षित कर देगा।&lt;br /&gt;
#राज्य विधान मण्डल के द्वारा सम्पत्ति प्राप्त करने के लिए पारित विधेयक को राष्ट्रपति की अनुमति के लिए आरक्षित रखा जाएगा। &lt;br /&gt;
#किसी राज्य के अन्दर या दूसरे राज्यों के साथ व्यापार आदि पर प्रतिबन्ध लगाने वाले विधेयकों को विधानसभा में पेश करने के पहले राष्ट्रपति की अनुमति लेनी होगी।&lt;br /&gt;
#वित्तीय आपात स्थिति के प्रवर्तन की स्थिति में राष्ट्रपति निर्देश दे सकता है कि सभी धन विधेयकों को राज्य विधान सभा में पेश करने के पहले उस पर राष्ट्रपति की अनुमति ली जाए। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;u&amp;gt;'''अध्यादेश जारी करने की शक्ति'''&amp;lt;/u&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
संविधान के अनुच्छेद 123 के तहत राष्ट्रपति को अध्यादेश जारी करने की शक्ति प्रदान की गयी है। राष्ट्रपति द्वारा जारी अध्यादेश का वही प्रभाव होता है, जो संसद द्वारा पारित तथा राष्ट्रपति के द्वारा अनुमोदित अधिनियम को होता है, लेकिन अन्तर यह होता है कि अधिनियम का प्रभाव तब तक स्थायी होता है, जब तक की संसद के द्वारा या राष्ट्रपति के अध्यादेश द्वारा निरस्त न कर दिया जाए, इसके विपरीत अध्यादेश केवल 6 मास तक ही प्रवर्तन में रहता है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
राष्ट्रपति के द्वारा अध्यादेश संसद के विश्रान्तिकाल में उस समय जारी किया जाता है, जब राष्ट्रपति को यह विश्वास हो जाए कि ऐसी परिस्थिति उत्पन्न हो गयी है, जिसके अनुसार अविलम्ब कार्रवाई करना आवश्यक है। राष्ट्रपति के द्वारा जारी अध्यादेश का प्रभाव केवल 6 मास तक ही रहता है यदि 6 मास के अन्दर संसद द्वारा अनुमोदित न कर दिया जाए। संसद द्वारा अनुमोदित किये जाने पर वह राष्ट्रपति की अनुमति प्राप्त करने के बाद अधिनियम हो जाता है। यदि संसद के अधिवेशन के प्रारम्भ के बाद पहले जारी किये गये अध्यादेश को संसद द्वारा अनुमोदित किये जाने के लिए 6 मास के अन्दर संसद में पेश नहीं किया जाता है, तो अध्यादेश प्रभावहीन हो जाता है। यदि संसद के एक सदन का सत्र चल रहा है और दूसरे सदन का सत्र स्थगित हो, तब भी अध्यादेश जारी किया जा सकता है, क्योंकि संसद का एक सदन कोई विधेयक पारित कर उसे क़ानून बनाने के लिए सक्षम नहीं है।  &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;u&amp;gt;'''नियम बनाने की शक्ति'''&amp;lt;/u&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
राष्ट्रपति को निम्नलिखित के सम्बन्ध में क़ानून बनाने की शक्ति है-&lt;br /&gt;
#राष्ट्रपति के नाम से किये जाने वाले और निष्पादित आदेशों तथा अन्य लिखतों को अधिप्रमाणित करने के ढंग के सम्बन्ध में।&lt;br /&gt;
#राज्यसभा के सभापति तथा लोकसभा के अध्यक्ष से परामर्श करके दोनों सदनों की संयुक्त बैठकों से सम्बन्धित और उनमें परस्पर संचार से सम्बन्धित प्रक्रिया के नियम।&lt;br /&gt;
#संघ या राज्य की सेवा करने वाले व्यक्तियों की भर्ती और सेवा की शर्तों को विनियमित करने वाले नियम।&lt;br /&gt;
#संयुक्त लोक सेवा आयोग तथा संघ लोक सेवा आयोग के सदस्यों कर्मचारियों की सेवा शर्तों को विनियमित करने वाले नियम।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;u&amp;gt;'''राष्ट्रपति की वीटो शक्ति'''&amp;lt;/u&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
संविधान द्वारा राष्ट्रपति को स्पष्टत: वीटो की शक्ति प्रदान नहीं की गयी है। लेकिन संविधान के अनुसार किये गये कार्यों तथा स्थापित परम्पराओं के अनुसार यह माना जाता है कि राष्ट्रपति को निम्नलिखित तीन प्रकार की वीटो शक्तियाँ प्राप्त हैं-&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;u&amp;gt;'''पूर्ण वीटो'''&amp;lt;/u&amp;gt;- जब राष्ट्रपति किसी विधेयक को अनुमति नहीं देता है तो यह कहा जाता है कि राष्ट्रपति ने पूर्ण वीटो की शक्ति का प्रयोग किया है। राष्ट्रपति इस वीटो की शक्ति का प्रयोग गैर सरकारी विधेयक पर अनुमति न प्रदान करके कर सकता है या ऐसे विधेयक पर अनुमति न प्रदान करके कर सकता है जो ऐसी सरकार के द्वारा पारित किया गया हो, जो विधेयक पर अनुमति देने के पूर्व ही त्यागपत्र दे दे और नयी सरकार विधेयक पर अनुमति न देने की सिफ़ारिश करे। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;u&amp;gt;'''निलम्बनकारी वीटो'''&amp;lt;/u&amp;gt;- जब राष्ट्रपति किसी विधेयक के प्रभाव को निलम्बित रखने के लिए अनुमति देने हेतु अपने पास प्रेषित विधेयक को संसद के पास पुनर्विचार के लिए भेजता है, तो यह कहा जाता है कि उन्होंने निलम्बनकारी वीटो का प्रयोग किया है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;u&amp;gt;'''जेबी वीटो'''&amp;lt;/u&amp;gt;- इस पॉकेट वीटो भी कहा जाता है। जब राष्टपति संसद द्वारा पारित करके अनुमति के लिए भेजे गए विधेयक पर न तो अनुमति देता है और न ही उसे पुनर्विचार के लिए वापस भेजता है तो यह कहा जाता है कि राष्ट्रपति ने जेबी या पॉकेट वीटो का प्रयोग किया है। इस वीटो का प्रयोग राष्ट्रपति (ज्ञानी ज़ेल सिंह) ने [[1986]] में संसद द्वारा पारित भारतीय डाक (संशोधन) अधिनियम के सन्दर्भ में किया है। राष्ट्रपति ने न तो इस पर अपनी अनुमति दी है और न ही इसे संसद के पास पुनर्विचार के लिए भेजा है। &lt;br /&gt;
====वित्तीय शक्तियाँ====&lt;br /&gt;
राष्ट्रपति को संविधान द्वारा कई वित्तीय शक्तियाँ प्रदान की गयी हैं। धन विधेयक तथा वित्त विधेयक को तभी लोकसभा में पेश किया जाता है जब राष्ट्रपति उसकी सिफ़ारिश करे। जिस विधेयक को प्रवर्तित किये जान पर भारत की संचित निधि में व्यय करना पड़े, उस विधेयक को संसद द्वारा तभी पारित किया जाएगा, जब राष्ट्रपति उस विधेयक पर विचार-विमर्श करने की सिफ़ारिश संसद से करें। जिस कराधान में राज्य का हित सम्बद्ध है, उस कराधान से सम्बन्धित विधेयक को राष्ट्रपति की अनुमति से ही लोकसभा में पेश किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त राष्ट्रपति प्रत्येक वर्ष वित्तमंत्री के माध्यम से वर्ष का बजट लोकसभा में पेश करवाता है तथा प्रत्येक पाँच वर्ष की समाप्ति पर वित्त आयोग का गठन करता है। राष्ट्रपति वित्त आयोग द्वारा की गयी प्रत्येक सिफ़ारिश को, उस पर किये गये स्पष्टीकरण ज्ञापन सहित संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाता है। &lt;br /&gt;
====न्यायिक शक्तियाँ====&lt;br /&gt;
संविधान द्वारा राष्ट्रपति को तीन प्रकार की न्यायिक शक्तियाँ प्रदान की गई हैं, जिनका विवरण निम्न प्रकार से है-&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;u&amp;gt;'''न्यायाधीशों की नियुक्ति करने की शक्ति'''&amp;lt;/u&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अनुच्छेद 124 के अनुसार राष्ट्रपति को उच्चतम न्यायालय तथा उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को नियुक्त करने की शक्ति है। उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति करने के लिए राष्ट्रपति उच्चतम न्यायालय तथा उच्च न्यायालय के ऐसे न्यायाधीशों से परामर्श करेगा, जिनसे परामर्श करना वह आवश्यक समझे। मुख्य न्यायाधीश के अतिरिक्त अन्य न्यायाधीशों की नियुक्ति के पूर्व वह मुख्य न्यायाधीश से परामर्श करेगा। लेकिन संविधान में स्पष्ट रूप से यह प्रावधान नहीं किया गया है कि राष्ट्रपति मुख्य न्यायाधीश के परामर्श से बाध्य होंगे या नहीं। लेकिन [[6 अक्टूबर]], [[1993]] को दिये गये एक निर्णय में उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि &lt;br /&gt;
*उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठतम न्यायाधीश को ही देश का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया जाना चाहिए, &lt;br /&gt;
*उच्चतम न्यायालय के अन्य न्यायाधीशों की नियुक्ति के सम्बन्ध में राष्ट्रपति उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की राय मानने के लिए बाध्य है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
राष्ट्रपति उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों तथा अन्य न्यायाधीशों को नियुक्त करता है। उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों को नियुक्त करते समय राष्ट्रपति भारत के मुख्य न्यायाधीश तथा राज्य के राज्यपाल से परामर्श करता है, जबकि अन्य न्यायाधीशों की नियुक्ति करते समय वह भारत के मुख्य न्यायाधीश, राज्य के राज्यपाल तथा सम्बन्धित उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श करता है। 6 अक्टूबर, 1993 को दिये गये निर्णय के अनुसार राष्ट्रपति ऐसी नियुक्तियाँ करते समय भारत के मुख्य न्यायाधीशों की राय को वरीयता देने के लिए बाध्य है। राष्ट्रपति उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों का एक उच्च न्यायालय से दूसरे उच्च न्यायालय में स्थानान्तरण कर सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;u&amp;gt;'''क्षमादान की शक्ति'''&amp;lt;/u&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
संविधान के अनुच्छेद 72 के तहत राष्ट्रपति को क्षमा तथा कुछ मामलों में दण्डादेश के निलम्बन, परिहार या लघुकरण की शक्ति प्रदान की गयी है। राष्ट्रपति को निम्नलिखित मामले में क्षमा, तथा दोषसिद्धि के निलम्बन, परिहार या लघुकरण की शक्ति प्राप्त है-&lt;br /&gt;
#सेना न्यायालयों के द्वारा दिये गये दण्ड के मामले में।&lt;br /&gt;
#मृत्यु दण्डादेश के सभी मामलों में।&lt;br /&gt;
#उन सभी मामलों में, जिन्हें दण्ड या दण्डादेश ऐसे विषय सम्बन्धी किसी विधि के विरुद्ध अपराध के लिए दिया गया है, जिस विषय तक संघ की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार है।&lt;br /&gt;
क्षमा का तात्पर्य अपराध के दण्ड से मुक्ति प्रदान करना है। प्रतिलम्बन का तात्पर्य विधि द्वारा विहित दण्ड के स्थायी स्थगन से है। परिहार के अंतर्गत दण्ड की प्रकृति में परिवर्तन किए बिना दण्ड की मात्रा को कम किया जाना है। लघुकरण का अर्थ दण्ड की प्रकृति में परिवर्तन करना है। &lt;br /&gt;
राष्ट्रपति अपनी इस शक्ति का प्रयोग मंत्रिपरिषद की सलाह पर करता है और राष्ट्रपति द्वारा यदि इस शक्ति का प्रयोग किया जाता है तो उसका न्यायिक पुनर्विलोकन न्यायालय द्वारा किया जा सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;u&amp;gt;'''उच्चतम न्यायालय से परामर्श लेने का अधिकार'''&amp;lt;/u&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अनुच्छेद 143 के अनुसार जब राष्ट्रपति को ऐसा प्रतीत हो कि विधि या तथ्य का कोई ऐसा प्रश्न उत्पन्न हुआ है या उत्पन्न होने की सम्भावना है, जो ऐसी प्रकृति का और व्यापक महत्त्व का है कि उस पर उच्चतम न्यायालय की राय प्राप्त करना समीचीन है, तब वह उस प्रश्न पर उच्चतम न्यायालय की राय मांग सकता है।&lt;br /&gt;
====आपातकालीन शक्ति====&lt;br /&gt;
राष्ट्रपति को निम्नलिखित आपातकालीन शक्तियाँ प्रदान की गयी हैं-&lt;br /&gt;
#राष्ट्रीय आपात घोषित करने की (अनुच्छेद 352)।&lt;br /&gt;
#राज्यों में संवैधानिक तन्त्र की विफलता पर वहाँ आपातकाल घोषित करने की (अनुच्छेद 356)।&lt;br /&gt;
#वित्तीय आपात घोषित करने की (अनुच्छेद 360)। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==राष्ट्रपति का विशेषाधिकार==&lt;br /&gt;
संविधान द्वारा राष्ट्रपति को यह विशेषाधिकार प्रदान किया गया है कि वह अपने पद के किसी कर्तव्य के निर्वहन तथा शक्तियों के प्रयोग में किये जाने वाले किसी कार्य के लिए न्यायालय के प्रति उत्तरदायी नहीं होगा। &lt;br /&gt;
==संवैधानिक स्थिति==&lt;br /&gt;
संविधान की भावना तथा संविधान सभा में इसके सदस्यों द्वारा किये गये विचारों के अनुसार राष्ट्रपति राष्ट्र का केवल औपचारिक प्रधान होगा, लेकिन मूल संविधान के अनुच्छेद 74 (1) में यह प्रावधान किया गया था कि राष्ट्रपति को उसके कृत्यों का प्रयोग करने में सहायता और सलाह देने के लिए एक मंत्रिपरिषद होगी, जिसका प्रधान प्रधानमंत्री होगा। इसका यह अर्थ लगाया जाता था कि राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद की सलाह मानने के लिए बाध्य नहीं है और वह अपने विवेक से भी संविधान के प्रावधानों के अनुसार अपने कृत्यों का निर्वहन कर सकता है। इसी प्रावधान के कारण प्रथम प्रधानमंत्री [[पंडित जवाहर लाल नेहरू]] तथा तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद के बीच हिन्दू कोड तथा चीन से सम्बन्ध आदि मामलों में काफ़ी मतभेद था, जिससे दोनों के बीच संघर्ष की स्थिति उत्पन्न हो गयी थी। इसके बावजूद 1976 तक संविधान के इस प्रावधान को क़ायम रखा गया, परन्तु 42वें संविधान संशोधन के द्वारा अनुच्छेद 74 (1) में संशोधन करके यह व्यवस्था की गयी कि राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद की सलाह के अनुसार ही कार्य करेगा और इस प्रकार राष्ट्रपति को मंत्रिपरिषद की सलाह के अनुसार कार्य करने के लिए बाध्य कर दिया गया, किन्तु 44वें संविधान संशोधन द्वारा अनुच्छेद 74 (1) में यह व्यवस्था कर दी गयी कि यदि राष्ट्रपति को मंत्रिपरिषद द्वारा कोई सलाह दी जाती है तो वह मंत्रिपरिषद की दी गयी सलाह पर पुनर्विचार करने के लिए कह सकता है। इस प्रकार मंत्रिपरिषद द्वारा पुनर्विचार के बाद की गयी सलाह पर राष्ट्रपति कार्य करने के लिए बाध्य है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{प्रचार}}&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति&lt;br /&gt;
|आधार=&lt;br /&gt;
|प्रारम्भिक=प्रारम्भिक3&lt;br /&gt;
|माध्यमिक=&lt;br /&gt;
|पूर्णता=&lt;br /&gt;
|शोध=&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{संदर्भ ग्रंथ}}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{भारत के राष्ट्रपति}}&lt;br /&gt;
{{भारत के राष्ट्रपति2}}&lt;br /&gt;
{{भारत गणराज्य}}&lt;br /&gt;
[[Category:राष्ट्रपति और राज्यपाल]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Pankaj pathak</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%AA%E0%A4%A4%E0%A4%BF&amp;diff=285562</id>
		<title>राष्ट्रपति</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%AA%E0%A4%A4%E0%A4%BF&amp;diff=285562"/>
		<updated>2012-07-25T13:27:00Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Pankaj pathak: /* राष्ट्रपति की पदावधि */&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;[[चित्र:Dr.Rajendra-Prasad.jpg|thumb|[[भारत]] के प्रथम राष्ट्रपति [[राजेन्द्र प्रसाद|डॉक्टर राजेन्द्र प्रसाद]]]]&lt;br /&gt;
भारतीय संविधान पर ब्रिटेन के संविधान का व्यापक [[प्रभाव]] है। [[ब्रिटेन]] के संविधान का अनुकरण करते हुए [[भारत]] में संविधान द्वारा संसदीय शासन की स्थापना की गयी है। जिस तरह ब्रिटेन में शासन की प्रमुख वहाँ की साम्राज्ञी होती है, उसी प्रकार से भारत में राज्य का प्रमुख राष्ट्रपति होता है। ब्रिटेन की साम्राज्ञी की तरह भारत का राष्ट्रपति राज्य का औपचारिक प्रमुख होता है और संघ की वास्तविक शक्ति संघ मन्त्रिमण्डल में निहित होती है। इन दोनों देशों के प्रमुखों में मूलभूत अन्तर यह है कि ब्रिटेन की साम्राज्ञी का पद वंशानुगत होता है, जबकि भारत का राष्ट्रपति एक निर्वाचित मण्डल द्वारा निर्वाचित किया जाता है। इसी अन्तर के कारण भारत को प्रजातांत्रिक गणतन्त्र कहा जाता है। भारत में राष्ट्रपति का पद संविधान के अनुच्छेद 52 द्वारा उपबंधित है।&lt;br /&gt;
==भारत के राष्ट्रपति==&lt;br /&gt;
{{Main|भारत के राष्ट्रपति}}&lt;br /&gt;
[[भारत]] के राष्ट्रपति राष्ट्रप्रमुख और भारत के प्रथम नागरिक हैं, साथ ही भारतीय सशस्त्र सेनाओं के प्रमुख सेनापति भी हैं। राष्ट्रपति के पास पर्याप्त शक्ति होती है पर कुछ अपवादों के अलावा राष्ट्रपति के पद में निहित अधिकांश अधिकार वास्तव में प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाले मंत्रिपरिषद के द्वारा उपयोग किए जाते हैं। भारत के राष्ट्रपति [[नई दिल्ली]] स्थित [[राष्ट्रपति भवन]] में रहते हैं, जिसे रायसीना हिल के नाम से भी जाना जाता है। राष्ट्रपति अधिकतम दो कार्यकाल तक हीं पद पर रह सकते हैं। अब तक केवल पहले राष्ट्रपति [[डा. राजेंद्र प्रसाद]] ने हीं इस पद पर दो कार्यकाल पूरा कियें है। महामहिम [[प्रतिभा पाटिल]] भारत की 12वीं तथा इस पद को सुशोभित करने वाली पहली महिला राष्ट्रपति हैं। उन्होंने [[25 जुलाई]], [[2007]] को पद व गोपनीयता की शपथ ली थी।&lt;br /&gt;
==पद की योग्यता==&lt;br /&gt;
{{tocright}}&lt;br /&gt;
संविधान के अनुच्छेद 58 के अनुसार कोई भी व्यक्ति राष्ट्रपति होने के योग्य तब होगा, जब वह–&lt;br /&gt;
#भारत का नागरिक हो।&lt;br /&gt;
#पैंतीस वर्ष की आयु पूरी कर चुका हो।&lt;br /&gt;
#लोक सभा का सदस्य निर्वाचित किये जाने के योग्य हो, तथा&lt;br /&gt;
#भारत सरकार के या किसी राज्य सरकार के अधीन अथवा इन दोनों सरकारों में से किसी के नियन्त्रण में किसी स्थानीय या अन्य प्राधिकारी के अधीन लाभ का पद न धारण करता हो। यदि कोई व्यक्ति राष्ट्रपति या [[उपराष्ट्रपति]] के पद पर या संघ अथवा किसी राज्य के मंत्रिपरिषद का सदस्य हो, तो यह नहीं माना जाएगा कि वह लाभ के पद पर है। &lt;br /&gt;
==निर्वाचन==&lt;br /&gt;
{{seealso|उपराष्ट्रपति}}&lt;br /&gt;
राष्ट्रपति का चुनाव 'अप्रत्यक्ष निर्वाचन' के द्वारा किया जाता है। राष्ट्रपति पद के निर्वाचन में अभ्यर्थी होने के लिए आवश्यक है कि कोई व्यक्ति निर्वाचन के लिए अपना नामांकन करते समय 15,000 रुपये की धरोहर (ज़मानत धनराशि) निर्वाचन अधिकारी के समक्ष जमा करे और उसके नामांकन पत्र का प्रस्ताव कम से कम 50 मतदाताओं के द्वारा किया जाना चाहिए तथा कम से कम 50 मतदाताओं द्वारा उसके नामांकन पत्र का समर्थन भी किया जाना चाहिए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==निर्वाचक मण्डल==&lt;br /&gt;
अनुच्छेद 54 के अनुसार राष्ट्रपति का निर्वाचन ऐसे निर्वाचक मण्डल के द्वारा किया जाएगा, जिसमें [[संसद]] (लोकसभा तथा राज्यसभा) तथा राज्य विधान सभाओं के निर्वाचित सदस्य शामिल होंगे। राष्ट्रपति के निर्वाचक मण्डल में संसद के मनोनीत सदस्य, राज्य विधान सभाओं के मनोनीत सदस्य तथा राज्य विधान परिषदों के सदस्य (निर्वाचित एवं मनोनीत दोनों) शामिल नहीं किये जाते। संघ राज्य क्षेत्रों की विधानसभाओं के सदस्यों को भी 70वें संविधान संशोधन के पूर्व राष्ट्रपति के निर्वाचक मण्डल में शामिल नहीं किया जाता था। लेकिन 70वें संविधान संशोधन द्वारा यह व्यवस्था कर दी गयी है कि दो संघ राज्य क्षेत्रों, यथा [[पाण्डिचेरी]] तथा [[राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली|राष्ट्रीय राजधानी राज्यक्षेत्र दिल्ली]] की विधानसभाओं के सदस्य राष्ट्रपति के निर्वाचक मण्डल में शामिल किये जायेंगे। यहाँ पर यह उल्लेखनीय है कि केवल इन दोनों संघ राज्य क्षेत्रों में ही विधानसभा का गठन हुआ है।&lt;br /&gt;
==राष्ट्रपति के चुनाव पर प्रभाव==&lt;br /&gt;
संविधान सभा में राष्ट्रपति के निर्वाचन प्रक्रिया पर विचार करते समय यह ध्यान नहीं दिया गया था कि निर्वाचक मण्डल में से कोई स्थान रिक्त हो तो राष्ट्रपति का चुनाव कैसे होगा? [[1957]] में जब राष्ट्रपति का चुनाव किया गया तो निर्वाचक मण्डल में कुछ स्थान ख़ाली थे। इसलिए राष्ट्रपति के चुनाव को इस आधार पर चुनौती दी गई की निर्वाचक मण्डल में स्थान रिक्त होने के कारण राष्ट्रपति का चुनाव अवैध है। बाद में [[1961]] में ग्याहरवाँ संविधान संशोधन के तहत यह व्यवस्था की गयी कि निर्वाचक मण्डल में स्थान रिक्त होते हुए भी राष्ट्रपति का चुनाव कैसे कराया जा सकता है।&lt;br /&gt;
==निर्वाचन की पद्धति==&lt;br /&gt;
राष्ट्रपति के निर्वाचन पद्धति के सम्बन्ध में संविधान के अनुच्छेद 55 में प्रावधान किया गया है, जिसके अनुसार राष्ट्रपति के निर्वाचन में दो सिद्धान्तों को अपनाया जाता है–&lt;br /&gt;
====समरूपता तथा समतुल्यता====&lt;br /&gt;
इस सिद्धान्त, जो अनुच्छेद 55 के खण्ड (1) तथा (2) वर्णित हैं, के अनुसार राज्यों के प्रतिनिधित्व के मापमान में एकरूपता तथा सभी राज्यों और संघ के प्रतिनिधित्व में समतुल्यता होगी। इस सिद्धान्त का तात्पर्य यह है कि सभी राज्यों की विधानसभाओं का प्रतिनिधित्व का मान निकालने के लिए एक ही प्रक्रिया अपनायी जाएगी तथा सभी राज्यों की विधानसभाओं के सदस्यों के मत मूल्य का योग संसद के सभी सदस्य के मत मूल्य के योग के समतुल्य अर्थात् समान होगा। राज्यों की विधानसभाओं के सदस्यों के मतमूल्य तथा संसद के सदस्यों के मतमूल्य को निर्धारित करने के लिए निम्नलिखित प्रक्रिया अपनायी जाएगी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;u&amp;gt;'''विधानसभा के सदस्य के मत मूल्य का निर्धारण'''&amp;lt;/u&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रत्येक राज्य की विधानसभा के सदस्य के मतों की संख्या निकालने के लिए उस राज्य की कुल जनसंख्या (जो पिछली जनगणना के अनुसार निर्धारित है) को राज्य विधानसभा की कुल निर्वाचित सदस्य संख्या से विभाजित करके भागफल को 1000 से विभाजित किया जाता है। इस प्रकार भजनफल को एक सदस्य का मत मूल्य मान लेते हैं। यदि उक्त विभाजन के परिणामस्वरूप शेष संख्या 500 से अधिक आये, तो प्रत्येक सदस्य के मतों की संख्या में एक और जोड़ दिया जाता है। राज्य विधान सभा के सदस्यों का मूल्य निम्न प्रकार निकाला जाता है–&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
राज्य की विधानसभा के एक सदस्य का मत मूल्य = राज्य की कुल जनसंख्या / राज्य विधानसभा के निर्वाचित X 1 / 1000 सदस्यों की कुल संख्या&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;u&amp;gt;'''संसद सदस्य के मत मूल्य का निर्धारण'''&amp;lt;/u&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
संसद सदस्य का मत मूल्य निर्धारित करने के लिए राज्यों की विधानसभाओं के सदस्यों के मत मूल्यों को जोड़कर संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्यों के योग का भाग दिया जाता है। संसद सदस्य का मत मूल्य निम्न प्रकार निकाला जाता है–&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
संसद सदस्य का मत मूल्य = कुल राज्य विधान सभाओं के निर्वाचित सदस्यों के मत मूल्यों का योग / संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्यों का योग&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस प्रकार राष्ट्रपति के चुनाव में यह ध्यान रखा जाता है कि सभी राज्य विधान सभाओं के निर्वाचित सदस्यों के मतों के मूल्य का योग संसद के निर्वाचित सदस्यों के मतों के मूल्य का योग बराबर रहे और सभी राज्यों की विधान सभाओं के निर्वाचित सदस्यों के मत मूल्य का निर्धारण करने के लिए एक समान प्रक्रिया अपनायी जाए। इसे आनुपातिक प्रतिनिधित्व का सिद्धान्त भी कहते हैं।&lt;br /&gt;
====एकल संक्रमणीय सिद्धान्त====&lt;br /&gt;
इस सिद्धान्त का तात्पर्य है कि यदि निर्वाचन में एक से अधिक उम्मीदवार हों, तो मतदाताओं द्वारा मतदान वरीयता क्रम से दिया जाए। इसका आशय यह है कि मतदाता मतदान पत्र में उम्मीदवारों के नाम या चुनाव चिह्न के समक्ष अपना वरीयता क्रम लिखेगा। &lt;br /&gt;
==मतगणना==&lt;br /&gt;
राष्ट्रपति के चुनाव के बाद उसी व्यक्ति को निर्वाचित घोषित किया जाता है, जो डाले गये कुल वैध मतों में से आधे से अधिक मत प्राप्त करे। जब राष्ट्रपति के निर्वाचन के बाद मतों की गणना प्रारम्भ होती है, तो सर्वप्रथम अवैध मतपत्रों को निरस्त करके शेष वैध मत पत्रों का मत मूल्य निकाला जाता है और निकाले गए मत मूल्य में 2 का भाग देकर भागफल में एक जोड़कर निर्वाचित घोषित किये जाने वाले उम्मीदवार का कोटा निकाला जाता है। यदि मतगणना के प्रथम दौर में किसी उम्मीदवार को नियत किये गये कोटा के बराबर मत मूल्य प्राप्त हो जाता है, तो उसे निर्वाचित घोषित कर दिया जाता है। यदि किसी उम्मीदवार को नियम कोटा के बराबर मत मूल्य नहीं प्राप्त होता है, तो मतगणना का दूसरा दौर प्रारम्भ होता है। दूसरे दौर के मतगणना में जिस उम्मीदवार को प्रथम वरीयता का सबसे कम मत मिला होता है, उसको गणना से बाहर करके उसके द्वितीय वरीयता के मत मूल्य को अन्य उम्मीदवारों को स्थानान्तरित कर दिया जाता है। यदि द्वितीय दौर की गणना में भी किसी उम्मीदवार को नियत किये गये कोटा के बराबर मत मूल्य नहीं प्राप्त होता है, तो तीसरे दौर की गणना होती है। तीसरे दौर की गणना में उस उम्मीदवार को गणना से बाहर कर दिया जाता है, जो कि दूसरे दौर की गणना में सबसे कम मूल्य पाता है और इस उम्मीदवार के तृतीय वरीयता मत मूल्य को शेष उम्मीदवारों के पक्ष में स्थानान्तरित कर दिया जाता है। यह प्रक्रिया तब तक अपनायी जाती है, जब तक कि किसी उम्मीदवार को नियत किये गये कोटा के मत मूल्य के बराबर मत मूल्य प्राप्त नहीं हो जाता है।&lt;br /&gt;
==भारत में राष्ट्रपति का चुनाव==&lt;br /&gt;
[[चित्र:President-Selection.jpg|thumb|भारत में राष्ट्रपति चुनाव का तरीक़ा]]&lt;br /&gt;
भारत में अब तक 12 व्यक्ति राष्ट्रपति का पद ग्रहण कर चुके हैं, जिनमें से प्रथम राष्ट्रपति [[डॉ. राजेंद्र प्रसाद]] ने 2 बार इस पद को सुशोभित किया है। राष्ट्रपति की पदावधि 5 वर्ष की होती है। लेकिन राजेन्द्र प्रसाद 10 वर्ष से अधिक की अवधि तक राष्ट्रपति का पद धारण किये था। इसका कारण यह था कि [[1952]] में राष्ट्रपति के प्रथम चुनाव के पूर्व ही [[24 जनवरी]], [[1950]] को संविधान सभा के द्वारा राष्ट्रपति के रूप में डॉ. राजेंद्र प्रसाद का चुनाव कर लिया गया था। संविधान के प्रवर्तन की तिथि अर्थात् [[26 जनवरी]], 1950 से लेकर [[12 मई]], 1952 तक राजेन्द्र प्रसाद राष्ट्रपति के पद पर रहे। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भारत में अब तक 13 बार राष्ट्रपति के चुनाव हुए हैं, जिनमें से एक बार, अर्थात् [[1977]] में, श्री नीलम संजीव रेड्डी निर्विरोध राष्ट्रपति चुने गये थे। शेष 12 बार राष्ट्रपति पद के चुनाव में एक से अधिक उम्मीदवार थे। अब तक केवल डॉ. राजेंद्र प्रसाद, [[फ़ख़रुद्दीन अली अहमद]], [[नीलम संजीव रेड्डी]] तथा [[ज्ञानी ज़ैल सिंह]] को छोड़कर अन्य सभी राष्ट्रपति पूर्व में उपराष्ट्रपति के पद को सुशोभित कर चुके थे। [[डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन|डॉ. एस. राधाकृष्णन]] लगातार दो बार उपराष्ट्रपति तथा एक बार राष्ट्रपति के पद पर आसीन हुए। निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में [[वी.वी. गिरी]] ऐसे राष्ट्रपति निर्वाचित हुए थे, जिन्होंने कांग्रेस का स्पष्ट बहुमत होते हुए भी उसके उम्मीदवार को पराजित किया था। अब तक नीलम संजीव रेड्डी एकमात्र ऐसे राष्ट्रपति हुए हैं, जो एक बार चुनाव में पराजित हुए तथा बाद में निर्विरोध निर्वाचित हुए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[19 जुलाई]], [[2007]] को सम्पन्न 13वें राष्ट्रपति के चुनाव के लिए निर्वाचक मण्डल में 4,896 सदस्य थे, जिसमें 776 सांसद और 4,120 विधायक शामिल हैं। इन सबका कुल मत मूल्य 10,98,882 था। वर्तमान में प्रत्येक सांसद का मत मूल्य 708 है। सांसदों का कुल मत मूल्य 5,49,408 और विधायकों का कुल मत मूल्य 5,49,474 है। राज्यों में [[उत्तर प्रदेश]] विधानसभा का मत मूल्य सर्वाधिक 83,824 है। इसके बाद क्रमश: [[महाराष्ट्र]] विधानसभा का मत मूल्य 50,400, [[पश्चिम बंगाल]] का 44,394, [[आंध्र प्रदेश]] का 43,512 और [[बिहार]] विधानसभा का मत मूल्य 42,039 है। [[सिक्किम]] विधानसभा का मत मूल्य सबसे कम 224 है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==मतदान स्थल==&lt;br /&gt;
राष्ट्रपति के चुनाव में राज्य विधान सभाओं के सदस्य अपने-अपने राज्यों की राजधानियों में मतदान करते हैं और संसद सदस्य [[दिल्ली]] में या अपने राज्य की राजधानी में मतदान कर सकते हैं। यदि कोई संसद सदस्य अपने राज्य की राजधानी में मतदान करना चाहता है तो उसे इसकी सूचना 10 दिन पूर्व ही चुनाव आयोग का देनी चाहिए।&lt;br /&gt;
==चुनाव का समय ==&lt;br /&gt;
संविधान के अनुच्छेद 62 में केवल यह अपेक्षा की गई है कि राष्ट्रपति का चुनाव निर्धारित समय के अन्दर सम्पन्न करा लिया जाना चाहिए। निर्वाचन की प्रक्रिया को पाँच वर्ष की अवधि समाप्त हो जाने के बाद स्थगित नहीं रखा जा सकता है। राष्ट्रपति का चुनाव कब कराया जाएगा, इसके सम्बन्ध में संविधान में कोई प्रावधान नहीं किया गया है। संविधान में अनुच्छेद 71 (3) में केवल यह प्रावधान किया गया है कि राष्ट्रपति के निर्वाचन से सम्बन्धित या संसक्त किसी विषय का विनियमन संसद विधि द्वारा कर सकेगी। इस शक्ति का प्रयोग करके संसद ने राष्ट्रपतीय तथा उपराष्ट्रपतीय निर्वाचन अधिनियम, 1952 पारित करके यह प्रावधान किया है कि राष्ट्रपति का चुनाव निवर्तमान राष्ट्रपति की पदावधि की समाप्ति के पूर्व ही कराया जाना चाहिए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;u&amp;gt;'''किसी राज्य की विधानसभा भंग होने की स्थिति में राष्ट्रपति चुनाव '''&amp;lt;/u&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
किसी राज्य की विधानसभा भंग होने की स्थिति में भी राष्ट्रपति का चुनाव सम्पन्न होता है। इस सन्दर्भ में 11वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1961 में यह स्पष्ट किया गया है कि राष्ट्रपति के चुनाव को इस आधार पर चुनौती नहीं दी जा सकती कि निर्वाचक मण्डल में कोई स्थान रिक्त था। सर्वोच्च न्यायालय ने भी यह निर्णय दिया है कि बिना किसी विधानसभा के ही राष्ट्रपति का चुनाव कराया जा सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''राष्ट्रपति चुनाव में एक विधायक के मत का मूल्य'''&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
एक विधायक के मत के मूल्य का फार्मूला = राज्य की कुल जनसंख्या / राज्य विधानसभा के निर्वाचित विधायकों की संख्या X 1000&lt;br /&gt;
{| class=&amp;quot;bharattable&amp;quot; border=&amp;quot;1&amp;quot;&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
! राज्य&lt;br /&gt;
! सीटों की संख्या&amp;lt;ref&amp;gt;विधानसभा&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
! जनसंख्या (1971)&lt;br /&gt;
! मत का मूल्य&amp;lt;ref&amp;gt;एक विधायक&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
! मतों का मूल्य&amp;lt;ref&amp;gt;राज्य के कुल निर्वाचित विधायक&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[आन्ध्र प्रदेश]]&lt;br /&gt;
| 294&lt;br /&gt;
| 43,502,708&lt;br /&gt;
| 148&lt;br /&gt;
| 148 x 294 = 43,512&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[अरुणाचल प्रदेश]]&lt;br /&gt;
| 60&lt;br /&gt;
| 467,511&lt;br /&gt;
| 08&lt;br /&gt;
| 08 x 60 = 480&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[असम]]&lt;br /&gt;
| 126 &lt;br /&gt;
| 14,625,152&lt;br /&gt;
| 116&lt;br /&gt;
| 116 x 126 = 14,616&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[बिहार]]&lt;br /&gt;
| 243&lt;br /&gt;
| 42,126,239&lt;br /&gt;
| 173&lt;br /&gt;
| 173 x 243 = 42,039&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[छत्तीसगढ़]]&lt;br /&gt;
| 90&lt;br /&gt;
| 11,637,497&lt;br /&gt;
| 129&lt;br /&gt;
| 129 x 90 = 11,610&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[गोवा]]&lt;br /&gt;
| 40&lt;br /&gt;
| 795,120&lt;br /&gt;
| 20&lt;br /&gt;
| 20 x 40 = 800&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[गुजरात]]&lt;br /&gt;
| 182&lt;br /&gt;
| 26,697,475&lt;br /&gt;
| 147&lt;br /&gt;
| 147 x 182 = 26,754&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[हरियाणा]]&lt;br /&gt;
| 90&lt;br /&gt;
| 10,036,808&lt;br /&gt;
| 112&lt;br /&gt;
| 112 x 90 = 10,080&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[हिमाचल प्रदेश]]&lt;br /&gt;
| 68&lt;br /&gt;
| 3,460,434&lt;br /&gt;
| 51&lt;br /&gt;
| 51 x 68 = 3,468&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[जम्मू और कश्मीर]]&lt;br /&gt;
| 87&lt;br /&gt;
| 6,300,000&lt;br /&gt;
| 72&lt;br /&gt;
| 72 x 87 = 6,264&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[झारखण्ड]]&lt;br /&gt;
| 81&lt;br /&gt;
| 14,227,133&lt;br /&gt;
| 176&lt;br /&gt;
| 176 x 81 = 14,256&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[कर्नाटक]]&lt;br /&gt;
| 224&lt;br /&gt;
| 29,299,014&lt;br /&gt;
| 131&lt;br /&gt;
| 131 x 224 = 29,344&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[केरल]]&lt;br /&gt;
| 140&lt;br /&gt;
| 21,347,375&lt;br /&gt;
| 152&lt;br /&gt;
| 152 x 140 = 21,280&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[मध्य प्रदेश]]&lt;br /&gt;
| 230&lt;br /&gt;
| 30,016,625&lt;br /&gt;
| 131&lt;br /&gt;
| 131 x 230 = 30,130&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[महाराष्ट्र]]&lt;br /&gt;
| 288&lt;br /&gt;
| 50,412,235&lt;br /&gt;
| 175&lt;br /&gt;
| 175 x 288 = 50,400&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[मणिपुर]]&lt;br /&gt;
| 60&lt;br /&gt;
| 1,072,753&lt;br /&gt;
| 18&lt;br /&gt;
| 18 x 60 = 1,080&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[मेघालय]]&lt;br /&gt;
| 60&lt;br /&gt;
| 1,011,699&lt;br /&gt;
| 17&lt;br /&gt;
| 17 x 60 = 1,020&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[मिज़ोरम]]&lt;br /&gt;
| 40&lt;br /&gt;
| 332,390&lt;br /&gt;
| 8&lt;br /&gt;
| 8 x 40 = 320&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[नागालैण्ड]]&lt;br /&gt;
| 60&lt;br /&gt;
| 516,449&lt;br /&gt;
| 9&lt;br /&gt;
| 9 x 60 = 540&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[उड़ीसा]]&lt;br /&gt;
| 147&lt;br /&gt;
| 21,944,615&lt;br /&gt;
| 149&lt;br /&gt;
| 149 x 147 = 21,903&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[पंजाब]]&lt;br /&gt;
| 117&lt;br /&gt;
| 13,551,060&lt;br /&gt;
| 116&lt;br /&gt;
| 116 x 117 = 13,572&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[राजस्थान]]&lt;br /&gt;
| 200&lt;br /&gt;
| 25,765,806&lt;br /&gt;
| 129&lt;br /&gt;
| 129 x 200 = 25,800&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[सिक्किम]]&lt;br /&gt;
| 32&lt;br /&gt;
| 209,843&lt;br /&gt;
| 7&lt;br /&gt;
| 7 x 32 = 224&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[तमिलनाडु]]&lt;br /&gt;
| 234&lt;br /&gt;
| 41,199,168&lt;br /&gt;
| 176&lt;br /&gt;
| 176 x 234 = 41,184 &lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[त्रिपुरा]]&lt;br /&gt;
| 60&lt;br /&gt;
| 1,556,342&lt;br /&gt;
| 26&lt;br /&gt;
| 26 x 60 = 1,560&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[उत्तर प्रदेश]]&lt;br /&gt;
| 403&lt;br /&gt;
| 83,849,905&lt;br /&gt;
| 208&lt;br /&gt;
| 208 x 403 = 83,824&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[उत्तराखण्ड]]&lt;br /&gt;
| 70&lt;br /&gt;
| 4,491,239&lt;br /&gt;
| 64&lt;br /&gt;
| 64 x 70 = 4,480&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[पश्चिम बंगाल]]&lt;br /&gt;
| 294&lt;br /&gt;
| 44,312,011&lt;br /&gt;
| 151&lt;br /&gt;
| 151 x 294 =44,394&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[दिल्ली]]&lt;br /&gt;
| 70 &lt;br /&gt;
| 40,65,698&lt;br /&gt;
| 58&lt;br /&gt;
| 58 x 70 = 4,060&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[पुदुचेरी]]&lt;br /&gt;
| 30 &lt;br /&gt;
| 471,707&lt;br /&gt;
| 16&lt;br /&gt;
| 16 x 30 = 480&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| कुल&lt;br /&gt;
|4120&lt;br /&gt;
| 549,302,005&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| =549,474&lt;br /&gt;
|}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==एक सांसद के मत का मूल्य==&lt;br /&gt;
*राज्य के कुल निर्वाचित विधायकों के मतों का मूल्य = 5,49,474&lt;br /&gt;
*लोकसभा के कुल निर्वाचित सदस्यों की संख्या = 543&lt;br /&gt;
*राज्यसभा के कुल निर्वाचित सदस्यों की संख्या = 233&lt;br /&gt;
*कुल सांसदों की संख्या = 543+233 = 776&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
एक सांसद के मत के मूल्य का फार्मूला = राज्य के कुल मतों का मूल्य यानी 5,49,474 / कुल सांसदों की संख्या यानी 778 = 708.085 यानी 708&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सांसदों के कुल मतों का मूल्य, 708×776 = 5,49,408&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
वर्ष [[2002]] के राष्ट्रपति चुनाव में भाग लेने वाले कुल मतदाताओं की संख्या = कुल विधायक (4120) + कुल सांसद (776) = 4896&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सभी मतदाताओं के कुल मतों का मूल्य = 5,49,474+5,49,408 = 10,98,882&amp;lt;ref&amp;gt;नोट - भारतीय संविधान के अनुसार वर्ष 2002 के राष्ट्रपति चुनाव के लिए भी [[1971]] की जनगणना के आंकड़े ही मान्य थे, केवल [[झारखण्ड]], [[उत्तरांचल]] और [[छत्तीसगढ़]] जैसे नये बने तीन राज्यों के विधायकों के मतों का मूल्य अलग से तय किया गया है।&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
राष्ट्रपति के चुनाव को इस आधार पर चुनौती नहीं दी जा सकती कि निर्वाचक मंडल में कोई रिक्त स्थान था। सर्वोच्च न्यायालय ने भी यह निर्णय दिया है कि बिना किसी विधानसभा के ही राष्ट्रपति का चुनाव कराया जा सकता है।&lt;br /&gt;
==सम्बन्धित विवाद का विनिश्चय==&lt;br /&gt;
अनुच्छेद 7 के अनुसार राष्ट्रपति के चुनाव से सम्बन्धित विवाद का विनिश्चय [[उच्चतम न्यायालय]] द्वारा किया जाएगा। यदि कोई व्यक्ति राष्ट्रपति के रूप में निर्वाचित होकर पद ग्रहण कर लेता है और बाद में उसका चुनाव उच्चतम न्यायालय द्वारा अवैध घोषित किया जाता है, तो राष्ट्रपति के पद पर रहते हुए भी उसके द्वारा किया गया कार्य या की गयी घोषणा अविधिमान्य नहीं होगी।&lt;br /&gt;
==पुननिर्वाचन के लिए योग्यता==&lt;br /&gt;
अनुच्छेद 57 के अनुसार [[भारत]] के राष्ट्रपति पद पर पदस्थ व्यक्ति दूसरे कार्यकाल के लिए भी चुनाव में उम्मीदवार बन सकता है। वैसे संविधान में यह व्यवस्था नहीं की गयी है कि राष्ट्रपति पद पर पदस्थ व्यक्ति दूसरे कार्यकाल के लिए निर्वाचन में भाग ले सकता है या नहीं, लेकिन सामान्यत: यह परम्परा बन गयी है कि राष्ट्रपति पद के लिए कोई व्यक्ति एक ही बार निर्वाचित किया जाता है। इसका अपवाद राजेन्द्र प्रसाद रहे हैं, जो दो बार राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार थे। इसके अतिरिक्त दो राष्ट्रपति [[ज़ाकिर हुसैन]] तथा फ़खरुद्दीन अली अहमद, जिनकी कार्यकाल के दौरान ही मृत्यु हो गई थी, के सिवाय सभी राष्ट्रपति अपने एक कार्यकाल के बाद दूसरी बार राष्ट्रपति के चुनाव में उम्मीदवार नहीं बने।&lt;br /&gt;
{| class=&amp;quot;bharattable&amp;quot; border=&amp;quot;1&amp;quot;&lt;br /&gt;
|+राष्ट्रपति पद का चुनाव तथा विजयी एवं द्वितीय स्थान प्राप्त उम्मीदवारों की सूची&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
! क्र.सं.&lt;br /&gt;
! वर्ष&lt;br /&gt;
! निर्वाचित प्रत्याशी&lt;br /&gt;
! द्वितीय स्थान प्राप्त प्रत्याशी&lt;br /&gt;
! मत प्रतिशत&lt;br /&gt;
! चित्र&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| पहला&lt;br /&gt;
| [[1952]]&lt;br /&gt;
| [[राजेन्द्र प्रसाद|डॉ. राजेन्द्र प्रसाद]]&lt;br /&gt;
| के. टी. शाह&lt;br /&gt;
| 83.80&lt;br /&gt;
| [[चित्र:Dr.Rajendra-Prasad.jpg|30px]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| दूसरा                &lt;br /&gt;
| [[1957]]&lt;br /&gt;
| [[राजेन्द्र प्रसाद|डॉ. राजेन्द्र प्रसाद]]&lt;br /&gt;
| एन. एन. दास&lt;br /&gt;
| 99.30&lt;br /&gt;
| [[चित्र:Dr.Rajendra-Prasad.jpg|30px]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| तीसरा   &lt;br /&gt;
| [[1962]]&lt;br /&gt;
| [[सर्वपल्ली राधाकृष्णन|डॉ. राधाकृष्णन]]&lt;br /&gt;
| सी. एच. राम&lt;br /&gt;
| 98.30&lt;br /&gt;
| [[चित्र:Sarvepalli-Radhakrishnan.jpg|30px]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| चौथा   &lt;br /&gt;
| [[1967]]&lt;br /&gt;
| [[डॉ. ज़ाकिर हुसैन]]&lt;br /&gt;
| के. सुब्बाराव&lt;br /&gt;
| 56.20&lt;br /&gt;
| [[चित्र:Dr.Zakir-Hussain.jpg|30px]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| पाँचवाँ   &lt;br /&gt;
| [[1969]]&lt;br /&gt;
| [[वाराहगिरि वेंकट गिरि]]&lt;br /&gt;
| [[नीलम संजीव रेड्डी]]&lt;br /&gt;
| 50.20&lt;br /&gt;
| [[चित्र:V.V.Giri.jpg|30px]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| छठा &lt;br /&gt;
| [[1974]]&lt;br /&gt;
| [[फ़ख़रुद्दीन अली अहमद]]&lt;br /&gt;
| टी. चौधरी&lt;br /&gt;
| 80.20&lt;br /&gt;
| [[चित्र:Fakhruddin-Ali-Ahmed.jpg|30px]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| सातवाँ  &lt;br /&gt;
| [[1977]]&lt;br /&gt;
| [[नीलम संजीव रेड्डी]]&lt;br /&gt;
| निर्विरोध&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| [[चित्र:Neelam Sanjiva Reddy.jpg|30px]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| आठवाँ &lt;br /&gt;
| [[1982]]&lt;br /&gt;
| [[ज्ञानी ज़ैल सिंह]]&lt;br /&gt;
| एच. आर. खन्ना&lt;br /&gt;
| 72.70&lt;br /&gt;
| [[चित्र:Giani-Zail-Singh.jpg|30px]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| नवाँ &lt;br /&gt;
| [[1987]]&lt;br /&gt;
| [[रामस्वामी वेंकटरमण|आर. वेंकिटरमन अय्यर]]&lt;br /&gt;
| वी. आर. कृष्ण&lt;br /&gt;
| 72.30&lt;br /&gt;
| [[चित्र:R. Venkataraman.jpg|30px]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| दसवाँ      &lt;br /&gt;
| [[1992]]&lt;br /&gt;
| [[शंकरदयाल शर्मा|डॉ. शंकरदयाल शर्मा]]&lt;br /&gt;
| जी. जी. स्वेल&lt;br /&gt;
| 64.78&lt;br /&gt;
| [[चित्र:Shankar-Dayal-Sharma.jpg|30px]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| ग्यारहवाँ  &lt;br /&gt;
| [[1997]]&lt;br /&gt;
| [[के. आर. नारायणन]] &lt;br /&gt;
| टी. एन. शेषन&lt;br /&gt;
| 94.70&lt;br /&gt;
| [[चित्र:K.R.Narayanan.jpg|30px]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| बारहवाँ  &lt;br /&gt;
| [[2002]]&lt;br /&gt;
| [[डॉक्टर ए. पी. जे. अब्दुल कलाम]]&lt;br /&gt;
| कैप्टन लक्ष्मी सहगल&lt;br /&gt;
| 89.98&lt;br /&gt;
| [[चित्र:Abdul-Kalam.jpg|30px]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| तेरहवाँ  &lt;br /&gt;
| [[2007]]&lt;br /&gt;
| [[प्रतिभा देवी सिंह पाटिल]] &lt;br /&gt;
| भैरोसिंह शेखाबत&lt;br /&gt;
| 65.82&lt;br /&gt;
| [[चित्र:Pratibha-Patil.jpg|30px]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| तेरहवाँ  &lt;br /&gt;
| [[2012]]&lt;br /&gt;
| [[प्रणव मुखर्जी]] &lt;br /&gt;
| पी. ए. संगमा&lt;br /&gt;
| 69.31&lt;br /&gt;
| [[चित्र:Pranab_mukherjee.jpg|30px]]&lt;br /&gt;
|}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==राष्ट्रपति के द्वारा शपथ==&lt;br /&gt;
राष्ट्रपति या कोई व्यक्ति, जो किसी कारण से राष्ट्रपति के कृत्यों के निर्वहन के लिए नियुक्त होता है, अपना पद ग्रहण करने के पूर्व अनुच्छेद 60 के तहत भारत के मुख्य न्यायधीश या उसकी अनुपस्थिति में [[उच्चतम न्यायालय]] में उपलब्ध वरिष्ठतम न्यायधीश के समक्ष अपने पद के कार्यपालन की शपथ लेता है। राष्ट्रपति के शपथ पत्र का प्रारूप निम्नलिखित रूप में होता है–&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;'''मैं, अमुक ईश्वर की शपथ लेता हूँ सत्य निष्ठा से प्रतिज्ञाण करता हूँ कि मैं श्रद्धापूर्वक भारत के राष्ट्रपति के पद का कार्यपालन (अथवा राष्ट्रपति के कृत्यों का निर्वहन) करूँगा तथा अपनी पूरी योग्यता से संविधान और विधि का परिरक्षण, संरक्षण और प्रतिरक्षण करूँगा और मैं भारत की जनता की सेवा और कल्याण में निरत रहूँगा।'''&amp;lt;/poem&amp;gt; राष्ट्रपति द्वारा लिया जाने वाला शपथ या प्रतिज्ञण उपराष्ट्रपति एवं [[प्रधानमंत्री]] के शपथ से इस मामले में भिन्न है कि राष्ट्रपति संविधान और विधि के परिरक्षण, संरक्षण और प्रतिरक्षण का शपथ लेता है।&lt;br /&gt;
==राष्ट्रपति की पदावधि==&lt;br /&gt;
अनुच्छेद 56 के अनुसार राष्ट्रपति अपने पदग्रहण की तिथि से पाँच वर्ष की अवधि तक अपने पद पर बना रहता है, लेकिन इस पाँच वर्ष की अवधि के पूर्व भी वह उपराष्ट्रपति को अपना त्यागपत्र दे सकता है या उसे पाँच वर्ष की अवधि के पूर्व संविधान के उल्लंघन के लिए संसद द्वारा लगाये गये महाभियोग द्वारा हटाया जा सकता है। राष्ट्रपति द्वारा उपराष्ट्रपति को सम्बोधित त्यागपत्र की सूचना उसके द्वारा (उपराष्ट्रपति के द्वारा) लोकसभा के अध्यक्ष को अविलम्ब दी जाती है।&lt;br /&gt;
राष्ट्रपति अपने पाँच वर्ष के कार्यकाल के पूरा करने के बाद भी तब तक राष्ट्रपति के पद पर बना रहता है, जब तक उसका उत्तराधिकारी पद ग्रहण नहीं कर लेता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भारतीय संविधान में प्रावधान किया गया है कि राष्ट्रपति के पद में आकस्मिक रिक्ति के दौरान या उसकी अनुपस्थिति में उपराष्ट्रपति, राष्ट्रपति के पद के कार्यों का निर्वहन करेगा और राष्ट्रपति तथा उपराष्ट्रपति दोनों के पद में आकस्मिक रिक्ति के दौरान या दोनों की अनुपस्थिति में भारत का मुख्य न्यायधीश राष्ट्रपति के पद के कृत्यों का निर्वहन करेगा। इसी कारण जब [[3 मई]], [[1969]] को तत्कालीन राष्ट्रपति ज़ाकिर हुसैन की मृत्यु हुई, तब तत्कालीन उपराष्ट्रपति वी॰ वी॰ गिरि कार्यकारी राष्ट्रपति नियुक्त किये गये। लेकिन उन्होंने राष्ट्रपति पद के चुनाव में उम्मीदवार होने के लिए अपने पद से त्यागपत्र दे दिया था। तब भारत के तत्कालीन मुख्य न्यायधीश न्यायमूर्ति मो॰ हिदायतुल्ला ने राष्ट्रपति के पद का निर्वहन तब तक किया, जब तक निर्वाचित होकर वी॰ वी॰ गिरि ने राष्ट्रपति पद का कार्यभार ग्रहण नहीं कर लिया। अब तक तीन उपराष्ट्रपति वी॰ वी॰ गिरि (राष्ट्रपति जाकिर हुसैन की मृत्यु के कारण), [[बी.डी. जत्ती]] (राष्ट्रपति फ़खरुद्दीन अली अहमद की मृत्यु के कारण), तथा मोहम्मद हिदायतुल्ला (राष्ट्रपति ज्ञानी ज़ेल सिंह की अनुपस्थिति के कारण) और एक मुख्य न्यायधीश न्यायमूर्ती मोहम्मद हिदायतुल्ला राष्ट्रपति के पद के कृत्यों का निर्वहन कर चुके हैं।&lt;br /&gt;
{| width=&amp;quot;100%&amp;quot;&lt;br /&gt;
|-valign=&amp;quot;top&amp;quot;&lt;br /&gt;
| style=&amp;quot;width:50%&amp;quot;|&lt;br /&gt;
&amp;lt;div style=&amp;quot;border:thin solid #aaaaaa; margin:10px&amp;quot;&amp;gt;&lt;br /&gt;
{| width=&amp;quot;98%&amp;quot; class=&amp;quot;bharattable&amp;quot;&lt;br /&gt;
|+भारत के राष्ट्रपति पद के कृत्यों का निर्वहन करने वाले व्यक्ति&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
! नाम&lt;br /&gt;
! कार्यकाल&lt;br /&gt;
|}&lt;br /&gt;
&amp;lt;div style=&amp;quot;height: 300px; overflow: auto;overflow-x:hidden;&amp;quot;&amp;gt;&lt;br /&gt;
{| class=&amp;quot;bharattable&amp;quot; border=&amp;quot;1&amp;quot; width=&amp;quot;99%&amp;quot;&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[राजेन्द्र प्रसाद|डॉ. राजेन्द्र प्रसाद]]&lt;br /&gt;
| [[26 जनवरी]], [[1950]] से [[13 मई]], [[1962]] &lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[सर्वपल्ली राधाकृष्णन|डॉ. राधाकृष्णन]]&lt;br /&gt;
| [[13 मई]], [[1962]] से [[13 मई]], [[1967]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[डॉ. ज़ाकिर हुसैन]]&lt;br /&gt;
| [[15 मई]], [[1967]] से [[3 मई]], [[1969]] &lt;br /&gt;
(कार्यकाल में ही मृत्यु)&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[वाराहगिरि वेंकट गिरि]] &lt;br /&gt;
(उपराष्ट्रपति)&lt;br /&gt;
| [[3 मई]], [[1969]] से [[20 जुलाई]], [[1969]] &lt;br /&gt;
(कार्यवाहक)&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| न्यायमूर्ति एम॰ हिदायतुल्ला &lt;br /&gt;
(भारत के मुख्य न्यायाधीश)&lt;br /&gt;
| [[20 जुलाई]], [[1969]] से [[24 अगस्त]], [[1969]] &lt;br /&gt;
(कार्यवाहक)&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[वाराहगिरि वेंकट गिरि]]&lt;br /&gt;
| [[24 अगस्त]], [[1969]] से [[24 अगस्त]], [[1974]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[फ़ख़रुद्दीन अली अहमद]]&lt;br /&gt;
| [[24 अगस्त]], [[1974]] से [[11 फ़रवरी]], [[1977]] &lt;br /&gt;
(कार्यकाल में ही मृत्यु)&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[बी.डी. जत्ती]] (उपराष्ट्रपति)  &lt;br /&gt;
| [[11 फ़रवरी]], [[1977]] से [[25 जुलाई]], [[1977]] &lt;br /&gt;
(कार्यवाहक) &lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[नीलम संजीव रेड्डी]]&lt;br /&gt;
| [[25 जुलाई]], [[1977]] से [[25 जुलाई]], [[1982]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[ज्ञानी ज़ैल सिंह]]&lt;br /&gt;
| [[25 जुलाई]], [[1982]] से [[25 जुलाई]], [[1987]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| एम॰ हिदायतुल्ला (उपराष्ट्रपति) &lt;br /&gt;
| [[6 अक्टूबर]], [[1982]] से [[31 अक्टूबर]], [[1982]] &lt;br /&gt;
(जब राष्ट्रपति अनुपस्थित थे)&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[रामस्वामी वेंकटरमण]]  &lt;br /&gt;
| [[25 जुलाई]], [[1987]] से [[25 जुलाई]], [[1992]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[शंकरदयाल शर्मा|डॉ. शंकर दयाल शर्मा]]&lt;br /&gt;
| [[25 जुलाई]], [[1992]] से [[25 जुलाई]], [[1997]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[के. आर. नारायणन]] &lt;br /&gt;
| [[25 जुलाई]], [[1997]] से [[25 जुलाई]], [[2002]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[अब्दुल कलाम|डॉ. ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम]]&lt;br /&gt;
| [[25 जुलाई]], [[2002]] से [[25 जुलाई]], [[2007]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[प्रतिभा पाटिल]]&lt;br /&gt;
| [[25 जुलाई]], [[2006]] से [[25 जुलाई]], [[2012]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[प्रणव मुखर्जी]]&lt;br /&gt;
| [[25 जुलाई]], [[2012]] से निरन्तर&lt;br /&gt;
|}&lt;br /&gt;
&amp;lt;/div&amp;gt;&lt;br /&gt;
&amp;lt;/div&amp;gt;&lt;br /&gt;
| style=&amp;quot;width:50%&amp;quot;|&lt;br /&gt;
&amp;lt;div style=&amp;quot;border:thin solid #aaaaaa; margin:10px&amp;quot;&amp;gt;&lt;br /&gt;
{| width=&amp;quot;98%&amp;quot; class=&amp;quot;bharattable&amp;quot;&lt;br /&gt;
|+विभिन्न चुनावों में राष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों को मिले मत&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
! उम्मीदवार&lt;br /&gt;
! चुनाव तिथि&lt;br /&gt;
! प्राप्त मत&lt;br /&gt;
|}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;div style=&amp;quot;height: 300px; overflow: auto;overflow-x:hidden;&amp;quot;&amp;gt;&lt;br /&gt;
{| class=&amp;quot;bharattable&amp;quot; border=&amp;quot;1&amp;quot; width=&amp;quot;99%&amp;quot;&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| '''प्रथम चुनाव, 1952'''  &lt;br /&gt;
| '''2 मई, 1952'''&lt;br /&gt;
| &lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[डॉ. राजेन्द्र प्रसाद]]&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 5,07,400&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| के. टी. शाह  &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 92,827&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| लक्ष्मण गणेश ठाते  &lt;br /&gt;
| &lt;br /&gt;
| 2,672&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| चौधरी हरी राम  &lt;br /&gt;
| &lt;br /&gt;
| 1,954&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| कृष्ण कुमार चटर्जी &lt;br /&gt;
| &lt;br /&gt;
| 533&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| '''द्वितीय चुनाव, 1957''' &lt;br /&gt;
| '''6 मई, 1957'''&lt;br /&gt;
| '''प्राप्त मत'''&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| डॉ. राजेन्द्र प्रसाद &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 4,59,698&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| नागेन्द्र नारायण दास &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 2000&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| चौधरी हरी राम &lt;br /&gt;
| &lt;br /&gt;
| 1498&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| '''तृतीय चुनाव, 1962'''&lt;br /&gt;
| '''7 मई, 1962'''&lt;br /&gt;
| '''प्राप्त मत'''&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन]] &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 5,53,067&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| चौधरी हरी राम &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 6,341&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| यमुना प्रसाद त्रिशुलिया &lt;br /&gt;
| &lt;br /&gt;
| 3,537&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| '''चौथा चुनाव, 1967'''&lt;br /&gt;
| '''6 मई, 1967'''&lt;br /&gt;
| '''प्राप्त मत'''&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[डॉ. जाकिर हुसैन]] &lt;br /&gt;
| &lt;br /&gt;
| 4,71,244&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| कोका सुब्बाराय &lt;br /&gt;
| &lt;br /&gt;
| 3,63,971&lt;br /&gt;
|- &lt;br /&gt;
| खुबी राम &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 1369&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| यमुना प्रसाद त्रिशुलिया &lt;br /&gt;
| &lt;br /&gt;
| 750&lt;br /&gt;
|- &lt;br /&gt;
| भाम्बुरकर श्रीनिवास गोपाल &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 232&lt;br /&gt;
|- &lt;br /&gt;
| ब्रह्म देव &lt;br /&gt;
| &lt;br /&gt;
| 232&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| कृष्ण कुमार चटर्जी &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 125&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| कुमार कमला सिंह &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 125&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| '''पाँचवाँ चुनाव, 1969''' &lt;br /&gt;
| '''16 अगस्त, 1969'''&lt;br /&gt;
| '''प्राप्त मत'''&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[वी. वी. गिरि]] &lt;br /&gt;
| &lt;br /&gt;
| 4,01,515&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[नीलम संजीव रेड्डी]] &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 3,13,548&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| सी. डी. देशमुख &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 1,12,769&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| चन्द्रदत्त सेनानी &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 5,814&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| गुरुचरण कौर &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 940&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| राजभोज पांडुरंग नाथूजी&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 831&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| पं बाबूलाल भाग &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 576&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| मनोबिहारी अनिरुद्ध शर्मा &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 125&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| चौधरी हरी राम &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 125&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| खूबी राम &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 94&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| '''छठा चुनाव, 1974''' &lt;br /&gt;
| '''17 अगस्त, 1974'''&lt;br /&gt;
| '''प्राप्त मत'''&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[फ़खरुद्दीन अली अहमद]] &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 7,65,587&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| त्रिदिव चौधरी &lt;br /&gt;
| &lt;br /&gt;
| 1,89,196&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| '''सातवां चुनाव, 1977'''&lt;br /&gt;
| '''6 अगस्त, 1977'''&lt;br /&gt;
| '''प्राप्त मत'''&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[नीलम संजीव रेड्डी]]&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| निर्विरोध निर्वाचन&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| '''आठवां चुनाव, 1982'''&lt;br /&gt;
| '''12 जुलाई, 1982'''&lt;br /&gt;
| '''प्राप्त मत'''&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[ज्ञानी जैल सिंह]] &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 7,54,113&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| हंस राज खन्ना &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 2,82,685&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| '''नवां चुनाव, 1987'''&lt;br /&gt;
| '''13 जुलाई, 1987'''&lt;br /&gt;
| '''प्राप्त मत'''&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[रामास्वामी वेंकटरमण]] &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 7,40,148&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| कृष्ण अय्यर रामा अय्यर &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 2,81,550&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| मिथलेश कुमार &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 2,223&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| '''दसवां चुनाव, 1992'''&lt;br /&gt;
| '''13 जुलाई, 1992'''&lt;br /&gt;
| '''प्राप्त मत'''&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[डॉ. शंकर दयाल शर्मा]] &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 6,75,864&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| प्रो. जी. जी. स्वेल &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 3,46,485&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| राम जेठमलानी &lt;br /&gt;
| &lt;br /&gt;
| 2,704&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| जोगेन्द्र सिंह उर्फ धरती पकड़ &lt;br /&gt;
| &lt;br /&gt;
| 1,135&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| '''ग्याहरवां चुनाव, 1997'''&lt;br /&gt;
| '''14 जुलाई, 1997'''&lt;br /&gt;
| '''प्राप्त मत'''&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[के. आर. नारायणन]] &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 9,56,290&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| टी. एन. शेषन &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 50,631&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| '''बारहवां चुनाव, 2002'''&lt;br /&gt;
| '''15 जुलाई, 2002'''&lt;br /&gt;
| '''प्राप्त मत'''&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम]] &lt;br /&gt;
| &lt;br /&gt;
| 9,22,884&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| कैप्टन लक्ष्मी सहगल &lt;br /&gt;
| &lt;br /&gt;
| 1,07,366&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| '''तेरहवां चुनाव, 2007'''&lt;br /&gt;
| '''19 जुलाई, 2007'''&lt;br /&gt;
| '''प्राप्त मत'''&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[प्रतिभा देवी सिंह पाटिल]] &lt;br /&gt;
| &lt;br /&gt;
| 6,38,116&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| भैरोसिंह शेखावत &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 3,31,306&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| '''चौदहवाँ चुनाव, 2012'''&lt;br /&gt;
| '''22 जुलाई, 2012'''&lt;br /&gt;
| '''प्राप्त मत'''&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[प्रणव मुखर्जी]] &lt;br /&gt;
| &lt;br /&gt;
| 7,13,937&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| पी. ए. संगमा &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 315,987&lt;br /&gt;
|}&lt;br /&gt;
&amp;lt;/div&amp;gt;&lt;br /&gt;
&amp;lt;/div&amp;gt;&lt;br /&gt;
|}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==वेतन और भत्ते==&lt;br /&gt;
राष्ट्रपति को नि:शुल्क शासकीय निवास उपलब्ध होता है। वह ऐसी परिलब्धियों, भत्तों और विशेषाधिकारों का हक़दार होता है, जो संसद विधि के द्वारा अवधारित करें, और जब तक संसद ऐसी विधि पारित नहीं करती है उनकी परिलब्धियाँ या भत्ते वही होगें जो संविधान की दूसरी अनुसूची में विनिर्दिष्ट हैं। [[1990]] में राष्ट्रपति की परिलब्धियाँ बढ़ाकर 20,000 रुपये, [[4 अगस्त]], [[1998]] को इसे बढ़ाकर 50,000 रुपये और [[10 जनवरी]], [[2008]] को राष्ट्रपति की परिलब्धियों में एक बार फिर पुन: संशोधन करते हुए इसे बढ़ाकर 1.50 लाख रुपये प्रति माह कर दिया गया। यह वृद्धि जनवरी, [[2006]] से प्रभावी की गई है। राष्ट्रपति को पद त्याग देने के पश्चात् या पदावधि समाप्ति पर उनके वेतन का 50 प्रतिशत पेंशन का प्रावधान है। इस प्रकार पद विमुक्ति के पश्चात् पूर्व राष्ट्रपति को 9,00,000 रुपये वार्षिक पेंशन देय है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पूर्व राष्ट्रपति को एक अतिरिक्त निजी सचिव के अलावा एक कर्मचारी की भी सुविधा का प्रावधान है। उन्हें मोबाइल फ़ोन, इंटरनेट और ब्राडबैंड का कनेक्शन भी उपलब्ध कराया जाएगा। उनके कार्यालय के रख-रखाव पर पूर्व में 12 हज़ार रुपये वार्षिक ख़र्च का प्रावधान था, जिसे बढ़ाकर अब 60,000 रुपये कर दिया गया है। पदावधि के दौरान राष्ट्रपति की मृत्यु हो जाने पर उसे पारिवारिक पेंशन, सुसज्जित आवास, कर्मचारी, कार, टेलीफ़ोन, यात्रा और स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध हैं। संविधान के अनुच्छेद 59 के अनुसार राष्ट्रपति की परिलब्धियाँ और उसके भत्ते उसके कार्यकाल में घटाये नहीं जा सकते। राष्ट्रपति के वेतन एवं भत्ते को आयकर से छूट प्राप्त हैं।&lt;br /&gt;
==महाभियोग की प्रक्रिया==&lt;br /&gt;
राष्ट्रपति को उसके पद से अनुच्छेद 61 के तहत महाभियोग की प्रक्रिया के द्वारा हटाया जा सकता है। राष्ट्रपति के विरुद्ध महाभियोग की प्रक्रिया तब संचालित की जा सकती है, जब उसने संविधान के प्रावधानों का उल्लंघन किया हो। राष्ट्रपति के विरुद्ध महाभियोग चलाने का संकल्प संसद के किसी भी सदन में पेश किया जा सकता है, लेकिन जिस सदन में महाभियोग का संकल्प पेश किया जाना हो, उसके एक चौथाई सदस्यों के द्वारा हस्ताक्षरित आरोप पत्र राष्ट्रपति को 14 दिन पूर्व दिया जाना आवश्यक है। राष्ट्रपति को आरोप पत्र दिये जाने के 14 दिन बाद ही सदन में महाभियोग का संकल्प पेश किया जा सकता है। जिस सदन में संकल्प पेश किया जाए, उसके सदस्य संख्या के बहुमत तथा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो तिहाई बहुमत से संकल्प पारित किया जाना चाहिए। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिस सदन में संकल्प पेश किया गया है, उसके द्वारा पारित किये जाने के बाद संकल्प दूसरे सदन को भेजा जाएगा और दूसरा सदन राष्ट्रपति पर लगाये गये आरोपों की जाँच करेगा। जब दूसरा सदन राष्ट्रपति पर लगाये गये आरोपों की जाँच कर रहा हो, तब राष्ट्रपति या तो स्वयं या तो अपने वकील के माध्यम से लगाये गये आरोपों के सम्बन्ध में अपना पक्ष प्रस्तुत करेगा और स्पष्टीकरण देगा। यदि दूसरा सदन राष्ट्रपति पर लगाये गये आरोपों को सही पाता है तथा अपनी संख्या के बहुमत से तथा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो तिहाई बहुमत पहले सदन द्वारा पारित संकल्प का अनुमोदन कर देता है, तो महाभियोग की कार्रवाई पूर्ण हो जाती है। इस प्रकार राष्ट्रपति अपना पद त्याग करने के लिए बाध्य हो जाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==राष्ट्रपति भवन==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Rashtrapati-Bhavan-1.jpg|thumb|200px|राष्ट्रपति भवन, [[दिल्ली]] &amp;lt;br /&amp;gt; Rashtrapati Bhavan, Delhi]]&lt;br /&gt;
{{main|राष्ट्रपति भवन}}&lt;br /&gt;
राष्ट्रपति भवन वास्तुकला का उत्कृष्ट नमूना है। इस भवन के निर्माण की सोच सर्वप्रथम [[1911]] में उस समय उत्पन्न हुई जब [[दिल्ली दरबार]] ने निर्णय किया कि भारत की राजधानी [[कोलकाता]] से [[दिल्ली]] स्थानान्तरित की जाएगी। इसी के साथ में यह भी निर्णय लिया गया कि [[नई दिल्ली]] में ब्रिटिश वायसराय के रहने के लिए एक आलीशान भवन का निर्माण किया जाएगा।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==राष्ट्रपति के अंगरक्षक==&lt;br /&gt;
राष्ट्रपति की सुरक्षा के लिए अंगरक्षकों की व्यवस्था है। इस अंगरक्षक दस्ते का गठन सर्वप्रथम 1773 में गवर्नर जनरल हेस्टिग्स ने [[बनारस]] में किया था। प्रारम्भ में इस दस्तें में 50 जवान और 50 घोड़े शामिल किये गये थे। बाद में बनारस के राजा चेत सिंह द्वारा इस दस्ते में 50 जवान और 50 घोड़े शामिल कर लिये जाने के बाद इनकी संख्या 100 हो गई। प्रथम विश्वयुद्ध से पूर्व यह संख्या 1845 थी, जो कालान्तर में बढ़कर 1929 हो गई। वर्तमान में राष्ट्रपति के अंगरक्षक दस्ते में 4 अधिकारी, 14 जूनियर कमीशंड अधिकारी और 161 जवानों की टुकड़ी शामिल है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
राष्ट्रपति के सुरक्षा बलों को 1784 तक गवर्नर जनरल का बाडीगार्ड कहा जाता था। 1858 में इसे वायसराय का बाडीगार्ड कहा जाने लगा। [[1944]] तक आते-आते इसका नाम '44वीं डिवीजन निगरानी स्कवॉड्रन' पड़ गया। [[1947]] में एक बार फिर इस दस्ते को 'गवर्नर जनरल बाडीगार्ड' कहा जाने लगा। लेकिन [[21 जनवरी]], [[1950]] को भारत को गणतंत्र घोषित किये जाने के साथ ही इस दस्ते को 'राष्ट्रपति का अंगरक्षक' के रूप में नामांकित कर दिया गया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
राष्ट्रपति के अंगरक्षक के दस्ते के रेजीमेंट का [[नीला रंग|रंग नीला]] और गाढ़ा लाल (मैरून) है। इस दस्ते का अमर वाक्य 'भारत माता की जय' है। वर्तमान में राष्ट्रपति के अंगरक्षक दस्तें में [[सिक्ख]], [[जाट]] और राजपूत सहित लगभग सभी रेजीमेंट के जवान और अधिकारी कार्यरत हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==शक्तियाँ तथा अधिकार==&lt;br /&gt;
भारतीय संविधान द्वारा राष्ट्रपति को निम्नलिखित शक्तियाँ तथा अधिकार प्रदान किये गये हैं–&lt;br /&gt;
====कार्यपालिका शक्तियाँ====&lt;br /&gt;
संविधान के अनुच्छेद 73 के अनुसार संघ की कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में निहित है और वह अपनी इस शक्ति का प्रयोग अपने अधीनस्थ प्राधिकारियों के माध्यम से करता है। यहाँ अधीनस्थ प्राधिकारी का तात्पर्य केन्द्रीय मंत्रिमण्डल से है। राष्ट्रपति की कार्यपालिका शक्तियों को निम्नलिखित तीन भागों में विभाजित किया जा सकता है–&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;u&amp;gt;'''मंत्रिपरिषद का गठन'''&amp;lt;/u&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अनुच्छेद 74 के अनुसार राष्ट्रपति संघ की कार्यपालिका शक्ति के संचालन में सलाह देने के लिए मंत्रिपरिषद का गठन करता है, जिसका अध्यक्ष प्रधानमंत्री होता है। सामान्यत: राष्ट्रपति ऐसे व्यक्ति को प्रधानमंत्री के पद पर नियुक्त करता है जो कि लोकसभा में बहुमत दल का नेता हो। इस प्रकार नियुक्त किये गये प्रधानमंत्री की सलाह पर वह मंत्रिपरिषद के अन्य सदस्यों की नियुक्ति करता है। साथ ही वह प्रधानमंत्री की सलाह पर मंत्रिपरिषद के किसी सदस्य को बर्ख़ास्त कर सकता है। सामान्यत: यह प्रथा रही है कि प्रधानमंत्री लोकसभा का सदस्य होता है, क्योंकि मंत्रिपरिषद लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होता है, लेकिन राष्ट्रपति को यह अधिकार है कि यदि लोकसभा में बहुमत प्राप्त दल किसी ऐसे व्यक्ति को अपना नेता चुनता है, जो लोकसभा का सदस्य नहीं है या राज्यसभा का सदस्य है, तो राष्ट्रपति ऐसे व्यक्ति को प्रधानमंत्री नियुक्त करता है, लेकिन इस प्रकार नियुक्त किये गये व्यक्ति को 6 माह के अंतर्गत संसद का सदस्य होना पड़ता है। इसी तरह प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति ऐसे व्यक्ति को मंत्रिपरिषद में शामिल कर सकता है, जो कि संसद का सदस्य नहीं है। यदि ऐसा व्यक्ति मंत्रिपरिषद में शामिल किया जाता है तो उसे छ: माह के अंतर्गत संसद के किसी सदन का सदस्य बनना पड़ता है। &lt;br /&gt;
जब कभी ऐसी स्थिति उत्पन्न हो कि लोकसभा में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत न मिले या लोकसभा में पेश किये गये अविश्वास प्रस्ताव के पारित होने के कारण मंत्रिपरिषद को त्यागपत्र देना पड़े, तो राष्ट्रपति किस व्यक्ति को प्रधानमंत्री नियुक्त करेगा, इस सम्बन्ध में संविधान में कोई प्रावधान नहीं है। यहाँ पर राष्ट्रपति ऐसे व्यक्ति को प्रधानमंत्री नियुक्त कर सकता है, जिसके सम्बन्ध में उसे विश्वास हो कि वह लोकसभा में अपना बहुमत सिद्ध करता है। इस सम्बन्ध में कुछ हद तक राष्ट्रपति को विशेषाधिकार प्राप्त हैं। इसी विशेषाधिकार के प्रयोग में राष्ट्रपति ने [[1979]] में चरण सिंह को प्रधानमंत्री नियुक्त किया था। चरण सिंह की प्रधानमंत्री पद पर नियुक्ति को इस आधार पर न्यायालय में चुनौती दी गयी थी कि विश्वास मत प्राप्त करने पर ही उन्हें प्रधानमंत्री के रूप में नियुक्त किया जाना चाहिए था, किन्तु न्यायालन ने अपने निर्णय में कहा कि प्रधानमंत्री की नियुक्ति के सम्बन्ध में यह पूर्ववर्ती शर्त नहीं है कि लोकसभा में विश्वास मत प्राप्त किया जाय। इसी तरह [[1989]] में [[वी. पी. सिंह]], [[1991]] में [[नरसिंह राव पी. वी.|पी. वी. नरसिंहराव]], [[1996]] में [[अटल बिहारी वाजपेयी]] और 1996 में ही [[एच डी देवगौड़ा]] तथा [[1997]] में [[इन्द्रकुमार गुजराल]] को प्रधानमंत्री पर पर नियुक्त किया गया था। बाद में [[1998]] में 12वीं लोकसभा के गठन के बाद राष्ट्रपति ने अटल बिहारी वाजपेयी को प्रधानमंत्री पद पर नियुक्त किया था। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;u&amp;gt;'''नियुक्ति सम्बन्धी शक्ति'''&amp;lt;/u&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
संविधान द्वारा राष्ट्रपति को यह शक्ति दी गई है कि वह संघ से सम्बन्धित महत्त्वपूर्ण पदों पर नियुक्तियाँ करें। राष्ट्रपति इस शक्ति के प्रयोग में कई पदाधिकारियों, जैसे-महान्यायवादी, नियंत्रक-महालेखा परीक्षक, वित्त आयोगों के सदस्यों, संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष तथा अन्य सदस्यों, संयुक्त राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष तथा अन्य सदस्यों, मुख्य निर्वाचन आयुक्त, अन्य निर्वाचन आयुक्तों, [[उच्चतम न्यायालय]] तथा उच्च न्यायालयों के न्यायाधाशों, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष तथा सदस्यों, राष्ट्रीय महिला आयोग के अध्यक्ष तथा सदस्यों, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष तथा सदस्यों, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्षों तथा सदस्यों, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष तथा सदस्यों, राज्यों के राज्यपालों, संघ राज्यक्षेत्रों के उपराज्यपालों या प्रशासकों की नियुक्ति कर सकता है। राष्ट्रपति ये नियुक्तियाँ मंत्रिपरिषद की सलाह से करता है। वह अपने द्वारा नियुक्त प्राधिकारियों तथा अधिकारियों को पदमुक्त कर सकता है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;u&amp;gt;'''आयोगों का गठन'''&amp;lt;/u&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
राष्ट्रपति को आयोगों को गठित करने की शक्तियाँ भी प्रदान की गई हैं। यह भारत के राज्य क्षेत्र में सामाजिक और शैक्षणिक दृष्टि से पिछड़े वर्ग की दशाओं का अन्वेषण करने के लिए आयोग, [[राजभाषा]] पर प्रतिवेदन देने के लिए आयोग, अनुसूचित क्षेत्रों के प्रशासन पर रिपोर्ट देने के लिए तथा राज्यों में अनुसूचित जनजातियों के कल्याण सम्बन्धी क्रियाकलापों पर रिपोर्ट देने के लिए आयोग का गठन कर सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
====सैनिक शक्ति====&lt;br /&gt;
संघ के रक्षाबलों का समादेश राष्ट्रपति में निहित होता है। वह रक्षा बलों का प्रमुख होता है। राष्ट्रपति अपने में निहित रक्षा बलों का समादेश उस विधि के अनुसार प्रयुक्त करता है, जिसे संसद बनाये। वह रक्षा बलों के प्रमुखों को भी नियुक्त करता है। &lt;br /&gt;
====राजनयिक शक्तियाँ ====&lt;br /&gt;
अन्य देशों के साथ में भारत का संव्यवहार राष्ट्रपति के नाम से किया जाता है। अंतर्राष्ट्रीय मामलों में राष्ट्रपति भारत का प्रतिनिधित्व करता है। अन्य देशों में भेजे जाने वाले राजदूत तथा उच्चायुक्त राष्ट्रपति के द्वारा नियुक्त जाते हैं। साथ ही अन्य देशों से भारत में नियुक्ति पर आने वाले राजदूतों व उच्चायुक्तों का स्वागत भी राष्ट्रपति के द्वारा किया जाता है। जब अन्य देश के राजदूत या उच्चायुक्त भारत में नियुक्त होकर आते हैं, तो वे अपना 'प्रत्यय पत्र' राष्ट्रपति के समक्ष पेश करते हैं। समस्त अंतर्राष्ट्रीय क़रार और सन्धियाँ राष्ट्रपति के नाम से की जाती हैं, लेकिन राष्ट्रपति अपनी राजनयिक शक्ति का प्रयोग मंत्रिपरिषद की सलाह पर करता है।&lt;br /&gt;
====विधायी शक्तियाँ एवं कार्य====&lt;br /&gt;
संविधान द्वारा राष्ट्रपति को व्यापक विधायी शक्तियाँ प्रदान की गयी हैं, जिन्हें निम्नलिखित भागों में विभाजित किया जा सकता है-&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;u&amp;gt;'''संसद से सम्बन्धित शक्ति'''&amp;lt;/u&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
राष्ट्रपति संसद का अभिन्न अंग है, क्योंकि संसद का गठन राष्ट्रपति और लोकसभा तथा राज्यसभा से मिलकर होता है। संसद से सम्बन्धित राष्ट्रपति की शक्तियाँ निम्नलिखित हैं-&lt;br /&gt;
#अनुच्छेद 331 के तहत वह लोकसभा में आंग्ल-भारतीय समुदाय के दो सदस्यों को नामजद कर सकता है, यदि उसके विचार में लोकसभा में उस समूदाय को उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिला है।&lt;br /&gt;
#वह राज्यसभा में 12 सदस्यों को मनोनीत कर सकता है (अनुच्छेद 80, 1)।&lt;br /&gt;
#यदि संसद के किसी सदस्य की अयोग्यता के सम्बन्ध में, दल-बदल के आधार पर के सिवाय, सवाल उत्पन्न होता है, तो उसका निर्णय राष्ट्रपति करेगा, लेकिन राष्ट्रपति ऐसा निर्णय करने के लिए निर्वाचन आयोग की राय लेगा। &lt;br /&gt;
#राष्ट्रपति संसद के सत्र को आहूत करता है, लेकिन संसद के एक सत्र की अन्तित बैठक और आगामी सत्र की प्रथम बैठक के लिए नियत तारीख़ के बीच छ: मास का अन्तर नहीं होना चाहिए। &lt;br /&gt;
#वह सदनों या किसी सदन का सत्रावसान कर सकता है तथा लोकसभा का विघटन कर सकता है। &lt;br /&gt;
#वह संसद के किसी एक सदन में या संसद के संयुक्त अधिवेशन में अभिभाषण कर सकता है। &lt;br /&gt;
#संसद में लम्बित किसी विधेयक के सम्बन्ध में संसद के दोनों सदनों या किसी सदन को संदेश भेज सकता है और उसके संदेश पर यथाशीघ्र विचारण किया जाता है। &lt;br /&gt;
#वह लोकसभा के प्रत्येक साधारण निर्वाचन के पश्चात् प्रथम सत्र के आरम्भ में और प्रत्येक वर्ष के प्रथम सत्र के आरम्भ में संसद के संयुक्त अधिवेशन में अभिभाषण कर सकता है। &lt;br /&gt;
#संसद द्वारा कोई विधेयक पारित किये जाने पर उसे राष्ट्रपति के समक्ष अनुमति के लिए भेजा जाता है। राष्ट्रपति या तो उस पर अपनी अनुमति देता है या विधेयक पर पुन: विचार करने के लिए संसद को वापस भेजता है। यदि संसद द्वारा पुन: विधेयक पारित कर दिया जाता है तो राष्ट्रपति उस पर अपनी अनुमति देने के लिए बाध्य होता है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;u&amp;gt;'''विधेयक को पेश करने की सिफ़ारिश करने की शक्ति'''&amp;lt;/u&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
निम्नलिखित विधेयक राष्ट्रपति की सिफ़ारिश के बिना संसद में पेश नहीं किये जा सकते-&lt;br /&gt;
#धन विधेयक, लेकिन किसी कर को घटाने या समाप्त करने का प्रावधान करने वाले विधेयक राष्ट्रपति की सिफ़ारिश के बिना संसद में पेश किये जा सकते हैं।&lt;br /&gt;
#राज्य का निर्माण करने या विद्यमान राज्य के क्षेत्र, सीमा या नाम में परिवर्तन करने वाले विधेयक।&lt;br /&gt;
#जिस कराधान में राज्य का हित हो, उस कराधान पर प्रभाव डालने वाले विधेयक।&lt;br /&gt;
#जिस विधेयक को अधिनियमित और प्रवर्तित करने से भारत की संचित निधि से व्यय करना पड़ेगा, सम्बन्धी विधेयक।&lt;br /&gt;
#भूमि अधिग्रहण से सम्बन्धित विधेयक।&lt;br /&gt;
#व्यापार की स्वतंत्रता पर रोक लगाने वाले राज्य का कोई विधेयक।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;u&amp;gt;'''राज्य विधान मण्डल के द्वारा बनायी जाने वाली विधि के सम्बन्ध में राष्ट्रपति की शक्ति'''&amp;lt;/u&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
राज्य विधान मण्डल द्वारा बनायी जाने वाली विधि के सम्बन्ध में राष्ट्रपति को निम्नलिखित शक्तियाँ प्राप्त हैं-&lt;br /&gt;
#यदि राज्य विधान मण्डल कोई ऐसा विधेयक पारित करता है, जिससे उच्च न्यायालय की अधिकारिता प्रभावित होती है, तो राज्यपाल उस विधेयक पर अनुमति नहीं देगा और उसे राष्ट्रपति की अनुमति के लिए आरक्षित कर देगा।&lt;br /&gt;
#राज्य विधान मण्डल के द्वारा सम्पत्ति प्राप्त करने के लिए पारित विधेयक को राष्ट्रपति की अनुमति के लिए आरक्षित रखा जाएगा। &lt;br /&gt;
#किसी राज्य के अन्दर या दूसरे राज्यों के साथ व्यापार आदि पर प्रतिबन्ध लगाने वाले विधेयकों को विधानसभा में पेश करने के पहले राष्ट्रपति की अनुमति लेनी होगी।&lt;br /&gt;
#वित्तीय आपात स्थिति के प्रवर्तन की स्थिति में राष्ट्रपति निर्देश दे सकता है कि सभी धन विधेयकों को राज्य विधान सभा में पेश करने के पहले उस पर राष्ट्रपति की अनुमति ली जाए। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;u&amp;gt;'''अध्यादेश जारी करने की शक्ति'''&amp;lt;/u&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
संविधान के अनुच्छेद 123 के तहत राष्ट्रपति को अध्यादेश जारी करने की शक्ति प्रदान की गयी है। राष्ट्रपति द्वारा जारी अध्यादेश का वही प्रभाव होता है, जो संसद द्वारा पारित तथा राष्ट्रपति के द्वारा अनुमोदित अधिनियम को होता है, लेकिन अन्तर यह होता है कि अधिनियम का प्रभाव तब तक स्थायी होता है, जब तक की संसद के द्वारा या राष्ट्रपति के अध्यादेश द्वारा निरस्त न कर दिया जाए, इसके विपरीत अध्यादेश केवल 6 मास तक ही प्रवर्तन में रहता है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
राष्ट्रपति के द्वारा अध्यादेश संसद के विश्रान्तिकाल में उस समय जारी किया जाता है, जब राष्ट्रपति को यह विश्वास हो जाए कि ऐसी परिस्थिति उत्पन्न हो गयी है, जिसके अनुसार अविलम्ब कार्रवाई करना आवश्यक है। राष्ट्रपति के द्वारा जारी अध्यादेश का प्रभाव केवल 6 मास तक ही रहता है यदि 6 मास के अन्दर संसद द्वारा अनुमोदित न कर दिया जाए। संसद द्वारा अनुमोदित किये जाने पर वह राष्ट्रपति की अनुमति प्राप्त करने के बाद अधिनियम हो जाता है। यदि संसद के अधिवेशन के प्रारम्भ के बाद पहले जारी किये गये अध्यादेश को संसद द्वारा अनुमोदित किये जाने के लिए 6 मास के अन्दर संसद में पेश नहीं किया जाता है, तो अध्यादेश प्रभावहीन हो जाता है। यदि संसद के एक सदन का सत्र चल रहा है और दूसरे सदन का सत्र स्थगित हो, तब भी अध्यादेश जारी किया जा सकता है, क्योंकि संसद का एक सदन कोई विधेयक पारित कर उसे क़ानून बनाने के लिए सक्षम नहीं है।  &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;u&amp;gt;'''नियम बनाने की शक्ति'''&amp;lt;/u&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
राष्ट्रपति को निम्नलिखित के सम्बन्ध में क़ानून बनाने की शक्ति है-&lt;br /&gt;
#राष्ट्रपति के नाम से किये जाने वाले और निष्पादित आदेशों तथा अन्य लिखतों को अधिप्रमाणित करने के ढंग के सम्बन्ध में।&lt;br /&gt;
#राज्यसभा के सभापति तथा लोकसभा के अध्यक्ष से परामर्श करके दोनों सदनों की संयुक्त बैठकों से सम्बन्धित और उनमें परस्पर संचार से सम्बन्धित प्रक्रिया के नियम।&lt;br /&gt;
#संघ या राज्य की सेवा करने वाले व्यक्तियों की भर्ती और सेवा की शर्तों को विनियमित करने वाले नियम।&lt;br /&gt;
#संयुक्त लोक सेवा आयोग तथा संघ लोक सेवा आयोग के सदस्यों कर्मचारियों की सेवा शर्तों को विनियमित करने वाले नियम।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;u&amp;gt;'''राष्ट्रपति की वीटो शक्ति'''&amp;lt;/u&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
संविधान द्वारा राष्ट्रपति को स्पष्टत: वीटो की शक्ति प्रदान नहीं की गयी है। लेकिन संविधान के अनुसार किये गये कार्यों तथा स्थापित परम्पराओं के अनुसार यह माना जाता है कि राष्ट्रपति को निम्नलिखित तीन प्रकार की वीटो शक्तियाँ प्राप्त हैं-&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;u&amp;gt;'''पूर्ण वीटो'''&amp;lt;/u&amp;gt;- जब राष्ट्रपति किसी विधेयक को अनुमति नहीं देता है तो यह कहा जाता है कि राष्ट्रपति ने पूर्ण वीटो की शक्ति का प्रयोग किया है। राष्ट्रपति इस वीटो की शक्ति का प्रयोग गैर सरकारी विधेयक पर अनुमति न प्रदान करके कर सकता है या ऐसे विधेयक पर अनुमति न प्रदान करके कर सकता है जो ऐसी सरकार के द्वारा पारित किया गया हो, जो विधेयक पर अनुमति देने के पूर्व ही त्यागपत्र दे दे और नयी सरकार विधेयक पर अनुमति न देने की सिफ़ारिश करे। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;u&amp;gt;'''निलम्बनकारी वीटो'''&amp;lt;/u&amp;gt;- जब राष्ट्रपति किसी विधेयक के प्रभाव को निलम्बित रखने के लिए अनुमति देने हेतु अपने पास प्रेषित विधेयक को संसद के पास पुनर्विचार के लिए भेजता है, तो यह कहा जाता है कि उन्होंने निलम्बनकारी वीटो का प्रयोग किया है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;u&amp;gt;'''जेबी वीटो'''&amp;lt;/u&amp;gt;- इस पॉकेट वीटो भी कहा जाता है। जब राष्टपति संसद द्वारा पारित करके अनुमति के लिए भेजे गए विधेयक पर न तो अनुमति देता है और न ही उसे पुनर्विचार के लिए वापस भेजता है तो यह कहा जाता है कि राष्ट्रपति ने जेबी या पॉकेट वीटो का प्रयोग किया है। इस वीटो का प्रयोग राष्ट्रपति (ज्ञानी ज़ेल सिंह) ने [[1986]] में संसद द्वारा पारित भारतीय डाक (संशोधन) अधिनियम के सन्दर्भ में किया है। राष्ट्रपति ने न तो इस पर अपनी अनुमति दी है और न ही इसे संसद के पास पुनर्विचार के लिए भेजा है। &lt;br /&gt;
====वित्तीय शक्तियाँ====&lt;br /&gt;
राष्ट्रपति को संविधान द्वारा कई वित्तीय शक्तियाँ प्रदान की गयी हैं। धन विधेयक तथा वित्त विधेयक को तभी लोकसभा में पेश किया जाता है जब राष्ट्रपति उसकी सिफ़ारिश करे। जिस विधेयक को प्रवर्तित किये जान पर भारत की संचित निधि में व्यय करना पड़े, उस विधेयक को संसद द्वारा तभी पारित किया जाएगा, जब राष्ट्रपति उस विधेयक पर विचार-विमर्श करने की सिफ़ारिश संसद से करें। जिस कराधान में राज्य का हित सम्बद्ध है, उस कराधान से सम्बन्धित विधेयक को राष्ट्रपति की अनुमति से ही लोकसभा में पेश किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त राष्ट्रपति प्रत्येक वर्ष वित्तमंत्री के माध्यम से वर्ष का बजट लोकसभा में पेश करवाता है तथा प्रत्येक पाँच वर्ष की समाप्ति पर वित्त आयोग का गठन करता है। राष्ट्रपति वित्त आयोग द्वारा की गयी प्रत्येक सिफ़ारिश को, उस पर किये गये स्पष्टीकरण ज्ञापन सहित संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाता है। &lt;br /&gt;
====न्यायिक शक्तियाँ====&lt;br /&gt;
संविधान द्वारा राष्ट्रपति को तीन प्रकार की न्यायिक शक्तियाँ प्रदान की गई हैं, जिनका विवरण निम्न प्रकार से है-&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;u&amp;gt;'''न्यायाधीशों की नियुक्ति करने की शक्ति'''&amp;lt;/u&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अनुच्छेद 124 के अनुसार राष्ट्रपति को उच्चतम न्यायालय तथा उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को नियुक्त करने की शक्ति है। उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति करने के लिए राष्ट्रपति उच्चतम न्यायालय तथा उच्च न्यायालय के ऐसे न्यायाधीशों से परामर्श करेगा, जिनसे परामर्श करना वह आवश्यक समझे। मुख्य न्यायाधीश के अतिरिक्त अन्य न्यायाधीशों की नियुक्ति के पूर्व वह मुख्य न्यायाधीश से परामर्श करेगा। लेकिन संविधान में स्पष्ट रूप से यह प्रावधान नहीं किया गया है कि राष्ट्रपति मुख्य न्यायाधीश के परामर्श से बाध्य होंगे या नहीं। लेकिन [[6 अक्टूबर]], [[1993]] को दिये गये एक निर्णय में उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि &lt;br /&gt;
*उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठतम न्यायाधीश को ही देश का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया जाना चाहिए, &lt;br /&gt;
*उच्चतम न्यायालय के अन्य न्यायाधीशों की नियुक्ति के सम्बन्ध में राष्ट्रपति उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की राय मानने के लिए बाध्य है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
राष्ट्रपति उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों तथा अन्य न्यायाधीशों को नियुक्त करता है। उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों को नियुक्त करते समय राष्ट्रपति भारत के मुख्य न्यायाधीश तथा राज्य के राज्यपाल से परामर्श करता है, जबकि अन्य न्यायाधीशों की नियुक्ति करते समय वह भारत के मुख्य न्यायाधीश, राज्य के राज्यपाल तथा सम्बन्धित उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श करता है। 6 अक्टूबर, 1993 को दिये गये निर्णय के अनुसार राष्ट्रपति ऐसी नियुक्तियाँ करते समय भारत के मुख्य न्यायाधीशों की राय को वरीयता देने के लिए बाध्य है। राष्ट्रपति उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों का एक उच्च न्यायालय से दूसरे उच्च न्यायालय में स्थानान्तरण कर सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;u&amp;gt;'''क्षमादान की शक्ति'''&amp;lt;/u&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
संविधान के अनुच्छेद 72 के तहत राष्ट्रपति को क्षमा तथा कुछ मामलों में दण्डादेश के निलम्बन, परिहार या लघुकरण की शक्ति प्रदान की गयी है। राष्ट्रपति को निम्नलिखित मामले में क्षमा, तथा दोषसिद्धि के निलम्बन, परिहार या लघुकरण की शक्ति प्राप्त है-&lt;br /&gt;
#सेना न्यायालयों के द्वारा दिये गये दण्ड के मामले में।&lt;br /&gt;
#मृत्यु दण्डादेश के सभी मामलों में।&lt;br /&gt;
#उन सभी मामलों में, जिन्हें दण्ड या दण्डादेश ऐसे विषय सम्बन्धी किसी विधि के विरुद्ध अपराध के लिए दिया गया है, जिस विषय तक संघ की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार है।&lt;br /&gt;
क्षमा का तात्पर्य अपराध के दण्ड से मुक्ति प्रदान करना है। प्रतिलम्बन का तात्पर्य विधि द्वारा विहित दण्ड के स्थायी स्थगन से है। परिहार के अंतर्गत दण्ड की प्रकृति में परिवर्तन किए बिना दण्ड की मात्रा को कम किया जाना है। लघुकरण का अर्थ दण्ड की प्रकृति में परिवर्तन करना है। &lt;br /&gt;
राष्ट्रपति अपनी इस शक्ति का प्रयोग मंत्रिपरिषद की सलाह पर करता है और राष्ट्रपति द्वारा यदि इस शक्ति का प्रयोग किया जाता है तो उसका न्यायिक पुनर्विलोकन न्यायालय द्वारा किया जा सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;u&amp;gt;'''उच्चतम न्यायालय से परामर्श लेने का अधिकार'''&amp;lt;/u&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अनुच्छेद 143 के अनुसार जब राष्ट्रपति को ऐसा प्रतीत हो कि विधि या तथ्य का कोई ऐसा प्रश्न उत्पन्न हुआ है या उत्पन्न होने की सम्भावना है, जो ऐसी प्रकृति का और व्यापक महत्त्व का है कि उस पर उच्चतम न्यायालय की राय प्राप्त करना समीचीन है, तब वह उस प्रश्न पर उच्चतम न्यायालय की राय मांग सकता है।&lt;br /&gt;
====आपातकालीन शक्ति====&lt;br /&gt;
राष्ट्रपति को निम्नलिखित आपातकालीन शक्तियाँ प्रदान की गयी हैं-&lt;br /&gt;
#राष्ट्रीय आपात घोषित करने की (अनुच्छेद 352)।&lt;br /&gt;
#राज्यों में संवैधानिक तन्त्र की विफलता पर वहाँ आपातकाल घोषित करने की (अनुच्छेद 356)।&lt;br /&gt;
#वित्तीय आपात घोषित करने की (अनुच्छेद 360)। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==राष्ट्रपति का विशेषाधिकार==&lt;br /&gt;
संविधान द्वारा राष्ट्रपति को यह विशेषाधिकार प्रदान किया गया है कि वह अपने पद के किसी कर्तव्य के निर्वहन तथा शक्तियों के प्रयोग में किये जाने वाले किसी कार्य के लिए न्यायालय के प्रति उत्तरदायी नहीं होगा। &lt;br /&gt;
==संवैधानिक स्थिति==&lt;br /&gt;
संविधान की भावना तथा संविधान सभा में इसके सदस्यों द्वारा किये गये विचारों के अनुसार राष्ट्रपति राष्ट्र का केवल औपचारिक प्रधान होगा, लेकिन मूल संविधान के अनुच्छेद 74 (1) में यह प्रावधान किया गया था कि राष्ट्रपति को उसके कृत्यों का प्रयोग करने में सहायता और सलाह देने के लिए एक मंत्रिपरिषद होगी, जिसका प्रधान प्रधानमंत्री होगा। इसका यह अर्थ लगाया जाता था कि राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद की सलाह मानने के लिए बाध्य नहीं है और वह अपने विवेक से भी संविधान के प्रावधानों के अनुसार अपने कृत्यों का निर्वहन कर सकता है। इसी प्रावधान के कारण प्रथम प्रधानमंत्री [[पंडित जवाहर लाल नेहरू]] तथा तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद के बीच हिन्दू कोड तथा चीन से सम्बन्ध आदि मामलों में काफ़ी मतभेद था, जिससे दोनों के बीच संघर्ष की स्थिति उत्पन्न हो गयी थी। इसके बावजूद 1976 तक संविधान के इस प्रावधान को क़ायम रखा गया, परन्तु 42वें संविधान संशोधन के द्वारा अनुच्छेद 74 (1) में संशोधन करके यह व्यवस्था की गयी कि राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद की सलाह के अनुसार ही कार्य करेगा और इस प्रकार राष्ट्रपति को मंत्रिपरिषद की सलाह के अनुसार कार्य करने के लिए बाध्य कर दिया गया, किन्तु 44वें संविधान संशोधन द्वारा अनुच्छेद 74 (1) में यह व्यवस्था कर दी गयी कि यदि राष्ट्रपति को मंत्रिपरिषद द्वारा कोई सलाह दी जाती है तो वह मंत्रिपरिषद की दी गयी सलाह पर पुनर्विचार करने के लिए कह सकता है। इस प्रकार मंत्रिपरिषद द्वारा पुनर्विचार के बाद की गयी सलाह पर राष्ट्रपति कार्य करने के लिए बाध्य है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{प्रचार}}&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति&lt;br /&gt;
|आधार=&lt;br /&gt;
|प्रारम्भिक=प्रारम्भिक3&lt;br /&gt;
|माध्यमिक=&lt;br /&gt;
|पूर्णता=&lt;br /&gt;
|शोध=&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{संदर्भ ग्रंथ}}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{भारत के राष्ट्रपति}}&lt;br /&gt;
{{भारत के राष्ट्रपति2}}&lt;br /&gt;
{{भारत गणराज्य}}&lt;br /&gt;
[[Category:राष्ट्रपति और राज्यपाल]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Pankaj pathak</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%AA%E0%A4%A4%E0%A4%BF&amp;diff=285561</id>
		<title>राष्ट्रपति</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%AA%E0%A4%A4%E0%A4%BF&amp;diff=285561"/>
		<updated>2012-07-25T13:13:26Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Pankaj pathak: /* पुननिर्वाचन के लिए योग्यता */&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;[[चित्र:Dr.Rajendra-Prasad.jpg|thumb|[[भारत]] के प्रथम राष्ट्रपति [[राजेन्द्र प्रसाद|डॉक्टर राजेन्द्र प्रसाद]]]]&lt;br /&gt;
भारतीय संविधान पर ब्रिटेन के संविधान का व्यापक [[प्रभाव]] है। [[ब्रिटेन]] के संविधान का अनुकरण करते हुए [[भारत]] में संविधान द्वारा संसदीय शासन की स्थापना की गयी है। जिस तरह ब्रिटेन में शासन की प्रमुख वहाँ की साम्राज्ञी होती है, उसी प्रकार से भारत में राज्य का प्रमुख राष्ट्रपति होता है। ब्रिटेन की साम्राज्ञी की तरह भारत का राष्ट्रपति राज्य का औपचारिक प्रमुख होता है और संघ की वास्तविक शक्ति संघ मन्त्रिमण्डल में निहित होती है। इन दोनों देशों के प्रमुखों में मूलभूत अन्तर यह है कि ब्रिटेन की साम्राज्ञी का पद वंशानुगत होता है, जबकि भारत का राष्ट्रपति एक निर्वाचित मण्डल द्वारा निर्वाचित किया जाता है। इसी अन्तर के कारण भारत को प्रजातांत्रिक गणतन्त्र कहा जाता है। भारत में राष्ट्रपति का पद संविधान के अनुच्छेद 52 द्वारा उपबंधित है।&lt;br /&gt;
==भारत के राष्ट्रपति==&lt;br /&gt;
{{Main|भारत के राष्ट्रपति}}&lt;br /&gt;
[[भारत]] के राष्ट्रपति राष्ट्रप्रमुख और भारत के प्रथम नागरिक हैं, साथ ही भारतीय सशस्त्र सेनाओं के प्रमुख सेनापति भी हैं। राष्ट्रपति के पास पर्याप्त शक्ति होती है पर कुछ अपवादों के अलावा राष्ट्रपति के पद में निहित अधिकांश अधिकार वास्तव में प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाले मंत्रिपरिषद के द्वारा उपयोग किए जाते हैं। भारत के राष्ट्रपति [[नई दिल्ली]] स्थित [[राष्ट्रपति भवन]] में रहते हैं, जिसे रायसीना हिल के नाम से भी जाना जाता है। राष्ट्रपति अधिकतम दो कार्यकाल तक हीं पद पर रह सकते हैं। अब तक केवल पहले राष्ट्रपति [[डा. राजेंद्र प्रसाद]] ने हीं इस पद पर दो कार्यकाल पूरा कियें है। महामहिम [[प्रतिभा पाटिल]] भारत की 12वीं तथा इस पद को सुशोभित करने वाली पहली महिला राष्ट्रपति हैं। उन्होंने [[25 जुलाई]], [[2007]] को पद व गोपनीयता की शपथ ली थी।&lt;br /&gt;
==पद की योग्यता==&lt;br /&gt;
{{tocright}}&lt;br /&gt;
संविधान के अनुच्छेद 58 के अनुसार कोई भी व्यक्ति राष्ट्रपति होने के योग्य तब होगा, जब वह–&lt;br /&gt;
#भारत का नागरिक हो।&lt;br /&gt;
#पैंतीस वर्ष की आयु पूरी कर चुका हो।&lt;br /&gt;
#लोक सभा का सदस्य निर्वाचित किये जाने के योग्य हो, तथा&lt;br /&gt;
#भारत सरकार के या किसी राज्य सरकार के अधीन अथवा इन दोनों सरकारों में से किसी के नियन्त्रण में किसी स्थानीय या अन्य प्राधिकारी के अधीन लाभ का पद न धारण करता हो। यदि कोई व्यक्ति राष्ट्रपति या [[उपराष्ट्रपति]] के पद पर या संघ अथवा किसी राज्य के मंत्रिपरिषद का सदस्य हो, तो यह नहीं माना जाएगा कि वह लाभ के पद पर है। &lt;br /&gt;
==निर्वाचन==&lt;br /&gt;
{{seealso|उपराष्ट्रपति}}&lt;br /&gt;
राष्ट्रपति का चुनाव 'अप्रत्यक्ष निर्वाचन' के द्वारा किया जाता है। राष्ट्रपति पद के निर्वाचन में अभ्यर्थी होने के लिए आवश्यक है कि कोई व्यक्ति निर्वाचन के लिए अपना नामांकन करते समय 15,000 रुपये की धरोहर (ज़मानत धनराशि) निर्वाचन अधिकारी के समक्ष जमा करे और उसके नामांकन पत्र का प्रस्ताव कम से कम 50 मतदाताओं के द्वारा किया जाना चाहिए तथा कम से कम 50 मतदाताओं द्वारा उसके नामांकन पत्र का समर्थन भी किया जाना चाहिए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==निर्वाचक मण्डल==&lt;br /&gt;
अनुच्छेद 54 के अनुसार राष्ट्रपति का निर्वाचन ऐसे निर्वाचक मण्डल के द्वारा किया जाएगा, जिसमें [[संसद]] (लोकसभा तथा राज्यसभा) तथा राज्य विधान सभाओं के निर्वाचित सदस्य शामिल होंगे। राष्ट्रपति के निर्वाचक मण्डल में संसद के मनोनीत सदस्य, राज्य विधान सभाओं के मनोनीत सदस्य तथा राज्य विधान परिषदों के सदस्य (निर्वाचित एवं मनोनीत दोनों) शामिल नहीं किये जाते। संघ राज्य क्षेत्रों की विधानसभाओं के सदस्यों को भी 70वें संविधान संशोधन के पूर्व राष्ट्रपति के निर्वाचक मण्डल में शामिल नहीं किया जाता था। लेकिन 70वें संविधान संशोधन द्वारा यह व्यवस्था कर दी गयी है कि दो संघ राज्य क्षेत्रों, यथा [[पाण्डिचेरी]] तथा [[राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली|राष्ट्रीय राजधानी राज्यक्षेत्र दिल्ली]] की विधानसभाओं के सदस्य राष्ट्रपति के निर्वाचक मण्डल में शामिल किये जायेंगे। यहाँ पर यह उल्लेखनीय है कि केवल इन दोनों संघ राज्य क्षेत्रों में ही विधानसभा का गठन हुआ है।&lt;br /&gt;
==राष्ट्रपति के चुनाव पर प्रभाव==&lt;br /&gt;
संविधान सभा में राष्ट्रपति के निर्वाचन प्रक्रिया पर विचार करते समय यह ध्यान नहीं दिया गया था कि निर्वाचक मण्डल में से कोई स्थान रिक्त हो तो राष्ट्रपति का चुनाव कैसे होगा? [[1957]] में जब राष्ट्रपति का चुनाव किया गया तो निर्वाचक मण्डल में कुछ स्थान ख़ाली थे। इसलिए राष्ट्रपति के चुनाव को इस आधार पर चुनौती दी गई की निर्वाचक मण्डल में स्थान रिक्त होने के कारण राष्ट्रपति का चुनाव अवैध है। बाद में [[1961]] में ग्याहरवाँ संविधान संशोधन के तहत यह व्यवस्था की गयी कि निर्वाचक मण्डल में स्थान रिक्त होते हुए भी राष्ट्रपति का चुनाव कैसे कराया जा सकता है।&lt;br /&gt;
==निर्वाचन की पद्धति==&lt;br /&gt;
राष्ट्रपति के निर्वाचन पद्धति के सम्बन्ध में संविधान के अनुच्छेद 55 में प्रावधान किया गया है, जिसके अनुसार राष्ट्रपति के निर्वाचन में दो सिद्धान्तों को अपनाया जाता है–&lt;br /&gt;
====समरूपता तथा समतुल्यता====&lt;br /&gt;
इस सिद्धान्त, जो अनुच्छेद 55 के खण्ड (1) तथा (2) वर्णित हैं, के अनुसार राज्यों के प्रतिनिधित्व के मापमान में एकरूपता तथा सभी राज्यों और संघ के प्रतिनिधित्व में समतुल्यता होगी। इस सिद्धान्त का तात्पर्य यह है कि सभी राज्यों की विधानसभाओं का प्रतिनिधित्व का मान निकालने के लिए एक ही प्रक्रिया अपनायी जाएगी तथा सभी राज्यों की विधानसभाओं के सदस्यों के मत मूल्य का योग संसद के सभी सदस्य के मत मूल्य के योग के समतुल्य अर्थात् समान होगा। राज्यों की विधानसभाओं के सदस्यों के मतमूल्य तथा संसद के सदस्यों के मतमूल्य को निर्धारित करने के लिए निम्नलिखित प्रक्रिया अपनायी जाएगी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;u&amp;gt;'''विधानसभा के सदस्य के मत मूल्य का निर्धारण'''&amp;lt;/u&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रत्येक राज्य की विधानसभा के सदस्य के मतों की संख्या निकालने के लिए उस राज्य की कुल जनसंख्या (जो पिछली जनगणना के अनुसार निर्धारित है) को राज्य विधानसभा की कुल निर्वाचित सदस्य संख्या से विभाजित करके भागफल को 1000 से विभाजित किया जाता है। इस प्रकार भजनफल को एक सदस्य का मत मूल्य मान लेते हैं। यदि उक्त विभाजन के परिणामस्वरूप शेष संख्या 500 से अधिक आये, तो प्रत्येक सदस्य के मतों की संख्या में एक और जोड़ दिया जाता है। राज्य विधान सभा के सदस्यों का मूल्य निम्न प्रकार निकाला जाता है–&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
राज्य की विधानसभा के एक सदस्य का मत मूल्य = राज्य की कुल जनसंख्या / राज्य विधानसभा के निर्वाचित X 1 / 1000 सदस्यों की कुल संख्या&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;u&amp;gt;'''संसद सदस्य के मत मूल्य का निर्धारण'''&amp;lt;/u&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
संसद सदस्य का मत मूल्य निर्धारित करने के लिए राज्यों की विधानसभाओं के सदस्यों के मत मूल्यों को जोड़कर संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्यों के योग का भाग दिया जाता है। संसद सदस्य का मत मूल्य निम्न प्रकार निकाला जाता है–&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
संसद सदस्य का मत मूल्य = कुल राज्य विधान सभाओं के निर्वाचित सदस्यों के मत मूल्यों का योग / संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्यों का योग&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस प्रकार राष्ट्रपति के चुनाव में यह ध्यान रखा जाता है कि सभी राज्य विधान सभाओं के निर्वाचित सदस्यों के मतों के मूल्य का योग संसद के निर्वाचित सदस्यों के मतों के मूल्य का योग बराबर रहे और सभी राज्यों की विधान सभाओं के निर्वाचित सदस्यों के मत मूल्य का निर्धारण करने के लिए एक समान प्रक्रिया अपनायी जाए। इसे आनुपातिक प्रतिनिधित्व का सिद्धान्त भी कहते हैं।&lt;br /&gt;
====एकल संक्रमणीय सिद्धान्त====&lt;br /&gt;
इस सिद्धान्त का तात्पर्य है कि यदि निर्वाचन में एक से अधिक उम्मीदवार हों, तो मतदाताओं द्वारा मतदान वरीयता क्रम से दिया जाए। इसका आशय यह है कि मतदाता मतदान पत्र में उम्मीदवारों के नाम या चुनाव चिह्न के समक्ष अपना वरीयता क्रम लिखेगा। &lt;br /&gt;
==मतगणना==&lt;br /&gt;
राष्ट्रपति के चुनाव के बाद उसी व्यक्ति को निर्वाचित घोषित किया जाता है, जो डाले गये कुल वैध मतों में से आधे से अधिक मत प्राप्त करे। जब राष्ट्रपति के निर्वाचन के बाद मतों की गणना प्रारम्भ होती है, तो सर्वप्रथम अवैध मतपत्रों को निरस्त करके शेष वैध मत पत्रों का मत मूल्य निकाला जाता है और निकाले गए मत मूल्य में 2 का भाग देकर भागफल में एक जोड़कर निर्वाचित घोषित किये जाने वाले उम्मीदवार का कोटा निकाला जाता है। यदि मतगणना के प्रथम दौर में किसी उम्मीदवार को नियत किये गये कोटा के बराबर मत मूल्य प्राप्त हो जाता है, तो उसे निर्वाचित घोषित कर दिया जाता है। यदि किसी उम्मीदवार को नियम कोटा के बराबर मत मूल्य नहीं प्राप्त होता है, तो मतगणना का दूसरा दौर प्रारम्भ होता है। दूसरे दौर के मतगणना में जिस उम्मीदवार को प्रथम वरीयता का सबसे कम मत मिला होता है, उसको गणना से बाहर करके उसके द्वितीय वरीयता के मत मूल्य को अन्य उम्मीदवारों को स्थानान्तरित कर दिया जाता है। यदि द्वितीय दौर की गणना में भी किसी उम्मीदवार को नियत किये गये कोटा के बराबर मत मूल्य नहीं प्राप्त होता है, तो तीसरे दौर की गणना होती है। तीसरे दौर की गणना में उस उम्मीदवार को गणना से बाहर कर दिया जाता है, जो कि दूसरे दौर की गणना में सबसे कम मूल्य पाता है और इस उम्मीदवार के तृतीय वरीयता मत मूल्य को शेष उम्मीदवारों के पक्ष में स्थानान्तरित कर दिया जाता है। यह प्रक्रिया तब तक अपनायी जाती है, जब तक कि किसी उम्मीदवार को नियत किये गये कोटा के मत मूल्य के बराबर मत मूल्य प्राप्त नहीं हो जाता है।&lt;br /&gt;
==भारत में राष्ट्रपति का चुनाव==&lt;br /&gt;
[[चित्र:President-Selection.jpg|thumb|भारत में राष्ट्रपति चुनाव का तरीक़ा]]&lt;br /&gt;
भारत में अब तक 12 व्यक्ति राष्ट्रपति का पद ग्रहण कर चुके हैं, जिनमें से प्रथम राष्ट्रपति [[डॉ. राजेंद्र प्रसाद]] ने 2 बार इस पद को सुशोभित किया है। राष्ट्रपति की पदावधि 5 वर्ष की होती है। लेकिन राजेन्द्र प्रसाद 10 वर्ष से अधिक की अवधि तक राष्ट्रपति का पद धारण किये था। इसका कारण यह था कि [[1952]] में राष्ट्रपति के प्रथम चुनाव के पूर्व ही [[24 जनवरी]], [[1950]] को संविधान सभा के द्वारा राष्ट्रपति के रूप में डॉ. राजेंद्र प्रसाद का चुनाव कर लिया गया था। संविधान के प्रवर्तन की तिथि अर्थात् [[26 जनवरी]], 1950 से लेकर [[12 मई]], 1952 तक राजेन्द्र प्रसाद राष्ट्रपति के पद पर रहे। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भारत में अब तक 13 बार राष्ट्रपति के चुनाव हुए हैं, जिनमें से एक बार, अर्थात् [[1977]] में, श्री नीलम संजीव रेड्डी निर्विरोध राष्ट्रपति चुने गये थे। शेष 12 बार राष्ट्रपति पद के चुनाव में एक से अधिक उम्मीदवार थे। अब तक केवल डॉ. राजेंद्र प्रसाद, [[फ़ख़रुद्दीन अली अहमद]], [[नीलम संजीव रेड्डी]] तथा [[ज्ञानी ज़ैल सिंह]] को छोड़कर अन्य सभी राष्ट्रपति पूर्व में उपराष्ट्रपति के पद को सुशोभित कर चुके थे। [[डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन|डॉ. एस. राधाकृष्णन]] लगातार दो बार उपराष्ट्रपति तथा एक बार राष्ट्रपति के पद पर आसीन हुए। निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में [[वी.वी. गिरी]] ऐसे राष्ट्रपति निर्वाचित हुए थे, जिन्होंने कांग्रेस का स्पष्ट बहुमत होते हुए भी उसके उम्मीदवार को पराजित किया था। अब तक नीलम संजीव रेड्डी एकमात्र ऐसे राष्ट्रपति हुए हैं, जो एक बार चुनाव में पराजित हुए तथा बाद में निर्विरोध निर्वाचित हुए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[19 जुलाई]], [[2007]] को सम्पन्न 13वें राष्ट्रपति के चुनाव के लिए निर्वाचक मण्डल में 4,896 सदस्य थे, जिसमें 776 सांसद और 4,120 विधायक शामिल हैं। इन सबका कुल मत मूल्य 10,98,882 था। वर्तमान में प्रत्येक सांसद का मत मूल्य 708 है। सांसदों का कुल मत मूल्य 5,49,408 और विधायकों का कुल मत मूल्य 5,49,474 है। राज्यों में [[उत्तर प्रदेश]] विधानसभा का मत मूल्य सर्वाधिक 83,824 है। इसके बाद क्रमश: [[महाराष्ट्र]] विधानसभा का मत मूल्य 50,400, [[पश्चिम बंगाल]] का 44,394, [[आंध्र प्रदेश]] का 43,512 और [[बिहार]] विधानसभा का मत मूल्य 42,039 है। [[सिक्किम]] विधानसभा का मत मूल्य सबसे कम 224 है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==मतदान स्थल==&lt;br /&gt;
राष्ट्रपति के चुनाव में राज्य विधान सभाओं के सदस्य अपने-अपने राज्यों की राजधानियों में मतदान करते हैं और संसद सदस्य [[दिल्ली]] में या अपने राज्य की राजधानी में मतदान कर सकते हैं। यदि कोई संसद सदस्य अपने राज्य की राजधानी में मतदान करना चाहता है तो उसे इसकी सूचना 10 दिन पूर्व ही चुनाव आयोग का देनी चाहिए।&lt;br /&gt;
==चुनाव का समय ==&lt;br /&gt;
संविधान के अनुच्छेद 62 में केवल यह अपेक्षा की गई है कि राष्ट्रपति का चुनाव निर्धारित समय के अन्दर सम्पन्न करा लिया जाना चाहिए। निर्वाचन की प्रक्रिया को पाँच वर्ष की अवधि समाप्त हो जाने के बाद स्थगित नहीं रखा जा सकता है। राष्ट्रपति का चुनाव कब कराया जाएगा, इसके सम्बन्ध में संविधान में कोई प्रावधान नहीं किया गया है। संविधान में अनुच्छेद 71 (3) में केवल यह प्रावधान किया गया है कि राष्ट्रपति के निर्वाचन से सम्बन्धित या संसक्त किसी विषय का विनियमन संसद विधि द्वारा कर सकेगी। इस शक्ति का प्रयोग करके संसद ने राष्ट्रपतीय तथा उपराष्ट्रपतीय निर्वाचन अधिनियम, 1952 पारित करके यह प्रावधान किया है कि राष्ट्रपति का चुनाव निवर्तमान राष्ट्रपति की पदावधि की समाप्ति के पूर्व ही कराया जाना चाहिए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;u&amp;gt;'''किसी राज्य की विधानसभा भंग होने की स्थिति में राष्ट्रपति चुनाव '''&amp;lt;/u&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
किसी राज्य की विधानसभा भंग होने की स्थिति में भी राष्ट्रपति का चुनाव सम्पन्न होता है। इस सन्दर्भ में 11वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1961 में यह स्पष्ट किया गया है कि राष्ट्रपति के चुनाव को इस आधार पर चुनौती नहीं दी जा सकती कि निर्वाचक मण्डल में कोई स्थान रिक्त था। सर्वोच्च न्यायालय ने भी यह निर्णय दिया है कि बिना किसी विधानसभा के ही राष्ट्रपति का चुनाव कराया जा सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''राष्ट्रपति चुनाव में एक विधायक के मत का मूल्य'''&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
एक विधायक के मत के मूल्य का फार्मूला = राज्य की कुल जनसंख्या / राज्य विधानसभा के निर्वाचित विधायकों की संख्या X 1000&lt;br /&gt;
{| class=&amp;quot;bharattable&amp;quot; border=&amp;quot;1&amp;quot;&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
! राज्य&lt;br /&gt;
! सीटों की संख्या&amp;lt;ref&amp;gt;विधानसभा&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
! जनसंख्या (1971)&lt;br /&gt;
! मत का मूल्य&amp;lt;ref&amp;gt;एक विधायक&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
! मतों का मूल्य&amp;lt;ref&amp;gt;राज्य के कुल निर्वाचित विधायक&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[आन्ध्र प्रदेश]]&lt;br /&gt;
| 294&lt;br /&gt;
| 43,502,708&lt;br /&gt;
| 148&lt;br /&gt;
| 148 x 294 = 43,512&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[अरुणाचल प्रदेश]]&lt;br /&gt;
| 60&lt;br /&gt;
| 467,511&lt;br /&gt;
| 08&lt;br /&gt;
| 08 x 60 = 480&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[असम]]&lt;br /&gt;
| 126 &lt;br /&gt;
| 14,625,152&lt;br /&gt;
| 116&lt;br /&gt;
| 116 x 126 = 14,616&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[बिहार]]&lt;br /&gt;
| 243&lt;br /&gt;
| 42,126,239&lt;br /&gt;
| 173&lt;br /&gt;
| 173 x 243 = 42,039&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[छत्तीसगढ़]]&lt;br /&gt;
| 90&lt;br /&gt;
| 11,637,497&lt;br /&gt;
| 129&lt;br /&gt;
| 129 x 90 = 11,610&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[गोवा]]&lt;br /&gt;
| 40&lt;br /&gt;
| 795,120&lt;br /&gt;
| 20&lt;br /&gt;
| 20 x 40 = 800&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[गुजरात]]&lt;br /&gt;
| 182&lt;br /&gt;
| 26,697,475&lt;br /&gt;
| 147&lt;br /&gt;
| 147 x 182 = 26,754&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[हरियाणा]]&lt;br /&gt;
| 90&lt;br /&gt;
| 10,036,808&lt;br /&gt;
| 112&lt;br /&gt;
| 112 x 90 = 10,080&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[हिमाचल प्रदेश]]&lt;br /&gt;
| 68&lt;br /&gt;
| 3,460,434&lt;br /&gt;
| 51&lt;br /&gt;
| 51 x 68 = 3,468&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[जम्मू और कश्मीर]]&lt;br /&gt;
| 87&lt;br /&gt;
| 6,300,000&lt;br /&gt;
| 72&lt;br /&gt;
| 72 x 87 = 6,264&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[झारखण्ड]]&lt;br /&gt;
| 81&lt;br /&gt;
| 14,227,133&lt;br /&gt;
| 176&lt;br /&gt;
| 176 x 81 = 14,256&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[कर्नाटक]]&lt;br /&gt;
| 224&lt;br /&gt;
| 29,299,014&lt;br /&gt;
| 131&lt;br /&gt;
| 131 x 224 = 29,344&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[केरल]]&lt;br /&gt;
| 140&lt;br /&gt;
| 21,347,375&lt;br /&gt;
| 152&lt;br /&gt;
| 152 x 140 = 21,280&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[मध्य प्रदेश]]&lt;br /&gt;
| 230&lt;br /&gt;
| 30,016,625&lt;br /&gt;
| 131&lt;br /&gt;
| 131 x 230 = 30,130&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[महाराष्ट्र]]&lt;br /&gt;
| 288&lt;br /&gt;
| 50,412,235&lt;br /&gt;
| 175&lt;br /&gt;
| 175 x 288 = 50,400&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[मणिपुर]]&lt;br /&gt;
| 60&lt;br /&gt;
| 1,072,753&lt;br /&gt;
| 18&lt;br /&gt;
| 18 x 60 = 1,080&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[मेघालय]]&lt;br /&gt;
| 60&lt;br /&gt;
| 1,011,699&lt;br /&gt;
| 17&lt;br /&gt;
| 17 x 60 = 1,020&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[मिज़ोरम]]&lt;br /&gt;
| 40&lt;br /&gt;
| 332,390&lt;br /&gt;
| 8&lt;br /&gt;
| 8 x 40 = 320&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[नागालैण्ड]]&lt;br /&gt;
| 60&lt;br /&gt;
| 516,449&lt;br /&gt;
| 9&lt;br /&gt;
| 9 x 60 = 540&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[उड़ीसा]]&lt;br /&gt;
| 147&lt;br /&gt;
| 21,944,615&lt;br /&gt;
| 149&lt;br /&gt;
| 149 x 147 = 21,903&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[पंजाब]]&lt;br /&gt;
| 117&lt;br /&gt;
| 13,551,060&lt;br /&gt;
| 116&lt;br /&gt;
| 116 x 117 = 13,572&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[राजस्थान]]&lt;br /&gt;
| 200&lt;br /&gt;
| 25,765,806&lt;br /&gt;
| 129&lt;br /&gt;
| 129 x 200 = 25,800&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[सिक्किम]]&lt;br /&gt;
| 32&lt;br /&gt;
| 209,843&lt;br /&gt;
| 7&lt;br /&gt;
| 7 x 32 = 224&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[तमिलनाडु]]&lt;br /&gt;
| 234&lt;br /&gt;
| 41,199,168&lt;br /&gt;
| 176&lt;br /&gt;
| 176 x 234 = 41,184 &lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[त्रिपुरा]]&lt;br /&gt;
| 60&lt;br /&gt;
| 1,556,342&lt;br /&gt;
| 26&lt;br /&gt;
| 26 x 60 = 1,560&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[उत्तर प्रदेश]]&lt;br /&gt;
| 403&lt;br /&gt;
| 83,849,905&lt;br /&gt;
| 208&lt;br /&gt;
| 208 x 403 = 83,824&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[उत्तराखण्ड]]&lt;br /&gt;
| 70&lt;br /&gt;
| 4,491,239&lt;br /&gt;
| 64&lt;br /&gt;
| 64 x 70 = 4,480&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[पश्चिम बंगाल]]&lt;br /&gt;
| 294&lt;br /&gt;
| 44,312,011&lt;br /&gt;
| 151&lt;br /&gt;
| 151 x 294 =44,394&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[दिल्ली]]&lt;br /&gt;
| 70 &lt;br /&gt;
| 40,65,698&lt;br /&gt;
| 58&lt;br /&gt;
| 58 x 70 = 4,060&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[पुदुचेरी]]&lt;br /&gt;
| 30 &lt;br /&gt;
| 471,707&lt;br /&gt;
| 16&lt;br /&gt;
| 16 x 30 = 480&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| कुल&lt;br /&gt;
|4120&lt;br /&gt;
| 549,302,005&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| =549,474&lt;br /&gt;
|}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==एक सांसद के मत का मूल्य==&lt;br /&gt;
*राज्य के कुल निर्वाचित विधायकों के मतों का मूल्य = 5,49,474&lt;br /&gt;
*लोकसभा के कुल निर्वाचित सदस्यों की संख्या = 543&lt;br /&gt;
*राज्यसभा के कुल निर्वाचित सदस्यों की संख्या = 233&lt;br /&gt;
*कुल सांसदों की संख्या = 543+233 = 776&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
एक सांसद के मत के मूल्य का फार्मूला = राज्य के कुल मतों का मूल्य यानी 5,49,474 / कुल सांसदों की संख्या यानी 778 = 708.085 यानी 708&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सांसदों के कुल मतों का मूल्य, 708×776 = 5,49,408&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
वर्ष [[2002]] के राष्ट्रपति चुनाव में भाग लेने वाले कुल मतदाताओं की संख्या = कुल विधायक (4120) + कुल सांसद (776) = 4896&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सभी मतदाताओं के कुल मतों का मूल्य = 5,49,474+5,49,408 = 10,98,882&amp;lt;ref&amp;gt;नोट - भारतीय संविधान के अनुसार वर्ष 2002 के राष्ट्रपति चुनाव के लिए भी [[1971]] की जनगणना के आंकड़े ही मान्य थे, केवल [[झारखण्ड]], [[उत्तरांचल]] और [[छत्तीसगढ़]] जैसे नये बने तीन राज्यों के विधायकों के मतों का मूल्य अलग से तय किया गया है।&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
राष्ट्रपति के चुनाव को इस आधार पर चुनौती नहीं दी जा सकती कि निर्वाचक मंडल में कोई रिक्त स्थान था। सर्वोच्च न्यायालय ने भी यह निर्णय दिया है कि बिना किसी विधानसभा के ही राष्ट्रपति का चुनाव कराया जा सकता है।&lt;br /&gt;
==सम्बन्धित विवाद का विनिश्चय==&lt;br /&gt;
अनुच्छेद 7 के अनुसार राष्ट्रपति के चुनाव से सम्बन्धित विवाद का विनिश्चय [[उच्चतम न्यायालय]] द्वारा किया जाएगा। यदि कोई व्यक्ति राष्ट्रपति के रूप में निर्वाचित होकर पद ग्रहण कर लेता है और बाद में उसका चुनाव उच्चतम न्यायालय द्वारा अवैध घोषित किया जाता है, तो राष्ट्रपति के पद पर रहते हुए भी उसके द्वारा किया गया कार्य या की गयी घोषणा अविधिमान्य नहीं होगी।&lt;br /&gt;
==पुननिर्वाचन के लिए योग्यता==&lt;br /&gt;
अनुच्छेद 57 के अनुसार [[भारत]] के राष्ट्रपति पद पर पदस्थ व्यक्ति दूसरे कार्यकाल के लिए भी चुनाव में उम्मीदवार बन सकता है। वैसे संविधान में यह व्यवस्था नहीं की गयी है कि राष्ट्रपति पद पर पदस्थ व्यक्ति दूसरे कार्यकाल के लिए निर्वाचन में भाग ले सकता है या नहीं, लेकिन सामान्यत: यह परम्परा बन गयी है कि राष्ट्रपति पद के लिए कोई व्यक्ति एक ही बार निर्वाचित किया जाता है। इसका अपवाद राजेन्द्र प्रसाद रहे हैं, जो दो बार राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार थे। इसके अतिरिक्त दो राष्ट्रपति [[ज़ाकिर हुसैन]] तथा फ़खरुद्दीन अली अहमद, जिनकी कार्यकाल के दौरान ही मृत्यु हो गई थी, के सिवाय सभी राष्ट्रपति अपने एक कार्यकाल के बाद दूसरी बार राष्ट्रपति के चुनाव में उम्मीदवार नहीं बने।&lt;br /&gt;
{| class=&amp;quot;bharattable&amp;quot; border=&amp;quot;1&amp;quot;&lt;br /&gt;
|+राष्ट्रपति पद का चुनाव तथा विजयी एवं द्वितीय स्थान प्राप्त उम्मीदवारों की सूची&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
! क्र.सं.&lt;br /&gt;
! वर्ष&lt;br /&gt;
! निर्वाचित प्रत्याशी&lt;br /&gt;
! द्वितीय स्थान प्राप्त प्रत्याशी&lt;br /&gt;
! मत प्रतिशत&lt;br /&gt;
! चित्र&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| पहला&lt;br /&gt;
| [[1952]]&lt;br /&gt;
| [[राजेन्द्र प्रसाद|डॉ. राजेन्द्र प्रसाद]]&lt;br /&gt;
| के. टी. शाह&lt;br /&gt;
| 83.80&lt;br /&gt;
| [[चित्र:Dr.Rajendra-Prasad.jpg|30px]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| दूसरा                &lt;br /&gt;
| [[1957]]&lt;br /&gt;
| [[राजेन्द्र प्रसाद|डॉ. राजेन्द्र प्रसाद]]&lt;br /&gt;
| एन. एन. दास&lt;br /&gt;
| 99.30&lt;br /&gt;
| [[चित्र:Dr.Rajendra-Prasad.jpg|30px]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| तीसरा   &lt;br /&gt;
| [[1962]]&lt;br /&gt;
| [[सर्वपल्ली राधाकृष्णन|डॉ. राधाकृष्णन]]&lt;br /&gt;
| सी. एच. राम&lt;br /&gt;
| 98.30&lt;br /&gt;
| [[चित्र:Sarvepalli-Radhakrishnan.jpg|30px]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| चौथा   &lt;br /&gt;
| [[1967]]&lt;br /&gt;
| [[डॉ. ज़ाकिर हुसैन]]&lt;br /&gt;
| के. सुब्बाराव&lt;br /&gt;
| 56.20&lt;br /&gt;
| [[चित्र:Dr.Zakir-Hussain.jpg|30px]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| पाँचवाँ   &lt;br /&gt;
| [[1969]]&lt;br /&gt;
| [[वाराहगिरि वेंकट गिरि]]&lt;br /&gt;
| [[नीलम संजीव रेड्डी]]&lt;br /&gt;
| 50.20&lt;br /&gt;
| [[चित्र:V.V.Giri.jpg|30px]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| छठा &lt;br /&gt;
| [[1974]]&lt;br /&gt;
| [[फ़ख़रुद्दीन अली अहमद]]&lt;br /&gt;
| टी. चौधरी&lt;br /&gt;
| 80.20&lt;br /&gt;
| [[चित्र:Fakhruddin-Ali-Ahmed.jpg|30px]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| सातवाँ  &lt;br /&gt;
| [[1977]]&lt;br /&gt;
| [[नीलम संजीव रेड्डी]]&lt;br /&gt;
| निर्विरोध&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| [[चित्र:Neelam Sanjiva Reddy.jpg|30px]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| आठवाँ &lt;br /&gt;
| [[1982]]&lt;br /&gt;
| [[ज्ञानी ज़ैल सिंह]]&lt;br /&gt;
| एच. आर. खन्ना&lt;br /&gt;
| 72.70&lt;br /&gt;
| [[चित्र:Giani-Zail-Singh.jpg|30px]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| नवाँ &lt;br /&gt;
| [[1987]]&lt;br /&gt;
| [[रामस्वामी वेंकटरमण|आर. वेंकिटरमन अय्यर]]&lt;br /&gt;
| वी. आर. कृष्ण&lt;br /&gt;
| 72.30&lt;br /&gt;
| [[चित्र:R. Venkataraman.jpg|30px]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| दसवाँ      &lt;br /&gt;
| [[1992]]&lt;br /&gt;
| [[शंकरदयाल शर्मा|डॉ. शंकरदयाल शर्मा]]&lt;br /&gt;
| जी. जी. स्वेल&lt;br /&gt;
| 64.78&lt;br /&gt;
| [[चित्र:Shankar-Dayal-Sharma.jpg|30px]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| ग्यारहवाँ  &lt;br /&gt;
| [[1997]]&lt;br /&gt;
| [[के. आर. नारायणन]] &lt;br /&gt;
| टी. एन. शेषन&lt;br /&gt;
| 94.70&lt;br /&gt;
| [[चित्र:K.R.Narayanan.jpg|30px]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| बारहवाँ  &lt;br /&gt;
| [[2002]]&lt;br /&gt;
| [[डॉक्टर ए. पी. जे. अब्दुल कलाम]]&lt;br /&gt;
| कैप्टन लक्ष्मी सहगल&lt;br /&gt;
| 89.98&lt;br /&gt;
| [[चित्र:Abdul-Kalam.jpg|30px]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| तेरहवाँ  &lt;br /&gt;
| [[2007]]&lt;br /&gt;
| [[प्रतिभा देवी सिंह पाटिल]] &lt;br /&gt;
| भैरोसिंह शेखाबत&lt;br /&gt;
| 65.82&lt;br /&gt;
| [[चित्र:Pratibha-Patil.jpg|30px]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| तेरहवाँ  &lt;br /&gt;
| [[2012]]&lt;br /&gt;
| [[प्रणव मुखर्जी]] &lt;br /&gt;
| पी. ए. संगमा&lt;br /&gt;
| 69.31&lt;br /&gt;
| [[चित्र:Pranab_mukherjee.jpg|30px]]&lt;br /&gt;
|}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==राष्ट्रपति के द्वारा शपथ==&lt;br /&gt;
राष्ट्रपति या कोई व्यक्ति, जो किसी कारण से राष्ट्रपति के कृत्यों के निर्वहन के लिए नियुक्त होता है, अपना पद ग्रहण करने के पूर्व अनुच्छेद 60 के तहत भारत के मुख्य न्यायधीश या उसकी अनुपस्थिति में [[उच्चतम न्यायालय]] में उपलब्ध वरिष्ठतम न्यायधीश के समक्ष अपने पद के कार्यपालन की शपथ लेता है। राष्ट्रपति के शपथ पत्र का प्रारूप निम्नलिखित रूप में होता है–&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;'''मैं, अमुक ईश्वर की शपथ लेता हूँ सत्य निष्ठा से प्रतिज्ञाण करता हूँ कि मैं श्रद्धापूर्वक भारत के राष्ट्रपति के पद का कार्यपालन (अथवा राष्ट्रपति के कृत्यों का निर्वहन) करूँगा तथा अपनी पूरी योग्यता से संविधान और विधि का परिरक्षण, संरक्षण और प्रतिरक्षण करूँगा और मैं भारत की जनता की सेवा और कल्याण में निरत रहूँगा।'''&amp;lt;/poem&amp;gt; राष्ट्रपति द्वारा लिया जाने वाला शपथ या प्रतिज्ञण उपराष्ट्रपति एवं [[प्रधानमंत्री]] के शपथ से इस मामले में भिन्न है कि राष्ट्रपति संविधान और विधि के परिरक्षण, संरक्षण और प्रतिरक्षण का शपथ लेता है।&lt;br /&gt;
==राष्ट्रपति की पदावधि==&lt;br /&gt;
अनुच्छेद 56 के अनुसार राष्ट्रपति अपने पदग्रहण की तिथि से पाँच वर्ष की अवधि तक अपने पद पर बना रहता है, लेकिन इस पाँच वर्ष की अवधि के पूर्व भी वह उपराष्ट्रपति को अपना त्यागपत्र दे सकता है या उसे पाँच वर्ष की अवधि के पूर्व संविधान के उल्लंघन के लिए संसद द्वारा लगाये गये महाभियोग द्वारा हटाया जा सकता है। राष्ट्रपति द्वारा उपराष्ट्रपति को सम्बोधित त्यागपत्र की सूचना उसके द्वारा (उपराष्ट्रपति के द्वारा) लोकसभा के अध्यक्ष को अविलम्ब दी जाती है।&lt;br /&gt;
राष्ट्रपति अपने पाँच वर्ष के कार्यकाल के पूरा करने के बाद भी तब तक राष्ट्रपति के पद पर बना रहता है, जब तक उसका उत्तराधिकारी पद ग्रहण नहीं कर लेता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भारतीय संविधान में प्रावधान किया गया है कि राष्ट्रपति के पद में आकस्मिक रिक्ति के दौरान या उसकी अनुपस्थिति में उपराष्ट्रपति, राष्ट्रपति के पद के कार्यों का निर्वहन करेगा और राष्ट्रपति तथा उपराष्ट्रपति दोनों के पद में आकस्मिक रिक्ति के दौरान या दोनों की अनुपस्थिति में भारत का मुख्य न्यायधीश राष्ट्रपति के पद के कृत्यों का निर्वहन करेगा। इसी कारण जब [[3 मई]], [[1969]] को तत्कालीन राष्ट्रपति ज़ाकिर हुसैन की मृत्यु हुई, तब तत्कालीन उपराष्ट्रपति वी॰ वी॰ गिरि कार्यकारी राष्ट्रपति नियुक्त किये गये। लेकिन उन्होंने राष्ट्रपति पद के चुनाव में उम्मीदवार होने के लिए अपने पद से त्यागपत्र दे दिया था। तब भारत के तत्कालीन मुख्य न्यायधीश न्यायमूर्ति मो॰ हिदायतुल्ला ने राष्ट्रपति के पद का निर्वहन तब तक किया, जब तक निर्वाचित होकर वी॰ वी॰ गिरि ने राष्ट्रपति पद का कार्यभार ग्रहण नहीं कर लिया। अब तक तीन उपराष्ट्रपति वी॰ वी॰ गिरि (राष्ट्रपति जाकिर हुसैन की मृत्यु के कारण), [[बी.डी. जत्ती]] (राष्ट्रपति फ़खरुद्दीन अली अहमद की मृत्यु के कारण), तथा मोहम्मद हिदायतुल्ला (राष्ट्रपति ज्ञानी ज़ेल सिंह की अनुपस्थिति के कारण) और एक मुख्य न्यायधीश न्यायमूर्ती मोहम्मद हिदायतुल्ला राष्ट्रपति के पद के कृत्यों का निर्वहन कर चुके हैं।&lt;br /&gt;
{| width=&amp;quot;100%&amp;quot;&lt;br /&gt;
|-valign=&amp;quot;top&amp;quot;&lt;br /&gt;
| style=&amp;quot;width:50%&amp;quot;|&lt;br /&gt;
&amp;lt;div style=&amp;quot;border:thin solid #aaaaaa; margin:10px&amp;quot;&amp;gt;&lt;br /&gt;
{| width=&amp;quot;98%&amp;quot; class=&amp;quot;bharattable&amp;quot;&lt;br /&gt;
|+भारत के राष्ट्रपति पद के कृत्यों का निर्वहन करने वाले व्यक्ति&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
! नाम&lt;br /&gt;
! कार्यकाल&lt;br /&gt;
|}&lt;br /&gt;
&amp;lt;div style=&amp;quot;height: 300px; overflow: auto;overflow-x:hidden;&amp;quot;&amp;gt;&lt;br /&gt;
{| class=&amp;quot;bharattable&amp;quot; border=&amp;quot;1&amp;quot; width=&amp;quot;99%&amp;quot;&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[राजेन्द्र प्रसाद|डॉ. राजेन्द्र प्रसाद]]&lt;br /&gt;
| [[26 जनवरी]], [[1950]] से [[13 मई]], [[1962]] &lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[सर्वपल्ली राधाकृष्णन|डॉ. राधाकृष्णन]]&lt;br /&gt;
| [[13 मई]], [[1962]] से [[13 मई]], [[1967]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[डॉ. ज़ाकिर हुसैन]]&lt;br /&gt;
| [[15 मई]], [[1967]] से [[3 मई]], [[1969]] &lt;br /&gt;
(कार्यकाल में ही मृत्यु)&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[वाराहगिरि वेंकट गिरि]] &lt;br /&gt;
(उपराष्ट्रपति)&lt;br /&gt;
| [[3 मई]], [[1969]] से [[20 जुलाई]], [[1969]] &lt;br /&gt;
(कार्यवाहक)&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| न्यायमूर्ति एम॰ हिदायतुल्ला &lt;br /&gt;
(भारत के मुख्य न्यायाधीश)&lt;br /&gt;
| [[20 जुलाई]], [[1969]] से [[24 अगस्त]], [[1969]] &lt;br /&gt;
(कार्यवाहक)&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[वाराहगिरि वेंकट गिरि]]&lt;br /&gt;
| [[24 अगस्त]], [[1969]] से [[24 अगस्त]], [[1974]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[फ़ख़रुद्दीन अली अहमद]]&lt;br /&gt;
| [[24 अगस्त]], [[1974]] से [[11 फ़रवरी]], [[1977]] &lt;br /&gt;
(कार्यकाल में ही मृत्यु)&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[बी.डी. जत्ती]] (उपराष्ट्रपति)  &lt;br /&gt;
| [[11 फ़रवरी]], [[1977]] से [[25 जुलाई]], [[1977]] &lt;br /&gt;
(कार्यवाहक) &lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[नीलम संजीव रेड्डी]]&lt;br /&gt;
| [[25 जुलाई]], [[1977]] से [[25 जुलाई]], [[1982]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[ज्ञानी ज़ैल सिंह]]&lt;br /&gt;
| [[25 जुलाई]], [[1982]] से [[25 जुलाई]], [[1987]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| एम॰ हिदायतुल्ला (उपराष्ट्रपति) &lt;br /&gt;
| [[6 अक्टूबर]], [[1982]] से [[31 अक्टूबर]], [[1982]] &lt;br /&gt;
(जब राष्ट्रपति अनुपस्थित थे)&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[रामस्वामी वेंकटरमण]]  &lt;br /&gt;
| [[25 जुलाई]], [[1987]] से [[25 जुलाई]], [[1992]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[शंकरदयाल शर्मा|डॉ. शंकर दयाल शर्मा]]&lt;br /&gt;
| [[25 जुलाई]], [[1992]] से [[25 जुलाई]], [[1997]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[के. आर. नारायणन]] &lt;br /&gt;
| [[25 जुलाई]], [[1997]] से [[25 जुलाई]], [[2002]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[अब्दुल कलाम|डॉ. ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम]]&lt;br /&gt;
| [[25 जुलाई]], [[2002]] से [[25 जुलाई]], [[2007]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[प्रतिभा पाटिल]]&lt;br /&gt;
| [[25 जुलाई]], [[2006]] से निरन्तर&lt;br /&gt;
|}&lt;br /&gt;
&amp;lt;/div&amp;gt;&lt;br /&gt;
&amp;lt;/div&amp;gt;&lt;br /&gt;
| style=&amp;quot;width:50%&amp;quot;|&lt;br /&gt;
&amp;lt;div style=&amp;quot;border:thin solid #aaaaaa; margin:10px&amp;quot;&amp;gt;&lt;br /&gt;
{| width=&amp;quot;98%&amp;quot; class=&amp;quot;bharattable&amp;quot;&lt;br /&gt;
|+विभिन्न चुनावों में राष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों को मिले मत&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
! उम्मीदवार&lt;br /&gt;
! चुनाव तिथि&lt;br /&gt;
! प्राप्त मत&lt;br /&gt;
|}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;div style=&amp;quot;height: 300px; overflow: auto;overflow-x:hidden;&amp;quot;&amp;gt;&lt;br /&gt;
{| class=&amp;quot;bharattable&amp;quot; border=&amp;quot;1&amp;quot; width=&amp;quot;99%&amp;quot;&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| '''प्रथम चुनाव, 1952'''  &lt;br /&gt;
| '''2 मई, 1952'''&lt;br /&gt;
| &lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[डॉ. राजेन्द्र प्रसाद]]&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 5,07,400&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| के. टी. शाह  &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 92,827&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| लक्ष्मण गणेश ठाते  &lt;br /&gt;
| &lt;br /&gt;
| 2,672&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| चौधरी हरी राम  &lt;br /&gt;
| &lt;br /&gt;
| 1,954&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| कृष्ण कुमार चटर्जी &lt;br /&gt;
| &lt;br /&gt;
| 533&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| '''द्वितीय चुनाव, 1957''' &lt;br /&gt;
| '''6 मई, 1957'''&lt;br /&gt;
| '''प्राप्त मत'''&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| डॉ. राजेन्द्र प्रसाद &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 4,59,698&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| नागेन्द्र नारायण दास &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 2000&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| चौधरी हरी राम &lt;br /&gt;
| &lt;br /&gt;
| 1498&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| '''तृतीय चुनाव, 1962'''&lt;br /&gt;
| '''7 मई, 1962'''&lt;br /&gt;
| '''प्राप्त मत'''&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन]] &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 5,53,067&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| चौधरी हरी राम &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 6,341&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| यमुना प्रसाद त्रिशुलिया &lt;br /&gt;
| &lt;br /&gt;
| 3,537&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| '''चौथा चुनाव, 1967'''&lt;br /&gt;
| '''6 मई, 1967'''&lt;br /&gt;
| '''प्राप्त मत'''&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[डॉ. जाकिर हुसैन]] &lt;br /&gt;
| &lt;br /&gt;
| 4,71,244&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| कोका सुब्बाराय &lt;br /&gt;
| &lt;br /&gt;
| 3,63,971&lt;br /&gt;
|- &lt;br /&gt;
| खुबी राम &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 1369&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| यमुना प्रसाद त्रिशुलिया &lt;br /&gt;
| &lt;br /&gt;
| 750&lt;br /&gt;
|- &lt;br /&gt;
| भाम्बुरकर श्रीनिवास गोपाल &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 232&lt;br /&gt;
|- &lt;br /&gt;
| ब्रह्म देव &lt;br /&gt;
| &lt;br /&gt;
| 232&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| कृष्ण कुमार चटर्जी &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 125&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| कुमार कमला सिंह &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 125&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| '''पाँचवाँ चुनाव, 1969''' &lt;br /&gt;
| '''16 अगस्त, 1969'''&lt;br /&gt;
| '''प्राप्त मत'''&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[वी. वी. गिरि]] &lt;br /&gt;
| &lt;br /&gt;
| 4,01,515&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[नीलम संजीव रेड्डी]] &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 3,13,548&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| सी. डी. देशमुख &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 1,12,769&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| चन्द्रदत्त सेनानी &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 5,814&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| गुरुचरण कौर &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 940&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| राजभोज पांडुरंग नाथूजी&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 831&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| पं बाबूलाल भाग &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 576&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| मनोबिहारी अनिरुद्ध शर्मा &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 125&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| चौधरी हरी राम &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 125&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| खूबी राम &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 94&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| '''छठा चुनाव, 1974''' &lt;br /&gt;
| '''17 अगस्त, 1974'''&lt;br /&gt;
| '''प्राप्त मत'''&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[फ़खरुद्दीन अली अहमद]] &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 7,65,587&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| त्रिदिव चौधरी &lt;br /&gt;
| &lt;br /&gt;
| 1,89,196&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| '''सातवां चुनाव, 1977'''&lt;br /&gt;
| '''6 अगस्त, 1977'''&lt;br /&gt;
| '''प्राप्त मत'''&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[नीलम संजीव रेड्डी]]&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| निर्विरोध निर्वाचन&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| '''आठवां चुनाव, 1982'''&lt;br /&gt;
| '''12 जुलाई, 1982'''&lt;br /&gt;
| '''प्राप्त मत'''&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[ज्ञानी जैल सिंह]] &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 7,54,113&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| हंस राज खन्ना &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 2,82,685&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| '''नवां चुनाव, 1987'''&lt;br /&gt;
| '''13 जुलाई, 1987'''&lt;br /&gt;
| '''प्राप्त मत'''&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[रामास्वामी वेंकटरमण]] &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 7,40,148&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| कृष्ण अय्यर रामा अय्यर &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 2,81,550&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| मिथलेश कुमार &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 2,223&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| '''दसवां चुनाव, 1992'''&lt;br /&gt;
| '''13 जुलाई, 1992'''&lt;br /&gt;
| '''प्राप्त मत'''&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[डॉ. शंकर दयाल शर्मा]] &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 6,75,864&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| प्रो. जी. जी. स्वेल &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 3,46,485&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| राम जेठमलानी &lt;br /&gt;
| &lt;br /&gt;
| 2,704&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| जोगेन्द्र सिंह उर्फ धरती पकड़ &lt;br /&gt;
| &lt;br /&gt;
| 1,135&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| '''ग्याहरवां चुनाव, 1997'''&lt;br /&gt;
| '''14 जुलाई, 1997'''&lt;br /&gt;
| '''प्राप्त मत'''&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[के. आर. नारायणन]] &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 9,56,290&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| टी. एन. शेषन &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 50,631&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| '''बारहवां चुनाव, 2002'''&lt;br /&gt;
| '''15 जुलाई, 2002'''&lt;br /&gt;
| '''प्राप्त मत'''&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम]] &lt;br /&gt;
| &lt;br /&gt;
| 9,22,884&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| कैप्टन लक्ष्मी सहगल &lt;br /&gt;
| &lt;br /&gt;
| 1,07,366&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| '''तेरहवां चुनाव, 2007'''&lt;br /&gt;
| '''19 जुलाई, 2007'''&lt;br /&gt;
| '''प्राप्त मत'''&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[प्रतिभा देवी सिंह पाटिल]] &lt;br /&gt;
| &lt;br /&gt;
| 6,38,116&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| भैरोसिंह शेखावत &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 3,31,306&lt;br /&gt;
|}&lt;br /&gt;
&amp;lt;/div&amp;gt;&lt;br /&gt;
&amp;lt;/div&amp;gt;&lt;br /&gt;
|}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==वेतन और भत्ते==&lt;br /&gt;
राष्ट्रपति को नि:शुल्क शासकीय निवास उपलब्ध होता है। वह ऐसी परिलब्धियों, भत्तों और विशेषाधिकारों का हक़दार होता है, जो संसद विधि के द्वारा अवधारित करें, और जब तक संसद ऐसी विधि पारित नहीं करती है उनकी परिलब्धियाँ या भत्ते वही होगें जो संविधान की दूसरी अनुसूची में विनिर्दिष्ट हैं। [[1990]] में राष्ट्रपति की परिलब्धियाँ बढ़ाकर 20,000 रुपये, [[4 अगस्त]], [[1998]] को इसे बढ़ाकर 50,000 रुपये और [[10 जनवरी]], [[2008]] को राष्ट्रपति की परिलब्धियों में एक बार फिर पुन: संशोधन करते हुए इसे बढ़ाकर 1.50 लाख रुपये प्रति माह कर दिया गया। यह वृद्धि जनवरी, [[2006]] से प्रभावी की गई है। राष्ट्रपति को पद त्याग देने के पश्चात् या पदावधि समाप्ति पर उनके वेतन का 50 प्रतिशत पेंशन का प्रावधान है। इस प्रकार पद विमुक्ति के पश्चात् पूर्व राष्ट्रपति को 9,00,000 रुपये वार्षिक पेंशन देय है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पूर्व राष्ट्रपति को एक अतिरिक्त निजी सचिव के अलावा एक कर्मचारी की भी सुविधा का प्रावधान है। उन्हें मोबाइल फ़ोन, इंटरनेट और ब्राडबैंड का कनेक्शन भी उपलब्ध कराया जाएगा। उनके कार्यालय के रख-रखाव पर पूर्व में 12 हज़ार रुपये वार्षिक ख़र्च का प्रावधान था, जिसे बढ़ाकर अब 60,000 रुपये कर दिया गया है। पदावधि के दौरान राष्ट्रपति की मृत्यु हो जाने पर उसे पारिवारिक पेंशन, सुसज्जित आवास, कर्मचारी, कार, टेलीफ़ोन, यात्रा और स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध हैं। संविधान के अनुच्छेद 59 के अनुसार राष्ट्रपति की परिलब्धियाँ और उसके भत्ते उसके कार्यकाल में घटाये नहीं जा सकते। राष्ट्रपति के वेतन एवं भत्ते को आयकर से छूट प्राप्त हैं।&lt;br /&gt;
==महाभियोग की प्रक्रिया==&lt;br /&gt;
राष्ट्रपति को उसके पद से अनुच्छेद 61 के तहत महाभियोग की प्रक्रिया के द्वारा हटाया जा सकता है। राष्ट्रपति के विरुद्ध महाभियोग की प्रक्रिया तब संचालित की जा सकती है, जब उसने संविधान के प्रावधानों का उल्लंघन किया हो। राष्ट्रपति के विरुद्ध महाभियोग चलाने का संकल्प संसद के किसी भी सदन में पेश किया जा सकता है, लेकिन जिस सदन में महाभियोग का संकल्प पेश किया जाना हो, उसके एक चौथाई सदस्यों के द्वारा हस्ताक्षरित आरोप पत्र राष्ट्रपति को 14 दिन पूर्व दिया जाना आवश्यक है। राष्ट्रपति को आरोप पत्र दिये जाने के 14 दिन बाद ही सदन में महाभियोग का संकल्प पेश किया जा सकता है। जिस सदन में संकल्प पेश किया जाए, उसके सदस्य संख्या के बहुमत तथा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो तिहाई बहुमत से संकल्प पारित किया जाना चाहिए। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिस सदन में संकल्प पेश किया गया है, उसके द्वारा पारित किये जाने के बाद संकल्प दूसरे सदन को भेजा जाएगा और दूसरा सदन राष्ट्रपति पर लगाये गये आरोपों की जाँच करेगा। जब दूसरा सदन राष्ट्रपति पर लगाये गये आरोपों की जाँच कर रहा हो, तब राष्ट्रपति या तो स्वयं या तो अपने वकील के माध्यम से लगाये गये आरोपों के सम्बन्ध में अपना पक्ष प्रस्तुत करेगा और स्पष्टीकरण देगा। यदि दूसरा सदन राष्ट्रपति पर लगाये गये आरोपों को सही पाता है तथा अपनी संख्या के बहुमत से तथा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो तिहाई बहुमत पहले सदन द्वारा पारित संकल्प का अनुमोदन कर देता है, तो महाभियोग की कार्रवाई पूर्ण हो जाती है। इस प्रकार राष्ट्रपति अपना पद त्याग करने के लिए बाध्य हो जाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==राष्ट्रपति भवन==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Rashtrapati-Bhavan-1.jpg|thumb|200px|राष्ट्रपति भवन, [[दिल्ली]] &amp;lt;br /&amp;gt; Rashtrapati Bhavan, Delhi]]&lt;br /&gt;
{{main|राष्ट्रपति भवन}}&lt;br /&gt;
राष्ट्रपति भवन वास्तुकला का उत्कृष्ट नमूना है। इस भवन के निर्माण की सोच सर्वप्रथम [[1911]] में उस समय उत्पन्न हुई जब [[दिल्ली दरबार]] ने निर्णय किया कि भारत की राजधानी [[कोलकाता]] से [[दिल्ली]] स्थानान्तरित की जाएगी। इसी के साथ में यह भी निर्णय लिया गया कि [[नई दिल्ली]] में ब्रिटिश वायसराय के रहने के लिए एक आलीशान भवन का निर्माण किया जाएगा।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==राष्ट्रपति के अंगरक्षक==&lt;br /&gt;
राष्ट्रपति की सुरक्षा के लिए अंगरक्षकों की व्यवस्था है। इस अंगरक्षक दस्ते का गठन सर्वप्रथम 1773 में गवर्नर जनरल हेस्टिग्स ने [[बनारस]] में किया था। प्रारम्भ में इस दस्तें में 50 जवान और 50 घोड़े शामिल किये गये थे। बाद में बनारस के राजा चेत सिंह द्वारा इस दस्ते में 50 जवान और 50 घोड़े शामिल कर लिये जाने के बाद इनकी संख्या 100 हो गई। प्रथम विश्वयुद्ध से पूर्व यह संख्या 1845 थी, जो कालान्तर में बढ़कर 1929 हो गई। वर्तमान में राष्ट्रपति के अंगरक्षक दस्ते में 4 अधिकारी, 14 जूनियर कमीशंड अधिकारी और 161 जवानों की टुकड़ी शामिल है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
राष्ट्रपति के सुरक्षा बलों को 1784 तक गवर्नर जनरल का बाडीगार्ड कहा जाता था। 1858 में इसे वायसराय का बाडीगार्ड कहा जाने लगा। [[1944]] तक आते-आते इसका नाम '44वीं डिवीजन निगरानी स्कवॉड्रन' पड़ गया। [[1947]] में एक बार फिर इस दस्ते को 'गवर्नर जनरल बाडीगार्ड' कहा जाने लगा। लेकिन [[21 जनवरी]], [[1950]] को भारत को गणतंत्र घोषित किये जाने के साथ ही इस दस्ते को 'राष्ट्रपति का अंगरक्षक' के रूप में नामांकित कर दिया गया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
राष्ट्रपति के अंगरक्षक के दस्ते के रेजीमेंट का [[नीला रंग|रंग नीला]] और गाढ़ा लाल (मैरून) है। इस दस्ते का अमर वाक्य 'भारत माता की जय' है। वर्तमान में राष्ट्रपति के अंगरक्षक दस्तें में [[सिक्ख]], [[जाट]] और राजपूत सहित लगभग सभी रेजीमेंट के जवान और अधिकारी कार्यरत हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==शक्तियाँ तथा अधिकार==&lt;br /&gt;
भारतीय संविधान द्वारा राष्ट्रपति को निम्नलिखित शक्तियाँ तथा अधिकार प्रदान किये गये हैं–&lt;br /&gt;
====कार्यपालिका शक्तियाँ====&lt;br /&gt;
संविधान के अनुच्छेद 73 के अनुसार संघ की कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में निहित है और वह अपनी इस शक्ति का प्रयोग अपने अधीनस्थ प्राधिकारियों के माध्यम से करता है। यहाँ अधीनस्थ प्राधिकारी का तात्पर्य केन्द्रीय मंत्रिमण्डल से है। राष्ट्रपति की कार्यपालिका शक्तियों को निम्नलिखित तीन भागों में विभाजित किया जा सकता है–&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;u&amp;gt;'''मंत्रिपरिषद का गठन'''&amp;lt;/u&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अनुच्छेद 74 के अनुसार राष्ट्रपति संघ की कार्यपालिका शक्ति के संचालन में सलाह देने के लिए मंत्रिपरिषद का गठन करता है, जिसका अध्यक्ष प्रधानमंत्री होता है। सामान्यत: राष्ट्रपति ऐसे व्यक्ति को प्रधानमंत्री के पद पर नियुक्त करता है जो कि लोकसभा में बहुमत दल का नेता हो। इस प्रकार नियुक्त किये गये प्रधानमंत्री की सलाह पर वह मंत्रिपरिषद के अन्य सदस्यों की नियुक्ति करता है। साथ ही वह प्रधानमंत्री की सलाह पर मंत्रिपरिषद के किसी सदस्य को बर्ख़ास्त कर सकता है। सामान्यत: यह प्रथा रही है कि प्रधानमंत्री लोकसभा का सदस्य होता है, क्योंकि मंत्रिपरिषद लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होता है, लेकिन राष्ट्रपति को यह अधिकार है कि यदि लोकसभा में बहुमत प्राप्त दल किसी ऐसे व्यक्ति को अपना नेता चुनता है, जो लोकसभा का सदस्य नहीं है या राज्यसभा का सदस्य है, तो राष्ट्रपति ऐसे व्यक्ति को प्रधानमंत्री नियुक्त करता है, लेकिन इस प्रकार नियुक्त किये गये व्यक्ति को 6 माह के अंतर्गत संसद का सदस्य होना पड़ता है। इसी तरह प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति ऐसे व्यक्ति को मंत्रिपरिषद में शामिल कर सकता है, जो कि संसद का सदस्य नहीं है। यदि ऐसा व्यक्ति मंत्रिपरिषद में शामिल किया जाता है तो उसे छ: माह के अंतर्गत संसद के किसी सदन का सदस्य बनना पड़ता है। &lt;br /&gt;
जब कभी ऐसी स्थिति उत्पन्न हो कि लोकसभा में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत न मिले या लोकसभा में पेश किये गये अविश्वास प्रस्ताव के पारित होने के कारण मंत्रिपरिषद को त्यागपत्र देना पड़े, तो राष्ट्रपति किस व्यक्ति को प्रधानमंत्री नियुक्त करेगा, इस सम्बन्ध में संविधान में कोई प्रावधान नहीं है। यहाँ पर राष्ट्रपति ऐसे व्यक्ति को प्रधानमंत्री नियुक्त कर सकता है, जिसके सम्बन्ध में उसे विश्वास हो कि वह लोकसभा में अपना बहुमत सिद्ध करता है। इस सम्बन्ध में कुछ हद तक राष्ट्रपति को विशेषाधिकार प्राप्त हैं। इसी विशेषाधिकार के प्रयोग में राष्ट्रपति ने [[1979]] में चरण सिंह को प्रधानमंत्री नियुक्त किया था। चरण सिंह की प्रधानमंत्री पद पर नियुक्ति को इस आधार पर न्यायालय में चुनौती दी गयी थी कि विश्वास मत प्राप्त करने पर ही उन्हें प्रधानमंत्री के रूप में नियुक्त किया जाना चाहिए था, किन्तु न्यायालन ने अपने निर्णय में कहा कि प्रधानमंत्री की नियुक्ति के सम्बन्ध में यह पूर्ववर्ती शर्त नहीं है कि लोकसभा में विश्वास मत प्राप्त किया जाय। इसी तरह [[1989]] में [[वी. पी. सिंह]], [[1991]] में [[नरसिंह राव पी. वी.|पी. वी. नरसिंहराव]], [[1996]] में [[अटल बिहारी वाजपेयी]] और 1996 में ही [[एच डी देवगौड़ा]] तथा [[1997]] में [[इन्द्रकुमार गुजराल]] को प्रधानमंत्री पर पर नियुक्त किया गया था। बाद में [[1998]] में 12वीं लोकसभा के गठन के बाद राष्ट्रपति ने अटल बिहारी वाजपेयी को प्रधानमंत्री पद पर नियुक्त किया था। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;u&amp;gt;'''नियुक्ति सम्बन्धी शक्ति'''&amp;lt;/u&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
संविधान द्वारा राष्ट्रपति को यह शक्ति दी गई है कि वह संघ से सम्बन्धित महत्त्वपूर्ण पदों पर नियुक्तियाँ करें। राष्ट्रपति इस शक्ति के प्रयोग में कई पदाधिकारियों, जैसे-महान्यायवादी, नियंत्रक-महालेखा परीक्षक, वित्त आयोगों के सदस्यों, संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष तथा अन्य सदस्यों, संयुक्त राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष तथा अन्य सदस्यों, मुख्य निर्वाचन आयुक्त, अन्य निर्वाचन आयुक्तों, [[उच्चतम न्यायालय]] तथा उच्च न्यायालयों के न्यायाधाशों, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष तथा सदस्यों, राष्ट्रीय महिला आयोग के अध्यक्ष तथा सदस्यों, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष तथा सदस्यों, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्षों तथा सदस्यों, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष तथा सदस्यों, राज्यों के राज्यपालों, संघ राज्यक्षेत्रों के उपराज्यपालों या प्रशासकों की नियुक्ति कर सकता है। राष्ट्रपति ये नियुक्तियाँ मंत्रिपरिषद की सलाह से करता है। वह अपने द्वारा नियुक्त प्राधिकारियों तथा अधिकारियों को पदमुक्त कर सकता है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;u&amp;gt;'''आयोगों का गठन'''&amp;lt;/u&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
राष्ट्रपति को आयोगों को गठित करने की शक्तियाँ भी प्रदान की गई हैं। यह भारत के राज्य क्षेत्र में सामाजिक और शैक्षणिक दृष्टि से पिछड़े वर्ग की दशाओं का अन्वेषण करने के लिए आयोग, [[राजभाषा]] पर प्रतिवेदन देने के लिए आयोग, अनुसूचित क्षेत्रों के प्रशासन पर रिपोर्ट देने के लिए तथा राज्यों में अनुसूचित जनजातियों के कल्याण सम्बन्धी क्रियाकलापों पर रिपोर्ट देने के लिए आयोग का गठन कर सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
====सैनिक शक्ति====&lt;br /&gt;
संघ के रक्षाबलों का समादेश राष्ट्रपति में निहित होता है। वह रक्षा बलों का प्रमुख होता है। राष्ट्रपति अपने में निहित रक्षा बलों का समादेश उस विधि के अनुसार प्रयुक्त करता है, जिसे संसद बनाये। वह रक्षा बलों के प्रमुखों को भी नियुक्त करता है। &lt;br /&gt;
====राजनयिक शक्तियाँ ====&lt;br /&gt;
अन्य देशों के साथ में भारत का संव्यवहार राष्ट्रपति के नाम से किया जाता है। अंतर्राष्ट्रीय मामलों में राष्ट्रपति भारत का प्रतिनिधित्व करता है। अन्य देशों में भेजे जाने वाले राजदूत तथा उच्चायुक्त राष्ट्रपति के द्वारा नियुक्त जाते हैं। साथ ही अन्य देशों से भारत में नियुक्ति पर आने वाले राजदूतों व उच्चायुक्तों का स्वागत भी राष्ट्रपति के द्वारा किया जाता है। जब अन्य देश के राजदूत या उच्चायुक्त भारत में नियुक्त होकर आते हैं, तो वे अपना 'प्रत्यय पत्र' राष्ट्रपति के समक्ष पेश करते हैं। समस्त अंतर्राष्ट्रीय क़रार और सन्धियाँ राष्ट्रपति के नाम से की जाती हैं, लेकिन राष्ट्रपति अपनी राजनयिक शक्ति का प्रयोग मंत्रिपरिषद की सलाह पर करता है।&lt;br /&gt;
====विधायी शक्तियाँ एवं कार्य====&lt;br /&gt;
संविधान द्वारा राष्ट्रपति को व्यापक विधायी शक्तियाँ प्रदान की गयी हैं, जिन्हें निम्नलिखित भागों में विभाजित किया जा सकता है-&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;u&amp;gt;'''संसद से सम्बन्धित शक्ति'''&amp;lt;/u&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
राष्ट्रपति संसद का अभिन्न अंग है, क्योंकि संसद का गठन राष्ट्रपति और लोकसभा तथा राज्यसभा से मिलकर होता है। संसद से सम्बन्धित राष्ट्रपति की शक्तियाँ निम्नलिखित हैं-&lt;br /&gt;
#अनुच्छेद 331 के तहत वह लोकसभा में आंग्ल-भारतीय समुदाय के दो सदस्यों को नामजद कर सकता है, यदि उसके विचार में लोकसभा में उस समूदाय को उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिला है।&lt;br /&gt;
#वह राज्यसभा में 12 सदस्यों को मनोनीत कर सकता है (अनुच्छेद 80, 1)।&lt;br /&gt;
#यदि संसद के किसी सदस्य की अयोग्यता के सम्बन्ध में, दल-बदल के आधार पर के सिवाय, सवाल उत्पन्न होता है, तो उसका निर्णय राष्ट्रपति करेगा, लेकिन राष्ट्रपति ऐसा निर्णय करने के लिए निर्वाचन आयोग की राय लेगा। &lt;br /&gt;
#राष्ट्रपति संसद के सत्र को आहूत करता है, लेकिन संसद के एक सत्र की अन्तित बैठक और आगामी सत्र की प्रथम बैठक के लिए नियत तारीख़ के बीच छ: मास का अन्तर नहीं होना चाहिए। &lt;br /&gt;
#वह सदनों या किसी सदन का सत्रावसान कर सकता है तथा लोकसभा का विघटन कर सकता है। &lt;br /&gt;
#वह संसद के किसी एक सदन में या संसद के संयुक्त अधिवेशन में अभिभाषण कर सकता है। &lt;br /&gt;
#संसद में लम्बित किसी विधेयक के सम्बन्ध में संसद के दोनों सदनों या किसी सदन को संदेश भेज सकता है और उसके संदेश पर यथाशीघ्र विचारण किया जाता है। &lt;br /&gt;
#वह लोकसभा के प्रत्येक साधारण निर्वाचन के पश्चात् प्रथम सत्र के आरम्भ में और प्रत्येक वर्ष के प्रथम सत्र के आरम्भ में संसद के संयुक्त अधिवेशन में अभिभाषण कर सकता है। &lt;br /&gt;
#संसद द्वारा कोई विधेयक पारित किये जाने पर उसे राष्ट्रपति के समक्ष अनुमति के लिए भेजा जाता है। राष्ट्रपति या तो उस पर अपनी अनुमति देता है या विधेयक पर पुन: विचार करने के लिए संसद को वापस भेजता है। यदि संसद द्वारा पुन: विधेयक पारित कर दिया जाता है तो राष्ट्रपति उस पर अपनी अनुमति देने के लिए बाध्य होता है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;u&amp;gt;'''विधेयक को पेश करने की सिफ़ारिश करने की शक्ति'''&amp;lt;/u&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
निम्नलिखित विधेयक राष्ट्रपति की सिफ़ारिश के बिना संसद में पेश नहीं किये जा सकते-&lt;br /&gt;
#धन विधेयक, लेकिन किसी कर को घटाने या समाप्त करने का प्रावधान करने वाले विधेयक राष्ट्रपति की सिफ़ारिश के बिना संसद में पेश किये जा सकते हैं।&lt;br /&gt;
#राज्य का निर्माण करने या विद्यमान राज्य के क्षेत्र, सीमा या नाम में परिवर्तन करने वाले विधेयक।&lt;br /&gt;
#जिस कराधान में राज्य का हित हो, उस कराधान पर प्रभाव डालने वाले विधेयक।&lt;br /&gt;
#जिस विधेयक को अधिनियमित और प्रवर्तित करने से भारत की संचित निधि से व्यय करना पड़ेगा, सम्बन्धी विधेयक।&lt;br /&gt;
#भूमि अधिग्रहण से सम्बन्धित विधेयक।&lt;br /&gt;
#व्यापार की स्वतंत्रता पर रोक लगाने वाले राज्य का कोई विधेयक।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;u&amp;gt;'''राज्य विधान मण्डल के द्वारा बनायी जाने वाली विधि के सम्बन्ध में राष्ट्रपति की शक्ति'''&amp;lt;/u&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
राज्य विधान मण्डल द्वारा बनायी जाने वाली विधि के सम्बन्ध में राष्ट्रपति को निम्नलिखित शक्तियाँ प्राप्त हैं-&lt;br /&gt;
#यदि राज्य विधान मण्डल कोई ऐसा विधेयक पारित करता है, जिससे उच्च न्यायालय की अधिकारिता प्रभावित होती है, तो राज्यपाल उस विधेयक पर अनुमति नहीं देगा और उसे राष्ट्रपति की अनुमति के लिए आरक्षित कर देगा।&lt;br /&gt;
#राज्य विधान मण्डल के द्वारा सम्पत्ति प्राप्त करने के लिए पारित विधेयक को राष्ट्रपति की अनुमति के लिए आरक्षित रखा जाएगा। &lt;br /&gt;
#किसी राज्य के अन्दर या दूसरे राज्यों के साथ व्यापार आदि पर प्रतिबन्ध लगाने वाले विधेयकों को विधानसभा में पेश करने के पहले राष्ट्रपति की अनुमति लेनी होगी।&lt;br /&gt;
#वित्तीय आपात स्थिति के प्रवर्तन की स्थिति में राष्ट्रपति निर्देश दे सकता है कि सभी धन विधेयकों को राज्य विधान सभा में पेश करने के पहले उस पर राष्ट्रपति की अनुमति ली जाए। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;u&amp;gt;'''अध्यादेश जारी करने की शक्ति'''&amp;lt;/u&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
संविधान के अनुच्छेद 123 के तहत राष्ट्रपति को अध्यादेश जारी करने की शक्ति प्रदान की गयी है। राष्ट्रपति द्वारा जारी अध्यादेश का वही प्रभाव होता है, जो संसद द्वारा पारित तथा राष्ट्रपति के द्वारा अनुमोदित अधिनियम को होता है, लेकिन अन्तर यह होता है कि अधिनियम का प्रभाव तब तक स्थायी होता है, जब तक की संसद के द्वारा या राष्ट्रपति के अध्यादेश द्वारा निरस्त न कर दिया जाए, इसके विपरीत अध्यादेश केवल 6 मास तक ही प्रवर्तन में रहता है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
राष्ट्रपति के द्वारा अध्यादेश संसद के विश्रान्तिकाल में उस समय जारी किया जाता है, जब राष्ट्रपति को यह विश्वास हो जाए कि ऐसी परिस्थिति उत्पन्न हो गयी है, जिसके अनुसार अविलम्ब कार्रवाई करना आवश्यक है। राष्ट्रपति के द्वारा जारी अध्यादेश का प्रभाव केवल 6 मास तक ही रहता है यदि 6 मास के अन्दर संसद द्वारा अनुमोदित न कर दिया जाए। संसद द्वारा अनुमोदित किये जाने पर वह राष्ट्रपति की अनुमति प्राप्त करने के बाद अधिनियम हो जाता है। यदि संसद के अधिवेशन के प्रारम्भ के बाद पहले जारी किये गये अध्यादेश को संसद द्वारा अनुमोदित किये जाने के लिए 6 मास के अन्दर संसद में पेश नहीं किया जाता है, तो अध्यादेश प्रभावहीन हो जाता है। यदि संसद के एक सदन का सत्र चल रहा है और दूसरे सदन का सत्र स्थगित हो, तब भी अध्यादेश जारी किया जा सकता है, क्योंकि संसद का एक सदन कोई विधेयक पारित कर उसे क़ानून बनाने के लिए सक्षम नहीं है।  &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;u&amp;gt;'''नियम बनाने की शक्ति'''&amp;lt;/u&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
राष्ट्रपति को निम्नलिखित के सम्बन्ध में क़ानून बनाने की शक्ति है-&lt;br /&gt;
#राष्ट्रपति के नाम से किये जाने वाले और निष्पादित आदेशों तथा अन्य लिखतों को अधिप्रमाणित करने के ढंग के सम्बन्ध में।&lt;br /&gt;
#राज्यसभा के सभापति तथा लोकसभा के अध्यक्ष से परामर्श करके दोनों सदनों की संयुक्त बैठकों से सम्बन्धित और उनमें परस्पर संचार से सम्बन्धित प्रक्रिया के नियम।&lt;br /&gt;
#संघ या राज्य की सेवा करने वाले व्यक्तियों की भर्ती और सेवा की शर्तों को विनियमित करने वाले नियम।&lt;br /&gt;
#संयुक्त लोक सेवा आयोग तथा संघ लोक सेवा आयोग के सदस्यों कर्मचारियों की सेवा शर्तों को विनियमित करने वाले नियम।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;u&amp;gt;'''राष्ट्रपति की वीटो शक्ति'''&amp;lt;/u&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
संविधान द्वारा राष्ट्रपति को स्पष्टत: वीटो की शक्ति प्रदान नहीं की गयी है। लेकिन संविधान के अनुसार किये गये कार्यों तथा स्थापित परम्पराओं के अनुसार यह माना जाता है कि राष्ट्रपति को निम्नलिखित तीन प्रकार की वीटो शक्तियाँ प्राप्त हैं-&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;u&amp;gt;'''पूर्ण वीटो'''&amp;lt;/u&amp;gt;- जब राष्ट्रपति किसी विधेयक को अनुमति नहीं देता है तो यह कहा जाता है कि राष्ट्रपति ने पूर्ण वीटो की शक्ति का प्रयोग किया है। राष्ट्रपति इस वीटो की शक्ति का प्रयोग गैर सरकारी विधेयक पर अनुमति न प्रदान करके कर सकता है या ऐसे विधेयक पर अनुमति न प्रदान करके कर सकता है जो ऐसी सरकार के द्वारा पारित किया गया हो, जो विधेयक पर अनुमति देने के पूर्व ही त्यागपत्र दे दे और नयी सरकार विधेयक पर अनुमति न देने की सिफ़ारिश करे। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;u&amp;gt;'''निलम्बनकारी वीटो'''&amp;lt;/u&amp;gt;- जब राष्ट्रपति किसी विधेयक के प्रभाव को निलम्बित रखने के लिए अनुमति देने हेतु अपने पास प्रेषित विधेयक को संसद के पास पुनर्विचार के लिए भेजता है, तो यह कहा जाता है कि उन्होंने निलम्बनकारी वीटो का प्रयोग किया है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;u&amp;gt;'''जेबी वीटो'''&amp;lt;/u&amp;gt;- इस पॉकेट वीटो भी कहा जाता है। जब राष्टपति संसद द्वारा पारित करके अनुमति के लिए भेजे गए विधेयक पर न तो अनुमति देता है और न ही उसे पुनर्विचार के लिए वापस भेजता है तो यह कहा जाता है कि राष्ट्रपति ने जेबी या पॉकेट वीटो का प्रयोग किया है। इस वीटो का प्रयोग राष्ट्रपति (ज्ञानी ज़ेल सिंह) ने [[1986]] में संसद द्वारा पारित भारतीय डाक (संशोधन) अधिनियम के सन्दर्भ में किया है। राष्ट्रपति ने न तो इस पर अपनी अनुमति दी है और न ही इसे संसद के पास पुनर्विचार के लिए भेजा है। &lt;br /&gt;
====वित्तीय शक्तियाँ====&lt;br /&gt;
राष्ट्रपति को संविधान द्वारा कई वित्तीय शक्तियाँ प्रदान की गयी हैं। धन विधेयक तथा वित्त विधेयक को तभी लोकसभा में पेश किया जाता है जब राष्ट्रपति उसकी सिफ़ारिश करे। जिस विधेयक को प्रवर्तित किये जान पर भारत की संचित निधि में व्यय करना पड़े, उस विधेयक को संसद द्वारा तभी पारित किया जाएगा, जब राष्ट्रपति उस विधेयक पर विचार-विमर्श करने की सिफ़ारिश संसद से करें। जिस कराधान में राज्य का हित सम्बद्ध है, उस कराधान से सम्बन्धित विधेयक को राष्ट्रपति की अनुमति से ही लोकसभा में पेश किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त राष्ट्रपति प्रत्येक वर्ष वित्तमंत्री के माध्यम से वर्ष का बजट लोकसभा में पेश करवाता है तथा प्रत्येक पाँच वर्ष की समाप्ति पर वित्त आयोग का गठन करता है। राष्ट्रपति वित्त आयोग द्वारा की गयी प्रत्येक सिफ़ारिश को, उस पर किये गये स्पष्टीकरण ज्ञापन सहित संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाता है। &lt;br /&gt;
====न्यायिक शक्तियाँ====&lt;br /&gt;
संविधान द्वारा राष्ट्रपति को तीन प्रकार की न्यायिक शक्तियाँ प्रदान की गई हैं, जिनका विवरण निम्न प्रकार से है-&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;u&amp;gt;'''न्यायाधीशों की नियुक्ति करने की शक्ति'''&amp;lt;/u&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अनुच्छेद 124 के अनुसार राष्ट्रपति को उच्चतम न्यायालय तथा उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को नियुक्त करने की शक्ति है। उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति करने के लिए राष्ट्रपति उच्चतम न्यायालय तथा उच्च न्यायालय के ऐसे न्यायाधीशों से परामर्श करेगा, जिनसे परामर्श करना वह आवश्यक समझे। मुख्य न्यायाधीश के अतिरिक्त अन्य न्यायाधीशों की नियुक्ति के पूर्व वह मुख्य न्यायाधीश से परामर्श करेगा। लेकिन संविधान में स्पष्ट रूप से यह प्रावधान नहीं किया गया है कि राष्ट्रपति मुख्य न्यायाधीश के परामर्श से बाध्य होंगे या नहीं। लेकिन [[6 अक्टूबर]], [[1993]] को दिये गये एक निर्णय में उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि &lt;br /&gt;
*उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठतम न्यायाधीश को ही देश का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया जाना चाहिए, &lt;br /&gt;
*उच्चतम न्यायालय के अन्य न्यायाधीशों की नियुक्ति के सम्बन्ध में राष्ट्रपति उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की राय मानने के लिए बाध्य है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
राष्ट्रपति उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों तथा अन्य न्यायाधीशों को नियुक्त करता है। उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों को नियुक्त करते समय राष्ट्रपति भारत के मुख्य न्यायाधीश तथा राज्य के राज्यपाल से परामर्श करता है, जबकि अन्य न्यायाधीशों की नियुक्ति करते समय वह भारत के मुख्य न्यायाधीश, राज्य के राज्यपाल तथा सम्बन्धित उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श करता है। 6 अक्टूबर, 1993 को दिये गये निर्णय के अनुसार राष्ट्रपति ऐसी नियुक्तियाँ करते समय भारत के मुख्य न्यायाधीशों की राय को वरीयता देने के लिए बाध्य है। राष्ट्रपति उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों का एक उच्च न्यायालय से दूसरे उच्च न्यायालय में स्थानान्तरण कर सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;u&amp;gt;'''क्षमादान की शक्ति'''&amp;lt;/u&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
संविधान के अनुच्छेद 72 के तहत राष्ट्रपति को क्षमा तथा कुछ मामलों में दण्डादेश के निलम्बन, परिहार या लघुकरण की शक्ति प्रदान की गयी है। राष्ट्रपति को निम्नलिखित मामले में क्षमा, तथा दोषसिद्धि के निलम्बन, परिहार या लघुकरण की शक्ति प्राप्त है-&lt;br /&gt;
#सेना न्यायालयों के द्वारा दिये गये दण्ड के मामले में।&lt;br /&gt;
#मृत्यु दण्डादेश के सभी मामलों में।&lt;br /&gt;
#उन सभी मामलों में, जिन्हें दण्ड या दण्डादेश ऐसे विषय सम्बन्धी किसी विधि के विरुद्ध अपराध के लिए दिया गया है, जिस विषय तक संघ की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार है।&lt;br /&gt;
क्षमा का तात्पर्य अपराध के दण्ड से मुक्ति प्रदान करना है। प्रतिलम्बन का तात्पर्य विधि द्वारा विहित दण्ड के स्थायी स्थगन से है। परिहार के अंतर्गत दण्ड की प्रकृति में परिवर्तन किए बिना दण्ड की मात्रा को कम किया जाना है। लघुकरण का अर्थ दण्ड की प्रकृति में परिवर्तन करना है। &lt;br /&gt;
राष्ट्रपति अपनी इस शक्ति का प्रयोग मंत्रिपरिषद की सलाह पर करता है और राष्ट्रपति द्वारा यदि इस शक्ति का प्रयोग किया जाता है तो उसका न्यायिक पुनर्विलोकन न्यायालय द्वारा किया जा सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;u&amp;gt;'''उच्चतम न्यायालय से परामर्श लेने का अधिकार'''&amp;lt;/u&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अनुच्छेद 143 के अनुसार जब राष्ट्रपति को ऐसा प्रतीत हो कि विधि या तथ्य का कोई ऐसा प्रश्न उत्पन्न हुआ है या उत्पन्न होने की सम्भावना है, जो ऐसी प्रकृति का और व्यापक महत्त्व का है कि उस पर उच्चतम न्यायालय की राय प्राप्त करना समीचीन है, तब वह उस प्रश्न पर उच्चतम न्यायालय की राय मांग सकता है।&lt;br /&gt;
====आपातकालीन शक्ति====&lt;br /&gt;
राष्ट्रपति को निम्नलिखित आपातकालीन शक्तियाँ प्रदान की गयी हैं-&lt;br /&gt;
#राष्ट्रीय आपात घोषित करने की (अनुच्छेद 352)।&lt;br /&gt;
#राज्यों में संवैधानिक तन्त्र की विफलता पर वहाँ आपातकाल घोषित करने की (अनुच्छेद 356)।&lt;br /&gt;
#वित्तीय आपात घोषित करने की (अनुच्छेद 360)। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==राष्ट्रपति का विशेषाधिकार==&lt;br /&gt;
संविधान द्वारा राष्ट्रपति को यह विशेषाधिकार प्रदान किया गया है कि वह अपने पद के किसी कर्तव्य के निर्वहन तथा शक्तियों के प्रयोग में किये जाने वाले किसी कार्य के लिए न्यायालय के प्रति उत्तरदायी नहीं होगा। &lt;br /&gt;
==संवैधानिक स्थिति==&lt;br /&gt;
संविधान की भावना तथा संविधान सभा में इसके सदस्यों द्वारा किये गये विचारों के अनुसार राष्ट्रपति राष्ट्र का केवल औपचारिक प्रधान होगा, लेकिन मूल संविधान के अनुच्छेद 74 (1) में यह प्रावधान किया गया था कि राष्ट्रपति को उसके कृत्यों का प्रयोग करने में सहायता और सलाह देने के लिए एक मंत्रिपरिषद होगी, जिसका प्रधान प्रधानमंत्री होगा। इसका यह अर्थ लगाया जाता था कि राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद की सलाह मानने के लिए बाध्य नहीं है और वह अपने विवेक से भी संविधान के प्रावधानों के अनुसार अपने कृत्यों का निर्वहन कर सकता है। इसी प्रावधान के कारण प्रथम प्रधानमंत्री [[पंडित जवाहर लाल नेहरू]] तथा तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद के बीच हिन्दू कोड तथा चीन से सम्बन्ध आदि मामलों में काफ़ी मतभेद था, जिससे दोनों के बीच संघर्ष की स्थिति उत्पन्न हो गयी थी। इसके बावजूद 1976 तक संविधान के इस प्रावधान को क़ायम रखा गया, परन्तु 42वें संविधान संशोधन के द्वारा अनुच्छेद 74 (1) में संशोधन करके यह व्यवस्था की गयी कि राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद की सलाह के अनुसार ही कार्य करेगा और इस प्रकार राष्ट्रपति को मंत्रिपरिषद की सलाह के अनुसार कार्य करने के लिए बाध्य कर दिया गया, किन्तु 44वें संविधान संशोधन द्वारा अनुच्छेद 74 (1) में यह व्यवस्था कर दी गयी कि यदि राष्ट्रपति को मंत्रिपरिषद द्वारा कोई सलाह दी जाती है तो वह मंत्रिपरिषद की दी गयी सलाह पर पुनर्विचार करने के लिए कह सकता है। इस प्रकार मंत्रिपरिषद द्वारा पुनर्विचार के बाद की गयी सलाह पर राष्ट्रपति कार्य करने के लिए बाध्य है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{प्रचार}}&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति&lt;br /&gt;
|आधार=&lt;br /&gt;
|प्रारम्भिक=प्रारम्भिक3&lt;br /&gt;
|माध्यमिक=&lt;br /&gt;
|पूर्णता=&lt;br /&gt;
|शोध=&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{संदर्भ ग्रंथ}}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{भारत के राष्ट्रपति}}&lt;br /&gt;
{{भारत के राष्ट्रपति2}}&lt;br /&gt;
{{भारत गणराज्य}}&lt;br /&gt;
[[Category:राष्ट्रपति और राज्यपाल]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Pankaj pathak</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%AA%E0%A4%A4%E0%A4%BF&amp;diff=285560</id>
		<title>राष्ट्रपति</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%AA%E0%A4%A4%E0%A4%BF&amp;diff=285560"/>
		<updated>2012-07-25T13:12:24Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Pankaj pathak: /* पुननिर्वाचन के लिए योग्यता */&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;[[चित्र:Dr.Rajendra-Prasad.jpg|thumb|[[भारत]] के प्रथम राष्ट्रपति [[राजेन्द्र प्रसाद|डॉक्टर राजेन्द्र प्रसाद]]]]&lt;br /&gt;
भारतीय संविधान पर ब्रिटेन के संविधान का व्यापक [[प्रभाव]] है। [[ब्रिटेन]] के संविधान का अनुकरण करते हुए [[भारत]] में संविधान द्वारा संसदीय शासन की स्थापना की गयी है। जिस तरह ब्रिटेन में शासन की प्रमुख वहाँ की साम्राज्ञी होती है, उसी प्रकार से भारत में राज्य का प्रमुख राष्ट्रपति होता है। ब्रिटेन की साम्राज्ञी की तरह भारत का राष्ट्रपति राज्य का औपचारिक प्रमुख होता है और संघ की वास्तविक शक्ति संघ मन्त्रिमण्डल में निहित होती है। इन दोनों देशों के प्रमुखों में मूलभूत अन्तर यह है कि ब्रिटेन की साम्राज्ञी का पद वंशानुगत होता है, जबकि भारत का राष्ट्रपति एक निर्वाचित मण्डल द्वारा निर्वाचित किया जाता है। इसी अन्तर के कारण भारत को प्रजातांत्रिक गणतन्त्र कहा जाता है। भारत में राष्ट्रपति का पद संविधान के अनुच्छेद 52 द्वारा उपबंधित है।&lt;br /&gt;
==भारत के राष्ट्रपति==&lt;br /&gt;
{{Main|भारत के राष्ट्रपति}}&lt;br /&gt;
[[भारत]] के राष्ट्रपति राष्ट्रप्रमुख और भारत के प्रथम नागरिक हैं, साथ ही भारतीय सशस्त्र सेनाओं के प्रमुख सेनापति भी हैं। राष्ट्रपति के पास पर्याप्त शक्ति होती है पर कुछ अपवादों के अलावा राष्ट्रपति के पद में निहित अधिकांश अधिकार वास्तव में प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाले मंत्रिपरिषद के द्वारा उपयोग किए जाते हैं। भारत के राष्ट्रपति [[नई दिल्ली]] स्थित [[राष्ट्रपति भवन]] में रहते हैं, जिसे रायसीना हिल के नाम से भी जाना जाता है। राष्ट्रपति अधिकतम दो कार्यकाल तक हीं पद पर रह सकते हैं। अब तक केवल पहले राष्ट्रपति [[डा. राजेंद्र प्रसाद]] ने हीं इस पद पर दो कार्यकाल पूरा कियें है। महामहिम [[प्रतिभा पाटिल]] भारत की 12वीं तथा इस पद को सुशोभित करने वाली पहली महिला राष्ट्रपति हैं। उन्होंने [[25 जुलाई]], [[2007]] को पद व गोपनीयता की शपथ ली थी।&lt;br /&gt;
==पद की योग्यता==&lt;br /&gt;
{{tocright}}&lt;br /&gt;
संविधान के अनुच्छेद 58 के अनुसार कोई भी व्यक्ति राष्ट्रपति होने के योग्य तब होगा, जब वह–&lt;br /&gt;
#भारत का नागरिक हो।&lt;br /&gt;
#पैंतीस वर्ष की आयु पूरी कर चुका हो।&lt;br /&gt;
#लोक सभा का सदस्य निर्वाचित किये जाने के योग्य हो, तथा&lt;br /&gt;
#भारत सरकार के या किसी राज्य सरकार के अधीन अथवा इन दोनों सरकारों में से किसी के नियन्त्रण में किसी स्थानीय या अन्य प्राधिकारी के अधीन लाभ का पद न धारण करता हो। यदि कोई व्यक्ति राष्ट्रपति या [[उपराष्ट्रपति]] के पद पर या संघ अथवा किसी राज्य के मंत्रिपरिषद का सदस्य हो, तो यह नहीं माना जाएगा कि वह लाभ के पद पर है। &lt;br /&gt;
==निर्वाचन==&lt;br /&gt;
{{seealso|उपराष्ट्रपति}}&lt;br /&gt;
राष्ट्रपति का चुनाव 'अप्रत्यक्ष निर्वाचन' के द्वारा किया जाता है। राष्ट्रपति पद के निर्वाचन में अभ्यर्थी होने के लिए आवश्यक है कि कोई व्यक्ति निर्वाचन के लिए अपना नामांकन करते समय 15,000 रुपये की धरोहर (ज़मानत धनराशि) निर्वाचन अधिकारी के समक्ष जमा करे और उसके नामांकन पत्र का प्रस्ताव कम से कम 50 मतदाताओं के द्वारा किया जाना चाहिए तथा कम से कम 50 मतदाताओं द्वारा उसके नामांकन पत्र का समर्थन भी किया जाना चाहिए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==निर्वाचक मण्डल==&lt;br /&gt;
अनुच्छेद 54 के अनुसार राष्ट्रपति का निर्वाचन ऐसे निर्वाचक मण्डल के द्वारा किया जाएगा, जिसमें [[संसद]] (लोकसभा तथा राज्यसभा) तथा राज्य विधान सभाओं के निर्वाचित सदस्य शामिल होंगे। राष्ट्रपति के निर्वाचक मण्डल में संसद के मनोनीत सदस्य, राज्य विधान सभाओं के मनोनीत सदस्य तथा राज्य विधान परिषदों के सदस्य (निर्वाचित एवं मनोनीत दोनों) शामिल नहीं किये जाते। संघ राज्य क्षेत्रों की विधानसभाओं के सदस्यों को भी 70वें संविधान संशोधन के पूर्व राष्ट्रपति के निर्वाचक मण्डल में शामिल नहीं किया जाता था। लेकिन 70वें संविधान संशोधन द्वारा यह व्यवस्था कर दी गयी है कि दो संघ राज्य क्षेत्रों, यथा [[पाण्डिचेरी]] तथा [[राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली|राष्ट्रीय राजधानी राज्यक्षेत्र दिल्ली]] की विधानसभाओं के सदस्य राष्ट्रपति के निर्वाचक मण्डल में शामिल किये जायेंगे। यहाँ पर यह उल्लेखनीय है कि केवल इन दोनों संघ राज्य क्षेत्रों में ही विधानसभा का गठन हुआ है।&lt;br /&gt;
==राष्ट्रपति के चुनाव पर प्रभाव==&lt;br /&gt;
संविधान सभा में राष्ट्रपति के निर्वाचन प्रक्रिया पर विचार करते समय यह ध्यान नहीं दिया गया था कि निर्वाचक मण्डल में से कोई स्थान रिक्त हो तो राष्ट्रपति का चुनाव कैसे होगा? [[1957]] में जब राष्ट्रपति का चुनाव किया गया तो निर्वाचक मण्डल में कुछ स्थान ख़ाली थे। इसलिए राष्ट्रपति के चुनाव को इस आधार पर चुनौती दी गई की निर्वाचक मण्डल में स्थान रिक्त होने के कारण राष्ट्रपति का चुनाव अवैध है। बाद में [[1961]] में ग्याहरवाँ संविधान संशोधन के तहत यह व्यवस्था की गयी कि निर्वाचक मण्डल में स्थान रिक्त होते हुए भी राष्ट्रपति का चुनाव कैसे कराया जा सकता है।&lt;br /&gt;
==निर्वाचन की पद्धति==&lt;br /&gt;
राष्ट्रपति के निर्वाचन पद्धति के सम्बन्ध में संविधान के अनुच्छेद 55 में प्रावधान किया गया है, जिसके अनुसार राष्ट्रपति के निर्वाचन में दो सिद्धान्तों को अपनाया जाता है–&lt;br /&gt;
====समरूपता तथा समतुल्यता====&lt;br /&gt;
इस सिद्धान्त, जो अनुच्छेद 55 के खण्ड (1) तथा (2) वर्णित हैं, के अनुसार राज्यों के प्रतिनिधित्व के मापमान में एकरूपता तथा सभी राज्यों और संघ के प्रतिनिधित्व में समतुल्यता होगी। इस सिद्धान्त का तात्पर्य यह है कि सभी राज्यों की विधानसभाओं का प्रतिनिधित्व का मान निकालने के लिए एक ही प्रक्रिया अपनायी जाएगी तथा सभी राज्यों की विधानसभाओं के सदस्यों के मत मूल्य का योग संसद के सभी सदस्य के मत मूल्य के योग के समतुल्य अर्थात् समान होगा। राज्यों की विधानसभाओं के सदस्यों के मतमूल्य तथा संसद के सदस्यों के मतमूल्य को निर्धारित करने के लिए निम्नलिखित प्रक्रिया अपनायी जाएगी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;u&amp;gt;'''विधानसभा के सदस्य के मत मूल्य का निर्धारण'''&amp;lt;/u&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रत्येक राज्य की विधानसभा के सदस्य के मतों की संख्या निकालने के लिए उस राज्य की कुल जनसंख्या (जो पिछली जनगणना के अनुसार निर्धारित है) को राज्य विधानसभा की कुल निर्वाचित सदस्य संख्या से विभाजित करके भागफल को 1000 से विभाजित किया जाता है। इस प्रकार भजनफल को एक सदस्य का मत मूल्य मान लेते हैं। यदि उक्त विभाजन के परिणामस्वरूप शेष संख्या 500 से अधिक आये, तो प्रत्येक सदस्य के मतों की संख्या में एक और जोड़ दिया जाता है। राज्य विधान सभा के सदस्यों का मूल्य निम्न प्रकार निकाला जाता है–&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
राज्य की विधानसभा के एक सदस्य का मत मूल्य = राज्य की कुल जनसंख्या / राज्य विधानसभा के निर्वाचित X 1 / 1000 सदस्यों की कुल संख्या&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;u&amp;gt;'''संसद सदस्य के मत मूल्य का निर्धारण'''&amp;lt;/u&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
संसद सदस्य का मत मूल्य निर्धारित करने के लिए राज्यों की विधानसभाओं के सदस्यों के मत मूल्यों को जोड़कर संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्यों के योग का भाग दिया जाता है। संसद सदस्य का मत मूल्य निम्न प्रकार निकाला जाता है–&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
संसद सदस्य का मत मूल्य = कुल राज्य विधान सभाओं के निर्वाचित सदस्यों के मत मूल्यों का योग / संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्यों का योग&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस प्रकार राष्ट्रपति के चुनाव में यह ध्यान रखा जाता है कि सभी राज्य विधान सभाओं के निर्वाचित सदस्यों के मतों के मूल्य का योग संसद के निर्वाचित सदस्यों के मतों के मूल्य का योग बराबर रहे और सभी राज्यों की विधान सभाओं के निर्वाचित सदस्यों के मत मूल्य का निर्धारण करने के लिए एक समान प्रक्रिया अपनायी जाए। इसे आनुपातिक प्रतिनिधित्व का सिद्धान्त भी कहते हैं।&lt;br /&gt;
====एकल संक्रमणीय सिद्धान्त====&lt;br /&gt;
इस सिद्धान्त का तात्पर्य है कि यदि निर्वाचन में एक से अधिक उम्मीदवार हों, तो मतदाताओं द्वारा मतदान वरीयता क्रम से दिया जाए। इसका आशय यह है कि मतदाता मतदान पत्र में उम्मीदवारों के नाम या चुनाव चिह्न के समक्ष अपना वरीयता क्रम लिखेगा। &lt;br /&gt;
==मतगणना==&lt;br /&gt;
राष्ट्रपति के चुनाव के बाद उसी व्यक्ति को निर्वाचित घोषित किया जाता है, जो डाले गये कुल वैध मतों में से आधे से अधिक मत प्राप्त करे। जब राष्ट्रपति के निर्वाचन के बाद मतों की गणना प्रारम्भ होती है, तो सर्वप्रथम अवैध मतपत्रों को निरस्त करके शेष वैध मत पत्रों का मत मूल्य निकाला जाता है और निकाले गए मत मूल्य में 2 का भाग देकर भागफल में एक जोड़कर निर्वाचित घोषित किये जाने वाले उम्मीदवार का कोटा निकाला जाता है। यदि मतगणना के प्रथम दौर में किसी उम्मीदवार को नियत किये गये कोटा के बराबर मत मूल्य प्राप्त हो जाता है, तो उसे निर्वाचित घोषित कर दिया जाता है। यदि किसी उम्मीदवार को नियम कोटा के बराबर मत मूल्य नहीं प्राप्त होता है, तो मतगणना का दूसरा दौर प्रारम्भ होता है। दूसरे दौर के मतगणना में जिस उम्मीदवार को प्रथम वरीयता का सबसे कम मत मिला होता है, उसको गणना से बाहर करके उसके द्वितीय वरीयता के मत मूल्य को अन्य उम्मीदवारों को स्थानान्तरित कर दिया जाता है। यदि द्वितीय दौर की गणना में भी किसी उम्मीदवार को नियत किये गये कोटा के बराबर मत मूल्य नहीं प्राप्त होता है, तो तीसरे दौर की गणना होती है। तीसरे दौर की गणना में उस उम्मीदवार को गणना से बाहर कर दिया जाता है, जो कि दूसरे दौर की गणना में सबसे कम मूल्य पाता है और इस उम्मीदवार के तृतीय वरीयता मत मूल्य को शेष उम्मीदवारों के पक्ष में स्थानान्तरित कर दिया जाता है। यह प्रक्रिया तब तक अपनायी जाती है, जब तक कि किसी उम्मीदवार को नियत किये गये कोटा के मत मूल्य के बराबर मत मूल्य प्राप्त नहीं हो जाता है।&lt;br /&gt;
==भारत में राष्ट्रपति का चुनाव==&lt;br /&gt;
[[चित्र:President-Selection.jpg|thumb|भारत में राष्ट्रपति चुनाव का तरीक़ा]]&lt;br /&gt;
भारत में अब तक 12 व्यक्ति राष्ट्रपति का पद ग्रहण कर चुके हैं, जिनमें से प्रथम राष्ट्रपति [[डॉ. राजेंद्र प्रसाद]] ने 2 बार इस पद को सुशोभित किया है। राष्ट्रपति की पदावधि 5 वर्ष की होती है। लेकिन राजेन्द्र प्रसाद 10 वर्ष से अधिक की अवधि तक राष्ट्रपति का पद धारण किये था। इसका कारण यह था कि [[1952]] में राष्ट्रपति के प्रथम चुनाव के पूर्व ही [[24 जनवरी]], [[1950]] को संविधान सभा के द्वारा राष्ट्रपति के रूप में डॉ. राजेंद्र प्रसाद का चुनाव कर लिया गया था। संविधान के प्रवर्तन की तिथि अर्थात् [[26 जनवरी]], 1950 से लेकर [[12 मई]], 1952 तक राजेन्द्र प्रसाद राष्ट्रपति के पद पर रहे। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भारत में अब तक 13 बार राष्ट्रपति के चुनाव हुए हैं, जिनमें से एक बार, अर्थात् [[1977]] में, श्री नीलम संजीव रेड्डी निर्विरोध राष्ट्रपति चुने गये थे। शेष 12 बार राष्ट्रपति पद के चुनाव में एक से अधिक उम्मीदवार थे। अब तक केवल डॉ. राजेंद्र प्रसाद, [[फ़ख़रुद्दीन अली अहमद]], [[नीलम संजीव रेड्डी]] तथा [[ज्ञानी ज़ैल सिंह]] को छोड़कर अन्य सभी राष्ट्रपति पूर्व में उपराष्ट्रपति के पद को सुशोभित कर चुके थे। [[डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन|डॉ. एस. राधाकृष्णन]] लगातार दो बार उपराष्ट्रपति तथा एक बार राष्ट्रपति के पद पर आसीन हुए। निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में [[वी.वी. गिरी]] ऐसे राष्ट्रपति निर्वाचित हुए थे, जिन्होंने कांग्रेस का स्पष्ट बहुमत होते हुए भी उसके उम्मीदवार को पराजित किया था। अब तक नीलम संजीव रेड्डी एकमात्र ऐसे राष्ट्रपति हुए हैं, जो एक बार चुनाव में पराजित हुए तथा बाद में निर्विरोध निर्वाचित हुए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[19 जुलाई]], [[2007]] को सम्पन्न 13वें राष्ट्रपति के चुनाव के लिए निर्वाचक मण्डल में 4,896 सदस्य थे, जिसमें 776 सांसद और 4,120 विधायक शामिल हैं। इन सबका कुल मत मूल्य 10,98,882 था। वर्तमान में प्रत्येक सांसद का मत मूल्य 708 है। सांसदों का कुल मत मूल्य 5,49,408 और विधायकों का कुल मत मूल्य 5,49,474 है। राज्यों में [[उत्तर प्रदेश]] विधानसभा का मत मूल्य सर्वाधिक 83,824 है। इसके बाद क्रमश: [[महाराष्ट्र]] विधानसभा का मत मूल्य 50,400, [[पश्चिम बंगाल]] का 44,394, [[आंध्र प्रदेश]] का 43,512 और [[बिहार]] विधानसभा का मत मूल्य 42,039 है। [[सिक्किम]] विधानसभा का मत मूल्य सबसे कम 224 है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==मतदान स्थल==&lt;br /&gt;
राष्ट्रपति के चुनाव में राज्य विधान सभाओं के सदस्य अपने-अपने राज्यों की राजधानियों में मतदान करते हैं और संसद सदस्य [[दिल्ली]] में या अपने राज्य की राजधानी में मतदान कर सकते हैं। यदि कोई संसद सदस्य अपने राज्य की राजधानी में मतदान करना चाहता है तो उसे इसकी सूचना 10 दिन पूर्व ही चुनाव आयोग का देनी चाहिए।&lt;br /&gt;
==चुनाव का समय ==&lt;br /&gt;
संविधान के अनुच्छेद 62 में केवल यह अपेक्षा की गई है कि राष्ट्रपति का चुनाव निर्धारित समय के अन्दर सम्पन्न करा लिया जाना चाहिए। निर्वाचन की प्रक्रिया को पाँच वर्ष की अवधि समाप्त हो जाने के बाद स्थगित नहीं रखा जा सकता है। राष्ट्रपति का चुनाव कब कराया जाएगा, इसके सम्बन्ध में संविधान में कोई प्रावधान नहीं किया गया है। संविधान में अनुच्छेद 71 (3) में केवल यह प्रावधान किया गया है कि राष्ट्रपति के निर्वाचन से सम्बन्धित या संसक्त किसी विषय का विनियमन संसद विधि द्वारा कर सकेगी। इस शक्ति का प्रयोग करके संसद ने राष्ट्रपतीय तथा उपराष्ट्रपतीय निर्वाचन अधिनियम, 1952 पारित करके यह प्रावधान किया है कि राष्ट्रपति का चुनाव निवर्तमान राष्ट्रपति की पदावधि की समाप्ति के पूर्व ही कराया जाना चाहिए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;u&amp;gt;'''किसी राज्य की विधानसभा भंग होने की स्थिति में राष्ट्रपति चुनाव '''&amp;lt;/u&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
किसी राज्य की विधानसभा भंग होने की स्थिति में भी राष्ट्रपति का चुनाव सम्पन्न होता है। इस सन्दर्भ में 11वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1961 में यह स्पष्ट किया गया है कि राष्ट्रपति के चुनाव को इस आधार पर चुनौती नहीं दी जा सकती कि निर्वाचक मण्डल में कोई स्थान रिक्त था। सर्वोच्च न्यायालय ने भी यह निर्णय दिया है कि बिना किसी विधानसभा के ही राष्ट्रपति का चुनाव कराया जा सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''राष्ट्रपति चुनाव में एक विधायक के मत का मूल्य'''&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
एक विधायक के मत के मूल्य का फार्मूला = राज्य की कुल जनसंख्या / राज्य विधानसभा के निर्वाचित विधायकों की संख्या X 1000&lt;br /&gt;
{| class=&amp;quot;bharattable&amp;quot; border=&amp;quot;1&amp;quot;&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
! राज्य&lt;br /&gt;
! सीटों की संख्या&amp;lt;ref&amp;gt;विधानसभा&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
! जनसंख्या (1971)&lt;br /&gt;
! मत का मूल्य&amp;lt;ref&amp;gt;एक विधायक&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
! मतों का मूल्य&amp;lt;ref&amp;gt;राज्य के कुल निर्वाचित विधायक&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[आन्ध्र प्रदेश]]&lt;br /&gt;
| 294&lt;br /&gt;
| 43,502,708&lt;br /&gt;
| 148&lt;br /&gt;
| 148 x 294 = 43,512&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[अरुणाचल प्रदेश]]&lt;br /&gt;
| 60&lt;br /&gt;
| 467,511&lt;br /&gt;
| 08&lt;br /&gt;
| 08 x 60 = 480&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[असम]]&lt;br /&gt;
| 126 &lt;br /&gt;
| 14,625,152&lt;br /&gt;
| 116&lt;br /&gt;
| 116 x 126 = 14,616&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[बिहार]]&lt;br /&gt;
| 243&lt;br /&gt;
| 42,126,239&lt;br /&gt;
| 173&lt;br /&gt;
| 173 x 243 = 42,039&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[छत्तीसगढ़]]&lt;br /&gt;
| 90&lt;br /&gt;
| 11,637,497&lt;br /&gt;
| 129&lt;br /&gt;
| 129 x 90 = 11,610&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[गोवा]]&lt;br /&gt;
| 40&lt;br /&gt;
| 795,120&lt;br /&gt;
| 20&lt;br /&gt;
| 20 x 40 = 800&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[गुजरात]]&lt;br /&gt;
| 182&lt;br /&gt;
| 26,697,475&lt;br /&gt;
| 147&lt;br /&gt;
| 147 x 182 = 26,754&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[हरियाणा]]&lt;br /&gt;
| 90&lt;br /&gt;
| 10,036,808&lt;br /&gt;
| 112&lt;br /&gt;
| 112 x 90 = 10,080&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[हिमाचल प्रदेश]]&lt;br /&gt;
| 68&lt;br /&gt;
| 3,460,434&lt;br /&gt;
| 51&lt;br /&gt;
| 51 x 68 = 3,468&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[जम्मू और कश्मीर]]&lt;br /&gt;
| 87&lt;br /&gt;
| 6,300,000&lt;br /&gt;
| 72&lt;br /&gt;
| 72 x 87 = 6,264&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[झारखण्ड]]&lt;br /&gt;
| 81&lt;br /&gt;
| 14,227,133&lt;br /&gt;
| 176&lt;br /&gt;
| 176 x 81 = 14,256&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[कर्नाटक]]&lt;br /&gt;
| 224&lt;br /&gt;
| 29,299,014&lt;br /&gt;
| 131&lt;br /&gt;
| 131 x 224 = 29,344&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[केरल]]&lt;br /&gt;
| 140&lt;br /&gt;
| 21,347,375&lt;br /&gt;
| 152&lt;br /&gt;
| 152 x 140 = 21,280&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[मध्य प्रदेश]]&lt;br /&gt;
| 230&lt;br /&gt;
| 30,016,625&lt;br /&gt;
| 131&lt;br /&gt;
| 131 x 230 = 30,130&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[महाराष्ट्र]]&lt;br /&gt;
| 288&lt;br /&gt;
| 50,412,235&lt;br /&gt;
| 175&lt;br /&gt;
| 175 x 288 = 50,400&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[मणिपुर]]&lt;br /&gt;
| 60&lt;br /&gt;
| 1,072,753&lt;br /&gt;
| 18&lt;br /&gt;
| 18 x 60 = 1,080&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[मेघालय]]&lt;br /&gt;
| 60&lt;br /&gt;
| 1,011,699&lt;br /&gt;
| 17&lt;br /&gt;
| 17 x 60 = 1,020&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[मिज़ोरम]]&lt;br /&gt;
| 40&lt;br /&gt;
| 332,390&lt;br /&gt;
| 8&lt;br /&gt;
| 8 x 40 = 320&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[नागालैण्ड]]&lt;br /&gt;
| 60&lt;br /&gt;
| 516,449&lt;br /&gt;
| 9&lt;br /&gt;
| 9 x 60 = 540&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[उड़ीसा]]&lt;br /&gt;
| 147&lt;br /&gt;
| 21,944,615&lt;br /&gt;
| 149&lt;br /&gt;
| 149 x 147 = 21,903&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[पंजाब]]&lt;br /&gt;
| 117&lt;br /&gt;
| 13,551,060&lt;br /&gt;
| 116&lt;br /&gt;
| 116 x 117 = 13,572&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[राजस्थान]]&lt;br /&gt;
| 200&lt;br /&gt;
| 25,765,806&lt;br /&gt;
| 129&lt;br /&gt;
| 129 x 200 = 25,800&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[सिक्किम]]&lt;br /&gt;
| 32&lt;br /&gt;
| 209,843&lt;br /&gt;
| 7&lt;br /&gt;
| 7 x 32 = 224&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[तमिलनाडु]]&lt;br /&gt;
| 234&lt;br /&gt;
| 41,199,168&lt;br /&gt;
| 176&lt;br /&gt;
| 176 x 234 = 41,184 &lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[त्रिपुरा]]&lt;br /&gt;
| 60&lt;br /&gt;
| 1,556,342&lt;br /&gt;
| 26&lt;br /&gt;
| 26 x 60 = 1,560&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[उत्तर प्रदेश]]&lt;br /&gt;
| 403&lt;br /&gt;
| 83,849,905&lt;br /&gt;
| 208&lt;br /&gt;
| 208 x 403 = 83,824&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[उत्तराखण्ड]]&lt;br /&gt;
| 70&lt;br /&gt;
| 4,491,239&lt;br /&gt;
| 64&lt;br /&gt;
| 64 x 70 = 4,480&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[पश्चिम बंगाल]]&lt;br /&gt;
| 294&lt;br /&gt;
| 44,312,011&lt;br /&gt;
| 151&lt;br /&gt;
| 151 x 294 =44,394&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[दिल्ली]]&lt;br /&gt;
| 70 &lt;br /&gt;
| 40,65,698&lt;br /&gt;
| 58&lt;br /&gt;
| 58 x 70 = 4,060&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[पुदुचेरी]]&lt;br /&gt;
| 30 &lt;br /&gt;
| 471,707&lt;br /&gt;
| 16&lt;br /&gt;
| 16 x 30 = 480&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| कुल&lt;br /&gt;
|4120&lt;br /&gt;
| 549,302,005&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| =549,474&lt;br /&gt;
|}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==एक सांसद के मत का मूल्य==&lt;br /&gt;
*राज्य के कुल निर्वाचित विधायकों के मतों का मूल्य = 5,49,474&lt;br /&gt;
*लोकसभा के कुल निर्वाचित सदस्यों की संख्या = 543&lt;br /&gt;
*राज्यसभा के कुल निर्वाचित सदस्यों की संख्या = 233&lt;br /&gt;
*कुल सांसदों की संख्या = 543+233 = 776&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
एक सांसद के मत के मूल्य का फार्मूला = राज्य के कुल मतों का मूल्य यानी 5,49,474 / कुल सांसदों की संख्या यानी 778 = 708.085 यानी 708&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सांसदों के कुल मतों का मूल्य, 708×776 = 5,49,408&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
वर्ष [[2002]] के राष्ट्रपति चुनाव में भाग लेने वाले कुल मतदाताओं की संख्या = कुल विधायक (4120) + कुल सांसद (776) = 4896&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सभी मतदाताओं के कुल मतों का मूल्य = 5,49,474+5,49,408 = 10,98,882&amp;lt;ref&amp;gt;नोट - भारतीय संविधान के अनुसार वर्ष 2002 के राष्ट्रपति चुनाव के लिए भी [[1971]] की जनगणना के आंकड़े ही मान्य थे, केवल [[झारखण्ड]], [[उत्तरांचल]] और [[छत्तीसगढ़]] जैसे नये बने तीन राज्यों के विधायकों के मतों का मूल्य अलग से तय किया गया है।&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
राष्ट्रपति के चुनाव को इस आधार पर चुनौती नहीं दी जा सकती कि निर्वाचक मंडल में कोई रिक्त स्थान था। सर्वोच्च न्यायालय ने भी यह निर्णय दिया है कि बिना किसी विधानसभा के ही राष्ट्रपति का चुनाव कराया जा सकता है।&lt;br /&gt;
==सम्बन्धित विवाद का विनिश्चय==&lt;br /&gt;
अनुच्छेद 7 के अनुसार राष्ट्रपति के चुनाव से सम्बन्धित विवाद का विनिश्चय [[उच्चतम न्यायालय]] द्वारा किया जाएगा। यदि कोई व्यक्ति राष्ट्रपति के रूप में निर्वाचित होकर पद ग्रहण कर लेता है और बाद में उसका चुनाव उच्चतम न्यायालय द्वारा अवैध घोषित किया जाता है, तो राष्ट्रपति के पद पर रहते हुए भी उसके द्वारा किया गया कार्य या की गयी घोषणा अविधिमान्य नहीं होगी।&lt;br /&gt;
==पुननिर्वाचन के लिए योग्यता==&lt;br /&gt;
अनुच्छेद 57 के अनुसार [[भारत]] के राष्ट्रपति पद पर पदस्थ व्यक्ति दूसरे कार्यकाल के लिए भी चुनाव में उम्मीदवार बन सकता है। वैसे संविधान में यह व्यवस्था नहीं की गयी है कि राष्ट्रपति पद पर पदस्थ व्यक्ति दूसरे कार्यकाल के लिए निर्वाचन में भाग ले सकता है या नहीं, लेकिन सामान्यत: यह परम्परा बन गयी है कि राष्ट्रपति पद के लिए कोई व्यक्ति एक ही बार निर्वाचित किया जाता है। इसका अपवाद राजेन्द्र प्रसाद रहे हैं, जो दो बार राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार थे। इसके अतिरिक्त दो राष्ट्रपति [[ज़ाकिर हुसैन]] तथा फ़खरुद्दीन अली अहमद, जिनकी कार्यकाल के दौरान ही मृत्यु हो गई थी, के सिवाय सभी राष्ट्रपति अपने एक कार्यकाल के बाद दूसरी बार राष्ट्रपति के चुनाव में उम्मीदवार नहीं बने।&lt;br /&gt;
{| class=&amp;quot;bharattable&amp;quot; border=&amp;quot;1&amp;quot;&lt;br /&gt;
|+राष्ट्रपति पद का चुनाव तथा विजयी एवं द्वितीय स्थान प्राप्त उम्मीदवारों की सूची&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
! क्र.सं.&lt;br /&gt;
! वर्ष&lt;br /&gt;
! निर्वाचित प्रत्याशी&lt;br /&gt;
! द्वितीय स्थान प्राप्त प्रत्याशी&lt;br /&gt;
! मत प्रतिशत&lt;br /&gt;
! चित्र&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| पहला&lt;br /&gt;
| [[1952]]&lt;br /&gt;
| [[राजेन्द्र प्रसाद|डॉ. राजेन्द्र प्रसाद]]&lt;br /&gt;
| के. टी. शाह&lt;br /&gt;
| 83.80&lt;br /&gt;
| [[चित्र:Dr.Rajendra-Prasad.jpg|30px]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| दूसरा                &lt;br /&gt;
| [[1957]]&lt;br /&gt;
| [[राजेन्द्र प्रसाद|डॉ. राजेन्द्र प्रसाद]]&lt;br /&gt;
| एन. एन. दास&lt;br /&gt;
| 99.30&lt;br /&gt;
| [[चित्र:Dr.Rajendra-Prasad.jpg|30px]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| तीसरा   &lt;br /&gt;
| [[1962]]&lt;br /&gt;
| [[सर्वपल्ली राधाकृष्णन|डॉ. राधाकृष्णन]]&lt;br /&gt;
| सी. एच. राम&lt;br /&gt;
| 98.30&lt;br /&gt;
| [[चित्र:Sarvepalli-Radhakrishnan.jpg|30px]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| चौथा   &lt;br /&gt;
| [[1967]]&lt;br /&gt;
| [[डॉ. ज़ाकिर हुसैन]]&lt;br /&gt;
| के. सुब्बाराव&lt;br /&gt;
| 56.20&lt;br /&gt;
| [[चित्र:Dr.Zakir-Hussain.jpg|30px]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| पाँचवाँ   &lt;br /&gt;
| [[1969]]&lt;br /&gt;
| [[वाराहगिरि वेंकट गिरि]]&lt;br /&gt;
| [[नीलम संजीव रेड्डी]]&lt;br /&gt;
| 50.20&lt;br /&gt;
| [[चित्र:V.V.Giri.jpg|30px]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| छठा &lt;br /&gt;
| [[1974]]&lt;br /&gt;
| [[फ़ख़रुद्दीन अली अहमद]]&lt;br /&gt;
| टी. चौधरी&lt;br /&gt;
| 80.20&lt;br /&gt;
| [[चित्र:Fakhruddin-Ali-Ahmed.jpg|30px]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| सातवाँ  &lt;br /&gt;
| [[1977]]&lt;br /&gt;
| [[नीलम संजीव रेड्डी]]&lt;br /&gt;
| निर्विरोध&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| [[चित्र:Neelam Sanjiva Reddy.jpg|30px]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| आठवाँ &lt;br /&gt;
| [[1982]]&lt;br /&gt;
| [[ज्ञानी ज़ैल सिंह]]&lt;br /&gt;
| एच. आर. खन्ना&lt;br /&gt;
| 72.70&lt;br /&gt;
| [[चित्र:Giani-Zail-Singh.jpg|30px]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| नवाँ &lt;br /&gt;
| [[1987]]&lt;br /&gt;
| [[रामस्वामी वेंकटरमण|आर. वेंकिटरमन अय्यर]]&lt;br /&gt;
| वी. आर. कृष्ण&lt;br /&gt;
| 72.30&lt;br /&gt;
| [[चित्र:R. Venkataraman.jpg|30px]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| दसवाँ      &lt;br /&gt;
| [[1992]]&lt;br /&gt;
| [[शंकरदयाल शर्मा|डॉ. शंकरदयाल शर्मा]]&lt;br /&gt;
| जी. जी. स्वेल&lt;br /&gt;
| 64.78&lt;br /&gt;
| [[चित्र:Shankar-Dayal-Sharma.jpg|30px]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| ग्यारहवाँ  &lt;br /&gt;
| [[1997]]&lt;br /&gt;
| [[के. आर. नारायणन]] &lt;br /&gt;
| टी. एन. शेषन&lt;br /&gt;
| 94.70&lt;br /&gt;
| [[चित्र:K.R.Narayanan.jpg|30px]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| बारहवाँ  &lt;br /&gt;
| [[2002]]&lt;br /&gt;
| [[डॉक्टर ए. पी. जे. अब्दुल कलाम]]&lt;br /&gt;
| कैप्टन लक्ष्मी सहगल&lt;br /&gt;
| 89.98&lt;br /&gt;
| [[चित्र:Abdul-Kalam.jpg|30px]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| तेरहवाँ  &lt;br /&gt;
| [[2007]]&lt;br /&gt;
| [[प्रतिभा देवी सिंह पाटिल]] &lt;br /&gt;
| भैरोसिंह शेखाबत&lt;br /&gt;
| 65.82&lt;br /&gt;
| [[चित्र:Pratibha-Patil.jpg|30px]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| तेरहवाँ  &lt;br /&gt;
| [[2007]]&lt;br /&gt;
| [[प्रणव मुखर्जी]] &lt;br /&gt;
| पी. ए. संगमा&lt;br /&gt;
| 69.31&lt;br /&gt;
| [[चित्र:200px-Pranab_mukherjee.jpg|30px]]&lt;br /&gt;
|}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==राष्ट्रपति के द्वारा शपथ==&lt;br /&gt;
राष्ट्रपति या कोई व्यक्ति, जो किसी कारण से राष्ट्रपति के कृत्यों के निर्वहन के लिए नियुक्त होता है, अपना पद ग्रहण करने के पूर्व अनुच्छेद 60 के तहत भारत के मुख्य न्यायधीश या उसकी अनुपस्थिति में [[उच्चतम न्यायालय]] में उपलब्ध वरिष्ठतम न्यायधीश के समक्ष अपने पद के कार्यपालन की शपथ लेता है। राष्ट्रपति के शपथ पत्र का प्रारूप निम्नलिखित रूप में होता है–&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;'''मैं, अमुक ईश्वर की शपथ लेता हूँ सत्य निष्ठा से प्रतिज्ञाण करता हूँ कि मैं श्रद्धापूर्वक भारत के राष्ट्रपति के पद का कार्यपालन (अथवा राष्ट्रपति के कृत्यों का निर्वहन) करूँगा तथा अपनी पूरी योग्यता से संविधान और विधि का परिरक्षण, संरक्षण और प्रतिरक्षण करूँगा और मैं भारत की जनता की सेवा और कल्याण में निरत रहूँगा।'''&amp;lt;/poem&amp;gt; राष्ट्रपति द्वारा लिया जाने वाला शपथ या प्रतिज्ञण उपराष्ट्रपति एवं [[प्रधानमंत्री]] के शपथ से इस मामले में भिन्न है कि राष्ट्रपति संविधान और विधि के परिरक्षण, संरक्षण और प्रतिरक्षण का शपथ लेता है।&lt;br /&gt;
==राष्ट्रपति की पदावधि==&lt;br /&gt;
अनुच्छेद 56 के अनुसार राष्ट्रपति अपने पदग्रहण की तिथि से पाँच वर्ष की अवधि तक अपने पद पर बना रहता है, लेकिन इस पाँच वर्ष की अवधि के पूर्व भी वह उपराष्ट्रपति को अपना त्यागपत्र दे सकता है या उसे पाँच वर्ष की अवधि के पूर्व संविधान के उल्लंघन के लिए संसद द्वारा लगाये गये महाभियोग द्वारा हटाया जा सकता है। राष्ट्रपति द्वारा उपराष्ट्रपति को सम्बोधित त्यागपत्र की सूचना उसके द्वारा (उपराष्ट्रपति के द्वारा) लोकसभा के अध्यक्ष को अविलम्ब दी जाती है।&lt;br /&gt;
राष्ट्रपति अपने पाँच वर्ष के कार्यकाल के पूरा करने के बाद भी तब तक राष्ट्रपति के पद पर बना रहता है, जब तक उसका उत्तराधिकारी पद ग्रहण नहीं कर लेता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भारतीय संविधान में प्रावधान किया गया है कि राष्ट्रपति के पद में आकस्मिक रिक्ति के दौरान या उसकी अनुपस्थिति में उपराष्ट्रपति, राष्ट्रपति के पद के कार्यों का निर्वहन करेगा और राष्ट्रपति तथा उपराष्ट्रपति दोनों के पद में आकस्मिक रिक्ति के दौरान या दोनों की अनुपस्थिति में भारत का मुख्य न्यायधीश राष्ट्रपति के पद के कृत्यों का निर्वहन करेगा। इसी कारण जब [[3 मई]], [[1969]] को तत्कालीन राष्ट्रपति ज़ाकिर हुसैन की मृत्यु हुई, तब तत्कालीन उपराष्ट्रपति वी॰ वी॰ गिरि कार्यकारी राष्ट्रपति नियुक्त किये गये। लेकिन उन्होंने राष्ट्रपति पद के चुनाव में उम्मीदवार होने के लिए अपने पद से त्यागपत्र दे दिया था। तब भारत के तत्कालीन मुख्य न्यायधीश न्यायमूर्ति मो॰ हिदायतुल्ला ने राष्ट्रपति के पद का निर्वहन तब तक किया, जब तक निर्वाचित होकर वी॰ वी॰ गिरि ने राष्ट्रपति पद का कार्यभार ग्रहण नहीं कर लिया। अब तक तीन उपराष्ट्रपति वी॰ वी॰ गिरि (राष्ट्रपति जाकिर हुसैन की मृत्यु के कारण), [[बी.डी. जत्ती]] (राष्ट्रपति फ़खरुद्दीन अली अहमद की मृत्यु के कारण), तथा मोहम्मद हिदायतुल्ला (राष्ट्रपति ज्ञानी ज़ेल सिंह की अनुपस्थिति के कारण) और एक मुख्य न्यायधीश न्यायमूर्ती मोहम्मद हिदायतुल्ला राष्ट्रपति के पद के कृत्यों का निर्वहन कर चुके हैं।&lt;br /&gt;
{| width=&amp;quot;100%&amp;quot;&lt;br /&gt;
|-valign=&amp;quot;top&amp;quot;&lt;br /&gt;
| style=&amp;quot;width:50%&amp;quot;|&lt;br /&gt;
&amp;lt;div style=&amp;quot;border:thin solid #aaaaaa; margin:10px&amp;quot;&amp;gt;&lt;br /&gt;
{| width=&amp;quot;98%&amp;quot; class=&amp;quot;bharattable&amp;quot;&lt;br /&gt;
|+भारत के राष्ट्रपति पद के कृत्यों का निर्वहन करने वाले व्यक्ति&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
! नाम&lt;br /&gt;
! कार्यकाल&lt;br /&gt;
|}&lt;br /&gt;
&amp;lt;div style=&amp;quot;height: 300px; overflow: auto;overflow-x:hidden;&amp;quot;&amp;gt;&lt;br /&gt;
{| class=&amp;quot;bharattable&amp;quot; border=&amp;quot;1&amp;quot; width=&amp;quot;99%&amp;quot;&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[राजेन्द्र प्रसाद|डॉ. राजेन्द्र प्रसाद]]&lt;br /&gt;
| [[26 जनवरी]], [[1950]] से [[13 मई]], [[1962]] &lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[सर्वपल्ली राधाकृष्णन|डॉ. राधाकृष्णन]]&lt;br /&gt;
| [[13 मई]], [[1962]] से [[13 मई]], [[1967]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[डॉ. ज़ाकिर हुसैन]]&lt;br /&gt;
| [[15 मई]], [[1967]] से [[3 मई]], [[1969]] &lt;br /&gt;
(कार्यकाल में ही मृत्यु)&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[वाराहगिरि वेंकट गिरि]] &lt;br /&gt;
(उपराष्ट्रपति)&lt;br /&gt;
| [[3 मई]], [[1969]] से [[20 जुलाई]], [[1969]] &lt;br /&gt;
(कार्यवाहक)&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| न्यायमूर्ति एम॰ हिदायतुल्ला &lt;br /&gt;
(भारत के मुख्य न्यायाधीश)&lt;br /&gt;
| [[20 जुलाई]], [[1969]] से [[24 अगस्त]], [[1969]] &lt;br /&gt;
(कार्यवाहक)&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[वाराहगिरि वेंकट गिरि]]&lt;br /&gt;
| [[24 अगस्त]], [[1969]] से [[24 अगस्त]], [[1974]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[फ़ख़रुद्दीन अली अहमद]]&lt;br /&gt;
| [[24 अगस्त]], [[1974]] से [[11 फ़रवरी]], [[1977]] &lt;br /&gt;
(कार्यकाल में ही मृत्यु)&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[बी.डी. जत्ती]] (उपराष्ट्रपति)  &lt;br /&gt;
| [[11 फ़रवरी]], [[1977]] से [[25 जुलाई]], [[1977]] &lt;br /&gt;
(कार्यवाहक) &lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[नीलम संजीव रेड्डी]]&lt;br /&gt;
| [[25 जुलाई]], [[1977]] से [[25 जुलाई]], [[1982]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[ज्ञानी ज़ैल सिंह]]&lt;br /&gt;
| [[25 जुलाई]], [[1982]] से [[25 जुलाई]], [[1987]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| एम॰ हिदायतुल्ला (उपराष्ट्रपति) &lt;br /&gt;
| [[6 अक्टूबर]], [[1982]] से [[31 अक्टूबर]], [[1982]] &lt;br /&gt;
(जब राष्ट्रपति अनुपस्थित थे)&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[रामस्वामी वेंकटरमण]]  &lt;br /&gt;
| [[25 जुलाई]], [[1987]] से [[25 जुलाई]], [[1992]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[शंकरदयाल शर्मा|डॉ. शंकर दयाल शर्मा]]&lt;br /&gt;
| [[25 जुलाई]], [[1992]] से [[25 जुलाई]], [[1997]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[के. आर. नारायणन]] &lt;br /&gt;
| [[25 जुलाई]], [[1997]] से [[25 जुलाई]], [[2002]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[अब्दुल कलाम|डॉ. ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम]]&lt;br /&gt;
| [[25 जुलाई]], [[2002]] से [[25 जुलाई]], [[2007]]&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[प्रतिभा पाटिल]]&lt;br /&gt;
| [[25 जुलाई]], [[2006]] से निरन्तर&lt;br /&gt;
|}&lt;br /&gt;
&amp;lt;/div&amp;gt;&lt;br /&gt;
&amp;lt;/div&amp;gt;&lt;br /&gt;
| style=&amp;quot;width:50%&amp;quot;|&lt;br /&gt;
&amp;lt;div style=&amp;quot;border:thin solid #aaaaaa; margin:10px&amp;quot;&amp;gt;&lt;br /&gt;
{| width=&amp;quot;98%&amp;quot; class=&amp;quot;bharattable&amp;quot;&lt;br /&gt;
|+विभिन्न चुनावों में राष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों को मिले मत&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
! उम्मीदवार&lt;br /&gt;
! चुनाव तिथि&lt;br /&gt;
! प्राप्त मत&lt;br /&gt;
|}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;div style=&amp;quot;height: 300px; overflow: auto;overflow-x:hidden;&amp;quot;&amp;gt;&lt;br /&gt;
{| class=&amp;quot;bharattable&amp;quot; border=&amp;quot;1&amp;quot; width=&amp;quot;99%&amp;quot;&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| '''प्रथम चुनाव, 1952'''  &lt;br /&gt;
| '''2 मई, 1952'''&lt;br /&gt;
| &lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[डॉ. राजेन्द्र प्रसाद]]&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 5,07,400&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| के. टी. शाह  &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 92,827&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| लक्ष्मण गणेश ठाते  &lt;br /&gt;
| &lt;br /&gt;
| 2,672&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| चौधरी हरी राम  &lt;br /&gt;
| &lt;br /&gt;
| 1,954&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| कृष्ण कुमार चटर्जी &lt;br /&gt;
| &lt;br /&gt;
| 533&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| '''द्वितीय चुनाव, 1957''' &lt;br /&gt;
| '''6 मई, 1957'''&lt;br /&gt;
| '''प्राप्त मत'''&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| डॉ. राजेन्द्र प्रसाद &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 4,59,698&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| नागेन्द्र नारायण दास &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 2000&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| चौधरी हरी राम &lt;br /&gt;
| &lt;br /&gt;
| 1498&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| '''तृतीय चुनाव, 1962'''&lt;br /&gt;
| '''7 मई, 1962'''&lt;br /&gt;
| '''प्राप्त मत'''&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन]] &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 5,53,067&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| चौधरी हरी राम &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 6,341&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| यमुना प्रसाद त्रिशुलिया &lt;br /&gt;
| &lt;br /&gt;
| 3,537&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| '''चौथा चुनाव, 1967'''&lt;br /&gt;
| '''6 मई, 1967'''&lt;br /&gt;
| '''प्राप्त मत'''&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[डॉ. जाकिर हुसैन]] &lt;br /&gt;
| &lt;br /&gt;
| 4,71,244&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| कोका सुब्बाराय &lt;br /&gt;
| &lt;br /&gt;
| 3,63,971&lt;br /&gt;
|- &lt;br /&gt;
| खुबी राम &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 1369&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| यमुना प्रसाद त्रिशुलिया &lt;br /&gt;
| &lt;br /&gt;
| 750&lt;br /&gt;
|- &lt;br /&gt;
| भाम्बुरकर श्रीनिवास गोपाल &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 232&lt;br /&gt;
|- &lt;br /&gt;
| ब्रह्म देव &lt;br /&gt;
| &lt;br /&gt;
| 232&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| कृष्ण कुमार चटर्जी &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 125&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| कुमार कमला सिंह &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 125&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| '''पाँचवाँ चुनाव, 1969''' &lt;br /&gt;
| '''16 अगस्त, 1969'''&lt;br /&gt;
| '''प्राप्त मत'''&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[वी. वी. गिरि]] &lt;br /&gt;
| &lt;br /&gt;
| 4,01,515&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[नीलम संजीव रेड्डी]] &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 3,13,548&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| सी. डी. देशमुख &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 1,12,769&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| चन्द्रदत्त सेनानी &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 5,814&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| गुरुचरण कौर &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 940&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| राजभोज पांडुरंग नाथूजी&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 831&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| पं बाबूलाल भाग &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 576&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| मनोबिहारी अनिरुद्ध शर्मा &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 125&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| चौधरी हरी राम &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 125&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| खूबी राम &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 94&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| '''छठा चुनाव, 1974''' &lt;br /&gt;
| '''17 अगस्त, 1974'''&lt;br /&gt;
| '''प्राप्त मत'''&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[फ़खरुद्दीन अली अहमद]] &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 7,65,587&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| त्रिदिव चौधरी &lt;br /&gt;
| &lt;br /&gt;
| 1,89,196&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| '''सातवां चुनाव, 1977'''&lt;br /&gt;
| '''6 अगस्त, 1977'''&lt;br /&gt;
| '''प्राप्त मत'''&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[नीलम संजीव रेड्डी]]&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| निर्विरोध निर्वाचन&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| '''आठवां चुनाव, 1982'''&lt;br /&gt;
| '''12 जुलाई, 1982'''&lt;br /&gt;
| '''प्राप्त मत'''&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[ज्ञानी जैल सिंह]] &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 7,54,113&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| हंस राज खन्ना &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 2,82,685&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| '''नवां चुनाव, 1987'''&lt;br /&gt;
| '''13 जुलाई, 1987'''&lt;br /&gt;
| '''प्राप्त मत'''&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[रामास्वामी वेंकटरमण]] &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 7,40,148&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| कृष्ण अय्यर रामा अय्यर &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 2,81,550&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| मिथलेश कुमार &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 2,223&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| '''दसवां चुनाव, 1992'''&lt;br /&gt;
| '''13 जुलाई, 1992'''&lt;br /&gt;
| '''प्राप्त मत'''&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[डॉ. शंकर दयाल शर्मा]] &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 6,75,864&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| प्रो. जी. जी. स्वेल &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 3,46,485&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| राम जेठमलानी &lt;br /&gt;
| &lt;br /&gt;
| 2,704&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| जोगेन्द्र सिंह उर्फ धरती पकड़ &lt;br /&gt;
| &lt;br /&gt;
| 1,135&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| '''ग्याहरवां चुनाव, 1997'''&lt;br /&gt;
| '''14 जुलाई, 1997'''&lt;br /&gt;
| '''प्राप्त मत'''&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[के. आर. नारायणन]] &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 9,56,290&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| टी. एन. शेषन &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 50,631&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| '''बारहवां चुनाव, 2002'''&lt;br /&gt;
| '''15 जुलाई, 2002'''&lt;br /&gt;
| '''प्राप्त मत'''&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम]] &lt;br /&gt;
| &lt;br /&gt;
| 9,22,884&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| कैप्टन लक्ष्मी सहगल &lt;br /&gt;
| &lt;br /&gt;
| 1,07,366&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| '''तेरहवां चुनाव, 2007'''&lt;br /&gt;
| '''19 जुलाई, 2007'''&lt;br /&gt;
| '''प्राप्त मत'''&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| [[प्रतिभा देवी सिंह पाटिल]] &lt;br /&gt;
| &lt;br /&gt;
| 6,38,116&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
| भैरोसिंह शेखावत &lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
| 3,31,306&lt;br /&gt;
|}&lt;br /&gt;
&amp;lt;/div&amp;gt;&lt;br /&gt;
&amp;lt;/div&amp;gt;&lt;br /&gt;
|}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==वेतन और भत्ते==&lt;br /&gt;
राष्ट्रपति को नि:शुल्क शासकीय निवास उपलब्ध होता है। वह ऐसी परिलब्धियों, भत्तों और विशेषाधिकारों का हक़दार होता है, जो संसद विधि के द्वारा अवधारित करें, और जब तक संसद ऐसी विधि पारित नहीं करती है उनकी परिलब्धियाँ या भत्ते वही होगें जो संविधान की दूसरी अनुसूची में विनिर्दिष्ट हैं। [[1990]] में राष्ट्रपति की परिलब्धियाँ बढ़ाकर 20,000 रुपये, [[4 अगस्त]], [[1998]] को इसे बढ़ाकर 50,000 रुपये और [[10 जनवरी]], [[2008]] को राष्ट्रपति की परिलब्धियों में एक बार फिर पुन: संशोधन करते हुए इसे बढ़ाकर 1.50 लाख रुपये प्रति माह कर दिया गया। यह वृद्धि जनवरी, [[2006]] से प्रभावी की गई है। राष्ट्रपति को पद त्याग देने के पश्चात् या पदावधि समाप्ति पर उनके वेतन का 50 प्रतिशत पेंशन का प्रावधान है। इस प्रकार पद विमुक्ति के पश्चात् पूर्व राष्ट्रपति को 9,00,000 रुपये वार्षिक पेंशन देय है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पूर्व राष्ट्रपति को एक अतिरिक्त निजी सचिव के अलावा एक कर्मचारी की भी सुविधा का प्रावधान है। उन्हें मोबाइल फ़ोन, इंटरनेट और ब्राडबैंड का कनेक्शन भी उपलब्ध कराया जाएगा। उनके कार्यालय के रख-रखाव पर पूर्व में 12 हज़ार रुपये वार्षिक ख़र्च का प्रावधान था, जिसे बढ़ाकर अब 60,000 रुपये कर दिया गया है। पदावधि के दौरान राष्ट्रपति की मृत्यु हो जाने पर उसे पारिवारिक पेंशन, सुसज्जित आवास, कर्मचारी, कार, टेलीफ़ोन, यात्रा और स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध हैं। संविधान के अनुच्छेद 59 के अनुसार राष्ट्रपति की परिलब्धियाँ और उसके भत्ते उसके कार्यकाल में घटाये नहीं जा सकते। राष्ट्रपति के वेतन एवं भत्ते को आयकर से छूट प्राप्त हैं।&lt;br /&gt;
==महाभियोग की प्रक्रिया==&lt;br /&gt;
राष्ट्रपति को उसके पद से अनुच्छेद 61 के तहत महाभियोग की प्रक्रिया के द्वारा हटाया जा सकता है। राष्ट्रपति के विरुद्ध महाभियोग की प्रक्रिया तब संचालित की जा सकती है, जब उसने संविधान के प्रावधानों का उल्लंघन किया हो। राष्ट्रपति के विरुद्ध महाभियोग चलाने का संकल्प संसद के किसी भी सदन में पेश किया जा सकता है, लेकिन जिस सदन में महाभियोग का संकल्प पेश किया जाना हो, उसके एक चौथाई सदस्यों के द्वारा हस्ताक्षरित आरोप पत्र राष्ट्रपति को 14 दिन पूर्व दिया जाना आवश्यक है। राष्ट्रपति को आरोप पत्र दिये जाने के 14 दिन बाद ही सदन में महाभियोग का संकल्प पेश किया जा सकता है। जिस सदन में संकल्प पेश किया जाए, उसके सदस्य संख्या के बहुमत तथा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो तिहाई बहुमत से संकल्प पारित किया जाना चाहिए। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिस सदन में संकल्प पेश किया गया है, उसके द्वारा पारित किये जाने के बाद संकल्प दूसरे सदन को भेजा जाएगा और दूसरा सदन राष्ट्रपति पर लगाये गये आरोपों की जाँच करेगा। जब दूसरा सदन राष्ट्रपति पर लगाये गये आरोपों की जाँच कर रहा हो, तब राष्ट्रपति या तो स्वयं या तो अपने वकील के माध्यम से लगाये गये आरोपों के सम्बन्ध में अपना पक्ष प्रस्तुत करेगा और स्पष्टीकरण देगा। यदि दूसरा सदन राष्ट्रपति पर लगाये गये आरोपों को सही पाता है तथा अपनी संख्या के बहुमत से तथा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो तिहाई बहुमत पहले सदन द्वारा पारित संकल्प का अनुमोदन कर देता है, तो महाभियोग की कार्रवाई पूर्ण हो जाती है। इस प्रकार राष्ट्रपति अपना पद त्याग करने के लिए बाध्य हो जाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==राष्ट्रपति भवन==&lt;br /&gt;
[[चित्र:Rashtrapati-Bhavan-1.jpg|thumb|200px|राष्ट्रपति भवन, [[दिल्ली]] &amp;lt;br /&amp;gt; Rashtrapati Bhavan, Delhi]]&lt;br /&gt;
{{main|राष्ट्रपति भवन}}&lt;br /&gt;
राष्ट्रपति भवन वास्तुकला का उत्कृष्ट नमूना है। इस भवन के निर्माण की सोच सर्वप्रथम [[1911]] में उस समय उत्पन्न हुई जब [[दिल्ली दरबार]] ने निर्णय किया कि भारत की राजधानी [[कोलकाता]] से [[दिल्ली]] स्थानान्तरित की जाएगी। इसी के साथ में यह भी निर्णय लिया गया कि [[नई दिल्ली]] में ब्रिटिश वायसराय के रहने के लिए एक आलीशान भवन का निर्माण किया जाएगा।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==राष्ट्रपति के अंगरक्षक==&lt;br /&gt;
राष्ट्रपति की सुरक्षा के लिए अंगरक्षकों की व्यवस्था है। इस अंगरक्षक दस्ते का गठन सर्वप्रथम 1773 में गवर्नर जनरल हेस्टिग्स ने [[बनारस]] में किया था। प्रारम्भ में इस दस्तें में 50 जवान और 50 घोड़े शामिल किये गये थे। बाद में बनारस के राजा चेत सिंह द्वारा इस दस्ते में 50 जवान और 50 घोड़े शामिल कर लिये जाने के बाद इनकी संख्या 100 हो गई। प्रथम विश्वयुद्ध से पूर्व यह संख्या 1845 थी, जो कालान्तर में बढ़कर 1929 हो गई। वर्तमान में राष्ट्रपति के अंगरक्षक दस्ते में 4 अधिकारी, 14 जूनियर कमीशंड अधिकारी और 161 जवानों की टुकड़ी शामिल है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
राष्ट्रपति के सुरक्षा बलों को 1784 तक गवर्नर जनरल का बाडीगार्ड कहा जाता था। 1858 में इसे वायसराय का बाडीगार्ड कहा जाने लगा। [[1944]] तक आते-आते इसका नाम '44वीं डिवीजन निगरानी स्कवॉड्रन' पड़ गया। [[1947]] में एक बार फिर इस दस्ते को 'गवर्नर जनरल बाडीगार्ड' कहा जाने लगा। लेकिन [[21 जनवरी]], [[1950]] को भारत को गणतंत्र घोषित किये जाने के साथ ही इस दस्ते को 'राष्ट्रपति का अंगरक्षक' के रूप में नामांकित कर दिया गया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
राष्ट्रपति के अंगरक्षक के दस्ते के रेजीमेंट का [[नीला रंग|रंग नीला]] और गाढ़ा लाल (मैरून) है। इस दस्ते का अमर वाक्य 'भारत माता की जय' है। वर्तमान में राष्ट्रपति के अंगरक्षक दस्तें में [[सिक्ख]], [[जाट]] और राजपूत सहित लगभग सभी रेजीमेंट के जवान और अधिकारी कार्यरत हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==शक्तियाँ तथा अधिकार==&lt;br /&gt;
भारतीय संविधान द्वारा राष्ट्रपति को निम्नलिखित शक्तियाँ तथा अधिकार प्रदान किये गये हैं–&lt;br /&gt;
====कार्यपालिका शक्तियाँ====&lt;br /&gt;
संविधान के अनुच्छेद 73 के अनुसार संघ की कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में निहित है और वह अपनी इस शक्ति का प्रयोग अपने अधीनस्थ प्राधिकारियों के माध्यम से करता है। यहाँ अधीनस्थ प्राधिकारी का तात्पर्य केन्द्रीय मंत्रिमण्डल से है। राष्ट्रपति की कार्यपालिका शक्तियों को निम्नलिखित तीन भागों में विभाजित किया जा सकता है–&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;u&amp;gt;'''मंत्रिपरिषद का गठन'''&amp;lt;/u&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अनुच्छेद 74 के अनुसार राष्ट्रपति संघ की कार्यपालिका शक्ति के संचालन में सलाह देने के लिए मंत्रिपरिषद का गठन करता है, जिसका अध्यक्ष प्रधानमंत्री होता है। सामान्यत: राष्ट्रपति ऐसे व्यक्ति को प्रधानमंत्री के पद पर नियुक्त करता है जो कि लोकसभा में बहुमत दल का नेता हो। इस प्रकार नियुक्त किये गये प्रधानमंत्री की सलाह पर वह मंत्रिपरिषद के अन्य सदस्यों की नियुक्ति करता है। साथ ही वह प्रधानमंत्री की सलाह पर मंत्रिपरिषद के किसी सदस्य को बर्ख़ास्त कर सकता है। सामान्यत: यह प्रथा रही है कि प्रधानमंत्री लोकसभा का सदस्य होता है, क्योंकि मंत्रिपरिषद लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होता है, लेकिन राष्ट्रपति को यह अधिकार है कि यदि लोकसभा में बहुमत प्राप्त दल किसी ऐसे व्यक्ति को अपना नेता चुनता है, जो लोकसभा का सदस्य नहीं है या राज्यसभा का सदस्य है, तो राष्ट्रपति ऐसे व्यक्ति को प्रधानमंत्री नियुक्त करता है, लेकिन इस प्रकार नियुक्त किये गये व्यक्ति को 6 माह के अंतर्गत संसद का सदस्य होना पड़ता है। इसी तरह प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति ऐसे व्यक्ति को मंत्रिपरिषद में शामिल कर सकता है, जो कि संसद का सदस्य नहीं है। यदि ऐसा व्यक्ति मंत्रिपरिषद में शामिल किया जाता है तो उसे छ: माह के अंतर्गत संसद के किसी सदन का सदस्य बनना पड़ता है। &lt;br /&gt;
जब कभी ऐसी स्थिति उत्पन्न हो कि लोकसभा में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत न मिले या लोकसभा में पेश किये गये अविश्वास प्रस्ताव के पारित होने के कारण मंत्रिपरिषद को त्यागपत्र देना पड़े, तो राष्ट्रपति किस व्यक्ति को प्रधानमंत्री नियुक्त करेगा, इस सम्बन्ध में संविधान में कोई प्रावधान नहीं है। यहाँ पर राष्ट्रपति ऐसे व्यक्ति को प्रधानमंत्री नियुक्त कर सकता है, जिसके सम्बन्ध में उसे विश्वास हो कि वह लोकसभा में अपना बहुमत सिद्ध करता है। इस सम्बन्ध में कुछ हद तक राष्ट्रपति को विशेषाधिकार प्राप्त हैं। इसी विशेषाधिकार के प्रयोग में राष्ट्रपति ने [[1979]] में चरण सिंह को प्रधानमंत्री नियुक्त किया था। चरण सिंह की प्रधानमंत्री पद पर नियुक्ति को इस आधार पर न्यायालय में चुनौती दी गयी थी कि विश्वास मत प्राप्त करने पर ही उन्हें प्रधानमंत्री के रूप में नियुक्त किया जाना चाहिए था, किन्तु न्यायालन ने अपने निर्णय में कहा कि प्रधानमंत्री की नियुक्ति के सम्बन्ध में यह पूर्ववर्ती शर्त नहीं है कि लोकसभा में विश्वास मत प्राप्त किया जाय। इसी तरह [[1989]] में [[वी. पी. सिंह]], [[1991]] में [[नरसिंह राव पी. वी.|पी. वी. नरसिंहराव]], [[1996]] में [[अटल बिहारी वाजपेयी]] और 1996 में ही [[एच डी देवगौड़ा]] तथा [[1997]] में [[इन्द्रकुमार गुजराल]] को प्रधानमंत्री पर पर नियुक्त किया गया था। बाद में [[1998]] में 12वीं लोकसभा के गठन के बाद राष्ट्रपति ने अटल बिहारी वाजपेयी को प्रधानमंत्री पद पर नियुक्त किया था। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;u&amp;gt;'''नियुक्ति सम्बन्धी शक्ति'''&amp;lt;/u&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
संविधान द्वारा राष्ट्रपति को यह शक्ति दी गई है कि वह संघ से सम्बन्धित महत्त्वपूर्ण पदों पर नियुक्तियाँ करें। राष्ट्रपति इस शक्ति के प्रयोग में कई पदाधिकारियों, जैसे-महान्यायवादी, नियंत्रक-महालेखा परीक्षक, वित्त आयोगों के सदस्यों, संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष तथा अन्य सदस्यों, संयुक्त राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष तथा अन्य सदस्यों, मुख्य निर्वाचन आयुक्त, अन्य निर्वाचन आयुक्तों, [[उच्चतम न्यायालय]] तथा उच्च न्यायालयों के न्यायाधाशों, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष तथा सदस्यों, राष्ट्रीय महिला आयोग के अध्यक्ष तथा सदस्यों, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष तथा सदस्यों, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्षों तथा सदस्यों, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष तथा सदस्यों, राज्यों के राज्यपालों, संघ राज्यक्षेत्रों के उपराज्यपालों या प्रशासकों की नियुक्ति कर सकता है। राष्ट्रपति ये नियुक्तियाँ मंत्रिपरिषद की सलाह से करता है। वह अपने द्वारा नियुक्त प्राधिकारियों तथा अधिकारियों को पदमुक्त कर सकता है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;u&amp;gt;'''आयोगों का गठन'''&amp;lt;/u&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
राष्ट्रपति को आयोगों को गठित करने की शक्तियाँ भी प्रदान की गई हैं। यह भारत के राज्य क्षेत्र में सामाजिक और शैक्षणिक दृष्टि से पिछड़े वर्ग की दशाओं का अन्वेषण करने के लिए आयोग, [[राजभाषा]] पर प्रतिवेदन देने के लिए आयोग, अनुसूचित क्षेत्रों के प्रशासन पर रिपोर्ट देने के लिए तथा राज्यों में अनुसूचित जनजातियों के कल्याण सम्बन्धी क्रियाकलापों पर रिपोर्ट देने के लिए आयोग का गठन कर सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
====सैनिक शक्ति====&lt;br /&gt;
संघ के रक्षाबलों का समादेश राष्ट्रपति में निहित होता है। वह रक्षा बलों का प्रमुख होता है। राष्ट्रपति अपने में निहित रक्षा बलों का समादेश उस विधि के अनुसार प्रयुक्त करता है, जिसे संसद बनाये। वह रक्षा बलों के प्रमुखों को भी नियुक्त करता है। &lt;br /&gt;
====राजनयिक शक्तियाँ ====&lt;br /&gt;
अन्य देशों के साथ में भारत का संव्यवहार राष्ट्रपति के नाम से किया जाता है। अंतर्राष्ट्रीय मामलों में राष्ट्रपति भारत का प्रतिनिधित्व करता है। अन्य देशों में भेजे जाने वाले राजदूत तथा उच्चायुक्त राष्ट्रपति के द्वारा नियुक्त जाते हैं। साथ ही अन्य देशों से भारत में नियुक्ति पर आने वाले राजदूतों व उच्चायुक्तों का स्वागत भी राष्ट्रपति के द्वारा किया जाता है। जब अन्य देश के राजदूत या उच्चायुक्त भारत में नियुक्त होकर आते हैं, तो वे अपना 'प्रत्यय पत्र' राष्ट्रपति के समक्ष पेश करते हैं। समस्त अंतर्राष्ट्रीय क़रार और सन्धियाँ राष्ट्रपति के नाम से की जाती हैं, लेकिन राष्ट्रपति अपनी राजनयिक शक्ति का प्रयोग मंत्रिपरिषद की सलाह पर करता है।&lt;br /&gt;
====विधायी शक्तियाँ एवं कार्य====&lt;br /&gt;
संविधान द्वारा राष्ट्रपति को व्यापक विधायी शक्तियाँ प्रदान की गयी हैं, जिन्हें निम्नलिखित भागों में विभाजित किया जा सकता है-&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;u&amp;gt;'''संसद से सम्बन्धित शक्ति'''&amp;lt;/u&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
राष्ट्रपति संसद का अभिन्न अंग है, क्योंकि संसद का गठन राष्ट्रपति और लोकसभा तथा राज्यसभा से मिलकर होता है। संसद से सम्बन्धित राष्ट्रपति की शक्तियाँ निम्नलिखित हैं-&lt;br /&gt;
#अनुच्छेद 331 के तहत वह लोकसभा में आंग्ल-भारतीय समुदाय के दो सदस्यों को नामजद कर सकता है, यदि उसके विचार में लोकसभा में उस समूदाय को उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिला है।&lt;br /&gt;
#वह राज्यसभा में 12 सदस्यों को मनोनीत कर सकता है (अनुच्छेद 80, 1)।&lt;br /&gt;
#यदि संसद के किसी सदस्य की अयोग्यता के सम्बन्ध में, दल-बदल के आधार पर के सिवाय, सवाल उत्पन्न होता है, तो उसका निर्णय राष्ट्रपति करेगा, लेकिन राष्ट्रपति ऐसा निर्णय करने के लिए निर्वाचन आयोग की राय लेगा। &lt;br /&gt;
#राष्ट्रपति संसद के सत्र को आहूत करता है, लेकिन संसद के एक सत्र की अन्तित बैठक और आगामी सत्र की प्रथम बैठक के लिए नियत तारीख़ के बीच छ: मास का अन्तर नहीं होना चाहिए। &lt;br /&gt;
#वह सदनों या किसी सदन का सत्रावसान कर सकता है तथा लोकसभा का विघटन कर सकता है। &lt;br /&gt;
#वह संसद के किसी एक सदन में या संसद के संयुक्त अधिवेशन में अभिभाषण कर सकता है। &lt;br /&gt;
#संसद में लम्बित किसी विधेयक के सम्बन्ध में संसद के दोनों सदनों या किसी सदन को संदेश भेज सकता है और उसके संदेश पर यथाशीघ्र विचारण किया जाता है। &lt;br /&gt;
#वह लोकसभा के प्रत्येक साधारण निर्वाचन के पश्चात् प्रथम सत्र के आरम्भ में और प्रत्येक वर्ष के प्रथम सत्र के आरम्भ में संसद के संयुक्त अधिवेशन में अभिभाषण कर सकता है। &lt;br /&gt;
#संसद द्वारा कोई विधेयक पारित किये जाने पर उसे राष्ट्रपति के समक्ष अनुमति के लिए भेजा जाता है। राष्ट्रपति या तो उस पर अपनी अनुमति देता है या विधेयक पर पुन: विचार करने के लिए संसद को वापस भेजता है। यदि संसद द्वारा पुन: विधेयक पारित कर दिया जाता है तो राष्ट्रपति उस पर अपनी अनुमति देने के लिए बाध्य होता है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;u&amp;gt;'''विधेयक को पेश करने की सिफ़ारिश करने की शक्ति'''&amp;lt;/u&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
निम्नलिखित विधेयक राष्ट्रपति की सिफ़ारिश के बिना संसद में पेश नहीं किये जा सकते-&lt;br /&gt;
#धन विधेयक, लेकिन किसी कर को घटाने या समाप्त करने का प्रावधान करने वाले विधेयक राष्ट्रपति की सिफ़ारिश के बिना संसद में पेश किये जा सकते हैं।&lt;br /&gt;
#राज्य का निर्माण करने या विद्यमान राज्य के क्षेत्र, सीमा या नाम में परिवर्तन करने वाले विधेयक।&lt;br /&gt;
#जिस कराधान में राज्य का हित हो, उस कराधान पर प्रभाव डालने वाले विधेयक।&lt;br /&gt;
#जिस विधेयक को अधिनियमित और प्रवर्तित करने से भारत की संचित निधि से व्यय करना पड़ेगा, सम्बन्धी विधेयक।&lt;br /&gt;
#भूमि अधिग्रहण से सम्बन्धित विधेयक।&lt;br /&gt;
#व्यापार की स्वतंत्रता पर रोक लगाने वाले राज्य का कोई विधेयक।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;u&amp;gt;'''राज्य विधान मण्डल के द्वारा बनायी जाने वाली विधि के सम्बन्ध में राष्ट्रपति की शक्ति'''&amp;lt;/u&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
राज्य विधान मण्डल द्वारा बनायी जाने वाली विधि के सम्बन्ध में राष्ट्रपति को निम्नलिखित शक्तियाँ प्राप्त हैं-&lt;br /&gt;
#यदि राज्य विधान मण्डल कोई ऐसा विधेयक पारित करता है, जिससे उच्च न्यायालय की अधिकारिता प्रभावित होती है, तो राज्यपाल उस विधेयक पर अनुमति नहीं देगा और उसे राष्ट्रपति की अनुमति के लिए आरक्षित कर देगा।&lt;br /&gt;
#राज्य विधान मण्डल के द्वारा सम्पत्ति प्राप्त करने के लिए पारित विधेयक को राष्ट्रपति की अनुमति के लिए आरक्षित रखा जाएगा। &lt;br /&gt;
#किसी राज्य के अन्दर या दूसरे राज्यों के साथ व्यापार आदि पर प्रतिबन्ध लगाने वाले विधेयकों को विधानसभा में पेश करने के पहले राष्ट्रपति की अनुमति लेनी होगी।&lt;br /&gt;
#वित्तीय आपात स्थिति के प्रवर्तन की स्थिति में राष्ट्रपति निर्देश दे सकता है कि सभी धन विधेयकों को राज्य विधान सभा में पेश करने के पहले उस पर राष्ट्रपति की अनुमति ली जाए। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;u&amp;gt;'''अध्यादेश जारी करने की शक्ति'''&amp;lt;/u&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
संविधान के अनुच्छेद 123 के तहत राष्ट्रपति को अध्यादेश जारी करने की शक्ति प्रदान की गयी है। राष्ट्रपति द्वारा जारी अध्यादेश का वही प्रभाव होता है, जो संसद द्वारा पारित तथा राष्ट्रपति के द्वारा अनुमोदित अधिनियम को होता है, लेकिन अन्तर यह होता है कि अधिनियम का प्रभाव तब तक स्थायी होता है, जब तक की संसद के द्वारा या राष्ट्रपति के अध्यादेश द्वारा निरस्त न कर दिया जाए, इसके विपरीत अध्यादेश केवल 6 मास तक ही प्रवर्तन में रहता है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
राष्ट्रपति के द्वारा अध्यादेश संसद के विश्रान्तिकाल में उस समय जारी किया जाता है, जब राष्ट्रपति को यह विश्वास हो जाए कि ऐसी परिस्थिति उत्पन्न हो गयी है, जिसके अनुसार अविलम्ब कार्रवाई करना आवश्यक है। राष्ट्रपति के द्वारा जारी अध्यादेश का प्रभाव केवल 6 मास तक ही रहता है यदि 6 मास के अन्दर संसद द्वारा अनुमोदित न कर दिया जाए। संसद द्वारा अनुमोदित किये जाने पर वह राष्ट्रपति की अनुमति प्राप्त करने के बाद अधिनियम हो जाता है। यदि संसद के अधिवेशन के प्रारम्भ के बाद पहले जारी किये गये अध्यादेश को संसद द्वारा अनुमोदित किये जाने के लिए 6 मास के अन्दर संसद में पेश नहीं किया जाता है, तो अध्यादेश प्रभावहीन हो जाता है। यदि संसद के एक सदन का सत्र चल रहा है और दूसरे सदन का सत्र स्थगित हो, तब भी अध्यादेश जारी किया जा सकता है, क्योंकि संसद का एक सदन कोई विधेयक पारित कर उसे क़ानून बनाने के लिए सक्षम नहीं है।  &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;u&amp;gt;'''नियम बनाने की शक्ति'''&amp;lt;/u&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
राष्ट्रपति को निम्नलिखित के सम्बन्ध में क़ानून बनाने की शक्ति है-&lt;br /&gt;
#राष्ट्रपति के नाम से किये जाने वाले और निष्पादित आदेशों तथा अन्य लिखतों को अधिप्रमाणित करने के ढंग के सम्बन्ध में।&lt;br /&gt;
#राज्यसभा के सभापति तथा लोकसभा के अध्यक्ष से परामर्श करके दोनों सदनों की संयुक्त बैठकों से सम्बन्धित और उनमें परस्पर संचार से सम्बन्धित प्रक्रिया के नियम।&lt;br /&gt;
#संघ या राज्य की सेवा करने वाले व्यक्तियों की भर्ती और सेवा की शर्तों को विनियमित करने वाले नियम।&lt;br /&gt;
#संयुक्त लोक सेवा आयोग तथा संघ लोक सेवा आयोग के सदस्यों कर्मचारियों की सेवा शर्तों को विनियमित करने वाले नियम।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;u&amp;gt;'''राष्ट्रपति की वीटो शक्ति'''&amp;lt;/u&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
संविधान द्वारा राष्ट्रपति को स्पष्टत: वीटो की शक्ति प्रदान नहीं की गयी है। लेकिन संविधान के अनुसार किये गये कार्यों तथा स्थापित परम्पराओं के अनुसार यह माना जाता है कि राष्ट्रपति को निम्नलिखित तीन प्रकार की वीटो शक्तियाँ प्राप्त हैं-&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;u&amp;gt;'''पूर्ण वीटो'''&amp;lt;/u&amp;gt;- जब राष्ट्रपति किसी विधेयक को अनुमति नहीं देता है तो यह कहा जाता है कि राष्ट्रपति ने पूर्ण वीटो की शक्ति का प्रयोग किया है। राष्ट्रपति इस वीटो की शक्ति का प्रयोग गैर सरकारी विधेयक पर अनुमति न प्रदान करके कर सकता है या ऐसे विधेयक पर अनुमति न प्रदान करके कर सकता है जो ऐसी सरकार के द्वारा पारित किया गया हो, जो विधेयक पर अनुमति देने के पूर्व ही त्यागपत्र दे दे और नयी सरकार विधेयक पर अनुमति न देने की सिफ़ारिश करे। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;u&amp;gt;'''निलम्बनकारी वीटो'''&amp;lt;/u&amp;gt;- जब राष्ट्रपति किसी विधेयक के प्रभाव को निलम्बित रखने के लिए अनुमति देने हेतु अपने पास प्रेषित विधेयक को संसद के पास पुनर्विचार के लिए भेजता है, तो यह कहा जाता है कि उन्होंने निलम्बनकारी वीटो का प्रयोग किया है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;u&amp;gt;'''जेबी वीटो'''&amp;lt;/u&amp;gt;- इस पॉकेट वीटो भी कहा जाता है। जब राष्टपति संसद द्वारा पारित करके अनुमति के लिए भेजे गए विधेयक पर न तो अनुमति देता है और न ही उसे पुनर्विचार के लिए वापस भेजता है तो यह कहा जाता है कि राष्ट्रपति ने जेबी या पॉकेट वीटो का प्रयोग किया है। इस वीटो का प्रयोग राष्ट्रपति (ज्ञानी ज़ेल सिंह) ने [[1986]] में संसद द्वारा पारित भारतीय डाक (संशोधन) अधिनियम के सन्दर्भ में किया है। राष्ट्रपति ने न तो इस पर अपनी अनुमति दी है और न ही इसे संसद के पास पुनर्विचार के लिए भेजा है। &lt;br /&gt;
====वित्तीय शक्तियाँ====&lt;br /&gt;
राष्ट्रपति को संविधान द्वारा कई वित्तीय शक्तियाँ प्रदान की गयी हैं। धन विधेयक तथा वित्त विधेयक को तभी लोकसभा में पेश किया जाता है जब राष्ट्रपति उसकी सिफ़ारिश करे। जिस विधेयक को प्रवर्तित किये जान पर भारत की संचित निधि में व्यय करना पड़े, उस विधेयक को संसद द्वारा तभी पारित किया जाएगा, जब राष्ट्रपति उस विधेयक पर विचार-विमर्श करने की सिफ़ारिश संसद से करें। जिस कराधान में राज्य का हित सम्बद्ध है, उस कराधान से सम्बन्धित विधेयक को राष्ट्रपति की अनुमति से ही लोकसभा में पेश किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त राष्ट्रपति प्रत्येक वर्ष वित्तमंत्री के माध्यम से वर्ष का बजट लोकसभा में पेश करवाता है तथा प्रत्येक पाँच वर्ष की समाप्ति पर वित्त आयोग का गठन करता है। राष्ट्रपति वित्त आयोग द्वारा की गयी प्रत्येक सिफ़ारिश को, उस पर किये गये स्पष्टीकरण ज्ञापन सहित संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाता है। &lt;br /&gt;
====न्यायिक शक्तियाँ====&lt;br /&gt;
संविधान द्वारा राष्ट्रपति को तीन प्रकार की न्यायिक शक्तियाँ प्रदान की गई हैं, जिनका विवरण निम्न प्रकार से है-&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;u&amp;gt;'''न्यायाधीशों की नियुक्ति करने की शक्ति'''&amp;lt;/u&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अनुच्छेद 124 के अनुसार राष्ट्रपति को उच्चतम न्यायालय तथा उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को नियुक्त करने की शक्ति है। उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति करने के लिए राष्ट्रपति उच्चतम न्यायालय तथा उच्च न्यायालय के ऐसे न्यायाधीशों से परामर्श करेगा, जिनसे परामर्श करना वह आवश्यक समझे। मुख्य न्यायाधीश के अतिरिक्त अन्य न्यायाधीशों की नियुक्ति के पूर्व वह मुख्य न्यायाधीश से परामर्श करेगा। लेकिन संविधान में स्पष्ट रूप से यह प्रावधान नहीं किया गया है कि राष्ट्रपति मुख्य न्यायाधीश के परामर्श से बाध्य होंगे या नहीं। लेकिन [[6 अक्टूबर]], [[1993]] को दिये गये एक निर्णय में उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि &lt;br /&gt;
*उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठतम न्यायाधीश को ही देश का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया जाना चाहिए, &lt;br /&gt;
*उच्चतम न्यायालय के अन्य न्यायाधीशों की नियुक्ति के सम्बन्ध में राष्ट्रपति उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की राय मानने के लिए बाध्य है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
राष्ट्रपति उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों तथा अन्य न्यायाधीशों को नियुक्त करता है। उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों को नियुक्त करते समय राष्ट्रपति भारत के मुख्य न्यायाधीश तथा राज्य के राज्यपाल से परामर्श करता है, जबकि अन्य न्यायाधीशों की नियुक्ति करते समय वह भारत के मुख्य न्यायाधीश, राज्य के राज्यपाल तथा सम्बन्धित उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श करता है। 6 अक्टूबर, 1993 को दिये गये निर्णय के अनुसार राष्ट्रपति ऐसी नियुक्तियाँ करते समय भारत के मुख्य न्यायाधीशों की राय को वरीयता देने के लिए बाध्य है। राष्ट्रपति उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों का एक उच्च न्यायालय से दूसरे उच्च न्यायालय में स्थानान्तरण कर सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;u&amp;gt;'''क्षमादान की शक्ति'''&amp;lt;/u&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
संविधान के अनुच्छेद 72 के तहत राष्ट्रपति को क्षमा तथा कुछ मामलों में दण्डादेश के निलम्बन, परिहार या लघुकरण की शक्ति प्रदान की गयी है। राष्ट्रपति को निम्नलिखित मामले में क्षमा, तथा दोषसिद्धि के निलम्बन, परिहार या लघुकरण की शक्ति प्राप्त है-&lt;br /&gt;
#सेना न्यायालयों के द्वारा दिये गये दण्ड के मामले में।&lt;br /&gt;
#मृत्यु दण्डादेश के सभी मामलों में।&lt;br /&gt;
#उन सभी मामलों में, जिन्हें दण्ड या दण्डादेश ऐसे विषय सम्बन्धी किसी विधि के विरुद्ध अपराध के लिए दिया गया है, जिस विषय तक संघ की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार है।&lt;br /&gt;
क्षमा का तात्पर्य अपराध के दण्ड से मुक्ति प्रदान करना है। प्रतिलम्बन का तात्पर्य विधि द्वारा विहित दण्ड के स्थायी स्थगन से है। परिहार के अंतर्गत दण्ड की प्रकृति में परिवर्तन किए बिना दण्ड की मात्रा को कम किया जाना है। लघुकरण का अर्थ दण्ड की प्रकृति में परिवर्तन करना है। &lt;br /&gt;
राष्ट्रपति अपनी इस शक्ति का प्रयोग मंत्रिपरिषद की सलाह पर करता है और राष्ट्रपति द्वारा यदि इस शक्ति का प्रयोग किया जाता है तो उसका न्यायिक पुनर्विलोकन न्यायालय द्वारा किया जा सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;u&amp;gt;'''उच्चतम न्यायालय से परामर्श लेने का अधिकार'''&amp;lt;/u&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अनुच्छेद 143 के अनुसार जब राष्ट्रपति को ऐसा प्रतीत हो कि विधि या तथ्य का कोई ऐसा प्रश्न उत्पन्न हुआ है या उत्पन्न होने की सम्भावना है, जो ऐसी प्रकृति का और व्यापक महत्त्व का है कि उस पर उच्चतम न्यायालय की राय प्राप्त करना समीचीन है, तब वह उस प्रश्न पर उच्चतम न्यायालय की राय मांग सकता है।&lt;br /&gt;
====आपातकालीन शक्ति====&lt;br /&gt;
राष्ट्रपति को निम्नलिखित आपातकालीन शक्तियाँ प्रदान की गयी हैं-&lt;br /&gt;
#राष्ट्रीय आपात घोषित करने की (अनुच्छेद 352)।&lt;br /&gt;
#राज्यों में संवैधानिक तन्त्र की विफलता पर वहाँ आपातकाल घोषित करने की (अनुच्छेद 356)।&lt;br /&gt;
#वित्तीय आपात घोषित करने की (अनुच्छेद 360)। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==राष्ट्रपति का विशेषाधिकार==&lt;br /&gt;
संविधान द्वारा राष्ट्रपति को यह विशेषाधिकार प्रदान किया गया है कि वह अपने पद के किसी कर्तव्य के निर्वहन तथा शक्तियों के प्रयोग में किये जाने वाले किसी कार्य के लिए न्यायालय के प्रति उत्तरदायी नहीं होगा। &lt;br /&gt;
==संवैधानिक स्थिति==&lt;br /&gt;
संविधान की भावना तथा संविधान सभा में इसके सदस्यों द्वारा किये गये विचारों के अनुसार राष्ट्रपति राष्ट्र का केवल औपचारिक प्रधान होगा, लेकिन मूल संविधान के अनुच्छेद 74 (1) में यह प्रावधान किया गया था कि राष्ट्रपति को उसके कृत्यों का प्रयोग करने में सहायता और सलाह देने के लिए एक मंत्रिपरिषद होगी, जिसका प्रधान प्रधानमंत्री होगा। इसका यह अर्थ लगाया जाता था कि राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद की सलाह मानने के लिए बाध्य नहीं है और वह अपने विवेक से भी संविधान के प्रावधानों के अनुसार अपने कृत्यों का निर्वहन कर सकता है। इसी प्रावधान के कारण प्रथम प्रधानमंत्री [[पंडित जवाहर लाल नेहरू]] तथा तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद के बीच हिन्दू कोड तथा चीन से सम्बन्ध आदि मामलों में काफ़ी मतभेद था, जिससे दोनों के बीच संघर्ष की स्थिति उत्पन्न हो गयी थी। इसके बावजूद 1976 तक संविधान के इस प्रावधान को क़ायम रखा गया, परन्तु 42वें संविधान संशोधन के द्वारा अनुच्छेद 74 (1) में संशोधन करके यह व्यवस्था की गयी कि राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद की सलाह के अनुसार ही कार्य करेगा और इस प्रकार राष्ट्रपति को मंत्रिपरिषद की सलाह के अनुसार कार्य करने के लिए बाध्य कर दिया गया, किन्तु 44वें संविधान संशोधन द्वारा अनुच्छेद 74 (1) में यह व्यवस्था कर दी गयी कि यदि राष्ट्रपति को मंत्रिपरिषद द्वारा कोई सलाह दी जाती है तो वह मंत्रिपरिषद की दी गयी सलाह पर पुनर्विचार करने के लिए कह सकता है। इस प्रकार मंत्रिपरिषद द्वारा पुनर्विचार के बाद की गयी सलाह पर राष्ट्रपति कार्य करने के लिए बाध्य है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{प्रचार}}&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति&lt;br /&gt;
|आधार=&lt;br /&gt;
|प्रारम्भिक=प्रारम्भिक3&lt;br /&gt;
|माध्यमिक=&lt;br /&gt;
|पूर्णता=&lt;br /&gt;
|शोध=&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{संदर्भ ग्रंथ}}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{भारत के राष्ट्रपति}}&lt;br /&gt;
{{भारत के राष्ट्रपति2}}&lt;br /&gt;
{{भारत गणराज्य}}&lt;br /&gt;
[[Category:राष्ट्रपति और राज्यपाल]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Pankaj pathak</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE:%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%96%E0%A4%AA%E0%A5%83%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%A0&amp;diff=281521</id>
		<title>वार्ता:मुखपृष्ठ</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE:%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%96%E0%A4%AA%E0%A5%83%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%A0&amp;diff=281521"/>
		<updated>2012-07-04T11:59:12Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Pankaj pathak: /* suggetion */&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{वार्ता}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रिय सर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
        मुझे ये साइट बहुत पसन्द है और मै इसका नियमित यूजर हु लेकिन सर '''मुखपृष्ठ''' को प्रतिदिन यपडेट करे नये - नये टापिक के साथ!&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== '''सुझाव''' ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ऊपर का सुझाव मैने दिया है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुखपृष्ठ को रोजाना बद्ले&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
````पॅकज पाठक````&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Pankaj pathak</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE:%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%96%E0%A4%AA%E0%A5%83%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%A0&amp;diff=281520</id>
		<title>वार्ता:मुखपृष्ठ</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE:%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%96%E0%A4%AA%E0%A5%83%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%A0&amp;diff=281520"/>
		<updated>2012-07-04T11:49:38Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Pankaj pathak: /* suggetion */ नया विभाग&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{वार्ता}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रिय सर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
        मुझे ये साइट बहुत पसन्द है और मै इसका नियमित यूजर हु लेकिन सर '''मुखपृष्ठ''' को प्रतिदिन यपडेट करे नये - नये टापिक के साथ!&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== suggetion ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ऊपर का सुझाव मैने दिया है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुखपृष्ठ को रोजाना बद्ले&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
````पॅकज पाठक````&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Pankaj pathak</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE:%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%96%E0%A4%AA%E0%A5%83%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%A0&amp;diff=281518</id>
		<title>वार्ता:मुखपृष्ठ</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE:%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%96%E0%A4%AA%E0%A5%83%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%A0&amp;diff=281518"/>
		<updated>2012-07-04T11:44:04Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Pankaj pathak: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{वार्ता}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रिय सर&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
        मुझे ये साइट बहुत पसन्द है और मै इसका नियमित यूजर हु लेकिन सर '''मुखपृष्ठ''' को प्रतिदिन यपडेट करे नये - नये टापिक के साथ!&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Pankaj pathak</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%8C%E0%A4%B2%E0%A5%80_%E0%A4%9C%E0%A4%BC%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A4%BE&amp;diff=280849</id>
		<title>करौली ज़िला</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%8C%E0%A4%B2%E0%A5%80_%E0%A4%9C%E0%A4%BC%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A4%BE&amp;diff=280849"/>
		<updated>2012-06-27T14:04:26Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Pankaj pathak: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा ज़िला&lt;br /&gt;
|[[चित्र:चित्र=http://karauli.nic.in/slide/collactract.JPG]]&lt;br /&gt;
|चित्र का नाम=करौली&lt;br /&gt;
|राज्य=-राजस्थान&lt;br /&gt;
|मुख्यालय=करौली&lt;br /&gt;
|स्थापना=-1 मार्च 1997&lt;br /&gt;
|जनसंख्या=-1458459&lt;br /&gt;
|क्षेत्रफल=-5070 वर्ग कि . मी .&lt;br /&gt;
|भौगोलिक निर्देशांक=-&lt;br /&gt;
|तहसील=-6&lt;br /&gt;
|मंडल=-&lt;br /&gt;
|खण्डों की सँख्या=-6&lt;br /&gt;
|आदिवासी=-&lt;br /&gt;
|विधान सभा क्षेत्र =-&lt;br /&gt;
|लोकसभा=-&lt;br /&gt;
|नगर पालिका=-3&lt;br /&gt;
|नगर निगम=-&lt;br /&gt;
|नगर=-&lt;br /&gt;
|क़स्बे=-&lt;br /&gt;
|कुल ग्राम=-881&lt;br /&gt;
|विद्युतीकृत ग्राम=-&lt;br /&gt;
|मुख्य ऐतिहासिक स्थल=-&lt;br /&gt;
|मुख्य पर्यटन स्थल=-कैला देवी,श्री महावीर जी&lt;br /&gt;
|वनक्षेत्र=-172459 हैक्‍ट&lt;br /&gt;
|बुआई क्षेत्र =-201819 हैक्‍ट&lt;br /&gt;
|सिंचित क्षेत्र =-&lt;br /&gt;
|नगरीय जनसंख्या=-&lt;br /&gt;
|ग्रामीण जनसंख्या=-&lt;br /&gt;
|राजस्व ग्राम=-&lt;br /&gt;
|आबादी रहित ग्राम=-&lt;br /&gt;
|आबाद ग्राम=-&lt;br /&gt;
|नगर पंचायत=-&lt;br /&gt;
|ग्राम पंचायत=-&lt;br /&gt;
|जनपद पंचायत=-&lt;br /&gt;
|सीमा=-&lt;br /&gt;
|अनुसूचित जाति=-&lt;br /&gt;
|अनुसूचित जनजाति=-&lt;br /&gt;
|प्रसिद्धि=-&lt;br /&gt;
|लिंग अनुपात=-&lt;br /&gt;
|साक्षरता=-&lt;br /&gt;
|स्त्री=-&lt;br /&gt;
|पुरुष=-&lt;br /&gt;
|ऊँचाई=-&lt;br /&gt;
|तापमान=-&lt;br /&gt;
|ग्रीष्म=-&lt;br /&gt;
|शरद=-&lt;br /&gt;
|वर्षा=-&lt;br /&gt;
|दूरभाष कोड=-&lt;br /&gt;
|वाहन पंजी.=-34&lt;br /&gt;
|संबंधित लेख=&lt;br /&gt;
|पाठ 1=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=&lt;br /&gt;
|पाठ 2=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 2=&lt;br /&gt;
|पाठ 3=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 3=&lt;br /&gt;
|अन्य जानकारी=वेब जाल-http://karauli.nic.in&lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
|अद्यतन=&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
{{ज़िला लेख}}&lt;br /&gt;
'''ऐतिहासिक पृष्ठभूमि'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|जिला करौली का क्षेत्र पुराने करौली राज्य तथा जयपुर राज्य की गंगापुर एवं हिण्डौन निजामतों में आता&lt;br /&gt;
है। कल्याणपुरी नामक इस क्षेत्र को वर्तमान स्वरूप प्रदान करने का श्रेय यदुवंसी राजाओं को जाता है। कार्ल&lt;br /&gt;
माक्र्स और कर्नल टाड ने अपनी पुस्तक में भी इसका वर्णन किया है। करौली राज्य अप्रैल 1949 को मत्स्य संघ में&lt;br /&gt;
समिमलित हुआ बाद में जयपुर राज्य के साथ मिलकर वृहत संयुक्त राज्य राजस्थान का भाग बना। राजस्थान&lt;br /&gt;
सरकार द्वारा 1 मार्च 1997 को सवार्इमाधोपुर जिले की पांच तहसीलों को मिलाकर एक अलग जिला करौली का&lt;br /&gt;
गठन किया। 15 जुलार्इ 1997 को करौली जिला निर्माण की अधिसूचना जारी करते हुए तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री&lt;br /&gt;
भैराेंसिंह शेखावत ने 19 जुलार्इ 1997 को इस जिले का उदधाटन&lt;br /&gt;
किया। 2011 की जनगणना के अनुसार जिले की जनसंख्या 1458459&lt;br /&gt;
तथा क्षेत्रफल 5043 वर्ग किलोमीटर है। राज्य की प्रमुख नदी चम्बल&lt;br /&gt;
इस जिले को मध्यप्रदेश राज्य से अलग करती है। इस जिले में&lt;br /&gt;
बहुसंख्या में पाये जाने वाले किले एवं गढ इसके पुराने गौरव की ओर&lt;br /&gt;
संकेत करते है। इनमें से तिमनगढ, उटगिरी, मण्डरायल के किलों का&lt;br /&gt;
देश के मध्यकालीन इतिहास&lt;br /&gt;
में प्रमुख स्थान रहा है।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तिमनगढ के किले पर यदुवंश&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
की प्रमुखता रही है। सन 1093 से 1159 में राजा तिमनपाल इस वंश का&lt;br /&gt;
शकितशाली राजा था, जिसने अपनी शकित को बढाकर तिमनगढ का&lt;br /&gt;
निर्माण कराया। ऐतिहासिक महापुरूषों के नाम की अनेक छतरियां इस&lt;br /&gt;
क्षेत्र में आज भी मौजूद है। तिमनगढ, करौली, हिण्डौन आदि स्थानों में&lt;br /&gt;
पाये गये प्रारभिभक तथा मध्ययुग के मूर्तिकला एवं वास्तुकला के नमूने&lt;br /&gt;
पुराने समय में भव्य मंदिरों का होना सि़द्ध करते है। राजा मोरध्वज की&lt;br /&gt;
नगरी गढमोरा करौली जिले में है, जहां आज भी पुराने अवशेष मौजूद है।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''भौगोलिक सिथति एवं जलवायु'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
करौली अपनी भौगोलिक विशिष्टताओं के लिए भी विख्यात है। यह जिला प्राकृतिक सौन्दर्य से भरपूर एवं&lt;br /&gt;
विध्याचंल व अरावली पर्वत मालाओं से आच्छादित है। जिले का कुछ भाग समतल एवं कुछ भाग उचा नीचा एवं&lt;br /&gt;
पहाडियों वाला है। करौली मण्डरायल उपखण्ड को पहाडी इलाका कहा जाता है जबकि बाकी क्षेत्र सामान्यता&lt;br /&gt;
समतल एवं मैदानी है। मैदानी क्षेत्र उपजाऊ है तथा यहा की मिटटी हल्की एवं रेतीली है। करौली एवं मण्डरायल&lt;br /&gt;
उपखण्ड का क्षेत्र, जो स्थानीय भाषा में डांग कहलाता है, पहाडियों एवं नदियों से भरा है।&lt;br /&gt;
जिले की ऊचार्इ समुन्द्र की सतह से 400 से 600 मीटर तक है। जिले के पशिचम में दौसा, दक्षिण पशिचम में&lt;br /&gt;
सवार्इमाधोपुर, उत्तर पूर्व में धौलपुर तथा पशिचम उत्तर में भरतपुर जिले की सीमाएं लगती है। यह जिला 26&lt;br /&gt;
डिग्री 3 सै. से 49 डिग्री उत्तर पशिचम अक्षाश तथा 76 डिग्री 35 से 77 डिग्री 26 पूर्व देशान्तरों के मध्य सिथत&lt;br /&gt;
है।&lt;br /&gt;
जिले में अल्पकालीन मौसम के अलवा शेष समय जलवायु शुष्क रहती है। सर्दी नवम्बर माह के प्रथम सप्ताह से&lt;br /&gt;
मार्च तक रहती है, जबकि गर्मी मार्च के अन्त से जून के तीसरे सप्ताह तक रहती है। जिले की सामान्य वार्षिक&lt;br /&gt;
वर्ष 668.86 मि.मी. है। जिले में औसतन 35 दिन वर्षा होती है। जिले का दैनिक अधिकतम तापमान का औसत मर्इ&lt;br /&gt;
माह में 49 डिग्री सेल्सीयस रहता है तथा न्यूनतम 2.00 डिग्री सैलिस. जनवरी में रहता है।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''प्रशासनिक व्यवस्था'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रशासनिक व्यवस्था के अन्तर्गत जिला कलेक्टर जिले का सर्वोच्च अधिकारी होने के साथ-साथ समस्त प्रशासनिक&lt;br /&gt;
एवं कानून व्यवस्थाओं के लिए उत्तरदायी है। जिले को छ: उपखण्डो करौली, हिण्डौन, सपोटरा, मण्डरायल,&lt;br /&gt;
टोडाभीम एवं नादौती में विभाजित किया हुआ है। इन उपखण्डों को 5 पंचायत समिति एवं 6 तहसीलों में&lt;br /&gt;
विभाजित कर क्षेत्राधिकारी निर्धारण किया हुआ है। जिलें में तीन नगरपालिका क्रमश: करौली, हिण्डौन एवं&lt;br /&gt;
टोडाभीम हंै। जिले के प्रशासनिक स्वरूप में जनभागीदारी के रूप में एक लोकसभा सदस्य तथा चार विधानसभा&lt;br /&gt;
सदस्य है।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''भूगर्भ एवं खनिज'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिला करौली एक तरफ से चम्बल तथा तीन तरफ से मैदानों से घिरा हुआ है। इसके मैदान&lt;br /&gt;
कैमबि्रयन-पूर्व की आग्नेय चêानों तथा उनकी तलछट से बनी चêानों के रूपान्तरण से बने है । अरावली की पूर्व&lt;br /&gt;
चêाने स्फटिक, अभ्रक, नार्इसिस्ट, मिग्मा टाइटस आदि की बनी हुर्इ है। महान विंध्य श्रेणी की चêाने जिनमें&lt;br /&gt;
कैमूल, रीवा, भाण्डेर प्रमुख है, विभिन्न प्रकार के सलेटी पत्थर, बालू पत्थर तथा चूना पत्थर से परिपूर्ण है। जिला&lt;br /&gt;
अनेक प्रकार के धातिवक एवं अधातिवक खनिजों से परिपूर्ण है। धातुओं में शीषा, तांबा, लोहा अयस्क आदि तथा&lt;br /&gt;
अधातुओं में चूना, पत्थर, चिकनी मिêी, सिलिका ,सैलरूडा आदि प्रमुख रूप से पाये जाते है।&lt;br /&gt;
इसके अलावा जिले में लेट्रार्इट, रेड आक्सार्इड, बैनेटोनार्इट, बेरार्इट, मैगनीज मिêी तथा काली मिêी पार्इ&lt;br /&gt;
जाती है । जिले में विभिन्न प्रकार की चêानों से मिलने वाले खनिज जैसे र्इमारत बनाने के पत्थर, सजावट के&lt;br /&gt;
पत्थर आदि प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है । भाण्डेर श्रेणी का गुलाबी पत्थर एवं सफेद निषानों वाला पत्थर करौली&lt;br /&gt;
एवं हिण्डौन क्षेत्र में काफी मात्रा में पाया जाता है । सीमेन्ट श्रेणी का चूना पत्थर एवं सिलिकासैण्ड सपोटरा&lt;br /&gt;
,नादौती क्षेत्र मे पाया जाता है। खनिज अभियन्ता करौली के अन्तर्गत इस जिलें की छ: तहसीलों के अलावा सवार्इ&lt;br /&gt;
माधोपुर जिले की दो तहसील गंगापुर एंव बामनवास आती है । इस क्षेत्र में मुख्यरूप से खनिज , सेण्ड स्टोन ,&lt;br /&gt;
मैषनरी स्टेान , सोप स्टोन , सिलिका सेण्ड इत्यादि का खनन होता है । इस खण्ड में कुल 260 खनन पटटे&lt;br /&gt;
स्वीकृत है । जिनका क्षेत्रफल 15568 हैक्टर है । जिसमें से करीब 13210 हैक्टर क्षेत्र में खनिज सेण्ड स्टोन का है&lt;br /&gt;
। उक्त 260 खनन पटटों से सिथर भाटक रू 11059000 प्राप्त होता है एंव अधिक अधिषुल्क रायल्टी कलेक्टषन&lt;br /&gt;
ठेंको को शामिल करते हुए वित्तीय वर्ष 2001-02 में कुल 381.06 लाख की आय विभाग को हुर्इ थी ।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''वनस्पति, वन सम्पदा'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिले मे पाये जाने वाले महत्वपूर्ण पेड़ नीम बबूल ,बेरी, धौंक, रोंझ,तेन्दु, सालर, खैर, सनथा, जामुन, आम, घनेरी,&lt;br /&gt;
बास, खेजडा, बरगद, पीपल आदि है। इस क्षेत्र में पार्इ जाने वाली प्रमुख जडी बूटिया ओधीझाडा, चीचड़ा, पोलर,&lt;br /&gt;
कालीलम्प, लपला, कंैच, गूगल आदि है। जिले में सिथत वनों से इमारती लकड़ी, र्इधन, लकड़ी का कोयला, पशुओं&lt;br /&gt;
के लिए चारा, घास-फूस, तेन्दूपत्ता, गोंद, धौक के पत्ते, शहद, मोम, जड़ी बूटिया फल, कत्था, कंरज तथा दूसरी&lt;br /&gt;
अन्य उपयोगी वस्तुएें प्राप्त होती है।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''जीव जन्तु'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिला करौेली वन्य प्राणियों के मामले में सम्पन्न है इसमें विभिन्न प्रकार के वन्य जीव पाये जाते है जिनमें तेन्दुएें,&lt;br /&gt;
जंगली कुत्ता, सांभर, नील गाय, चीतल, चिंकारा, जंगली सुअर, रीछ प्रमुख हैं। जिलें में कैलादेवी वन्य अभ्यारण्य&lt;br /&gt;
सन 1983 में स्थापित किया गया था, जिसको सन 1991 में रणथम्भौर रिजर्व के नजदीक मानते हुए संरक्षित वन&lt;br /&gt;
क्षेत्र एवं वन्य जीव अभ्यारण्य घोषित किया गया है जिसमे यदा कदा बाघ देखे जा सकते है। अभ्यारण्य का&lt;br /&gt;
क्षेत्रफल 674 वर्ग कि0मी0 है।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''फसल पद्धति:'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिले मे तीनों मौसमों में फसल की बुबार्इ का कार्य होता है खरीफ वर्षा पर आधारित है। जो जुलार्इ माह में&lt;br /&gt;
प्रारम्भ होता है । इसमें बोर्इ जाने वाली मुख्य फसलें बाजरा, मक्का, तिल, ज्वार, ग्वार आदि हैं। रबी की बुवार्इ&lt;br /&gt;
अक्टूबर से प्रारम्भ होती है, जिसमें मुख्यतया जौ, चना, गेहू , सरसों की बुवार्इ होती है। यहा के लोगो का मुख्य&lt;br /&gt;
व्यवसाय कृषि एवं खनन कार्य है। भूमिगत पानी की कमी एवं सिंचार्इ सुविधा की कमी के कारण कृषि मुख्यतया&lt;br /&gt;
वर्षा पर निर्भर है। कृषि विपणन के लिए जिले में हिण्डौन में कृषि उपज मण्डी एवं करौली, टोडाभीम में गौण मंडी&lt;br /&gt;
हैं।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''हस्तकला'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
करौली की हस्तकला में प्रमुख स्थान लाख की चूडियों का है लगभग एक लाख रूपये की चूडियों का&lt;br /&gt;
प्रतिवर्ष अन्य प्रांतों में निर्यात किया जाता है। चूडियों बनाने का काराबार जिले में हिण्डौन एवं करौली शहरों में&lt;br /&gt;
स्थानीय लखेरा एवं मुसिलम सम्प्रदाय के लोगों द्वारा किया जाता है। इस कार्य में करीब पांच सौ लोगों को&lt;br /&gt;
रोजगार मिला हुआ है। इसके अलावा करौली जिले मेें लकडी के खिलौने, घरेलू उपयोग की सामगि्रयों में&lt;br /&gt;
चकला-बेलन, दही बिलौने की रर्इ, लकके चम्मच एवं चारपार्इ व दीवान आदि भी बनाएं जाते हैं। वर्तमान में पत्थर&lt;br /&gt;
तराषी कर मूर्तियों एवं जाली झरोखे बनाने का कार्य भी रीको क्षेत्र हिण्डौन व करौली में किये जाने लगा है।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''सामाजिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियां'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिले मे लोगों के सांस्कृतिक, धार्मिक एवं सामाजिक जीवन में मेले एवं त्यौहारों का महत्वपूर्ण स्थान है। अधिकांष&lt;br /&gt;
मौसमी एवं धार्मिक महत्व के है। इन मेलों का व्यापारिक, पर्यटन एवं सांस्कृतिक दृषिट से एकता के लिए महत्वपूर्ण&lt;br /&gt;
स्थान हैं। जिले के मुख्य मेले कैलादेवी मेला, महावीरजी, मेहन्दीपुर बालाजी एवं मदनमोहनजी के है, जिनमें लाखों&lt;br /&gt;
की संख्या में दर्षनार्थी आते है। राज्य के अन्य हिस्सों की तरह इस जिले में भी हिन्दुओं के रक्षाबन्धन, होली,&lt;br /&gt;
दीपावली, जन्माष्टमी, दषहरा, गणगौर तथा मुसलमानों के इदुलजुहा, रमजान, इदुलफितर त्योहार प्रमुख हैं।&lt;br /&gt;
ऐतिहासिक एवं पुरातातिवक स्थल जिले में निम्नलिखित विषेष महत्व के स्थान है&lt;br /&gt;
वर्तमान जिला मुख्यालय करौली राजपूतानें की प्राचीन रियासतों में से एक प्रमुख रियासत थी। यहां के षासकों&lt;br /&gt;
का सन 1100 से लेकर सन 1947 तक का गौरवषाली इतिहास रहा है। रियासत के यदुवंषी राजाओं ने अपनी&lt;br /&gt;
गरिमा की सुरक्षा, प्रजा के संरक्षण व प्राकृतिक आपदाओं के संधारण हेतु अनेक महल, किले व गढियों का निर्माण&lt;br /&gt;
कराया। इन महलों किलों व गढियों में वास्तु विषेषज्ञता, स्थापत्य कला और चित्रकारी के दुर्लभ नमूने देखने को&lt;br /&gt;
मिलते है। एक प्राचीन राज्य होने के कारण करौली में ऐतिहासिक, धार्मिक व पर्यटक महत्व के स्थानों की बहुलता&lt;br /&gt;
के साथ क्षेत्र में पुरा वैभव विखरा पडा है।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''करौली शहर'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
करौली जिला मुख्यालय पूर्व में करौली राज्य की राजधानी थी। करौली कस्बे की स्थापना 1348 में यादववंश के&lt;br /&gt;
राजा अजर्ुनपाल ने की थी। इसका मूलत: नाम कल्याणपुरी था जो कल्याणजी के मनिदर के कारण प्रसिद्व था।&lt;br /&gt;
इसको भद्रावती नदी के किनारे होने के कारण भद्रावती नगरी भी कहा जाता था। करौली कस्बा चारों तरफ से&lt;br /&gt;
लाल स्टोन से निर्मित है, जिसकी परिधि 3.7 कि0मी0 है जिसमें 6 दरवाजे 12 खिडकिया है। महाराज गोपालसिंह&lt;br /&gt;
के समय का एक खूबसूरत महल है जिसके रंगमहल एवं दीवाने आम को शीशाओं से बडी खूबसूरती से बनाया&lt;br /&gt;
गया है। इस कस्बे में काफी संख्या में मनिदर है जिसमें प्रमुख मनिदर मदनमोहनजी का है। यह मनिदर सेन्दर&lt;br /&gt;
बरामदे एवं सुसजिजत पेनिटंग से निर्मित है तथा महाराजा गोपालसिंह जी के द्वारा जयपुर से लायी गयी काले&lt;br /&gt;
मार्बल से निर्मित मदनमोहनजी की मूर्ति है। प्रत्येक अमावस्या को मेला लगता है, जिसमें हजारो की संख्य में लोग&lt;br /&gt;
दर्शनार्थ आते है करौली मे जैन मनिदर, जामा मसिजद, र्इदगाह अंजनी माता मनिदर,गोविन्द देव जी मनिदर आदि&lt;br /&gt;
भी धार्मिक आस्था के स्थान है।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''हिण्डौन सिटी:'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हिण्डौन नगर करौली जिले की सबसे बडी नगरपालिका है। इस पौराणिक एवं ऐतिहासिक नगर की स्थापना&lt;br /&gt;
किसने की इसके सम्बन्ध में इतिहासकार एकमत नही हैं। सम्भवत: यह भूमि हिरण्यकश्यप व भक्त प्रहलाद की&lt;br /&gt;
कर्म भूमि रही है। यहां पर आज भी नृसिंह मनिदर, प्रहलाद कुण्ड, हिरण्यकश्यप के महल, बावडि़यों के अवशेष हैं।&lt;br /&gt;
यहां से कुछ दूरी पर कुण्डेवा, जगर, दानघाटी पौराणिक स्थान है। जनश्रुतियो के अनुसार महाभारत कालीन&lt;br /&gt;
हिडिम्बा नामक राक्षसी की कर्मस्थली भी यही क्षेत्रा रहा था। हिण्डौन वर्तमान में जिले का प्रमुख औधोगिक&lt;br /&gt;
वाणिजियक नगर है यहां से उत्तर-मध्य रेलवे का दिल्ली मुम्बर्इ मार्ग गुजरता है साथ ही राष्ट्रीय राजमार्ग 11 से&lt;br /&gt;
दूरी 41 कि0मी0 है। यहां पर पत्थर तरासी, स्लेट उधोग का करोबार बडे स्तर पर किया जाता है&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''तिमनगढ़ का किला'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यह किला जिला मुख्यालय करौली से 42 किलोमीटर दूर&lt;br /&gt;
मासलपुर कस्बे के पास सिथत है। यहां बेजोड़ पुरातत्व संबंधी मूर्तिया&lt;br /&gt;
हैं। प्रचलित मान्यता के अनुसार संवत 1244 में यदुवंशी शासक&lt;br /&gt;
तिमनपाल ने इस किले का निर्माण कराया थां। कुछ इतिहासकार इस&lt;br /&gt;
किले को 1000 वर्ष से अधिक प्राचीन बताते है किले के अन्दर कर्इ&lt;br /&gt;
शिलालेखाें, उपलब्ध प्राचीन कृतियों से पता चलता है कि इसे किसी&lt;br /&gt;
शिल्पी व कलाप्रेमी ने बसाया था, जो बाद में शासकों के कब्जे मे&lt;br /&gt;
चला गया। किले के चारों ओर पांच फीट मोटा तथा करीब 30 फीट&lt;br /&gt;
ऊंचा परकोटा स्थापत्य कला का अनूठा नमूना है। किले के भीतर बाजार, फर्श, बगीची, मनिदर, कुंए कि अवशेष&lt;br /&gt;
आज भी मौजूद हैं। पूरा किला अपने अन्दर एक पूरा नगर समेटे हुए हैं। प्रवेश द्वार पर अक्सर ब्रहमा, गणेश की&lt;br /&gt;
मूर्तिया नजर आती है, लेकिन यहा प्रेत व राक्षसों के चित्र देखने को मिलते है। किले मे जगह -जगह खणिडत&lt;br /&gt;
मूर्तियाें को देखने से ऐसा लगता है कि यहा मूर्तियों की बहुत बडी मण्डी थी। दुर्ग में छोटे - छोटे कमरे भी हैं,&lt;br /&gt;
जो संभवत: स्नानघर के काम आते होंगे।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''मण्डरायल का किला'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
करौली शहर से 40 किलो मीटर दूर दक्षिण पूर्व में पहाडों के मध्य एक आयताकार पहाडी के नीचे बसी एक&lt;br /&gt;
मध्यकालीन बस्ती है, जो दो प्रान्तों को विभक्त करते&lt;br /&gt;
हुए चम्बल नदीं के किनारे मण्डरायल नाम से जानी&lt;br /&gt;
जाती है । एतिहासिक दृषिट से एक गजिटयर के&lt;br /&gt;
अनुसार यह दुर्ग यादवों के इस क्षेत्र में प्रवेष से पूर्व&lt;br /&gt;
का है । करौली रियासत की विलेज डायरेक्ट्री में&lt;br /&gt;
इसके निर्माणकर्ता के रूप में बीजाबहादुर को दर्षाया&lt;br /&gt;
गया है, जिसकी कौम एंव काल का कोर्इ जिक्र नही&lt;br /&gt;
है । किदवतियों के अनुसार पूर्व में इस दुर्ग पर&lt;br /&gt;
मियां मकन का आधिपत्य होने के कारण उसी के&lt;br /&gt;
नाम से कालान्तर में अपभ्रषं होकर दुर्ग का नाम&lt;br /&gt;
मण्डरायल हो गया । यहां मुख्य दरवाजें के रूप में&lt;br /&gt;
दो गोलाकार गुबंद है । दूसरा दरवाजा सूर्यपोल नाम हैं, जो रानीपुरा इलाके की तरफ उतरता है। इस दरवाजें&lt;br /&gt;
की खासियत है कि पौर से प्रात: से साय तक सूर्य का प्रकाष रहता है । इसके अन्दर एक सुरक्षित टांका ओर&lt;br /&gt;
बाहर दो तालाब है । तालाब के किनारे त्रिदेव भगवान के मनिदर ओर बारहदारी है । पूर्व में इस किले की दीवारों&lt;br /&gt;
पर उर्दु में कुछ घटनायें लिपिबद्व थी , जो अब नष्ट हो चुकी है ।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''उंट गिरि दुर्ग'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
15 वी षताब्दी में स्थापित यह दुर्ग करणपुर के कल्याण पुरा गांव की ऊंची पर्वत श्रृंखला की सुरंगनुमा पहाडी पर&lt;br /&gt;
सिथत है। लगभग 4 कि0मी0 क्षेत्र में फेले इस दुर्ग में 100 फुट की ऊंचार्इ से नीचे षिवलिंगों पर पानी गिरता है।&lt;br /&gt;
इस पानी में बडी मात्रा में षिलाजीत मिलता है। यह दुर्ग भी सामरिक दृषिट से महत्वपूर्ण रहा है। 1506-07 र्इ. में&lt;br /&gt;
सिकन्दर लोदी ने इस पर आक्रमण किया था उस समय इसे ग्वालियर किले की कुंजी कहा जाता था। अंतिम&lt;br /&gt;
मुगल सल्तनत तक इस किले पर यदुवंषियों का ही आधिपत्य रहा।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''देव गिरि'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उंट गिरि के पूर्व में चम्बल नदी के किनारे सिथत यह किला खण्डहर होते हुए भी अतीत की अनेक घटनाओं का&lt;br /&gt;
साक्षी है। परकोटे के नाम पर आज कुछ भी नही मिलता साथ ही अन्दर के सभी आवासीय भागों को नष्ट किया&lt;br /&gt;
जा चुका है। सन 1506-07 र्इ. में सिकन्दर लोदी के आक्रमण के समय इस किले को सबसे अधिक नुकसान&lt;br /&gt;
पहुचाया गया। वर्तमान में यहां एक बावडी, जर्जर होता षिलालेख तथा कुछ हवेलियों के अवषेष है।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''बहादुरपुर का किला'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
करौली जिला मुख्यालय से 15 किलोमीटर दूर मण्डरायल मार्ग पर ससेड गांव के पास जंगल और सुनसान&lt;br /&gt;
वातावरण में अटल योद्वा सा खडा बहादुरपुर का किला मुगलकालीन स्थापत्य कला का बेजोड नमूना है। दो&lt;br /&gt;
मंजिला नृप गोपाल भवन, सहेली की बाबडी कलात्मक झरोखे 18 फीट लम्बी चीरियों की आमखास कचहरी,&lt;br /&gt;
पंचवीर, मगधराय की छतरी दर्षनीय है। यदुवंषी राजा तिमनपाल के पुत्र नागराज द्वारा निर्मित इस किले का&lt;br /&gt;
विस्तार सन 1566 से 1644 तक होता रहा। जयपुर के राजा सवार्इ जयंिसह ने इस किले में तीन माह तक प्रवास&lt;br /&gt;
किया था।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''शहर किला एवं छतरी'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नादौती तहसील के ग्राम शहर में यह किला उंची पहाडी पर बना हुआ है तथा आज भी सुरक्षित एवं आबाद है।&lt;br /&gt;
यहा के ठिकानेदार आमेर के राजा पृथ्वीराज के पुत्र पच्चाण के वंषज है। इसमें देवी का प्राचीन मंदिर है।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''फतेहपुर किला'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
करौली जिला मुख्यालय से लगभग 30 कि.मी. दूर कंचनपुर जाने वाले मार्ग पर सिथत यह किला यदु शासकों के&lt;br /&gt;
एक बडे जागीरदार हरनगर के ठाकुर घासीराम द्वारा 1702 र्इ. में निर्मित किया गया। यह किला सुरक्षित अवस्था&lt;br /&gt;
में है।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''किला नारौली डांग'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सपोटरा उपखण्ड मुख्यालय से .... दूरी पर सिथत यह किला पहाडी के उपर बना हुआ है। तत्कालीन करौली एवं&lt;br /&gt;
जयपुर रियासतों की सीमा पर सिथत नारौली डांग गांव में स्थानीय जागीरदार द्वारा इसका निर्माण कराया गया&lt;br /&gt;
था।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''भवरविलास पैलेस'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
करौली के पूर्व शासक रहे राजा भंवर पाल के नाम से पूर्व नरेषों का यह&lt;br /&gt;
आवास उत्कृष्ट वास्तु एवं षिल्प समेटे हुए नगर के दक्षिण में मंडरायल&lt;br /&gt;
रोड पर सिथत है। वर्तमान में इसे होटल का रूप दिया हुआ है।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''हरसुख विलास'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
करौली में आने वाला प्रत्येक अतिथि हरसुख विलास की वास्तु एवं षिल्प&lt;br /&gt;
से प्रभावित हुए बिना नही रह सकता।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''रामठरा किला'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भारत के प्रमुख वन्य जीव अम्भारण्य रगथम्भोर एवं घना पक्षी बिहार भरतपुर के बीच करौली जिले के सपोटरा&lt;br /&gt;
उपखण्ड में सिथत रामठरा फोर्ट कैलादेवी राष्ट्रीय अम्भारण्य से मात्र 15 किलोमीटर दूर है।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''सुख विलास बाग एवं शाही कुण्ड'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिला मुख्यालय सिथत भ्रदावती नदी के किनारे एक सुन्दर महलनुमा चारदिवारी के अन्दर बाग लगाया गया था&lt;br /&gt;
जिसका उपयोग रानिया अपने आमोद-प्रमोद के लिए करती थी इसे सुख विलास बाग कहते है। शहर के पर&lt;br /&gt;
कोटे के बहार सुखविलास के पास भव्य शाही कुण्ड बना हुआ है तीन मंजिला बावडीनुमा इस कुण्ड की बनावट&lt;br /&gt;
अद्वितीय है इसमें प्रत्येक मंजिल पर बरामदे एवं उतरने हेतू चारो तरफ सिढियां बनी है। रियासत काल में इस&lt;br /&gt;
कुण्ड का उपयोग शहर में पेयजल सप्लार्इ के लिए किया जाता था।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''दरगाह कबीरषाह'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
करौली पषिचम द्वार पर वजीरपुर गेट एवं सायनाथ खिडकियां के मध्य आज से लगभग 120 वर्ष पूर्व बनार्इ गर्इ&lt;br /&gt;
एक सूफी संत की दरगाह उत्कृष्ट षिल्प का नमूना है। इसकी खासियत यह है कि इसमें दरवाजे भी पत्थर के&lt;br /&gt;
बनाये हुए है। पत्थर पर की गर्इ नक्कासी बरबस ही दर्षको का मन मोह लेती है।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''रावल पैलेस (राजमहल)'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तेरहवी षताब्दी में स्थापित राजमहल (रावल पैलेस) लाल व सफेद पत्थर के षिल्प का बेजोड नमूना है। नक्कषी&lt;br /&gt;
व कलात्मक चितराम से सुसजिजत विषाल द्वार, जालीदार झरोखे, तोपखाना, नाहर कटहरा, सुर्री गुर्ज, गोपालसिंह&lt;br /&gt;
अखाडा, भवर बैंक, नजर बगीची, मानिक महल, फब्बारा कण्ड, बारह दरी, गोपाल मनिदर, दीवान ए आम, फौज&lt;br /&gt;
कचहरी, किरकिरी खाना, ज्ञान बगला, षीष महल, मोतीमहल, हरविलास, रंगलाल, गेंदघर, टेडा कुआ, जनानी&lt;br /&gt;
डयौढी आदि कुषल स्थापत्य के साथ-साथ यहां की सभ्यता व संस्कृति के परिचायक है।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''अन्य'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
करौली में महाराजा गोपालसिंहजी की छतरी, रणगमा तालाब, सुख विलास कुण्ड, एवं षिकारगंज आदि करौली के&lt;br /&gt;
पुरा वैभव प्रतीक है। साथ ही जिले के सपोटरा में नारौली डांग का किला, गढमोरा (नादौती) में राजा मोरध्वज का&lt;br /&gt;
महल व मनिदर, षहर सोप का ऊची पहाडी पर निर्मित किला, हिण्डौन की पुरानी कचहरी व प्रहलाद कुण्ड जैसे&lt;br /&gt;
दर्षनीय ऐतिहासिक स्थल हमारी संस्कृति की पहचान है।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''धार्मिक स्थल&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
महावीर जी'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दिगम्बर जैन संप्रदाय का भारत का एक प्रमुख स्थान है। यहा पर भगवान महावीर की&lt;br /&gt;
400 वर्ष पुरानी मूर्ति है। महावीर जी में निर्मित मनिदर आधुनिक एवं प्राचीन शिल्पकला&lt;br /&gt;
का बेजोड़ नमूना है। मनिदर को एक बहुत बडे प्लेटफार्म पर सफेद मार्बल से बनाया&lt;br /&gt;
गया है। इसकी छतरी दूर से दिखायी देती है, जो लाल बलुआ पत्थर की है। मनिदर&lt;br /&gt;
पर नक्काशी का कार्य भी अति सुन्दर है। मनिदर के ठीक सामने मान स्तम्भ बना हुआ&lt;br /&gt;
है। जिसमें जैन तीर्थकर की प्रतिमा है। मनिदर के पीछ कटला एवं चरण मनिदर है,&lt;br /&gt;
जहां पर दर्शनार्थी श्रद्वापूर्वक दर्शन को जाते है। प्रतिवर्ष चैत्र सुदी 11 से बैशाख सुदी&lt;br /&gt;
2 तक (मार्च-अप्रैल) मेला लगता है, जिसमें लाखों लोग विभिन्न क्षेत्रों से यहां आते हैं।&lt;br /&gt;
मेले के अन्त में रथया़त्रा का आयोजन किया जाता है।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''कैलादेवी मनिदर'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
करौली से 24 कि0मी0 दूर यह प्रसिद्व धार्मिक स्थल है। जहां प्रतिवर्ष&lt;br /&gt;
मार्च - अपै्रल माह मे एक बहुत बडा मेला लगता है। इस मेले में&lt;br /&gt;
राजस्थान के अलावा दिल्ली, हरियाणा, मध्यप्रदेष, उत्तर प्रदेष के&lt;br /&gt;
तीर्थ यात्री आते है। मुख्य मनिदर संगमरमर से बना हुआ है जिसमें&lt;br /&gt;
कैला (महालक्ष्मी) एवं चामुण्डा देवी की प्रतिमाऐं हैं। कैलादेवी की&lt;br /&gt;
आठ भुजाऐं एवं सिंह पर सवारी करते हुए बताया है। यहां क्षेत्रीय&lt;br /&gt;
लांगुरियां के गीत विषेष रूप से गाये जाते है। जिसमें लागुरियां के&lt;br /&gt;
माध्यम से कैलादेवी को अपनी भकित-भाव प्रदर्षित करते है।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''बालाजी'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यह एक छोटा सा गांव टोडाभीम तहसील से 5 कि0मी0 दूर है तथा जयपुर-आगरा राष्ट्रीय राज्यमार्ग से जुडा&lt;br /&gt;
हुआ है। हिन्दुओ की आस्था का महत्वपूर्ण स्थान है। यहां पर पहाडी की तलहटी मे निर्मित हनुमानजी का बहुत&lt;br /&gt;
पुराना मनिदर है। लोग काफी दूर-दूर से यहां आते है। ऐसी मान्यता है कि हिस्टीरिया एवं डिलेरियम के रोगी&lt;br /&gt;
दर्षन लाभ से स्वस्थ होकर लोैटते है। होली एवं दीपावली के त्यौहार पर काफी संख्या मे लोग यहां दर्षन के&lt;br /&gt;
लिए आते है।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''मदनमोहन जी'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
श्री मदन मोहन देवालय मुख्यालय के आंचल में महलों के पास वृहद&lt;br /&gt;
भव्य परिसर के धेरे मे सिथत है जहां भगवान राधा मदनमोहन के साथ&lt;br /&gt;
श्रीगोपालजी की मनमोहनी प्रतिमाएं प्रतिषिठत है। जिनकी सेवा गौड&lt;br /&gt;
सम्प्रदायी गुसार्इयों के माध्यम से बहुत सुन्दर तरीकों से होती आ रही&lt;br /&gt;
है। मंगला से शयन तक हजारो भक्तों का समुह प्रत्येक झांकी पर&lt;br /&gt;
उपसिथत रहता है। मदनमोहनजी की कुल आठ झांकी सकल मनोरथ&lt;br /&gt;
पूर्ण करने वाली हैं । मूलरूप से इन दोनो प्रतिमाओं को उडीसा और&lt;br /&gt;
वृदावन में प्रतिषिठत कराया गया था। कालान्तर में यही प्रतिमाएं&lt;br /&gt;
विभिन्न श्रोतों के माध्यम से आज इस पावन नगरी में भक्तों के वास्ते प्रेरणा की श्रोत बनी हुर्इ है।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''शिल्प एवं उधोग'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
करौली जिलें में षिल्प के उत्कृष्ट नमूने पाये जाते है । वास्तुषिल्प&lt;br /&gt;
के रूप में महाराजा गोपाल सिंह के शासन काल से षिल्प के क्षेत्र&lt;br /&gt;
में भारी विकास हुआ है । जिसका साक्षात प्रमाण करौली दुर्ग के&lt;br /&gt;
रूप में है । 14वीं शताब्दी में निर्मित यह महल जहा साधारण&lt;br /&gt;
दिखार्इ देते है । वही इस किले का बाहरी हिस्सा जो 17वी शताब्दी&lt;br /&gt;
में बनाया गया था । षिल्प का उत्कृष्ट उदाहरण है । बैहरदह में&lt;br /&gt;
बौहरों की हवेली एंव करौली नगर के कर्इ कलापूर्ण एंव भवनों का&lt;br /&gt;
षिल्प दर्षन अपनी ओर आकर्षित कर लेता है । इनके अतिरिक्त मा&lt;br /&gt;
साहब का मनिदर, दीवान साहब की हवेली, पदम तालाब की&lt;br /&gt;
हवेलियां एंव रतियापुरा एंव कसारा की परेंडी विषेष षिल्पकला के नमूने है ।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''जिला एक दृषिट में'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भौगोलिक सिथति 26 डिग्री 3 से 26 डिग्री 49 उत्तरी अक्षांष&lt;br /&gt;
76 डिग्री 35 से 77 डिग्री 26 पूर्वी देषान्तर के मध्य&lt;br /&gt;
भौगोलिक क्षेत्रफल 5069.64 वर्ग किमी0 वन क्षेत्र के अन्तर्गत 1658.19 कि0मी0&lt;br /&gt;
समुद्रतल से ऊंचार्इ 400 से 600 मीटर&lt;br /&gt;
तापमान अधिकतम 49 डिग्री न्यूनतम 2 डिग्री&lt;br /&gt;
जिले की औसत वर्षा 668.86 मिलीमीटर 1 जनवरी 05 से आज तक की&lt;br /&gt;
वर्षा&lt;br /&gt;
555.23 मि.मी.&lt;br /&gt;
भौगोलिक क्षेत्रफल 505217 वन 172499&lt;br /&gt;
अकृषि योग्य भूमि 19361 स्थार्इ चरागाह 30818&lt;br /&gt;
भूमि उपयोग&lt;br /&gt;
(हैक्टर में) कृषि योग्य भूमि 185871&lt;br /&gt;
115076 हैक्टर&lt;br /&gt;
नहरो से 19761 तालाबों से 5471&lt;br /&gt;
नलकूपो से 29320 कुएं से 60470&lt;br /&gt;
शुद्ध ंिसंचित क्षेत्र&lt;br /&gt;
(हैक्टर में)&lt;br /&gt;
अन्य से 54&lt;br /&gt;
लोक सभा क्षेत्र करौली-धौलपुर&lt;br /&gt;
विधान सभा क्षेत्र 4 (करौली, हिण्डौन, टोडाभीम, सपोटरा)&lt;br /&gt;
उप खण्ड 6 (करौली, हिण्डौन, टोडाभीम, सपोटरा, मंडरायल, नादौती)&lt;br /&gt;
तहसील 6 (करौली, हिण्डौन, टोडाभीम, सपोटरा,मंडरायल, नादौती)&lt;br /&gt;
उप तहसील 2 (करनपुर, मासलपुर)&lt;br /&gt;
पंचायत समिति 5 (करौली, हिण्डौन, टोडाभीम, सपोटरा, नादौती)&lt;br /&gt;
नगरपालिका 3 (करौली, हिण्डौन, टोडाभीम)&lt;br /&gt;
पटवार मंडल 254&lt;br /&gt;
ग्राम पंचायत 223 ( 101 ग्रा.प. डांग क्षेत्र में )&lt;br /&gt;
राजस्व ग्राम 878&lt;br /&gt;
आवाद ग्राम 836&lt;br /&gt;
मुख्य व्यवसाय खनिज, बीड़ी उधोग&lt;br /&gt;
मुख्य नदियां भद्रावती, गम्भीर, बरखेड़ा, चम्बल&lt;br /&gt;
पषु गणना 8,14,427&lt;br /&gt;
कुल 1458459 पुरुष 784943&lt;br /&gt;
जनसंख्या महिला 673516&lt;br /&gt;
लिंग अनुपात&lt;br /&gt;
( प्रति 1000 पु. )&lt;br /&gt;
858&lt;br /&gt;
जनसंख्या घनत्व 264 प्रति वर्ग कि.मीकुल&lt;br /&gt;
67.34 प्रतिषत&lt;br /&gt;
साक्षरता महिला 49.18 प्रति. पुरुष 82.96 प्रतिकैलादेवी&lt;br /&gt;
मेला श्री महावीर जी मेला मदन मोहन जी का&lt;br /&gt;
मेला&lt;br /&gt;
मेले एवं त्यौहार&lt;br /&gt;
बाला जी का लक्खी&lt;br /&gt;
मेला&lt;br /&gt;
अंजनी माता का मेला&lt;br /&gt;
ऐतिहासिक स्थल तिमनगढ़ का किला मण्डरायल का किला&lt;br /&gt;
श्री महावीर जी कैलादेवी&lt;br /&gt;
पर्यटन स्थल&lt;br /&gt;
आध्यातिमक स्थल मदन मोहन जी का मंदिर मेहन्दीपुर बाला जी&lt;br /&gt;
पुलिस उपअधीक्षक वृत 4 पुलिस थाना 16&lt;br /&gt;
पुलिस चौकी 16&lt;br /&gt;
जेल 2&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:राजस्थान]][[Category:राजस्थान के ज़िले]]&lt;br /&gt;
[[Category:भारत के ज़िले]][[Category:गणराज्य संरचना कोश]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Pankaj pathak</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%8C%E0%A4%B2%E0%A5%80_%E0%A4%9C%E0%A4%BC%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A4%BE&amp;diff=280848</id>
		<title>करौली ज़िला</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%8C%E0%A4%B2%E0%A5%80_%E0%A4%9C%E0%A4%BC%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A4%BE&amp;diff=280848"/>
		<updated>2012-06-27T14:00:29Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Pankaj pathak: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा ज़िला&lt;br /&gt;
|[[चित्र:चित्र=http://karauli.nic.in/slide/collactract.JPG]]&lt;br /&gt;
|चित्र का नाम=करौली&lt;br /&gt;
|राज्य=-राजस्थान&lt;br /&gt;
|मुख्यालय=करौली&lt;br /&gt;
|स्थापना=-1 मार्च 1997&lt;br /&gt;
|जनसंख्या=-1458459&lt;br /&gt;
|क्षेत्रफल=-5070 वर्ग कि . मी .&lt;br /&gt;
|भौगोलिक निर्देशांक=-&lt;br /&gt;
|तहसील=-6&lt;br /&gt;
|मंडल=-&lt;br /&gt;
|खण्डों की सँख्या=-6&lt;br /&gt;
|आदिवासी=-&lt;br /&gt;
|विधान सभा क्षेत्र =-&lt;br /&gt;
|लोकसभा=-&lt;br /&gt;
|नगर पालिका=-3&lt;br /&gt;
|नगर निगम=-&lt;br /&gt;
|नगर=-&lt;br /&gt;
|क़स्बे=-&lt;br /&gt;
|कुल ग्राम=-881&lt;br /&gt;
|विद्युतीकृत ग्राम=-&lt;br /&gt;
|मुख्य ऐतिहासिक स्थल=-&lt;br /&gt;
|मुख्य पर्यटन स्थल=-कैला देवी,श्री महावीर जी&lt;br /&gt;
|वनक्षेत्र=-172459 हैक्‍ट&lt;br /&gt;
|बुआई क्षेत्र =-201819 हैक्‍ट&lt;br /&gt;
|सिंचित क्षेत्र =-&lt;br /&gt;
|नगरीय जनसंख्या=-&lt;br /&gt;
|ग्रामीण जनसंख्या=-&lt;br /&gt;
|राजस्व ग्राम=-&lt;br /&gt;
|आबादी रहित ग्राम=-&lt;br /&gt;
|आबाद ग्राम=-&lt;br /&gt;
|नगर पंचायत=-&lt;br /&gt;
|ग्राम पंचायत=-&lt;br /&gt;
|जनपद पंचायत=-&lt;br /&gt;
|सीमा=-&lt;br /&gt;
|अनुसूचित जाति=-&lt;br /&gt;
|अनुसूचित जनजाति=-&lt;br /&gt;
|प्रसिद्धि=-&lt;br /&gt;
|लिंग अनुपात=-&lt;br /&gt;
|साक्षरता=-&lt;br /&gt;
|स्त्री=-&lt;br /&gt;
|पुरुष=-&lt;br /&gt;
|ऊँचाई=-&lt;br /&gt;
|तापमान=-&lt;br /&gt;
|ग्रीष्म=-&lt;br /&gt;
|शरद=-&lt;br /&gt;
|वर्षा=-&lt;br /&gt;
|दूरभाष कोड=-&lt;br /&gt;
|वाहन पंजी.=-34&lt;br /&gt;
|संबंधित लेख=&lt;br /&gt;
|पाठ 1=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=&lt;br /&gt;
|पाठ 2=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 2=&lt;br /&gt;
|पाठ 3=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 3=&lt;br /&gt;
|अन्य जानकारी=वेब जाल-http://karauli.nic.in&lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
|अद्यतन=&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
{{ज़िला लेख}}&lt;br /&gt;
'''ऐतिहासिक पृष्ठभूमि'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|जिला करौली का क्षेत्र पुराने करौली राज्य तथा जयपुर राज्य की गंगापुर एवं हिण्डौन निजामतों में आता&lt;br /&gt;
है। कल्याणपुरी नामक इस क्षेत्र को वर्तमान स्वरूप प्रदान करने का श्रेय यदुवंसी राजाओं को जाता है। कार्ल&lt;br /&gt;
माक्र्स और कर्नल टाड ने अपनी पुस्तक में भी इसका वर्णन किया है। करौली राज्य अप्रैल 1949 को मत्स्य संघ में&lt;br /&gt;
समिमलित हुआ बाद में जयपुर राज्य के साथ मिलकर वृहत संयुक्त राज्य राजस्थान का भाग बना। राजस्थान&lt;br /&gt;
सरकार द्वारा 1 मार्च 1997 को सवार्इमाधोपुर जिले की पांच तहसीलों को मिलाकर एक अलग जिला करौली का&lt;br /&gt;
गठन किया। 15 जुलार्इ 1997 को करौली जिला निर्माण की अधिसूचना जारी करते हुए तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री&lt;br /&gt;
भैराेंसिंह शेखावत ने 19 जुलार्इ 1997 को इस जिले का उदधाटन&lt;br /&gt;
किया। 2011 की जनगणना के अनुसार जिले की जनसंख्या 1458459&lt;br /&gt;
तथा क्षेत्रफल 5043 वर्ग किलोमीटर है। राज्य की प्रमुख नदी चम्बल&lt;br /&gt;
इस जिले को मध्यप्रदेश राज्य से अलग करती है। इस जिले में&lt;br /&gt;
बहुसंख्या में पाये जाने वाले किले एवं गढ इसके पुराने गौरव की ओर&lt;br /&gt;
संकेत करते है। इनमें से तिमनगढ, उटगिरी, मण्डरायल के किलों का&lt;br /&gt;
देश के मध्यकालीन इतिहास&lt;br /&gt;
में प्रमुख स्थान रहा है।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तिमनगढ के किले पर यदुवंश&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
की प्रमुखता रही है। सन 1093 से 1159 में राजा तिमनपाल इस वंश का&lt;br /&gt;
शकितशाली राजा था, जिसने अपनी शकित को बढाकर तिमनगढ का&lt;br /&gt;
निर्माण कराया। ऐतिहासिक महापुरूषों के नाम की अनेक छतरियां इस&lt;br /&gt;
क्षेत्र में आज भी मौजूद है। तिमनगढ, करौली, हिण्डौन आदि स्थानों में&lt;br /&gt;
पाये गये प्रारभिभक तथा मध्ययुग के मूर्तिकला एवं वास्तुकला के नमूने&lt;br /&gt;
पुराने समय में भव्य मंदिरों का होना सि़द्ध करते है। राजा मोरध्वज की&lt;br /&gt;
नगरी गढमोरा करौली जिले में है, जहां आज भी पुराने अवशेष मौजूद है।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''भौगोलिक सिथति एवं जलवायु'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
करौली अपनी भौगोलिक विशिष्टताओं के लिए भी विख्यात है। यह जिला प्राकृतिक सौन्दर्य से भरपूर एवं&lt;br /&gt;
विध्याचंल व अरावली पर्वत मालाओं से आच्छादित है। जिले का कुछ भाग समतल एवं कुछ भाग उचा नीचा एवं&lt;br /&gt;
पहाडियों वाला है। करौली मण्डरायल उपखण्ड को पहाडी इलाका कहा जाता है जबकि बाकी क्षेत्र सामान्यता&lt;br /&gt;
समतल एवं मैदानी है। मैदानी क्षेत्र उपजाऊ है तथा यहा की मिटटी हल्की एवं रेतीली है। करौली एवं मण्डरायल&lt;br /&gt;
उपखण्ड का क्षेत्र, जो स्थानीय भाषा में डांग कहलाता है, पहाडियों एवं नदियों से भरा है।&lt;br /&gt;
जिले की ऊचार्इ समुन्द्र की सतह से 400 से 600 मीटर तक है। जिले के पशिचम में दौसा, दक्षिण पशिचम में&lt;br /&gt;
सवार्इमाधोपुर, उत्तर पूर्व में धौलपुर तथा पशिचम उत्तर में भरतपुर जिले की सीमाएं लगती है। यह जिला 26&lt;br /&gt;
डिग्री 3 सै. से 49 डिग्री उत्तर पशिचम अक्षाश तथा 76 डिग्री 35 से 77 डिग्री 26 पूर्व देशान्तरों के मध्य सिथत&lt;br /&gt;
है।&lt;br /&gt;
जिले में अल्पकालीन मौसम के अलवा शेष समय जलवायु शुष्क रहती है। सर्दी नवम्बर माह के प्रथम सप्ताह से&lt;br /&gt;
मार्च तक रहती है, जबकि गर्मी मार्च के अन्त से जून के तीसरे सप्ताह तक रहती है। जिले की सामान्य वार्षिक&lt;br /&gt;
वर्ष 668.86 मि.मी. है। जिले में औसतन 35 दिन वर्षा होती है। जिले का दैनिक अधिकतम तापमान का औसत मर्इ&lt;br /&gt;
माह में 49 डिग्री सेल्सीयस रहता है तथा न्यूनतम 2.00 डिग्री सैलिस. जनवरी में रहता है।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''प्रशासनिक व्यवस्था'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रशासनिक व्यवस्था के अन्तर्गत जिला कलेक्टर जिले का सर्वोच्च अधिकारी होने के साथ-साथ समस्त प्रशासनिक&lt;br /&gt;
एवं कानून व्यवस्थाओं के लिए उत्तरदायी है। जिले को छ: उपखण्डो करौली, हिण्डौन, सपोटरा, मण्डरायल,&lt;br /&gt;
टोडाभीम एवं नादौती में विभाजित किया हुआ है। इन उपखण्डों को 5 पंचायत समिति एवं 6 तहसीलों में&lt;br /&gt;
विभाजित कर क्षेत्राधिकारी निर्धारण किया हुआ है। जिलें में तीन नगरपालिका क्रमश: करौली, हिण्डौन एवं&lt;br /&gt;
टोडाभीम हंै। जिले के प्रशासनिक स्वरूप में जनभागीदारी के रूप में एक लोकसभा सदस्य तथा चार विधानसभा&lt;br /&gt;
सदस्य है।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''भूगर्भ एवं खनिज'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिला करौली एक तरफ से चम्बल तथा तीन तरफ से मैदानों से घिरा हुआ है। इसके मैदान&lt;br /&gt;
कैमबि्रयन-पूर्व की आग्नेय चêानों तथा उनकी तलछट से बनी चêानों के रूपान्तरण से बने है । अरावली की पूर्व&lt;br /&gt;
चêाने स्फटिक, अभ्रक, नार्इसिस्ट, मिग्मा टाइटस आदि की बनी हुर्इ है। महान विंध्य श्रेणी की चêाने जिनमें&lt;br /&gt;
कैमूल, रीवा, भाण्डेर प्रमुख है, विभिन्न प्रकार के सलेटी पत्थर, बालू पत्थर तथा चूना पत्थर से परिपूर्ण है। जिला&lt;br /&gt;
अनेक प्रकार के धातिवक एवं अधातिवक खनिजों से परिपूर्ण है। धातुओं में शीषा, तांबा, लोहा अयस्क आदि तथा&lt;br /&gt;
अधातुओं में चूना, पत्थर, चिकनी मिêी, सिलिका ,सैलरूडा आदि प्रमुख रूप से पाये जाते है।&lt;br /&gt;
इसके अलावा जिले में लेट्रार्इट, रेड आक्सार्इड, बैनेटोनार्इट, बेरार्इट, मैगनीज मिêी तथा काली मिêी पार्इ&lt;br /&gt;
जाती है । जिले में विभिन्न प्रकार की चêानों से मिलने वाले खनिज जैसे र्इमारत बनाने के पत्थर, सजावट के&lt;br /&gt;
पत्थर आदि प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है । भाण्डेर श्रेणी का गुलाबी पत्थर एवं सफेद निषानों वाला पत्थर करौली&lt;br /&gt;
एवं हिण्डौन क्षेत्र में काफी मात्रा में पाया जाता है । सीमेन्ट श्रेणी का चूना पत्थर एवं सिलिकासैण्ड सपोटरा&lt;br /&gt;
,नादौती क्षेत्र मे पाया जाता है। खनिज अभियन्ता करौली के अन्तर्गत इस जिलें की छ: तहसीलों के अलावा सवार्इ&lt;br /&gt;
माधोपुर जिले की दो तहसील गंगापुर एंव बामनवास आती है । इस क्षेत्र में मुख्यरूप से खनिज , सेण्ड स्टोन ,&lt;br /&gt;
मैषनरी स्टेान , सोप स्टोन , सिलिका सेण्ड इत्यादि का खनन होता है । इस खण्ड में कुल 260 खनन पटटे&lt;br /&gt;
स्वीकृत है । जिनका क्षेत्रफल 15568 हैक्टर है । जिसमें से करीब 13210 हैक्टर क्षेत्र में खनिज सेण्ड स्टोन का है&lt;br /&gt;
। उक्त 260 खनन पटटों से सिथर भाटक रू 11059000 प्राप्त होता है एंव अधिक अधिषुल्क रायल्टी कलेक्टषन&lt;br /&gt;
ठेंको को शामिल करते हुए वित्तीय वर्ष 2001-02 में कुल 381.06 लाख की आय विभाग को हुर्इ थी ।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''वनस्पति, वन सम्पदा'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिले मे पाये जाने वाले महत्वपूर्ण पेड़ नीम बबूल ,बेरी, धौंक, रोंझ,तेन्दु, सालर, खैर, सनथा, जामुन, आम, घनेरी,&lt;br /&gt;
बास, खेजडा, बरगद, पीपल आदि है। इस क्षेत्र में पार्इ जाने वाली प्रमुख जडी बूटिया ओधीझाडा, चीचड़ा, पोलर,&lt;br /&gt;
कालीलम्प, लपला, कंैच, गूगल आदि है। जिले में सिथत वनों से इमारती लकड़ी, र्इधन, लकड़ी का कोयला, पशुओं&lt;br /&gt;
के लिए चारा, घास-फूस, तेन्दूपत्ता, गोंद, धौक के पत्ते, शहद, मोम, जड़ी बूटिया फल, कत्था, कंरज तथा दूसरी&lt;br /&gt;
अन्य उपयोगी वस्तुएें प्राप्त होती है।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''जीव जन्तु'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिला करौेली वन्य प्राणियों के मामले में सम्पन्न है इसमें विभिन्न प्रकार के वन्य जीव पाये जाते है जिनमें तेन्दुएें,&lt;br /&gt;
जंगली कुत्ता, सांभर, नील गाय, चीतल, चिंकारा, जंगली सुअर, रीछ प्रमुख हैं। जिलें में कैलादेवी वन्य अभ्यारण्य&lt;br /&gt;
सन 1983 में स्थापित किया गया था, जिसको सन 1991 में रणथम्भौर रिजर्व के नजदीक मानते हुए संरक्षित वन&lt;br /&gt;
क्षेत्र एवं वन्य जीव अभ्यारण्य घोषित किया गया है जिसमे यदा कदा बाघ देखे जा सकते है। अभ्यारण्य का&lt;br /&gt;
क्षेत्रफल 674 वर्ग कि0मी0 है।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''फसल पद्धति:'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिले मे तीनों मौसमों में फसल की बुबार्इ का कार्य होता है खरीफ वर्षा पर आधारित है। जो जुलार्इ माह में&lt;br /&gt;
प्रारम्भ होता है । इसमें बोर्इ जाने वाली मुख्य फसलें बाजरा, मक्का, तिल, ज्वार, ग्वार आदि हैं। रबी की बुवार्इ&lt;br /&gt;
अक्टूबर से प्रारम्भ होती है, जिसमें मुख्यतया जौ, चना, गेहू , सरसों की बुवार्इ होती है। यहा के लोगो का मुख्य&lt;br /&gt;
व्यवसाय कृषि एवं खनन कार्य है। भूमिगत पानी की कमी एवं सिंचार्इ सुविधा की कमी के कारण कृषि मुख्यतया&lt;br /&gt;
वर्षा पर निर्भर है। कृषि विपणन के लिए जिले में हिण्डौन में कृषि उपज मण्डी एवं करौली, टोडाभीम में गौण मंडी&lt;br /&gt;
हैं।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''हस्तकला'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
करौली की हस्तकला में प्रमुख स्थान लाख की चूडियों का है लगभग एक लाख रूपये की चूडियों का&lt;br /&gt;
प्रतिवर्ष अन्य प्रांतों में निर्यात किया जाता है। चूडियों बनाने का काराबार जिले में हिण्डौन एवं करौली शहरों में&lt;br /&gt;
स्थानीय लखेरा एवं मुसिलम सम्प्रदाय के लोगों द्वारा किया जाता है। इस कार्य में करीब पांच सौ लोगों को&lt;br /&gt;
रोजगार मिला हुआ है। इसके अलावा करौली जिले मेें लकडी के खिलौने, घरेलू उपयोग की सामगि्रयों में&lt;br /&gt;
चकला-बेलन, दही बिलौने की रर्इ, लकके चम्मच एवं चारपार्इ व दीवान आदि भी बनाएं जाते हैं। वर्तमान में पत्थर&lt;br /&gt;
तराषी कर मूर्तियों एवं जाली झरोखे बनाने का कार्य भी रीको क्षेत्र हिण्डौन व करौली में किये जाने लगा है।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''सामाजिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियां'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिले मे लोगों के सांस्कृतिक, धार्मिक एवं सामाजिक जीवन में मेले एवं त्यौहारों का महत्वपूर्ण स्थान है। अधिकांष&lt;br /&gt;
मौसमी एवं धार्मिक महत्व के है। इन मेलों का व्यापारिक, पर्यटन एवं सांस्कृतिक दृषिट से एकता के लिए महत्वपूर्ण&lt;br /&gt;
स्थान हैं। जिले के मुख्य मेले कैलादेवी मेला, महावीरजी, मेहन्दीपुर बालाजी एवं मदनमोहनजी के है, जिनमें लाखों&lt;br /&gt;
की संख्या में दर्षनार्थी आते है। राज्य के अन्य हिस्सों की तरह इस जिले में भी हिन्दुओं के रक्षाबन्धन, होली,&lt;br /&gt;
दीपावली, जन्माष्टमी, दषहरा, गणगौर तथा मुसलमानों के इदुलजुहा, रमजान, इदुलफितर त्योहार प्रमुख हैं।&lt;br /&gt;
ऐतिहासिक एवं पुरातातिवक स्थल जिले में निम्नलिखित विषेष महत्व के स्थान है&lt;br /&gt;
वर्तमान जिला मुख्यालय करौली राजपूतानें की प्राचीन रियासतों में से एक प्रमुख रियासत थी। यहां के षासकों&lt;br /&gt;
का सन 1100 से लेकर सन 1947 तक का गौरवषाली इतिहास रहा है। रियासत के यदुवंषी राजाओं ने अपनी&lt;br /&gt;
गरिमा की सुरक्षा, प्रजा के संरक्षण व प्राकृतिक आपदाओं के संधारण हेतु अनेक महल, किले व गढियों का निर्माण&lt;br /&gt;
कराया। इन महलों किलों व गढियों में वास्तु विषेषज्ञता, स्थापत्य कला और चित्रकारी के दुर्लभ नमूने देखने को&lt;br /&gt;
मिलते है। एक प्राचीन राज्य होने के कारण करौली में ऐतिहासिक, धार्मिक व पर्यटक महत्व के स्थानों की बहुलता&lt;br /&gt;
के साथ क्षेत्र में पुरा वैभव विखरा पडा है।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''करौली शहर'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
करौली जिला मुख्यालय पूर्व में करौली राज्य की राजधानी थी। करौली कस्बे की स्थापना 1348 में यादववंश के&lt;br /&gt;
राजा अजर्ुनपाल ने की थी। इसका मूलत: नाम कल्याणपुरी था जो कल्याणजी के मनिदर के कारण प्रसिद्व था।&lt;br /&gt;
इसको भद्रावती नदी के किनारे होने के कारण भद्रावती नगरी भी कहा जाता था। करौली कस्बा चारों तरफ से&lt;br /&gt;
लाल स्टोन से निर्मित है, जिसकी परिधि 3.7 कि0मी0 है जिसमें 6 दरवाजे 12 खिडकिया है। महाराज गोपालसिंह&lt;br /&gt;
के समय का एक खूबसूरत महल है जिसके रंगमहल एवं दीवाने आम को शीशाओं से बडी खूबसूरती से बनाया&lt;br /&gt;
गया है। इस कस्बे में काफी संख्या में मनिदर है जिसमें प्रमुख मनिदर मदनमोहनजी का है। यह मनिदर सेन्दर&lt;br /&gt;
बरामदे एवं सुसजिजत पेनिटंग से निर्मित है तथा महाराजा गोपालसिंह जी के द्वारा जयपुर से लायी गयी काले&lt;br /&gt;
मार्बल से निर्मित मदनमोहनजी की मूर्ति है। प्रत्येक अमावस्या को मेला लगता है, जिसमें हजारो की संख्य में लोग&lt;br /&gt;
दर्शनार्थ आते है करौली मे जैन मनिदर, जामा मसिजद, र्इदगाह अंजनी माता मनिदर,गोविन्द देव जी मनिदर आदि&lt;br /&gt;
भी धार्मिक आस्था के स्थान है।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''हिण्डौन सिटी:'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हिण्डौन नगर करौली जिले की सबसे बडी नगरपालिका है। इस पौराणिक एवं ऐतिहासिक नगर की स्थापना&lt;br /&gt;
किसने की इसके सम्बन्ध में इतिहासकार एकमत नही हैं। सम्भवत: यह भूमि हिरण्यकश्यप व भक्त प्रहलाद की&lt;br /&gt;
कर्म भूमि रही है। यहां पर आज भी नृसिंह मनिदर, प्रहलाद कुण्ड, हिरण्यकश्यप के महल, बावडि़यों के अवशेष हैं।&lt;br /&gt;
यहां से कुछ दूरी पर कुण्डेवा, जगर, दानघाटी पौराणिक स्थान है। जनश्रुतियो के अनुसार महाभारत कालीन&lt;br /&gt;
हिडिम्बा नामक राक्षसी की कर्मस्थली भी यही क्षेत्रा रहा था। हिण्डौन वर्तमान में जिले का प्रमुख औधोगिक&lt;br /&gt;
वाणिजियक नगर है यहां से उत्तर-मध्य रेलवे का दिल्ली मुम्बर्इ मार्ग गुजरता है साथ ही राष्ट्रीय राजमार्ग 11 से&lt;br /&gt;
दूरी 41 कि0मी0 है। यहां पर पत्थर तरासी, स्लेट उधोग का करोबार बडे स्तर पर किया जाता है&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''तिमनगढ़ का किला'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यह किला जिला मुख्यालय करौली से 42 किलोमीटर दूर&lt;br /&gt;
मासलपुर कस्बे के पास सिथत है। यहां बेजोड़ पुरातत्व संबंधी मूर्तिया&lt;br /&gt;
हैं। प्रचलित मान्यता के अनुसार संवत 1244 में यदुवंशी शासक&lt;br /&gt;
तिमनपाल ने इस किले का निर्माण कराया थां। कुछ इतिहासकार इस&lt;br /&gt;
किले को 1000 वर्ष से अधिक प्राचीन बताते है किले के अन्दर कर्इ&lt;br /&gt;
शिलालेखाें, उपलब्ध प्राचीन कृतियों से पता चलता है कि इसे किसी&lt;br /&gt;
शिल्पी व कलाप्रेमी ने बसाया था, जो बाद में शासकों के कब्जे मे&lt;br /&gt;
चला गया। किले के चारों ओर पांच फीट मोटा तथा करीब 30 फीट&lt;br /&gt;
ऊंचा परकोटा स्थापत्य कला का अनूठा नमूना है। किले के भीतर बाजार, फर्श, बगीची, मनिदर, कुंए कि अवशेष&lt;br /&gt;
आज भी मौजूद हैं। पूरा किला अपने अन्दर एक पूरा नगर समेटे हुए हैं। प्रवेश द्वार पर अक्सर ब्रहमा, गणेश की&lt;br /&gt;
मूर्तिया नजर आती है, लेकिन यहा प्रेत व राक्षसों के चित्र देखने को मिलते है। किले मे जगह -जगह खणिडत&lt;br /&gt;
मूर्तियाें को देखने से ऐसा लगता है कि यहा मूर्तियों की बहुत बडी मण्डी थी। दुर्ग में छोटे - छोटे कमरे भी हैं,&lt;br /&gt;
जो संभवत: स्नानघर के काम आते होंगे।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''मण्डरायल का किला'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
करौली शहर से 40 किलो मीटर दूर दक्षिण पूर्व में पहाडों के मध्य एक आयताकार पहाडी के नीचे बसी एक&lt;br /&gt;
मध्यकालीन बस्ती है, जो दो प्रान्तों को विभक्त करते&lt;br /&gt;
हुए चम्बल नदीं के किनारे मण्डरायल नाम से जानी&lt;br /&gt;
जाती है । एतिहासिक दृषिट से एक गजिटयर के&lt;br /&gt;
अनुसार यह दुर्ग यादवों के इस क्षेत्र में प्रवेष से पूर्व&lt;br /&gt;
का है । करौली रियासत की विलेज डायरेक्ट्री में&lt;br /&gt;
इसके निर्माणकर्ता के रूप में बीजाबहादुर को दर्षाया&lt;br /&gt;
गया है, जिसकी कौम एंव काल का कोर्इ जिक्र नही&lt;br /&gt;
है । किदवतियों के अनुसार पूर्व में इस दुर्ग पर&lt;br /&gt;
मियां मकन का आधिपत्य होने के कारण उसी के&lt;br /&gt;
नाम से कालान्तर में अपभ्रषं होकर दुर्ग का नाम&lt;br /&gt;
मण्डरायल हो गया । यहां मुख्य दरवाजें के रूप में&lt;br /&gt;
दो गोलाकार गुबंद है । दूसरा दरवाजा सूर्यपोल नाम हैं, जो रानीपुरा इलाके की तरफ उतरता है। इस दरवाजें&lt;br /&gt;
की खासियत है कि पौर से प्रात: से साय तक सूर्य का प्रकाष रहता है । इसके अन्दर एक सुरक्षित टांका ओर&lt;br /&gt;
बाहर दो तालाब है । तालाब के किनारे त्रिदेव भगवान के मनिदर ओर बारहदारी है । पूर्व में इस किले की दीवारों&lt;br /&gt;
पर उर्दु में कुछ घटनायें लिपिबद्व थी , जो अब नष्ट हो चुकी है ।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''उंट गिरि दुर्ग'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
15 वी षताब्दी में स्थापित यह दुर्ग करणपुर के कल्याण पुरा गांव की ऊंची पर्वत श्रृंखला की सुरंगनुमा पहाडी पर&lt;br /&gt;
सिथत है। लगभग 4 कि0मी0 क्षेत्र में फेले इस दुर्ग में 100 फुट की ऊंचार्इ से नीचे षिवलिंगों पर पानी गिरता है।&lt;br /&gt;
इस पानी में बडी मात्रा में षिलाजीत मिलता है। यह दुर्ग भी सामरिक दृषिट से महत्वपूर्ण रहा है। 1506-07 र्इ. में&lt;br /&gt;
सिकन्दर लोदी ने इस पर आक्रमण किया था उस समय इसे ग्वालियर किले की कुंजी कहा जाता था। अंतिम&lt;br /&gt;
मुगल सल्तनत तक इस किले पर यदुवंषियों का ही आधिपत्य रहा।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''देव गिरि'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उंट गिरि के पूर्व में चम्बल नदी के किनारे सिथत यह किला खण्डहर होते हुए भी अतीत की अनेक घटनाओं का&lt;br /&gt;
साक्षी है। परकोटे के नाम पर आज कुछ भी नही मिलता साथ ही अन्दर के सभी आवासीय भागों को नष्ट किया&lt;br /&gt;
जा चुका है। सन 1506-07 र्इ. में सिकन्दर लोदी के आक्रमण के समय इस किले को सबसे अधिक नुकसान&lt;br /&gt;
पहुचाया गया। वर्तमान में यहां एक बावडी, जर्जर होता षिलालेख तथा कुछ हवेलियों के अवषेष है।&lt;br /&gt;
'''बहादुरपुर का किला'''&lt;br /&gt;
करौली जिला मुख्यालय से 15 किलोमीटर दूर मण्डरायल मार्ग पर ससेड गांव के पास जंगल और सुनसान&lt;br /&gt;
वातावरण में अटल योद्वा सा खडा बहादुरपुर का किला मुगलकालीन स्थापत्य कला का बेजोड नमूना है। दो&lt;br /&gt;
मंजिला नृप गोपाल भवन, सहेली की बाबडी कलात्मक झरोखे 18 फीट लम्बी चीरियों की आमखास कचहरी,&lt;br /&gt;
पंचवीर, मगधराय की छतरी दर्षनीय है। यदुवंषी राजा तिमनपाल के पुत्र नागराज द्वारा निर्मित इस किले का&lt;br /&gt;
विस्तार सन 1566 से 1644 तक होता रहा। जयपुर के राजा सवार्इ जयंिसह ने इस किले में तीन माह तक प्रवास&lt;br /&gt;
किया था।&lt;br /&gt;
'''शहर किला एवं छतरी'''&lt;br /&gt;
नादौती तहसील के ग्राम शहर में यह किला उंची पहाडी पर बना हुआ है तथा आज भी सुरक्षित एवं आबाद है।&lt;br /&gt;
यहा के ठिकानेदार आमेर के राजा पृथ्वीराज के पुत्र पच्चाण के वंषज है। इसमें देवी का प्राचीन मंदिर है।&lt;br /&gt;
'''फतेहपुर किला'''&lt;br /&gt;
करौली जिला मुख्यालय से लगभग 30 कि.मी. दूर कंचनपुर जाने वाले मार्ग पर सिथत यह किला यदु शासकों के&lt;br /&gt;
एक बडे जागीरदार हरनगर के ठाकुर घासीराम द्वारा 1702 र्इ. में निर्मित किया गया। यह किला सुरक्षित अवस्था&lt;br /&gt;
में है।&lt;br /&gt;
'''किला नारौली डांग'''&lt;br /&gt;
सपोटरा उपखण्ड मुख्यालय से .... दूरी पर सिथत यह किला पहाडी के उपर बना हुआ है। तत्कालीन करौली एवं&lt;br /&gt;
जयपुर रियासतों की सीमा पर सिथत नारौली डांग गांव में स्थानीय जागीरदार द्वारा इसका निर्माण कराया गया&lt;br /&gt;
था।&lt;br /&gt;
'''भवरविलास पैलेस'''&lt;br /&gt;
करौली के पूर्व शासक रहे राजा भंवर पाल के नाम से पूर्व नरेषों का यह&lt;br /&gt;
आवास उत्कृष्ट वास्तु एवं षिल्प समेटे हुए नगर के दक्षिण में मंडरायल&lt;br /&gt;
रोड पर सिथत है। वर्तमान में इसे होटल का रूप दिया हुआ है।&lt;br /&gt;
'''हरसुख विलास'''&lt;br /&gt;
करौली में आने वाला प्रत्येक अतिथि हरसुख विलास की वास्तु एवं षिल्प&lt;br /&gt;
से प्रभावित हुए बिना नही रह सकता।&lt;br /&gt;
'''रामठरा किला'''&lt;br /&gt;
भारत के प्रमुख वन्य जीव अम्भारण्य रगथम्भोर एवं घना पक्षी बिहार भरतपुर के बीच करौली जिले के सपोटरा&lt;br /&gt;
उपखण्ड में सिथत रामठरा फोर्ट कैलादेवी राष्ट्रीय अम्भारण्य से मात्र 15 किलोमीटर दूर है।&lt;br /&gt;
'''सुख विलास बाग एवं शाही कुण्ड'''&lt;br /&gt;
जिला मुख्यालय सिथत भ्रदावती नदी के किनारे एक सुन्दर महलनुमा चारदिवारी के अन्दर बाग लगाया गया था&lt;br /&gt;
जिसका उपयोग रानिया अपने आमोद-प्रमोद के लिए करती थी इसे सुख विलास बाग कहते है। शहर के पर&lt;br /&gt;
कोटे के बहार सुखविलास के पास भव्य शाही कुण्ड बना हुआ है तीन मंजिला बावडीनुमा इस कुण्ड की बनावट&lt;br /&gt;
अद्वितीय है इसमें प्रत्येक मंजिल पर बरामदे एवं उतरने हेतू चारो तरफ सिढियां बनी है। रियासत काल में इस&lt;br /&gt;
कुण्ड का उपयोग शहर में पेयजल सप्लार्इ के लिए किया जाता था।&lt;br /&gt;
'''दरगाह कबीरषाह'''&lt;br /&gt;
करौली पषिचम द्वार पर वजीरपुर गेट एवं सायनाथ खिडकियां के मध्य आज से लगभग 120 वर्ष पूर्व बनार्इ गर्इ&lt;br /&gt;
एक सूफी संत की दरगाह उत्कृष्ट षिल्प का नमूना है। इसकी खासियत यह है कि इसमें दरवाजे भी पत्थर के&lt;br /&gt;
बनाये हुए है। पत्थर पर की गर्इ नक्कासी बरबस ही दर्षको का मन मोह लेती है।&lt;br /&gt;
'''रावल पैलेस (राजमहल)'''&lt;br /&gt;
तेरहवी षताब्दी में स्थापित राजमहल (रावल पैलेस) लाल व सफेद पत्थर के षिल्प का बेजोड नमूना है। नक्कषी&lt;br /&gt;
व कलात्मक चितराम से सुसजिजत विषाल द्वार, जालीदार झरोखे, तोपखाना, नाहर कटहरा, सुर्री गुर्ज, गोपालसिंह&lt;br /&gt;
अखाडा, भवर बैंक, नजर बगीची, मानिक महल, फब्बारा कण्ड, बारह दरी, गोपाल मनिदर, दीवान ए आम, फौज&lt;br /&gt;
कचहरी, किरकिरी खाना, ज्ञान बगला, षीष महल, मोतीमहल, हरविलास, रंगलाल, गेंदघर, टेडा कुआ, जनानी&lt;br /&gt;
डयौढी आदि कुषल स्थापत्य के साथ-साथ यहां की सभ्यता व संस्कृति के परिचायक है।&lt;br /&gt;
'''अन्य'''&lt;br /&gt;
करौली में महाराजा गोपालसिंहजी की छतरी, रणगमा तालाब, सुख विलास कुण्ड, एवं षिकारगंज आदि करौली के&lt;br /&gt;
पुरा वैभव प्रतीक है। साथ ही जिले के सपोटरा में नारौली डांग का किला, गढमोरा (नादौती) में राजा मोरध्वज का&lt;br /&gt;
महल व मनिदर, षहर सोप का ऊची पहाडी पर निर्मित किला, हिण्डौन की पुरानी कचहरी व प्रहलाद कुण्ड जैसे&lt;br /&gt;
दर्षनीय ऐतिहासिक स्थल हमारी संस्कृति की पहचान है।&lt;br /&gt;
'''धार्मिक स्थल&lt;br /&gt;
महावीर जी'''&lt;br /&gt;
दिगम्बर जैन संप्रदाय का भारत का एक प्रमुख स्थान है। यहा पर भगवान महावीर की&lt;br /&gt;
400 वर्ष पुरानी मूर्ति है। महावीर जी में निर्मित मनिदर आधुनिक एवं प्राचीन शिल्पकला&lt;br /&gt;
का बेजोड़ नमूना है। मनिदर को एक बहुत बडे प्लेटफार्म पर सफेद मार्बल से बनाया&lt;br /&gt;
गया है। इसकी छतरी दूर से दिखायी देती है, जो लाल बलुआ पत्थर की है। मनिदर&lt;br /&gt;
पर नक्काशी का कार्य भी अति सुन्दर है। मनिदर के ठीक सामने मान स्तम्भ बना हुआ&lt;br /&gt;
है। जिसमें जैन तीर्थकर की प्रतिमा है। मनिदर के पीछ कटला एवं चरण मनिदर है,&lt;br /&gt;
जहां पर दर्शनार्थी श्रद्वापूर्वक दर्शन को जाते है। प्रतिवर्ष चैत्र सुदी 11 से बैशाख सुदी&lt;br /&gt;
2 तक (मार्च-अप्रैल) मेला लगता है, जिसमें लाखों लोग विभिन्न क्षेत्रों से यहां आते हैं।&lt;br /&gt;
मेले के अन्त में रथया़त्रा का आयोजन किया जाता है।&lt;br /&gt;
'''कैलादेवी मनिदर'''&lt;br /&gt;
करौली से 24 कि0मी0 दूर यह प्रसिद्व धार्मिक स्थल है। जहां प्रतिवर्ष&lt;br /&gt;
मार्च - अपै्रल माह मे एक बहुत बडा मेला लगता है। इस मेले में&lt;br /&gt;
राजस्थान के अलावा दिल्ली, हरियाणा, मध्यप्रदेष, उत्तर प्रदेष के&lt;br /&gt;
तीर्थ यात्री आते है। मुख्य मनिदर संगमरमर से बना हुआ है जिसमें&lt;br /&gt;
कैला (महालक्ष्मी) एवं चामुण्डा देवी की प्रतिमाऐं हैं। कैलादेवी की&lt;br /&gt;
आठ भुजाऐं एवं सिंह पर सवारी करते हुए बताया है। यहां क्षेत्रीय&lt;br /&gt;
लांगुरियां के गीत विषेष रूप से गाये जाते है। जिसमें लागुरियां के&lt;br /&gt;
माध्यम से कैलादेवी को अपनी भकित-भाव प्रदर्षित करते है।&lt;br /&gt;
'''बालाजी'''&lt;br /&gt;
यह एक छोटा सा गांव टोडाभीम तहसील से 5 कि0मी0 दूर है तथा जयपुर-आगरा राष्ट्रीय राज्यमार्ग से जुडा&lt;br /&gt;
हुआ है। हिन्दुओ की आस्था का महत्वपूर्ण स्थान है। यहां पर पहाडी की तलहटी मे निर्मित हनुमानजी का बहुत&lt;br /&gt;
पुराना मनिदर है। लोग काफी दूर-दूर से यहां आते है। ऐसी मान्यता है कि हिस्टीरिया एवं डिलेरियम के रोगी&lt;br /&gt;
दर्षन लाभ से स्वस्थ होकर लोैटते है। होली एवं दीपावली के त्यौहार पर काफी संख्या मे लोग यहां दर्षन के&lt;br /&gt;
लिए आते है।&lt;br /&gt;
'''मदनमोहन जी'''&lt;br /&gt;
श्री मदन मोहन देवालय मुख्यालय के आंचल में महलों के पास वृहद&lt;br /&gt;
भव्य परिसर के धेरे मे सिथत है जहां भगवान राधा मदनमोहन के साथ&lt;br /&gt;
श्रीगोपालजी की मनमोहनी प्रतिमाएं प्रतिषिठत है। जिनकी सेवा गौड&lt;br /&gt;
सम्प्रदायी गुसार्इयों के माध्यम से बहुत सुन्दर तरीकों से होती आ रही&lt;br /&gt;
है। मंगला से शयन तक हजारो भक्तों का समुह प्रत्येक झांकी पर&lt;br /&gt;
उपसिथत रहता है। मदनमोहनजी की कुल आठ झांकी सकल मनोरथ&lt;br /&gt;
पूर्ण करने वाली हैं । मूलरूप से इन दोनो प्रतिमाओं को उडीसा और&lt;br /&gt;
वृदावन में प्रतिषिठत कराया गया था। कालान्तर में यही प्रतिमाएं&lt;br /&gt;
विभिन्न श्रोतों के माध्यम से आज इस पावन नगरी में भक्तों के वास्ते प्रेरणा की श्रोत बनी हुर्इ है।&lt;br /&gt;
'''शिल्प एवं उधोग'''&lt;br /&gt;
करौली जिलें में षिल्प के उत्कृष्ट नमूने पाये जाते है । वास्तुषिल्प&lt;br /&gt;
के रूप में महाराजा गोपाल सिंह के शासन काल से षिल्प के क्षेत्र&lt;br /&gt;
में भारी विकास हुआ है । जिसका साक्षात प्रमाण करौली दुर्ग के&lt;br /&gt;
रूप में है । 14वीं शताब्दी में निर्मित यह महल जहा साधारण&lt;br /&gt;
दिखार्इ देते है । वही इस किले का बाहरी हिस्सा जो 17वी शताब्दी&lt;br /&gt;
में बनाया गया था । षिल्प का उत्कृष्ट उदाहरण है । बैहरदह में&lt;br /&gt;
बौहरों की हवेली एंव करौली नगर के कर्इ कलापूर्ण एंव भवनों का&lt;br /&gt;
षिल्प दर्षन अपनी ओर आकर्षित कर लेता है । इनके अतिरिक्त मा&lt;br /&gt;
साहब का मनिदर, दीवान साहब की हवेली, पदम तालाब की&lt;br /&gt;
हवेलियां एंव रतियापुरा एंव कसारा की परेंडी विषेष षिल्पकला के नमूने है ।&lt;br /&gt;
'''जिला एक दृषिट में'''&lt;br /&gt;
भौगोलिक सिथति 26 डिग्री 3 से 26 डिग्री 49 उत्तरी अक्षांष&lt;br /&gt;
76 डिग्री 35 से 77 डिग्री 26 पूर्वी देषान्तर के मध्य&lt;br /&gt;
भौगोलिक क्षेत्रफल 5069.64 वर्ग किमी0 वन क्षेत्र के अन्तर्गत 1658.19 कि0मी0&lt;br /&gt;
समुद्रतल से ऊंचार्इ 400 से 600 मीटर&lt;br /&gt;
तापमान अधिकतम 49 डिग्री न्यूनतम 2 डिग्री&lt;br /&gt;
जिले की औसत वर्षा 668.86 मिलीमीटर 1 जनवरी 05 से आज तक की&lt;br /&gt;
वर्षा&lt;br /&gt;
555.23 मि.मी.&lt;br /&gt;
भौगोलिक क्षेत्रफल 505217 वन 172499&lt;br /&gt;
अकृषि योग्य भूमि 19361 स्थार्इ चरागाह 30818&lt;br /&gt;
भूमि उपयोग&lt;br /&gt;
(हैक्टर में) कृषि योग्य भूमि 185871&lt;br /&gt;
115076 हैक्टर&lt;br /&gt;
नहरो से 19761 तालाबों से 5471&lt;br /&gt;
नलकूपो से 29320 कुएं से 60470&lt;br /&gt;
शुद्ध ंिसंचित क्षेत्र&lt;br /&gt;
(हैक्टर में)&lt;br /&gt;
अन्य से 54&lt;br /&gt;
लोक सभा क्षेत्र करौली-धौलपुर&lt;br /&gt;
विधान सभा क्षेत्र 4 (करौली, हिण्डौन, टोडाभीम, सपोटरा)&lt;br /&gt;
उप खण्ड 6 (करौली, हिण्डौन, टोडाभीम, सपोटरा, मंडरायल, नादौती)&lt;br /&gt;
तहसील 6 (करौली, हिण्डौन, टोडाभीम, सपोटरा,मंडरायल, नादौती)&lt;br /&gt;
उप तहसील 2 (करनपुर, मासलपुर)&lt;br /&gt;
पंचायत समिति 5 (करौली, हिण्डौन, टोडाभीम, सपोटरा, नादौती)&lt;br /&gt;
नगरपालिका 3 (करौली, हिण्डौन, टोडाभीम)&lt;br /&gt;
पटवार मंडल 254&lt;br /&gt;
ग्राम पंचायत 223 ( 101 ग्रा.प. डांग क्षेत्र में )&lt;br /&gt;
राजस्व ग्राम 878&lt;br /&gt;
आवाद ग्राम 836&lt;br /&gt;
मुख्य व्यवसाय खनिज, बीड़ी उधोग&lt;br /&gt;
मुख्य नदियां भद्रावती, गम्भीर, बरखेड़ा, चम्बल&lt;br /&gt;
पषु गणना 8,14,427&lt;br /&gt;
कुल 1458459 पुरुष 784943&lt;br /&gt;
जनसंख्या महिला 673516&lt;br /&gt;
लिंग अनुपात&lt;br /&gt;
( प्रति 1000 पु. )&lt;br /&gt;
858&lt;br /&gt;
जनसंख्या घनत्व 264 प्रति वर्ग कि.मीकुल&lt;br /&gt;
67.34 प्रतिषत&lt;br /&gt;
साक्षरता महिला 49.18 प्रति. पुरुष 82.96 प्रतिकैलादेवी&lt;br /&gt;
मेला श्री महावीर जी मेला मदन मोहन जी का&lt;br /&gt;
मेला&lt;br /&gt;
मेले एवं त्यौहार&lt;br /&gt;
बाला जी का लक्खी&lt;br /&gt;
मेला&lt;br /&gt;
अंजनी माता का मेला&lt;br /&gt;
ऐतिहासिक स्थल तिमनगढ़ का किला मण्डरायल का किला&lt;br /&gt;
श्री महावीर जी कैलादेवी&lt;br /&gt;
पर्यटन स्थल&lt;br /&gt;
आध्यातिमक स्थल मदन मोहन जी का मंदिर मेहन्दीपुर बाला जी&lt;br /&gt;
पुलिस उपअधीक्षक वृत 4 पुलिस थाना 16&lt;br /&gt;
पुलिस चौकी 16&lt;br /&gt;
जेल 2&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:राजस्थान]][[Category:राजस्थान के ज़िले]]&lt;br /&gt;
[[Category:भारत के ज़िले]][[Category:गणराज्य संरचना कोश]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Pankaj pathak</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%8C%E0%A4%B2%E0%A5%80_%E0%A4%9C%E0%A4%BC%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A4%BE&amp;diff=280847</id>
		<title>करौली ज़िला</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%8C%E0%A4%B2%E0%A5%80_%E0%A4%9C%E0%A4%BC%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A4%BE&amp;diff=280847"/>
		<updated>2012-06-27T13:53:00Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Pankaj pathak: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा ज़िला&lt;br /&gt;
|[[चित्र:चित्र=http://karauli.nic.in/slide/collactract.JPG]]&lt;br /&gt;
|चित्र का नाम=करौली&lt;br /&gt;
|राज्य=-राजस्थान&lt;br /&gt;
|मुख्यालय=करौली&lt;br /&gt;
|स्थापना=-1 मार्च 1997&lt;br /&gt;
|जनसंख्या=-1458459&lt;br /&gt;
|क्षेत्रफल=-5070 वर्ग कि . मी .&lt;br /&gt;
|भौगोलिक निर्देशांक=-&lt;br /&gt;
|तहसील=-6&lt;br /&gt;
|मंडल=-&lt;br /&gt;
|खण्डों की सँख्या=-6&lt;br /&gt;
|आदिवासी=-&lt;br /&gt;
|विधान सभा क्षेत्र =-&lt;br /&gt;
|लोकसभा=-&lt;br /&gt;
|नगर पालिका=-3&lt;br /&gt;
|नगर निगम=-&lt;br /&gt;
|नगर=-&lt;br /&gt;
|क़स्बे=-&lt;br /&gt;
|कुल ग्राम=-881&lt;br /&gt;
|विद्युतीकृत ग्राम=-&lt;br /&gt;
|मुख्य ऐतिहासिक स्थल=-&lt;br /&gt;
|मुख्य पर्यटन स्थल=-कैला देवी,श्री महावीर जी&lt;br /&gt;
|वनक्षेत्र=-172459 हैक्‍ट&lt;br /&gt;
|बुआई क्षेत्र =-201819 हैक्‍ट&lt;br /&gt;
|सिंचित क्षेत्र =-&lt;br /&gt;
|नगरीय जनसंख्या=-&lt;br /&gt;
|ग्रामीण जनसंख्या=-&lt;br /&gt;
|राजस्व ग्राम=-&lt;br /&gt;
|आबादी रहित ग्राम=-&lt;br /&gt;
|आबाद ग्राम=-&lt;br /&gt;
|नगर पंचायत=-&lt;br /&gt;
|ग्राम पंचायत=-&lt;br /&gt;
|जनपद पंचायत=-&lt;br /&gt;
|सीमा=-&lt;br /&gt;
|अनुसूचित जाति=-&lt;br /&gt;
|अनुसूचित जनजाति=-&lt;br /&gt;
|प्रसिद्धि=-&lt;br /&gt;
|लिंग अनुपात=-&lt;br /&gt;
|साक्षरता=-&lt;br /&gt;
|स्त्री=-&lt;br /&gt;
|पुरुष=-&lt;br /&gt;
|ऊँचाई=-&lt;br /&gt;
|तापमान=-&lt;br /&gt;
|ग्रीष्म=-&lt;br /&gt;
|शरद=-&lt;br /&gt;
|वर्षा=-&lt;br /&gt;
|दूरभाष कोड=-&lt;br /&gt;
|वाहन पंजी.=-34&lt;br /&gt;
|संबंधित लेख=&lt;br /&gt;
|पाठ 1=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=&lt;br /&gt;
|पाठ 2=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 2=&lt;br /&gt;
|पाठ 3=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 3=&lt;br /&gt;
|अन्य जानकारी=वेब जाल-http://karauli.nic.in&lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
|अद्यतन=&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
{{ज़िला लेख}}&lt;br /&gt;
'''ऐतिहासिक पृष्ठभूमि'''&lt;br /&gt;
|जिला करौली का क्षेत्र पुराने करौली राज्य तथा जयपुर राज्य की गंगापुर एवं हिण्डौन निजामतों में आता&lt;br /&gt;
है। कल्याणपुरी नामक इस क्षेत्र को वर्तमान स्वरूप प्रदान करने का श्रेय यदुवंसी राजाओं को जाता है। कार्ल&lt;br /&gt;
माक्र्स और कर्नल टाड ने अपनी पुस्तक में भी इसका वर्णन किया है। करौली राज्य अप्रैल 1949 को मत्स्य संघ में&lt;br /&gt;
समिमलित हुआ बाद में जयपुर राज्य के साथ मिलकर वृहत संयुक्त राज्य राजस्थान का भाग बना। राजस्थान&lt;br /&gt;
सरकार द्वारा 1 मार्च 1997 को सवार्इमाधोपुर जिले की पांच तहसीलों को मिलाकर एक अलग जिला करौली का&lt;br /&gt;
गठन किया। 15 जुलार्इ 1997 को करौली जिला निर्माण की अधिसूचना जारी करते हुए तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री&lt;br /&gt;
भैराेंसिंह शेखावत ने 19 जुलार्इ 1997 को इस जिले का उदधाटन&lt;br /&gt;
किया। 2011 की जनगणना के अनुसार जिले की जनसंख्या 1458459&lt;br /&gt;
तथा क्षेत्रफल 5043 वर्ग किलोमीटर है। राज्य की प्रमुख नदी चम्बल&lt;br /&gt;
इस जिले को मध्यप्रदेश राज्य से अलग करती है। इस जिले में&lt;br /&gt;
बहुसंख्या में पाये जाने वाले किले एवं गढ इसके पुराने गौरव की ओर&lt;br /&gt;
संकेत करते है। इनमें से तिमनगढ, उटगिरी, मण्डरायल के किलों का&lt;br /&gt;
देश के मध्यकालीन इतिहास&lt;br /&gt;
में प्रमुख स्थान रहा है।&lt;br /&gt;
तिमनगढ के किले पर यदुवंश&lt;br /&gt;
की प्रमुखता रही है। सन 1093 से 1159 में राजा तिमनपाल इस वंश का&lt;br /&gt;
शकितशाली राजा था, जिसने अपनी शकित को बढाकर तिमनगढ का&lt;br /&gt;
निर्माण कराया। ऐतिहासिक महापुरूषों के नाम की अनेक छतरियां इस&lt;br /&gt;
क्षेत्र में आज भी मौजूद है। तिमनगढ, करौली, हिण्डौन आदि स्थानों में&lt;br /&gt;
पाये गये प्रारभिभक तथा मध्ययुग के मूर्तिकला एवं वास्तुकला के नमूने&lt;br /&gt;
पुराने समय में भव्य मंदिरों का होना सि़द्ध करते है। राजा मोरध्वज की&lt;br /&gt;
नगरी गढमोरा करौली जिले में है, जहां आज भी पुराने अवशेष मौजूद है।&lt;br /&gt;
'''भौगोलिक सिथति एवं जलवायु'''&lt;br /&gt;
करौली अपनी भौगोलिक विशिष्टताओं के लिए भी विख्यात है। यह जिला प्राकृतिक सौन्दर्य से भरपूर एवं&lt;br /&gt;
विध्याचंल व अरावली पर्वत मालाओं से आच्छादित है। जिले का कुछ भाग समतल एवं कुछ भाग उचा नीचा एवं&lt;br /&gt;
पहाडियों वाला है। करौली मण्डरायल उपखण्ड को पहाडी इलाका कहा जाता है जबकि बाकी क्षेत्र सामान्यता&lt;br /&gt;
समतल एवं मैदानी है। मैदानी क्षेत्र उपजाऊ है तथा यहा की मिटटी हल्की एवं रेतीली है। करौली एवं मण्डरायल&lt;br /&gt;
उपखण्ड का क्षेत्र, जो स्थानीय भाषा में डांग कहलाता है, पहाडियों एवं नदियों से भरा है।&lt;br /&gt;
जिले की ऊचार्इ समुन्द्र की सतह से 400 से 600 मीटर तक है। जिले के पशिचम में दौसा, दक्षिण पशिचम में&lt;br /&gt;
सवार्इमाधोपुर, उत्तर पूर्व में धौलपुर तथा पशिचम उत्तर में भरतपुर जिले की सीमाएं लगती है। यह जिला 26&lt;br /&gt;
डिग्री 3 सै. से 49 डिग्री उत्तर पशिचम अक्षाश तथा 76 डिग्री 35 से 77 डिग्री 26 पूर्व देशान्तरों के मध्य सिथत&lt;br /&gt;
है।&lt;br /&gt;
जिले में अल्पकालीन मौसम के अलवा शेष समय जलवायु शुष्क रहती है। सर्दी नवम्बर माह के प्रथम सप्ताह से&lt;br /&gt;
मार्च तक रहती है, जबकि गर्मी मार्च के अन्त से जून के तीसरे सप्ताह तक रहती है। जिले की सामान्य वार्षिक&lt;br /&gt;
वर्ष 668.86 मि.मी. है। जिले में औसतन 35 दिन वर्षा होती है। जिले का दैनिक अधिकतम तापमान का औसत मर्इ&lt;br /&gt;
माह में 49 डिग्री सेल्सीयस रहता है तथा न्यूनतम 2.00 डिग्री सैलिस. जनवरी में रहता है।&lt;br /&gt;
'''प्रशासनिक व्यवस्था'''&lt;br /&gt;
प्रशासनिक व्यवस्था के अन्तर्गत जिला कलेक्टर जिले का सर्वोच्च अधिकारी होने के साथ-साथ समस्त प्रशासनिक&lt;br /&gt;
एवं कानून व्यवस्थाओं के लिए उत्तरदायी है। जिले को छ: उपखण्डो करौली, हिण्डौन, सपोटरा, मण्डरायल,&lt;br /&gt;
टोडाभीम एवं नादौती में विभाजित किया हुआ है। इन उपखण्डों को 5 पंचायत समिति एवं 6 तहसीलों में&lt;br /&gt;
विभाजित कर क्षेत्राधिकारी निर्धारण किया हुआ है। जिलें में तीन नगरपालिका क्रमश: करौली, हिण्डौन एवं&lt;br /&gt;
टोडाभीम हंै। जिले के प्रशासनिक स्वरूप में जनभागीदारी के रूप में एक लोकसभा सदस्य तथा चार विधानसभा&lt;br /&gt;
सदस्य है।&lt;br /&gt;
'''भूगर्भ एवं खनिज'''&lt;br /&gt;
जिला करौली एक तरफ से चम्बल तथा तीन तरफ से मैदानों से घिरा हुआ है। इसके मैदान&lt;br /&gt;
कैमबि्रयन-पूर्व की आग्नेय चêानों तथा उनकी तलछट से बनी चêानों के रूपान्तरण से बने है । अरावली की पूर्व&lt;br /&gt;
चêाने स्फटिक, अभ्रक, नार्इसिस्ट, मिग्मा टाइटस आदि की बनी हुर्इ है। महान विंध्य श्रेणी की चêाने जिनमें&lt;br /&gt;
कैमूल, रीवा, भाण्डेर प्रमुख है, विभिन्न प्रकार के सलेटी पत्थर, बालू पत्थर तथा चूना पत्थर से परिपूर्ण है। जिला&lt;br /&gt;
अनेक प्रकार के धातिवक एवं अधातिवक खनिजों से परिपूर्ण है। धातुओं में शीषा, तांबा, लोहा अयस्क आदि तथा&lt;br /&gt;
अधातुओं में चूना, पत्थर, चिकनी मिêी, सिलिका ,सैलरूडा आदि प्रमुख रूप से पाये जाते है।&lt;br /&gt;
इसके अलावा जिले में लेट्रार्इट, रेड आक्सार्इड, बैनेटोनार्इट, बेरार्इट, मैगनीज मिêी तथा काली मिêी पार्इ&lt;br /&gt;
जाती है । जिले में विभिन्न प्रकार की चêानों से मिलने वाले खनिज जैसे र्इमारत बनाने के पत्थर, सजावट के&lt;br /&gt;
पत्थर आदि प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है । भाण्डेर श्रेणी का गुलाबी पत्थर एवं सफेद निषानों वाला पत्थर करौली&lt;br /&gt;
एवं हिण्डौन क्षेत्र में काफी मात्रा में पाया जाता है । सीमेन्ट श्रेणी का चूना पत्थर एवं सिलिकासैण्ड सपोटरा&lt;br /&gt;
,नादौती क्षेत्र मे पाया जाता है। खनिज अभियन्ता करौली के अन्तर्गत इस जिलें की छ: तहसीलों के अलावा सवार्इ&lt;br /&gt;
माधोपुर जिले की दो तहसील गंगापुर एंव बामनवास आती है । इस क्षेत्र में मुख्यरूप से खनिज , सेण्ड स्टोन ,&lt;br /&gt;
मैषनरी स्टेान , सोप स्टोन , सिलिका सेण्ड इत्यादि का खनन होता है । इस खण्ड में कुल 260 खनन पटटे&lt;br /&gt;
स्वीकृत है । जिनका क्षेत्रफल 15568 हैक्टर है । जिसमें से करीब 13210 हैक्टर क्षेत्र में खनिज सेण्ड स्टोन का है&lt;br /&gt;
। उक्त 260 खनन पटटों से सिथर भाटक रू 11059000 प्राप्त होता है एंव अधिक अधिषुल्क रायल्टी कलेक्टषन&lt;br /&gt;
ठेंको को शामिल करते हुए वित्तीय वर्ष 2001-02 में कुल 381.06 लाख की आय विभाग को हुर्इ थी ।&lt;br /&gt;
'''वनस्पति, वन सम्पदा'''&lt;br /&gt;
जिले मे पाये जाने वाले महत्वपूर्ण पेड़ नीम बबूल ,बेरी, धौंक, रोंझ,तेन्दु, सालर, खैर, सनथा, जामुन, आम, घनेरी,&lt;br /&gt;
बास, खेजडा, बरगद, पीपल आदि है। इस क्षेत्र में पार्इ जाने वाली प्रमुख जडी बूटिया ओधीझाडा, चीचड़ा, पोलर,&lt;br /&gt;
कालीलम्प, लपला, कंैच, गूगल आदि है। जिले में सिथत वनों से इमारती लकड़ी, र्इधन, लकड़ी का कोयला, पशुओं&lt;br /&gt;
के लिए चारा, घास-फूस, तेन्दूपत्ता, गोंद, धौक के पत्ते, शहद, मोम, जड़ी बूटिया फल, कत्था, कंरज तथा दूसरी&lt;br /&gt;
अन्य उपयोगी वस्तुएें प्राप्त होती है।&lt;br /&gt;
'''जीव जन्तु'''&lt;br /&gt;
जिला करौेली वन्य प्राणियों के मामले में सम्पन्न है इसमें विभिन्न प्रकार के वन्य जीव पाये जाते है जिनमें तेन्दुएें,&lt;br /&gt;
जंगली कुत्ता, सांभर, नील गाय, चीतल, चिंकारा, जंगली सुअर, रीछ प्रमुख हैं। जिलें में कैलादेवी वन्य अभ्यारण्य&lt;br /&gt;
सन 1983 में स्थापित किया गया था, जिसको सन 1991 में रणथम्भौर रिजर्व के नजदीक मानते हुए संरक्षित वन&lt;br /&gt;
क्षेत्र एवं वन्य जीव अभ्यारण्य घोषित किया गया है जिसमे यदा कदा बाघ देखे जा सकते है। अभ्यारण्य का&lt;br /&gt;
क्षेत्रफल 674 वर्ग कि0मी0 है।&lt;br /&gt;
'''फसल पद्धति:'''&lt;br /&gt;
जिले मे तीनों मौसमों में फसल की बुबार्इ का कार्य होता है खरीफ वर्षा पर आधारित है। जो जुलार्इ माह में&lt;br /&gt;
प्रारम्भ होता है । इसमें बोर्इ जाने वाली मुख्य फसलें बाजरा, मक्का, तिल, ज्वार, ग्वार आदि हैं। रबी की बुवार्इ&lt;br /&gt;
अक्टूबर से प्रारम्भ होती है, जिसमें मुख्यतया जौ, चना, गेहू , सरसों की बुवार्इ होती है। यहा के लोगो का मुख्य&lt;br /&gt;
व्यवसाय कृषि एवं खनन कार्य है। भूमिगत पानी की कमी एवं सिंचार्इ सुविधा की कमी के कारण कृषि मुख्यतया&lt;br /&gt;
वर्षा पर निर्भर है। कृषि विपणन के लिए जिले में हिण्डौन में कृषि उपज मण्डी एवं करौली, टोडाभीम में गौण मंडी&lt;br /&gt;
हैं।&lt;br /&gt;
'''हस्तकला'''&lt;br /&gt;
करौली की हस्तकला में प्रमुख स्थान लाख की चूडियों का है लगभग एक लाख रूपये की चूडियों का&lt;br /&gt;
प्रतिवर्ष अन्य प्रांतों में निर्यात किया जाता है। चूडियों बनाने का काराबार जिले में हिण्डौन एवं करौली शहरों में&lt;br /&gt;
स्थानीय लखेरा एवं मुसिलम सम्प्रदाय के लोगों द्वारा किया जाता है। इस कार्य में करीब पांच सौ लोगों को&lt;br /&gt;
रोजगार मिला हुआ है। इसके अलावा करौली जिले मेें लकडी के खिलौने, घरेलू उपयोग की सामगि्रयों में&lt;br /&gt;
चकला-बेलन, दही बिलौने की रर्इ, लकके चम्मच एवं चारपार्इ व दीवान आदि भी बनाएं जाते हैं। वर्तमान में पत्थर&lt;br /&gt;
तराषी कर मूर्तियों एवं जाली झरोखे बनाने का कार्य भी रीको क्षेत्र हिण्डौन व करौली में किये जाने लगा है।&lt;br /&gt;
'''सामाजिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियां'''&lt;br /&gt;
जिले मे लोगों के सांस्कृतिक, धार्मिक एवं सामाजिक जीवन में मेले एवं त्यौहारों का महत्वपूर्ण स्थान है। अधिकांष&lt;br /&gt;
मौसमी एवं धार्मिक महत्व के है। इन मेलों का व्यापारिक, पर्यटन एवं सांस्कृतिक दृषिट से एकता के लिए महत्वपूर्ण&lt;br /&gt;
स्थान हैं। जिले के मुख्य मेले कैलादेवी मेला, महावीरजी, मेहन्दीपुर बालाजी एवं मदनमोहनजी के है, जिनमें लाखों&lt;br /&gt;
की संख्या में दर्षनार्थी आते है। राज्य के अन्य हिस्सों की तरह इस जिले में भी हिन्दुओं के रक्षाबन्धन, होली,&lt;br /&gt;
दीपावली, जन्माष्टमी, दषहरा, गणगौर तथा मुसलमानों के इदुलजुहा, रमजान, इदुलफितर त्योहार प्रमुख हैं।&lt;br /&gt;
ऐतिहासिक एवं पुरातातिवक स्थल जिले में निम्नलिखित विषेष महत्व के स्थान है&lt;br /&gt;
वर्तमान जिला मुख्यालय करौली राजपूतानें की प्राचीन रियासतों में से एक प्रमुख रियासत थी। यहां के षासकों&lt;br /&gt;
का सन 1100 से लेकर सन 1947 तक का गौरवषाली इतिहास रहा है। रियासत के यदुवंषी राजाओं ने अपनी&lt;br /&gt;
गरिमा की सुरक्षा, प्रजा के संरक्षण व प्राकृतिक आपदाओं के संधारण हेतु अनेक महल, किले व गढियों का निर्माण&lt;br /&gt;
कराया। इन महलों किलों व गढियों में वास्तु विषेषज्ञता, स्थापत्य कला और चित्रकारी के दुर्लभ नमूने देखने को&lt;br /&gt;
मिलते है। एक प्राचीन राज्य होने के कारण करौली में ऐतिहासिक, धार्मिक व पर्यटक महत्व के स्थानों की बहुलता&lt;br /&gt;
के साथ क्षेत्र में पुरा वैभव विखरा पडा है।&lt;br /&gt;
'''करौली शहर'''&lt;br /&gt;
करौली जिला मुख्यालय पूर्व में करौली राज्य की राजधानी थी। करौली कस्बे की स्थापना 1348 में यादववंश के&lt;br /&gt;
राजा अजर्ुनपाल ने की थी। इसका मूलत: नाम कल्याणपुरी था जो कल्याणजी के मनिदर के कारण प्रसिद्व था।&lt;br /&gt;
इसको भद्रावती नदी के किनारे होने के कारण भद्रावती नगरी भी कहा जाता था। करौली कस्बा चारों तरफ से&lt;br /&gt;
लाल स्टोन से निर्मित है, जिसकी परिधि 3.7 कि0मी0 है जिसमें 6 दरवाजे 12 खिडकिया है। महाराज गोपालसिंह&lt;br /&gt;
के समय का एक खूबसूरत महल है जिसके रंगमहल एवं दीवाने आम को शीशाओं से बडी खूबसूरती से बनाया&lt;br /&gt;
गया है। इस कस्बे में काफी संख्या में मनिदर है जिसमें प्रमुख मनिदर मदनमोहनजी का है। यह मनिदर सेन्दर&lt;br /&gt;
बरामदे एवं सुसजिजत पेनिटंग से निर्मित है तथा महाराजा गोपालसिंह जी के द्वारा जयपुर से लायी गयी काले&lt;br /&gt;
मार्बल से निर्मित मदनमोहनजी की मूर्ति है। प्रत्येक अमावस्या को मेला लगता है, जिसमें हजारो की संख्य में लोग&lt;br /&gt;
दर्शनार्थ आते है करौली मे जैन मनिदर, जामा मसिजद, र्इदगाह अंजनी माता मनिदर,गोविन्द देव जी मनिदर आदि&lt;br /&gt;
भी धार्मिक आस्था के स्थान है।&lt;br /&gt;
'''हिण्डौन सिटी:'''&lt;br /&gt;
हिण्डौन नगर करौली जिले की सबसे बडी नगरपालिका है। इस पौराणिक एवं ऐतिहासिक नगर की स्थापना&lt;br /&gt;
किसने की इसके सम्बन्ध में इतिहासकार एकमत नही हैं। सम्भवत: यह भूमि हिरण्यकश्यप व भक्त प्रहलाद की&lt;br /&gt;
कर्म भूमि रही है। यहां पर आज भी नृसिंह मनिदर, प्रहलाद कुण्ड, हिरण्यकश्यप के महल, बावडि़यों के अवशेष हैं।&lt;br /&gt;
यहां से कुछ दूरी पर कुण्डेवा, जगर, दानघाटी पौराणिक स्थान है। जनश्रुतियो के अनुसार महाभारत कालीन&lt;br /&gt;
हिडिम्बा नामक राक्षसी की कर्मस्थली भी यही क्षेत्रा रहा था। हिण्डौन वर्तमान में जिले का प्रमुख औधोगिक&lt;br /&gt;
वाणिजियक नगर है यहां से उत्तर-मध्य रेलवे का दिल्ली मुम्बर्इ मार्ग गुजरता है साथ ही राष्ट्रीय राजमार्ग 11 से&lt;br /&gt;
दूरी 41 कि0मी0 है। यहां पर पत्थर तरासी, स्लेट उधोग का करोबार बडे स्तर पर किया जाता है&lt;br /&gt;
'''तिमनगढ़ का किला'''&lt;br /&gt;
यह किला जिला मुख्यालय करौली से 42 किलोमीटर दूर&lt;br /&gt;
मासलपुर कस्बे के पास सिथत है। यहां बेजोड़ पुरातत्व संबंधी मूर्तिया&lt;br /&gt;
हैं। प्रचलित मान्यता के अनुसार संवत 1244 में यदुवंशी शासक&lt;br /&gt;
तिमनपाल ने इस किले का निर्माण कराया थां। कुछ इतिहासकार इस&lt;br /&gt;
किले को 1000 वर्ष से अधिक प्राचीन बताते है किले के अन्दर कर्इ&lt;br /&gt;
शिलालेखाें, उपलब्ध प्राचीन कृतियों से पता चलता है कि इसे किसी&lt;br /&gt;
शिल्पी व कलाप्रेमी ने बसाया था, जो बाद में शासकों के कब्जे मे&lt;br /&gt;
चला गया। किले के चारों ओर पांच फीट मोटा तथा करीब 30 फीट&lt;br /&gt;
ऊंचा परकोटा स्थापत्य कला का अनूठा नमूना है। किले के भीतर बाजार, फर्श, बगीची, मनिदर, कुंए कि अवशेष&lt;br /&gt;
आज भी मौजूद हैं। पूरा किला अपने अन्दर एक पूरा नगर समेटे हुए हैं। प्रवेश द्वार पर अक्सर ब्रहमा, गणेश की&lt;br /&gt;
मूर्तिया नजर आती है, लेकिन यहा प्रेत व राक्षसों के चित्र देखने को मिलते है। किले मे जगह -जगह खणिडत&lt;br /&gt;
मूर्तियाें को देखने से ऐसा लगता है कि यहा मूर्तियों की बहुत बडी मण्डी थी। दुर्ग में छोटे - छोटे कमरे भी हैं,&lt;br /&gt;
जो संभवत: स्नानघर के काम आते होंगे।&lt;br /&gt;
'''मण्डरायल का किला'''&lt;br /&gt;
करौली शहर से 40 किलो मीटर दूर दक्षिण पूर्व में पहाडों के मध्य एक आयताकार पहाडी के नीचे बसी एक&lt;br /&gt;
मध्यकालीन बस्ती है, जो दो प्रान्तों को विभक्त करते&lt;br /&gt;
हुए चम्बल नदीं के किनारे मण्डरायल नाम से जानी&lt;br /&gt;
जाती है । एतिहासिक दृषिट से एक गजिटयर के&lt;br /&gt;
अनुसार यह दुर्ग यादवों के इस क्षेत्र में प्रवेष से पूर्व&lt;br /&gt;
का है । करौली रियासत की विलेज डायरेक्ट्री में&lt;br /&gt;
इसके निर्माणकर्ता के रूप में बीजाबहादुर को दर्षाया&lt;br /&gt;
गया है, जिसकी कौम एंव काल का कोर्इ जिक्र नही&lt;br /&gt;
है । किदवतियों के अनुसार पूर्व में इस दुर्ग पर&lt;br /&gt;
मियां मकन का आधिपत्य होने के कारण उसी के&lt;br /&gt;
नाम से कालान्तर में अपभ्रषं होकर दुर्ग का नाम&lt;br /&gt;
मण्डरायल हो गया । यहां मुख्य दरवाजें के रूप में&lt;br /&gt;
दो गोलाकार गुबंद है । दूसरा दरवाजा सूर्यपोल नाम हैं, जो रानीपुरा इलाके की तरफ उतरता है। इस दरवाजें&lt;br /&gt;
की खासियत है कि पौर से प्रात: से साय तक सूर्य का प्रकाष रहता है । इसके अन्दर एक सुरक्षित टांका ओर&lt;br /&gt;
बाहर दो तालाब है । तालाब के किनारे त्रिदेव भगवान के मनिदर ओर बारहदारी है । पूर्व में इस किले की दीवारों&lt;br /&gt;
पर उर्दु में कुछ घटनायें लिपिबद्व थी , जो अब नष्ट हो चुकी है ।&lt;br /&gt;
'''उंट गिरि दुर्ग'''&lt;br /&gt;
15 वी षताब्दी में स्थापित यह दुर्ग करणपुर के कल्याण पुरा गांव की ऊंची पर्वत श्रृंखला की सुरंगनुमा पहाडी पर&lt;br /&gt;
सिथत है। लगभग 4 कि0मी0 क्षेत्र में फेले इस दुर्ग में 100 फुट की ऊंचार्इ से नीचे षिवलिंगों पर पानी गिरता है।&lt;br /&gt;
इस पानी में बडी मात्रा में षिलाजीत मिलता है। यह दुर्ग भी सामरिक दृषिट से महत्वपूर्ण रहा है। 1506-07 र्इ. में&lt;br /&gt;
सिकन्दर लोदी ने इस पर आक्रमण किया था उस समय इसे ग्वालियर किले की कुंजी कहा जाता था। अंतिम&lt;br /&gt;
मुगल सल्तनत तक इस किले पर यदुवंषियों का ही आधिपत्य रहा।&lt;br /&gt;
'''देव गिरि'''&lt;br /&gt;
उंट गिरि के पूर्व में चम्बल नदी के किनारे सिथत यह किला खण्डहर होते हुए भी अतीत की अनेक घटनाओं का&lt;br /&gt;
साक्षी है। परकोटे के नाम पर आज कुछ भी नही मिलता साथ ही अन्दर के सभी आवासीय भागों को नष्ट किया&lt;br /&gt;
जा चुका है। सन 1506-07 र्इ. में सिकन्दर लोदी के आक्रमण के समय इस किले को सबसे अधिक नुकसान&lt;br /&gt;
पहुचाया गया। वर्तमान में यहां एक बावडी, जर्जर होता षिलालेख तथा कुछ हवेलियों के अवषेष है।&lt;br /&gt;
'''बहादुरपुर का किला'''&lt;br /&gt;
करौली जिला मुख्यालय से 15 किलोमीटर दूर मण्डरायल मार्ग पर ससेड गांव के पास जंगल और सुनसान&lt;br /&gt;
वातावरण में अटल योद्वा सा खडा बहादुरपुर का किला मुगलकालीन स्थापत्य कला का बेजोड नमूना है। दो&lt;br /&gt;
मंजिला नृप गोपाल भवन, सहेली की बाबडी कलात्मक झरोखे 18 फीट लम्बी चीरियों की आमखास कचहरी,&lt;br /&gt;
पंचवीर, मगधराय की छतरी दर्षनीय है। यदुवंषी राजा तिमनपाल के पुत्र नागराज द्वारा निर्मित इस किले का&lt;br /&gt;
विस्तार सन 1566 से 1644 तक होता रहा। जयपुर के राजा सवार्इ जयंिसह ने इस किले में तीन माह तक प्रवास&lt;br /&gt;
किया था।&lt;br /&gt;
'''शहर किला एवं छतरी'''&lt;br /&gt;
नादौती तहसील के ग्राम शहर में यह किला उंची पहाडी पर बना हुआ है तथा आज भी सुरक्षित एवं आबाद है।&lt;br /&gt;
यहा के ठिकानेदार आमेर के राजा पृथ्वीराज के पुत्र पच्चाण के वंषज है। इसमें देवी का प्राचीन मंदिर है।&lt;br /&gt;
'''फतेहपुर किला'''&lt;br /&gt;
करौली जिला मुख्यालय से लगभग 30 कि.मी. दूर कंचनपुर जाने वाले मार्ग पर सिथत यह किला यदु शासकों के&lt;br /&gt;
एक बडे जागीरदार हरनगर के ठाकुर घासीराम द्वारा 1702 र्इ. में निर्मित किया गया। यह किला सुरक्षित अवस्था&lt;br /&gt;
में है।&lt;br /&gt;
'''किला नारौली डांग'''&lt;br /&gt;
सपोटरा उपखण्ड मुख्यालय से .... दूरी पर सिथत यह किला पहाडी के उपर बना हुआ है। तत्कालीन करौली एवं&lt;br /&gt;
जयपुर रियासतों की सीमा पर सिथत नारौली डांग गांव में स्थानीय जागीरदार द्वारा इसका निर्माण कराया गया&lt;br /&gt;
था।&lt;br /&gt;
'''भवरविलास पैलेस'''&lt;br /&gt;
करौली के पूर्व शासक रहे राजा भंवर पाल के नाम से पूर्व नरेषों का यह&lt;br /&gt;
आवास उत्कृष्ट वास्तु एवं षिल्प समेटे हुए नगर के दक्षिण में मंडरायल&lt;br /&gt;
रोड पर सिथत है। वर्तमान में इसे होटल का रूप दिया हुआ है।&lt;br /&gt;
'''हरसुख विलास'''&lt;br /&gt;
करौली में आने वाला प्रत्येक अतिथि हरसुख विलास की वास्तु एवं षिल्प&lt;br /&gt;
से प्रभावित हुए बिना नही रह सकता।&lt;br /&gt;
'''रामठरा किला'''&lt;br /&gt;
भारत के प्रमुख वन्य जीव अम्भारण्य रगथम्भोर एवं घना पक्षी बिहार भरतपुर के बीच करौली जिले के सपोटरा&lt;br /&gt;
उपखण्ड में सिथत रामठरा फोर्ट कैलादेवी राष्ट्रीय अम्भारण्य से मात्र 15 किलोमीटर दूर है।&lt;br /&gt;
'''सुख विलास बाग एवं शाही कुण्ड'''&lt;br /&gt;
जिला मुख्यालय सिथत भ्रदावती नदी के किनारे एक सुन्दर महलनुमा चारदिवारी के अन्दर बाग लगाया गया था&lt;br /&gt;
जिसका उपयोग रानिया अपने आमोद-प्रमोद के लिए करती थी इसे सुख विलास बाग कहते है। शहर के पर&lt;br /&gt;
कोटे के बहार सुखविलास के पास भव्य शाही कुण्ड बना हुआ है तीन मंजिला बावडीनुमा इस कुण्ड की बनावट&lt;br /&gt;
अद्वितीय है इसमें प्रत्येक मंजिल पर बरामदे एवं उतरने हेतू चारो तरफ सिढियां बनी है। रियासत काल में इस&lt;br /&gt;
कुण्ड का उपयोग शहर में पेयजल सप्लार्इ के लिए किया जाता था।&lt;br /&gt;
'''दरगाह कबीरषाह'''&lt;br /&gt;
करौली पषिचम द्वार पर वजीरपुर गेट एवं सायनाथ खिडकियां के मध्य आज से लगभग 120 वर्ष पूर्व बनार्इ गर्इ&lt;br /&gt;
एक सूफी संत की दरगाह उत्कृष्ट षिल्प का नमूना है। इसकी खासियत यह है कि इसमें दरवाजे भी पत्थर के&lt;br /&gt;
बनाये हुए है। पत्थर पर की गर्इ नक्कासी बरबस ही दर्षको का मन मोह लेती है।&lt;br /&gt;
'''रावल पैलेस (राजमहल)'''&lt;br /&gt;
तेरहवी षताब्दी में स्थापित राजमहल (रावल पैलेस) लाल व सफेद पत्थर के षिल्प का बेजोड नमूना है। नक्कषी&lt;br /&gt;
व कलात्मक चितराम से सुसजिजत विषाल द्वार, जालीदार झरोखे, तोपखाना, नाहर कटहरा, सुर्री गुर्ज, गोपालसिंह&lt;br /&gt;
अखाडा, भवर बैंक, नजर बगीची, मानिक महल, फब्बारा कण्ड, बारह दरी, गोपाल मनिदर, दीवान ए आम, फौज&lt;br /&gt;
कचहरी, किरकिरी खाना, ज्ञान बगला, षीष महल, मोतीमहल, हरविलास, रंगलाल, गेंदघर, टेडा कुआ, जनानी&lt;br /&gt;
डयौढी आदि कुषल स्थापत्य के साथ-साथ यहां की सभ्यता व संस्कृति के परिचायक है।&lt;br /&gt;
'''अन्य'''&lt;br /&gt;
करौली में महाराजा गोपालसिंहजी की छतरी, रणगमा तालाब, सुख विलास कुण्ड, एवं षिकारगंज आदि करौली के&lt;br /&gt;
पुरा वैभव प्रतीक है। साथ ही जिले के सपोटरा में नारौली डांग का किला, गढमोरा (नादौती) में राजा मोरध्वज का&lt;br /&gt;
महल व मनिदर, षहर सोप का ऊची पहाडी पर निर्मित किला, हिण्डौन की पुरानी कचहरी व प्रहलाद कुण्ड जैसे&lt;br /&gt;
दर्षनीय ऐतिहासिक स्थल हमारी संस्कृति की पहचान है।&lt;br /&gt;
'''धार्मिक स्थल&lt;br /&gt;
महावीर जी'''&lt;br /&gt;
दिगम्बर जैन संप्रदाय का भारत का एक प्रमुख स्थान है। यहा पर भगवान महावीर की&lt;br /&gt;
400 वर्ष पुरानी मूर्ति है। महावीर जी में निर्मित मनिदर आधुनिक एवं प्राचीन शिल्पकला&lt;br /&gt;
का बेजोड़ नमूना है। मनिदर को एक बहुत बडे प्लेटफार्म पर सफेद मार्बल से बनाया&lt;br /&gt;
गया है। इसकी छतरी दूर से दिखायी देती है, जो लाल बलुआ पत्थर की है। मनिदर&lt;br /&gt;
पर नक्काशी का कार्य भी अति सुन्दर है। मनिदर के ठीक सामने मान स्तम्भ बना हुआ&lt;br /&gt;
है। जिसमें जैन तीर्थकर की प्रतिमा है। मनिदर के पीछ कटला एवं चरण मनिदर है,&lt;br /&gt;
जहां पर दर्शनार्थी श्रद्वापूर्वक दर्शन को जाते है। प्रतिवर्ष चैत्र सुदी 11 से बैशाख सुदी&lt;br /&gt;
2 तक (मार्च-अप्रैल) मेला लगता है, जिसमें लाखों लोग विभिन्न क्षेत्रों से यहां आते हैं।&lt;br /&gt;
मेले के अन्त में रथया़त्रा का आयोजन किया जाता है।&lt;br /&gt;
'''कैलादेवी मनिदर'''&lt;br /&gt;
करौली से 24 कि0मी0 दूर यह प्रसिद्व धार्मिक स्थल है। जहां प्रतिवर्ष&lt;br /&gt;
मार्च - अपै्रल माह मे एक बहुत बडा मेला लगता है। इस मेले में&lt;br /&gt;
राजस्थान के अलावा दिल्ली, हरियाणा, मध्यप्रदेष, उत्तर प्रदेष के&lt;br /&gt;
तीर्थ यात्री आते है। मुख्य मनिदर संगमरमर से बना हुआ है जिसमें&lt;br /&gt;
कैला (महालक्ष्मी) एवं चामुण्डा देवी की प्रतिमाऐं हैं। कैलादेवी की&lt;br /&gt;
आठ भुजाऐं एवं सिंह पर सवारी करते हुए बताया है। यहां क्षेत्रीय&lt;br /&gt;
लांगुरियां के गीत विषेष रूप से गाये जाते है। जिसमें लागुरियां के&lt;br /&gt;
माध्यम से कैलादेवी को अपनी भकित-भाव प्रदर्षित करते है।&lt;br /&gt;
'''बालाजी'''&lt;br /&gt;
यह एक छोटा सा गांव टोडाभीम तहसील से 5 कि0मी0 दूर है तथा जयपुर-आगरा राष्ट्रीय राज्यमार्ग से जुडा&lt;br /&gt;
हुआ है। हिन्दुओ की आस्था का महत्वपूर्ण स्थान है। यहां पर पहाडी की तलहटी मे निर्मित हनुमानजी का बहुत&lt;br /&gt;
पुराना मनिदर है। लोग काफी दूर-दूर से यहां आते है। ऐसी मान्यता है कि हिस्टीरिया एवं डिलेरियम के रोगी&lt;br /&gt;
दर्षन लाभ से स्वस्थ होकर लोैटते है। होली एवं दीपावली के त्यौहार पर काफी संख्या मे लोग यहां दर्षन के&lt;br /&gt;
लिए आते है।&lt;br /&gt;
'''मदनमोहन जी'''&lt;br /&gt;
श्री मदन मोहन देवालय मुख्यालय के आंचल में महलों के पास वृहद&lt;br /&gt;
भव्य परिसर के धेरे मे सिथत है जहां भगवान राधा मदनमोहन के साथ&lt;br /&gt;
श्रीगोपालजी की मनमोहनी प्रतिमाएं प्रतिषिठत है। जिनकी सेवा गौड&lt;br /&gt;
सम्प्रदायी गुसार्इयों के माध्यम से बहुत सुन्दर तरीकों से होती आ रही&lt;br /&gt;
है। मंगला से शयन तक हजारो भक्तों का समुह प्रत्येक झांकी पर&lt;br /&gt;
उपसिथत रहता है। मदनमोहनजी की कुल आठ झांकी सकल मनोरथ&lt;br /&gt;
पूर्ण करने वाली हैं । मूलरूप से इन दोनो प्रतिमाओं को उडीसा और&lt;br /&gt;
वृदावन में प्रतिषिठत कराया गया था। कालान्तर में यही प्रतिमाएं&lt;br /&gt;
विभिन्न श्रोतों के माध्यम से आज इस पावन नगरी में भक्तों के वास्ते प्रेरणा की श्रोत बनी हुर्इ है।&lt;br /&gt;
'''शिल्प एवं उधोग'''&lt;br /&gt;
करौली जिलें में षिल्प के उत्कृष्ट नमूने पाये जाते है । वास्तुषिल्प&lt;br /&gt;
के रूप में महाराजा गोपाल सिंह के शासन काल से षिल्प के क्षेत्र&lt;br /&gt;
में भारी विकास हुआ है । जिसका साक्षात प्रमाण करौली दुर्ग के&lt;br /&gt;
रूप में है । 14वीं शताब्दी में निर्मित यह महल जहा साधारण&lt;br /&gt;
दिखार्इ देते है । वही इस किले का बाहरी हिस्सा जो 17वी शताब्दी&lt;br /&gt;
में बनाया गया था । षिल्प का उत्कृष्ट उदाहरण है । बैहरदह में&lt;br /&gt;
बौहरों की हवेली एंव करौली नगर के कर्इ कलापूर्ण एंव भवनों का&lt;br /&gt;
षिल्प दर्षन अपनी ओर आकर्षित कर लेता है । इनके अतिरिक्त मा&lt;br /&gt;
साहब का मनिदर, दीवान साहब की हवेली, पदम तालाब की&lt;br /&gt;
हवेलियां एंव रतियापुरा एंव कसारा की परेंडी विषेष षिल्पकला के नमूने है ।&lt;br /&gt;
'''जिला एक दृषिट में'''&lt;br /&gt;
भौगोलिक सिथति 26 डिग्री 3 से 26 डिग्री 49 उत्तरी अक्षांष&lt;br /&gt;
76 डिग्री 35 से 77 डिग्री 26 पूर्वी देषान्तर के मध्य&lt;br /&gt;
भौगोलिक क्षेत्रफल 5069.64 वर्ग किमी0 वन क्षेत्र के अन्तर्गत 1658.19 कि0मी0&lt;br /&gt;
समुद्रतल से ऊंचार्इ 400 से 600 मीटर&lt;br /&gt;
तापमान अधिकतम 49 डिग्री न्यूनतम 2 डिग्री&lt;br /&gt;
जिले की औसत वर्षा 668.86 मिलीमीटर 1 जनवरी 05 से आज तक की&lt;br /&gt;
वर्षा&lt;br /&gt;
555.23 मि.मी.&lt;br /&gt;
भौगोलिक क्षेत्रफल 505217 वन 172499&lt;br /&gt;
अकृषि योग्य भूमि 19361 स्थार्इ चरागाह 30818&lt;br /&gt;
भूमि उपयोग&lt;br /&gt;
(हैक्टर में) कृषि योग्य भूमि 185871&lt;br /&gt;
115076 हैक्टर&lt;br /&gt;
नहरो से 19761 तालाबों से 5471&lt;br /&gt;
नलकूपो से 29320 कुएं से 60470&lt;br /&gt;
शुद्ध ंिसंचित क्षेत्र&lt;br /&gt;
(हैक्टर में)&lt;br /&gt;
अन्य से 54&lt;br /&gt;
लोक सभा क्षेत्र करौली-धौलपुर&lt;br /&gt;
विधान सभा क्षेत्र 4 (करौली, हिण्डौन, टोडाभीम, सपोटरा)&lt;br /&gt;
उप खण्ड 6 (करौली, हिण्डौन, टोडाभीम, सपोटरा, मंडरायल, नादौती)&lt;br /&gt;
तहसील 6 (करौली, हिण्डौन, टोडाभीम, सपोटरा,मंडरायल, नादौती)&lt;br /&gt;
उप तहसील 2 (करनपुर, मासलपुर)&lt;br /&gt;
पंचायत समिति 5 (करौली, हिण्डौन, टोडाभीम, सपोटरा, नादौती)&lt;br /&gt;
नगरपालिका 3 (करौली, हिण्डौन, टोडाभीम)&lt;br /&gt;
पटवार मंडल 254&lt;br /&gt;
ग्राम पंचायत 223 ( 101 ग्रा.प. डांग क्षेत्र में )&lt;br /&gt;
राजस्व ग्राम 878&lt;br /&gt;
आवाद ग्राम 836&lt;br /&gt;
मुख्य व्यवसाय खनिज, बीड़ी उधोग&lt;br /&gt;
मुख्य नदियां भद्रावती, गम्भीर, बरखेड़ा, चम्बल&lt;br /&gt;
पषु गणना 8,14,427&lt;br /&gt;
कुल 1458459 पुरुष 784943&lt;br /&gt;
जनसंख्या महिला 673516&lt;br /&gt;
लिंग अनुपात&lt;br /&gt;
( प्रति 1000 पु. )&lt;br /&gt;
858&lt;br /&gt;
जनसंख्या घनत्व 264 प्रति वर्ग कि.मीकुल&lt;br /&gt;
67.34 प्रतिषत&lt;br /&gt;
साक्षरता महिला 49.18 प्रति. पुरुष 82.96 प्रतिकैलादेवी&lt;br /&gt;
मेला श्री महावीर जी मेला मदन मोहन जी का&lt;br /&gt;
मेला&lt;br /&gt;
मेले एवं त्यौहार&lt;br /&gt;
बाला जी का लक्खी&lt;br /&gt;
मेला&lt;br /&gt;
अंजनी माता का मेला&lt;br /&gt;
ऐतिहासिक स्थल तिमनगढ़ का किला मण्डरायल का किला&lt;br /&gt;
श्री महावीर जी कैलादेवी&lt;br /&gt;
पर्यटन स्थल&lt;br /&gt;
आध्यातिमक स्थल मदन मोहन जी का मंदिर मेहन्दीपुर बाला जी&lt;br /&gt;
पुलिस उपअधीक्षक वृत 4 पुलिस थाना 16&lt;br /&gt;
पुलिस चौकी 16&lt;br /&gt;
जेल 2&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:राजस्थान]][[Category:राजस्थान के ज़िले]]&lt;br /&gt;
[[Category:भारत के ज़िले]][[Category:गणराज्य संरचना कोश]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Pankaj pathak</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%8C%E0%A4%B2%E0%A5%80_%E0%A4%9C%E0%A4%BC%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A4%BE&amp;diff=280846</id>
		<title>करौली ज़िला</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%8C%E0%A4%B2%E0%A5%80_%E0%A4%9C%E0%A4%BC%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A4%BE&amp;diff=280846"/>
		<updated>2012-06-27T13:50:22Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Pankaj pathak: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा ज़िला&lt;br /&gt;
|चित्र=http://karauli.nic.in/slide/collactract.JPG&lt;br /&gt;
|चित्र का नाम=करौली&lt;br /&gt;
|राज्य=-राजस्थान&lt;br /&gt;
|मुख्यालय=करौली&lt;br /&gt;
|स्थापना=-1 मार्च 1997&lt;br /&gt;
|जनसंख्या=-1458459&lt;br /&gt;
|क्षेत्रफल=-5070 वर्ग कि . मी .&lt;br /&gt;
|भौगोलिक निर्देशांक=-&lt;br /&gt;
|तहसील=-6&lt;br /&gt;
|मंडल=-&lt;br /&gt;
|खण्डों की सँख्या=-6&lt;br /&gt;
|आदिवासी=-&lt;br /&gt;
|विधान सभा क्षेत्र =-&lt;br /&gt;
|लोकसभा=-&lt;br /&gt;
|नगर पालिका=-3&lt;br /&gt;
|नगर निगम=-&lt;br /&gt;
|नगर=-&lt;br /&gt;
|क़स्बे=-&lt;br /&gt;
|कुल ग्राम=-881&lt;br /&gt;
|विद्युतीकृत ग्राम=-&lt;br /&gt;
|मुख्य ऐतिहासिक स्थल=-&lt;br /&gt;
|मुख्य पर्यटन स्थल=-कैला देवी,श्री महावीर जी&lt;br /&gt;
|वनक्षेत्र=-172459 हैक्‍ट&lt;br /&gt;
|बुआई क्षेत्र =-201819 हैक्‍ट&lt;br /&gt;
|सिंचित क्षेत्र =-&lt;br /&gt;
|नगरीय जनसंख्या=-&lt;br /&gt;
|ग्रामीण जनसंख्या=-&lt;br /&gt;
|राजस्व ग्राम=-&lt;br /&gt;
|आबादी रहित ग्राम=-&lt;br /&gt;
|आबाद ग्राम=-&lt;br /&gt;
|नगर पंचायत=-&lt;br /&gt;
|ग्राम पंचायत=-&lt;br /&gt;
|जनपद पंचायत=-&lt;br /&gt;
|सीमा=-&lt;br /&gt;
|अनुसूचित जाति=-&lt;br /&gt;
|अनुसूचित जनजाति=-&lt;br /&gt;
|प्रसिद्धि=-&lt;br /&gt;
|लिंग अनुपात=-&lt;br /&gt;
|साक्षरता=-&lt;br /&gt;
|स्त्री=-&lt;br /&gt;
|पुरुष=-&lt;br /&gt;
|ऊँचाई=-&lt;br /&gt;
|तापमान=-&lt;br /&gt;
|ग्रीष्म=-&lt;br /&gt;
|शरद=-&lt;br /&gt;
|वर्षा=-&lt;br /&gt;
|दूरभाष कोड=-&lt;br /&gt;
|वाहन पंजी.=-34&lt;br /&gt;
|संबंधित लेख=&lt;br /&gt;
|पाठ 1=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=&lt;br /&gt;
|पाठ 2=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 2=&lt;br /&gt;
|पाठ 3=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 3=&lt;br /&gt;
|अन्य जानकारी=वेब जाल-http://karauli.nic.in&lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
|अद्यतन=&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
{{ज़िला लेख}}&lt;br /&gt;
'''ऐतिहासिक पृष्ठभूमि'''&lt;br /&gt;
|जिला करौली का क्षेत्र पुराने करौली राज्य तथा जयपुर राज्य की गंगापुर एवं हिण्डौन निजामतों में आता&lt;br /&gt;
है। कल्याणपुरी नामक इस क्षेत्र को वर्तमान स्वरूप प्रदान करने का श्रेय यदुवंसी राजाओं को जाता है। कार्ल&lt;br /&gt;
माक्र्स और कर्नल टाड ने अपनी पुस्तक में भी इसका वर्णन किया है। करौली राज्य अप्रैल 1949 को मत्स्य संघ में&lt;br /&gt;
समिमलित हुआ बाद में जयपुर राज्य के साथ मिलकर वृहत संयुक्त राज्य राजस्थान का भाग बना। राजस्थान&lt;br /&gt;
सरकार द्वारा 1 मार्च 1997 को सवार्इमाधोपुर जिले की पांच तहसीलों को मिलाकर एक अलग जिला करौली का&lt;br /&gt;
गठन किया। 15 जुलार्इ 1997 को करौली जिला निर्माण की अधिसूचना जारी करते हुए तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री&lt;br /&gt;
भैराेंसिंह शेखावत ने 19 जुलार्इ 1997 को इस जिले का उदधाटन&lt;br /&gt;
किया। 2011 की जनगणना के अनुसार जिले की जनसंख्या 1458459&lt;br /&gt;
तथा क्षेत्रफल 5043 वर्ग किलोमीटर है। राज्य की प्रमुख नदी चम्बल&lt;br /&gt;
इस जिले को मध्यप्रदेश राज्य से अलग करती है। इस जिले में&lt;br /&gt;
बहुसंख्या में पाये जाने वाले किले एवं गढ इसके पुराने गौरव की ओर&lt;br /&gt;
संकेत करते है। इनमें से तिमनगढ, उटगिरी, मण्डरायल के किलों का&lt;br /&gt;
देश के मध्यकालीन इतिहास&lt;br /&gt;
में प्रमुख स्थान रहा है।&lt;br /&gt;
तिमनगढ के किले पर यदुवंश&lt;br /&gt;
की प्रमुखता रही है। सन 1093 से 1159 में राजा तिमनपाल इस वंश का&lt;br /&gt;
शकितशाली राजा था, जिसने अपनी शकित को बढाकर तिमनगढ का&lt;br /&gt;
निर्माण कराया। ऐतिहासिक महापुरूषों के नाम की अनेक छतरियां इस&lt;br /&gt;
क्षेत्र में आज भी मौजूद है। तिमनगढ, करौली, हिण्डौन आदि स्थानों में&lt;br /&gt;
पाये गये प्रारभिभक तथा मध्ययुग के मूर्तिकला एवं वास्तुकला के नमूने&lt;br /&gt;
पुराने समय में भव्य मंदिरों का होना सि़द्ध करते है। राजा मोरध्वज की&lt;br /&gt;
नगरी गढमोरा करौली जिले में है, जहां आज भी पुराने अवशेष मौजूद है।&lt;br /&gt;
'''भौगोलिक सिथति एवं जलवायु'''&lt;br /&gt;
करौली अपनी भौगोलिक विशिष्टताओं के लिए भी विख्यात है। यह जिला प्राकृतिक सौन्दर्य से भरपूर एवं&lt;br /&gt;
विध्याचंल व अरावली पर्वत मालाओं से आच्छादित है। जिले का कुछ भाग समतल एवं कुछ भाग उचा नीचा एवं&lt;br /&gt;
पहाडियों वाला है। करौली मण्डरायल उपखण्ड को पहाडी इलाका कहा जाता है जबकि बाकी क्षेत्र सामान्यता&lt;br /&gt;
समतल एवं मैदानी है। मैदानी क्षेत्र उपजाऊ है तथा यहा की मिटटी हल्की एवं रेतीली है। करौली एवं मण्डरायल&lt;br /&gt;
उपखण्ड का क्षेत्र, जो स्थानीय भाषा में डांग कहलाता है, पहाडियों एवं नदियों से भरा है।&lt;br /&gt;
जिले की ऊचार्इ समुन्द्र की सतह से 400 से 600 मीटर तक है। जिले के पशिचम में दौसा, दक्षिण पशिचम में&lt;br /&gt;
सवार्इमाधोपुर, उत्तर पूर्व में धौलपुर तथा पशिचम उत्तर में भरतपुर जिले की सीमाएं लगती है। यह जिला 26&lt;br /&gt;
डिग्री 3 सै. से 49 डिग्री उत्तर पशिचम अक्षाश तथा 76 डिग्री 35 से 77 डिग्री 26 पूर्व देशान्तरों के मध्य सिथत&lt;br /&gt;
है।&lt;br /&gt;
जिले में अल्पकालीन मौसम के अलवा शेष समय जलवायु शुष्क रहती है। सर्दी नवम्बर माह के प्रथम सप्ताह से&lt;br /&gt;
मार्च तक रहती है, जबकि गर्मी मार्च के अन्त से जून के तीसरे सप्ताह तक रहती है। जिले की सामान्य वार्षिक&lt;br /&gt;
वर्ष 668.86 मि.मी. है। जिले में औसतन 35 दिन वर्षा होती है। जिले का दैनिक अधिकतम तापमान का औसत मर्इ&lt;br /&gt;
माह में 49 डिग्री सेल्सीयस रहता है तथा न्यूनतम 2.00 डिग्री सैलिस. जनवरी में रहता है।&lt;br /&gt;
'''प्रशासनिक व्यवस्था'''&lt;br /&gt;
प्रशासनिक व्यवस्था के अन्तर्गत जिला कलेक्टर जिले का सर्वोच्च अधिकारी होने के साथ-साथ समस्त प्रशासनिक&lt;br /&gt;
एवं कानून व्यवस्थाओं के लिए उत्तरदायी है। जिले को छ: उपखण्डो करौली, हिण्डौन, सपोटरा, मण्डरायल,&lt;br /&gt;
टोडाभीम एवं नादौती में विभाजित किया हुआ है। इन उपखण्डों को 5 पंचायत समिति एवं 6 तहसीलों में&lt;br /&gt;
विभाजित कर क्षेत्राधिकारी निर्धारण किया हुआ है। जिलें में तीन नगरपालिका क्रमश: करौली, हिण्डौन एवं&lt;br /&gt;
टोडाभीम हंै। जिले के प्रशासनिक स्वरूप में जनभागीदारी के रूप में एक लोकसभा सदस्य तथा चार विधानसभा&lt;br /&gt;
सदस्य है।&lt;br /&gt;
'''भूगर्भ एवं खनिज'''&lt;br /&gt;
जिला करौली एक तरफ से चम्बल तथा तीन तरफ से मैदानों से घिरा हुआ है। इसके मैदान&lt;br /&gt;
कैमबि्रयन-पूर्व की आग्नेय चêानों तथा उनकी तलछट से बनी चêानों के रूपान्तरण से बने है । अरावली की पूर्व&lt;br /&gt;
चêाने स्फटिक, अभ्रक, नार्इसिस्ट, मिग्मा टाइटस आदि की बनी हुर्इ है। महान विंध्य श्रेणी की चêाने जिनमें&lt;br /&gt;
कैमूल, रीवा, भाण्डेर प्रमुख है, विभिन्न प्रकार के सलेटी पत्थर, बालू पत्थर तथा चूना पत्थर से परिपूर्ण है। जिला&lt;br /&gt;
अनेक प्रकार के धातिवक एवं अधातिवक खनिजों से परिपूर्ण है। धातुओं में शीषा, तांबा, लोहा अयस्क आदि तथा&lt;br /&gt;
अधातुओं में चूना, पत्थर, चिकनी मिêी, सिलिका ,सैलरूडा आदि प्रमुख रूप से पाये जाते है।&lt;br /&gt;
इसके अलावा जिले में लेट्रार्इट, रेड आक्सार्इड, बैनेटोनार्इट, बेरार्इट, मैगनीज मिêी तथा काली मिêी पार्इ&lt;br /&gt;
जाती है । जिले में विभिन्न प्रकार की चêानों से मिलने वाले खनिज जैसे र्इमारत बनाने के पत्थर, सजावट के&lt;br /&gt;
पत्थर आदि प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है । भाण्डेर श्रेणी का गुलाबी पत्थर एवं सफेद निषानों वाला पत्थर करौली&lt;br /&gt;
एवं हिण्डौन क्षेत्र में काफी मात्रा में पाया जाता है । सीमेन्ट श्रेणी का चूना पत्थर एवं सिलिकासैण्ड सपोटरा&lt;br /&gt;
,नादौती क्षेत्र मे पाया जाता है। खनिज अभियन्ता करौली के अन्तर्गत इस जिलें की छ: तहसीलों के अलावा सवार्इ&lt;br /&gt;
माधोपुर जिले की दो तहसील गंगापुर एंव बामनवास आती है । इस क्षेत्र में मुख्यरूप से खनिज , सेण्ड स्टोन ,&lt;br /&gt;
मैषनरी स्टेान , सोप स्टोन , सिलिका सेण्ड इत्यादि का खनन होता है । इस खण्ड में कुल 260 खनन पटटे&lt;br /&gt;
स्वीकृत है । जिनका क्षेत्रफल 15568 हैक्टर है । जिसमें से करीब 13210 हैक्टर क्षेत्र में खनिज सेण्ड स्टोन का है&lt;br /&gt;
। उक्त 260 खनन पटटों से सिथर भाटक रू 11059000 प्राप्त होता है एंव अधिक अधिषुल्क रायल्टी कलेक्टषन&lt;br /&gt;
ठेंको को शामिल करते हुए वित्तीय वर्ष 2001-02 में कुल 381.06 लाख की आय विभाग को हुर्इ थी ।&lt;br /&gt;
'''वनस्पति, वन सम्पदा'''&lt;br /&gt;
जिले मे पाये जाने वाले महत्वपूर्ण पेड़ नीम बबूल ,बेरी, धौंक, रोंझ,तेन्दु, सालर, खैर, सनथा, जामुन, आम, घनेरी,&lt;br /&gt;
बास, खेजडा, बरगद, पीपल आदि है। इस क्षेत्र में पार्इ जाने वाली प्रमुख जडी बूटिया ओधीझाडा, चीचड़ा, पोलर,&lt;br /&gt;
कालीलम्प, लपला, कंैच, गूगल आदि है। जिले में सिथत वनों से इमारती लकड़ी, र्इधन, लकड़ी का कोयला, पशुओं&lt;br /&gt;
के लिए चारा, घास-फूस, तेन्दूपत्ता, गोंद, धौक के पत्ते, शहद, मोम, जड़ी बूटिया फल, कत्था, कंरज तथा दूसरी&lt;br /&gt;
अन्य उपयोगी वस्तुएें प्राप्त होती है।&lt;br /&gt;
'''जीव जन्तु'''&lt;br /&gt;
जिला करौेली वन्य प्राणियों के मामले में सम्पन्न है इसमें विभिन्न प्रकार के वन्य जीव पाये जाते है जिनमें तेन्दुएें,&lt;br /&gt;
जंगली कुत्ता, सांभर, नील गाय, चीतल, चिंकारा, जंगली सुअर, रीछ प्रमुख हैं। जिलें में कैलादेवी वन्य अभ्यारण्य&lt;br /&gt;
सन 1983 में स्थापित किया गया था, जिसको सन 1991 में रणथम्भौर रिजर्व के नजदीक मानते हुए संरक्षित वन&lt;br /&gt;
क्षेत्र एवं वन्य जीव अभ्यारण्य घोषित किया गया है जिसमे यदा कदा बाघ देखे जा सकते है। अभ्यारण्य का&lt;br /&gt;
क्षेत्रफल 674 वर्ग कि0मी0 है।&lt;br /&gt;
'''फसल पद्धति:'''&lt;br /&gt;
जिले मे तीनों मौसमों में फसल की बुबार्इ का कार्य होता है खरीफ वर्षा पर आधारित है। जो जुलार्इ माह में&lt;br /&gt;
प्रारम्भ होता है । इसमें बोर्इ जाने वाली मुख्य फसलें बाजरा, मक्का, तिल, ज्वार, ग्वार आदि हैं। रबी की बुवार्इ&lt;br /&gt;
अक्टूबर से प्रारम्भ होती है, जिसमें मुख्यतया जौ, चना, गेहू , सरसों की बुवार्इ होती है। यहा के लोगो का मुख्य&lt;br /&gt;
व्यवसाय कृषि एवं खनन कार्य है। भूमिगत पानी की कमी एवं सिंचार्इ सुविधा की कमी के कारण कृषि मुख्यतया&lt;br /&gt;
वर्षा पर निर्भर है। कृषि विपणन के लिए जिले में हिण्डौन में कृषि उपज मण्डी एवं करौली, टोडाभीम में गौण मंडी&lt;br /&gt;
हैं।&lt;br /&gt;
'''हस्तकला'''&lt;br /&gt;
करौली की हस्तकला में प्रमुख स्थान लाख की चूडियों का है लगभग एक लाख रूपये की चूडियों का&lt;br /&gt;
प्रतिवर्ष अन्य प्रांतों में निर्यात किया जाता है। चूडियों बनाने का काराबार जिले में हिण्डौन एवं करौली शहरों में&lt;br /&gt;
स्थानीय लखेरा एवं मुसिलम सम्प्रदाय के लोगों द्वारा किया जाता है। इस कार्य में करीब पांच सौ लोगों को&lt;br /&gt;
रोजगार मिला हुआ है। इसके अलावा करौली जिले मेें लकडी के खिलौने, घरेलू उपयोग की सामगि्रयों में&lt;br /&gt;
चकला-बेलन, दही बिलौने की रर्इ, लकके चम्मच एवं चारपार्इ व दीवान आदि भी बनाएं जाते हैं। वर्तमान में पत्थर&lt;br /&gt;
तराषी कर मूर्तियों एवं जाली झरोखे बनाने का कार्य भी रीको क्षेत्र हिण्डौन व करौली में किये जाने लगा है।&lt;br /&gt;
'''सामाजिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियां'''&lt;br /&gt;
जिले मे लोगों के सांस्कृतिक, धार्मिक एवं सामाजिक जीवन में मेले एवं त्यौहारों का महत्वपूर्ण स्थान है। अधिकांष&lt;br /&gt;
मौसमी एवं धार्मिक महत्व के है। इन मेलों का व्यापारिक, पर्यटन एवं सांस्कृतिक दृषिट से एकता के लिए महत्वपूर्ण&lt;br /&gt;
स्थान हैं। जिले के मुख्य मेले कैलादेवी मेला, महावीरजी, मेहन्दीपुर बालाजी एवं मदनमोहनजी के है, जिनमें लाखों&lt;br /&gt;
की संख्या में दर्षनार्थी आते है। राज्य के अन्य हिस्सों की तरह इस जिले में भी हिन्दुओं के रक्षाबन्धन, होली,&lt;br /&gt;
दीपावली, जन्माष्टमी, दषहरा, गणगौर तथा मुसलमानों के इदुलजुहा, रमजान, इदुलफितर त्योहार प्रमुख हैं।&lt;br /&gt;
ऐतिहासिक एवं पुरातातिवक स्थल जिले में निम्नलिखित विषेष महत्व के स्थान है&lt;br /&gt;
वर्तमान जिला मुख्यालय करौली राजपूतानें की प्राचीन रियासतों में से एक प्रमुख रियासत थी। यहां के षासकों&lt;br /&gt;
का सन 1100 से लेकर सन 1947 तक का गौरवषाली इतिहास रहा है। रियासत के यदुवंषी राजाओं ने अपनी&lt;br /&gt;
गरिमा की सुरक्षा, प्रजा के संरक्षण व प्राकृतिक आपदाओं के संधारण हेतु अनेक महल, किले व गढियों का निर्माण&lt;br /&gt;
कराया। इन महलों किलों व गढियों में वास्तु विषेषज्ञता, स्थापत्य कला और चित्रकारी के दुर्लभ नमूने देखने को&lt;br /&gt;
मिलते है। एक प्राचीन राज्य होने के कारण करौली में ऐतिहासिक, धार्मिक व पर्यटक महत्व के स्थानों की बहुलता&lt;br /&gt;
के साथ क्षेत्र में पुरा वैभव विखरा पडा है।&lt;br /&gt;
'''करौली शहर'''&lt;br /&gt;
करौली जिला मुख्यालय पूर्व में करौली राज्य की राजधानी थी। करौली कस्बे की स्थापना 1348 में यादववंश के&lt;br /&gt;
राजा अजर्ुनपाल ने की थी। इसका मूलत: नाम कल्याणपुरी था जो कल्याणजी के मनिदर के कारण प्रसिद्व था।&lt;br /&gt;
इसको भद्रावती नदी के किनारे होने के कारण भद्रावती नगरी भी कहा जाता था। करौली कस्बा चारों तरफ से&lt;br /&gt;
लाल स्टोन से निर्मित है, जिसकी परिधि 3.7 कि0मी0 है जिसमें 6 दरवाजे 12 खिडकिया है। महाराज गोपालसिंह&lt;br /&gt;
के समय का एक खूबसूरत महल है जिसके रंगमहल एवं दीवाने आम को शीशाओं से बडी खूबसूरती से बनाया&lt;br /&gt;
गया है। इस कस्बे में काफी संख्या में मनिदर है जिसमें प्रमुख मनिदर मदनमोहनजी का है। यह मनिदर सेन्दर&lt;br /&gt;
बरामदे एवं सुसजिजत पेनिटंग से निर्मित है तथा महाराजा गोपालसिंह जी के द्वारा जयपुर से लायी गयी काले&lt;br /&gt;
मार्बल से निर्मित मदनमोहनजी की मूर्ति है। प्रत्येक अमावस्या को मेला लगता है, जिसमें हजारो की संख्य में लोग&lt;br /&gt;
दर्शनार्थ आते है करौली मे जैन मनिदर, जामा मसिजद, र्इदगाह अंजनी माता मनिदर,गोविन्द देव जी मनिदर आदि&lt;br /&gt;
भी धार्मिक आस्था के स्थान है।&lt;br /&gt;
'''हिण्डौन सिटी:'''&lt;br /&gt;
हिण्डौन नगर करौली जिले की सबसे बडी नगरपालिका है। इस पौराणिक एवं ऐतिहासिक नगर की स्थापना&lt;br /&gt;
किसने की इसके सम्बन्ध में इतिहासकार एकमत नही हैं। सम्भवत: यह भूमि हिरण्यकश्यप व भक्त प्रहलाद की&lt;br /&gt;
कर्म भूमि रही है। यहां पर आज भी नृसिंह मनिदर, प्रहलाद कुण्ड, हिरण्यकश्यप के महल, बावडि़यों के अवशेष हैं।&lt;br /&gt;
यहां से कुछ दूरी पर कुण्डेवा, जगर, दानघाटी पौराणिक स्थान है। जनश्रुतियो के अनुसार महाभारत कालीन&lt;br /&gt;
हिडिम्बा नामक राक्षसी की कर्मस्थली भी यही क्षेत्रा रहा था। हिण्डौन वर्तमान में जिले का प्रमुख औधोगिक&lt;br /&gt;
वाणिजियक नगर है यहां से उत्तर-मध्य रेलवे का दिल्ली मुम्बर्इ मार्ग गुजरता है साथ ही राष्ट्रीय राजमार्ग 11 से&lt;br /&gt;
दूरी 41 कि0मी0 है। यहां पर पत्थर तरासी, स्लेट उधोग का करोबार बडे स्तर पर किया जाता है&lt;br /&gt;
'''तिमनगढ़ का किला'''&lt;br /&gt;
यह किला जिला मुख्यालय करौली से 42 किलोमीटर दूर&lt;br /&gt;
मासलपुर कस्बे के पास सिथत है। यहां बेजोड़ पुरातत्व संबंधी मूर्तिया&lt;br /&gt;
हैं। प्रचलित मान्यता के अनुसार संवत 1244 में यदुवंशी शासक&lt;br /&gt;
तिमनपाल ने इस किले का निर्माण कराया थां। कुछ इतिहासकार इस&lt;br /&gt;
किले को 1000 वर्ष से अधिक प्राचीन बताते है किले के अन्दर कर्इ&lt;br /&gt;
शिलालेखाें, उपलब्ध प्राचीन कृतियों से पता चलता है कि इसे किसी&lt;br /&gt;
शिल्पी व कलाप्रेमी ने बसाया था, जो बाद में शासकों के कब्जे मे&lt;br /&gt;
चला गया। किले के चारों ओर पांच फीट मोटा तथा करीब 30 फीट&lt;br /&gt;
ऊंचा परकोटा स्थापत्य कला का अनूठा नमूना है। किले के भीतर बाजार, फर्श, बगीची, मनिदर, कुंए कि अवशेष&lt;br /&gt;
आज भी मौजूद हैं। पूरा किला अपने अन्दर एक पूरा नगर समेटे हुए हैं। प्रवेश द्वार पर अक्सर ब्रहमा, गणेश की&lt;br /&gt;
मूर्तिया नजर आती है, लेकिन यहा प्रेत व राक्षसों के चित्र देखने को मिलते है। किले मे जगह -जगह खणिडत&lt;br /&gt;
मूर्तियाें को देखने से ऐसा लगता है कि यहा मूर्तियों की बहुत बडी मण्डी थी। दुर्ग में छोटे - छोटे कमरे भी हैं,&lt;br /&gt;
जो संभवत: स्नानघर के काम आते होंगे।&lt;br /&gt;
'''मण्डरायल का किला'''&lt;br /&gt;
करौली शहर से 40 किलो मीटर दूर दक्षिण पूर्व में पहाडों के मध्य एक आयताकार पहाडी के नीचे बसी एक&lt;br /&gt;
मध्यकालीन बस्ती है, जो दो प्रान्तों को विभक्त करते&lt;br /&gt;
हुए चम्बल नदीं के किनारे मण्डरायल नाम से जानी&lt;br /&gt;
जाती है । एतिहासिक दृषिट से एक गजिटयर के&lt;br /&gt;
अनुसार यह दुर्ग यादवों के इस क्षेत्र में प्रवेष से पूर्व&lt;br /&gt;
का है । करौली रियासत की विलेज डायरेक्ट्री में&lt;br /&gt;
इसके निर्माणकर्ता के रूप में बीजाबहादुर को दर्षाया&lt;br /&gt;
गया है, जिसकी कौम एंव काल का कोर्इ जिक्र नही&lt;br /&gt;
है । किदवतियों के अनुसार पूर्व में इस दुर्ग पर&lt;br /&gt;
मियां मकन का आधिपत्य होने के कारण उसी के&lt;br /&gt;
नाम से कालान्तर में अपभ्रषं होकर दुर्ग का नाम&lt;br /&gt;
मण्डरायल हो गया । यहां मुख्य दरवाजें के रूप में&lt;br /&gt;
दो गोलाकार गुबंद है । दूसरा दरवाजा सूर्यपोल नाम हैं, जो रानीपुरा इलाके की तरफ उतरता है। इस दरवाजें&lt;br /&gt;
की खासियत है कि पौर से प्रात: से साय तक सूर्य का प्रकाष रहता है । इसके अन्दर एक सुरक्षित टांका ओर&lt;br /&gt;
बाहर दो तालाब है । तालाब के किनारे त्रिदेव भगवान के मनिदर ओर बारहदारी है । पूर्व में इस किले की दीवारों&lt;br /&gt;
पर उर्दु में कुछ घटनायें लिपिबद्व थी , जो अब नष्ट हो चुकी है ।&lt;br /&gt;
'''उंट गिरि दुर्ग'''&lt;br /&gt;
15 वी षताब्दी में स्थापित यह दुर्ग करणपुर के कल्याण पुरा गांव की ऊंची पर्वत श्रृंखला की सुरंगनुमा पहाडी पर&lt;br /&gt;
सिथत है। लगभग 4 कि0मी0 क्षेत्र में फेले इस दुर्ग में 100 फुट की ऊंचार्इ से नीचे षिवलिंगों पर पानी गिरता है।&lt;br /&gt;
इस पानी में बडी मात्रा में षिलाजीत मिलता है। यह दुर्ग भी सामरिक दृषिट से महत्वपूर्ण रहा है। 1506-07 र्इ. में&lt;br /&gt;
सिकन्दर लोदी ने इस पर आक्रमण किया था उस समय इसे ग्वालियर किले की कुंजी कहा जाता था। अंतिम&lt;br /&gt;
मुगल सल्तनत तक इस किले पर यदुवंषियों का ही आधिपत्य रहा।&lt;br /&gt;
'''देव गिरि'''&lt;br /&gt;
उंट गिरि के पूर्व में चम्बल नदी के किनारे सिथत यह किला खण्डहर होते हुए भी अतीत की अनेक घटनाओं का&lt;br /&gt;
साक्षी है। परकोटे के नाम पर आज कुछ भी नही मिलता साथ ही अन्दर के सभी आवासीय भागों को नष्ट किया&lt;br /&gt;
जा चुका है। सन 1506-07 र्इ. में सिकन्दर लोदी के आक्रमण के समय इस किले को सबसे अधिक नुकसान&lt;br /&gt;
पहुचाया गया। वर्तमान में यहां एक बावडी, जर्जर होता षिलालेख तथा कुछ हवेलियों के अवषेष है।&lt;br /&gt;
'''बहादुरपुर का किला'''&lt;br /&gt;
करौली जिला मुख्यालय से 15 किलोमीटर दूर मण्डरायल मार्ग पर ससेड गांव के पास जंगल और सुनसान&lt;br /&gt;
वातावरण में अटल योद्वा सा खडा बहादुरपुर का किला मुगलकालीन स्थापत्य कला का बेजोड नमूना है। दो&lt;br /&gt;
मंजिला नृप गोपाल भवन, सहेली की बाबडी कलात्मक झरोखे 18 फीट लम्बी चीरियों की आमखास कचहरी,&lt;br /&gt;
पंचवीर, मगधराय की छतरी दर्षनीय है। यदुवंषी राजा तिमनपाल के पुत्र नागराज द्वारा निर्मित इस किले का&lt;br /&gt;
विस्तार सन 1566 से 1644 तक होता रहा। जयपुर के राजा सवार्इ जयंिसह ने इस किले में तीन माह तक प्रवास&lt;br /&gt;
किया था।&lt;br /&gt;
'''शहर किला एवं छतरी'''&lt;br /&gt;
नादौती तहसील के ग्राम शहर में यह किला उंची पहाडी पर बना हुआ है तथा आज भी सुरक्षित एवं आबाद है।&lt;br /&gt;
यहा के ठिकानेदार आमेर के राजा पृथ्वीराज के पुत्र पच्चाण के वंषज है। इसमें देवी का प्राचीन मंदिर है।&lt;br /&gt;
'''फतेहपुर किला'''&lt;br /&gt;
करौली जिला मुख्यालय से लगभग 30 कि.मी. दूर कंचनपुर जाने वाले मार्ग पर सिथत यह किला यदु शासकों के&lt;br /&gt;
एक बडे जागीरदार हरनगर के ठाकुर घासीराम द्वारा 1702 र्इ. में निर्मित किया गया। यह किला सुरक्षित अवस्था&lt;br /&gt;
में है।&lt;br /&gt;
'''किला नारौली डांग'''&lt;br /&gt;
सपोटरा उपखण्ड मुख्यालय से .... दूरी पर सिथत यह किला पहाडी के उपर बना हुआ है। तत्कालीन करौली एवं&lt;br /&gt;
जयपुर रियासतों की सीमा पर सिथत नारौली डांग गांव में स्थानीय जागीरदार द्वारा इसका निर्माण कराया गया&lt;br /&gt;
था।&lt;br /&gt;
'''भवरविलास पैलेस'''&lt;br /&gt;
करौली के पूर्व शासक रहे राजा भंवर पाल के नाम से पूर्व नरेषों का यह&lt;br /&gt;
आवास उत्कृष्ट वास्तु एवं षिल्प समेटे हुए नगर के दक्षिण में मंडरायल&lt;br /&gt;
रोड पर सिथत है। वर्तमान में इसे होटल का रूप दिया हुआ है।&lt;br /&gt;
'''हरसुख विलास'''&lt;br /&gt;
करौली में आने वाला प्रत्येक अतिथि हरसुख विलास की वास्तु एवं षिल्प&lt;br /&gt;
से प्रभावित हुए बिना नही रह सकता।&lt;br /&gt;
'''रामठरा किला'''&lt;br /&gt;
भारत के प्रमुख वन्य जीव अम्भारण्य रगथम्भोर एवं घना पक्षी बिहार भरतपुर के बीच करौली जिले के सपोटरा&lt;br /&gt;
उपखण्ड में सिथत रामठरा फोर्ट कैलादेवी राष्ट्रीय अम्भारण्य से मात्र 15 किलोमीटर दूर है।&lt;br /&gt;
'''सुख विलास बाग एवं शाही कुण्ड'''&lt;br /&gt;
जिला मुख्यालय सिथत भ्रदावती नदी के किनारे एक सुन्दर महलनुमा चारदिवारी के अन्दर बाग लगाया गया था&lt;br /&gt;
जिसका उपयोग रानिया अपने आमोद-प्रमोद के लिए करती थी इसे सुख विलास बाग कहते है। शहर के पर&lt;br /&gt;
कोटे के बहार सुखविलास के पास भव्य शाही कुण्ड बना हुआ है तीन मंजिला बावडीनुमा इस कुण्ड की बनावट&lt;br /&gt;
अद्वितीय है इसमें प्रत्येक मंजिल पर बरामदे एवं उतरने हेतू चारो तरफ सिढियां बनी है। रियासत काल में इस&lt;br /&gt;
कुण्ड का उपयोग शहर में पेयजल सप्लार्इ के लिए किया जाता था।&lt;br /&gt;
'''दरगाह कबीरषाह'''&lt;br /&gt;
करौली पषिचम द्वार पर वजीरपुर गेट एवं सायनाथ खिडकियां के मध्य आज से लगभग 120 वर्ष पूर्व बनार्इ गर्इ&lt;br /&gt;
एक सूफी संत की दरगाह उत्कृष्ट षिल्प का नमूना है। इसकी खासियत यह है कि इसमें दरवाजे भी पत्थर के&lt;br /&gt;
बनाये हुए है। पत्थर पर की गर्इ नक्कासी बरबस ही दर्षको का मन मोह लेती है।&lt;br /&gt;
'''रावल पैलेस (राजमहल)'''&lt;br /&gt;
तेरहवी षताब्दी में स्थापित राजमहल (रावल पैलेस) लाल व सफेद पत्थर के षिल्प का बेजोड नमूना है। नक्कषी&lt;br /&gt;
व कलात्मक चितराम से सुसजिजत विषाल द्वार, जालीदार झरोखे, तोपखाना, नाहर कटहरा, सुर्री गुर्ज, गोपालसिंह&lt;br /&gt;
अखाडा, भवर बैंक, नजर बगीची, मानिक महल, फब्बारा कण्ड, बारह दरी, गोपाल मनिदर, दीवान ए आम, फौज&lt;br /&gt;
कचहरी, किरकिरी खाना, ज्ञान बगला, षीष महल, मोतीमहल, हरविलास, रंगलाल, गेंदघर, टेडा कुआ, जनानी&lt;br /&gt;
डयौढी आदि कुषल स्थापत्य के साथ-साथ यहां की सभ्यता व संस्कृति के परिचायक है।&lt;br /&gt;
'''अन्य'''&lt;br /&gt;
करौली में महाराजा गोपालसिंहजी की छतरी, रणगमा तालाब, सुख विलास कुण्ड, एवं षिकारगंज आदि करौली के&lt;br /&gt;
पुरा वैभव प्रतीक है। साथ ही जिले के सपोटरा में नारौली डांग का किला, गढमोरा (नादौती) में राजा मोरध्वज का&lt;br /&gt;
महल व मनिदर, षहर सोप का ऊची पहाडी पर निर्मित किला, हिण्डौन की पुरानी कचहरी व प्रहलाद कुण्ड जैसे&lt;br /&gt;
दर्षनीय ऐतिहासिक स्थल हमारी संस्कृति की पहचान है।&lt;br /&gt;
'''धार्मिक स्थल&lt;br /&gt;
महावीर जी'''&lt;br /&gt;
दिगम्बर जैन संप्रदाय का भारत का एक प्रमुख स्थान है। यहा पर भगवान महावीर की&lt;br /&gt;
400 वर्ष पुरानी मूर्ति है। महावीर जी में निर्मित मनिदर आधुनिक एवं प्राचीन शिल्पकला&lt;br /&gt;
का बेजोड़ नमूना है। मनिदर को एक बहुत बडे प्लेटफार्म पर सफेद मार्बल से बनाया&lt;br /&gt;
गया है। इसकी छतरी दूर से दिखायी देती है, जो लाल बलुआ पत्थर की है। मनिदर&lt;br /&gt;
पर नक्काशी का कार्य भी अति सुन्दर है। मनिदर के ठीक सामने मान स्तम्भ बना हुआ&lt;br /&gt;
है। जिसमें जैन तीर्थकर की प्रतिमा है। मनिदर के पीछ कटला एवं चरण मनिदर है,&lt;br /&gt;
जहां पर दर्शनार्थी श्रद्वापूर्वक दर्शन को जाते है। प्रतिवर्ष चैत्र सुदी 11 से बैशाख सुदी&lt;br /&gt;
2 तक (मार्च-अप्रैल) मेला लगता है, जिसमें लाखों लोग विभिन्न क्षेत्रों से यहां आते हैं।&lt;br /&gt;
मेले के अन्त में रथया़त्रा का आयोजन किया जाता है।&lt;br /&gt;
'''कैलादेवी मनिदर'''&lt;br /&gt;
करौली से 24 कि0मी0 दूर यह प्रसिद्व धार्मिक स्थल है। जहां प्रतिवर्ष&lt;br /&gt;
मार्च - अपै्रल माह मे एक बहुत बडा मेला लगता है। इस मेले में&lt;br /&gt;
राजस्थान के अलावा दिल्ली, हरियाणा, मध्यप्रदेष, उत्तर प्रदेष के&lt;br /&gt;
तीर्थ यात्री आते है। मुख्य मनिदर संगमरमर से बना हुआ है जिसमें&lt;br /&gt;
कैला (महालक्ष्मी) एवं चामुण्डा देवी की प्रतिमाऐं हैं। कैलादेवी की&lt;br /&gt;
आठ भुजाऐं एवं सिंह पर सवारी करते हुए बताया है। यहां क्षेत्रीय&lt;br /&gt;
लांगुरियां के गीत विषेष रूप से गाये जाते है। जिसमें लागुरियां के&lt;br /&gt;
माध्यम से कैलादेवी को अपनी भकित-भाव प्रदर्षित करते है।&lt;br /&gt;
'''बालाजी'''&lt;br /&gt;
यह एक छोटा सा गांव टोडाभीम तहसील से 5 कि0मी0 दूर है तथा जयपुर-आगरा राष्ट्रीय राज्यमार्ग से जुडा&lt;br /&gt;
हुआ है। हिन्दुओ की आस्था का महत्वपूर्ण स्थान है। यहां पर पहाडी की तलहटी मे निर्मित हनुमानजी का बहुत&lt;br /&gt;
पुराना मनिदर है। लोग काफी दूर-दूर से यहां आते है। ऐसी मान्यता है कि हिस्टीरिया एवं डिलेरियम के रोगी&lt;br /&gt;
दर्षन लाभ से स्वस्थ होकर लोैटते है। होली एवं दीपावली के त्यौहार पर काफी संख्या मे लोग यहां दर्षन के&lt;br /&gt;
लिए आते है।&lt;br /&gt;
'''मदनमोहन जी'''&lt;br /&gt;
श्री मदन मोहन देवालय मुख्यालय के आंचल में महलों के पास वृहद&lt;br /&gt;
भव्य परिसर के धेरे मे सिथत है जहां भगवान राधा मदनमोहन के साथ&lt;br /&gt;
श्रीगोपालजी की मनमोहनी प्रतिमाएं प्रतिषिठत है। जिनकी सेवा गौड&lt;br /&gt;
सम्प्रदायी गुसार्इयों के माध्यम से बहुत सुन्दर तरीकों से होती आ रही&lt;br /&gt;
है। मंगला से शयन तक हजारो भक्तों का समुह प्रत्येक झांकी पर&lt;br /&gt;
उपसिथत रहता है। मदनमोहनजी की कुल आठ झांकी सकल मनोरथ&lt;br /&gt;
पूर्ण करने वाली हैं । मूलरूप से इन दोनो प्रतिमाओं को उडीसा और&lt;br /&gt;
वृदावन में प्रतिषिठत कराया गया था। कालान्तर में यही प्रतिमाएं&lt;br /&gt;
विभिन्न श्रोतों के माध्यम से आज इस पावन नगरी में भक्तों के वास्ते प्रेरणा की श्रोत बनी हुर्इ है।&lt;br /&gt;
'''शिल्प एवं उधोग'''&lt;br /&gt;
करौली जिलें में षिल्प के उत्कृष्ट नमूने पाये जाते है । वास्तुषिल्प&lt;br /&gt;
के रूप में महाराजा गोपाल सिंह के शासन काल से षिल्प के क्षेत्र&lt;br /&gt;
में भारी विकास हुआ है । जिसका साक्षात प्रमाण करौली दुर्ग के&lt;br /&gt;
रूप में है । 14वीं शताब्दी में निर्मित यह महल जहा साधारण&lt;br /&gt;
दिखार्इ देते है । वही इस किले का बाहरी हिस्सा जो 17वी शताब्दी&lt;br /&gt;
में बनाया गया था । षिल्प का उत्कृष्ट उदाहरण है । बैहरदह में&lt;br /&gt;
बौहरों की हवेली एंव करौली नगर के कर्इ कलापूर्ण एंव भवनों का&lt;br /&gt;
षिल्प दर्षन अपनी ओर आकर्षित कर लेता है । इनके अतिरिक्त मा&lt;br /&gt;
साहब का मनिदर, दीवान साहब की हवेली, पदम तालाब की&lt;br /&gt;
हवेलियां एंव रतियापुरा एंव कसारा की परेंडी विषेष षिल्पकला के नमूने है ।&lt;br /&gt;
'''जिला एक दृषिट में'''&lt;br /&gt;
भौगोलिक सिथति 26 डिग्री 3 से 26 डिग्री 49 उत्तरी अक्षांष&lt;br /&gt;
76 डिग्री 35 से 77 डिग्री 26 पूर्वी देषान्तर के मध्य&lt;br /&gt;
भौगोलिक क्षेत्रफल 5069.64 वर्ग किमी0 वन क्षेत्र के अन्तर्गत 1658.19 कि0मी0&lt;br /&gt;
समुद्रतल से ऊंचार्इ 400 से 600 मीटर&lt;br /&gt;
तापमान अधिकतम 49 डिग्री न्यूनतम 2 डिग्री&lt;br /&gt;
जिले की औसत वर्षा 668.86 मिलीमीटर 1 जनवरी 05 से आज तक की&lt;br /&gt;
वर्षा&lt;br /&gt;
555.23 मि.मी.&lt;br /&gt;
भौगोलिक क्षेत्रफल 505217 वन 172499&lt;br /&gt;
अकृषि योग्य भूमि 19361 स्थार्इ चरागाह 30818&lt;br /&gt;
भूमि उपयोग&lt;br /&gt;
(हैक्टर में) कृषि योग्य भूमि 185871&lt;br /&gt;
115076 हैक्टर&lt;br /&gt;
नहरो से 19761 तालाबों से 5471&lt;br /&gt;
नलकूपो से 29320 कुएं से 60470&lt;br /&gt;
शुद्ध ंिसंचित क्षेत्र&lt;br /&gt;
(हैक्टर में)&lt;br /&gt;
अन्य से 54&lt;br /&gt;
लोक सभा क्षेत्र करौली-धौलपुर&lt;br /&gt;
विधान सभा क्षेत्र 4 (करौली, हिण्डौन, टोडाभीम, सपोटरा)&lt;br /&gt;
उप खण्ड 6 (करौली, हिण्डौन, टोडाभीम, सपोटरा, मंडरायल, नादौती)&lt;br /&gt;
तहसील 6 (करौली, हिण्डौन, टोडाभीम, सपोटरा,मंडरायल, नादौती)&lt;br /&gt;
उप तहसील 2 (करनपुर, मासलपुर)&lt;br /&gt;
पंचायत समिति 5 (करौली, हिण्डौन, टोडाभीम, सपोटरा, नादौती)&lt;br /&gt;
नगरपालिका 3 (करौली, हिण्डौन, टोडाभीम)&lt;br /&gt;
पटवार मंडल 254&lt;br /&gt;
ग्राम पंचायत 223 ( 101 ग्रा.प. डांग क्षेत्र में )&lt;br /&gt;
राजस्व ग्राम 878&lt;br /&gt;
आवाद ग्राम 836&lt;br /&gt;
मुख्य व्यवसाय खनिज, बीड़ी उधोग&lt;br /&gt;
मुख्य नदियां भद्रावती, गम्भीर, बरखेड़ा, चम्बल&lt;br /&gt;
पषु गणना 8,14,427&lt;br /&gt;
कुल 1458459 पुरुष 784943&lt;br /&gt;
जनसंख्या महिला 673516&lt;br /&gt;
लिंग अनुपात&lt;br /&gt;
( प्रति 1000 पु. )&lt;br /&gt;
858&lt;br /&gt;
जनसंख्या घनत्व 264 प्रति वर्ग कि.मीकुल&lt;br /&gt;
67.34 प्रतिषत&lt;br /&gt;
साक्षरता महिला 49.18 प्रति. पुरुष 82.96 प्रतिकैलादेवी&lt;br /&gt;
मेला श्री महावीर जी मेला मदन मोहन जी का&lt;br /&gt;
मेला&lt;br /&gt;
मेले एवं त्यौहार&lt;br /&gt;
बाला जी का लक्खी&lt;br /&gt;
मेला&lt;br /&gt;
अंजनी माता का मेला&lt;br /&gt;
ऐतिहासिक स्थल तिमनगढ़ का किला मण्डरायल का किला&lt;br /&gt;
श्री महावीर जी कैलादेवी&lt;br /&gt;
पर्यटन स्थल&lt;br /&gt;
आध्यातिमक स्थल मदन मोहन जी का मंदिर मेहन्दीपुर बाला जी&lt;br /&gt;
पुलिस उपअधीक्षक वृत 4 पुलिस थाना 16&lt;br /&gt;
पुलिस चौकी 16&lt;br /&gt;
जेल 2&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:राजस्थान]][[Category:राजस्थान के ज़िले]]&lt;br /&gt;
[[Category:भारत के ज़िले]][[Category:गणराज्य संरचना कोश]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Pankaj pathak</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%8C%E0%A4%B2%E0%A5%80_%E0%A4%9C%E0%A4%BC%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A4%BE&amp;diff=280845</id>
		<title>करौली ज़िला</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://loginhi.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%8C%E0%A4%B2%E0%A5%80_%E0%A4%9C%E0%A4%BC%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A4%BE&amp;diff=280845"/>
		<updated>2012-06-27T13:48:55Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Pankaj pathak: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा ज़िला&lt;br /&gt;
|चित्र=http://karauli.nic.in/slide/collactract.JPG KARAULI]&lt;br /&gt;
|चित्र का नाम=करौली&lt;br /&gt;
|राज्य=-राजस्थान&lt;br /&gt;
|मुख्यालय=करौली&lt;br /&gt;
|स्थापना=-1 मार्च 1997&lt;br /&gt;
|जनसंख्या=-1458459&lt;br /&gt;
|क्षेत्रफल=-5070 वर्ग कि . मी .&lt;br /&gt;
|भौगोलिक निर्देशांक=-&lt;br /&gt;
|तहसील=-6&lt;br /&gt;
|मंडल=-&lt;br /&gt;
|खण्डों की सँख्या=-6&lt;br /&gt;
|आदिवासी=-&lt;br /&gt;
|विधान सभा क्षेत्र =-&lt;br /&gt;
|लोकसभा=-&lt;br /&gt;
|नगर पालिका=-3&lt;br /&gt;
|नगर निगम=-&lt;br /&gt;
|नगर=-&lt;br /&gt;
|क़स्बे=-&lt;br /&gt;
|कुल ग्राम=-881&lt;br /&gt;
|विद्युतीकृत ग्राम=-&lt;br /&gt;
|मुख्य ऐतिहासिक स्थल=-&lt;br /&gt;
|मुख्य पर्यटन स्थल=-कैला देवी,श्री महावीर जी&lt;br /&gt;
|वनक्षेत्र=-172459 हैक्‍ट&lt;br /&gt;
|बुआई क्षेत्र =-201819 हैक्‍ट&lt;br /&gt;
|सिंचित क्षेत्र =-&lt;br /&gt;
|नगरीय जनसंख्या=-&lt;br /&gt;
|ग्रामीण जनसंख्या=-&lt;br /&gt;
|राजस्व ग्राम=-&lt;br /&gt;
|आबादी रहित ग्राम=-&lt;br /&gt;
|आबाद ग्राम=-&lt;br /&gt;
|नगर पंचायत=-&lt;br /&gt;
|ग्राम पंचायत=-&lt;br /&gt;
|जनपद पंचायत=-&lt;br /&gt;
|सीमा=-&lt;br /&gt;
|अनुसूचित जाति=-&lt;br /&gt;
|अनुसूचित जनजाति=-&lt;br /&gt;
|प्रसिद्धि=-&lt;br /&gt;
|लिंग अनुपात=-&lt;br /&gt;
|साक्षरता=-&lt;br /&gt;
|स्त्री=-&lt;br /&gt;
|पुरुष=-&lt;br /&gt;
|ऊँचाई=-&lt;br /&gt;
|तापमान=-&lt;br /&gt;
|ग्रीष्म=-&lt;br /&gt;
|शरद=-&lt;br /&gt;
|वर्षा=-&lt;br /&gt;
|दूरभाष कोड=-&lt;br /&gt;
|वाहन पंजी.=-34&lt;br /&gt;
|संबंधित लेख=&lt;br /&gt;
|पाठ 1=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=&lt;br /&gt;
|पाठ 2=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 2=&lt;br /&gt;
|पाठ 3=&lt;br /&gt;
|शीर्षक 3=&lt;br /&gt;
|अन्य जानकारी=वेब जाल-http://karauli.nic.in&lt;br /&gt;
|बाहरी कड़ियाँ=&lt;br /&gt;
|अद्यतन=&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
{{ज़िला लेख}}&lt;br /&gt;
'''ऐतिहासिक पृष्ठभूमि'''&lt;br /&gt;
|जिला करौली का क्षेत्र पुराने करौली राज्य तथा जयपुर राज्य की गंगापुर एवं हिण्डौन निजामतों में आता&lt;br /&gt;
है। कल्याणपुरी नामक इस क्षेत्र को वर्तमान स्वरूप प्रदान करने का श्रेय यदुवंसी राजाओं को जाता है। कार्ल&lt;br /&gt;
माक्र्स और कर्नल टाड ने अपनी पुस्तक में भी इसका वर्णन किया है। करौली राज्य अप्रैल 1949 को मत्स्य संघ में&lt;br /&gt;
समिमलित हुआ बाद में जयपुर राज्य के साथ मिलकर वृहत संयुक्त राज्य राजस्थान का भाग बना। राजस्थान&lt;br /&gt;
सरकार द्वारा 1 मार्च 1997 को सवार्इमाधोपुर जिले की पांच तहसीलों को मिलाकर एक अलग जिला करौली का&lt;br /&gt;
गठन किया। 15 जुलार्इ 1997 को करौली जिला निर्माण की अधिसूचना जारी करते हुए तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री&lt;br /&gt;
भैराेंसिंह शेखावत ने 19 जुलार्इ 1997 को इस जिले का उदधाटन&lt;br /&gt;
किया। 2011 की जनगणना के अनुसार जिले की जनसंख्या 1458459&lt;br /&gt;
तथा क्षेत्रफल 5043 वर्ग किलोमीटर है। राज्य की प्रमुख नदी चम्बल&lt;br /&gt;
इस जिले को मध्यप्रदेश राज्य से अलग करती है। इस जिले में&lt;br /&gt;
बहुसंख्या में पाये जाने वाले किले एवं गढ इसके पुराने गौरव की ओर&lt;br /&gt;
संकेत करते है। इनमें से तिमनगढ, उटगिरी, मण्डरायल के किलों का&lt;br /&gt;
देश के मध्यकालीन इतिहास&lt;br /&gt;
में प्रमुख स्थान रहा है।&lt;br /&gt;
तिमनगढ के किले पर यदुवंश&lt;br /&gt;
की प्रमुखता रही है। सन 1093 से 1159 में राजा तिमनपाल इस वंश का&lt;br /&gt;
शकितशाली राजा था, जिसने अपनी शकित को बढाकर तिमनगढ का&lt;br /&gt;
निर्माण कराया। ऐतिहासिक महापुरूषों के नाम की अनेक छतरियां इस&lt;br /&gt;
क्षेत्र में आज भी मौजूद है। तिमनगढ, करौली, हिण्डौन आदि स्थानों में&lt;br /&gt;
पाये गये प्रारभिभक तथा मध्ययुग के मूर्तिकला एवं वास्तुकला के नमूने&lt;br /&gt;
पुराने समय में भव्य मंदिरों का होना सि़द्ध करते है। राजा मोरध्वज की&lt;br /&gt;
नगरी गढमोरा करौली जिले में है, जहां आज भी पुराने अवशेष मौजूद है।&lt;br /&gt;
'''भौगोलिक सिथति एवं जलवायु'''&lt;br /&gt;
करौली अपनी भौगोलिक विशिष्टताओं के लिए भी विख्यात है। यह जिला प्राकृतिक सौन्दर्य से भरपूर एवं&lt;br /&gt;
विध्याचंल व अरावली पर्वत मालाओं से आच्छादित है। जिले का कुछ भाग समतल एवं कुछ भाग उचा नीचा एवं&lt;br /&gt;
पहाडियों वाला है। करौली मण्डरायल उपखण्ड को पहाडी इलाका कहा जाता है जबकि बाकी क्षेत्र सामान्यता&lt;br /&gt;
समतल एवं मैदानी है। मैदानी क्षेत्र उपजाऊ है तथा यहा की मिटटी हल्की एवं रेतीली है। करौली एवं मण्डरायल&lt;br /&gt;
उपखण्ड का क्षेत्र, जो स्थानीय भाषा में डांग कहलाता है, पहाडियों एवं नदियों से भरा है।&lt;br /&gt;
जिले की ऊचार्इ समुन्द्र की सतह से 400 से 600 मीटर तक है। जिले के पशिचम में दौसा, दक्षिण पशिचम में&lt;br /&gt;
सवार्इमाधोपुर, उत्तर पूर्व में धौलपुर तथा पशिचम उत्तर में भरतपुर जिले की सीमाएं लगती है। यह जिला 26&lt;br /&gt;
डिग्री 3 सै. से 49 डिग्री उत्तर पशिचम अक्षाश तथा 76 डिग्री 35 से 77 डिग्री 26 पूर्व देशान्तरों के मध्य सिथत&lt;br /&gt;
है।&lt;br /&gt;
जिले में अल्पकालीन मौसम के अलवा शेष समय जलवायु शुष्क रहती है। सर्दी नवम्बर माह के प्रथम सप्ताह से&lt;br /&gt;
मार्च तक रहती है, जबकि गर्मी मार्च के अन्त से जून के तीसरे सप्ताह तक रहती है। जिले की सामान्य वार्षिक&lt;br /&gt;
वर्ष 668.86 मि.मी. है। जिले में औसतन 35 दिन वर्षा होती है। जिले का दैनिक अधिकतम तापमान का औसत मर्इ&lt;br /&gt;
माह में 49 डिग्री सेल्सीयस रहता है तथा न्यूनतम 2.00 डिग्री सैलिस. जनवरी में रहता है।&lt;br /&gt;
'''प्रशासनिक व्यवस्था'''&lt;br /&gt;
प्रशासनिक व्यवस्था के अन्तर्गत जिला कलेक्टर जिले का सर्वोच्च अधिकारी होने के साथ-साथ समस्त प्रशासनिक&lt;br /&gt;
एवं कानून व्यवस्थाओं के लिए उत्तरदायी है। जिले को छ: उपखण्डो करौली, हिण्डौन, सपोटरा, मण्डरायल,&lt;br /&gt;
टोडाभीम एवं नादौती में विभाजित किया हुआ है। इन उपखण्डों को 5 पंचायत समिति एवं 6 तहसीलों में&lt;br /&gt;
विभाजित कर क्षेत्राधिकारी निर्धारण किया हुआ है। जिलें में तीन नगरपालिका क्रमश: करौली, हिण्डौन एवं&lt;br /&gt;
टोडाभीम हंै। जिले के प्रशासनिक स्वरूप में जनभागीदारी के रूप में एक लोकसभा सदस्य तथा चार विधानसभा&lt;br /&gt;
सदस्य है।&lt;br /&gt;
'''भूगर्भ एवं खनिज'''&lt;br /&gt;
जिला करौली एक तरफ से चम्बल तथा तीन तरफ से मैदानों से घिरा हुआ है। इसके मैदान&lt;br /&gt;
कैमबि्रयन-पूर्व की आग्नेय चêानों तथा उनकी तलछट से बनी चêानों के रूपान्तरण से बने है । अरावली की पूर्व&lt;br /&gt;
चêाने स्फटिक, अभ्रक, नार्इसिस्ट, मिग्मा टाइटस आदि की बनी हुर्इ है। महान विंध्य श्रेणी की चêाने जिनमें&lt;br /&gt;
कैमूल, रीवा, भाण्डेर प्रमुख है, विभिन्न प्रकार के सलेटी पत्थर, बालू पत्थर तथा चूना पत्थर से परिपूर्ण है। जिला&lt;br /&gt;
अनेक प्रकार के धातिवक एवं अधातिवक खनिजों से परिपूर्ण है। धातुओं में शीषा, तांबा, लोहा अयस्क आदि तथा&lt;br /&gt;
अधातुओं में चूना, पत्थर, चिकनी मिêी, सिलिका ,सैलरूडा आदि प्रमुख रूप से पाये जाते है।&lt;br /&gt;
इसके अलावा जिले में लेट्रार्इट, रेड आक्सार्इड, बैनेटोनार्इट, बेरार्इट, मैगनीज मिêी तथा काली मिêी पार्इ&lt;br /&gt;
जाती है । जिले में विभिन्न प्रकार की चêानों से मिलने वाले खनिज जैसे र्इमारत बनाने के पत्थर, सजावट के&lt;br /&gt;
पत्थर आदि प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है । भाण्डेर श्रेणी का गुलाबी पत्थर एवं सफेद निषानों वाला पत्थर करौली&lt;br /&gt;
एवं हिण्डौन क्षेत्र में काफी मात्रा में पाया जाता है । सीमेन्ट श्रेणी का चूना पत्थर एवं सिलिकासैण्ड सपोटरा&lt;br /&gt;
,नादौती क्षेत्र मे पाया जाता है। खनिज अभियन्ता करौली के अन्तर्गत इस जिलें की छ: तहसीलों के अलावा सवार्इ&lt;br /&gt;
माधोपुर जिले की दो तहसील गंगापुर एंव बामनवास आती है । इस क्षेत्र में मुख्यरूप से खनिज , सेण्ड स्टोन ,&lt;br /&gt;
मैषनरी स्टेान , सोप स्टोन , सिलिका सेण्ड इत्यादि का खनन होता है । इस खण्ड में कुल 260 खनन पटटे&lt;br /&gt;
स्वीकृत है । जिनका क्षेत्रफल 15568 हैक्टर है । जिसमें से करीब 13210 हैक्टर क्षेत्र में खनिज सेण्ड स्टोन का है&lt;br /&gt;
। उक्त 260 खनन पटटों से सिथर भाटक रू 11059000 प्राप्त होता है एंव अधिक अधिषुल्क रायल्टी कलेक्टषन&lt;br /&gt;
ठेंको को शामिल करते हुए वित्तीय वर्ष 2001-02 में कुल 381.06 लाख की आय विभाग को हुर्इ थी ।&lt;br /&gt;
'''वनस्पति, वन सम्पदा'''&lt;br /&gt;
जिले मे पाये जाने वाले महत्वपूर्ण पेड़ नीम बबूल ,बेरी, धौंक, रोंझ,तेन्दु, सालर, खैर, सनथा, जामुन, आम, घनेरी,&lt;br /&gt;
बास, खेजडा, बरगद, पीपल आदि है। इस क्षेत्र में पार्इ जाने वाली प्रमुख जडी बूटिया ओधीझाडा, चीचड़ा, पोलर,&lt;br /&gt;
कालीलम्प, लपला, कंैच, गूगल आदि है। जिले में सिथत वनों से इमारती लकड़ी, र्इधन, लकड़ी का कोयला, पशुओं&lt;br /&gt;
के लिए चारा, घास-फूस, तेन्दूपत्ता, गोंद, धौक के पत्ते, शहद, मोम, जड़ी बूटिया फल, कत्था, कंरज तथा दूसरी&lt;br /&gt;
अन्य उपयोगी वस्तुएें प्राप्त होती है।&lt;br /&gt;
'''जीव जन्तु'''&lt;br /&gt;
जिला करौेली वन्य प्राणियों के मामले में सम्पन्न है इसमें विभिन्न प्रकार के वन्य जीव पाये जाते है जिनमें तेन्दुएें,&lt;br /&gt;
जंगली कुत्ता, सांभर, नील गाय, चीतल, चिंकारा, जंगली सुअर, रीछ प्रमुख हैं। जिलें में कैलादेवी वन्य अभ्यारण्य&lt;br /&gt;
सन 1983 में स्थापित किया गया था, जिसको सन 1991 में रणथम्भौर रिजर्व के नजदीक मानते हुए संरक्षित वन&lt;br /&gt;
क्षेत्र एवं वन्य जीव अभ्यारण्य घोषित किया गया है जिसमे यदा कदा बाघ देखे जा सकते है। अभ्यारण्य का&lt;br /&gt;
क्षेत्रफल 674 वर्ग कि0मी0 है।&lt;br /&gt;
'''फसल पद्धति:'''&lt;br /&gt;
जिले मे तीनों मौसमों में फसल की बुबार्इ का कार्य होता है खरीफ वर्षा पर आधारित है। जो जुलार्इ माह में&lt;br /&gt;
प्रारम्भ होता है । इसमें बोर्इ जाने वाली मुख्य फसलें बाजरा, मक्का, तिल, ज्वार, ग्वार आदि हैं। रबी की बुवार्इ&lt;br /&gt;
अक्टूबर से प्रारम्भ होती है, जिसमें मुख्यतया जौ, चना, गेहू , सरसों की बुवार्इ होती है। यहा के लोगो का मुख्य&lt;br /&gt;
व्यवसाय कृषि एवं खनन कार्य है। भूमिगत पानी की कमी एवं सिंचार्इ सुविधा की कमी के कारण कृषि मुख्यतया&lt;br /&gt;
वर्षा पर निर्भर है। कृषि विपणन के लिए जिले में हिण्डौन में कृषि उपज मण्डी एवं करौली, टोडाभीम में गौण मंडी&lt;br /&gt;
हैं।&lt;br /&gt;
'''हस्तकला'''&lt;br /&gt;
करौली की हस्तकला में प्रमुख स्थान लाख की चूडियों का है लगभग एक लाख रूपये की चूडियों का&lt;br /&gt;
प्रतिवर्ष अन्य प्रांतों में निर्यात किया जाता है। चूडियों बनाने का काराबार जिले में हिण्डौन एवं करौली शहरों में&lt;br /&gt;
स्थानीय लखेरा एवं मुसिलम सम्प्रदाय के लोगों द्वारा किया जाता है। इस कार्य में करीब पांच सौ लोगों को&lt;br /&gt;
रोजगार मिला हुआ है। इसके अलावा करौली जिले मेें लकडी के खिलौने, घरेलू उपयोग की सामगि्रयों में&lt;br /&gt;
चकला-बेलन, दही बिलौने की रर्इ, लकके चम्मच एवं चारपार्इ व दीवान आदि भी बनाएं जाते हैं। वर्तमान में पत्थर&lt;br /&gt;
तराषी कर मूर्तियों एवं जाली झरोखे बनाने का कार्य भी रीको क्षेत्र हिण्डौन व करौली में किये जाने लगा है।&lt;br /&gt;
'''सामाजिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियां'''&lt;br /&gt;
जिले मे लोगों के सांस्कृतिक, धार्मिक एवं सामाजिक जीवन में मेले एवं त्यौहारों का महत्वपूर्ण स्थान है। अधिकांष&lt;br /&gt;
मौसमी एवं धार्मिक महत्व के है। इन मेलों का व्यापारिक, पर्यटन एवं सांस्कृतिक दृषिट से एकता के लिए महत्वपूर्ण&lt;br /&gt;
स्थान हैं। जिले के मुख्य मेले कैलादेवी मेला, महावीरजी, मेहन्दीपुर बालाजी एवं मदनमोहनजी के है, जिनमें लाखों&lt;br /&gt;
की संख्या में दर्षनार्थी आते है। राज्य के अन्य हिस्सों की तरह इस जिले में भी हिन्दुओं के रक्षाबन्धन, होली,&lt;br /&gt;
दीपावली, जन्माष्टमी, दषहरा, गणगौर तथा मुसलमानों के इदुलजुहा, रमजान, इदुलफितर त्योहार प्रमुख हैं।&lt;br /&gt;
ऐतिहासिक एवं पुरातातिवक स्थल जिले में निम्नलिखित विषेष महत्व के स्थान है&lt;br /&gt;
वर्तमान जिला मुख्यालय करौली राजपूतानें की प्राचीन रियासतों में से एक प्रमुख रियासत थी। यहां के षासकों&lt;br /&gt;
का सन 1100 से लेकर सन 1947 तक का गौरवषाली इतिहास रहा है। रियासत के यदुवंषी राजाओं ने अपनी&lt;br /&gt;
गरिमा की सुरक्षा, प्रजा के संरक्षण व प्राकृतिक आपदाओं के संधारण हेतु अनेक महल, किले व गढियों का निर्माण&lt;br /&gt;
कराया। इन महलों किलों व गढियों में वास्तु विषेषज्ञता, स्थापत्य कला और चित्रकारी के दुर्लभ नमूने देखने को&lt;br /&gt;
मिलते है। एक प्राचीन राज्य होने के कारण करौली में ऐतिहासिक, धार्मिक व पर्यटक महत्व के स्थानों की बहुलता&lt;br /&gt;
के साथ क्षेत्र में पुरा वैभव विखरा पडा है।&lt;br /&gt;
'''करौली शहर'''&lt;br /&gt;
करौली जिला मुख्यालय पूर्व में करौली राज्य की राजधानी थी। करौली कस्बे की स्थापना 1348 में यादववंश के&lt;br /&gt;
राजा अजर्ुनपाल ने की थी। इसका मूलत: नाम कल्याणपुरी था जो कल्याणजी के मनिदर के कारण प्रसिद्व था।&lt;br /&gt;
इसको भद्रावती नदी के किनारे होने के कारण भद्रावती नगरी भी कहा जाता था। करौली कस्बा चारों तरफ से&lt;br /&gt;
लाल स्टोन से निर्मित है, जिसकी परिधि 3.7 कि0मी0 है जिसमें 6 दरवाजे 12 खिडकिया है। महाराज गोपालसिंह&lt;br /&gt;
के समय का एक खूबसूरत महल है जिसके रंगमहल एवं दीवाने आम को शीशाओं से बडी खूबसूरती से बनाया&lt;br /&gt;
गया है। इस कस्बे में काफी संख्या में मनिदर है जिसमें प्रमुख मनिदर मदनमोहनजी का है। यह मनिदर सेन्दर&lt;br /&gt;
बरामदे एवं सुसजिजत पेनिटंग से निर्मित है तथा महाराजा गोपालसिंह जी के द्वारा जयपुर से लायी गयी काले&lt;br /&gt;
मार्बल से निर्मित मदनमोहनजी की मूर्ति है। प्रत्येक अमावस्या को मेला लगता है, जिसमें हजारो की संख्य में लोग&lt;br /&gt;
दर्शनार्थ आते है करौली मे जैन मनिदर, जामा मसिजद, र्इदगाह अंजनी माता मनिदर,गोविन्द देव जी मनिदर आदि&lt;br /&gt;
भी धार्मिक आस्था के स्थान है।&lt;br /&gt;
'''हिण्डौन सिटी:'''&lt;br /&gt;
हिण्डौन नगर करौली जिले की सबसे बडी नगरपालिका है। इस पौराणिक एवं ऐतिहासिक नगर की स्थापना&lt;br /&gt;
किसने की इसके सम्बन्ध में इतिहासकार एकमत नही हैं। सम्भवत: यह भूमि हिरण्यकश्यप व भक्त प्रहलाद की&lt;br /&gt;
कर्म भूमि रही है। यहां पर आज भी नृसिंह मनिदर, प्रहलाद कुण्ड, हिरण्यकश्यप के महल, बावडि़यों के अवशेष हैं।&lt;br /&gt;
यहां से कुछ दूरी पर कुण्डेवा, जगर, दानघाटी पौराणिक स्थान है। जनश्रुतियो के अनुसार महाभारत कालीन&lt;br /&gt;
हिडिम्बा नामक राक्षसी की कर्मस्थली भी यही क्षेत्रा रहा था। हिण्डौन वर्तमान में जिले का प्रमुख औधोगिक&lt;br /&gt;
वाणिजियक नगर है यहां से उत्तर-मध्य रेलवे का दिल्ली मुम्बर्इ मार्ग गुजरता है साथ ही राष्ट्रीय राजमार्ग 11 से&lt;br /&gt;
दूरी 41 कि0मी0 है। यहां पर पत्थर तरासी, स्लेट उधोग का करोबार बडे स्तर पर किया जाता है&lt;br /&gt;
'''तिमनगढ़ का किला'''&lt;br /&gt;
यह किला जिला मुख्यालय करौली से 42 किलोमीटर दूर&lt;br /&gt;
मासलपुर कस्बे के पास सिथत है। यहां बेजोड़ पुरातत्व संबंधी मूर्तिया&lt;br /&gt;
हैं। प्रचलित मान्यता के अनुसार संवत 1244 में यदुवंशी शासक&lt;br /&gt;
तिमनपाल ने इस किले का निर्माण कराया थां। कुछ इतिहासकार इस&lt;br /&gt;
किले को 1000 वर्ष से अधिक प्राचीन बताते है किले के अन्दर कर्इ&lt;br /&gt;
शिलालेखाें, उपलब्ध प्राचीन कृतियों से पता चलता है कि इसे किसी&lt;br /&gt;
शिल्पी व कलाप्रेमी ने बसाया था, जो बाद में शासकों के कब्जे मे&lt;br /&gt;
चला गया। किले के चारों ओर पांच फीट मोटा तथा करीब 30 फीट&lt;br /&gt;
ऊंचा परकोटा स्थापत्य कला का अनूठा नमूना है। किले के भीतर बाजार, फर्श, बगीची, मनिदर, कुंए कि अवशेष&lt;br /&gt;
आज भी मौजूद हैं। पूरा किला अपने अन्दर एक पूरा नगर समेटे हुए हैं। प्रवेश द्वार पर अक्सर ब्रहमा, गणेश की&lt;br /&gt;
मूर्तिया नजर आती है, लेकिन यहा प्रेत व राक्षसों के चित्र देखने को मिलते है। किले मे जगह -जगह खणिडत&lt;br /&gt;
मूर्तियाें को देखने से ऐसा लगता है कि यहा मूर्तियों की बहुत बडी मण्डी थी। दुर्ग में छोटे - छोटे कमरे भी हैं,&lt;br /&gt;
जो संभवत: स्नानघर के काम आते होंगे।&lt;br /&gt;
'''मण्डरायल का किला'''&lt;br /&gt;
करौली शहर से 40 किलो मीटर दूर दक्षिण पूर्व में पहाडों के मध्य एक आयताकार पहाडी के नीचे बसी एक&lt;br /&gt;
मध्यकालीन बस्ती है, जो दो प्रान्तों को विभक्त करते&lt;br /&gt;
हुए चम्बल नदीं के किनारे मण्डरायल नाम से जानी&lt;br /&gt;
जाती है । एतिहासिक दृषिट से एक गजिटयर के&lt;br /&gt;
अनुसार यह दुर्ग यादवों के इस क्षेत्र में प्रवेष से पूर्व&lt;br /&gt;
का है । करौली रियासत की विलेज डायरेक्ट्री में&lt;br /&gt;
इसके निर्माणकर्ता के रूप में बीजाबहादुर को दर्षाया&lt;br /&gt;
गया है, जिसकी कौम एंव काल का कोर्इ जिक्र नही&lt;br /&gt;
है । किदवतियों के अनुसार पूर्व में इस दुर्ग पर&lt;br /&gt;
मियां मकन का आधिपत्य होने के कारण उसी के&lt;br /&gt;
नाम से कालान्तर में अपभ्रषं होकर दुर्ग का नाम&lt;br /&gt;
मण्डरायल हो गया । यहां मुख्य दरवाजें के रूप में&lt;br /&gt;
दो गोलाकार गुबंद है । दूसरा दरवाजा सूर्यपोल नाम हैं, जो रानीपुरा इलाके की तरफ उतरता है। इस दरवाजें&lt;br /&gt;
की खासियत है कि पौर से प्रात: से साय तक सूर्य का प्रकाष रहता है । इसके अन्दर एक सुरक्षित टांका ओर&lt;br /&gt;
बाहर दो तालाब है । तालाब के किनारे त्रिदेव भगवान के मनिदर ओर बारहदारी है । पूर्व में इस किले की दीवारों&lt;br /&gt;
पर उर्दु में कुछ घटनायें लिपिबद्व थी , जो अब नष्ट हो चुकी है ।&lt;br /&gt;
'''उंट गिरि दुर्ग'''&lt;br /&gt;
15 वी षताब्दी में स्थापित यह दुर्ग करणपुर के कल्याण पुरा गांव की ऊंची पर्वत श्रृंखला की सुरंगनुमा पहाडी पर&lt;br /&gt;
सिथत है। लगभग 4 कि0मी0 क्षेत्र में फेले इस दुर्ग में 100 फुट की ऊंचार्इ से नीचे षिवलिंगों पर पानी गिरता है।&lt;br /&gt;
इस पानी में बडी मात्रा में षिलाजीत मिलता है। यह दुर्ग भी सामरिक दृषिट से महत्वपूर्ण रहा है। 1506-07 र्इ. में&lt;br /&gt;
सिकन्दर लोदी ने इस पर आक्रमण किया था उस समय इसे ग्वालियर किले की कुंजी कहा जाता था। अंतिम&lt;br /&gt;
मुगल सल्तनत तक इस किले पर यदुवंषियों का ही आधिपत्य रहा।&lt;br /&gt;
'''देव गिरि'''&lt;br /&gt;
उंट गिरि के पूर्व में चम्बल नदी के किनारे सिथत यह किला खण्डहर होते हुए भी अतीत की अनेक घटनाओं का&lt;br /&gt;
साक्षी है। परकोटे के नाम पर आज कुछ भी नही मिलता साथ ही अन्दर के सभी आवासीय भागों को नष्ट किया&lt;br /&gt;
जा चुका है। सन 1506-07 र्इ. में सिकन्दर लोदी के आक्रमण के समय इस किले को सबसे अधिक नुकसान&lt;br /&gt;
पहुचाया गया। वर्तमान में यहां एक बावडी, जर्जर होता षिलालेख तथा कुछ हवेलियों के अवषेष है।&lt;br /&gt;
'''बहादुरपुर का किला'''&lt;br /&gt;
करौली जिला मुख्यालय से 15 किलोमीटर दूर मण्डरायल मार्ग पर ससेड गांव के पास जंगल और सुनसान&lt;br /&gt;
वातावरण में अटल योद्वा सा खडा बहादुरपुर का किला मुगलकालीन स्थापत्य कला का बेजोड नमूना है। दो&lt;br /&gt;
मंजिला नृप गोपाल भवन, सहेली की बाबडी कलात्मक झरोखे 18 फीट लम्बी चीरियों की आमखास कचहरी,&lt;br /&gt;
पंचवीर, मगधराय की छतरी दर्षनीय है। यदुवंषी राजा तिमनपाल के पुत्र नागराज द्वारा निर्मित इस किले का&lt;br /&gt;
विस्तार सन 1566 से 1644 तक होता रहा। जयपुर के राजा सवार्इ जयंिसह ने इस किले में तीन माह तक प्रवास&lt;br /&gt;
किया था।&lt;br /&gt;
'''शहर किला एवं छतरी'''&lt;br /&gt;
नादौती तहसील के ग्राम शहर में यह किला उंची पहाडी पर बना हुआ है तथा आज भी सुरक्षित एवं आबाद है।&lt;br /&gt;
यहा के ठिकानेदार आमेर के राजा पृथ्वीराज के पुत्र पच्चाण के वंषज है। इसमें देवी का प्राचीन मंदिर है।&lt;br /&gt;
'''फतेहपुर किला'''&lt;br /&gt;
करौली जिला मुख्यालय से लगभग 30 कि.मी. दूर कंचनपुर जाने वाले मार्ग पर सिथत यह किला यदु शासकों के&lt;br /&gt;
एक बडे जागीरदार हरनगर के ठाकुर घासीराम द्वारा 1702 र्इ. में निर्मित किया गया। यह किला सुरक्षित अवस्था&lt;br /&gt;
में है।&lt;br /&gt;
'''किला नारौली डांग'''&lt;br /&gt;
सपोटरा उपखण्ड मुख्यालय से .... दूरी पर सिथत यह किला पहाडी के उपर बना हुआ है। तत्कालीन करौली एवं&lt;br /&gt;
जयपुर रियासतों की सीमा पर सिथत नारौली डांग गांव में स्थानीय जागीरदार द्वारा इसका निर्माण कराया गया&lt;br /&gt;
था।&lt;br /&gt;
'''भवरविलास पैलेस'''&lt;br /&gt;
करौली के पूर्व शासक रहे राजा भंवर पाल के नाम से पूर्व नरेषों का यह&lt;br /&gt;
आवास उत्कृष्ट वास्तु एवं षिल्प समेटे हुए नगर के दक्षिण में मंडरायल&lt;br /&gt;
रोड पर सिथत है। वर्तमान में इसे होटल का रूप दिया हुआ है।&lt;br /&gt;
'''हरसुख विलास'''&lt;br /&gt;
करौली में आने वाला प्रत्येक अतिथि हरसुख विलास की वास्तु एवं षिल्प&lt;br /&gt;
से प्रभावित हुए बिना नही रह सकता।&lt;br /&gt;
'''रामठरा किला'''&lt;br /&gt;
भारत के प्रमुख वन्य जीव अम्भारण्य रगथम्भोर एवं घना पक्षी बिहार भरतपुर के बीच करौली जिले के सपोटरा&lt;br /&gt;
उपखण्ड में सिथत रामठरा फोर्ट कैलादेवी राष्ट्रीय अम्भारण्य से मात्र 15 किलोमीटर दूर है।&lt;br /&gt;
'''सुख विलास बाग एवं शाही कुण्ड'''&lt;br /&gt;
जिला मुख्यालय सिथत भ्रदावती नदी के किनारे एक सुन्दर महलनुमा चारदिवारी के अन्दर बाग लगाया गया था&lt;br /&gt;
जिसका उपयोग रानिया अपने आमोद-प्रमोद के लिए करती थी इसे सुख विलास बाग कहते है। शहर के पर&lt;br /&gt;
कोटे के बहार सुखविलास के पास भव्य शाही कुण्ड बना हुआ है तीन मंजिला बावडीनुमा इस कुण्ड की बनावट&lt;br /&gt;
अद्वितीय है इसमें प्रत्येक मंजिल पर बरामदे एवं उतरने हेतू चारो तरफ सिढियां बनी है। रियासत काल में इस&lt;br /&gt;
कुण्ड का उपयोग शहर में पेयजल सप्लार्इ के लिए किया जाता था।&lt;br /&gt;
'''दरगाह कबीरषाह'''&lt;br /&gt;
करौली पषिचम द्वार पर वजीरपुर गेट एवं सायनाथ खिडकियां के मध्य आज से लगभग 120 वर्ष पूर्व बनार्इ गर्इ&lt;br /&gt;
एक सूफी संत की दरगाह उत्कृष्ट षिल्प का नमूना है। इसकी खासियत यह है कि इसमें दरवाजे भी पत्थर के&lt;br /&gt;
बनाये हुए है। पत्थर पर की गर्इ नक्कासी बरबस ही दर्षको का मन मोह लेती है।&lt;br /&gt;
'''रावल पैलेस (राजमहल)'''&lt;br /&gt;
तेरहवी षताब्दी में स्थापित राजमहल (रावल पैलेस) लाल व सफेद पत्थर के षिल्प का बेजोड नमूना है। नक्कषी&lt;br /&gt;
व कलात्मक चितराम से सुसजिजत विषाल द्वार, जालीदार झरोखे, तोपखाना, नाहर कटहरा, सुर्री गुर्ज, गोपालसिंह&lt;br /&gt;
अखाडा, भवर बैंक, नजर बगीची, मानिक महल, फब्बारा कण्ड, बारह दरी, गोपाल मनिदर, दीवान ए आम, फौज&lt;br /&gt;
कचहरी, किरकिरी खाना, ज्ञान बगला, षीष महल, मोतीमहल, हरविलास, रंगलाल, गेंदघर, टेडा कुआ, जनानी&lt;br /&gt;
डयौढी आदि कुषल स्थापत्य के साथ-साथ यहां की सभ्यता व संस्कृति के परिचायक है।&lt;br /&gt;
'''अन्य'''&lt;br /&gt;
करौली में महाराजा गोपालसिंहजी की छतरी, रणगमा तालाब, सुख विलास कुण्ड, एवं षिकारगंज आदि करौली के&lt;br /&gt;
पुरा वैभव प्रतीक है। साथ ही जिले के सपोटरा में नारौली डांग का किला, गढमोरा (नादौती) में राजा मोरध्वज का&lt;br /&gt;
महल व मनिदर, षहर सोप का ऊची पहाडी पर निर्मित किला, हिण्डौन की पुरानी कचहरी व प्रहलाद कुण्ड जैसे&lt;br /&gt;
दर्षनीय ऐतिहासिक स्थल हमारी संस्कृति की पहचान है।&lt;br /&gt;
'''धार्मिक स्थल&lt;br /&gt;
महावीर जी'''&lt;br /&gt;
दिगम्बर जैन संप्रदाय का भारत का एक प्रमुख स्थान है। यहा पर भगवान महावीर की&lt;br /&gt;
400 वर्ष पुरानी मूर्ति है। महावीर जी में निर्मित मनिदर आधुनिक एवं प्राचीन शिल्पकला&lt;br /&gt;
का बेजोड़ नमूना है। मनिदर को एक बहुत बडे प्लेटफार्म पर सफेद मार्बल से बनाया&lt;br /&gt;
गया है। इसकी छतरी दूर से दिखायी देती है, जो लाल बलुआ पत्थर की है। मनिदर&lt;br /&gt;
पर नक्काशी का कार्य भी अति सुन्दर है। मनिदर के ठीक सामने मान स्तम्भ बना हुआ&lt;br /&gt;
है। जिसमें जैन तीर्थकर की प्रतिमा है। मनिदर के पीछ कटला एवं चरण मनिदर है,&lt;br /&gt;
जहां पर दर्शनार्थी श्रद्वापूर्वक दर्शन को जाते है। प्रतिवर्ष चैत्र सुदी 11 से बैशाख सुदी&lt;br /&gt;
2 तक (मार्च-अप्रैल) मेला लगता है, जिसमें लाखों लोग विभिन्न क्षेत्रों से यहां आते हैं।&lt;br /&gt;
मेले के अन्त में रथया़त्रा का आयोजन किया जाता है।&lt;br /&gt;
'''कैलादेवी मनिदर'''&lt;br /&gt;
करौली से 24 कि0मी0 दूर यह प्रसिद्व धार्मिक स्थल है। जहां प्रतिवर्ष&lt;br /&gt;
मार्च - अपै्रल माह मे एक बहुत बडा मेला लगता है। इस मेले में&lt;br /&gt;
राजस्थान के अलावा दिल्ली, हरियाणा, मध्यप्रदेष, उत्तर प्रदेष के&lt;br /&gt;
तीर्थ यात्री आते है। मुख्य मनिदर संगमरमर से बना हुआ है जिसमें&lt;br /&gt;
कैला (महालक्ष्मी) एवं चामुण्डा देवी की प्रतिमाऐं हैं। कैलादेवी की&lt;br /&gt;
आठ भुजाऐं एवं सिंह पर सवारी करते हुए बताया है। यहां क्षेत्रीय&lt;br /&gt;
लांगुरियां के गीत विषेष रूप से गाये जाते है। जिसमें लागुरियां के&lt;br /&gt;
माध्यम से कैलादेवी को अपनी भकित-भाव प्रदर्षित करते है।&lt;br /&gt;
'''बालाजी'''&lt;br /&gt;
यह एक छोटा सा गांव टोडाभीम तहसील से 5 कि0मी0 दूर है तथा जयपुर-आगरा राष्ट्रीय राज्यमार्ग से जुडा&lt;br /&gt;
हुआ है। हिन्दुओ की आस्था का महत्वपूर्ण स्थान है। यहां पर पहाडी की तलहटी मे निर्मित हनुमानजी का बहुत&lt;br /&gt;
पुराना मनिदर है। लोग काफी दूर-दूर से यहां आते है। ऐसी मान्यता है कि हिस्टीरिया एवं डिलेरियम के रोगी&lt;br /&gt;
दर्षन लाभ से स्वस्थ होकर लोैटते है। होली एवं दीपावली के त्यौहार पर काफी संख्या मे लोग यहां दर्षन के&lt;br /&gt;
लिए आते है।&lt;br /&gt;
'''मदनमोहन जी'''&lt;br /&gt;
श्री मदन मोहन देवालय मुख्यालय के आंचल में महलों के पास वृहद&lt;br /&gt;
भव्य परिसर के धेरे मे सिथत है जहां भगवान राधा मदनमोहन के साथ&lt;br /&gt;
श्रीगोपालजी की मनमोहनी प्रतिमाएं प्रतिषिठत है। जिनकी सेवा गौड&lt;br /&gt;
सम्प्रदायी गुसार्इयों के माध्यम से बहुत सुन्दर तरीकों से होती आ रही&lt;br /&gt;
है। मंगला से शयन तक हजारो भक्तों का समुह प्रत्येक झांकी पर&lt;br /&gt;
उपसिथत रहता है। मदनमोहनजी की कुल आठ झांकी सकल मनोरथ&lt;br /&gt;
पूर्ण करने वाली हैं । मूलरूप से इन दोनो प्रतिमाओं को उडीसा और&lt;br /&gt;
वृदावन में प्रतिषिठत कराया गया था। कालान्तर में यही प्रतिमाएं&lt;br /&gt;
विभिन्न श्रोतों के माध्यम से आज इस पावन नगरी में भक्तों के वास्ते प्रेरणा की श्रोत बनी हुर्इ है।&lt;br /&gt;
'''शिल्प एवं उधोग'''&lt;br /&gt;
करौली जिलें में षिल्प के उत्कृष्ट नमूने पाये जाते है । वास्तुषिल्प&lt;br /&gt;
के रूप में महाराजा गोपाल सिंह के शासन काल से षिल्प के क्षेत्र&lt;br /&gt;
में भारी विकास हुआ है । जिसका साक्षात प्रमाण करौली दुर्ग के&lt;br /&gt;
रूप में है । 14वीं शताब्दी में निर्मित यह महल जहा साधारण&lt;br /&gt;
दिखार्इ देते है । वही इस किले का बाहरी हिस्सा जो 17वी शताब्दी&lt;br /&gt;
में बनाया गया था । षिल्प का उत्कृष्ट उदाहरण है । बैहरदह में&lt;br /&gt;
बौहरों की हवेली एंव करौली नगर के कर्इ कलापूर्ण एंव भवनों का&lt;br /&gt;
षिल्प दर्षन अपनी ओर आकर्षित कर लेता है । इनके अतिरिक्त मा&lt;br /&gt;
साहब का मनिदर, दीवान साहब की हवेली, पदम तालाब की&lt;br /&gt;
हवेलियां एंव रतियापुरा एंव कसारा की परेंडी विषेष षिल्पकला के नमूने है ।&lt;br /&gt;
'''जिला एक दृषिट में'''&lt;br /&gt;
भौगोलिक सिथति 26 डिग्री 3 से 26 डिग्री 49 उत्तरी अक्षांष&lt;br /&gt;
76 डिग्री 35 से 77 डिग्री 26 पूर्वी देषान्तर के मध्य&lt;br /&gt;
भौगोलिक क्षेत्रफल 5069.64 वर्ग किमी0 वन क्षेत्र के अन्तर्गत 1658.19 कि0मी0&lt;br /&gt;
समुद्रतल से ऊंचार्इ 400 से 600 मीटर&lt;br /&gt;
तापमान अधिकतम 49 डिग्री न्यूनतम 2 डिग्री&lt;br /&gt;
जिले की औसत वर्षा 668.86 मिलीमीटर 1 जनवरी 05 से आज तक की&lt;br /&gt;
वर्षा&lt;br /&gt;
555.23 मि.मी.&lt;br /&gt;
भौगोलिक क्षेत्रफल 505217 वन 172499&lt;br /&gt;
अकृषि योग्य भूमि 19361 स्थार्इ चरागाह 30818&lt;br /&gt;
भूमि उपयोग&lt;br /&gt;
(हैक्टर में) कृषि योग्य भूमि 185871&lt;br /&gt;
115076 हैक्टर&lt;br /&gt;
नहरो से 19761 तालाबों से 5471&lt;br /&gt;
नलकूपो से 29320 कुएं से 60470&lt;br /&gt;
शुद्ध ंिसंचित क्षेत्र&lt;br /&gt;
(हैक्टर में)&lt;br /&gt;
अन्य से 54&lt;br /&gt;
लोक सभा क्षेत्र करौली-धौलपुर&lt;br /&gt;
विधान सभा क्षेत्र 4 (करौली, हिण्डौन, टोडाभीम, सपोटरा)&lt;br /&gt;
उप खण्ड 6 (करौली, हिण्डौन, टोडाभीम, सपोटरा, मंडरायल, नादौती)&lt;br /&gt;
तहसील 6 (करौली, हिण्डौन, टोडाभीम, सपोटरा,मंडरायल, नादौती)&lt;br /&gt;
उप तहसील 2 (करनपुर, मासलपुर)&lt;br /&gt;
पंचायत समिति 5 (करौली, हिण्डौन, टोडाभीम, सपोटरा, नादौती)&lt;br /&gt;
नगरपालिका 3 (करौली, हिण्डौन, टोडाभीम)&lt;br /&gt;
पटवार मंडल 254&lt;br /&gt;
ग्राम पंचायत 223 ( 101 ग्रा.प. डांग क्षेत्र में )&lt;br /&gt;
राजस्व ग्राम 878&lt;br /&gt;
आवाद ग्राम 836&lt;br /&gt;
मुख्य व्यवसाय खनिज, बीड़ी उधोग&lt;br /&gt;
मुख्य नदियां भद्रावती, गम्भीर, बरखेड़ा, चम्बल&lt;br /&gt;
पषु गणना 8,14,427&lt;br /&gt;
कुल 1458459 पुरुष 784943&lt;br /&gt;
जनसंख्या महिला 673516&lt;br /&gt;
लिंग अनुपात&lt;br /&gt;
( प्रति 1000 पु. )&lt;br /&gt;
858&lt;br /&gt;
जनसंख्या घनत्व 264 प्रति वर्ग कि.मीकुल&lt;br /&gt;
67.34 प्रतिषत&lt;br /&gt;
साक्षरता महिला 49.18 प्रति. पुरुष 82.96 प्रतिकैलादेवी&lt;br /&gt;
मेला श्री महावीर जी मेला मदन मोहन जी का&lt;br /&gt;
मेला&lt;br /&gt;
मेले एवं त्यौहार&lt;br /&gt;
बाला जी का लक्खी&lt;br /&gt;
मेला&lt;br /&gt;
अंजनी माता का मेला&lt;br /&gt;
ऐतिहासिक स्थल तिमनगढ़ का किला मण्डरायल का किला&lt;br /&gt;
श्री महावीर जी कैलादेवी&lt;br /&gt;
पर्यटन स्थल&lt;br /&gt;
आध्यातिमक स्थल मदन मोहन जी का मंदिर मेहन्दीपुर बाला जी&lt;br /&gt;
पुलिस उपअधीक्षक वृत 4 पुलिस थाना 16&lt;br /&gt;
पुलिस चौकी 16&lt;br /&gt;
जेल 2&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:राजस्थान]][[Category:राजस्थान के ज़िले]]&lt;br /&gt;
[[Category:भारत के ज़िले]][[Category:गणराज्य संरचना कोश]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Pankaj pathak</name></author>
	</entry>
</feed>