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	<title>ऐंबर - अवतरण इतिहास</title>
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	<updated>2026-05-09T10:55:16Z</updated>
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		<title>यशी चौधरी: ''''ऐंबर''' एक फ़ौसिल रेज़िन है। यह एक ऐसे वृक्ष का फ़ौस...' के साथ नया पृष्ठ बनाया</title>
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		<updated>2018-07-18T10:03:38Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;ऐंबर&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039; एक फ़ौसिल रेज़िन है। यह एक ऐसे वृक्ष का फ़ौस...&amp;#039; के साथ नया पृष्ठ बनाया&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;b&gt;नया पृष्ठ&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;div&gt;'''ऐंबर''' एक फ़ौसिल रेज़िन है। यह एक ऐसे वृक्ष का फ़ौसिल रेज़िन है जो आज कहीं नहीं पाया जाता। रगड़ने से इससे बिजली पैदा होती है। यह इसकी विशेषता है और इसी गुण के कारण इसकी ओर लोगों का ध्यान पहले पहल आकर्षित हुआ। आजकल ऐंबर के अनेक उपयोग हैं। इसके मनके और मालाएँ, तंबाकू की नलियाँ (पाइप), सिगार और सिगरेट की धानियाँ (होल्डर) बनती हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ऐंबर बाल्टिक सागर के तटों पर, समुद्रतल के नीचे के स्तर में, पाया जाता है। समुद्र की तरंगों से बहकर यह तटों पर आता है और वहाँ चुन लिया जाता है, अथवा जालों में पकड़ा जाता है। ऐसा ऐंबर डेनमार्क, स्वीडन और बाल्टिक प्रदेशों के अन्य समुद्रतटों पर पाया जाता है। सिसली में भी ऐंबर प्राप्त होता है। यहाँ का ऐंबर कुछ भिन्न प्रकार का और प्रतिदीप्त (फ़्लुओरेसेंट) होता है। ऐंबर के समान ही कई किस्म के अन्य फ़ौसिल रेज़िन अन्य देशों में पाए जाते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ऐंबर के भीतर लिगनाइट अथवा काठ-फ़ौसिल और कभी कभी मरे हुए कीड़े सुरक्षित पाए जाते हैं। इससे ज्ञात होता है कि इसकी उत्पत्ति कार्बनिक स्रोतों से हुई है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ऐंबर अमणिभीय और भंगुर होता है। इसका भंग शंखाभीय (कनकॉयडल) होता है। इस पर नक्काशी सरलता से हो सकती है। इसका तल चिकना और आकर्षक बनाया जा सकता है। यह साधारणतया अनियमित आकार में पाया जाता है। यह चमकदार होता है। इसकी कठोरता 2.25 से 2.50, विशिष्ट घनता 1.05 से 1.10, रंग हल्का पीला से लेकर कुछ कुछ लाल और भरा तक होता है। वायु के सूक्ष्म बुलबुलों के कारण यह मेघाभ हो सकता है। कुछ ऐंबर प्रतिदीप्त होते हैं। यह पारदर्शक, पारभासक और पारांध हो सकता है तथा 300रू-375रू सें. के बीच पिघलता है। इसका वर्तनांक 1.539 से 1.5445 तक होता है। ऐंबर में कार्बन 78 प्रतिशत, आक्सिजन 10.5 प्रतिशत और हाइड्रोजन 10.5 प्रतिशत, का10 हा16 औ (क्10 क्त16 ग्र्) सूत्र के अनुरूप होता है। गंधक 0.26 से 0.42 प्रतिशत और राख लगभग 0.2 प्रतिशत रहती है। एथिल ऐल्कोहल ओर एथिल ईथर सदृश विलायकों में गरम करने से यह घुलता है। डाइक्लोरहाइड्रिन इसके लिए सर्वश्रेष्ठ विलायक है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ऐंबर में 3 से 4 प्रति शत तक (मेघाभ नमूने में 8 प्रति शत तक) सकसिनिक अम्ल रहता है। ऐंबर का संगठन जानने के प्रयास में इससे दो अम्ल का20 हा 30 औ4 (क्20 क्त30 ग्र्4) और का19 हा28 औ4 (क्19 क्त28 ग्र्4) सूत्र के, पृथक किए गए हैं, परंतु इन अम्लों के संगठन का अभी ठीक ठीक पता नहीं लगा है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गरम करने से ऐंबर का लगभग 150रू सें. ताप पर कोमल होना आरंभ होता है और तब इससे एक विशेष गंध निकलती है। फिर 300रू-375रू सें. के ताप पर पिघलता और इससे घना सफेद धुआँ निकलता है जिसमें सौरभ होता है। इससे फिर तेल निकलता है जिसे 'ऐंबर का तेल' कहते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ऐंबर के बड़े बड़े टुकड़ों से मनका आदि बनता है। छोटे छोटे और अशुद्ध टुकड़ों को पिघलाकर ऐंबर वार्निश बनाते हैं। छोटे छोटे टुकड़ों को तो अब उष्मा और दबाव से 'ऐंब्रायड' में परिणत करते हैं। आजकल प्रति वर्ष लगभग 30,000 किलोग्राम ऐंब्रायड बनता है। यह ऐंबर से सस्ता बिकता है और ऐंबर के स्थान में बहुधा इसी का उपयोग होता है। ऐंबर के सामान जर्मनी और आस्ट्रिया में अधिक बनते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अब नकली ऐंबर भी काच और प्लास्टिक (बैकेलाइट, गैलेलिथ और सेल्यूलायड) से बनने लगे हैं। नकली ऐंबर की विशिष्ट घनता ऊँची होती है और परा-बैंगनी किरणों से उसमें प्रतिदीप्ति नहीं आती। ऐंबर के अतिरिक्त अन्य कई प्रकार फ़ौसिल रेज़िन भी अनेक देशों में पाए जाते और विभिन्न कामों में प्रयुक्त होते हैं।&amp;lt;ref&amp;gt;{{पुस्तक संदर्भ |पुस्तक का नाम=हिन्दी विश्वकोश, खण्ड 2|लेखक= |अनुवादक= |आलोचक= |प्रकाशक= नागरी प्रचारिणी सभा, वाराणसी|संकलन= भारत डिस्कवरी पुस्तकालय|संपादन= |पृष्ठ संख्या=271 |url=}}&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
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{{लेख प्रगति|आधार= |प्रारम्भिक=प्रारम्भिक2 |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
[[Category:वनस्पति]][[Category:वनस्पति विज्ञान]][[Category:वनस्पति कोश]]&lt;br /&gt;
[[Category:हिन्दी विश्वकोश]]&lt;br /&gt;
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		<author><name>यशी चौधरी</name></author>
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