"शारिका": अवतरणों में अंतर
भारत डिस्कवरी प्रस्तुति
No edit summary |
No edit summary |
||
| (इसी सदस्य द्वारा किए गए बीच के 2 अवतरण नहीं दर्शाए गए) | |||
| पंक्ति 2: | पंक्ति 2: | ||
|हिन्दी=वाद्यों को बजाने की धनुष-जैसी कमानी या गज, शतरंज का मोहरा, एक चिड़िया, मैना। | |हिन्दी=वाद्यों को बजाने की धनुष-जैसी कमानी या गज, शतरंज का मोहरा, एक चिड़िया, मैना। | ||
|व्याकरण=स्त्रीलिंग | |व्याकरण=स्त्रीलिंग | ||
|उदाहरण= | |उदाहरण=<poem>अपनी साधना से ऊँची कर दो शारिका की ताल। | ||
शारिका लहरी के धुन को ऊँची कर दो, फिर स्पन्दित होगी अमर राग॥</poem> | |||
|विशेष= | |विशेष= | ||
|विलोम= | |विलोम= | ||
|पर्यायवाची=कमान, गज़, वाद दंड, धनुष। | |पर्यायवाची=कमान, गज़, वाद दंड, धनुष। | ||
|संस्कृत=शारि+कन्-टाप् | |संस्कृत=शारि+कन्-टाप् | ||
|अन्य ग्रंथ=[[शारि]] | |अन्य ग्रंथ= | ||
|संबंधित शब्द=[[शारि]] | |||
}} | }} | ||
__INDEX__ | __INDEX__ | ||
10:42, 5 फ़रवरी 2011 के समय का अवतरण
| हिन्दी | वाद्यों को बजाने की धनुष-जैसी कमानी या गज, शतरंज का मोहरा, एक चिड़िया, मैना। |
| -व्याकरण | स्त्रीलिंग |
| -उदाहरण | अपनी साधना से ऊँची कर दो शारिका की ताल। |
| -विशेष | |
| -विलोम | |
| -पर्यायवाची | कमान, गज़, वाद दंड, धनुष। |
| संस्कृत | शारि+कन्-टाप् |
| अन्य ग्रंथ | |
| संबंधित शब्द | शारि |
| संबंधित लेख |