"उल्का": अवतरणों में अंतर
भारत डिस्कवरी प्रस्तुति
व्यवस्थापन (वार्ता | योगदान) छो (Text replace - "{{लेख प्रगति" to "{{प्रचार}} {{लेख प्रगति") |
व्यवस्थापन (वार्ता | योगदान) छो (Text replace - "ते है।" to "ते हैं।") |
||
| पंक्ति 1: | पंक्ति 1: | ||
[[चित्र:metoer shower.jpg|thumb|200px|उल्काएँ <br />Metoers]] | [[चित्र:metoer shower.jpg|thumb|200px|उल्काएँ <br />Metoers]] | ||
*उल्काएँ प्रकाश की चमकीली धारी के रूप में दिखती हैं, जो आकाश में क्षणभर के लिए चमकती हैं और लुप्त हो जाती हैं। | *उल्काएँ प्रकाश की चमकीली धारी के रूप में दिखती हैं, जो आकाश में क्षणभर के लिए चमकती हैं और लुप्त हो जाती हैं। | ||
*उल्काएँ [[क्षुद्र ग्रह|ग्रहों]] के टुकड़े तथा [[धूमकेतु|धूमकेतुओं]] के द्वारा पीछे छोड़े गए धूल और गैस के पिंड होते हैं जो पृथ्वी के निकट से गुजरने पर पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण से आकर्षित होकर गतिमान हो जाते है ओर स्वयं चमकने लगते | *उल्काएँ [[क्षुद्र ग्रह|ग्रहों]] के टुकड़े तथा [[धूमकेतु|धूमकेतुओं]] के द्वारा पीछे छोड़े गए धूल और गैस के पिंड होते हैं जो पृथ्वी के निकट से गुजरने पर पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण से आकर्षित होकर गतिमान हो जाते है ओर स्वयं चमकने लगते हैं। | ||
{{प्रचार}} | {{प्रचार}} | ||
{{लेख प्रगति | {{लेख प्रगति | ||
08:12, 20 फ़रवरी 2011 का अवतरण

Metoers
- उल्काएँ प्रकाश की चमकीली धारी के रूप में दिखती हैं, जो आकाश में क्षणभर के लिए चमकती हैं और लुप्त हो जाती हैं।
- उल्काएँ ग्रहों के टुकड़े तथा धूमकेतुओं के द्वारा पीछे छोड़े गए धूल और गैस के पिंड होते हैं जो पृथ्वी के निकट से गुजरने पर पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण से आकर्षित होकर गतिमान हो जाते है ओर स्वयं चमकने लगते हैं।
|
|
|
|
|
|