"सदस्य:रविन्द्र प्रसाद/अभ्यास": अवतरणों में अंतर
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+[[गोपाल कृष्ण गोखले]] | +[[गोपाल कृष्ण गोखले]] | ||
-[[जवाहर लाल नेहरू]] | -[[जवाहर लाल नेहरू]] | ||
||[[चित्र:Gopal-Krishna-Gokhle.jpg|right|120px|गोपाल कृष्ण गोखले]]महादेव गोविंद रानाडे के शिष्य [[गोपाल कृष्ण गोखले]] को वित्तीय मामलों की अद्वितीय समझ और उस पर अधिकारपूर्वक बहस करने की क्षमता से उन्हें [[भारत]] का '''ग्लेडस्टोन''' कहा जाता है। 1905 ई. में गोखले ने 'भारत सेवक समाज' | ||[[चित्र:Gopal-Krishna-Gokhle.jpg|right|120px|गोपाल कृष्ण गोखले]]महादेव गोविंद रानाडे के शिष्य [[गोपाल कृष्ण गोखले]] को वित्तीय मामलों की अद्वितीय समझ और उस पर अधिकारपूर्वक बहस करने की क्षमता से उन्हें [[भारत]] का '''ग्लेडस्टोन''' कहा जाता है। 1905 ई. में गोखले ने 'भारत सेवक समाज' की स्थापना की, ताकि नौजवानों को सार्वजनिक जीवन के लिए प्रशिक्षित किया जा सके। उनका मानना था कि, वैज्ञानिक और तकनीकी शिक्षा भारत की महत्त्वपूर्ण आवश्यकता है। इसीलिए इन्होंने सबसे पहले प्राथमिक शिक्षा लागू करने के लिये सदन में विधेयक भी प्रस्तुत किया था।{{point}}अधिक जानकारी के लिए देखें:-[[गोपाल कृष्ण गोखले]] | ||
{[[लॉर्ड लिनलिथगो]] के शासनकाल में ‘चेटफ़ील्ड कमेटी’ की नियुक्ति हुई। इसका सम्बन्ध किस विषय से था? | {[[लॉर्ड लिनलिथगो]] के शासनकाल में ‘चेटफ़ील्ड कमेटी’ की नियुक्ति हुई। इसका सम्बन्ध किस विषय से था? | ||
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-[[महात्मा गाँधी]] | -[[महात्मा गाँधी]] | ||
||[[चित्र:Surendranath-Banerjee.jpg|right|120px|सुरेन्द्रनाथ बनर्जी]]सुरेन्द्रनाथ बनर्जी ने [[बंगाल]] के विभाजन का घोर विरोध किया और उसके विरोध में ज़बर्दस्त आंदोलन चलाया, जिससे वे बंगाल के निर्विवाद रूप से नेता मान लिये गये। वे बंगाल के '''बिना ताज़ के बादशाह''' कहलाने लगे थे। बंगाल का विभाजन 1911 ई. में रद्द कर दिया गया, जो [[सुरेन्द्रनाथ बनर्जी]] की एक बहुत बड़ी जीत थी। लेकिन इस समय तक देशवासियों में एक नया वर्ग पैदा हो गया था, जिसका विचार था कि [[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस]] के वैधानिक आंदोलन विफल सिद्ध हुए हैं।{{point}}अधिक जानकारी के लिए देखें:-[[सुरेन्द्रनाथ बनर्जी]] | ||[[चित्र:Surendranath-Banerjee.jpg|right|120px|सुरेन्द्रनाथ बनर्जी]]सुरेन्द्रनाथ बनर्जी ने [[बंगाल]] के विभाजन का घोर विरोध किया और उसके विरोध में ज़बर्दस्त आंदोलन चलाया, जिससे वे बंगाल के निर्विवाद रूप से नेता मान लिये गये। वे बंगाल के '''बिना ताज़ के बादशाह''' कहलाने लगे थे। बंगाल का विभाजन 1911 ई. में रद्द कर दिया गया, जो [[सुरेन्द्रनाथ बनर्जी]] की एक बहुत बड़ी जीत थी। लेकिन इस समय तक देशवासियों में एक नया वर्ग पैदा हो गया था, जिसका विचार था कि [[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस]] के वैधानिक आंदोलन विफल सिद्ध हुए हैं।{{point}}अधिक जानकारी के लिए देखें:-[[सुरेन्द्रनाथ बनर्जी]] | ||
{‘[[मुस्लिम लीग]]’ ने अपने किस अधिवेशन में ‘डिवाइड एण्ड क्विट’ का नारा दिया था? | {‘[[मुस्लिम लीग]]’ ने अपने किस अधिवेशन में ‘डिवाइड एण्ड क्विट’ का नारा दिया था? | ||
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- | -लाहौर अधिवेशन, 1940 ई. | ||
- | -कराची अधिवेशन, 1933 ई. | ||
+कराची, 1943 ई. | +कराची अधिवेशन, 1943 ई. | ||
- | -लखनऊ अधिवेशन, 1931 ई. | ||
{‘[[सविनय अवज्ञा आन्दोलन]]’ अन्तिम रूप से कब वापस लिया गया? | {‘[[सविनय अवज्ञा आन्दोलन]]’ अन्तिम रूप से कब वापस लिया गया? | ||
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-[[नमक सत्याग्रह]] | -[[नमक सत्याग्रह]] | ||
{‘नौजवान सभा’ की स्थापना 1929 ई. में हुई थी। इसके संस्थापक कौन थे? | {‘नौजवान भारत सभा’ की स्थापना 1929 ई. में हुई थी। इसके संस्थापक कौन थे? | ||
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- | -[[सुखदेव]] | ||
-[[चन्द्रशेखर आज़ाद]] | -[[चन्द्रशेखर आज़ाद]] | ||
+[[भगत सिंह]] | +[[भगत सिंह]] | ||
-[[बटुकेश्वर दत्त]] | -[[बटुकेश्वर दत्त]] | ||
||[[चित्र:Bhagat-Singh.gif|right|120px|सरदार भगत सिंह]][[कानपुर]] में [[भगत सिंह]] को श्री गणेश शंकर विद्यार्थी का हार्दिक सहयोग भी प्राप्त हुआ था। देश की स्वतंत्रता के लिए अखिल भारतीय स्तर पर क्रान्तिकारी दल का पुनर्गठन करने का श्रेय सरदार भगत सिंह को ही जाता है। उन्होंने कानपुर के 'प्रताप' में 'बलवंत सिंह' के नाम से तथा [[दिल्ली]] में 'अर्जुन' के सम्पादकीय विभाग में 'अर्जुन सिंह' के नाम से कुछ समय काम किया और अपने को 'नौजवान भारत सभा' से भी सम्बद्ध रखा, जिसकी स्थापना उन्होंने की थी।{{point}}अधिक जानकारी के लिए देखें:-[[भगत सिंह]] | |||
{‘[[मुस्लिम लीग]]’ ने किस दिन को ‘पाकिस्तान दिवस’ के रूप में मनाया? | {‘[[मुस्लिम लीग]]’ ने किस दिन को ‘पाकिस्तान दिवस’ के रूप में मनाया? | ||
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-समाजवादी कांग्रेसियों को | -समाजवादी कांग्रेसियों को | ||
-कम्युनिस्टों को | -कम्युनिस्टों को | ||
+[[आज़ाद हिन्द फौज]] के जवानों को | +[[आजाद हिन्द फ़ौज|आज़ाद हिन्द फौज]] के जवानों को | ||
-उग्रवादी क्रान्तिकारियों को | -उग्रवादी क्रान्तिकारियों को | ||
||[[चित्र:Azad-Hind-Fauj.jpg|right|120px|आज़ाद हिन्द फ़ौज का ध्वज]]'नेताजी' के नाम से विख्यात [[सुभाषचन्द्र बोस]] ने सशक्त क्रान्ति द्वारा [[भारत]] को स्वतंत्र कराने के उद्देश्य से 21 अक्टूबर, 1943 को 'आज़ाद हिन्द सरकार' की स्थापना की तथा '[[आजाद हिन्द फ़ौज|आज़ाद हिन्द फौज]]' का गठन किया। इस संगठन के प्रतीक चिह्न पर एक झंडे पर दहाड़ते हुए [[बाघ]] का चित्र बना होता था। 'क़दम-क़दम बढाए जा, खुशी के गीत गाए' जा-इस संगठन का वह गीत था, जिसे गुनगुना कर संगठन के सेनानी जोश और उत्साह से भर उठते थे।{{point}}अधिक जानकारी के लिए देखें:-[[आजाद हिन्द फ़ौज|आज़ाद हिन्द फौज]] | |||
{किस घटना के पश्चात् [[महात्मा गाँधी]] ने ब्रिटिश सरकार को 'शैतानी लोग' कहा था? | {किस घटना के पश्चात् [[महात्मा गाँधी]] ने ब्रिटिश सरकार को 'शैतानी लोग' कहा था? | ||
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-जलियाँवाला बाग़ हत्याकाण्ड | -[[जलियाँवाला बाग़]] हत्याकाण्ड | ||
+रौलट एक्ट पास होने के समय | +[[रौलट एक्ट]] पास होने के समय | ||
-साम्प्रदायिक निर्णय के पश्चात् | -[[साम्प्रदायिक निर्णय]] के पश्चात् | ||
1942 ई. में क्रान्तिकारियों पर हवाई हमलों के बाद | 1942 ई. में क्रान्तिकारियों पर हवाई हमलों के बाद | ||
||[[चित्र:Mahatma-Gandhi-1.jpg|right|120px|महात्मा गाँधी]][[अंग्रेज़|अंग्रेज़ों]] द्वारा जनतांत्रिक अधिकारों का विकास करने के बजाय नागरिक अधिकारों पर और ज़्यादा अंकुश लगाने से देश में असंतोष की लहर सी उमड़ पड़ी थी। इसके परिणामस्वरूप [[रौलट एक्ट]] के ख़िलाफ़ एक ज़बरदस्त आंदोलन उठ खड़ा हुआ। इस आंदोलन के दौरान राष्ट्रवादी आंदोलन की बाग़डोर एक नये नेता [[महात्मा गाँधी|मोहनदास करमचंद गाँधी]] ने सँभाली, जिन्होंने इस एक्ट के पास होने पर अंग्रेज़ी सरकार को शैतानों के नाम से पुकारा था।{{point}}अधिक जानकारी के लिए देखें:-[[रौलट एक्ट]] | |||
{किस भारतीय ने देश के बाहर सर्वप्रथम गणतंत्रात्मक सरकार की स्थापना की थी? | {किस भारतीय ने देश के बाहर सर्वप्रथम गणतंत्रात्मक सरकार की स्थापना की थी? | ||
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{निम्न में से किस [[वायसराय]] का सम्बन्ध ‘ब्रेक-डायन-प्लान’ से था? | {निम्न में से किस [[वायसराय]] का सम्बन्ध ‘ब्रेक-डायन-प्लान’ से था? | ||
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+ | +[[लॉर्ड वेवेल]] | ||
- | -[[लॉर्ड इरविन]] | ||
- | -[[लॉर्ड रीडिंग]] | ||
- | -[[लॉर्ड माउण्ट बेटन]] | ||
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08:25, 9 अगस्त 2011 का अवतरण
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