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{{सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी}}
 
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{[[टीपू सुल्तान]] ने किस क्लब की सदस्यता प्राप्त कर श्रीरंगपट्टनम में स्वतंत्रता का वृक्ष रोपा था?
+
{[[टीपू सुल्तान]] ने [[अंग्रेज़|अंग्रेज़ों]] के साथ युद्ध करते हुए कब वीरगति प्राप्त की?
 
|type="()"}
 
|type="()"}
-लॉयन्स क्लब
+
-1857 ई.
+जैकोबिन क्लब
+
-1793 ई.
-फ्रीडम फाइटर्स क्लब
+
+1799 ई.
-ईस्ट इण्डिया क्लब
+
-1769 ई.
 +
||[[चित्र:Tipu-Sultan-1.jpg|right|100px|टीपू सुल्तान]] '[[टीपू सुल्तान]]' [[भारतीय इतिहास]] में 'शेर-ए-मैसूर' के नाम से प्रसिद्ध है। वह प्रसिद्ध योद्धा [[हैदर अली]] का पुत्र था। हैदर अली की मृत्यु के बाद पुत्र टीपू सुल्तान ने [[मैसूर]] की सेना की कमान संभाली थी। टीपू अपने पिता की ही भांति योग्य एवं पराक्रमी था। '[[मैसूर युद्ध तृतीय|मैसूर की तीसरी लड़ाई]]' में भी जब [[अंग्रेज़]] [[टीपू सुल्तान]] को नहीं हरा पाए, तो उन्होंने [[मैसूर]] के इस शेर से 'मेंगलूर की संधि' नाम से एक समझौता किया। लेकिन 'फूट डालो और शासन करो' की नीति चलाने वाले अंग्रेज़ों ने संधि करने के कुछ समय बाद ही टीपू से गद्दारी कर डाली। [[ईस्ट इंडिया कंपनी]] ने [[हैदराबाद]] के साथ मिलकर चौथी बार टीपू पर ज़बर्दस्त हमला किया और आख़िरकार '[[4 मई]], सन् 1799 ई.' को मैसूर का शेर [[श्रीरंगपट्टनम]] की रक्षा करते हुए शहीद हुआ। - अधिक जानकारी के लिए देखें:-[[टीपू सुल्तान]]
  
{दादाभाई नौरोजी ने [[अंग्रेज़|अंग्रेज़ों]] की किस नीति को 'अनिष्टों का अनिष्ट' कहा था?
+
{[[बुद्ध]] में वैराग्य भावना किन चार दृश्यों के कारण बलवती हुई?
 
|type="()"}
 
|type="()"}
-भारतीयों के प्रति अत्याचार की नीति
+
+बूढ़ा, रोगी, मृतक, संन्यासी
-भारतीयों के प्रति शोषण की नीति
+
-अन्धा, रोगी, लाश, संन्यासी
-शैक्षणिक परिवेश में विकृति लाने की नीति
+
-लंगड़ा, रोगी, लाश, संन्यासी
+[[भारत]] से धन निष्कासन की नीति
+
-युवा, रोगी, लाश, संन्यासी
 +
||[[चित्र:Buddha1.jpg|right|100px|अभिलिखित अभय मुद्रा में बुद्ध]] [[गौतम बुद्ध]] का मूल नाम 'सिद्धार्थ' था। वे [[शुद्धोदन|राजा शुद्धोदन]] और महामाया के पुत्र थे। शुद्धोदन ने सिद्धार्थ को चक्रवर्ती सम्राट बनाना चाहा, उसमें क्षत्रियोचित गुण उत्पन्न करने के लिये समुचित शिक्षा आदि का प्रबंध भी किया, किंतु सिद्धार्थ सदा किसी चिंता में डूबे दिखाई देते थे। अंत में [[पिता]] ने उन्हें [[विवाह]] बंधन में बांध दिया। एक दिन जब सिद्धार्थ रथ पर भ्रमण के लिये निकले तो उन्होंने मार्ग में जो कुछ भी देखा, उसने उनके जीवन की दिशा ही बदल डाली। एक बार एक दुर्बल वृद्ध व्यक्ति को, एक बार एक रोगी को और एक बार एक शव को देख कर वे संसार से और भी अधिक विरक्त तथा उदासीन हो गये। एक अन्य अवसर पर उन्होंने प्रसन्नचित्त संन्यासी को देखा। उसके चेहरे पर शांति और तेज़ की अपूर्व चमक विराजमान थी। इस दृश्य को देखकर सिद्धार्थ अत्यधिक प्रभावित हुए और उनके मन में वैराग्य की भावना बलवती हो उठी। - अधिक जानकारी के लिए देखें:-[[बुद्ध]]
  
{[[भारत]] में [[कृषि]] का प्राचीनतम साक्ष्य कहाँ से मिलता है?
+
{[[सम्राट अशोक]] की वह कौन-सी पत्नी थी, जिसने उसे सबसे ज़्यादा प्रभावित किया था?
 
|type="()"}
 
|type="()"}
- [[हड़प्पा]]
+
-चंडालिका
+ मेहरगढ़
+
-चारुलता
- सराय नहर
+
-गौतमी
- बुर्जहोम
+
+[[कारुवाकी]]
 +
||[[चित्र:Ashokthegreat1.jpg|right|100px|भारतीय संविधान की मूल सुलेखित प्रतिलिपि में प्रदर्शित अशोक के चित्र की प्रतिलिपि ]]'सम्राट अशोक' को अपने विस्तृत साम्राज्य के बेहतर कुशल प्रशासन तथा [[बौद्ध धर्म]] के प्रचार के लिए जाना जाता है। जीवन के उत्तरार्ध में [[अशोक]] [[गौतम बुद्ध]] का [[भक्त]] हो गया था। कतिपय लेखों में उसके नज़दीकी रिश्तेदारों के नाम भी दिये गये हैं। इनमें उसकी दूसरी रानी [[कारुवाकी]] और उसके पुत्र तीवर के उल्लेख हैं। एक बाद के लेख में अशोक के पोते [[दशरथ मौर्य|दशरथ]] का नाम आया है। [[अशोक के अभिलेख|अशोक के लेखों]] में और जनश्रुतियों में भी अशोक की कई पत्नियाँ होने का उल्लेख है। सिंहली अनुश्रुतियों के अनुसार उसकी पहली पत्नी का नाम 'देवी' था, जो वेदिसगिरि के एक धनी श्रेष्ठी की पुत्री थी। अशोक ने उसके साथ तब [[विवाह]] किया, जब वह [[उज्जैन]] में वाइसराय था। - अधिक जानकारी के लिए देखें:-[[अशोक का परिवार]], [[अशोक|सम्राट अशोक]]
  
{अब तक [[सिंधु सभ्यता]] में कुल कितनी फ़सलों के उगाये जाने का संकेत मिल चुका है?
+
{निम्नलिखित में से सबसे प्राचीन राजवंश कौन-सा है?
 
|type="()"}
 
|type="()"}
- तीन
+
+[[मौर्य वंश]]
- पाँच
+
-[[गुप्त वंश]]
+ नौ
+
-[[कुषाण वंश]]
- ग्यारह
+
-[[कण्व वंश]]
 +
||[[चित्र:maurya-empire.jpg|right|150px|चंद्रगुप्त मौर्य का सभा गृह]][[चंद्रगुप्त मौर्य]] की माता का नाम 'मुरा' था। इसी से यह वंश '[[मौर्य वंश]]' कहलाया। [[चंद्रगुप्त]] के बाद उसके पुत्र [[बिंदुसार]] ने 298 ई.पू. से 273 ई. पू. तक राज्य किया। बिंदुसार के बाद उसका पुत्र [[अशोक]] 273 ई.पू. से 232 ई.पू. तक गद्दी पर रहा। अशोक के समय में [[कलिंग]] का भारी नरसंहार हुआ, जिससे द्रवित होकर उसने [[बौद्ध धर्म]] ग्रहण कर लिया। 316 ईसा पूर्व तक मौर्य वंश ने पूरे उत्तरी पश्चिमी [[भारत]] पर अधिकार कर लिया था। अशोक के राज्य में मौर्य वंश का बेहद विस्तार हुआ। - अधिक जानकारी के लिए देखें:-[[मौर्य वंश]], [[चंद्रगुप्त मौर्य]]
  
{उत्तरोत्तर [[हड़प्पा]] संस्कृति के अवशेष कहाँ से मिलते हैं?
+
{[[अशोक के शिलालेख|अशोक के शिलालेखों]] को पढ़ने वाला प्रथम [[अंग्रेज़]] कौन था?
 
|type="()"}
 
|type="()"}
+ [[रंगपुर (गुजरात)|रंगपुर]]
+
-[[कर्नल टॉड]]
- [[कालीबंगा]]
+
+[[जेम्स प्रिंसेप]]
- [[लोथल]]
+
-[[हेमचंद्र रायचौधरी]]
- [[रोपड़]]
+
-[[चार्ल्स मैटकॉफ़]]
 
+
||[[चित्र:Rock-Edicts-Of-Ashoka.jpg|right|90px|अशोक शिलालेख, धौली]][[मौर्य राजवंश|मौर्य]] [[सम्राट अशोक]] के इतिहास की सम्पूर्ण जानकारी उसके [[अशोक के अभिलेख|अभिलेखों]] से मिलती है। यह माना जाता है कि अशोक को अभिलेखों की प्रेरणा [[ईरान]] के शासक '[[डेरियस प्रथम|डेरियस]]' से मिली थी। अशोक के लगभग 40 [[अभिलेख]] प्राप्त हुए हैं। ये [[ब्राह्मी लिपि|ब्राह्मी]], [[खरोष्ठी लिपि|खरोष्ठी]] और आर्मेइक-ग्रीक लिपियों में लिखे गये हैं। सम्राट अशोक के ब्राह्मी लिपि में लिखित सन्देश को सर्वप्रथम [[कनिंघम|एलेग्जेंडर कनिंघम]] के सहकर्मी [[जेम्स प्रिंसेप]] ने पढ़ा था। [[शिलालेख|शिलालेखों]] और स्तम्भ लेखों को दो उपश्रेणियों में रखा जाता है। 14 शिलालेख सिलसिलेवार हैं, जिनको 'चतुर्दश शिलालेख' कहा जाता है। ये शिलालेख [[शाहबाजगढ़ी]], [[मानसेरा]], [[कालसी]], [[गिरनार]], [[सोपारा]], [[धौली]] और [[जौगढ़]] में मिले हैं। - अधिक जानकारी के लिए देखें:-[[अशोक के शिलालेख]]
{[[सूरकोटदा]] किस लिए प्रसिद्ध है?
 
|type="()"}
 
- परिपक्व हड़प्पा संस्कृति के लिए
 
+ घोड़े की हड्डियों के अवशेष के लिए
 
- युगल शवाधान के लिए
 
- उपर्युक्त सभी के लिए
 
 
 
{अमरकोश में कुल कितने प्रकार की भूमि का वर्णन मिलता है?
 
|type="()"}
 
-16
 
+12
 
-15
 
-14
 
 
 
{भारतीय मज़दूरों के असंतोष की अभिव्यक्ति सर्वप्रथम कहाँ के मज़दूरों की हड़ताल के रूप में देखने को मिलती है?
 
|type="()"}
 
+[[नागपुर]]
 
-[[कलकत्ता]]
 
-[[अहमदाबाद]]
 
-[[बम्बई]]
 
 
 
{[[मोहन जोदड़ो]] की सबसे बड़ी इमारत निम्न में से कौन सी है?
 
|type="()"}
 
+ अन्नागार
 
- स्नानागार
 
- ईटों से बना सभा भवन
 
- उपर्युक्त में से कोई नहीं
 
 
 
{[[सिंधु सभ्यता]] में कुम्भकारों के भट्ठों के अवशेष कहाँ मिलते हैं?
 
|type="()"}
 
- [[हड़प्पा]] में
 
- [[कालीबंगा]] में
 
+ [[मोहन जोदड़ो]] में
 
- [[लोथल]] में
 
|| [[चित्र:King-priest-mohenjo-daro.jpg|right|100px|प्रधान अनुष्ठानकर्ता मोहनजोदाड़ो 2000 ई.पू.]] [[मोहनजोदाड़ो]], जिसका कि अर्थ मुर्दो का टीला है 2600 ईसा पूर्व की एक सुव्यवस्थित नगरीय सभ्यता थी। इस सभ्यता के ध्वंसावशेष [[पाकिस्तान]] के सिन्ध प्रान्त के 'लरकाना ज़िले' में [[सिंधु नदी]] के दाहिने किनारे पर प्राप्त हुए हैं। यह नगर क़रीब 5 कि.मी. के क्षेत्र में फैला हुआ है। मोहनजोदाड़ो के टीलों का 1922 ई. में खोजने का श्रेय 'राखालदास बनर्जी' को प्राप्त हुआ। {{point}} अधिक जानकारी के लिए देखें:- [[मोहनजोदाड़ो]]
 
 
 
{सैन्धव निवासियों का प्रिय पशु निम्न में से कौन-सा था?
 
|type="()"}
 
- कुत्ता
 
+ साँड़
 
- घोड़ा
 
- ऊँट
 
 
 
 
 
{[[हड़प्पा]] सभ्यता के अंतर्गत हल से जोते गये खेतों का साक्ष्य कहाँ से मिलता है?
 
|type="()"}
 
- [[रोपड़]]
 
- [[लोथल]]
 
+ [[कालीबंगा]]
 
- वनमाली
 
||कालीबंगा [[राजस्थान]] के [[गंगानगर ज़िले]] में [[घग्घर नदी]] के बाएं तट पर स्थित है। खुदाई 1953 में 'बी.बी. लाल' एवं 'बी. के. थापड़' द्वारा करायी गयी। यहाँ पर प्राक [[हड़प्पा]] एवं हड़प्पाकालीन संस्कृति के अवशेष मिले हैं। [[हड़प्पा]] एवं [[मोहनजोदाड़ो]] की भांति यहाँ पर सुरक्षा दीवार से घिरे दो टीले पाए गए हैं। कुछ विद्धानों का मानना है कि यह [[सिंधु घाटी सभ्यता|सैंधव सभ्यता]] की तीसरी राजधानी रही होगी। कालीबंगा के दुर्ग टीले के दक्षिण भाग में मिट्टी और कच्चे ईटों के बने हुए पांच चबूतरे मिले हैं, जिसके शिखर पर हवन कुण्डों के होने के साक्ष्य मिले हैं।{{point}}अधिक जानकारी के लिए देखें:- [[कालीबंगा]]
 
 
 
{[[हड़प्पा]] सभ्यता की प्रमुख विशेषता निम्न में से कौन-सी है?
 
|type="()"}
 
- स्नानागार
 
- धार्मिक स्थल
 
+ नगर नियोजन
 
- अन्नागार
 
 
 
{वैदिक साहित्य के अंतर्गत आने वाले निम्नलिखित ग्रंथों में कौन बेमेल है?
 
|type="()"}
 
+ [[स्मृतियाँ]]
 
- [[वेद]]
 
- [[उपनिषद]]
 
- [[आरण्यक]]
 
||'स्मृति' शब्द दो अर्थों में प्रयुक्त हुआ है। एक अर्थ में यह वेदवाङ्मय से इतर ग्रन्थों, यथा [[पाणिनि]] के व्याकरण, श्रौत, [[गृह्यसूत्र]] एवं [[धर्मसूत्र|धर्मसूत्रों]], [[महाभारत]], [[मनुस्मृति|मनु]], याज्ञवल्क्य एवं अन्य ग्रन्थों से सम्बन्धित है। किन्तु संकीर्ण अर्थ में स्मृति एवं धर्मशास्त्र का अर्थ एक ही है, जैसा कि मनु का कहना है। [[तैत्तिरीय आरण्यक]] में भी 'स्मृति' शब्द आया है। गौतम तथा [[वसिष्ठ]] ने स्मृति को धर्म का उपादान माना है। {{point}}अधिक जानकारी के लिए देखें:- [[स्मृतियाँ]]
 
 
 
{[[ऋग्वेद]] का वह कौन-सा प्रतापी [[देवता]] है, जिसका 250 सूक्तों में वर्णन मिलता है?
 
|type="()"}
 
- [[अग्नि]]
 
+ [[इन्द्र]]  
 
- [[वरुण देवता|वरुण]]
 
- द्यौ
 
||अधिकांश वैदिक विद्वानों का मत है कि वृत्र सूखा (अनावृष्टि) का दानव है और उन बादलों का प्रतीक है जो आकाश में छाये रहने पर भी एक बूँद जल नहीं बरसाते। इन्द्र अपने वज्र प्रहार से वृत्ररूपी दानव का वध कर [[जल]] को मुक्त करता है और फिर [[पृथ्वी देवी|पृथ्वी]] पर वर्षा होती है। ओल्डेनवर्ग एवं हिलब्रैण्ट ने वृत्र-वध का दूसरा अर्थ प्रस्तुत किया है। उनका मत है कि पार्थिव पर्वतों से जल की मुक्ति इन्द्र द्वारा हुई है। [[ऋग्वेद]] में इन्द्र को जहाँ अनावृष्टि के दानव वृत्र का वध करने वाला कहा गया है, वहीं उसे रात्रि के अन्धकार रूपी दानव का वध करने वाला एवं [[प्रकाश]] का जन्म देने वाला भी कहा गया है। {{point}}अधिक जानकारी के लिए देखें:- [[इन्द्र]]
 
 
 
{ऋग्वैदिक काल में विनिमय के माध्यम के रूप में किसका प्रयोग किया जाता था?
 
|type="()"}
 
- अनाज
 
- मुद्रा
 
+ गाय
 
- दास
 
 
 
{ऋग्वैदिक युगीन नदी 'परुष्णी' का महत्त्व क्यों है?
 
|type="()"}
 
- सर्वाधिक पवित्र नदी होने के कारण
 
- [[ऋग्वेद]] में सबसे अधिक बार उल्लेख होने के कारण
 
+ दाशराज्ञ युद्ध के कारण
 
- उपर्युक्त सभी
 
 
 
{[[ऋग्वेद]] में निम्न में से किसका उल्लेख नहीं मिलता है?
 
|type="()"}
 
- [[कृषि]]
 
- यव
 
- ब्रीहि
 
+ कपास
 
 
 
{[[ऋग्वेद]] के दसवें मण्डल में किसका उल्लेख पहली बार मिलता है?
 
|type="()"}
 
- योद्धा
 
- पुरोहित
 
+ शूद्र
 
- चाण्डाल
 
|| 'ॠक' का अर्थ होता है छन्दोबद्ध रचना या श्लोक। [[चित्र:Rigveda.jpg|right|100px|ॠग्वेद का आवरण पृष्ठ]]<br />ॠग्वेद के सूक्त विविध [[देवता|देवताओं]] की स्तुति करने वाले भाव भरे गीत हैं। इनमें भक्तिभाव की प्रधानता है। यद्यपि ॠग्वेद में अन्य प्रकार के सूक्त भी हैं, परन्तु देवताओं की स्तुति करने वाले स्त्रोतों की प्रधानता है। <br />ॠग्वेद में कुल दस मण्डल हैं और उनमें 1,029 सूक्त हैं और कुल 10,580 ॠचाएँ हैं। ये स्तुति मन्त्र हैं। <br />ॠग्वेद के दस मण्डलों में कुछ मण्डल छोटे हैं और कुछ मण्डल बड़े हैं। {{point}}अधिक जानकारी के लिए देखें:- [[ऋग्वेद]]
 
 
 
{[[ऋग्वेद]] में उल्लिखित कुल क़रीब 25 नदियों में से सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण नदी कौन-सी थी?
 
|type="()"}
 
- [[गंगा नदी]]
 
- [[यमुना नदी]]
 
+ [[सरस्वती नदी]]
 
- [[सिन्धु नदी]]
 
|| कई भू-विज्ञानी मानते हैं, और [[ॠग्वेद]] में भी कहा गया है, [[चित्र:Saraswati-River.png|सरस्वती नदी<br /> Saraswati River|right|100px]] कि हज़ारों साल पहले [[सतलुज नदी|सतलुज]] (जो [[सिन्धु नदी|सिन्धु]] नदी की सहायक नदी है) और [[यमुना नदी|यमुना]] (जो [[गंगा नदी|गंगा]] की सहायक नदी है) के बीच एक विशाल नदी थी, जो [[हिमालय]] से लेकर [[अरब सागर]] तक बहती थी। आज ये भूगर्भी बदलाव के कारण सूख गयी है। ऋग्वेद में, [[वैदिक काल]] में इस नदी सरस्वती को 'नदीतमा' की उपाधि दी गयी है। उस सभ्यता में सरस्वती ही सबसे बड़ी और मुख्य नदी थी, गंगा नहीं। सरस्वती नदी [[हरियाणा]], [[पंजाब]] व [[राजस्थान]] से होकर बहती थी और कच्छ के रण में जाकर अरब सागर में मिलती थी। तब सरस्वती के किनारे बसा राजस्थान भी हराभरा था। उस समय यमुना, [[सतलुज नदी|सतलुज]] व घग्गर इसकी प्रमुख सहायक नदियाँ थीं। बाद में सतलुज व यमुना ने भूगर्भीय हलचलों के कारण अपना मार्ग बदल लिया और सरस्वती से दूर हो गईं। हिमालय की पहाड़ियों में प्राचीन काल से हीभूगर्भीय गतिविधियाँ चलती रही हैं।{{point}}अधिक जानकारी के लिए देखें:- [[सरस्वती नदी]]
 
 
 
{[[ऋग्वेद]] में 'जन' और 'विश' का उल्लेख क्रमश: कितनी बार हुआ है?
 
|type="()"}
 
- 250,175
 
- 275,175
 
- 200,150
 
+ 275,170
 
 
 
{ऋग्वैदिक युग की सर्वाधिक प्राचीन संस्था कौन-सी थी?
 
|type="()"}
 
- सभा
 
- समिति
 
+ विद्थ
 
- परिषद
 
 
 
{'आर्य' शब्द का शाब्दिक अर्थ क्या है?
 
|type="()"}
 
- वीर
 
+ श्रेष्ठ या कुलीन
 
- विद्वान
 
- यज्ञकर्ता
 
 
 
{[[बोधगया]] में स्थित वह बोधिवृक्ष, जिसके नीचे [[बुद्ध]] को ज्ञान प्राप्त हुआ था, किस शासक के द्वारा कटवा दिया गया?
 
|type="()"}
 
-[[पुष्यमित्र शुंग]]
 
-[[हूण]] राजा मिहिरकुल
 
+गौड़ के राजा शशांक
 
-[[महमूद गज़नवी]]
 
 
 
{[[भारत]] में पूजित पहली मानव प्रतिमा कौन-सी थी?
 
|type="()"}
 
+[[बुद्ध|भगवान बुद्ध]]
 
-[[इन्द्र|इन्द्र भगवान]]
 
-[[महावीर|महावीर स्वामी]]
 
-[[कृष्ण|वासुदेव कृष्ण]]
 
 
</quiz>
 
</quiz>
 
|}
 
|}
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{{इतिहास सामान्य ज्ञान}}
 
{{इतिहास सामान्य ज्ञान}}
 
{{सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी}}
 
{{सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी}}
{{प्रचार}}
 
 
[[Category:सामान्य ज्ञान]]
 
[[Category:सामान्य ज्ञान]]
 
[[Category:सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी]]
 
[[Category:सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी]]
 +
[[Category:इतिहास कोश]]
 +
[[Category:इतिहास सामान्य ज्ञान]]
 
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__NOTOC__
 
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 +
{{Review-G}}

13:16, 15 फ़रवरी 2023 के समय का अवतरण

सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी
राज्यों के सामान्य ज्ञान


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1 टीपू सुल्तान ने अंग्रेज़ों के साथ युद्ध करते हुए कब वीरगति प्राप्त की?

1857 ई.
1793 ई.
1799 ई.
1769 ई.

2 बुद्ध में वैराग्य भावना किन चार दृश्यों के कारण बलवती हुई?

बूढ़ा, रोगी, मृतक, संन्यासी
अन्धा, रोगी, लाश, संन्यासी
लंगड़ा, रोगी, लाश, संन्यासी
युवा, रोगी, लाश, संन्यासी

3 सम्राट अशोक की वह कौन-सी पत्नी थी, जिसने उसे सबसे ज़्यादा प्रभावित किया था?

चंडालिका
चारुलता
गौतमी
कारुवाकी

4 निम्नलिखित में से सबसे प्राचीन राजवंश कौन-सा है?

मौर्य वंश
गुप्त वंश
कुषाण वंश
कण्व वंश

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