"तालकड़": अवतरणों में अंतर

भारत डिस्कवरी प्रस्तुति
यहाँ जाएँ:नेविगेशन, खोजें
(''''तालकड़''' अथवा 'तलकाड़' मैसूर का एक प्राचीन नगर था। [[...' के साथ नया पन्ना बनाया)
 
छो (Text replace - " कायम" to " क़ायम")
 
(2 सदस्यों द्वारा किए गए बीच के 4 अवतरण नहीं दर्शाए गए)
पंक्ति 1: पंक्ति 1:
'''तालकड़''' अथवा 'तलकाड़' [[मैसूर]] का एक प्राचीन नगर था। [[गंग वंश]] के राजा बूतुंग द्वितीय (लगभग 937-960) ने [[तुंगभद्रा नदी|तुंगभद्रा]] और [[कृष्णा नदी|कृष्णा]] नदियों के बीच अपना व्यापक राज्य कायम किया था। इस समय तालकड़ उसकी राजधानी थी।  
[[चित्र:Maruleshwara-Temple-Talakad.jpg|thumb|250px|मरुलेश्वारा मंदिर, तालकड़]]
 
'''तालकड़''' अथवा 'तलकाड़' [[मैसूर]] का एक प्राचीन नगर था। [[गंग वंश]] के राजा बूतुंग द्वितीय (लगभग 937-960) ने [[तुंगभद्रा नदी|तुंगभद्रा]] और [[कृष्णा नदी|कृष्णा]] नदियों के बीच अपना व्यापक राज्य क़ायम किया था। इस समय तालकड़ उसकी राजधानी थी। बाद के समय में [[चोल वंश|चोल]] शासकों ने इस पर शासन किया।
*प्राचीन नगर तालकड़ शिवसमुद्र से 15 मील दूर [[कावेरी नदी|कावेरी]] के तट पर बसा हुआ था।
*प्राचीन नगर तालकड़ शिवसमुद्र से 15 मील दूर [[कावेरी नदी|कावेरी]] के तट पर बसा हुआ था।
*अब नदी के द्वारा लाई हुई बालू में यह पूरी तरह अंट गया है।
*अब नदी के द्वारा लाई हुई बालू में यह पूरी तरह अंट गया है।
पंक्ति 12: पंक्ति 12:
==संबंधित लेख==
==संबंधित लेख==
{{कर्नाटक के नगर}}
{{कर्नाटक के नगर}}
[[Category:इतिहास कोश]][[Category:कर्नाटक]][[Category:कर्नाटक के ऐतिहासिक नगर]][[Category:कर्नाटक के नगर]][[Category:भारत के नगर]][[Category:]]
[[Category:इतिहास कोश]]
[[Category:कर्नाटक]]
[[Category:कर्नाटक के ऐतिहासिक नगर]]
[[Category:कर्नाटक के नगर]]
[[Category:भारत के नगर]]
__INDEX__
__INDEX__

14:16, 29 जनवरी 2013 के समय का अवतरण

मरुलेश्वारा मंदिर, तालकड़

तालकड़ अथवा 'तलकाड़' मैसूर का एक प्राचीन नगर था। गंग वंश के राजा बूतुंग द्वितीय (लगभग 937-960) ने तुंगभद्रा और कृष्णा नदियों के बीच अपना व्यापक राज्य क़ायम किया था। इस समय तालकड़ उसकी राजधानी थी। बाद के समय में चोल शासकों ने इस पर शासन किया।

  • प्राचीन नगर तालकड़ शिवसमुद्र से 15 मील दूर कावेरी के तट पर बसा हुआ था।
  • अब नदी के द्वारा लाई हुई बालू में यह पूरी तरह अंट गया है।
  • इस नगर के अनेक ध्वंसावशेष आज भी बालू के नीचे दबे पड़े हैं।
  • 1717 ई. में बने हुए कीर्तिनारायण के मंदिर को बालू में से खोद निकाला गया गया है।


पन्ने की प्रगति अवस्था
आधार
प्रारम्भिक
माध्यमिक
पूर्णता
शोध

टीका टिप्पणी और संदर्भ

ऐतिहासिक स्थानावली |लेखक: विजयेन्द्र कुमार माथुर |प्रकाशक: राजस्थान ग्रंथ अकादमी, जयपुर |पृष्ठ संख्या: 398 |


संबंधित लेख