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'''अहिल्या घाट''' [[महेश्वर]] के ख़ूबसूरत घाटों में से एक है। यह इतना सुन्दर है कि बस घंटों निहारते रहने का मन करता है। चारों ओर [[शिव]] जी के छोटे और बड़े मंदिर, हर जगह [[शिवलिंग]] ही शिवलिंग दिखाई देते हैं। सामने देखो तो नर्मदा नदी अपने पूरे तीव्र वेग से प्रवाहित होती दिखाई देती हैं। आस पास देखो तो शिव मंदिर दिखाई देते हैं और पीछे की और देखो तो महेश्वर का एतिहासिक तथा ख़ूबसूरत क़िला होल्कर राजवंश तथा रानी [[अहिल्याबाई होल्कर|देवी अहिल्याबाई]] के शासन काल की गौरवगाथा का बखान करता प्रतीत होता है। यह घाट पूरी तरह से शिवमय दिखाई देता है। पूरे घाट पर पाषाण के अनगिनत शिवलिंग निर्मित हैं। महेश्वर की महारानी देवी अहिल्याबाई से बढ़कर शिवभक्त [[आधुनिक काल]] में कोई नहीं हुआ है। उन्होंने पूरे [[भारत]] में शिव मंदिरों का तथा घाटों का निर्माण तथा पुनरोद्धार करवाया था, जिनमें प्रमुख हैं-
'''अहिल्या घाट''' [[महेश्वर]] के ख़ूबसूरत घाटों में से एक है। यह इतना सुन्दर है कि बस घंटों निहारते रहने का मन करता है। चारों ओर शिव जी के छोटे और बड़े मंदिर, हर जगह [[शिवलिंग]] ही शिवलिंग दिखाई देते हैं। सामने [[नर्मदा नदी]] अपने पूरे तीव्र वेग से प्रवाहित होती दिखाई देती हैं। घाट के आस पास शिव मंदिर दिखाई देते हैं और पीछे की ओर महेश्वर का ऐतिहासिक तथा ख़ूबसूरत क़िला [[होल्कर राजवंश]] तथा [[अहिल्याबाई होल्कर|रानी अहिल्याबाई]] के शासन काल की गौरवगाथा का बखान करता प्रतीत होता है। यह घाट पूरी तरह से शिवमय दिखाई देता है। पूरे घाट पर पाषाण के अनगिनत शिवलिंग निर्मित हैं। महेश्वर की महारानी देवी अहिल्याबाई से बढ़कर शिवभक्त [[आधुनिक काल]] में कोई नहीं हुआ है।<ref>{{cite web |url=http://www.ghumakkar.com/%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A5%87%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%B0-%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%81-%E0%A4%A8%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A4%A6%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%A8/ |title=महेश्वर – एक दिन देवी अहिल्या की नगरी में : भाग 1  |accessmonthday=1 सितम्बर |accessyear=2014 |last= |first= |authorlink= |format= |publisher=घुमक्कड़ डॉट कॉम |language=हिंदी }}</ref> उन्होंने पूरे [[भारत]] में शिव मंदिरों और घाटों का निर्माण तथा पुनरोद्धार करवाया था, जिनमें प्रमुख हैं-
 
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#[[एलोरा]] का [[घुश्मेश्वर ज्योतिर्लिंग]]
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#[[महाराष्ट्र]] का [[वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग|वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग मंदिर]]
#[[महाराष्ट्र]] का [[वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग|वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग मंदिर]]


इन उल्लेखों के अनुसार यह सोचा जा सकता है कि अपनी राजधानी से इतनी दूर-दूर तक देवी अहिल्याबाई ने मंदिरों तथा घाटों का निर्माण करवाया तो उनके अपने शहर, अपने निवास स्थान के घाट को जहाँ वे स्वयं नर्मदा के किनारे पर [[शिव]] का [[अभिषेक]] करती थीं, उसे कैसा बनवाया होगा?
 




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==टीका टिप्पणी और संदर्भ==
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==संबंधित लेख==
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{{मध्य प्रदेश के पर्यटन स्थल}}
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07:31, 1 सितम्बर 2014 का अवतरण

अहिल्या घाट महेश्वर के ख़ूबसूरत घाटों में से एक है। यह इतना सुन्दर है कि बस घंटों निहारते रहने का मन करता है। चारों ओर शिव जी के छोटे और बड़े मंदिर, हर जगह शिवलिंग ही शिवलिंग दिखाई देते हैं। सामने नर्मदा नदी अपने पूरे तीव्र वेग से प्रवाहित होती दिखाई देती हैं। घाट के आस पास शिव मंदिर दिखाई देते हैं और पीछे की ओर महेश्वर का ऐतिहासिक तथा ख़ूबसूरत क़िला होल्कर राजवंश तथा रानी अहिल्याबाई के शासन काल की गौरवगाथा का बखान करता प्रतीत होता है। यह घाट पूरी तरह से शिवमय दिखाई देता है। पूरे घाट पर पाषाण के अनगिनत शिवलिंग निर्मित हैं। महेश्वर की महारानी देवी अहिल्याबाई से बढ़कर शिवभक्त आधुनिक काल में कोई नहीं हुआ है।[1] उन्होंने पूरे भारत में शिव मंदिरों और घाटों का निर्माण तथा पुनरोद्धार करवाया था, जिनमें प्रमुख हैं-

  1. वाराणसी का काशी विश्वनाथ मंदिर
  2. एलोरा का घुश्मेश्वर ज्योतिर्लिंग
  3. सोमनाथ का प्राचीन मंदिर
  4. महाराष्ट्र का वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग मंदिर



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टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. महेश्वर – एक दिन देवी अहिल्या की नगरी में : भाग 1 (हिंदी) घुमक्कड़ डॉट कॉम। अभिगमन तिथि: 1 सितम्बर, 2014।

बाहरी कड़ियाँ

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