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*'''दक्षिण काशी''' कही जाने वाली इस जगह पर स्थापित लिंग के बार में माना जाता है कि इसकी स्थापना [[गौतम ऋषि]] ने की थी।
 
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*यह नगर 10वीं और 11वीं शताब्दी में [[गंग वंश|गंग]] [[चोल वंश]] के समय से ही विख्यात रहा है।  
 
*यह नगर 10वीं और 11वीं शताब्दी में [[गंग वंश|गंग]] [[चोल वंश]] के समय से ही विख्यात रहा है।  
*मैसूर के वाडयार राजाओं और [[टीपू सुल्तान]] ने इन्हें स्वर्ण-आभूषण और [[दान]] स्वरूप भूमि देकर संरक्षण प्रदान किया।  
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*मैसूर के वाडयार राजाओं और [[टीपू सुल्तान]] ने इन्हें [[स्वर्ण]]-[[आभूषण]] और दान स्वरूप भूमि देकर संरक्षण प्रदान किया।  
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*इस नगर में श्रीकांतेश्वर नंजुनदेश्वर ([[शिव]]) को समर्पित एक प्रसिद्ध मन्दिर है।  
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*द्रविड़ शैली में यहाँ उत्तुंग गोपुरम वाला यह मन्दिर '''385x160''' वर्गफीट क्षेत्रफल में फैला हुआ है और यह '''147''' स्तम्भों पर खड़ा है।  
 
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12:24, 5 मार्च 2012 का अवतरण

  • नंजनगुड प्राचीन तीर्थनगर कर्नाटक में कावेरी की सहायक काबिनी नदी के तट पर मैसूर से 26 किलोमीटर दक्षिण में स्थित है।
  • नंजनगुड को ननजनगढ़ के नाम से भी जाना जाता है।
  • दक्षिण काशी कही जाने वाली इस जगह पर स्थापित लिंग के बार में माना जाता है कि इसकी स्थापना गौतम ऋषि ने की थी।
  • यह नगर 10वीं और 11वीं शताब्दी में गंग चोल वंश के समय से ही विख्यात रहा है।
  • मैसूर के वाडयार राजाओं और टीपू सुल्तान ने इन्हें स्वर्ण-आभूषण और दान स्वरूप भूमि देकर संरक्षण प्रदान किया।
  • इस नगर में श्रीकांतेश्वर नंजुनदेश्वर (शिव) को समर्पित एक प्रसिद्ध मन्दिर है।
  • द्रविड़ शैली में यहाँ उत्तुंग गोपुरम वाला यह मन्दिर 385x160 वर्गफीट क्षेत्रफल में फैला हुआ है और यह 147 स्तम्भों पर खड़ा है।
  • यह समूचा नगर विभिन्न देवताओं के मन्दिरों से भरा हुआ है।


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टीका टिप्पणी और संदर्भ

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