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<div style="padding-left:8px; background:#e5e0b4; border:thin solid #ccc693;">'''संक्षिप्त परिचय'''</div>
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चरित कोश
  • महापुरुषों की जीवनियाँ हमें याद दिलाती हैं कि हम भी अपना जीवन महान बना सकते हैं और मरते समय अपने पदचिन्ह समय की बालू पर छोड़ सकते हैं।
  • प्राचीन महापुरुषों के जीवन से अपरिचित रहना जीवन-भर निरंतर बाल्यावस्था में ही रहना है।
विशेष आलेख
सत्यजित राय
सत्यजित राय
  • विश्व में भारतीय फ़िल्मों को नई पहचान दिलाने वाले सत्यजित राय का जन्म- 2 मई, 1921 को कलकत्ता में हुआ।
  • सत्यजित राय 20वीं शताब्दी के विश्व की महानतम फ़िल्मी हस्तियों में से एक थे, जिन्होंने यथार्थवादी धारा की फ़िल्मों को नई दिशा देने के अलावा साहित्य, चित्रकला जैसी अन्य विधाओं में भी अपनी प्रतिभा का परिचय दिया।
  • कोलकाता के एक जाने-माने बंगाली परिवार में जन्मे सत्यजित राय फ़िल्म निर्माण से संबंधित कई काम खुद ही करते थे। जिनमें निर्देशन, छायांकन, पटकथा, पार्श्व संगीत, कला निर्देशन, संपादन आदि शामिल हैं।
  • फ़िल्मकार के अलावा वह कहानीकार, चित्रकार, फ़िल्म आलोचक भी थे। सत्यजित राय कथानक लिखने को निर्देशन का अभिन्न अंग मानते थे।
  • विश्व विख्यात निर्देशक सत्यजित राय ने सबसे ज़्यादा राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार जीते हैं। उन्होंने और उनके काम ने कुल 32 राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार प्राप्त किये।
  • भारत रत्न, पद्म विभूषण, दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित सत्यजित राय का 23 अप्रॅल, 1992 को कोलकाता में स्वर्गवास हुआ। .... और पढ़ें
चयनित लेख
बाल गंगाधर तिलक
बाल गंगाधर तिलक
  • बाल गंगाधर तिलक भारत के एक प्रमुख नेता, समाज सुधारक और स्वतन्त्रता सेनानी, विद्वान, गणितज्ञ, दार्शनिक और उग्र राष्ट्रवादी व्यक्ति थे जिन्होंने भारत की स्वतंत्रता की नींव रखने में सहायता की।
  • बाल गंगाधर तिलक भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम के पहले लोकप्रिय नेता थे। इन्होंने सबसे पहले भारत में पूर्ण स्वराज की माँग उठाई। इन्हें हिन्दू राष्ट्रवाद का पिता भी कहा जाता है।
  • तिलक ने वेदों के इतिहास के बारे में एक पुस्तक लिखी जिसे काफ़ी सराहा जाता है। उन्होंने "द आर्कटिक होम इन द वेदास" नामक पुस्तक में खगोल शास्त्र के उद्धरण देकर साबित किया कि वेद आर्कटिक क्षेत्र में लिखे गए थे। इसके अलावा उन्होंने "श्रीमद्भागवतगीतारहस्य अथवा कर्मयोगशास्त्र" और "जीवन का हिन्दू दर्शन" नामक किताबें भी लिखी हैं।
  • इनका कथन "स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूँगा" बहुत प्रसिद्ध हुआ। .... और पढ़ें
संक्षिप्त परिचय


राहुल सांकृत्यायन
राहुल सांकृत्यायन
पूरा नाम राहुल सांकृत्यायन
अन्य नाम केदारनाथ पाण्डे, दामोदर स्वामी
जन्म 9 अप्रैल, 1893
जन्म भूमि आजमगढ़, उत्तर प्रदेश
मृत्यु तिथि 14 अप्रैल, 1963
मृत्यु स्थान दिल्ली
उपाधि साहित्य अकादमी पुरस्कार (1958), पद्म भूषण (1963), त्रिपिटिका चार्य
प्रसिद्धि बहुभाषाविद्, अग्रणी विचारक, उपन्यासकार, यात्राकार, इतिहासविद्, साहित्यकार
भाषा हिन्दी, पाली, प्राकृत, अपभ्रंश
मुख्य रचनाएँ घुमक्कड़ शास्त्र, 'सतमी के बच्चे', 'जीने के लिए', 'सिंह सेनापति', 'वोल्गा से गंगा' आदि।
अन्य जानकारी बौद्ध धर्म पर उनका शोध हिन्दी साहित्य में युगान्तरकारी माना जाता है, जिसके लिए उन्होंने तिब्बत से लेकर श्रीलंका तक भ्रमण किया था।
बाहरी कड़ियाँ राहुल सांकृत्यायन आधिकारिक वेबसाइट
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जीवनी श्रेणी वृक्ष

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