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पंचाप्सरस

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पंचाप्सरस का उल्लेख मंडकर्णि (या मंदकर्णि) मुनि के आश्रम के रूप में वाल्मीकि ने किया है-

'तत: कर्तुतपोविघ्नं सर्वदवैर्नियोजित: प्रधानाप्सरस: पंचविद्युच्यलितवर्चस:, इदं पंचाप्सरो नाम तड़ागं सार्वकालिक निर्मितंतपसा तेन मुनिना मंदिकर्णिना'।

'एतन् मुने मानिनिशातकर्णि पंचाप्सरो नाम विहारिवारि, आभाति पर्यंतनं विदुरान्मेघांतरालक्ष्य मिवेंदुबिंबम्'।

  • स्थानीय किंवदंती के अनुसार मैसूर राज्य में स्थित गंगावती या गंगोली का अभिज्ञान पंचाप्सरस से किया जाता है।
  • पंचाप्सरस पाँच नदियों का संगम स्थल है।


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टीका टिप्पणी और संदर्भ

ऐतिहासिक स्थानावली |लेखक: विजयेन्द्र कुमार माथुर |प्रकाशक: राजस्थान हिन्दी ग्रंथ अकादमी, जयपुर |पृष्ठ संख्या: 516 |

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